Celeberity family

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फिल्मी सितारों की पारिवारिक ज़िंदगी के बारे में जानने की ख़्वाहिश हमेशा से ही फैंस की रहती है. आइए, फिल्म स्टार्स की फैमिली लाइफ के बारे में संक्षेप में जानने की कोशिश करते हैं.

 

फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा से ही फिल्मी परिवारों का काफ़ी दबदबा रहा है. फिर चाहे वो कपूर खानदान हो, चोपड़ा फैमिली हो या ख़ान ब्रदर्स. इन सबके बीच कुछ अलग लोगों ने भी अपनी पहचान बनाई, जिनमें दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, शाहरुख ख़ान, अक्षय कुमार आदि का नाम विशेष रूप से लिया जाता है. इनका फिल्मी बैकग्राउंड न होने के बावजूद इन्होंने अपने बलबूते पर अपनी अलग ख़ास पहचान बनाई. फिल्म स्टार्स की फैमिली लाइफ और उनसे जुड़े विभिन्न अनछुए पहलुओं पर एक नज़र डालते हैं.

 

कपूर फैमिली

* कपूर परिवार ने फिल्म इंडस्ट्री को कई बेहतरीन कलाकार दिए हैं. पृथ्वीराज कपूर से जो सिलसिला शुरू हुआ, वो करीना-रणबीर के साथ-साथ आगे बढ़ता ही जा रहा है. बिग शोमैन राज कपूर ने अलग विषयों के साथ, कर्णप्रिय गीत-संगीत का नया दौर शुरू किया. उनकी आग, अनाड़ी, मेरा नाम जोकर, संगम, बॉबी, सत्यम शिवम सुंदरम, प्रेमरोग, राम तेरी गंगा मैली… जैसी फिल्मों ने कई कीर्तिमान स्थापित किए. राजजी का अपने परिवार के सभी लोगों से बेहद लगाव था. तभी तो उन्होंने अपनी हर फिल्म में कभी भाई, तो कभी अपने बेटों को न केवल ब्रेक दिया, बल्कि उनके लिए फिल्मी करियर का प्लेटफॉर्म भी तैयार किया. आज उनकी तीसरी पीढ़ी पोते-पोती करीना कपूर और रणबीर कपूर अपने दमदार अभिनय-स्टाइल से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं.
* अनिल कपूर के परिवार में पिता सुरेंद्र कपूर व भाई बोनी कपूर ने प्रोड्यूसर के रूप में कई बेहतरीन फिल्में बनाईं. बोनी ने ही अनिल कपूर को वो सात दिन मूवी के ज़रिए ब्रेक दिया. आज जहां अनिल कपूर की बेटी सोनम फिल्म इंडस्ट्री में अपने स्टाइल व बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं, वहीं बोनी के बेटे अर्जुन कपूर ने अपनी पहली ही फिल्म इश्क़ज़ादे में अपने बिंदास अंदाज़ से दर्शकों को प्रभावित किया है.
श्रीदेवी से दूसरी शादी करके बोनी कपूर भले ही अलग रह रहे हों, पर अपने बेटे अर्जुन कपूर के साथ ज़रूरत के समय वे सदा मौजूद रहे. अर्जुन के अनुसार, “पिता के साथ मेरी एक अलग ही बॉन्डिंग रही है. वे भले ही मेरे साथ नहीं रहते, मुझसे दूर हैं, पर वे हमेशा मेरे दिल के क़रीब रहते हैं.”
बोनी-अनिल कपूर में से कलाकार के रूप में अनिल कपूर बेहद कामयाब रहे. एक समय था, जब चारों तरफ़ उन्हीं का दबदबा था. तेज़ाब, राम लखन, परिंदा, 1942 ए लव स्टोरी, ईश्‍वर जैसी सफल फिल्मों ने उन्हें सुपर स्टार के सिंहासन पर बैठा दिया था.
परिवार में अपनी स्थिति पर अनिल कपूर मज़ाकिया ढंग से कुछ इस तरह से कहते हैं, “मैं तीन पीढ़ी से फिल्मों में भले ही लीड रोल करता रहा हूं, पर आज भी मेरे घर की बागडोर मेरी पत्नी सुनीता के हाथ में है. घर में उसी की चलती है. घर में मेरी कम और बीवी-बच्चों की ज़्यादा चलती है. मेरे बच्चे बहुत स्मार्ट हैं, वे मुझे आसानी से फुसला लेते हैं और सुनीता मुझे उंगलियों पर नचाती है. लेकिन जो भी है मेरी फैमिली मेरी ज़िंदगी है और उनकी हर ख़ुशी मुझे और अधिक ख़ुशियों से भर देती है.”

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बच्चन फैमिली

परिवार का साथ और उनके साथ जुड़कर आगे बढ़ते रहना कोई अमिताभ बच्चन से सीखे. हरिवंशराय-तेजी बच्चन के सुपुत्र अमितजी शुरू से ही संयुक्त परिवार व उनके साथ-सहयोग को महत्व देते रहे हैं. जीवन में चाहे जितने उतार-चढ़ाव आए हों, उनके परिवार का साथ सदा रहा. बेटे अभिषेक को लॉन्च करने से लेकर आज भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं. वे एक आदर्श पुत्र, पति, पिता, ससुर की बेजोड़ मिसाल हैं. बकौल अमितजी, “मुझे हमेशा से ही संयुक्त परिवार में रहना अच्छा लगता रहा है. मेरे लिए परिवार के साथ रहना सबसे आनंददायक व सुखदायक है.”

अनेकता में एकता

सलीम ख़ान का परिवार फिल्म इंडस्ट्री में अनेकता में एकता के रूप में कुछ अलग ही अंदाज़ में आदर्श परिवार के रूप में जाना जाता है. सलीमजी की पहली पत्नी सलमा हिंदू हैं, तो दूसरी पत्नी हेलन क्रिश्‍चियन, पर उनकी फैमिली में हमेशा ही दोनों को उचित मान-सम्मान व प्यार मिलता रहा है. सलीम के बेटे अरबाज़ ख़ान ने मलाइका अरोरा ख़ान से शादी की, जो सिख हैं. एक बार सलमान ख़ान ने अपने परिवार की व्याख्या कुछ यूं की, हमारी फैमिली में हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई सभी का बेजोड़ मेल है और हम सभी धर्मों के तीज-त्योहार प्यार व अपनेपन से मनाते हैं.
फिल्म कलाकारों के लिए उनके पापा हमेशा से उनके हीरो व बेस्ट फ्रेंड रहे हैं. आइए, सितारों के उनके पापा के बारे में उनकी फीलिंग्स को जानते हैं-

प्रतिभाशाली परिवार

ब्लैक एंड व्हाइट के ज़माने में अभिनेत्री शोभना समर्थ ने अभिनय की जिन ऊंचाइयों को छुआ था. उनकी बेटियों तनुजा व नूतन और नातिन काजोल ने उसे बख़ूबी आगे बढ़ाया. अभिनय की विविधता काजोल को मां तनुजा, मौसी नूतन व नानी शोभना से विरासत में मिली. इसी अभिनय को अलग रंग दिए कज़िन रानी मुखर्जी ने भी.

 

कामयाब ख़ान

आमिर के पिता व चाचा ताहिर-नासिर हुसैन का फिल्म इंडस्ट्री में बरसों से काफ़ी दबदबा रहा है. उनकी फिल्मों के लोकेशन, गीत-संगीत दर्शकों को बेहद प्रभावित करते थे, जो आज भी फ्रेश लगते हैं. अनामिका, तीसरी मंज़िल, कारवां, यादों की बारात, हम किसी से कम नहीं जैसी फिल्मों का लुत्फ़ आज भी हम सभी उठाते हैं. आमिर ख़ुद को हमेशा एक फैमिली मैन मानते रहे हैं. परिवार में जब कभी जिस किसी को ज़रूरत हुई, वे मज़बूती से उनके साथ खड़े रहे. फिर भाई फैज़ल-मंसूर हो या फिर भतीजा इमरान ही क्यों न हो. वे आज भी इमरान को प्रमोट करने का कोई मौक़ा नहीं चूकते. आमिर अपने व्यक्तिगत जीवन में चाहे कितने ही उतार-चढ़ाव से गुज़रे हों, पर करियर व दूसरी शादी, फिर सरोगेट द्वारा बेटे आज़ाद का उनके जीवन में आना हो. हर लम्हे को उन्होंने पूरी ज़िंदादिली के साथ जिया. आज की तारीख़ में उनके लिए उनका परिवार ही सब कुछ है और वे अपना अधिक समय उनके साथ ही बिताना पसंद करते हैं.

 

मेरे पापा मेरे हीरो…

सोनम कपूर- मेरे डैड पर्दे पर तो हीरो हैं ही, पर मेरी रियल लाइफ के हीरो भी वही रहे हैं. बचपन से लेकर अब तक उन्होंने मुझे क़दम-क़दम पर सिक्योर फील करवाया और गाइड किया. डैड मेरे फ्रेंड, फिलॉसफर और गाइड रहे हैं. उनसे मैंने ज़िंदगी के बारे में सीखा. अभिनय के बारे में जाना.
विद्या बालन- मेरी असल ज़िंदगी के असली हीरो मेरे पापा ही रहे हैं. मेरे करियर के शुरुआती दौर में साउथ की फिल्मों के रिजेक्शन के अजीबोगरीब दौर से गुज़र रही थी मैं. मेरे संघर्ष के दौर में मेरे पापा हमेशा मेरे साथ चट्टान की तरह खड़े न होते, तो मैं चूर-चूर हो चुकी होती.
वरुण धवन- मेरे पापा (डेविड धवन) ने मेरे लिए मैं तेरा हीरो बनाई, पर मेरे लिए तो वही हमेशा हीरो रहेंगे. एक पिता के रूप में उन्होंने मुझे बहुत केयर और लव दिया है. मैं अपने पापा को बहुत प्यार करता हूं.
करीना कपूर- मैं हमेशा से अपने पापा के बहुत क्लोज़ रही हूं. इसमें कोई शक नहीं कि मेरे पापा ही मेरे पहले हीरो रहे हैं. मैं देहरादून के वेल्हम गर्ल्स हॉस्टल में पढ़ रही थी. उन दिनों पापा अक्सर सरप्राइज़ विज़िट देकर मुझे हैरान कर दिया करते थे. उन्होंने मुझे हमेशा अनकंडिशनल प्यार किया है. वे मेरे लिए मज़बूत सपोर्ट सिस्टम रहे हैं.

 

स्टार्स के सुपरस्टार उनकी नज़र में…

अक्षय कुमार- मेेरे पिता (हरिओम भाटिया) के बाद कोई मेरी नज़र में मेरा सुपरस्टार है, तो मेरा विश्‍वसनीय स्पॉट बॉय नितिन बंकर. बरसों से वो मेरी देखभाल कर रहा है. मेरे करियर के हर उतार-चढ़ाव से वाक़िफ़ है, जिसने मेरा हमेशा साथ निभाया, मुझे मान-सम्मान दिया और हमेशा परछाईं की तरह मेरे साथ रहा. इसलिए मैं उसे अपना पर्सनल स्टार मानता हूं.
शाहरुख ख़ान- चार्ली चैप्लीन, सेल्वाडोर डाली और पाबलो पिकासो मेरे लिए ग्रेट रहे हैं. इन सभी को इस बात का विश्‍वास था कि वे अपने पैशन को अपनी कला के रूप में या फिर ज़िंदगी के लिए आप इस्तेमाल कर सकते हैं. आप दो या तीन चीज़ों को लेकर जुनून नहीं दिखा सकते. आपको अपनी ज़िंदगी अपनी कला के लिए समर्पित करनी पड़ती है. ये वो लोग हैं, जिन्हें मैं कामयाब और सुपरस्टार समझता हूं.

यदि एक्टर्स न होते, तो कौन-सा क़िरदार निभाते…
– धर्मेंद्रजी चाहते हैं कि यदि उनकी बायोपिक पर फिल्म बने, तो वो सलमान ख़ान ही कर सकते हैं, क्योंकि वो उनके जैसे ही हैं और दोनों की आदतें भी काफ़ी मिलती-जुलती हैं.
– अमिताभ बच्चन एक ज़बरदस्त पत्रकार बन सकते हैं. उनके शब्दों का चुनाव, बोलने में ठहराव, दमदार आवाज़, बेहतरीन लेखनी उन्हें एक अच्छे पत्रकार की श्रेणी में रखती है.
– रितिक रोशन जिम ट्रेनर होते. अपनी ग्रीक गॉड जैसी बॉडी, नेचर, सही डायट आदि के कारण वे अच्छी तरह से जिम चला सकते हैं.
– ऐश्‍वर्या राय बच्चन एक अच्छी कूटनीतिज्ञ होतीं. इंटरव्यू हो या फिर प्रेस कॉफ्रेंस. किसी भी तरह के सवाल हो, वे बड़ी सफ़ाई से बिना किसी पर आरोप लगाए अपने को सेफ कर लेती हैं.
– बकौल शबाना आज़मी रितिक रोशन को चेतन आनंद के डायरेक्शन में बनी फिल्म हीर-रांझा की रीमेक में रांझा का क़िरदार निभाना चाहिए, जिसमें सारे डायलॉग पद्य में थे.

 

फिल्मी सितारों के बच्चे, जिन्हें भविष्य में फिल्मी परदे पर हम देख सकते हैं-
सन्नी देओल का बेटा करण, सैफ अली ख़ान/अमृता सिंह की बेटी सारा, आमिर ख़ान-ज़ुनैद, सुष्मिता सेन- रिनी, शाहरुख ख़ान-आर्यन, गोविंदा-हर्षवर्धन, अरबाज़ ख़ान- अरहान, अक्षय कुमार-आरव, अमिताभ बच्चन की नातिन-नव्या नवेली.
– ऊषा गुप्ता