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साइलेंट मोड पर होते रिश्ते… (Communication Gap In Relationships)

ख़ामोशियां जब बात करती हैं, तो उनमें मुहब्बत की आवाज़ छिपी होती है… ये ख़ामोशियां मन को लुभाती हैं, ये ख़ामोशियां कभी-कभी बहुत भाती हैं, ये ख़ामोशियां गुदगुदाती हैं… लेकिन जब आपका रिश्ता (Relationship) ही ख़ामोश होने लगे, तब ये ख़ामोशियां रुलाती हैं… जी हां, आज के दौर की हक़ीक़त यही है कि हमारे रिश्तों में ख़ामोशी पसरने लगी है… हमारे संबंधों में अजीब-सी वीरानी पनप रही है… आख़िर क्यों साइलेंट मोड (Silent Mode) पर जा रहे हैं हमारे रिश्ते?

Relationships Problems

पहचानें रिश्तों की ख़ामोशियों को…

–     आप दोनों पास-पास होते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

–     डिनर टेबल हो या चाय का समय, आप दोनों के पास एक-दूसरे से बात करने के लिए कुछ होता ही नहीं.

–     अब न पहले की तरह फोन या मैसेजेस करते हैं, न ही सरप्राइज़ेस प्लान करते हैं.

–     बेडरूम में भी न रोमांस की जगह बची है, न ही पर्सनल बातों की.

–     सेक्स लाइफ भी पहले की तरह नहीं रही.

–     बात भले ही न होती हो, लेकिन वो कनेक्शन भी फील नहीं होता, जो पहले हुआ करता था.

–     एक-दूसरे के प्रति इतने कैज़ुअल हो गए हैं कि किसी के होने न होने से ज़्यादा फ़र्क़ ही नहीं पड़ता अब.

–     लड़ाई-झगड़े, वाद-विवाद भी अब नहीं होते.

–     आख़िरी बार साथ-साथ कहां बाहर गए थे या कौन-सी मूवी देखी थी, वो तक याद नहीं.

–     एक-दूसरे के साथ अब ज़िद भी नहीं करते.

–     पार्टनर की पसंद-नापसंद को अब तवज्जो नहीं दी जाती.

–     इसी तरह की कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जो यह महसूस करने के लिए काफ़ी हैं कि रिश्ते में ख़ामोशी ने जगह बना ली है.

क्या हैं वजहें?

–     लाइफस्टाइल फैक्टर बड़ी वजह है. पार्टनर्स बिज़ी रहते हैं.

–     समय की कमी भी एक कारण है, क्योंकि एक-दूसरे के साथ समय कम बिता पाते हैं.

–     प्राथमिकताएं बदल गई हैं. करियर, दोस्त, बाहरी दुनिया ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

–     सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है. यहां का आकर्षण आपसी रिश्तों को काफ़ी प्रभावित करता है.

–    लोग अंजाने लोगों से कनेक्ट करके जो एक्साइटमेंट महसूस करते हैं, जो नयापन उन्हें लगता है, वो आपसी रिश्तों में नहीं महसूस होता. ये रिश्ते उन्हें बोझिल और उबाऊ लगने लगते हैं.

–     आजकल डिनर का टेबल हो या बेडरूम, शारीरिक रूप से वहां मौजूद भले ही हों, मानसिक व भावनात्मक रूप से वो कहीं और ही होते हैं.

–     कभी खाने की पिक्चर्स क्लिक करके शेयर करते हैं, तो कभी सेल्फी को कितने लाइक्स और कमेंट्स मिले, इस पर पूरा ध्यान रहता है.

–     ऐसे में रिश्तों के लिए समय ही नहीं रहता और न ही एनर्जी बचती है.

–     ऑफिस से थकने के बाद सोशल साइट्स उनके लिए रिफ्रेश होने का टॉनिक बन जाती हैं, जहां अपना बचा-खुचा समय व ऊर्जा बर्बाद करने के बाद किसी और चीज़ के लिए कुछ नहीं बचता.

–     इसके अलावा ऑफिस में भी कलीग्स के साथ दोनों समय ज़्यादा बिताते हैं, जिससे उनसे इमोशनल रिश्ता बन जाता है, जो अपने रिश्ते से कहीं ज़्यादा कंफर्टेबल और आकर्षक लगने लगता है.

–     पार्टनर्स को लगता है कि कलीग्स उन्हें बेहतर समझते हैं, बजाय पार्टनर के.

–    कई बार ये रिश्ते भावनात्मक रिश्तों से भी आगे बढ़कर शारीरिक संबंधों में बदल जाते हैं.

–     एक बार इस तरह के रिश्ते में बंध गए, तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल लगता है.

–     शुरुआत में अच्छा और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन आगे चलकर ज़िंदगी में बड़ी परेशानी हो सकती है.

–     ऐसे में अपने पार्टनर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती, उसकी हर बात बेवजह की रोक-टोक लगने लगती है और फिर आपसी प्यार लगभग ख़त्म ही हो जाता है, रिश्ता एकदम ख़ामोश हो जाता है.

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Relationships Problems
कैसे बचाएं रिश्तों को?

–     सबसे पहले तो यह जानें कि समय रहते इस ख़ामोशी की आहट को पहचान लिया जाए.

–     अगर आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में सब कुछ सामान्य नहीं है, तो पार्टनर से बात करें.

–    सोशल मीडिया, टीवी, फोन और लैपटॉप्स के यूज़ के भी नियम बनाएं.

–     हफ़्ते में एक बार आउटिंग के लिए जाएं. मूवी प्लान करें या डिनर.

–     एक-दूसरे के ऑफिस में सरप्राइज़ विज़िट दें.

–     कभी यूं ही बिना काम के भी फोन या मैसेज कर लिया करें.

–     कभी-कभार स़िर्फ एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ही कैज़ुअल लीव ले लिया करें. इससे एक्साइटमेंट बना रहता है.

–    एक-दूसरे के लिए शॉपिंग या कुकिंग करें.

–     सोशल साइट्स पर भी एक-दूसरे से कनेक्टेड रहें, ताकि आप दोनों को ही पता रहे कि रिश्ते के बाहर आप सोशल मीडिया पर कैसे बिहेव करते हैं.

–     अपने पार्टनर के प्रति कैज़ुअल अप्रोच से बचें. शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कैज़ुअल हो जाते हैं, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

–     पार्टनर को यह महसूस करवाएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी कितनी अहमियत है.

–    उन्हें स्पेशल फील कराने का प्रयास बीच-बीच में करते रहें.

–     यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों हर पल, हर घड़ी बातें ही करते रहें, लेकिन वो कनेक्शन बना रहे, वो नीरस-सी ख़ामोशी न पनपे इसकी कोशिश ज़रूर होनी चाहिए.

–     समस्या चाहे जितनी भी गंभीर हो, कम्यूनिकेशन से बेहतर समाधान कोई नहीं है. बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन और कनेक्शन बना रहे और आपका रिश्ता साइलेंट मोड पर कभी न आए.

–     अपनी सेक्स लाइफ को साइलेंट मोड पर कभी न आने दें. उसमें ऊर्जा बनी रहे, इसकी कोशिश होती रहनी चाहिए.

–     जब भी लगे कि सेक्स लाइफ बोरिंग हो रही है, तो कभी रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर, तो कभी बेडरूम डेकोर चेंज करके, रोमांटिक गानों के साथ पार्टनर का स्वागत करें. इससे आप दोनों को ही नयापन महसूस होगा.

–     नई पोज़ीशन्स ट्राई करें या सेक्स की लोकेशन चेंज करें. वीकेंड पर कोई होटल बुक करके साथ में समय बिताएं.

– विजयलक्ष्मी

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Relationship Expert: क्या करें जब रिश्ते में आ जाए चुप्पी? (How To Overcome Communication Gap In Your Relationship?)

आजकल हमारी ज़िन्दगी की तेज़ रफ़्तार में रिश्ते (Relationships) भी उलझने लगे हैं. उन्हें सुलझाने के लिए हम लाएं हैं रिलेशनशिप से जुड़े कुछ सवाल-जवाब. यकीन है इससे कुछ लोगों को अपनी रिलेशनशिप की उलझनों को सुलझाने का मौका मिलेगा.

Communication Gap In Relationships

मैं 25 साल की हूं. मेरे पति बहुत ही कम बात करते हैं. पहले मुझे लगता था कि वो शांत स्वभाव के हैं, तो अच्छा ही है, लेकिन अब अक्सर यह महसूस होता है कि रिलेशनशिप में इतनी भी चुप्पी अच्छी नहीं. न कभी कॉम्प्लीमेंट देते और न ही कोई शिकायत करते. क्या करूं कि हमारे बीच कम्यूनिकेशन और प्यार भरी बातें हों?
– विभा सकलानी, मुंबई.

सबसे पहले तो आपको यह जानना होगा कि आपके पति का यह मूल स्वभाव है या फिर वो सभी के साथ इसी तरह से कम बात करते हैं? यदि वो सबके साथ इसी तरह से बर्ताव करते हैं, तो ज़ाहिर है कि वो अंतर्मुखी स्वभाव के हैं और आपको उनके इस मूल स्वभाव को स्वीकारना होगा. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि पति या पत्नी भले ही दूसरों के साथ कम घुलते-मिलते हों, लेकिन जब वे एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल हो जाते हैं, तो आपस में काफ़ी बातचीत करते हैं. ऐसे में आपको ख़ुद प्रयास करना होगा कि वो आपके साथ सहज हो सकें और आप दोनों के बीच अच्छा कम्यूनिकेशन हो पाए. लेकिन यदि वो स़िर्फ आपसे कम बातचीत करते हैं और बाकी सबके साथ नॉर्मल हैं, तो सतर्क होने की ज़रूरत है. शायद कहीं न कहीं उनके मन में कोई बात है, जिसे आप अपने किसी क़रीबी की मदद से जानने का प्रयास कर सकती हैं और अपने पति के साथ बात करके समस्या का समाधान कर सकती हैं.

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Communication Gap Relationships

मैं 28 साल का हूं. शादी को 6 महीने ही हुए हैं. मेरी पत्नी ने मुझे शादी से पहले ही बताया था कि वो एक रिलेशनशिप में थी, उस व़क्त मैं उसकी ईमानदारी से काफ़ी इंप्रेस हुआ था, लेकिन मुझे लगता है कि कहीं न कहीं मेरे मन से वो बात निकल नहीं रही. मैं पूरी तरह से उसे स्वीकार नहीं पा रहा. जबकि वो हर तरह से अच्छी पत्नी का रोल निभा रही है, क्या करूं कि यह बात मन से निकल जाए?
– रितेश सिंह, पटना.

सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा कि आज के ज़माने में हम सभी इस तरह की रिलेशनशिप से गुज़रे होते हैं, ख़ासतौर से आपकी उम्र के युवा लोगों के लिए तो यह सामान्य सी बात है कि आप इस तरह की रिलेशनशिप गुज़रते हैं. ज़रूरी यह है कि आपका रिश्ता किसी झूठ पर नहीं टिका. आपकी पत्नी से आपको सच बताया और उनके लिए इस व़क्त जो ज़रूरी है, वो उस भूमिका को सही तरी़के से निभा रही हैं. ऐसे में आप बेवजह क्यों बीती बात को बेवजह तूल देकर परेशान हो रहे हैं? बेहतर होगा कि अपना दिल बड़ा करें और सोच खुली रखें. अपने रिश्ते को बिना किसी संदेह के स्वीकारें और अपने रिश्ते को एंजॉय करें.

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रिलेशनशिप की 5 लेटेस्ट प्रॉब्लम्स व उनके स्मार्ट हल (5 latest Relationship problems and smart solutions)

Relationship problems and smart solutions

पति-पत्नी के रिश्ते की नाज़ुक डोर प्यार, विश्‍वास, भरोसे व अपनेपन जैसे मज़बूत धागों से बंधी होती है. इनमें ज़रा-सी भी उलझन दिलों में दरार डाल देती है और रिश्ते दरकने लगते हैं. कहीं आपकी शादीशुदा ज़िंदगी में भी तो कोई रिलेशनशिप प्रॉब्लम नहीं? अगर है, तो आइए जानें, रिलेशनशिप की 5 लेटेस्ट प्रॉब्लम्स (Relationship problems and smart solutions) व उनके स्मार्ट हल.

Relationship problems and smart solutions

1. कम्युनिकेशन गैप

हर सफल रिश्ते की नींव कम्युनिकेशन यानी बातचीत व सही व्यवहार पर टिकी होती है. जॉन ग्रे की क़िताब ङ्गमेन आर फ्रॉम मास, वुमन आर फ्रॉम वीनसफ में लेखक ने लिखा है, ङ्गस्त्री और पुरुष दोनों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से है, इसलिए उनमें रिलेशन प्रॉब्लम्स होती हैं, जिससे महिलाएं चाहती हैं कि कोई उन्हें ध्यान से सुने, उनकी बातों परध्यान दे, पर पुरुष उन्हें समझ नहीं पाते और अपनी व्यस्तता के कारण उन्हें समाधानों की एक लंबी-चौड़ी लिस्ट थमा देते हैं.
अक्सर महिलाएं कहना कुछ चाहती हैं, पर वे कहती कुछ और हैं, जैसे- ङ्गकोई बात नहीं, मैं ये काम कर लूंगी,फ तो पुरुषों को समझ जाना चाहिए कि कुछ बात है और वह चाहती है कि आप उनसे कहें कि नहीं, नहीं मैं वो काम कर लूंगा, पर पुरुष इसे समझ ही नहीं पाते. इसी वजह से पत्नी को लगता है कि उसके पति उसे समझते ही नहीं, जिससे उनके रिश्ते में प्रॉब्लम्स आने लगती हैं.
ऐसी ही न जाने कितनी बातों की वजह से पति-पत्नी के रिश्ते में ख़ामोशी आने लगती है, जो धीरे-धीरे उनके रिश्ते को ख़ामोश करने लगती है, इसलिए अपने रिश्ते को बचाने के लिए उसमें कभी भी ख़ामोशी को न आने दें.
स्मार्ट हल
* कम्युनिकेशन यानी बातचीत का अर्थ केवल बोलना नहीं है, बल्कि सामनेवाले की बातों को ग़ौर से सुनना और समझना भी है.
* माना घर-गृहस्थी और करियर के चक्कर में आप एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, पर आपके पार्टनर के बिना कैसी घर-गृहस्थी?
* पार्टनर के बीच बातचीत बहुत ज़रूरी है. एक-दूसरे की मजबूरियों और समस्याओं को समझने की कोशिश करें और कोई भी फैसला लेने से पहले खुलकर उस विषय पर बात करें.
* कितनी भी नाराज़गी क्यूं न हो, बात करना बंद न करें.
* इसके लिए किसी न किसी को तो पहल करनी ही होगी, तो उनके पहल करने का इंतज़ार न करें और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर दें.
* हमेशा याद रखें कि ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका हल बातचीत से नहीं निकल सकता. बड़ी से बड़ी समस्या का हल बैठकर निकाला जा सकता है.

2. नो टाइम फॉर सेक्स

शादीशुदा ज़िंदगी को सफल बनाने में सेक्सुअल रिलेशन अहम् भूमिका अदा करती है. आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, जल्दी से जल्दी सब कुछ पा लेने की होड़ में अक्सर रिश्ते कहीं पिछड़ जाते हैं, ख़ासकर शहरों में, जहां दोनों ही पार्टनर्स कामकाजी हैं, एक-दूसरे के लिए क्वालिटी टाइम निकालना मुश्किल हो जाता है, जिसका असर उनके शादीशुदा जीवन पर पड़ता है.
स्मार्ट हल
* चाहे कितने भी बिज़ी हों, एक-दूसरे के लिए समय ज़रूर निकालें. ध्यान रखें, सेक्स शादीशुदा ज़िंदगी के लिए टॉनिक की तरह है.
* इसके लिए ज़रूरी है कि दोनों ही खुलकर अपनी भावनाएं एक-दूसरे से व्यक्त करें.
* वीकेंड पर या छुट्टी के दिन ऑफ़िस को भूल जाएं. पूरा दिन साथ-साथ बिताएं. रोमांटिक बातें करें. आउटिंग पर जाएं.
* एक-दूसरे को छोटे-छोटे गिफ्ट्स देकर भी आप अपनी भावनाओं को ज़ाहिर कर सकते हैं.
* शादीशुदा ज़िंदगी में ताज़गी बनाए रखने के लिए हर छह महीने पर या साल में कम से कम एक बार स़िर्फ आप दोनों घूमने जाएं. ऐसे में सारे गिले-शिकवे भी दूर हो जाते हैं और आपकी सेक्सुअल लाइफ भी रिन्यू हो जाती है.

3. फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स

अक्सर पैसे ख़र्च करने के मामले में दोनों पार्टनर अलग होते हैं. एक को बहुत ख़र्च करना पसंद होता है, तो दूसरे को बचत करने की या कम ख़र्च करने की आदत होती है. कई बार तो पार्टनर के बीच इस बात को लेकर झगड़े हो जाते हैैं कि कौन कितना ख़र्च करेगा. व्यक्तिगत ख़र्च को प्राथमिकता देकर घर ख़र्च को अनदेखा करना भी इसका एक प्रमुख कारण है.
स्मार्ट हल
* दोनों पार्टनर्स बैठकर फाइनेंशियल प्लानिंग करें. इन्वेस्टमेंट आदि के अलावा घरेलू ख़र्चों में दोनों मिलकर सहयोग करें.
* हर महीने का बजट बनाएं, ताकि फ़िज़ूलख़र्ची न हो.
* अपने पार्टनर से अपने व्यक्तिगत ख़र्चों को छुपाए नहीं.

4. नो टाइम फॉर किड्स

कहते हैं, बच्चा पति-पत्नी के बीच के सभी गिले-शिकवे दूर कर उन्हें और क़रीब ले आता है, लेकिन आज कपल्स के पास इतना समय ही नहीं रहता कि वे बच्चे प्लान कर सकें. करियर बनाने और भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में दोनों ही पार्टनर अपने रिश्ते से ज़्यादा काम को अहमियत देते हैं. बच्चे की ज़िम्मेदारी लेने के लिए उनके पास समय ही नहीं होता. लेकिन उम्र के एक पड़ाव पर उन्हें जब बच्चे की कमी का एहसास होता है, तब अपनी झुंझलाहट वो एक-दूसरे पर ही निकालते हैं और एक-दूसरे को दोषी ठहराते हैं, जिससे रिश्तों में खटास आने लगती है.
स्मार्ट हल
* दोनों को ही यह बात समझनी होगी कि करियर उनके रिश्ते से बढ़कर नहीं है और हर चीज़ की एक सही उम्र होती है, अगर उसी उम्र में वह हो जाए, तो ज़्यादा बेहतर है. इसलिए बच्चा प्लान करने में देरी न करें.
* ध्यान रखें कि बच्चे जीने के मक़सद होते हैं. पति-पत्नी के रिश्ते की कड़ी होते हैं, जो उन्हें स्नेह के बंधन से जोड़े रखते हैं.
* माना कि बच्चों की परवरिश एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है, लेकिन दोनों
के सहयोग से इसे आसान बनाया जा सकता है.

5. ऑफिस रोमांस

कॉम्पटीशन के इस दौर में हर कोई आगे निकलना चाहता है. ऐसे में ज़्यादा समय तक काम करना हमारी आदत में शुमार हो जाता है. घर से ज़्यादा वक़्त हम ऑफिस में गुज़ारते हैं, जिसकी वजह से कलीग्स में एक भावनात्मक लगाव हो जाता है. ऐसी कई बातें होती हैं, जो हम अपने पार्टनर से न शेयर करके अपने कलीग्स से शेयर करने लगते हैं. कभी-कभी यह लगाव अफेयर का रूप ले लेता है, जिसका असर उनकी शादीशुदा ज़िंदगी पर भी पड़ता है. यह स़िर्फ पुरुषों तक ही सीमित नहीं है, महिलाएं भी इसमें उतनी ही भागीदार हैं, इसलिए दोनों को ही अपने रिश्तों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है.
स्मार्ट हल
* अगर आपको ऐसा एहसास हो रहा है कि आप अपने कलीग्स के साथ कुछ ज़्यादा ही इन्वॉल्व हो रहे हैं, तो वहीं पर अपने क़दम पीछे खींच लें.
* अपने पार्टनर के साथ ज़्यादा से ज़्यादा क्वालिटी समय बिताने की कोशिश करें.
* अपने पार्टनर से बेवफ़ाई की भावना आपको आत्मग्लानि से भर देगी और आपकी ख़ुशहाल ज़िंदगी ख़ुशहाल नहीं रह जाएगी, इसलिए अपने रिश्ते में ईमानदारी बनाए रखें.
* रिश्तों की अहमियत को समझने की कोशिश करें और साथ ही अपने पार्टनर को भी समझने की कोशिश करें.
जानें स्वस्थ रिश्तों के लक्षण
1. दो व्यक्तियों के बीच की आपसी समझ ही स्वस्थ रिश्ते का सबसे बड़ा लक्षण है. पति-पत्नी बिना बोले एक-दूसरे की भावनाओं को समझ जाते हैं, तो स्वस्थ रिश्ते का इससे बड़ा उदाहरण नहीं है.
2. पति-पत्नी दोनों ही ख़ुश व तनावमुक्त होते हैं.
3. दोनों ही अपनी ज़िम्मेदारियां दूसरे पर नहीं थोपते, बल्कि उन्हें बांटने का पूरा प्रयास करते हैं.
4. दोनों में मन-मुटाव कम ही होते हैं, क्योंकि दोनों हर समस्या का समाधान मिलकर निकालते हैं. हर अहम् ़फैसलों में दोनों की सहमति होती है.
5. दोनों न स़िर्फ एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाते हैं, बल्कि उनके काम का सम्मान भी करते हैं और उनके तनाव को समझते हैं.
6. ऐसे कपल्स एक-दूसरे पर निर्भर नहीं होते, बल्कि हर क़दम पर एक-दूसरे का साथ निभाते हैं.
7. स्वस्थ रिश्तों में पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ भरपूर क्वालिटी समय बिताते हैं. एक-दूसरे को ख़ुश रखने की हर संभव कोशिश करते हैं.
8. दोनों ही एक-दूसरे पर इतना विश्‍वास करते हैं कि दूसरों के बहकावे में कभी नहीं आते.

– अनीता सिंह

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