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बात तो सभी जानते हैं कि विनोद खन्ना और महेश भट्ट में बड़ी गहरी दोस्ती थी. विनोद खन्ना को रजनीश के आश्रम पहुंचाने में भी महेश भट्ट का ही हाथ था और महेश भट्ट के कहने पर ही विनोद खन्ना ने उनके भाई मुकेश भट्ट को अपना सेक्रेटरी बना लिया था, लेकिन मुकेश भट्ट पर एक बार विनोद खन्ना इतना भड़क गए कि उन्हें एक दो नहीं, बल्कि कई थप्पड़ जड़ दिए. आखिर ऐसा क्या हुआ कि अपने सबसे अच्छे फ्रेंड के भाई पर ही भड़क गए विनोद खन्ना. जानिए पूरा मामला क्या था.

Vinod Khanna and Mukesh Bhatt



महेश भट्ट ने क्यों दी थी रजनीश की शरण में जाने की सलाह?

Vinod Khanna


महेश भट्ट को पहले से ही आदत रही है लोगों की पर्सनल लाइफ में दखल देने की, रिया चक्रवर्ती ही नहीं अपने दोस्त विनोद खन्ना की लाइफ में वो अक्सर दखल दिया करते थे. दरअसल अस्सी के दशक में विनोद खन्ना का करियर एकदम पीक पर था. ऐसा माना जा रहा था कि जल्द ही विनोद खन्ना अमिताभ बच्चन को भी पीछे छोड़ देंगे, लेकिन इसी दौरान विनोद खन्ना की मां की डेथ हो गयी. इस घटना से विनोद खन्ना बहुत दुखी थे, उस पर महेश भट्ट ने उन्हें आध्यात्म की ओर जाने की सलाह दे दी और महेश भट्ट के उकसाने पर ही विनोद खन्ना उनके साथ ओशो रजनीश के आश्रम चले गए थे. कहते हैं उन दिनों महेश भट्ट का पूरा खर्च विनोद खन्ना ही उठाया करते थे. अपनी मर्सिडीज में महेश भट्ट को बिठाकर ओशो आश्रम ले जाया करते थे. खुद महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘तब मेरे पास पैसा नहीं था. विनोद ही मेरी देखभाल करते थे और मेरी ट्रेवलिंग का खर्चा उठाते थे.”

गुस्से में विनोद ने लगातार 40 दिन तक शूटिंग कैंसिल कराई थी

Vinod Khanna and Mukesh Bhatt

फिर विनोद खन्ना का रजनीश से भी मोहभंग हो गया और वो वापस बॉलीवुड में लौट आए और आते ही उन्होंने फ़िल्म ‘इंसाफ’ से धमाकेदार वापसी भी की. महेश भट्ट इस मौके को कैश करना चाहते थे, इसलिए अपने भाई मुकेश भट्ट को प्रोड्यूसर बनाकर विनोद खन्ना को लेकर फ़िल्म ‘जुर्म’ की शुरुआत कर दी. जैसा कि अमूमन हमेशा होता है भट्ट अपने स्टार्स को उनकी फीस देने में आना कानी करते हैं, फिर विनोद खन्ना तो उनके करीबी थे, तो भट्ट ब्रदर्स विनोद खन्ना को पैसे देने में भी आनाकानी करने लगे. विनोद खन्ना इस बात से बहुत नाराज हुए और वो शूटिंग के लिए भट्ट ब्रदर्स को रखड़ाने लगे और इस तरह फ़िल्म लटक गई. कहते हैं गुस्से में विनोद ने लगातार 40 दिन तक शूटिंग कैंसिल कराई थी.

पहले महेश भट्ट ने विनोद खन्ना का सेक्रेटरी बना दिया मुकेश भट्ट को

Vinod Khanna and Mukesh Bhatt


प्रोड्यूसर बनने से पहले मुकेश भट्ट शराबी हुआ करते थे और कोई काम धाम नहीं करते थे. बस शराब पीकर यहां वहां भटका करते थे. ऐसे में महेश भट्ट ने ही विनोद खन्ना से रिक्वेस्ट करके मुकेश को विनोद खन्ना का सेक्रेटरी बना दिया और इस तरह मुकेश भट्ट काफी दिनों तक उनका काम संभालते रहे.

गुस्से में विनोद खन्ना ने मुकेश भट्ट को कई चांटे जड़ दिये

Vinod Khanna


जब ‘जुर्म’ से मुकेश भट्ट प्रोड्यूसर बने और पैसे न मिलने की वजह से विनोद खन्ना ने उनकी फिल्म अटका दी, तो मुकेश भट्ट ने विनोद खन्ना के खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया. वो उनके खिलाफ पब्लिक में ऊलजुलूल स्टेटमेंट्स देने लगे. कुछ समय तक तो विनोद खन्ना शांत रहे, लेकिन जब उन्हें लगा कि पानी सर के ऊपर जाने लगा है, तो उनका गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया. आखिर एक दिन स्टूडियो में उनका मुकेश भट्ट से सामना हो गया. विनोद खन्ना इतने गुस्से में थे कि मुकेश को देखते ही उन्हें कई चांटे जड़ दिए.

और महेश भट्ट के साथ भी विनोद के रिश्ते खराब हो गए

Vinod Khanna and Mukesh Bhatt


महेश भट्ट, जो खुद को विनोद खन्ना का बहुत अच्छा दोस्त बताते थे, कहते हैं फ़िल्म ‘जुर्म’ के बाद उनकी दोस्ती भी खत्म हो गई. महेश भट्ट ने यहां तक कह दिया कि  ‘मैं विनोद के स्पॉट ब्वॉय को हीरो बना लूंगा, लेकिन विनोद को अपनी फिल्मों में साइन नहीं करूंगा’.

विनोद खन्ना ने खुद पूरी की वो फ़िल्म

Vinod Khanna


तुम्हें और क्या दूं मैं दिल के सिवा…1964 में रिलीज हुई फिल्म ‘आई मिलन की बेला’ का बेहद मशहूर गाना, जिसे पिक्चराइज किया गया था खूबसूरत अभिनेत्री सायरा बानो और हैंडसम हंक राजेंद्र कुमार पर. और बस ये जोड़ी सबकी आंखों में रच बस गई थी. खुद सायरा और राजेंद्र कुमार भी एक दूसरे की आंखों में बस गए थे. कहा जाता है कि इसी फिल्म से शुरू हुई थी सायरा बानो और राजेंद्र कुमार की लव स्टोरी. इसके बाद इस जोड़ी की 1968 में आई फिल्म ‘झुक गया आसमान’ भी बड़ी हिट साबित हुई. इस फिल्म का भी एक गाना ‘कौन है जो सपनों में आया’ काफी हिट हुआ और इस गाने के सुपरहिट होने के बाद लोग यह समझने लगे कि राजेंद्र कुमार के सपने में कोई और नहीं बल्कि सायरा बानो ही शामिल हो गई हैं. लेकिन अभी लोगों के इस सपने का टूटना बाकी था, क्योंकि इस लव स्टोरी में कोई तीसरा आनेवाला था.

Saira Banu

और तीन बच्चों के फादर से दिल लगा बैठीं सायरा
जिस तरह आज बॉलीवुड में खान हीरोज़ का दौर है, उसी तरह उस ज़माने में कुमार हीरोज़ की तिकड़ी फ़िल्म हिट होने के गारन्टी हुआ करती थी. ये तिकड़ी थी- दिलीप कुमार, मनोज कुमार और राजेंद्र कुमार की तिकड़ी. इसमें से राजेंद्र कुमार की हर फिल्म सिल्वर जुबली मनाती थी, इसीलिए उनका नाम ही जुबली कुमार पड़ गया.

Saira Banu


खैर राजेन्द्र उस समय शादीशुदा थे और तीन बच्चों के पिता भी, लेकिन ये जानते हुए भी कि राजेंद्र शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं, सायरा खुद को उनसे प्यार करने से न रोक सकीं. वो हर हाल में उनके साथ रहने को तैयार थीं. कहा जाता है कि राजेंद्र भी उनकी खातिर अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ने को तैयार थे. वह शादी के लिए सायरा को प्रपोज करने ही वाले थे, लेकिन ऐसा हो न सका…

सायरा की मां इस रिश्ते से टेंशन में थीं

Saira Banu

नसीम बानो इन सब अफवाहों से बहुत टेंशन में आ गई. उन्हें यह रिश्ता रास नहीं आ रहा था. वजह थी राजेंद्र कुमार का शादीशुदा होना और दूसरे धर्म से ताल्लुक रखना. दोनों को अलग करने के लिए नसीम ने एड़ी चोटी का बल लगा दिया और अपनी बेटी को इस रिश्ते से बाहर निकालने की कोशिश करनी शुरू कर दी. अपने मंसूबे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए नसीम बानो ने दिलीप कुमार का सहारा लिया. सायरा बचपन से ही दिलीप साहब की दीवानी थीं, ये बात नसीम बानो अच्छी तरह जानती थीं और इसी बात का फायदा उन्होंने उठाया.

दिलीप कुमार पर फिदा थीं सायरा बानो

Saira Banu

सायरा बानो ने बचपन में दिलीप कुमार की सुपरहिट फिल्म मुगले आजम देखी थी. इस फिल्म को देखने के बाद से ही सायरा मन ही मन उन्हें चाहने लगी थीं.
यह किस्सा 1960 का है, जब दिलीप कुमार और मधुबाला की फिल्म मुगल-ए-आजम रिलीज हुई थी. लंदन में पढ़ी – लिखी 16 साल की सायरा बानो ने जब इस फिल्म का प्रीमियर देखा तो बस दिन रात दिलीप कुमार के ही सपने देखने लगीं. कहा जाता है कि प्रीमियर के वक्त सायरा बानो दिलीप कुमार से मिलने का ख्वाब भी संजोए बैठी थीं लेकिन दिलीप कुमार प्रीमियर में पहुंचे ही नहीं और सायरा का दिल टूट गया. उस वक्त मधुबाला के साथ दिलीप कुमार के रोमांस के चर्चे भी दूर-दूर तक थे, इसलिए सायरा ने सोचा दिलीप साहब बस उनके सपनों के राजकुमार बन कर रह जाएंगे. इस बीच सायरा ने खुद बॉलीवुड में एंट्री ले ली और राजेंद्र कुमार से दिल लगा बैठीं.

दिलीप कुमार ने सायरा को कैसे किया राजेंद्र कुमार से अलग

Saira Banu and Dilip Kumar

सायरा को राजेंद्र कुमार से अलग करने के लिए नसीम बानो दिलीप कुमार से मिलीं और उनसे कहा कि वो सायरा से राजेंद्र कुमार और उनके रिश्ते के बारे में बातचीत करें और उन्हें समझाएं.
23 अगस्त 1966 को सायरा ने अपनी बर्थडे पार्टी में लगभग पूरे बॉलीवुड को इनवाइट किया. दिलीप कुमार इस पार्टी में नहीं पहुंचे. जबकि राजेंद्र कुमार इस पार्टी में अपनी पत्नी के साथ पहुंचे. नसीम बानो खुद दिलीप कुमार के पास गईं और उन्हें पार्टी में आने के लिए कहा. नसीम बानो को दिलीप साहब न नहीं कह सके और पार्टी में पहुंचे.

सायरा को देखते ही दिल दे बैठे दिलीप कुमार

Saira Banu and Dilip Kumar


पार्टी में दिलीप साहब पहुंचे और जैसे ही उन्होंने सायरा को देखा, पहली ही नज़र में उन्हें अपना दिल दे बैठे. हालांकि, वो इससे पहले कई बार सायरा से मिले थे, लेकिन उनके मुताबिक उस दिन सायरा का अंदाज कुछ अलग ही था. वो खुद को उनके प्यार में गिरफ्तार होने से न रोक पाए. इस बात का जिक्र दिलीप साहब ने अपनी बायोग्राफी ‘दिलीप कुमार: द सब्सटेंस एंड द शैडो’ में भी किया है. वैसे भी दिलीप कुमार का मधुबाला से उन दिनों ताजा-ताजा ब्रेकअप हुआ था और उन्हें किसी के सहारे की ज़रूरत थी, जो नसीम ने सायरा बानो के रूप में उनके सामने पेश किया.
उन्होंने सायरा को राजेंद्र कुमार से दूरी बनाने के लिए कहा. सायरा ने इसके लिए एक शर्त रखी. वो शर्त ये थी कि इसके लिए दिलीप साहब को उनसे शादी करनी होगी. दिलीप साहब भी यही चाहते थे. दिलीप साहब के हां कहते ही सायरा के सिर से राजेंद्र कुमार का नशा काफुर होते देर न लगी. दिलीप और सायरा की स्टोरी, जब राजेंद्र को पता चली, तो उन्होंने भी सायरा से ब्रेकअप कर लिया. इसी के साथ ही सायरा और राजेंद्र कुमार का ये किस्सा भी यहीं पर हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो गया.

आखिरकार 4 नवंबर 1966 को सायरा ने अपने से उम्र में 22 साल बड़े दिलीप कुमार से शादी कर ली. उस वक्त दिलीप कुमार की उम्र 44 साल और सायरा बानो सिर्फ 22 साल की थीं.

हर रोज नजर उतारती हैं सायरा

Saira Banu and Dilip Kumar

सायरा बानो आज भी दिलीप साहब से उतना ही प्यार करती हैं जितना वह 22 साल की उम्र में करती थीं. दिलीप साहब पिछले कई सालों से बीमार हैं और बेड पर ही हैं, लेकिन सायरा आज भी खुद उनका पूरा ख्याल रखती हैं. उनकी पूरी केयर करती नजर आती हैं. दिलीप साहब को किसी नजर ना लगे, इसलिए वो हर रोज उनकी नजर उतारती हैं. इतना ही नहीं दिलीप साहब को लोगों की दुआएं मिलें, इसलिए वो उनकी नज़र उतारकर गरीबों को अनाज और कपड़े देती रहती हैं.