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पहला अफेयर: इतना-सा झूठ (Pahla Affair: Itna Sa Jhooth)

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पहला अफेयर: इतना-सा झूठ (Pahla Affair: Itna Sa Jhooth)

प्यार करने की भी भला कोई उम्र होती है क्या? पंद्रह से पच्चीस वर्ष, बस इसी बीच आप प्यार कर सकते हैं, इसके आगे-पीछे नहीं. फिल्मों और कहानियों से तो ऐसा ही लगता है. नायक-नायिका न केवल जवां होने चाहिए, बल्कि उनका हसीन होना भी ज़रुरी है. सच पूछो तो इस उम्र के बाद का प्यार अधिक परिपक्व होता है, उसमें वासना का स्थान गौण हो जाता है और इस उम्र के पहले का प्यार तो और भी पवित्र होता है. निश्छल- हां बस यही एक शब्द है उसका बखान करने के लिए. और जब भी उस निश्छल प्यार के बारे में सोचती हूं तो मेरे सामने किशोर आ खड़ा होता है. सातवीं कक्षा में पढ़ता अल्हड़ किशोर.

हमारे ग्रुप में बिल्डिंग के बहुत से बच्चे थे. उन्हीं में से एक था- किशोर. बारह वर्षीय किशोर स्वयं को बहुत समझदार समझता था. उसके बड़े भाई का उन्हीं दिनों विवाह हुआ था एवं उसने अपने किशोर मन में कहीं यह ठान लिया था कि वह शादी करेगा तो स़िर्फ मुझसे. मैं तो खैर इन बातों से अनभिज्ञ तब तीसरी कक्षा में पढ़ती थी. बहुत नादान थी.

उन दिनों टी.वी., फ़िल्में उतनी प्रचलित नहीं थीं. हम कभी घर-घर खेलते, शादी-ब्याह करवाते-बच्चों की अपनी एक अलग दुनिया थी. इसके अलावा प्रायः हम छोटे-छोटे नाटक भी अभिनीत करते. किसी की मां की साड़ी का पर्दा बन जाता और बड़ी बहनों के दुपट्टों से पगड़ी और धोती. किशोर की हमेशा यह ज़िद रहती कि वह मेरे साथ ही काम करेगा. यदि मैं नायिका का रोल कर रही हूं तो वह नायक का करेगा और यदि मैं मां का पार्ट कर रही हूं तो वह पिता का करेगा.

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बचपन किशोरावस्था का समय कब पंख लगाकर उड़ जाता है, पता ही नहीं चलता. समय के साथ-साथ हमारी मित्र मंडली भी तितर-बितर हो गई अपने अभिभावकों के संग. पिताजी के तबादलों के कारण हर वर्ष नया शहर, नया स्कूल होता. शेष रह गईं बचपन की यादें. पर किशोर ने उन यादों को कुछ अधिक ही संजो रखा था. अपने उस इरादे पर वह सचमुच संजीदा था.

विधि का विधान देखो, मेरा विवाह तय हुआ भी तो किशोर के ममेरे भाई से और राज़ खुला कार्ड छपने के बाद, जब उसके हाथ वह कार्ड लगा. कार्ड हाथ में लिए ही वह हमारे घर आया. पास ही के शहर में हम रहते थे. पर क्या हो सकता था तब? उसने अपने प्यार की बहुत दुहाई दी. एक अपरिचित व्यक्ति से बंधने के स्थान पर उससे विवाह करना जिसने मुझे ताउम्र चाहा- मेरे लिए बहुत बड़ा प्रलोभन था.

अरसा बीत गया. यूं कहो कि जीवन ही बीत गया. पर मैंने भरसक उससे दूरी बनाए रखी. किसी उत्सव में उसकी उपस्थिति की संभावना मात्र से ही मैं वहां जाना टाल जाती. शादी-ब्याह में शामिल होना ज़रूरी हो जाता तो शादी की भीड़ में गुम हो जाने की कोशिश करती, पर क़रीबी रिश्ता होने से अनायास सामना हो ही जाता. और मुझसे नज़रें मिलते ही उसकी आंखों के चिराग़ दहक उठते. मैं भी उस ताप से कहां बच पाती हूं. मन का चोर हमें सामान्य बातचीत करने से भी रोक देता है. वह आज भी मुझे उसी शिद्दत से चाहता है . यह मात्र मेरी कल्पना नहीं- उसकी पत्नी मालिनी ने स्वयं मुझसे कहा था. कभी क्रोध के ज्वार में उसने अपने जीवन की पूरी निराशा, पूरी कुण्ठा, पत्नी पर उड़ेल दी और वह मेेरे पास आई थी सफ़ाई मांगने.

“मेरे लिए वह मात्र ससुराल पक्ष का रिश्तेदार है. इससे अधिक मैंने उसे कुछ नहीं माना.” मैंने मालिनी को पूरा विश्‍वास दिलाते हुए कहा था. मैं जानती हूं यह सच नहीं. पर सच बोलकर भला दो घरों की शांति भंग क्यों करूं? बच्चों की भावनाओं, उनके सुरक्षित भविष्य पर ठेस पहुंचाऊं? अपने निर्दोष पति और निर्दोष मालिनी का सुख-चैन छीनूं?

इन सबके लिए मेरा इतना-सा झूठ क्षम्य नहीं है क्या?

– उषा

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तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

Pyar Ki Kahaniya

तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

दस साल बीत गए… तुम्हारा चेहरा आज भी मेरी आंखों में बसा है. उस दिन के बाद न तो तुम मिले और न ही तुम्हारा कोई अता-पता. तुम्हें तो शायद मैं याद भी न हूं, पर मुझे तुम्हारी कत्थई आंखों की कशिश हर रोज़ शाम को गेटवे ऑफ इंडिया की तरफ़ खींच ले जाती है. क़दम ख़ुद-ब-ख़ुद तुम्हारे लिए चल पड़ते हैं. हर बार तुम्हें देखने और मिलने की एक उम्मीद जन्म लेती है, परंतु फिर मेरी शाम खाली हाथ लौट जाती है. वो पहली नज़र के प्रेम का एहसास आज भी मेरे अंदर सांसें ले रहा है.

कैसे भूल जाऊं वो 26 नवंबर का ताज होटल पर अटैकवाला दिन, जो इतिहास के पन्नों में एक काले, मनहूस दिन के रूप में अंकित हो चुका है. उस दिन न जाने कितनों ने अपनों को खोया था और कितनों ने अपनी जान गंवाई थी. विपरीत इसके मेरे लिए तो वो मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत, यादगार दिन था, जिसने मुझे प्यार जैसे ख़ूबसूरत एहसास से रू-ब-रू करवाया था. एकतरफ़ा ही सही, प्यार तो है.

याद है मुझे आज भी उस दिन का रोंगटे खड़े कर देनेवाला एक-एक लम्हा, जब मैंने और मेरी सहेलियों ने गेट वे ऑफ इंडिया घूमने का प्रोग्राम बनाया था. समुद्र की लहरें अपने मस्त अंदाज़ में साहिल से अठखेलियां करने में मग्न थीं कि अचानक आतंकवादियों ने मुंबई के ताज होटल पर हमला कर दिया था. थोड़ी देर पहले तक जो समां रोमांचक लग रहा था, वो करुणा से भरी चीखों, गोलियों की आवाज़ों और मदद की गुहारों में परिवर्तित हो चुका था. इसी भगदड़ में मेरी सभी सहेलियां मुझसे बिछड़ गई थीं.

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मैंने बड़ी मुश्किल से डरते-डरते एक बेंच के पीछे आश्रय लिया था. दहशत के मारे पूरा शरीर कांपने लग गया था. आंसुओं से भरी आंखें किसी तरह की मदद की खोज में थीं. पुलिस ने होटल के बाहर पूरी तरह घेराबंदी कर ली थी. जो लोग बाहर फंसे हुए थे, पुलिस उन्हें किसी तरह सुरक्षित निकालने की कोशिश में थी. मौत को इतने क़रीब देखकर मेरी शक्ति और हिम्मत जवाब देने लगी. बेहोशी मुझे अपनी आगोश में लेने को थी कि तभी किसी की मज़बूत बांहों ने मुझे थाम लिया. वो मज़बूत-गर्म बांहें तुम्हारी थीं. मेरी बेहोशी से भरी धुंधली आंखों से मुझे स़िर्फ तुम्हारी कत्थई आंखें दिखाई दे रही थीं.

“देखो, संभालो अपने आप को. बेहोश मत होना. हम किसी भी तरह यहां से सुरक्षित बाहर निकल जाएंगे…” यह कहते-कहते तुम किसी तरह मुझे होश में लाए. आंखें खुलते ही तुम्हारा चेहरा दिखा, जो मेरी आंखों में उतर गया. तुमने मुझे धीरे-धीरे पुलिस की तरफ़ चलने का इशारा किया. मैं तो तुम्हें देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठी थी. बस, तुम्हारे भरोसे एक कठपुतली बन तुम्हारा हाथ पकड़कर चल पड़ी थी साथ.

किसी तरह हम पुलिस के पास पहुंच ही गए और उन्होंने तुरंत हमें वहां से सुरक्षित बाहर निकाल दिया. मेरे लिए तुम एक फ़रिश्ता बनकर आए थे. बस, यहीं तक था हमारा साथ. सुरक्षित बाहर आते ही तुम मुझे एक टैक्सी में बैठाकर, मेरा हाथ छोड़कर मेरी नज़रों से ओझल हो गए. कहां चले गए… पता नहीं. अपना नाम, पता, सब कुछ अपने साथ ले गए. तुम तो चले गए, किंतु अपना चेहरा, अपनी कत्थई आंखें सदा के लिए मेरी आंखों में, मेरी सांसों में छोड़ गए.

आज भी मेरी शामें तुमसे मिलने के एक अटूट भरोसे पर, गेटवे ऑफ इंडिया की उसी बेंच पर तुम्हारी कत्थई आंखों के इंतज़ार में गुज़रती हैं.

– कीर्ति जैन

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पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत रिश्ता (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Rishta)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत रिश्ता (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Rishta)

रात के अंधेरे में शून्य में ताकती निगाहें… रेलगाड़ी के पहियों की आवाज़ें… जाने क्यों आज मिलकर स्मृतियों में दबी पड़ी हुई परतों को उधेड़कर चलचित्र की भांति चलने लगी थी और विक्रम का मन अपने अतीत को लेकर सोचने लगा… इस दुनिया में कोई ऐसा भी था, जो उसके दर्द को हमेशा उससे पहले ही महसूस कर लेता था. दुनिया में विक्रम ने स़िर्फ उसे ही चाहा और उसके सिवा उसने किसी और की तरफ़ मुड़कर भी नहीं देखा. श्रुति नाम था उसका. दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत रिश्ता दोस्ती का होता है और उनका आपस में ऐसा ही रिश्ता था और यह दोस्ती की मिठास में डूबा हुआ था. उनकी वफ़ाएं हमेशा एक-दूसरे के साथ थीं.

श्रुति के साथ कॉलेज में विक्रम का यह तीसरा वर्ष था. हर वर्ष की तरह इस साल भी उनके कॉलेज में वार्षिक समारोह का बड़ा शानदार आयोजन किया जा रहा था, जिसमें उन दोनों को भी भाग लेना था. लेकिन इस बार एक हास्य नाटक में दोनों को 60-65 वर्ष के उम्र के फूफा-फूफी का क़िरदार निभाना था, जिसे करने के लिए कॉलेज में कोई और तैयार नहीं था.

यही वजह थी कि दोनों को अपनी सबसे प्रिय क्लास टीचर सुश्री लता मायकेल के विशेष अनुरोध पर यह रोल करना पड़ा. नाटक के समय दोनों ने अपने रोल्स को इस तरह जीवंत कर दिया था कि पूरे कॉलेज में उनकी चर्चा होने लगी. फिर जब उनकी क्लास के छात्र-छात्राएं श्रुति को ‘फूफी’ कहकर पुकारने लगे, तो इससे नाराज़ होकर श्रुति ने टीचर से इसकी शिकायत कर दी. टीचर ने क्लास के सभी स्टूडेंट्स की परेड ली और सबको आदेश दिया कि जो भी श्रुति को ‘फूफी’ कहते हैं, अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. इस पर विक्रम को छोड़कर सभी खड़े हो गए.

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टीचर ने पूछा, “विक्रम, तुम श्रुति को ‘फूफी’ कहकर नहीं चिढ़ाते, क्यों?” तब विक्रम ने जवाब दिया, “क्योंकि मैं ‘फूफा’ बना था.” इस पर पूरी क्लास ठहाका लगाकर हंस पड़ी. पूरा रूम ठहाकों से गूंज रहा था और अचानक श्रुति का गुलाबी चेहरा मारे शर्म के लाल होता चला गया… और फिर श्रुति की हालत देख विक्रम मन ही मन शर्मिंदा हुआ. वो अपनी प्रिय दोस्त का सम्मान भी करता था. दोनों में कभी भी किसी भी बात को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था. एक-दूसरे पर उनका अटूट विश्‍वास था.

उन दोनों के परिवार भी मध्यमवर्गीय थे… आज दोपहर में विक्रम की मां ने उसे फोन पर बताया था कि श्रुति के घरवाले श्रुति का रिश्ता लेकर कल उनके घर आनेवाले हैं. अर्थात् उनकी यह दोस्ती अब प्यार व शादी में बदलनेवाली है. इससे पहले विक्रम ने कभी सोचा ही कहां था कि वह श्रुति ही होगी, जो एक दिन उसकी जीवनसंगिनी बनेगी.

अचानक रेलगाड़ी के ब्रेक लगने से उसकी तंद्रा भंग हुई… उसका शहर आ गया था…

शायद प्यार का फूल तो कहीं पनप चुका था… जिसे दोनों दोस्ती की गहरी भावना के बीच महसूस नहीं कर पाए थे, लेकिन दूसरों ने उन्हें इसका एहसास दिला दिया था… उनके पहले प्यार को मंज़िल मिल रही थी, इससे ख़ूबसूरत रिश्ता और क्या हो सकता था.

– प्रांशु राजवानी

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ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स (Side Effects Of Office Romance)

कहते हैं इश्क़ और मुश्क छिपाए नहीं छिपते… और इश्क़ यदि ऑफिस कलीग से हो जाए, तो इसकी ख़बर आग की तरह पूरे ऑफिस में फैल जाती है… और फिर शुरू होता है ऑफिस रोमांस (Office Romance) के साइइ इफेक्ट्स (Side Effects) का सिलसिला…

Side Effects Of Office Romance

बढ़ते कॉम्पटीशन ने ऑफिस में काम के घंटे बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण लोग अपना ज़्यादातर समय ऑफिस में ही बिताते हैं. ऐसे में लंबे समय तक साथ काम करते हुए अपने सहकर्मी से प्यार हो जाना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है. साथ काम करते हुए हम कलीग से अपने सुख-दुख बांटते हैं, एक-दूसरे की रुचियों को जानते हैं. ऐसे में जब कोई मनचाहा सहकर्मी मिलता है, तो उसके प्रति आकर्षण बढ़ जाता है. हम उसके साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताना पसंद करते हैं और ऐसा करते हुए अक्सर कलीग से प्यार हो जाता है. लेकिन ऑफिस रोमांस की राह इतनी आसान नहीं है. यदि आपको अपने सहकर्मी से इश्क़ हो जाए, तो ये एहसास आपके लिए जितना रूमानी होगा, उतनी ही मुश्किलें भी खड़ी कर सकता है.

हां, वो मुश्किल दौर था मेरे लिए…

28 वर्षीया सुहानी ने बताया, वो मेरी पहली जॉब थी और मैं अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थी. फिर एक प्रोजेक्ट में मुझे रोहित के साथ काम करने का मौक़ा मिला. रोहित का सुलझा हुआ व्यवहार और अपने काम के प्रति लगन मुझे बहुत पसंद आई. मैं रोहित से काम को लेकर कई सवाल पूछती और वो पूरे धैर्य के साथ मेरे हर सवाल का जवाब देता. शायद रोहित को भी अब मेरा साथ अच्छा लगने लगा था. फिर प्रोजेक्ट पूरा होने की ख़ुशी में रोहित ने मुझे ट्रीट दी और उसी दिन अपने प्यार का इज़हार भी कर लिया. मैं तो जैसे तैयार बैठी थी रोहित का साथ पाने के लिए. रोहित का साथ पाकर मुझे ऑफिस और भी अच्छा लगने लगा था, लेकिन उसके बाद हम ऑफिस में नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पाते थे. हमारा प्यार हमारी बॉडी लैंग्वेज से झलकने लगा था. हम रोज़ सुबह साथ ऑफिस आते और शाम को भी ऑफिस से जल्दी निकलने के बहाने तलाशते. ऑफिस में भी लंच ब्रेक, टी ब्रेक के बहाने बाहर निकल जाते. ऑफिस टाइम में एक-दूसरे को मैसेज करते. धीरे-धीरे हमारे इश्क़ के चर्चे पूरे ऑफिस में चर्चा का विषय बन गए. रोहित सीनियर था, इसलिए वो अपना काम संभाल लेता था, लेकिन मेरे काम में अब शिकायतें आने लगी थीं. बॉस और सीनियर्स से अब मुझे वॉर्निंग मिलने लगी थी. ऑफिस में हम दोनों की इमेज ख़राब होने लगी थी. मैं समझ गई थी कि अब हमें एक ऑफिस में काम नहीं करना चाहिए. इससे पहले कि बात और बिगड़ जाती, मैंने दूसरी नौकरी तलाश ली. ये हम दोनों के लिए मुश्किल ज़रूर था, लेकिन हमारे रिश्ते के लिए यही सही फैसला था.

ऑफिस रोमांस की वजहें

ऑफिस कलीग से प्यार हो जाने की कई वजहें हैं और ऐसा होना स्वाभाविक है. आमतौर पर इन वजहों से ऑफिस रोमांस शुरू होता है:

लंबे समय तक साथ काम करना

आजकल काम के घंटे बढ़ते जा रहे हैं और शिफ्ट ड्यूटी, नाइट शिफ्ट में साथ काम करते हुए सहकर्मी आपस में भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं. ऐसे में उनके बीच अफेयर या रोमांस होना आम बात है.

समानताएं

एक ही प्रोफेशन में काम करनेवाले लोगों की कई आदतें और पसंद-नापसंद भी आपस में मेल खाती हैं, इसलिए ऐसे व्यक्ति से प्रभावित होना या उससे प्यार हो जाना स्वाभाविक है. साथ काम करते हुए ऐसे सहकर्मी कई बार एक-दूसरे के इतने क़रीब आ जाते हैं कि उन्हें प्यार हो जाता है और फिर वो एक-दूसरे से दूर नहीं रह पाते.

भावनात्मक लगाव

भावनात्मक लगाव हमें किसी से भी हो सकता है. साथ काम करते हुए कुछ लोगों से हम बहुत ज़्यादा घुल-मिल जाते हैं, ऐसे में उस शख़्स से प्यार हो जाना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है.

ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स

ऑफिस कलीग से प्यार हो जाना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन आप जब ऑफिस के काम और अपने इस रिश्ते को सही तरह से बैलेंस नहीं कर पाते, तब ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स दिखने शुरू हो जाते हैं.

काम पर होता है असर

जब ऑफिस में दो लोगों के बीच रोमांस चल रहा होता है, तो वो हर पल साथ रहना चाहते हैं. साथ रहने के बहाने तलाशने के लिए वो बार-बार टी ब्रेक लेते हैं या आपस में मैसेज करते रहते हैं. इससे उनका काम पर से ध्यान हटता है और इसका उनके परफॉर्मेंस पर असर होता है.

एक साथ छुट्टी लेना

दो प्यार करनेवाले हमेशा मिलने के बहाने तलाशते रहते हैं और जब किसी को अपने ऑफिस कलीग से प्यार हो जाता है, तो वो भी डेट पर जाने के बहाने तलाशते रहते हैं. ऐसे में दोनों के एक साथ छुट्टी लेने से ऑफिस के काम पर असर पड़ता है.

ब्रेकअप का दर्द

ज़रूरी नहीं कि ऑफिस की हर लव स्टोरी सक्सेसफुल ही हो, ऐसे में जब दोनों का ब्रेकअप होता है, तो उनका काम में मन नहीं लगता. वो ऑफिस में एक-दूसरे को देखकर डिस्टर्ब हो जाते हैं. इससे भी ऑफिस का ही नुक़सान होता है.

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Office Romance Effects
कैसे बचें ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स से?

कॉलेज के बाद ऑफिस ही एक ऐसी जगह है, जहां पर सबसे ज़्यादा अफेयर होते हैं. ऑफिस में हमउम्र सहकर्मी के प्रति आकर्षित होना आम बात है. लेकिन जब आपको ऑफिस में किसी से प्यार हो जाए, तो आपको ऑफिस के नियमों का पालन करते हुए अपनी लव स्टोरी को आगे बढ़ाना चाहिए. ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें.

* ऑफिस में भले ही आपका अपने कलीग के साथ अफेयर चल रहा हो, लेकिन काम के समय स़िर्फ अपने काम पर ध्यान दें. अपने इस ख़ास रिश्ते के लिए ऑफिस के पहले और बाद का समय रखें.

* काम के समय आपस में मैसेज द्वारा या इशारों में बात न करें. इससे आपका काम प्रभावित होगा और ऑफिस में आपकी इमेज भी ख़राब होगी.

* आपके अफेयर की ख़बर आपके अन्य सहकर्मियों या बॉस तक न पहुंचे तो ही अच्छा है, वरना आपकी हर गतिविधि पर नज़र रखी जाएगी और हर बात को आपके अफेयर से जोड़कर देखा जाएगा. इससे आपकी नौकरी ख़तरे में पड़ सकती है.

* बार-बार टी ब्रेक के बहाने या लंच के लिए बाहर न जाएं, रोज़ ऐसा करने से आपके अफेयर की बात सबको पता चल जाएगी और फिर आपके ब्रेक लेने पर भी पाबंदी लग सकती है.

* डेट पर जाने का प्रोग्राम छुट्टी के दिन बनाएं. ऑफिस में एक साथ दोनों की ग़ैरहाज़िरी से एक तो आपके अफेयर के बारे में सबको पता चल जाएगा और इससे ऑफिस का काम भी प्रभावित होगा.

* अपने पर्सनल रिश्ते को ऑफिस के काम पर हावी न होने दें. यदि किसी बात पर डिबेट चल रहा हो, तो बिना सोचे-समझे स़िर्फ अपने पार्टनर का सपोर्ट न करें, वो जहां पर ग़लत हों, वहां पर उनका विरोध अवश्य करें.

ऑफिस रोमांस के आंकड़े
सुहानी और रोहित की कहानी आपको लगभग हर ऑफिस में मिल जाएगी, क्योंकि एक साथ काम करने वाले सहकर्मियों के बीच प्यार हो जाना कोई नई बात नहीं है. एक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 58 प्रतिशत लोगों का ये मानना है कि वे या तो ऑफिस रोमांस में शामिल रहे हैं या उन्हें ऐसा करने में कोई आपत्ति नहीं है.
ऑफिस रोमांस के फ़ायदे

माना ऑफिस रोमांस आपके काम या जॉब के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन आप यदि समझदारी से काम लें और काम पर फोकस करते हुए अपने रिश्ते को भी बैलेंस करते जाएं, तो ऑफिस रोमांस आपके लिए एक सुखद अनुभव हो सकता है. ऑफिस रोमांस के अपने ही फ़ायदे हैं-

* रोज़ ऑफिस आने का मन करता है.

* आप ऑफिस में ख़ुश रहते हैं, इसलिए काम अच्छा करते हैं

* ऑफिस के काम में आपका मन लगता है.

* आप ऑफिस में हमेशा प्रेज़ेंटेबल रहते हैं.

* पार्टनर पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए आप हर काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

* वर्क प्रेशर में भी ख़ुशी से मिल-जुलकर काम करते हैं.

* ऑफिस अफेयर की वजह से आप घर की समस्याएं ऑफिस तक नहीं लाते.

– कमला बडोनी

 

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पहला अफेयर: उड़ती हवा का वो झोंका जीना सिखा गया (Pahla Affair: Udti Hawa Ka Wo Jhonka Jeena Sikha Gaya)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: उड़ती हवा का वो झोंका जीना सिखा गया (Pahla Affair: Udti Hawa Ka Wo Jhonka Jeena Sikha Gaya)

 

उससे मेरी मुलाक़ात तब हुई, जब मैं जीवन में निराशा के दौर से गुज़र रही थी. मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिली, मेरे सपने चकनाचूर हो गए. एक डॉक्टर की बेटी को ही मेडिकल में एडमिशन नहीं मिले, तो लोग क्या कहेंगे, यही सोचकर जीवन को समाप्त करने के लिए अस्पताल की छठी मंज़िल पर चढ़ गई. कूदने के लिए जैसे ही कदम बढ़ाया, एक आवाज़ से टकराई, “कोहरे की गाढ़ी चादर अगर सूरज को कुछ देर ढक लेती है, तो न कोहरा महान बनता है और न ही सूरज की शक्ति क्षीण होती है. कुदरत ने सभी को अवसर दिए हैं और वह आज़माइश भी करती है, लेकिन हक़ीक़त तो हक़ीक़त है, दुख-सुख, अच्छे-बुरे… ज़िंदगी जैसी भी मिले, उसके हर लम्हे को एंजॉय करो.”

“कौन हो तुम?”

“एक हवा का झोंका.”

जवाब देकर वह चला गया, पर मेरे दिल पर दस्तक दे गया. आत्महत्या का ख़्याल तो जाने कहां गुम हो गया, रातभर उसके बारे में सोचती रही. उसके ख़्यालों में खोई हुई रात गुज़री. दूसरे दिन वह स़फेद कोट पहनकर मरीज़ों को हिदायत दे रहा था… “दवाई समय पर खाओ, ऐसे एक्सरसाइज़ करना… खाने में ये खाना समझे…”

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पापा ने शायद नया डॉक्टर अपॉइंट किया है. उसकी आवाज़ में दीवानगी घुली हुई थी, जो मुझे दीवाना बनाकर उसकी तरफ़ खींच रही थी. दिन हो या रात, क्लीनिक में उनके हाथ बंटाने के बहाने मैं वहां बनी रहती. वो अपरिचित कभी मुझे ड्रेसिंग करता मिलता, कभी किसी बच्चे के साथ खेलता हुआ, कभी किसी बुज़ुर्ग के साथ किसी चुटकुले पर हंसता हुआ या तितली के पीछे भागता दिखाई देता. एक ऐसा ज़िंदादिल इंसान, जो अपने चारों ओर हंसी की चादर ओढ़े रहता. उससे भला दिल कैसे न लगता. उसने ज़िंदगी के प्रति मेरा नज़रिया ही बदल दिया था. उसने ही असफलता को सफलता में बदलने की सलाह दी और इस बार मैं सफल हो गई.

उस दिन पापा ने पूछ ही लिया इस परिवर्तन के पीछे क्या राज़ है? मैंने भी दिल का हाल पापा को बता दिया. पापा एकदम गंभीर हो गए. फिर बोले, “मैं भी बहुत ख़ुश होता ऐसा दामाद पाकर, पर मेरे बच्चे, वो कैंसर पेशेंट है. ख़ुश रहने के लिए वह कभी बच्चा, कभी डॉक्टर और न जाने क्या-क्या रूप धरता है. उसके जीवन के कुछ ही दिन शेष हैं.”

मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई. मैं जिसे डॉक्टर समझती थी, वो मरीज़ निकला. मेरे प्यार की इतनी कम उम्र, अभी-अभी तो सीखा था कि… मैं क्या करूं यही सोच रही थी कि ख़बर मिली हवा का झोंका अब नहीं रहा. मैं टूट गई. तेहरवीं की रस्म पर पापा मुझे उसके घर ले गए, उसकी तस्वीर पर स़फेद फूलों की माला चढ़ी हुई थी. वह तस्वीर में भी खिलखिला रहा था. ऐसा लगा जैसे मुझे कह रहा हो कि इस मासूम खिलखिलाहट में मेरे प्यार को हमेशा अपने मन और जीवन में संभालकर रखना और यूं ही चहचहाते रहना. उस रोज़ मैंने अपने दामन में प्यार की मीठी ख़ुशबू को ताउम्र के लिए समेट लिया.

20 वर्ष गुज़र गए. आज भी उसके लबों की मुस्कुराहट मेरे मन में बसी है. उसकी हंसी को उसी के अंदाज़ में डॉक्टर बनकर दूसरों के जीवन में बिखेरने की कोशिश में हूं. जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए, पर उसके द्वारा सुझाया गया हल जीवन में पतवार बन गया. ओ उड़ती हवा के झोंके, तुम्हारी कमी को कोई पूरा न कर सका, पर मैंने जीवन के हर लम्हे में तुम्हें पा लिया.

– शोभा रानी गोयल

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क्यों बढ़ रहा है सेक्स रिसेशन? (What Are The Reasons Behind Increasing Sex Recession?)

आजकल की युवापीढ़ी स़िर्फ जॉब रिसेशन का ही नहीं, बल्कि सेक्स रिसेशन (Sex Recession) का भी सामना कर रही है. अब आप सोच रहे होंगे कि यह सेक्स रिसेशन क्या बला है और भला युवाओं का सेक्स रिसेशन से क्या लेना-देना? तो हमारी और आपकी इसी उलझन को सुलझाने के लिए हमने बात की कुछ सेक्स एक्सपर्ट्स से.

Sex Recession

क्या है सेक्स रिसेशन?

सेक्स रिसेशन यानी सेक्स में घटती दिलचस्पी. बढ़ती उम्र के साथ सेक्स में रुचि कम होना स्वाभाविक है, पर जब कम उम्र में ही सेक्स में रुचि घटने लगे, तो यह सेक्स रिसेशन का संकेत हो सकता है. आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि भारत सहित कई देशों में हुए शोधों से यह बात पता चली है कि पिछले दशक की तुलना में अब लोग ख़ासतौर पर युवा कम सेक्स कर रहे हैं.

क्या कहते हैं आंकड़े?

2013 में नेशनल सर्वे ऑफ सेक्सुअल एंड लाइफस्टाइल (नैटसाल)  द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, 16 से 44 साल के लोग हर महीने पांच से कम बार सेक्स करने लगे हैं. 2014 में ऑस्ट्रलियाई नेशनल सर्वे ऑफ सेक्सुअल एक्टिविटी के मुताबिक़, आजकल कपल्स प्रति सप्ताह औसतन दो बार सेक्स संबंध बनाते हैं, जबकि 10 साल पहले यह औसत चार बार था. यह स्थिति जापान में और भी भयावह दिख रही है. वहां किए गए एक सर्वे के अनुसार 16 से 25 साल की उम्र की 46 फ़ीसदी जापानी महिलाएं और 25 फ़ीसदी जापानी पुरुष सेक्स संबंधों से घृणा करते हैं. जबकि ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, वहां की आधी आबादी हफ़्ते में स़िर्फ एक ही बार सेक्स करती है. 16 से 44 वर्ष की आयुवाले पुरुष और महिलाओं पर किए इस सर्वे में पाया गया कि वर्ष 2001 से 2012 के दौरान वहां के लोगों की सेक्सुअल एक्टिविटी 50 फ़ीसदी कम हो गई है.

ऐसा क्यों हो रहा है?

इसकी कई वजहें हैं. विशेषज्ञों की मानें तो इसका सबसे प्रमुख कारण है तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल. ऑनलाइन पोर्नोग्राफी, इंटरनेट और सोशल मीडिया इत्यादि कारणों से सेक्स के प्रति लोगों की रुचि कम होती जा रही है. आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

पोर्नोग्राफी

ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के बढ़ते चलन से कई लोगों में इंटरनेट सेक्स एडिक्शन जैसी बीमारी  देखने को मिल रही है, जिसके कारण उनका रियल सेक्स के प्रति झुकाव कम होते जा रहा है. इस बारे में बात करते हुए के.ई.एम हॉस्पिटल मुंबई के कंसल्टेंट इन सेक्सुअल मेडिसिन एंड सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोसले कहते हैं, “जिन लोगों को पोर्न फिल्मों की लत लग जाती है, उन्हें रियल सेक्स की जगह पोर्न में ही मज़ा आने लगता है, क्योंकि वे उस काल्पनिक दुनिया से बाहर नहीं आ पाते और उसी तरह के सेक्स की कल्पना करने लगते हैं. ऐसे में अगर पार्टनर उनकी अपेक्षाओं पर पूरा नहीं उतर पाता, तो सेक्स संबंध बनाने से उन्हें अरुचि हो जाती है. वहीं कुछ कपल्स में यह हीनभावना भी घर कर जाती है कि उनमें पोर्न में दिखाए जानेवाले स्टार की तरह न ही स्टेमिना है और न ही वैसी परफेक्ट बॉडी. ऐसे में वे पार्टनर से दूरी बना लेते हैं.”

इंटरनेट

इंटरनेट ने हमारी ज़िंदगी आसान तो बना दी है, लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हैं. सेक्स रिसेशन उनमें से एक है. इस बारे में बताते हुए डॉ. राजन भोसले कहते हैं, “आजकल के ज़्यादातर कपल्स अपने स्मार्ट फोन में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे साथ होते हुए भी साथ नहीं हो पाते. खाली व़क्त में एक-दूसरे के साथ समय बिताने और सेक्स की पहल करने से ज़्यादा उन्हें मोबाइल स्क्रीन में दिलचस्पी होती है.” इस बारे में अपनी राय रखते हुए डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं, “आजकल की युवापीढ़ी एक-दूसरे से मिलकर रिलेशनशिप रखने की बजाय ऑनलाइन डेटिंग और डिजिटल सोशलाइज़िंग ज़्यादा पसंद करती है, जिसका असर उनके सेक्स संबंधों पर भी पड़ता है.”

2014 में अमेरिका में माइकल मैलकॉल्म और जॉर्ज नाउफैल नामक दो शोधकर्ताओं ने 18 से 35 साल के 1500 युवाओं पर सर्वे किया. इनसे इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल और उनके रोमांटिक जीवन पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछा गया. ईस्टर्न इकोनॉमिक जरनल में प्रकाशित इस अध्ययन में देखा गया कि जो लोग ज़्यादा देर तक इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, उनमें शादी करने की दर कम होती है.

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Sex Recession
काम का बढ़ता प्रेशर व तनाव

स्ट्रेस और वर्क प्रेशर भी सेक्स के प्रति नीरसता की प्रमुख वजहों में से एक है. डॉ. राजन भोसले के अनुसार,“पहले के समय में महिलाएं घर पर रहती थीं. दिनभर काम करके जब पति घर लौटता था, तो वे उसे रिझाने की कोशिश करती थीं, जिससे उनकी सेक्स लाइफ में उत्तेजना बनी रहती थी. पर आज के समय में पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग होते हैं. दोनों पर काम का दबाव इतना होता है कि सेक्स उनकी प्राथमिकता की लिस्ट से गायब हो जाता है. काम का तनाव कपल्स को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से इतना शिथिल कर देता है कि उनकी कामोत्तेजना ख़त्म होने लगती है.” इसका समर्थन करते हुए डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं, “तनाव से हार्मोंस का स्तर गड़बड़ हो जाता है और इन सबका असर सेक्स संबंधों पर भी पड़ता है.”

बॉडी बिल्डिंग का क्रेज़

डॉ. रजिन्द्र यादव का मानना है कि आज के युवाओं में बॉडी बिल्डिंग का इतना अधिक क्रेज़ हो गया है कि वे जल्दी से जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में डायट सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड्स  का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी बॉडी थोड़े समय के लिए बन तो जाती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. स्टेरॉयडयुक्त डायट सप्लीमेंट खाने से नपुंसकता व सेक्स में अरुचि जैसी समस्याएं होती हैं.

ग़लत खानपान

डॉ. राजन भोसले के अनुसार, “युवा कपल्स में सेक्स के प्रति घटती अरुचि के लिए उनका अनहेल्दी खानपान भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है. वे जंक फूड, फ्राइड फूड इत्यादि का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं. इस तरह के खाद्य पदार्थों में हाइड्रोजेनटेड फैट्स की मात्रा ज़्यादा होती है, जो सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम करती है, जिसके कारण उनकी सेक्स ड्राइव घटती है.”

2011 में इटली में पोर्न देखने वाले 28 हज़ार लोगों पर एक सर्वे किया गया. सर्वे के मुताबिक़, लोगों पर पोर्न में दिखने वाली काल्पनिक तस्वीरों का ऐसा असर होता है कि वे बेडरूम में सेक्स संबंध के लिए तैयार ही नहीं हो पाते हैं और उनकी स्थिति असहाय जैसी हो जाती है.

डिप्रेशन

पिछले कुछ सालों में युवाओं में डिप्रेशन और एंज़ायटी के केसेज़ बढ़े हैं. डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं कि आज की युवापीढ़ी नौकरी की असुरक्षा, अपना घर बनाने की जद्दोज़ेहद और कट थ्रोटकॉम्प्टीशन के बीच उलझी है. इन सबका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. ऐसे में वे एंटी डिप्रेसेंट जैसी दवाइयों का सेवन करने लगते हैं और इन सबका दुष्प्रभाव उनकी सेक्स लाइफ पर पड़ता है.

सेक्स रिसेशन को दूर करने के उपाय

–     सबसे पहले इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत को दूर करना ज़रूरी है. हफ़्ते में कुल मिलाकर दो घंटा पोर्न देखना सेक्स इच्छा को प्रबल करता है. इससे ज़्यादा पोर्न देखने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अतः इस बात का ख़्याल रखना ज़रूरी है.

–     खानपान पर ध्यान दें. जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें. सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए सेक्स बूस्टर खाद्य पदार्थ, जैसे- अंडा, मछली, तेल, ऑलिव ऑयल, एवोकैडो, डार्क चॉकलेट का सेवन करें.

–     काम का बोझ घर लेकर न आएं, क्योंकि  सेक्स का मज़ा उठाने के लिए आराम करना भी ज़रूरी है. जब हम रिलैक्स होते हैं, तो शरीर में सेक्स हार्मोंस का स्राव होता है, जो सेक्स पावर को स्वाभाविक तौर पर बढ़ाता है.

 

– शिल्पी शर्मा

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पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

वो ख़्वाब था बिखर गया, ख़्याल था मिला नहीं, मगर ये दिल को क्या हुआ… ये क्यों बुझा, पता नहीं… हरेक दिन उदास दिन, तमाम शब उदासियां… किसी से क्या बिछड़ गए कि जैसे कुछ बचा नहीं… जीवन से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद भी यादों की रहगुज़र पर जलता एक दीया है पहला प्यार, जिसकी झिलमिलाती यादों में कसक होती है, जो तन्हाई में दिल को उदास कर देती है, तो महफिल में भी नज़रें किसी को तलाशने लगती हैं. सब होने के बाद भी कुछ खोने का एहसास होता है. वो जज़्बात, जिन्हें इज़हार की मोहलत न मिली, जहां नज़रों ने नज़रों की ज़ुबां से दिल की बात सुन ली, लेकिन जब दिलों के फैसले दिमाग से किए जाते हैं, तो जुदाई ही मिलती है.

वो बीएससी करके कोचिंग में टीचर थे और मैं बारहवीं की स्टूडेंट, जो फिज़िक्स की प्रॉब्लम सॉल्व करना तो सीख गई, लेकिन दर्दे दिल में उलझकर रह गई. फिर तो जो समझ में आता था, उन्हें देखकर वो भी भूल जाया करती थी. कोचिंग के फेयरवेल पार्टी में उनका सुनाया वो शेर शायद उनके दिल की सदा थी. कुछ ऐसा था उन आंखों में कि मैंने कोचिंग जाना छोड़ दिया और घर पर ही परीक्षा की तैयारी करने लगी. सब ने बहुत समझाया कि परीक्षा तो हो जाने दो, लेकिन मैंने ना कर दिया. आखिरी पेपर के बाद कुछ इरादा करके मैं कोचिंग गई. वहां जाने पर पता चला कि वो तो शाखे-दिल पर गुलों की बहार की आस दिखाकर मुझे तन्हा छोड़कर जा चुके हैं. क्यों? कोई जवाब नहीं.

व़क्त अपनी रफ्तार से चलता रहा. विवाह, परिवार, सर्विस… इन सबके बीच कुछ खो देने का गम उतना ज़्यादा नहीं था, क्योंकि उसे पाया ही कब था. लेकिन फिर भी एक बार मिलने की ख़्वाहिश थी. लगता था महफिल में, मेले में कभी वो मेरे सामने आ जाएंगे. स्कूल में जब भी विदाई पार्टी होती, मुझे वो आखिरी मुलाकात याद आती.

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लेकिन गुज़रा व़क्त इस तरह सामने आ जाएगा, मैंने कभी सोचा न था. स्कूल में नए लेक्चरार से परिचय कराने के लिए प्रिंसिपल ने पूरे स्टाफ को बुलाया. पूरे 12 साल बाद उन्हें देखा था. आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था. वही ग्रेसफुल चेहरा, आंखों में चमक, ठहरा हुआ प्रभावी अंदाज़… नज़रें हटाना मुशिकल था, कहीं फिर खो न जाएं. गुस्सा था या डर, मैं उनके सामने आने से कतराने लगी. लेकिन एक स्कूल में होते हुए ऐसा नामुमकिन था. एक दिन पता चला कि अभी तक उन्होंने शादी नहीं की. क्यों? किसकी खातिर? जानना चाहती थी, लेकिन हम सब एक मर्यादा में बंधे थे.

शिक्षक दिवस पर छात्रों की फरमाइश पर उन्होंने कुछ शेर और गजल सुनाई- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता… वे कभी दिल के करीब थे. इसलिए उनके दर्द को मैं महसूस कर सकती थी. लेकिन कुछ सवालों के जवाब अभी पाने बाकी थे. अब हम दोस्त बन चुके थे.

“आपने शादी क्यों नहीं की?” एक बार फिर मैं पूछ बैठी.

“तुमसा कोई न मिला.” दिल की बात बताने में बिल्कुल भी नहीं झिझके थे.

“तो चोरों की तरह क्यों चले गए थे?”

“सब कुछ हमारे चाहने से नहीं होता. तक़दीर का फैसला हमें मानना पड़ता है.”

“कायरता को मजबूरी ना कहिए.” मैं गुस्से में बोली.

“तुम जानना चाहती हो, तो सुनो, तुम्हारे भैया मेरे दोस्त थे, फिर भी उनको सच्चाई बताकर तुम्हारा हाथ मांगा था, लेकिन उन्होंने जवाब दिय- ये तुम्हारी मर्ज़ी तक ही ठीक है, यदि मेरी बहन ने हां की, तो उसे गोली मार दूंगा, क्योंकि टीचर का दर्जा हर हाल में सम्मानीय होता है. अगर इस तरह शादियां होने लगीं, तो माहौल ही बिगड़ जाएगा. मैं उनको समझाने में नाकाम रहा, इसलिए खामोशी से चला गया. लेकिन फिर कोई और इस दिल में जगह न बना पाया.”

उनके शब्दों में उनकी बेबसी झलक रही थी, लेकिन अब मैंने उनका जहां मुकम्मल कराने का इरादा कर लिया था. अपनी मर्ज़ी उन्हें बता दी है. ज़िंदगी की ख़ुशियों पर उनका भी हक है. मुझे उम्मीद है कि इस दोस्ती के रिश्ते की वो लाज रखेंगे और इस शादी के लिए ना नहीं कहेंगे. बस, आप सभी की दुआओं की ज़रूरत है.

– शहाना सिद्दीकी

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अर्जुन कपूर ने मलाइका के लिए लिखा लव नोट- शी हैज़ माय हार्ट! (Hot Date Night: She Has My Heart… Arjun Kapoor Goes Romantic With Malaika Arora)

Date Night Photos Of Arjun Kapoor and Malaika Arora

Image Courtesy: Instagram/@arjunkapoor

अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) ने मलाइका (Malaika Arora) के लिए लिखा लव नोट- शी हैज़ माय हार्ट! (Hot Date Night: She Has My Heart… Arjun Kapoor Goes Romantic With Malaika Arora)

अर्जुन और मलाइका (Arjun and Malaika) इन दिनों हॉलीडेज़ पर हैं और उनका इश्क़ भी परवान चढ़ रहा है. अब वो खुलेआम अपने प्यार का इज़हार भी करते हैं और एक-दूसरे को स्पेशल फील करवाते हुए सोशल मीडिया पर भी अपने दिल की बात कहने व प्यार का इज़हार करने से पीछे नहीं हटते. बीती रात अर्जुन ने अपने इंस्टाग्राम पर मलाइका की तस्वीर के साथ लिखा था- शी हैज़ माय हार्ट यानी इनके पास मेरा दिल है. ये बात अलग है कि इस पिक्चर में मलाइका का चेहरा एक बैग के पीछे छिपा हुआ है, लेकिन दूसरी तस्वीर में मलाइका उसी हैंड बैग के साथ नज़र आ रही हैं. इसका मतलब यह है कि बैग के पीछे छिपा चेहरा मलाइका का ही है. और यह तस्वीर अर्जुन और मलाइका की डेट नाइट की है.

इसके अलावा मलाइका की इंस्टाग्राम स्टोरी और पिक्चर्स से भी इस डेट नाइट का खुलासा हो रहा है, जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह काफ़ी हॉट और रोमांटिक रही होगी.

Date Night Photos Of Arjun Kapoor and Malaika Arora

Date Night Photos Of Arjun Kapoor and Malaika Arora

Date Night Photos Of Arjun Kapoor and Malaika Arora

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सुष्मिता सेन की फोटो पर क्यूट रेस्पॉन्स देने से ख़ुद को नहीं रोक पाए रोहमन… क्या अब भी है प्यार? (Sushmita Sen’s Pic With A Baby Evokes A Cute Response from Rohman)

Sushmita Sen’s Pic With A Baby

सुष्मिता सेन की फोटो पर क्यूट रेस्पॉन्स देने से ख़ुद को नहीं रोक पाए रोहमन… क्या अब भी है प्यार? (Sushmita Sen’s Pic With A Baby Evokes A Cute Response from Rohman)

सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) और रोहमन शॉल (Rohman Shawl) के बीच अब भी है प्यार? हॉट कपल के रूप में जाने जानेवाले सुष्मिता सेन और रोहमन के बीच पिछले दिनों ब्रेकअप की ख़बर काफ़ी चर्चा में थी. रोहमन की इंस्टाग्राम स्टोरीज़ ने सनसनी फैला दी थी और यह ख़बर जंगल में आग की तरह पूरी इंडस्ट्री और मीडिया में फैल गई थी.

लेकिन शुक्रवार को रोहमन की इंस्टाग्राम स्टोरी कुछ और ही बयां कर रही थी. इसमें रोहमन ने सुष्मिता के लिए प्यार और उनके साथ घर बसाने का क्यूट-सा मैसेज दिया था. रोहमन की इसी स्टोरी को सुष्मिता ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट किया, जिससे तो यही लग रहा है कि प्यार अभ भी बाकी है.

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Sushmita Sen

इसके अलावा सुष्मिता ने अपनी एक पिक्चर भी शेयर की है, जिसमें वो एक छोटी-सी बेबी के साथ फ्लाइट में नज़र आ रही हैं, उनकी इस पिक्चर पर भी रोहमन से आठ घंटे पहले ही कमेंट किया है कि- माय बेबी विद ए बेबी!

तो प्यार में तो लड़ाई-झगड़ते होते रहते हैं, बस फैंस यही दुआ करते हैं कि ये हॉट कपल यूं ही हॉट बना रहे. हाल ही में सुष्मिता ने एक इंटरव्यू में भी अपने और रोहमन के पहले इंटरेक्शन की बात कही थी कि उनकी मुलाक़ात इंस्टाग्राम पर ही हुई थी और किस तरह से अंजाने में सुष ने रोहमन का मैसेज ओपन कर लिया था और उसके बाद बातों और डेट्स का सिलसिला शुरू हुआ.

 

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बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

Breakup Effects
बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

शरीर में दर्द होने पर जैसे आप कोई काम सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, ठीक वैसे ही दिल के टूटने पर भी दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है. ब्रेकअप का संबंध केवल भावनाओं से ही नहीं होता, शरीर से भी होता है, इसलिए ब्रेकअप (Breakup) के दौरान जब व्यक्ति बुरी तरह से आहत होता है, तो उसका दुष्प्रभाव (Side Effects) मन के साथ-साथ शरीर पर भी इस प्रकार से दिखाई देने लगता है-

आंखों में सूजन: जब दिल दुखी होता है, तो आंखों में आंसू आना लाज़िमी है. लोग पूरी-पूरी रात रोते रहते हैं, जिसके कारण अगले दिन आंखों में सूजन आ जाती है. यहां पर एक दिलचस्प बात बता दें कि ब्रेकअप, तलाक़ या किसी अन्य बात से आहत होने के बाद रोने पर जो आंसू निकलते हैं, वो केवल वॉटरी होते हैं, उनमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चोट लगने या अन्य किसी कारण से रोने पर निकलनेवाले आंसुओं में नमक की मात्रा अधिक होती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जब कोई भावनात्मक रूप से आहत होकर रोता है, तो उसकी आंखों में अधिक सूजन आती है.

सीने में दर्द: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जब भी आप किसी बे्रकअप और तलाक़ जैसी गंभीर बात से आहत होते हैं, तो आपको ऐसा महूसस होता है, जैसे- सिर घूम रहा है, चक्कर आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, सीने में हवा पूरी तरह से नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है. इसका कारण है कि भावनात्मक पीड़ा होने के साथ सीने में शारीरिक पीड़ा भी महसूस होती है. कई बार तो ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे किसी ने छाती में मुक्का मारा हो या फिर छाती में भारीपन-सा महसूस होता है.

नींद न आना: ब्रेकअप के बाद अधिकतर लोग नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसका कारण प्यार में नाकाम होना है. परिणामस्वरूप तनाव बढ़ने लगता है. तनाव बढ़ने के कारण कार्टिसोल का उत्पादन शरीर में बढ़ने लगता है और बॉडी क्लॉक पर भी बुरा असर पड़ता है. इन्हीं कारणों से ब्रेकअप के समय लोगों को नींद नहीं आती है.

मांसपेशियों में दर्द: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में हुए एक शोध के अनुसार, बेक्रअप के बाद मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, सिरदर्द बढ़ सकता है और गर्दन में अकड़न आ सकती है. कई बार पैर भी इतने स्थिर (स्टिफ) हो जाते हैं कि सीढ़ियां चढ़ना दूभर हो जाता है. यहां तक कि थोड़ी दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है. इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी साबित हुआ है कि 23% तलाक़शुदा लोगों को कुछ दिन तक चलने में परेशानी हो रही थी और कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द हो रहा था.

पाचन तंत्र में गड़बड़ी: ब्रेकअप के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तऱफ़ डायवर्ट हो जाती है. जब कार्टिसोल की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तरफ़ ज़रूरत से ज़्यादा होती है, तो भूख कम होना, डायरिया और पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं होती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप ब्रेकअप के दौर से गुज़र रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क भूख मिटानेवाले हार्मोन का उत्पादन अधिक करता है.

वज़न बढ़ना: कुछ लोग जब तनावग्रस्त होते हैं, तो उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. इसका कारण है कि तनावग्रस्त होने पर उनके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं और शरीर इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है. परिणामस्वरूप शरीर में शुगर फैट के रूप में एकत्रित होने लगता है और उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. जब वे ब्रेकअप से आहत होते हैं, तो उस समय उनका मन शुगर और फैटवाली चीज़ें खाने का करता है और इन चीज़ों को खाने से वज़न बढ़ता है.

मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव: एक्सपर्टस का मानना है कि जब आप किसी अपने को खो देते हैं, तो दिल में दर्द के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी उसका असर पड़ता है. यानी कि दिल के बुरी तरह से आहत होने पर मस्तिष्क में भी तकलीफ़ होती है.

स्किन संबंधी समस्याएं: ब्रेकअप के बाद तनाव होता ही है. तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसके कारण त्वचा की चमक ख़त्म हो जाती है. अगर आप पहले से ही मुंहासे, सोरायसिस और एग्ज़ीमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो बे्रकअप के बाद आपकी त्वचा की रंगत और भी ख़राब होने लगती है.

दिल संबंधी परेशानियां: कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप के समय व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूटा हुआ होता है, इसलिए उस व़क्त उसे हार्ट संबंधी तकलीफ़ या दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा अधिक होता है. इसका कारण है कि ब्रेकअप के दौरान व्यक्ति के शरीर में एंड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा हुआ होता है.

इम्यूनिटी कमज़ोर होना: ब्रेकअप के दौरान अक्सर मन में नकारात्मक ख़्याल आते हैं. इन नकारात्मक ख़्यालों के कारण अवसाद, अकेलापन, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है.

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Breakup Effects

ब्रेकअप से जुड़े कुछ तथ्य
  • ब्रेकअप के दौरान महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक आहत होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में पुरुषों को नॉर्मल होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते.
  • ब्रेकअप से पहले व्यक्ति अपने रिश्ते के प्रति जितना प्रतिबद्ध होता है, रिश्ता टूटने के बाद उसमें बदलाव की संभावना भी उतनी अधिक होती है. यानी बे्रकअप के बाद व्यक्ति अपने आप को पूरी तरह से बदला हुआ महसूस करता है.
  • सोशल मीडिया रिश्तों टूटने, मानसिक व शारीरिक शोषण और तलाक़ का एक प्रमुख कारण बन गया है.

 

ब्रेकअप के बाद कैसे करें अपनी बॉडी को हील?
  1. ब्रेकअप के बाद सबसे पहले अपना फिज़िकल चेकअप कराएं. फिज़िकल चेकअप के दौरान डॉक्टर से पूछें- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना है? क्या शरीर में रक्तसंचार सुचारू रूप से हो रहा है? कई बार तनाव और अवसाद के कारण इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.
  2. अगर आप किसी भावनात्मक समस्या से परेशान हैं, तो उसे भी अपने डॉक्टर से शेयर करें और उससे निबटने के तरी़के पूछें.
  3. अकेलेपन, अवसाद और तनाव से छुटकारा पाने के लिए किसी अच्छे स्पा में जाकर बॉडी मसाज कराएं. बॉडी मसाज से माइंड और बॉडी दोनों रिलैक्स होती हैं.
  4. ब्रेकअप के बाद बॉडी मसाज कराने से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द और तनाव दूर होता है. अच्छी नींद आती है और एकाग्रता बढ़ती है.
  5. नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रकृति के क़रीब जाएं.
  6. ब्रेकअप में खाना-पीना छोड़ने की बजाय अपनी डायट पर ध्यान दें और हेल्दी फूड हैबिट्स फॉलो करें.
  7. ब्रेकअप के बाद शरीर में होनेवाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए वर्कआउट करें. वर्कआउट और एक्सरसाइज़ करने से एंड्रॉर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जो तनाव और अवसाद को दूर करता है.
  8. योग और प्राणायाम करके अपने अशांत मन को शांत करने का प्रयास करें.
  9. अपने बीते हुए कल को भुलाने के लिए ख़ुद को व्यस्त करें, जैसे- अच्छी किताबें पढ़ें, सकारात्मक सोचवाले दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  10. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डांस, साइकिलिंग, स्विमिंग, फिटनेस क्लास और स्पोर्ट्स खेलें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

प्रेम, प्यार, रोमांस, इश्क़, मुहब्बत… चाहत से लबरेज़ ये शब्द सुनते ही आंखों में अपने आप कई सपने पलने लगते हैं… गालों पर हया की एक लालिमा-सी छा जाती है… मुझे भी इस इश्क़ के रोग ने छू लिया था. 23 साल की थी मैं. नई-नई नौकरी लगी थी. मेरे साथ ही मेरे सहपाठी अभिनव ने भी जॉइन किया था. अभिनव के विभाग में ही उसका एक

शर्मीला-सा दोस्त था पल्लव. अभिनव से मेरा काफ़ी दोस्ताना व्यवहार था, उसी बीच पल्लव का मुझे चुपचाप देखना, आंखें झुकाकर बातें करना और बहुत ही सली़के से व्यवहार करना बेहद भाने लगा था. पल्लव की यही बातें मुझे बार-बार अभिनव के विभाग की ओर जाने को मजबूर कर देती थीं.

आख़िर मेरी क़िस्मत भी रंग लाई और पल्लव का ट्रांसफर मेरे ही विभाग में हो गया. बेहद ख़ुश थी मैं, हद तो तब हो गई, जब हम दोनों को एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने का मौक़ा मिला. अब धीरे-धीरे हमें क़रीब आने का मौक़ा मिला. दोस्ती गहरी हुई और फिर ये दोस्ती प्यार में बदल ही गई. पल्लव ने भी अपने प्यार का इज़हार इशारों-इशारों में कर ही दिया. हां, हमने आपस में कोई वादे नहीं किए थे, पर हमारे प्यार को मंज़िल मिलेगी, यह विश्‍वास हम दोनों को ही था.

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लेकिन नियति पर कब किसी का ज़ोर चला है. मैंने विभागीय परीक्षा दी थी और उसके लिए भी पल्लव ने ही मुझे प्रोत्साहन दिया था. हमने साथ-साथ तैयारी की. दुर्भाग्यवश पल्लव परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया और मैं पास हो गई थी. विभाग में रिक्त पद होने के कारण मेरा अधिकारी पद पर चयन हो गया था. अगली विभागीय परीक्षा को अभी समय था, मैंने पल्लव का हौसला बढ़ाया, लेकिन अब कार्यक्षेत्र में हमारे बीच दूरी बढ़ गई थी और धीरे-धीरे ये दूरियां हमारे संबंधों में भी बढ़ने लगी थीं. मैंने कई कोशिशें कीं, लेकिन पल्लव के मन में हीनभावना ने घर कर लिया था. वो मुझसे नज़रें चुराने लगा था. दूरी बनाए रखने के प्रयास करने लगा था. कुछ पूछती तो यही कहता कि मैं तुम्हारे लायक ही नहीं.

शायद पल्लव जान-बूझकर मुझसे दूर जाना चाहता था. मेरे सामने दूसरी लड़कियों से बातें करता… मेरा सामना तक नहीं करता था अब वो. मैंने फिर कोशिश की, तो उसने कहा, “मैं चाहता हूं तुम मुझे भूल जाओ, मुझसे घृणा करो, क्योंकि मेरा-तुम्हारा कोई मुक़ाबला नहीं. तुम्हें मुझसे बेहतर जीवनसाथी मिलेगा.”

ख़ैर, घर पर भी मेरी शादी की बातें होने लगी थीं और फिर मैंने भी पल्लव के लिए कोशिशें करनी बंद कर दीं, क्योंकि उसने ख़ुद मुझसे दूर जाने का निर्णय कर लिया था. मेरी शादी हो गई. पति के रूप में बेहद शालीन और प्यार करनेवाला साथी ज़रूर मिला, लेकिन मेरा पहला प्यार तो पल्लव था. कुछ समय बाद पता चला कि पल्लव के पिताजी ने काफ़ी दहेज लेकर एक लड़की से उसकी शादी कर दी. मेरा पहला प्यार दम तोड़ चुका था.

कई वर्षों बाद किसी समारोह में अचानक हमारा आमना-सामना हुआ. साधारण-सी औपचारिक बात के बाद हम दोनों अपनी-अपनी राह
चल दिए…

यूं ही अपने-अपने सफ़र में गुम… कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… मेरा पहला प्यार स़िर्फ एक छोटे-से मेल ईगो की बलि चढ़ गया था, काश! पल्लव तुमने अपना वो झूठा ईगो छोड़ दिया होता… काश!… लेकिन अब कोई फ़ायदा नहीं यह सोचने का, क्योंकि नियति को यही मंज़ूर था!

– अलका कुलश्रेष्ठ

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पति-पत्नी के रिश्ते में भी ज़रूरी है शिष्टाचार (Etiquette Tips For Happily Married Couples)

मुहब्बत की शबनम का बस एक क़तरा था और प्यास बड़ी… अब चाहत का पूरा समंदर है सामने पर प्यास नहीं… प्यार और विश्‍वास के रिश्ते जितने गहरे होते हैं, उतने ही नाज़ुक भी! ये मुहब्बत, ये रिश्ते और ये चाहतें बनी रहें, इसके लिए ज़रूरी है आपसी सम्मान और संवाद में शालीनता, सहजता और शिष्टता. बेतकल्लुफ़ी को हम भले ही क़रीब होने का इशारा समझें, लेकिन सच तो यह है कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी शिष्टाचार ज़रूरी है, वरना रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है.

Etiquette Tips For Couples

सुनने में ये अजीब लगता है कि भला पति-पत्नी के बीच ये शिष्टाचार या मैनर्स जैसी औपचारिकताएं क्यों? लेकिन अगर हम अपने आस-पास नज़र दौड़ाएं, तो यही पाएंगे कि बहुत-से छोटे-मोटे झगड़े, बहुत-सी उलझनें और आपसी मन-मुटाव इसी वजह से होते हैं, क्योंकि हम आपस में अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल करने लगते हैं या फिर इतने बेतकल्लुफ़ हो जाते हैं कि एक-दूसरें को अनजाने में ही अपमानित करने लगते हैं. ऐसे में कुछ बातों का ख़्याल रखा जाए, तो न स़िर्फ आपका रिश्ता गहरा होगा, बल्कि एक-दूसरे के लिए सम्मान और प्यार भी बढ़ेगा.

– एक-दूसरे की बातों पर ध्यान न देना और अक्सर उन्हें ही अनसुना कर देना बैड मैनर माना जाता है. इससे यह संदेश जाता है कि अपने पार्टनर की बातें या उसके विचार आपके लिए ज़्यादा मायने नहीं रखते. इससे बचें.

– हर बात में टोकना भी धीरे-धीरे रिश्तों में तनाव उत्पन्न कर सकता है. अगर आप पार्टनर की किसी बात से असहमत हैं, तो प्यार से भी उसे दर्शाया जा सकता है.

– आपसी बातचीत में शब्दों का चयन भी बहुत मायने रखता है. सॉरी, थैंक्यू और प्लीज़ जैसे मैजिक वर्ड्स का इस्तेमाल न स़िर्फ गुड मैनर्स को दर्शाता है, बल्कि रिश्ते को मज़बूत भी बनाता है.

– अगर घर पर कोई मेहमान या रिश्तेदार हों,  तो उनके सामने आपसी व्यवहार में सहजता और प्यार झलकना चाहिए.

– एक-दूसरे की मदद करना बेहद ज़रूरी है. आपसी काम में जितना संभव हो, एक-दूसरे की मदद करें और अगर पार्टनर का काम कम नहीं कर सकते, तो उसे बढ़ाने की ग़लती तो बिल्कुल न करें.

– ताने देने से बचेें. मज़ाक करना अलग बात है, लेकिन मज़ाक उड़ाने और ताने देने से रिश्ते प्रभावित होते हैं, क्योंकि इससे आत्मसम्मान को ठेस पहुंच सकती है.

– एक-दूसरे के परिवार को लेकर कोई भी ग़लत बात न करें या छींटाकशी न करें. उनका सम्मान करना सीखें, तभी आप दोनों के बीच भी सम्मान बना रहेगा.

– ग़ुस्से में बात करने से बचें. जब भी आप ग़ुस्से में हों, तो कोशिश करें कि पहले ग़ुस्सा शांत हो जाए, फिर –

– जितना हो सके बहस से बचें, लेकिन अगर बहस हो ही जाए तो अशिष्ट या असभ्य भाषा का प्रयोग न करें. न ही रिश्ते ख़त्म करने की धमकी दें. ग़ुस्से में इस्तेमाल किए गए अपशब्दों का असर भावी जीवन पर पड़ सकता है. इससे यह संदेश जाएगा कि कहीं न कहीं मन में यह विचार दबे हैं, जो बाहर आ गए.

– बदले की भावना मन में न रखें. पिछली बातों  का या पहले हुए किसी अपमान का बदला लेने की भावना मन में न पालें. यह भी अशिष्ट व असभ्य व्यवहार में आता है. जहां प्यार और सम्मान होगा, वहां बदले की भावना होनी ही नहीं चाहिए.

– अक्सर शादी के बाद पार्टनर्स टेबल मैनर्स ज़्यादा फॉलो नहीं करते, लेकिन यह भी मैनरिज़्म का हिस्सा है.

– खाते समय आवाज़ न करें. धीरे-धीरे चबा-चबाकर खाएं और मुंह बंद कर के खाएं.

– खाते वक़्त गंभीर या विवादास्पद मुद्दे पर बात करने से बचें.

– लाइट और अच्छे मूड में खाना खाएं. फ़ोन या पेपर पढ़ते हुए खाना न खाएं.

– फ़ोन मैनर्स का भी ख़्याल रखें. बेवजह एक-दूसरे के मैसेज या मेल्स चेक न करें.

– फ़ोन पर ज़ोर-ज़ोर से बातें न करें.

– अगर पार्टनर के नाम पर कोई लेटर, कुरियर, पार्सल या गिफ़्ट आया है, तो उसे ख़ुद खोलना  ग़लत है. आप अपने पार्टनर के आने का इंतज़ार करें. बिना बताए किसी का पैकट खोलना  शिष्टाचार में नहीं आता.

– समय की पाबंदी भी गुड मैनर्स में आती है. पार्टनर्स आपस में एक-दूसरे को इंतज़ार करवाते वक़्त यह नहीं सोचते कि इसका क्या असर पड़ेगा. लेकिन हर किसी के समय और इंतज़ार की क़ीमत होती है, यह समझना ज़रूरी है.

– स्पेस ज़रूर दें. किसी भी रिश्ते में स्पेस बहुत ज़रूरी है और यह भी मैनर्स का ही हिस्सा है.

– आपस में शेयरिंग और केयरिंग की भावना भी ज़रूरी है. एक-दूसरे को सपोर्ट करें, आपस में कंपीट न करें. कई कपल्स ये भूल जाते हैं कि वो सहभागी और साथी हैं, न कि प्रतियोगी या प्रतिद्वंद्वी. ऐसे में एक-दूसरे की तरक़्क़ी पर वे ख़ुश होने की बजाय ईर्ष्या की भावना मन में पैदा कर लेते हैं.

– किसी एक की क़ामयाबी दूसरे की भी सफलता है, उसे बधाई दें और सेलिब‘ेट करें.

– एक-दूसरे की तारीफ़ ज़रूर करें और समय-समय पर सरप्राइज़ेस भी दें.

– गीता शर्मा

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