Bhutta

मक्का, कॉर्न कहे या भुट्टा स्वाद के साथ-साथ हमारे सेहत के लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद है. आयुर्वेद के अनुसार, यह पित्तनाशक है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता और भी बढ़ जाती है. पके हुए भुट्टे में कैरोटीनायड होता है, जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है. यह कैंसर से लड़ने में भी मदद करता है. पके हुए भुट्टे में फोलिक एसिड होता है, जो कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में सहायता करता है. कच्चा मक्का मूत्र संबंधी बीमारियों में दवा की तरह काम करता है. साथ ही पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है. कॉर्न में मिनरल्स व विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं. यह एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीज़ों के लिए बेहद फ़ायदेमंद है.

घरेलू नुस्ख़े

  • किडनी में पथरी हो, तो एक ग्लास पानी में 65 मि. ग्रा. मक्के की भस्म को मिलाकर लें.
  • यदि यूरिन के समय दर्द हो, तो मक्के का काढ़ा बनाकर इसे 15-20 मि. ली. मात्रा में लेने से आराम मिलता है.
  • टीबी के मरीज़ों के लिए कॉर्न लाभदायक है. उन्हें रोज़ मक्के की रोटी खानी चाहिए. इससे टीबी के इलाज में फ़ायदा होता है.
  • ताज़ा भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमज़ोरी दूर होती है.
  • यदि मौसम के बदलाव के कारण खांसी से परेशान है, तो भुने मक्के का सेवन करें. खांसी में राहत मिलेगी.

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  • मक्के के बाल (सिल्क) यानी रेशे का उपयोग पथरी की समस्या को दूर करता है. रातभर बाल को पानी में भिगोकर रख दें. सुबह इस पानी को छानकर पी लें. इसके अलावा बाल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से भी लाभ होगा.
  • भुट्टे के कोमल बाल दर्द कम करनेवाला और मूत्र को बढ़ानेवाला भी होता है. साथ ही पथरी के अलावा सूजाक या गोनोरिया और सूजन में भी भुट्टे का काढ़ा बनाकर पीने से फ़ायदा होता है.
  • मक्के के दानों का काढ़ा बनाकर कमर से स्नान करने से बवासीर में भी फ़ायदा होता है.
  • खुजली की समस्या हो, तो भुट्टे का स्टॉर्च इस्तेमाल करें.
  • कॉर्न स्टार्च चेहरे की सुंदरता भी बढ़ाता है. इसके प्रयोग से त्वचा ख़ूबसूरत और नर्म-मुलायम बनती है.
  • ज़ुकाम की समस्या में भी भुट्टा लाभकारी है. भुट्टे के दानों को खाने के बाद भुट्टे को बीच से तोड़कर सूंघें. इससे ज़ुकाम में फ़ायदा होता है यानी भुट्टे के दोनों बीचवाले हिस्सों को एक साथ नाक के पास रखकर ज़ोर से सूंघना है. ऐसा 4- 5 बार करें. ज़ुकाम में आराम मिलेगा.
  • लीवर के लिए मक्के के आटे का उपयोग फ़ायदेमंद है, क्योंकि यह प्रचुर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है, इसलिए इसे खाने से पेट ठीक रहता है. इससे कब्ज़, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना भी नहीं रहती.
  • मक्के के आटे में भरपूर मात्रा में फाइबर और ग्लूटेन होता है, जिससे इसका सेवन करने से यह शरीर को डायबिटीज़, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से बचाता है. साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है.

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  • बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत उपयोगी होता है. ताज़े दूधिया मक्के के दाने पीसकर एक खाली शीशी में भरकर धूप में रखें. जब उसका दूध सूखकर उड़ जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए, तो उसे छान लें. इस तेल से शिशु के पैरों की मालिश करें. इससे उसके पैर मज़बूत होंगे और वह जल्दी चलने लगेगा.
  • साथ ही इस तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली भी होता है. हर रोज़ एक टीस्पून तेल को शक्कर के बने शर्बत में मिलाकर पीने से ताक़त मिलती है.

हेल्थ अलर्ट

  • ध्यान दें कि कॉर्न हर किसी को सूट नहीं करता. कई लोगों को इसे खाने से एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते आदि समस्याएं हो ती है.
  • मीठे मक्के को कच्‍चा न खाएं. इससे दस्‍त की समस्या हो सकती है.
  • कुछ लोगों को कॉर्न का अधिक सेवन करने से गैस, पेट फूलना, सूजन जैसी समस्‍याएं होती है.
  • मक्का खाने से वज़न बढ़ता है, इसलिए जो अपना वज़न कम करना चाहते हैं, उन्‍हें मक्के का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए.
  • कुछेक को मक्के की रोटी डाइजेस्ट नहीं होती. यदि मक्के की रोटी के साथ छाछ या लस्सी पीएं, तो रोटी आसानी से डाइजेस्ट होगी.

– ऊषा गुप्ता

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