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क्या बोन्स स्ट्रॉन्ग हैं ? (Are Your Bones Really Strong?)

Strong Bones

how to make Strong Bones

मॉडर्न लाइफस्टाइल, भागदौड़ भरी ज़िंदगी, स्ट्रेस, अनहेल्दी डायट आदि ने अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स के साथ ही हमारी हड्डियों को भी अनहेल्दी बना दिया है और नतीजा कम उम्र में ही पीठदर्द, कमरदर्द, ऑस्टियोपोरोसिस, बोन लॉस जैसी शिकायतें… अगर हमें अपनी हड्डियों को हेल्दी रखना है तो कम उम्र से ही सावधानी बरतनी होगी. कुछ बातों का ध्यान रखना होगा, तभी हमारी हड्डियां हेल्दी रह पाएंगी.

कुछ ज़रूरी बातें

– पूरे जीवनकाल में हमारा शरीर पुरानी हड्डियों को एब्ज़ॉर्ब करता है और नई हड्डियों का निर्माण करता है.
– जब तक हमारे शरीर में नई और पुरानी हड्डियों में संतुलन रहता है, हमारी हड्डियां हेल्दी व मज़बूत रहती हैं.
– प्रॉब्लम तब शुरू होती है, जब जिस तेज़ी से पुरानी हड्डियां एब्ज़ॉर्ब होती हैं, उस तेज़ी से नई हड्डियों का निर्माण नहीं होता.
– कई बार बिना किसी कारण के भी बोन लॉस होता है. आनुवांशिक कारणों से भी ऐसा होता है.
– कमज़ोर हड्डियां आसानी से टूट जाती हैं, कई बार तो बिना गिरे या बिना कोई चोट लगे भी.
– जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारा शरीर हड्डियों मेें कैल्शियम और फॉस्फेट रखने की बजाय इन मिनरल्स को एब्ज़ॉर्ब करने लगता है. जिससे हमारी हड्डियां      कमज़ोर होने लगती हैं. यही प्रक्रिया जब एक निश्चित स्तर पर पहुंच जाती है, तो उस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं.
– महिलाओं को 50 की उम्र के बाद और पुरुषों को 70 की उम्र के बाद ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा ज़्यादा होता है.
– महिलाओं में मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आना बोन लॉस की वजह हो सकता है, जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट अनहेल्दी बोन     का कारण बन सकता है.

कैसे जानें कि आपके बोन्स हेल्दी नहीं हैं?

अगर आपको अक्सर जोड़ों में दर्द रहता है, हल्का-सा धक्का लगने से भी फ्रैक्चर हो जाता है, तो इसका मतलब है कि आप रिस्क ज़ोन में हैं. ऐसे में आप फ़ौरन डॉक्टर से मिलें और अपना पूरा चेकअप कराए. डॉक्टर आपका बोन डेन्सिटी टेस्ट कराएंगे, जिससे ये पता चल जाएगा कि आपका कितना बोन लॉस हुआ है. इसके बाद डॉक्टर आपको ज़रूरी दवाएं और एहतियात बरतने को कहेंगे.

बोन हेल्थ को प्रभावित करनेवाले कारण

– डायट में लो कैल्शियम. लो कैल्शियम युक्त आहार का मतलब है ख़राब बोन डेन्सिटी, हड्डियों का कमज़ोर होना और फ्रैक्चर होने की अधिक संभावना.
– जो लोग एक्टिव नहीं रहते, उन्हें एक्टिव रहनेवाले लोगों की तुलना में ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा अधिक होता है.
– तंबाकू और अल्कोहल का सेवन भी बोन हेल्थ को प्रभावित करता है. शोधों से ये बात साबित हो चुकी है कि तंबाकू के सेवन से हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं, इसी  तरह रोज़ाना दो अल्कोहलिक ड्रिंक लेने से ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि अल्कोहल शरीर की कैल्शियम को एब्ज़ॉर्ब करने की क्षमता को प्रभावित
करता है.
– आनुवांशिकता भी ऑस्टियोपोरोसिस का एक बड़ा कारण हो सकता है. अगर आपके पैरेंट्स या भाई-बहन को ऑस्टियोपोरोसिस है, तो आपको भी इसके होने की  संभावना बढ़ जाती है.
– महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा ज़्यादा होता है. इसके अलावा बढ़ती उम्र, अत्यधिक दुबला होना भी इसका कारण हो सकता है.
– थायरॉइड हार्मोन का बढ़ना भी बोन हेल्थ को प्रभावित करता है.
– कुछ दवाइयों का सेवन भी हड्डियों को कमज़ोर बनाता है.

तो उपाय क्या है?

– सबसे पहले तो डॉक्टर से सलाह लें. ये सोचकर घरेलू इलाज के चक्कर में न पड़े रहें कि कुछ दिनों में ठीक हो जाएगा, क्योंकि अगर ठीक समय पर इलाज नहीं शुरू  किया गया, तो नुक़सान ज़्यादा हो सकता है.
– अपने डायट में भरपूर मात्रा में कैल्शियम शामिल करें. दही, कॉटेज चीज़, लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स, बादाम, ब्रोकोली, साल्मन, सोया प्रोडक्ट्स जैसे टोफू आदि      कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं.
– रोज़ाना आधा घंटा एक्सरसाइज़ करें. डांसिंग, जॉगिंग, वॉकिंग, एरोबिक्स- आप कोई भी एक्टिविटी कर सकते हैं.
– जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपकी कैल्शियम की ज़रूरतें भी बढ़ती जाती हैं, जो स़िर्फ डायट से पूरी नहीं हो पाती. बेहतर होगा कि अपने डॉक्टर से कंसल्ट करके   कैल्शियम सप्लीमेंट्स लें.
– कैल्शियम को एब्ज़ॉर्ब करने के लिए विटामिन डी भी ज़रूरी है. इसके लिए सबसे आसान और बेस्ट तरीक़ा है सुबह की धूप में बैठना. इसके अलावा डॉक्टर के परामर्श   पर विटामिन डी सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है.
– धूम्रपान या शराब का सेवन कम कर दें. इससे आपके बोन हेल्दी रहेंगे.
– नमक का सेवन भी कम कर दें. हम में से अधिकतर लोग रोज़ाना 9 ग्राम नमक का सेवन करते हैं, जबकि ये मात्रा 6 ग्राम से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए.
– चाय, कॉफी, कोला या अन्य फिज़ी ड्रिंक्स का सेवन भी बोन्स के हेल्थ के लिए ठीक नहीं. इसलिए बेहतर होगा कि इनका सेवन भी कम कर दें.
– वज़न को मेंटेन रखें. बहुत जल्दी बहुत ज़्यादा वज़न घटाने के चक्कर में क्रैश डायट न करें. इससे ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है. वेट लॉस हमारे शरीर में  एस्ट्रोजन की मात्रा कम देता है. दरअसल, एस्ट्रोजन वो हार्मोन है, जो हड्डियों की सुरक्षा करता है. इसलिए अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं, तो समझदारी से  काम लें और सही तरीका अपनाएं.

किन्हें ज़्यादा ख़तरा है?
अगर आपको ये हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं, तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आपकी ये हेल्थ प्रॉब्लम्स आपके बोन्स को भी प्रॉब्लम में डाल सकती हैं.
– अस्थमा या एलर्जी
– कैंसर
– डायबिटीज़
– हाइपर थायरॉइड
– लिवर या किडनी डिसीज़
– लंग डिसीज़
– रूमेटाइड अर्थराइटिस
– आंत के रोग
– प्रोस्टेट कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर के लिए लिया जानेवाला हार्मोन ब्लॉकिंग ट्रीटमेंट
– गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी
– कुछ दवाइयों का सेवन. स्टेरॉइडयुक्त दवाओं का रोज़ाना तीन महीने तक लगातार सेवन करनेवालों को भी ख़तरा ज़्यादा होता है.

स्ट्रॉन्ग बोन के लिए एक्सरसाइज़
अगर हड्डियों को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो हेल्दी डायट व लाइफस्टाइल के साथ ही रेग्युलर एक्सरसाइज़ को भी अपने रूटीन में शामिल करें. एक्सरसाइज़ बोन डेन्सिटी को बेहतर बनाता है और बोन डेन्सिटी बेहतर होने का मतलब है, ऑस्टियोपोरोसिस होने की कम संभावना. एक्सरसाइज़ न स़िर्फ हड्डियों को मज़बूत बनाता है, बल्कि हड्डियों और जॉइंट्स को सपोर्ट करनेवाले मसल्स को भी स्ट्रेंथ देता है.

वेट ट्रेनिंगः इसमें हैवी वेट उठाना होता है, लेकिन इसे केवल हेल्दी लोग ही कर सकते हैं. ये न स़िर्फ मसल्स बनाते हैं, बल्कि बोन हेल्थ व डेन्सिटी को भी बेहतर बनाते हैं.

हाइकिंगः अगर आपको एडवेंचर पसंद है, तो हाइकिंग, ट्रेकिंग या माउंटेनियरिंग करें. इन एक्टिविटीज़ को आप एंजॉय तो करेंगे ही, इससे हड्डियां भी मज़बूत होंगी.

डांसिंग व एरोबिक्सः अगर आपको डांसिंग का शौक़ है, तो इसे फ़ौरन रूटीन में शामिल कर लीजिए. डांसिंग या एरोबिक्स भी बोन्स को हेल्दी बनाता है.

दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना या वॉकिंगः इन एक्टिविटीज़ से आपका वज़न तो नियंत्रित रहता ही है, आपका एनर्जी लेवल बढ़ता है और आपकी हड्डियां भी मज़बूत बनती हैं. इसलिए रोज़ाना कम से कम 30 मिनट तक तेज़ चलें या दौड़ें. जहां तक हो सके, लिफ्ट का इस्तेमाल न करें.

– प्रतिभा तिवारी

क्यों ज़रूरी है कैल्शियम ? (Calcium: Health Benefits, Foods, and Deficiency)

Calcium Health Benefits

Calcium Health Benefits
मॉडर्न लाइफ़स्टाइल के चलते हमारी फूड हैबिट्स काफ़ी बदल गई है. हम पौष्टिक चीज़ें खाने की बजाय स्वाद को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं, जैसे- जंक फूड्स, तली-भुनी चीज़ें, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, आइस्क्रीम आदि. खानपान में गड़बड़ी के चलते शरीर में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या हो गई है, जो आगे चलकर स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.

शरीर के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए हर उम्र में कैल्शियम की आवश्यकता होती है. बढ़ते बच्चों के शरीर, दांतों के आकार और हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए भी कैल्शियम ज़रूरी है. जहां तक महिलाओं का प्रश्‍न है, हमारे देश की अधिकांश महिलाओं में कैल्शियम की कमी पाई जाती है. उनमें इसकी कमी टीनएज से ही रहने लगती है, जो ताउम्र बनी रहती है. चूंकि महिलाएं मासिक धर्म, मेनोपॉज़ जैसी प्रक्रियाओं से गुज़रती हैं, साथ ही गर्भधारण और स्तनपान कराती हैं, इसलिए उन्हें ख़ासतौर पर कैल्शियम की आवश्यकता होती है.

क्यों ज़रूरी है कैल्शियम?
शरीर की प्रत्येक कोशिका को कैल्शियम की ज़रूरत इसलिए होती है, क्योंकि हमारे शरीर में त्वचा, नाख़ून, बाल और मल के ज़रिए रोज़ ही कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है. इसलिए कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने के लिए इसकी रोज़ ही पूर्ति कर ली जाए, तो अच्छा रहता है. यदि ऐसा नहीं होगा, तो हमारा शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा. नतीजा बाहर से भले ही हम कमज़ोर न लगें, लेकिन अंदर ही अंदर हड्डियां खोखली हो जाएंगी और शरीर कमज़ोर. और कमज़ोर हड्डियां कई तरह की परेशानियां पैदा करती हैं, जैसे- ज़रा-सी चोट लगने पर ही फ्रैक्चर हो सकता है. यही नहीं, कैल्शियम हृदय, मांसपेशियों, ब्लड क्लॉटिंग के लिए भी बेहद ज़रूरी होता है.
इसके अलावा कैल्शियम मांसपेशियों के कई काम में मदद करता है, जैसे-
– लिखना, टहलना, बैठना और किसी गेंद को फेंकना आदि.
– कैल्शियम नर्वस सिस्टम के संदेश मस्तिष्क तक पहुंचाने में सहायक है, जैसे- यदि आपने किसी गरम वस्तु को छू लिया है, तो मस्तिष्क तुरंत एक संदेश भेजेगा, जिससे आपके मुंह से ‘आह!… आउच!’ की आवाज़ आएगी और आप अपने हाथ को जल्दी से दूर हटा लेंगे.
– इसके अलावा ये चोट, घाव, खरोंच आदि को भी जल्दी ठीक करने में मदद करता है.
– लेकिन यदि शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाए, तो इसके दुष्प्रभाव होते हैं, जो हमें बीमार कर सकते हैं. इन बीमारियों के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं.

Calcium Health Benefits

कैल्शियम की कमी के लक्षण
– ब्लड प्रेशर का बढ़ना
– दांतों का समय से पहले गिरना
– शरीर का विकास रुकना
– हड्डियों में टेढ़ापन
– शरीर के विभिन्न अंगों मेंऐंठन या कंपन
– जोड़ों का दर्द
– मांसपेशियों में निष्क्रियता
– ज़रा-सा टकराने पर हड्डियों का टूटना
– मस्तिष्क का सही ढंग से काम न करना
– भू्रण के विकास पर प्रभाव पड़ना
– हड्डियों का खोखला होना, उनका कमज़ोर होकर टूटना, बार-बार फ्रैक्चर होना
– कमर का झुकना व दर्द होना
– हाथ-पैरों में झुनझुनाहट व कमज़ोरी
– बुज़ुर्गों को ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है यानी फ्रैक्चर व हड्डियों में दर्द.

कितना कैल्शियम है ज़रूरी?
– सामान्य महिलाओं के लिए प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है.
– गर्भवती महिलाओं व स्तनपान करानेवाली महिलाओं के लिए प्रतिदिन 1500 मिलीग्राम.
– 6 माह के छोटे बच्चों के लिए 400 मिलीग्राम.
– 1 साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए 800 मिलीग्राम.
– 10 साल से 18 साल और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए 1300 मिलीग्राम.

Calcium Health Benefits

कैल्शियम की कमी की पूर्ति कैसे करें?
इस बारे में डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि बीमारी कोई भी हो, शरीर के लिए दुखदायी होती है, इसलिए उसका तुरंत उपचार करना भी ज़रूरी होता है, वरना उसके साथ-साथ शरीर में और भी कई बीमारियां घर कर लेती हैं. यदि हम अपने खानपान का ध्यान रखें, तो बीमारियों को दूर भगा सकते हैं. आइए, जानें कि कैल्शियम हमें किन चीज़ों से मिल सकता है, जिन्हें अपने डायट में शामिल कर हम स्वस्थ रह सकते हैं-
अनाज- गेहूं, बाजरा, मूंग, मोठ, चना, राजमा और सोयाबीन.
सब्ज़ियां- गाजर, भिंडी, टमाटर, ककड़ी, अरबी, मूली, मेथी, करेला और चुकंदर.
फल- नारियल, आम, संतरा और अनन्नास.
डेयरी उत्पाद- दूध व दूध से बनी चीज़ों को कैल्शियम का प्रमुख स्रोत माना जाता है. हर रोज़ दूध का सेवन शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनाए रखने में मददगार होता है.
– मां का दूध नवजात शिशु के लिए कैल्शियम का सर्वोत्तम स्रोत है, जो उनमें कैल्शियम की पूर्ति करता है और स्वस्थ रखता है.
– ये सभी प्राकृतिक रूप से कैल्शियम प्रदान करनेवाले तत्व हैं. ये पदार्थ तुरंत शरीर के द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं, इन्हें अपनी रोज़मर्रा की डायट में शामिल कर हम कैल्शियम की कमी से होनेवाले नुक़सानों से बच सकते हैं.

उम्र बढ़ानी है तो ब्रिस्क वॉक करिए (Morning Brisk Walk Benefits)

Morning Brisk Walk Benefits

सुबह की ताज़ी हवा में दौड़ना (Brisk Walk) सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है. यह एक ऐसा व्यायाम है, जिसके लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती. मोटापा घटाने के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से संबंधित अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए भी जॉगिंग बेस्ट है.

Morning Brisk Walk Benefits

स्ट्रेस को दूर करता है

जॉगिंग या तेज़ चलने से स्ट्रेस दूर होता है, क्योंकि दौड़ने के कुछ ही सेकंड के भीतर दिमाग़ एक हार्मोन रिलीज़ करने लगता है, जिससे नेचुरल तरी़के से मूड फ्रेश हो जाता है.Morning Brisk Walk Benefits

 

स्मोकिंग की लत से छुटकारा

दौड़ने से आत्मविश्‍वास बढ़ता है. सोच पॉज़िटिव होती है और स्मोकिंग जैसी बुरी लत से मन हटने लगता है.

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डायबिटीज़ का रिस्क हो जाएगा कम

हफ़्ते में 4-5 दिन तक 30 मिनट की दौड़ डायबिटीज़ का रिस्क 12 फ़ीसदी तक कम कर देती है.

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वज़न पर कंट्रोल

दौड़ना एक बेस्ट कैलोरी बर्नर है. हफ़्ते में कम से कम 5 दिनों तक 30 मिनट दौड़ने या तेज़ चलने से 340 कैलोरी बर्न होती है.weight loss

याददाश्त होगी तेज़

कई रिसर्च कहते हैं कि हफ़्ते में 4 दिन अगर 30 मिनट दौड़ा जाए, तो न स़िर्फ याददाश्त तेज़ होती है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ती है.improve-memory

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दिल का ख़्याल

एक रिसर्च कहती है, जो लोग हफ़्ते में 6 किलोमीटर चलते हैं, उन्हें दिल की बीमारी का ख़तरा 45 फ़ीसदी तक कम रहता है.healthy-heart

हड्डियों को देता है मज़बूती

दौड़ने से हड्डियों पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से ज़रूरी मिनरल्स हड्डियों तक पहुंचते हैं और हड्डियां मज़बूत बनती हैं.Calcium-and-Strong-Bones

उम्र बढ़ेगी

रिसर्च के मुताबिक़ हफ़्ते में एक घंटे की दौड़ जीवनकाल का औसतन तीन साल बढ़ा देती है.positive_life_long_Live_long_healthy

कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण

दौड़ने या तेज़ चलने से गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है.

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ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

दौड़ते व़क्त धमनियां फैलती व संकुचित होती हैं. इससे धमनियां स्वस्थ रहती हैं और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है.

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आराम की नींद

दौड़ने से नींद झट से आ जाती है. नींद की गुणवत्ता में भी इज़ाफ़ा होता है.

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नोट

जिन्हें घुटनों में दर्द है, उन्हें दौड़ने की बजाय आराम से चलना चाहिए.

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