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पहचानें अपने रिलेशनशिप की केमेस्ट्री ( Compatibility and Chemistry in Relationships )

Relationship chemistry

Relationship chemistry
रिश्ते के समीकरणों में जहां ग़ुस्से और झगड़े का तीखापन है, तो वहीं एक-दूसरे की परवाह की मिठास भी है. यदि इसमें मतभेदों की कड़वाहट है, तो शरारतों का चटपटापन भी है. कभी-कभी रिश्ते द्वेष की आग से जब कुछ ज़्यादा गर्म हो जाते हैं, तो साथी के छुअन की ठंडक उसे ठंडा कर देती है. पर जनाब क्या आप जानते हैं कि इस तरह के रिश्ते वहीं परिपक्व होते हैं, जहां पति-पत्नी के बीच की केमेस्ट्री यानी तालमेल अच्छा होता है. अब आप पूछेंगे कि पति-पत्नी क्या तत्व या यौगिक हैं, जो उनकी केमिस्ट्री होगी. तो जवाब है, जी हां, पति-पत्नी रिश्ते के तत्व भी हैं और यौगिक भी.
क्या होती है रिश्तों की केमेस्ट्री?
कैसा लगता है आपको, जब आपका साथी भीड़ में सड़क पार करते समय आपका हाथ झट से थाम लेता है? कैसा लगता है आपको, जब आपके दुख के समय आपका साथी आपकी पीठ को सहलाते हुए बिना कुछ कहे आपको सांत्वना देता है? ज़रा सोचिए किसी दिन आपको ऑफिस से आने में देर हो जाए, थकी-हारी आप घर लौटें और पति ने रात का सारा खाना बना लिया हो… ये सभी और इनके जैसे कई और पल रिश्ते के सबसे मधुर पल होते हैं. इस आपसी तालमेल और समझदारी को हम केमेस्ट्री कहते हैं, जिसमें कोई एक-दूसरे से कोई भी न ही कुछ मांगता है और न बोलता है, बस, आंखों ही आंखों में सारी बातें हो जाती हैं.
क्यों ज़रूरी है रिश्ते में तालमेल?
अच्छ तालमेल होना सुखी वैवाहिक जीवन का आधार हो सकता है. रिश्ते में तालमेल की ज़रूरत शादी के कुछ सालों के बाद ज़्यादा पड़ती है, क्योंकि तब शादी में प्यार की जगह कई तरह की ज़िम्मेदारियां ले लेती हैं.
पति-पत्नी एक-दूसरे को उतना समय नहीं दे पाते या यूं कहें कि शादी के कुछ सालों के बाद प्यार का रूपांतर ही केमेस्ट्री में हो जाता है. और यही बात आपके समय के साथ बूढ़े हो रहे रिश्ते को तरोताज़ा और जवां बनाती है. कहने का तात्पर्य यह है कि स़िर्फ प्यार के आधार पर रिश्तों को जीवित रखना मुश्किल है, लंबी रेस के लिए सही तालमेल का होना ज़रूरी है.
कैसे पहचानें अपने रिश्ते को?
क्या आप सेल्फी हैं?
सेल्फी का अर्थ है ख़ुद की ही तस्वीरें उतारनेवाला. क्या आप ख़ुद की तस्वीरों में ही गुम रहते हैं? इसका मतलब क्या आप ख़ुद के काम, कपड़ों, पसंद-नापसंद, परेशानियों या ख़ुशियों के अलावा कुछ सोच नहीं पाते. तो सचेत हो जाइए, आपका रिश्ता ख़तरे में है. बेहतर रिश्ते के लिए ख़ुद के खोल से बाहर निकलना ज़रूरी होता है.
क्या आप डाउटिंग थॉमस हैं?
क्या आप किसी शक के चलते अक्सर अपने पति का मोबाइल चेक करती हैं या आप अपनी पत्नी के किसी पुरुष सहकर्मी के साथ बात करने पर या घर आने पर रातभर सो नहीं पाते. तो इसका मतलब साफ़ है कि दोनों ही परिस्थितियों में आपका रिश्ता कमज़ोर है.
मन की बात
यदि आपके रिश्ते में कोई अपेक्षाएं नहीं हैं और फिर भी आप ख़ुश हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आप एक-दूसरे की अपेक्षाओं को बिना कहे ही पूरा कर रहे हैं. इसे ही अपने साथी के मन की बात को पहचानना कहते हैं. अपने साथी के ख़ुशी-ग़म और ज़रूरतों को बिना कहे समझ लेना भी एक कला है. यह कला यदि आपको आ गई, तो यह अच्छी बात है.
निर्भरता
जीवन की छोटी-मोटी ज़रूरतों के लिए अपने साथी पर निर्भर रहने में कोई बुराई नहीं है. इससे जीवन में एक-दूसरे की ज़रूरत और ज़िम्मेदारी बनी रहती है. यदि आप एक-दूसरे पर निर्भर हैं, तभी आप एक-दूसरे को समझने की कोशिश करेंगे. यह निर्भरता आर्थिक, भावनात्मक या किसी भी अन्य तरह की हो सकती है.
पास भी, दूर भी
आजकल पति-पत्नी को साथ बिताने के लिए उतना समय नहीं मिलता, उस पर डिस्टेंस मैरिजेस का बोझ भी है. ऐसे में अगर दूर रहकर भी आपके साथी के पास होने का एहसास बना हुआ है, तो यह अच्छा है.
अच्छी केमेस्ट्री के लिए कुछ मज़ेदार, पर कारगर एक्सरसाइज़
* महीने में एक बार अपने साथी के साथ अकेले बैठें और उससे अपने बारे में ऐसी 5 चीज़ें पूछें, जो उसे पसंद-नापसंद हैं. उन्हें आप लिख लें और किसी भी बात का बुरा न मानें. फिर उसे भी ऐसा करने
को कहें.अब अपनी लिखी हुई चीज़ों पर काम करें.
* कोई ऐसी एक्टिविटी करें, जिसमें आपसी तालमेल की ज़रूरत हो, जैसे- कोई खेल, डबल्स टेनिस या पार्टनरशिप में कैरम या तो डांस, जैसे- सालसा आदि.
* यदि यह सब भी मुमकिन ना हो, तो घर के काम अकेले करने की जगह साथ
मिलकर करें.
अक्सर यह देखा गया है कि अपेक्षाएं रिश्तों को कमज़ोर बना देती हैं. अपेक्षाएं रखना बुरी बात नहीं है, बशर्ते वे वास्तविकता के धरातल पर हों.

– विजया कठाले निबंधे

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