Cancer

बॉलीवुड एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhry) से जुड़ी ये बेहद हैरान करने वाली खबर है, फिल्म परदेस से डेब्यू करनेवाली वो हंसती-खिलखिलाती प्यारी सी लड़की आज ब्रेस्ट कैंसर (breast cancer) के दर्द से जूझ रही हैं. अनुपम खेर (anupam kher) ने एक्ट्रेस का एक वीडियो (video) पाने इंस्टा पेज (Instagram) पर शेयर किया है जिसमें महिमा खुद अपना अनुभव ब दर्द बयां कर रही हैं.

इस वीडियो की शुरुआत होती है जिसमें खिड़की पर खड़ी महिमा स्माइल करते हुए कैमरे से रूबरू होती हैं. उनको देख पहचानना मुश्किल हो रहा है क्योंकि उनके लम्बे घने बालों की जगह अब छोटे-छोटे बालों ने ले ली है. अनुपम ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है कि महिमा चौधरी की कैन्सर व साहस की कहानी. एक महीना पहले जब मैंने महिमा को एक रोल के लिए यूएस से कॉल किया था तब बातचीत के दौरान उनके ब्रेस्ट कैंसर के बारे में पता चला. अनुपम ने महिमा को अपना हीरो बताया और ये भी कहा कि वो कई महिलाओं के लिए एक हौसला और प्रेरणा हैं. अनुपम ने बताया कि महिमा चाहती थीं कि उनके कैंसर की खबर को सबके सामने लाने में मैं उनकी मदद करूं. दोस्तों उसको प्यार और शुभकामनाएं दें. वो अब सेट्स पर काम के लिए वापस आ चुकी हैं जो असल में उसकी सही जगह भी है, वो लम्बी उड़ान भरने को तैयार है. जितने भी प्रडूसर्स और डायरेक्टर्स हैं उनके पास मौक़ा है महिमा के टैलेंट को टैप करने का. महिमा की जय हो! कैंसर, साहस, उम्मीद, प्रार्थना!

इस वीडियो को प्ले करने पर महिमा अनुपम खेर कि सामने कैमरा फेस करती हैं और अपनी बात रखती हैं. महिमा कहती हैं जब अनुपम खेर का कॉल यूएस के नंबर से आया तो मुझे उठाना ही पड़ा क्योंकि मुझे लगा अर्जेंट है. वहां से वो हा हा ही ही करने के लिए तो कॉल नहीं करेंगे. उस वक़्त मैं कीमो थेरेपी के लिए अस्पताल में नर्सों के बीच घिरी हुई थी. मैंने कॉल पिक किया तो उन्होंने पूछा क्या मैं उनके साथ काम करूंगी. मैंने कहा काम ज़रूर करूंगी लेकिन क्या वो थोड़ा इंतज़ार करेंगे. अनुपम खेर ने कहा कि नहीं नहीं, इंतज़ार क्यों और तुम हो कहां, इतनी आवाज़ें कैसे आ रही हैं. इस पर मैंने उनको बताया कि मैंने अपने बाल खो दिए हैं… महिमा इस वीडियो में बीच-बीच में इतनी भावुक भी हो जाती हैं कि उनका दर्द साफ़ झलकता है.

आगे महिमा कहती हैं कि मैंने उनको पूछा कि क्या मैं विग पहनकर सेट्स पर आ सकती हूं और अनुपम खेर ने इसकी वजह पूछी तो मैंने कहा मुझे ब्रेस्ट कैंसर है.

जब अनुपम खेर ने महिमा से पूछा कि उनको कैसे पता चला कैन्सर का तब महिमा ने कहा कि वो नियमित छेकके अप कराती हैं. उनको ब्रेस्ट कैंसर के कोई लक्षण नहीं थे लेकिन चेक अप के दौरान ही उनको डॉक्टर मंदर से मिलने को कहा गया, जहां बायोप्सी के बाद उनकी बीमारी का खुलासा हुआ. महिमा ने जानकारी दी है कि ये शुरुआती स्टेज है और पूरी तरह से क्युरेबल है यानी वो पूरी तरह से ठीक हो जाएंगी.

महिमा ने वीडियो में अपना अनुभव शेयर करते हुए ये भी बताया कि अपनी बीमारी की खबर से वो कितना घबरा गई थी और रोने लगी थीं. उनके रिएक्शन को देख उनकी बहन ने उनको हौसला दिया कि जब डॉक्टर्स कह रहे हैं कि इसका इलाज संभव है और तुम ठीक हो जाओगी तो क्यों नकारात्मक सोच रही हो. और इसके बाद उनका जज़्बा तो सब देख ही रहे हैं. महिमा ने बताया कि वो पूरी तरह पॉज़िटिव हैं और सकारात्मक सोच के साथ ज़िंदगी जीने को पूरी तरह तैयार भी हैं.

वीडियो में कई ऐसे क्षण आए कब महिमा खुद पर क़ाबू नहीं रख पाई और रो पड़ीं, लेकिन उनकी प्यारी मुस्कान को देख लगा कि उनमें वाक़ई काफ़ी साहस है! महिमा ने खुद भी ये वीडियो शेयर किया है…

फैंस और दोस्त सभी महिमा के हौसले व जज़्बे की तारीफ़ कर रहे हैं और उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हुए जल्द ठीक होने की दुआ भी कर रहे हैं.

बॉलीवुड के मुन्नाभाई यानी संजय दत्त इन दिनों हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर 2’ में अधीरा के किरदार के लिए खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं और फिल्म में संजय दत्त के रोल की काफी सराहना की जा रही है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि संजय दत्त ने एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं और अपने फिल्मी करियर में खूब नाम कमाया है, लेकिन उनकी निजी ज़िंदगी काफी उतार-चढ़ाव से भरी रही है. उनकी पर्सनल लाइफ में वैसे तो कई मुश्किल दौर आए, जिनका उन्होंने सामना भी किया, लेकिन उनका सबसे मुश्किल दौर वो था जब उन्हें कैंसर से पीड़ित होने का पता चला. कैंसर से पीड़ित होने के बारे में जब उन्हें पता चला था तो उनकी हालत काफी खराब हो गई थी और अब पहली बार उन्होंने खुलकर अपना दर्द बयां किया है.

फोटो सौजन्य: इंस्टाग्राम
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फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर 2’ में अधीरा के रोल के लिए दर्शकों की तारीफें बटोर रहे संजय दत्त ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने कैंसर फेज़ के बारे में भी बात की और बताया कि उन्हें जब कैंसर के बारे में पता चला तो उनकी हालत कैसी हो गई थी? उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जब उन्हें कैंसर के बारे में पता चला तो वह घंटों तक फूट-फूटकर रोए थे. अपनी पत्नी और बच्चों के बारे में सोच-सोचकर उनका बुरा हाल हो गया था. यह भी पढ़ें: UnseenPhotos: आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी के फोटोज़ सोशल मीडिया पर ख़ूब छाए हुए हैं, देखें अनसिन पिक्चर्स.. (Alia Bhatt-Ranbir Kapoor Wedding’s Unseen Photos)

फोटो सौजन्य: इंस्टाग्राम
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एक्टर की मानें तो लॉकडाउन का समय था और उन्हें सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी. नहाने के बाद भी जब सांस की दिक्कत से राहत नहीं मिली तो उन्होंने अपने डॉक्टर को कॉल किया. इसके बाद उनका एक्स-रे किया गया तो पता चला कि उनके आधे से ज्यादा फेफड़ों में पानी भर गया है. डॉक्टरों का मानना था कि यह टीबी हो सकता है, जिसकी वजह से फेफड़ों में पानी भर गया है, लेकिन वह कैंसर निकला.

फोटो सौजन्य: इंस्टाग्राम
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संजू बाबा ने आगे बताया कि जब उन्हें कैंसर के बारे में पता चला तो उन्होंने सोचा कि अब इस बात को कैसे परिवार वालों से बताया जाए. उस दौरान उनकी बहन आई थी तब उन्होंने उनसे कहा कि मुझे कैंसर हो गया है, अब क्या किया जाए? कैंसर के बारे में पता चलने के बाद सबने बात की कि अब क्या किया जा सकता है, लेकिन एक्टर अपने बच्चों, पत्नी और अपनी ज़िंदगी के बारे में सोच कर दो-तीन घंटे तक खूब रोए. फिर उन्हें लगा कि वो कमज़ोर नहीं पड़ सकते और उन्हें इससे लड़ना होगा. लिहाजा सबसे पहले परिवार ने इलाज के लिए यूएस जाने के बारे में सोचा, लेकिन वीज़ा नहीं मिला, जिसके बाद एक्टर ने तय किया कि वो यहीं अपना इलाज कराएंगे. यह भी पढ़ें:
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फोटो सौजन्य: इंस्टाग्राम
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एक्टर ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि वो दुबई में कीमोथेरेपी के लिए जाते थे और फिर वहां से लौटकर बैडमिंटन कोर्ट जाकर दो-तीन घंटे तक खेला करते थे. संजू बाबा की मानें तो यह पागलपन था, बावजूद इसके वो ऐसा किया करते थे. यह उनके मज़बूत इरादे और हौसले का ही कमाल है कि वो अब पूरी तरह से ठीक हैं और अपने रूटीन में ढल रहे हैं. कैंसर का पता लगने पर कुछ समय के लिए फैमिली के बारे में सोचकर उनकी हालत ज़रूर खराब हुई थी और वो खूब रोए भी थे, लेकिन फिर उन्होंने डटकर इसका सामना करने की ठानी और अब वो बिल्कुल स्वस्थ हैं.

पहले अधिकतर लोग कैंसर जैसी बीमारी को दूर करने के लिए होमियोपैथिक का विकल्प नहीं चुनते थे, जबकि एम.डी.(होम), पीएचडी. होमियोपैथीक डॉ. पंकज अग्रवाल का कहना है कि होमियोपैथिक की पहली खुराक से प्रभाव दिखना शुरू हो जाता है. हां, कई स्थितियों में थोड़ा समय लग सकता है. जहां तक बात समय की है, तो जो व्यक्ति दवाइयों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है, तो उतार-चढ़ाव होना सामान्य है. ऐसे में मरीज़ की ज़िम्मेदारी है कि वह डॉक्टर के साथ संपर्क बनाए रखें और हमेशा चेकअप करवाने आए. केवल दवाइयों को ख़रीदना या उनका सेवन करना ही काफ़ी नहीं है. आपको पता होना चाहिए कि कैंसर मौसम के अनुसार बदलता रहता है, वहीं व्यक्ति तनाव में है, तब भी स्थिति प्रभावित हो सकती है. ऐसे में समय-समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.


एएचसी यानी अग्रवाल होमियो क्लिनिक पिछले 53 वर्षों से भारत और विदेश दोनों जगह जनता की सेवा कर रहे हैं. चूंकि कैंसर डे के दिन लोगों को कैंसर से जुड़ी सभी जानकारियों से अवगत कराया जाता है. ऐसे में बता दें कि पिछले 33 वर्षों से सभी प्रकार के कैंसर की स्थिति का इलाज डॉ. पंकज अग्रवाल कर रहे हैं.
जब डॉ. पंकज से कैंसर के इलाज का तरीक़ा जानना चाहा, तो उन्होंने कहा कि मेरा तरीक़ा बाकी के रोग विशेषज्ञ की तरह बीमारी का अध्ययन करना नहीं है, बल्कि हमारे पास रोगी ज़्यादातर संभावित रिपोर्ट और ट्रीटमेंट लेकर आते हैं. ऐसे में मैं थोड़ा अलग तरीक़ा अपनाता हूं, जिसमें मरीज़ से उसकी मानसिक स्थिति, शारीरिक स्थिति, पारिवारिक इतिहास आदि चीज़ों के बारे में पूछा जाता है.
डॉक्टर ने अपने एक मरीज़ सलिल माथुर का केस भी बताया कि किस तरह उन्होंने उसका इलाज किया था. आइए जानते हैं मरीज़ से ही इसके बारे में.

सलिल माथुरजी ने कैंसर के इलाज के बारे में विस्तार से बताया.
मेरे बाएं कंधे में ग्रेड 3 सॉफ्ट टिश्यू सार्कोमा (कैंसर) का निदान होने के बाद, मैंने तत्काल सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की. इतना सब होने के बाद भी यह बीमारी मेरे फेफड़ों तक फैल चुकी थी और मुझे फिर से फेफड़ों की सर्जरी, रेडिएशन और कीमो के लिए जाना पड़ा. कट, बर्न और ज़हर के एलोपैथिक दृष्टिकोण में कोई राहत नहीं मिलने पर मैंने वैकल्पिक उपचारों की तलाश शुरू कर दी. यह तब हुआ जब मुझे डॉ. पंकज के बारे में किसी ऐसे व्यक्ति से पता चला, जिसके पिता जो कैंसर से पीड़ित थे, उनके द्वारा ठीक किया गया था.


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पहले कुछ सत्रों में, डॉ. पंकज और उनकी टीम ने मेरी पसंद-नापसंद के बारे में, मेरे माता-पिता और मेरे दोनों से बचपन से हुई सभी प्रमुख घटनाओं के बारे में विभिन्न प्रश्न पूछे. मुझे एहसास हुआ कि वे बीमारी के ट्रिगर बिंदु की जांच करने के लिए मेरे मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक पैटर्न को समझने की कोशिश कर रहे थे.
अपनी यात्राओं पर, वह प्रत्येक शब्द को पकड़ लेते थे और मुझसे मेरे द्वारा बोले गए प्रत्येक शब्द के पीछे की वास्तविक भावना पूछते थे. उन्होंने अक्सर मुझसे कहा कि इस तरह की बीमारी की एकमात्र दवा ‘खुशी’ है और उन्होंने धैर्य रखने और मेरे फॉलो-अप में नियमित रहने पर ज़ोर दिया. डॉ. पंकज ने मुझे होमियोपैथिक उपचार से जुड़ा उनका दृष्टिकोण समझाया.
मैं तब अपने स्वास्थ्य, मेरे शरीर और दिमाग़ पर दवा के प्रभाव के प्रति अधिक चौकस हो गया. और जब भी मैं कुछ चर्चा करना चाहता था, तो उन्हें स्वतंत्र रूप से फोन करता था. मुझे इलाज शुरू हुए दो साल हो चुके हैं और अब पिछले 10 महीनों से मैं रोगमुक्त हूं और मेरे सभी पीटी स्कैन स्पष्ट हैं. मेरी ऊर्जा और सहनशक्ति जो कीमो की उच्च खुराक के कारण समाप्त हो गई थी, अब बेहतर है और मैंने फिर से कार्यालय में प्रवेश किया है. मैं वास्तव में डॉ. पंकज के पेशे के प्रति उनके समर्पण और सच्चाई की प्रशंसा करता हूं और मुझे एक नया जीवन देने के लिए हमेशा उनका आभारी रहूंगा.

डॉ. पंकज अग्रवाल ने नए वैरिएंट डेल्टाक्रॉन से बचाव से जुड़े कुछ उपयोगी बातें भी बताई.
कोरोना वायरस के नए-नए रूप जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे लोगों के मन में खौफ़ पैदा हो रहा है. लोग बढ़ती महामारी को लेकर काफ़ी परेशान हैं. वहीं अब ओमिक्रॉन व डेल्टा से मिलकर एक और नए कोरोना वैरिएंट की ख़बर आ रही है. इससे पहले ओमिक्रॉन को सबसे तेज फैलने वाला कोरोना वैरिएंट माना जा रहा है, वहीं डेल्टा ने भी कई देशों में आतंक मचाया है. ऐसे में इनके मिले-जुले नए वैरिएंट को ज़्यादा ख़तरनाक माना जा सकता है. बता दें कि लियोन्डियोस कोस्ट्रिक्स जो कि साइप्रस यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञान के प्राध्यापक हैं ने इसे ‘डेल्टाक्रॉन’ नाम दिया है.

कोरोना के नए वैरिएंट से बचाव के उपाय

  • नए वैरिएंट से बचाव के लिए वैक्सीन आपके काम आ सकती है. हालांकि नए वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी कारगर है इस पर सरकार की कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है. लेकिन डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि कोरोना वैक्सीन तुरंत लगवा लें.
  • जिन लोगों की इम्यूनिटी कमज़ोर है वे अपना अधिक ध्यान रखें.
  • समय-समय पर अपने हाथों को धोएं और सैनेटाइजर का इस्तेमाल करें.
  • चेहरे पर बार-बार हाथ लगाने से बचें.
  • सामाजिक दूरी का ख़्याल रखें और मास्क लगाएं.
  • डबल मास्किंग फॉर्मला को अप्लाई करें.
  • बेवजह घर से बाहर जाने से बचें.


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इम्यूनिटी को बढ़ाने के तरीक़े

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मेडिटेशन एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. इसे करने से ना केवल ब्रेन शांत रह सकता है, बल्कि हैपी हॉर्मोन्स का स्तर भी बढ़ सकता है. बता दें कि ये हॉर्मोन्स अन्य कोशिकाओं को तनावमुक्त करने में सहायता कर सकते हैं, जिससे शरीर मज़बूत बनने के साथ-साथ कई समस्याओं से दूर भी रह सकती है.
  • जब व्यक्ति तनावमुक्त रहता है, तो इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी आसानी से बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में आप डांस, संगीत, पसंदीदा किताबें आदि की मदद लें और ख़ुद को ख़ुश रखने की कोशिश करें. ऐसा इसलिए क्योंकि ख़ुश रहने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है और व्यक्ति रिलैक्स महसूस करता है. रिलैक्स रहने से इम्यूनिटी अपने आप बढ़ सकती है.
  • इम्यूमिटी के लिए धूप लेना भी ज़रूरी है. ऐसे में आप थोड़ा समय धूप में ज़रूर बिताएं. बता दें कि धूप के माध्यम से शरीर का इंफेक्शन दूर हो सकती है और टी-सेल्स को ऊर्जा मिल सकती है.
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए भरपूर नींद लेना भी ज़रूरी है. नींद से शरीर में इम्यून सेल्स को बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में हम कह सकते हैं कि नींद के माध्यम से इम्यूनिटी सिस्टम को भी बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में व्यक्ति को 8 से 9 घंटे की नींद लेना ज़रूरी है.
  • औषधीय गुणों से भरपूर अदरक के सेवन से इम्यून सिस्टम को मज़बूत किया जा सकता है. ऐसे में आप नियमित रूप से अदरक का सेवन कर सकते हैं.

होमियोपैथिक उपचार है मददगार
हमारे एक्सपर्ट कहते हैं कि होमियोपैथिक उपचार इस समस्या को दूर करने में उपयोगी है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस उपचार के उपयोग से प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाया जा सकता है. हालांकि वायरस हमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरीक़ों से बीमार कर रहा है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि आख़िर क्यों यह संक्रमण 70% लोगों को नुक़सान पहुंचा पाया है, पूरे 100% लोगों को नहीं? इसके पीछे कारण है मज़बूत इम्यूनिटी. जी हां, होमियोपैथिक उपचार बिना किसी साइड इफेक्ट के आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है. ऐसे में लोग होमियोपैथिक उपचार के माध्यम से अपने मन के डर को ख़त्म कर सकते हैं.

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‘बिग बॉस 14’ में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाली राखी सावंत इन दिनों अपनी कैंसर पीड़िता मां का इलाज करवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रही हैं. राखी की कैंसर पीड़ित मां जया सांवत का इन दिनों मुंबई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. इस मुश्किल घड़ी में बॉलीवुड के बजरंगी भाईजान और बिग बॉस के होस्ट सलमान खान मदद के लिए आगे आए हैं. उन्होंने राखी की मां के इलाज में आने वाले खर्च का बीड़ा उठाते हुए उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की है. इलाज में आर्थिक मदद के लिए राखी की मां ने सलमान खान का आभार जताया है, जिसका वीडियो सामने आया है.

Rakhi Sawant's Mother
Photo Credit: Instagram
Rakhi Sawant's Mother
Photo Credit: Instagram

हाल ही में राखी सावंत ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक्ट्रेस की मां सलमान खान का आभार जताते हुए उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं. सलमान के साथ-साथ उन्होंने सोहेल को भी धन्यवाद कहा है. वीडियो में राखी की मां जया सावंत कहती हैं- ‘सलमान जी धन्यवाद बेटा, सोहेल जी धन्यवाद. अभी मेरा कीमो चल रहा है. मैं अस्पताल में हूं. आज चार कीमो हुए हैं और दो बाकी है, फिर उसके बाद ऑपरेशन होगा.’ आगे वो कहती हैं- ‘आप लोगों को परमेश्वर खूब आगे बढ़ाए. आप लोग सलामत रहें. परमेश्वर आपके साथ हैं और आपकी हर मनोकामना पूरी होगी.’ यह भी पढ़ें: सबको हंसानेवाली राखी सावंत ने इस बार इमोशनल कर दिया, अपनी मां की दिल को छू लेनेवाली तस्वीरें शेयर कर कहा- प्रार्थना करें, वो कैंसर ट्रीटमेंट से गुज़र रही हैं! (Rakhi Sawant Shares Photos Of Her Mom, Asks For Prayers As She Undergoes Cancer Treatment)

इसके बाद वीडियो में राखी भी हाथ जोड़कर सलमान खान को धन्यवाद करती हुई दिखाई दे रही हैं. इस वीडियो को सोशल मीडिया यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं और यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है. आपको बता दें कि राखी सावंत ने अपनी मां के इलाज के लिए सलमान खान से मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद सलमान ने इलाज के लिए उनकी आर्थिक मदद की.

Rakhi Sawant and Salman Khan
Photo Credit: Instagram

दरअसल, हाल ही में एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में राखी ने बताया था कि उन्होंने सलमान खान से मदद के लिए गुहार लगाई है. एक्ट्रेस की मानें तो उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब चल रही है और उनके ज्यादातर पैसे मां के इलाज में खर्च हो गए हैं. ऐसे में उन्होंने सलमान खान के ‘बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन’ के साथ-साथ संजय दत्त व उनकी बहन प्रिया दत्त के ‘नरगिस दत्त फाउंडेशन’ से भी मदद की गुहार लगाई.

Rakhi Sawant
Photo Credit: Instagram

आपको बता दें कि इससे पहले ही राखी सावंत ने अपनी मां की दो तस्वीरें फैन्स के साथ सोशल मीडिया पर शेयर की थीं, जिसके साथ उन्होंने अपनी कैंसर पीड़ित मां के लिए प्रशंसकों से दुआ की अपील की थी. एक्ट्रेस ने इस पोस्ट के साथ लिखा था- ‘कृपया मेरी मां के लिए प्रार्थना कीजिए, उनका कैंसर का इलाज चल रहा है.’ उनके पोस्ट पर टीवी के कई सेलेब्स ने कमेंट करते हुए उनकी मां के जल्द स्वस्थ होने की कामना की. एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने लिखा था- ‘आंटी ठीक हो जाएंगी राखी…. तुम बहुत स्ट्रॉन्ग हो.’ यह भी पढ़ें: Big Boss 14 Finale: शॉकिंग अपडेट, अली गोनी हुए रेस से बाहर, राखी सावंत 14 लाख लेकर पहले ही घर छोड़ चुकीं हैं, ये हैं 3 फाइनलिस्ट! (BB14 Finale Update: Aly Goni Evicted, Rakhi Sawant Walks Out With 14 Lakh Money Bag)

बात करें ‘बिग बॉस 14’ की तो राखी सावंत टॉप 5 में पहुंचने में कामयाब रही थीं, लेकिन जब उन्हें 14 लाख रुपए लेकर शो छोड़ने का ऑफर मिला तो उन्होंने इस ऑफर को हाथ से जाने नहीं दिया और पैसे लेकर वो शो से बाहर हो गईं. दरअसल, राखी सावंत ने उस वक्त कहा था कि उन्हें अपनी मां के इलाज के लिए पैसों की सख्त ज़रूरत है और इन पैसों से उनके मां के इलाज में काफी मदद मिल सकती है. एक्ट्रेस ने यह भी कहा था कि उनकी पूरी कमाई उनकी मां के इलाज में लग चुकी है और अब बिग बॉस के पैसों से उनकी मां का इलाज आराम से हो सकता है.

राखी सावंत ने बिग बॉस में भले ही लोगों को खूब हंसाया और उनके मनोरंजन में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि इस ड्रामा क्वीन के दिल में दुखों का अपार समंदर है. बात-बात में उनके मुंह से ये निकल भी जाता था बिग बॉस हाउस में कि मुझे वो सब नहीं मिला जो दूसरों को मिला. ना शादी सही है, ना पति का सुख, ना प्यार.

Rakhi Sawant

ज़ाहिर सी बात है राखी ने काफ़ी संघर्ष करके अपना नाम और मुक़ाम बनाया है और इस बार बिग बॉस में उनके आने की वो जो वजह बताती थीं वो यही कि उन्हें पैसों की ज़रूरत है क्योंकि उनकी मां जया अस्पताल में भर्ती हैं.
राखी के भाई राकेश ने ही ये ख़ुलासा किया था कि उनकी मां आईसीयू में है क्योंकि उनके गाल ब्लैडर में कैंसरस ट्यूमर है. उनकी मां ने भी वीडियो कॉल पर राखी से बात की थी और तब राखी ने अपनी मां को कहा था कि आप कमज़ोर मत पड़ना, मेरे आने तक मज़बूत बनी रहना. उनकी मां की कीमोथेरेपी शुरू होने जा रही थी और राखी ने अपनी विश मांगने के समय भी राहुल के ये पूछने पर कि आपने अपनी मां से मिलने की विश क्यों नहीं मांगी यही कहा था कि उनको देखकर मैं कमज़ोर पड़ जाती जो मैं नहीं चाहती और मेरी मां भी शेरनी है तो वो ठीक होंगी!

Rakhi Sawant's Mom

बहरहाल राखी ने बिग बॉस में भी 14 लाख का सूटकेस लेकर शो छोड़ने का फ़ैसला किया था और वो पहले से ही कहती आ रही थीं कि अगर मौक़ा मिला तो मैं मनी बैग लेकर जाना प्रिफ़र करूंगी. पैसे लेने कि बाद भी उन्होंने कहा था कि इससे मेरी मां का इलाज हो पाएगा और मैं अस्पताल के बिल्स चुकता कर पाऊंगी.

Rakhi Sawant

यहां तक कि राखी को सपोर्ट करने आए विंदु दारा सिंह ने भी उनको यही अड्वाइस दी थी कि बैग उठाने का मौक़ा मिले तो बैग ले लेना. राखी ने ऐसा ही किया और अब बाहर आने के बाद पहली बार उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दिल को छू लेनेवाली अपनी मां की तस्वीरें शेयर की हैं और इनके साथ ही फैंस से अपील भी कि है कि वो उनकी मां के लिए दुआ करें.

Rakhi Sawant
Rakhi Sawant's Mom

राखी ने लिखा है कि कृपया मेरी मां के लिए प्रार्थना कीजिए, वो कैंसर ट्रीटमेंट से गुज़र रही हैं!

वाक़ई ये तस्वीरें और राखी का संदेश काफ़ी इमोशनल करनेवाला है, जो राखी सबको हंसाती है उसने आज लोगों को इमोशनल कर दिया!

Photo Courtesy: Instagram (All Photos)

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Mammogram

कैंसर को लेकर कई लोगों को कुछ भ्रम बना रहता है, ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर के मामले में. इसी से जुड़े मैमोग्राम के बारे में भी महिलाओं को बहुत कम जानकारी होती है. उन्हें इसके बारे में संपूर्ण जानकारी हो, इसलिए यहां इसके बारे में प्रश्नोत्तर के रूप बता रहे हैं. पुणे के जुपिटर हॉस्पिटल की डॉ. प्रांजली गाडगिल, जो ब्रेस्ट कैंसर सर्जन हैं, ने इसके बारे में विस्तारपूर्वक बताया.

मैमोग्राम होता क्या है?
मैमोग्राम यह ब्रेस्ट (स्तन) के मुलायम ऊतक का निकाला गया विशेष प्रकार का एक्स-रे होता है. यह जांच मैमोग्राफी सेंटर में ख़ास उपकरण द्वारा की जाती है. अति सूक्ष्म, कम ऊर्जावाले रेडिएशन द्वारा हर एक ब्रेस्ट के दो एक्स-रे निकाले जाते है. रेडिओलॉजिस्ट इन चित्रों का परिक्षण करके रिजल्ट तैयार करते है.

स्तन की कोई शिकायत न होने पर मैमोग्राम क्यों करवाना?
स्तन का कर्करोग यानी ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक होनेवाला कैंसर है, इसीलिए विशेषज्ञों द्वारा सलाह दी जाती है कि महिलाओं को ४० साल की उम्र के बाद इसकी वार्षिक जांच ज़रूर करवानी चाहिए. नियमित जांच करनेवाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का निदान, हाथ को गांठ का स्पर्श होने से पहले ही हो सकता है. प्रारंभिक अवस्था में इलाज करने से इसका इलाज आसानी से होता है. साथ ही कोई गम्भीर समस्या या जान का ख़तरा भी नहीं रहता. स्वस्थ महिलाओं में इस उद्देश्य से की गई जांच को स्क्रिनिंग मैमोग्राफी कहा जाता है.

स्तन में गांठ होनेपर मैमोग्राफी करवानी चाहिए या सोनोग्राफी?
४० साल से कम उम्र की महिलाओ के लिए प्रथम स्तन की सोनोग्राफी अर्थात अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है. सोनोग्राफी के अंतर्गत एक्स-रे का उपयोग ना करके, ध्वनि तरंग का उपयोग किया जाता है. ४० साल से अधिक उम्र की महिलाओं का, प्रथम मैमोग्राफी उसके बाद आवश्यकतानुसार सोनोग्राफी की जाती है. दोनों ही जांच एक-दूसरे के पूरक होने से, कई बार पूर्ण निदान के लिए दोनों उपकरणों का उपयोग किया जाता है. इन जांच के लिए विशेषज्ञों की सलाह भी अनिवार्य है.

मैमोग्राम में दिखनेवाली हर गांठ, ज़रुरी है कि कैंसर ही हो?
८० प्रतिशत गांठें कैंसर की (मतलब मलिग्नंट) न होकर अन्य कई वजहों से भी हो सकती है. इन दोषों को बिनाइन ब्रेस्ट डिसीज़ कहा जाता है. इसके अंतर्गत ब्रेस्ट सिस्ट फाइब्रोएड़ेनोमा इन्फेक्शन्स तथा अन्य कई क़िस्म के स्तन की बीमारी आती है.


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मैमोग्राफी के लिए जाते समय क्या-क्या तैयारी करनी चाहिए?
सुबह स्नान के बाद पाउडर, क्रीम, डिओड्रेंट आदि का इस्तेमाल किए बिना चेकअप के लिए जाना चाहिए. इस जांच के लिए खाली पेट रहने की ज़रुरत नहीं है. पूर्व में किए गए सभी मैमोग्राफी तथा सोनोग्राफी के रिपोर्ट अपने साथ रखें. नई जांच की तुलना पुरानी फिल्म की रिपोर्ट को देख उसके साथ करना आवश्यक होता है. पहले के बायोप्सी तथा महत्वपूर्ण सर्जरी के रिपोर्ट भी साथ में रखना आवश्यक है.

मैमोग्राफी करते समय दर्द होता है क्या?
एक्स-रे लेते समय स्तन को ५ से १० सेकंड प्लेट्स के बीच में रखा जाता है, जिससे स्तन के ऊपर दबाव महसूस होता है. अनुभवी टेक्निशियन और आधुनिक उपकरण होने से जांच बिल्कुल आसानी से होता है. इसके लिए आई.वी. इंजेक्शन तथा कॉन्ट्रास्ट डाय की आवश्यकता नहीं होती.

मैमोग्राम एब्नार्मल आने पर क्या करना चाहिए?
मैमोग्राम में कुछ अनुचित दिखाए देने पर उसका उचित निदान करने के लिए कुछ और जांच की जाती है. अधिकतर सोनोग्राफी द्वारा ही संदेह को दूर किया जाता है. कभी टोमोसिंथेसिस या ब्रेस्ट एमआरआई तथा विशेष इमेजिंग उपकरणों का उपयोग भी किया जाता है. कैंसर की या उसके प्राथमिक अवस्था की अगर ज़रा भी संभावना है, तो सुई की जांच मतलब बायोप्सी की जाती है. हाथ को स्पर्श न होनेवाली गांठ की बायोप्सी के लिए सोनोग्राफी का उपयोग किया जाता है.

मैमोग्राफी करने से क्या कैंसर से बच सकते है?
नियमित रूप से वार्षिक मैमोग्राम करनेवाली महिलाओं में कैंसर का निदान प्रथम चरण में ही होता है. इस वजह से इलाज आसान होकर किसी गम्भीर ख़तरे को टाला जा सकता है. मैमोग्राफी से कैंसर का प्रजनन रुकता नहीं है, किंतु समयानुसार निदान और उपचार संपन्न करने से नुक़सान कम होता है.

फैमिली हिस्ट्री में मां, बहन, मौसी, बुआ आदि इनमें से किसी को कैंसर हो, तो क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
ब्रेस्ट कैंसर यह ५ से १० प्रतिशत मरीज़ों में आनुवांशिक होता है. ऐसी संभावना होने पर उचित स्तन रोग चिकित्सक/ब्रेस्ट सर्जन से सलाह लेकर जेनेटिक टेस्टिंग करवाना चाहिए. आप की आयु, अब तक के स्तन की जांच के रिपोर्ट, फैमिली हिस्ट्री, जेनेटिक रिपोर्ट इन सभी का अध्ययन करके योग्य चेकअप और उपचार की सलाह दी जाती है.


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हाथों को गांठ का स्पर्श महसूस हो, किंतु मैमोग्राफी में दिखाई न दे तो क्या करना चाहिए?
स्तन की कोई भी शिकायत होने पर मैमोग्राफी करने से पहले डॉक्टर द्वारा चेकअप करवाना चाहिए. मैमोग्राफी में गांठ न दिखाई देने के और भी कई कारण हो सकते है. जांच के समय ठीक से पोजीशन न दी गई हो, तो स्तन का पूर्ण भाग चित्र में नहीं आता है. कुछ महिलाओं में स्तन का गहन घनिष्ठ (डेन्स ब्रेस्ट) होने पर सिर्फ़ एक्स-रे की जांच पर्याप्त नहीं होती, इसीलिए सोनोग्राफी या अन्य उपकरण की सहायता ली जाती है. जांच द्वारा संतुष्टि न होने पर स्तन रोग चिकित्सक या ब्रेस्ट सर्जन की सलाह अवश्य ले.

जिस महिला का ब्रेस्ट कैंसर का निदान होने के बाद उपचार हुआ हो, तो क्या उसे भी मैमोग्राफी करवानी चाहिए?
मास्टेक्टॉमी की ऑपरेशन द्वारा स्तन का पूर्ण हिस्सा अगर निकाला गया हो, फिर भी दूसरे स्तन की वार्षिक जांच आवश्यक है. स्तन का कुछ ही हिस्सा रखकर लम्पेक्टॉमी की गई हो, तो शुरुआती एक-दो साल हर छह महीने में मैमोग्राफी की जाती है और उसके बाद वार्षिक जांच की जाती है. कैंसर के मरीज़ों को ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाहनुसार नियमित जांच करवाते रहना ज़रूरी है.

– ऊषा गुप्ता


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मेरी उम्र 45 वर्ष है. 8 साल पहले मेरी मां का सर्विक्स कैंसर का ऑपरेशन हुआ था. अब हाल ही में पता चला है कि मेरी छोटी बहन, जिसकी उम्र 39 वर्ष है, को भी सर्वाइकल कैंसर है. मेरी दो बेटियां हैं. मुझे डर है कि कहीं उन्हें भी यह बीमारी न हो जाए. इससे बचाव के लिए मैं क्या करूं?
– जया सुराना, बड़ौदा.

सबसे पहले बात तो ये जान लें कि सर्वाइकल कैंसर आनुवांशिक नहीं है. यह ह्यूमन पैपिला वायरस के कारण होता है. इसके अलावा सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन, मल्टीपल प्रेग्नेंसीज़ से भी सर्विक्स कैंसर हो सकता है. इससे बचाव के लिए एक वैक्सीन लगाया जाता है, जो एंटीबॉडीज़ उत्पन्न करता है. यह लड़कियों को किशोरावस्था में ही दे दिया जाना चाहिए, क्योंकि इस समय शरीर का इम्यून सिस्टम अच्छा रहता है. यदि सर्विक्स कैंसर नहीं हुआ है तो सुरक्षा के लिए ये वैक्सीन 45 की उम्र तक लगाया जा सकता है. यह छह महीने के अंतराल में तीन बार लगाया जाता है. इसके अलावा समय-समय पर पैप स्मीयर टेस्ट करवाते रहें, ताकि सर्विक्स कैंसर का पता चल सके.

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मेरी उम्र 20 वर्ष है. मैं बहुत ही दुबली-पतली हूं. मेरी माहवारी 7 साल पहले शुरू हुई थी और तब से मुझे भारी रक्तस्राव होता है. मेरी माहवारी अनियमित भी रहती है. इन दिनों मैं बहुत कमज़ोर भी हो गई हूं. थोड़ी-सी थकान से मुझे चक्कर आने लगते हैं व सांस भी फूल जाती है. मैं क्या करूं?
– हरप्रीत कौर, अंबाला.

आपके बताए लक्षणों से लगता है कि आपका हीमोग्लोबीन लेवल कम है. आपको एनीमिया हो सकता है. इतने लंबे समय तक भारी रक्तस्राव के कारण शायद ऐसा हुआ हो. आपको हीमोग्लोबीन लेवल चेक करने के लिए ब्लड टेस्ट व अन्य समस्याओं जैसे- फायब्रॉइड या पॉलिप की जानकारी के लिए पेल्विक सोनोग्राफ़ी करवा लेनी चाहिए. अनियमित माहवारी का कारण हार्मोंस का असंतुलित होना है. आपको ऐसा भोजन लेना चाहिए, जिससे पर्याप्त आयरन प्राप्त हो सके, जैसे- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, राजमा, रागी आदि. आयरन की टेबलेट्स भी ले सकती हैं. अनियमित माहवारी के लिए आप गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करके हार्मोंस की टेबलेट्स भी ले सकती हैं.

Dr. Rajshree Kumar
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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विवाह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका अपने पार्टनर के साथ परफेक्ट मैच बने और आप दोनों के रिश्ते में कोई तक़रार न आए, तो अन्य चीज़ों के साथ आपको अपने भावी पार्टनर की राशि भी ज़रूर देखनी चाहिए. एस्ट्रो कंसल्टेंट डॉ. माधवी सेठ बता रही हैं कि आपकी राशि की बेहतर जोड़ी किस राशि के साथ बनेगी?

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मेष राशि ( Aries)

मेष अग्नि तत्व की राशि है. इस राशि के लोग स्वतंत्र मिज़ाज के होते हैं और इन्हें अपनी आज़ादी बहुत प्यारी होती है. इनको अपना पर्सनल स्पेस चाहिए होता है. ये ख़ुद को बहुत इंपॉर्टेंस देते हैं और अपने पार्टनर से भी यही उम्मीद रखते हैं. मेष राशिवालों को किसी के साथ तुलना बिल्कुल भी पसंद नहीं आती. इस राशि के लोग यदि जीवनसाथी के रूप में सिंह और धनु राशिवालों को चुनते हैं, तो इनका वैवाहिक जीवन सफल रहता है. इनके लिए वृश्‍चिक राशि भी अनुकूल है.

वृषभ राशि (Taurus)

वृषभ पृथ्वी तत्व की राशि है. इस राशि के जातक बहुत इमोशनल होने के साथ-साथ मेहनती भी होते हैं. इस राशिवालों को ऐसा पार्टनर चाहिए होता है, जो इन्हें हमेशा प्रेम करता रहे. इन्हें केयरिंग व लविंग पार्टनर पसंद आता है. वृषभ राशिवालों का वैवाहिक जीवन आमतौर पर सुखी होता है. इस राशिवालों का जल राशि के साथ बेहतर तालमेल बैठता है, क्योंकि पृथ्वी के ऊपर जल बहता है, इसलिए इस राशिवालों के लिए वृश्‍चिक, मीन, कर्क और कन्या राशि अनुकूल है.

मिथुन  (Gemini)

मिथुन वायु तत्व की राशि है.  मिथुन राशिवाले बेहद बुद्धिमान, बातूनी, कलात्मक व ज्ञानी होते हैं. इन्हें अपने पार्टनर में भी ऐसे ही गुण चाहिए होते हैं. यही वजह है कि इनको कलात्मक, ज्ञानी और बुद्धिमान पार्टनर की तलाश होती है. साथ ही इन्हें लचीले स्वभाववाला पार्टनर अट्रैक्ट करता है. इनकी तुला के साथ बेहतरीन जोड़ी बनती है, पर सिंह राशिवाले भी इनके लिए अनुकूल हैं.

कर्क (Cancer)

कर्क जल तत्व की राशि है. कर्क राशिवाले बेहद भावुक व ईमानदार होते हैं. कर्क राशिवाले बहुत मूडी होते हैं. ये कब रूठ जाते हैं, इसका अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल होता है. इस राशि के लोग अपने पार्टनर पर भावनात्मक रूप से काफ़ी निर्भर होते हैं, जिसके कारण ये कभी-कभार उन पर बोझ बन जाते हैं. कर्क राशिवाले दूसरों से बहुत ज़्यादा आशा रखते हैं. यही वजह है कि इन्हें संतुष्टि कभी नहीं मिलती और इन्हें प्यार हमेशा कम लगता है,  इसलिए इनका शादीशुदा जीवन उतना अच्छा नहीं होता. इनकी उन्नति के द्वार शादी के बाद ही खुलते हैं. कर्क राशिवालों के लिए शादी सब कुछ नहीं होती, ये विवाह को स़िर्फ एक पड़ाव मानते हैं. इनके लिए ज़िंदगी यहां से शुरू होती है, क्योंकि इनका भाग्य भी शादी के बाद ही खुलता है. चूंकि कर्क जल राशि है, इसलिए इनकी दूसरी जल राशि वृश्‍चिक के साथ अच्छी जमती है. साथ ही पृथ्वी राशि, जैसे-कन्या और वृषभ के साथ भी इनकी जोड़ी सफल रहती है.

सिंह (Leo)

सिंह अग्नि तत्व की राशि है. इस राशिवालों को ऐसे पार्टनर की तलाश होती है, जो इनको अटेंशन दें और इनको लाड़ करें. इनको केयरिंग पार्टनर चाहिए होता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिंह राशि सूर्य की राशि है. यह एकमात्र राशि है, जो सूर्य की राशि है, इसलिए सिंह राशिवालों को इनकी पसंद व स्टैंडर्ड के हिसाब से पार्टनर चाहिए होता है.  इन्हें लगता है कि इनके स्टैंडर्ड के हिसाब से ही इनके साथ बर्ताव किया जाना चाहिए. कोई भी उनके साथ कैजुअल व्यवहार नहीं कर सकता.  सिंह राशि की मेष और धनु राशि के साथ बहुत बनती है. तुला भी इनके लिए अनुकूल है.

कन्या (Virgo)

कन्या पृथ्वी तत्व की राशि है. इस राशिवालों के लिए मकर, वृषभ जैसे पृथ्वी तत्व की राशिवाले पार्टनर चुनने चाहिए, लेकिन इनके लिए जलराशि कर्क व वृश्‍चिक भी अनुकूल है. इस राशिवाले परफेक्शनिस्ट होते हैं. इन्हें मैच्योर, सेंसिबल और सेंसिटिव पार्टनर चाहिए होता है. ये परिवारप्रेमी होते हैं. ये अपने परिवार का बहुत ध्यान रखते हैं. ये परिवार को बहुत ऊंचा मानते हैं, लेकिन इन्हें इनके हिसाब का ही पार्टनर चाहिए होता है.

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तुला (Libra)

तुला वायु तत्व की राशि है. वैसे तो वायु राशिवाले कभी-कभी बहुत अनियंत्रित हो जाते हैं, लेकिन तुला बहुत संतुलित राशि है.  ये बैलेंस तरी़के से काम भी करते हैं और साथ ही  पार्टी का भी मज़ा लेते हैं. कहने का अर्थ यह है कि ये स़िर्फ काम या स़िर्फ पार्टी करने में विश्‍वास नहीं रखते, बल्कि काम और पार्टी दोनों में संतुलन बनाकर चलते हैं. इस राशिवाले प्रेम को पवित्र बंधन मानते हैं. चूंकि यह शुक्र की राशि है, इसलिए इन्हें सुंदर चीज़ें पसंद आती हैं. ये ख़ुद भी बहुत अट्रैक्टिव होते हैं और इन्हें अट्रैक्टिव चीज़ें ही अच्छी लगती हैं. इस राशिवालों की जोड़ी सिंह, कुंभ व तुला से अच्छी जमती है.

वृश्‍चिक (Scorpio)

वृश्‍चिक जल तत्व की राशि है. इस राशि के लोग बहुत सेंशुअल व इंटेलिजेंट होते हैं. इन्हें अपने से बड़ी उम्रवाले लोग अच्छे लगते हैं. कर्क राशि से इनकी बहुत बनती है. अगर वृश्‍चिक और कर्क राशिवाले की शादी हो जाए तो वो पावरफुल कपल हो सकता है. चूंकि वृश्‍चिक व कर्क दोनों ही जल राशि हैं. ये दोनों राशियां प्यार जताने के लिए किसी भी हद तक जाती हैं, इसलिए अगर इनका मिलन हो जाए, तो इनका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चलता है. इस राशि की मकर और वृश्‍चिक राशि से भी अच्छी बनती है.

धनु  (Sagittarius)

धनु अग्नि तत्व की राशि है.  इस राशि के लोग पार्टनर में दोस्त व गाइड की तलाश करते हैं. इन्हें स्वाभाविक व रियल पार्टनर पसंद होते हैं. इन्हें बनावटी पार्टनर अच्छे नहीं लगते. इन लोगों को ख़ुशमिज़ाज साथी की चाह होती है.  इनकी कर्क राशिवालों से नहीं बनती, क्योंकि कर्क राशिवाले बहुत भावुक होते हैं, इसी तरह कन्या राशिवाले इन्हें बहुत बातूनी लग सकते हैं. इस राशि के लिए कुंभ, सिंह और मेष उपयुक्त राशियां हैं.

मकर  (Capricorn)

मकर पृथ्वी तत्व की राशि है. इस राशि के जातक सबसे ज़िद्दी होते हैं. इससे ज़िद्दी कोई राशि नहीं होती. इन्हें करियर माइंडेड, सफल और साहसी पार्टनर चाहिए होता है. ख़ुद थोड़े स्लो होते हैं, लेकिन उन्हें महत्वाकांक्षी पार्टनर ही पसंद आते हैं. वृषभ, कन्या व मीन के साथ इनका वैवाहिक जीवन बहुत सफल रहता है.

कुंभ  (Aquarius)

कुंभ वायु तत्व की राशि है, इनकी अग्नि तत्व की राशि से बनती है, इसलिए इनके लिए मेष और तुला राशि उपयुक्त है. इनकी धनु राशिवालों से भी कभी-कभी जम जाती है. ये बहुत सिंपल किस्म के, लेकिन इंडिपेंडेंट होते हैं. इन्हें वाइल्ड स्पिरिटेडेड पार्टनर पसंद आते हैं. इन्हें जजमेंटल लोग अच्छे नहीं लगते यानी बिना सोचे-समझे राय बनानेवाले लोग इन्हें पसंद नहीं आते.

मीन (Pisces)

मीन जल राशि है. इस राशिवालों को कर्क व वृश्‍चिक राशिवाले जीवनसाथी का चुनाव करना चाहिए. वृषभ से भी इनकी बनती है. ये बड़े शांत स्वभाव के व व्यवस्थित होते हैं. इस राशिवाले बहुत इमोशनल होते हैं. लाइफ पार्टनर के रूप में इन्हें थोड़ा संभालना पड़ता है. ये बहुत डिप्लोमैटिक होते हैं. इन्हें दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की आदत होती है यानी अपनी बात दूसरे से निकलवाने में माहिर होते हैं.

नोटः यह सामान्य विश्‍लेषण है. विशेषज्ञ से जीवनसाथी का चुनाव अपनी कुंडली का विश्‍लेषण करवा कर ही पार्टनर का चुनाव करना चाहिए, क्योंकि कुंडली में ग्रहस्थिति भी देखनी होती है.

– शिल्पी शर्मा

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आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप ने ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी अपनी लड़ाई के बारे में बताया कि किस तरह से वे रातभर अकेले रोती रहती थीं. ऐसे में पति आयुष्मान खुराना शूटिंग में व्यस्त रहते थे. उन्होंने अपने उस दौर के मानसिक अवसाद और उतार-चढ़ाव के बारे में खुलकर एक इंटरव्यू में बताया. उनके अनुसार, वे समझती थी कि फिजिकल हेल्थ ही मायने रखता है और वे ख़ूब एक्सरसाइज करती थीं, पर उन्होंने यह नहीं समझा कि मेंटल हेल्थ भी बहुत ज़रूरी होता है. वे इस कदर परेशान व तनाव में रहती थी कि कई बार तो उनके मन में आया कि वे सब रिश्ते ख़त्म कर दे.

Tahira Kashyap
तन्हा रातभर रोने के बाद भी सुबह बच्चों की ख़ातिर वे उनके सामने मुस्कुराते हुए आतीं. उन्होंने अपने दर्द को अपने तक ही रखा. उनके अनुसार, यदि समय रहते वे डॉक्टर के पास चली जातीं, तो शायद और जल्दी कैंसर से रिकवर कर लेतीं. वे ख़ुद को ख़ुशनसीब समझती हैं कि उनके ब्रेस्ट कैंसर का इनिशियल स्टेज पर पता चल गया और समय पर ट्रीटमेंट हुआ.
ताहिरा का पहले यह मानना था कि शारीरिक स्वास्थ्य ही सेहतमंद ज़िंदगी के लिए काफ़ी है, पर बाद में उन्हें यह एहसास हुआ कि कैंसर जैसी बीमारी में मानसिक और भावनात्मक चीज़ें भी बहुत मायने रखती हैं. फिर उन्होंने बौद्धिक जाप करना शुरू किया, जिससे उन्हें काफ़ी फ़ायदा हुआ.

Tahira Kashyap
ताहिरा कश्यप के केस में हमें यह जानने को मिलता है कि कैंसर जैसी बीमारी में दवाइयों और थेरेपी के साथ-साथ हमारी मानसिक और भावनात्मक स्थिति भी काफ़ी मायने रखती है. ऐसे में परिवार का, अपनों का, ख़ासकर पति का साथ काफ़ी सकारात्मक परिणाम लाता है. इसलिए जिस किसी को भी कैंसर हुआ हो, तब कोशिश करनी चाहिए कि वह अपनों के क़रीब रहे. कैंसर के मरीज को ढेर सारा प्यार अपनापन दें. उन्हें सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करें और हर कदम पर उनका साथ दें.

Tahira Kashyap
जैसा कि आप सभी जानते हैं सोनाली बेंद्रे के केस में उनकी कैंसर की बीमारी इन सभी से ही जल्दी ठीक हुई. इसलिए हर किसी का फर्ज बनता है कि अगर उनके भाई-बंधु में या परिवार में जिस किसी को भी कैंसर हो, वे उनका भरपूर साथ दें. उन्हें फिजिकली और मेंटली मदद करें. ताहिरा ने अपने इंटरव्यू में इसी बात पर अधिक ज़ोर दिया और वे सभी को यही संदेश देना चाहती थीं कि कैंसर से डरे नहीं, उसका डटकर सामना करें और सकारात्मक सोच के साथ रहें.

Tahira Kashyap

यह भी पढ़ेनिक का स्वभाव बिल्कुल मेरे पापा जैसा हैः प्रियंका चोपड़ा (I Feel I Have Married Someone Who Is My Dad’s Chhavi: Priyanka Chopra)

मैं 35 वर्षीया महिला हूं और 2 बच्चों की मां भी. पिछले कुछ दिनों से मेरे ब्रेस्ट से मिल्की व्हाइट-सा लिक्विड डिस्चार्ज हो रहा है, जबकि मैंने 5 साल पहले ही अपने बच्चों को स्तनपान कराना बंद कर दिया है. क्या ऐसा डिस्चार्ज होना ख़तरनाक है? मुझे डर है कहीं यह कैंसर तो नहीं?
– सोनाली बंसल, बीकानेर.

पहले तो आप यह बताएं कि क्या आप कोई दवा ले रही हैं? क्योंकि कई बार कुछ दवाओं के खाने से भी ब्रेस्ट से व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जिसे ‘गलेक्टोरिया’ कहते हैं. या फिर किसी और कारण से भी ऐसा हो सकता है. इसके लिए आपको गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. यदि ऐसा दवाओं की वजह से हो रहा है, तो वे उन दवाओं की जगह कुछ अन्य दवाएं आपको देंगी. यदि दवा बदलने के बाद भी यह डिस्चार्ज बंद नहीं होता है, तो गायनाकोलॉजिस्ट आपके कुछ हार्मोनल टेस्ट कराएंगी, जैसे- थायरॉइड टेस्ट, प्रोलेक्टीन लेवल आदि. उसी के आधार पर आपका ट्रीटमेंट करेंगी. कई बार थायरॉइड से संबंधित दवाएं खाने पर भी ब्रेस्ट से डिस्चार्ज होता है.

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Abnormal Nipple Discharge

मैं 35 वर्षीया महिला हूं, मेरी शादी को 9 साल हो गए हैं. मेरे पीरियड्स अनियमित थे. लेकिन ट्रीटमेंट कराने के बाद अब मुझे नियमित पीरियड्स आते हैं. पर मैं गर्भ धारण नहीं कर पा रही हूं, जबकि मेरे और मेरे पति के सारे टेस्ट नॉर्मल हैं. कृपया बताएं, क्या करूं?
– रूपाली गौड, श्रीनगर.

आपको इंफ़र्टिलिटी की समस्या हो सकती है. लगता है आपके ओव्यूलेशन में कुछ प्रॉब्लम है. आपको इंफ़र्टिलिटी स्पेशलिस्ट के पास जाना चाहिए, जो आपके सारे टेस्ट कराने के बाद ही आपका सही ट्रीटमेंट करेंगे. यदि इसके बाद भी सफलता नहीं मिलती है तो टेस्ट ट्यूब बेबी की सहायता से आप मां बन सकती हैं. इसके अलावा यदि आप चाहें तो किसी बच्चे को गोद भी ले सकती हैं.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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Cancer Prevention

कैंसर से बचाएंगी ये किचन रेमेडीज़ (Cancer Prevention: Best Home Remedies To Lower Your Risk)

पूरी दुनिया में ही नहीं, भारत में भी कैंसर (Cancer) के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे किचन में ही ऐसी बहुत सारी चीज़ें उपलब्ध हैं, जिनका नियमित सेवन कैंसर से लड़ने में सहायता कर सकता है. एक नजर किचन में मौजूद कुछ ऐसी ही एंटी कैंसर चीज़ों पर.

हल्दीः खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज़रूर करें. इसमें मौजूद करक्यूमिन तत्व कैंसर से लड़ने में मदद करता है. हल्दी ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और त्वचा के कैंसर में ज़्यादा प्रभावी है.

केसरः केसर में क्रोसेटिन नाम का तत्व होता है, जो कैंसर से लड़ने में प्रभावी है. ये ना स़िर्फ कैंसर को स्प्रेड होने से रोकता है, बल्कि ट्यूमर के साइज़ को भी कम करता है.

जीराः जीरा खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कैंसर से भी बचाता है. इसमें थाइमोक्वीनोन नाम का पदार्थ होता है, जो प्रोस्टेट कैंसर बनानेवाले सेल्स को बढ़ने से रोकता है. लिहाज़ा अगर कैंसर से बचना है और हेल्दी रहना है, तो अपने डेली डायट में जीरा शामिल करें.

दालचीनीः आयरन और कैल्शियम से भरपूर दालचीनी शरीर में ट्यूमर के साइज़ को कम करने में मदद करती है. हर रोज़ अपने दिन की शुरुआत दालचीनी की चाय से करें और सोने से पहले शहद और दालचीनी के साथ एक ग्लास दूध का सेवन करें. इससे आप कैंसर से सुरक्षित रहेंगे.

ऑरिगेनोः ऑरिगेनो का इस्तेमाल स़िर्फ पिज़्ज़ा, पास्ता की टॉपिंग के रूप में ही नहीं होता, बल्कि ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़िलाफ़ भी एक सशक्त एजेंट का काम करता है.

Cancer Prevention

अदरक: औषधीय गुणों से भरपूर अदरक के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है और कैंसर सेल्स भी ख़त्म होते हैं. अदरक का अर्क कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से होनेवाली परेशानी को भी कम कर सकता है. ये अन्य कई बीमारियों से भी बचाता है.

तुलसीः तुलसी की पत्तियों में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो कैंसर से सुरक्षा देता है. इस तत्व का इस्तेमाल एंटी कैंसर दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है.

नारियल तेलः रोज़ खाली पेट एक चम्मच नारियल तेल का सेवन करने से कैंसर से बचाव होता है. इसमें मौजूद लॉरिक एसिड कैंसर की कोशिकाओं को ख़त्म करने में सहायक होता है.

लहसुन और प्याज़ः लहसुन और प्याज़ में मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी आंत, बे्रस्ट कैंसर, लिवर और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं को मार देते हैं. यह इंसुलिन के प्रोडक्शन को कम करके शरीर में ट्यूमर नहीं बनने देते.

एंटी कैंसर सब्ज़ियां: फूलगोभी और ब्रोकोली कैंसर की कोशिकाओं को मारती हैं और ट्यूमर को बढ़ने से रोकती हैं. ये लिवर, प्रोस्टेट, मूत्राशय और पेट के कैंसर के ख़तरे को कम करती हैं.

फलियां और दाल: दाल और फलियां प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होने के साथ ही फाइबर और फोलेट से भरपूर होती हैं, जो पैंक्रियाज़ के कैंसर के ख़तरे को कम कर सकती हैं.

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ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) पिछले कई महीनों से किसी अज्ञात बीमारी के इलाज के लिए न्यूयॉर्क में हैं. हालांकि इतने महीनों से अमेरिका में इलाज करवा रहे ऋषि कपूर के परिवारवालों ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि वे किस बीमारी का इलाज कर रहे हैं, लेकिन फिल्म मेकर राहुल रवैल के लेटेस्ट फेसबुक पोस्ट की मानें तो ऋषि कपूर कैंसर मुक्त (Cancer Free) हो गए हैं. हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा. ऋषि कपूर न्यूयॉर्क में कैंसर का इलाज करवा रहे थे और अब वे कैंसर फ्री हो चुके हैं. फिल्म मेकर राहुल रवैल ऋषि कपूर के करीबी मित्र हैं.

Rishi Kapoor

राहुल रावैल ने ऋषि कपूर के साथ अपनी पिक्चर शेयर करते हुए लिखा कि ऋषि कपूर (चिंटू) कैंसर फ्री हो गए हैं!!! यह एक बहुत अच्छी खबर है. आपको याद दिला दें कि नए साल के उपलब्ध में नीतू कपूर ने रणबीर कपूर और उनकी गर्लफ्रेंड आलिया भट्ट के साथ फैमिली पिक पोस्ट करते हुए लिखा कि इस साल कोई रेजोल्यूशन नहीं, सिर्फ कुछ विशेज़.. मैं आशा करती हूं कि भविष्य में कैंसर सिर्फ़ एक जोडिएक साइन होगा…

Rishi Kapoor's Family Photo

इस पोस्ट के बाद लोगों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था कि ऋषि कपूर कैंसर से जूझ रहे हैं, लेकिन जब इस बारे में मीडिया ने उनके भाई रणधीर कपूर से पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन मैं इतना बता सकता हूं कि ऋषि की तबियत ठीक हो रही हैं. लोगों को जो कहना है, वे कहते रहते हैं. ऋषि कपूर जल्द ही इंडिया वापस लौट आएंगे. हम बस उसी का इंतजार कर रहे हैं.

बीमारी के दौरान भी ऋषि कपूर सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहे. वर्कफ्रंट की बात करें तो ऋषि कपूर आखिरी बार मुल्क फिल्म में नजर आए थे. फिल्म में उनके अलावा तापसी पन्नू और आशुतोष राणा भी थे। इसे अनुभव सिन्हा ने डायरेक्ट किया था.

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