bonding

Bharti's elder sister

पहचान कौन: तस्वीरें देखकर आप भी खा जाएंगे धोखा! (Can You Guess Who She Is?)

आपको लग रहा होगा कि ये हैं लाफ्टर क्वीन भारती सिंह. लेकिन ये सच नहीं है, क्योंकि ये भारती नहीं, पिंकी राजपूत हैं. जी हां, ये भारती की बहन हैं, लेकिन ये जुड़वां नहीं हैं, फिर भी हू-ब-हू उनकी तरह ही दिखती हैं. पिंकी भारती की बड़ी बहन हैं और उनमें और भारती के चेहरे में फर्क स़िर्फ इतना ही है कि पिंकी के चेहरे पर एक मस्सा है. वरना तस्वीरें देखकर कोई इन दोनों में फर्क ही नहीं बता सकता. यकीन नहीं होता, तो देखें पिंकी और भारती की ये तस्वीरें

View this post on Instagram

😊😊😊🤗🤗

A post shared by Pinky Rajput (@pinky.rajput) on

View this post on Instagram

Mubeen bhai😊

A post shared by Pinky Rajput (@pinky.rajput) on

View this post on Instagram

Mera mota bacha🤣

A post shared by Pinky Rajput (@pinky.rajput) on

Bharti's elder sister

Bharti Singh's Sister

Bharti Singh's Sister

Bharti Singh's Sister

Bharti Singh's Sister

Bharti Singh's Sister

Bharti Singh's Sister

Bharti Singh's Sister

View this post on Instagram

🤟🏻💃🏻💃🏻💃🏻

A post shared by Pinky Rajput (@pinky.rajput) on

यह भी पढ़ें:बिग बॉस 13ः कौन है इस सीज़न का सबसे बड़ा खिलाड़ी? कमेंट करें (Bigg Boss 13: Who Do You Think Was The Biggest Gamer Of This Season?)

Gift Ideas For Bhai Dooj

भाई दूज के लिए स्मार्ट गिफ्ट आइडियाज़… (Smart Gift Ideas For Bhai Dooj)

इस भाई दूज (Bhai Dooj) अपने भाई को स्पेशल फील करवाने के लिए दें उसे कोई स्पेशल गिफ्ट (Special Gift)..

  • कोई ऐसी चीज़ गिफ्ट करें, जो वो लंबे समय से ख़रीदने की सोच रहा हो, चाहे वो कोई बुक हो, कोई एक्सेसरी हो या कोई ड्रेस.
  • आप उसकी फेवरेट मिठाई के साथ चांदी का ब्रेसलेट भी दे सकती हैं. यह एक ऐसा गिफ्ट होगा, जो सभी को पसंद आएगा.
  • पर्सनलाइज़्ड गिफ्ट दे सकती हैं. कार्ड होल्डर, डायरी या पेन.
  • इमेज प्रिंट वाली नोटबुक, कुशन कवर, न्यू ईयर कैलेंडर, वॉल डेकोरेटिव पीस या फिर टी शर्ट भी दे सकती हैं.
  • अगर वह पढ़ने का शौकीन है, तो आप लेटेस्ट बुक या उसके मनपसंद लेखक की क़िताबों का सेट भी गिफ्ट कर सकती हैं या डिक्शनरी भी गिफ्ट की जा सकती है.
  • आप गिफ्ट हैंपर्स भी दे सकती हैं, जो अपने आप में कंप्लीट होता है.
  • गिफ्ट वाउचर्स भी ग्रेट आइडिया है. यह लोगों को काफ़ी पसंद भी आता है और वो अपना मनचाहा गिफ्ट ले सकते हैं.
  • स्वीट्स, फ्रूट्स और ड्राय फ्रूट्स हैंपर्स भी अच्छा ऑप्शन है. साथ में बुके व ग्रीटिंग भी दे सकती हैं.
  • फ्लोटिंग या एरोमैटिक कैंडल सेट्स भी दे सकती हैं.
  • कोई टूर स्पॉन्सर करके भी गिफ्ट दिया जा सकता है.
  • हैंड मेड कोई चीज़ उपहार में दे सकते हैं. यह बहुत ही पर्सनल भी लगेगा और दिल को छू लेनेवाला गिफ्ट होगा.
  • कुछ यादगार पुरानी तस्वीरों को फ्रेम करवाकर गिफ्ट करें. अपने बचपन की यादों को संजोकर फोटोज़ फ्रेम करवाकर दे सकती हैं.
  • अगर आपका भाई हेल्थ कॉन्शियस है, तो आप शुगर फ्री चॉकलेट्स व मिठाइयां गिफ्ट कर सकती हैं. इसके गिफ्ट हैंपर्स की काफ़ी वेरायटी उपलब्ध है.
  • हैंडमेड वास या पेन होल्डर भी पेंट करके या डेकोरेट करके गिफ्ट किया जा सकता है.
  • बेडशीट्स भी प्रिंट करवाकर दी जा सकती हैं. यह आइडिया भी लोगों को काफ़ी पसंद आता है.
  • वुडन फ्रेम को भी कलर्स से पेंट करके एथनिक झरोखा बनाकर विंडो फ्रेम या वॉल डेकोरेटिव पीस के तौर पर गिफ्ट कर सकते हैं. यह बहुत ही क्लासी लगता है.
  • परफ्यूम, ग्रूमिंग या कॉस्मेटिक्स से जुड़ी चीज़ें भी गिफ्ट की जा सकती हैं.
  • अपने हाथों से पेंट या एंब्रायडरी की हुई पेंटिग, बैग या कोई ड्रेस भी दे सकती हैं.
  • होम अप्लायन्सेस भी गिफ्ट कर सकते हैं, जैसे- कॉफी मेकर, हैंड ब्लेंडर या सैंडविच मेकर्स, ताकि वो आसानी से अपने लिए कुछ कुक कर सके.
  • आप भाई-बहन के मैसेजेस के मग्स या कुशन कवर्स विद कोट्स भी गिफ्ट कर सकती हैं यानी उन पर कुछ कहावतें, जोक्स, दिलचस्प या दार्शनिक बातें छपी हों.
  • मोबाइल या लैपटॉप एक्सेसरीज़ भी बहुत अच्छा गिफ्ट आइडिया है. आजकल कलरफुल ईयरफोन्स, मोबाइल व लैपटॉप कवर्स, स्लीव्स और जैकेट्स आते हैं. इनमें भी बीडेड और बहुत ही एथनिक कवर्स आते हैं, जो फेस्टिवल के समय गिफ्ट किए जा सकते हैं.
  • पेन सेट, पर्स या वॉलेट्स भी गिफ्ट करना अच्छा ऑप्शन है.
  • होम डेकोर एक्सेसरी, लैंप्स या लैनटर्न्स भी अच्छा गिफ्ट आइडिया है. फेस्टिवल सीज़न में तो यह और भी अच्छा लगेगा.
  • हैंड मेड चॉकलेट्स, केक और मिठाइयां भी पसंद आएंगी. इसमें उसे पर्सनल टच महसूस होगा. आप सरप्राइज़ के तौर पर उसे बताए बगैर उसके लिए इसे तैयार करें.
  • फेस्टिवल के दौरान कई कॉम्बो ऑफर्स भी मिलते हैं, जैसे- एक पर एक फ्री या फिर ड्राय फ्रूट्स, चॉकलेट्स या मिठाइयों के हैंपर्स भी ऑफर्स में आते हैं, जो बड़ों और बच्चों दोनों को बहुत भाते हैं.

यह भी पढ़ें: 9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

यह भी पढ़ें: गरीबों का मसीहा- मेडिसिन बाबा (The Incredible Story Of ‘Medicine Baba’)

 

Social Media Makes You Feel Alone
सोशल साइट्स ने हमारी ज़िंदगी बदलकर रख दी है, इसमें कोई दो राय नहीं है. हम अब आसानी से अपडेटेड रहते हैं, पुराने दोस्तों व दूर-दराज़ के रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहते हैं, अपनी फीलिंग्स उनके साथ बांट सकते हैं… इस तरह से देखा जाए, तो सोशल साइट्स हमारे लिए किसी सोशल साइट्स ने हमारी ज़िंदगी बदलकर रख दी है, इसमें कोई दो राय नहीं है. हम अब आसानी से अपडेटेड रहते हैं, पुराने दोस्तों व दूर-दराज़ के रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहते हैं, अपनी फीलिंग्स उनके साथ बांट सकते हैं… इस तरह से देखा जाए, तो सोशल साइट्स हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं. लेकिन जब हम इनके आदी होने लगें और जब यथार्थ की दुनिया को छोड़कर इस डिजिटल वर्ल्ड में ही अपनों को और अपने रिश्तों को तलाशने लगें, तब यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या हम इतने तन्हा हैं कि हमारे आसपास कोई है ही नहीं अपने सुख-दुख बांटने के लिए और हम ऐसे लोगों की तलाश सोशल साइट्स पर भी करने लगे हैं.

  • कई तरह की स्टडीज़ और रिसर्च यह बताते हैं कि सोशल साइट्स पर सीमा से अधिक समय बिताना एक तरह के एडिक्शन को जन्म देता है.
  • ये शोध यह भी बताते हैं कि जो लोग भीतर से तन्हा होते हैं, वो इस तरह के एडिक्शन के अधिक शिकार होते हैं.
  • वो अपना अकेलापन दूर करने के लिए ही चैटिंग का सहारा लेते हैं.
  • अक्सर इस तरह की चैटिंग के ज़रिए ही वो अपने लिए पार्टनर भी तलाशने लगते हैं.
  • हालांकि कुछ लोग ये चैटिंग फन के लिए करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लत लगने लगती है और फिर वो सीरियस एडिक्शन में तब्दील होने लगती है.
  • यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.
  • दरअसल, यंगस्टर्स सोशल मीडिया में इस तरह से इंवॉल्व हो जाते हैं कि बाहरी दुनिया से कट जाते हैं. उन्हें वो डिजिटल दुनिया और उसके रिश्ते इतने आकर्षक लगते हैं कि अपनी असली दुनिया उन्हें बोरिंग लगने लगती है. यही वजह है कि जब कभी उन्हें डिजिटल वर्ल्ड से ब्रेक लेना पड़ता हो या फिर वहां उन्हें रिश्ते नहीं मिल रहे हों, तो उन्हें रियल वर्ल्ड और भी तन्हा लगने लगता है. उनमें निराशा, अवसाद और चिड़चिड़ापन पनपने लगता है. इसका असर यह होता है कि वो फिर उसी डिजिटल दुनिया का रुख करते हैं और अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए नए रिश्ते तलाशने लगते हैं.
  • यह एक चक्र जैसा है, जिसमें हमें पहले यह लगता है कि हम तन्हा हैं, तो सोशल मीडिया हमारी तन्हाई को दूर करने का सबसे कारगर साधन है, लेकिन जब हम इस चक्र में फंसने लगते हैं, तो महसूस होता है कि यह तन्हाई दूर करने का नहीं, बढ़ाने का साधन साबित हो रहा है.
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है.
  • यानी लोग अपनी तन्हाई दूर करने के इरादे से सोशल वर्ल्ड में आते हैं और यह उनकी तन्हाई घटाने की बजाय बढ़ा देता है.
  • इसके अलावा, डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का भी होता है. आपको कोई भी आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है यहां.
  • अपनी पहचान छिपाकर आपसे लंबे समय तक दोस्ती रख सकता है, आपका फ़ायदा उठा सकता है. इसी तरह की एक घटना का ज़िक्र करती हैं मुंबई की प्रीति वर्मा (बदला हुआ नाम). प्रीति ने जो आपबीती सुनाई, वो हैरान करनेवाली थी. “मैं पहले तो बहुत अधिक सोशल मीडिया पर रहती ही नहीं थी. मेरे सभी दोस्त सोशल मीडिया पर काफ़ी एक्टिव थे और मैं अपनी ज़िंदगी में बहुत ही तन्हाई के दौर से गुज़र रही थी. मैंने सोचा, क्यों न मैं भी सोशल मीडिया पर किसी से दोस्ती कर लूं. धीरे-धीरे मुझे यहां अच्छा लगने लगा. मेरा ज़्यादा समय यहां गुज़रने लगा. मुझे नए दोस्त बनाने का शौक़ तो था ही, यहां नए-नए लोगों से बातचीत होती, उनके बारे में दिलचस्प बातें जानने को मिलतीं, तो मेरा रुझान इस तरफ़ ज़्यादा ही होने लगा. कुछ समय पहले मुझे एक लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, उसका प्रोफाइल बेहद आकर्षक था. मैंने भी उसमें दिलचस्पी दिखाई. हम दोस्त बन गए, दोस्ती थोड़ी गहरी हुई, तो हमने अपने फोन नंबर्स एक्सचेंज किए. वो घंटों मुझसे फोन पर बात करता. मुझे भी अच्छा लगने लगा था. वो अपने वीडियोज़ और पिक्चर्स भेजता. पर कहीं न कहीं मुझे लगता था कि न जाने क्यों इस शख़्स की पर्सनैलिटी से इसकी बातें मैच नहीं करतीं. वो पिक्चर्स तो बहुत आकर्षक भेजता था, लेकिन उसकी बातें बहुत ही बचकानी लगती थीं, जैसे कोई टीनएजर बात कर रहा हो. इस तरह पूरा एक साल बीत गया. वो अक्सर मिलने की इच्छा ज़ाहिर करता. दूसरे शहर में रहने की वजह से मैं प्लान कर रही थी कि कैसे जाकर उससे मिलूं, क्योंकि मैं भी उससे मिलना चाहती थी.एक दिन मैं यूं ही यू ट्यूब पर वीडियोज़ देख रही थी, तो अचानक एक वीडियो पर मेरी नज़र गई. मैं हैरान रह गई. वो वीडियो एक पंजाबी मॉडल का था, जिसकी शक्ल मेरे उस दोस्त से हूबहू मिलती थी. मैंने डीटेल में उस मॉडल का प्रोफाइल खंगाला, तो मेरे पसीने छूट गए, ये अगर असली है, तो वो कौन है, जो इसकी पहचान के आधार पर मेरा दोस्त बना हुआ था? उसने नकली पिक्चर्स लगाकर, नाम बदलकर मुझसे दोस्ती की. मैंने उसे तुरंत फोन लगाकर सफ़ाई मांगी, तो वो डर गया, मैंने पुलिस कंप्लेन करने की बात कही, तो उसने मुझे ब्लॉक कर दिया. नंबर्स से लेकर सोशल मीडिया तक, सब जगह से वो अब गायब था. मैं चाहकर भी कुछ न कर सकी, बस यही सोचकर रूह कांप जाती है कि अगर मैं उससे मिलने चली गई होती, तो न जाने क्या होता? मैं ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रही थी. मैं बस, यही कहना चाहती हूं कि जब भी सोशल मीडिया पर रिश्ते तलाशें, तो अच्छी तरह जांचें-परखें, वरना यह आपको और भी तन्हा कर देगा. कहां तो मैं अपनी तन्हाई दूर करने यहां आई थी, कहां मैं बेव़कूफ़ बन बैठी.”
  • यह अपने आप में अकेली घटना नहीं है, प्रीति की तरह ही बहुत से लड़के-लड़कियां अपनी तन्हाई को दूर करने के लिए सोशल मीडिया की शरण में आते हैं और वो इस कदर तन्हा होते हैं कि कोई दोस्त मिल जाने पर बिना जांचे-परखे आगे बढ़ने लगते हैं. जबकि सोशल मीडिया एक अच्छा प्लेटफॉर्म है हर किसी के लिए, लेकिन यहां आकर जल्दबाज़ी में रिश्ते ढूंढ़ना आपको भारी पड़ सकता है. बेहतर होगा सतर्क रहें, सावधान रहें.
  • रियल वर्ल्ड में अगर आप तन्हा हैं या आपका अभी-अभी ब्रेकअप हुआ है, तो थोड़ा सब्र करें, ख़ुद को समय दें. अपनी हॉबीज़ पर ध्यान दें और अपना मन लगाने के अन्य साधन भी तलाशें. अक्सर लोग ब्रेकअप के बाद सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव हो जाते हैं या फिर अपनी बोरिंग शादीशुदा लाइफ से हटकर ज़िंदगी में कुछ स्पाइस ऐड करने के इरादे से यहां आते हैं. शुरुआत में उन्हें सब कुछ बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन इससे अपनी तन्हाई दूर करने का यह इरादा उन्हें भटका भी सकता है.
  • बेहतर होगा, तन्हाई को क्रिएटिविटी में बदलें. कुछ समय बाद तन्हाई का एहसास अपने आप कम होने लगेगा. सोशल मीडिया पर ज़रूर जाएं, लेकिन एक निश्‍चित सीमा में रहकर, सावधानी से ही किसी से संपर्क साधें और अपने नंबर्स शेयर करें.

ब्रह्मानंद शर्मा

यह भी पढ़ें: ख़ुशहाल ससुराल के लिए अपनाएं ये 19 हैप्पी टिप्स

 

Pahla Affair: Wo Meri Prerna Hai

पहला अफेयर: वह मेरी प्रेरणा है (Pahla Affair: Wo Meri Prerna Hai)

तुमसे ल़फ़्ज़ों का नहीं, रूह का रिश्ता है मेरा
मेरी सांसों में बसी रहती हो ख़ुशबू की तरह!

ये पंक्तियां शायर ने शायद मेरे ही लिए लिखी हैं. आज भी उसकी महक मेरी यादों में बसी है और उसका चेहरा आंखों में… वह मेरा पहला प्यार थी… एक ऐसा एहसास जो आज भी तन-मन में ताज़गी और उत्साह भर देता है… वसंत ऋतु में जिस तरह आमों की बौराई की गंध कोयल को कूकने के लिए मज़बूर कर देती है, उसी तरह प्यार का एहसास ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बना देता है, दुनिया की हर शै अपनी-सी लगने लगती है और प्रेम की मदहोशी छा जाती है.

हम पड़ोसी थे और सहपाठी भी, इसलिए खुलकर हर विषय पर चर्चा करते. लड़ते भी तो दो दिन से अधिक नाराजग़ी को खींच नहीं पाते. अधिकतर पहल वही करती, शायद इसीलिए मेरा अहम कुछ बढ़ गया और यही उसे खोने का कारण बना.

स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद हम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. उसी बीच उसकी शादी के प्रस्ताव आने लगे थे. उसने इस संबंध में मुझे बताया भी, परंतु मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया. मैं कोचिंग करने दिल्ली गया तो मैंने न ही उसे कुछ कहा और न ही अपना साथ देने के लिए आश्‍वस्त किया.

मैं सोचता था कि वह मुझे चाहती है तो मेरा इंतज़ार करेगी ही, लेकिन मैं एक लड़की की स्थिति को समझ नहीं पाया. बिना किसी वादे या आश्‍वासन के वह कितने दिन मेरा इंतज़ार करती, अपने परिवार को कैसे समझाती, उसने उनके कहे अनुसार शादी कर ली.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुमको न भूल पाएंगे

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: कच्ची उम्र का प्यार

अपनी नादानी में मैंने उसे खो दिया. मैं तो पूरी तरह से आश्‍वस्त था कि जब वो मुझे चाहती है तो मेरे सिवा किसी और की हो ही नहीं सकती. पर शायद हमारी क़िस्मत में एक होना लिखा न था.

कभी-कभी दिल में बरबस यह ख़याल आने लगता है कि वह मेरी अच्छी जीवनसंगिनी बन सकती थी. मेरी हर पसंद का ख़याल रखने वाली, मेरी ग़लतियों को समझाने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाली, ऐसी साथी मुझे कोई और नहीं मिल सकती थी.

वह अब भी मेरी सच्ची दोस्त है तथा मुझे सुखी देखना चाहती है. पर कहते हैं ना कभी किसी को मुक़म्मल जहां नहीं मिलता-कहीं जमीं, तो कहीं आसमां नहीं मिलता.

माना कि उसकी जुदाई से कुछ दिनों तक दीवानों-सी हालत रही. पर उसके समझाने पर घर-परिवार का ख़याल कर मैंने ख़ुद को बिखरने से बचा लिया. इसका श्रेय भी उसे ही जाता है.

कितनी कशिश रहती है उसकी आंखों में. दिल को इस बात का सुकूं है कि क्या हुआ वो मेरी न हो सकी, लेकिन उसके संग बिताए वे पल, वे प्यार भरे एहसास तो मेरे यादों के घरौंदे में महफूज़ हैं. आज भी निराशा, अकेलेपन में मेरे जीने का सबब बन जाती हैं, उसकी बातें, उसकी यादें. साथ ही ज़िंदगी-ज़िंदादिली से जीने की प्रेरणा देती है.

प्यार के मीठे एहसास में डूबे और आर्टिकल्स के लिए यहां क्लिक करें

– समीर चौबे

पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर तकरार या झगड़ा होना आम बात है. झगड़ा करते समय अक्सर पति-पत्नी असभ्य भाषा का प्रयोग करते हुए एक-दूसरे को अपमानित करते हैं, जिससे उनके दांपत्य जीवन में दरार आ सकती है. ख़ुशहाल दांपत्य जीवन की सफलता में शिष्टाचार और बेसिक मैनर्स (How to Live a Happy Married Life) की भूमिका भी अहम् होती है. इससे पार्टनर्स में एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान की भावना बढ़ती है.

How to Live a Happy Married Life

शादी दो लोगों के बीच एक ऐसा खट्टा-मीठा रिश्ता है, जो जितना पुराना होता जाता है, उनके बीच प्यार और विश्‍वास की नींव उतनी ही गहरी होती जाती है. इस नींव की मज़बूती तभी कायम रह सकती है, जब उनके रिश्ते में एक-दूसरे के लिए आदर, सम्मान और शिष्टाचार की भावना हो. आज तलाक़ लेनेवाले दंपतियों की संख्या जिस तेज़ी से बढ़ रही है, उसके पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि उनके दांपत्य जीवन से ‘शिष्टाचार’ और ‘एटीकेट्स’ जैसे शब्द गायब होते जा रहे हैं. पति-पत्नी के बीच अशिष्ट भाषा का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है, जो धीरे-धीरे उनके सुखी वैवाहिक जीवन को खोखला बना रहा है.

क्यों ज़रूरी है दांपत्य जीवन में शिष्टता?

– आपसी रिश्ते में मज़बूती लाने के लिए.

– एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान का भाव बनाए रखने के लिए.

– एक-दूसरे के लिए प्यार बनाए रखने के लिए.

How to Live a Happy Married Life

शिष्टाचार संबंधी कुछ ज़रूरी बातें

पतियों के लिए

– कुछ पतियों की आदत होती है कि घर के कामों में पत्नियों की मदद नहीं करते, बल्कि उनके कामों को और बढ़ा  देते हैं. यदि आप घर के कामों में पत्नी की मदद नहीं कर सकते हैं, तो उनके कामों को और बढ़ाएं भी नहीं.

– यदि आप पत्नी की मदद करना चाहते हैं, तो पहले उनसे पूछ लें कि आप किस तरह से उनकी मदद कर सकते हैं.

– ऐसा करने से पति का सम्मान कम नहीं होता है, बल्कि उन्हें अच्छा लगता है कि पति उन्हें सपोर्ट करना चाह रहे हैं.

– पति अपनी चीज़ों की देखभाल, साज-संभाल स्वयं करें.

– हर छोटे-छोटे काम के लिए पत्नी को बोलने की बजाय कुछ काम ख़ुद करें.

– कुछ व्यक्तियों की काम को टालने की आदत होती है. बेहतर होगा कि काम को टालने की बजाय पत्नी को पहले ही स्पष्ट रूप से बता दें कि आप उनकी मदद नहीं कर सकते, क्योंकि यदि आप काम टालते रहेंगे, तो आपकी इस आदत से परेशान होकर वह धीरे-धीरे आप पर विश्‍वास खोने लगेगी, जो दांपत्य जीवन के लिए ठीक नहीं है.

– पत्नी चाहे हाउसवाइफ हो या वर्किंग, बातचीत के दौरान शिष्टता बनाए रखें. अधिकतर पतियों की यह आदत होती है कि वे पत्नियों के साथ सही ढंग से बात नहीं करते. उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह आपकी पत्नी है. वह भी आपसे उतना ही सम्मान चाहती है, जितना आप उनसे. यदि आप उनसे बेसिक मैनर्स, शिष्टाचार और आदर-सम्मान की उम्मीद रखते हैं, तो वे भी आप से ऐसे ही व्यवहार की अपेक्षा रखती हैं.

– पत्नी के साथ बाहर जाते समय कुछ छोटी किंतु महत्वपूर्ण शिष्टाचार संबंधी बातों का ध्यान ज़रूर रखें, जैसे- शॉपिंग बैग्स उठाना, कार में बैठने से पहले उनके लिए दरवाज़ा खोलना, बाहर लंच या डिनर के समय चेयर ऑफर करना आदि. ये बेसिक मैनर्स महिलाओं को, ख़ासकर पत्नियों को बेहद अच्छे लगते हैं. पत्नियों को भी यह एहसास होता है कि वे अपने पति के लिए ‘स्पेशल’ हैं.

– समय-समय पर पत्नी को उपहार ज़रूर दें. ज़रूरी नहीं कि उपहार में डायमंड-गोल्ड की ज्वेलरी, डिज़ाइनर साड़ियां, क़ीमती सामान आदि ही दिए जाएं. उपहार देकर उन्हें यह एहसास कराएं कि वे आपके लिए ख़ास हैं.

– पत्नी के सामने कभी भी उनकी सहेलियों की तारीफ़ न करें, न ही उनसे ज़्यादा घुलने-मिलने की कोशिश करें. पत्नियों को पति की यह आदत बिल्कुल अच्छी नहीं लगती.

– समय-समय पर पत्नी को ‘मिस यू’, ‘लव यू’ ज़रूर कहें. अच्छा काम करने पर उन्हें कॉम्प्लीमेंट्स दें या एप्रिशिएट करें.

– ऑफिस के काम को घर में न लाएं.

– घर या बाहर, जब भी पत्नी आपके साथ हो, तो मोबाइल, लैपटॉप आदि को नज़रअंदाज़ करें. नहीं तो उन्हें यह महसूस होगा कि आप उन्हें अनदेखा कर रहे हैं.

– आप चाहे कितने ही व्यस्त क्यों न हों, परिवार के लिए समय ज़रूर निकालें.

– शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखें.

– गंदे मोजे, गंदी बनियान और गंदा रुमाल आदि चीज़ें कहीं भी फेंकने की बजाय लॉन्ड्री बैग में रखें.

– गीला तौलिया बिस्तर पर छोड़ने की बजाय सूखने के लिए डाल दें.

How to Live a Happy Married Life

शिष्टाचार संबंधी कुछ ज़रूरी बातें

पत्नियों के लिए

– पतियों को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता कि पत्नियां उन्हें बात-बात पर टोकें, उनमें कमी निकालें.

– पति को स्पेस दें. हर समय उन पर शक करने या जासूसी करने से आपका दांपत्य जीवन ख़तरे में पड़ सकता है.

– अपनी सहेलियों, पति के दोस्तों, ससुराल व मायकेवालों के सामने पति की बुराई न करें. इससे न केवल पति की इमेज ख़राब होगी, बल्कि आपका इम्प्रेशन भी ख़राब होगा.

– घर हो या बाहर, दोस्तों, रिश्तेदारों के सामने पति को रिसपेक्ट दें. उनकी कमियों के बारे में दूसरों से न बोलें, न ही ताने मारें.

– हर समय पति के सामने ससुराल व बच्चों की शिकायतों का रोना न रोएं. आपके ऐसे व्यवहार से परेशान होकर पति आपसे बचने की कोशिश करने लगेंगे.

– पति को हर छोटी-छोटी बात के लिए फोन या एसएमएस करके परेशान न करें.

– भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करने की कोशिश न करें.

– छोटी-छोटी तकरार होने पर बार-बार मायके जाने या बच्चों को छोड़कर जाने की धमकी न दें.

– व़क्त-बेव़क्त पति के सामने उनकी कम तनख़्वाह और महंगाई का रोना न रोएं.

– छोटी-छोटी बातों की ज़िद न करें, जैसे- मुझे आज ही शॉपिंग के लिए जाना है या आज डिनर के लिए हम बाहर जाएंगे आदि.

– पति व बच्चों के साथ बाहर जाते समय पहनावे का ख़ास ध्यान रखें.

– पति के लिए कुछ समय ज़रूर निकालें, जैसे- साथ बैठकर कॉफी पीएं, वॉक पर जाएं.

– घर-बाहर की ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपनी फिटनेस व ब्यूटी का भी ध्यान रखें.

– देवांश शर्मा