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7 स्मार्ट ट्रिक्स से सुपरचार्ज करें अपनी सेक्स लाइफ (7 Smart Tricks To Supercharge Your Sex Life)

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कभी ऑफिस का वर्कलोड, तो कभी घर की टेंशन और समय की कमी के चलते कपल्स की सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है. यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो धीरे-धीरे उनके रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं. यदि आप अपने प्यार भरे पलों को हमेशा तरोताज़ा बनाए रखना चाहते हैं, तो आज़माइए ये तरी़के.

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1. तनाव को करें टाटा

तनाव न स़िर्फ आपकी सेहत और सुंदरता बिगाड़ता है, बल्कि ये सेक्स लाइफ का भी दुश्मन है. तनाव में रहने पर कोई भी इंसान रोमांटिक नहीं हो सकता और जब रोमांस ही नहीं रहेगा, तो नज़दीकियां कैसे बढ़ेंगी. आज की लाइफस्टाइल में तनाव से पूरी तरह बचा तो नहीं जा सकता, लेकिन कुछ आसान तरक़ीब, जैसे- योगा व मेडिटेशन के ज़रिए आप उससे दूर रह सकते हैं. अंतरंग पलों का रोमांच बनाए रखने के लिए बेडरूम में स्ट्रेस की नो एंट्री ज़रूरी है.

2. जादू की झप्पी

आप कितने भी थके क्यों न हों यदि बेडरूम में जाते ही पार्टनर आपको प्यार भरी जादू की झप्पी दे, तो आपकी थकान पल भर में छूमंतर हो जाती है और आपका मूड भी रोमांटिक हो जाता है. दरअसल, प्यार भरे स्पर्श से ऑक्सिटोसिन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करते हैं. ऐसे में पार्टनर से आपकी क़रीबी बढ़ती है.

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3. बहकी-बहकी बातें

बेडरूम में जाने के बाद न तो उनसे किचन की बातें डिस्कस करें और न ही ऑफिस की. उस व़क्त स़िर्फ आप दोनों अपने बारे में बात करें. अपनी कुछ पुरानी यादें ताज़ा करें. पहली मुलाक़ात व शादी से जुड़ी दिलचस्प बातें शेयर करें. उस व़क्त साथ बिताए अच्छे पलों की ही बात करें. बुरे अनुभवों को भूल जाएं. इससे आप दोनों अच्छा महसूस करेंगे और एक-दूसरे के क़रीब आएंगे.

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4. बेवजह करें फोन

शादी के शुरुआती कुछ महीनों तक तो पति-पत्नी दोनों को फोन पर बातें करना अच्छा लगता है, मगर साल बीतते-बीतते कुछ काम होने पर ही पार्टनर को फोन करते हैं. आप ऐसी ग़लती न करें, कभी-कभार यूं ही बेवजह उन्हें फोन मिला लें और रोमांटिक बातें करें. यदि ये आपको अटपटा लगे, तो कुछ ऐसी बात करें जो आप अपने रिश्ते की शुरुआत में किया करते थे. पार्टनर के लिए यदि कुछ स्पेशल प्लान बनाया है, तो फोन करके उन्हें हिंट दे दें. इससे वो बेताबी से शाम को आपसे मिलने का इंतज़ार करते रहेंगे, ये सोचकर कि आख़िर आप उन्हें क्या सरप्राइज़ देने वाले हैं.

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5. करें रोमांटिक डिनर प्लान

आजकल ज़्यादातर कपल्स वर्किंग हैं, जिसके कारण उन्हें एकसाथ समय बिताने का मौक़ा कम ही मिलता है. ऐसे में यदि कभी आप ऑफिस से जल्दी आ जाएं, तो घर पर ही कैंडल लाइट डिनर का अरेंजमेंट करें. ज़रूरी नहीं कि आप पूरा खाना बनाएं, कोई एक या दो उनकी पसंद की डिश बनाएं और बाहर से खाना ऑर्डर करके रोमांटिक अंदाज़ में डिनर टेबल अरेंज करें. जब पार्टनर आए, तो सेक्सी डे्रस पहनकर उनका स्वागत करें, यक़ीन मानिए, आपकी इस अदा पर वो फिदा हो जाएंगे.

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6. लाइट डिनर करें

अक्सर लोग दिनभर बाहर रहने के कारण रात को घर आकर जमकर खाते हैं, मगर आप ऐसी ग़लती न करें, रात का डिनर हमेशा लाइट ही होना चाहिए. रात को हैवी डिनर करने से आपको बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाएगी और आप पार्टनर के साथ प्यार भरे पलों का आनंद नहीं ले पाएंगे. बेहतर होगा कि सोने से एक-डेढ़ घंटे पहले ही डिनर कर लें. इससे बेड पर जाते ही आपको नींद नहीं आएगी.

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7. बेडरूम को दें रोमांटिक टच

यदि आपके पास थोड़ा टाइम है, तो अपने बोरिंग-से बेडरूम के इंटीरियर में मामूली बदलाव करके उसे रोमांटिक टच दीजिए, जैसे- ख़ूबसूरत सैटिन की बेडशीट बिछाएं, हो सके तो फ्रेश फ्लावर रखें. बेडरूम की लाइट को डिम करें और पार्टनर के आने से पहले ही कोई रोमांटिक म्यूज़िक ऑन कर दें. फिर देखिए, इस रोमांटिक माहौल का कैसा जादुई असर होता है. यदि पार्टनर बहुत थका हुआ नज़र आ रहा है, तो मसाज से उसकी थकान दूर करके उसके दिल के क़रीब आ जाइए.

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बॉलीवुड की मां निरूपा रॉय के कमरे को लेकर रियल लाइफ में दोनों बेटों के बीच दीवार (Nirupa Roy’s sons fighting over the late actress bedroom)

निरूपा रॉय

निरूपा रॉय

बॉलीवुड में मां का किरदार निभाने वाली स्व. निरूपा रॉय के घर में बेटों के रिश्तों में भी दीवार आ गई है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि निरूपा रॉय के कमरे को लेकर उनके दोनों बेटों किरन और योगेश में ठन गई है. निरूपा रॉय के दोनों बेटे उनके बेडरूम पर दावा कर रहे हैं, उनकी कहना है कि उनकी भावनाएं इस कमरे से जुड़ी हुई हैं.
वैसे साल 2004 में निरूपा रॉय की मौत के बाद से ही उनकी संपत्ति को लेकर विवाद शुरु हो गया था. उनकी पूरी संपत्ति लगभग 100 करोड़ की है. उनका 3000 स्क्वैर का अपार्टमेंट है, जिसमें किरन और योगेश के हिस्से में दो दो बेडरूम हैं. साथ ही इसमें 8000 स्क्वैर का गार्डन भी है.

ख़्वाबों के रंग… (Khwabon ke Rang- Home Decor)

आंखों के काजल से खींची है ख़्वाबों की लकीरें… लबों की सुर्ख़ी से रंग भरे हैं दीवारों पर… तेरी यादों के मौसम को सजाया है चिलमन में… और लिख दिया है मुहब्बत दिल की मीनारों पर… 

Home Decor

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आपके घर-आंगन में भी चाहत और मुहब्बत बरसे, लेकिन इसके लिए आपको भी तो कुछ कोशिश करनी होगी, तो क्यों न अपने डेकोर को कुछ न्यू टच दें. अपने बेडरूम को दें नया अंदाज़, नया लुक और भर दें अपने ख़्वाबों के ढेरों रंग.

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  • राइट डेकोर से आप अपने कमरे को दे सकते हैं डिफरेंट व स्टाइलिश लुक.
  •  आपको कूल लुक चाहिए, तो पूरे रूम को सिंगल कलर दें या फिर सिंगल कलर के ही डिफरेंट शेड्स यूज़ करें.
  •  दीवारों के कलर्स हों, बेडशीट्स, कुशन्स, कर्टेन्स या फिर अन्य एक्सेसरीज़- सबको एक ही कलर के डिफरेंट शेड्स दें.
  •  रूम बड़ा भी नज़र आएगा.
  •  आपको रूम का हरेक एलीमेंट और सेग्मेंट अलग दिखाना है, तो हर एक कॉर्नर व दीवार पर आई कैचिंग एक्सेसरीज़
    यूज़ करें.

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  •  छोटी-से-छोटी कोई चीज़ हो या फिर फर्नीचर व कवर्स- सब कुछ डिफरेंट व क्लासी होना चाहिए.
  •  टोन्स आपके बेडरूम को कोज़ी लुक व फील देंगे.
  •  वॉलपेपर्स आजकल हॉट फेवरेट हैं, तो अपने रूम का लुक एंड फील बदलने के लिए इन्हें यूज़ करें.
  •  न स़िर्फ कलर व फर्नीचर, बल्कि टेक्सचर भी बहुत ज़रूरी है डेकोर के लिए. आपके फैब्रिक का टेक्सचर आपके रूम को रिच लुक दे सकता है.
  • कस्टमाइज़्ड बेड पर स्टाइलिश ड्रेप्स आपको सपनों की दुनिया में ले जाएंगे.
  •  आप वॉल्स पर भी कर्टेन्स लगवाकर कुछ डिफरेंट व क्रिएटिव कर सकते हैं.
  •  आप वुडन टच देकर भी कुछ नया कर सकते हैं. ब्राइट कलर और डिफरेंट क्राफ्टिंग से बेडरूम को एक नया ही फील दें.

फोटो सौजन्य: अनीश मोटवानी एसोसिएट्स, साई चेम्बर्स, आर. सी. मार्ग, चेम्बूर (पूर्व), मुंबई- 400071
वेबसाइट: http://www.anishkmotwani.in

– ब्रह्मानंद शर्मा

5 स्मार्ट होम डेकोरेशन टिप्स न्यूली मैरिड कपल्स के लिए (5 smart home decoration tips for newly wed couples)

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नया रिश्ता, नई शुरुआत और नया घर… शादी के बाद आए इस बदलाव के बीच अपने ड्रीम होम को सजाना कोई आसान काम नहीं है. पति-पत्नी की पसंद एक जैसी हो ये ज़रूरी नहीं. ऐसे में कॉमन कलर से लेकर डेकोर एक्सेसरीज़ सिलेक्ट करना बहुत मुश्किल हो जाता है. एक पार्टनर को लाइट कलर पसंद आता है, तो दूसरे को डार्क शेड. कई कपल्स ऐसे भी होते हैं जिन्हें समझ नहीं आता कि होम डेकोरेशन की शुरुआत कैसे की जाए? आपकी परेशानी दूर करने के लिए मेरी सहेली लेकर आई है होम डेकोर से जुड़ी गाइडलाइन.

 

पहले बजट तय करें
आजकल घर सजाना काफ़ी महंगा सौदा है, इसलिए पहले दोनों मिलकर ये देख लें कि आपका बजट कितना है? क्या इतने बजट में पूरे घर को सजाया जा सकता है? यदि नहीं, तो घर के उस ख़ास हिस्से को डेकोरेट करें, जहां आप दोनों ज़्यादा समय बिताते हैं. बेहतर होगा कि आप अपने बेडरूम को अपने हिसाब से सजाएं, लेकिन ध्यान रहे कि इसमें पार्टनर की पसंद भी शामिल हो, जैसे यदि कलर आपकी पसंद का है, तो डेकोर एक्सेसरीज़ पार्टनर की पसंद की रखें.

 

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कॉमन कलर स्कीम सिलेक्ट करें
यदि आप पूरे घर को सजाने की सोच रहे हैं, तो पहले दोनों मिलकर कोई कॉमन कलर स्कीम सिलेक्ट करें. हो सकता है कि दोनों को अलग-अलग शेड पसंद आएं, ऐसे में आप बीच का रास्ता निकालते हुए दोनों कलर को मिक्स करके यूज़ कर सकते हैं. इन दिनों घर की एक दीवार डार्क और बाकी लाइट कलर से पेंट करवाने का ट्रेंड है, लेकिन कलर कॉम्बिनेशन करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह अवश्य ले लें.

 

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सोच-समझकर सिलेक्ट करें फर्नीचर
यदि आप घर को विंटेज लुक देना चाहते हैं, तो वुडन बेस्ड फर्नीचर आपके लिए बेस्ट है. यदि मॉडर्न लुक देना चाहते हैं, तो आयरन फर्नीचर का चुनाव करें. आजकल मार्केट में अलग-अलग मटीरियल और डिज़ाइन के ढेरों फर्नीचर हैं. आप अपने कमरे के साइज़ और बजट को देखते हुए अपने लिए बेस्ट फर्नीचर चुनें. फर्नीचर ख़रीदने से पहले अपने लिविंग रूम व बेडरूम का साइज़ ज़रूर ध्यान में रखें.

 

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ड्रीम होम का लुक
आप अपने आशियाने को ट्रेडिशनल और कंटेम्प्रेरी लुक देने की बजाय दोनों को मिक्स एंड मैच भी कर सकती हैं. आजकल मार्केट में कई ऐसी दुकानें हैं जहां होम डेकोर से जुड़ी ऐसी चीज़ें आसानी से मिल जाती हैं. रग्स और आरामदायक चेयर हर घर की ज़रूरत हैं इसलिए इन्हें ख़रीदना न भूलें.

 

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बेडरूम को दें स्पेशल फील
न्यूली मैरिड कपल्स के लिए उनका बेडरूम बहुत ख़ास होता है. कलर, परदे और बेडशीट से लेकर डेकोर एक्सेसरीज़ तक सब कुछ यहां ख़ास होना चाहिए ताकि जब आप बेडरूम में आएं, तो स्पेशल फील करें. बेडरूम में अपनी कोई रोमांटिक फोटो लगाना न भूलें.

 

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परदा है परदा
परदा सिलेक्ट करने के लिए आपको ज़्यादा टाइम और एनर्जी वेस्ट करने की ज़रूरत नहीं है. अपने घर की कलर स्कीम से मैच करता परदा ख़रीदें. यदि दीवारों पर लाइट कलर है, तो डार्क कलर का परदा चुनें और यदि दीवार पर डार्क शेड है, तो परदे का कलर लाइट रखें.

– कंचन सिंह

40 होम डेकोर मिस्टेक्स (40 Home Decor Mistakes)

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ख़ूबसूरत और स्टाइलिश घर की चाह भला किसे नहीं होती. इसके लिए लोग तरह-तरह के चीज़ों से घर को सजाने लगते हैं, लेकिन कई बार होम डेकोर में वे कुछ ऐसी ग़लतियां भी कर देते हैं, जिनसे घर की ख़ूबसूरती प्रभावित होती है. इसी विषय पर हमें इंटीरियर डिज़ाइनर एकांश बंसल ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

* घर का डेकोर बदलने से पहले यह देख लें कि आप किस तरह ज़्यादा से ज़्यादा जगहों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

* घर की पेंटिंग और लाइटिंग अरेंजमेंट किस तरह की होनी चाहिए. कभी भी अपनी पसंद की सभी चीज़ों को एक ही कमरे में सजा देने की भूल न करें.

* दीवारों पर ब्राइट कलर्स न लगाएं. इसकी बजाय नेचुरल कलर्स का इस्तेमाल करें, जैसे- बेज या क्रीम.

* किसी भी तरह का मोज़ैक टाइल्स रूम के किसी भी दीवार पर न लगाएं.

* कई लोग मैग्ज़ीन में छपे इंटीरियर डेकोरेशन को देख उसी तरह की डेकोरेशन करने की सोचते हैं. ऐसा न करें. अपने घर के आकार और ज़रूरत को    ध्यान में रखते हुए होम डेकोर करें.

* सीलिंग के मामले में अक्सर लोग ग़लतियां करते हैं, जैसे- सीलिंग लो हो या बहुत ही हाई, दोनों ही स्थितियों में होम डेकोर के हिसाब से ख़राब लगता  है. ऐसे में यदि कमरे की छत नीची है, तो कमरे का आकार बड़ा दिखाने के लिए आप ग्लास के दरवाज़े लगा सकते हैं. इसी तरह यदि सीलिंग बहुत  ऊंची है, तो वह देखने में बहुत अजीब लगती है. इसके लिए कमरे में बड़ी-बड़ी लाइटें या झूमर लटका देते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि हमारे सिर के  ऊपर कोई बोझ लटका हुआ है. इन सबसे बेहतर यही होगा कि फॉल्स सीलिंग बनाई जाए.

* पूरी दीवार को पेंटिंग्स या आर्ट वर्क न सजाएं. ब्राइट और लाइवली आर्ट वर्क दीवार के बीचोंबीच लगाएं यानी सेंटर प्लेस पर.

* फ्लोर छोटा है, तो दीवारों पर डार्क कलर करने की भूल न करें, इससे फ्लोर और छोटा नज़र आएगा.

* आपने बहुत स्टाइलिश फर्नीचर से घर को सजा तो दिया, लेकिन वे फर्नीचर्स कंफर्टेबल न हो, तो ऐसे फर्नीचर का कोई औचित्य नहीं है.

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* ड्रॉइंगरूम में शोपीस का ढेर न लगा दें. फर्नीचर के अलावा शोपीस कॉफी टेबल या फिर साइड टेबल पर लगाएं.

* घर की खिड़कियां बड़ी हैं, तो उन्हें लैमीनेटेड ग्लास पेन्ट से कवर करने की ग़लती न करें. इसकी बजाय ग्रिल्स का इस्तेमाल करें. इससे जहां कमरे    को एथनिक लुक मिलेगा, वहीं फ्रेश हवा भी कमरे में आएगी.

* कमरों को छोटे-छोटे चीज़ों से न भर दें. बहुत अधिक छोटे सामानों से रूम बहुत भरा-भरा लगता है.

* कभी भी दीवारों पर पेंटिंग बहुत ऊंचाई पर न लगाएं. इसे लगाने से पहले दीवार के सामने बैठकर देख लेें और एक निश्‍चित ऊंचाई पर इसे लगाएं.

* छोटे कमरे में रखा गया बड़ा सोफा इंटीरियर के अनुसार बहुत बड़ी ग़लती है. ग़लत तरी़के से रखा गया फर्नीचर घर के शो को बिगाड़ देता है. एक बड़े  सोफे के साथ छोटा-सा साइड टेबल भी अच्छा नहीं लगता.

* बड़े पैटर्नवाले कारपेट की बजाय कमरे में छोटे पैटर्नवाले कारपेट बिछाएं, इससे कमरा बड़ा दिखेगा. इसके अलावा छोटे कारपेट से भी कमरे बड़े  दिखते हैं.

* दीवारों पर एक ही कलर के अलग-अलग शेड्स का इस्तेमाल न करें, जैसे- सीलिंग पर अगर इंडिगो कलर लगा रहे हैं, तो एक तरफ़ की दीवार पर  हल्का नीला रंग करें.

* कमरे की हर चीज़ एक-दूसरे से अधिक मैच करने की ग़लती न करें, जैसे- सोफे, पर्दे, कारपेट, लैंपशेड आदि मैचिंग करने पर अधिक ज़ोर न दें. वरना  हर चीज़ एक ही शैली व रंगों में दिखाई देगी, जो होम डेकोर के हिसाब से ठीक नहीं होगा.

* यदि स्ट्रेटलाइन सोफा वेलवेट रेड कलर का है, तो उसके साथ कश्मीरी कारपेट नहीं जाएगा.

* कई लोग ड्रॉइंगरूम को ट्रेंडी और आकर्षक दिखाने के लिए डेकोरेटिव पीसेस, बड़े-बड़े शैंडेलेयसर्र्, पेंटिंग्स, प्लांट्स,  फोटोफ्रेम आदि से भर देते हैं. इससे कमरा ख़ूबसूरत दिखने की बजाय म्यूज़ियम लगने लगता है.

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* आप घर को कैसा लुक देना चाहते हैं, उसी के अनुसार ही होम डेकोर के सामान ख़रीदें, जैसे- एथनिक लुक, फ्यूज़न लुक देना चाह रहे हैं, तो उसी के  अनुसार सही कॉम्बीनेशन की चीज़ें इस्तेमाल करें.

* बच्चों के कमरों को बहुत अधिक खिलौनों से न भर दें. इससे जहां बच्चे का कमरा छोटा दिखाई देगा, वहीं इन्हें रखने-हटाने में भी मुश्किलें आएंगी.

* डायनिंग रूम में क्रॉकरी को सजाकर न रखें, वरना मेहमानों के आने पर क्रॉकरी को डायनिंग रूम से किचन में ले जाना पड़ता है, जो ठीक नहीं लगता.  वैसे भी क्रॉकरी कोई रूम को सजाने की वस्तु नहीं है, इसलिए इसे किचन में ही रखें, तो बेहतर है.

* यदि रूम की सीलिंग नीची है और उसे रूम की दीवारों के कलर से अधिक डार्क कलर से पेंट करा दिया है, तो वो और अधिक नीची लगेगी. सीलिंग को  ऊंचा दिखाने के लिए लाइट कलर का इस्तेमाल करें.

* इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, जैसे- एलसीडी टीवी, म्यूज़िक सिस्टम आदि के कई वायर्स होते हैं. इन वायरों को बाहर की तरफ़ बिखरा हुआ न रहने दें. इसके  लिए टीवी पैनल बनाए जाते हैं, उसमें इसे छिपाकर रखा जा सकता है.

* बाथरूम में फ्लैशी हाइलाइटर्स अवॉइड करना चाहिए. बेडरूम को स्टोर रूम बनाने की ग़लती न करें. बेड के क़रीब ग़ैरज़रूरी चीज़ें या बुक्स आदि का  ढेर न रखें.

* मिरर को बेड की ओर मुंह करके न रखें. फ्लोरिंग के लिए ज्योमैट्रिकल डिज़ाइन का इस्तेमाल करना ग़लत है. जहां इस तरह के डिज़ाइन्स आंखों में  चुभते हैं, वहीं रूम भी भरा-भरा लगता है.

* साथ ही इस तरह की फ्लोरिंग के साथ फर्नीचर मैच करना बहुत मुश्किल हो जाता है.

* फिर भी यदि आप फ्लोरिंग के लिए ज्योमैट्रिकल डिज़ाइन्स इस्तेमाल करना ही चाहते हैं, तो फर्नीचर बहुत ही लाइट व स्लीक वाले इस्तेमाल करें.

* बेडरूम में डल कलर से पेेंट न कराएं. स़फेद रंग या ऑफ व्हाइट जैसे लाइट कलर एंग्ज़ाइटी व डिप्रेशन पैदा कर  सकते हैं.

* साथ ही बेडरूम की दीवारों पर गहरे रंग भी न लगाएं. इसकी बजाय पिंक, पेस्टल या पेल शेड्स सिलेक्ट करें.

* डेकोरेशन में झालर व डोरियां लगाने से बचें, क्योंकि इनका अन्य डेकोरेशन के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होता है.

* ड्रेसिंग टेबल और स्टडी टेबल पर डिम लाइट न लगाएं. यहां हमेशा अच्छी रोशनी होनी चाहिए.

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* लाइटिंग अरेंजमेंट ऐसा हो, जो आंखों पर चुभे नहीं, बल्कि आराम पहुंचाए. अतः हर कमरे की ज़रूरत के अनुसार लाइटिंग
अरेंजमेंट करें.

* बच्चों के कमरे में बहुत ज़्यादा डेकोरेटिव लाइट का इस्तेमाल न करें. इससे पढ़ते व़क्त उनकी आंखों पर तनाव बढ़ता है और चिड़चिड़ापन भी आता है.

* कभी भी बासी फूलों को कमरे में न रखें. डेकोरेशन के लिए जब भी फूलों का इस्तेमाल करें, तो फ्रेश फ्लावर्स ही लें. फ्रेश फ्लावर्स जहां नकारात्मक  ऊर्जा को घर से बाहर निकालने में सहायक होते हैं, वहीं घर के सदस्यों के लिए एनर्जी बूस्टर का काम भी करते हैं.

* बाथरूम में मिरर टाइल्स न लगवाएं. बेडरूम में मेटल फ्रेम वाले बेड की बजाय वुडन बेड का इस्तेमाल करें.

* बेड के पिलो और मैट्रेस न ज़्यादा कड़े होने चाहिए और न ही ज़्यादा नरम. बेड पर बिछाने के लिए भी कॉटन फैब्रिकवाला बेडशीट चुनें. यह बेहद  आरामदायक होता है.

* अक्सर लोग बेडरूम या टॉयलेट्स जैसी ज़रूरी चीज़ों की तुलना में लॉबी यानी खाली स्पेस को ज़्यादा बड़ा रखते हैं. जबकि ऐसा करना जगह की  बर्बादी करना है.

* बेड बिना किसी सहारे के न रखें, बेड को दीवार से सटाकर रखें. यानी आपके बेड के पीछे दीवार होनी चाहिए. बेड कवर, बेडशीट और पिलो कवर्स के  लिए नेचुरल फैब्रिक्स का प्रयोग करें.

* ऐसे में खाली जगह होने पर कई बार वहां पर वॉशिंग मशीन, बच्चों के खिलौनों की टोकरी, साइकिल या फिर प्रेस के लिए जानेवाले कपड़ों की पोटली  आदि रख देते हैं. ऐसी ग़लती न करें. इस जगह को स्टोरेज बनाने की बजाय यहां क्लासिक डेकोरेटिव चीज़ें रखकर घर का ख़ास आकर्षण बना सकते हैं.

– रीटा गुप्ता

लाइटिंग अरेंजमेंट से घर को दें डिफरेंट लुक (Lighting Arrangement for Different Look)

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होम डेकोर में लाइटिंग की काफ़ी अहमियत होती है. लाइटिंग से आप अलग ही एंबियंस क्रिएट कर सकते हैं. अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग मिक्स लाइटिंग से कमरे की ख़ूबसूरती को निखारा जा सकता है, दूसरी तरफ़ टास्क लाइटिंग से अपनी ज़रूरत के हिसाब से काम लिया जा सकता है.

लिविंग रूम

* चार में से तीन कोनों को लाइट करें, जिसमें से एक लाइट किसी आर्ट पीस को फोकस करती हुई हो, जैसे चेयर, प्लांट या वास आदि.

* फ्लोर और टेबल लैंप्स का कॉम्बीनेशन यूज़ करें, जिनमें से कुछ नीचे फ्लोर की तरफ़ ग्लो करते हुए हों और कुछ ऊपर यानी सीलिंग की तरफ़  शाइन करते हुए हों.

* नीचे की तरफ़ फोकस करते हुए लैंप्स के पास सीटिंग और रीडिंग अरेंजमेंट करें.

* डिमर्स भी यूज़ कर सकते हैं, ताकि अपने हिसाब से लाइट कम-ज़्यादा कर सकें.

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डायनिंग रूम

* यहां सबसे ज़रूरी है कि आप अपने डायनिंग टेबल पर फोकस करें और उसकी ब्राइटनेस बढ़ाएं. रूम का वो सबसे ब्राइट स्पॉट होना चाहिए.

* टेबल के ऊपर शैंडेलियर या पेंडेंट यूज़ करें.

* कमरे के दूसरे हिस्सों में इंडायरेक्ट लाइटिंग ही बेस्ट है, यह रिलैक्सिंग और फ्लैटरिंग होती है.

* स्पेशियस जगह या फिर साइडबोर्ड पर छोटे टेबल लैंप्स या वॉल पर अटैच्ड लैंप या कैंडल से ग्लोइंग इफेक्ट दें.

* ग्लास डोरवाले कैबिनेट्स में बैटरीवाले छोटे लैंप्स या बल्ब से लाइटिंग करें. ये बेहद ख़ूबसूरत लगेंगे और आपको सामान ढूंढ़ने में भी आसानी होगी.

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किचन

* ओवरहेड लाइटिंग पर फोकस करें. रात को कुकिंग के व़क्त भी जो आपके लिए मददगार हो. डिमर्स हों, तो और भी अच्छा होगा, ताकि आप अपनी  ज़रूरत के अनुसार लाइट एडजस्ट कर सकें.

* सभी ग्लास के डोर्स वाले कैबिनेट्स में लाइटिंग करवाएं.

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बेडरूम

* यहां का माहौल बेहद सुकून देनेवाला और रोमांटिक टच लिए हुए होना चाहिए.

* बेडरूम में हमेशा सॉफ्ट लाइटिंग ही रखें.

* बेड के साइड में रीडिंग लैंप रखें, लेकिन उसका फोकस बेड पर सीधे न हो.

* फिक्स्ड लाइट्स भी हैं अगर, तो यह ध्यान रखें कि उनका भी फोकस सीधे बेड पर न हो.

* लो वॉट के लैंप्स या बल्ब का भी ऑप्शन रखें. वह आपको रोमांटिक और रिलैक्सिंग फील देंगे.

* बेडरूम के लिए डिमर्स बेस्ट ऑप्शन हैं.

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बाथरूम

* साइड लाइट्स यहां सबसे महत्वपूर्ण हैं.

* बाथरूम के मिरर के साइड्स में लाइट्स बहुत ही ख़ूबसूरत लगती हैं.

* इसके अलावा ओवरहेड लाइट भी बहुत ज़रूरी है, जिससे आप साफ़-साफ़ चेहरा भी देख सकेंगे और बाथरूम की लाइटिंग और एनहांस भी होगी.

* आप चाहें, तो शॉवर के ठीक ऊपर भी लाइट लगवा सकते हैं.

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बचें इन लाइटिंग मिस्टेक्स से

* अगर आपके रूम की सीलिंग थोड़ी नीचे होती है, तो बेहतर होगा कि यहां शैंडेलियर या पेंडेंट का इस्तेमाल न करें.

* फिक्स्ड माउंटेड लैंप्स यहां के लिए बेस्ट ऑप्शन हैं.

* एक ही जगह बहुत ज़्यादा और शार्प लाइटिंग न रखें.

* रूम में लाइटिंग का एक ही सोर्स कभी न रखें. फिक्स सोर्स के अलावा लैंप्स और कैंडल्स भी रखें.

* लैंप्स पर शेड्स या बहुत ज़्यादा ओपेक लाइट अवॉइड करें, वरना आपका रूम बहुत ही ज़्यादा डार्क लगेगा.

* डेलीकेट कपड़ों के आसपास हॉट लैंप्स या लाइट्स कभी न रखें. बेहतर होगा आप फ्लोरोसेंट लाइट्स का इस्तेमाल करें. यह ब्राइट होती हैं, रोशनी  अधिक देकर बिजली की बचत भी करती हैं.

ईज़ी टिप्स

* रेग्युलर यूज़ के लिए सॉफ्ट लाइटिंग का प्रयोग करें, ताकि आंखों पर ज़ोर न पड़े.

* फर्नीचर, आर्ट पीस या डेकोरेटिव एक्सेसरीज़ को हाइलाइट करने के लिए हेलोजन लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है.

* ख़ास ओकेज़न के लिए दो तरह की लाइट्स का प्रयोग करें. ऐसा करते समय कलर कॉम्बीनेशन का ख़ास ध्यान रखें, ताकि लाइट का ख़ूबसूरत  इफेक्ट देखने को मिले.

* मूड लाइटिंग के लिए लेड का प्रयोग करें, क्योंकि ये कम पावरवाले होते हैं.

– विजयलक्ष्मी

वास्तु शास्त्र के नियम (Rules of vastu)

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आपके घर में ख़ुशियां ही ख़ुशियां हों, इसके लिए प्यार और समझदारी के साथ-साथ घर को वास्तुशास्त्र के अनुसार सजाना भी ज़रूरी है. घर का वास्तु करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

* उत्तर दिशा में दक्षिण दिशा से ज़्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए. इसी तरह पूर्व में पश्‍चिम से ज़्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए.

* मकान की ऊंचाई दक्षिण और पश्‍चिम में ज़्यादा होनी चाहिए. मकान की सबसे ऊपरी मंज़िल उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोण में होनी चाहिए.

* उत्तर और पूर्व में बरामदा होना चाहिए व उस ओर की ज़मीन सामान्य ज़मीन से निचले स्तर पर होनी चाहिए. इसी तरह दूसरी छत भी अन्य हिस्से  से निचले स्तर पर होनी चाहिए.

* छत हमेशा उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व की ओर होनी चाहिए. दक्षिण और पश्‍चिम में नहीं होनी चाहिए.

* मकान की चारदीवारी उत्तर और पूर्व में नीची और पश्‍चिम व दक्षिण में ऊंची होनी चाहिए.

* कार पार्किंग, नौकरों के लिए कमरा, आउटहाउस आदि दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्‍चिम कोण में होने चाहिए. उनके कमरों की दीवारों से उत्तर और पूर्व  की दीवार जुड़नी नहीं चाहिए और उनकी ऊंचाई प्रमुख भवन से छोटी होनी चाहिए.

* पोर्च, पोर्टिको या बालकनी उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए. सुख, समृद्वि व स्वास्थ्य के लिए यह लाभदायक है.

* बेडरूम में बेड के लिए आदर्श स्थिति कमरे का मध्य स्थान माना गया है या फिर दक्षिण-पश्‍चिम कोना. बेड को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार से दूर  रखना चाहिए. दक्षिण या पश्‍चिम की दीवार से सटाकर रखा जा सकता है.

* मकान का ज़्यादा खुला हिस्सा पूर्व और उत्तर में होना चाहिए.

* रसोई में फ्रिज, मिक्सर और भारी सामान दक्षिण और पश्‍चिम दीवार से सटाकर रखें.

* मकान के सभी दर्पण उत्तर या पूर्व की दीवार पर होने चाहिए. दक्षिण और पश्‍चिम की दीवार पर दर्पण नहीं लगाना चाहिए. टॉयलेट के वॉश बेसिन  भी उत्तर या पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए.

* पहली मंज़िल पर दरवाज़े और खिड़कियां ग्राउंड फ्लोर से कम या ज़्यादा होनी चाहिए, एक समान नहीं होनी चाहिए. संभव हो, तो अपना मकान  बनवाते समय अपनी जन्मपत्रिका के अनुसार प्रवेशद्वार बनवाएं, परंतु इतना ज़रूर ध्यान रखें कि प्रवेशद्वार मकान के किसी भी कोण में न हो.

* द़फ़्तर या अध्ययन कक्ष में टेबल को दक्षिण या पश्‍चिम दिशा में रखें, जिससे उसमें बैठनेवाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे.

* मकान के उत्तर-पूर्व कोण में कचरा बिल्कुल न डालें. उस जगह को साफ़-सुथरा रखें.

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* प्रमुख बैठक के कमरे में सोफा आदि बैठने का फ़र्नीचर पश्‍चिम या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए. मकान मालिकों को पूर्व या उत्तर दिशा में मुख  करके बैठना चाहिए.

* तिजोरी इस तरह रखनी चाहिए कि उसकी पीठ दक्षिण दिशा में हो अर्थात् खोलते समय तिजोरी का मुंह उत्तर में और हमारा मुंह दक्षिण में होना  चाहिए.

* मकान के पश्‍चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्‍चिम भाग में वज़नी सामान रखा जाना चाहिए.

* डाइनिंग रूम में भोजन करते समय पूर्व या पश्‍चिम की ओर मुख करके भोजन करें.

* हमेशा दक्षिण या पूर्व में सिर रखकर ही सोना चाहिए.

* सोलार हीटर मकान के दक्षिण-पूर्व में रखना चाहिए. मकान पर स्थित पानी की टंकी हमेशा दक्षिण-पश्‍चिम कोने में होनी चाहिए. सीढ़ी और ल़िफ़्ट  पश्‍चिम, दक्षिण दिशा में होनी चाहिए.

* बरसाती पानी की निकासी पश्‍चिम से पूर्व, दक्षिण से उत्तर और अंत में मकान के उत्तर-पूर्व कोने से होनी चाहिए.

* यदि आपके घर में लाल फूल उगते हों तो वे बाहर से दिखाई नहीं देेने चाहिए.

* बगीचे में यदि पत्थर की मूर्ति या पत्थर सजाकर बगीचा बनाया गया हो तो उसे दक्षिण-पश्‍चिम कोने में बनाना चाहिए. यह कोना भारी सामान  रखने के लिए उपयुक्त है.

* दो कमरों के दरवाज़े एकदम आमने-सामने नहीं होने चाहिए.

* चौकोर या आयताकार प्लॉट सर्वश्रेष्ठ है, किंतु बहुत ज़्यादा लंबी आयताकार जगह उचित नहीं है.

* पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ऊंची दीवार या अन्य कोई निर्माण नहीं करना चाहिए. ये वास्तु के नियमों का उल्लंघन होगा.

* पूजा स्थान के लिए घर का उत्तर-पूर्व कोना या ईशान कोण सर्वोत्तम स्थान है. मूर्ति का मुंह पूर्व या पश्‍चिम की दिशा में होना चाहिए.

* रसोई के लिए सर्वोत्तम स्थान पूर्व-दक्षिण कोना यानी अग्नि कोण माना गया है.

* भवन का मध्य भाग खुला रहने देें, अथवा अन्य कमरों में आने-जाने के रास्ते की तरह इस्तेमाल करें, क्योंकि इसे ब्रह्मस्थान माना गया है.

* उत्तर-पूर्व दिशा में बाथरूम कभी भी नहीं होना चाहिए, विशेषकर टॉयलेट. जिस फ्लैट में भी ऐसा है, वहां के लोग कभी भी प्रगति व समृद्धि प्राप्त नहीं  कर पाते हैं.

स्मार्ट होम मैनेजमेंट आइडियाज़ (Smart Home Management Ideas)

Home Management

घर के हर कोने को साफ़ और व्यवस्थित रखना चाहती हैं, तो अपनाएं ये स्मार्ट होम मैनेजमेंट ट्रिक्स और कहलाएं स्मार्ट होम मैनेजर. Home Management 

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लिविंग रूम
* सबसे पहले तो लिविंग रूम को फर्नीचर और एंटीक चीज़ों से भरने की ग़लती न करें. जितना ज़रूरी है, उतने ही फर्नीचर और डेकोरेटिव पीसेस रखें.  इससे मैनेज करना आसान हो जाता है.

* सोफा कवर या पर्दे थोड़े डार्क कलर के सिलेक्ट करें. ये जल्दी गंदे नहीं लगते.

* अगर लाइट कलर इस्तेमाल कर रही हैं, तो बेहतर होगा कि सोफा कवर, पर्दे, कुशन कवर्स आदि के एक से ज़्यादा पेयर रखें, ताकि इसकी क्लीनिंग  आसान हो जाए.

* कई सारे फोटोफ्रेम्स की बजाय सारे फोटो का कोलाज बनाकर एक-दो फ्रेम लगाएं. इससे लिविंग रूम को क्लीन लुक मिलेगा.

* सोफे के पीछे की जगह को स्मार्टली यूज़ करें. एक्स्ट्रा ब्लैंकेट, कुशन्स, डेकोरेटिव आइटम्स को बक्से में भरकर सोफे के पीछे रख दें. एक्स्ट्रा बुक्स  को भी आप ट्रंक में भरकर यहां रख सकती हैं.

* अपना एंटरटेनमेंट कॉर्नर एक बार चेक करें. डीवीडी या सीडी का कलेक्शन चेक करें. जो मूवी आप देख चुके हैं और जिसका कलेक्शन आपको नहीं  रखना है, उसे हटा दें. गैरज़रूरी चीज़ों को घर में न रखें. इससे घर मैनेज करना आसान हो जाएगा और समय की भी बचत होगी.

* हर डेकोरेटिव आइटम या पीस को ये सोचकर सहेजती न जाएं कि इतने पैसे ख़र्च किए थे या अब कहां मिलेंगी ऐसी चीज़ें. इससे आपका घर एंटीक चीज़ों का स्टोर बन जाएगा और आपके लिए उन्हें मैनेज करना भी मुश्किल हो जाएगा. अगर नई चीज़ें घर में लाती हैं, तो पुरानी चीज़ों को हटाना ही पड़ेगा.

* यदि आपने लिविंग रूम में लोटस पॉन्ड, वास आदि रखे हैं, तो उसकी क्लीनिंग का ख़ास ख़्याल रखें. उसका पानी रोज़ाना बदलती रहें, ताकि  बीमारियां न पनपने पाएं.

* क़िताबों को शीशे की आलमारी में रखें. इससे क़िताबों को ढूंढ़ना आसान हो जाएगा. हां समय-समय पर इनकी सफ़ाई करना न भूलें.

* यह सोचकर सफ़ाई को टालती न रहें कि इकट्ठे ही सफ़ाई करेंगी. हर 15 दिन में सफ़ाई करती रहें. इससे जहां आपका घर हेल्दी बना रहेगा, वहीं क्लीन  भी लगेगा.

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किचन मैनेजमेंट

* जो चीज़ें अक्सर इस्तेमाल में आती हैं, उन्हें एक ही जगह रखें, ताकि उन्हें ढूंढ़ने में समय बर्बाद न हो.

* क्रॉकरी को भी उसके यूज़ के हिसाब से अरेंज करें. रोज़ाना या अक्सर यूज़ होनेवाली क्रॉकरी निचले शेल्फ में रखें और कभी-कभार होनेवाली क्रॉकरी  को ऊपर के शेल्फ में रखें.

* गैस के पास ही कुकिंग रेंज सेट करें जैसे कि मसालों, नमक, शक्कर के जार, कुकिंग पैन, कड़ाही आदि को गैस के पास के शेल्फ में ही रखें, ताकि  इस्तेमाल में आसानी हो.

* किचन में हर समय शॉपिंग लिस्ट लगाकर रखें. जैसे ही कोई चीज़ आउट ऑफ स्टॉक होती है, फ़ौरन उसे लिस्ट में शामिल कर लें. इससे आपको पता  रहेगा कि किचन में क्या चीज़ें नहीं हैं और अंतिम समय में होनेवाली भागदौड़ से आप बच जाएंगे.

* कई महिलाओं की आदत होती है कि कोई भी प्लास्टिक कंटेनर खाली होता है, तो उसे किचन में यूज़ करने लगती हैं. इससे किचन अन ऑर्गनाइज़्ड  तो लगता ही है, मेसी भी लगने लगता है. इसलिए बेहतर होगा कि प्लास्टिक कंटेनर्स का मोह छोड़ें और जितनी ज़रूरत हो, उतने ही कंटेनर्स रखें.

* फ्रिज को गैरज़रूरी चीज़ों का स्टोरेज युनिट न बनाएं. ख़राब हो चुकी सब्ज़ियों, बासी चीज़ों को रोज़ाना हटाती रहें. इससे फ्रिज आसानी से मेंटेन तो  होगा ही, आपके हेल्थ के लिए भी ये ज़रूरी है.

* किचन में साफ़-सफ़ाई का ख़ास ख़्याल रखें. एग्ज़ॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं. इससे किचन में धूल-मिट्टी कम जमती है और किचन क्लीन रहता है.

* किचन प्लेटफॉर्म के पास एक प्लास्टिक बैग टांगकर रखें और कुछ भी काटने के बाद कचरा उसमें ही डालें. ऐसा करने से किचन साफ़-सुथरा रहेगा.  साथ ही नैपकिन्स भी ज़रूर रखें. हाथ पोंछने के लिए सूखे तौलिए या हो सके तो डिस्पोज़ेबल पेपर नैपकिन का इस्तेमाल करें.

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बेडरूम

* बेडरूम के ड्रॉवर्स का इस्तेमाल अक्सर हम ग़ैरज़रूरी चीज़ों को स्टोर करने के लिए करते हैं और जब उन चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है, तो उन्हें ढूंढ़ने में  पूरा बेडरूम ही तहस-नहस कर देते हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. हर चीज़ के लिए एक जगह निर्धारित करें और उसे इस्तेमाल के बाद वहीं रखें.  इससे  आपका बेडरूम तो ऑर्गनाइज़ रहेगा ही, आपके समय की भी बचत होगी.

* बेड स़िर्फ सोने के लिए नहीं होते. इसके नीचे-ऊपर और आसपास की जगह को आप स्टोरेज के लिए स्मार्ट्ली यूज़ कर सकते हैं. लेकिन इसका ये  मतलब नहीं कि आप कहीं भी कुछ भी रख दें.

* इसके लिए आप कलरफुल स्टोरेज ट्रे और प्लास्टिक बिन लेकर आएं और इसमें सामान रखें. इसे आप बेड के नीचे या साइड में अच्छी तरह अरेंज  कर सकती हैं. इन ट्रे और प्लास्टिक बिन्स को समय-समय पर क्लीन करती रहें.

* बेडरूम के हर फर्नीचर यहां तक कि नाइट टेबल का सिलेक्शन करते समय भी स्टोरेज को ध्यान में रखें.

* छोटे घरों में ड्रेसिंग टेबल भी अक्सर बेडरूम में ही रखा जाता है. कॉस्मेटिक्स के लिए कलरफुल ट्रे यूज़ करें. ज्वेलरी और
एक्सेसरीज़ के लिए हैंगिंग ऑर्गेनाइज़र का इस्तेमाल करें. इसमें कई पॉकेट्स बने होते हैं और इसमें आपके ईयरिंग्स, ज्वेलरी, वॉचेस आदि अच्छे से  अरेंज हो जाते हैं.

* हर सुबह उठने के बाद नियम बनाएं कि पांच मिनट बेडरूम ऑर्गनाइज़ करने के लिए देंगे. सारे बेडशीट, पिलो, रजाई वगैरह फोल्ड करके रखें. कोई  चीज़ ग़ैरज़रूरी लगे, तो उसे हटा दें. इससे आपका बेडरूम हमेशा मैनेज रहेगा.

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वॉर्डरोब मैनेजमेंट

* हर सीज़न के बाद अपना वॉर्डरोब चेक करें. उसमें से जो भी कपड़े अगले सीज़न में इस्तेमाल में न आनेवाले हों, उन्हें वॉर्डरोब से हटा दें.

* जिन कपड़ों के बारे में तय नहीं कर पा रहे हैं कि पहनेंगे या  नहीं, उन्हें भी वॉर्डरोब से बाहर निकाल दें.
* इसी तरह जब भी नए कपड़े, खिलौने, बुक्स आदि ख़रीदें,  तो पुरानी और अनुपयोगी चीज़ों को निकाल दें. इससे  ग़ैरज़रूरी चीज़ों से घर भरा नहीं रहेगा और मैनेज करना भी  आसान हो जाएगा.

* हर सीज़न के कपड़े अलग-अलग रखें और एक सीज़न के  ख़त्म होते ही वो कपड़े अच्छी तरह से क्लीन करके पैक  करके रख दें, ताकि अगले सीज़न में आसानी से यूज़ कर  सकें. इससे आपका वॉर्डरोब क्लीन और मैनेजेबल हो  जाएगा.

* एक जैसे कपड़े, जैसे- शर्ट, सूट, वेस्टर्न वेयर, इंडियन वेयर, पार्टी वेयर आदि को वॉर्डरोब के एक हिस्से में रखें. इससे ज़रूरत पड़ने पर आपको पूरा वॉर्डरोब ढूंढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

* हैवी सूट्स, साड़ियां, बच्चों के हैवी कपड़े, जेंट्स सूट, जो कभी-कभार ही पहने जाते हैं, उन्हें सूटकेस में रख दें.

* कई पॉकेट वाले हैंगिंग प्लास्टिक बैग्स को भी वॉर्डरोब में लटका कर रख दें. इसमें आप ज्वेलरी, कॉस्मेटिक्स, एक्सेसरीज़ आदि रख सकती हैं.

* स्टोरेज स्पेस बढ़ाने के लिए ड्रॉवर्स बनवाएं. इनमें कपड़े मैनेज करना भी आसान होता है.

* कपड़ों को हमेशा आयरन करके ही वॉर्डरोब में रखें. इससे जहां वॉर्डरोब आर्गनाइज़्ड रहेगा, वहीं कपड़े भी अच्छी कंडीशन में रहेंगे.

* अच्छी क्वालिटी के हैंगर्स ख़रीदें और इन पर ही कपड़े रखें. इससे कपड़ों पर सिलवटें नहीं पड़ेंगी और उनमें जंग लगने की संभावना भी नहीं रहेगी.

 
कुछ काम की बातें

* ऐसी कोई चीज़, जो अच्छी कंडीशन में हो, पर आपके काम न आती हो, उसे फेंकने से अच्छा है किसी को दान कर दें.

* बिज़नेस या विज़िटिंग कार्ड्स को मैनेज करना मुश्किल होता है, इसलिए बेहतर होगा कि उसे फोन में सेव कर लें या डिजिटल कॉन्टैक्ट लिस्ट
बना लें.

* ज़रूरी पेपर्स और बिल्स को यहां-वहां रखने की बजाय उसे फाइल करने की आदत डालें. इससे उनके खोने का डर नहीं रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर वो  आसानी से मिल भी जाएंगे.

घर को क्लीन लुक देने के लिए टूटी-फूटी, ख़राब हो चुकी और ग़ैरज़रूरी चीज़ों को तुरंत हटा दें, जैसे-

* एक्सपायर हो चुके फूड आइटम्स

* शॉपिंग, रेस्टोरेंट के बिल्स, जो ज़रूरी न हों

* टूटे हुए बेकार के इलेक्ट्रॉनिक या किचन अप्लायंसेस, गेम्स आदि

* पुराने कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी

* बच्चों के पुराने खिलौने

* ग़ैरज़रूरी कपड़े या अन्य सामान

बेडरूम के लिए वास्तु गाइड ( Architectural Guide to the bedroom)

Architectural Guide

यदि आप वैवाहिक जीवन में ख़ुशी चाहते हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बेडरूम हवादार और शांत हो. कमरे में होनेवाली बातचीत की आवाज़ बाहर न जाने पाए. इससे दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ती है. यहां वास्तुशास्त्री डॉ. प्रेम गुप्ता बेडरूम के वास्तु से जुड़ी कई उपयोगी बातों की जानकारी दे रहे हैं. Architectural Guide

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* हर पूर्णिमा के दिन सोने के पानी (कोई भी गोल्ड ज्वेलरी को पानी में डालकर निकाल लें और इस पानी का इस्तेमाल करें) से स्वस्तिक बनाएं.

* बेडरूम घर का सबसे ख़ास हिस्सा होता है. यहां रखी हर चीज़ का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है, जैसे- फोटो, फ्लावर पॉट, पलंग आदि. यहां  पति-पत्नी अपना मुस्कुराता हुआ साथ का फोटो लगा सकते हैं, पर फोटो पैरों की ओर न लगाएं.

* कमरे में रोमांटिक पोज़वाले युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं.

* रोमांटिक पोज़वाले सेक्सी क्रिस्टल जोड़े व फोटो से बेडरूम को सजाएं.

* हर अमावस्या को काले तिल उत्तर/पश्‍चिम कोने में रखें.

* रोमांस व प्राइवेसी बनी रहे, इसके लिए ध्यान रहे कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले.

* चांदी की कटोरी में कपूर रखें.

* आपसी प्यार और बेडरूम की ख़ूबसूरती के लिए मनी प्लांट्स भी लगाए जाते हैं. ये शुक्र के कारक हैं. मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर  होते हैं.

* बेडरूम में हल्की गुलाबी रंग की रोशनी होने से कपल्स में प्रेम बना रहता है.

* शिव रूद्राक्ष गुलाबजल में भिगोकर रखें.

* वास्तु के अनुसार हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोएं, ताकि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार आप दीर्घायु और गहरी नींद प्राप्त कर सकें  आरामदायक व भरपूर नींद से दांपत्य जीवन अधिक सुखद बनता है.

* पत्नी पति के बाईं ओर सोए.

* यदि कमरे में ड्रेसिंग टेबल हो, तो इस बात का ख़्याल रखें कि सोते समय आपका प्रतिबिंब आईने पर न पड़ने पाए. यदि ऐसा हो, तो आईने कोढंक दें.

* लव बर्ड, मैंडरीन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं. इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा कमरे में रखें.

* बेडरूम में हल्की व ख़ूबसूरत लाइट व्यवस्था हो, पर रोशनी सीधी पलंग पर न पड़े.

* वास्तु के अनुसार बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.

* फिर भी बेडरूम में बाथरूम रखना चाहते हों, तो नैऋत्य कोण में बनवाएं. यदि ऐसा संभव न हो, तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्‍चिम) में भी बाथरूम  बनवाया जा सकता है.

* अगर बेडरूम में बाथरूम है, तो हर पूर्णिमा या शुक्रवार को नमक के पानी से बाथरूम धोएं.

* ऐसे कपल्स, जो संतान सुख पाना चाहते हैं, वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शानेवाली फोटो अपने बेडरूम में लगाएं.

* बेड के नीचे मोर पंख रखें.

* बेडरूम में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक नहीं है, फिर भी यदि चाहें,
तो राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं.

* यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह सेे दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है, तो सुंदर से बाउल मेें पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के  साथ मिलाकर रखें.

* क्रिस्टल क्वार्ट्ज़ स्टोन के बने शोपीस पति-पत्नी के प्रेम को बढ़ाते हैं. ये क्रिस्टल गुलाबी रंग के होते हैं और इनसे सकारात्मक ऊर्जा का स्तर बहुत  अच्छा होता है.

* लाल कपड़े की थैली में तांबे व पीतल के सिक्के रखें.

* कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं दिखाई देती हैं, जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि. ऐसे दृश्यों से  बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें.

यह भी पढ़ें: टॉप 25 वास्तु टिप्स: बिना तोड़-फोड़ के कैसे दूर करें वास्तु दोष?

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ऐसा न करें

* बेडरूम में आईना न लगाएं.

* कमरे में कभी भी टूटा हुआ शीशा नहीं रखें.

* उत्तर दिशा में बेडरूम नहीं होना चाहिए. यदि है, तो मोतियों का बंदनवार लगाएं.

* पलंग दरवाज़े के सामने न हो. यदि हो, तो उत्तर/पश्‍चिम कोने में पिरामिड के नीचे मूंगा रत्न रखें.

* बेडरूम के दरवाज़े को खोलते या बंद करते समय किसी तरह की कोई आवाज़ नहीं होनी चाहिए.

* कैंची, प्रेस और सुई बेड से दूर ही रखें. बेडरूम में पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग न लगाएं.

* ख़राब एयर कंडीशनर या पंखा जिसके चलने पर आवाज़ हो, उसे तुरंत ठीक करवा लें. इसके कारण कपल्स के संबंधों में परेशानी पैदा हो सकती है.

* कमरे में रॉट आयरन के बेड न रखें. जहां तक हो सके, लकड़ी का ही बेड रखें. बेडरूम में मकड़ी के जाले भूलकर भी न हों.
भीनी-भीनी ख़ुशबू व रोमांटिक म्यूज़िक

* बेडरूम में सुगंधित कैंडल, रूम फ्रेशनर्स व ऑयल ज़रूर रखें.

* परफ्यूम सिलेक्ट करते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि परफ्यूम व डियो जो भी इस्तेमाल करें, वह ऐसा हो जिसकी ख़ुशबू आप दोनों को  पसंद हो.

* मंगलवार को मोगरा व शुक्रवार को गुलाब का इत्र अवश्य छिड़कें.

* पार्टनर का मूड सेक्सी बनाने के लिए रोमांटिक म्यूज़िक लगाएं.

– ऊषा पन्नालाल गुप्ता

यह भी पढ़ें: करियर में कामयाबी के लिए इफेक्टिव वास्तु ट्रिक्स

वास्तु से जुड़े 20 सवाल-जवाब (20 Questions and answers related to architectural)

architectural

 

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वास्तुशास्त्र के अनुसार पति-पत्नी को कहां सोना चाहिए?
आपको बिस्तर पर दक्षिण-पश्‍चिम की ओर तथा आपकी पत्नी को दक्षिण-पूर्व की ओर सोना चाहिए.

हमारे बेडरूम की दक्षिण दिशा की दीवार में दरार आ गई है. क्या इससे कोई नुक़सान है?
वैसे तो किसी भी रूम की किसी भी दीवार पर दरार का होना अशुभ माना जाता है, पर दक्षिण दिशा में दरार का रहना उस रूम विशेष में होनेवाले कार्यों में बाधा डालता है, जैसे- आपके बेडरूम की दक्षिण दिशा की दीवार पर दरार काम सुख में कमी एवं वैचारिक मतभेदों को बल दे सकता है.

अक्सर यह सुनने में आता है कि बड़ों को दक्षिण में सिर व उत्तर में पैर रखकर सोना चाहिए. क्या यही नियम बच्चों पर भी लागू होता है?
जी हां, यह नियम सभी पर लागू होता है, पर यदि बच्चे पूर्व की तरफ़ सिर एवं पश्‍चिम की ओर पैर रखें, तो और उत्तम होगा. उत्तर दिशा की तरफ़ कभी भी सिर करके नहीं सोना चाहिए.

हमारे मकान में यदि अज्ञानतावश दक्षिण में ज़्यादा खिड़कियां हों और उत्तर में कम, तो ऐसे में क्या करना चाहिए?
यह स्थिति ठीक नहीं है, इनके दोषों से बचने के लिए दक्षिण की कुछ खिड़कियां बंद करके गहरे नीले रंग के डबल परदे डाल दें.

मैंने सुना है, वास्तु के दोष या गुण से शारीरिक शक्ति पर गहरा असर पड़ता है. यदि यह बात सच है तो कृपया बताएं कि भूमिगत पानी की टंकी यदि उत्तर दिशा में हो, तो कौन-सी शक्ति पर क्या और कौन-सा प्रभाव पड़ता है?
इससे घर के प्रमुख व ज़िम्मेदार व्यक्ति की छठी इन्द्रिय मजबूत होती है और उन्हें उचित पूर्वाभास की शक्ति प्राप्त होती है.

टेरेस पर हम टीवी एंटीना किस दिशा में लगा सकते हैं?
एंटीना दक्षिण-पश्‍चिम कॉर्नर में लगाना ठीक रहेगा.

वास्तु विज्ञान की बड़ी-बड़ी जटिल परिभाषाएं पढ़ने में आती हैं, फिर भी कुछ आधा-अधूरा सा लगता है, एकदम सरल भाषा में बताएं कि वास्तु शास्त्र क्या है?
प्रकृति के अनुरूप रहने का अत्यंत प्रभावशाली ज्ञान-विज्ञान है यह अर्थात् सुख-शांति व समृद्धि देने वाला अद्भुत विज्ञान.

अचानक कांच का टूटना कोई दोष होता है?
कभी किसी वजह से कांच का टूटना दोषपूर्ण नहीं होता है, परन्तु अचानक बार-बार कांच का टूटना या चटकना निश्‍चित ही बड़े दोष का कारण हो सकता है.

खेल के मैदान के लिए सबसे उपयुक्त स्थान कौन-सा है?
पूर्व या उत्तर, विशेष परिस्थिति में पूर्वी-उत्तर के कोने में भी खेल का मैदान बना दें.

हमने उत्तर की दिशा में आईना लगा रखा है, पता नहीं किस कारण से वह बार-बार टूट जाता है?
टूटने का कारण ढूंढ़ें, यदि कोई स्पष्ट कारण समझ में नहीं आए, तो चांदी का एक सिक्का आईने के पीछे दीवार के सहारे लगा दें.

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कृपया यह बताएं कि नहाते समय हमारा मुंह किस दिशा में होना चाहिए?
वैसे तो नहाते समय मुंह पूर्व, पश्‍चिम और उत्तर की ओर रख सकते हैं, पर यदि आप बाथटब का उपयोग करते हैं, तो उस समय आपका मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए.

बैंक में मुझे एक लॉकर लेना है, कृपया बताएं मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर खुलनेवाला लॉकर लें, इस लॉकर के सामने खिड़की हो, तो उत्तम होगा. ध्यान रहे, सामने कोई द्वार न हो.

क्या एक बिल्डिंग के सभी फ्लैट वास्तु के अनुरूप बन सकते हैं?
जी हां, सारे फ्लैट वास्तु नियमों के आधार पर बन तो सकते हैं, पर उनकी शुभता में कुछ अंतर अवश्य आएगा.

क्या बेडरूम में टेलीफोन रख सकते हैं? यदि हां, तो किस तरफ़ रखें?
टेलीफोन को पश्‍चिम या दक्षिण-पूर्वी कोने में रखना चाहिए.

मैं व्यापारी हूं. पहले माल का उत्पादन बहुत धीमा होता था और मांग ज़्यादा रहती थी, कुछ वास्तुदोष निवारण के बाद उत्पादन तो संतोषजनक हो गया, पर माल की मांग घट गई है. इसका क्या कारण हो सकता है?
निश्‍चित ही आपने कुछ संशोधन किया होगा, पर संशोधन प्रक्रिया में कुछ कमी और ग़लतियां रहने के कारण मांग की गति धीमी पड़ गई है. आप पुनः नए सिरे से वास्तु दोष का परीक्षण कर संशोधन कराएं और मन में विश्‍वास रखें कि सब ठीक हो जाएगा.

बैंक में हमारा लॉकर पश्‍चिम की ओर खुलता है. वास्तु नियमों के हिसाब से क्या यह उचित है?
लॉकर को दक्षिण दीवार के सहारे होना चाहिए और उसे उत्तर या पूर्व की ओर खुलना चाहिए.

प्राकृतिक आपदाएं क्यों आती हैं? क्या किसी देश-प्रदेश के वास्तु से इसका कोई संबंध है?
वास्तु विज्ञान पंच तत्वों एवं विभिन्न ऊर्जा पर आधारित है. जब इन पंच तत्वों एवं ऊर्जाओं के समीकरण में कोई असंतुलन होता है, तो बाढ़, तूफान या अन्य आपदाएं आती हैं. इन तत्वों में हुए असंतुलन का व्यापक प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है. कहते हैं, हर दिशा के कोई न कोई अधिष्ठाता देवता होते हैं, कृपया इसका पूरा विवरण दें कि किस दिशा के कौन-कौन से देवता अधिष्ठाता हैं? दिशा और इनके अधिष्ठाता देवता इस प्रकार हैं- पूर्व दिशा के सूर्य एवं इन्द्र, पश्‍चिम दिशा के वरुण, उत्तर दिशा के सोम एवं कुबेर, दक्षिण दिशा के यम, ईशान के शिव एवं सोम, आग्नेय के ब्रह्मा एवं अग्नि, नैऋत्य के निऋति, वायव्य के वायु हैं.

हम अपने नए ऑफिस की सीलिंग में हल्का गुलाबी रंग कराना चाहते हैं. क्या यह ठीक रहेगा?
सीलिंग में सफेद रंग ही कराएं. भूलकर भी किसी दूसरे रंग के बारे में न सोचें.

मकान की मरम्मत करानी है, उसके लिए मज़दूर आदि हमारे मकान के बाहर अहाते में ही रहेंगे. उन्हें अस्थायी स्थान किस दिशा में देना श्रेष्ठकर होगा?
उनके रहने की व्यवस्था उत्तर-पश्‍चिम में करें.

यदि नींव की मिट्टी में मूंगा रत्न दिखलाई दे, तो यह कैसा लक्षण है?
यह बेहद ही शुभ लक्षण है, क्योंकि वह भूमि अत्यंत शुभ मानी जाएगी.

वास्तु से सुधारें बिगड़े काम (Repair of damaged architectural work)

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अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं, अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं, अच्छे स्वभाव के होते हैं, पर इन सब के बावजूद उन्हें कई बार असफलता ही हाथ लगती है. उनका काम बिगड़ जाता है फिर चाहे वो घर, परिवार, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो. वास्तु द्वारा बिगड़े हुए कार्यों को सुधारा जा सकता है. आइए, इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ड्रॉइंगरूम
* कभी भी ड्रॉइंगरूम यानी बैठक में भारी परदे नहीं लगाएं. इससे धूल-मिट्टी परदे में चिपक जाती है, जिससे गृहिणियां अक्सर बीमार पड़ जाती हैं.
* जहां तक हो सके लकड़ी के फ़र्नीचर से कमरे को सजाएं, जैसे- कुर्सी, सोफा, टेबल आदि. दरअसल लकड़ी का फ़र्नीचर होने से सूर्य-प्रकाश, हवा आदि से प्रवाहित होनेवाली ऊर्जा व्यक्ति विशेष पर सीधे पड़ती है यानी लकड़ी इन्हें अपने में सोख नहीं लेती. इसके विपरीत लोहे, स्टील जैसी अन्य
धातुओं के फ़र्नीचर होने पर सभी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है.
* बहुत भारी पीतल के सजावट के सामान ड्रॉइंगरूम में दक्षिण व नैऋत्य दिशा में रखें.
* ताज़े फूल बैठक में लगाने से उनकी सुगंध से घर का वातावरण अच्छा रहता है, जबकि नकली फूल बनावटी जीवन का प्रतीक हैं.
* कई बार व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित बातें ड्रॉइंगरूम में करते हैं. ऐसे में अपनी दिशा के अनुरूप बैठकर वार्तालाप करें यानी जो दिशा व्यक्ति विशेष के अनुकूल हो, यदि वो वहां बैठें, तो सदैव सफलता हाथ लगती है. बिगड़े हुए काम बनते हैं.

कमरे का रंग
ड्रॉइंगरूम का रंग अगर गृहस्वामी से मैच नहीं करता, तो कभी भी उसका मन बैठक में नहीं लगेगा. उसका जो भी व्यवसाय है, उसमें वो सफल नहीं हो पाएगा. हल्के रंग ख़ासकर क्रीम रंग, जो सबको सूट करता है अर्थात् किसी भी लग्न प्रधान व्यक्ति को सूट करता है, इसे कमरे में लगवाएं. वैसे भी यह लक्ष्मी का प्रिय रंग है.

बेडरूम
इसका चुनाव व्यक्ति विशेष की दिशा पर निर्धारित किया जाता है. कमरे का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र न रखें. हवा आने के लिए सही खिड़की लगी होनी चाहिए. बेडरूम में अपने किसी भी मित्र का चित्र नहीं लगाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव संचित होता है.

कमरे का रंग
बेडरूम में गहरे रंग के प्रयोग से बचें. कमरे में सदैव हल्के रंग लगाएं. इससे संबंधों में मधुरता बनी रहती है.

कमरे में पलंग
कमरे का पलंग लकड़ी का ही हो, किसी धातु का न हो. पलंग की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई व्यक्ति के अनुरूप होनी चाहिए. बिस्तर नर्म होना चाहिए और चद्दर अधिकांशत: स़फेद रखनी चाहिए या हल्के क्रीम रंग की. व्यक्ति के अनुरूप रंग नहीं हुआ, तो व्यक्ति तकलीफ़ में आ जाता है. अत: इन पहलुओं पर भी ग़ौर करें.

बच्चों की पढ़ाई
बच्चों का कमरा या मेज़ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. सबसे शुभ पूर्व होता है, क्योंकि यहां से सूर्य का प्रकाश आता है. उनके कमरे में थोड़े खिलौने वगैरह लगा दें और किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति का चित्र लगाएं, जो उन्हें हमेशा प्रेरित
करते रहें कि कैसे इन महापुरुषों ने जीवन में संघर्ष किया और महान बने. उनसे कभी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा सकारात्मक बातें ही करें.

पूजाघर
घर में मंदिर पूर्वोत्तर (ईशान) दिशा में शुभ है. पश्‍चिम और दक्षिण दिशा में मंदिर नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा मंदिर में मूर्ति बहुत ज़्यादा ऊंची या टूटी अथवा भगवान का चित्र कटे-फटे अवस्था में नहीं रखना चाहिए. जहां तक हो सके, केवल अपने आराध्य देव की और दो-तीन मूर्ति ही रखें. टूटी हुई, खंडित मूर्ति, पुरानी जगह या मंदिर से लाई हुई मूर्ति न रखें. धूप-दीप जलाएं, घंटी व शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है. शुद्ध वायु का प्रसार होता है.

रसोईघर
वेद, उपनिषद एवं समस्त वास्तु ग्रंथों के अनुसार, रसोईघर को अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो वायव्य कोण में भी रसोई बना सकते हैं. यदि यह भी संभव न हो, तो ईशान कोण को छोड़कर किसी भी कमरे के अग्नि कोण में रसोईघर बना सकते हैं, परंतु क्रमानुसार उसकी शुभता कम होती जाती है. ध्यान रहे, भोजन बनाते समय चेहरा पूर्व में रहे.

टॉयलेट और बाथरूम
प्राय: लोग बाकी सभी चीज़ें साफ़ रखते हैं, पर टॉयलेट व बाथरूम पर ध्यान नहीं देते. इसके कारण कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हड्डी तक टूट जाती है. स्नानघर पूर्व दिशा और टॉयलेट दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में होना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉयलेट की सफ़ाई का विशेष रूप से ध्यान रखें.
विशेष: ईशान/नैऋत्य कोण में बाथरूम सदैव अशुभ होता है.

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भवन निर्माण के समय
कोई भी नया भवन निर्माण करते समय वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए. निर्माण के पूर्व नक्शा भी वास्तु के अनुरूप ही बनाना चाहिए. जहां तक संभव हो, निर्मित भवन में तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए. उपाय के द्वारा भी वास्तु-दोष निवारण किया जा सकता है, जैसे- उस वास्तु-दोष के निवारण हेतु दोषयुक्त दिशा या स्थान पर यंत्र स्थापित कर पूरे भवन के वास्तु-दोष की शांति के लिए मुख्य द्वार एवं अंदर के सभी कमरों के द्वारों पर शुभ प्रतीक चिह्न- घोड़े की नाल, स्वस्तिक, ओम आदि का प्रतीक चिह्न अंकित कर सकते हैं. तुलसी का पौधा दोषयुक्त स्थान/दिशा में रखकर लाभ उठाया जा सकता है. घर में अखंड रूप से श्रीरामचरितमानस का नवाह पारायण नौ बार करने से वास्तु जनित दोष दूर हो जाता है. वास्तु में विभिन्न दिशाओं, स्थानों और कोणों से किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्हें कैसे दूर करें? आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं-

ईशान कोण (उत्तर/पूर्व)
ईशान कोण वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान या दिशा है. यदि ईशान कोण दूषित है तो अन्य सारे स्थान/दिशा सही होने पर भी कोई लाभ नहीं. इस दिशा को हमेशा साफ़ रखें. यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए. यह स्थान खाली होना चाहिए. इस स्थान को देवता का वास/स्थान माना गया है. यहां पूजा स्थल सर्वाधिक उपयुक्त है. इस दिशा में झाड़ू भूलकर भी न रखें.
विशेष: यह कोण बढ़ा हुआ हो, तो शुभ फलदायक होता है.

आग्नेय कोण ( दक्षिण/पूर्व)
इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए. पानी की टंकी (अंडरग्राउंड) कदापि नहीं होनी चाहिए.

नैऋत्य कोण (दक्षिण/पश्‍चिम)
परिवार के मुखिया के शयनकक्ष हेतु सर्वाधिक उपयुक्त है तथा दुकान के मालिक के लिए यह स्थान लाभदायक है. भारी मशीनें, भारी सामान इस दिशा में रखना चाहिए.
विशेष: नैऋत्य कोण में किसी भी प्रकार का गड्ढा, बेसमेंट, कुआं नहीं होना चाहिए. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है.

वायव्य कोण (उत्तर/पश्‍चिम)
शौचालय, सेप्टिक टैंक के लिए उपयुक्त. अध्ययन कक्ष, गैरेज के लिए लाभदायक. इस दिशा में दुकान का गल्ला, कैश बॉक्स नहीं रखना चाहिए.

ब्रह्म स्थान
भूखंड के बीच के स्थान (आंगन) को ब्रह्म स्थान की संज्ञा दी गई है. आंगन खुला एवं स्वच्छ होना चाहिए. जूठे बर्तन या गंदगी आंगन में नहीं होनी चाहिए. आंगन में किसी प्रकार का गड्ढा न हो.

– डॉ. प्रेम गुप्ता
वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ

कैसे बनाएं घर को बैक्टीरिया फ्री? ( How to create a bacteria-free home?)

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घर की सफ़ाई तो हम रोज़ाना करते हैं, पर क्या हमारा घर रोज़ाना जर्म फ्री हो पाता है. अच्छी सफ़ाई के बावजूद हम पूरे विश्‍वास से नहीं कह सकते कि हमारा घर 100% बैक्टीरिया फ्री है, क्योंकि घर में ऐसे कई बैक्टीरिया स्पॉट्स होते हैं, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं. अगर हमें इनकी जानकारी हो, तो यक़ीनन हम अपने घर को बैक्टीरिया फ्री व हेल्दी बना सकते हैं.

किचन

हमेशा खाने-पीने की चीज़ों के कारण किचन में कीटाणुओं, जीवाणुओं और कीड़ों-मकोड़ों की संभावना सबसे ज़्यादा बनी रहती है.

बर्तन धोनेवाला स्पॉन्ज और किचन क्लॉथ: अगर इन्हें सही तरी़के से साफ़ व स्टोर न किया जाए, तो इनमें पनपते फंगस और असंख्य जीवाणु बर्तनों के ज़रिए हमारे शरीर में पहुंचकर हमें काफ़ी नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
हेल्थ टिप: हर बार इस्तेमाल के बाद इसे सूखने के लिए रख दें. यह जितनी ज़्यादा देर गीला रहेगा, कीटाणु उतनी ही तेज़ी से फैलेंगे. स्पॉन्ज को आप माइक्रोवेव में रखकर सैनेटाइज़ कर सकते हैं.

कटिंग बोर्ड: रिसर्च की मानें, तो किचन के कटिंग बोर्ड पर किसी टॉयलेट सीट की तुलना में 20 गुना ज़्यादा कीटाणु होते हैं. इसलिए इसकी सफ़ाई पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होती है.
हेल्थ टिप: फल-सब्ज़ियों और बाकी की सामग्री के लिए एक और मीट, चिकन, फिश आदि नॉन वेज के लिए अलग-अलग कटिंग बोर्ड रखें, ताकि क्रॉस कंटैमिनेशन न हो. नियमित रूप से एंटी बैक्टीरियल क्लीनर से क्लीन करें.

काउंटर्स: किचन काउंटर्स पर हमेशा कुछ न कुछ खाने का सामान गिरता रहता है, जिसके कारण फूड बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े तेज़ी से बढ़ते हैं, जो अस्थमा व एलर्जी का कारण हो सकते हैं.
हेल्थ टिप: काउंटर को रोज़ाना साबुन से धोने के बाद पानी में 1 टीस्पून क्लोरीन ब्लीच डालकर साफ़ करें. कैबिनेट में मौजूद कंटेनर्स को अच्छी तरह से बंद करके रखें.

बर्तन रखने की ट्रॉली: भले ही बर्तनों को कितना भी चमका दें, लेकिन अगर बर्तन रखनेवाली जगह साफ़ व हाइजीनिक नहीं है, तो बर्तनों पर उनका सीधा असर पड़ेगा, जो हमारी हेल्थ को प्रभावित कर सकता है.
हेल्थ टिप: नियमित रूप से बर्तन रखनेवाली ट्रॉली को साफ़ व हाइजीनिक रखें. खाने के तुरंत बाद बर्तनों को धो-पोंछकर रख दें, सिंक में यूं ही पड़े न रहने दें.

डस्टबिन: बैक्टीरिया के पनपने और फैलने के लिए सबसे आम जगह है, लेकिन अगर ध्यान दिया जाए, तो इसे कीटाणुमुक्त रख सकते हैं.
हेल्थ टिप: डस्टबिन में हमेशा ब्लैक पॉलीथिन डालकर रखें. हर हफ़्ते डस्टबिन को साबुन के पानी से धोएं.

बाथरूम

बाथरूम मेें मौजूद नमी बैक्टीरिया को पनपने में काफ़ी मदद करती है, यही कारण है कि हमें बाथरूम को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करनी चाहिए.

टॉयलेट हैंडल: टॉयलेट का हैंडल फ्लश करते व़क्त हमें यह ध्यान ही नहीं रहता कि इस हैंडल पर भी वायरस हो सकते हैं. दरअसल, बच्चों में डायरिया का एक बड़ा कारण रोटावायरस होता है, जो ज़्यादातर टॉयलेट हैंडल पर पाया जाता है.
हेल्थ टिप: टॉयलेट साफ़ करते समय इसे अनदेखा न करें. साबुन के अलावा एंटी बैक्टीरियल क्लीनर का इस्तेमाल भी करें.

फ्लोर से सीलिंग तक: हमेशा नमी होने के कारण बाथरूम में फंगस बहुत तेज़ी से फैलता है. इसके कारण आंख व नाक से पानी आने के साथ-साथ सांस संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं.
हेल्थ टिप: बाथरूम में हमेशा पानी भरकर न रखें. नहाने के तुरंत बाद बाल्टी को उल्टा करके रख दें और बाथटब को पोंछकर साफ़ कर दें. यदि शावर कर्टन्स का इस्तेमाल करते हैं, तो हर 15 दिन में इसे साफ़ करें.

सोप व टूथब्रश होल्डर: गीले साबुन और गीले टूथब्रश बैक्टीरिया को बहुत तेज़ी से आकर्षित करते हैं. कॉकरोच आपके टूथब्रश को जीवाणुओं से भर सकता है और अनजाने ही आप ओरल प्रॉब्लम्स के शिकार हो सकते हैं.
हेल्थ टिप: टूथब्रश पर कैप लगाकर और साबुन का झाग धोकर रखें, ताकि वह जल्दी सूख जाए. एक ही साबुन अगर एक से ज़्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं, तो हमेशा साबुन धोकर इस्तेमाल करें. सोप व टूथब्रश होल्डर नियमित रूप से साफ़ करें.

बेडरूम

बेडशीट्स और तकियों में डस्ट माइट्स और एलर्जेंस को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है, जिसके कारण लोगों को अक्सर सर्दी-ज़ुकाम, बदनदर्द और सांस संबंधी समस्याएं होती ही रहती हैं.

तकिया: इसके बिना हम सुकून की नींद सो भी नहीं सकते, पर हो सकता है कि इसमें मौजूद डस्ट माइट्स और जर्म्स
आपसे आपका सुकून छीन लें. पुराने तकियों में इनकी भरमार होती है, जिन पर हमारा ध्यान बमुश्किल जाता है.
हेल्थ टिप: तकिये के कवर को हर 15 दिन में गर्म पानी में धोएं. हर दो साल में तकिया बदलते रहें.

बेडशीट्स, चादर और गद्दे: हम रोज़ाना 7-8 घंटे इनमें गुज़ारते हैं, अगर ये ख़ुद ही बीमार हों, तो भला हम कैसे स्वस्थ रह सकते हैं. डस्ट माइट्स और एलर्जेन्स चादर व गद्दों को अपना घर बनाकर हमें बीमार कर सकते हैं.
हेल्थ टिप: चादर और गद्दे के कवर को हर 15 दिन में एक बार गर्म पानी में धोएं. गद्दों को समय-समय पर धूप में डालें, ताकि डस्ट माइट्स ख़त्म हो जाएं.

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घर का बाकी हिस्सा

दरवाज़े के हैंडल: दरवाज़े के हैंडल में स्टैफ नामक बैक्टीरिया पाया जाता है, जो हमारे मुंह, आंख और घाव में पहुंचकर नुक़सान पहुंचाता है.
हेल्थ टिप: किसी एंटी-बैक्टीरियल क्लीनर से इसे रोज़ाना साफ़ करें.

दीवारें: दीवारों पर जमी धूल-मिट्टी में पनपते डस्ट माइट्स जहां हमारी सेहत को नुक़सान पहुंचा सकते हैं, वहीं दीवारों पर लगा पेंट भी नुक़सानदेह हो सकता है. कुछ पेंट्स में वोलाटाइल ऑर्गेनाइक कंपाउंड्स (वीओसी) होते हैं, जो इंडोर एयर पॉल्यूशन का कारण बनते हैं और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी पैदा कर सकते हैं.
हेल्थ टिप: घर के लिए लो वीओसी पेंट्स, मिल्क पेंट व व्हाइट वॉश चुनें. इस बात का भी ध्यान रखें कि पेंट में लेड न हो. नियमित रूप से दीवारों के जाले और धूल-मिट्टी को झाड़कर साफ़ करें.

कार्पेट व रग्स: इनमें डस्ट माइट्स व एलर्जेन्स बहुत तेज़ी से फैलते हैं, जो एलर्जी फैलाने के लिए काफ़ी हैं. कार्पेट्स को अगर नियमित रूप से साफ़ नहीं किया गया, तो नमी के कारण इसमें फंगस लगने लगता है.
हेल्थ टिप: समय-समय पर कार्पेट निकालकर थोड़ी देर उल्टा करके धूप में रखें, ताकि किसी तरह के बैक्टीरिया या फंगस न पैदा हों.

शू रैक: अक्सर लोग इसे अनदेखा कर देते है, जबकि बाहर से हमारे जूते-चप्पलों के साथ आई गंदगी व बैक्टीरिया हमारे घर में घुस आते हैं. इसमें चिपके बैक्टीरिया घर में फैलकर हमें बीमार बना सकते हैं.
हेल्थ टिप: हो सके, तो शू रैक को घर से बाहर ही रखें. समय-समय पर जूते-चप्पलों को निकालकर शू रैक साफ़ करें और कीटनाशक भी स्प्रे करवाएं.

हेल्दी होम टिप्स
* घर में वेंटिलेशन का ख़ास ख़्याल रखें. खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ी हवा व सूरज की रोशनी घर में आती रहे.
* घर के जिन हिस्सों में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती, वहां बहुत तेज़ी से कीटाणु फैलते हैं. इसलिए सुबह के व़क्त खिड़कियां खोल दें, ताकि सूरज की      रोशनी घर  में आ सके.
* अपने किचन व बाथरूम को कीटाणुओं से मुक्त करने के लिए नीम व लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल करें.
* नियमित रूप से किचन के सिंक और ड्रेन में 1/4 कप विनेगर डालें, ताकि वे कीटाणु मुक्त रहें.
* खाना बनाते व़क्त किचन में एक्ज़ॉस्ट फैन ऑन रखें, ताकि सारा धुंआ तुरंत निकल जाए.
* घर के किसी भी हिस्से को दो हफ़्ते से ज़्यादा अनदेखा न करें, वरना यह नुक़सानदेह हो सकता है.
* समय-समय पर घर में पेस्ट कंट्रोल करवाएं.
* हर रोज़ फ्लोर क्लीनर से पोंछा लगाएं.
* एक स्प्रे बॉटल में 1 कप फिल्टर वॉटर, 5 बूंदें ऑरेंज एसेंशियल ऑयल, 3 बूंदें लैवेंडर एसेंशियल ऑयल, 2 बूंदें नीलगिरी एसेंशियल ऑयल और 2  बूंदें टी ट्री ऑयल मिलाकर नेचुरल एंटी बैक्टीरियल स्प्रे बनाकर रख लें, आवश्यकतानुसार इस्तेमाल करें.
* एक स्प्रे बॉटल लें. आधे बॉटल में विनेगर भरें और आधे बॉटल में पानी भरकर एंटी बैक्टीरियल क्लीनर की तरह इस्तेमाल करें.

 

– अनुश्री