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वुमन पावर- भारतीय महिला बॉक्सर्स ने रचा इतिहास (Indian Women Boxers Create History)

Indian Women Boxers Create History

गुवाहाटी में हुए एआईबीए (अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज़ी संघ) विश्‍व महिला युवा बॉक्सिंग चैंपियनशिप में युवा भारतीय महिला बॉक्सर्स ने पांच गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया. सभी ने बॉक्सिंग रिंग में अपना वर्चस्व कायम रखते हुए दस में से पांच कैटेगरी में पांच स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा किया. यानी टूर्नामेंट में भारतीय बॉक्सर्स ने पांच गोल्ड का ज़बरदस्त पंच मारा.

* जीत की शुरुआत नीतू (48 किग्रा) से हुई, जिन्होंने लाइटफ्लाइटवेट कैटेगरी में कज़ाखस्तान की झाजिरा उराकबायेवा को आराम से पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक के जीत का आगाज़ किया. फिर तो गोल्ड मेडल जीतने की होड़-सी लग गई.
* ज्योति गुलिया (51 किग्रा) ने फ्लाइवेट में रूस की एकातेरिना मोलचानोवा पर जीत हासिल की. इसी के साथ ज्योति ने अगले साल अर्जेटीना में होनेवाले यूथ ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया.
* साक्षी चौधरी (54 किग्रा) ने बेंटमवेट में इंग्लैंड की इवी जेन स्मिथ को संघर्षपूर्ण मुक़ाबले में हराया और तीसरा स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला.
* शशि चोपड़ा (57 किग्रा) ने फीदरवेट में वियतनाम की डु हॉन्ग गॉक को 3-2 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया.
* अंकुशिता बोरो (64 किग्रा) ने लाइटवेट कैटेगरी में फाइनल में रुस की डाइनिक एकाटेरिना को हराया. इसके अलावा अंकुशिता टूर्नामेंट की बेस्ट प्लेयर भी चुनी गईं.


* साथ ही नेहा यादव (+81 किग्रा) व अनुपमा (81 किग्रा) में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर मेडल की संख्या में इज़ाफ़ा किया.
* इस चैंपियनशिप में साल 2011 में सरजूबाला ने पहली बार भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था.

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सभी महिला बॉक्सर्स की संघर्षपूर्ण, पर प्रेरणादायी कहानी रही है. असम की शोणितपुर के एक छोटे-से गांव ठेलामारी की अंकुशिता के पिता प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं. बेटी के लिए बॉक्सिंग सीखने के लिए सुविधा मुहैया करवाना, फिर उनके दादाजी का सहयोग अंकुशिता के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम करता रहा. जब अंकुशिता ने बॉक्सिंग सीखना शुरू किया था, तब उनके गांव की वे एकमात्र महिला बॉक्सर थीं. लेकिन अंकुशिता की सफलता व शोहरत के कारण आज स्थिति यह है कि उनके गांव के लोग उनके परिवारवालों से अपनी बेटियों को बॉक्सिंग सिखाने के बारे में जानकारी लेने के लिए आते हैं, जो एक सुखद शुरुआत है.
भारतीय बॉक्सिंग टीम के कोच भास्कर भट्ट के अनुसार, सभी महिला बॉक्सर्स ने जी तोड़ तैयारी की थी और सभी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ख़ुद को साबित किया.


महिला बॉक्सर्स के प्रशंसनीय व यादगार परफॉर्मेंस को देखते हुए भारतीय मुक्केबाज़ी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने सभी गोल्ड मेडल विजेता महिला खिलाड़ियों को 2-2 लाख रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की.
यह साल भारतीय महिला खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम युग-सा रहा है. हॉकी, बैडमिंटन, टेनिस, क्रिकेट जैसे खेलों में उन्होंने क़दम-दर-क़दम सफलताएं अर्जित करते हुए यह साबित कर दिखाया कि हम किसी से कम नहीं! वेलडन इंडियन वुमन पावर! ऑल द बेस्ट!

– ऊषा गुप्ता

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वैलडन मैरी कॉम! एशियन चैंपियनशिप में पांचवी बार गोल्ड जीतकर रचा इतिहास! (Congratulations Mary Kom!… Well Done!)

Mary Kom wins Asian Boxing Championships gold

 

Mary Kom wins Asian Boxing Championships gold

वियतनाम के हो चि मिन्ह सिटी में हो रहे एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर एम. सी. मैरी कॉम ने इतिहास रच दिया. फाइनल में उन्होंने उत्तर कोरिया की किम हयांग मि को 5-0 से हराया. ग़ौर करनेवाली बात यह है कि उन्होंने सेमीफाइनल में जापान की सुबासा कोमुरा पर भी 5-0 से जीत दर्ज की थी. (Mary Kom wins Asian Boxing Championships gold)

* राज्यसभा सांसद, ओलिंपिक्स ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट मैरी ने अपना अवॉर्ड अपनी साथी एल. सरिता देवी को समर्पित किया, जो 64 किलो के सेमीफाइनल में हार गई थीं.
* मैरी ने मुक्केबाज़ी के 45-48 किलो लाइट फ्लाइवेट कैटीगरी के फाइनल में किम को मात देकर पांचवी बार एशियाई महिला मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में गोल्ड जीता.
* इसके पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी उन्होंने पांच बार गोल्ड मेडल जीता है.
* यह उनका एशियाई चैंपियनशिप में छठा अवॉर्ड है. इससे पहले उन्होंने 4 गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीता था.
* 48 किलो वर्ग में यह उनका पहला एशियन गोल्ड है. इसके पहले वे 51 किलो वर्ग में हिस्सा लेती रही हैं.
* भारत ने अब तक कुल 7 गोल्ड, 8 सिल्वर और 32 कांस्य पदक जीते हैं.

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खेल सफ़र/अवॉर्ड्स
* साल 2000 में मैरी कॉम ने अपना बॉक्सिंग करियर शुरू किया.
* 2001 में पहली बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती.
* वे दस राष्ट्रीय ख़िताब भी जीत चुकी हैं.
* साल 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
* 2010 के एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज़ और 2014 में गोल्ड मेडल अपने नाम किया.
* दो साल के प्रैक्टिस, ब्रेक के बाद उन्होंने वापसी करते हुए लगातार चौथी बार वर्ल्ड बॉक्सिंग में गोल्ड जीता था.
* उनकी इस उपलब्धि से प्रभावित होकर एआइबीए ने उन्हें ‘मैग्नीफिसेंट मैरी’ की उपाधि दी.
* बॉक्सिंग में उनके बेहतरीन परफॉर्मेंस के कारण साल 2003 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड नवाज़ा गया.
* 2006 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
* 2009 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड दिया गया.
* उनके कोच नरजित सिंह, चार्ल्स एक्टिनसन रहे हैं.

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पर्सनल स्ट्रोक्स
* एम. सी. मैरी कॉम (मैंगते चंग्नेेइजैंग मैरी कॉम) का जन्म 1 मार्च, 1983 में मणिपुर चुराचांदपुर में एक किसान परिवार में हुआ था.
* उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई लोकटक क्रिश्‍चियन मॉडल स्कूल व सेंट हेवियर स्कूल में की थी.
* उन्हें बचपन से ही खेल से विशेष लगाव था. साल 1999 में जब उन्होंने कुछ लड़कियों को खुमान लंपक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में लड़कों के साथ मुक्केबाज़ी में दांव-पेंच लड़ाते देखा, तो इस खेल के प्रति उत्सुकता जागी.
* मणिपुरी बॉक्सर डिंग्को सिंह की कामयाबी ने भी उन्हें बॉक्सिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया.
* उन्होंने ओन्लर कॉम से शादी की और उनके तीन बच्चे हैं.
* मैरी कॉम को सुपर मॉम भी कहते हैं, क्योंकि तीन बच्चों के बावजूद वे लगातार बॉक्सिंग कर रही हैं.
* पांच बार की वर्ल्ड व एशियन चैंपियन, ओलंपिक मेडलिस्ट मैरी की बॉक्सिंग रिंग में अटैक व तेज़ी देखते ही बनती है.
* मैरी कॉम नाम से उन पर फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने उनका क़िरदार निभाया था.

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– ऊषा गुप्ता

Knocked out: विजेंदर ने चेका को किया चारों खाने चित्त! (Vijender Singh Knocks Out Cheka)

vijender singh

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  • भारत के स्टार बॉक्सर विजेंदर (vijender singh) सिंह ने आख़िर अपने एशिया पैसिफिक मिडिलवेट टाइटल को डिफ़ेंड कर ही लिया और ख़ूँख़ार चेका को चित्त करके उसको घर का रास्ता दिखा ही दिया.
  • विजेंदर ने तीसरे ही राउंड में चेका को धूल चटा दी और यह बता दिया के रिंग के किंग वही हैं.
  • यह विजेंदर की लगातार आठवीं जीत थी.
  • गौरतलब है कि इस बाउट को देखने के लिए दिल्ली में बड़ी बड़ी हस्तियां मौजूद थीं, जिनमें रेसलर सुशील कुमार, खेल मंत्री विजय गोयल और बाबा रामदेव प्रमुख रूप से विजेंदर का हौसला बढ़ाते नज़र आये.
  • जीत के बाद विजेंदर काफी इमोशनल हो गए थे और उनका यही था कि चेका बहुत ज़्यादा बोल रहे रहे थे जबकि मैं अपनी जीत को लेकर आश्वस्त था.
  • हम यही कहेंगे कि बड़बोले चेका को आखिर जवाब मिल ही गया
  • हमारी तरफ़ से बहुत बहुत बधाई!
  • Well done! We are proud of you Vijender!

– गीता शर्मा