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कितना ज़रूरी है आत्मसम्मान… जानें ख़ुद का सम्मान करने के तरी़के (Why Self-Respect Is Important… How To Respect Yourself?)

How To Respect Yourself

आत्मसम्मान यानी सेल्फ रिस्पेक्ट (Self-respect) का सीधा-सरल अर्थ है ख़ुद का सम्मान करना और ये ख़ुद से प्यार करने का ही दूसरा नाम है. कुछ लोग इसे ईगो समझ बैठते हैं, लेकिन ईगो का मतलब होता है अपना महत्व जताना. ख़ासतौर से दूसरों के सामने ख़ुद को अधिक महत्वपूर्ण व उनसे बड़ा समझना.

क्यों ज़रूरी है आत्मसम्मान?

आत्मसम्मान जहां सकारात्मक भावना है, वहीं ईगो यानी अहम् नकारात्मक भाव है. ऐसे में आत्मसम्मान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि आप अपना ही सम्मान नहीं करेंगे, तो दूसरे भी आपका सम्मान नहीं करेंगे.

  • जब आप ख़ुद का सम्मान करते हैं, तो आपको पता होता है कि कब और कहां ‘ना’ कहना ज़रूरी है.
  • आपको अपनी क़द्र करनी आती है, तो आप हर बात को भावनात्मक तरी़के से नहीं सोचते.
  • कोई आपका फ़ायदा उठा रहा है, यह आप जानते-समझते हैं, लेकिन फिर भी आप चुपचाप सहते हैं, तो इसका अर्थ है आप अपना सम्मान नहीं करते.
  • आत्मसम्मान इसलिए भी ज़रूरी है कि वो आपको परिपक्वता से वो निर्णय लेने की क्षमता देता है, जिसका असर आपके व आपसे जुड़े लोगों पर पड़ता है.
  • आत्मसम्मान आपके रिश्ते को बेहतर बनाता है. ख़ुश रहने के लिए भी यह बहुत ज़रूरी है.
  • जब आप ख़ुद से प्यार करते हो, तो आप तुलना करना बंद कर देते हो. आपको अपने हुनर और अपने काम करने के तरी़के पर विश्‍वास होता है.
  • जब आप अपने निर्णय, अपने संस्कारों पर भरोसा करते हो, तो आप और ज़िम्मेदार बनते हो.

क्या होता है, जब आत्मसम्मान की कमी होती है?

  • जब आप में आत्मसम्मान की कमी होती है, तो आप महज़ डोरमैट बनकर रह जाते हैं यानी लोग आपका इस्तेमाल करके छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि आप बिना शिकायत के उनकी सुविधानुसार उनके लिए उपलब्ध रहोगे.
  • आप रिश्तों में ख़ुद को पूरी तरह भूल जाते हैं. आप रिश्ते में तो बंधते हो, लेकिन उसके बाद आप भूल जाते हो कि आप कौन हो और रिश्ते में आपकी अहमियत क्या है?
  • आप अटेंशन यानी दूसरों के ध्यानाकर्षण के लिए अजीब-सी चीज़ें व हरक़तें करने लगते हैं, चाहे ऑफिस हो या घर, ख़ुद को बेव़कूफ़ बनाते चले जाते हैं.
  • बुरी आदतों व लतों के शिकार होने लगते हो, क्योंकि आप अपने शरीर, अपने स्वास्थ्य व अपनी ज़रूरतों का सम्मान नहीं करते.
  • आप उन लोगों की फ़िक्र करते हो, जिन्हें आपकी परवाह तक नहीं और आप हर बार ख़ुद को समझाते हो कि आप जो कर रहे हो,  वो सही है. जबकि सामनेवाले व्यक्ति को इस बात से कोई लेना-देना तक नहीं होता कि आप उनके लिए क्या और कितना करते हो.
  • आप भावनात्मक, शारीरिक, मानसिक और मौखिक शोषण को बर्दाश्त व स्वीकार करते हो. आप एब्यूसिव पार्टनर को बर्दाश्त करते हो और जो आपको बार-बार बेइज़्ज़त करते हैं, आपका मज़ाक बनाते हैं, उन्हें आप दोस्त बनाए रखते हो.
  • आप कैज़ुअल सेक्स से परहेज़ नहीं करते और इसके पीछे कारण यह होता है कि आप सेक्स को एंजॉय करने के लिए नहीं, बल्कि ख़ुद को यह समझाने व महसूस कराने के लिए करते हो कि आपको भी कोई चाहता है.
  • आप दूसरों के हाथों की कठपुतली बन जाते हो. अपनी ज़िंदगी, अपने निर्णय भी दूसरों के मुताबिक़ लेते हो.
  • ख़ुद पर ध्यान देना छोड़ देते हो. ग्रूमिंग का ख़्याल नहीं रखते. सजना-संवरना बंद कर देते हो.

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Love Yourself

कैसे करें ख़ुद का सम्मान?

  • अपनी सोच, अपने संस्कारों पर विश्‍वास रखें और दूसरों की सुविधा के लिए उन्हें कभी न बदलें.
  • अपने शरीर का सम्मान करें. हेल्दी रहें, हेल्दी खाएं और ख़ुद के सजने-संवरने में भी दिलचस्पी लें.
  • अपनी हॉबीज़ को भी महत्व दें. अपने पैशन को लोगों से शेयर करें.
  • साफ़ कहना सीखें. कम्यूनिकेट करें. अगर आपको किसी का व्यवहार या बात असहज कर रहा है, तो उससे कहें. झिझकें नहीं, क्योंकि यदि लोगों को यह पता होता है कि आपको मैन्युपुलेट किया जा सकता है, तो वो आपका सम्मान न करके आपको यूज़ करने लगते हैं.
  • अपनी ख़ूबियों पर ध्यान दें, वहीं अपनी कमज़ोरियों को भी सहजता व ईमानदारी से स्वीकारें.
  • ख़ुद की कद्र करने के लिए बेहद ज़रूरी है कि आप अपने समय की भी कद्र करें. टाइम मैनेजमेंट सीखें और अपने समय को बेहतर कामों के लिए इस्तेमाल करें.
  • सकारात्मक लोगों के साथ रहें. उनसे कुछ अच्छा सीखने को मिले, तो ज़रूर उन्हें फॉलो करें.
  • इसी तरह बुज़ुर्गों का सम्मान करें और उनकी राय को महत्व दें. उनके अनुभव आपको बहुत कुछ सिखा सकते हैं.
  • नकारात्मक न बनें. हर बात के लिए, हर असफलता के लिए ख़ुद को ही दोषी या ज़िम्मेदार न ठहराएं. यह सोचें कि ग़लती किसी से भी हो सकती है. दोबारा कोशिश करना ही आपको हारने से बचाता है.
  • हां, अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी पीछे न हटें.
  • अपने प्रति अपनी सोच को बदलें. उसे सकारात्मक बनाएं.
  • मेडिटेशन का सहारा लें, यह आपको रिफ्रेश और पॉज़िटिव बनाता है.
  • अपना ध्यान क्रिएटिव कार्यों में लगाएं और निगेटिव लोगों से दूर रहें.
  • आत्मविश्‍वासी बनें. निर्णय लेने से पीछे न हटें और अपने निर्णय पर भरोसा करें. यदि काम न भी बने, तो भी निराशा से बचें. यह सोचें कि कोशिश करना बेहतर होता है, बजाय कोशिश न करने के.

– कमलेश शर्मा

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क्यों मुस्कुराने में भी कंजूसी करते हैं लोग? (Why Don’t Some People Smile)

Smile

क्यों मुस्कुराने में भी कंजूसी करते हैं लोग? (Why Don’t Some People Smile)

ऐसे तमाम लोग (People) हमें रोज़ ही मिल जाते हैं, जो बेवजह ही मुस्कुराकर (Smile) चले जाते हैं और ऐसे भी लोग मिलते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि शायद ये ज़िंदगी में कभी मुस्कुराए ही नहीं. कोई उन्हें घमंडी समझता है, तो कोई ग़मग़ीन… आइए, जानते हैं कि वो ऐसे क्यों हैं?

टेस्टोस्टेरॉन का हाई लेवल: रिसर्च बताते हैं कि जिनका टेस्टोस्टेरॉन स्तर अधिक होता है, वो कम मुस्कुराते हैं. यही वजह है कि महिलाओं के मुक़ाबले पुरुष कम मुस्कुराते हैं.

पावर: कुछ अध्ययन यह बताते हैं कि ख़ास परिस्थितियों में मुस्कुराने का मतलब ख़ुद को कमज़ोर दर्शाना या एक तरह से आत्मसमर्पण की निशानी माना जाता है. जो लोग कम मुस्कुराते हैं, वो ख़ुद को पावरफुल महसूस करते हैं. उन्हें लगता है कि वो हर परिस्थिति का मुक़ाबला कर सकते हैं और उनमें वो शक्ति है.

कम संवेदनशीलता: स्टडीज़ इस बात की ओर भी इशारा करती हैं कि इमोशनल सेंसिटिविटी हंसने और मुस्कुराने से जोड़कर देखी जाती है, कम मुस्कुरानेवाले लोग इतने संवेदनशील नहीं होते यानी वो कम संवेदनशील होते हैं.

संवादहीनता व असहमति: कम मुस्कुरानेवाले दूसरों की बातों और विचारों से कम सहमत होते हैं. मुस्कुराहट को संवाद स्थापित करने का एक अच्छा ज़रिया माना जाता है, ऐसे में कम मुस्कुरानेवाले दूसरों से अधिक बात करना पसंद नहीं करते हैं.

कठोर व दृढ़ नज़र आने की कोशिश: कुछ लोग प्रभावशाली, मज़बूत, कठोर या दृढ़ नज़र आने की कोशिश में कम मुस्कुराते हैं. शायद ये ऐसे लोग होते हैं, जिनकी परवरिश के दौरान मन में यह बात बैठा दी जाती है या परिस्थितियां इन्हें ऐसा महसूस कराती हैं कि मुस्कुराना उन्हें कमज़ोर बना सकता है यानी मुस्कुराहट को वो कमज़ोरी की निशानी मानने लगते हैं.

नाख़ुश: ज़िंदगी से जिन्हें बहुत-सी शिकायतें हैं, जो ख़ुश नहीं हैं, वो चाहकर भी मुस्कुरा नहीं पाते.

रक्षात्मक प्रतिक्रिया: ज़िंदगी के कुछ कड़वे अनुभव और जो लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए होते हैं कभी या फिर बुली का शिकार भी हुए होते हैं, तो वो ख़ुद को बचाने व अधिक आहत होने से बचाने के लिए न मुस्कुराने को एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर लेते हैं.

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लोग गंभीरता से लें: कुछ लोग चाहते हैं कि दूसरे उन्हें अधिक गंभीरता से लें, इसलिए वो कम मुस्कुराते हैं, क्योंकि उनकी यह सोच होती है कि मुस्कुराने से अन्य लोग उन्हें उतनी गंभीरता से नहीं लेंगे या उनकी बातों को उतना महत्व नहीं देंगे, जितना वो चाहते हैं.

परिपक्वता: कम मुस्कुरानेवाले ख़ुद को परिपक्व दिखाने के लिए ऐसा करते हैं. उन्हें लगता है हंसना-मुस्कुराना अपरिपक्वता की निशानी है. उन्हें यह बचकाना लगता है. वे सोचते हैं कि कम मुस्कुराना उन्हें अधिक मैच्योर दिखाएगा और लोग उन्हें अधिक महत्व देंगे.

ख़ूबसूरत नहीं लगते: कुछ लोगों में यह भावना घर कर जाती है कि मुस्कुराते हुए वो अच्छे नहीं लगते या तो उनके दांत ख़राब होते हैं या उन्हें कभी किसी ने कहा होता है कि वो गंभीर अधिक आकर्षक नज़र आते हैं, इसलिए भी वो कम मुस्कुराते हैं.

मुखौटा: कुछ लोग इसे आवरण या मुखौटा बना लेते हैं, जिससे उनकी तकलीफ़ या भावनाएं दूसरों पर ज़ाहिर न हों. कहीं न कहीं वो तकलीफ़ में होते हैं, पर वो शेयर नहीं करना चाहते, इसलिए वो दूसरों से उतना कंफर्टेबल नहीं होना चाहते, जहां लोग उनकी मुस्कुराहट के पीछे दर्द को पहचान सकें. ऐसे में वो गंभीर व ख़ुद को मज़बूत दिखाने के लिए यह मुखौटा ओढ़ लेते हैं.

महत्व कम न हो: कुछ लोगों की यह पक्की धारणा बन जाती है कि बात-बात पर या जब-तब मुस्कुरानेवालों की वैल्यू कम हो जाती है. हर किसी को देखकर मुस्कुरा देने से वो व्यक्ति भी आपकी कद्र नहीं करता, जिसे देखकर आप मुस्कुराते हैं.

ईगो: यह भी एक कारण है, क्योंकि कई बार आपसी रिश्तों या दोस्तों में भी लोग यह सोचते हैं कि एक स्वीट-सी स्माइल से अगर झगड़ा ख़त्म होता है, तो क्या बुराई है, पर वहीं कुछ लोग अपना ईगो सैटिस्फाई करने के लिए यह सोचकर नहीं मुस्कुराते कि भला मैं क्यों झुकूं, ग़लती तो सामनेवाले की थी, मैं क्यों पहल करूं… यदि सामनेवाला पहल करता है, तो भी वो जल्दी से अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते, क्योंकि उन्हें लगता है कि इतनी जल्दी माफ़ करने पर अगली बार आपको वो हल्के में लेंगे और आपका महत्व धीरे-धीरे ख़त्म हो जाएगा.

Sad Face

क्या-क्या और कैसे-कैसे बहाने…

जी हां, कम मुस्कुराने के मनोविज्ञान व मनोवैज्ञानिक कारणों की चर्चा तो हम कर चुके. अब उन बहानों को भी जानते हैं, जो लोग अपने न मुस्कुराने पर बनाते हैं.

क्या मैं पागल हूं: बहुत-से लोग यही कहते हैं कि बेवजह या बात-बात पर मुस्कुराने व हंसनेवाला तो पागल होता है. क्या मैं आपको पागल लगता/लगती हूं, जो हर बात पर या हर किसी को देखकर मुस्कुराऊं?

मूड भी कोई चीज़ है या नहीं: न मुस्कुराने की वजह पूछने पर कुछ लोग यही तर्क देते हैं कि मूड भी कोई चीज़ है, बिना मूड के कोई काम नहीं होता, फिर चाहे वो मुस्कुराना ही क्यों न हो.

झूठी हंसी क्यों भला: हम ज़बर्दस्ती किसी को ख़ुश करने के लिए नहीं मुस्कुरा सकते. झूठी हंसी नहीं आती हमें. यह बहाना भी बहुत लोग बनाते हैं.

कुछ अच्छा तो हो मुस्कुराने के लिए: कुछ लोग इतने नकारात्मक होते हैं कि उन्हें हर बात में, हर चीज़ में, हर इंसान में और हर परिस्थिति में कमियां ही नज़र आती हैं. उनके लिए कुछ भी कभी भी अच्छा नहीं होता, तो भला मुस्कुराना किस बात का.

मैं क्यों अपनी वैल्यू कम करूं: कुछ लोगों को लगता है कि उनकी वैल्यू कम हो जाएगी, लोगों के बीच उन्होंने जो छवि बना रखी है, वो हल्की पड़ जाएगी.

जब मेरा मन होगा, तब हंसूंगा/हंसूंगी: तुम्हारे कहने या दुनिया के चाहने से थोड़ी हंसी आएगी. जब मेरी मर्ज़ी होगी, मन होगा, भीतर से हंसने जैसा महसूस होगा तब हंसूगा.

कोई ज़बर्दस्ती है क्या: नहीं हंसना, तो नहीं हंसना, कोई ज़ोर-ज़बर्दस्ती है क्या कि हर बात पर मुस्कुराया जाए या हर चुटकुले पर हंसा ही जाए.

हम तो ऐसे ही हैं: आपको हम पसंद हों या न हों, पर हम तो ऐसे ही हैं. हमको नहीं आता मुस्कुराना. बात करनी हो, तो करो, वरना आप अपने रास्ते, हम अपने रास्ते.

आपको क्या तकलीफ़ है: हमारे नहीं मुस्कुराने से क्या आपका कोई नुक़सान हो रहा है? नहीं न, तो फिर?

हम किसी के ग़ुलाम नहीं: आपको जब लगेगा कि हमें मुस्कुराना चाहिए, क्या तब हम मुस्कुराएंगे? हम किसी के ग़ुलाम नहीं कि किसी के चाहने पर हंसे या मुस्कुराएं.

आपके पेट में दर्द क्यों है: हमारे कम या नहीं मुस्कुराने से दूसरों के पेट में दर्द क्यों होता है, यह बात आज तक समझ नहीं आई. अगर हमें कोई घमंडी या सिरफिरा समझता है, तो यह हमारी प्रॉब्लम है, इससे आपको क्या लेना-देना भला?

–  गीता शर्मा

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इन 9 आदतोंवाली लड़कियों से दूर भागते हैं लड़के (9 Habits Of Women That Turn Men Off)

आदत तो आदत होती है फिर वो अच्छी हो या बुरी… कुछ न कुछ गुल खिलाती ही है… और जब बात हो लड़कियों की आदत की तो भई वो भी कुछ कम दिलचस्प नहीं है, जिसके कारण लड़के उनसे थोड़ा दूर ही रहना पसंद करते हैं.

Habits That Turn Men Off

अक्सर देखा गया है कि लड़कियों को लड़कों की बहुत-सी आदतें पसंद नहीं आतीं या फिर जो लड़के उन्हें पसंद नहीं होते, उनसे वे दूर रहना ही पसंद करती हैं. इसी तरह लड़कों का भी रवैया होता है. कुछ ऐसी लड़कियां हैं, जिनके क़रीब वे भी नहीं जाना चाहते. वे भरसक कोशिश करते हैं कि उनसे दूर ही रहा जाए, तो अच्छा है. वे ख़ासकर लड़कियों की कुछ आदतों से परेशान रहते हैं या फिर ये कहें कि उन्हें हर लड़की में कोई न कोई कमी ही नज़र आती है. वैसे कुछ ख़ास तरह की लड़कियां होती हैं या फिर लड़कियों की कुछ अदाएं ऐसी हैं, जिन्हें लड़के बिल्कुल पसंद नहीं करते और ऐसी लड़कियों से शादी के नाम पर ही वे दूर भागते हैं. आइए, जानते हैं किस तरह की आदतोंवाली लड़कियों से घबराते व दूर भागते हैं लड़के.

1. रौब दिखाना/एटीट्यूड देना

लड़कों को नखरे दिखानेवाली, बेवजह रौब गांठनेवाली यानी बहुत अधिक एटीट्यूड दिखानेवाली लड़कियां बिल्कुल भी पसंद नहीं आतीं. वे इस तरह की एक्स्ट्रा स्मार्ट लड़कियों से दूर ही भागते हैं.

2. दिखावा पसंद ख़ासकर परिवार का

उन लड़कियों से लड़के बेहद चिढ़ते हैं, जो उन्हें बात-बात पर अपने पैसे, नाम-शौहरत, बड़े परिवार का होने का एहसास कराती हैं. इसमें वे अपने रिश्तेदारों को भी पीछे नहीं छोड़तीं, जैसे- मेरे मामाजी अमेरिका में रहते हैं, मेरे कज़िन का यूरोप में बड़ा बिज़नेस है. वे अक्सर अपने नामी-गिरामी होने का प्रचार-प्रसार करती रहती हैं.

3. चुगली/लगाई-बुझाई करना

वे लड़कियां जो छोटी-छोटी बातों को इधर-उधर करती रहती हैं यानी चुगलखोरी में नंबर वन रहती हैं, ऐसी लड़कियों से तो लड़के दूर ही भागते हैैं, क्योंकि उन्हें बात का बतंगड़ बनाना, बातों को बढ़ा-चढ़ाकर कहना नहीं भाता. वे सोचते हैं कि अब यह हाल है, तो ख़ुदा न खास्ता जीवनसाथी बनने पर न जाने और क्या गुल खिलाएं.

4. सीधी-सरल होना भी आफ़त

कुछ लड़के इसलिए भी कुछ लड़कियों को नहीं पसंद करते कि वो बहुत ही सीधी यानी बहनजी टाइप की होती हैं. अब भला बहनजी टाइप क्या होता है? इन लड़कों को सीधी-सादी लड़की बिल्कुल भी गवारा नहीं. उनका तो यही कहना रहता है कि भला ऐसी लड़की को हम अपना जीवनसाथी कैसे बना सकते हैं.

5. हर व़क्त रोते रहना

कुछ लड़कियां जब-तब अपना रोना लेकर बैठ जाती हैं. उन्हें ख़ुशी हो या ग़म, बस रोने का मौक़ा चाहिए. इस कदर संवेदनशील, ज़रूरत से ज़्यादा भावुक लड़कियों से लड़के किनारा ही करते हैं. एक और ख़ास बात इनमें होती है कि रोने-धोने के अलावा इनके पास शिकायतों का पुलिंदा भी कुछ कम नहीं रहता. इन्हें ज़मानेभर से शिकायत रहती है.

6. मेकअप, ओह नो ओवर मेकअप

कुछ लड़कियां दिनभर में न जाने कितनी बार अपना चेहरा, बाल आदि संवारती रहती हैं. बार-बार मेकअप करती रहती हैं. दिनभर में कई बार लिपस्टिक लगाना तो इन्हें ख़ास पसंद होता है. लड़कों की सोच रहती है कि ऐसी लड़कियां प्यार-मोहब्बत की बातें कम और मेकअप, ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर अधिक बातें करती हैं और शॉपिंग भी कुछ ज़्यादा ही करती हैं, इसलिए वे इनसे दूर रहना ही बेहतर समझते हैं.

7. सेल्फी का हैंगओवर

वे लड़कियां जो अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को कैमरे में ़कैद कर लेना चाहती हैं, ख़ासकर सेल्फी के रूप में, उनसे लड़के थोड़ा दूर ही रहते हैं. उन्हें अक्सर यह लगता है कि हम पार्टनर के साथ नहीं, बल्कि फोटोग्राफी की पूरी दुकान के साथ घूम-फिर रहे हैं, क्योंकि वे उनके साथ जहां-जहां जाते हैं, ये लड़कियां वहां-वहां हर लम्हे को मोबाइल फोन में ़कैद करने की इच्छुक रहती हैं. इन सब से लड़के चिढ़ जाते हैं. उन्हें महसूस होता है कि उनकी कोई पर्सनल लाइफ ही नहीं है.

8. कैसी लग रही हूं मैं…?

लड़कियां ख़ुद अच्छी तरह से जानती हैं कि वे कैसी लग रही हैं, इसके बावजूद कुछ लड़कियों की आदत होती है पूछते रहने की कि मैं कैसी लग रही हूं..? और उनकी

लड़के वर्कोहोलिक लड़कियां यानी हरदम काम में व्यस्त रहनेवाली लड़कियों से दूर ही भागते हैं. उनका यह सोचना रहता है कि ऐसी लड़कियां रिश्तों के साथ कम ही न्याय कर पाएंगी, क्योंकि उन्हें रिश्ते से अधिक अपने ऑफिस, नौकरी और बॉस से प्यार रहता है. उनका यही रवैया उन्हें लड़कों से दूर करता चला जाता है.

– ऊषा गुप्ता

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सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र (10 Tips To Stay Happy)

Happy

सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र

आज की लाइफस्टाइल में खुश रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं, पर इन टिप्स को आज़माकर आप भी रह सकते हैं खुश और पॉज़िटिव

1 आप हैं तो सबकुछ है, इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखें.

2 अगर आप ख़ुश हैं, तो आप दूसरों को भी ख़ुश रखते हैं. इसलिए अपनी ख़ुशियों को प्राथमिकता दें.

3 यदि आपको किसी से कुछ कहना है, तो कह दीजिए, क्योंकि कह देने से मन हल्का हो जाता है. यदि आप मन की बात कह नहीं सकते, तो उसे काग़ज़ पर लिख दीजिए, ऐसा करने से भी आप हल्का महसूस करेंगे.

4 रिश्ते अनमोल होते हैं, इसलिए अपने रिश्तों की क़द्र करें और उन्हें पर्याप्त समय दें.

5 दोस्तों के साथ हम सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते हैं, इसलिए दोस्तों के साथ समय गुज़ारें.

6 किसी भी मनमुटाव को मन में रखने से मन भारी हो जाता है और तनाव बढ़ जाता है, ख़ुश रहने के लिए माफ़ करना सीखें.

7 आपकी उम्र चाहे जो होे, अपने भीतर के बच्चे को कभी बड़ा न होने दें. उसे शरारतें करने दें, तभी आप ज़िंदगी की असली ख़ुशी महसूस कर सकेंगे.

8 आप चाहे कितने ही बिज़ी क्यों न हों, अपने शौक़ के लिए समय ज़रूर निकालें. इससे आपको कभी बोरियत नहीं महसूस होगी और आप ज़िंदगी से हमेशा प्यार करेंगे.

9 ख़ुशी पाने से कहीं ज़्यादा ख़ुशी देने से संतुष्टि मिलती है, इसलिए जीवन में ऐसे काम ज़रूर करें जिनसे आप दूसरों के चेहरे पर ख़ुशी बिखेर सकें.

10 स्वस्थ और फिट रहें, क्योंकि बीमार शरीर कभी ख़ुश नहीं  रह सकता.

– वंशज विनय

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