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Personal Problems: क्या प्रेग्नेंसी में ब्लडप्रेशर की दवा लेना सेफ है? (Is It Safe To Have Blood Pressure Medicine During Pregnancy?)

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मेरी नौ महीने की बेटी है, जिसे मैं ब्रेस्ट फीडिंग करती हूं. मेरी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉज़ीटिव आई है और सोनोग्राफी में 5 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी का पता चला है. मेरे डॉक्टर ने मुझे सर्जिकल एबॉर्शन की बजाय मेडिकल एबॉर्शन की सलाह दी है. क्या यह सेफ और इफेक्टिव है?
– महिमा झा, हिसार.

स्टडीज़ में यह बात साबित हो चुकी है कि मेडिकल एबॉर्शन सेफ और इफेक्टिव तरीक़ा है. इसमें दो गोलियां दी जाती हैं. सर्जिकल प्रोसीजर भले ही कितना भी छोटा हो, फिर भी उसमें एनीस्थिसिया दिया जाता है और प्रोसीजर में कॉम्प्लीकेशंस की संभावना भी बनी रहती है, क्योंकि आपके डॉक्टर ने आपको मेडिकल एबॉर्शन की सलाह दी है, तो उन्होंने इसके बारे में आपको पूरी जानकारी भी दी होगी. इसलिए बेफिक्र रहें. ये बिल्कुल सेफ है.

 Blood Pressure Medicine During Pregnancy
मैं पहली बार मां बनी हूं और मेरी 8 महीने की प्रेग्नेंसी है. डॉक्टर ने कहा है कि मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है, जिसे कंट्रोल करने के लिए मुझे दवा लेनी होगी. कहीं ये दवाएं मेरे बच्चे को कोई नुक़सान तो नहीं पहुंचाएंगी? मुझे क्या करना चाहिए?
– अमृता जैन, राजकोट.

पहली बार मां बननेवाली बहुत-सी महिलाओं को यह समस्या होती है, जिसे प्रेग्नेंसी के कारण होनेवाला हाइपरटेंशन कहते हैं. अगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल न किया गया, तो यह आपके और आपके बच्चे की सेहत को नुक़सान पहुंचा सकता है. ज़्यादातर एंटी-हाइपरटेंसिव दवाएं टेस्टेड ही होती हैं, इसलिए इफेक्टिव और बच्चों के लिए सेफ हैं. अगर आपके डॉक्टर ने आपको इसकी सलाह दी है, तो वैसा ही करें.

 

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 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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जानें कौन-सी दवा का सेक्स लाइफ पर क्या साइड इफेक्ट होता है (Side Effects of Medicines on Sex Life)

sex life
माना कि दवाएं दर्द-तकली़फें दूर करने के लिए होती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ दवाएं आपकी सेक्स लाइफ़ को भी प्रभावित करती हैं. कैसे? आइए जानें.

 

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कहते हैं प्यार के इज़हार का सबसे अच्छा ज़रिया होता है- सेक्स. पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई और मज़बूती काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी सेक्स लाइफ़ कैसी है? लेकिन, बहुत बार कई कारणों से आपसी रिश्ते अच्छे होते हुए भी सेक्स लाइफ़ प्रभावित होने लगती है. जिसका असर रिश्तों पर पड़ने लगता है. अचानक या धीरे-धीरे आपके पार्टनर की सेक्स में रुचि कम होने लगती है और आप बस कारण ढूंढ़ते रह जाते हैं और अक्सर ग़लत नतीज़े पर पहुंचकर अपने संबंध ख़राब कर लेते हैं. ऐसे में ज़रूरी है कि सही कारणों को जानें और एक्सपर्ट की सलाह से अपने रिश्तों को मज़बूूत बनाएं.
आपको जानकर हैरानी होगी, मगर विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी कई दवाइयां हैं, जिनके सेवन से सेक्स लाइफ़ पर असर होता है, लेकिन कई बार शर्म या झिझक के कारण लोग डॉक्टर से संपर्क नहीं करते.

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ब्लडप्रेशर

ब्लडप्रेशर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्लोनीडीन, अल्फा मिथाइल डोपर (एंडोमेंट), रेसर्पिन, ग्वानेथिडीन जैसी औषधियां कामेच्छा में कमी लाती हैं. ये औषधियां शरीर में प्रोलॅक्टीन नामक हारमोन की मात्रा बढ़ा देती हैं, जिससे पुरुष नपुंसकता का शिकार हो जाता है. इसके अलावा इंडोरॉल, बीटास्पैन, बीटा ब्लॉकर, एल्फाडोपा, डोपाजिट, आर्कामिन, केटाप्रेस आदि औषधियां लिंग के उत्थापन मेें बाधा पहुंचाती हैं, जिससे सेक्स लाइफ़ प्रभावित होती है.

एंटी-हाइपरटेंशन-   हाई ब्लडप्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की दवाइयां सेक्स लाइफ़ को प्रभावित कर सकती हैं.
एंटी-डिप्रेसेंट- अवसाद यानी डिप्रेशन की दवाइयां.
एंटी-सायकॉटिक- अगर आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो हो सकता है आपकी सेक्स लाइफ़ उनसे प्रभावित हो रही हो.

अब सवाल ये उठता है कि ये दवाएं भला सेक्स लाइफ़ को कैसे प्रभावित करती हैं?
दरअसल सेक्स के लिए ज़रूरी हार्मोंस, न्यूरोट्रान्समीटर्स यानी शरीर की ज़रूरतों व संदेशों को मस्तिष्क तक पहुंचाने वाले तत्व, जैसे- डोपामाइन, सेरोटोनिन और सेक्स के अंगों के बीच तालमेल ज़रूरी होता है. मुख्यतः डोपामाइन सेक्स क्रिया को बढ़ाने में और सेरोटोनिन उसे कम करने की भूमिका निभाते हैं, वहीं टेस्टोस्टेरॉन हार्मोंस रक्त धमनियों के ज़रिए उत्तेजना उत्पन्न करने का काम करते हैं.
ऐसे में ये दवाएं हार्मोंस के स्तर में बदलाव लाकर, सेक्स की क्षमता और सेक्स में रुचि को भी कम कर देती हैं. एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं मस्तिष्क में केमिकल्स के स्तर को बढ़ा देती हैं. कुछ दवाएं सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ा देती है, जिससे सेक्स क्रिया प्रभावित होती है.
हालांकि हर दवा का असर अलग-अलग होता है, ऐसे में ये ज़रूरी नहीं कि स़िर्फ दवाएं ही ज़िम्मेदार हो, लेकिन यदि आपको अपनी सेक्स लाइफ़ में बदलाव महसूस हो रहा है, तो दवा बंद न करें, पहले डॉक्टर से संपर्क करें और उनकी सलाह से आगे बढ़ें.
ध्यान रहे आपकी ज़िंदगी और ज़िंदगी को बेहतर बनाना ही आपका और आपके डॉक्टर का उद्देश्य है, ऐसे में झिझक छोड़कर अपनी परेशानी डॉक्टर को बताना ज़रूरी है.

 

ये दवाएं भी हो सकती हैं सेक्स की दुश्मन

 

एंटी-डिप्रेसेंट, एंटी-सायकॉटिक और एंटी-हाइपरटेंशन के अलावा एंटी-एपिलेप्टिक और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं भी ज़िम्मेदार हो सकती हैं. साथ ही घबराहट और अनिद्रा के लिए बेंजोडायज़ेपाइन्स पेप्टिक अल्सर, एसिडिटी, प्रोस्टेट कैंसर, नशा छुड़ाने के लिए प्रयुक्त दवाएं, मितली और उल्टी, हृदय संबंधी दवाएं भी आपकी सेक्स लाइफ़ को प्रभावित कर सकती हैं.
कुछ पेनकिलर्स भी इसकी ज़िम्मेदार हो सकती है. ऐसे में ङ्गसेल्फ़ मेडिकेशनफ या सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं ख़ुद से न लेकर डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं, इन दवाओं के साथ मिलकर कई अन्य साइड इ़फेक्ट्स उत्पन्न कर सकती हैं, जो बेहद घातक हो सकता है.

 

इरेक्शन फ्रेंड्ली दवाओं का भी उपयोग किया जा सकता है-

– वॉटर टेबलेट्स या बीटा ब्लॉकर्स के बजाय उच्च रक्तचाप में यदि कैल्शियम चैनल और एल्फा ब्लॉकर्स का प्रयोग किया जाए तो सेक्स समस्याएं कम होंगी.
– एसीएफ इंहिबिटई भी बेहतर विकल्प है.
– ट्रायसायक्लिक एंटी-डिप्रेसेंट के मुक़ाबले SSRIs और उसके बाद MAQIs (मोनो-अमाइन ऑक्सिडेस इंहिबिटर्स) सेक्स संबंधी परेशानियां ज़्यादा पैदा करते हैं.
– कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए फाइब्रेट्स की जगह स्टैटिन्स कम समस्या देंगे.
यह ध्यान रहे कि डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवाई न खाएं और ये भी ज़रूरी नहीं कि हर कोई जो ये दवाएं ले रहा है उसे वे सेक्स संबंधी परेशानियां हों ही या अगर हो रही हों तो उनकी अन्य वजहें भी हो सकती हैं.

 

– विजयलक्ष्मी

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उम्र बढ़ानी है तो ब्रिस्क वॉक करिए (Morning Brisk Walk Benefits)

Morning Brisk Walk Benefits

सुबह की ताज़ी हवा में दौड़ना (Brisk Walk) सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है. यह एक ऐसा व्यायाम है, जिसके लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती. मोटापा घटाने के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से संबंधित अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए भी जॉगिंग बेस्ट है.

Morning Brisk Walk Benefits

स्ट्रेस को दूर करता है

जॉगिंग या तेज़ चलने से स्ट्रेस दूर होता है, क्योंकि दौड़ने के कुछ ही सेकंड के भीतर दिमाग़ एक हार्मोन रिलीज़ करने लगता है, जिससे नेचुरल तरी़के से मूड फ्रेश हो जाता है.Morning Brisk Walk Benefits

 

स्मोकिंग की लत से छुटकारा

दौड़ने से आत्मविश्‍वास बढ़ता है. सोच पॉज़िटिव होती है और स्मोकिंग जैसी बुरी लत से मन हटने लगता है.

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डायबिटीज़ का रिस्क हो जाएगा कम

हफ़्ते में 4-5 दिन तक 30 मिनट की दौड़ डायबिटीज़ का रिस्क 12 फ़ीसदी तक कम कर देती है.

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वज़न पर कंट्रोल

दौड़ना एक बेस्ट कैलोरी बर्नर है. हफ़्ते में कम से कम 5 दिनों तक 30 मिनट दौड़ने या तेज़ चलने से 340 कैलोरी बर्न होती है.weight loss

याददाश्त होगी तेज़

कई रिसर्च कहते हैं कि हफ़्ते में 4 दिन अगर 30 मिनट दौड़ा जाए, तो न स़िर्फ याददाश्त तेज़ होती है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ती है.improve-memory

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दिल का ख़्याल

एक रिसर्च कहती है, जो लोग हफ़्ते में 6 किलोमीटर चलते हैं, उन्हें दिल की बीमारी का ख़तरा 45 फ़ीसदी तक कम रहता है.healthy-heart

हड्डियों को देता है मज़बूती

दौड़ने से हड्डियों पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से ज़रूरी मिनरल्स हड्डियों तक पहुंचते हैं और हड्डियां मज़बूत बनती हैं.Calcium-and-Strong-Bones

उम्र बढ़ेगी

रिसर्च के मुताबिक़ हफ़्ते में एक घंटे की दौड़ जीवनकाल का औसतन तीन साल बढ़ा देती है.positive_life_long_Live_long_healthy

कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण

दौड़ने या तेज़ चलने से गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है.

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ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

दौड़ते व़क्त धमनियां फैलती व संकुचित होती हैं. इससे धमनियां स्वस्थ रहती हैं और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है.

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आराम की नींद

दौड़ने से नींद झट से आ जाती है. नींद की गुणवत्ता में भी इज़ाफ़ा होता है.

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नोट

जिन्हें घुटनों में दर्द है, उन्हें दौड़ने की बजाय आराम से चलना चाहिए.

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