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सोनू निगम

सोनू निगम ने मुंडवा लिया अपना सिर. पश्चिम बंगाल के मौलवी की ओर से जारी किए गए फतवे का करारा जवाब देते हुए सोनू ने सिर मुंडवा लिया. अज़ान को लेकर किए गए ट्वीट्स के बाद सोनू के खिलाफ़ फतवा जारी किया गया था, जिसमें ये कहा गया था कि अगर सोनू निगम को गंजा करेगा और पुराने जूते की माला पहनाएगा उसे 10 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा. इसका जवाब सोनू ने ट्वीट करके दिया कि दोपहर 2 बजे अलीम घर आकर मेरा सिर गंजा करेगा, 10 लाख रुपये तैयार रखना मौलवी. इसके अलावा सोनू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई थी.

https://twitter.com/sonunigam/status/854548450548908032

सोनू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद सिर मुंडवा लिया. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि मैं सोच भी नहीं सकता था कि इतनी छोटी-सी बात उतनी बड़ी बन जाएगी. मुद्दा समझने की बजाय मेरी बातों को पकड़ा गया है. सोनू ने आगे कहा, “मेरा विरोध लाउडस्पीकर को लेकर था, न कि अज़ान को लेकर. मेरा मानना है कि लाउडस्पीकर धार्मिक स्थलों पर नहीं होने चाहिए. मेरे आसपास बहुत से मुस्लिम लोग हैं, मैं मुस्लिम विरोधी नहीं हूं. मेरे लिए यह गुंडागर्दी है कि कोई अपने धर्म को ज़ोर-शोर से प्रचारित करे. मैं कोई नाम नहीं लूंगा पर त्‍योहारों के दौरान ये जो लोग सड़कों पर दादागिरी के साथ नाचते हैं… ए हटो.. ए हटो… करते हैं, उससे पुलिस को परेशानी होती है. वो बेसिकली, धरम के नाम पर शराब पीके नाच रहे होते हैं, फिल्मी गाने बजा रहे होते हैं. क्या ये दादागिरी नहीं है? और अगर मैं यह मुद्दा उठा रहा हूं तो आप बुद्धिजीवियों को यह बात सही तरीक़े से समझकर उठानी चाहिए, क्योंकि आपके बच्चे भी तो उसी देश में, उसी माहौल में बढ़ने वाले हैं. क्या आप उन्हें ऐसा ही माहौल देना चाहते हैं, जिसमें हम इस वक़्त जी रहे हैं.”

कई लोगों को मोहम्मद साहब का नाम मोहम्मद लिखे जाने पर भी आपत्ति थी, जिसका जवाब देते हुए सोनू ने कहा, “ट्विटर पर जगह कम होती है. छोटे से छोटा लिखने की कोशिश होती है, इसलिए मैंने मोहम्मद साहब नहीं लिखा. यह अंग्रेज़ी भाषा की वजह से हुआ है. शिव को इंग्लिश में शिवा, राम को रामा कहा जाता है. ये मेरा उद्देश्य नहीं था कि पैगंबर की निंदा करूं. ट्विटर पर आदमी सोच समझ कर छोटा-छोटा लिखता है.
सिर मुंडवाने की बात पर उन्होंने ने कहा कि मैं यह किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं कर रहा हूं, ना ही किसी मौलाना का चैलेंज पूरा करने के लिए कर रहा हूं. मेरे बाल एक मुसलमान काटेगा. मैंं बहुत सेकुलर हूं.

FotorCreatedसाल 2016 को जल्द ही हम अलविदा कह देंगे. इस साल में कई घटनाएं हुईं. आइए, हम आपको बताते हैं कि खेल की दुनिया में क्या कुछ विवादास्पद घटा. ऐसी 5 घटनाएं, जिन्होंने भारतीय खेल और खिलाड़ियों को कटघरे में खड़ा कर दिया.

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नरसिंह यादव
2015 में नरसिंह ने लास वेगास में विश्‍व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल किया था, विवादों की जड़ थी उस समय कुश्ती संघ की ओर से कहा जाना कि कोटा देश का होता है, खिलाड़ी का नहीं. ऐसे मे खिलाड़ी का फैसला बाद में होगा. 74 किलो वर्ग में नरसिंह थे. इसी वर्ग में सुशील कुमार अभ्यास कर रहे थे. जब तय हुआ कि फेडरेशन सुशील को नहीं भेजेगा, तो वो अदालत चले गए. अदालत का फैसला भी नरसिंह के पक्ष में आया. इस बीच नरसिंह सोनीपत में हुए डोप टेस्ट में दोषी पाए गए. तमाम राजनीतिक दबाव के बीच उन्हें नाडा ने बरी किया. लेकिन रियो में वाडा पैनल ने चार साल का बैन उन पर लगा दिया. 2016 का साल नरसिंह कभी नहीं भूल पाएंगे.

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हॉकी प्लेयर सरदार सिंह
2016 में हॉकी की ओर से सरदार सिंह पर एक ब्रिटिश मूल की लड़की के साथ रेप की ख़बरों ने तहलका मचा दिया था. इसके चलते ही रियो ओलिंपिक में सरदार को कप्तान नहीं बनाया गया. सरदार सिंह के कारण हॉकी को 2016 में अदालत के कटघरे में खड़ा होना पड़ा.

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पेस-बोपन्ना
आमतौर पर लिएंडर पेस इस तरह के विवादों से बचते हैं, लेकिन 2016 में उन्होंने इसकी परवाह किए बग़ैर एक सीनियर प्लेयर होने के बावजूद रोहन मामले में अपनी तीखी प्रतिक्रिया दिखाई, रियो ओलिंपिक में जाने के लिए जहां दूसरे खिलाड़ी तैयारियों में व्यस्त थे, वहीं भारत के लिएंडर पेस बोपन्ना के साथ नहीं खेलने को लेकर दुनिया के हॉट न्यूज़ में शामिल थे. इन दोनों का विवाद ओलिंपिक गेम पर पड़ा और भारत को कोई भी मेडल नहीं मिला. इंटरनेशनल लेवल पर इसकी काफ़ी आलोचना हुई.

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ओपी जैशा का आरोप
ओपी जैशा ने पूरे खेल जगत को अपने आरोपों से हिला दिया. उन्होंने कहा कि मैराथन के दौरान उन्हें पानी नहीं दिया गया. कोई भारतीय स्टॉल पर नहीं था. जैशा बेहद गरीब घर से आई हैं. उनके आरोपों को गंभीरता से लिया गया. लेकिन बाद में पाया गया कि आरोप सच नहीं हैं. नियमों के मुताबिक स्टॉल पर पानी था.

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आईओए का कलमाड़ी सिलेक्शन
साल के ख़त्म होते-होते आईओए ने एक ऐसा फैसला देश के सामने रखा, जिसने खेल जगत को ही हिलाकर रख दिया. ये फैसला था सुरेश कलमाड़ी को आईओए का आजीवन अध्यक्ष बनाना. ये जानते हुए कि सुरेश कलमाड़ी पर 2010 कॉमवेल्थ गेम्स में भ्रष्टाचार का आरोप है.

– श्वेता सिंह