Baisakhi

आज फिल्मी सितारों ने बैसाखी की बधाइयां देने के साथ-साथ लोगों से घर पर ही रहकर परिवार के साथ मिलकर इसे मनाने के लिए भी कहा. अमिताभ बच्चन ने अपनी फिल्म सुहाग के गाने तेरी रब ने बना दी जोड़ी… के सीन का फोटो शेयर करके लोगों को बधाइयां दीं और कहा की- बैसाखी के पावन अवसर पर, ले बारम बार बधाई.. ये दिन हर दिन मंगलमय हो.. हम सब की यही दुहाई.. हर्षित पल और मधुमय जीवन, अपने घर मनाएं.. सुख, शांत, सुरक्षित रहें सदा.. ईश्वर से यही दुआएँ.. हैप्पी बैसाखी लव… 

हेमा मालिनी ने भी तमिल के नव वर्ष और बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि जल्द हम सब कोरोना से मुक्त हो नए सिरे से बिना किसी भय के ख़ुशियों के साथ अपने सभी काम कर सकेंगे.
ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई बड़ा व धूमधाम से भरपूर त्यौहार हम घर पर रहकर ही मना रहे हैं. ख़ास पंजाबियों के इस फेस्टिवल में आमतौर पर नाच-गाना, बड़ी धूमधाम और रौनक देखने को मिलती है, लेकिन कोरोना की लड़ाई में लॉकडाउन के कारण सब जगह बंद होने के कारण घर पर ही रहकर लोग इसे मना रहे हैं और मुबारकबाद दे रहे हैं.
अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी से लेकर सनी देओल, माधुरी दीक्षित, अजय देवगन, किरण खेर, हरभजन सिंह, गीता बसरा, अंगद बेदी, नेहा धूपिया आदि ने ढेर सारी बधाइयां और शुभकामनाएं दी. साथ ही ये प्रार्थना भी की कि यह मुश्किल घड़ी जल्दी ख़त्म हो जाए और देश में सुख, शांति और ख़ुशियां वापस लौट आए.
इस लॉकडाउन में स्टार्स अपने मनोरंजन का भी कोई मौक़ा नहीं चूक रहे. वे घर पर रहकर किस तरह से ख़ुद को इंटरटेन कर रहे हैं, इसकी ढेर सारी मज़ेदार वीडियोज़ आए दिन देखने को मिलती हैं. आइए उन्हीं में से कुछ चुनिंदा वीडियोज़ को देखते हैं.
सभी को बैसाखी की लख-लख बधाइयां.. मुबारकबाद.. शुभकामनाएं…

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Teejay and me are quarantined #mainyahantuwahan

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बैसाखी

देश के अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से बौसाखी मनाई जाती है. लो आ गई बैसाखी, जिसका इंतज़ार हर किसान को बेसब्री से रहता है. बैसाखी, दरअसल सिख धर्म की स्थापना और फसल पकने के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है. इस महीने फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो जाती है और पकी हुई फसल को काटने की शुरुआत भी हो जाती है. ऐसे में किसान खरीफ की फसल पकने की खुशी में यह त्यौहार मनाते हैं.

क्या है ऐतिहासिक कहानी?
सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह ने बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में वर्ष 1699 में खालसा पंथ की नींव रखी थी. गुरु गोविन्द सिंह ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी, इसलिए बैसाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा. खालसा-पंथ की स्थापना के पीछे गुरु गोविन्द सिंह का मुख्य लक्ष्य लोगों को तत्कालीन मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था.

बैसाखी

किसानों की ख़ुशी ज़ाहिर करने का दिन
बैसाखी पंजाब के किसानों के मुख्य पर्व है. इस पर्व को वो बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं. इस समय गेंहू की फसल तैयार हो जाती है. किसानों के लिए गेंहू सोने के समान होता है. इस त्योहार से किसान अपने खेतों में गेंहू की कटाई शुरू कर देते हैं. फसल अच्छी हुई, तो किसानों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता. इस दिन किसान सुबह-सुबह मंदिरों और गुरुद्वारों में जाकर ईश्‍वर की आराधना करते हैं और फिर इसी दिन से फसलों की कटाई का काम शुरू करते हैं.

बैसाखी के त्योहार से बॉलीवुड की फिल्में भी अछूती नहीं रही हैं. कई फिल्मों में भी बैसाखी को भव्य अंदाज़ में दिखाया गया है. फिल्मों में गेंहू के खेतों में किसानों को नाचते-गाते दिखाया जाता है.