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क्या आपके हार्मोंस आपके रिश्ते को प्रभावित कर रहे हैं? (How Hormones Influence Love And Relationships)

How Hormones Influence Love And Relationships

ये रूह के रिश्ते क्यों स़िर्फ जिस्म तक ही सिमटते जा रहे हैं… और जिस्म से होते हुए सिसक-सिसक कर दम तोड़ते जा रहे हैं… दूरियां जो आ रही हैं दरमियान, मन का पंछी ढूंढ़ने लगा है एक नया आशियान… लेकिन मुहब्बत जो कभी हममें-तुममें थी… अब भी कह रही है कि बचे हैं उसके कुछ तो नामो-निशान… न कुसूर तुम्हारा था, न ख़ता हमारी थी… बस व़क्त के सितम हमें तन्हा करते चले गए… और क़रीब आने की हसरत में हम दूर होते चले गए…

How Hormones Influence Love And Relationships
जी हां, यह बात सच है कि मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रूहानी रिश्तों को जिस्मानी बना दिया है. भावनाओं की जगह ज़रूरतों ने ले ली है और सपनों की जगह कठोर हक़ीक़तों ने अपना डेरा जमा लिया. यही वजह है कि सब कुछ बदल रहा है. हम बदल रहे हैं… हमारा खान-पान बदल रहा है… दिनचर्या बदल रही है… और इसका सीधा प्रभाव हमारी सेहत और हमारे रिश्तों की सेहत पर पड़ रहा है.
यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारी तमाम गतिविधियों को हर्मोंस ही प्रभावित करते हैं. ऐसे में उनमें होनेवाले बदलाव हम में भी बहुत कुछ बदल देते हैं. हार्मोंस में यह बदलाव काफ़ी हद तक हमारी लाइफस्टाइल व डायट पर भी निर्भर करता है. यही वजह है कि आजकल तेज़ी से हमारा मूड और हमारे रिश्ते बदल रहे हैं, क्योंकि हर्मोंस बदल रहे हैं.

शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि आज के दौर में हम और ख़ासतौर से महिलाएं पहले की अपेक्षा अधिक हार्मोनल बदलाव से गुज़रती हैं. लेकिन अब यह बात भी लोग मानने लगे हैं कि हार्मोंस में होनेवाले यह बदलाव हमारे रिश्तों को भी प्रभावित करने लगे हैं.

हार्मोंस और मूड

हार्मोंस के बदलाव से बहुत कुछ बदलता है- हमारा मूड हो या शरीर में कोई परिवर्तन, हार्मोंस की उसमें अहम् भूमिका होती है.
बदलते हार्मोंस से बदलते हैं रिश्ते: जब कभी भी शरीर में हार्मोंस का असंतुलन होता है, आपकी सेक्स की इच्छा कम हो जाती है और मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं. ये दोनों ही चीज़ें रिश्ते को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

महिलाओं में सेक्सुअल डिज़ायर बनाए रखने के लिए प्रोजेस्टेरॉन और इस्ट्रोजेन में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है. लेकिन अधिकांश महिलाओं में इस्ट्रोजन की अधिकता होती है, जिससे सेक्स की इच्छा में कमी आती है.

प्रोजेस्टेरॉन शांत हार्मोन होता है, जो महिलाओं की सेक्सुअल हेल्थ व सामान्य सेहत को भी बेहतर बनाता है. इसी तरह से इस्ट्रोजेन का स्तर भी यदि सही व संतुलित रहेगा, तो सेक्स की इच्छा बढ़ेगी और सेक्स लाइफ बेहतर होगी. सेक्स लाइफ और रिलेशनशिप का बहुत गहरा संबंध होता है, यदि आपकी सेक्स लाइफ अच्छी है, तो आपका रिश्ता और बेहतर बनेगा और यदि सेक्स लाइफ सामान्य नहीं, तो रिश्ते पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ़तौर पर नज़र आएगा. यही वजह है कि हार्मोंस का संतुलन आपके रिश्ते के लिए बेहद ज़रूरी है.

सेल्फ इमेज पर प्रभाव: अगर अपने शरीर में कुछ परिवर्तन महसूस कर रहे हैं, तो इसका संबंध हार्मोंस से हो सकता है. हर्मोंस के असंतुलन से वज़न बढ़ना, थकान रहना, अचानक तेज़ गर्मी लगकर पसीना आना आदि समस्याएं हो सकती हैं. ये तमाम शारीरिक समस्याएं आपके ख़ुद को देखने के नज़रिए पर असर डालती हैं और इससे आपका रिश्ता भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.
प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टॉसटेरॉन और इस्ट्रोजेन- इन तीनों हार्मोंस के असंतुलन का आपके मूड पर और सेल्फ एस्टीम (आत्मसम्मान) पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है.
इन हार्मोंस को संतुलित रखना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपने बारे में अच्छा महसूस करें और यही सकारात्मक भाव आपके रिश्ते को भी सकारात्मक रखेगा.

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आपके स्वभाव और व्यवहार भी होते हैं प्रभावित: इस्ट्रोजेन का बढ़ता स्तर आपको चिड़चिड़ा बना सकता है. साथ ही आपको अनिद्रा और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं भी दे सकता है. वहीं प्रोजेस्टेरॉन का घटता स्तर आपको स्वाभाव से चिंतित बना सकता है. ऐसे में यदि आप अपने स्वभाव को नियंत्रित नहीं कर पाते, तो दूसरों की नज़रों में आपकी इमेज प्रभावित हो सकती है. आपका पार्टनर भी आपको ग़लत समझ सकता है और आपके रिश्ते पर इसका बुरा असर हो सकता है.
प्रोजेस्टेरॉन के स्तर का सामान्य बनाए रखकर इस्ट्रोजेन के असर को कम किया जा सकता है, जिससे आपके स्वभाव व व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

आपके दोस्तों व रिश्तेदारों पर भी असर हो सकता है: हर किसी की चाहत होती है कि अपने दोस्तों व क़रीबी लोगों के साथ वो अच्छा व़क्त गुज़ारे, लेकिन आपके हार्मोंस आपको बेवजह को स्ट्रेस देकर आपसे यह अच्छा व़क्त छीन सकते हैं.
किसी भी हार्मोंस के स्तर का बेहद बढ़ना या एकदम कम होना आपके स्वभाव में निराशा, चिड़चिड़ापन, चिंता, अवसाद जैसे नकारात्मक भाव को जन्म दे सकता है. इसके अलावा वज़न बढ़ना या नींद न आना जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं. जिससे आपकी ख़ुशियां बहुत हद तक प्रभावित हो सकती हैं.

 

How Hormones Influence Love And Relationships

क्या करें?

– जब कभी भी आप ख़ुद में इस तरह के बदलाव देखें और जब ये चीज़ें आपके व्यवहार व रिश्तों पर असर डालने लगें, तो फ़ौरन एक्सपर्ट की मदद लें. ऐसा करके आप ख़ुद को भी ख़ुश रख सकते हैं और अपने रिश्तों को भी बचा सकते हैं.
– पीरियड्स से पहले व बाद में महिलाओं के हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं, यही वजह है कि उनका मूड इस दौरान काफ़ी बदलता रहता है, ऐसे में अन्य लोगों को थोड़ी समझदारी दिखानी चाहिए, ताकि इसका असर उनके रिश्ते पर न पड़े.
– हेल्दी डायट लें, क्योंकि अनहेल्दी लाइफस्टाइल से हर्मोंस असंतुलित होते हैं. चाय, कॉफी, अल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड जितना हो सके कम लें. इनकी जगह गाजर, ब्रोकोली, फूलगोभी, पत्तागोभी, फ्लैक्ससीड, ग्रीन टी, ड्राइ फ्रूट्स, ओट्स, दही, फ्रेश फ्रूट्स, हरी सब्ज़ियां, अदरक, लहसुन आदि अपने डायट में शामिल करें. यह तमाम चीज़ें शरीर को डिटॉक्सिफाइ करके हार्मोंस को संतुलित करती हैं.
– डार्क चॉकलेट्स भी मूड को बेहतर बनाकर डिप्रेशन दूर करता है.
– वेजीटेबल ऑयल्स की जगह ऑलिव ऑयल व कोकोनट ऑयल को शामिल करें.
– लाइट एक्सरसाइज़, योग व प्राणायाम से हार्मोंस संतुलित होते हैं.

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हार्मोंस और बिहेवियर

हार्मोंस एंड बिहेवियर के नाम से हुए एक विस्तृत अध्ययन में यह पाया गया है कि किस तरह से महिलाओं के हार्मोंस, उनका अपने पार्टनर को देखने का नज़रिया और उनके रिश्ते में मज़बूत संबंध है.
दरअसल इन सबका संबंध महिलाओं के मासिक धर्म से है. अगर कोई महिला अपने पार्टनर को हॉट समझती है, तो जब उसका पीरियड क़रीब होता है, तो वो अधिक ख़ुश रहती है और अपने पार्टनर के और क़रीब आती है. जबकि यदि महिला अपने पार्टनर को बहुत हॉट नहीं समझती, तो ऑव्युलेशन के समय वो उसकी अधिक निंदा करने लगती है और उससे दूरी बनाए रखती है.

हैप्पी हार्मोंस

मात्र सेक्स ही वो शारीरिक क्रिया नहीं है, जो आपके तनाव को कम करके आपको हेल्दी रख सकती है. जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि गले मिलने के बाद महिलाओं और पुरुषों में ऑक्सिटोसिन का स्तर अधिक पाया गया और कार्टिसोल का स्तर कम पाया गया.
दरअसल, ऑक्सिटोसिन वो हार्मोन है, जो तनाव कम करके मूड को बेहतर बनाता है, जबकि कार्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है. ऐसे में नतीजा यह निकला कि हाथ पकड़ना, प्यार से छूना, दुलार करना आदि केयरिंग बिहेवियर भी आपको
तनावमुक्त रखककर हेल्दी बना सकता है.

– गीता शर्मा

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