couple goals

तुम मुझे अब पहले की तरह प्यार नहीं करते, तुम्हें अब मेरी परवाह कहां रहती है, तुम्हें तो मुझमें सिर्फ कमियां ही नज़र आती हैं… जैसे उलाहने देना पति-पत्नी के बीच आम बात है. क्या होती हैं पति-पत्नी की शिकायतें और प्यार में क्या चाहते हैं स्री-पुरुष? आइए जानते हैं.

Love Life

1) ख़ूबियां क्यों खामियों में बदल जाती हैं?
शादी के शुरुआती सालों में तो सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन साल-दो साल में ही मुहब्बत की स्क्रिप्ट कमज़ोर पड़ने लगती है. दूसरे शब्दों में कहें तो तुम्हारे दीदार से सुबह की शुरुआत हो, तुम्हारे पहलू में ही हर शाम ढले… के दावे धीरे-धीरे दम तोड़ने लगते हैं. शादी के बाद घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के बोझ तले मुहब्बत अपना असर खोने लगती है और एक-दूसरे में सिर्फ ख़ूबियां ढूढ़ने वाले शख्स बात-बात पर एक-दूसरे की खामियां गिनाने लगते हैं.

2) क्यों टूटती हैं उम्मीदें?
एक-दूसरे पर दोषारोपण की एक ख़ास वजह होती है एक-दूसरे से ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें, जिसमें महिलाएं पुरुषों से कहीं आगे होती हैं. पुरुष पत्नी के साथ वैसा ही व्यवहार करता है, जैसा उसने अपने पिता का मां के प्रति देखा था, लेकिन पत्नी उसे एक अच्छे दोस्त, बहुत प्यार करने वाले प्रेमी, जिम्मेदार पिता के रूप में देखना चाहती है. पत्नी अगर कामकाजी हो, तो वो उम्मीद करती है कि पति घरेलू जिम्मेदारियों में भी उसका साथ दे. यदि वो ऑफिस से आकर खुद को बहुत थका हुआ महसूस कर रही है, तो पति किचन के कामों में उसकी मदद करे, बच्चे के स्कूल की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग के लिए समय निकाले, ज़रूरत पड़े तो अपने कपड़े खुद प्रेस कर ले… लेकिन ़ज़्यादातर पुरुष इन तमाम ज़िम्मेदारियों को बांटना नहीं चाहते, उन्हें लगता है कि घरेलू काम सिर्फ पत्नी की ज़िम्मेदारी है.

3) क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सीमा हिंगोरानी के अनुसार- स्त्री-पुरुष को प्रकृति ने एक-दूसरे से बिल्कुल अलग बनाया है. स्त्रियां अपनी भावनाओं को आसानी से अभिव्यक्त कर लेती हैं, लेकिन पुरुषों के लिए ये इतना आसान नहीं होता. दूसरा फर्क़ ये भी है कि महिलाएं इमोशनल और ड्रीमी होती हैं, जबकि पुरुष पैक्टिकल होते हैं. पुरुष प्यार तो करता है, लेकिन बात-बात में उसे ज़ाहिर करना ज़रूरी नहीं समझता. हमारे पास ऐसे कई केस आते हैं जहां बीवी की शिकायत होती है कि पति उसका हाथ नहीं पकड़ते, ऑफिस जाते समय उसे किस नहीं करते. जबकि पुरुष की शिकायत होती है कि बीवी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें रखती है. एक केस तो ऐसा भी आया, जिसमें पत्नी को पति से ये शिकायत थी कि पति ने उसे एनिवर्सरी ग़िफ़्ट देने के बजाय पैसे थमा कर कह दिया कि अपने लिए ग़िफ़्ट ख़रीद लेना. वहीं पति महोदय की शिकायत थी कि पत्नी को उनके लाए तोहफे कभी पसंद नहीं आते, इसलिए उन्होंने पत्नी से ख़रीद लाने को कहा. यदि वह चाहती तो मैं उसके साथ चल सकता था. दरअसल, स्त्री-पुरुष के ब्रेन की वायरिंग ही अलग-अलग होती है. पत्नी चाहती है कि पति उसे दिन में 2-3 बार फोन करे, एसएमएस करे, जबकि पति को लगता है कि जब शाम को घर ही जाना है तो फ़ोन या एसएमएस की ज़रूरत क्या है.

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4) नज़रिया अपना-अपना

  • बैंक कर्मचारी सागरिका शर्मा कहती हैं, बहुत खीज होती है जब ऑफिस टाइम पर पहुंचने के लिए सुबह जल्दी उठकर घर के सारे काम निपटाने पड़ते हैं और पति महोदय को बिस्तर पर चाय चाहिए होती है. उस पर उनके कपड़े, लंच बॉक्स, टाई, पेन सब कुछ हाथ में थमाने पड़ते हैं. कई बार इस बात को लेकर अनबन भी होती है, लेकिन इन पर तो कोई असर ही नहीं होता. आखिर थक-हारकर मुझे ही सारा कुछ करना पड़ता है. बच्चों का होमवर्क कराना भी इन्हें बोझ लगता है.
  • एक प्राइवेट फर्म में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत सार्थक मेहरा कहते हैं, औरतें वंडरलैंड से बाहर निकलना ही नहीं चाहतीं, उन्हें लगता है कि पति ज़िंदगीभर उनसे चांद-तारे तोड़ लाने की खयाली बातें करता रहे या फिर उनकी ख़ूबसूरती के कलमे पढ़े. हर दूसरे-तीसरे दिन पत्नी की शिकायत शुरू हो जाती है कि कितने दिन से कहीं घूमने नहीं गये, आप अब पहले की तरह बाय करके ऑफ़िस नहीं जाते, कभी डिनर पर ले जाने का नाम नहीं लेते… इन तमाम शिकायतों से बचने के लिए मैं जान बूझकर काम का बहाना बनाकर देर से घर लौटता हूं. ठीक है, शादी के शुरुआती दिनों में पति कुछ ज्यादा ही दरियादिली दिखा देते हैं, लेकिन ऐसा उम्रभर तो नहीं हो सकता, पर ये सब इन बीवियों को कौन समझाए.
  • ऐड एजेंसी में कार्यरत मेघना पुरी कहती हैं, पुरुषों की शिकायत होती है कि पत्नी को हमेशा उनसे शिकायत रहती है, लेकिन इसके पीछे वजह भी तो साफ है, क्योंकि तकलीफ़ भी उन्हीं को ज़्यादा होती है. आज ज़्यादातर घरों में औरतें फाइनेंशियल, इमोशनल, सारे काम संभाल रही हैं, इसके बावजूद उनकी स्थिति पहले जैसी, बल्कि पहले से बदतर हो गई है. उसकी एडिशनल ज़िम्मेदारियों को तो पति एक्सेप्ट कर लेते हैं, बाहरी दुनिया में उससे मॉर्डन अप्रोच भी रखते हैं, लेकिन जहां घर की बात आती है तो उन्हें बिल्कुल पारंपरिक पत्नी चाहिए होती है.
  • एक प्राइवेट फर्म में कार्यरत प्रणव मुखर्जी कहते हैं, जहां तक फ्रीडम की बात है, तो मुझे इसमें किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं. मैं प्राची (पत्नी) के पर्सनल मैटर में ख़ुद भी हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन जब वो इतनी स्मोकिंग क्यों करते हो, तुम्हारा यूं रात-रात तक दोस्तों में घिरे रहना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं, तुम्हारे ऑफिस की लड़कियां इतनी रात गये क्यों फोन करती हैं, इतना वल्गर एसएमएस किसने भेजा… ऐसी बेहूदा शिकायतें करती है तो मैं चिढ़ जाता हूं. भई मैं क्यों किसी के लिए अपनी ख़ुशी को दांव पर लगाऊं, फिर चाहे वो मेरी पत्नी ही क्यों न हो.

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5) प्यार को प्यार ही रहने दो
प्यार जताने या एक-दूसरे पर दोषारोपण करने का सभी कपल्स का तरीक़ा भले ही अलग-अलग हो, लेकिन ये बात तो तय है कि जब भी पार्टनर ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद की जाती है, तब रिश्ते में कड़ुवाहट का सिलसिला शुरू हो जाता है. प्यार के इतिहास, भूगोल पर टीका-टिप्पणी किये बिना यदि प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो की तर्ज़ पर स़िर्फ महसूस किया जाए या निभाया जाए, तो शायद हम प्यार के इस ख़ूबसूरत रिश्ते का उम्रभर लुत्फ़ उठा सकते हैं.

6) कंसास यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि महिलाओं को अपनी प्रशंसा सुनना अच्छा लगता है. कॉम्प्लिमेंट्स या फ्लैटरिंग (प्रशंसा या चापलूसी) से महिलाओं में आत्मविश्वाछस बढ़ता है और वे अपने शरीर को लेकर हीनभावना की शिकार नहीं होतीं. शायद ये भी एक बड़ी वजह है पत्नी की पति से अपनी तारीफ़ की चाह रखने की.

7) ये है प्यार का केमिकल लोचा
रॉबर्ट फ्रेयर द्वारा किये गए प्रयोगों के अनुसार, जब किसी को प्यार हो जाता है, तो एक ख़ास तरह के न्यूरो केमिकल फिनाइल इथाइल अमीन की वजह से उसे प्रेमी/प्रेमिका में खामियां नज़र आना बंद हो जाता है. लेकिन यह रसायन हमेशा एक ही स्तर पर नहीं रहता. एक-दो साल बाद इसका स्तर शरीर में कम होता जाता है और चार-पांच साल बाद इसका प्रभाव शरीर पर बिल्कुल बंद हो जाता है. अतः इसके उतार-चढ़ाव का प्रभाव प्रेमियों के स्वभाव में भी साफ़ नज़र आता है. यानी जब प्रेम का उफान कम होने लगता है, तो एक-दूसरे की ख़ूबियां खामियों में बदलने लग जाती हैं.

Couple Goals

8) प्यार बढ़ाने के असरदार फॉर्मूले

  • ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षाओं से बचें.
  • प्यार करें, अधिकार जताएं, पर हकूमत न करें.
  • पति-पत्नी के परंपरागत फ्रेम से बाहर निकलकर अच्छे दोस्त बनें.
  • पज़ेसिव होने से बचें.
  • करीब रहें, पर इतना भी नहीं कि सांस लेना मुश्किल लगने लगे. रिश्तों के स्पेस को समझें.
    – कमला बडोनी

दिल के रिश्ते का हर एहसास ख़ास होता है… दिल मिलने पर जितनी ख़ुशी होती है, दिल टूटने पर दर्द भी उतना ही ज़्यादा होता है… कहते हैं, पुरुष अपने दिल का दर्द ज़ाहिर नहीं करते… तो फिर दिल टूटने का पुरुषों पर क्या होता है असर?

How Men Deal With Breakups

ब्रेकअप का पुरुषों पर ये होता है असर
ब्रेकअप का अलग-अलग पुरुषों पर अलग असर होता है. ब्रेकअप का दर्द शायद सभी पुरुषों को एक-सा हो, लेकिन इस दर्द से उबरने के लिए हर पुरुष अपना अलग तरीका खोज निकालता है. आमतौर पर ब्रेकअप का पुरुषों पर ये असर होता है:

1) ख़ुद को नशे में डुबो देना
ब्रेकअप के बाद अक्सर कई पुरुष अपना दर्द और अपने एक्स को भुलाने के लिए बहुत ज़्यादा सिगरेट-शराब पीने लगते हैं. इसका असर उनकी पर्सनल, प्रोफेशनल और सोशल लाइफ पर भी पड़ने लगता है. ज़्यादा शराब पीकर कई पुरुष दूसरों से झगड़ा या गाली-गलौज भी करने लगते हैं. घर वालों के समझाने पर उन्हें भी भला-बुरा कह देते हैं. ब्रेकअप का दर्द उन्हें इतना आहत करता है कि वो न तो अपने करियर पर फोकस कर पाते हैं और न ही उनका किसी चीज़ में मन लगता है.

2) लोगों से मिलने से कतराना
ब्रेकअप को कई पुरुष अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते हैं. उन्हें लगता है कि किसी से मिलने पर यदि किसी ने उनसे उनके रिलेशनशिप के बारे में पूछ लिया, तो वे उसे क्या जवाब देंगे. ब्रेकअप के बाद पुरुष अपने रिश्ते के बारे में डिस्कस नहीं करना चाहतेे इसलिए वो लोगों से मिलने से कतराने लगते हैं.

3) सच्चाई स्वीकार न कर पाना
कई पुरुष ये बात स्वीकार ही नहीं पाते कि कोई महिला उन्हें लाइफ पार्टनर बनाने से इनकार कर सकती है. ब्रेकअप की बात सोचते ही उनके अहम् को ठेस लगती है इसलिए वो ये ये सच्चाई स्वीकारना ही नहीं चाहते कि किसी महिला ने उनका दिल तोड़ा है. इस बात का उनकी पर्सनैलिटी पर भी गहरा असर होता है. ऐसे लोग समझ ही नहीं पाते कि अब उन्हें आगे क्या करना है.

4) सारा दोष महिला पार्टनर से सिर मढ़ देना
कई पुरुष ये बात मानना ही नहीं चाहते कि उनके ब्रेकअप के लिए वो भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं, जितना कि उनकी महिला पार्टनर. वो हर किसी से यही कहते फिरते हैं कि उनकी पाटर्नर इस रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने लायक ही नहीं थी इसलिए उन्हें मजबूरन उससे रिश्ता तोड़ना पड़ा.

5) बिज़ी रहने की एक्टिंग करना
ब्रेकअप हो जाना कई पुरुषों को अपनी बेइज़्ज़ती लगती है इसलिए वो इस बात से डरते रहते हैं कि कोई उनसे उनके ब्रेकअप के बारे में न पूछ लें. दोस्तों और करीबियों के सवालों से बचने के लिए वो बिज़ी रहने की एक्टिंग करने लगते हैं. कई बार ऐसे लोग ख़ुद को काम में इतना डुबो देते हैं कि उन्हें अपने बारे में सोचने तक का समय नहीं मिल पाता.

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Breakups

6) घंटों जिम में बिताना
कई पुरुष ब्रेकअप के बाद जिम में अधिक समय बिताते हैं. ऐसा वो इसलिए करते हैं ताकि अपना ग़ुस्सा और फ्रस्ट्रेशन जिम में जाकर रिलीज़ कर सकें. उन्हें किसी से मिलने या बात करने की इच्छा नहीं होती इसलिए वो जिम में ख़ुद को थकाकर अपना ग़ुस्सा शांत करते हैं. ब्रेकअप के बाद जो पुरुष जिम में अधिक समय बिताते हैं, कई बार वो अपनी क्षमता से अधिक एक्सरसाइज़ करके ख़ुद को नुक़सान तक पहुंचा देते हैं.

7) किसी भी महिला पर विश्‍वास न करना
ब्रेकअप के बाद कई पुरुषों का महिलाओं पर से विश्‍वास उठ जाता है. दिल का रिश्ता टूटने का उन पर इतना बुरा प्रभाव पड़ता है कि वो फिर किसी महिला पर विश्‍वास ही नहीं कर पाते. ऐसे पुरुषों को फिर से दिल लगाने में बहुत दिक्कत होती है. जब तक कोई महिला उनका विश्‍वास न जीत ले, वो तब तक महिलाओं से दूर ही रहते हैं.

8) मल्टीपल पार्टनर बनाना
दिल टूटने का अलग-अलग पुरुषों पर अलग असर होता है. दिल टूटने पर कई पुरुष महिलाओं से दूर रहते हैं, तो कई पुरुष मल्टीपल पार्टनर बना लेते हैं यानी एक साथ एक से ज़्यादा महिला पार्टनर के साथ रोमांस करने लगते हैं. मल्टीपल पार्टनर बनाने वाले पुरुष शादी के रिश्ते में नहीं बंधना चाहते, वो बस महिला पार्टनर का साथ चाहते हैं, उन्हें लाइफ पार्टनर नहीं बनाना चाहते.

9) डेटिंग ऐप्स का सहारा लेना
ब्रेकअप के दर्द से उबरने के लिए कई पुरुष डेटिंग ऐप्स का सहारा लेने लगते हैं. ऐसे पुरुष अपना अधिकतर समय डेटिंग ऐप्स में बिताने लगते हैं. वो डेटिंग ऐप्स के माध्यम से कई लड़कियों से मिलते-जुलते हैं और अपना ग़म दूर करने की कोशिश करते हैं.

10) सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना
सोशल मीडिया अकेलापन दूर करने का आसान माध्यम बन गया है. सोशल मीडिया का सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि आप अपने मोबाइल स्क्रीन पर उंगलियां फिराते हुए कई लोगों से जुड़ सकते हैं. आपको न उनसे मिलने की ज़रूरत है और न ही उन्हें अपना चेहरा दिखाने की ज़रूरत है. ऐसे में अकेलेपन के शिकार कई लोग सोशल मीडिया पर अपना अधिकतर समय बिताते हैं. अपने करीबियों से मिलने-जुलने के बजाय उन्हें घर बैठे अजनबियों से बातें करना अच्छा लगने लगता है. वो सोशल मीडिया की आभासी दुनिया अपना ग़म भुलाने की कोशिश करते रहते हैं.

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How To Deal With Breakups
 ब्रेकअप के दर्द से कैसे उबरें पुरुष?
हालांकि दिल टूटने के दर्द से उबरना आसान नहीं, लेकिन ज़िंदगी में आगे बढ़ना भी ज़रूरी है. ब्रेकअप के दर्द से उबरने के लिए क्या करें पुरुष? आइए, जानते हैं.

1) शी-टॉक्स शुरू करें 
जिस तरह हम अपने शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकालने के लिए डीटॉक्स करते हैं, उसी तरह अपने पुराने रिश्ते से बाहर निकलने के लिए शी-टॉक्स शुरू करें. इसके लिए अपने एक्स से जुड़ी सभी यादों को ख़ुद से दूर करें. सोशल मीडिया पर उसे अनफ्रेंड करें, उसका नंबर डिलीट कर दें, इस तरह आप बार-बार उसे देखने या उसके बारे में जानने से बच पाएंगे और अपना ध्यान अपने काम पर लगा पाएंगे.

2) पुरानी यादों को जला दें
करीना कपूर और शाहिद कपूर की फिल्म जब वी मेट का वो सीन आपको याद होगा, जब शाहिद कपूर अपने एक्स की यादें मिटाने के लिए करीना कपूर से उसकी तस्वीर को जलाकर कमोड में फ्लश करने को कहते हैं, ताकि करीना उसकी यादों को भुला सके. आप भी ऐसा कर सकते हैं. बार-बार अपने एक्स की फोटो देखकर दुखी होने के बजाय उसकी फोटो को जलाकर अपने दिल को समझाएं कि अब वो आपकी ज़िंदगी में नहीं है.

3) एक्स से दोस्ती न रखें
कई लोग रिश्ता ख़त्म होने के बाद भी दोस्त बने रहना चाहते हैं. ऐसा करना तब सही होता है, जब आप अपनी दोस्ती को स़िर्फ दोस्ती की नज़र से देखें, लेकिन आपके मन में यदि अब भी अपने एक्स के लिए वही भावनाएं हैं, तो बेहतर होगा कि आप उससे दोस्ती भी न रखें. अपने एक्स को भुलाने के लिए आप उससे दूर ही रहें.

ये प्यार इतना कॉम्प्लिकेटेड क्यों है? देखें वीडियो:

4) ख़ुद को नशे से दूर रखें
ब्रेकअप के दर्द को भुलाने के लिए यदि आप भी ख़ुद को नशे में डुबो देते हैं, तो ये आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है. नशा करने की बजाय अपने शौक के लिए व़क्त निकालें, वो चीज़ें करें जो आपको अच्छी लगती हैं.

5) महिलाओं से दूर न भागें
यदि एक महिला ने आपका दिल तोड़ा है, तो इसका ये मतलब नहीं कि सभी महिलाएं ऐसी ही होती हैं. अत: महिलाओं से कतराएं नहीं, बल्कि उनसे बात करें. यदि कोई महिला दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाए, तो ख़ुद को एक और चांस दें और जीवन में आगे बढ़ें.

6) ख़ुद से प्यार करें
हर इंसान का ये फर्ज़ है कि वो दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुद से प्यार करें. यदि आप ख़ुद से प्यार करेंगे, तभी आप दूसरों से भी उतना ही प्यार कर सकेंगे. हमेशा जीवन का सकारात्मक पहलू देखें. एक रिश्ता टूट जाने से ज़िंदगी ख़त्म नहीं होती. आज यदि आपका दिल टूटा है, तो इस बात पर विश्‍वास रखें कि आपके जीवन में इससे भी अच्छा लाइफ पार्टनर आने वाला है. ज़िंदगी एक बार मिलती है इसलिए उसे खुलकर जीएं. आप बस ख़ुद से प्यार करें, आपके जीवन में प्यार की कभी कमी नहीं होगी.

– कमला बडोनी

Affair Stories

पहला अफेयर: इतना-सा झूठ (Pahla Affair: Itna Sa Jhooth)

प्यार करने की भी भला कोई उम्र होती है क्या? पंद्रह से पच्चीस वर्ष, बस इसी बीच आप प्यार कर सकते हैं, इसके आगे-पीछे नहीं. फिल्मों और कहानियों से तो ऐसा ही लगता है. नायक-नायिका न केवल जवां होने चाहिए, बल्कि उनका हसीन होना भी ज़रुरी है. सच पूछो तो इस उम्र के बाद का प्यार अधिक परिपक्व होता है, उसमें वासना का स्थान गौण हो जाता है और इस उम्र के पहले का प्यार तो और भी पवित्र होता है. निश्छल- हां बस यही एक शब्द है उसका बखान करने के लिए. और जब भी उस निश्छल प्यार के बारे में सोचती हूं तो मेरे सामने किशोर आ खड़ा होता है. सातवीं कक्षा में पढ़ता अल्हड़ किशोर.

हमारे ग्रुप में बिल्डिंग के बहुत से बच्चे थे. उन्हीं में से एक था- किशोर. बारह वर्षीय किशोर स्वयं को बहुत समझदार समझता था. उसके बड़े भाई का उन्हीं दिनों विवाह हुआ था एवं उसने अपने किशोर मन में कहीं यह ठान लिया था कि वह शादी करेगा तो स़िर्फ मुझसे. मैं तो खैर इन बातों से अनभिज्ञ तब तीसरी कक्षा में पढ़ती थी. बहुत नादान थी.

उन दिनों टी.वी., फ़िल्में उतनी प्रचलित नहीं थीं. हम कभी घर-घर खेलते, शादी-ब्याह करवाते-बच्चों की अपनी एक अलग दुनिया थी. इसके अलावा प्रायः हम छोटे-छोटे नाटक भी अभिनीत करते. किसी की मां की साड़ी का पर्दा बन जाता और बड़ी बहनों के दुपट्टों से पगड़ी और धोती. किशोर की हमेशा यह ज़िद रहती कि वह मेरे साथ ही काम करेगा. यदि मैं नायिका का रोल कर रही हूं तो वह नायक का करेगा और यदि मैं मां का पार्ट कर रही हूं तो वह पिता का करेगा.

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बचपन किशोरावस्था का समय कब पंख लगाकर उड़ जाता है, पता ही नहीं चलता. समय के साथ-साथ हमारी मित्र मंडली भी तितर-बितर हो गई अपने अभिभावकों के संग. पिताजी के तबादलों के कारण हर वर्ष नया शहर, नया स्कूल होता. शेष रह गईं बचपन की यादें. पर किशोर ने उन यादों को कुछ अधिक ही संजो रखा था. अपने उस इरादे पर वह सचमुच संजीदा था.

विधि का विधान देखो, मेरा विवाह तय हुआ भी तो किशोर के ममेरे भाई से और राज़ खुला कार्ड छपने के बाद, जब उसके हाथ वह कार्ड लगा. कार्ड हाथ में लिए ही वह हमारे घर आया. पास ही के शहर में हम रहते थे. पर क्या हो सकता था तब? उसने अपने प्यार की बहुत दुहाई दी. एक अपरिचित व्यक्ति से बंधने के स्थान पर उससे विवाह करना जिसने मुझे ताउम्र चाहा- मेरे लिए बहुत बड़ा प्रलोभन था.

अरसा बीत गया. यूं कहो कि जीवन ही बीत गया. पर मैंने भरसक उससे दूरी बनाए रखी. किसी उत्सव में उसकी उपस्थिति की संभावना मात्र से ही मैं वहां जाना टाल जाती. शादी-ब्याह में शामिल होना ज़रूरी हो जाता तो शादी की भीड़ में गुम हो जाने की कोशिश करती, पर क़रीबी रिश्ता होने से अनायास सामना हो ही जाता. और मुझसे नज़रें मिलते ही उसकी आंखों के चिराग़ दहक उठते. मैं भी उस ताप से कहां बच पाती हूं. मन का चोर हमें सामान्य बातचीत करने से भी रोक देता है. वह आज भी मुझे उसी शिद्दत से चाहता है . यह मात्र मेरी कल्पना नहीं- उसकी पत्नी मालिनी ने स्वयं मुझसे कहा था. कभी क्रोध के ज्वार में उसने अपने जीवन की पूरी निराशा, पूरी कुण्ठा, पत्नी पर उड़ेल दी और वह मेेरे पास आई थी सफ़ाई मांगने.

“मेरे लिए वह मात्र ससुराल पक्ष का रिश्तेदार है. इससे अधिक मैंने उसे कुछ नहीं माना.” मैंने मालिनी को पूरा विश्‍वास दिलाते हुए कहा था. मैं जानती हूं यह सच नहीं. पर सच बोलकर भला दो घरों की शांति भंग क्यों करूं? बच्चों की भावनाओं, उनके सुरक्षित भविष्य पर ठेस पहुंचाऊं? अपने निर्दोष पति और निर्दोष मालिनी का सुख-चैन छीनूं?

इन सबके लिए मेरा इतना-सा झूठ क्षम्य नहीं है क्या?

– उषा

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Pahla Affair, Mohabbat, love story

पहला अफेयर: मुहब्बत उम्र की मोहताज नहीं (Pahla Affair: Mohabbat Umra Ki Mohtaj Nahi)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

ईश्‍वर ने जब इस सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने सृष्टि की प्रत्येक वस्तु को नियमों में बांध दिया. सूरज के उगने और डूबने का स्थान और समय पहले से निर्धारित कर दिया. जहां पंछियों को उड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, वहीं इंसान आकाश में मुक्त होकर विचरण करने की कल्पना तक नहीं कर सकता. जहां दिन का आगमन रोशनी के साथ होता है, वहीं रात का स्वागत अंधकार करता है. लेकिन स़िर्फ एक ही चीज़ है इस सृष्टि में, जिसको ईश्‍वर ने सभी नियमों से मुक्त रखा है. वह चीज़ है- प्यार!

प्यार किसी को भी, कहीं भी, किसी से भी हो सकता है. यह इस सृष्टि की सबसे रहस्यमयी रचना है. प्रेम में उम्र और जन्म का बंधन कोई मायने नहीं रखता. यही वजह है कि मुझे जिस व्यक्ति से प्यार हुआ, वो मुझसे उम्र में 22 साल बड़े थे. जब इस ख़ूबसूरत एहसास को मैंने पहली बार महसूस किया, उस व़क्त मेरी उम्र मात्र 16 साल थी और वो 38 साल के थे. वो शादीशुदा थे.

मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद है, जब मेरे मोबाइल पर उनका संदेश आया था. मेरे मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से कुछ रोमांटिक पंक्तियां आई थीं. मैंने सोचा कि कोई लड़का मेरे साथ बदमाशी कर रहा है. मैंने ग़ुस्से में आकर फोन लगाया और जमकर उनको बातें सुनाईं, पर उन्होंने मेरी गालियों का ज़रा भी बुरा नहीं माना, बल्कि नम्रतापूर्वक मुझसे आग्रह किया कि मैं उनकी दोस्ती स्वीकार कर लूं.

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पता नहीं, उनकी आवाज़ में क्या जादू था कि मुझ जैसी लड़की, जो हमेशा लड़कों से दूर रहती थी, ने एक अंजान शख़्स के आग्रह को स्वीकार कर लिया. इस घटना के बाद लगभग 20 दिनों तक हम एक-दूसरे से फोन पर बातें करते रहे. इन 20 दिनों में मैं यह तो बहुत अच्छी तरह समझ चुकी थी कि ये वही हंसान हैं, जिसकी मुझे तलाश थी.

इन 20 दिनों के बाद हम कई बार एक-दूसरे से समंदर के किनारे मिले. समंदर के किनारे बैठकर हम दोनों ही आई पॉड पर बजते संगीत का आनंद लेते थे और बिना एक-दूसरे से एक शब्द भी बोले अंधेरा होने तक समंदर को निहारते रहते थे. उस पल मुझे ऐसा महसूस होता था कि काश! ऐसा होता कि मैं अपनी सारी ज़िंदगी इसी तरह उनके साथ समंदर के किनारे बैठकर गुज़ार देती.

ऐसी ही एक ख़ूबसूरत शाम थी, जब उन्होंने मुझे अपनी बांहों में लेकर चूमा था. वो मेरी ज़िंदगी के पहले और आख़िरी पुरुष थे, जिन्होंने मेरे शरीर के साथ-साथ मेरी आत्मा को भी छुआ था. हमें एक-दूसरे से मिले स़िर्फ एक साल ही हुआ था कि उनका तबादला दूसरे शहर में हो गया. उसके बाद हम कभी नहीं मिले.

मेरी तो दुनिया ही वीरान हो गई. इस बीच उनका पत्र मुझे मिला, जिसमें उन्होंने अपने प्रेम का इज़हार किया और इस असफल प्रेम कहानी पर दुख व्यक्त किया. वो मजबूर थे. एक तरफ़ उनकी पत्नी और बेटे की ज़िम्मेदारी थी, तो दूसरी तरफ़ हमारे प्रेम को समाज की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं होती.

आज इस बात को 20 साल हो गए, पर आज भी मैं उनको भूल नहीं पाई. मेरे जीवन का कोई ऐसा दिन नहीं गुज़रता जब मैं उनको याद नहीं करती. ईश्‍वर से यही दुआ करती हूं कि वो जहां भी रहें, हमेशा ख़ुश रहें.

हालांकि मेरी क़िस्मत में उनसे जुदाई ही लिखी है, जिसे मैंने अब स्वीकार कर लिया है, क्योंकि किसी ने सच ही कहा है- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता…

– सोनी दुबे

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