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क्रोध (गुस्से) पर नियंत्रण के 5 आसान उपाय (How To Control Your Anger)

गुस्सा (Anger) आना सामान्य व्यवहार है, लेकिन जब किसी को बात-बात पर गुस्सा आए तो ये सामान्य बात नहीं है. गुस्सैल लोगों से सब दूर ही रहना चाहते हैं, क्योंकि ऐसे लोग गुस्से में कुछ भी बोल देते हैं, जिससे माहौल बिगड़ जाता है. गुस्सैल लोग दूसरों का कम और अपना नुकसान ज़्यादा करते हैं. यदि आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है, तो आपको गुस्से को काबू करने के ये 5 उपाय ज़रूर जानने चाहिए.

Anger Management

 

 

 

 

 

गुस्सैल लोगों को होते हैं ये 5 नुकसान
1) आपका गुस्सा सबसे पहले आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. गुस्से से तनाव बढ़ता है और तनाव से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं. अत: गुस्सैल स्वभाव के लोगों को अपने स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.
2) गुस्से के कारण आपकी छवि ख़राब हो सकती है. लोग आप पर विश्‍वास कम करते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा इस बात का डर लगा रहता है कि गुस्से में कहीं आप बना बनाया काम न बिगाड़ दें.
3) गुस्से के कारण आप अपनों को खो सकते हैं. गुस्से में आपको समझ नहीं आता कि आप क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसा करके आप कई बार अपनों का दिल दुखाते हैं, जिससे वो आपसे दूर होते चले जाते हैं.
4) अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण आप अपने अच्छे दोस्त भी खो सकते हैं.
5) यदि आपको बात-बात पर गुस्सा आता है और आप गुस्से में किसी को कुछ भी बोल देते हैं, तो लोग आपसे बात करने से कतराने लगते हैं. ऐसे में आप अपना सम्मान खो सकते हैं और अकेलेपन के शिकार भी हो सकते हैं.

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गुस्से से बचने के 5 कारगर उपाय
1) आवेश में आकर कुछ भी बोलने से पहले सोचें कि क्या आपको ऐसा करने की ज़रूरत है. ऐसा करके आप कई ग़लतियों से बच सकते हैं. यदि गुस्से पर काबू नहीं कर पा रहे हैं तो मन ही मन दस से लेकर एक तक उल्टी गिनती गिनें. ऐसा करने से आपका ध्यान बंट जाएगा और आपका गुस्सा शांत हो जाएगा.
2) नियमित रूप से योग व मेडिटेशन करें, ऐसा करने से आप अपने गुस्से पर नियंत्रण कर पाएंगे. साथ ही सात्विक भोजन करें, ऐसा भोजन करने से गुस्सा कम आता है.
3) हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें, इससे आप अच्छा महसूस करेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
4) ख़ुद को काम में व्यस्त रखें, इससे आप जल्दी थक जाएंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
5) अपने शौक के लिए समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करेंगे, तो आप ख़ुश रहेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.

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दोराहे (क्रॉसरोड्स) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? (Are You At A Crossroads In Your Life? The Secret To Dealing With Crossroads In Life)

हमारी ज़िंदगी (Life) में कई बार ऐसे मौ़के आते हैं, जब हमारे लिए निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है. हम चाहकर भी समझ नहीं पाते कि अब क्या करें. ऐसी स्थिति में दोराहे (Crossroads) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? ज़िंदगी में जब निर्णय लेना मुश्किल हो जाए, तो ऐसी स्थिति से कैसे उबरें, दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी को आगे बढ़ाने के कुछ आसान रास्ते बता रही हैं काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ (Psychologist Dr. Madhavi Seth). डॉ. माधवी के अनुसार, इस स्थिति को सायकोलॉजी में कॉन्फ्लिक्ट कहते हैं. मॉडर्न सोशल सायकोलॉजी के फादर कहे जानेवाले कर्ट लुइन, जो एक सोशल सायकोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी पर गहन अध्ययन किया है. कर्ट लुइन का कहना है कि कॉन्फ्लिक्ट हर किसी की ज़िंदगी में होते हैं. आप उनसे बच तो नहीं सकते, लेकिन सही फैसला लेकर या बीच का रास्ता निकालकर आप इन कॉन्फ्लिक्ट्स से बाहर ज़रूर निकल सकते हैं. माधवी सेठ से हमने दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ स्थितियां शेयर कीं, जिनका हल उन्होंने कुछ इस तरह बताया.

Crossroads In Life

1) समस्या: मेरी शादी को आठ साल हो गए हैं, हमारे दो बच्चे हैं. दो साल पहले तक तो सब ठीक था, लेकिन दो साल से मेरे पति का अपने ऑफिस की कलीग से अफेयर चल रहा है. मेरे पति कहते हैं कि अब वो स़िर्फ उसे ही प्यार करते हैं, उन्हें अब मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है. वो मुझसे तलाक़ चाहते हैं, लेकिन मैं उन्हें तलाक़ देकर आज़ाद नहीं घूमने देना चाहती. मेरे सास-ससुर मुझे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन पति उनकी भी नहीं सुनते. सास-ससुर बच्चों के भविष्य के लिए चुपचाप सब कुछ सहने को कहते हैं, लेकिन मैं ये बात सहन नहीं कर पा रही हूं.
समाधान: आपकी जगह कोई भी महिला होती, तो वह पति का ऐसा व्यवहार सहन नहीं कर पाती. आप इस बारे में पति और सास-ससुर से खुलकर बात करें, उनसे बच्चों के भविष्य के बारे में डिस्कस करें. हो सके तो उस महिला से भी मिलें, जिससे पति का अफेयर चल रहा है. अगर ऐसा करने से स्थितियां सुधरती हैं, तो ठीक है, लेकिन इतना करने के बाद भी यदि आपके पति को आपका और बच्चों का ख़्याल नहीं आता, तो समझ लीजिए कि वो अपने नए रिश्ते में बहुत आगे निकल गए हैं. ऐसे में साथ रहने का कोई मतलब नहीं. आप एक बेवफ़ा इंसान के साथ ऐसे कितने दिनों तक एक छत के नीचे रह सकेंगी. बेहतर होगा कि आप अपने और बच्चों के भविष्य के बारे में सोचें और ज़िंदगी में आगे बढ़ें.

2) समस्या: मेरा बेटा एक रिलेशनशिप में नहीं रहता. वो कहता है कि मैं एक लड़की को बहुत दिनों तक डेट नहीं कर सकता. उसका बार-बार ब्रेकअप होता रहता है और उसे इसका दुख भी नहीं होता.
समाधान: आजकल के युवा रिलेशनशिप मेंटेनेंस की परवाह नहीं करते. ऐसी हरकत को इमोशनल डिनायल भी कह सकते हैं. ऐसे युवा भले ही अपने ब्रेकअप से दुखी हुए हों, लेकिन ये बात दूसरों पर ज़ाहिर नहीं होने देते, हर समय कूल दिखने की कोशिश करते हैं. जो युवा अपने इमोशन को दबा देते हैं, उन्हें ज़ाहिर नहीं करते, आगे चलकर वो डिप्रेशन के शिकार तक हो सकते हैं. कई बार ऐसे लोग आगे चलकर भावनाशून्य भी हो जाते हैं यानी उन पर किसी भी भावना का कोई असर नहीं होता, इसलिए बच्चों को अपनी भावनाएं स्वीकार करना सिखाएं, वरना आगे चलकर उन्हें रिलेशनशिप में बहुत द़िक्क़तें आ सकती हैं.

3) समस्या: मेरी शादी को पांच साल हो गए हैं और हमारा तीन साल का बेटा है. मेरे पति बिना ग़लती के बात-बात पर मुझ पर हाथ उठाते हैं और सास-ससुर भी उनका ही साथ देते हैं. मायके में शिकायत की, तो वो भी कहते हैं कि घर बचाने और बच्चे की ख़ातिर सहन कर लो, वरना तुम्हें कौन पालेगा. लेकिन मुझसे बार-बार ये बेइज़्ज़ती सहन नहीं होती.
समाधान: पति के हाथों बार-बार बिना ग़लती के मार खाना बहुत अपमानजनक है. आप कमाती नहीं हैं, तो इसका ये मतलब नहीं है कि आपकी कोई इज़्ज़त नहीं है. सबसे पहले तो आप स्वावलंबी बनने के लिए कोई काम शुरू कीजिए, इससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आपके मन से अपने और बच्चे के भविष्य का डर निकल जाएगा. साथ ही पति और सास-ससुर से इस बारे में बात करें कि आप आगे से ये सब सहन नहीं करेंगी. अपने लिए आपको ख़ुद ही बात करनी होगी, ख़ुद ही आगे आना होगा.

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4) समस्या: हमारा इकलौता बेटा अमेरिका में सेटल हो गया है, उसकी बीवी भी वहीं नौकरी करती है. वो चाहते हैं कि हम वहां उनके साथ रहें, लेकिन वहां हमारा अपना कोई नहीं है. हमारा वहां मन नहीं लगता. बेटे-बहू के बिना हमारा यहां भी मन नहीं लगता. इस तरह ज़िंदगी कैसे कटेगी, समझ नहीं आता.
समाधान: ऐसी स्थिति में पैरेंट्स को समझदारी से काम लेना चाहिए. आप बेटे-बहू का भविष्य ख़राब नहीं कर सकते, इसलिए आपको बीच का रास्ता निकालना चाहिए. ये सच है कि पूरी ज़िंदगी अपने देश में बिताने के बाद विदेश में रहना मुश्किल है, लेकिन अकेले रहना भी तो संभव नहीं. ऐसे में पैरेंट्स को विन-विन सिचुएशन अपनानी चाहिए यानी अपनी सुविधानुसार दोनों जगहों पर रहना चाहिए. आप चाहें तो त्योहारों के समय या सर्दियों में अपने देश में रह सकते हैं और गर्मियों में या फ्री टाइम में बेटे-बहू के साथ विदेश में रह सकते हैं. ऐसा करके आप बिज़ी भी रहेंगे और ख़ुश भी. ज़िद करके आप भी दुखी रहेंगे और आपके बच्चे भी. बच्चों की और अपनी सुविधानुसार समाधान निकाल लीजिए.

5) समस्या: हमारी शादी को एक साल हो गया है. अभी कुछ दिन पहले ही मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि शादी से पहले उसका अफेयर था और ब्रेकअप के बाद से उन दोनों ने न कभी एक-दूसरे को फोन किया और न ही कभी एक-दूसरे से मिले. लेकिन पत्नी की पिछली ज़िंदगी का सच जानने के बाद मैं उसके साथ नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पा रहा हूं. मुझे लगता है कि वो मन ही मन उसकी तुलना मुझसे करती होगी. मेरे साथ रहते हुए भी उसके ख़्यालों में वो ही रहता होगा. अब मैं अपनी पत्नी के साथ पहले की तरह बेहिचक नहीं रह पा रहा हूं.
समाधान: आप सबसे पहले अपनी पत्नी की जगह ख़ुद को रखकर देखिए. अगर आपके साथ ऐसा हुआ होता, तो आप क्या करते? आपकी पत्नी ने अपनी बीती ज़िंदगी के बारे में आपको ईमानदारी से सब कुछ बताया और अब वो बीती बातों को भूलकर ज़िंदगी में आपके साथ आगे बढ़ चुकी है. फिर आप क्यों उनकी पिछली ज़िंदगी के बारे में सोचकर अपना आज ख़राब कर रहे हैं. आप भी बीती बातों को भूल जाइए और अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाइए.

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How To Deal With Crossroads In Life

6) समस्या: मेरे पापा का ऑटोमोबाइल का बिज़नेस है, लेकिन मैं फोटोग्राफी में करियर बनाना चाहता हूं. मेरे पापा ने अपने इस बिज़नेस को खड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी, अब वो चाहते हैं कि मैं अपना पैशन छोड़कर उनका काम संभालूं, लेकिन मेरा बिज़नेस में ज़रा भी मन नहीं लगता. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: जहां तक करियर की बात है, तो ज़िंदगी का ये फैसला हमें ख़ुद ही लेना होता है. कई बार ऐसा भी होता है कि जिस काम को हम अपना पैशन समझते हैं, जब हम उसे करने बैठते हैं, तो समझ आता है कि ये मात्र हमारा शौक था, हम उस काम के लिए बने ही नहीं थे. आपको सबसे पहले अपने पैशन को पहचानना होगा. यदि फोटोग्राफी वाकई आपका पैशन है, तो आप उसके बिना नहीं रह पाएंगे. ऐसे में आप यदि बेमन से अपने पिता का बिज़नेस संभालेंगे, तो शायद उसे उस मुक़ाम तक न पहुंचा सकें, जहां आप अपने मनपसंद करियर को पहुंचा सकते हैं. आपको अपने पापा से इस बारे में बात करनी चाहिए और अपने पैशन के लिए काम करना चाहिए. आपके पापा अपने बिज़नेस को इसलिए इतना आगे बढ़ा पाए, क्योंकि ये उनका पैशन था. इसी तरह आपको अपने पैशन को ही करियर बनाना चाहिए.

7) समस्या: मैं एक हाउसवाइफ हूं. मेरा बचपन एक छोटे शहर में बीता. मेरी शादी मुंबई के लड़के से हुई, इसलिए शादी के बाद मैं यहां आ गई. मेरे पति और ससुराल वालों को लगता है कि मेरा रहन-सहन, बातचीत करने का तरीक़ा उन जैसा नहीं है. मेरे पति मुझे कहीं घुमाने-फिराने, पार्टी वगैरह में नहीं ले जाते. मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता, इससे मेरा कॉन्फिडेंस कम होता जा रहा है.
समाधान: सबसे पहले इस बात पर ध्यान दें कि आपके पति या ससुरालवाले आपके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं. आपमें वाकई कमी है या वो आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा करते हैं. यदि आप में कमी है, तो आप अपनी पर्सनैलिटी को निखारने की कोशिश करें और यदि वो स़िर्फ आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो उनसे इस बारे में बात करें और कहें कि आप ये सब सहन नहीं करेंगी.

8) समस्या: मेरी उम्र 30 साल है. मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं अफेयर तो कर लेता हूं, लेकिन जैसे ही बात शादी तक पहुंचती है, तो मैं डर जाता हूं और ब्रेकअप कर लेता हूं. मैं शादी की ज़िम्मेदारी लेने से डरता हूं.
समाधान: ये आपकी अकेले की प्रॉब्लम नहीं है, आजकल अधिकतर युवा कमिटमेंट फोबिया के शिकार हैं. वो अफेयर तो करना चाहते हैं, लेकिन शादी की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. कई लोग शादी तो कर लेते हैं, लेकिन बच्चे की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. ये आपको तय करना होगा कि यदि आपको सेटल्ड लाइफ चाहिए, तो आपको उसकी ज़िम्मेदारियां उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा.

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9) समस्या: मेरे शादी को पांच साल हो गए हैं. मेरा चार साल का बेटा है. कुछ समय पहले मेरे पति की अचानक एक्सीडेंट में मौत हो गई. अब मेरे ससुराल वाले चाहते हैं कि मैं अपने देवर से शादी कर लूं, लेकिन मेरा मन उसे अपना पति मानने को तैयार ही नहीं है. मैंने कभी अपने देवर को उस नज़र से देखा ही नहीं है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: आपकी स्थिति में फैसला लेना वाकई मुश्किल होता है. पति को खोने का दर्द, बच्चे के भविष्य की चिंता, अपनी ज़िंदगी की फिक्र… आपके मन में न जाने कितनी उथल-पुथल मच रही होगी. यदि आप अभी फैसला नहीं ले पा रही हैं, तो ख़ुद को थोड़ा और टाइम दीजिए. किसी भी इंसान को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने से पहले उसे मन से स्वीकार करना ज़रूरी होता है. यदि आप अपने देवर को पति के रूप में नहीं स्वीकार कर पाएंगी, तो उनके साथ ख़ुश नहीं रह पाएंगी इसलिए अपनी ज़िंदगी का फैसला सोच-समझकर लें, जिसमें आपकी और आपके बच्चे दोनों की ख़ुशी शामिल हो.

– कमला बडोनी

क्या रिश्ते स्वर्ग में बनते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो:

अपने ग़ुस्से पर कितना काबू कर पाती हैं आप? (Anger Management: 10 Easy Tips To Control Your Anger)

काम है तो प्रेशर है, प्रेशर है तो तनाव है और तनाव में ग़ुस्सा आना लाज़मी है, लेकिन ग़ुस्सा ज़हिर करने के तरी़के सभी के अलग-अलग होते हैं. क्या ग़ुस्सा आपकी पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ़ को भी प्रभावित कर रहा है? आप अपने ग़ुस्से पर किनता काबू कर पाती हैं? ये क्विज़ हल कीजिए और ख़ुद जान जाइए.

Tips To Control Anger

1) आपके बच्चे को स्कूल जाने के लिए पहले से ही देर हो रही है, उस पर उसने नाश्ता करते समय यूनिफॉर्म इतनी ख़राब कर दी कि उसे पहन कर स्कूल नहीं जाया जा सकता. ऐसे में आप-

ए) तुरंत यूनिफॉर्म बदलकर उसे स्कूल बस के बजाय ऑटो रिक्शा या अपनी गाड़ी में स्कूल छोड़ देंगी.
बी) बच्चे पर बहुत ग़ुस्सा होंगी और गंदी यूनिफ़ॉर्म में ही उसे स्कूल छोड़ देंगी.
सी) गुस्से में बच्चे को थप्पड़ जड़ देंगी हैं और स्कूल भी नहीं भेजेंगी.

2) आप ऑफ़िस में एक ज़रूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, तभी कंप्यूटर ख़राब हो गया और आप फाइल सेव भी नहीं कर पाईं. ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगी?

ए) एक कप कॉफ़ी पीएंगी और रिलैक्स होकर दोबारा काम शुरू कर देंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) गुस्से में वहां से चली जाएंगी.

3) आपने अपने एक सहकर्मी के साथ मिलकर बड़ी मेहनत से कोई प्रोजेक्ट पूरा किया, लेकिन उसका पूरा श्रेय स़िर्फ आपके सहकर्मी को ही मिला. ऐसे में आप…

ए) आपके प्रेज़ेंटेशन में कहां कभी रह गई, इस पर विचार करेंगी और अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश करेंगी.
बी) सहकर्मी को भला-बुरा कहकर मन की भड़ास निकालेंगी.
सी) पूरे ऑफ़िस में उसकी चुगली करती फिरेंगी.

4) ऑफ़िस की एक ज़रूरी मीटिंग में आपको व़क़्त पर पहुंचना है, लेकिन ट्रैफिक के कारण आप देर से पहुंचती हैं, ऐसे में आप…

ए) देरी के लिए सॉरी कहकर आगे ऐसा न होने का भरोसा दिलाएंगी.
बी) मीटिंग में पहुंचते ही सिस्टम को कोसने लगेंगी.
सी) फोन करके मीटिंग अटेंड करने से मना कर देंगी.

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5) ग़ुस्से में आपका पक्ष जाने बिना ही आपके पति यदि आपको भला-बुरा कहने लग जाएं तो?

ए) उस व़क़्त तो चुप रहेंगी, लेकिन जब पति शांत हो जाएंगे, तब अपना पक्ष रखकर उन्हें सही स्थिति से अवगत कराएंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) आप भी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लग जाएंगी.

6) आपने बड़े जतन से ख़ास मेहमानों के लिए डिनर पार्टी अरेंज की है, पर उसी व़क़्त थोड़े मेहमान और आ गए. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) तुरंत और खाने के बंदोबस्त में जुट जाएंगी.
बी) समझ नहीं पाएंगी कि क्या करूं?
सी) बिन बुलाए मेहमानों को मन ही मन कोसेंगी.

7) ऑफ़िस में आपको इतना काम दे दिया गया है जो डेडलाइन पर पूरा नहीं हो सकता. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) ऑफ़िस टाइम के बाद रुककर काम पूरा करेंगी.
बी) सहकर्मियों से मदद के लिए कहेंगी.
सी) काम करने से मना कर देंगी.

8) यदि आपकी बेस्ट फ्रेंड आपको अपनी बर्थडे पार्टी में बुलाना भूल जाए तो?

ए) आप ख़ुद ही फोन करके उसे याद दिला देंगी.
बी) फोन करके फ्रेंड पर ख़ूब चिल्लाएंगी.
सी) उससे दोस्ती तोड़ देंगी.

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9) इन दिनों काम की अधिकता के कारण आपको लगभग रोज़ ही ऑफ़िस से घर लौटने में देर हो रही है, जो कि सासू मां को बिल्कुल पसंद नहीं. ऐसे में आप…

ए) उन्हें ऑफिस की स्थिति समझाने की कोशिश करेंगी.
बी) उनकी बातों को अनसुना कर देंगी.
सी) उनके साथ झगड़ा करने लग जाएंगी.

10) आपके पति रोज़ देर रात तक इंटरनेट पर सर्फिंग करते रहते हैं, जिससे आप ठीक से सो नहीं पातीं. ऐसे में आप…

ए) पति को समझाएंगी हैं कि इससे आप दोनों की नींद व सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.
बी) पति से बात करना बंद कर देंगी.
सी) उनसे रोज़ इस बात पर झगड़ने लग जाएंगी.

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क्या कहता है स्कोर?
यदि आपके अधिकतर जवाब (ए) हैं तो:
आपका स्कोर बेस्ट है. आप ग़ुस्से पर काबू रखना बख़ूबी जानती हैं, जिससे आप ज़िंदगी के छोटे-छोटे तनावों को आसानी से हैंडल कर लेती हैं. आप मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी रास्ता तलाशना और उसे अपने फ़ायदे में बदलाना बख़ूबी जानती हैं. आपके परिवार, सहकर्मी बेशक आप के व्यवहार से संतुष्ट रहते होंगे.

यदि आपके अधिकतर जवाब (बी) हैं तो:
आप ग़ुस्से को ख़ुद पर हावी तो नहीं होने देतीं, लेकिन उसे हैंडल भी नहीं कर पाती हैं. कई बार आप समस्या से भागने का विकल्प भी चुन लेती हैं. ऐसा करना ठीक नहीं, क्योंकि ये समस्या का समाधान नहीं है. आपको अपने ग़ुस्से पर काबू पाने और समस्या को हैंडल करने के लिए थोड़ी कोशिश और करनी होगी.

यदि आपके अधिकतर जवाब (सी) हैं तो:
छोटी-छोटी बातों पर ग़ुस्सा करना, बेवजह तनावग्रस्त हो जाना आपकी आदत में शामिल हो गया है. आपको अपनी आदतों पर कंट्रोल करना होगा, वरना आगे चलकर आपका ग़ुस्सा आपकी सेहत को भी प्रभावित कर सकता है.

दूरियों को नज़दीकियों में बदलने के लिए अपनाएं ये गुड लक टिप्स: देखें वीडियो:

 

मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

मन (Mind) की बात लिखने (Writing) से दूर होता है तनाव (Tension) और ये बात बिल्कुल सही है. मन की बात कहने के लिए जब आसपास कोई न हो, तो काग़ज़-कलम को अपना साथी बना लीजिए. ख़ुशी, ग़म, उदासी… अपने मन के हर भाव को काग़ज़ पर उतार दीजिए. मन की बात काग़ज़ पर लिख देने से मन हल्का हो जाता है.

Reducing Stress Tips

डायरी लिखें
सपनों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और विचारों का डेरा है मन… और जिस मन पर इतना बोझ हो, उसे कभी-कभी हल्का करना भी ज़रूरी है. मन का बोझ हल्का करने का सबसे आसान तरीक़ा है किसी से बात करना, लेकिन जब आपके पास बात करने के लिए कोई न हो या जो व्यक्ति आपके सामने है उससे आप अपने दिल के राज़ साझा नहीं कर सकते, तो सबसे बेहतर विकल्प है डायरी लिखना. डायरी के पन्नों पर अपने मन के विचार चाहे वो अच्छे हों या बुरे लिख दें. इससे न स़िर्फ आपके दिल का बोझ उतर जाएगा, बल्कि आप बाद में अपने लिखे हुए शब्दों पर विचार करके सही-ग़लत का ़फैसला भी कर सकते हैं. दूसरों के सामने कुछ कहते समय जहां आपको इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि कहीं वो आपकी बातों का ग़लत मतलब न निकाल ले, वहीं मन की बात लिखते समय ऐसा कोई डर नहीं रहता, जो जी में आए आप वो सब लिख सकते हैं.

लिखी हुई भावनाओं को आप फिर से जी सकते हैं
जब भी आप जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें, तो उस पल की ख़ुशी को डायरी के पन्नों पर शब्दों में बयां कर दें. कुछ समय बाद जब आप उन पन्नों को पलटकर देखेंगे, तो उस पल को फिर से जी सकेंगे, अपनी उपलब्धि पर एक बार फिर नाज़ कर सकेंगे. ज़िंदगी की कुछ ऐसी बातें या पल जिन्हें आप जीवनभर याद रखना चाहते हैं, उन्हें संजोए रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा है उन्हें लिख लेना.

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मन की बात लिख देने से मन हल्का हो जाता है
किसी बात पर आपका पड़ोसी से झगड़ा हो जाए या ऑफिस में कलीग आपसे उलझ जाए, उस समय संकोचवश आप उससे कुछ नहीं कहते, लेकिन मन ही मन उसे भला-बुरा कहते रहते हैं. ऐसी स्थिति में अपने मन की भड़ास काग़ज़ पर उतार दें. इससे जहां आपका ग़ुस्सा शांत हो जाएगा, वहीं आप उस बात पर फिर से विचार कर पाएंगे कि आख़िर झगड़ा हुआ क्यों? पुनर्विचार से कई बार एहसास होता है कि बेकार की बातों को तूल देकर हम अपना मूड और रिश्ता दोनों ख़राब कर रहे हैं. इस तरह मंथन करने से हमारे मन से नफ़रत की भावना निकल जाती है और मन हल्का हो जाता है.

मन की बात लिखने से बनी रहती है सेहत
किसी के प्रति घृणा और ग़ुस्से के भाव को बहुत दिनों तक मन में दबाए रखने से आप तनाव, अवसाद आदि के शिकार हो सकते हैं. इन भावों को आप दूसरों के सामने व्यक्त भी नहीं कर सकते. ऐसे में इन भावों को लिख देने से तनाव दूर होता है और मन शांत हो जाता है, जिससे सेहत भी बनी रहती है.

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ज़िंदगी रुकती नहीं (Life Doesn’t Stop And Neither Should You)

ज़िंदगी रुकती नहीं, बदस्तूर चलती रहती है. हां, ज़िंदगी में कई बार ऐसे वाकये या हादसे हो जाते हैं जो ज़िंदगी की चाल ही बदल देते हैं, या यूं कहें कि आपको बेहद मायूस या हताश कर देते हैं, तोड़कर रख देते हैं, लेकिन ऐसे हालात से हार मानकर जीना छोड़ा नहीं जा सकता. ऐसे हालात में भी आगे बढ़कर ज़िंदगी को संवारना और नए सिरे से ज़िंदगी की शुरुआत करना ही ज़िंदादिली है. काम ज़रा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन नहीं.

Life

चलना ही जीवन है
कितनी भी बड़ी आपदा या हादसा क्यों न हो जाए ज़िंदगी नहीं ठहरती. हां, कुछ समय के लिए इसकी रफ़्तार ज़रूरी धीमी पड़ जाती है, लेकिन फिर उसे अपने पुराने ढर्रे पर आना ही पड़ता है. चाहे जापान में आई सुनामी हो या उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा. इतने बड़े विनाश के बाद भी दोबारा ज़िंदगी धीरे-धीरे ही सही पटरी पर आने लगती है. क्योंकि जो हो गया हम उसे तो बदल नहीं सकते, जो अपना चला गया हम उसे वापस तो ला नहीं सकते, लेकिन अपने आने वाले कल को संवारने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. हमें अपने और अपने आसपास के बाकी लोगों की ख़ातिर जो हो गया उसे भुलाकर जीवन में आगे बढ़ना ही पड़ता है.

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जब तक है आस
बात चाहे कुदरत के विनाश की हो या ज़िंदगी में किसी अन्य तरह की असफलता की, आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है उम्मीद. माना किसी प्रोजेक्ट पर कई हफ्तों तक दिन-रात मेहनत करने के बाद वो डेटा किसी कारणवश आपके कंप्यूटर से उड़ गया. ऐसे में निश्‍चय ही आपके पैरों तले से ज़मीन खिसक जाएगी, लेकिन उस वक़्त अपना मानसिक संतलुन खोकर ख़ुद पर या किसी और पर ग़ुस्सा करने या फिर उदास होकर बैठ जाने से समस्या हल नहीं होगी. यदि आपको ख़ुद को साबित करना है, करियर में आगे बढ़ना हैं, तो दोबारा मेहनत करनी ही पड़ेगी. माना इसमें वक़्त लगेगा, मगर आगे बढ़ने के लिए तो आपको ये करना ही होगा. यक़ीन मानिए, यदि आप सकारात्मक सोच के साथ नई शुरुआत करते हैं, तो देर से ही सही आपको सफलता ज़रूर मिलेगी.

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जो बीत गई सो बात गई
‘टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई’, हरिवंश राय बच्चन की कविता की इन पंक्तियों का सही अर्थ समझकर यदि आप जीवन में उतार लेंगे, तो मुश्किल से मुश्किल हालात से भी ख़ुद को उबारकर जीवन में आगे बढ़ सकेंगे. ज़िंदगी में बहुत से ऐसे लोग, चीज़ें, बातें और पल होते हैं, जिनके छिन जाने पर आपको बहुत दुख होता है या आपकी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है. कई बार तो लगता है जैसे जीने का कोई मक़सद ही नहीं बचा, मगर जब तक आप ज़िंदा है आपको अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी जी नहीं पाएंगे.

क्या वाकई रिश्ते स्वर्ग में तय होते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो: 

अपने मुंह मियां मिट्ठू (Self Praise: Are You Hurting Or Helping?)

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग अपने सिवाय किसी और को कुछ समझते ही नहीं हैं. अपने मुंह मियां मिट्ठू लोगों को आत्मप्रशंसा की इतनी बुरी लत होती है कि हर किसी के सामने अपनी बड़ाई करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे ख़ुद को श्रेष्ठ साबित कर सकते हैं, जबकि आत्मप्रशंसा ओछेपन की निशानी है.

Self Praise

 

बड़े बड़ाई न करें, बड़े बोले न बोल
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मेरा मोल

रहीमदास का ये कथन बिल्कुल सटीक है. जो लोग वाकई में ज्ञानी और गुणवान होते हैं वो अपने गुणों का बखान नहीं करते, बल्कि चुपचाप अपना काम करते रहते हैं. क्योंकि उनका काम ही उनके बारे में सब कुछ कह देता है. इसकी जीती जागती मिसाल स्वामी विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगौर, महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस जैसे इतिहास पुरुष हैं, जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है, लेकिन उन्होंने ख़ुद कभी अपनी शेखी नहीं बघारी.

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग दरअसल अपनी कमियां छुपाते हैं
जिन लोगों में योग्यता नहीं होती वो ही ख़ुद की प्रशंसा करके अपनी कमियां छुपाने की कोशिश करते हैं. अपनी हार के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार मानने की बजाय उसका दोष परिस्थितियों व दूसरे लोगों पर मढ़ देते हैं, जैसे जॉब या प्रमोशन न
मिलने पर ऐसे शख़्स कहेंगे, “मुझे काम का अनुभव तो था, लेकिन लोगों को इसकी कद्र नहीं… मेरी सिफ़ारिश करने वाला कोई नहीं था या मेरी किसी बड़े आदमी से पहचान नहीं थी, इसलिए मुझे ये नौकरी/प्रमोशन नहीं मिली.’ माना किसी संदर्भ में ये बातें सही हो सकती है, लेकिन आप में यदि प्रतिभा व योग्यता है, तो निश्‍चय ही आपको सफलता मिलेगी. इसके लिए आपको अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की ज़रूरत नहीं.

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अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग छोटी सोच के होते हैं
अपनी तारीफ़ करके यदि आपको ऐसा लगता है कि दूसरे आपसे प्रभावित हो जाएंगे और उनकी नज़रों में आपका क़द बढ़ जाएगा तो आप ग़लत हैं. उल्टा आप उनकी नज़रों में छोटे बन जाएंगे, क्योंकि कोई भी इंसान अपनी कथनी से नहीं, बल्कि करनी से बड़ा होता है. शांति व संजीदगी सज्जन व ज्ञानी व्यक्तियों की पहचान है. जिस तरह पूरा भरा घड़ा छलकता नहीं है वैसे ही योग्य व सक्षम व्यक्ति भी ख़ुद अपनी बड़ाई नहीं करते, बल्कि दुनिया उनके गुणों का बखान करती है. दरअसल, प्रशंसा की भूख अयोग्य व्यक्तियों में ही होती है. इस संदर्भ में महात्मा गांधी ने बिल्कुल सही कहा है, “जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वो साबित कर देते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है.”

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग स़िर्फ अपनी शेखी बघारते हैं
आप अपने परिवार व समाज में सबकी मदद करते हैं, मुश्किल हालात में जी जान लगाकर आप उनकी सहायता करते हैं. इस काम के लिए जब दूसरे आपकी प्रशंसा करें तब तो ठीक है, लेकिन आप अगर ख़ुद ही अपनी शेखी बघारने लगेंगे तो आपके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा. तुलसीदास जी ने भी कहा है “आत्मप्रशंसा वह आग है जिसमें कर्तव्य का जंगल जल जाता है.”

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अपने सपनों को पूरा कैसे करें? (How To Fulfill Your Dreams)

How To Fulfill Your Dreams

सपनों को पूरा करना बहुत मुश्किल नहीं है, यदि आपका लक्ष्य सही हो, आप अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हों. अपने सपनों को कैसे पूरा करें, इसके बहुत ही आसान उपाय यहां पर हम आपको बता रहे हैं.

How To Fulfill Your Dreams

सपनों की उड़ान
ख़्वाबों की दुनिया बड़ी हसीन होती है, यहां हम जो चाहें बन सकते हैं, जो चाहें हासिल कर सकते हैं, लेकिन आप यदि अपने ख़्वाबों को हकीक़त में बदलना चाहते हैं, तो पूरी लगन, ताक़त और जोश के साथ उसे पूरा करने में जुट जाइए, यक़ीन मानिए सपना सच होते देर नहीं लगेगी.

जीने के लिए ज़रूरी हैं सपने
यदि ज़िंदगी में सपने नहीं होंगे तो इच्छाएं नहीं होगीं, इच्छाएं नहीं होगी तो हम प्रयास नहीं करेंगे और यदि हमने प्रयास बंद कर दिए तो ज़िंदगी जड़ हो जाएगी यानी हमारा जीवन ही ख़त्म हो जाएगा. उस स्थिति की कल्पना करिए जब आपके पास करने के लिए कुछ न रहे, आप किसी चीज़ को हासिल करने के बारे में सोचे ही नहीं… कैसी होगी ज़िंदगी? निश्‍चय ही बेरंग, नीरस और उबाऊ. जीने के लिए कुछ मकसद होना ज़रूरी है और वो मकसद तभी मिलता है जब हम सपने देखते हैं. सपना कुछ करने का, सपना कुछ बदलने का, सपना अपनों को ख़ुश रखने का या देश/समाज में कुछ बदलाव लाने का, लेकिन स़िर्फ सपने देखना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि उसे पूरा करने में जी जान लगाना भी ज़रूरी है.

प्रेरणा देते हैं सपने
विप्रो कंपनी के मालिक अजीम प्रेमजी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि ‘सपने आपके सच्चे प्रेरक होते हैं, सपनों से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं. साथ ही ये लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ऊर्जा भी देते हैं.’ मगर ये भी सच है कि ख़्याली पुलाव पकाने या हवा में महल बनाने से ज़िंदगी में कुछ हासिल नहीं होता. सपने तभी सार्थक है जब वो हकीक़त के धरातल से जुड़े रहें. माना कोई इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए यदि डॉक्टर बनने का सपना देखता है तो ऐसा सपनों का कोई मतलब नहीं है, लेकिन एक साधारण इंसान यदि टाटा और अंबानी जैसा अमीर बनने का सपना देखता है, तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है. कभी एक मामूली सी नौकरी करने वाले धीरूभाई अंबानी जब करोड़ों की कंपनी खड़ी कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

पूरा करने के लिए देखें सपने
एक बार पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था ‘सपने सच होने के लिए ज़रूरी है कि पहले आप सपने तो देखें.’ उनकी बात सौ फीसदी सच है. जब तक आप घर ख़रीदने, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार या कुछ और बनने का सपना ही नहीं देखेंगे, तो इस दिशा में प्रयास कैसे करेंगें? जब तक आप किसी चीज़ के बारे में सोचेंगे ही नहीं, तो उसे हासिल करने की तरक़ीब कैसे निकालेंगे? जीवन में क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने के लिए पहले सपने देखिए फिर पूरी शिद्दत, ईमानदारी और लगन से उसे पूरा करने की कोशिश में जुट जाइए. फिर देखिए ‘सपने भी कहीं सच होते हैं?’ वाली आपकी ये सोच कैसे बदल जाती है.

ग़ुस्सा कम करने और मन शांत करने के आसान उपाय (Anger Management: How To Deal With Anger)

Anger Management, How To Deal With Anger

आज के कॉम्पटीशन के युग में जितनी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं, तनाव उससे भी कहीं ़ज़्यादा हैं. घर में सुख-सुविधाएं जुटाने का तनाव, ऑफ़िस में अच्छे परफ़ॉर्मेंस का तनाव… नतीज़ा, बात-बात में ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन… चाहकर भी हम नॉर्मल नहीं रह पाते. बढ़ते काम के घंटों ने जैसे दिन रात के फ़र्क़ को ही मिटा दिया है, जिसके चलते अक्सर ऑफ़िस का तनाव घर तक आ पहुंचता है और हमारी पर्सनल लाइफ़ को भी डिस्टर्ब करने लगता है. ग़ुस्से की स्थिति में हम बात-बात पर चिढ़ने लगते हैं, किसी का ग़ुस्सा किसी और पर निकालने लगते हैं. इससे न स़िर्फ हमारा मूड ख़राब रहता है, बल्कि सेहत भी बिगड़ने लगती है.

Anger Management, How To Deal With Anger
ग़ुस्से के कारण निवारण के बारे में जानते हुए भी आख़िर क्यों हम इस पर काबू नहीं कर पाते..? क्योंकि हम दूसरों से ही नहीं, अपने आप से भी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें करने लगते हैं. हम हर बात में बेस्ट और पऱफेक्शन ढूंढ़ने लगते हैं, जोकि हर बार मुमक़िन नहीं होता और ये भी मुमक़िन नहीं है कि किसी व्यक्ति को कभी ग़ुस्सा न आए. ख़ुशी, ग़म, प्यार-दुलार जैसी तमाम भावनाओं की तरह ही ग़ुस्सा आना भी मानव स्वभाव है. हां, जब इसकी अति होने लगती है तो इसके परिणाम भी नकारात्मक होने लगते हैं.

थोड़ा ग़ुस्सा ज़रूरी है
ग़ुस्सा हमारी ताकत बन सकता है, यदि हम उसका सही समय पर सही प्रयोग करें. कई बार हम ग़ुस्से में वो काम भी कर जाते हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती है. यानी ग़ुस्सा जब ताकत बन जाए, तो व्यक्ति को असाधारण प्रतिभा का धनी भी बना सकता है, लेकिन ग़ुस्सा तभी असरदार हो सकता है, जब वह किसी का अहित न करे, किसी को आहत न करे. अतः थोड़ा-बहुत ग़ुस्सा आता भी है, तो उसे अपनी ताक़त बनाइए, कमज़ोरी नहीं.

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कब आता है ग़ुस्सा?
जब हम कोई काम बड़ी लगन व मेहनत से करते हैं, लेकिन संतुष्टिजनक नतीज़ा नहीं मिलता.
जब कभी हार का सामना करना पड़ता है.
हालात, आस-पास के लोग या फिर ज़िंदगी की गाड़ी जब हमारे हिसाब से नहीं चलती. शारीरिक कमज़ोरी या लंबी बीमारी.

कैसे पाएं ग़ुस्से पर काबू?
* कारण जानने की कोशिश करें.
* यदि स्थिति आपके अनुरूप नहीं हो सकती तो ख़ुद को स्थिति के अनुरूप ढाल दें.
* जिस माहौल या लोगों के बीच आपको ग़ुस्सा आता है, उनसे दूर रहने की कोशिश करें.
* ग़ुस्से की स्थिति में अपना मन उन चीज़ों में लगाने की कोशिश करें, जिनसे आपको ख़ुशी या संतुष्टि मिलती है.
* जब ग़ुस्सा आए, तो अपने आपको किसी रचनात्मक कार्य में व्यस्त कर दें.
* उल्टी गिनती गिनें. इससे ग़ुस्से पर से आपका ध्यान हट जाएगा.
* लंबी-लंबी सांसें लें. ये एक तरह से डी-टॉक्सीन का काम कर के मन को शांत करता है.

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चेहरे पर न बांधें अहंकार की पट्टी (Signs Of An Arrogant Person)

Signs Of An Arrogant Person

किसी को ख़ूबसूरती का घमंड होता है, किसी को शिक्षा का तो किसी को धन का. अहंकार चाहे किसी भी चीज़ को हो ये व्यक्ति की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. अहंकार के नशे में चूर व्यक्ति स्वयं को ही सर्वोपरी समझता है और दूसरों को छोटा, लेकिन अहं के इस मद में वो ये भूल जाता है कि अहंकार ने बड़े-ब़डे संत महात्माओं का भी सर्वनाश कर दिया. सफलता के शिखर पर पहुंच आसान नहीं है लेकिन उससे भी ज़्यादा मुश्किल हैं वहां टिके रहना. जिसके लिए अहंकार से कोसो दूर रहना ज़रूरी है, क्योंकि जिस दिन आपके अंदर अंह आ गया समझ लीजिए उसी दिन से आपके पतन की उल्टी गिनती शुरू हो गई.

Signs Of An Arrogant Person

अहंकार से होता है विनाश
अहंकार किस तरह मनुष्य का विनाश कर सकती है इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण रावण है. महाज्ञानी रावण को अपनी शक्ति और ज्ञान का इतना अंह हो गया था कि वो ख़ुद को ईश्‍वर से भी ऊपर समझने लगा था और उसके इसी अहंकार ने उसका अस्तित्व मिटा दिया. आप कितने भी ज्ञानी व परोपकारी क्यों न हो अगर आप में अहंकार का ज़रा सा भी समावेश वो गया तो आपके सारे गुण अवगुण समान हो जाएंगे. जैसे आपने आज सुबह किसी गरीब व्यक्ति को दान तो किया लेकिन आप मन ही मन सोच रहे थे कि आप बहुत श्रेष्ठ हैं इसलिए आपके पास धन हैं, तो आपको दान का फल नहीं मिलेगा. अहंकार की पट्टी आंखों पर बंध जाने पर इंसान को अच्छे-बुरे, सही-ग़लत का भी ज्ञान नहीं रहता. अहंकार में अंधे व्यक्ति को अपना ग़लत काम भी सही लगने लगता है, और उसका यही रवैया उसो लोगों की नफ़रत का पात्र बना देती है.

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प्रगति में बाधक है अंहकार
कई लोगों को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती कि कोई उनके काम पर उगंली उठाएं. वो हर हाल में ख़ुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं (चाहे वो ग़लत ही क्यों न हों). अगर कोई उनसे कह दे “आपका ये काम ठीक नहीं है” तो उन पर आसमान टूट पड़ता है, उनके अहं को ठेस पहुंच जाती हैं और ग़लती सुधारने की बजाय वो सोचने लगते हैं “उसकी इतनी मजाल कि वो मेरे काम में ग़लती निकाले.” ऐसे लोग जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पातें, क्योंकि वो अपनी ग़लती स्वीकार करके उसे सुधारने की कोशिश ही नहीं करतें. उल्टे ग़लती बताने वाले को ही भला-बुरा कहने लगते हैं. शायद इन लोगों को ज़रूरत है कबीर का ये दोहा पढ़ने की.
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय

अहंकार से बचाती है विनम्रता
अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो अहंकार को त्याग कर विनम्रता का दामन थाम लें. विनम्रता अहंकार को दूर रखती हैं. और ये संकट से भी बचाती है. आंधी-तूफान में एक सूखा पेड़ तो तुरंत टूट जाता है लेकिन फलों से लदा पेड़ नहीं टूटता, क्यों? क्योंकि वो झुका रहता है सूखे पेड़ की तरह अकड़कर खड़ा नहीं रहता. इसी तरह आप भी विनम्र बनकर मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं. आज से आप भी विनम्रता को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिए फिर देखिए ज़िंदगी कितनी बदल जाती है. कल तक आपसे नफ़रत करने वाले लोग भी अब आपकी तरफ़ प्यार भरी नज़रों से देखने लगेंगे.

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क्या आप भी करते हैं दूसरों की बुराई? (How To Avoid Gossiping)

How To Avoid Gossiping

“बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो” गांधीजी के ये वाक्य भले ही हमने रट लिए हों, लेकिन उन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हमने आज तक नहीं की. तो क्यों न अब इस ओर एक प्रयास किया जाए?

How To Avoid Gossiping

क्योंकि निंदा करना बुरी बात है
कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो हमें बचपन से सिखाई जाती हैं, जैसे- झूठ बोलना पाप है, चोरी करना गलत बात है आदि. इसी तरह निंदा करना बुरी बात है यह वाक्य भी कई बार हम अपने बड़े-बूढ़ों के मुंह से सुन चुके हैं, लेकिन आश्‍चर्य इस बात का है कि आज भी हमारी सुबह और शाम पड़ोसी, रिश्तेदार व सखी-सहेली से जुड़ी निंदक बातों से शुरू और खत्म होती है. जब कि हम सब इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि निंदा करना बुरी बात है.

निंदा करना और सुनना दोनों ही पाप है
कहते हैं, अन्याय करनेवाले और सहनेवाले दोनों ही बराबर के दोषी होते हैं. ठीक उसी तरह हिंदू वेद-पुराण के अनुसार परनिंदा करनेवाले और सुननेवाले दोनों ही पाप के समान भागीदार होते हैं. अतः अगर धार्मिक किताबों में आपकी निष्ठा है, तो अब से न ही दूसरों की निंदा करें और न ही किसी की निंदक बातों में दिलचस्पी लें.

परनिंदा से बेहतर है संतगुणों की प्रसंशा
काहू कि नहिं निन्दिये, चाहै जैसा होय।
फिर फिर ताको बन्दिये, साधु लच्छ है सोय॥
संत कबीर दासजी कहते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति कितना भी बुरा हो, परंतु उसकी निंदा न करें, क्योंकि इससे स़िर्फ समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, इसलिए अच्छा यह होगा कि आप अपना समय उन लोगों की प्रशंसा में व्यतीत करें, जो स्वभाव से सरल हों, जिनके भीतर साधू के लक्षण विद्यमान हों अथवा जो सतगुणों की खान हों.

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परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है
यह बात सौ आने सच है कि परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, क्योंकि आप जिस व्यक्ति की निंदा करते हैं, उसे इस बात की ख़बर तक नहीं होती कि आप उसके बारे में यूं भला-बुरा कह रहे हैं, नतीजतन वह व्यक्ति तो अपने काम में मस्त रहता है, परंतु उस वक्त उसकी निंदा करने के चक्कर में आपके काम पर अल्पविराम लग जाता है, इसलिए अब से अपना बेशक़ीमती समय दूसरों की निंदा में बर्बाद करने की बजाय अपने काम में मन लगाएं.

परनिंदा से पहले करें स्वयं का परीक्षण
जब हम दूसरों की तरफ एक उंगुली दिखाते हैं, तब हम ये भूल जाते हैं कि बाकी बची चार उंगुलियां हमारी ओर इशारा करती हैं. अर्थात जब हम फलाना व्यक्ति को एक उंगली से परिभाषित करते हैं, तो उस वक्त हमारी चार उंगलियां हमें परिभाषित कर रही होती हैं. इसका मतलब आप उस व्यक्ति से ज़्यादा अवगुणी हैं. अतः किसी और पर दोषारोपण करने से पहले अपने गुण-दोष का परिक्षण करें और ख़ुद से पूछें कि क्या आप दूसरों की निंदा करने के लायक हैं? और उत्तर मिलने के बाद ही किसी की निंदा करें या सुनें.

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क्या आप इमोशनली इंटेलिजेंट हैं? (How Emotionally Intelligent Are You?)

How Emotionally Intelligent Are You

आपके साथ भी ऐसा कई बार हुआ होगा जब आपने जाने-अनजाने अपने पैरेंट्स, पार्टनर या क़रीबी दोस्तों का दिल दुखाया होगा. उस समय ग़ुस्से में आपने उन्हें भला-बुरा कह तो दिया होगा, लेकिन बाद में पछताए होंगे कि आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था. क्या आप अपने ऐसे व्यवहार या हरक़तों को बदल सकते हैं? बेशक, आप अपने दिमाग़ को अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना सिखा सकते हैं, ताकि आगे से आपकी ज़ुबान से ऐसा कोई वाक्य न निकले, जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े. हां, इसके लिए आपको थोड़ी प्रैक्टिस ज़रूर करनी पड़ेगी.

How Emotionally Intelligent Are You

तलाशें नए रंग
रोज़ सुबह ये कल्पना करें कि आपका मन एक कोरी क़िताब है, जिस पर आपको स़िर्फ अच्छी बातें लिखनी हैं. अपनी कल्पनाओं के रंग भरने हैं. अब तक आपने या दूसरों ने जो भी बुरी बातें कहीं या सुनी, उन्हें आप अपने मन की क़िताब से मिटा देंगे और उनकी जगह ढेर सारी नई, अनोखी, दिलचस्प बातें लिखेंगे. यक़ीन मानिए, आपके ये पॉज़िटिव विचार आपके व्यवहार में भी झलकने लगेंगे. ऐसे में यदि कोई आपके सामने बुरा व्यवहार करता भी है, तो आप उसे अपने मन तक पहुंचने नहीं देंगे और हमेशा ख़ुश व एनर्जेटिक महसूस करेंगे.

कह दें मन की बात
जो लोग बीती बातों का बोझ मन में लिए फिरते हैं, उनके लिए मन को साफ़ रखना आसान नहीं होता. अतः किसी से भी कोई शिकवा-गिला हो तो उसे बातचीत द्वारा सुलझा लें, ताकि आपके मन में कोई ऐसी बात न रह जाए, जिसे आप कह न पाए हों, क्योंकि मन की कड़ुवाहट ही कई बार जाने-अनजाने ज़ुबान से आ जाती है. वैसे भी कह देने से मन हल्का हो जाता है.

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जब आए ग़ुस्सा
शॉपिंग करते समय यदि बच्चे ग़ैर ज़रूरी चीज़ के लिए ज़िद करने लगें, पति महोदय हमेशा की तरह बच्चे के स्कूल की पैंरेट्स टीचर्स मीटिंग में जाने से इनकार कर दें या फिर ऑफ़िस से थक कर आने पर सासू मां घर के कामों की लंबी लिस्ट थमा दें, तो आपको ग़ुस्सा आना लाज़मी है. ऐसी स्थिति में भी अपने ग़ुस्से पर कंट्रोल रख पाना ही इमोशनली इंटेलिजेंट होना है. आप अपनी भावनाओं पर जितना कंट्रोल रख पाएंगी, विपरीत स्थितियों से उतनी ही आसानी से निकल पाएंगी.

समाधान आसान है
ग़ुस्सा करने से पहले सोचें कि क्या इस स्थिति में आपका ग़ुस्सा करना वाजिब है? क्या आपके ग़ुस्सा करने से स्थिति सुधर जाएगी? ग़ुस्सा करने के अलावा आपके पास और क्या विकल्प है? हो सकता है, पति के साथ प्यार से बातचीत करके आप उन्हें अगली बार बच्चे की पैंरेट्स टीचर्स मीटिंग में जाने के लिए तैयार कर दें. इसी तरह सास व बच्चों को भी प्यार से अपने मन की बात समझा सकें.

हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है.
– स्वामी विवेकानंद

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हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं! (How To Overcome Failure)

How To Overcome Failure

हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं! शाहरुख़ ख़ान की फिल्म बाज़ीगर का ये डायलॉग यूं ही मशहूर नहीं हो गया. इस डायलॉग में जीवन का सार छुपा है. जब हम हार से हारते नहीं, लगातार जीतने की कोशिश करते रहते हैं, तो हमारी जीत निश्‍चित होती है. हम तब तक नहीं हारते, जब तक हम हार नहीं मान लेते.

How To Overcome Failure

 

सुपरस्टार भी हारते हैं
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान से लेकर उद्योग जगत के बादशाह टाटा और बिड़ला तक सबने एक ही प्रयास में सफलता का स्वाद नहीं चखा, बल्कि हर बार हारने पर दुगुने जोश से आगे बढ़कर आज वो क़ामयाबी की बुलंदियों पर हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बार-बार चुनाव हारते रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आख़िरकार 52 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का पद हासिल किया. कहने का अर्थ है कि आपकी हार में जीत का रास्ता छुपा होता है. ज़रूरत है तो बस उसे पहचानने की.

हार को जीत में बदलें
परिक्षा या प्यार में असफल हो जाने, नौकरी न मिलने और ऑफिस में कोई प्रॉजेक्ट हाथ से निकल जाने पर आप मायूस हो जाते हैं, लेकिन क्या मायूस होने से आपकी हार जीत में बदल सकती है? नहीं, क्योंकि कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द की ही तरह बीता व़क़्त भी लौटकर नहीं आता. आप अपने बीते कल को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हार में छुपी जीते के अवसर को पहचानकर आप आने वाले कल को ज़रूर संवार सकते हैं.

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क्योंकि हारना ज़रूरी है
अगर आपको पता ही न हो कि कड़वाहट क्या होती है तो क्या आप कभी मिठास का असली म़जा ले सकते हैं? नहीं न, उसी तरह जब तक आप असफलता का स्वाद नहीं चख लेते, तब तक आपको सफलता के असली मायने समझ नहीं आएंगे. जिस तरह दुख के बाद मिली ख़ुशी अनमोल होती है, उसी तरह हार के बाद मिली जीत का कोई मोल नहीं होता. बार-बार प्रयास करके हासिल की गई चीज़ की अहमियत एक बार प्रयास करने पर मिली चीज़ से कहीं ़ज़्यादा होती है. हार के रूप में मिली ठोकरें हमें मज़बूत बनाती हैं, इसलिए इसे सकारात्मक रूप में लें.

हार से लें सबक
हार के आगे नतमस्तक होने की बजाय उसे एक सीख की तरह लें. एक बार यह जानने की कोशिश करें कि आख़िर आप हारे क्यों? क्या आपके प्रयासों में कहीं कोई कमी रह गई थी? अगर हां, तो अगली बार उसे दुुगुनी मेहनत से उन्हें सुधारने की कोशिश करें. और अगर नहीं, तो भी उदास न हों, बल्कि एक नए जोश से फिर आगे बढ़ने की कोशिश करें. हो सकता है, इससे बेहतर मौक़ा आपका इंतज़ार कर रहा हो. एक बात हमेशा याद रखें कि गिरते वही हैं जो आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं.

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