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इसलिए सिखाएं बच्चों को हेल्दी कॉम्पटीशन (Why Healthy Competition Is Good For Kids)

Why Healthy Competition Is Good For Kids

कॉम्पटीशन दो तरह की होती है- पॉज़िटिव और निगेटिव. पॉज़िटिव कॉम्पटीशन में इंसान ख़ुद को अपने प्रतिस्पर्धी से आगे ले जाने के लिए जीतोड़ मेहनत करता है और उससे आगे निकल जाता है. इसे हेल्दी कॉम्पटीशन कहते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो ख़ुद तो कुछ नहीं करते, लेकिन दूसरों को भी आगे नहीं बढ़ने देते. ऐसे लोग अपने से क़ामयाब लोगों की बुराई करते रहते हैं, उनके काम में रुकावट डालने की कोशिश करते रहते हैं. ऐसे लोग न ख़ुद आगे बढ़ पाते हैं और न ही दूसरों को आगे बढ़ता देख सकते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास स़िर्फ निगेटिविटी ही फैलाते हैं. अत: सभी पैरेंट्स के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि वे अपने बच्चों को हेल्दी कॉम्पटीशन सिखाएं, ताकि उनके बच्चे अपने दम पर आगे बढ़ें और क़ामयाबी हासिल करें.

Why Healthy Competition Is Good For Kids

बचपन से सिखाएं ये आदत
कई बच्चे जब खेल में हारने लगते हैं, तो गेम छोड़कर चले जाते हैं या फिर अपने दोस्तों से झगड़ने लगते हैं. ख़ुद चीटिंग करने के बावजूद वो दोस्तों पर इसका इल्ज़ाम लगाते हैं. ऐसे बच्चों को दूसरे बच्चे गेम में शामिल नहीं करना चाहते, जिससे उनके दोस्त भी नहीं बन पाते. उससे भी बड़ी समस्या ये है कि ऐसे बच्चे आगे चलकर कॉम्पटीशन का प्रेशर नहीं झेल पाते. अत: पैरेंट्स को चाहिए कि वे छोटी उम्र से ही अपने बच्चों को हेल्दी कॉम्पटीशन के बारे में सिखाएं. उन्हें बताएं कि गेम में जीत-हार तो लगी रहती है. आज आपका दोस्त जीता है, कल आप जीत सकते हैं, लेकिन गेम में आगे रहने के लिए आपको हमेशा मेहनत करनी होगी. तभी आप हमेशा गेम में आगे रह सकते हैं. ऐसा ही उसे पढ़ाई के बारे में भी बताएं कि अच्छे नंबर लाने के लिए उसे हमेशा ज़्यादा मेहनत करनी होगी.

ज़रूरी है हेल्दी कॉम्पटीशन
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हाईप्रोफाइल लाइफ़ स्टाइल की चाहत ने लोगों की प्रतिस्पर्धात्मक भावना को भी बढ़ा दिया है. हर कोई एक-दूसरे से बेहतर जीवन शैली चाहता है और इस चाहत को पूरा करने के चक्कर में लोग सामने वाले के पैर खींचकर आगे बढ़ने से भी परहेज नहीं करते. जबकि प्रतिस्पर्धा का मतलब दूसरों को पीछे खींचना नहीं, बल्कि ख़ुद आगे बढ़ना होता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सही मायने में और अपने दम पर क़ामयाबी पाए, तो उसे अभी से हेल्दी कॉम्पटीशन का महत्व और उसके गुण सिखाएं.

हर मोड़ पर है कॉम्पटीशन
आज के दौर में बिना कॉम्पटीशन के जीवन के किसी क्षेत्र मेें आगे बढ़ने की कल्पना ही नहीं की जा सकती. स्कूल-कॉलेज से लेकर ऑफिस तक इसका दायरा बहुत बड़ा है. स्कूल-कॉलेज में छात्रों के बीच एक-दूसरे से अच्छे नंबर लाने की होड़ लगी रहती है, तो ऑफिस में दूसरों को नीचा दिखाकर ख़ुद को श्रेष्ठ साबित करने वालों की तादाद ज़्यादा होती है. प्रतिस्पर्धा अगर ईमानदारी से की जाए तो इससे काम की गुणवत्ता सुधरती है, क्योंकि अपने सहकर्मी को अच्छा काम करता देखकर दूसरा व्यक्ति भी उससे आगे बढ़ने के लिए अपने काम में सुधार करेगा. लेकिन प्रतिस्पर्धा में अगर ईमानदारी न हो, तो इसका परिणाम हमेशा नकारात्मक ही होता है. अत: अपने बच्चे को सिखाएं कि अच्छे नंबर लाने या खेल में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उसे अपने सहपाठियों से ज़्यादा मेहनत करनी होगी, तभी वो उनसे आगे बढ़ सकता है.

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आगे बढ़ने का भाव
अपने बच्चे को सिखाएं कि ज़िंदगी में किसी क़ामयाब इंसान को देखकर उसकी तरह बनने या उससे आगे बढ़ने की बात सोचने में कोई हर्ज़ नहीं है. अपने सहपाठी से आगे बढ़ने के लिए अगर आप जी तोड़ मेहनत करते हैं, तो उसमें भी कुछ ग़लत नहीं है, क्योंकि ये सब आप अपनी तरक़्क़ी के लिए कर रहे हैं. लेकिन आप अगर किसी को पीछे धकेल कर या किसी को नीचे गिराकर आगे बढ़ रहे हैं, तो ये प्रतिस्पर्धा की श्रेणी में कतई नहीं आएगा. अपने बच्चे को यह भी समझाएं कि ग़लत तरी़के से मिली क़ायमाबी की उम्र ज़्यादा लंबी नहीं होती इसलिए हमेशा ख़ुद को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए और इसके हमेशा मेहनत करनी चाहिए.

नफ़रत या ईर्ष्या का भाव
कई बार आपका बच्चा भी अपने दोस्त को पढ़ाई या खेल में उससे आगे बढ़ते देख निराश हो जाता होगा, ऐसा भी हो सकता है कि आपके बच्चे में अपने दोस्त को लेकर जलन या ईर्ष्या की भावना आ जाए. ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि हर कोई आगे बढ़ना चाहता है और ख़ुद को दूसरों से बेहतर साबित करना चाहता है. यदि आपका बच्चा भी ऐसा सोचता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. ऐसी स्थिति में अपने बच्चे को सिखाएं कि सफलता की राह में आगे बढ़ने के लिए वो अपने प्रतिस्पर्धी भाव को जीवित रखते हुए सच्चे दिल व पूरी लगन से अपना काम करता रहे. पढ़ाई या खेल में आगे बढ़ने के लिए जी-जान से मेहनत करे. ऐसा करके जल्दी ही वो अपने दोस्त से आगे निकल सकता है. अपने बच्चे को सिखाएं कि दिल से की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. देर से ही सही, मेहनत का फल अवश्य मिलता है.

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कॉम्पटिशन ज़रूरी है, लेकिन… (Try To Do Healthy Competition)

Competition

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सर्वश्रेष्ठ बनने और सर्वश्रेष्ठ पाने की चाह से ही शायद कॉम्पटिशन शब्द का जन्म हुआ होगा. कॉम्पटिशन सकारात्मक हो तो आपको बहुत आगे ले जा सकती है, लेकिन नकारात्मक प्रतिस्पर्धा आपके साथ-साथ दूसरों को भी नुक़सान पहुंचा सकती है. अतः ऐसी कॉम्पटिशन से बचें, जो आपको ग़लत दिशा में ले जाए. बचपन से ही हम अपने बच्चों का कॉम्पटिशन शब्द से भलीभांति परिचय करा देते हैं. दूसरे बच्चों से उनकी तुलना करके, उनसे आगे निकलने की नसीहतें देकर हम उन्हें कॉम्पटिशन करना सिखा देते हैं, लेकिन ऐसा करते समय हम उन्हें ये बताना अक्सर भूल जाते हैं कि दूसरों से तुलना करने से पहले अपनी क्षमता को पहचानें. आगे बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन दूसरों से प्रेरणा लेकर, उन्हें नुक़सान पहुंचाकर नहीं. अतः किसी से भी प्रतिस्पर्धा करने से पहले उसके नफा-नुक़सान के बारे में अच्छी तरह सोच लें.

अपनी क्षमता को पहचानें
बड़े सपने देखना, उन्नति की राह पर चलना बिल्कुल सही है, लेकिन ऐसा करते समय हमें अपनी क्षमता का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए. आप एक एवरेज स्टूडेंट हैं, लेकिन अपने दोस्त की देखादेखी में आप मेडिकल में एडमिशन के सपने देख रहे हैं, तो आपका ये सपना टूट सकता है. अपने सपने को पूरा करने के लिए आपको उस लेवल की पढ़ाई करनी होगी या फिर मेडिकल से संबंधित कोई और विकल्प ढ़ूंढ़ना होगा. करियर का चुनाव दूसरों को देखकर या कॉम्पटिशन के चलते नहीं करना चाहिए. ये जीवन का अहम् ़फैसला है. इसके लिए आपका उस क्षेत्र के लिए सक्षम होना ज़रूरी है.

दूसरों से सीखें
ज़रूरी नहीं कि हम हर बार अपनी ग़लती से ही सीखें, दूसरों की ग़लती से सबक लेकर भी हम वैसी भूल करने से बच सकते हैं. इसी तरह दूसरों को तऱक्की करते देख उनसे ईर्ष्या करने की बजाय हम उनकी तरह बनने की कोशिश कर सकते हैं. इस तरह हेल्दी कॉम्पटिशन से हम न स़िर्फ अपनी ग्रोथ बढ़ा सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं.

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ईर्ष्या से बचें
उसे मुझसे अच्छी जॉब क्यों मिली, उसका घर मुझसे बड़ा क्यों, उसकी कार मेरी कार से महंगी क्यों..? इसे कॉम्पटिशन नहीं ईर्ष्या कहेंगे, इसकी बजाय यदि आप हेल्दी कॉम्पटिशन रखेंगे तो आप भी अच्छी जॉब, घर, गाड़ी आदि पाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे और अपनी क़ाबीलियत के दम पर वो तमाम चीज़ें हासिल कर लेंगे. अतः किसी से ईर्ष्या करने की बजाय हेल्दी कॉम्पटिशन रखें और तऱक्की पाने के लिए ख़ूब मेहनत करें.

मेहनत से मिलती है मंज़िल
सही समय पर सही दिशा में किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, लेकिन इसके लिए आपको अपनी क्षमता और लक्ष्य के बारे में अच्छी तरह पता होना चाहिए. दूसरों को देखकर अपनी ज़िंदगी के ़फैसले करना समझदारी नहीं है. हर इंसान के पास एक ऐसा हुनर ज़रूर होता है, जो उसे कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचा सकता है. हमें बस उस हुनर को पहचानना होता है और उसी दिशा में आगे बढ़ना होता है. अतः अपनी क्षमता को पहचानें और मेहनत से पाएं अपनी मंज़िल.

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