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मानवाधिकार में बनाएं करियर (Career Option In Human Rights)

Career Option In Human Rights

Career Option In Human Rights
मानवाधिकार के क्षेत्र को आज भी समाजसेवा से जोड़कर देखा जाता है, पर अब यह महज़ समाजसेवा नहीं रह गया है, बल्कि एक करियर के रूप में उभरकर सामने आया है. शिक्षित युवाओं के अलावा दूसरे कई और प्रोफेशनल्स के लिए भी इस क्षेत्र में कई अवसर उपलब्ध हैं.   

क्या हैं मानवाधिकार?

ह्युमन राइट्स यानी मानवीय अधिकार मनुष्य के अस्तित्व से जुड़ा एक अभिन्न अंग है. ऐसा माना जाता है कि जन्म के साथ ही हमें कुछ अधिकार प्रकृति द्वारा ख़ुद-ब-ख़ुद मिल जाते हैं, जिन्हें हमसे कोई नहीं छीन सकता. हमारे इन मानवीय अधिकारों में प्रमुख हैं- सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार तथा समानता व सामाजिक न्याय का अधिकार. मानवता के विकास के साथ-साथ मानवाधिकारों का भी विकास हुआ है. मानवाधिकार की जानकारी न स़िर्फ आपको अपना हक़ दिलाती है, बल्कि एक अच्छा रोज़गार भी दिला सकती है. पिछले दो दशकों में मानवाधिकार के क्षेत्र में काफ़ी प्रगति हुई है. जहां एक ओर लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुए हैं, वहीं रोज़गार के क्षेत्र में इसे एक नई विधा के रूप में काफ़ी अहमियत भी मिली है.

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के नोडल सेंटर ऑफ एक्सलेंस फॉर ह्युमन राइट्स एजुकेशन के चेयरपर्सन प्रो. अरविंद तिवारी के अनुसार, फिलहाल हमारे देश में ह्युमन राइट्स एक सप्लीमेंट्री करियर के तौर पर ही ज़्यादा प्रचलित है. इसका कारण है सरकारी संस्थानों का इस क्षेत्र को गंभीरता से न लेना. सरकारी नौकरियों के लिए निकलनेवाले विज्ञापनों में कहीं भी ह्युमन राइट्स का विशेषतौर पर ज़िक्र नहीं किया जाता. मानवाधिकार में करियर को बढ़ावा देने के लिए सरकार को अपनी रिक्रूटमेंट पॉलिसीज़ में बदलाव करने की ज़रूरत है. इसमें करियर को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक व ग़ैर सरकारी संस्थाओं को मिलकर सरकार से इस विषय पर नए नियम बनाने की मांग करनी चाहिए. सरकार को इस क्षेत्र में नए-नए अवसर प्रदान करने चाहिए, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा युवा इस क्षेत्र में आकर मानवाधिकारों को एक नया आयाम दें.

Career Option In Human Rights
काम का स्वरूप

मानवाधिकार के क्षेत्र में कई तरह के प्रोफेशनल्स के लिए रोज़गार की अच्छी संभावनाएं हैं. इस क्षेत्र में बेशक बहुत-सी संभावनाएं हैं, पर मुश्किलें भी कम नहीं हैं. मानवीय अधिकारों के उल्लंघन से बचाव व इससे जुड़े अपराधों की पूरी तरह रोकथाम के लिए रिसर्च, मानवाधिकारों के विकास पर निगरानी रखना, साइट पर जाकर मामले की जांच-पड़ताल करना, केस स्टडीज़ लिखना और रिपोर्ट्स तैयार करना, मानवाधिकारों की वकालत करना व पीड़ितों के लिए मुक़दमा लड़ना, मानवाधिकारों का प्रचार-प्रसार करना आदि काम इस क्षेत्र में करने पड़ते हैं.

क्या बन सकते हैं?

इस क्षेत्र में आप बतौर ह्युमन राइट्स एक्टिविस्ट, ह्युमन राइट्स डिफेंडर, ह्युमन राइट्स एनालिस्ट, ह्युमन राइट्स प्रोफेशनल, ह्युमन राइट्स रिसर्चर, ह्युमन राइट्स प्रोग्रामर, ह्युमन राइट्स एडवोकेट, ह्युमन राइट्स टीचर, ह्युमन राइट्स वर्कर, ह्युमन राइट्स कंसल्टेंट, ह्युमन राइट्स कैम्पेनर, ह्युमन राइट्स फंडरेज़र, ह्युमन राइट्स मैनेजर आदि का काम कर सकते हैं. इन सब में से फिलहाल लोगों को एक्टिविस्ट और रिसर्चर के बारे में ही मालूम है.


रोज़गार के अवसर

ख़ासकर युवाओं के लिए इस क्षेत्र में कई अच्छे अवसर उपलब्ध हैं. मानवाधिकार में डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करके आप इस क्षेत्र में अच्छा करियर बना सकते हैं. आज देश-विदेश में कई सरकारी-ग़ैरसरकारी, समाजसेवी व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इस क्षेत्र में अग्रसर होकर काम कर रही हैं. आप चाहें, तो सरकारी संस्थानों, जैसे- नेशनल ह्युमन राइट्स कमीशन, स्टेट ह्युमन राइट्स कमीशन, ह्युमन राइट्स ट्राइब्युनल्स आदि से जुड़कर काम कर सकते हैं. कई ग़ैरसरकारी संस्थाए, जो विकलांगों, बेघर लोगों, अनाथों, बुज़ुर्गों, पीड़ित महिलाओं, शोषित बच्चों, कैदियों आदि की बेहतरी के लिए काम करती हैं, उनसे जुड़कर आप अपने करियर को एक नया मुक़ाम देने के साथ-साथ लोगों की मदद भी कर सकते हैं. इसके अलावा कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं, जैसे- एमनेस्टी इंटरनेशनल, क्राई, ह्युमन राइट्स वॉच, कॉमनवेल्थ ह्युमन राइट्स इनिशिएटिव, एशियन सेंटर फॉर ह्युमन राइट्स, साउथ एशियन ह्युमन राइट्स डॉक्युमेंटेशन्स सेंटर, पीयूसीएल, पीयूडीआर जैसे संस्थान मुख्य हैं. इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियां, जैसे- यूएनडीपी, यूएनडीईएसए (यूएन डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्सएंड सोशल अफेयर्स), वर्ल्ड बैंक, यूनिसेफ, यूनेस्को, एफएओ (फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन), यूएनईपी (यूनाइटेड नेशन्स एनवॉयरमेंट प्रोग्राम), आईएमएफ, आईएलओ में भी काम की बेशुमार संभावनाएं हैं.

शैक्षणिक योग्यता व प्रवेश

मानवाधिकार में डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करके आप इस क्षेत्र में अच्छा करियर बना सकते हैं. आजकल कई यूनिवर्सिटी, कॉलेज व इंस्टीट्यूट्स ह्युमन राइट्स में 3 साल का डिग्री कोर्स कंडक्ट करते हैं, जो 12वीं के बाद किया जा सकता है. इसके अलावा ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ में पोस्ट-ग्रैजुएट कोर्सेस व डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध हैं, जिसके लिए आपको किसी भी क्षेत्र में ग्रैजुएट होना ज़रूरी है.

अन्य योग्यताएं 

शैक्षणिक योग्यताओं के अलावा ऐसी कई योग्यताएं हैं, जो इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए ज़रूरी हैं. ये योग्ताएं हैं- बेहतर लेखन क्षमता, क़ानून की अच्छी समझ, मैनेजमेंट की जानकारी, बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स, रिसर्च स्किल्स, इंटरव्यू स्किल्स, डॉक्युमेंटेशन स्किल्स, टीमवर्क स्किल्स, नेटवर्किंग स्किल्स, रिपोर्टिंग स्किल्स, फंडरेज़िंग स्किल्स, क्राइसिस रिस्पॉन्स स्किल्स आदि. अगर आपको लगता है कि ये सारी स्किल्स आपमें हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए बिल्कुल उपयुक्त है.

 वेतन 

मानवाधिकार के क्षेत्र में वेतन कितना मिलेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि आप सरकारी, ग़ैरसरकारी, समाजसेवी, अंतर्राष्ट्रीय संस्था, कॉर्पोरेट हाउस  में हैं और भारत में हैं या विदेश में. इसके अलावा आपकी जॉब परमानेंट, टेम्पररी, एड हॉक या असाइन्मेंट बेस है, इस पर भी निर्भर करती है.

प्रमुख संस्थान

डिग्री कोर्स

  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़- 202 002, उत्तर प्रदेश, फोन: (0571)- 2700920, 2400921, 2700922,2700923, वेबसाइट: http://www.amu.ac.in
  • जामिया मिलिया यूनिवर्सिट, जामिया नगर, नई दिल्ली- 110025, फोन: (011)- 26981717, 26984617, 2698465, वेबसाइट: http://jmi.ac.in
  • बनारस हिंदू विश्‍वविद्याल, वाराणसी-221005, उत्तर प्रदेश, फोन: (0542)- 2368558, 2307222, वेबसाइट: http://www.bhu.ac.in
  • एम.एस यूनिवर्सिटी ऑफ वडोदरा, गुजरात
  • एम.डी यूनिवर्सिटी, रोहतक, हरियाणा
  • महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, कोट्टयम, केरल

डिप्लोमा कोर्स

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्युमन राइट्स ए-50, पर्यावरण कॉम्पलेक्स, साकेत-मंदागढ़ी मार्ग, नई दिल्ली-110030, फोन: (011)- 29532930, 29532850, वेबसाइट: http://www.rightsedu.net
  • मुंबई यूनिवर्सिटी, कलीना, सांताक्रुज़ (पूर्व), मुंबई- 400098 फोन: (022)- 26526388, 26526091, वेबसाइट: http://www.mu.ac.in
  • जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी, राजकोट, गुजरात
  • जेएन व्यास यूनिवर्सिटी, जोधपुर, राजस्थान
  • एचपी यूनिवर्सिटी, शिमला, हिमाचल प्रदेश

सर्टिफिकेट कोर्स

  • देवी अहिल्या विश्‍वविद्यालय, इंदौर
  • एस.एन.डी.टी. यूनिवर्सिटी, मुंबई
  • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • बेरहामपुर यूनिवर्सिटी, बेरहामपुर, उड़ीसा
  • नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंगलुरू

 – अनीता सिंह

क्या आप भी 4, 13, 22 और 31 को जन्में हैं, तो आपका रूलिंग नंबर है 4 (Numerology No 4: Personality, Love Life And Characteristics)

जिन लोगों का जन्म 4, 13, 22 और 31 और होता है, उनका मूलाकं 4 ( Numerology number 4 ) होता है. जिस तरह स्क्वेयर की चारों भुजाएं समान होती हैं और उसी तरह अंक 4 वाले भी हर तरह से समान, सुलझे हुए व व्यवस्थित व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं. आइए नंबर 4 से जुड़े लोगों के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

 

स्वभावः इस अंक वाले व्यक्ति कर्मठ व उत्साही होते हैं. ये अपने काम के प्रति बेहद सजग रहते हैं. इनसे कोई भी चीज़ छूटती नहीं है, इसलिए ये अपने काम में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं. ये बहुत व्यवहारिक होते हैं और कल्पना की उड़ान नहीं भरते. व्यवहारिकता के घरातल पर रहकर ही सभी फैसले लेते हैं. ये अपनी उम्र से ज़्यादा समझदार होते हैं. कभी भी बड़ी-बड़ी बातें नहीं बघारते हैं. ये गजब से मेहनती होते हैं. अगर वे किसी काम पर भिड़ जाएं तो उससे करके ही छोड़ते हैं. ये ईमानदार व विश्‍वासपात्र होते हैं और अपने सभी कामों को पूर्वनिर्धारित व पूर्वनियोजित तरी़के से करते हैं.

करियरः इस नंबरवाले व्यक्ति अच्छे प्लानर होते हैं. योजना बनाना व उसे सही तरह से कार्यान्वित करना इनकी प्रमुख विशेषता है. ये जिस काम को भी मन लगाकर करते हैं, उसमें सफलता प्राप्त करते हैं, क्योंकि ये अपने काम को पूरी ईमानदारी व लगन से करते हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि अपनी सफलता का श्रेय ये अपनी मेहनत को न देकर भाग्य को देते हैं. ये अच्छे स्टेनोग्राफर, लैक्चरर, अकाउंटेंट व मैनेजर बन सकते हैं.

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सकारात्मक पक्ष
ये योजना बनाने व चीज़ों को ऑर्गनाइज़ करने में निपुण होते हैं. ये जिम्मेदारी, भरोसेमंद और व्यवहारिक होते हैं. ये धार्मिक होते हैं. ये अपने रिश्ते के प्रति बेहद ईमानदार होते हैं और जल्दी-जल्दी पार्टनर नहीं बदलते. इन्हें स्थिरता पसंद है. इसलिए जो लोग रिश्ते में स्थिरता चाहते हैं, वो नंबर 4 की ओर आर्कषित होते हैं. इन्हें कोई भी काम में जल्दीबाज़ी पसंद नहीं आती.

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नकारात्मक पक्ष
ये अकड़ू, जिद्दी व संकीर्ण विचारधारा वाले होते हैं. ये अपनी भवानाओं को व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए लोग इन्हें ठंडा समझते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. ये कहने से ज़्यादा करने में विश्‍वास रखते हैं. यानि अगर आपका पार्टनर का मूलांक 4 है तो वो आपके लिए कविता लिखने के बजाय चॉकलेट या फूल देना ज़्यादा पसंद करेगा. कुला मिलाकर ये थोड़े बोरिंग होते हैं और सामाजिक नहीं होते.
अभिभावक के रूप में 4 नंबर वाले अपने बच्चों को संस्कार व विश्‍वास का पाठ पढ़ाकर बड़ा करते हैं. ये घर को साफ़-सुथरा व व्यवस्थित रखना पसंद करते हैं.

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पसंदः इन्हें खाने, घूमने, म्यूज़िक व डांस का शौक़ होता है.

लकी स्टोनः गोमेद
लकी दिशाः पूर्व
लकी डेट्स- 1, 10, 19. जिन अंक का जोड़ 1 या 5 होता है, वे उनके लिए भाग्यशाली होता है.
लकी डेज़ः रविवार व गुरुवार
अनलकी डेट्स- 8, 17, 26, 28.
लकी कलर- ब्लू, येलो व गोल्ड
अनलकी कलर- ब्लैक, कॉफी ब्राउन व सभी गाढ़े रंग
लकी सिग्नेचरः आपका सिग्नेचर 4 सेटिंमीटर से कम छोटा होना चाहिए.
लकी नंबर्सः 5, 7, 8.
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सावधानः मूलांक 4 के पुरुष और मूलांक 4 की महिला से शादी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों ही डॉमिनेटिंग स्वभाव के होते हैं. ऐसे में झगड़े की आशंका बढ़ जाती है.

फेमस पर्सनैलिटीः चेतन भगत, किशोर कुमार, श्रीदेवी, तब्बू, सनी लियोनी, कोंकणा सेन शर्मा, अरबाज़ ख़ान, इमरान ख़ान, परिणीती चोपड़ा, जयाप्रदा, महिमा चौधरी, उर्मिला मातोंडकर, शशि कपूर.

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बेहतर करियर के लिए समझदारी से चुनें लाइफ पार्टनर (Choose Your Spouse Wisely For Better Career)

Spouse Wisely For Better Career

ज़िंदगी इत्तेफ़ाक नहीं है… हमारे फैसले, हमारी राय, हमारी सोच और हमारे निर्णय हमारी ज़िंदगी को दिशा देते हैं. हो सकता है कुछ चीज़ें हमारे मन के हिसाब से न हों, लेकिन सवाल यह है कि हमने कितना प्रयास किया? अक्सर शादी के निर्णय में हम और ख़ासतौर से लड़कियां अपनी सारी सोच और तमाम ख़्वाहिशों को ताक पर रख देती हैं, जबकि यही वो व़क्त होता है, जब हमें सबसे ज़्यादा सोच-समझकर फैसला लेने की ज़रूरत होती है, क्योंकि एक ज़िम्मेदार व समझदार पति आपकी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकता है, जबकि एक ग़लत निर्णय आपको उम्रभर का पछतावा भी दे सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या और किस तरह से सिलेक्ट करें आप अपना लाइफ पार्टनर, ताकि आपको परिवार व शादी के बाद अपने अच्छे-ख़ासे सफल करियर को यूं ही अलविदा न कहना पड़े.

क्या करें?

  • सबसे पहले आपको ख़ुद यह सोचना होगा कि आप क्या करना चाहती हैं? श्र अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
  • डबल माइंड में न रहें.श्र आख़िर यह आपकी ज़िंदगी है, तो आपको ही यह निर्णय लेना होगा कि आपको क्या करना है.
  • अक्सर लड़कियां या तो ख़ुद यह सोच लेती हैं या फिर उनके परिवार की तरफ़ से उनको यह समझा दिया जाता है कि शादी के बाद देखा जाएगा, फ़िलहाल तो शादी हो जाए, यह ज़रूरी है.
  • ऐसे में लड़कियों पर भी दबाव होता है कि वो अपने होनेवाले पति से साफ़-साफ़ बात नहीं कर पातीं, क्योंकि उन्हें ससुरालपक्ष की नाराज़गी का डर रहता है.
  • अगर आप करियर ओरिएंटेड हैं और शादी के बाद भी करियर छोड़ना नहीं चाहतीं, तो सबसे बेहतर है कि अपने होनेवाले पति से इस बारे में खुलकर बात करें.
  • इससे आपको उनकी सोच व राय का भी अंदाज़ा हो जाएगा.श्र आपके लिए निर्णय लेना भी आसान हो जाएगा कि अब आपको किस चीज़ को प्राथमिकता देनी है.
  • आपकी राय भी महत्वपूर्ण है, आपका करियर भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना आपके पति का, इसलिए आपको अपनी बात बिना किसी संकोच के कहने की हिम्मत जुटानी ही होगी.

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क्या-क्या पूछें होनेवाले पार्टनर से?

  • आपके करियर को कितना महत्व देते हैं?
  • शादी के बाद आपके करियर को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ़ से क्या मदद होगी?
  • क्या घरेलू ज़िम्मेदारियों में आपका हाथ बंटाएंगे?श्र घर के कामों में आपकी कितनी मदद करेंगे?
  • महिलाओं के प्रति और ख़ासतौर से कामकाजी महिलाओं के प्रति उनकी क्या राय है?
  • फैमिली बढ़ने के बाद भी क्या वो आपके करियर को उतना ही महत्वपूर्ण समझेंगे?
  • परिवार के लोग यदि नौकरी छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वो आपको किस तरह से और किस हद तक सपोर्ट करेंगे?
  • बच्चे की ज़िम्मेदारी में किस तरह से आपको सपोर्ट करेंगे… आदि… इत्यादि… ये तमाम सवाल आपको बेझिझक पूछने होंगे, ताकि आगे चलकर आपको अपने करियर को लेकर किसी तरह का समझौता न करना पड़े.
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कितना कॉम्प्रोमाइज़ करें, कितना नहीं?

  • बातचीत के बाद आपको स्वयं यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपका होनेवाला पार्टनर आपकी बातों से कितना सहमत है.
  • आपको यह भी पता लग जाएगा कि शादी के बाद आपकी क्या चुनौतियां होंगी.
  • आपको कितना कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ेगा और आपकी कितनी बातों को समर्थन दिया जाएगा.
  • इसी के अनुसार आप अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं. आप प्लानिंग कर सकती हैं कि आपको कितना बदलना है और किस तरह से बदलना है, ताकि  आपको करियर से भी समझौता न करना पड़े और परिवार को भी व़क्त दे सकें.

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • सर्वे बताते हैं कि 48% महिलाएं अपने रियर को बीच में ही छोड़ देती हैं, ताकि वो अपने परिवार को समय दे सकें.
  • यदि ये महिलाएं काम करती रहें, तो भारत का जीडीपी 2% तक ऊपर जा सकता है.
  • जबकि पूरे एशिया की बात करें, तो 21% महिलाएं अपने करियर को बीच में छोड़ देती हैं.
  • इसी तरह से 43% उच्च शिक्षित महिलाएं बच्चों की परवरिश की ख़ातिर कुछ समय के लिए अपना करियर छोड़ देती हैं.
  • यही नहीं, विदेशों में भी यह आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है.

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कारण क्या है?

  • दरअसल, महिलाएं परिवार के प्रति अधिक ज़िम्मेदारी महसूस करती हैं.
  • न स़िर्फ ज़िम्मेदारी, विशेषज्ञ बताते हैं कि उनमें अपराधबोध की भावना भी पुरुषों के मुक़ाबले अधिक होती है.
  • उन्हें लगता है कि बच्चों और परिवार को उनकी अधिक ज़रूरत है.
  • परिवार को समय न दे पाने की चिंता व गिल्ट उन्हें अधिक होता है.
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बदलाव ही रास्ता है…

  • बदलाव हो रहा है. लड़कियों की सोच भी बदल रही है और वो भी अब अपने करियर को गंभीरता से लेने लगी हैं.
  • लेकिन ज़रूरत है समाज व लड़कियों के माइंडसेट को बदलने की, जहां उन्हें यह साफ़तौर पर निर्णय लेना होगा कि उन्हें परिवार और करियर दोनों ही चाहिए.
  • इस सकारात्मक सोच के साथ यदि वो आगे बढ़ेंगी, तो यक़ीनन दोनों के बीच सामंजस्य बेहतर तरी़के से बैठा पाएंगी.
  • अपने हक़ के लिए और सही बात के लिए उन्हें बोलना होगा और बोलने का सबसे सही व़क्त शादी से पहले ही है.
  • शादी से पहले ही उन्हें अपनी राय साफ़ करनी होगी और उन्हें ख़ुद भी यह तय करना होगा कि वो क्या चाहती हैं.
  • आख़िर उन्हें भी अपनी ज़िंदगी व अपने करियर से जुड़े फैसले लेने का पूरा-पूरा हक़ है, तो स़िर्फ त्याग या बलिदान जैसे शब्दों का बोझ वो अकेले ही क्यों ढोएं.
  • बेहतर होगा अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर को जांचें, परखें और समझदारी से काम लें, क्योंकि एक समझदार लाइफ पार्टनर के साथ ही बेहतर ज़िंदगी और बेहतर करियर की संभावनाएं मौजूद होंगी.

 

– विजयलक्ष्मी

क्या आप भी 5, 14 और 23 को जन्मे हैं, तो आपका रूलिंग नंबर है- 5 (Numerology No 5: Personality And Characteristics)

न्यूमरोलॉजी का रूलिंग नंबर 5 ऐडवेंचर का नंबर माना जाता है. जिन लोगों का जन्म 5, 14 और 23 तारीख़ को होता है, उन्हें नंबर 5 रूल करता है, जिसे हम उनका रूलिंग नंबर या बर्थ नंबर कह सकते हैं. इसका सीधा-सा कैल्कुलेशन है- आपकी डेट ऑफ बर्थ यानी जन्म तारीख़ के अंकों को जोड़ लें और उससे जो नंबर आता है, वो आपका रूलिंग नंबर कहलाता है. आज हम बात करेंगे नंबर 5 यानी पांच नंबरवालों की. यहां हम उनके स्वभाव, करियर, लव लाइव और पर्सनैलिटी के बारे में जानने की कोशिश करेंगे.

पर्सनालिटी

नेचुरल डिटेक्टिव्स

नंबर 5 वाले नेचुरल डिटेक्टिव्स होते हैं. ये आज़ादी पसंद लोग होते हैं. इनकी ज़िंदगी काफ़ी ऐडवेंचरस होती है. ये चीज़ों को बड़े आसानी से अपना लेते हैं. सफलता की ऊंचाइयों को छूना इनका शौक़ होता है. ये हर फंक्शन की जान होते हैं.

बदलाव पसंद

ये उत्साहित और सकारात्मक किस्म के लोग होते हैं. इनका ज़िंदगी जीने का सकारात्मक रवैया दूसरों को काफ़ी पसंद आता है और यही वजह है कि ये सभी के चहेते होते हैं. ये बदलाव पसंद होते हैं, इसलिए इन्हें रूटीन लाइफ पसंद नहीं, ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना ही इनका मोटो होता है.

फैशनेबल

ये काफ़ी फैशनेबल होते हैं और इन्हें ब्राइट कलर्स बहुत पसंद होते हैं.

सीखना पसंद है

इन्हें हर व़क्त कुछ न कुछ सीखना पसंद है और जिस चीज़ में इन्हें इंट्रेस्ट होता है, उस विषय के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना और पढ़ना पसंद करते हैं.

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स्वभाव

फ्रेंडली व फन लविंग होते हैं, जिससे बहुत जल्दी लोगों से घुलमिल जाते हैं. इनके दोस्तों की फेहरिस्त काफ़ी बड़ी होती है. दोस्ती को दिल से निभाते हैं, पर ऐसे लोग बिल्कुल नापसंद हैं, जो लोग इन्हें फॉर ग्रांटेड लेते हैं. आज़ादी पसंद लोग होते हैं और किसी पर निर्भर रहना इन्हें पसंद नहीं.

करियर

नौकरी, बिज़नेस इनकी ज़िंदगी में हमेशा परिवार के बाद आते हैं. करियर इनके लिए ज़िंदगी जीने का महज़ ज़रिया है. हांलाकि अपने काम में काफ़ी ज़िम्मेदार होते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियों को बख़ूबी निभाते हैं. नंबर 5 वाले अपनी हॉबी और पैशन को ही करियर के तौर पर चुनते हैं, ताकि उसे एंजॉय कर सकें. सेल्स, ऐडवर्टाइज़िंग, ट्रैवेल और आउटडोर फिल्ड में जुड़ना पसंद करते हैं.

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लव लाइफ

ये काफ़ी रोमांटिक और पैशनेट लवर्स माने जाते हैं. सेक्स में अपने पार्टनर को ऐडवेंचरस मूव्स से सरप्राइज़ करना इन्हें बहुत पसंद है. ये कमिटेड पार्टनर्स होते हैं. अपने पार्टनर की भावनाओं का बख़ूबी ख़्याल रखते हैं.

किस नंबरवाले होंगे आपके बेस्ट लाइफ पार्टनर- 1, 3, 5, 6, 7.
लकी डे-  बुधवार और शुक्रवार.
लकी नंबर– 5
लकी कलर- लाइट ग्रे, व्हाइट, ऑरेंज, लाइट ग्रीन.
लकी स्टोन- एमराल्ड और डायमंड.

सेलिब्रिटीज़- आमिर ख़ान, दीपिका पादुकोण, काजोल, आयुष्मान खुराना, राज बब्बर, सनी देओल, तनुजा और हिमेश रेशमिया.

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जानें क्या-क्या लकी है जुलाई में जन्मे लोगों के लिए? (July Born: How Lucky You Are?)

 

anuska1अगर आपका जन्म भी जुलाई महिने में हुआ तो जानिए अपनी ख़ूबियों के बारे में विस्तार से. 

नेचर

इस माह में जन्मे लोग मेहनती होने के साथ-साथ टैलेंडेट भी होते हैैं. लाइफ के प्रति पॉज़िटिव एटीट्यूट रखते हैं, इसलिए छोटी-छोटी बातों में ख़ुश रहते हैं. स्वभाव से बहुत मेहनती होते हैं, लेकिन इनसे कोई भी काम ज़ोर-ज़बर्दस्ती से नहीं करा सकते. नए-नए दोस्त बनाना, फिल्में देखना और घूमना-फिरना इन्हें बहुत अच्छा लगता है.

रोमांस

केयरिंग नेचर होने के कारण बेस्ट लवर होते हैं, पर अपनी फीलिंग्स को शेयर करने में संकोच करते हैं. पार्टनर के प्रति बहुत इमोशनल और सेंसिटिव होते हैं, जिसकी वजह से इनकी मैरिड और सेक्सुअल लाइफ ख़ुशहाल होती है.

कैरियर

इस माह में जन्मे लोग इंटेलीजेंट और टैलेंटेड होते हैं. अपनी इच्छानुसार जिस भी कैरियर का चुनाव करते हैं, उसमें सफ़ल होते हैं. इनमें परखने की अच्छी क्षमता होती है, इसलिए शेयर मार्केट में अपना कैरियर बना सकते हैं. स्पोर्ट्स में भी इनकी बहुत रुचि होती है, चाहें तो अच्छे खिलाड़ी भी बन सकते हैं. इनमें अच्छा बिज़नेसमैन बनने के गुण होते हैं. इनमें लोकप्रिय ऐक्टर/ऐक्टर्स बनने की संभावना भी होती है.

फाइनेंस

जुलाई माह में जन्मे लोगों के लिए फाइनेंशियल सिक्युरिटी बहुत महत्वपूर्ण होती है. जितनी कुशलता से पैसे कमाते हैं, उतनी ही समझदारी के उसे इन्वेस्ट भी करते हैं. हालांकि ख़र्च करने से नहीं डरते, चाहे जेब में पैसे हों या न हों.

हेल्थ

जुलाई माह में जन्मे लोग अपनी हेल्थ के प्रति चिंतित रहते हैं, इसलिए अच्छी हेल्थ के लिए वेजीटेरियन फूड खाते हैं. इमोशनल होने के कारण इनका मूड स्विंग होता रहता है और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.

पॉप्युलैरिटी

इस माह में जन्मे लोग बेहद लोकप्रिय होते हैं, जैस- सौरव गांगुली, महेंद्र सिंह धोनी, अजीम प्रेमजी, सोनू निगम, रणवीर सिंह, प्रियंका चोपड़ा आदि इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.

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Career In Event Management

Career In Event Management

इवेंट चाहे जो हो, लेकिन ग्लैमर, आकर्षण और स्टाइल आज हर इवेंट की पहली मांग है. घर का कोई फंक्शन हो या ऑफिस की पार्टी, शादी का मौसम हो या गेट-टुगेदर, हर इवेंट को सही तरह से ऑर्गेनाइज़ करने का काम करता है इवेंट मैनेजर. आपको भी अगर इस तरह के प्रोग्राम को हैंडल करना अच्छा लगता है, तो आप भी बनाइए अपने इस शौक़ को अपना करियर और बनिए इवेंट मैनेजर. कैसे? आइए जानते हैं.

क्या करते हैं इवेंट मैनेजर?
इवेंट मैनेजर प्रोफेशनल, पर्सनल और फोकस्ड इवेंट्स ओर्गेनाइज़ करते हैं. जिसमें मैरिज सेलिब्रेशन, थीम पार्टीज़, कॉरपोरेट मिटिंग्स, सेमिनार, एग्ज़ीबिशन, फैशन और सेलिब्रिटी शो, म्यूजिकल कॉन्सर्ट, प्रॉडक्ट् लॉन्चिंग, फिल्म अवार्ड फंक्शन आदि शामिल हैं.

शैक्षणिक योग्यताएं
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बारहवीं पास होना बहुत ज़रूरी है. बारहवीं के बाद आप इस क्षेत्र में आगे की पढ़ाई कर सकते हैं.

क्या हैं कोर्सेस?
– डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट,
– पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट,
– पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट एंड पब्लिक रिलेशन्स.

व्यक्तिगत विशेषताएं
अच्छी कल्पना शक्ति, बेहतर बजटिंग, नॉलेज, ़ज़्यादा समय तक काम करने की क्षमता, परफेक्ट प्लानिंग, गुड कम्युनिकेशन स्किल, प्रेजेंटेशन स्किल, लीडरशीप क्वलिटी, गुड पब्लिक रिलेशनशीप, मार्केटिंग और बिजनेस क्षेत्र की कुशल जानकारी होना बहुत ज़रूरी है.

प्रमुख संस्थान
* अमेठी इंस्टिट्यूट ऑफ़ इवेंट मैनेजमेंट, न्यू
दिल्ली.
* इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इवेंट मैनेजमेंट, मुंबई.
* इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, न्यू दिल्ली.
* इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर इंवेट मैनेजमेंट, न्यू
दिल्ली.
* नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इवेंट मैनेजमेंट, मुंबई.
* एकैडमी ऑफ एनिमेशन आर्ट एंड
टेक्नोलॉजी, कोलकाता.
* इंस्टिट्यूट ऑफ़ एज्युकेशनल लीडरशीप,
उत्तरांचल, देहरादून.
* अजमेर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज़,
बरेली.
* एकैडमी ऑफ़ ब्रॉडकास्टिंग, चंडीगढ़.

जॉब प्रॉसपेक्ट्स
इस प्रोफेशन में परफेक्शन की डिमांड होती है.
* इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में आप एक इवेंट मैनेजर या कंसल्टेंट के तौर पर काम कर सकते हैं.
* टेलीविजन शोज़ और एड जगत से जुड़कर उनके प्रॉडक्ट के लिए काम कर सकते हैं.
* अपने अनुभव के मुताबिक आप अपनी ख़ुद की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी भी शुरू कर सकते हैं. जिसके लिए जरूरी है.
– सेलिंग स्किल यानी नए क्लाइंट्स को हैंडल करने की क्षमता.
– इवेंट डिज़ाइनिंग की क्रिएटिव स्किल.
– एकाउंटिंग नॉलेज.
– लॉजिस्टिक कंट्रोल करने की कला.
– रिस्क मैनेजमेंट स्किल.

इस क्षेत्र का भविष्य
दिन-ब-दिन हर क्षेत्र और इवेंट से जुड़ता ग्लैमर भविष्य में इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की मांग को बड़ाएंगे.

सैलरी
इस क्षेत्र में रेग्युलर मंथली सैलरी के अलावा प्रति इवेंट के हिसाब से भी सैलरी दी जाती है. मैनेजमेंट कोर्स कंपलीट करने के बाद फ्रेशर्स की इंकम 500 से 1,000 रुपए प्रतिदिन होती है. अपने अनुभव और क्रिएटिविटी से आप 8,000 से 10,000 रुपए प्रति इवेंट कमा सकते हैं. इस क्षेत्र में ़ज़्यादा अनुभव से 50,000 से 1 लाख रुपए प्रति इवेंट की इंकम भी होती है.

बेबी सिटिंग: प्रेग्नेंसी के बाद करियर के लिए चुनें ये (Best Job Option For You )

बेबी सिटिंग

बेबी सिटिंग

अधिकतर महिलाओं की ज़िंदगी में एक समय ऐसा आता है जब वो अपने बच्चे की ख़ातिर जॉब छोड़ देती हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि वो पोस्ट प्रेग्नेंसी नए सिरे से जॉब की शुरुआत नहीं कर पातीं.इस तरह की मनोदशा महिलाओं को आगे जॉब करने से रोकती है. आपके साथ भी अगर कुछ इस तरह की स्थिति है, तो आप अपने अनुसार एक बार फिर से जॉब की शुरुआत कर सकती हैं. ज़रूरी नहीं कि किसी ऑफिस में जाकर आठ घंटे की जॉब करें. घर से भी आप अपने करियर की नई पारी की शुरुआत कर सकती हैं. आप अगर बहुत पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन आज के ज़माने में अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं, तो बेबी सिटिंग आपके लिए बेहतर विकल्प है. बेबी सिटिंग के ज़रिए आप पैसे के साथ बच्चों का भविष्य भी बना सकती हैं. इस तरह से आपका पूरा दिन भी निकल जाएगा और दूसरे पैरेंट्स की मदद भी हो जाएगी. कैसे करें शुरुआत? आइए, जानते हैं.

कैसे करें शुरुआत?
– बेबी सिटिंग शुरू करने के लिए सबसे पहले अपने घर का एक ऐसा कमरा चुनें जो पूरी तरह से सुरक्षित हो.
– घर के बाहर एक छोटा-सा बोर्ड लगाएं, जिससे लोगों को आपके बेबी सिटिंग के बारे में पता चले.
– कुछ ख़ास चीज़ें जैसे, बच्चों के खेलने के लिए खिलौने, सॉफ्ट ट्वॉयज़ आदि रखें.
– खिलौनों के साथ बच्चों को पढ़ाने के लिए जैसे- राइम्स बुक, स्टोरी बुक आदि रखें.
– बच्चों को खाने में पूरी तरह से हेल्दी खाने का मेनू रखें, जिससे बच्चों के पैरेंट्स आप पर भरोसा कर सकें.
– अपने पैरेंट्स से दूर बच्चे पूरा दिन आपके सात होते हैं. ऐसे में उनके मूड का भी ख़्याल आपको रखना होगा. कुछ समय घर के बाहर लॉन में उनके साथ खेलें ताकि उनका फिज़िकल एक्सरसाइज़ भी हो जाए और समय भी पास हो जाए.
– अपना एक अच्छा सा टाइम-टेबल बनाकर बच्चों के पैरेंट्स को दें ताकि उन्हें पता हो कि उनके बच्चों का आप किस तरह ख़्याल रखेंगी.
– शुरुआत में ही बहुत ज़्यादा फीस न रखें.
– बेबी सिटिंग के दौरान बच्चों को यूं ही अकेला छोड़ अपने बच्चों में न लग जाएं. इससे वो बच्चे अकेलापन महसूस करेंगे.
– घर के काम को उससे पहले निपटा लें ताकि थोड़ा समय उन बच्चों को दे पाएं.

बेबी सिटिंग

बचें इन चीज़ों से
– अचानक जॉब छोड़ने के बाद घर वालों पर अपनी फ्रस्टेशन निकालने की कोशिश न करें.
– ज़िंदगी को दोबारा जीने की कोशिश करें.
– सकारात्मक सोचें और खाली समय में काम करना शुरु करें.
– घर के कामों की एक लिस्ट बनाएं. उसके बाद अपना पूरा समय ख़ुद पर दें.
– सपनों को भूलें न. अपने लक्ष्य को हमेशा याद रखें. फुल टाइम जॉब न सही, लेकिन पार्ट टाइम जॉब का ऑप्शन ज़रूर रखें.
एक रिसर्च के अनुसार 35 पार करने के बाद
अधिकतर महिलाएं जॉब नहीं करना चाहतीं. इसके लिए कई बार उनकी कंपनी तो कई बार उनकी पर्सनल लाइफ ज़िम्मेदार होती है.

अधिक  करियर आर्टिकल के लिए यहां क्लिक करें: CAREER ARTICLES 

दवाओं में है इंटरेस्ट तो करें ये कोर्स (Career In Pharma Sector)

Career In Pharma Sector

Career In Pharma Sector

अगर आपको दवाएं पसंद हैं यानी आपको दवाओं के बारे में जानकारी रखना अच्छा लगता है और आप नई-नई दवाओं के बारे में जानते रहते हैं, तो करियर का बेहतरीन स्कोप है आपके लिए. जी हां, फार्मासूटिकल्स में आप करियर बनाकर अच्छा कमा सकते हैं. यहां नई-नई दवाइयों की खोज व विकास संबंधी कार्य किया जा सकता है. तो अगर आपको ज़रा भी इंटरेस्ट हो और झट से पैसा कमाने की ललक हो, तो इस क्षेत्र में करियर बनाएं.

शैक्षणिक योग्यता
बारहवीं के बाद आप इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं.

क्या हैं कोर्सेस?
डिप्लोमा इन फार्मेसी (डीफार्मा)
यह दो साल का डिप्लोमा कोर्स है. बारहवीं के बाद आप इसे कर सकते हैं.

♦ बैचलर ऑफ फार्मेसी (बीफार्मा)
यह चार साल का अंडरग्रैजुएट कोर्स है. बारहवीं के बाद चार साल के इस कोर्स को आप करके इसमें करियर बना सकते हैं.

♦ बैचलर ऑफ फिजियोथेरपी (बीपीटी)
यह चार साल ग्रैजुएशन कोर्स है. इसके साथ ही छह माह की ज़रूरी क्लिनिकल इंटर्नशिप भी करनी होती है.

♦ मास्टर ऑफ फार्मेसी (एमफार्मा)
यह दो साल का पोस्टग्रैजुएट कोर्स है. इसे बीफार्मा के बाद किया जाता है.

पर्सनल इंटरेस्ट
अब ज़ामाना गया जब आप कुछ गिने-चुने सेक्टर में करियर बनाते थे. आज स्कोप बहुत है. आप चाहें, तो भरपूर पैसा कमा सकते हैं. इसके लिए आपका पर्सनल इंटरेस्ट होना बहुत ज़रूरी है. फर्मेसी सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आपको लाइफ साइंस व दवाइयों के प्रति जानकारी और नई जानकारी लेने में दिलचस्पी हो. इससे जुड़े नए-नए रिसर्च और जानकारी के बारे में आपको पढ़ना और जानना अच्छा लगता हो. इन सबके अलावा बातचीत करने का बेहतर और आसान ज़रिया आपको आना चाहिए.

रोज़गार के अवसर
इस कोर्स को करने के बाद आपके सामने बहुत स्कोप रहता है. हॉस्पिटल फार्मेसी, क्लिनिकल फार्मेसी, टेक्निकल फार्मेसी, रिसर्च एजेंसीज, मेडिकल डिस्पेंसिंग स्टोर, सेल्स ऐंड मार्केटिंग डिपार्टमेंट, एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स, हेल्थ सेंटर्स, मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव, क्लिनिकल रिसर्चर, मार्किट रिसर्च ऐनालिस्ट, मेडिकल राइटर, ऐनालिटिकल केमिस्ट, फार्मासिस्ट, ऑन्कॉलजिस्ट, रेग्युलेटरी मैनेजर के तौर पर आप कर सकते हैं और खूब पैसा कमा सकते हैं.

कहीं काम के बोझ तले दब न जाए आपका स्वास्थ्य (Work Pressure Is Spoiling Your Health)

Work Pressure

घर हो या ऑफ़िस हर जगह महिलाएं पुरुषों को टक्कर देती नज़र आती हैं. चाहे काम की ज़िम्मेदारी का सवाल हो या फिर काम के पर्फेक्शन की उनके आगे पुरूष टिक भी नहीं पातें. पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली बदलते ज़माने की महिलाएं इस बीच ये भूल जाती हैं कि शारीरिक रूप से उनकी कुछ समस्याएं होती हैं, जिनका अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति बद से बत्तर होते देर नहीं लगेगी. बीपीओ में काम करने वाली पूजा 45 किलो से बढ़कर कब 65 किलो की हो गईं पता भी नहीं चला. काम में मशगूल पूजा की अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से मोटापे के साथ-साथ बीमारियों ने भी शरीर में अपनी जगह बना ली. ख़ुद को दूसरी पूजा बनने से रोकने के लिए ऑफ़िस में कैसे रखें ख़ुद का ख़्याल आइए जानते हैं. 

Work Pressure

सही खान-पान की आदत
* जब हो ऑफ़िस वर्क- अगर आप लगातार आठ घंटे आफ़िस की कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदती हैं तो, अपने खाने पर आपको विशेष ध्यान देना होगा.
– हर संभव प्रयास करें कि घर से नाश्ता करके ही ऑफ़िस के लिए निकलें. इससे ऑफ़िस में आपको बार-बार कुछ खाने का मन नहीं करेगा.
– किसी वजह से अगर नाश्ता नहीं हो पाया है, तो पैक करके ऑफ़िस में ला सकती हैं.
– लंच ब्रेक के दौरान बाहर से खाना मंगाने की बजाए घर से पैक किए हुए खाने को ही खाएं.
– ऑफ़िस में स्नैक्स खाने की आदत को जितना हो सके इंकार करें.
– खाना उतना ही खाएं जितनी भूख हो, उससे ज़्यादा खाना आपको नुकसान पहुंचा सकता है.

जब हो फ़ील्ड वर्क
वो ज़माना गया जब महिलाएं स़िर्फ ऑफ़िस में बैठकर ही काम करना पसंद करती थीं. आज स्थिति कुछ और ही है. बिना किसी हिचकिचाहट और रोक-टोक के महिलाएं किसी भी फ़ील्ड वर्क चाहे वो सेल्स हो मार्केटिंग हो, मीडिया हो हर जगह क़दम बढ़ा रही हैं. फील्ड वर्क मेें खाने पर विशेष ध्यान रखना होता है.
– बाहर जाने से पहले घर से नाश्ता ले जाना न भूलें.
– कुछ बनाने का समय नहीं है तो बैग में कुछ फल रखें.
– बाहर से समोसा, डोसा या फिर कुछ और खाने के बजाय जितना संभव हो जूस पीने की कोशिश करें.
– अपने नाश्ते और लंच को सही समय पर लेना न भूलें.

Work Pressure

नाइट शिफ़्ट से बिगड़ता स्वास्थ्य
काम करने के जूनून में क्या दिन क्या रात हर वक़्त बस काम ही काम. जब दुनिया सोती है, तो क्या आप ऑफ़िस के लिए निकलती हैं? अगर हां तो संभल जाइए क्यों कि एक नहीं दो नहीं बल्कि आपका शरीर कुछ ही दिनों में कई तरह की समस्याओं की गिरफ़्त में आ सकता है. नाइट शिफ़्ट में काम करने वाली महिलाओं को आय दिन किसी न किसी बीमारी का शिकार होना पड़ता है.
– नाइट शिफ़्ट में काम करने से शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ जाता है जिसकी वजह से बॉडी मेलाटॉनिन नामक हार्मोन को प्रोड्यूज़ करना बंद कर देती है.
– एक शोध से पता चलता है कि नाइट शिफ़्ट में काम करने वाली महिलाओं में कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. शोध में कहा गया है कि वो महिलाएं जो एक साल से लेकर 27 साल तक नाइट शिफ़्ट करती हैं उनमें ब्रेस्ट कैंसर के आसार 8 प्रतिशत बढ़ जाते हैं. वहीं 30 साल तक नाइट शिफ़्ट में काम करने वाली महिलाओं में इसका ख़तरा 36 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.
– नाइट शिफ़्ट में काम करने वाली महिलाओं में मासिक धर्म की समस्या बढ़ जाती है.
– लगातार नाइट शिफ़्ट करने से एक ओर जहां शरीर में कमज़ोरी बढ़ती है वहीं दूसरी ओर महिलाएं तनाव का भी शिकार होती हैं.
– कई महिलाएं नाइट शिफ़्ट के चक्कर में अनिद्रा की भी शिकार हो रही हैं.
– डॉक्टरों की मानें तो नाइट शिफ़्ट में काम करने से महिलाओं में प्रजनन की समस्या भी गंभीर रूप ले रही है.
– इन सब से अलग नाइट शिफ़्ट में काम करने से महिलाओं को सिगरेट और शराब का भी चस्का लग रहा है, जो उनके शरीर के लिए फ़ायदेमंद नहीं होता.

Work Pressure

कैसे रखें ख़ुद को नाइट शिफ़्ट के दौरान चुस्त-दुरुस्त?
प्रतियोगियों से भरी इस दुनिया में अगर आपको सबसे आगे निकलना है तो बिना किसी झिझक के किसी भी वक़्त काम के लिए तैयार रहना पड़ेगा. फिर चाहे वो जो भी शिफ़्ट हो, नाइट ही क्यों न हो. हंसते-हंसते कैसे करें नाइट शिफ़्ट में अपनी सेहत की देखभाल आइए जानते हैं.

व्यायाम
नाइट शिफ़्ट में काम करने से हमारा शरीर आलसी हो जाता है. शरीर में किसी तरह की ऊर्जा का श्राव नहीं होता, जिसकी वजह से हम बिल्कुल सुस्त हो जाते हैं. नाइट शिफ़्ट में काम के दौरान बार-बार नींद आना, काम में रूकावट का काम करता है. इसके लिए बहुत ज़रूरी है कि काम के बीच में ऑफ़िस में ही वॉकिंग और स्ट्रेचिंग जैसी एक्सरसाइज़ से आप ख़ुद की सेहत का बख़ूबी ख़्याल रख सकते हैं.

स्वास्थ्य वर्धक भोजन
नाइट शिफ़्ट के दौरान शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सही खान-पान बहुत ज़रूरी है. रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच कुछ न कुछ हल्की चीज़ों का सेवन करें. घर से निकलने के पहले रात का खाना खाकर ही निकलें. अपने साथ सलाद और फल रखें भूख लगने पर उनका सेवन करें.

लोगों के साथ घुल-मिलकर रहें
नाइट शिफ़्ट में काम करने से दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क न होने पर धीरे-धीरे इसकी आदत हो जाती है, जिसके कारण समय मिलने पर भी हम उनसे मिलने के बजाए घर में रहकर कुछ न कुछ खाते रहते हैं और टीवी के सामने बैठे रहते हैं. इससे हमारा शरीर मोटापे का शिकार हो जाता है उसके साथ ही कई बीमारियों का भी. इसलिए बेहतर होता है कि दोस्तों के साथ टाइम बिताएं, बाहर घूमने जाएं या फिर कोई हेल्थ क्लब ज्वॉइन करें.

नियमित चेकअप 
नाइट शिफ़्ट करने से दैनिक कार्यों में बदलाव आ जाते हैं जिसकी वजह से कई बार परेशानी होती है. इसलिए नियमित चेकप से आप किसी भयंकर बीमारी के प्रकोप से सुरक्षित रहेंगे.

स्पोर्ट्स लवर के लिए स्पोर्ट्स मैनेजमेंट है बेस्ट करियर विकल्प (Best Career Option For Sports’ lover)

स्पोर्ट्स मैनेजमेंट

स्पोर्ट्स मैनेजमेंट
खेल में दिलचस्पी रखने वालों के लिए स्पोर्ट्स मैनेजमेंट एक अच्छा करियर ऑप्शन है. इसके ज़रिए वे अपनी पसंद और शौक़ को प्रो़फेशन बना सकते हैं. आइए, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट से जुड़े क्षेत्रों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.

करियर ऑप्शन
प्लेयर (खिलाड़ी), फ़िज़िकल एज्युकेशन इंस्ट्रक्टर, कोच, स्पोर्ट्स मैनेजर, स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर, एम्पायर या रेफ़री, स्पोर्ट्स मेडिसिन (यदि आप मेडिकल फ़ील्ड से जुड़े हैं), स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट आदि स्पोर्ट्स मैनेजमेंट से जुड़े पद हैं. इसके अलावा कई निजी व सरकारी स्पोर्ट्स इंस्टिट्यूट भी कई तरह के स्पोर्ट्स स्पॉन्सर करते हैं. वहां भी स्पोर्ट्स टीचर, कोच आदि की ज़रूरत होती है. आप किसी स्पोर्ट्स क्लब में मैनेजर के रूप में भी काम कर सकते हैं.

शैक्षणिक योग्यता
ग्रेज्युएशन में कम से कम 40% मार्क्स होने ज़रूरी हैं. स्पोर्ट्स से जुड़ा कोई कोर्स करना भी ज़रूरी है, जैसे-बैचलर इन फ़िज़िकल एज्युकेशन आदि.

क्या सिखाया जाता है?
स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में सोशल और एथिकल रिलेवेन्स ऑफ़ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, स्पॉन्सरशिप, मार्केटिंग एंड मर्चन्डाइस ऑफ़ स्पोर्ट्स, इंटररिलेशनशिप बिटवीन फ़ायनांस एंड स्पोर्ट्स, कम्युनिकेशन विद इलेक्ट्रॉनिक एंड प्रिंट मीडिया, स्पोर्ट्स संबंधी क़ानून का ज्ञान, स्पोर्ट्स एथिक्स की जानकारी, स्पोर्ट्स ऑर्गनाइजेशन आदि बातों पर ज़ोर दिया जाता है.

स्पोर्ट्स मैनेजर का क्या काम होता है?
स्पोर्ट्स मैनेजर को स्पोर्ट्स एजेंट भी कहते हैं. प्लेयर्स के शेड्यूल, करियर प्रोग्रेशन, बिज़नेस प्रमोशन, मीडिया एंड पब्लिक रिलेशन संबंधी काम स्पोर्ट्स मैनेजर के होते हैं. साथ ही बजटिंग, फ़ायनांस से जुड़ी ज़िम्मेदारी भी उसी के कंधों पर होती है.

स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर का काम
सुपरवाइज़िंग के साथ-साथ स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी व इवेंट की प्लानिंग और उसे मैनेज भी करता है, जैसे- नेशनल व डोमेस्टिक क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, गोल्फ़ टूर्नामेंट आदि.

ज़रूरी योग्यताएं
कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए.
क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल आदि में से किसी एक खेल के प्रति पैशनेट होना ज़रूरी है.
खेल के प्रति ईमानदार व उत्सुक होना चाहिए.
संबंधित खेल के रूल्स, रेग्युलेशन और क़ानून की पूरी जानकारी होनी ज़रूरी है.
लीडरशिप या कैप्टनशिप क्वालिटी होनी चाहिए.
शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना भी ज़रूरी है.

प्रमुख विश्वविद्यालय व संस्थान
अलगप्पा यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु- (पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स मैनेजमेंट)
इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़िज़िकल एज्युकेशन एंड स्पोर्ट्स साइन्स, नई दिल्ली (पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स मैनेजमेंट)
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, अहमदाबाद (मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम इन प्रो़फेशनल मैनेजमेंट एंड स्पोर्ट्स ऑर्गनाइज़ेशन)

फैशन कम्युनिकेशन में बनाएं करियर (Career In Fashion Communication)

Career In Fashion Communication

Career In Fashion Communication
इन दिनों फैशन वर्ल्ड में फॉरेन और डोमेस्टिक ब्रांड की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. इसलिए कंपनियां लोगों को लुभाने के लिए यूनीक ब्रांड आइडेंटिटीज़ डेवलप करती हैं और इसके लिए वो फैशन कम्युनिकेशन प्रो़फेशनल्स को अप्वॉइंट करते हैं. फैशन कम्युनिकेशन उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है जो फैशन, बिज़नेस, रिटेल मर्चेडाइज़िंग, कम्युनिकेशन फील्ड जर्नलिज़्म, टेलीविज़न, इवेंट मैनेजमेंट आदि में करियर बनाना चाहते हैं.

शैक्षणिक योग्यता
12वीं के बाद आप इस फील्ड में अपनी क़िस्मत आज़मा सकते हैं.

कोर्स के तहत
फैशन कम्युनिकेशन का कोर्स करने वाले स्टूडेंट को बेसिक ऑफ़ डिज़ाइन, टेक्निकल ड्रॉइंग, फैशन स्टडीज़, प्रिंसीपल ऑफ़ मार्केटिंग, फैशन स्टाइल, फैशन जर्नलिज़्म और पोर्टफ़ोलियो डेवलपमेंट के बारे में बताया जाता है.

प्रमुख संस्थान
* नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी, दिल्ली.
* सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट, नोएडा.

Career In Fashion Communication

रोजगार की संभावनाएं
* विदेशी और घरेलू कंपनियां बड़े पैमाने पर क़ाबिल और स्मार्ट ़फैशन कम्युनिकेटर को रखती हैं.
* किसी भी अच्छी कंपनी में आसानी से जॉब मिल सकती है.
* रिटेल मर्चेडाइज़िंग, कम्युनिकेशन फील्ड जर्नलिज़्म, टेलीविज़न और इवेंट मैनेजमेंट में आसानी से ट्राई कर सकते हैं.

पेट ग्रूमिंग (Career In Pet Grooming)

Career In Pet Grooming

Career In Pet Grooming
अगर आपको जानवरों से प्यार है और उन्हें सजाने-संवारने में भी दिलचस्पी है, तो पेट ग्रूमिंग आपके लिए एक अच्छा करियर ऑप्शन है. आप चाहें तो इसकी शुरुआत अपने पालतू जानवर से ही कर सकते हैं, लेकिन प्रो़फेशनल पेट ग्रूमर बनने के लिए निर्धारित कोर्स व ट्रेनिंग पूरी करनी ज़रूरी है.

शैक्षणिक योग्यता
पेट ग्रूमर बनने के लिए विशेष शैक्षणिक योग्यता की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़ने के लिए पशु-पक्षियों के प्रति प्यार व अपनेपन की भावना होनी ज़रूरी है.

कोर्स के तहत क्या सिखाया जाता है?
ग्रूमिंग कोर्स में कुत्ते, बिल्ली, खरगोश जैसे पालतू जानवरों की ग्रूमिंग व स्टाइलिंग के बारे में ट्रेनिंग दी जाती है. साथ ही उनके हेयर ड्रेसिंग आर्ट के बारे में भी बताया जाता है.

Career In Pet Grooming

रोजगार की संभावनाएं
आप चाहें तो किसी अच्छे पेट ग्रूमिंग इंस्टिट्यूट में नौकरी कर सकते हैं. पेट ग्रूमिंग का बिज़नेस भी कर सकते हैं. इस पर तक़रीबन 4-5 लाख रुपए का ख़र्च (ड्रेनिंग, शॉप रेंट, टूल्स, इक्विपमेंट आदि लेकर) आएगा, लेकिन एक बार बिज़नेस सेटल हो जाने पर आप आराम से प्रति माह 50,000 तक रुपए कमा सकते हैं.
आजकल पेट ग्रूमिंग के लिए कई कैम्पेन भी चलाए जाते हैं जिनमें पेट ग्रूमिंग, केयरिंग व मेडिकल केयर के लिए ट्रेन्ड पेट ग्रूमर की ज़रूरत होती है. आप चाहें तो वहां भी काम कर सकते हैं.

प्रमुख विश्वविद्यालय एवं संस्थान
स्कूपी स्क्रब, दिल्ली
फ़िजी विज़ी, बैंगलोर