Baby Care

माता-पिता द्वारा अपने नवजात शिशु को प्‍यार व स्‍नेहभरा स्‍पर्श किए जाने के साथ ही उनके रिश्‍ते का पहला बंधन बंधता है. शिशुओं के रोज़ाना ख़्याल रखने की बात हो या फिर उनकी कोमल त्‍वचा की देखभाल, उन्‍हें विशेष रूप से अतिरिक्‍त देखभाल एवं सुरक्षा की आवश्‍यकता होती है. वयस्‍क की तुलना में शिशु की त्‍वचा लगभग 20-30% कम पतली होती है और इसमें जलन या खुजली पैदा होने का अधिक ख़तरा होता है, इसलिए उनकी त्‍वचा की उचित देखभाल अत्‍यावश्‍यक है. क्‍योंकि शिशु के स्‍वस्‍थ विकास में हेल्दी स्किन का महत्‍वपूर्ण योगदान होता है.
इस नवजात शिशु देखभाल सप्‍ताह के अवसर पर, जॉन्‍सन एंड जॉन्‍सन कंज्‍यूमर हेल्‍थ इंडिया की जनरल मैनेजर डॉ. प्रीति ठाकोर ने सर्वोत्‍तम ढंग से त्‍वचा की देखभाल के तरीक़ों के बारे में बताया, जो नवजात शिशु के संपूर्ण विकास में सहायक हो सकते हैं.

स्‍पर्श का प्रभाव
कहा जाता है कि नवजात शिशु सबसे पहले जिस भाषा को समझता है, वो होती है स्‍पर्श की भाषा. यह संवाद का प्रभावशाली तरीक़ा भी है. शुरू-शुरू में त्‍वचा से लगातार स्‍पर्श, बच्‍चे के संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य में सहायक होता है. विशेष तौर पर जन्‍म के तुरंत बाद अधिक समय तक त्‍वचा से त्‍वचा के संपर्क से शिशु को स्‍तनपान शुरू करने में मदद मिलती है. अध्‍ययनों से पता चला है कि नियमित स्‍पर्श से शिशु के शारीरिक, भावनात्‍मक एवं सामाजिक विकास को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

मालिश है ज़रूरी
शिशु के साथ अपने रिश्‍ते को मज़बूत बनाने का शानदार तरीक़ा है मालिश. शिशु के नियमित मसाज से स्‍वस्‍थ विकास में सहायता मिलती है. यह पैरेंट्स और शिशु के संबंध को मज़बूत बनाने का बेहतरीन ज़रिया भी है.

मसाज टिप्स

  • मालिश हल्‍के-हल्‍के और प्‍यार से सहलाकर करें और ध्यान रहे कि पूरे शरीर का मसाज हो.
  • आपको मालिश के लिए ऐसे तेल का चुनाव करना चाहिए, जिसकी सौम्‍यता चिकित्‍सकीय दृष्टि से प्रमाणित हो और जो नवजात शिशु की त्‍वचा के लिए उपयुक्‍त हो.
  • यह ऐसी होनी चाहिए जिसे त्‍वचा जल्द सोख ले.
  • जिसमें त्‍वचा को नम व कोमल बनानेवाले तत्‍व मौजूद हों.
  • प्राकृतिक तेलों के उपयोग को नवजात शिशु की त्‍वचा की देखभाल के लिए उत्‍तम माना जाता है.
  • वनस्‍पति तेल, नारियल तेल और कपास के बीज से निकाले गए अर्कयुक्‍त तेल का इस्तेमाल बेहतर है, क्‍योंकि इसमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में होते हैं. यह शिशु की नर्म-मुलायम त्‍वचा के लिए लाभदायक भी होता है.

आनंदायक तरीक़े से स्नान कराएं
ऐसा माना जाता है कि स्नान का समय अपने शिशु के साथ जुड़ाव पैदा करने के लिहाज से सबसे उपयुक्‍त समय होता है. रिसर्च से पता चला है कि बच्‍चे के मस्तिष्‍क के विकास को आकार देने में विभिन्‍न इन्द्रियों से जुड़े अनुभव महत्‍वपूर्ण होते हैं. स्नान के समय शिशु को रूप, रस, गंध, स्‍पर्श एवं ध्‍वनि का बोध एक साथ मिलता है. नवजात शिशु के साथ प्यारभरी बातें करते और हंसते-खेलते हुए इस प्रक्रिया को मज़ेदार बनाएं. .
बच्‍चे की कोमल त्‍वचा की सुरक्षा के लिहाज से उन्‍हें नहलाने के लिए सही उत्‍पादों का चुनाव महत्‍वपूर्ण होता है.
इसलिए, उन्‍हें नहलाने के लिए माइल्ड सोप-शैंपू का इस्तेमाल करें.
जो हल्‍का हो, जिससे त्‍वचा में जरा भी जलन न हो. साथ ही ध्यान रहे कि यह चिकित्‍सकीय रूप से भी प्रामाणिक तौर पर सौम्‍य हो.
यह हाइपोएलर्जेनिक तत्‍वों से तैयार किया गया हो, तो अच्छा है.

डायपर
नवजात शिशु की त्वचा को बाहरी दुनिया के अनुरूप ढलने में समय लगता है. इसी कारण अक्सर उन्हें त्‍वचा संबंधी सामान्‍य समस्याएं होती रहती हैं, जैसे- फुंसी, त्‍वचा पर दाने, डायपर रैश आदि. शिशु की त्‍वचा की देखभाल के लिए सही चीज़ों का चुनाव इसमें कारगर साबित होता है. उदाहरण के लिए शिशु को पर्याप्‍त डायपर्स ब्रेक देकर डायपर रैश से बचाया जा सकता है. यदि शिशु अधिक समय तक गिला डायपर ही पहना रहे, तो उससे रैशेज हो जाएंगे. इस कारण उन्हें परेशानी होने लगती है.
डायपर पहनाई जानेवाली जगह साफ़ और सूखी हुई होनी चाहिए. इसके लिए त्‍वचा को रगड़ने की बजाय उसे सहलाकर सूखा लें. आप इसके लिए बेबी वाइप्‍स या नरम कपड़े के साथ पानी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं.

त्‍वचा को नम बनाए रखें
शिशु की त्‍वचा को बराबर नम यानी माॅइश्चराइज़ रखा जाना महत्‍वपूर्ण है. सामान्‍य तौर पर नवजात शिशुओं में स्किन पीलिंग एवं ड्राई स्किन जैसी समस्‍याएं देखने को मिलती हैं, इसलिए शिशु की त्वचा को नम बनाए रखना ज़रूरी है. इसके लिए ऐसे क्रीम का उपयोग करें, जो विशेष तौर पर नवजात शिशु की संवेदनशील त्‍वचा को ध्यान में रखकर बनाई गई हो. जो चिपचिपी न हो. आप शिशु के शरीर पर ऐसे लोशन का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं, जिनका पीएच नवजात शिशु के लिए संतुलित हो और जो त्‍वचा को तुरंत नमी प्रदान करे. साथ ही चौबीस घंटे तक त्‍वचा नम बनी रहे. सबसे अच्‍छा तो यही है कि शिशु को नहलाने के तुरंत बाद लोशन या क्रीम लगाएं. वैसे इसे किसी भी समय में लगाया जा सकता है.

ऊषा गुप्ता

Baby Care Tips

यह भी पढ़ें: Parenting Tips: कैसे छुड़ाएं अपने बच्चे की गंदी और बुरी आदतें? (How To Break Your Child’s Bad Habits?)

हर मां अपने बच्चे के देखभाल को लेकर चिंतित रहती है, ख़ासकर नई मांएं. यहां पर कई मांओं ने इसे लेकर अपने अनुभव साझा किए. यदि आप अपने मातृत्व के सफ़र को एंजॉय करेंगी, तब सब कुछ आसान होता चला जाएगा.

मौज से जीवन बिताएं. हर पल का आनंद उठाएं. क्योंकि आपका शिशु बहुत जल्द बढ़ता हैं और इससे पहले कि आप जाने, वह उड़ने के लिए तैयार हो जाता हैं. न्यूली मदर के लिए हर स्नान, हर मालिश, हर डायपर बदलने का काम बहुत ही महत्वपूर्ण और आनंददायक है, इसलिए इसे मिस न करें.
यह नम्रता दीपक सावधानी, जो सिटी एडिटर हैं का कहना है. उनके लिए मातृत्व अनगिनत अमिट यादों से भरी सबसे मधुर यात्रा रही है. वे कहती हैं, “यह एक शानदार अनुभव है और यह बात सिर्फ़ मैं अपने लिए नहीं, बल्कि सभी मांओं के लिए बोल रही हूं. मेरे बच्चे के जन्म से लेकर अब तक, जैसे मेरे बच्चे बड़े हुए, विकसित होते गए, उनके साथ मैं भी एक व्यक्ति के रूप में विकसित होती चली गई…
मैं दो बच्चों की मां हूं. इतने वर्षों में एक मां होने के नाते मैंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि मेरे बच्चों को छोटी-छोटी परेशानियों का भी सामना न करना पडें. कोरोनो वायरस महामारी के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान भी मेरी सीखने की यात्रा जारी है. जीवन का यह नया चरण कुछ ऐसा है, जिसके लिए हम में से कोई भी तैयार नहीं था. हमें इसमें एडजस्ट करने में कुछ समय लगा. लेकिन मेरे बच्चों ने मौजूदा हालत में ख़ुद को अच्छी तरह से ढाल लिया है. हमारी सभी बाहरी गतिविधियों को इनडोर प्लेटाइम में बदलना पड़ा. यह पहले तो चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमने एक अटूट बंधन भी विकसित किया और हमारे घर के हर कोनों को पहले से बेहतर बना लिया.
मुझे अब भी उनके बचपन के दिन याद हैं. मैं सभी माताओं को प्रोत्साहित करना चाहती हूं, विशेषकर उन्हें, जो इस लॉकडाउन में पहली बार मां बनी हैं.
उन्हें अपने शिशु की देखभाल करने के लिए खुद में विश्वास बढ़ाना होगा.
नई-नई मां बनी स्त्रियों को यह जानने की ज़रूरत है कि शिशु के कोमल त्वचा को बहुत ही नाज़ुक देखभाल की ज़रूरत होती है. इसलिए, उनके बेबी स्किन केयर उत्पादों का सही विकल्प चुनना महत्वपूर्ण है. विशेष रूप से बदलते मौसम में सही निर्णय आपकी कई चिंताओं को कम कर सकता है.
एक व्यस्क की त्वचा की तुलना में एक बच्चे की त्वचा बेहद नाज़ुक और संवेदनशील होती है और तेजी से नमी खो देती है. इसलिए सूखापन से बचाने के लिए मॉइश्चराइजिंग बहुत महत्वपूर्ण है.
साथ ही अभी माॅनसून के मौसम में, बच्चे की त्वचा को हाइड्रेट रखना महत्वपूर्ण है. अपने शिशुओं के लिए मुझे सही मॉइश्चराइज़र खोजने में कुछ समय लगा. मैं हमेशा उनकी नाजुक त्वचा के लिए एक जेंटल लोशन का उपयोग करना चाहती थी. मेरे शोध ने मुझे जॉनसन के बेबी लोशन तक पहुंचाया और इसने उनकी त्वचा पर अद्भुत काम किया. यह बच्चे के लिए सबसे अच्छा है और धीरे-धीरे त्वचा को पूरे दिन नर्म-मुलायम रखता है और इसे शिशु के चेहरे और शरीर पर उपयोग करने के लिए इसे काफ़ी हल्के ढंग से इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, यह एक ऑल-सीजन मॉइश्चराइज़र है, जो प्राकृतिक त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करता है.

यह भी पढ़ें: बच्चों के सर्वांगीण विकास में ब्रेस्टफीडिंग की महत्वपूर्ण भूमिका (The Benefits Of Breastfeeding For Both Mother And Baby)

बेबी के नाज़ुक बालों को भी विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है. इसके लिए अच्छी क्वालिटी का बेबी शैम्पू का इस्तेमाल करें. यह बच्चे के सिर की कोमल त्वचा और बालों को साफ़ करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आंखों को कोई लालिमा और चुभन न हो. इसने न केवल उनके बाल मुलायम, चमकदार बनते है, बल्कि एक नई ख़ुशबू भी बनी रहती है. बच्चों के लिए उच्च श्रेणी वाली कंपनी के प्रोड्क्ट इस्तेमाल करने से आपकी मदर जर्नी आसान और मज़ेदार हो जाती है.
मॉमजंक्शन की कंटेंट हेड, चंद्रमा देशमुख के अनुसार, मां बनना एक पूर्णकालिक और सबसे अधिक संतुष्टिदायक नौकरी है. मुझे याद है, जब मेरा बेटा एक छोटा था, इस ख़ूबसूरत यात्रा के हर पल ने मुझे ज़िन्दगी की सीख दी. क्योंकि जिस समय आप अपने हाथों में ख़ुशी के उस छोटे खज़ाने को लेते हैं, उसी वक़्त एक मां के रूप में आपका पुनर्जन्म भी होता है.
उनकी मासूम हंसी अनमोल हैं, उनकी मौजूदगी गर्मजोशी से भरी है. आनंद की आपकी छोटी-सी पोटली कोमल होती है, जिसे एक कोमल स्पर्श की आवश्यकता होती है.
ये शब्द ही सभी मांओं के लिए मेरे दिल से निकले सन्देश हैं. नई-नई मां बनी वर्तमान लॉकडाउन स्थिति में भ्रम और चिंता की स्थिति में होंगी. उन्हें सबसे पहले तो मानसिक तौर पर तैयार होने और शांत रहने की ज़रूरत हैं, ताकि वे इस समय अपने बच्चों की देखभाल ठीक से कर सके. अभी तो हालत यह है कि छोटी समस्याओं के लिए अस्पताल जाना भी मुश्किल है. बदलते मौसम के लिए अपनी शिशु देखभाल दिनचर्या को बदलना मददगार हो सकता है.

चूंकि माॅनसून का मौसम है, इसलिए रोज़ाना बच्चे को नहलाना ज़रूरी नहीं है. आप उन्हें हर दूसरे दिन स्नान करा सकती हैं. बस, यह सुनिश्चित करें कि पानी गर्म है और आप अपने बच्चे के साथ बातचीत करते हुए उन्हें नहलाएं. इस दौरान शिशु से बातचीत करती रहें, क्योंकि यह आपके बच्चे को पूरी प्रक्रिया के साथ सहज महसूस करने में मदद कर सकता है. मैं अपने बच्चे के जन्म के दिन से ही बेबी सोप का इस्तेमाल कर रही हूं. यह अल्ट्रा-माइल्ड वॉश होता है, जो आपके बच्चे की त्वचा और संवेदनशील आंखों के लिए कोमल होता है. यदि बच्चा एक नवजात शिशु है, तो एक कॉटन बॉल (रूई) या वॉशक्लॉथ के साथ इस हल्के क्लीन्ज़र का उपयोग करके बच्चे को पोंछ सकती है, चेहरे पर, आंखों के कोने, कान के पीछे, गर्दन आदि को साफ़ कर सकती है. उसके बाद धीरे से गुनगुना पानी डालें. इन साधारण उपायों का पालन करके आप अपने बच्चे को बेहतर तरीके से क्लीन कर सकती हैं. बच्चे को नहलाना जल्द ही बच्चे के साथ जुड़ने और बंधने के लिए एक मज़ेदार काम में बदल जाएगा.
शिशुओं में मां के स्पर्श को लेकर तेज इमोशन होती है. यह न केवल उन्हें आराम देता है, बल्कि उन्हें आरामदायक और सुरक्षित महसूस कराता है. अपने बच्चे को एक प्यारभरे स्नान के बाद सोने के लिए न केवल उन्हें शांत करना होगा, बल्कि आपको आराम की भावना भी देगा.
याद रखें, शिशु-दिनचर्या मौज-मस्ती, हंसी-ठिठोली में बदल सकती है, अगर आप ख़ुद को इस समय का आनंद लेने दें. मानें या न मानें, आपका शिशु भी इसे समझता है. मेरी मातृत्व यात्रा के दौरान जॉनसन बेबी हमेशा एक कूल केयर की तरह मेरे साथ रहा. आज भी, जब मैं बेबी सोप देखती हूं, तो यह मुझे नॉस्टैल्जिया से भर देता है और मुझे याद दिलाता है कि मैं कितनी खुशहाली भरी यात्रा करके आई हूं.
आपके बच्चे के स्वास्थ्य के विकास और बच्चे के साथ अपने बंधन को मज़बूत करने के लिए मालिश एक और महत्वपूर्ण काम है. धीरे-धीरे बच्चे की मालिश करने से आपके बच्चे के विकास, संचार और सीखने की प्रक्रिया तेज़ होती है. उसका समग्र विकास सुनिश्चित होता है. मैंने अपनी मम्मी से एक टिप सीखी थी बच्चे की मालिश करते समय, उचित रूप से तैयार किए गए तेल की थोड़ी मात्रा का उपयोग करना आदर्श है. मालिश हमेशा ऊपर की ओर हाथ ले जाकर करना चाहिए. इस काम के लिए मेरी पसंद हमेशा जॉनसन बेबी ऑयल रहा है और मैं इसे सभी को अपने बच्चे के लिए इस्तेमाल करने की सलाह देती हूं. एक और टिप यह सुनिश्चित करने के लिए है कि मालिश करने वाले कमरे का तापमान गर्म हो ताकि आपका शिशु ठंड से बच सके. इसके अलावा, मालिश के लिए अधिक तेल का उपयोग नहीं करना चाहिए, ख़ासकर अगर आपके बच्चे की त्वचा में जलन हो या उसमें चकत्ते हों.

– ऊषा गुप्ता

Baby Care Tips

यह भी पढ़ें: पहले चलना सिखाया, अब रास्ता दिखाएगी… सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन की ‘इंडिया वाली मां’ (Pehle Chalna Sikhaya Tha, Ab Rasta Dikhayegi… Sony Entertainment Television’s ‘Indiawaali Maa’)

स्तनपान शिशु के पोषण और विकास की आधारशिला है. नेशनल ब्रेस्टफीडिंग मंथ (राष्ट्रीय स्तनपान माह) जो अगस्त में रहता है, इसमें स्तनपान के अद्भुत लाभों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता के तमाम कार्यक्रम होते हैं. हालांकि मौजूदा कोविड-19 के बीच स्तनपान को लेकर चिंता जताई गई है. कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल की स्त्री रोग और प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा पवार ने स्तनपान और मां और बच्चे के संपर्क के महत्व पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं.

नई मांओं के लिए उपयोगी सुझाव
• नई मांएं , जिन्हें कोविड-19 संक्रमण का सन्देह है या पॉज़िटिव पाई गई हैं, के बीच स्तनपान कराने और न कराने को लेकर काफ़ी संशय की स्थिति रहती है. हालांकि डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश अनुसार, नई मांताएं पहले दिन से ही शिशुओं को स्तनपान करा सकती हैं.

  • प्रसव के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना शुरू कर देना चाहिए और प्रसव के बाद छह महीने तक स्तनपान जारी रखना चाहिए.
    • मांओं को अनिवार्य रूप से हाथ की स्वच्छता (हैंड हाइजीन) का पूरा घ्यान रखना चाहिए. बच्चे को संभालने से पहले और बाद में, उन्हें काम कम-से-कम 40 सेकंड के लिए अपने हाथ धोने चाहिए.
  • स्तनपान कराने के दौरान मास्क पहनना चाहिए.
    • वैसे शिशुओं को कोविड-19 संक्रमण का जोखिम बहुत कम होता. स्तनपान से जुड़े लाभों की ताक़त इस जोखिम को और कम कर देती हैं, क्योंकि मां का दूध शिशुओं के पोषण का सबसे अच्छा स्रोत है और प्रतिरक्षा निर्माण में मदद करता है.
  • यहां तक कि अगर शिशु/बच्चे को कोविड-19 संक्रमण का संदेह या इसके लक्षण विकसित होते हैं, तो भी माताओं को स्तनपान कराना जारी रखना चाहिए.
    • मां और बच्चे को भीड़भाड़वाली जगहों से बचना चाहिए और केवल डॉक्टर के पास जाने के लिए ही बाहर निकलना चाहिए.
  • मां को पर्याप्त आराम मिले और अन्य संक्रमणों के संपर्क से बचाव सुनिश्चित करने के लिए बच्चे के साथ केवल एक देखभाल करनेवाला और मां ही साथ हो.
    • मां को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेते रहने चाहिए और सभी प्रकार के भोजन को शामिल करके संतुलित व पौष्टिक आहार लेना चाहिए.
    • यदि मां अस्वस्थ है और उसे लगातार सर्दी-खांसी है, तब भी वह आवश्यक सावधानी बरतते हुए स्तनपान करा सकती है.
  • अगर मां बहुत बीमार है, तो मां का दूध एक कटोरी में निकालकर बच्चे को दिया जा सकता है. अन्य विकल्प है, जैसे- वेट नर्सिंग, जहां कोई नर्स मां के बदले बच्चे को स्तनपान कराएं. एक बार स्वास्थ्य बेहतर होने के बाद मां स्तनपान फिर से शुरू कर सकती है.
    • शुरुआती छह महीनों के दौरान फॉर्मूला दूध, पानी और शहद, बॉटल्स, पेसिफायर्स से बचना चाहिए, क्योंकि बच्चे के संक्रमित होने की अधिक संभावना होती है, ख़ासकर फॉर्मूला दूध के कारण.
Benefits Of Breastfeeding

ब्रेस्टफीडिंग से लाभ
• एक तरफ़ जहां ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे को लाभ मिलता है, वहीं मां को अतिरिक्त कैलोरी बर्न करने में भी मदद करता है, ख़ासकर गर्भावस्था के समय बढ़े वज़न को तेज़ी से कम करने में मदद करता है.
• स्तनपान करने से ऑक्सीटोसिन हार्मोन उत्पन्न होती है, जो गर्भाशय को प्री-प्रेग्नेंसी साइज़ में लाने में मदद करती है.
• बच्चे को स्तनपान कराने के लिए कोई नियत समय या मात्रा नहीं हैं. उन्हें मांग के अनुसार स्तनपान कराया जाना चाहिए यानी जब बच्चे को दूध की आवश्यकता हो, तब उसे ब्रेस्टफीडिंग कराएं.
• लगातार स्तनपान कराने से मां और बच्चे के बीच मज़बूत रिश्ता बनने में मदद मिलती है.
• मां और बच्चे के बीच शुरुआती और निर्बाध संपर्क (स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट) बच्चे के संपूर्ण विकास में मदद करता है. मां और शिशु को हमेशा साथ रहने की कोशिश करनी चाहिए, विशेष रूप से जन्म के तुरंत बाद और स्तनपान के दौरान.

– ऊषा गुप्ता

छोटे बच्चे बहुत नाजुक होते हैं. उनके प्रत्येक अंग की उचित देखरेख ज़रूरी होती है. लेकिन कानों की देखरेख, उनकी सफ़ाई के लिए क्या करना आवश्यक है, इसके बारे में कुछ सुझाव यहां प्रस्तुत हैं.

Parenting Guide

* कानों में मैल जमा हो जाने से बच्चे कान खुजलाने लगते हैं. ऐसे में कानों में इयर ड्रॉप्स डालकर कान साफ करें.

* स्नान करते समय बच्चों के कान में पानी चले जाने की आशंका रहती है. लिहाज़ा नर्म तौलिए से बच्चों के कानों को अच्छी तरह से पोंछ दें.

* नहलाते समय बच्चों के कानों में रुई के फाहे डालकर कानों में पानी जाने से रोक सकते हैं.

* सर्दी-जुकाम होने पर तुरंत बच्चे का उपचार करें.

यह भी पढ़े: कहीं अंजाने में अपने बच्चों को ग़लत आदतें तो नहीं सिखा रहे हैं? (Is Your Child Learning Bad Habits From You?)

* पान के कुनकुने रस की कुछ बूंदें कान में डालें. इससे ठंडी के कारण बच्चे के कान में होनेवाली पीड़ा शांत होती है.

* बच्चे का कान बहता हो, तो मां के दूध की धार उसके कानों में डालें. कौड़ी की राख कान में डालने से भी कान का बहना बंद हो जाता है.

* पटाखों और ऊंची आवाजों से बच्चों को बचाना चाहिए, खासकर छोटे शिशुओं को. ऊंची आवाज़ें बच्चों को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

* छोटे शिशुओं के कान में जाड़े के दिनों में ऊन से बनी टोपी पहनाए रखें. इससे अधिक ठंड से उनके कानों की रक्षा होगी.

– सूर्यकांत ओमप्रकाश

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

Home Remedies To Treat Gas In Babies

वायु के अवरोध से कभी-कभी बच्चे का पेट फूल जाता है. पेट में गुड़गुड़ आवाज होती है, दर्द होता है, कभी-कभी बच्चा तेज रोता है और बेचैन हो जाता है. ऐसे में गैस की समस्या के लिए निम्न नुस्ख़े कारगर सिद्ध होते हैं.

* एक चम्मच लहसुन के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पिलाएं. तुरंत गैस से राहत मिलेगी.
* सरसों भर सेंकी हुई हींग का चूर्ण घी में मिलाकर पिलाने से गैस से बच्चे को आराम मिलता है.
* जीरा या अजवायन को पीसकर पेट पर लेप करने से वायु का अवरोध दूर होता है और बच्चा राहत महसूस करता है.
* हींग को भूनकर उसे पानी में घिसकर नाभि के चारों ओर लेप करें. गैस का शमन होगा और बच्चा चैन की सांस लेगा.

यह भी पढ़े: बच्चों से जुड़ी मनोवैज्ञानिक समस्याएं 

कब्ज़ की शिकायत होने पर…
माता के अनुचित आहार-विहार के कारण उसका दूध दूषित हो जाता है, जिसकी वजह से बच्चे की पाचन शक्ति ख़राब होकर उसे वायु विकार हो जाता है और मल का सूख जाना, मल त्याग का अभाव, पेट में दर्द, गुड़गुड़ाहट, उल्टी आदि लक्षण पैदा हो जाते हैं और बच्चा रोते-रोते बेहाल हो जाता है.
* नीम के तेल का फाहा गुदा मार्ग में लगाने से कब्ज दूर होता है.
* रात को बीज निकाला हुआ छुहारा पानी में भिगो दें. सुबह उसे हाथ से मसलकर निचोड़ लें और छुहारे के गूदे को फेंक दें. छुहारे के इस पानी को बच्चे को आवश्यकतानुसार 3-4 बार पिलाएं. इससे कब्ज की शिकायत दूर होगी.
* बड़ी हरड़ को पानी के साथ घिसकर उसमें मूंग के दाने के बराबर काला नमक मिलाएं. इसे कुछ गुनगुना गर्म करके आवश्यकतानुसार दिन में 2-3 बार दें. अवश्य लाभ होगा.

यह भी पढ़े: 19 आसान टिप्स बच्चों के हाइट बढ़ाने के

बच्चों की हिचकी
बच्चों को प्रायः हिचकी आती रहती है. वैसे यह लाभदायक है, क्योंकि यह शरीर के विकास की निशानी मानी जाती है. हिचकी से आंतें बढ़ती हैं और स्वस्थ रहती हैं. फिर भी यदि हिचकी बार-बार आती है और बच्चे को कष्ट होता हो तो निम्न नुस्खा प्रयोग करें.
* अदरक के रस में (4-5 बूंद) आधी चुटकी भर पीसी हुई सोंठ, काली मिर्च और दो बूंद नींबू का रस मिलाकर बच्चे को चटाएं. तुरंत लाभ होगा.
* नारियल की जटा जलाकर उसकी थोड़ी-सी राख तीन चम्मच पानी में घोलकर और उसे छानकर बच्चे को पिलाने से हिचकी बंद हो जाती है.

– ऊषा गुप्ता

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

 

Health Tips For Cough in Babies

जाड़े के मौसम अथवा बदलते मौसम के कारण अक्सर बच्चों को खांसी की शिकायत हो जाती है. सर्दी-जुकाम, ठंडा वातावरण भी खासी के प्रमुख कारणों में से एक है. धूल भरे वातावरण में रहना, गंदी जगह और भीड़वाले इलाके, औद्योगिक क्षेत्र, धुओं की तरह अन्य प्रदूषणों के कारण भी खांसी के जन्मदाता हैं. खांसी से बचने के लिए उपरोक्त कारणों से बचने की भरसक कोशिश करनी चाहिए. ठंडी के दिनों में गर्म कपड़ों का प्रयोग करना चाहिए. बच्चे और बूढ़े सर्दी से अधिक प्रभावित होते हैं. अतः इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए. खांसी होने पर निम्न घरेलू उपाय करें.

* एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से कफ तथा खांसी से राहत मिलती है.
* अंजीर खाने से छाती में जमा बलगम निकल जाता है और खांसी से छुटकारा मिलता है.
* बड़ी इलायची का चूर्ण दो-दो ग्राम दिन में तीन बार पानी के साथ लेने से सभी प्रकार की खांसी से आराम मिलता है.
* काली खांसी होने पर कपूर की धूनी सूंघने से लाभ होता है.
* खांसी को कम करने के लिए मिश्री के साथ अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाइए. इससे खांसी से शीघ्र आराम मिलेगा.
* अदरक का रस शहद के साथ रात को सोते समय चाटें. इसके बाद पानी न पीएं. इससे खांसी में राहत पहुंचेगी.

यह भी पढ़े: बच्चे को डांटें नहीं हो जाएगा बीमार 

यह भी पढ़े: कैसा हो 0-3 साल तक के बच्चे का आहार? 
* कालीमिर्च तथा मिश्री या मुलहठी को मुख में रखकर चूसें. इससे सूखी खांसी में आराम मिलता है.
* तवे पर फिटकरी भून लें और उसका चूर्ण बनाकर मिश्री या शहद के साथ सेवन करें. सूखी खांसी से राहत मिलेगी.
* एक चम्मच सोंठ का चूर्ण (भूना हुआ), थोड़ा-सा गुड़ और एक चुटकी अजवाइन इन तीनों को एक साथ मिलाकर खाएं और ऊपर से गर्म दूध पीकर कम्बल ओढ़कर सो जाएं. खांसी से छुटकारा मिलेगा.
* काली खांसी को खत्म करने के लिए काले बांस को जलाकर राख बना लें. इसे शहद के साथ मिलाकर चाटें.
* एक तोला मुलहठी, चौथाई तोला काली मिर्च, आधा तोला सोंठ, आधा तोला अदरक- इन सबको बारीक पीसकर छान लें और दो तोले गुड़ में मिलाकर बेर के बराबर गोलियां बना लें. 1-1 गोली सुबह-शाम गर्म पानी के साथ सेवन करें. इससे काली खांसी खत्म हो जाएगी.
* बादाम की 5 गिरी, 5 मुनक्का और 5 काली मिर्च- इन्हें मिश्री के साथ पीसकर गोली बना लें. चार-चार घंटे पर एक गोली चूसें. इससे खांसी दूर हो जाएगी.
* खांसी में थोड़े-से नमक में बराबर मात्रा में हल्दी मिलाकर फांक लें और ऊपर से एक कप गुनगुना दूध पी लें.
* चाय के पानी में चुटकीभर नमक मिलाकर सोते समय गरारे करने से भी खांसी में लाभ होता है.
* खांसी आने पर अरवी की सब्जी खाएं. इससे खांसी तुरंत ठीक हो जाएगी.
* अकरकरा और गुड़ की गोली बनाकर चूसने से खांसी तुरंत ठीक हो जाती है.

– भावना वर्मा

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide 

 

 

 

बच्चे का अचानक या अकारण रोना पैरेंट्स या परिवार के लिए बेहद चिन्ता का विषय बन जाता है. कभी-कभी तो कारण समझ में नहीं आता कि आख़िर बच्चा रो क्यों रहा है? बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इसी कारण उन्हें बीमारियां जल्दी घेरती हैं. ऐसे में पैरेंट्स का चिन्तित होना स्वाभाविक है. यदि घर में कोई बड़ा या बुज़ुर्ग है, तो सलाह मिल जाती है, अन्यथा करें भी तो क्या? उन्हें तो खांसी-ज़ुकाम, उल्टी, दस्त, कब्ज़, गैस जैसी तकलीफ़ या दांत निकलने के दौरान होनेवाली परेशानियों के लिए भी डॉक्टर की सलाह लेनी ही पड़ेगी. वैसे ऐसे छोटे-मोटे रोगों के लिए कुछ एक घरेलू नुस्ख़े अपनाएं जा सकते हैं.

 

* बदन पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाएं, तो चंदन का लेप लगाने से आराम आ जाता है.
* खांसी होने पर एक चम्मच तुलसी रस, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चटाने से लाभ होगा.
* अंजीर चूसने से छाती में जमा बलगम साफ़ हो जाता है.
* हल्दी, गुड़ व घी का मिश्रण चटाने से भी खांसी से राहत मिलती है.
* सोते समय अजवाइन का तेल बनाकर (सरसों के तेल में अजवाइन पकाकर छान लें) छाती व गले पर लगाएं. ठंड के कारण हुई खांसी में लाभ होगा. इसी प्रकार गाय का घी भी लगाया जा सकता है.
* काली खांसी को खत्म करने के लिए बांस को जलाकर राख बना लें और शहद मिलाकर चटाएं, लाभ होगा.
* नवजात शिशु को शहद चटाने से जल्दी ठंड नहीं लगती है.
* बच्चे के आस-पास कुचली हुई प्याज़ की पोटली रख देने से भी सर्दी का प्रभाव जल्दी नहीं पड़ता.
* रात को सोते समय तुलसी का रस उसके नाक, कान और माथे पर मलें. तुलसी के रस का सेवन सर्दी से बचाव का अच्छा साधन है. इसमें शहद मिला कर भी चटाया जा सकता है.
* जायफल को पत्थर पर घिस कर चटाना भी सर्दी का अच्छा उपाय है.
* दांत निकलते समय बच्चों को काफ़ी तकलीफ़ होती है. वे बेवजह ही रोते दिखाई देते हैं. ऐसे में दस्त, कब्ज़, बुखार जैसे विकार सामने आने लगते हैं. दांत निकलने के दौरान भुना सुहागा व मुलहठी पीसकर बच्चों के मसूड़ों पर मलने से दांत आसानी से निकल आते हैं.

यह भी पढ़े – बच्चे का आहार

* शहद और सुहागा पाउडर मसूड़ों पर मलने से भी दांत बिना कष्ट के निकल आते हैं.
* कच्चे आंवले व कच्ची हल्दी का रस मसूड़ों पर मलने से दांत आसानी से निकल आते हैं.
* अनार के रस में तुलसी का रस मिलाकर बच्चों को चटाने से उनके दांत सुगमता से निकल आते हैं और दस्त नहीं लगती.
* सुहागे की खील 125 ग्राम की मात्रा में मां के दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह-शाम चटाएं. साथ ही इसे शहद में मिलाकर मसूड़ों पर मलें. बच्चे को इस दौरान तकलीफ़ नहीं होने पाएगी.
* अक्सर दांत निकलने के दौरान मतली या उल्टी होने लगती है. ऐसे में अदरक, नींबू व शहद समान मात्रा में मिलाकर चटाएं, आराम आ जाएगा.
* इलायची के छिलकों को जलाकर उसकी भस्म चटाने से भी मतली में लाभ होता है.
* अजवाइन और लौंग पाउडर की एक-एक चुटकी लेकर शहद में मिलाकर चटाएं.
* बच्चे को नैपी रैश हो जाने पर मक्खन में हल्दी मिलाकर उसका लेप लगाने से लाभ होता है.
* बच्चे को गैस की तकलीफ़ हो तो एक चम्मच लहसुन के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पिलाएं, गैस से तुरन्त राहत मिलेगी.
* हींग को भूनकर उसमें पानी मिलाकर नाभि के चारों ओर लेप करें, आराम आ जाएगा.
* कच्ची हींग व थोड़ा-सा बेसन मिलाकर हल्के हाथ से पेट पर मलें, गैस निकल जाएगी.
* अजवाइन पाउडर का लेप करने से भी राहत मिलती है.
* यदि बच्चे को कब्ज़ की शिकायत हो, तो चार मुनक्का रात को पानी में भिगो दें. सुबह उसे मसल कर उसका रस छान कर बच्चे को पिलाएं.
* बड़ी हरड़ को पानी के साथ घिसें. इसमें ज़रा-सा काला नमक मिलाकर हल्का-सा गर्म करके दिन में 2-3 बार पिलाएं, अवश्य लाभ होगा.
* यदि बच्चे के पेट में कीड़े हो गए हों तो शहद में काले जीरे का चूर्ण मिलाकर चटाएं.
* सौंफ का कपड़छान चूर्ण 1/4 चम्मच भर शहद के साथ सुबह-शाम चटाएं.

* नवजात शिशुओं को सर्दी के प्रभाव से बचाए रखने के लिए आप उन्हें खूब हंसाएं या फिर रोते समय कुछ पल उन्हें रोने दें. सर्दी से बचाव का यह कुदरती प्राणायाम है. इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

– प्रसून भार्गव
    अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide 
j0408979
स्पर्श का अपना एक अनूठा एहसास होता है. स्पर्श द्वारा यानी कि मसाज के ज़रिए मां-शिशु का एक अटूट रिश्ता बनता है. और जब एक मां अपने बच्चे की मालिश करती है, तो वह शिशु को सुखद अनुभूति के साथ सुरक्षा का एहसास भी कराती है. बच्चों के शुरुआती देखभाल के लिए बेबी मसाज बहुत ज़रूरी होता है. हाल ही में मेडिकल रिसर्च द्वारा इसके कई फ़ायदों के बारे में बताया गया है.

 

* शोधों से यह साबित हुआ है कि शिशु की नियमित रूप से मसाज की जाए, तो उसके बीमार होने की गुंजाइश कम रहती है.
* जिन नवजात शिशुओं का हर रोज़ अच्छी तरह से मसाज होता है, वे हेल्दी रहते हैं, उनका वज़न सही रहता है और सुचारू रूप से उनका शारीरिक विकास भी होता है.
* एक अच्छे बेबी ऑयल से मसाज करने से बच्चे को आराम और ख़ुशी मिलती है. इसके अलावा शिशु को अच्छी नींद आती है और उठने पर उसे तरोताज़गी का एहसास होता है.
* मसाज एक अच्छी एक्सरसाइज़ भी है. इससे बच्चे को भावनात्मक सुरक्षा मिलती है.
* मसाज से शिशु की कई छोटी-छोटी हेल्थ समस्याएं भी दूर होती हैं, जैसे- बच्चे के पेट में गैस होना, सुस्त रहना, नींद न आना आदि. यह शिशु की पाचन क्रिया को भी सही करता है.

यह भी पढ़ें : सर्दियों में नवजात शिशुओं की देखभाल के 11 अचूक नुस्ख़े

* मसाज करते समय ध्यान रहे कि आपके हाथ ठंडे न हों और हमेशा हल्के हाथों से मसाज करें.
* मालिश के समय सफ़ाई का विशेष ख़याल रखें.
* यदि शिशु ने दूध पिया हो या कुछ खाया हो यानी कि उसका पेट भरा हो तो मसाज न करें.
* तीन-चार माह तक के शिशु को स्नान कराने से पहले उसके सभी अंगों पर बेबी ऑयल से मसाज करें. मसाज के बाद यदि ठंड का मौसम हो, तो गरम पानी से, गर्मी के मौसम में सादे पानी से और बारिश में गुनगुने पानी से स्नान कराएं.
* शिशु को दिन में तीन-चार बार मालिश करना चाहिए.
* मसाज करते समय बच्चे को अपनी बातों से लोरी-गाने आदि से व्यस्त रखें, ताकि शिशु मसाज का पूरी तरह से आनंद उठा सके.
* ध्यान रहे, मसाज करते समय आपकी उंगलियां बच्चे के मुंह या आंखों के अंदर स्पर्श न करने पाएं.
* यदि आप चाहें, तो बच्चे को तीन-चार साल तक मसाज कर सकती हैं, इससे वह शारीरिक रूप से और भी मज़बूत होगा.

– रेखा कुंदर