Baby Massage

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स्पर्श का अपना एक अनूठा एहसास होता है. स्पर्श द्वारा यानी कि मसाज के ज़रिए मां-शिशु का एक अटूट रिश्ता बनता है. और जब एक मां अपने बच्चे की मालिश करती है, तो वह शिशु को सुखद अनुभूति के साथ सुरक्षा का एहसास भी कराती है. बच्चों के शुरुआती देखभाल के लिए बेबी मसाज बहुत ज़रूरी होता है. हाल ही में मेडिकल रिसर्च द्वारा इसके कई फ़ायदों के बारे में बताया गया है.

 

* शोधों से यह साबित हुआ है कि शिशु की नियमित रूप से मसाज की जाए, तो उसके बीमार होने की गुंजाइश कम रहती है.
* जिन नवजात शिशुओं का हर रोज़ अच्छी तरह से मसाज होता है, वे हेल्दी रहते हैं, उनका वज़न सही रहता है और सुचारू रूप से उनका शारीरिक विकास भी होता है.
* एक अच्छे बेबी ऑयल से मसाज करने से बच्चे को आराम और ख़ुशी मिलती है. इसके अलावा शिशु को अच्छी नींद आती है और उठने पर उसे तरोताज़गी का एहसास होता है.
* मसाज एक अच्छी एक्सरसाइज़ भी है. इससे बच्चे को भावनात्मक सुरक्षा मिलती है.
* मसाज से शिशु की कई छोटी-छोटी हेल्थ समस्याएं भी दूर होती हैं, जैसे- बच्चे के पेट में गैस होना, सुस्त रहना, नींद न आना आदि. यह शिशु की पाचन क्रिया को भी सही करता है.

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* मसाज करते समय ध्यान रहे कि आपके हाथ ठंडे न हों और हमेशा हल्के हाथों से मसाज करें.
* मालिश के समय सफ़ाई का विशेष ख़याल रखें.
* यदि शिशु ने दूध पिया हो या कुछ खाया हो यानी कि उसका पेट भरा हो तो मसाज न करें.
* तीन-चार माह तक के शिशु को स्नान कराने से पहले उसके सभी अंगों पर बेबी ऑयल से मसाज करें. मसाज के बाद यदि ठंड का मौसम हो, तो गरम पानी से, गर्मी के मौसम में सादे पानी से और बारिश में गुनगुने पानी से स्नान कराएं.
* शिशु को दिन में तीन-चार बार मालिश करना चाहिए.
* मसाज करते समय बच्चे को अपनी बातों से लोरी-गाने आदि से व्यस्त रखें, ताकि शिशु मसाज का पूरी तरह से आनंद उठा सके.
* ध्यान रहे, मसाज करते समय आपकी उंगलियां बच्चे के मुंह या आंखों के अंदर स्पर्श न करने पाएं.
* यदि आप चाहें, तो बच्चे को तीन-चार साल तक मसाज कर सकती हैं, इससे वह शारीरिक रूप से और भी मज़बूत होगा.

– रेखा कुंदर