Bill

लंबे समय से सरोगेसी को लेकर चल रही बहस पर विराम लगाते हुए कैबिनेट ने सरोगेसी बिल पास कर दिया है यानी अब हर किसी को आसानी से किराए की कोख उपलब्ध नहीं होगी. Surrogacy business

 

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सरोगेसी बिल

बिल में साफ़ कहा गया है कि विदेशियों को भारत में किराए की कोख नहीं मिल पाएगी. साथ ही भारतीय कपल्स को भी आसानी से ये सुविधा नहीं मिल सकती. सरोगेसी का सहारा लेने से पहले उन्हें साबित करना होगा कि वो नेचुरल तरी़के से बच्चा पैदा करने में असमर्थ हैं. मेडिकली अनिफट होने की बात साबित होने पर ही उन्हें सरोगेसी की इजाज़त मिलेगी, लेकिन अविवाहित, समलैंगिक दंपति और लिव इन में रहनेवाले कपल्स को सरोगेसी की इजाज़त नहीं होगी. बिल में कहा गया है कि किसी महिला को एक ही बार सरोगेसी की अनुमति होगी. सरोगेसी के लिए पुरुष की उम्र 26 से 55 के बीच और महिला की उम्र 23 से 50 साल के बीच होनी चाहिए. शादी के पांच साल बाद ही इसकी इजाज़त होगी और यह काम रजिस्टर्ड क्लीनिकों में ही होगा. सरकार ने सरोगेसी के बढ़ते व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक के मक़सद से ही सरोगेसी बिल पास किया. साथ ही सरोगेसी के मामलों की निगरानी के लिए एक बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी है.

ज़रूरत शौक़ बन गई है

बिल पास होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि सरोगेसी कुछ सेलेब्रिटीज़ के लिए एक शौक़ बन गया है और जिनके पास बेटे और बेटियां हैं वे भी सरोगेसी का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि उनकी पत्नियां प्रेग्नेंसी नहीं चाहती हैं. सरकार आगे से इसकी इजाज़त नहीं देगी. दरअसल, सरोगेसी का मकसद ज़रूरतमंद कपल्स की मदद करना था, मगर धीरे-धीरे ये पूरी तरह से व्यवसायिक बन गया है, इतना ही नहीं अब तो अधिकांश महिलाएं प्रेग्नेंसी के दर्द से बचने के लिए इस आसान रास्ते का इस्तेमाल करने लगी हैं.

बिल की अहम बातें

* स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड का गठन किया जाएगा.

* सरोगेसी बोर्ड में दो सांसद सदस्य होंगे.

* स़िर्फ भारतीय नागरिकों को सरोगेसी का अधिकार होगा.

* यह अधिकार एनआरआई और ओसीआई होल्डर को नहीं मिलेगा.

* सिंगल पैरेंट्स, होमोसेक्सुअल जोड़े, लिव इन में रहनेवालों को सरोगेसी की इजाज़त नहीं होगी.

* सरोगेसी के अनैतिक इस्तेमाल पर रोक लगेगी, गरीब महिलाओं की कोख किराए पर लेना गुनाह होगा.

* सरोगेसी के व्यावसायिक इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगेगा.

* सरोगेसी का प्रावधान केवल निःसंतान दंपतियों के लिए.

* निःसंतान दंपति को भी केवल एक बार ही सरोगेसी की इजाज़त होगी.

* एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी. उसका विवाहित होना और एक स्वस्थ बच्चे की मां होना ज़रूरी है.

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बॉलीवुड सेलिब्रेटी ने भी ली सरोगेसी की मदद

* हाल ही में तुषार कपूर सरोगेसी के ज़रिए एक बेटे के पिता बनें, जबकि अभी तक उन्होंने शादी नहीं की है.

* शाहरुख़ ख़ान के तीसरे बेटे अब्राहम ख़ान का जन्म आईवीएफ तकनीक के ज़रिए सरोगेसी से हुआ है.

* आमिर ख़ान व किरण राव के बेटे आज़ाद राव ख़ान का जन्म भी आईवीएफ तकनीक के ज़रिए सरोगेसी से ही हुआ है.

* फराह ख़ान ने भी अपने तीनों बच्चे के आईवीएफ तकनीक से होने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी.

क्या है सरोगेसी?

गर्भधारण में दिक्क़त होने की वजह से जो लोग मां-बाप नहीं बन पाते, वे किराए की कोख से बच्चा पैदा करते हैं. यही सरोगेसी है. पैरेंट्स के स्पर्म और एग को बाहर फर्टिलाइज़ करके सरोगेट मदर के गर्भ में पहुंचा दिया जाता है.

तेज़ी से बढ़ता सरोगेसी कारोबार

पिछले कुछ सालों से भारत में सरोगेसी का कारोबार बहुत तेज़ी से बढ़ रहा था. आकड़ों के अनुसार हर साल विदेशों से आए दंपतियों के 2000 बच्चे यहां होते हैं. क़रीब 3000 क्लीनिक इस काम में लगे हुए हैं, लेकिन नए क़ानून के बाद इसमें मजबूर महिलाओं के शोषण की गुंजाइश नहीं रहेगी. सरकार देश में सरोगेसी को रेग्यूलेट करने के लिए एक नया क़ानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है. अब अगली चुनौती बिल के प्रारूप पर राजनीतिक सहमति बनाकर इसे संसद के शीतकालीन सत्र में पारित कराने की होगी.

सरोगेसी के लिए भारत क्यों है विदेशियों की पसंद?

– अमेरिका में सरोगेसी की लागत 1.20 लाख डॉलर (54.67 लाख रु.) तक हो सकती है, जबकि भारत में इसका खर्च 10 से 25 लाख रुपए के बीच ही है. सिंपल सरोगेसी की लागत गुजरात के आणंद में 7 लाख रुपए है.

– भारत में सरोगेसी पर किसी तरह की पाबंदी लगाने वाला कोई क़ानून नहीं है. ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों में सरोगेट मदर को मां का दर्जा मिलता है, जबकि भारत में इच्छुक पैरेंट्स का नाम बर्थ सटिर्फिकेट पर होता है.

– फ्रांस, नीदरलैंड और नॉर्वे जैसे यूरोपीय देशों में कमर्शियल सरोगेसी की इजाज़त नहीं है.

 

– कंचन सिंह

easier life

GST-Bill

सालों से अधर में लटका जीएसटी बिल आख़िरकार राज्यसभा में पास हो ही गया. संसद के मानसून सत्र में 197 वोटों के साथ जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है. ऐसा अनुमान है कि अगले साल यानी 2017 में इसे लागू भी कर दिया जाएगा. इसके लागू होते ही आम आदमी को कई तरह से फ़ायदा होगा.

जानें क्या है जीएसटी ?
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है, जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं.

जीएसटी के अनेक फ़ायदे
अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है. जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी. जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

समान प्राइस रेट
जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फ़ायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को ख़रीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी. उदाहरण के लिए अगर आप मुंबई से कार ख़रीदते हैं, तो आपको अलग क़ीमत चुकानी पड़ती है और उसी कार को अगर आप अहमदाबाद से ख़रीदते हैं, तो अलग क़ीमत. अब ऐसा नहीं होगा. जीएसटी बिल लागू होने के बाद आपको कार की एक ही क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

कम होगी महंगाई
जानकारों की मानें, तो जीएसटी बिल के लागू होने के बाद काफ़ी हद तक महंगाई पर लगाम लगाया जा सकता है. चीज़ों के रेट अपने आप कम हो जाएंगे, जिससे आम आदमी को इसका फ़ायदा मिलेगा. फिलहाल जो सामान ख़रीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है, वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है. आम आदमी के साथ कंपनियों और व्यापारियों को भी फ़ायदा होगा.

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