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‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ फ़िल्म बाहुबली द बिगनिंग को देखने के बाद पूरे देश में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सबकी ज़ुबान पर बस यही एक सवाल था. भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी फ़िल्म का जुनून इस कदर फैन्स के सर चढ़कर बोल रहा था. इस फ़िल्म ने न सिर्फ़ तेलुगू फिल्मों को मेनस्ट्रीम सिनेमा से जोड़कर देखना सिखाया, बल्कि प्रभास और राणा दग्गुबाती को भीई पूरे देश में एक नई पहचान दिलाई. 10 जुलाई 2015 को यह फ़िल्म रिलीज़ हुई थी, आज फ़िल्म को 5 साल पूरे करने की ख़ुशी फ़िल्म के लीड कैरेक्टर्स प्रभास और राणा दोनों में सोशल मीडिया के ज़रिए अपने फैन्स से शेयर की. इस फ़िल्म के बाद कैसे क्या कुछ बदला भारतीय सिनेमा के संसार में आइए जानते हैं.

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जानें फ़िल्म से जुड़ी कुछ ख़ास बातें

  • पहली बार इस फ़िल्म के लिए ख़ास भाषा तैयार की गई थी, जिसका नाम किलिकी रखा गया. कालकेय यही भाषा बोलता था.
  • इस फ़िल्म की ख़ासियत रही वीएफएक्स, जिसके लिए दुनियाभर के करीब 15 कम्प्यूटर कंपनियों ने काम किया, जिसमें 5000 के करीब विज़ुअल इफेक्ट्स डाले गए.
  • इसकी रिलीज़ के लिए 50 हज़ार स्क्वैर फुट का पोस्टर बनाया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा पोस्टर बना और गिनीज़ बुक और वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ.
  • प्रभास और राणा ने बॉडी बनाने के लिए पर्सनल जिम सेटअप किये, जिसमें करीब 1 डेढ़ करोड़ लग गए.
  • बीबीसी ने पहली बार किसी भारतीय फिल्म की डॉक्यूमेंट्री बनाई, जो पिछले 100 सालों में नहीं हुआ था.
  • इस फ़िल्म का बजट ही 250 करोड़ था और क्लाइमैक्स पर ही करोड़ों ख़र्च हो गए थे.
  • इस फ़िल्म के बाद भारत में पहली बार बाहुबली म्यूज़ियम बन रहा है, जहां सारे हथियार और अस्त्र-शस्त्र रखे जाएंगे.
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क्या बदला इस फ़िल्म ने?

  • बाहुबली फ़िल्म ने भारतीय सिनेमा को बुलंदियों पर पहुंचाया, सालों बाद ऐसा हुआ था कि जो लोग सालों से थियेटर नहीं जा रहे थे, वो भी खुद को रोक नहीं पाए और फ़िल्म देखने गए. इस फ़िल्म ने लोगों पर जादू-सा कर दिया था.
  • बॉक्स ऑफिस पर फ़िल्म ने न सिर्फ़ ज़बर्दस्त कमाई की, साथ ही तेलुगू सिनेमा को भी लाइमलाइट में ला दिया.
  • इस फ़िल्म के बाद साउथ इंडियन फिल्म्स ख़ास तौर से तेलुगू फिल्म्स के डबिंग राइट्स और रीमेक राइट्स के प्राइस रेट बढ़ गए.
  • इससे पहले सिर्फ़ हिंदी फिल्मों को ही पूरे देश में वो सम्मान मिलता था, साउथ इंडियन फिल्म्स एक ज़ोन से जुड़ी मानी जाती थीं, लेकिन इस फ़िल्म ने तेलुगू सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया.
  • इसके बाद से ही इस इंडस्ट्री में भी लोग पैसा लगाने लगे हैं और अब इन फिल्मों का बजट बढ़ गया है.
  • बॉलीवुड के राइटर्स और प्रोड्यूसर्स भी अब साउथ की तरफ़ देखने लगे हैं और उनके प्रोजेस्ट्स बढ़ रहे हैं और यह सब मुमकिन हुआ है सिर्फ़ बाहुबली के कारण.
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  • 650 करोड़ का बिज़नेस करनेवाली इस फ़िल्म ने प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी, तमन्ना जैसे कलाकारों को घर घर में मशहूर कर दिया. सोशल मीडिया पर रातोंरात प्रभास की फैन फॉलोइंग बढ़ गई.
  • बाहुबली का कंधे पर शिवलिंग लेकर चलनेवाला लुक इतना पॉप्युलर हुआ कि हज़ारों तरह से लोगों ने उन पर मेमे बनाये और कटप्पा का बाल्ड लुक आज भी उतना ही मशहूर है.
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बाहुबली प्रभास ने फ़िल्म के 5 साल पूरे होने पर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की और अपनी ख़ुशी अपने फैन्स के साथ शेयर की.

बाहुबली में भल्लालदेव का निगेटिव किरदार निभानेवाले राणा दग्गुबाती ने भी इस मौके पर अपने ख़ुशी फैन्स के साथ शेयर की.

बाहुबली के 5 साल पूरे होने पर इसके फैन्स भी उतने ही ख़ुश हैं, जितने इसके कास्ट एंड क्रू. आपको यह फ़िल्म कितनी अच्छी लगती है, हमें ज़रूर बताएं.

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आज प्रवासी मजदूरों, गरीब, ज़रूरतमंद और वे सभी लोग जो अपने घर जाना चाह रहे थे और पहुंच गए के लिए सोनू मसीहा बन गए हैं. उन मजदूरों को घर पहुंचाने की मुहिम के चलते सोनू सूद को हर तरफ से प्यार, आशीर्वाद, सराहना और दुआएं दी जा रही हैं. उन्हें सुपर हीरो, बाहुबली, रियल लाइफ हीरो, सिंघम, नायक जैसे तमाम उपाधियों से नवाजा जा रहा है. उन्हें खूब शाबाशी दी जा रही है.
आज सोनू सूद सबसे बड़े मददगार व मसीहा बने हुए हैं प्रवासी मजदूरों के लिए. पिछले कई दिनों से लगातार घंटों वे काम करते रहे हैं, हर उस प्रवासी, हर उस गरीब मजदूर को उसके घर पहुंचाने की व्यवस्था करने के लिए. अपने इस काम का ना वह कभी श्रेय ले रहे हैं.. ना इसकी पब्लिसिटी कर रहे हैं. बस सभी को घर पहुंचाना है उनकी यही धुन है और वह उसी में निरंतर लगातार लगे हुए हैं. उनका कहना है कि ये लोग हमारी देश की धड़कन हैं. इनकी वजह से ही अपना काम कर पा रहे हैं. सड़क पर चल रहे हैं. ऐसे में उनकी सहायता करके उन्हें असीम शांति मिल रही है. उनके प्यार से प्रोत्साहन और ताक़त उन्हें मिल रही है लोगों की और अधिक मदद करने के लिए.
उनका कहना है कि जब वे किसी प्रवासी मजदूर या किसी ग़रीब को उसके घर पहुंचा देते हैं. और जब वो अपने घर पहुंचता है और उन्हें फोन करता है, तब उन्हें दिली सुकून मिलता है. बेहद ख़ुशी मिलती है, जो किसी भी अवार्ड से कम नहीं है. सोनू सूद की हर तरफ से हर कोई उनके इस नेक काम की तारीफ़ कर रहा है. इसमें हमारे फिल्मी हीरो भी पीछे नहीं है. अजय देवगन ने भी सराहना करते हुए सोनू के इस संवेदनशील कार्य की काफ़ी तारीफ की. क्रिकेटर शिखर धवन ने भी सोनू सूद के इस बेहतरीन काम की सराहना की और उनका उत्साह बढ़ाया.
सोनू सूद ने अजय देवगन और शिखर धवन को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि आप लोगों का प्यार और भरोसा ही मेरे लिए बहुत बड़ी ताक़त है. सोनू मजदूरों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने का नेक काम तो कर ही रहे हैं, इसके अलावा वे लगातार सोशल मीडिया से भी उनकी सहायता कर रहे हैं. उनके हर सवाल, प्रार्थना का वे सभी को लगातार जवाब भी दे रहे हैं. उनके तमाम रिप्लाय को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वे ना केवल समझदार, सुलझे हुए इंसान हैं, बल्कि उनकी हाजिरजवाबी भी लाजवाब है.
उन्होंने अपना एक हेल्पलाइन फोन नंबर 18001213711 भी शेयर किया है. लोगों से कहा है कि जिस किसी प्रवासी मजदूरों को घर जाना है, जो कोई अपने यहां पर फंसा हुआ है और अपने गांव, अपने घर जाना चाहता है, तो इस फोन नंबर पर संपर्क करें या अपने डिटेल दें. तब वे उनके जाने की व्यवस्था करेंगे. इस काम में वे लगातार लगे हुए हैं. उनके दोस्त, अपनों की पूरी टीम बनी हुई है, जो दिन-रात इसी काम में लगी हुई है. लोगों का आधार कार्ड वेरीफाई करना, पेपर्स वर्क करना, एक राज्य से दूसरे राज्य की अनुमती लेना, बस के साथ-साथ भोजन-पानी का बंदोबस्त करना… सभी इसी काम में लगे हुए हैं. कह सकते कि एक छोटा-सा कॉल सेंटर जैसा बन गया है उनके दोस्तों और इस मुहिम में लगे लोगों के बीच में.
सोनू सूद का कहना कि जब तक वह उस आख़िरी व्यक्ति को जो अपने घर जाना चाहता है, उसके घर सही सलामत पहुंचा नहीं देंगे, तब तक वह इसी तरह से लगातार काम करते रहेंगे.. सड़क पर रहेंगे.. उन लोगों के बीच में रहेंगे.. उनकी मदद करते रहेंगे.. उन्हें प्रोत्साहन, दिलासा देते रहेंगे कि वे घबराए नहीं.. परेशान ना हो.. वे सभी उनके घर, अपनों के बीच, अपने माता-पिता के पास ज़रूर जाएंगे और उन्हें मिलेंगे.
सोनू के इसी प्रशंसनीय कार्य और मदद को देखते हुए किसी के लिए वह सुपर हीरो, बाहुबली, सिंघम आदि बन गए हैं, तो किसी ने तो उन्हें भगवान का दर्जा दे दिया.. इन सभी प्रवासी मजदूरों के लिए वे भाई, बेटा, मामा, दोस्त, आदर्श जाने क्या-क्या बन गए हैं. प्यार और आशीर्वाद की बरसात उन पर हो रही है. हर कोई उन्हें दुआएं दे रहा है. कितने ही लोग ऐसे भी हैं, जो आर्थिक रूप से मदद भी करना चाहते हैं, तो सोनू उन्हें प्यार से कहते हैं कि बस वो किसी और ज़रूरतमंद, ग़रीब की मदद कर दे, वहीं उनकी सबसे बड़ी सहायता होगी. यह सोनू का बड़प्पन है कि वह अपने बलबूते पर यह सब कार्य कर रहे हैं, बिना किसी पब्लिसिटी के.. बिना किसी स्वार्थ के.. इस नेक व समाज सेवा के कार्य में लगे हुए हैं. वे अब तक बारह हज़ार से अधिक लोगों को उनके घर पहुंचा चुके हैं.
ऐसे ही एक व्यक्ति, जो बिहार के सिवान के हैं, जिन्हें सोनू सूद ने घर पहुंचाया था. उन्होंने ट्विटर पर उनसे कहा कि उनके गांव के लोग उनकी मूर्ति बनानेवाले हैं. इस पर सोनू ने नम्रता से कहा कि सुनो भाई उन पैसों से किसी ज़रूरतमंद की मदद कर देना. वे नहीं चाहते कि उनको महिमामंडित किया जाए. बस इस तरह के लोगों से यही कहते हैं कि आप किसी ग़रीब, दुखी, ज़रूरतमंद की पैसों से या जैसे मदद हो सके कर दीजिएगा. वही उनके लिए बहुत बड़ा पुरस्कार और मदद होगा.
सोनू सूद को यह ज़ज्बा और समर्पण की प्रेरणा उनकी मां सरोज से मिली है. वे हमेशा कहती थीं कि अगर दाएं हाथ से दान दो, तो बाएं हाथ को भी ख़बर नहीं होनी चाहिए. मां की परवरिश इतनी बेहतरीन रही है कि आज उनका बेटा कितने ही भले काम करता जा रहा है.
इस बार मदर्स डे पर भी उन्होंने अपनी मां को बड़ी शिद्दत से याद किया. उनके अनुसार, आख़िर मां के लिए एक ही दिन क्यों..? उनके लिए तो हर एक दिन ख़ास हो जाते हैं. जैसे मां के लिए बच्चे का हर एक दिन ख़ास होता है. उसी तरह बच्चों का भी मां के लिए होना चाहिए. मां तो वो होती है, जो एक चम्मच घी अधिक डाल देती है.. जो भिगोया हुआ बादाम खिलती है, कहती है इससे दिमाग़ तेज होगा. आज उन सब बातों को याद करता हूं, तो मुझे लगता है कि वाक़ई दिमाग़ कितना तेज हो गया कि मैं अपनी मां पर कुछ लिख सका. वैसे भी मेरी मां को बड़ी ख़ुशी होती थी जब मैं कुछ लिखता था.. वे कहतीं बहुत अच्छा लिखते हो, लिखा करो… तो इस बार मदर्स डे पर उन्होंने बहुत ही प्यारी बातें अपनी मां को लेकर लिखी थीं. एक प्यारा-सा वीडियो भी शेयर किया था.
जिस तरह से सोनू सूद लगातार इतने दिनों से हर एक प्रवासी मजदूरों और ग़रीब ज़रूरतमंद को उनके घर, अपनों के बीच, उनके माता-पिता के बीच पहुंचा रहे हैं.. उनसे वे हज़ारों दुआएं भी पा रहे हैं. सोशल मीडिया पर सभी उनके तरह-तरह के तस्वीरें, स्केच, दिलचस्प कार्टून भी शेयर कर रहे हैं. ये दुआएं अनमोल और बेमिसाल हैं. सोनू सूद हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं. बिना किसी स्वार्थ के काम करना ही सही मायने में सार्थक जीवन जीना है. यह अनमोल पुरस्कार है और इसके हक़दार सोनू सूद हैं. हम उनके इस जज़्बे को सलाम करते हैं और उन्हें शुभकामनाएं देते हैं कि वे यूं ही आगे बढ़ते रहें. सबकी मदद करते रहें और हर किसी को एक उम्मीद और एक हौसला दें कि वह अपने घर ज़रूर पहुंच जाएंगे.

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हॉलीवुड फिल्म ‘इट’ ने महज तीन दिनों में वर्ल्डवाइड 1150 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. जिस आंकड़े पर पहुंचने में दंगल व बाहुबली जैसी फिल्मों हफ़्तों लग गए, उस जादुई आंकड़े पर इस फिल्म में महज तीन दिन में छू लिया. फिल्म का बजट 3.50 करोड़ डॉलर (224 करोड़ रुपये) है.

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यह फिल्म पॉप्युलर हॉहर राइटर स्टिफ़न किंग की नॉवेल पर आधारित है. इट ने रिलीज के पहले हफ्ते में ही अपने बजट की तीन गुना कमाई कर ली है.  आपको बता दें कि आमिर खान की ‘दंगल’ ने 2 हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जबकि ‘बाहुबली’ ने 1700 करोड़ का आंकड़ा छुआ था. वहीं 8 सितंबर को रिलीज हुई हॉरर मूवी इट ने कई पुरानी हॉरर फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.  इट को आजतक की सबसे डरावनी फिल्म माना जा रहा है. यह सबसे ज़्यादा कमाई करनेवाली हॉरर फिल्म बन चुकी है. इस फिल्म को एंडी मुशिएती ने डायरेक्ट किया है.  स्टीफन ने फिल्म रिलीज होने से पहले ही कहा था कि यह आपको एक अलग अहसास कराएगी. हर लेवल पर आपको इसे देखकर मजा आएगा.  फिल्म ने पहले दिन 326.2 करोड़ की कमाई की. रिलीज के पहले दिन बंपर कमाई का रिकॉर्ड इससे पहले 2013 की रिलीज ‘द कंज्यूरिंग’ के नाम था. जिसने पहले दिन 262.2 करोड़ की कमाई की थी।

फिल्म की कहानी मैने के डेरी शहर की है. यहां के बच्चे काफी डरे हुए हैं और उनके डर का कारण पेनीवाइज नाम का शैतानी जोकर है. फिल्म दो भाग में बनी है. पहला पार्ट 8 सितंबर को रिलीज़ हुआ और दूसरा 2019 में रिलीज़ होगा.

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unnamed-74 (1)आमिर खान ने अपनी फिल्म दंगल के प्रमोशन पर कहा कि अगर फिल्म निर्माता एस. एस. राजामौली महाभारत बनाते हैं तो वह श्री कृष्ण या कर्ण की भूमिका करना चाहेंगे. आमिर ने कहा, “मैं राजामौली के काम का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. अगर वह कभी महाभारत बनाते हैं, तो मैं कृष्ण या कर्ण की भूमिका करना पसंद करूंगा.” आमिर हैदराबाद में दंगल के तेलुगू वर्जन को प्रमोट करने पहुंचे थे. वैसे इससे पहले अक्षय कुमार फिल्म ओ माय गॉड में श्री कृष्ण का रोल निभा चुके हैं और उन्हें काफ़ी पसंद भी किया गया था. देखते हैं आमिर की ये इच्छा कब पूरी होती है.

national-award63वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड की घोषणा हो गई है. रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली फिल्म बाहुबली को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड दिया जाएगा, तो वहीं बेस्ट एंटरटेनमेंट फिल्म के अवॉर्ड से नवाज़ा गया है फिल्म बजरंगी भाईजान को. बात करें अगर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अभिनेत्री की तो फिल्म पीकू के लिए अमिताभ बच्चन को मिला बेस्ट ऐक्टर का अवॉर्ड, तो वहीं बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला कंगना रनौत को तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के लिए. बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड दिया गया है संजय लीला भंसाली को उनकी फिल्म बाजीराव मस्तानी के लिए. कुछ और कैटेगरीज़ में जिन्हें अवॉर्ड मिला वह इस प्रकार हैं-
बेस्ट हिंदी फिल्म- दम लगाके हईशा
बेस्ट सिनेमैटोग्राफ़ी- सुदीप चटर्जी (फिल्म- बाजीराव मस्तानी)
बेस्ट स्क्रीनप्ले- जूही चतुर्वेदी (फिल्म- पीकू) और हिमांशु शर्मा (फिल्म- तनु वेड्स मनु रिटर्न्स)
बेस्ट एडैप्टेड स्क्रीनप्ले- विशाल भारद्वाज (फिल्म- तलवार)
बेस्ट डेब्यू फिल्म डायरेक्टर- नीरज घेवान (फिल्म- मसान)
बेस्ट कोरियोग्राफी- रेमो डिसूजा (फिल्म- बाजीराव मस्तानी)
बेस्ट गीत- वरुण ग्रोवर (गाना- मोह मोह के धागे, फिल्म- दम लगा के हईशा)
बेस्ट चिल्ड्रेन्स फिल्म- दुरंतो
बेस्ट सपोर्टिंग फीमेल एक्टर- तनवी आज़मी (फिल्म- बाजीराव मस्तानी)
राष्ट्रीय अखंडता पर बेस्ट फीचर फिल्म- नानक शाह फकीर
स्पेशल जूरी अवॉर्ड- कल्कि कोचलिन ( फिल्म- मार्गरिटा विद ए स्ट्रॉ)