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इस साल 5 जून से 5 जुलाई तक एक महीने में तीन ग्रहण पड़ने वाले हैं. ये ग्रहण 5 जून, 21 जून और 5 जुलाई को पड़ेंगे. इस बार एक महीने में तीन ग्रहण पड़ेंगे, जिनमें से दो चंद्र ग्रहण और एक सूर्य ग्रहण हैं. जहां तक भारत में ग्रहण के असर की बात है, 5 जून को और 5 जुलाई को जो चंद्र ग्रहण पड़ेगा, वो देशभर में कहीं दिखाई नहीं देगा, इसीलिए इन दोनों ग्रहण के दौरान सूतक काल और वधू पालन करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण साल का सबसे बड़ा ग्रहण है और ये सूर्यग्रहण जरूर इतिहास रचने वाला है, इसलिए इस ग्रहण के बारे में आपको संपूर्ण जानकारी होनी जरूरी है. 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण हमारे जीवन पर क्या प्रभाव डालने वाला है, इस ग्रहण से किन राशियों को क्या नुकसान और क्या लाभ होने वाला है, इसके बारे में हमने बात की ज्योतिष शिरोमणि पंडित राजेंद्रजी से. इस साल के सबसे बड़े सूर्यग्रहण के बारे में पंडित राजेंद्रजी हमें इस प्रकार विस्तार से पूरी जानकारी दी.

Solar Eclips

भारत में 21 जून को दिखेगा कंकण (चूड़ामणि) सूर्यग्रहण
कंकण (चूड़ामणि) सूर्यग्रहण 21 जून 2020 को सुबह से दोपहर तक संपूर्ण भारत में खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा. उत्तरी राजस्थान, उत्तरी हरियाणा और उत्तराखंड में इस ग्रहण का परमग्रास 994 प्रतिशत रहेगा. 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण भारत के अलावा दक्षिणी-पूर्वी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, अफ्रीका, हिंद महासागर, पूर्वी एशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, वर्मा, फिलीपीन्स में दिखाई देगा. यह कंकण सूर्यग्रहण रविवार के दिन घटित हो रहा है, अतः इसे चूड़ामणि सूर्यग्रहण कहा जाता है. शास्त्रों में इस ग्रहण में स्नान-दान, जप-पूजा-पाठ आदि कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है. पवित्र तालाबों, गंगा, हरिद्वार, प्रयागराज आदि पवित्र तीर्थस्थलों पर स्नानादि से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है.

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का समय
इस सूर्यग्रहण की अवधि- 5 घंटे 48 मिनट 03 सेकंड रहेगी

पृथ्वी पर इस कंकण सूर्यग्रहण का समय
ग्रहण प्रारंभ – सुबह 9 बजकर 15 मिनट 58 सेकंड
कंकण प्रारंभ- सुबह 10 बजकर 17 मिनट 45 सेकंड
परमग्रास (मध्य)- 12 बजकर 10 मिनट 04 सेकंड
कंकण समाप्त– दोपहर 2 बजकर 2 मिनट 17 सेकंड
ग्रहण समाप्त- 3 बजकर 4 मिनट 01 सेकंड

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सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का 12 राशियों पर होगा क्या असर?
सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का यह ग्रहण मृगशिरा और आर्द्रा नक्षत्र मिथुन राशि में घटित होगा. दो तिथि पर गंड व वृद्धि पर भी होगा. लेकिन 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण साल का सबसे बड़ा ग्रहण है और इसका हर राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा. आइए, हम आपको बताते हैं कि इस सूर्यग्रहण का किस राशि पर क्या असर होने वाला है.

1) मेष
धन के रास्ते खुलेंगे, लाभ होगा.
2) वृषभ
धन की हानि, पैसे से संबंधित चिंता उत्पन्न होगी.
3) मिथुन
दुर्घटना, चोट, भय, चिंता, कलह में वृद्धि हो सकती है.
4) कर्क
शारीरिक पीड़ा हो सकती है, वाहन से बचें.
5) सिंह
चिंता से राहत मिलेगी, नया कार्य मिलेगा.
6) कन्या
रोग बढ़ सकते हैं, कष्ट बढ़ेंगे.
7) तुला
संतान को कष्ट होगा, चिंता उत्पन्न होगी.
8) वृश्चिक
शत्रु बढ़ सकते हैं, बहस से बचें, धन लाभ होगा.
9) धनु
जीवनसाथी को कष्ट हो सकता है, मानसिक चिंता बढ़ेगी.
10) मकर
गुप्त चिंता उभरेगी, शत्रु काम में बाधा डाल सकते हैं.
11) कुंभ
अधिक खर्च होगा, कार्य में परेशानी हो सकती है.
12) मीन
कार्य बढ़ेंगे, धन वृद्धि होगी, नए मकान के योग हैं.

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 के दिन करें ये विशेष उपाय, होगी हर मनोकामना पूरी
सूर्यग्रहण 21 जून 2020 के दिन ये विशेष उपाय करने से आप आनेवाली मुसीबत से बच सकते हैं और अपनी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं. इसके लिए कांसे की कटोरी में घी भरकर उसमें चांदी का सिक्का डालकर अपना मुंह देखकर छायापात्र मंत्र पढ़ें. ग्रहण समाप्ति पर ब्राह्मण को वस्त्र, फल, दक्षिणा दान करें. ये उपाय करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है.

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ग्रहण काल में क्या करें – क्या न करें

  • जब ग्रहण प्रारंभ हो रहा हो, उस समय से पहले ही स्नान, जप, संकल्प आदि कर लें. मध्यकाल में होम, देव पूजा, पाठ, ग्रहण मोक्ष समीप होने पर दान तथा पूर्ण मोक्ष होने पर पुनः स्नान करना चाहिए.
  • पका हुआ अन्न, कटी हुई सब्ज़ियां आदि ग्रहण काल में दूषित हो जाते हैं इसलिए ग्रहण काल शुरू होने से पहले ही इनका प्रयोग कर लें. तेल, घी, मक्खन, लस्सी, पनीर, अचार, चटनी, मुरब्बा में कुशा रखने से ये ग्रहण काल में दूषित नहीं होते हैं.

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं क्या करें – क्या न करें
गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में सब्जी न काटें, पापड़ न सेंकें, गुस्से से बचना चाहिए. गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में सोएं नहीं. गर्भवती महिलाओं के अलावा वृद्ध, रोगी, बच्चे भोजन या दवाई का सेवन कर सकते हैं. इसमें कोई दोष नहीं है.

26 दिसंबर 2019 के सूर्यग्रहण के लिए पंडित राजेंद्र जी ने क्या भविष्यवाणी की थी और इस सूर्यग्रहण का आपकी राशि पर क्या असर होगा, जानने के लिए देखें ये वीडियो:

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का क्या होगा असर?
यह सूर्यग्रहण राहु और मंगल के नक्षत्र में होने के कारण अग्नि से भय, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदाएं, राजनेताओं को कष्ट, भूकंप, सूखा जैसी विषम परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं. इसके अलावा आंदोलन, फसल को नुकसान, गायों के दूध में कमी, विश्व के राष्ट्र अध्यक्षों के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिल सकती है. कपड़े के व्यापारी, फल-फूल का व्यापार करने वाले, लेखक, शराब पीने वाले लोगों के लिए ये ग्रहण शुभ नहीं है. यमुना के निकट के गांववासियों के लिए भी ये समय शुभ नहीं है.

शनि वक्री, गुरु वक्री, बुध वक्री, शुक्र वक्री
चार ग्रहों का वक्री होना, दो नक्षत्र पर ग्रहण, दो तिथियों पर ग्रहण, कुल मिलाकर 21 जून का ग्रहण जरूर कोई इतिहास बनाकर जाएगा. जनता सचेत रहे, जप, हवन, पूजा, ध्यान, सत्संग को प्राथमिकता दे, तो स्थिति ठीक हो सकती है. ईश्वर सबका कल्याण करें, सबकी रक्षा करें.
– कमला बडोनी

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घर में लाल चींटियों (Red Ants) का आना अशुभ माना जाता है इसलिए हम सब घर में लाल चींटियां देखकर उन पर आटा या हल्दी डालकर उन्हें भगा देते हैं. क्या वाकई घर में लाल चींटियों का आना अशुभ होता है? घर में लाल चींटियां आने से क्या होता है, इसके बारे में बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक.

Red ants

आपने भी अपने घर में कभी न कभी लाल चींटियों को देखा ही होगा. जब बात बारिश के मौसम की आती है तो हम अक्सर अपने इर्दगिर्द घर के कोनो में, दरवाज़ों के किनारे, रसोई घर में इत्यादि जगहों पर चींटियों को पाते हैं. ऐसे में घर में चींटियों को देखते ही हम उन पर हल्दी या आता डालकर उन्हें भगा देते हैं. परन्तु क्या हम कभी यह सोचते हैं कि अचानक चींटियों का झुण्ड हमारे घर में क्यों आने लग गया है? अक्सर मौसम बदलते ही हम अपने घर में चींटियों का झुण्ड देखते हैं. परन्तु बेमौसम अचानक और बार-बार चींटियों का घर में या ऑफिस में दिखना क्या हमें कुछ इशारा करता है? क्या है चींटियों के आने की सच्चाई? घर में सामान्यतः दो प्रकार की चींटियां पाई जाती हैं- एक लाल चींटियां और दूसरी काली चींटियां.

घर में लाल चीटियों के आने से क्या होता है?
ऐसी मान्यता है कि चीटियों का संबंध हमारे ग्रहों में से शनि और राहु से होता है. चीटियों को शुभ-अशुभ मानने से जुड़ी एक कथा भी है. चींटी को श्रीहरि विष्णु का प्रतीक माना जाता है. ये तो हम सभी जानते हैं कि प्रह्लाद को मारने हेतु विभिन्न प्रकारों से सताया गया था. एक बार हिरण्यकश्यप ने कहा कि यदि हरि पर इतना विश्वास है, तो इस दहकते लोहे के खंबे से लिपटकर दिखाओ. ऐसे में प्रह्लाद ने जब अपने आराध्य श्री विष्णु को चींटी के रूप में उस लौह स्तंभ पर घूमते देखा, तो खुशी-खुशी उससे लिपट गए. तपता हुआ लौह स्तंभ शीतल हो गया. ऐसी मान्यता है कि चींटी रूपी नारायण को भोजन कराने से राहु एवं शनि के कोपों का शमन होता है. कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि घर में लाल चीटियों का आना अशुभ होता है. साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि चीटियों को आटा डालने से कर्ज़ से मुक्ति मिलती है.

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Red ants

घर में लाल चीटियों के आने से होता है ये
एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक के अनुसार, किसी भी जीव को शुभ-अशुभ से जोड़ना गलत है. लाल चींटियों को अशुभ मानने के पीछे ये वजह हो सकती है कि लाल चींटियों के काटने से बहुत तेज़ दर्द तो होता है और सूजन भी आ जाती है. चींटियां ज़्यादातर खाने की चीज़ों के आसपास ही आती हैं. पुराने ज़माने में लोगों की रसोइयां साधारण होती थीं. रसोई के बर्तन आदि खुले ही रहते थे. ऐसे में नमी के कारण चींटियां रसोई में और खाने की चीज़ों पर आ जाती थीं. काली चींटियां तो अपना भोजन लेकर बिलों में चली जाती थीं, लेकिन लाल चींटियां खाद्य पदार्थों को खराब करने के साथ ही तेज़ काटती भी थीं. लाल चींटियों के काटने के कारण ही उन्हें अशुभ संकेत से जोड़कर देखा जाता है.

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सभी पैरेंट्स की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चों की शादी सही उम्र और समय पर हो जाए, लेकिन कभी-कभी किसी ग्रह या नक्षत्र के कारण बात बनते-बनते रह जाती है, जिससे परिवार में काफ़ी तनाव रहता है, ऐसे में आप ये उपाय करके उन वैवाहिक दोषों को दूर कर सकते हैं. क्या हैं वो उपाय बता रहे हैं पंडित राजेंद्रजी दुबे. 

Marriage Problems

जन्म कुंडली में दिए गए योग के अनुसार, विवाह का विचार मुख्य रूप से सप्तम भाव से किया जाता है. इस भाव से ही शादी के अलावा वैवाहिक जीवन से जुड़ी अन्य बातें, पति-पत्नी के आपसी संबंध, जुड़ाव, रिश्तों में मज़बूती आदि पर चिंतन-मनन किया जाता है. आइए, इससे जुड़े उपायों के बारे में जानते हैं.

–     शनि की प्रतिकूल स्थिति से भी विवाह में बाधा आती है. शनि के कारण आनेवाली बाधा को दूर करने के लिए प्रत्येक शनिवार को शिव लिंग पर काले तिल अर्पित करना चाहिए.

–      शनिवार को काले कपड़े में साबुत उड़द, लोहा, काला तिल और साबुन बांधकर दान करने से भी लाभ मिलता है.

–      गुरू की स्थिति अनुकूल नहीं होने पर भी विवाह में देरी होती है. गुरू को अनुकूल बनाने के लिए गुरूवार के दिन पीला वस्त्र धारण करना चाहिए. चने की दान, केला, हल्दी एवं केसर का सेवन लाभप्रद होता है.

–      जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है, उनको उत्तर या उत्तर-पश्‍चिम दिशा में स्थित कमरे में रहना चाहिए. इससे विवाह के लिए रिश्ते आने लगते हैं. उस कमरे में उन्हें सोते समय अपना सिर हमेशा पूर्व दिशा में रखना चाहिए.

–     किसी कन्या की शादी हो रही हो तो उसमें अपनी क्षमता एवं श्रद्धा के अनुसार गुप्तदान करना भी बहुत फायदेमंद होता है. इससे जल्दी शादी होती है तथा वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है, लेकिन दान की चर्चा कभी भी किसी से न करना चाहिए.

–     गुरुवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है.

–     गुरुवार को विवाह योग्य लड़की को तकिए के नीचे हल्दी की गांठ पीले कपड़े में लपेटकर रखनी चाहिए.

–     यदि लड़का या लड़की पीपल की जड़ में लगातार 13 दिन तक जल चढ़ाते हैं, तो विवाह से संबंधित परेशानियां दूर हो जाती हैं.

–     जिस युवती की शादी में अड़चनें आ रही हों, उसे घर की वायव्य दिशा में सोना चाहिए.

–    अविवाहित लड़के/लड़की को ऐसे कमरे में नहीं रहना चाहिए, जहां अधूरा काम किया हो यानी कमरे के पेंट, मरम्मत आदि का काम अधूरा पड़ा हो या जिस कमरे में बीम लटका हुआ दिखाई देता हो.

–     कई बार ऐसा भी होता है कि कोई युवक या युवती शादी के लिए राजी नहीं होते हैं, तो उनके कमरे की उत्तर दिशा की ओर क्रिस्टल बॉल कांच की प्लेट में रखें.

–     जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों की शादी नहीं हो रही हो, उनके कमरे, बेडरूम व दरवाज़े का रंग गुलाबी, हल्का पीला या ब्राइट व्हाइट रंग का होना चाहिए. इससे स्थितियों में बदलाव आएगा.

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Marriage Problems

–     इसके अलावा उन्हें अपने कमरे में पूर्वोत्तर दिशा में वॉटर फाउंटेन रखना चाहिए.

–     कुंआरी कन्याएं शीघ्र विवाह के लिए गुरुवार का व्रत करें. साथ ही केले के पेड़ के नीचे बैठकर बृहस्पति मंत्र के पाठ की एक माला का जाप करें.

–     यदि कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान में मंगल स्थित है, तो जातक को मंगली योग होता है. इस योग के होने से शादी में देरी, शादी के बाद कपल्स में मतभेद, वाद-विवाद आदि समस्याएं होती हैं.

–    इससे बचने के लिए मंगली युवक या युवती मंगलवार का व्रत करें.

–     मंगल मंत्र का जाप करें और घट विवाह करें.

–     सप्तम में शनि स्थित होने से भी शादी-ब्याह में परेशानियां आती हैं.

–     इसके लिए ‘शं शनैश्‍चराय नम:’ मंत्र का जाप करें.

–     साथ ही शमी की लकड़ी, घी, शहद व मिश्री से हवन करें. अजब-ग़ज़ब टोटके

–     योग्य दूल्हे की प्राप्ति के लिए बालकांड का पाठ करना श्रेयस्कर होता है.

–     जब बेटी के पिता लड़केवालों से शादी की बात करने जाएं, तो बेटी बाल खुले रखे, तब तक जब तक पिता लौटकर घर न आ जाएं.

–     जो माता-पिता यह सोचते हैं कि उनकी बहू सुंदर व बुद्धिमान हो, तो वे गुरुवार व रविवार को बेटे के नाख़ून काटकर किचन में चूल्हे पर जला दें.

–     बेटी की शादी हो जाने के बाद विदाई के समय एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी-सी हल्दी और एक सिक्का डालकर बेटी के सिर के ऊपर से सात बार घुमाकर उसके आगे फेंक दें. उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा.

– ऊषा गुप्ता

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