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स्पाइस इट अप: जानें सेक्स के 20 फ़ायदे (Spice it up 20 benefits of sex)

Benefits of sex

benefits of sex

1. बेहतरीन व्यायामः क्या आपको पता है कि सेक्स एक तरह की शारीरिक एक्सरसाइज़ है. सेक्स (Benefits of sex) करने से इतनी कैलोरीज़ ख़र्च होती हैं, जिससे कोलेस्ट्रोल स्तर में सुधार आता है और ख़ून का प्रवाह बढ़ता है. 30 मिनट सेक्स करने से 85 कैलोरीज़ ख़र्च होती हैं. सप्ताह में तीन बार नियमित रूप से सेक्स करने से इतनी कैलोरीज़ ख़र्च होती हैं, जितनी कि आप एक सप्ताह सैर करके ख़त्म करते हैं. अगर पूरे वर्ष नियमित रूप से सेक्स किया जाए तो यह 75 मील जॉगिंग करने के बराबर होगा.

2. बेहतर इम्यून सिस्टमः सेक्स हमारे इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी एक थेरेपी की तरह काम करता है. इससे रोगप्रतिरोधक क्षमता सुदृढ़ होती है और पाचन क्रिया ठीक रहती है.

3. लंबी उम्र: नियमित रूप से सेक्स करने से आयु बढ़ती है. शरीर के अंग व तंत्र बेहतर ढंग से काम करते हैं, क्योंकि सेक्स कोशिकाओं में ऑक्सीजन की आपूर्ति में वृद्धि कर विभिन्न अंगों को शरीर के अंदर उत्प्रेरित करता है. एक तरफ़ जहां सेक्स से कोलेस्ट्रोल संतुलित होता है, वहीं दूसरी ओर इससे कोलेस्ट्रोल की मात्रा भी कम हो जाती है. सप्ताह में तीन या ़ज़्यादा बार सेक्स करने से हार्टअटैक का रिस्क कम हो जाता है.

4. दर्द से राहतः अध्ययनों से यह बात सामने आईर्र्र् है कि सेक्स(Benefits of sex) से सिर व जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है. ऑर्गे़़ज़म (चरमोत्कर्ष) से पहले ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का स्तर सामान्य स्तर से पांच गुना बढ़ जाता है, जिस वजह से एंड्रोफिन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे सिरदर्द, माइग्रेन और आर्थराइटिस के दर्द से आराम मिलता है. दर्द की दवाईर्र्र् खाने के बजाय सेक्स का आनंद उठाएं.

5. माहवारी में कम दर्दः जिन औरतों का सेक्स जीवन सुखद होता है, उन्हें माहवारी के दौरान कम दर्द होता है. इससे औरतों को प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के दर्द में भी राहत मिलती है.

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6. तनाव से राहतः तनाव से निजात दिलाने का सेक्स(Benefits of sex) सबसे कारगर तरीक़ा है. सेक्स के बाद रिलैक्सेशन महसूस होती है.

7. प्यार बढ़नाः सेक्स पति-पत्नी के बीच की दूरी तो ख़त्म करता ही है, साथ ही मन में ख़ुशी का संचार भी करता है. मन की उदासी दूर करने में यह बहुत सहायक होता है. इससे चिड़चिड़ाहट दूर होती है और साथी का प्यार मिलने से संबंध भी प्रगा़ढ़ होते हैं. जिन युगल के सेक्स संबंध बेहतर होते हैं, वे परेशानियों का सामना भी ठीक ढंग से कर पाते हैं.

8. ऊर्जा का संचार होता हैः सेक्स के दौरान हार्मोन का स्राव होने की वजह से मन शांत रहता है और निरंतर ऊर्जा का संचार होता है. नियमित रूप से इसे करने से व्यक्ति युवा रहता है. इससे फ़िटनेस लेेवल भी बढ़ता है. इंसान अपने अंदर सारे दिन एक स्फूर्ति महसूस करता है. इसका असर उस की पूरी दिनचर्या पर पड़ता है. सेक्स से सारी थकान दूर हो जाती है और बीमारी से भी बचा जा सकता है.

9. सुखद नींदः सेक्स से ऑक्सीटॉसिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जिससे सेक्स(Benefits of sex) के बाद नींद भी इतनी अच्छी आती है कि सोने के लिए किसी तरह की नींद की गोलियों की ज़रूरत नहीं पड़ती.

10. भरपूर आत्मविश्‍वासः सेक्स से इंसान सकारात्मक ढंग से सोचता है. उसके अंदर व्याप्त संतुष्टि का भाव आत्मविश्‍वास का संचार करता है. इससे उसके अंदर नकारात्मक विचार नहीं आते हैं.

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benefits of sex

11. वज़न घटनाः सेक्स वज़न कम करने का सबसे कारगर उपाय है. नियमित रूप से सेक्स करने से पेट नहीं बढ़ता और मांसपेशियों का तनाव कम होने से उनमें संकुचन नहींं होता. मांसपेशियों को यह टोन करता है.

12. ख़ूबसूरती में निखारः सेक्स के दौरान चूंकि हार्मोन का स्राव होता है और रक्त का प्रवाह भी सुचारु रूप से होता है, इसलिए इससे सुंदरता में निखार आता है. पूरे शरीर पर छाईर्र्र् मादकता चेहरे को एक ग्लो प्रदान करती है. उसके बाद किसी ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की ज़रूरत ही नहींं रह जाती. सेक्स के दौरान नारी के शरीर से एस्ट्रोजन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जिससे उसके बालों में चमक और चेहरे पर रौनक आ जाती है.

13. हेल्दी स्किन: सेक्स के दौरान चूंकि एक तरह से पूरे शरीर की मसाज हो जाती है, इसलिए उस रिलैक्सेशन की वजह से किसी तरह के रैशेज़ या दाग़ शरीर पर नहीं होते.

14. प्रोस्टेट कैंसर से सुरक्षाः नियमित सेक्स करने से भविष्य में प्रोस्टेट कैंसर होने का ख़तरा कम होता है.

15. दमे/बुखार के लिए फ़ायदेमंदः सेक्स नेचुरल एंटीहीसटामाइन है. इससे बंद नाक खुल जाती है और दमे व बुखार को ठीक करने में यह मदद करता है.

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16. कार्डियोवेस्कुलर में सुधारः जब नारी सेक्स के दौरान उत्तेजित होती है तो उसके ह्रदय व श्‍वास की गति बढ़ जाती है. इससे कार्डियोवेस्कुलर स्वास्थ्य में सुधार होता है.

17. वफ़ादारी: जिन युगलों के बीच सेक्स(Benefits of sex) संबंध सुखद होते हैं, वे एक-दूसरे को धोखा नहींं देते हैं. उनकी निकटता उन्हें ऐसा करने से रोकती है.

18. रक्त का प्रवाह बढ़ना: सेक्स के दौरान जब इंसान उत्तेजित होता है तो रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है. शरीर से बहने वाले ताज़े रक्त प्रवाह की आपूर्ति से हमारे अंगों को लाभ होता है. इस तरह शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है.

19. मूड बननाः सेक्स एक ऐसी प्रक्रिया है, जो मूड ठीक रखती है, जिससे दिमाग़ पर अच्छा असर पड़ता है और कार्य करने की शक्ति बढ़ती है.

20. कमिटमेंट की भावनाः सेक्स ऐसा माध्यम है जो पति-पत्नी के बीच कमिटमेंट की भावना पैदा करता है. उन पलों में दोनों के बीच किसी तरह की असुरक्षा भी नहीं रहती, जिससे उनके वैवाहिक जीवन में ख़ुशी बरक़रार रहती है.

– सुमन बाजपेयी

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ब्लड डोनेट करें, हेल्दी रहें

आमतौर पर लोगों की सोच होती है कि रक्तदान यानी ब्लड डोनेट करने से उन्हें कमज़ोरी आ जाएगी या उनकी सेहत पर इसका बुरा असर होगा, इसलिए वे ब्लड डोनेट करने से कतराते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. ब्लड डोनेट करने से ब्लड डोनर को किसी का जीवन बचाने या किसी की मदद करने की आत्मसंतुष्टि तो  मिलती ही है, साथ ही ये उनके हेल्थ के लिए भी फ़ायदेमंद है.

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हमारे देश में समय पर खून न मिलने के कारण हर साल 15 लाख मरीज़ अपनी जान गंवा बैठते हैं. इनमें उन बच्चों की तादाद अधिक होती है, जिन्हें थेलेसिमिया के कारण बार-बार ब्लड की ज़रूरत होती है. दुर्घटना के शिकार, मलेरिया के मरीज़ों, कुपोषणग्रस्त बच्चों के अलावा प्रेग्नेंट वुमन को भी कई कारणों से ब्लड की ज़रूरत होती है. ब्लड डोनेशन से जुड़े अहम् पहलुओं पर डॉ. मनोज जैन ने हमें कई उपयोगी जानकारियां दीं.

यदि सभी लोग साल में एक बार भी ब्लड डोनेट करें, तो कई ज़िंदगियां बचाई जा सकती हैं. एक सामान्य मनुष्य में 5 से 6 लीटर ब्लड होता है और उसके शरीर के वज़न में 7 % वज़न ब्लड का होता है. मेडिकली एक हेल्दी व्यक्ति हर तीन महीने में एक बार ब्लड डोनेट कर सकता है. यदि देश का हर हेल्दी व्यक्ति ब्लड डोनेट करता रहे, तो ब्लड की कमी से कभी किसी की मृत्यु नहीं हो सकती. हमारे यहां सबसे अधिक पाया जानेवाला ब्लड ग्रुप ‘ओ’ और सबसे कम ‘एबी निगेटिव’ है.

दान भी, सेहत भी…
अधिकतर लोगों का मानना है कि ब्लड डोनेट करने से कमज़ोरी आती है. ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. ब्लड डोनेट करते समय जितना ब्लड निकलता है, उसकी भरपाई हमारे शरीर में 2-3 दिन के अंदर हो जाती है. इसलिए ब्लड डोनेट करना न केवल एक अच्छा काम है, बल्कि ये आपको स्वस्थ भी रखता है. कैसे? आइए, जानते हैं.

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ब्लड डोनेट करने से शरीर को नुक़सान की बजाय कई फ़ायदे होते हैं, जैसे-

  • ब्लड प्यूरिफाई हो जाता है. ब्लड डोनेशन के दौरान मात्र 300 मि.ली. ब्लड लिया जाता है और शरीर इस ब्लड की पूर्ति 24 से 48 घंटे में कर लेता है.
  • इससे शरीर की रक्त कोशिकाएं तेज़ी से बनने लगती हैं.
  • रेड ब्लड सेल्स भी रिडेवलप होते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक रहती है. यानी रक्तदान के तुरंत बाद ही नई लाल कोशिकाएं बनने से शरीर में स्फूर्ति पैदा होती है.
  • ब्लड डोनेट करते रहने से हार्ट डिसीज़ में 5% की कमी आ जाती है.
  • ब्लड डोनेट करते रहने से बोनमैरो (अस्थिमज्जा) लगातार क्रियाशील बना रहता है.
  • रक्त द्वारा संक्रमित होनेवाली बीमारियों की भी अपने आप जांच हो जाती है.

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कुछ अन्य फ़ायदे भी

  • ज़रूरत होने पर ब्लड डोनर को डोनर कार्ड के बदले ब्लड बैंक से ब्लड मिल जाता है.
  • शायद बहुत कम लोगों को मालूम है कि ब्लड के 1 यूनिट से 3 ज़िंदगियां बचाई जा सकती हैं. यानी डोनेट किया हुआ आधा लीटर
    ब्लड कम से कम 3 मरीज़ों का जीवन बचा सकता है.
  • ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले यूनिवर्सल डोनर हैैं यानी वे अपना ब्लड किसी को भी दे सकते हैं.

ब्लड डोनेट कर सकते हैं?

  • कोई भी हेल्दी व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 से 68 साल के बीच हो.
  • जिसका वज़न 45 किलो या उससे अधिक हो.
  • जिसके ख़ून में हीमोग्लोबिन 12% से अधिक हो.
  • ब्लड डोनेट करते समय कोई एंटीबॉयोटिक न ले रहा हो.
  • पिछले तीन वर्षों में जॉन्डिस या कोई बड़ा ऑपरेशन न हुआ हो.
  • एक ब्लड डोनर सालभर में कम से कम चार बार और तीन-तीन महीने के गैप पर ब्लड डोनेट कर सकता है.

कौन नहीं कर सकता ब्लड डोनेट?

  • जो महिला पीरियड में हो.
  • जो महिला अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करा रही हो.
  • जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो.

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देशभर में ब्लड बैंक की स्थिति
देश में नामी और सही तौर पर मात्र पांच सौ ब्लड बैंक हैं, जहां हर साल दस हज़ार यूनिट्स से अधिक ब्लड जमा होता है. साथ ही क़रीब छह सौ ऐसे ब्लड बैंक भी हैं, जो हर साल 600 यूनिट्स ही इकट्ठा कर पाते हैं. इनके अलावा 2433 ब्लड बैंक्स ऐसे हैं, जो तीन से पांच हज़ार यूनिट्स हर साल इकट्ठा कर लेते हैं.
देश में क़रीब 25 लाख लोग अपनी इच्छा से ब्लड डोनेट करते हैं. सबसे अधिक ब्लड बैंक महाराष्ट्र में 270, तमिलनाडु में 240 और आंध्र प्रदेश में 222 हैं.
जबकि उत्तर-पूर्व के सातों राज्यों में कुल मिलाकर 29 ऑथोराइज़्ड ब्लड बैंक्स हैं.

क्या आप जानते हैं?

  • 1998 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देश में प्रोफेशनल ब्लड डोनर पर पूरी तरह बैन लगाया गया था.
  • सन् 2007 में वैज्ञानिकों ने एंज़ाइम्स के प्रयोग से ब्लड गु्रप ए, बी, एबी को ओ में बदलने मेें सफलता प्राप्त कर ली थी, लेकिन अब तक इंसानों पर प्रयोग होना बाकी है.
  • विकासशील व ग़रीब देशों में ब्लड डोनेट के बाद भी डोनेट किए हुए ब्लड का 45% ही स्टोर हो पाता है.
  • यदि किसी देश की जनसंख्या के मात्र 1 से 3% लोग भी ब्लड डोनेट करते हैं, तो उस देश की ज़रूरत पूरी हो सकती है, लेकिन दुनियाभर में तक़रीबन 73 देशों में जनसंख्या के 1% से भी कम लोग ब्लड डोनेट करते हैं.
  • वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार, ब्लड बैंक से ब्लड ख़रीदने की बजाय इच्छुक ब्लड डोनर से ़ज़रूरत के समय ब्लड लेना अधिक लाभदायक रहता है.
  • आंकड़ों के अनुसार, स्वैच्छिक ब्लड डोनर द्वारा दिया गया ब्लड न केवल मरीज़ों पर अच्छा असर करता है, बल्कि इसमें एचआईवी और हेपेटाइटिस वायरस के होने की आशंका भी कम रहती है.

ब्लड डोनेट करके जहां हम एक नेक कार्य करते हैं, वहीं अपने शरीर के ब्लड को भी क्लीन करते हैं, जो हमारे सेहत के लिए ज़रूरी भी है. रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए हम सभी कुछ ऐसा भी कर सकते हैं, जैसे जो लोग ब्लड डोनेट करने के इच्छुक हैं, वे अपने दोस्तों का एक ग्रुप बना सकते हैं. और जब कभी जान-पहचान वाले या किसी को भी ब्लड की ज़रूरत पड़े, तब वे एक-दूसरे को मैसेज देकर ब्लड की ज़रूरत को पूरा कर सकते हैं. और यदि इस गु्रप में रेयर ब्लड ग्रुपवाले लोग भी हों, तो और भी अधिक ज़रूरतमंदों की मदद की जा सकेगी.

– ऊषा गुप्ता

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प्ले स्कूल फैशन, ट्रेंड या ज़रूरत?

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ज़माने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा का स्तर और उनके स्कूल जाने की उम्र भी बदल गई है. पहले जहां 5 साल के बाद बच्चा स्कूल में पहला क़दम रखता था, अब वहीं डेढ़-दो साल की छोटी-सी उम्र में ही पैरेंट्स उसे प्ले स्कूल में भेज रहे हैं. आख़िर क्यों कर रहे हैं पैरेंट्स ऐसा?

 

बदलते ट्रेंड ने मटेरियल लाइफ को पूरी तरह बदल दिया है. अच्छा, सबसे अच्छा बनने की चाह में आज माता-पिता ख़ुद के साथ अपने बच्चों को भी रेस में सबसे आगे निकालने के लिए प्रयासरत हैं. तहज़ीब, बात करने का ढंग, पढ़ाई में अव्वल होने के लिए वो अब स्कूल तक के समय का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं. डेढ़ साल की उम्र में ही वो अपने बच्चे को प्ले स्कूल में डाल रहे हैं. प्ले स्कूल के बढ़ते फैशन के कारण कई पैरेंट्स दूसरों की देखा-देखी भी अपने बच्चे को प्ले स्कूल में भेजने लगते हैं. क्या प्ले स्कूल वाक़ई बच्चों के लिए फ़ायदेमंद है? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

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फ़ायदे

* सामाजिक बनते हैं

चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट अंशु कुलकर्णी के अनुसार, “स्कूल के पहले प्ले स्कूल में बच्चों का एडमिशन कराने से वो सामाजिक बनते हैं. बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं, जो घर के लोगों के अलावा बाहरी लोगों से बात करने में हिचकिचाते हैं. दूसरों से डरते हैं. प्ले स्कूल में जाने से वो दूसरे बच्चों और टीचर के संपर्क में आते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनकी हिचक दूर हो जाती है.”

* शेयरिंग

घर में प्यार-दुलार की वजह से बच्चे अपनी चीज़ों के इतने आदी हो जाते हैं कि किसी दूसरे के छूने मात्र से वो रोना या चिल्लाना शुरू कर देते हैं. प्ले स्कूल में एक ही खिलौने से कई बच्चों को खेलते देख और एक ही झूले पर बारी-बारी से दूसरे बच्चों को झूलते देख उनमें समझदारी और शेयरिंग की भावना विकसित होती है.

* स्कूल जाने में मदद

3 साल तक आपके साथ रहने से बच्चे को आपकी और परिवार की आदत हो जाती है. ऐसे में जब पहली बार उसे आप स्कूल के गेट तक छोड़ने जाती हैं, तो वो आपको छोड़ना नहीं चाहता. आपसे दूर जाने पर वो बहुत रोता है. आपकी दशा भी कुछ ऐसी ही होती है. ऐसे में शुरुआत से ही जब बच्चा आपसे कुछ घंटे ही सही, दूर रहने लगता है, तो वो सेपरेशन ब्लू यानी आपसे दूर जाने की बात को आसानी से सह लेता है.

* क्विक लर्नर

कम उम्र में ही प्ले स्कूल में जाने से बच्चे में सीखने की प्रवृत्ति बढ़ती है. टीचर द्वारा सिखाए पोएम को वो बार-बार दोहराता है. इससे उसका आधार मज़बूत होता है. स्कूल जाने के बाद उसे चीज़ों को समझने में आसानी होती है.

* पैरेंट्स भी यूज़ टू होते हैं

फर्स्ट टाइम पैरेंट्स बने कपल्स के लिए स्कूल में बच्चे के एडमिशन से लेकर उसे स्कूल भेजने तक का काम किसी चुनौती से कम नहीं होता. बच्चे के साथ उनके लिए भी ये नया अनुभव होता है. ऐसे में कई बार ख़ुद पैरेंट्स ही बच्चों से दूर जाने पर रोने लगते हैं, तो कई स्कूल सही समय पर नहीं पहुंच पाते. प्ले स्कूल के ज़रिए उन्हें स्कूल के नियम-क़ानून को समझने में मदद मिलती है.

नुक़सान

प्ले स्कूल के बहुत से फ़ायदों के साथ कुछ नुक़सान भी हैं.
  सही माहौल न मिलने की वजह से बच्चा ख़ुद को वहां एडजस्ट नहीं कर पाता और रोता है.
  प्ले स्कूल के बढ़ते क्रेज़ की वजह से कई बार मिडल क्लास फैमिली को न चाहते हुए भी स्कूल के पहले से ही आर्थिक तंगी का तनाव झेलना पड़ता है.
  स्कूलवाली ज़िम्मेदारी प्ले स्कूल से ही पैरेंट्स को उठानी पड़ती है, जैसे- सही समय पर बच्चे को स्कूल छोड़ना, स्कूल थीम के अनुसार उसे ड्रेसअप करना, स्कूल के नियम मानना आदि.
  कम उम्र में ही पैरेंट्स से दूर रहने की आदत बच्चे के कोमल मन को प्रभावित करती है.

होममेकर सुषमा विश्‍वकर्मा की प्ले स्कूल के बारे में अपनी राय है. सुषमा कहती हैं, “प्ले स्कूल एक अच्छा ज़रिया है बच्चों को सोशल बनाने का. मैंने अपनी 2 साल की बेटी आरवी को तब प्ले स्कूल में डाला जब वो डेढ़ साल की थी. प्ले ग्रुप कोई स्कूल नहीं है. वहां बच्चे एंजॉय करते हैं. ख़ुद मैंने भी जाकर देखा है. जिस तरह वहां बच्चों को ट्रीट किया जाता है, वो बहुत अच्छा लगता है. मेरी बेटी वहां जाकर एंजॉय करती है और जब वो लौटते समय अपनी टूटी-फूटी भाषा में कोई पोएम गुनगुनाती है, तो बहुत अच्छा लगता है. प्ले स्कूल जाने की आदत से अब वो स्कूल जाने में मुझे परेशान नहीं करेगी. मेरा एक और बेबी है. इसकी वजह से मैंने अपनी बच्ची को जल्दी ही प्ले स्कूल में डाल दिया, क्योंकि मैं उसको क्वालिटी टाइम नहीं दे पाती थी. दूसरा बेबी नहीं होता तो मैं अपनी बेटी को 2 साल की उम्र में प्ले स्कूल में डालती, लेकिन भेजती ज़रूर.”

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मुंबई में रहनेवाली पेशे से टीचर माला सिंह कहती हैं, “प्ले स्कूल की ज़रूरत मैंने अपने 3 साल के बेटे लक्ष्य के लिए कभी महसूस नहीं की. मुझे ऐसा लगता है कि बच्चों को हम घर में जो कुछ सिखा सकते हैं, वो प्ले स्कूलवाले नहीं सिखाते. शुरुआत के यही तीन साल होते हैं जब पूरा दिन बच्चा परिवार के साथ समय बिताता है. कुछ लोग तो बच्चों से पीछा छुड़ाने के लिए ही उन्हें प्ले स्कूल में डालते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि कुछ समय के लिए ही सही वो बच्चे की ज़िम्मेदारी से दूर रहेंगे.”
क्या ज़रूरी है प्ले स्कूल?
अपने आसपास के लोगों के बच्चे को प्ले स्कूल में जाते देख बहुत से माता-पिता के मन में ये बात आती है कि क्या वाक़ई स्कूल से पहले प्ले स्कूल में दाख़िला करवाना ज़रूरी है? जानकारों की मानें, तो प्ले स्कूल में दाख़िला करवाने का हर माता-पिता का अपना विचार और रुचि है. ज़रूरी नहीं कि स्कूल से पहले प्ले स्कूल में बच्चे को भेजा ही जाए. घर में बच्चे को क्वालिटी टाइम देकर आप उसे वो सारी चीज़ें सिखा सकती हैं, जो बच्चा प्ले स्कूल में सीखता है. अतः सबसे पहले अपनी स्थिति को परख लें. अपनी सुविधानुसार ही कोई निर्णय लें. दबाव में आकर या दूसरों की देखा-देखी में अपने बच्चे को प्ले स्कूल में न भेजें.
– श्‍वेता सिंह

एजुकेशन लोन की एबीसी ( ABC of education loan)

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सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर जीवन में एक अच्छा मुक़ाम हासिल करें, पर अक्सर पैसों की कमी के कारण प्रतिभावान छात्रों को वो सुविधाएं नहीं मिल पातीं, जिसके वे हक़दार होते हैं. ऐसे में एजुकेशन लोन आपके सपनों को साकार करने में आपकी मदद करता है. अगर आपका बच्चा भी आगे पढ़ना चाहता है, पूरे करें. education loan

एजुकेशन लोन के लिए योग्यता व लोन अमाउंट
किसी भी भारतीय बैंक से एजुकेशन लोन लेने के लिए सर्वप्रथम आपका भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है.

  • आपकी उम्र 16 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए.
  • किसी भी प्रोफेशनल, वोकेशनल या एकैडमिक कोर्स में मेरिट या एंट्रेंस टेस्ट पासकर दाख़िला मिला हो.
  • भारत में उच्च शिक्षा के लिए ञ्च् 10 से 15 लाख तक का लोन मिलता है, जबकि विदेश में पढ़ाई के लिए अधिकतम लोन अमाउंट ञ्च् 20 लाख है.
  • अगर आपके लोन की रक़म ञ्च् 4 लाख से ज़्यादा है, तो लोन की रक़म वापस लौटाने के लिए आपको इन्कम प्रूफ जमा करना होगा.
  • अगर लोन अमाउंट ञ्च् 7.5 लाख से ज़्यादा है, तो इन्कम प्रूफ के साथ-साथ कोलैटरल सिक्योरिटी की भी ज़रूरत पड़ती है. कोलैटरल सिक्योरिटी यानी लोन रीपेमेंट की तसल्ली के लिए बैंक प्राइमरी सिक्योरिटी के अलावा इसकी मांग भी करते हैं, जो कोई प्रॉपर्टी, फिक्स डिपॉज़िट, लाइफ पॉलिसी, शेयर्स या थर्ड पार्टी गारंटी हो सकती है.

किन कोर्सेस के लिए एजुकेशन लोन मिलता है?
कोई भी बैंक एजुकेशन लोन देने से पहले यह देखता है कि लोन किस कोर्स के लिए मांगा जा रहा है, क्योंकि भारत में सभी कोर्सेस के लिए एजुकेशन लोन नहीं मिलता है. आइए जानें, कौन-से कोर्सेस के लिए लोन मिलता है?

  • कॉमर्स के क्षेत्र से जुड़े चार्टेड अकाउंटेंट (सीए), कंपनी सेक्रेटरी (सीएस), कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंसी (सीडब्ल्यूए), चार्टेड फाइनेंशियल एनालिस्ट (सीएफए), मेडिसिन,
  • इंजीनियरिंग आदि प्रोफेशनल और वोकेशनल कोर्सेस.
  • सरकार व यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त ग्रैजुएशन व पोस्ट ग्रैजुएशन कोर्सेस.
  • मान्यता प्राप्त फॉरेन यूनिवर्सिटी द्वारा भारत में होनेवाले कोर्सेस के लिए.
  • आईआईटी व आईआईएम द्वारा चलाए जानेवाले कोर्सेस के लिए.
  • किसी मान्यता प्राप्त फॉरेन यूनिवर्सिटी में एमबीए, एफसीए या मेडिसिन का कोर्स करने के लिए.

क्या हैं ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स?
लोन एप्लीकेशन के साथ इन डॉक्यूमेंट्स को जमा करना ज़रूरी है.

  • जिस कोर्स व कॉलेज में एडमिशन लेने जा रहे हैं, उस कोर्स का एडमिशन लेटर व कॉलेज की पूरी जानकारी.
  • कोर्स के फीस की विस्तृत जानकारी.
  •  मार्कशीट की एक कॉपी और उसी से जुड़े कुछ ज़रूरी काग़ज़ात.
  • उम्र व पहचान पत्र. अगर आपका उस बैंक में अकाउंट नहीं है, तो आपको इसके साथ-साथ रेसिडेंस प्रूफ भी देना होगा.
  • गार्जियन या पैरेंट्स की इन्कम का प्रूफ. (अगर एप्लीकेंट ख़ुद कमा रहा है, तो पिछले दो महीने के सैलरी स्लिप, अगर एप्लीकेंट सेल्फ एम्प्लॉइड है, तो पिछले छह महीने के बैंक स्टेटमेंट और अगर एप्लीकेंट प्रोफेशनल और सेल्फ एम्प्लॉइड है, जैसे- सीए या सीएस तो इन का़ग़ज़ात के साथ-साथ आपको पिछले दो साल का इन्कम टैक्स रिटर्न भी दिखाना होगा).
  • दो लेटेस्ट पासपोर्ट साइज़ फोटोग्राफ्स.
  • अगर एप्लीकेंट को साथ में ही कोई स्कॉलरशिप भी मिली है, तो स्कॉलरशिप के लेटर की एक कॉपी.
  • अगर विदेश में पढ़ाई के लिए जा रहे हैं, तो पासपोर्ट व वीज़ा की 1-1 कॉपी.

एजुकेशन लोन के फ़ायदे
लोन बहुत जल्दी और आसानी से मिलता है.

  • अगर आपके पास बैंक जाने का समय नहीं है, तो आप उस बैंक की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं.
  • एजुकेशन लोन पर दिए जानेवाले ब्याज की राशि पर आपको इन्कम टैक्स में छूट भी मिल सकती है.
  • व्यक्तिगत सफलता के अलावा इसके कारण देश में साक्षरता दर में भी बढ़ोतरी हुई है.
  • जाने-माने शिक्षण संस्थान में दाख़िला लेने पर कई राष्ट्रीय बैंक एजुकेशन लोन में डिस्काउंट भी देते हैं. इसलिए किसी भी बैंक में एजुकेशन लोन लेने से पहले उनकी प्रायोरिटी लिस्ट ज़रूर देख लें.
  •  कई बैंक ग्राहकों को लुभाने के लिए एजुकेशन लोन के साथ-साथ इंश्योरेंस भी देते हैं, जिसके लिए आपको मासिक प्रीमियम भरना होता है या फिर वह फ्री होता है.
  •  4 लाख तक के लोन पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ता. इसके अलावा आपको कोई सिक्योरिटी भी नहीं देनी पड़ती.
  • कुछ लोग एजुकेशन लोन की बजाय पर्सनल लोन लेते हैं, क्योंकि एजुकेशन लोन में लिमिटेशन होता है और उन्हें उससे ज़्यादा अमाउंट चाहिए होता है. पर यहां ध्यान देनेवाली बात यह है कि एजुकेशन लोन के ब्याज की दर पर्सनल लोन के मुक़ाबले बहुत कम होती है और एजुकेशन लोन में पर्सनल लोन की बजाय रीपेमेंट ऑप्शन्स
    ज़्यादा हैं.
  • कोर्स ख़त्म होने के सालभर बाद या नौकरी मिलने के छह महीने बाद आपके रीपेमेंट की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. लोन चुकाने के लिए आपको पांच से सात साल का समय दिया जाता है.

सावधानियां भी हैं ज़रूरी
किसी भी बैंक से एजुकेशन लोन लेने से पहले सावधानी बरतना ज़रूरी है. आइए जानें ऐसी ही कुछ सावधानियों के बारे में.

  • एजुकेशन लोन लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले कुछ राष्ट्रीय बैंकों के ब्याज दर को टैली कर लें. कई बैंक मनमाने ढंग से ब्याज वसूलते हैं, इसलिए ब्याज दरों की विस्तृत जानकारी लेना बहुत ज़रूरी है, वरना आप भारी ब्याज दर पर लोन चुकाने पर मजबूर हो जाएंगे.
  • एजुकेशन लोन लेने से पहले सबसे ज़रूरी है, ब्याज के भुगतान की पूरी जानकारी लेना. कुछ बैंक फ्लोटिंग रेट पर लोन देते हैं, तो कुछ फिक्स्ड रेट पर. फ्लोटिंग रेट पर लिए गए लोन में ब्याज दर बाज़ार के घटने-बढ़ने के साथ घटता-बढ़ता रहता है, जबकि फिक्स्ड रेट में ब्याज फिक्स रहता है. अगर आपको लगता है कि भविष्य में बाज़ार के बढ़ने की उम्मीद है, तो फिक्स रेट पर ही लोन लेना सही होगा. कभी-कभार ऐसा भी देखने को मिलता है कि फिक्स रेट में कुछ समय बाद बढ़ोतरी कर दी जाती है. इसलिए बैंक से पहले ही पूरी जांच-पड़ताल कर लें कि भविष्य में ऐसा कुछ तो नहीं होगा.
  • ब्याज किस प्रकार से चार्ज किया जाता है, यह देखना भी बहुत ज़रूरी है. यह मासिक होगा या त्रैमासिक जानना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि उसी के अनुसार आपको ब्याज भरना पड़ेगा.
  • आप जिस बैंक से लोन ले रहे हैं, वहां इस बात की तसल्ली ज़रूर कर लें कि आपको कोर्स ख़त्म होने के बाद रीपेमेंट के लिए कितना समय दिया जा रहा है और क्या वह समय आपके लिए पर्याप्त है.
  •  एजुकेशन लोन पर लगनेवाली प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव फीस और डॉक्यूमेंटेशन कॉस्ट बहुत कम होनी चाहिए. लोन के लिए अप्लाई करने से पहले 2-3 बैंकों के फीस स्ट्रक्चर के बारे में पता लगाएं.
  • ज़्यादातर बैंक में ञ्च् 4 लाख के ऊपर लोन के लिए आपको सिक्योरिटी और को-एप्लीकेंट की ज़रूरत पड़ती है. हर बैंक के अपने कुछ ख़ास नियम होते हैं, इसलिए लोन लेने से पहले सिक्योरिटी और गैरंटर आदि के बारे में पूरी जानकारी लें.
  • इसके अलावा डाउन पेमेंट के बारे में भी जानकारी हासिल कर लें. लोन लेने से पहले आपके एजुकेशन लोन का 5-20% तक अमाउंट आपको बैंक को डाउन पेमेंट के तौर पर देना पड़ता है. डाउन पेमेंट का प्रतिशत हर बैंक का अलग-अलग होता है, इसलिए इस बात पर भी ग़ौर करके ही लोन लें.
  • अक्सर बैंक ब्याज दर के अलावा कई और तरह के फीस के नाम पर ज़्यादा चार्ज करने की कोशिश करते हैं. इसलिए लोन लेने से पहले सभी चार्जेज़ के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें.
  • लोन लेने से पहले प्रोसेसिंस टाइम के बारे में जान लें, क्योंकि इससे आपको यह पता चलेगा कि लोन अमाउंट आपको कब मिलेगा. प्रोसेसिंग टाइम पीरियड के बारे में हर बैंक एक निश्‍चित समय देता है, लेकिन कई बार इसमेें काफ़ी देरी हो जाती है, जिसके कारण एडमिशन मेें परेशानी आ सकती है.
  • कोर्स पूरा होने और जॉब मिलने के बाद ही रीपेमेंट की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन कई बार समय सीमा कम पड़ती है, इसलिए अगर आप चाहें, तो कोर्स पूरा होने के पहले से ही रीपेमेंट की शुरुआत कर सकते हैं.
  • लोन से जुड़े सभी नियम व शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ें.
  • उस बैंक की विश्‍वसनीयता की जांच के लिए आप उस बैंक के वर्तमान ग्राहकों से अधिक जानकारी ले सकते हैं.
  • कर्ज़ तो कर्ज़ ही होता है, इसलिए कोशिश करें कि कम से कम लोन लेना पड़े.
  • कोर्स के दौरान मासिक तौर पर थोड़ी-बहुत रक़म जमा करके आप ब्याज के बोझ तले दबने से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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ऑयल्स के ब्यूटी सीक्रेट्स ( Beauty Secrets of Oils)

Beauty Secrets

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घर में मौजूद तेल के भी कई ब्यूटी बेनीफिट्स हैं. आप भी अपनी ख़ूबसूरती निखारने के लिए इनका इस्तेमाल करें और बन जाएं हुस्न की मलिका.

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ऑलिव ऑयल:

यह विटामिन, मिनरल्स और नेचुरल फैटी एसिड्स से भरपूर होता है. सेंसिटिव स्किन के लिए उपयुक्त होता है. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने की वजह से यह एंटी-एजिंग ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी काफ़ी इस्तेमाल किया जाता है. झुर्रियों और फाइन लाइन्स को भी यह कम करता है, क्योंकि इसमें विटामिन ई और ए होता है, जो त्वचा का लचीलापन बनाए रखता है.

* अपने नहाने के पानी में 5 टेबलस्पून एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल मिलाएं. मात्र इसी से आपकी त्वचा बेहद नर्म-मुलायम हो जाएगी.

* नहाने से पहले एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल से बॉडी मसाज करें और बाद में थपथपाकर पोंछें. अतिरिक्त तेल भी हटा दें. आपको अपनी त्वचा में इतना बदलाव नज़र आएगा कि आप ख़ुद विश्‍वास नहीं कर पाएंगी.

* ऑलिव ऑयल को आप बॉडी लोशन की तरह इस्तेमाल करें. नहाने के बाद ऑयल को बॉडी लोशन की तरह अप्लाई करें. यह नेचुरल तरी़के से त्वचा की नमी बनाए रखता है.

* ऑलिव ऑयल को आप मेकअप रिमूवर की तरह भी यूज़ कर सकती हैं. यह न स़िर्फ मेकअप रिमूव करेगा, बल्कि त्वचा को पोषण भी देगा. कॉटन बॉल पर
थोड़ा-सा ऑलिव ऑयल लगाकर मेकअप हटाएं. चाहें तो कॉटन बॉल को थोड़ा गीला कर लें. अगर हैवी मेकअप है, तो पहले ऑयल से मालिश करें और फिर गर्म पानी में भिगोए कपड़े से साफ़ कर लें. गुनगुने पानी से चेहरा धोएं, फिर ठंडे पानी से धोएं.

* आई क्रीम के तौर पर ऑलिव ऑयल को यूज़ करें. आंखों के आसपास हल्का-सा ऑयल लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें. यह आंखों के आसपास की बारीक़ रेखाओं को कम करके रिफ्रेशिंग लुक देगा. रात को सोने से पहले या फिर सुबह उठकर आप मसाज कर सकती हैं.

* चेहरे पर ग्लो लाने के लिए ऑलिव ऑयल फेस मास्क ट्राई करें. 1 टेबलस्पून ऑलिव ऑयल में 1 अंडे की जर्दी मिलाएं. चाहें तो थोड़ा-सा नींबू का रस भी मिला सकते हैं. 5-10 मिनट तक इसे चेहरे पर लगाकर रखें. पहले गुनगुने पानी से, फिर ठंडे पानी से धो लें.

* बालों को सॉफ्ट और शाइनी बनाने के लिए 1 अंडे की जर्दी में 2 टेबलस्पून ऑलिव ऑयल और 1 टीस्पून नींबू का रस मिलाकर मास्क लगाएं. 15 मिनट बाद शैंपू और कंडीशन कर लें.

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कोकोनट ऑयल:

यह बहुत से पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसके अलावा यह एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल भी है.

* यह हेयर टॉनिक का काम करता है. बालों को पोषण व मज़बूती देता है. तेल को हल्का गुनगुना करके बालों की जड़ों में मालिश करने से बाल घने और शाइनी होते हैं.

* यह ड्राई स्किन को बेहतरीन तरी़के से मॉइश्‍चराइज़ करता है. नहाने के बाद आप वर्जिन कोकोनट ऑयल को मॉइश्‍चराइज़र की तरह यूज़ कर सकती हैं. हां, अगर आपकी त्वचा ऑयली है, तो बेहतर है इसे यूज़ न करें.

* बालों की डीप कंडीशनिंग करता है. रातभर बालों में लगाकर रखें और इसका नियमित प्रयोग करें. दोमुंहे व ड्राई बालों की समस्या ख़त्म हो जाएगी.
* थोड़े से वर्जिन कोकोनट ऑयल में शक्कर और कुछ बूंदें वेनीला एसेंशियल ऑयल मिलाएं. यह बेहतरीन बॉडी स्क्रब का काम करेगा.

* यह बहुत अच्छा क्लींज़र भी है. रात को कॉटन बॉल में थोड़ा-सा तेल लेकर मसाज करते हुए फेस क्लीन करें. इससे आप आई मेकअप भी रिमूव कर सकती हैं. उसके बाद माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धो लें.

* यह बेहतरीन अंडरआई क्रीम है. आंखों के आसपास मसाज करने से न स़िर्फ वहां की बारीक़ रेखाएं कम करता है, बल्कि पफी आईज़ यानी आई बैग्स की समस्या भी मिटाता है.

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मस्टर्ड ऑयल:

इसके गुणों को देखते हुए ही इसे एरोमा थेरेपी में भी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसके इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट ज़रूर कर लें, कहीं आपको इससे एलर्जी तो नहीं.

  •  यह टैन और डार्क स्पॉट्स को दूर करता है. इसके लिए तेल में थोड़ा बेसन, दही और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाएं. इस मास्क को 10-15 मिनट तक लगाकर रखें, फिर ठंडे पानी से धो लें. इस प्रयोग को हफ़्ते में 3 बार करें.
  • स्किन लाइटनिंग व त्वचा स्मूद बनाने के लिए सरसों के तेल में थोड़ा-सा नारियल का तेल मिलाएं और 5 मिनट तक मसाज करें. कॉटन से अच्छी तरह से पोंछ लें. यह न स़िर्फ त्वचा को स्मूद बनाएगा, मुंहासों से भी छुटकारा दिलाएगा.
  • यह रोमछिद्रों को खोलकर त्वचा से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है.
    म एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल होने के कारण यह त्वचा को इंफेक्शन्स व रैशेज़ से बचाता है. इसके इस्तेमाल से त्वचा की ड्राईनेस भी ख़त्म हो जाती है.
  • होंठों को फटने से बचाने के लिए सोने से पहले सरसों के तेल की एक या दो बूंद नाभि में लगा लें.
  • बालों को असमय स़फेद होने से बचाता है. बालों को डाई करने से बेहतर है कुछ समय तक सरसों के तेल की मालिश करें.
  • यह विटामिन, मिनरल्स से भरपूर होता है, ख़ासतौर से इसमें बीटा-कैरोटीन की काफ़ी मात्रा होती है. यह बीटा-कैरोटीन विटामिन ए में परिवर्तित होकर बालों को हेल्दी, लंबा व घना बनाता है. साथ ही यह बालों को झड़ने से भी रोकता है.

Jug of sunflower oil with flowers isolated on white background

सनफ्लावर ऑयल:

इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी यह है कि इसमें बीटा-कैरोटीन भरपूर मात्रा में होता है. यह एंटीऑक्सीडेंट्स का भी बेहतरीन स्रोत है.

  •  यह मुंहासों से बचाव करता है. इसकी परत त्वचा को बैक्टीरिया से बचाने के लिए सुरक्षित आवरण देती है, जिससे बैक्टीरिया त्वचा के सीधे संपर्क में नहीं आ पाते और मुंहासे पनप नहीं पाते.
  • इसमें मौजूद विटामिन ई और फैटी एसिड्स त्वचा को इंफेक्शन्स से भी बचाते हैं.
  • यह सन डैमेज से बचाव करता है. साथ ही त्वचा का लचीलापन बढ़ाकर झुर्रियों व समय से पहले पनपनेवाले बढ़ती उम्र के निशानों को कम करता है. इसे आप सीधे तौर पर त्वचा पर लगा सकती हैं. इसकी मालिश करने से त्वचा का इलास्टिन और कोलाजन बरक़रार रहता है, जिससे आपको मिलता है यंगर लुक.
  • डेढ़ कप सनफ्लावर ऑयल में तीन कप शक्कर मिलाकर बॉडी स्क्रब तैयार करें. इसे इस्तेमाल करने से पहले शरीर को गुनगुने पानी से भिगो लें. इससे शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाएगा और मृत त्वचा को हटाना आसान होगा.
  • त्वचा को नमी प्रदान करता है. आप चाहें, तो अपने मॉइश्‍चराइज़िंग प्रोडक्ट में इस तेल की कुछ बूंदें मिलाकर उसे यूज़ कर सकती हैं.
  • इससे आप आंखों के आसपास भी मसाज कर सकती हैं, जिससे वहां की त्वचा पर बारीक़ रेखाएं कम होंगी और त्वचा हेल्दी बनेगी.

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आल्मंड ऑयल:

यह त्वचा को हेल्दी ग्लो देता है, क्योंकि यह विटामिन ए, बी और ई से भरपूर होता है. ये सभी विटामिन्स हेल्दी स्किन के लिए बेहद ज़रूरी हैं.

  • यह त्वचा को भीतर से नमी प्रदान करता है.
  • फटे होंठों, ड्राई स्किन, एलर्जी व रैशेज़ के लिए बहुत लाभकारी है.
  • आंखों के नीचे काले घेरे को कम करने में बहुत फ़ायदेमंद है. रोज़ाना सोने से पहले आंखों के आसपास इससे मालिश करें. इसके नियमित प्रयोग से फ़ायदा होगा.
  • यह सेल्स का पुनर्निर्माण करने में मदद करता है, जिससे आपको मिलती है यंग, ग्लोइंग और फ्रेश त्वचा.
  • यह बेहतरीन हैंड और फूट क्रीम है. यह त्वचा द्वारा जल्दी सोख लिया जाता है, इसलिए यह इस्तेमाल में आसान है. इससे हाथों और पैरों की मालिश करें और हैंड व फूट क्रीम की जगह इसे इस्तेमाल करें.
  • त्वचा की डलनेस भी कम करता है. टैन भी दूर करता है.
  • आल्मंड ऑयल में थोड़ा-सा शहद मिलाकर होंठों पर लगाएं. होंठों का कालापन व ड्राइनेस दोनों दूर होगा. चाहें तो इस मिश्रण को स्टोर भी करके रख सकती हैं.
  • आधा एवोकैडो को मैश करके 1-1 टेबलस्पून तेल और शहद मिलाएं. प्यूरी जैसा बना लें और स्किन पर अप्लाई करें. 15-20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें. स्किन ग्लो करने लगेगी.
  • आल्मंड ऑयल मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो बालों के लिए बेहद ज़रूरी है. इसकी कमी से बाल झड़ने लगते हैं. हफ़्ते में एक बार आल्मंड ऑयल से स्काल्प मसाज करें. बाल झड़ने बंद होंगे. चाहें, तो मालिश के बाद गर्म तौलिए को बालों में लपेट लें. इससे तेल और बेहतर ढंग से समाएगा.
  • यह डैंड्रफ की समस्या को दूर करने में बेहद लाभकारी है. यह स्काल्प पर मौजूद मृत त्वचा को हटाकर डैंड्रफ दूर करता है. आंवले को मैश करके उसमें आल्मंड ऑयल मिलाकर बालों में 30 मिनट तक लगाकर रखें. फिर बाल धो लें. डैंड्रफ दूर होकर बाल शाइन करेंगे.
  • स्काल्प में आल्मंड ऑयल से नियमित मसाज करने से स्काल्प के इंफेक्शन्स व जलन ख़त्म होती है, स्काल्प हेल्दी होता है.

दूर होते रिश्ते, क़रीब आती टेक्नोलॉजी (Technology effecting negatively on relationships)

Technology effecting on relationships

Technology effecting on relationships
वर्तमान में पति-पत्नी, माता-पिता, बच्चे या फिर दोस्त ही क्यों न हों, सभी टेक्नोलॉजी (Technology effecting on relationships) की चपेट में इस कदर आ गए हैं कि वे चाहकर भी इससे निकल नहीं पा रहे. ऐसा क्यों? इसी विषय पर मनोचिकित्सक रेनू कुंदर से हमने बात की. उन्होंने कई छोटी-छोटी बातों के ज़रिए टेक्नोलॉजी के फ़ायदे-नुक़सान की पैरवी की.

* ग्लोबली हमें अपनी पोज़ीशन बनाए रखनी है, तो टेक्नोलॉजी को अपनाना ही पड़ेगा, वरना हम अपने ही दायरे में सिमट
जाएंगे. इसके प्रभाव और फ़ायदों को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स भी कम नहीं हैं.

* आज सोशल साइट्स पर एक्टिव रहना, अपडेट करते रहना, हर किसी का शग़ल बनता जा रहा है. इसका साइड इफेक्ट यह हो रहा है कि हमारे पास अपनों से बात तक करने का व़क्त नहीं मिल पाता है.

* पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग हैं, तो वैसे ही वे एक-दूसरे को कम व़क्त दे पाते हैं, उस पर जो समय मिलता है, उसमें पति महाशय सोशल साइट्स में बिज़ी रहते हैं, वहीं पत्नी अपने फेवरेट सीरियल्स का मोह छोड़ नहीं पाती.

* आज बच्चों के पास पैरेंट्स ही नहीं, अपने ग्रैंड पैरेंट्स के लिए भी बिल्कुल व़क्त नहीं है. वे अपने स्कूल-कॉलेज, पढ़ाई, दोस्तों के बाद जो भी व़क्त मिलता है, उसे घंटों सेल फोन पर गेम्स (Technology effecting on relationships) खेलने, कंप्यूटर पर सर्फिंग करने, चैटिंग करने आदि में बिताते हैं.

Technology effecting on relationships

* अब तो आलम यह है कि कइयों को रात को सोने से पहले और सुबह उठने पर बिना अपने सेल फोन पर मैसेज देखे, दोस्तों व सोशल गु्रप्स को ‘गुड मॉर्निंग’ कहे बगैर दिन की शुरुआत ही नहीं होती. वहीं क़रीब बैठे पार्टनर से दो मीठे बोल कहने का भी व़क्त
नहीं रहता.

* ताज्जुब होता है तब कॉलेज स्टूडेंट लता कहती हैं- “मैं बिना खाए-पीए रह सकती हूं, पर अपने सेल फोन, लैपटॉप और आईपॉड की दूरी बर्दाश्त नहीं कर सकती.” यानी गैजेट्स हम पर डिपेंड हैं या हम गैजेट्स के ग़ुलाम(Technology effecting on relationships) हो गए हैं.

* एक ज़माना था, जब शादी के निमंत्रण कार्ड दूर तो नहीं, पर क़रीबी रिश्तेदारों को पर्सनली मिलकर मिठाई के साथ दिए जाते थे, पर अब तो ईमेल और सोशल साइट्स के ज़रिए ही इन्वाइट कर दिया जाता है. सफ़ाई यह दी जाती है कि इससे व़क्त, पैसे और ग़ैरज़रूरी परेशानी से बच जाते हैं.

* आज की पीढ़ी का यह मानना है कि टेक्नोलॉजी न केवल आपको सहूलियत देती है, बल्कि आपका स्टेटस भी बढ़ाती है. इसलिए न चाहते हुए भी आपको इसे मेंटेन तो करना ही पड़ेगा.

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टेक्नोलॉजी एडिक्शन से कैसे बचें?

– इसमें टाइम मैनेजमेंट अहम् भूमिका निभाती है. सेल फोन का अधिक इस्तेमाल, नेट पर सर्फिंग करना, लैपटॉप पर चैटिंग करना इत्यादि बातें ग़लत नहीं, पर इसका एडिक्ट हो जाना नुक़सानदायक होता है. इसलिए अपना रोज़ का शेड्यूल कुछ इस तरह बनाएं कि इन सब बातों को व़क्त देने के साथ-साथ अपनों के साथ भी क्वॉलिटी टाइम बिताएं.

– पार्टनर के साथ हों, तो जितना कम हो, उतना गैजेट्स के साथ व़क्त बिताएं.

– ऐसा भी न हो कि जीवनसाथी आपको अपनी ऑफिस से जुड़ी कोई समस्या बता रहा हो और आप सेल फोन पर चैटिंग करने में मशगूल हैं. तब तो यही बात हो जाएगी कि क़रीब के दूर होते चले गए और जो कोसों दूर थे, वे न जाने कितने पास आ गए.

– अक्सर कहा जाता है कि बच्चों का अपना सर्कल होता है, वे उसी में एंजॉय करते हैं और उनके पास न अपने पैरेंट्स के लिए व़क्त रहता है और न ही ग्रैंड पैरेंट्स के लिए. लेकिन यह सही नहीं है. यह तो हमारी सोच है, जो जाने-अनजाने में बच्चों ने भी उस पर सहमति की मोहर लगा दी. यदि घर का एक नियम बन जाए कि चाहे सुबह का नाश्ता, दोपहर या शाम का खाना हो, कोई भी एक समय पूरा परिवार साथ मिलकर खाएं और क्वॉलिटी टाइम बिताएं, एक-दूसरे की दिनभर की एक्टिविटीज़ को जानें-समझें, तो इसमें ग़लत क्या है?

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– सेलिब्रिटीज़ भी आपसी संवाद के महत्व को समझते हैं, तभी तो सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के बाऊजी ने भी अपने दौर में यह नियम बना दिया था कि दिनभर कोई भी एक समय पूरा परिवार साथ हो. फिर चाहे वो खाने का समय हो या रात को सोने के लिए जाते समय. हां, आउटडोर शूटिंग या कोई और कारणों से कोई सदस्य आउट ऑफ स्टेशन है, तो यह और बात है. बकौल अमितजी के, “यही छोटी-छोटी बातें आपसी रिश्तों को जोड़ती हैं और रिश्तों में आपसी मिठास और अपनापन बनाए रखती हैं.”

– माना सोशल साइट्स की अलग ही दीवानगी और एडिक्शन है, जो छूटता ही नहीं, पर जीवंत रिश्तों को दांव पर लगाकर बेजान चीज़ों से मोह भला कहां की समझदारी है.

– क्यों न एक बार फिर अपने रिश्तों को रिवाइव किया जाए, जिनसे बरसों न बात हुई और न ही मुलाक़ात, उनसे मिला जाए. देखिए, यक़ीनन उस सुखद एहसास से आप ही नहीं, वे भी सराबोर हो जाएंगे.

– याद रहे, टेक्नोलॉजी हमारे कामों को आसान करने और सुविधा मुहैया कराने के लिए ज़रूरी है, न कि रिश्तों से दूर होने और संवेदनशीलता को मारने के लिए.

– ऊषा गुप्ता

रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

एक्सरसाइज़ के हेल्थ बेनीफिट्स (Health Benefits of Exercise)

Health Benefits of Exercise

– शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से एक्सरसाइज़ (Health Benefits of Exercise) करने से नींद अच्छी आती है.

– दिनभर ताज़गी का एहसास बना रहता है.

 

Health Benefits of Exercise

– रोज़ाना एक्सरसाइज़ करने से शरीर में फैट्स का लेवल कम होता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है.

– नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से अवसाद और चिड़चिड़ापन दूर होता है.

– यदि एक्सरसाइज़ करने के मूड में नहीं हैं, तो दूसरी एक्टिविटीज़ करके भी अपने आपको फिट रख सकती हैं, जैसे- बच्चों के साथ बास्केट बॉल खेलना, बागवानी करना, ग्रॉसरी शॉप तक वॉकिंग जाना, पेट्स के साथ वॉक पर जाना आदि.

– तनाव कम करने के लिए जितना हो सके, शारीरिक गतिविधियां अधिक करें.

– गेम्स आदि खेलकर भी आप अपने तनाव को कम कर सकती हैं.

 

Health Benefits of Exercise

– एक्सरसाइज़ से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.

– नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से इम्यून सिस्टम मज़बूत बनता है और आप बेहतर तरी़के से बीमारियों से लड़

पाते हैं.
Health Benefits of Exercise

मेडिकली यह साबित हो चुका है कि जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज़ या फिज़िकल एक्टिविटीज़ करते हैं, उनमें-

  • कोरोनरी हार्ट डिसीज़ और स्ट्रोक का ख़तरा 35% तक कम हो जाता है.
  • डायबिटीज़ का ख़तरा लगभग 50% तक कम हो जाता है.
  • ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा 20% तक कम हो जाता है.
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस का ख़तरा 83% तक कम हो जाता है.
  • अर्ली डेथ, डिप्रेशन और डेमेन्शिया का ख़तरा 30% तक कम हो जाता है.