Dadi Ma Ka Khazana

गर्मी के दिनों में स्वाद और सेहत दोनों के लिए ही कच्चे आम की चटनी और पना फ़ायदेमंद होता है. कच्चे आम खाने से न केवल पेट संबंधी समस्याएं दूर रहती हैं, बल्कि गर्मियों में होनेवाली लू, बदहजमी, एसिडिटी से भी आराम मिलता है. कच्चे आम में विटामिन ए, सी, ई प्रचुर मात्रा में होता है. साथ ही कैल्शियम, फॉस्फोरस, फाइबर जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. यह इम्यून सिस्टम व लीवर को मज़बूत करने में सहायक होता है. शुगरवालों के लिए कच्चा आम खाना फ़ायदेमंद है, क्योंकि यह शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है. कच्चे आम में जेंथोन एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो यूवी किरणों से हमारे शरीर का बचाव करता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • गर्मियों के दिनों में अधिक गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण जी मितलाने की परेशानी भी बहुत होती है. ऐसे में कच्चे आम को काटकर काला नमक छिड़ककर खाने से तुरंत आराम मिलता है.
  • मिनरल्स और विटामिन सी से भरपूर कच्चे आम को चुटकीभर नमक के साथ खाने से गर्मियों में होनेवाली शारीरिक परेशानी और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलती है. ख़ासकर यह डिहाइड्रेशन से भी बचाता है.
  • यदि लू लग जाए, तो उबले हुए हरे आम के रस में शक्कर और भुना हुआ जीरा मिलाकर पना बनाकर पीएं. साथ ही इसे पीने से सनस्ट्रोक और अत्यधिक गर्मी से होनेवाले स्किन प्रॉब्लम्स में भी राहत मिलती है.
  • पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में कच्चा आम काफ़ी फ़ायदेमंद है. यह हमारे शरीर में पानी की कमी को दूर करता है. इसमें मौजूद पेक्टिन की से कब्ज़, एसिडिटी, डायरिया, दस्त जैसी पेट की समस्याओं के इलाज में सहायता मिलती है.
  • डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए कच्चा आम बेहद उपयोगी है. इससे शरीर में शुगर लेवल कम होता है और आयरन की कमी भी दूर होती है. यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तो आपको अपने भोजन में कच्चा आम ज़रूर शामिल करना चाहिए.
  • गर्मियों के दिनों में अधिक पसीने के कारण हमारे शरीर में आयरन, सोडियम क्लोराइड मिनरल्स की कमी हो जाती है और ऐसे में कच्चे आम का जूस पीना लाभदायक होता है.
  • कच्चा आम खाने से सांसों की बदबू की समस्या दूर होती है.
  • एंटीऑक्सिडेंट्स व विटामिन सी से भरपूर कच्चे आम को नमक के साथ खाने से मसूड़े और दांत मज़बूत होते हैं.
  • कच्चे आम का नियमित रूप से सेवन करते हैं, तो बालों को काला बनाए रखने और त्वचा को बेदाग़ व आकर्षक बनाए रखने में भी मदद मिलती है.
  • उल्टी होने पर कच्चे आम को काले नमक के साथ खाने से थोड़ी देर में ही आराम मिल जाता है.
  • कच्चे आम को खाने से एनीमिया, हीमोफीलिया, ब्लड क्लॉट्स जैसे रक्त संबंधी विकारों को कंट्रोल करने में सहायता मिलती है.
  • विटामिन सी की कमी के कारण मसूड़ों की बीमारी स्कर्वी में कच्चा आम उपयोगी होता है. यह इस बीमारी को ठीक करने में मदद करता है.
  • एक आम इंसान को 100 से 150 ग्राम तक कच्चा आम खाना चाहिए, जबकि डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के मरीज़ों को 10 ग्राम खाना पर्याप्त है.

सुपर टिप
यदि आपका वज़न अधिक बढ़ रहा है, तो हर रोज़ कच्चे आम खाने से लाभ होगा.

सावधानी
यूं तो कच्चा आम सभी को पसंद आता है, लेकिन इसे पर्याप्त मात्रा में खाना ज़रूरी है, वरना इसके अधिक सेवन से पेटदर्द, टॉन्सिल, दस्त जैसी परेशानी हो सकती है. ध्यान रहे, इसे खाने के तुरंत बाद कभी भी ठंडा पानी ना पीएं.

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अनन्नास का स्वाद अन्य फलों से थोड़ा अलग होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक औषधि के रूप में भी काफ़ी फ़ायदेमंद है. अनन्नास के सेवन से कई बीमारियों को ठीक किया जा सकता है. अनन्नास में ब्रोमेलैन एंजाइम होता है, जो पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायता करता है. इसमें अधिक मात्रा में मौजूद फाइबर शरीर में कब्ज़ की समस्या को दूर करती है. यह आंतों को भी स्वस्थ रखता है. अनन्नास शक्तिवर्धक, भूख को बढ़ाने के साथ रक्त-पित्त विकार की समस्या से निजात दिलाता है. यह बुखार, पेटदर्द, एसिडिटी, रक्त स्त्राव से जुड़ी बीमारी, शारीरिक कमज़ोरी आदि को दूर करता है.

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घरेलू नुस्ख़े

  • एसिडिटी की परेशानी हो, तो पके हुए अनन्नास के जूस में भुनी हुई हींग, सेंधा नमक और अदरक का रस मिलाकर रोज़ सुबह और शाम पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है.
  • अनन्नास से डायबिटीज़ को भी कंट्रोल किया जा सकता है. 100 मिलीग्राम अनन्नास के रस में 10-10 ग्राम तिल, आंवला, हरड़, बहेड़ा, गोखरू और जामुन के बीज मिलाएं. इसके सूखने पर पाउडर बनाकर रख लें. हर रोज़ एक टीस्पून पाउडर का सेवन करें.
  • 10 मिलीग्राम पके हुए अनन्नास के रस में भुनी हुई हींग और अदरक का रस मिलाकर रोज़ पीने से पेटदर्द में राहत मिलती है.
  • दस्त की समस्या होने पर अनन्नास के पत्तों का काढ़ा बनाकर इसमें बहेड़ा और छोटी हरड़ का चूर्ण मिलाकर लें.


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  • अनन्नास के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री को मिलाकर सेवन करने से सांसों से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है.
  • भोजन के बाद यदि पेट फूल जाए और बैचेनी होने लगे, तो 50-100 मिलीग्राम अनन्नास का जूस पीएं.
  • खांसी से परेशान हैं, तो 100 मिलीग्राम पके अनन्नास के रस में 2-2 ग्राम पिप्पली का जड़, सोंठ, बहेड़े का चूर्ण, भुना हुआ सुहागा और शहद मिलाकर लें.
  • बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या होने पर पके हुए अनन्नास के रस में अजवायन, छुहारा, खुरासानी और वायविडंग का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाएं. इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में चटाने से पेट में कीड़े की समस्या ख़त्म हो जाती है.
  • बुखार होने पर अनन्नास के जूस में शहद मिलाकर पीने से बुखार ठीक होता है.


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  • पीरियड्स यानी माहवारी की समस्या में 50 मिलीग्राम कच्चे अनन्नास के रस में 1-1 मिलीग्राम पीपल की छाल का पाउडर और गुड मिलाकर लें.
  • शरीर में सूजन की समस्या हो, तो अनन्नास के रस का लेप लगाने से सूजन ठीक हो जाती है. इसके अलावा अनन्नास के पत्तों पर एरंड का तेल लगाकर थोड़ गर्म करके सूजनवाले हिस्से पर बांधने से भी सूजन दूर होती है.
  • यूरिन से संबंधित समस्या हो, तो अनन्नास के जूस में गुड़ मिलाकर पीएं.

सुपर टिप
पके हुए अनन्नास के टुकड़े में सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर मिलाकर खाने से अपच की समस्या दूर होती है.

Photo Courtesy: Freepik

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अंजीर स्वास्थ्यवर्धक बहुपयोगी फल है. इसमें आयरन, विटामिन, फाइबर, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरस पाया जाता है. यह वज़न घटाने में भी मदद करता है. अंजीर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मज़बूत करने में सहायक होता है. गर्भवती महिलाओं में लौह की कमी को भी पूरा करता है अंजीर. हाइपरटेंशन के मरीज़ों के लिए अंजीर बहुत फ़ायदेमंद है क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में पोटैशियम व कम मात्रा में सोडियम होता है. इसके ये पोषक गुण इसको सर्वोत्तम बनाते हैं. अंजीर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जिससे कब्ज़ की समस्या दूर करने में मदद मिलती है. अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के अनुसार, अंजीर डायबिटीज़ को भी कंट्रोल करता है. इसकी पत्तियों का सेवन शुगर के मरीज़ों की इन्सुलिन के इंजेक्शन पर निर्भरता को कम करता है. अंजीर खाने से डायरिया से भी बचा जा सकता है. यह पाचन शक्ति में सुधार कर पाचन से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • एक-दो पके हुए अंजीर दूध में उबालकर रात को सोने से पहले खाएं और ऊपर से दूध पी लें. इससे कब्ज़ में फ़ायदा होता है या फिर एक अंजीर को रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें. सुबह इसे अच्‍छी तरह से चबाकर खाएं और इसका पानी पी लें. कुछ ही दिनों में कब्ज़ की समस्‍या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी.
  • सिरदर्द की समस्या होने पर सिरके या पानी में अंजीर के पेड़ की छाल की भस्म बनाकर सिर पर लेप करने से आराम मिलता है.
  • सर्दी-ज़ुकाम होने पर पानी में पांच अंजीर उबाल लें और इस पानी को छानकर गर्म-गर्म सुबह-शाम पीएं. इससे ज़ुकाम में लाभ होता है.
  • कमरदर्द में भी अंजीर का उपयोग लाभदायक होता है. अंजीर की छाल, धनिया और सोंठ बराबर मात्रा में लेकर कूटकर रात को पानी में भिगो दें. सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें. इससे कमरदर्द में आराम मिलता है.
  • गले की सूजन व जलन होने पर अंजीर के पेस्ट को गर्म पानी के साथ घोलकर गले पर लगाएं. यह दर्द को कम करने के साथ गले को राहत देता है.


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  • रक्त संबंधी विकार और वृद्धि के लिए पाव लीटर दूध में आठ अंजीर व दस मुनक्के उबालकर खाएं और दूध को पी लें. इससे रक्त में वृद्धि होने के साथ रक्त संबंधी विकार भी दूर होते हैं. दो अंजीर को बीच से आधा काटकर एक ग्लास पानी में रातभर भिगोकर रख दें. सुबह अंजीर खा लें व उसका पानी पी लें. इससे रक्तसंचार बढ़ता है.
  • यदि बवासीर की समस्या हो, तो 3-4 सूखे अंजीर को शाम के समय पानी में भिगोकर रख दें. सुबह अंजीर को मसलकर खाली पेट खा लें. ऐसे कई दिनों तक हर रोज़ करने से बवासीर की तकलीफ़ दूर हो जाएगी.
  • यौन शक्ति बढ़ाने के लिए 2-3 अंजीर रातभर दूध में भिगो दें और सुबह खा लें.
  • अस्थमा के मरीज़ों के लिए अंजीर काफ़ी फ़ायदेमंद है. 2-3 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में उबालकर खाएं.
  • सूखे अंजीर के टुकड़े और छिले हुए बादाम को गर्म पानी में उबालें. इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर सात दिन तक गाय के घी में डालकर रखे. रोज़ सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें. इससे शरीर में ताक़त बढ़ती है.
  • दो अंजीर को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने से और ऊपर से उसी पानी को पीने से पेट साफ़ होता है.

सुपर टिप
नियमित रूप से अंजीर का सेवन करने पर कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.

रिसर्च
अध्ययनों के अनुसार, हर रोज़ अंजीर का सेवन ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है. अंजीर में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायता करते हैं.

सावधानी
इस बात का भी ध्यान रखें कि अंजीर के अधिक सेवन से वज़न बढ़ भी सकता है, ख़ासकर यदि इसे दूध के साथ लेते हैं.


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ब्राह्मी को विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार ब्राह्मी पित्तनाशक, बुद्धिवर्धक, ठंडक देने के साथ शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है. ब्राह्मी के तने व पत्तियां मुलामय व गूदेदार होते है. असली ब्राह्मी की एक टहनी में कई सारे पत्ते होते हैं और इसके फूल सफ़ेद‌ व छोटे-छोटे होते हैं.
त्वचा संबंधी बीमारियों में ब्राह्मी फ़ायदेमंद है. यह खून को साफ़ करने के साथ कफ़ को भी दूर करता है. बालों को मज़बूत व घना बनाने के साथ रूसी, दोमुंहे बाल, गंजापन और बालों को झड़ना भी रोकता है. ब्राह्मी वटी स्वाद में कसैली, तीखी व ठंडी तासीरवाली बूटी है. यह त्रिदोष का नाश करने, आयु बढ़ाने, प्रसूति महिलाओं के स्तनों के दूध को बढ़ाने व मस्तिष्क को शांति देनेवाली है. ब्राह्मी जन्मजात तुतलाहट की बीमारी में भी फ़ायदेमंद है. ब्राह्मी तेल आयुर्वेदिक तेल है, जिसे तिल के तेल या नारियल के तेल के साथ इस्तेमाल करना अधिक लाभदायक है. दिल की कमज़ोरी में इसका इस्तेमाल फ़ायदेमंद है. डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी ब्राह्मी उपयोगी है. यह शुगर के लेवल को नियंत्रित करती है. ब्राह्मी का नियमित रूप से उपयोग करने से इम्युनिटी मज़बूत होती है.

घरेलू नुस्ख़े

• सिरदर्द, पीठदर्द, मांसपेशियों में दर्द होने पर ब्राह्मी तेल से हल्का मसाज करने से राहत मिलती है.
• ब्राह्मी के पत्‍ते के रस को पेट्रोल के साथ मिलाकर लगाने से गठिया की समस्या दूर होती है.
• मानसिक व शारीरिक ताक़त बढाने के लिए १०-१० ग्राम ब्राह्मी, सौंठ, खसखस, सूखा साबुत धनिया और गोखरू, ३ ग्राम बादामगिरी, ५-५ ग्राम त्रिफला, शतावर और अश्वगंधा को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें. ३-३ ग्राम चूर्ण को सुबह-शाम दूध से लेें. इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है. साथ ही चश्मे के नंबर में भी कमी आती है.
• क्या आप जानते हैं कि ब्राह्मी तनाव में भी राहत देती है. इसके लिए ५-५ ग्राम ब्राह्मी व शंखपुष्पी, 6 ग्राम बादामगिरी, 3 ग्राम इलायची के दाने, 6 ग्राम खसखस सभी को मिलाकर पीस लें. इसे ठंडई की तरह पीने से तनाव में लाभ होता है.
• इसके अलावा चिंता और तनाव होने पर ब्राह्मी के पौधे की पत्तियों को भी चबाया जा सकता है.


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• ब्राह्मी की‌ १-१ टेबलेट सुबह-शाम दूध के साथ लेने से दिमाग़ मज़बूत होता है.
• नींद न आने की परेशानी में ब्राह्मी के ५ ग्राम चूर्ण को आधा लीटर दूध में उबालकर व छानकर ठंडा करें. इसे पीने से अनिद्रा और पुरानी नींद न आने की समस्या भी दूर होती है.
• ब्राह्मी के सेवन से मिर्गी में भी मदद मिलती है और यह बीमारी ठीक होती है.
• ब्राह्मी के रस एंटीऑक्सीडेंट और एडेप्टोजेनिक होते हैं, जिसके प्रभाव से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी सांस संबंधी बीमारियां ठीक होती हैं.
• यह शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी को निकालकर वॉटर रिटेंशन, किडनी, स्टोन, अन्य बीमारियों से छुटकारा दिलाने में भी कारगर साबित होती है.
• सूजन और झुर्रियों को दूर करने में भी ब्राह्मी फ़ायदेमंद है. ब्राह्मी के चूर्ण को पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाएं. इससे चेहरा चमक उठता है और सूजन भी कम होती है.
• बालों के गिरने की समस्या हो, तो ब्राह्मी, आंवला, भृंजराज को एक साथ पीसकर मिश्रण बना लें. इस मिश्रण को रातभर लोहे की कढ़ाई में रखें. सुबह इस पेस्ट को बालों में लगाकर 10-15 मिनट तक रखें. हफ़्ते में दो बार ऐसा करने से बालों का गिरना बंद हो जाता है.
• गर्दन और छाती पर ब्राह्मी का पेस्ट लगाने से निमोनिया से बचा जा सकता है.
• ब्राह्मी में रक्‍त शुद्ध करने के गुण पाए जाते हैं, जिससे स्कीन संबंधी बीमारियां ठीक करने में मदद मिलती है.
• ब्राह्मी का चाय बेहद फ़ायदेमंद होता है. ब्राह्मी चाय‌ बनाने के लिए ब्राह्मी के पांच से सात पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं.

रिसर्च
रिसर्च से यह साबित हुआ है कि ब्राह्मी कैंसर के ख़तरे को भी कम करता है. ब्राह्मी कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद करता है. एक अन्य अध्ययन के अनुसार इस जड़ी-बूटी में ऐसे एंटी कैंसर गुण है, जो ब्रेस्ट कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है.


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सुपर टीप
मानसिक बीमारियों में ब्राह्मी के पत्तों के चूर्ण का सेवन लाभदायक होता है.

सर्दियों में ठंड के कारण खाने-पीने की इच्छा पूरी तरह से बदल जाती है. इस मौसम में लोग गर्म और मौसमी चीज़ों पर ज़्यादा ध्‍यान देते हैं. विंटर में एक और चीज़ है, जो लोग खाना पसंद करते हैं, वो है गजक. सर्दियों में हर कोई गजक को बड़े चाव से खाना पसंद करता है. स्वाद और मिठास के अलावा गजक में सेहत के कई राज़ भी छिपे हुए हैं. सर्दियों में गजक के सेवन से कई तरह की समस्याओं से निजात मिलती है. आइए जानते हैं इससे होनेवाले फ़ायदों के बारे में.

गजक के तिल और गुड़ में मौजूद कैल्शियम हड्डियां मज़बूत करती हैं. गुड़ में कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है. इसे खाने से हड्डियां मज़बूत होती हैं. गुड़ आपके शरीर को साफ़ करने में मदद करता है, जिससे आपकी त्वचा पर भी निखार आता है. डॉक्टर्स भी सर्दी में एक बार खाने के बाद बीस ग्राम गुड़ की गजक नियमित खाने की सलाह देते हैं.

गजक आर्थराइटिस जैसी बीमारी से भी बचाता है. इसका कारण यह है कि इसमें तिल और मूंगफली पर्याप्त मात्रा मे होती है.

गजक मे तिल होता है और इसमें सीसामोलिन पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करता है.

गजक का तिल, मूंगफली और गुड़ लिवर को हेल्दी और फिट रखता है.


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फाइबर से भरपूर गजक पेट की तकलीफ़ दूर करते हैं.

गजक में जिंक, सेलेनियम जैसे मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बुढ़ापे की प्रोसेस को स्लो करने में सहायक हैं.

आयरन का सबसे शानदार स्रोत है गजक. शरीर में लौह तत्व बनता है. इसके सेवन से एनीमिया की बीमारी भी दूर होती है.

गजक में मौजूद तिल, मूंगफली, मेवे, इलायची आदि सर्द मौसम में शरीर को गर्म रखते हैं.

तिल और गुड़ शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर सर्दी-ज़ुकाम जैसी बीमारियों से बचाता है.

गजक खाने से कमज़ोरी दूर होती है, शरीर में ऊर्जा पैदा होती है और एनर्जी लेवल भी बढ़ जाता है.

– पूनम पांडे

Gajak


यह भी पढ़ें: सामान्य दर्द से लेकर कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज़ जैसी बीमारियों में भी फ़ायदेमंद है अदरक… (11 Health Benefits of Ginger)

Photo Courtesy: Freepik

 Jaggery

औषध‍िय गुणों से भरपूर गुड़ एक सुपर फूड है, जो अच्‍छी सेहत के लिए ज़रूरी है. इसके न‍ियमित इस्‍तेमाल से शरीर निरोगी और स्‍वस्‍थ बना रहता है. गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्‍शियम और फास्‍फोरस पाया जाता है. यह दोनों तत्‍व हड्डियों को मज़बूती देने में सहायक हैं. इससे शरीर मज़बूत व एक्टिव भी रहता है. गुड़ स्‍वाद का ही नहीं बल्‍कि सेहत का भी ख़ज़ाना है. इसके फ़ायदों के बारे में लोग कम ही जानते हैं. गुड़ का इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा कड़वी दवा को मीठा करने और कई बीमारियों में दवा के तौर पर भी किया जाता था. अधिकतर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि गुड़ सालभर खाया जा सकता है और शरीर को इससे भरपूर लाभ भी मिलते हैं.

घरेलू नुस्ख़े

• खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है.
• जोड़ों में दर्द की समस्या हो, तो गुड़ का अदरक के साथ सेवन लाभदायक है. हर रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
• अस्थमा के इलाज में गुड़ फ़ायदेमंद है. गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से अस्थमा की तकलीफ़ नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी भी बनी रहती है.
• पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर खाने से लाभ मिलता है.
• काफ़ी थकावट है, तो गुड़ को दूध के साथ लें. यदि आपको दूध नहीं पसंद, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा-सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से शरीर की थकान दूर होती है.


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• पेट में गैस बनने की समस्या होने पर हर रोज़ एक ग्लास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से पेट में ठंडक होती है और गैस भी नहीं बनती.
• गला बैठ जाने और आवाज़ जकड़ जाने पर पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है व आवाज़ भी खुल जाती है.
• कान में दर्द होने पर गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होनेवाले दर्द की समस्या ये निजात मिलती है.
• गुड़ सर्दी-ज़ुकाम भगाने में भी बेहद असरदार है. काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-ज़ुकाम में आराम मिलता है.
• खांसी की श‍िकायत है, तो गुड़ खाएं. गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश में राहत मिलती है.

Health Benefits Of Jaggery


• सांस संबंधी बीमारियों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
• शारीरिक कमज़ोरी में दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताक़त आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है.

सुपर टिप
गुड़ को अदरक के साथ हल्का गर्म कर खाने से गले की जलन दूर होती है. 

– अभिषेक गुप्ता


यह भी पढ़ें: अजवाइन का पानी वज़न घटाने के साथ शरीर को रखता है फिट और हेल्दी (Ajwain Water For Weight Loss And Other Health Benefits)

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महिलाएं अजवाइन का उपयोग रसोई के मसाले के रूप में करती हैं. अजवाइन भोजन को स्वादिष्ट तो बनाती ही है, साथ ही साथ तमाम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी राहत पहुंचाती है. अजवाइन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद मानी जाती है.
अगर खाली पेट अजवाइन का पानी पिया जाए, तो पेट की चर्बी कम होती है. अजवाइन के पानी के साथ-साथ, लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव और डायट के साथ कुछ घरेलू उपचार किया जाए, तो वज़न को नियंत्रण में किया जा सकता है.
इसके अलावा डायबिटीज़, कब्ज़, पेट की गैस, डायरिया और अस्थमा जैसी बीमारियों में अजवाइन दवा का काम करती है. इससे साफ़ पता चलता है कि अजवाइन में औषधीय गुण भी होते हैं. अजवाइन में प्रोटीन, फैट, खनिज पदार्थ, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व रहते है. इसके अलावा उसमें कैल्शियम, थायामिन, राइबोफ्लेविन, आयरन, फास्फोरस और नियासिन भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.

Ajwain

अपच
अगर आप पेट की गैस की समस्या से पीड़ित हैं, तो अजवाइन के पानी से आप को लाभ मिलेगा. अजवाइन के पानी से गैस, अपच और पेट संबंधी तमाम समस्याओं से निजात मिलने में मदद मिलती है. अजवाइन में स्पास्मोडिक और कार्मेनेटिव के गुण होते हैं.

कोलेस्ट्रॉल
अजवाइन के बीज में एंटी-हाइपर लिपिडेमिक के गुण होते हैं, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल, ट्राईग्लिसराइड्स और टोटल लिपिड को कम करने में मदद करता है.


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दांत दर्द में राहत
अजवाइन का पानी दांत दर्द में राहत पहुंचाता है. अजवाइन में स्थित एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह ओरल बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है. अजवाइन का पानी दांत दर्द में बहुत लाभकारी है.

चर्बी घटाता है
शरीर में चर्बी बढ़ने से शरीर का वज़न बढ़ जाता है. मोटापे के नियंत्रण के लिए भी अजवाइन के पानी का उपयोग किया जा सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान भी लाभकारी
ज़्यादातर गर्भवती महिलाओं के आहार में अजवाइन का समावेश किया जाता है. गर्भावस्था के दौरान अक्सर कब्ज़, गैस जैसी पेट संबंधी अन्य समस्याएं बनी रहती हैं. अजवाइन का पानी पीने से इन सभी समस्याओं से राहत मिलती है.

सर्दी में राहत पहुंचाता है
अजवाइन का पानी एक प्राकृतिक सर्दी-ज़ुकाम की दवा है, जो सर्दी के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके लिए अजवाइन को पीस कर एक ग्लास पानी में मिला कर पीने से राहत मिलती है. इसके अलावा अजवाइन का पेस्ट मुंहासे, फुंसी और एक्जिमा के कारण होने ववाली त्वचा की खुजली, सूजन को कम करने में बहुत उपयोगी है.


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मासिक के दौरान
अजवाइन महिलाओं के मासिक चक्र को नियंत्रण में रखने के लिए दवा के रूप में काम करता है. इसके लिए रात के समय मिट्टी के बर्तन में अजवाइन के बीज को भिगोकर सुबह उसका पानी पीने से महिलाओं का मासिक चक्र नियंत्रण में रहता है. इसके अलावा पीरियड्स के समय होनेवाले पेटदर्द में भी अजवाइन बहुत कारगर है.

Ajwain water

किस तरह बनाएं अजवाइन का पानी
एक ग्लास पानी में एक चम्मच अजवाइन डाल कर रात को रख दें. सुबह उसे छानकर पी लें. अगर खाली पेट अजवाइन का पानी पिएंगे, तो अच्छा रहेगा. अगर अजवाइन का पानी पीने में कड़वा लगे, तो उसमें शहद या नींबू मिला लें.

स्नेहा सिंह


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गिलोय की पत्त‍ियां पान के पत्ते की तरह होती हैं. इसकी पत्त‍ियों में प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होता है. ये पत्ते स्वाद में कसैले, कड़वे व तीखे होते हैं. वात, कफ़ और पित्त की समस्या को गिलोय के इस्तेमाल से ठीक किया जा सकता है. गिलोय पचने में आसान होने के साथ भूख भी बढ़ाता है. ये नुक़सानदायक बैक्टीरिया से लेकर पेट के कीड़ों तक को मार देती है. साथ ही टीबी की बीमारी में बननेवाले जीवाणु को बढ़ने से भी रोकती है. आंत व यूरीन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करनेवाले रोगाणुओं को भी दूर करती है. गिलोय डायबिटीज़, पीलिया, बुखार, उलटी, सूखी खांसी, हिचकी, बवासीर आदि बीमारियों में फ़ायदेमंद है.

Health Benefits of Giloy

घरेलू नुस्ख़े

  • गिलोय की पत्तियों को पानी में उबालकर पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है. साथ ही इसकी पत्तियों को अन्य फलों के साथ जूस में मिलाकर भी पी सकते हैं.
  • गिलोय के 10-20 मि. ली. जूस के साथ गुड़ का सेवन करने से कब्ज़ की समस्या दूर होती है.
  • हिचकी हो रही हो, तो गिलोय व सोंठ के चूर्ण को मिक्स कर लें और इसे सूंघे. इसके अलावा गिलोय व सोंठ के चूर्ण की चटनी बनाकर इसे दूध में मिलाकर पिलाने से भी हिचकी आना बंद हो जाता है.
  • एनीमिया की समस्या हो तो गिलोय में घी और शहद मिलाकर लेने से खून की कमी दूर होती है.
  • गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से कान की गंदगी निकल जाती है.
  • एसिडिटी के कारण उलटी हो, तो 10 मि. ली. गिलोय रस में 4-6 ग्राम मिश्री मिला लें. इसे सुबह- शाम पीने से उलटी बंद हो जाती है.
  • हरड़, गिलोय तथा धनिया को समान मात्रा में लेकर आधा लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें. इसमें गुड़ डालकर सुबह-शाम पीने से पाइल्स की प्रॉब्लम दूर होती है.


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  • गिलोय के 10-20 पत्तों को पीसकर एक ग्लास छाछ में मिलाकर छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया ठीक होता है.
  • 10 मि. ली. गिलोय के रस को पीने से डायबिटीज़, वात विकार के कारण होनेवाली बुखार व टायफायड में लाभ होता है.
  • गिलोय के 5-10 मि. ली. रस या 20-30 मि. ली. काढ़ा रोज़ कुछ समय तक सेवन करने से गठिया में लाभ होता है. इसके अलावा सोंठ के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द मिटता है.
  • 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर मिट्टी के बर्तन में रखें. फिर इसे पाव लीटर पानी मिलाकर रातभर ढककर रख लें. सुबह मसल लें और छानकर 20 मि. ली. की मात्रा में दिन में तीन बार पीने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है.
  • 20 मि. ली. गिलोय के रस में एक ग्राम पिप्पली और एक चम्मच शहद मिला लें. इसे सुबह-शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ़, खांसी, अरुचि आदि परेशानी दूर होती है.
  • ब्लड कैंसर के मरीज़ों पर गेहूं के ज्वारे के साथ गिलोय का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है.
  • अडूसा छाल और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर आधा लीटर पानी में पकाकर काढ़ा बनाएं. ठंडा होने पर 10-30 मि. ली. काढ़े में शहद मिलाकर पीने से बदहजमी, सूजन, सूखी खांसी, सांस तेज चलना, बुखार आदि परेशानी दूर होती है.
  • गिलोय के 10-20 मि. ली. रस के साथ गुड़ और मिश्री के साथ सेवन करने से एसिडिटी में लाभ होता है.


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  • 10-20 मि. ली. गिलोय के रस को दिन में दो-तीन बार कुछ महीनों तक नियमित रूप से पिलाने से कुष्ठ यानी लिप्रोसी बीमारी में फ़ायदा होता है.
  • 10 मि. ली. गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद व सेंधा नमक मिक्स करके आंखों में लगाने से आंखों के आगे अंधेरा छाना, चुभन, काला व सफ़ेद मोतियाबिंद ठीक हो जाता है.

सुपर टिप
कफ़ की तकलीफ़ में गिलोय को शहद के साथ लें.

ऊषा गुप्ता


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हल्दी ही एक ऐसी जड़ है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं, इसलिए इसे हेल्दी हल्दी नाम दिया गया है. आइए, इसके गुणकारी फ़ायदों के बारे में जानते हैं.

हल्दी बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
हल्दी एक ऐसी संजीवनी है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसे बीमारियों से दूर रखती है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं. यह खून को साफ़ करती है. बैक्टीरिया से लड़ती है. लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी हल्दी के बहुत सारे कामों में से एक है. ये दोनों ही अंग खून को साफ़ करने का काम करते हैं.

ठीक करती है बुखार
अगर किसी को बार-बार बुखार आता है, तो उसे गुनगुने पानी में हल्दी डालकर उसका घूंट- घूंट सेवन करना चाहिए. हल्दी निमोनिया, टायफाइड आदि हर तरह के बुखार से लड़ने में मदद करती है. इसलिए डेंगू के मरीज़ों को भी हल्दी के सेवन की सलाह दी जाती है. डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आनेवाले बुखार से भी हल्दी छुटकारा दिलाती है.

हल्दी के फ़ायदे डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए
हल्दी एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है. इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फ़ायदा टाइप टू डायबिटीज़ के मरीज़ों को होता है.

पाचन शक्ति बढ़ाती है
यह पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद करती है. इससे व्यक्ति कब्ज़ और पेट की दूसरी गड़बड़ियों से बचा रहता है.

Benefits Of Turmeric

कम करती है स्ट्रेस
गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है. हल्दी एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता के स्तर को कम करती है. इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है.


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अस्थमा में भी फ़ायदेमंद
मौसम के परिवर्तन पर ख़ासकर सर्दियों में अस्थमा के मरीज़ों को काफ़ी परेशानी होती है. ऐसे में अस्थमा के मरीज़ों को नियमित रूप से गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीना चाहिए. इससे उन्हें काफ़ी आराम मिलेगा.

गठिया में मिलेगा आराम
गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है. हल्दी पाउडर में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फ़ायदा पहुंचाती है

अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए हल्दी का सेवन
भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती हैं. इससे उन्हें हर वक़्त थकान और कमज़ोरी महसूस होती है. हल्दी के नियमित सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है.

कम होगी पेट की चर्बी
हल्दी शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिज़्म) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है. ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वज़न कम होता है.

ख़ूबसूरती बढ़ाती है
हल्दी न केवल सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है. हल्दी को उबटन की तरह इस्तेमाल करने से चेहरे पर ग्लो आता है.

जवां रखती है हल्दी
हल्दी में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं. इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है. अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं. त्वचा पर लगाने के लिए हल्दी का पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है.


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बालों की समस्या भी होगी दूर
अगर आप बालों में ड्रैंडफ, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो हल्दी पानी के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी.

दांतों की मज़बूती
दो चुटकी हल्दी और नमक दांतों पर रगड़ने से मसूड़े स्वस्थ और दांत मज़बूत होते हैं. हल्दी एक प्राकृतिक रक्त शोधक है. इसके अनेक गुण हैं.

साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान
वैसे तो हल्दी को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है. इसलिए इस बात पर नज़र रखें कि ब्लड शुगर ज़रूरत से ज़्यादा कम न हो जाए. दो साल से छोटे बच्चों को भी बिना डाॅक्टर की सलाह हल्दी दूध न दें. अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जहां भी उचित स्थान हो हल्दी की जड़ अवश्य लगाएं. यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है.

पूनम पांडे

Benefits Of Turmeric

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जामुन को सबसे अधिक मधुमेह यानी डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है. जामुन में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेड प्रचुर मात्रा होता है, इस कारण ये बच्चों की सेहत के लिए भी काफ़ी अच्छा है. जामुन पाचन क्रिया को ठीक रखने, दांत, आंख, पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ किडनी स्टोन के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद है.

घरेलू नुस्ख़े

  • डायबिटीज़ वाले जामुन की 100 ग्राम जड़ को साफ़ करके उसे 250 मि. ली. पानी में पीस लें. इसमें 20 ग्राम मिश्री डालकर सुबह-शाम भोजन से पहले पीएं. 300-500 मि. ग्रा. जामुन के बीज को सूखाकर उसका चूर्ण बनाकर दिनभर में तीन बार लेने से भी डायबिटीज़ फ़ायदा होता है. या फिर 250 ग्राम जामुन के पके हुए फलों को 500 मि. ली. उबलते हुए पानी में डालें. कुछ देर उबलने के बाद ठंडा करके मसलकर कपड़े से छान लें. इस जूस को हर रोज़ तीन बार पीएं.
  • बार-बार उल्टी होने पर आम व जामुन के पत्तों को 20-20 ग्राम की मात्रा में लें. इसे 400 मि. ली. पानी में उबालें. जब एक चौथाई बच जाए, तब इसे ठंडा करके पीएं.
Black Plum
  • अगर गले की कोई बीमारी है, तो हर रोज़ 10-15 मि. ली. जामुन का रस पीएं. साथ ही जामुन के पेड़ की छाल का चूर्ण बनाकर शहद मिलाकर लेने से भी गले के दर्द में लाभ मिलता है.
  • लिवर में सूजन है, तो 10 मि. ली. जामुन की गुठली का रस लें. अगर जामुन का सिरका भी हर रोज़ 10 मि. ली. सेवन करें, तो लिवर के बढ़ने के विकार में फ़ायदा होता है.
  • आंखें दुखती हैं या फिर आंखों से जुड़ी कोई समस्या है, तो 15-20 जामुन के पत्तों को 400 मि. ली. पानी में उबाल लें. जब वह एक चौथाई बच जाए, तब इससे आंखों को धोएं.


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  • पथरी या किडनी स्टोन की तकलीफ़ में जामुन रामबाण इलाज है. पके हुए जामुन को खाने से पथरी गल कर निकल जाती है. साथ ही 10 मि. ली. जामुन के रस में सेंधा नमक मिलाकर प्रतिदिन 2-3 बार पीने से मूत्राशय में रहनेवाली पथरी भी टूटकर बाहर निकल जाती है.
  • मोतियाबिन्द में जामुन की गुठली के चूर्ण को शहद में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें. रोज़ सुबह-शाम दो गोली खाएं. इन्हीं गोलियों में थोड़ा शहद मिलाकर काजल की तरह आंखों में लगाएं, इससे भी लाभ होगा.
  • कान से पस निकलने पर जामुन की गुठली को शहद में अच्छी तरह से डुबोकर कान में एक दो बूंद डालें.
  • पायरिया या दांत संबंधी किसी समस्या में जामुन के पत्तों की राख बनाकर मंजन की तरह रगड़ें. इसके अलावा जामुन के पके हुए फलों के रस को मुंह में भरकर अच्छी तरह हिलाकर कुल्ला करने से भी पायरिया की समस्या दूर होती है.
  • डायरिया में भी जामुन फ़ायदेमंद है. जामुन के पत्तों का रस बनाकर 100 मि. ली. बकरी के दूध 5-10 मि. ली. की मात्रा में मिलाकर पीएं.
  • गठिया के दर्द को कम करने के लिए जामुन की जड़ को उबालकर पीस लें. इसे जोड़ों पर रगड़ने से दर्द में लाभ मिलता है.
  • पेचिश में जामुन की छाल का 10 मि. ली. जूस निकालकर 10 मि. ली. बकरी के दूध के साथ सेवन करें. इसके अलावा जामुन के पेड़ की छाल का चूर्ण बनाकर उसमें दो चम्मच शहद मिलाएं. इसे पाव लीटर दूध के साथ लें. यदि जामुन के पेड़ की छाल को 500 मि. ली. पानी में पकाकर जब एक चौथाई रह जाए, तब उसे पीएं. इससे भी पेचिश में फ़ायदा होता है.
  • बवासीर या पाइल्स होने पर जामुन के 20 मि. ली. जूस में शक्कर मिलाकर दिन में तीन बार लें.
  • पीलिया होने पर 10-15 मि. ली. जामुन के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीएं. इससे पीलिया के अलावा खून की कमी व रक्त-विकार में भी फ़ायदा होता है.
  • सिफलिस रोग में प्रभावित हिस्से में जामुन के पत्तों से पकाया हुआ तेल लगाएं.

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  • त्वचा के विकारों, जैसे- दाद, खुजली में जामुन के रस को लगाने से आराम मिलता है.
  • घाव होने जामुन के पेड़ की छाल को बारीक़ पीसकर घाव पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाता है या फिर जामुन के तने को उबालकर काढ़ा बना लें. इससे घाव को धोने से भी घाव जल्दी ठीक होते हैं.
  • जूतों के कारण पैर में ज़ख़्म हो जाए, तो जामुन की गुठली को पानी में पीसकर लगाएं.
  • जामुन के 8-10 पत्तों को पीसकर लेप करने से आग से जला बना सफ़ेद दाग़ मिट जाता है.

सुपर टीप
मुंह में छाले होने पर जामुन के पत्तों के रस से कुल्ला करने से फ़ायदा होता है.

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दही को अमृत के समान आहार माना जाता है. इसके प्रतिदिन सेवन से शरीर स्वस्थ और लंबे समय तक युवा रहता है. यह आपको ऊर्जावान बनाए रखने में बेहद कारगर साबित होता है. दही पाचन तंत्र को मज़बूत और सक्रिय रहने में मददगार होता है. इसमें विटामिन सी और आयरन की बहुत अधिक मात्रा होती है, जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखती है.
दही में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए, बी, सी व ई से भरपूर होता है. एंटीऑक्सीडेंट की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, वहीं इसमें मौजूद वसा शरीर की दूसरी आवश्यकतों को भी पूरा करते हैं. इसमें फॉस्फोरस, आयरन, कैल्शियम, ज़िंक और मैग्नीशियम जैसे प्रमुख लवण पाए जाते हैं.
दही में कई प्रकार के विटामिन और आयरन पाए जाते हैं, जिसकी वजह से शरीर को ताकत मिलती है और मांसपेशियां भी मज़बूत बनती हैं.
दही में बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है. ऐसे में जो लोग नहीं चाहते कि उनका वजन बढ़े, वे दही को अपनी डायट का हिस्सा बना सकते हैं. नाश्ते में एक बाउल दही खाने से पेट दिनभर भरा रहता है, जिससे आप ओवरइटिंग से बच जाते हैं और वज़न कंट्रोल में रहता है.

Benefits Of Curd


दही मधुमेह यानी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए रामबाण है. मधुमेह रोगी को बार-बार भूख लगती है, ऐसे में दही का सेवन बिल्कुल सही है, क्योंकि इससे शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को अपनी डायट का ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत होती है. ऐसे में दही का सेवन बहुउपयोगी है.


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इसमें मौजूद एंटीआक्सीडेंट्स गुण शरीर से विषैले टॉक्सिंस को निकालने में मदद करते हैं, जिससे आप कब्ज़ और पेट से जुड़ी समस्याओं से बचे रहते हैं. दही का नियमित सेवन त्वचा को कांतिमान बनाता है.
नियमित रूप से दही का सेवन पेट व आंतों का कैंसर, ब्रेस्ट और अन्य तरह के कैंसर से भी बचाव करता है. इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व ट्यूमर जैसी ख़तरनाक बीमारियों से भी बचाते हैं.
दही व ताज़ी रोटी का नाश्ता करने से आपका दिल भी सुरक्षित रहेगा. दही दिल की बैचेनी व घबराहट कम करने मे बड़ा सहायक होता है, जो दिल के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है. यह निम्न रक्तचाप, हाई बीपी और हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करता है. साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल लेवल भी को भी कंट्रोल करता है.

Benefits Of Curd


आयरन, खनिज के साथ इसमें विटामिन सी व ए की भी भरपूर मात्रा होती है, जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है. इतना ही नहीं, दही का नियमित इस्तेमाल दिमाग़ को भी तेज़ करता है, जिससे आप बुढ़ापे में होनेवाली अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचे रहते हैं.
विटामिन सी से भरपूर होने के कारण इसका सेवन बालों के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. इससे बालों का झड़ना, टूटना जैसी समस्या दूर हो जाती है और बाल जड़ों से मज़बूत होते हैं.

पूनम पांडे


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एलोवेरा में विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसमें फॉलिक एसिड, कोलीन, बी1, बी2, बी3 व बी6 भी होता है. इसे घृतकुमारी और ग्वारपाठा भी कहा जाता है. एलोवेरा की पत्तियों में पाए जानेवाले जेल में 99% पानी होता है. औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. एलोवेरा में कई ऐसे गुण भी होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी और शाइनिंग बनाते हैं. दाग़-धब्बों, त्वचा, बालों, पाचन, डायबिटीज़, पेट की बीमारियों, जोड़े के दर्द, आंखों आदि समस्या में एलोवेरा का इस्तेमाल बेहद फ़ायदेमंद साबित होता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • अपच की समस्या में 10-20 ग्राम एलोवेरा के जड़ को उबाल लें. इसे छानकर इसमें भुनी हुई हींग मिला लें. इसे पीने से पेटदर्द में आराम मिलता है और बदहजमी की तकलीफ़ भी दूर होती है.
  • खांसी-ज़ुकाम में एलोवेरा का भस्म तैयार कर पांच ग्राम की मात्रा में मुनक्का के साथ सुबह-शाम सेवन करें. इससे पुरानी खांसी-ज़ुकाम में भी लाभ होता है.
  • पीलिया में 10-20 मि.ग्रा. एलोवेरा के रस को दिन में दो-तीन बार पीने से फ़ायदा होता है.
  • सिरदर्द होने पर एलोवेरा पल्प में थोड़ी मात्रा में दारु हल्‍दी का चूर्ण मिला लें. इसे गर्म करके दर्दवाले स्‍थान पर बांधें. इससे वात और कफ़ से होनेवाले सिरदर्द में लाभ होता है.
  • बुखार हो, तो एलोवेरा की जड़ का काढ़ा बनाएं. 10-20 मि. ग्रा. काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से बुखार ठीक होता है.


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  • एलोवेरा के कोमल गूदे को नियमित रूप से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से गठिया में लाभ होता है.
  • यदि आप कमरदर्द की तकलीफ़ से परेशान हैं, तो एलोवेरा का लड्डू खाएं. इसके लिए गेंहू का आटा, घी और एलोवेरा के पल्प लेकर गूंथ लें. इससे रोटी बनाएं. फिर इसका चूर्ण बनाकर लड्डू बना लें. हर रोज़ एक-दो लड्डू खाने से कमरदर्द ठीक होता है.
  • एलोवेरा का गूदा आंखों में लगाने से आंखों की लालिमा और गर्मी दूर होती है. यह आंखों की सूजन और वायरल कंजंक्टिवाइटिस में भी लाभदायक है. साथ ही इसके गूदे पर हल्दी डालकर थोड़ा गर्म करके आंखों पर बांधने से आंखों का दर्द दूर होता है.
  • यदि बवासीर की समस्या है, तो 50 ग्राम एलोवेरा के पल्प में 2 ग्राम पिसा हुआ गेरू मिलाएं. इसे रूई के फाहे पर फैलाकर गुदा स्थान पर बांध दें. इससे मस्सों में होनेवाली जलन और दर्द में आराम मिलता है.
  • कान में दर्द हो तो एलोवेरा के रस को हल्का गर्म करके जिस कान में दर्द हो रहा है, उसके दूसरी तरफ़ के कान में दो-दो बूंद टपकाने से कान के दर्द में आराम मिलता है.


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  • एलोवेरा के रस को तिल व कांजी के साथ पकाकर घाव पर लेप करने से लाभ होता है.
  • 6 ग्राम एलोवेरा का पल्प, 6 ग्राम गाय का घी, 1 ग्राम हरड़ चूर्ण और 1 ग्राम सेंधा नमक लेकर मिक्स कर लें. इसे सुबह-शाम खाने से वात विकार से होनेवाले गैस की समस्या दूर हो जाती है.
  • एलोवेरा के पत्ते को एक ओर से छीलकर उस पर थोड़ा-सा हरड़ का चूर्ण डालकर हल्का गर्म कर लें. इसे गांठों पर बांधने से गांठों की सूजन दूर होती है.
  • चेचक से होनेवाले घावों पर एलोवेरा के गूदे का लेप करने से लाभ होता है.
  • दो भाग एलोवेरा के पत्तों का रस और एक भाग शहद लेकर उसे चीनी मिट्टी के बर्तन में एक हफ़्ते रखने के बाद सेवन करने पर लीवर से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है.

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  • 5-10 ग्राम एलोवेरा जेल में शक्कर मिलाकर खाने से पेशाब में दर्द और जलन से आराम मिलता है.
  • चेहरे पर चकत्ते या फिर खुजली-जलन को दूर करने में भी एलोवेरा फ़ायदेमंद है. इसके लिए रात के समय प्रभावित जगह पर एलोवेरा लगाकर उसे छोड़ दें. फिर सुबह धो लें.
  • एलोवेरा के गूदे को पेट के ऊपर बांधने से पेट की गांठ बैठ जाती है. इससे आंतों में जमा हुआ मल भी सरलता से बाहर निकल जाता है.
  • एलोवेरा को स्क्रब के तौर पर भी इस्तेमाल कर चेहरे पर रौनक और ताज़गी ला सकते हैं. एलोवेरा जेल में ग्राउंड ओटमील मिला लें. ख़राब होने से बचाने के लिए उसमें चुटकीभर बेकिंग सोडा मिला लें. फिर रोज़ाना इससे अपने चेहरे पर स्क्रब करें. इससे चेहरे की रंगत निखर आएगी.

सुपर टिप

  • एलोवेरा के पल्प को आग से जले स्थान पर लगाने से जलन शांत होती है और फफोले भी नहीं उठते.

– ऊषा गुप्ता

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