Tag Archives: couple

पहला अफेयर: गुज़ारिश (Pahla Affair: Guzarish)

Pahla Affair, Guzarish

Pahla Affair, Guzarish

पहला अफेयर: गुज़ारिश (Pahla Affair: Guzarish)

नहीं जानती कि मैं क्यों तुम्हारे बारे में सोचती हूं. मेरे ख़्यालों में हर वक़्त तुम्हीं रहते हो. मुझे आज भी याद है, वो पहला एहसास जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था. मेरा आईडी कार्ड कहीं गिर गया था. मैं उसे हर जगह ढूंढ़ चुकी थी और परेशान हो रही थी, तभी तुम आए और मेरा आईडी कार्ड मुझे देकर चले गए. तुम्हारी स्मार्टनेस मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ चुकी थी. एक सहेली से पता चला कि तुम मुझसे सीनियर यानी एमएससी सेकंड ईयर के छात्र थे.

उस दिन के बाद से मेरी नज़रें कॉलेज में अक्सर तुम्हें तलाश करने लगी थीं. तुम अक्सर दिख ही जाते थे. तुम्हारी पर्सनैलिटी मुझे अपनी तरफ़ आकर्षित करने लगी थी. जब कभी तुम मेरे सामने होते थे, मेरी नज़रें अनायास ही तुम्हारी तरफ़ उठ जाती थीं. पर अगले ही पल दिमाग़ यह एहसास कराता कि एक लड़की का किसी को इस तरह देखना ठीक नहीं. लोग क्या कहेंगे? और मेरी नज़रें झुक जातीं. पर दिल को कहां परवाह थी किसी की? नज़रें फिर तुम्हारी तरफ़ उठतीं और झुक जातीं. जब तक तुम सामने होते दिल और दिमाग़ का ये द्वंद्व चलता ही रहता.

एक दिन बस का इंतज़ार करते वक़्त एक छोटा बच्चा आकर भीख मांगने लगा. तुमने उसे दुकान पर ले जाकर भरपेट खाना खिलाया. उस दिन मैंने तुम्हारे अंदर की ख़ूबसूरती भी देखी थी. मैं अपनी सहेली निशा से अक्सर तुम्हारी बातें करती थी. एक दिन वह मुझे छेड़ते हुए बोली, लगता है, वह तुझे कुछ ज़्यादा ही पसंद है. मैंने कहा, नहीं, वह तो चांद है जिसे स़िर्फ दूर से देखा जा सकता है, हाथों में नहीं लिया जा सकता. वह बोली, लोग चांद पर घर बनाने की सोच रहे हैं और तू पुराने ख़्यालों में अटकी पड़ी है. मैं उसके बारे में पता करूंगी और फिर तुम दोनों प्रो़फेसर बन इसी कॉलेज में साथ-साथ पढ़ाना. ये बातें उसने मज़ाक में ही कही थीं, पर अनजाने में ही उसने हमारे अनजाने रिश्ते की नींव रख दी थी.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

अब न जाने क्यों मैं तुम्हें ख़ुद से जोड़ने लगी थी. फिर निशा ने ही मुझे बताया कि तुम उसी कॉलेज के किसी प्रो़फेसर के बेटे होे. अब निशा मुझसे बार-बार कहने लगी कि अपने मन की बात उससे कह दे, पर न जाने क्यों मैं रुक जाती थी. शायद तुम्हारा स्टेटस मुझे रोक देता था. तुम एक अमीर प्रो़फेसर के बेटे और मैं एक लोअर मिडल क्लास की लड़की. मुझे डर था कि तुम मुझे ठुकरा न दो.

और फिर वो वक़्त भी आ गया, जिसके बारे में सोचकर डर लगता था. तुम्हारी विदाई का वक़्त. हम फ़र्स्ट ईयर वालों ने सेकंड ईयर के स्टूडेंट्स के लिए फेयरवेल पार्टी रखी थी, जिसमें मुझे एंकरिंग करनी थी. सुबह तैयार होते वक़्त भी तुम मेरे ख़्यालों में थे. आज मेरे पास आख़िरी मौक़ा था तुमसे अपने मन की बात कहने का, पर मैंने इसे गवां दिया, क्योंकि मेरे स्वाभिमान ने मुझे रोक दिया. मुझे आज भी याद है, वो बेचैनी, वो बेक़रारी तुम्हें न देख पाने की, जो उस शाम घर लौटते वक़्त मेरे दिलो-दिमाग़ पर छाई हुई थी. एक अनजाने से दर्द ने मुझे सारी रात सोने नहीं दिया. एक्ज़ाम्स के बाद प्रैक्टिकल के दिन जब मैं कॉलेज पहुंची तो तुम्हें बरामदे में खड़े देखकर आंखों पर यक़ीन नहीं हुआ, क्योंकि मैं तो तुमसे दोबारा मिलने की आस भी छोड़ चुकी थी. तुमने भी मेरी तरफ़ देखा और इस बीच मेरी आंखों ने बहुत कुछ बयां कर दिया था तुमसे.

अब मैं अपने शहर वापस आ गई हूं, तुम्हारी यादों को अपने दिल में संजोए हुए. अब शायद कुछ सालों तक मैं तुम्हें न देख पाऊं. जानते हो मेरा रिज़ल्ट आ चुका है. मैं क्लास में सेकंड हूं और वह प्रैक्टिकल, जिसमें तुम मेरे सामने थे, उसमें मेरे सबसे अधिक मार्क्स हैं. शायद तुम मेरी प्रेरणा भी हो. मैं इतने दिनों तक तुमसे कुछ न कह पाई, पर एक दिन अपने मन की बात तुमसे ज़रूर कहूंगी. उस दिन मिट जाएंगी हमारे बीच की सारी दूरियां और गिर जाएंगी सारी दीवारें. ये यक़ीन है मुझे ख़ुद पर और अपनी क़िस्मत पर भी. तब तक तुम मेरा इंतज़ार करना, यही गुज़ारिश है तुमसे.

– सारिका सोनी

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम बिन… अधूरी मैं! (Pahla Affair: Tum Bin… Adhuri Main)

साइलेंट मोड पर होते रिश्ते… (Communication Gap In Relationships)

ख़ामोशियां जब बात करती हैं, तो उनमें मुहब्बत की आवाज़ छिपी होती है… ये ख़ामोशियां मन को लुभाती हैं, ये ख़ामोशियां कभी-कभी बहुत भाती हैं, ये ख़ामोशियां गुदगुदाती हैं… लेकिन जब आपका रिश्ता (Relationship) ही ख़ामोश होने लगे, तब ये ख़ामोशियां रुलाती हैं… जी हां, आज के दौर की हक़ीक़त यही है कि हमारे रिश्तों में ख़ामोशी पसरने लगी है… हमारे संबंधों में अजीब-सी वीरानी पनप रही है… आख़िर क्यों साइलेंट मोड (Silent Mode) पर जा रहे हैं हमारे रिश्ते?

Relationships Problems

पहचानें रिश्तों की ख़ामोशियों को…

–     आप दोनों पास-पास होते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

–     डिनर टेबल हो या चाय का समय, आप दोनों के पास एक-दूसरे से बात करने के लिए कुछ होता ही नहीं.

–     अब न पहले की तरह फोन या मैसेजेस करते हैं, न ही सरप्राइज़ेस प्लान करते हैं.

–     बेडरूम में भी न रोमांस की जगह बची है, न ही पर्सनल बातों की.

–     सेक्स लाइफ भी पहले की तरह नहीं रही.

–     बात भले ही न होती हो, लेकिन वो कनेक्शन भी फील नहीं होता, जो पहले हुआ करता था.

–     एक-दूसरे के प्रति इतने कैज़ुअल हो गए हैं कि किसी के होने न होने से ज़्यादा फ़र्क़ ही नहीं पड़ता अब.

–     लड़ाई-झगड़े, वाद-विवाद भी अब नहीं होते.

–     आख़िरी बार साथ-साथ कहां बाहर गए थे या कौन-सी मूवी देखी थी, वो तक याद नहीं.

–     एक-दूसरे के साथ अब ज़िद भी नहीं करते.

–     पार्टनर की पसंद-नापसंद को अब तवज्जो नहीं दी जाती.

–     इसी तरह की कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जो यह महसूस करने के लिए काफ़ी हैं कि रिश्ते में ख़ामोशी ने जगह बना ली है.

क्या हैं वजहें?

–     लाइफस्टाइल फैक्टर बड़ी वजह है. पार्टनर्स बिज़ी रहते हैं.

–     समय की कमी भी एक कारण है, क्योंकि एक-दूसरे के साथ समय कम बिता पाते हैं.

–     प्राथमिकताएं बदल गई हैं. करियर, दोस्त, बाहरी दुनिया ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

–     सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है. यहां का आकर्षण आपसी रिश्तों को काफ़ी प्रभावित करता है.

–    लोग अंजाने लोगों से कनेक्ट करके जो एक्साइटमेंट महसूस करते हैं, जो नयापन उन्हें लगता है, वो आपसी रिश्तों में नहीं महसूस होता. ये रिश्ते उन्हें बोझिल और उबाऊ लगने लगते हैं.

–     आजकल डिनर का टेबल हो या बेडरूम, शारीरिक रूप से वहां मौजूद भले ही हों, मानसिक व भावनात्मक रूप से वो कहीं और ही होते हैं.

–     कभी खाने की पिक्चर्स क्लिक करके शेयर करते हैं, तो कभी सेल्फी को कितने लाइक्स और कमेंट्स मिले, इस पर पूरा ध्यान रहता है.

–     ऐसे में रिश्तों के लिए समय ही नहीं रहता और न ही एनर्जी बचती है.

–     ऑफिस से थकने के बाद सोशल साइट्स उनके लिए रिफ्रेश होने का टॉनिक बन जाती हैं, जहां अपना बचा-खुचा समय व ऊर्जा बर्बाद करने के बाद किसी और चीज़ के लिए कुछ नहीं बचता.

–     इसके अलावा ऑफिस में भी कलीग्स के साथ दोनों समय ज़्यादा बिताते हैं, जिससे उनसे इमोशनल रिश्ता बन जाता है, जो अपने रिश्ते से कहीं ज़्यादा कंफर्टेबल और आकर्षक लगने लगता है.

–     पार्टनर्स को लगता है कि कलीग्स उन्हें बेहतर समझते हैं, बजाय पार्टनर के.

–    कई बार ये रिश्ते भावनात्मक रिश्तों से भी आगे बढ़कर शारीरिक संबंधों में बदल जाते हैं.

–     एक बार इस तरह के रिश्ते में बंध गए, तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल लगता है.

–     शुरुआत में अच्छा और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन आगे चलकर ज़िंदगी में बड़ी परेशानी हो सकती है.

–     ऐसे में अपने पार्टनर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती, उसकी हर बात बेवजह की रोक-टोक लगने लगती है और फिर आपसी प्यार लगभग ख़त्म ही हो जाता है, रिश्ता एकदम ख़ामोश हो जाता है.

यह भी पढ़ें: रिश्तों में मिठास बनाए रखने के 50 मंत्र (50 Secrets For Happier Family Life)

Relationships Problems
कैसे बचाएं रिश्तों को?

–     सबसे पहले तो यह जानें कि समय रहते इस ख़ामोशी की आहट को पहचान लिया जाए.

–     अगर आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में सब कुछ सामान्य नहीं है, तो पार्टनर से बात करें.

–    सोशल मीडिया, टीवी, फोन और लैपटॉप्स के यूज़ के भी नियम बनाएं.

–     हफ़्ते में एक बार आउटिंग के लिए जाएं. मूवी प्लान करें या डिनर.

–     एक-दूसरे के ऑफिस में सरप्राइज़ विज़िट दें.

–     कभी यूं ही बिना काम के भी फोन या मैसेज कर लिया करें.

–     कभी-कभार स़िर्फ एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ही कैज़ुअल लीव ले लिया करें. इससे एक्साइटमेंट बना रहता है.

–    एक-दूसरे के लिए शॉपिंग या कुकिंग करें.

–     सोशल साइट्स पर भी एक-दूसरे से कनेक्टेड रहें, ताकि आप दोनों को ही पता रहे कि रिश्ते के बाहर आप सोशल मीडिया पर कैसे बिहेव करते हैं.

–     अपने पार्टनर के प्रति कैज़ुअल अप्रोच से बचें. शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कैज़ुअल हो जाते हैं, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

–     पार्टनर को यह महसूस करवाएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी कितनी अहमियत है.

–    उन्हें स्पेशल फील कराने का प्रयास बीच-बीच में करते रहें.

–     यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों हर पल, हर घड़ी बातें ही करते रहें, लेकिन वो कनेक्शन बना रहे, वो नीरस-सी ख़ामोशी न पनपे इसकी कोशिश ज़रूर होनी चाहिए.

–     समस्या चाहे जितनी भी गंभीर हो, कम्यूनिकेशन से बेहतर समाधान कोई नहीं है. बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन और कनेक्शन बना रहे और आपका रिश्ता साइलेंट मोड पर कभी न आए.

–     अपनी सेक्स लाइफ को साइलेंट मोड पर कभी न आने दें. उसमें ऊर्जा बनी रहे, इसकी कोशिश होती रहनी चाहिए.

–     जब भी लगे कि सेक्स लाइफ बोरिंग हो रही है, तो कभी रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर, तो कभी बेडरूम डेकोर चेंज करके, रोमांटिक गानों के साथ पार्टनर का स्वागत करें. इससे आप दोनों को ही नयापन महसूस होगा.

–     नई पोज़ीशन्स ट्राई करें या सेक्स की लोकेशन चेंज करें. वीकेंड पर कोई होटल बुक करके साथ में समय बिताएं.

– विजयलक्ष्मी

यह भी पढ़ें: इन 10 तरीक़ों से महिलाएं करती हैं फ्लर्ट (10 Smart Techniques Of Women Flirting)

पहला अफेयर: काला खट्टा (Pahla Affair: Kaala Khatta)

Pyar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: काला खट्टा (Pahla Affair: Kaala Khatta)

रेस्टोरेंट की सीट पर बैठते ही उसने हमेशा की तरह कहा, “एक काला खट्टा.” हैरानी तब हुई जब पीछे से भी कुछ जानी-पहचानी आवाज़ ने कहा, “एक काला खट्टा.” कुछ ख़ास बात नहीं थी, लेकिन उसे उत्सुकता हो आई. उसका ऑर्डर टेबल पर सज गया था, लेकिन वो उस आवाज़ को देखने का लोभ न छोड़ सकी और हाथ धोने के बहाने उठ खड़ी हुई. जब वो पास से गुज़री, तो एक ताना मिश्रित नारी स्वर उसे सुनाई दिया, “पता नहीं, तुम कब बाज़ आओगे ऐसी बचकानी चीज़ें खाने से…” और वो चाट खाने में व्यस्त हो गई. उसका पति धीरे-धीरे काला खट्टा चूस रहा था.

बेशक उम्र के निशान साफ़ नज़र आ रहे थे, लेकिन वो सोमेश ही था. उसके बचपन का स्कूल के समय का साथी. एक ही स्कूल और पास-पास घर. दोनों इकट्ठे ही खाते-पीते. ख़ासकर काला खट्टा एक ही स्टिक से चूसते. सोमेश को आज एक अरसे बाद इस तरह अचानक देखकर बीती बातों में दिल खोने लगा. बचपन का वो ज़माना फिर याद आने लगा, जहां दोनों एक साथ स्कूल
आते-जाते, एक ही साथ खेलते. बचपन की नादानियां, खट्टी-मीठी नोक-झोंक दोनों को कब एक-दूसरे के क़रीब ले आई, इसका एहसास ही नहीं हो पाया.

बचपन के छूमंतर होते ही जवानी में क़दम रखते ही लड़कियों पर हज़ारों तरह के पहरे लगना कोई नई बात नहीं है. भले ही ज़माना कितना ही मॉडर्न हो जाए, बहुत आगे पहुंच जाए, लेकिन समाज व परिवार की लक्ष्मण रेखा पार करना सबके बूते की बात नहीं होती. अब बात-बात पर उसे टोका जाने लगा था कि वो बच्ची नहीं है, जवान हो चुकी है. सोमेश के साथ इस तरह आना-जाना या समय बिताना ठीक नहीं. समाज और परिवार के लोग क्या कहेंगे? लेकिन उसके मन में प्यार की कोंपल फूट चुकी थी और सोमेश की आंखों की भाषा भी वो समझती थी. उसके मन में छिपे प्यार को और सोमेश की आंखों में साफ़ नज़र आते इक़रार को दोनों ही बख़ूबी समझते थे.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: अधूरा एहसास… अधूरा प्यार… (Pahla Affair: Adhura Ehsas… Adhura Pyar)

अब बचपन की वो बेफ़िक्री नहीं थी, एक अजीब-सी झिझक और हया दोनों के बीच पसर गई थी. एक-दूसरे को देखकर धड़कनें तेज़ हो जाना, चोरी-चोरी एक-दूसरे को छुप-छुपकर निहारना और जब आंखों से आंखें टकरा जाएं, तो अजीब-सी सिहरन और मदहोशी का एहसास होना… ये सब प्यार की ही तो निशानियां थीं… पहले प्यार की ख़ुशबू, एक अलग-सा जादू… दोनों को ही इस अनोखे एहसास ने छू लिया था.

चाहत तो दोनों की ही थी कि एक-दूसरे के हो जाएं हमेशा के लिए. एक पवित्र बंधन में बंध जाएं और खुलकर सबको कह सकें कि हां, हमें मुहब्बत है… और हम अपनी मुहब्बत को रिश्ते का नाम देना चाहते हैं, लेकिन दरिया गहरा था और वो सोहनी नहीं थी, जो कच्चे घड़े से दरिया पार कर लेती. पहला प्यार एक कसक बनकर रह गया.

पीछे वाली सीट खाली हो चुकी थी और उसकी प्लेट का काला खट्टा भी बह गया था, उसकी आंखों के आंसुओं की तरह…

– विमला गुगलानी

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: प्यार की परिभाषा (Pahla Affair: Pyar Ki Paribhasha)

जानें वो 10 कारण जो आपको ऑर्गैज़्म से वंचित रख रहे हैं? (10 Reasons You’re Not Having An Orgasm)

सेक्स (Sex) और रोमांस (Romance) का इतना एक्सपोज़र होने के बावजूद आज भी बहुत-सी ऐसी महिलाएं (Women) है, जो ऑर्गैज़्म (Orgasm) से वंचित रह जाती हैं. ऑर्गैज़्म न आने के कई कारण हैं, पर ज़्यादातर मामलों में देखा गया है कि महिलाएं ख़ुद इसके लिए कोई ख़ास कोशिश नहीं करतीं. ऑर्गैज़्म एक ऐसा एहसास है, जो न स़िर्फ महिलाओं को आत्मिक सुख का एहसास कराता है, बल्कि उन्हें पूर्णता का एहसास भी कराता है. अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को और रोमानी बनाना चाहती है, तो ऑर्गैज़्म बहुत ज़रूरी है. तो फिर ऐसा क्या है, जो आपको इस एहसास से वंचित रख रहा है, आइए जानते हैं.

Reasons Of Not Having An Orgasm

1. आप डेस्क जॉब करती हैं

लगातार बैठकर काम करनेवाली महिलाओं की पेल्विक मसल्स शॉर्ट होने लगती हैं, जिससे उन्हें पेल्विक पेन होता है. पेल्विक पेन आपके ऑर्गैज़्म में बाधा बनता है. इसके लिए मैरिज काउंसलर और सेक्स थेरेपस्टिस्ट काम के दौरान हर आधे घंटे में अपनी सीट से उठने की सलाह देते हैं. बीच-बीच में ये ब्रेक आपकी पेल्विक मसल्स को मज़बूती प्रदान करते हैं.  स्न्वैट्स और बटरफ्लाई एक्सरसाइज़ेस पेल्विक मसल्स की मज़बूती के लिए बेस्ट हैं.

2. बहुत ज़्यादा हाई हील्स पहनती हैं

हाई हील्स पहनना न स़िर्फ आपके पैरों में दर्द का कारण बनता है, बल्कि यह आपको ऑर्गैज़्म से भी वंचित रख सकता है. दरअसरल, पैरों की सोअस मसल्स पेल्विक नर्व्स से जुड़ी होती हैं, जिनके डैमेज होने से ऑगैऱ्ज्मवाला सिग्नल आप तक जल्दी नहीं पहुंचता. इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने सोअस मसल्स को ध्यान में रखते हुए बहुत ज़्यादा हाई हील्स न पहनें और न ही बहुत ज़्यादा देर तक पहनें.

3. पानी कम पीती हैं

पानी की कमी से न स़िर्फ रोज़मर्रा की हेल्थ प्रॉब्लम्स, जैसे- कब्ज़ और थकान की समस्या होती है, बल्कि यह आपके ऑर्गैज़्म को भी प्रभावित करता है. आपके शरीर में मौजूद अरॉउज़ल टिश्यूज़ को बेहतर ढंग से काम करने के लिए फ्लूइड की ज़रूरत होती है, जिसकी पूर्ति शरीर को हाइड्रेटेड रखकर ही की जा सकती है. अगर आप डिहाइड्रेशन का शिकार हैं, तो आपके लिए ऑगैऱ्ज्म पाना और भी मुश्किल हो जाता है. इसलिए कोशिश करें कि रोज़ाना 7-8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं.

4. सेक्स के दौरान चुप रहना

शायद आपको यह बात पता नहीं होगी कि सेक्स के दौरान की चुप्पी आपको ऑर्गैज़्म से वंचित रख सकती है. अगर सेक्स के दौरान आप आवाज़ नहीं करतीं या सिसकारी नहीं भरतीं, तो ऑर्गैज़्म मिलने में आपको काफ़ी व़क्त लगता है. अगर सेक्स के दौरान आप आवाज़ करती हैं, तो आपको ऑर्गैज़्म जल्दी और लंबे समय तक मिलता है.

 

5. दवाइयां हैं ज़िम्मेदार

दवाइयों में मौजूद प्रोलैक्टिन एक ऐसा तत्व है, जो आपकी सेक्स ड्राइव को कमज़ोर बनाता है. इसके लगातार इस्तेमाल से महिलाओं में सेक्स में रुचि कम हो जाती है. अगर आप भी लंबे समय से ब्लड प्रेशर की दवाइयां, बर्थ कंट्रोल पिल्स या फिर एंटीडिप्रेसेंट का इस्तेमाल कर रही हैं, तो समझ जाएं कि आपके और आपके ऑर्गैज़्म के बीच कौन दुश्मन बनकर खड़ा है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सेक्स थेरेपिस्ट महिलाओं को लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

यह भी पढ़ें: जानें सुबह के वक़्त सेक्स के 5 फ़ायदे (5 Health Benefits Of Morning Sex)

Orgasm
6. ऑक्सीटॉसिन लेवल बहुत कम है

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऑर्गैज़्म के लिए ‘फील गुड’ या ‘लव हार्मोन’ कहा जानेवाला ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का लेवल बहुत मायने रखता है. अगर आपके शरीर में इसका लेवल कम है, तो आपको ऑर्गैज़्म मिलने में मुश्किल होती है. ऑक्सीटॉसिन की कमी का कारण स्ट्रेस है, जो आजकल अमूनन हर किसी को परेशान करता है. पार्टनर के साथ ज़्यादा से ज़्यादा व़क्त बिताना, किसिंग और हगिंग इस हार्मोन के प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करता है.

7. ब्लैडर का फुल रहना

जिस तरह सेक्स के बाद यूरिन पास करना आपको यूरिनरी ट्रैक्ट से बचा सकता है, ठीक उसी तरह सेक्स से पहले ब्लैडर खाली करके आप ऑर्गैज़्म जल्दी पा सकती हैं. ब्लैडर फुल होने पर ऑर्गैज़्म की फीलिंग जल्दी नहीं आती. ख़ासतौर से महिलाएं संबंध बनाने से पहले यूरिन पास करें, ताकि ब्लैडर खाली रहे और आप उस व़क्त को एंजॉय कर सकें.

8. आप मास्टरबेशन नहीं करतीं

आज भी बहुत-सी महिलाएं इसे ग़लत मानती हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेक्स लाइफ और उनके ऑर्गैज़्म पर पड़ता है. मास्टरबेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जसिके ज़रिए आप ख़ुद को संतुष्ट करती हैं. मास्टरबेशन के दौरान आपकी फैंटसीज़ चरम पर होती हैं और आप खुद को संतुष्ट करने के लिए अपनी बॉडी को बेहतर समझती हैं, जो पार्टनर के साथ सेक्स करते वक़्त आपको ऑर्गैज़्म दिलाने में आपको मदद करता है. एक्सपर्ट भी सप्ताह में एक बार मास्टरबेशन की सलाह देते हैं.

9. पार्टनर को अपनी फैंटसीज़ नहीं बतातीं

यह भी एक कारण है कि आप ऑर्गैज़्म तक नहीं पहुंच पातीं. आप क्या चाहती हैं, क्या नहीं चाहती इस बारे में पार्टनर को खुलकर्र नहीं बतातीं। आपको दर है कि कहीं वो आपको ग़लत न समझ ले. पर ज़रूरी नहीं ऐसा हो. हो सकता है उसे अच्छा लगे कि आपने अपने दिल की बात उनसे कही. जब आपकी फैंटसीज़ पूरी होंगी, तो आपको ऑर्गैज़्म मिलना ही है.

10.  दिमाग़ ही दुश्मन है

आपने अपने दिमाग में यह बात बिठा ली है कि ऑर्गज़्म आपके लिए नहीं बना है. अगर शादी के इतने सालों में इसका एहसास नहीं हुआ तो, अब कभी नहीं होगा. लेकिन ऐसा है नहीं, हो सकता है, आपने इसके लिए कोशिश ही नहीं की. महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले ऑर्गैज़्म मिलने में थोड़ा समय लगता है और यह बात बहुत काम पुरुषों को पता होती है. महिलाओं को भी उस सुख का एहसास हो इसके लिए महिलाओं को ही पहल करनी होगी. आप टॉप पोज़िशन ट्राय करें आपको इसका जल्द एहसास होगा.

 

 – अनीता सिंह   

यह भी पढ़ें: माथे पर क्यों किस करते हैं पार्टनर्स? (What It Means When Partner Kisses On Forehead?)

यह भी पढ़ें: कितना फ़ायदेमंद है हस्तमैथुन? (Health Benefits Of Masturbation)

पहला अफेयर: अधूरा एहसास… अधूरा प्यार… (Pahla Affair: Adhura Ehsas… Adhura Pyar)

Pahla Affair

पहला अफेयर: अधूरा एहसास… अधूरा प्यार… (Pahla Affair: Adhura Ehsas… Adhura Pyar)

हर बात अच्छी थी तुम्हारी, क्योंकि तुम में हर वो बात थी, जो किसी भी लड़की को आकर्षित कर सकती थी. कम से कम मुझे तो यही लगता था. यही वहज थी कि मैं भी बिना डोर की पतंग की तरह तुम्हारी ओर खिंचती चली गई. मुहब्बत का वो शुरुआती आकर्षण, वो कशिश, वो एहसास… बेहद ख़ुबसूरत पल थे वो. बेहद हसीन दिन… कॉलेज का लास्ट ईयर था. तुमने इसी साल कॉलेज में एडमिशन लिया था और कुछ ही दिनों में तुम लड़कियों के मोस्ट फेवरेट बन गए थे. तुम्हारा स्टाइल, एटीड्यूड और स्टडीज़ से लेकर हर एक्टिविटीज़ में सबसे आगे रहना… सब दीवानी थीं तुम्हारी ही.

उन सबके बीच तुमने मुझे चुना था. मैं ख़ुद को सबसे ख़ुशनसीब समझ रही थी. वैलेंटाइन डे के दिन तुमने मुझे प्रपोज़ किया और मेरे पास भी इंकार करने का कोई कारण नहीं था. अब तो बस दिन-रात तुम्हारा ही ख़्याल…

इसी बीच हमें कुछ सालों के लिए जुदा होना था, क्योंकि तुम हायर स्टडीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे और मुझे जॉब मिल गया था. हमने वादा किया था एक-दूसरे से कि इंतज़ार करेंगे और सही व़क्त आने पर शादी भी, शायद इसीलिए ये दूरियां भी खल नहीं रही थीं इतनी.

तुम्हारा रोज़ कॉल आता. वीडियो कॉल पर ढेरों बातें होतीं. तुम अक्सर पूछते कि मेरे ऑफिस में कौन-कौन है… मैं कहां जा रही हूं… क्या कर रही हूं… और मैं भी अपनी सारी बातें तुमसे शेयर करती. हमारे दिन-रात के अंतर का भी हमारी बातचीत पर असर नहीं पड़ता था. तुम देर रात तक जागते थे, मुझसे बात करने के लिए.

उस दिन, तुम शायद नशे में थे, जब मैंने तुम्हें अपनी ऑफिस की पार्टी के बारे में बताया था, क्योंकि तुम्हारा ऐसा रूप मैंने पहले कभी नहीं देखा था. तुमने मुझे, अपनी प्रिया को इतना बुरा-भला कह दिया कि मुझे विश्‍वास ही नहीं हो रहा था अपने कानों पर. तुमने मेरे चरित्र पर सवाल उठाए कि ऑफिस पार्टी में दूसरों के साथ डान्स क्यों किया… इतना बन-ठन के क्यों गई… मेरे लिए काफ़ी शॉकिंग था तुम्हारा यह बर्ताव, पर मैंने अपने दिल को यही कहकर समझा लिया कि तुम दूर हो, इसीलिए ओवर पज़ेसिव हो रहे हो. साथ ही तुम नशे में भी थे.
ख़ैर, दो-तीन दिन की नाराज़गी के बाद तुमने माफ़ी मांगी और सब कुछ नॉर्मल हो गया. लेकिन फिर कुछ दिनों बाद तुम्हारे वही सवालात… कि फोन क्यों नहीं उठाया, मेरा फोन था, तुम समझती क्या हो, नौकरी करके मुझ पर एहसान नहीं कर रही… और भी न जाने क्या-क्या… उसके बाद तो ये सिलसिला रूटीन ही बन गया था… तुम हर रोज़ किसी न किसी बात को लेकर मुझे बुरा-भला कहते और अगले दिन माफ़ी मांग लेते.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मुझे माफ़ कर देना… (Pahla Affair: Mujhe Maaf Kar Dena)

अगले महीने तुम छुट्टियों में इंडिया आनेवाले थे. मुझे लगा मिलकर बात करेंगे, तो शायद मैं तुम्हें बेहतर ढंग से समझा सकूं. तुम आए, हम मिले भी, पर मुझे कहीं न कहीं यह एहसास हो रहा था कि तुम्हारा पुरुष अहम् तुम्हें सहज नहीं रहने दे रहा था मेरे साथ. तुम्हें लगता था कि तुम जो बोलो वही हो, तुम जब बोलो, तभी हो, क्यों? “क्योंकि मैं बोल रहा हूं, क्या इतना काफ़ी नहीं है?” यही जवाब होता तुम्हारा.
जब मन करता मेरा फोन उठाकर चेक करना, सोशल मीडिया पर किस-किस से पिक्चर लाइक की है, उसका नाम देखकर उसके बारे में सवाल करना… उसके बाद सोशल मीडिया से दूर रहने की सलाह देना… और मैं भी हर बात मानती चली गई, क्योंकि मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती थी. पर अक्सर मन में सोचती थी कि मेरा राज ऐसी सोच रखता है. इस मॉडर्न ज़माने में, ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, फिर भी ऐसी सोच?

उस दिन जब तुम वापस लौट रहे थे, मन बहुत उदास था. तुमसे लिपटकर रो रही थी मैं और तुमने मुझे सहलाते हुए कहा, “प्रिया, रोने की क्या बात है, तुम्हारे तो यहां भी बहुत सारे दोस्त हैं. उनस मन बहला लेना.”

“ये क्या बकवास है…”

“अरे, ठीक ही ता है. फ्रेंड्स तो होते ही इसलिए हैं. इतना सीरियस होने की क्या बात है.”

ख़ैर, तुम चले गए. तुम्हारी स्टडीज़ कंप्लीट होने को थी और अब तुम हमेशा के लिए इंडिया आनेवाले थे. हम शादी करनेवाले थे. तुम आए, हमारी सगाई भी हो गई. एंगेजमेंट में तुम्हारे दोस्त मेरे साथ हंसी-मज़ाक कर रहे थे. पार्टी ख़त्म होने पर मैंने तुमसे गौतम के बारे में पूछा भी था कि काफ़ी हंसमुख लड़का है. और तुमने कहा, “हां, पसंद है, तो नंबर दे देता हूं. बुला लेना रात को. चाहो तो बेड भी शेयर कर लेना.”

मैं पत्थर बनी वहीं खड़ी रही. सारी रात सोचती रही… कहां, क्या ग़लत हो रहा है मुझसे? क्या मैं यह सब डिज़र्व करती हूं?

“अरे, प्रिया सुबह-सुबह, क्या बात है?”

“हां राज, तुमसे ज़रूरी बात करनी थी. तुम्हें कुछ देना चाहती हूं.”

“क्या लाई हो मेरे लिए स्वीटहार्ट?”

“ये एंगेजमेंट रिंग, इसे अपने पास ही रखो और जब तुम्हें कोई ऐसी लड़की मिल जाए, तो तुम्हारी घटिया सोच के साथ निभा सके, तब उसे यह पहना देना.” और मैं चली आई वहां से. मेरे परिवारवाले भी मेरे इस फैसले से सहमत थे. तुमने भी उसके बाद कोई फोन या माफ़ी नहीं मांगी, क्योंकि मैं जानती थी, तुम्हारा ईगा इतना बड़ा है कि कोई लड़की तुम्हें ठुकरा दे, यह तुमसे बर्दाश्त नहीं होगा.

मेरा पहला प्यार भले ही अधूरा था, उसमें दर्द था, लेकिन मैंने सही समय पर उसे अधूरा छोड़ने का जो फैसला लिया, उससे मैं ख़ुश थी. ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं, इंसान को परखने से कहीं ज़्यादा उसे समझने में व़क्त लग जाता है. ऊपरवाले ने मेरे लिए भी कोई न कोई सही और सच्चा इंसान ज़रूर चुन रखा होगा. जब वो मुझे मिल जाएगा, तो दोबारा प्यार करने से परहेज़ नहीं करूंगी, क्योंकि मुझे प्यार से शिकायत नहीं, प्यार की भावना पर पूरा भरोसा है मुझे, क्योंकि प्यार ग़लत नहीं होता, ग़लत स़िर्फ इंसान होता है.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम बिन… अधूरी मैं! (Pahla Affair: Tum Bin… Adhuri Main)

बढ़ती उम्र, बदलती सेक्स की चाहत (Does Sex Drive Decreases With Age?)

बदलाव जीवन का नियम है और इसे टाला नहीं जा सकता. बदलाव के साथ ख़ुद को ढालना आसान नहीं होता है, परंतु हर किसी को कभी-न-कभी बदलाव को अपनाना ही पड़ता है. यही बात बढ़ती उम्र (Age) के साथ सेक्स, सेक्स डिज़ायर (Sex Desire) और सेक्सुअल परफॉर्मेंस (Sexual Performance) पर भी लागू होती है. बढ़ती उम्र के साथ सेक्सुअल डिज़ायर और सेक्सुअल परफॉर्मेंस में क्या-क्या बदलाव (Changes) आते हैं और उनका किस तरह सामना करना चाहिए, यह जानने के लिए हमने मुंबई की सेक्स स्पेशलिस्ट डॉ. एस. लता से बातचीत की.

 Sex Drive
सेक्स डिज़ायर और उम्र

सेक्स डिज़ायर उम्र के साथ घटने लगती है, परंतु लोग इस बात पर बहुत कम ध्यान देते हैं और अधिकतर समय उसका कारण जानने या ‘पहले जैसी सेक्स की ताक़त कैसे वापस पाएं’ यह सोचने में लगाते हैं. उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्त्री और पुरुष दोनों में शारीरिक बदलाव होते हैं, जैसे- त्वचा की संवेदनशीलता कम होना, बालों का स़फेद होना, हार्मोनल बदलाव, उम्र  से संबंधित बीमारियां, पुरुषों में सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की कमी होना और स्त्रियों में मेनोपॉज़ का होना. जब लोग उम्र के 40वें वर्ष में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें तरह-तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं, जैसे- आर्थराइटिस, डायबिटीज़, दिल की बीमारी, कमर दर्द आदि, जिसका सीधा असर सेक्स जीवन पर पड़ता है. ये सभी बीमारियां ऐसी हैं, जो सेक्स की इच्छा को कम करती हैं.

महिलाओं में सेक्सुअल डिज़ायर कम होने के कारण

शारीरिक व मानसिक कारण

महिलाओं में उम्र के साथ-साथ सेक्स हार्मोन, एस्ट्रोजेन की कमी हो जाती है, जिससे उनमें सेक्स की इच्छा कम हो जाती है. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के वेजाइना की वॉल पतली और ड्राई हो जाती है, जिससे सेक्स के दौरान बहुत दर्द होता है. यह भी एक कारण होता है कि महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ सेक्स की इच्छा कम हो जाती है.

सामाजिक दबाव

भारतीय समाज में आज भी महिलाओं पर इतनी बंदिशें हैं कि वे खुलकर सेक्स के बारे में बात तक करने से घबराती हैं. उम्र बढ़ने पर सामाजिक दबाव और बढ़ जाता है. महिलाएं हमेशा सोचती हैं कि अब इस उम्र में सेक्स करना ठीक नहीं, बच्चे बड़े हो गए हैं, समाज क्या कहेगा? यह भी एक कारण है कि उनमें उम्र बढ़ने के साथ सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.

बीमारियां और दवाइयां

उम्र बढ़ने के साथ कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जैसे- ब्लड प्रेशर, मानसिक दबाव, नींद न आना. इन सब से बचने के लिए तरह-तरह की दवाइयां लेनी पड़ती हैं. उन दवाइयों का असर भी सेक्स जीवन को प्रभावित करता है. इनमें से ब्लड प्रेशर की दवाइयां और मानसिक तनाव की दवाइयों का प्रयोग महिलाएं अधिक करती हैं.

लाइफ़स्टाइल

शहरों में महिलाओं की बदलती लाइफ़स्टाइल का असर भी सेक्स पर पड़ता है. बड़े शहरों में रहनेवाली महिलाएं काम करती हैं, सिगरेट-शराब पीने से भी बहुत-सी महिलाएं परहेज़ नहीं करतीं और अक्सर बाहर का खाना खाती हैं. इन सबका असर शरीर और सेक्स की इच्छा पर पड़ता है.

लुक्स

उम्र बढ़ने के साथ-साथ लुक्स में भी काफ़ी बदलाव आते हैं. इस बात का भी असर सेक्स लाइफ़ पर पड़ता है. शारीरिक आकर्षण कम हो जाने से महिलाओं में सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, क्योंकि महिलाएं अपने लुक्स को लेकर काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं.

यह भी पढ़ें: जानें सुबह के वक़्त सेक्स के 5 फ़ायदे (5 Health Benefits Of Morning Sex)

Sex Problems

पुरुषों में सेक्सुअल डिज़ायर कम होने के कारण

हार्मोनल बदलाव

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में भी हार्मोनल बदलाव आते हैं, जिसमें सेक्स हार्मोन, एंड्रोजन, टेस्टोस्टेरॉन में कमी हो जाती है, जो पुरुषों में सेक्स डिज़ायर के लिए ज़रूरी है. इसकी कमी होने से उनमें सेक्स की इच्छा में कमी आती है.

इरेक्टाइल डिस़्फंक्शन

उम्र बढ़ने के साथ हार्मोंस में कमी के कारण पुरुषों में इरेक्शन की समस्या हो जाती है. इरेक्शन ठीक से न होने से सेक्स करने में असमर्थता की वजह से सेक्स की इच्छा में भी कमी आ जाती है.

मानसिक दबाव

पुरुष अधिकतर कई तरह का दबाव अपने ऊपर लेते हैं, जैसे- काम का दबाव, परिवार का दबाव, बच्चों की पढ़ाई का दबाव और उनकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अपनी समस्याएं बहुत कम शेयर करते हैं. ऐसे में ये दबाव उन्हें शरीर से कमज़ोर कर देते हैं. इसके अलावा मानसिक तनाव के कारण भी उनकी सेक्स लाइफ़ प्रभावित होती है.

पार्टनर के सहयोग की कमी

उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं में सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, जिससे वो अपने साथी पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाती हैं, इससे उनका वैवाहिक जीवन नीरस हो जाता है और पुरुषों में भी सेक्स की चाह कम होने लगती है. इसलिए यह ज़रूरी है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ अपने साथी की तरफ़ ध्यान भी दें. एक-दूसरे की ज़रूरत के हिसाब से बदलाव लाएं, ताकि सेक्स की चाहत बनी रहे.

बच्चे होना

बच्चे होने पर पत्नी ज़्यादातर बच्चों को ही पूरा अटेंशन देने लगती है और पति से उसका जुड़ाव कम हो जाता है. इसके अलावा अधिकतर महिलाओं की सोच होती है कि बच्चे बड़े हो रहे हैं और बढ़ते बच्चों के सामने सेक्स करना ग़लत है. बस उनकी ये सोच उन्हें सेक्स से दूर कर देती है.

यह भी पढ़ें: दूर कीजिए सेक्स से जुड़ी 10 ग़लतफ़हमियां (Top 10 Sex Myths Busted)

Sex Desire

कैसे लें बढ़ती उम्र के साथ सेक्स का आनंद?

सेक्स के आनंद को उम्र के साथ कम न होने देना हमारे अपने हाथ में होता है. यदि कुछ बातों का ध्यान रखें, तो उम्र बढ़ने के बावजूद सेक्स की इच्छा को बनाए रखा जा सकता है.

एक्सपेरिमेंट करें

बढ़ती उम्र में पहले की तरह सेक्स करना बहुत मुश्किल होता है, इसलिए सेक्स करने के लिए अलग आसन और कुछ नए तरी़के अपनाने चाहिए. इससे सेक्स का आनंद भी बढ़ता है और सेक्स करने की इच्छा भी बनी रहती है.

सलाह लें

सेक्स की इच्छा में कमी आने पर आप स्पेशलिस्ट से सलाह लें, काउंसलर की मदद लें. उनके बताए उपाय काफ़ी कारगर साबित होंगे.

फ़िटनेस पर ध्यान दें

न स़िर्फ स्वास्थ्य की दृष्टि से, बल्कि सेक्स के नज़रिए से भी फ़िटनेस बहुत ज़रूरी है. ख़ुद को फ़िट रखेंगे, तो बीमारी दूर रहेगी, ऊर्जावान महसूस करेंगे और सेक्स की चाहत जागेगी. साथ ही आपका शारीरिक आकर्षण भी बरक़रार रहेगा, जो आपके पार्टनर को आपकी ओर खींच लाएगा.

– अभिषेक शर्मा

यह भी पढ़ें: जानें पुरुषों के कामोत्तेजक अंग (Erogenous Zones Of The Male Body)

पहला अफेयर: मुझे माफ़ कर देना… (Pahla Affair: Mujhe Maaf Kar Dena)

Love Stories in Hindi

पहला अफेयर: मुझे माफ़ कर देना… (Pahla Affair: Mujhe Maaf Kar Dena)

न जाने क्यों वो आज भी बहुत याद आती है. तीन साल बीत गए, पर बीते दिनों की याद मन में हलचल ही पैदा करती है. प्रेम अद्भुत होता है. जीवन में कब और किससे हो जाए कोई नहीं जानता. किसी के लिए मनमोहक एहसास, तो किसी के लिए जीने का सबब. मेरे लिए मेरा प्यार उसकी नफ़रत है. उसकी ज़िंदगी में मेरी कोई जगह नहीं, फिर भी न जाने कौन-सा तार है, जो मुझे उसकी ओर खींच ही लेता है. बार-बार माफ़ी मांगता हूं, क्योंकि उसका दिल बुरी तरह ज़ख़्मी हुआ है.

फेसबुक पर पहली मुलाक़ात हुई थी. फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले उसका प्रोफाइल चेक किया. भोली-भाली मासूम-सी लगी थी. तीखे नयन-नक्श किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफ़ी थे. धीरे-धीरे बातचीत होने लगी. कभी-कभी लगता कि बातों-बातों में कुछ कहना चाहती है. अब मुझे उसकी आदत हो गई.

एक दिन उसने सीधे सरल शब्दों में प्यार का इज़हार करते हुए कहा, “मैं तुम्हें प्यार करती हूं, मैं नहीं जानती कि तुम्हारे दिल में क्या है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि तुम भी मुझे प्यार करो. प्यार कोई सौदा नहीं कि प्यार के बदले प्यार मिले, ये वो रूहानी एहसास, जो दिल से महसूस किया जाता है, जो मैंने तुम्हारे प्रति पाया.”

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: ख़्वाब (Pahla Affair: Khwab)

मैं तो जैसे इसी इंतज़ार में था. बिना कुछ सोचे-समझे ‘हां’ कह दिया. एक दिन मन में विचार आया कि जब ज़िंदगी उसके साथ
गुज़ारनी है, तो क्यों न रू-ब-रू हुआ जाए. जब मैंने उसे इस बारे में कहा, तो वह तुरंत तैयार हो गई. जब पहली बार उससे मिला तो मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई. इतना बड़ा धोखा. उस व़क्त तो मैं कुछ कह नहीं पाया, पर उससे दूरियां बनानी शुरू कर दीं.

मेरे और उसके बीच एक दीवार खड़ी हो गई थी. एक व्हील चेयर पर बैठी लड़की और एक अति महत्वाकांक्षी लड़के के बीच बनी ये
दीवार, जिसके नीचे प्यार, सपने सब दब गए. मन ही मन सोचता मैंने

जल्दबाज़ी कर दी. मेरा और उसका क्या मेल? मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था कि मैं एक विकलांग लड़की के साथ प्यार करूंगा. कभी-कभी लगता कि मेरे सारे दोस्त मुझ पर हंस रहे हैं, ये दुनिया ताना दे रही है. मैं घबराकर आंखें बंद कर लेता हूं. मैं मन ही मन प्रश्‍न करता हूं कि मुझसे ग़लती कहां हो गई.

एक दिन मैंने उसके सामने मन की बात रखी कि अब आगे जाना संभव नहीं होगा. “क्या एक विकलांग लड़की प्यार नहीं कर सकती. क्या मेरा प्यार मेरे पैरों की तरह कमज़ोर था?” उसकी आंखों में आंसू उतर आए. मेरे पास कोई जवाब नहीं था. उसके बाद उसने मुझे अनफ्रेंड कर दिया, कभी कोई मैसेज नहीं किया. यहां तक कि उसने अपना अकाउंट भी डिलीट कर दिया. बिना कुछ कहे, बिना कोई शिकायत के वो मेरी ज़िंदगी से चली गई. आख़िरी बार उसकी बातों में जो उदासी छलकी थी उसे भुला नहीं पाया.

सच में ग़लती मेरी थी. उसके प्रोफाइल पर लगे फोटोग्राफ्स पर ध्यान नहीं दिया. क्यों कभी नहीं पूछा कि वो क्या करती है… मोहब्बत का कोई दायरा नहीं होता, पर मैं न जाने किस दिशा में भटक गया. आज मैं अपनी ग़लती के लिए क्षमाप्रार्थी हूं और बार-बार माफ़ी मांगता हूं कि मुझे माफ़ कर दो…

– शोभा रानी गोयल

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का… (Pahla Affair: Messagewala Ladka)

बॉलीवुड की 9 स्वीट लव स्टोरीज़… जिन्हें मिली उनकी मंज़िल! (9 Bollywood Love Stories With Happy Endings)

Bollywood Love Stories

बॉलीवुड की 9 स्वीट लव स्टोरीज़… जिन्हें मिली उनकी मंज़िल! (9 Bollywood Love Stories With Happy Endings)

एक लफ़्ज़, एक एहसास… एक चाहत-सी कुछ ख़ास… न दरमियान कोई, न फासले, पर इम्तिहान कई हैं इस राह पर… ़कैद होते हैं आंखों में कई हसीन सपने, लबों पर गुलाब-से खिले रहते हैं… कोई ये माने या न माने, पर दिलों में अंजाने से कुछ सिलसिले रहते हैं… कभी डगमगाती राहों में, कभी धूप में, तो कभी छांव में… हर व़क्त निगाहें ढूंढ़ती हैं महबूब को अपने इश्क़ की पनाहों में…
प्यार, इश्क़, मुहब्बत, लव… कुछ भी कह लो, पर एहसास एक ही है… इस एहसास ने जिसे भी छू लिया, उसने ख़ुद को खोकर भी जैसे सारा जहां पा लिया… यहां हम इसी अनोखे एहसास का ज़िक्र करेंगे, जिनसे अछूते हमारे फिल्मी सितारे भी नहीं रहे… उन्होंने कैसे अपनी मुहब्बत को ताउम्र के लिए पाया और किस शिद्दत से अपने प्यार को निभाया, आइए जानें…

amitabh bachchan and jaya bachchan

अमिताभ-जया… अनोखी मुहब्बत के सिलसिले
जिस व़क्त अमिताभ बॉलीवुड में स्ट्रगल कर रहे थे, उस समय जया एक स्थापित अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि स्टार थीं. अमिताभ एक फ्लॉप एक्टर थे और उस समय उनके साथ कोई भी एक्ट्रेस काम नहीं करना चाहती थी. फिर आई फिल्म ज़ंजीर, जिसमें अमिताभ को जया के साथ पेयर किया गया. ज़ंजीर अमिताभ की पहली सोलो हिट साबित हुई. कहा जाता है कि ज़ंजीर से पहले अमिताभ ने अपनी नाकामयाबी से तंग आकर फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंज़ूर था. जहां ज़ंजीर ने इंडस्ट्री को एंग्री यंग मैन के रूप में नया सुपरस्टार दिया था, वहीं अमिताभ को पर्सनल लाइफ में उनका सच्चा प्यार भी मिला जया के रूप में और दोनों शादी के बंधन में बंध गए.
हालांकि अमिताभ के रेखा के साथ लिंक अप की बातों के बाद इन दोनों की शादी में कुछ प्रॉब्लम्स ज़रूर आई थी. यश चोपड़ा ने अपने इंटरव्यू में कहा भी था कि फिल्म सिलसिला कीर शूटिंग के दौरान जया और रेखा के बीच माहौल काफ़ी तनावपूर्ण रहा करता था…
ख़ैर, वो पुरानी बातें हैं, जया ने अमिताभ की हर मुश्किल घड़ी में पूरी शिद्दत से साथ दिया. जिस व़क्त अमिताभ कुली के दौरान लगी चोट के कारण अस्पताल में थे, उस व़क्त जया ने उन्हें इस तरह संभाला कि अमिताभ को अपने प्यार के सामने झुकना ही पड़ा. आज ये बॉलीवुड के सबसे हैप्पी और आदर्श कपल के रूप में जाने जाते हैं, इसका ताज़ा उदाहरण है अपनी 45 एनीवर्सरी पर अमिताभ का जया के साथ क्यूट-सा पिक्चर सोशल मीडिया पर शेयर करना और ब्लॉग में अपने दिल की बात कहना. अमिताभ ने लिखा था कि वो यह स्पेशल दिन जया के साथ नहीं गुज़ार पाएंगे, क्योंकि जया ट्रैवल कर रही हैं, इसलिए वो आधी रात को जया को फोन कर रहे हैं, क्योंकि अगला दिन बहुतों के लिए सामान्य, पर कुछ के लिए ख़ास होगा. इस रोमांटिक मैसेज ने सबका दिल जीत लिया और अमिताभ के जया के प्रति प्यार को और गहराई से साबित भी कर दिया.

Bollywood Love Stories

ऋषि कपूर-नीतू सिंह… लवर बॉय ने यूं इंप्रेस किया अपनी लेडी क्वीन को
ऋषि कपूर बॉलीवुड के ओरिजनल लवर बॉय कहे जाते हैं. उनकी चॉकलेटी हीरोवाली इमेज ने लाखों दिलों को धड़काया, जिसमें नीतू का भी एक दिल शामिल था. ऋषि ने नीतू को इंप्रेस करने के लिए न जाने क्या-क्या किया. दोनों की ऑनस्क्रीन जोड़ी भी काफ़ी पसंद की जाती थी और ऑफ स्क्रीन भी उन्होंने ख़ुद को परफेक्ट हसबैंड-वाइफ साबित कर दिया. कहा जाता है कि फिल्म कभी-कभी की शूटिंग के दौरान ऋषि-नीतू पर एक गाना फिल्माया जा रहा था, तब ऋषि ने बिना नीपैड के ही जोश-जोश में भागकर ऊपर से जंप लगाया और घटने के बल नीतू के सामने बैठकर गाने की शूटिंग करने लगे, जबकि उस व़क्त ऋषि के घुटने बुरी तरह चोटिल हो गए थे, पर नीतू को इंप्रेस करने के चक्कर में अपना दर्द छुपा गए. नीतू ने महज़ 21 साल की उम्र में ही अपना बेहद सफल फिल्मी करियर छोड़कर शादी कर ली और इस शादी को वो अब तक पूरी शिद्दत से निभा भी रही हैं.

Saif ali khan and kareena

सैफ-करीना… नवाब का टशन बहुत भाया गॉर्जियस बेबो को
फिल्म टशन की शूटिंग के दौरान सैफ और करीना में प्यार हुआ और इसी दौरान करीना और शाहिद का रिश्ता भी टूटा. पांच साल तक सैफ और करीना ने एक-दूसरे को डेट किया. अपने रिश्ते को किसी से नहीं छुपाया और करीना हमेशा सैफ को अपना बेस्ट फ्रेंड भी मानती थीं, जो उनके रिश्ते को और मज़बूत बनाता था. अलग-अलग मज़हब से होने के बाद भी दोनों ने शादी की और आज करीना सैफ की बेगम हैं.

shahrukh khan and gauri khan

शाहरुख-गौरी… एक परीकथा-सी लव स्टोरी
जिस व़क्त शाहरुख गौरी के दीवाने हुए थे, उस समय वो स्टारडम से कोसों दूर थे. गौरी के परिवारवाले नहीं चाहते थे कि शाहरुख गौरी के क़रीब आएं. यहां तक कि शाहरुख के ओवरपज़ेसिवनेस से तंग आकर गौरी भी उन्हें बिना बताए मुंबई चली आई थीं. लेकिन सच्चा प्यार किसी के रोके नहीं रुकता. शाहरुख भी गौरी के पीछे-पीछे मुंबई आ गए और दोनों को ही यह एहसास हुआ कि उनकी मंज़िल एक ही है. हालांकि गौरी ने शाहरुख के सामने एक शर्त भी रखी कि शाहरुख शादी के बाद उन्हें शॉर्ट ड्रेसेज़ पहनने देंगे और इसी शर्त पर वो शाहरुख से शादी करेंगी, क्योंकि शाहरुख गौरी को छोटे कपड़े नहीं पहनने देते थे.
दोनों ने शादी का फैसला किया, लेकिन उनकी शादी में थोड़ी अड़चन आई, क्योंकि शाहरुख न स़िर्फ दूसरे धर्म के थे, बल्कि उनका करियर भी स्टेबल नहीं था, वो बॉलीवुड में स्ट्रगल कर रहे थे, लेकिन शाहरुख के सच्चे प्यार और दिल जीत लेनेवाले व्यवहार ने गौरी के पैरेंट्स को तैयार कर लिया और दोनों ने शादी कर ली.

akshay kumar and twinkle khanna

अक्षय कुमार-ट्विंकल खन्ना… मिस्टर खिलाड़ी को ऐसी मिली परफेक्ट मिस खिलाड़ी…
अक्षय कुमार की इमेज इंडस्ट्री के प्ले बॉय की थी. रवीना टंडन, पूजा बत्रा, शिल्पा शेट्टी के साथ लिंक अप्स की ख़बरों के बाद ट्विंकल से उनकी नज़दीकियां इतनी बढ़ीं कि ये रिश्ता शादी में बदल गया. शादी के बाद भी अक्षय की अपनी को-स्टार्स से नज़दीकियों के किस्से काफ़ी आते रहे, लेकिन ट्विंकल का भरोसा अपने रिश्ते पर बना रहा और अब ये कपल सभी का फेवरेट है.

Bollywood Love Stories

यह भी पढ़ें: सारा और जाह्नवी में कौन है बेहतर? जानिए कार्तिक आर्यन की राय (Kartik Aaryan Feels Sara Ali Khan Has A Brighter Future Than Janhvi Kapoor)

दिलीप कुमार-सायरा बानो… आज भी हैं साहेब की मलिका सायरा
दोनों की उम्र में 22 साल का अंतर है. सायरा दिलीप साहब की फैन थी और उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि वो उनकी बेगम भी बनेंगी, पर नियति को यही मंज़ूर था. सायरा की मां चाहती थीं कि सायरा और दिलीप कुमार की शादी हो. शादी के कुछ साल बाद सायरा ने एक्टिंग करियर छोड़ दिया. इसी बीच सायरा और दिलीप के बीच एक पाकिस्तानी लड़की भी आई, जिसके बारे में कहा जाता है कि दिलीप ने उसके साथ निकाह भी रचा लिया था. पर जल्द ही दिलीप कुमार को यह एहसास हुआ कि वो लड़की उन्हें चीट कर रही है. इस दौरान सायरा दिलीप कुमार का सहारा बनी रही और उन्होंने दिलीप साहब को पूरी तरह संभाला. आज भी उम्र व बीमारी के इस दौर में सायरा दिलीप कुमार का हाथ थामे रहती हैं. प्यार से वो उन्हें साहेब कहकर बुलाती हैं. कहते हैं कि जब दिलीप साहब स्वस्थ थे, तो सायरा को मलिका की तरह रखते थे. उनके सारे नाज़ उठाते और बेहद प्यार करते थे. इसे ही सच्चा प्यार कहते हैं. अब सायरा उन्हें बच्चों की तरह संभालती हैं.

priyanka and nick jonas

प्रियंका-निक … देसी गर्ल को मिला सात समंदर पार अपना सच्चा प्यार
एक देसी गर्ल, दूसरा हॉलीवुड का रॉक स्टार… लेकिन दोनों का मिलन हुआ. निक को प्रियंका के इंटेलिजेंस और कॉन्फिडेंस से इतना इंप्रेस किया कि वो प्रियंका के दीवाने हो गए. दोनों की उम्र में 10 साल का अंतर है, निका प्रियंका से 10 साल छोटे हैं और कुछ लोग इस बात को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी करते रहते हैं, लेकिन इन लव-बर्ड्स को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा और दोनों ही शादी के बंधन में बंध गए. निक भारत आए और भारतीय परंपरा के अनुसार सगाई व शादी भी की. यही सच्चे प्यार की निशानी होती है.

abhishek bachchan and aishwarya rai

अभिषेक-ऐश्‍वर्या… मिस वर्ल्ड पर इस कदर मर मिटे थे जूनियर बी
ऐश्‍वर्या जहां सलमान से अपने टूटे रिश्ते से उबरने की कोशिश में थीं, वहीं अभिषेक भी करिश्मा की यादों से ख़ुद को बाहर निकाल रहे थे. दोनों उस व़क्त साथ में तीन फिल्मों की शूटिंग कर रहे थे और फिल्म गुरू के प्रीमियर के दौरान अभिषेक ने दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत लड़की ऐश्‍वर्या के सामने अपना हाले-दिल बयां किया. ऐश ने अभिषेक का प्रपोज़ल स्वीकार कर लिया. लेकिन ऐश का मांगलिक दोष, अभिषेक पर जाह्नवी नाम की एक लड़की का यह आरोप लगाकर अपने हाथ की नस काट लेना कि अभि ने उससे शादी का वादा किया था और धूम 2 की शूटिंग के दौरान ऐश का किसिंग सीन… ये तमाम बातें दोनों के बीच आईं, लेकिन उनके प्यार को और उन्हें एक होने से नहीं रोक पाईं. आज ऐश बच्चन परिवार की बहू हैं और अभि के साथ बेहद ख़ुश भी.

deepveer

रणवीर सिंह-दीपिका… फेवरेट कपल से लेकर बेस्ट जोड़ी तक…
दीपिका का दिल रणबीर कपूर ने कुछ ऐसा तोड़ा था कि दीपिका के लिए संभलना बेहद मुश्किल हो गया था. वो डिप्रेशन में चली गई थीं. उनके टूटे दिल को जब रणवीर ने संभाला, तो दीपिका को ज़िंदगी से बेहद प्यार हो गया. रामलीला के सेट से जो इनकी लव स्टोरी शुरू हुई, वो शादी की मंज़िल तक पहुंचकर ही पूरी हुई. रणवीर का केयरिंग और लविंग नेचर हर किसी को पसंद है और उनकी यही बात व ज़िंदादिली दीपिका को भी बेहद लुभाई. रणवीर एक पॉज़ीटिव इंसान हैं और उनके साथ भला कौन ख़ुश नहीं होगा. आज दीपिका मिसेज़ रणवीर बन चुकी हैं और अपनी लाइफ से बेहद ख़ुश हैं.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: माइनस 10 डिग्री में टीवी की इस संस्कारी बहू ने कराया बिकनी में फोटोशूट, देखें पिक्स (See The Bold Photo Shoot Of This TV Actress)

पहला अफेयर: ख़्वाब (Pahla Affair: Khwab)

Love Story in Hindi
पहला अफेयर: ख़्वाब (Pahla Affair: Khwab)

कभी देखा है ख़्वाबों को उड़ते हुए… कभी देखा है चांद को आंगन में बैठे हुए… कभी देखा है आसमान को झुकते हुए… कभी देखा है हथेली पर सूरज को उगते हुए… एक ख़ामोश अफ़साने से तुम जब आते हो. फेसबुक पर जब देखती हूं ये सब कुछ होते हुए, सारी कायनात का नूर समेटे हुए अपनी अदाओं में बेपनाह चाहत भरे हुए जब तुम होते हो, तब स़िर्फ तुम होते हो और कोई नहीं होता आस-पास.

आज दो साल हो गए तुमसे बात करते हुए, हम फेसबुक पर एक-दूसरे से चैट करते हैं. कब समय गुज़र गया, पता ही नहीं चला. न व़क्त का होश रहा, न ही अपना ख़्याल. दीन-दुनिया से बेख़बर हम घंटों चैट करते. हर टॉपिक पर बात करते. बहत करते, खिलखिलाते एक अलग ही जहां में खोये रहते.

अजीब चीज़ है ये व़क्त भी… न कभी ठहरता है, न कभी रुकता है. बस, आगे ही आगे बढ़ता रहता है. एक दिन पापा-मम्मी ने कहा, “शादी की उम्र हो गई है तुम्हारी. कोई पसंद हो, तो बताओ.” शादी का नाम सुनते ही कुंआरी उमंगें अंगड़ाई लेने लगीं, पर पसंद तो कोई नहीं था, सो पापा से कहा, “जो आपकी पसंद हो.”

कैसा जीवनसाथी होना चाहिए? उसमें क्या गुण होने चाहिए? क्या बात करनी चाहिए… जब मैंने टाइप करते हुए पूछा, तो उसने कहा, ‘जो तुम्हारी आंखों से ही समझ जाए कि तुम्हें कुछ कहना है… तुम्हारी ख़ामोश ज़ुबां की आवाज़ उसकी धड़कन को सुनाई दे, जो रिश्तों की कद्र करे, तुम्हें मान दे… ऐसा होना चाहिए जीवनसाथी.’ कहां ढूंढ़ूं उसे? पूझने पर बताया बस अपनी आंखें बंद करो, जिसका भी चेहरा सामने आए, वही है सच्चा जीवनसानी, जैसा कहा, वैसा किया, पर कोई चेहरा सामने नहीं आया. आता भी कैसे? इस फेसबुक के चेहरे के अलावा न किसी से जान, न पहचान.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: ख़्वाबों के दरमियान… (Pahla Affair: Khwabon Ke Darmiyaan)

आज पापा ने कुछ लोगों को घर पर बुलाया है. मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि एक अंजान शख़्स से कैसे बात करूं? फेसबुक पर उससे बात करने में जो कंफर्ट लेवल था, वो यहां नहीं था. शाम को वो लोग आए और पापा ने पराग से मेरा परिचय करवाते हुए अकेले में बात करने को कहा. मैं बेहद घबराई हुई थी कि क्या और कहां से बात शुरू करूं. पराग ने भी बस मेरा नाम ही पूछा. हम दोनों लगभग आधे घंटे तक चुपचाप बैठे थे. कुछ दिन बाद पापा ने शादी की तारीख़ भी तय कर दी. मैंने फेसबुक पर उसे मैसेज किया कि कुछ ही दिनों में मेरी शादी होनेवाली है, पर मुझे नहीं पता वो मेरे लिए सही है या नहीं. उधर से तुरंत जवाब मिला, ‘जो केवल नाम पूछकर शादी के लिए हां कर दे, उस पर भी भरोसा नहीं करोगी क्या?’

‘तुम्हें कैसे पता?’

‘…अब भी नहीं पहचाना इस बंदे को?’ यह पढ़ते ही सब कुछ साफ़ हो गया… ‘पराग आप?’

‘हां, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?’

‘हां…’ दिल की सारी उलझनें मिट गईं. सब कुछ मिल गया था मुझे. आंखें बंद कीं, तो चेहरा भी सामने आ गया पराग का. दो साल कम नहीं होते किसी को जानने के लिए, मैं ही नहीं समझ पाई थी इस प्यार की अनुभूति को. आज ऐसा लगा छोटे-छोटे बादल के टुकड़े हवा में तैर रहे हैं. लग रहा है मानो आकाश ज़मीं पर उतर आया है और शाम की ख़ामोशियों में एक मीठी खनक गूंज रही है.

– शोभा रानी गोयल

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… (Pahla Affair: Khila Gulab Ki Tarah Mera Badan)

पहला अफेयर: ख़्वाबों के दरमियान… (Pahla Affair: Khwabon Ke Darmiyaan)

Pahla Affair Ki Kahani

पहला अफेयर: ख़्वाबों के दरमियान… (Pahla Affair: Khwabon Ke Darmiyaan)

वो ख़्वाब था कोई या मेरी ज़िंदगी की ख़ूबसूरत हक़ीक़त… आज तक नहीं समझ पाई हूं. अचानक आया और कई अरमान जगाकर चला गया… ट्रेन का सफ़र लंबा था और वो मेरे सामनेवाली सीट पर बैठा अपने में ही मस्त था. मुझे थोड़ा अजीब लगा, क्योंकि एक ख़ूबसूरत लड़की सामने बैठी है और पिछले 2-3 घंटों से उसने एक बार में मेरी तरफ़ नज़र भरकर नहीं देखा. पर उसका न देखना ही मुझे उसकी ओर आकर्षित कर रहा था. उसका इस तरह मुझ पर ध्यान न देना ही मुझे ख़ास लग रहा था. न चाहते हुए भी मेरी नज़र उसी की तरफ़ जा रही थी. वो अपने खाने-पीने में, फोन पर म्यूज़िक सुनने में ही बिज़ी था. मैं पहली बार अकेले सफ़र कर रही थी. थोड़ा असहज लग रहा था सब कुछ. मैं खिड़की से बाहर झांकने लगी, कोई बड़ा स्टेशन आया था.

“चाय पीती हैं आप?” अचानक एक आवाज़ आई और मेरे सामने वही था, चाय के दो कप थे हाथ में, एक कप मेरी तरफ़ बढ़ाते हुए कहा उसने… अजीब लड़का है. मैं कुछ कह पाती, उसने वो चाय का कप मेरे हाथ में थमा दिया और फिर अपनी दुनिया में खो गया.

सच कहूं, तो चाय की बहुत ज़रूरत थी उस व़क्त मुझे. शाम ढली, खाने का टाइम हुआ, तो उसने अपने बैग से खाना निकाला और फिर मुझे देखकर बोला, “मेरे साथ खाना शेयर कर सकती हैं आप, मुझे बुरा नहीं लगेगा, ये घर का बना खाना है, आपको अच्छा लगेगा.”

“थैंक यू, आप खा लीजिए, मुझे भूख नहीं है…” मैंने थोड़ा फॉर्मल होते हुए कहा, तो उसने फ़ौरन जवाब दिया, “नहीं खाना है, तो आपकी

मर्ज़ी, पर झूठ मत बोलो कि भूख नहीं है, क्योंकि दिनभर से आपने कुछ नहीं खाया है. आप कुछ डरी हुई-सी लग रही हैं.”

“जी मैं अकेले पहली बार सफ़र कर रही हूं, इसलिए थोड़ा अजीब-सा लग रहा है.”

“कोई बात नहीं, खाना खा लीजिए, आपका डर कुछ कम हो जाएगा, भूखे पेट ज़्यादा डर लगता है.”

मेरे पास अब उसे मना करने का कोई कारण नहीं था. मैंने उससे बातें करनी शुरू कीं, कहां से आया, कहां जा रहा है, क्या करता है… आदि… पर उसने हर बात को बेफिक्री में उड़ा दिया और सीधा-सरल जवाब नहीं दिया.

मैंने भी सोचा कि क्यों इससे इतनी बातें कर रही हूं, सीधा जवाब तो देता नहीं है. कितना अजीब लड़का है. ख़ैर सुबह स्टेशन आया, तो देखा वो भी अपना सामान पैक कर रहा है. फिर उतरने में मेरी मदद करने लगा. मैंने भी ज़्यादा कुछ तो नहीं कहा, पर थैंक्स बोलकर आगे बढ़ गई.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मुझे क्या हुआ है? (Pahla Affair: Mujhe Kya Hua Hai)

“अपना नाम तो बता दो मिस…” पीछे से उसने पुकारा.

मैंने पलटकर स़िर्फ उसको एक स्माइल पास की और आगे बढ़ गई…

एक साल बीत गया. पर वो सफ़र मैं आजतक नहीं भूली हूं, क्योंकि एक अकेले सफ़र में उस अंजान शख़्स से मुझे कुछ देर तो सहज महसूस करवाया. एक पहेली की तरह था वो, जिसे सुलझाने तक का मौक़ा मुझे नहीं मिला. पर उसके प्रति वो आकर्षण आज तक बना हुआ है. सोचती हूं कि क्या मुझे अपना नाम उसे बता देना चाहिए था? कहीं मैंने ग़लती तो नहीं कर दी, क्या पता नाम से बात आगे बढ़ती, तो वो मेरा फोन नंबर, पता-ठिकाना पूछ लेता. पर फिर यह सोचकर मन को समझा लेती हूं कि कितना अजीब लड़का था, क्या पता उसके मन में मेरे प्रति यह आकर्षण था भी या नहीं. मैं बस यूं ही वन वे ट्रैफिक चलाए जा रही हूं.

ख़ैर, जो भी था, बहुत मीठा-गुदगुदानेवाला एहसास था. शायद यही मेरा पहला प्यार था. पर आज इतना सब क्यों सोच रही हूं मैं. अब तो मुझे अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत करनी है, किसी और के ख़्वाबों को अपना बनाना है, उसके ही ख़्वाबों में खो जाना है.

“कविता बेटा, तैयार नहीं हुई क्या अब तक, लड़केवाले आते ही होंगे तुझे देखने…” मां की आवाज़ ने मुझे चौंकाया.

“मैं तैयार ही हूं मां, बस दो मिनट…”

नीचे गई, तो मैं हैरान थी, अरे, ये तो वही लड़का है. मुझे अपनी क़िस्मत पर यक़ीन नहीं हो रहा था. इतने में ही मेरा परिचय करवाया गया, “कविता, ये विक्रमजीत है हमारा छोटा बेटा और तुम्हें जिस ख़ास से मिलना है, वो बस अभी पहुंच ही रहा है. कमलजीत हमारा बड़ा बेटा, वो पीछेवाली कार में था, ट्रैफिक में फंस गया, आता ही होगा.

मुझे फिर एक झटका लगा. ऐसा लगा अब ख़ुद को नहीं रोक पाऊंगी, मैं फूट-फूटकर रो पड़ी, क़िस्मत मेरे साथ ऐसा भद्दा मज़ाक कैसे कर सकती है…!

मैं अपने कमरे में चली आई. सब हैरान थे कि आख़िर ऐसा क्या हो गया…

“उस दिन नाम बता देती, तो आज इस तरह हमारा सामना नहीं होता.” पीछे से विक्रम की आवाज़ सुनाई दी, तो मैं उस पर बिफर पड़ी…

“तुम ख़ुद को क्या समझते हो, ख़ुद चाहे कुछ भी करो, पर मैंने स़िर्फ नाम नहीं बताया, तो उसकी इतनी बड़ी सज़ा मिलेगी मुझे. तुमने भी तो कुछ नहीं बताया था, न नाम, न पता, न फोन नंबर, न ठिकाना और मुझे तो यह भी नहीं पता था कि तुम मुझसे प्यार करते भी हो या नहीं.”

“अरे, अगर ये आपसे प्यार नहीं करता, तो आज आपका हाथ मांगने आपके घर पर नहीं आया होता…” किसी अंजाने शख़्स की आवाज़ थी यह.मैंने पलटकर देखा, तो विक्रम ने परिचय करवाया… “ये मेरे बड़े भाई कमल हैं.”

कमल ने अपनी बात आगे बढ़ाई, “कविता, आपकी फोटो देखते ही विक्रम ने मुझे सब कुछ बता दिया था. पर वो आपके दिल की बात जानना चाहता था और इसीलिए उसी का यह आइडिया था कि मैं बाद में आऊंगा और आपको वो इस तरह सरप्राइज़ करेगा. मम्मी-पापा ने आपको पहले ही पसंद कर लिया था, विक्रम ने उन्हें भी अपने दिल की बात बता दी थी, बस आपकी मर्ज़ी वो जानना चाहता था.”

यह सब सुनकर मुझे विक्रम पर ग़ुस्सा भी आ रहा था और प्यार भी… सच में कितना अजीब लड़का है… पर मैं ख़ुश थी कि मैंने जिसको ख़्वाबों में अब तक संजोया था, वही मेरी ज़िंदगी की ख़ूबसूरत हक़ीक़त बन रहा है, मेरा हमसफ़र बन रहा है. मैं ख़ुशनसीब हूं कि मुझे मेरा प्यार ताउम्र के लिए मिल चुका था. थैंक यू भगवान!

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

पहला अफेयर: मुझे क्या हुआ है? (Pahla Affair: Mujhe Kya Hua Hai)

Love Stories in Hindi

पहला अफेयर: मुझे क्या हुआ है? (Pahla Affair: Mujhe Kya Hua Hai)

उस समय यह पता ही नहीं लगता था कि दिन कब शुरू हो रहा है व कब ख़त्म हो रहा है. बस, दिल में एक ही बात रहती थी कि कब सुबह हो और कब डीटीसी की बस में ऑफिस जाने के लिए बैठूं. रोज़ के आने-जानेवालों में लगभग सभी एक-दूसरे को पहचानते हैं. ऐसे ही एक दिन वो मेरी बगल में बैठी थी. बस, उस दिन से ना जाने क्या हुआ कि रोज़ हम एक-दूसरे की उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा करने लगे.

बस सरोजनी नगर डिपो से आरंभ होकर सचिवालय जाती थी, तो यह भी हम दोनों ही समझ गए कि हम लगभग एक ही जगह के
निवासी हैं व सेवा भी सचिवालय में ही करते हैं. हर रोज़ जब मैं बस में बैठता, तो वो स्वयं ही मेरे पास की सीट पर बैठ जाती अगर कभी वो पहले बस मैं बैठती, तो मैं उसके बगल की सीट पर बैठ जाता. कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा. बात बस नयनों की ही भाषा में चलती रही, पर ज़ुबां से कुछ ना कह पाए.

कुछ समय बाद हम घर वापस आने के लिए भी एक-दूसरे का इंतज़ार करते, परंतु हम कभी भी एक-दूसरे से बात नहीं कर पाते थे. मन की भाषा शायद किसी अपने का मन ही पढ़ सकता है या यूं कहें कि कुछ लोगों से कभी-कभी न जाने क्यों ऐसा प्यार हो जाता है जिसे कहा भी नहीं जा सकता और उनके बग़ैर रहा भी नहीं जा सकता.

हम दोनों का साथ-साथ आना-जाना चलता रहा, पर दिल की बात ज़ुबां पर नहीं आ पाई. मन हमेशा ख़ुश रहने लगा था. सब कुछ अच्छा लगता था. परंतु सब कुछ अपने मन मुताबिक़ नहीं चलता. कुछ दिनों बाद उसने अचानक आना बंद कर दिया. मेरे पास न उसका पता और न ही कोई फोन नंबर था. बहुत दिनों तक मैंने उसका इंतज़ार किया, पर कुछ हासिल नहीं हुआ. मन कहता वो ज़रूर आएगी, पर कब तक इंतज़ार करता. 32 की उम्र हो चुकी थी मेरी, घरवालों ने शादी कर दी. धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा. सुंदर-सुशील पत्नी मिली थी. कुल मिलाकर मैं संतुष्ट था अपनी ज़िंदगी से.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: यादों की परछाइयां… (Pahla Affair: Yaadon Ki Parchhaiyan)

एक दिन जब मैं अपने नए घर के गृह प्रवेश के बाद पास ही के होटल में खाना खाने पत्नी व दोनों बच्चों के साथ गया, तो उसे अपने सामने देखकर सन्न रह गया. वो अपने पति व बच्चों के साथ बैठी हुई थी उसी होटल में. मन बेहद ख़ुश था उसे देखकर. हम दोनों दूर-दूर से ही आपस में एक-दूसरे को देखकर हंसते-मुस्कुराते रहे. खाना खाने के बाद जब वो होटल से बाहर जाने लगे, तो उसके पति ने कई बार मुझे मुड़-मुड़कर देखा.

मैं तो बेहद ख़ुश था. ऐसा लग रहा था जैसे कोई ख़ज़ाना मिल गया हो. कुछ दिनों बाद मेरी बेटी ने मुझसे कहा, “पापा, मेरी मैडम मुझको बहुत प्यार करती हैं और चॉकलेट भी देती हैं.” मैंने उसकी बातों को ज़्यादा तवज्जो नहीं दी और कहा, “बेटा, तुम सुंदर हो और पढ़ने में होशियार हो, इसलिए मैडम प्यार करती हैं.” आज मेरी बेटी का स्कूल में आख़िरी दिन था, क्योंकि वो स्कूल पांचवीं तक ही था. वैसे तो मेरी पत्नी ही जाती थी उसे स्कूल से लेने के लिए, पर उस दिन मुझे जाना पड़ा.

“पापा, वो देखो मेरी मैडम.” मैडम को देखकर मुझे लगा कि मैं फिर लुट गया, क्योंकि वही मेरा पहला प्यार था, जिसको मैंने मन व आंखों की भाषा में पाया था. मैं ठगा-सा मुंह लटकाए घर वापस आ गया. जीवन तो जीना है, पर कुछ लोग न जाने क्यों मन में घर कर जाते हैं. यह मैं समझ नहीं पाया कि मुझे क्या हुआ है?

– दिनेश लखेड़ा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: रूहानी रिश्ता (Pahla Affair: Roohani Rishta)

पहला अफेयर: यादों की परछाइयां… (Pahla Affair: Yaadon Ki Parchhaiyan)

 

पहला अफेयर: यादों की परछाइयां… (Pahla Affair: Yaadon Ki Parchhaiyan)

जहाज़ ने अपनी चाल पकड़ ली है. बस, मेरी यादों की चाल ढीली पड़ गई है. कभी-कभी तन्हाई जीवन को उलट-पलट कर देखने के अवसर देती है- उसकी कुनीन-सी कड़वी बातों ने उसे दोबारा पाने के मेरे दंभ को चकनाचूर कर दिया है. मैं अपने जीवन को तराज़ू में तोलने लगी हूं- एक पलड़ा उसे पाने की चाह में ज़मीन छू रहा है और उसके दंभ का पलड़ा हवा से बातें कर रहा है… उसने तो मुझे अपनी ग़लती को जानने का मौक़ा तक नहीं दिया.

बेटी के बार-बार आग्रह पर पहली बार मैं अमेरिका जा रही हूं. क्या देखती हूं कि सामने से हाथ में छोटा सूटकेस पकड़े उसी अकड़ू चाल से आदी चला आ रहा है. मुझे ज़ोर का झटका लगा. ख़ैर, मैं उसे अनदेखा कर सामने फॉर्मैलिटीज़ पूरी करते अपने मामाजी की तरफ़ मुड़ने को हुई, तभी आगे बढ़कर आदी ने कहा- अरे सुरभि, तुम यहां कहां? मेरा संक्षिप्त उत्तर था- बेटी के पास जा रही हूं. और… जाना कि वो अपनी कंपनी की तरफ़ से शिकागो जा रहा है.

न जाने कितने सालों के पत्थर सरकते रहे हैं सीने से. सुना था उसका विवाह किसी अमीर बाप की इकलौती बेटी से हुआ है. नतीजा, उसके लालची पिता को ख़ूब दान-दहेज से लादा गया होगा. प्लेन में हमारी सीटें नज़दीक थीं. वह जानकर अचरज हुआ कि दो वर्ष के अंदर ही उसका माधवी से विवाह-विच्छेद हो गया.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: आईना (Pahla Affair: Aaina)

मैं टीचिंग लाइन में आ गई थी. साहित्य में एमए करने के बाद मैंने पब्लिक स्कूल में वाइस प्रिंसिपल का पद संभाला. माता-पिता के अति आग्रह के बाद विवाह बंधन में भी बंधी.

मुझे लगा शायद हम ऑक्टोपस की तरह अष्ट पद वाले ऐसे प्राणी हैं, जो समाज के कई कालों में जीने की मजबूरी झेलते हैं. और जब हार्दिक पीड़ा शब्दों में ढलनी दुष्कर हो जाती है, तो शायद ऐसी आग का सृजन होता है, जो आस-पास का सब कुछ तहस-नहस कर देती है. उसके तलाक़ का कारण जानना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता. उसकी बातों में मुझे ठुकराने के पश्‍चाताप का लहज़ा-सा ज़ाहिर था.

आज मेरे मन में कई उद्गार पानी के बुलबुले की तरह उठ-गिर रहे हैं. फिर भी मैं जानना चाहती थी कि मैंने तुमसे तुम्हारी हंसी तो न मांगी थी? अनजाने ही संगिनी बनने का सुख मांग बैठी. और आज है सामने रेतीला मैदान और तेरी यादों की परछाइयां और… तुम्हारे झूठे दंभ के कारण बहुत कुछ झेला है मैंने. मन सागर में आए तूफ़ान की हुंकार सुनी है मैंने.

यूं तो ज़माना ख़रीद सका न हमें… तेरे प्यार के लफ़्ज़ों पर बिकते चले गए हम…

फ्लाइट के लैंड करते ही आदी न जाने कहां गायब हो गया. मुझे कुछ कहने तक का मौक़ा नहीं दिया. यूं भी अब खोखली यादों के सिवा क्या था मेरे पास. ये मेरी यादें परछाइयां बन आज भी डोल रही हैं मेरे संग.

रात होते ही अतीत की यादें मुझे पीछे धकेल ले गईं. सुना है स्मृतियों को कहीं भी उखाड़ कर फेंक दो, कैक्टस के कंटीले झाड़ की तरह फिर से उगने की उद्दंडता कर बैठती है. ऐसे ही एक शाम हम बगीचे में बैठे थे, तभी पेड़ से एक पक्षी मुंह में एक कीड़ा लेकर दूर आसमान में उड़ चला. हम ध्यान से उसे देखते रहे- आदी के एक मनचले दोस्त ने एक शेर कह डाला था… न रख उम्मीद किसी परिंदे से इकबाल… जब निकल आते पर अपना आशियां भूल जाते हैं… आज उस शेर का एक-एक मिसरा मुंह चिढ़ा रहा है. मेरे सीने में नश्तर चुभो रहा है… मुझे माज़ी की अधकचरी यादों में, पीछे धकेल रहा है.

– मीरा हिंगोरानी

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम्हारा जाना… (Pahla Affair: Tumhara Jana)