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पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत रिश्ता (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Rishta)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत रिश्ता (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Rishta)

रात के अंधेरे में शून्य में ताकती निगाहें… रेलगाड़ी के पहियों की आवाज़ें… जाने क्यों आज मिलकर स्मृतियों में दबी पड़ी हुई परतों को उधेड़कर चलचित्र की भांति चलने लगी थी और विक्रम का मन अपने अतीत को लेकर सोचने लगा… इस दुनिया में कोई ऐसा भी था, जो उसके दर्द को हमेशा उससे पहले ही महसूस कर लेता था. दुनिया में विक्रम ने स़िर्फ उसे ही चाहा और उसके सिवा उसने किसी और की तरफ़ मुड़कर भी नहीं देखा. श्रुति नाम था उसका. दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत रिश्ता दोस्ती का होता है और उनका आपस में ऐसा ही रिश्ता था और यह दोस्ती की मिठास में डूबा हुआ था. उनकी वफ़ाएं हमेशा एक-दूसरे के साथ थीं.

श्रुति के साथ कॉलेज में विक्रम का यह तीसरा वर्ष था. हर वर्ष की तरह इस साल भी उनके कॉलेज में वार्षिक समारोह का बड़ा शानदार आयोजन किया जा रहा था, जिसमें उन दोनों को भी भाग लेना था. लेकिन इस बार एक हास्य नाटक में दोनों को 60-65 वर्ष के उम्र के फूफा-फूफी का क़िरदार निभाना था, जिसे करने के लिए कॉलेज में कोई और तैयार नहीं था.

यही वजह थी कि दोनों को अपनी सबसे प्रिय क्लास टीचर सुश्री लता मायकेल के विशेष अनुरोध पर यह रोल करना पड़ा. नाटक के समय दोनों ने अपने रोल्स को इस तरह जीवंत कर दिया था कि पूरे कॉलेज में उनकी चर्चा होने लगी. फिर जब उनकी क्लास के छात्र-छात्राएं श्रुति को ‘फूफी’ कहकर पुकारने लगे, तो इससे नाराज़ होकर श्रुति ने टीचर से इसकी शिकायत कर दी. टीचर ने क्लास के सभी स्टूडेंट्स की परेड ली और सबको आदेश दिया कि जो भी श्रुति को ‘फूफी’ कहते हैं, अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. इस पर विक्रम को छोड़कर सभी खड़े हो गए.

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टीचर ने पूछा, “विक्रम, तुम श्रुति को ‘फूफी’ कहकर नहीं चिढ़ाते, क्यों?” तब विक्रम ने जवाब दिया, “क्योंकि मैं ‘फूफा’ बना था.” इस पर पूरी क्लास ठहाका लगाकर हंस पड़ी. पूरा रूम ठहाकों से गूंज रहा था और अचानक श्रुति का गुलाबी चेहरा मारे शर्म के लाल होता चला गया… और फिर श्रुति की हालत देख विक्रम मन ही मन शर्मिंदा हुआ. वो अपनी प्रिय दोस्त का सम्मान भी करता था. दोनों में कभी भी किसी भी बात को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था. एक-दूसरे पर उनका अटूट विश्‍वास था.

उन दोनों के परिवार भी मध्यमवर्गीय थे… आज दोपहर में विक्रम की मां ने उसे फोन पर बताया था कि श्रुति के घरवाले श्रुति का रिश्ता लेकर कल उनके घर आनेवाले हैं. अर्थात् उनकी यह दोस्ती अब प्यार व शादी में बदलनेवाली है. इससे पहले विक्रम ने कभी सोचा ही कहां था कि वह श्रुति ही होगी, जो एक दिन उसकी जीवनसंगिनी बनेगी.

अचानक रेलगाड़ी के ब्रेक लगने से उसकी तंद्रा भंग हुई… उसका शहर आ गया था…

शायद प्यार का फूल तो कहीं पनप चुका था… जिसे दोनों दोस्ती की गहरी भावना के बीच महसूस नहीं कर पाए थे, लेकिन दूसरों ने उन्हें इसका एहसास दिला दिया था… उनके पहले प्यार को मंज़िल मिल रही थी, इससे ख़ूबसूरत रिश्ता और क्या हो सकता था.

– प्रांशु राजवानी

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पहला अफेयर: यादों की परछाइयां… (Pahla Affair: Yaadon Ki Parchhaiyan)

 

पहला अफेयर: यादों की परछाइयां… (Pahla Affair: Yaadon Ki Parchhaiyan)

जहाज़ ने अपनी चाल पकड़ ली है. बस, मेरी यादों की चाल ढीली पड़ गई है. कभी-कभी तन्हाई जीवन को उलट-पलट कर देखने के अवसर देती है- उसकी कुनीन-सी कड़वी बातों ने उसे दोबारा पाने के मेरे दंभ को चकनाचूर कर दिया है. मैं अपने जीवन को तराज़ू में तोलने लगी हूं- एक पलड़ा उसे पाने की चाह में ज़मीन छू रहा है और उसके दंभ का पलड़ा हवा से बातें कर रहा है… उसने तो मुझे अपनी ग़लती को जानने का मौक़ा तक नहीं दिया.

बेटी के बार-बार आग्रह पर पहली बार मैं अमेरिका जा रही हूं. क्या देखती हूं कि सामने से हाथ में छोटा सूटकेस पकड़े उसी अकड़ू चाल से आदी चला आ रहा है. मुझे ज़ोर का झटका लगा. ख़ैर, मैं उसे अनदेखा कर सामने फॉर्मैलिटीज़ पूरी करते अपने मामाजी की तरफ़ मुड़ने को हुई, तभी आगे बढ़कर आदी ने कहा- अरे सुरभि, तुम यहां कहां? मेरा संक्षिप्त उत्तर था- बेटी के पास जा रही हूं. और… जाना कि वो अपनी कंपनी की तरफ़ से शिकागो जा रहा है.

न जाने कितने सालों के पत्थर सरकते रहे हैं सीने से. सुना था उसका विवाह किसी अमीर बाप की इकलौती बेटी से हुआ है. नतीजा, उसके लालची पिता को ख़ूब दान-दहेज से लादा गया होगा. प्लेन में हमारी सीटें नज़दीक थीं. वह जानकर अचरज हुआ कि दो वर्ष के अंदर ही उसका माधवी से विवाह-विच्छेद हो गया.

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मैं टीचिंग लाइन में आ गई थी. साहित्य में एमए करने के बाद मैंने पब्लिक स्कूल में वाइस प्रिंसिपल का पद संभाला. माता-पिता के अति आग्रह के बाद विवाह बंधन में भी बंधी.

मुझे लगा शायद हम ऑक्टोपस की तरह अष्ट पद वाले ऐसे प्राणी हैं, जो समाज के कई कालों में जीने की मजबूरी झेलते हैं. और जब हार्दिक पीड़ा शब्दों में ढलनी दुष्कर हो जाती है, तो शायद ऐसी आग का सृजन होता है, जो आस-पास का सब कुछ तहस-नहस कर देती है. उसके तलाक़ का कारण जानना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता. उसकी बातों में मुझे ठुकराने के पश्‍चाताप का लहज़ा-सा ज़ाहिर था.

आज मेरे मन में कई उद्गार पानी के बुलबुले की तरह उठ-गिर रहे हैं. फिर भी मैं जानना चाहती थी कि मैंने तुमसे तुम्हारी हंसी तो न मांगी थी? अनजाने ही संगिनी बनने का सुख मांग बैठी. और आज है सामने रेतीला मैदान और तेरी यादों की परछाइयां और… तुम्हारे झूठे दंभ के कारण बहुत कुछ झेला है मैंने. मन सागर में आए तूफ़ान की हुंकार सुनी है मैंने.

यूं तो ज़माना ख़रीद सका न हमें… तेरे प्यार के लफ़्ज़ों पर बिकते चले गए हम…

फ्लाइट के लैंड करते ही आदी न जाने कहां गायब हो गया. मुझे कुछ कहने तक का मौक़ा नहीं दिया. यूं भी अब खोखली यादों के सिवा क्या था मेरे पास. ये मेरी यादें परछाइयां बन आज भी डोल रही हैं मेरे संग.

रात होते ही अतीत की यादें मुझे पीछे धकेल ले गईं. सुना है स्मृतियों को कहीं भी उखाड़ कर फेंक दो, कैक्टस के कंटीले झाड़ की तरह फिर से उगने की उद्दंडता कर बैठती है. ऐसे ही एक शाम हम बगीचे में बैठे थे, तभी पेड़ से एक पक्षी मुंह में एक कीड़ा लेकर दूर आसमान में उड़ चला. हम ध्यान से उसे देखते रहे- आदी के एक मनचले दोस्त ने एक शेर कह डाला था… न रख उम्मीद किसी परिंदे से इकबाल… जब निकल आते पर अपना आशियां भूल जाते हैं… आज उस शेर का एक-एक मिसरा मुंह चिढ़ा रहा है. मेरे सीने में नश्तर चुभो रहा है… मुझे माज़ी की अधकचरी यादों में, पीछे धकेल रहा है.

– मीरा हिंगोरानी

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एक्सक्लूसिव डिज़ाइन्स- स्टार अट्रैक्शन (Exclusive Designs- Star attraction)

फाइव स्टार (Exclusive Designs)
सामग्रीः 100-100 ग्राम ऑरेंज, आसमानी, पेस्टल ग्रीन, ब्राउन और पिंक रंग का ऊन, क्रोशिया.
विधिः पूरे स्वेटर में एक जैसी बुनाई पड़ेगी. 17 इंच चौड़ा रखने के लिए पेस्टल ग्रीन रंग से चेन बुनें. 2 बार सादी चेन बनाने के बाद चित्रानुसार रंग लगाते हुए कंगूरे बनाते जाएं. 16 इंच लंबाई हो जाने के बाद आगे के भाग में बीचोंबीच बटनपट्टी बना दें. 19 इंच बाद गोल गला घटाएं. पीछे का भाग भी ऐसे ही बुन लें. कंधे जोड़ें. गले पर बॉर्डर बनाएं. इसी तरह 17 इंच लंबी आस्तीन भी बुन लें. किनारे पर कंगूरा बढ़ाते जाएं. स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.

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परफेक्ट कॉम्बिनेशन
सामग्रीः 400 ग्राम हल्के हरे रंग का ऊन, 50 ग्राम पिंक, 25 ग्राम पीला ऊन, सलाइयां, क्रोशिया.
विधिः आगे का भागः गुलाबी रंग से 110 फं. डालकर हरा, पीला, हरा, गुलाबी, हरा, पीला, हरा, गुलाबी रंग से उल्टी धारियों का बॉर्डर बुनें. अब हरे रंग से सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई करें. चित्रानुसार पिंक व पीले से दिल व बूटी डालते जाएं. बीच में बुनाई डालें- 2 फं. सी., 1 उ. बुनें, उ. फं. को दूसरी सलाई पर लेकर ऊन को आगे से पीछे ले जाएं, फिर 1 सी. फं. बुनें, 2 सी. बुनें. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. ये बुनाई चेक में डाल लें. इसी तरह बुनते हुए 16 इंच लंबा बुनें. मुड्ढे घटाएं. बटनपट्टी के 6 फं. रखें. गोल गला घटाएं.
पीछे का भागः 110 फं. डालकर आगे की तरह सभी रंगों से बॉर्डर बुनें. पूरा भाग हरे रंग से सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में बुनें. आप चाहें तो चेकवाली डिज़ाइन डालते हुए बुन सकते हैं. लंबाई पूरी हो जाने पर मुड्ढे घटाएं. कंधे जोड़ें. गले के फं. उठाकर हरे रंग की 1-1 धारी बुन लें.
आस्तीनः 50-50 फं. डालकर बॉर्डर बुनें. पीछे के भाग की तरह बुनाई डालकर 20 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 5वीं सलाई में 1-1 फं. किनारे पर बढ़ाते जाएं.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें. नीचे पिंक रंग से क्रोशिया करें.

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प्ले विद कलर्स
सामग्रीः 150-150 ग्राम क्रीम और बैंगनी रंग का ऊन, 100-100 ग्राम आसमानी, ब्राउन और डार्क मेहंदी ग्रीन ऊन, सलाइयां.
विधिः आगे के भागः दाएं-बाएं भाग के लिए क्रीम रंग से 64-64 फं. डालकर 2 फं. सी., 2 उ. की रिब बुनाई में 3 इंच का बॉर्डर बुनें. अब बैंगनी रंग से 3 सी. फं. को एक साथ 1 सी., 1 उ., 1 सी. बुनें. 1 फं. उ. बुनें. 3 सी. फं. बुनें. पूरी सलाई ऐसे ही बुनें. उल्टी सलाई उल्टी बुनें. 3 इंच बुनने के बाद ग्राफ की सहायता से ब्राउन और मेहंदी ग्रीन रंग से बेल, लाइनिंग व बूटी डालें. आसमानी पर क्रीम से दूसरी बेल डालें. 20 इंच लंबाई हो जाने पर मुड्ढे और गला घटाएं.
पीछे का भागः 110 फं. डालकर आगे के भाग की तरह बुनें. कंधे जोड़कर आगे की बटनपट्टी को ही पीछे गले के बराबर दोनों तरफ़ से बुन लें.
आस्तीनः 50-50 फं. डालकर आगे-पीछे के भाग की तरह बुनाई करते हुए 20 इंच लंबी आस्तीन बुन लें. स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.