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करीपत्ता के लाजवाब औषधीय गुण (Excellent Medicinal Properties Of Curry Leaves)

करीपत्ते को भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन इसके सेहत से जुड़े अनगिनत फ़ायदे भी हैं. पौष्टिक तत्वों से भरपूर करीपत्ते में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस होता है. इसे मीठी नीम भी कहते हैं. इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स व फेनोल्स पाए जाते हैं, जिससे कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी से भी बचने में मदद भी मिलती है. करीपत्ते में मौजूद ख़ास तत्व प्रोस्टेट, ल्यूकेमिया, कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव करते हैं. इसके बेहतरीन फ़ायदे के लिए हमेशा ताज़े करीपत्ते का ही इस्तेमाल करें.

Curry Leaves Benefits

* जी मिचलाने पर 1/4 कप करीपत्ते के रस में चुटकीभर शक्कर व आधे नींबू का रस मिलाकर पीएं.

* पित्त की समस्या होने पर करीपत्ते को पीसकर इसका रस निकाल लें और इसे छाछ के साथ दिनभर में दो-तीन बार पीएं.

* चेहरे की रंगत निखारने में भी करीपत्ता उपयोगी है. करीपत्ते को सुखाकर पीसकर पाउडर बना लें. इसमें नारियल का तेल, गुलाबजल, मुलतानी मिट्टी व चंदन मिलाकर पैक तैयार कर लें. इसे चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद धो लें.

* एनीमिया की तकलीफ़ हो, तो हर रोज़ सुबह खाली पेट दो करीपत्ते के साथ एक खजूर खाएं.

* यदि डायरिया की प्रॉब्लम हो, तो करीपत्ते के पाउडर को छाछ में मिलाकर दिन में दो बार पीएं. इससे जल्द ही आराम मिल जाएगा.

* यदि आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं, तो अपने डायट में करीपत्ते को ज़रूर शामिल करें. तीन महीने तक लगातार हर रोज़ सुबह खाली पेट करीपत्ता खाने से इसके चमत्कारिक लाभ मिलेंगे.

* यदि स़़फेद बालों की समस्य हो, बाल टूटते व गिरते हों, तो 10-12 करीपत्ते में रातभर भिगोए हुए 5-6 बादाम मिलाकर पेस्ट बना लें. इससे बालों व स्काल्प की मालिश करें. फिर माइल्ड शैंपू से बाल धो लें. ऐसा तीन-चार हफ़्ते तक करने से बाल मज़बूत, चमकदार व काले होते हैं.

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* नियमित रूप से 7-8 करीपत्ते का सेवन करना शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है. इससे वज़न कम होने, आंखों की रोशनी बढ़ने, बालों के काले होने में मदद मिलती है.

* पीरियड में दर्द की समस्या होने पर करीपत्ते का सेवन करना फ़ायदेमंद रहता है. इससे माहवारी में होनेवाले असहनीय दर्द में काफ़ी आराम मिलता है.

* करीपत्ते में एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुण होने के कारण यह सूखी खांसी, कफ़ आदि में बलगम निकालने में मददगार साबित होता है.

* बवासीर की समस्या होने पर करीपत्ते का जूस पीएं. जूस के लिए करीपत्ते को पानी के साथ पीसकर उसका रस निकाल लें और इसे पीएं.

* वज़न कम करने के लिए करीपत्ते की चाय पीएं. इसके लिए पानी में करीपत्ता उबालकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाएं.

* अपच की परेशानी हो, तो एक टीस्पून घी को गर्म करके उसमें पांच-छह करीपत्ता, थोड़ा-सा सोंठ, जीरा, शहद व पानी मिलाकर उबाल लें. फिर इसे ठंडा करके पीएं.

* ब्लड प्रेशर से राहत के लिए सुबह लौकी के रस के साथ करीपत्ते का रस लें.

* खांसी-ज़ुकाम होने पर करीपत्ते के पाउडर में शहद मिलाकर लें.

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* चेहरे के जले-कटे निशान को दूर करने में भी करीपत्ता फ़ायदेमंद है. इसके लिए एक कप दूध को गर्म करके उसमें 5-6 करीपत्ते मिलाकर उबालें. जब यह गाढ़ा हो जाए, तब इसे आंच पर से उतारकर ठंडा कर लें. फिर इसे जले-कटे हुए जगहों पर लगाएं.

हमेशा चुस्त-दुरुस्त व सेहतमंद रहने के लिए अपने भोजन में नियमित रूप से करीपत्ते को ज़रूर शामिल करें.

सुपर टिप: उल्टी व घबराहट होने पर करीपत्ते के जूस में नींबू का रस व शक्कर मिलाकर पीएं.

– ऊषा गुप्ता

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आलू- स्वाद भी सेहत भी (Potato- 17 Wonderful Health Benefits)   

आलू भला किसे पसंद नहीं. आमतौर पर आलू को स्नैक्स व भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, पर इसमें कई औषधीय गुण भी हैं. जहां यह आंतों में सड़न की प्रक्रिया को रोकता है, वहीं पाचन में सहायक बैक्टीरिया के विकास में भी मदद करता है. आलू में प्रचुर मात्रा में विटामिन, स्टार्च, कैल्शियम, पोटैशियम व फास्फोरस होता है. कब्ज़, ड्रॉप्सी, यूरिक एसिड व आतों से जुड़ी बीमारियों में आलू काफ़ी फ़ायदेमंद है. स्कर्वी जैसी बीमारी के लिए तो आलू आदर्श आहार औषधी है. आलू का छिलका भी उपयोगी होता है, इसमें फाइबर व विटामिन बी 3 अधिक मात्रा में होती है. आलू को छिलके सहित पकाना चाहिए, क्योंेकि इसके छिलके के नीचे के हिस्से में ही प्रचुर मात्रा में प्रोटीन व खनिज होते हैं.

Potato

* पाचन संबंधी समस्या होने पर एक टेबलस्पून कच्चे आलू का रस भोजन से आधे घंटे पहले दो या तीन बार लें.

* मुंह में छाले हों, तो उबले हुए आलू खाएं. इससे जल्द ही छाले ठीक हो जाएंगे.

* यदि गठिया हो, तो चार आलू भून कर इसका छिलका निकाल लें. इस पर नमक व लाल मिर्च पाउडर छिड़ककर हर रोज़ खाएं. इससे गठिया जल्द ही ठीक हो जाएगा. इसके अलावा भोजन से पहले एक टेबलस्पून आलू का रस लेना भी फ़ायदेमंद होता है.

* गुर्दे की पथरी में मरीज़ को नियमित रूप से आलू खिलाते रहें और भरपूर मात्रा में पानी पिलाएं.

* सिरदर्द होने पर आलू को तीन तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं-

  1. आलू को छीलकर इसके पतले-पतले स्लाइस करके उसे सिर पर रखकर कपड़े से बांधकर शांत जगह पर लेट जाएं. कुछ देर में सिरदर्द से आराम मिल जाएगा.
  2. साफ़ कपड़े की पट्टी को आलू के रस में डुबोकर सिर पर रखें. जब पट्टी गर्म हो जाए, तब उसे बदल दें. कुछ देर तक ये प्रक्रिया करते रहने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.
  3. आलू के मोटे छिलके को सिर पर रखकर बांध दें. इससे भी सिरदर्द में लाभ होता है.

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* आयरन की कमी होने पर एनीमिया से परेशान मरीज़ों के लिए आलू का छिलका काफ़ी लाभदायक है. अन्य सब्ज़ियों के साथ आलू के छिलके का सेवन करें. इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होता है. इसका नियमित रूप से सेवन करते रहने से एनीमिया की समस्या दूर हो जाती है.

* आलू में मैग्नीशियम होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक होता है. अतः नियमित रूप से उबले हुए आलू अवश्य खाएं.

* शरीर में कहीं जल गया हो, तो कच्चे आलू का रस निकालकर जले हुए स्थान पर लगाएं.

* छोटे बच्चों या बुज़ुर्गों को आलू के रस में शहद मिलाकर पिलाने से उन्हें ताक़त मिलती है और वे हेल्दी भी होते हैं.

* आंखों की जलन और सूजन के लिए कच्चे आलू को कद्दूकस कर उसका रस निकालकर आंखों में काजल की तरह लगाएं.

* सन बर्न होने पर आलू को स्लाइस में काटकर फ्रिज में रख दें. फिर ठंडे आलू को सन बर्न वाले हिस्से में लगाएं.

* झुर्रियां व चेहरे के दाग़-धब्बे को दूर करने व खिली त्वचा के लिए आलू के रस का इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद रहता है.

* चेहरे की रंगत निखारने के लिए आलू के रस को चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद चेहरा धो लें. इसके अलावा इसमें नींबू का रस मिलाकर भी लगा सकते हैं.

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* चेहरे के दाग़-धब्बे को दूर करने के लिए आलू को स्लाइस में काटकर इसे चेहरे पर धीरे-धीरे रगड़ते हुए मसाज करें.

* आलू एक नेचुरल क्लींज़र का काम भी करता है. इसमें ककड़ी मिलाकर चेहरे पर लगाएं.

सुपर टिप

आलू में केरोटिनॉयड्स नामक तत्व होता है, जो दिल व शरीर के अंदरूनी हिस्से के लिए उपयोगी होता है, इसलिए नियमित रूप से उबले हुए आलू खाएं.

ऊषा गुप्ता

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अमरूद व अमरूद के पत्तों के 17 लाजवाब फ़ायदे (17 Health Benefits Of Guava Fruit And Leaves)

अमरूद (Guava) की तासीर ठंडी होती है. पेट संबंधित बीमारियों के लिए यह बहुत उपयोगी फल है. इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है. ये मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है. इसमें मौजूद लाइकोपीन नामक फाइटो न्यूट्रीएंट कैंसर व ट्यूमर के ख़तरे से बचाता है. साथ ही इसमें पाया जानेवाला बीटा कैरोटीन स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करता है. अमरूद में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, जो डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फ़ायदेमंद है. थायरॉइड को नॉर्मल करने के लिए भी डॉक्टर अमरूद के सेवन की सलाह देते हैं. अमरूद में मौजूद पोटैशियम व मैग्नीशियम मांसपेशियों व दिल को मज़बूत रखते हैं और इससे जुड़ी कई बीमारियों से भी बचाते हैं. आइए इसके स्वास्थ्य संबंधी अन्य लाभ के बारे में जानते हैं.

Benefits Of Guava

* यदि कब्ज़ की समस्या हो, तो सुबह खाली पेट पका हुआ अमरूद खाना फ़ायदेमंद रहता है.

* आंखों की सूजन व आंखों के नीचे के काले घेरे यानी कालेपन को दूर करने के लिए अमरूद की पत्तियों को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर लगाएं.

* दस्त की शिकायत होने पर अमरूद के पत्तों का रस निकालकर इसकी कुछ बूंदें एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर पीएं.

* यदि मुंह से दुर्गंध आती है, तो अमरूद की कोमल पत्तियों को चबाना लाभदायक होता है. इससे दांतों का दर्द भी कम होता है.

* बच्चों के पेट में कीड़े हों, तो अमरूद खिलाएं, तुरंत फ़ायदा होगा.

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* अमरूद को काले नमक के साथ खाने से पाचन संबंधी समस्या दूर हो जाती है, इसलिए इसे पाचन क्रिया के लिए बेहतरीन फल माना जाता है.

* एक लीटर पानी में 10-15 अमरूद के पत्ते डालकर 15 मिनट तक उबाल लें. ठंडा होने पर इसे छानकर बालों की जड़ों में लगाने से बालों का गिरना-झड़ना दूर हो जाता है. साथ ही इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करने से बाल ख़ूबसूरत, मज़बूत व चमकदार बनते हैं.

* पीरियड्स के समय होनेवाले असहनीय दर्द से राहत के लिए हर रोज़ छह मिलीग्राम अमरूद के रस का सेवन करें. इसके अलावा अमरूद के पत्ते का रस पीने से पीरियड्स में होनेवाली ऐंठन से भी आराम मिलता है.

* अध्ययन द्वारा यह साबित हुआ है कि डिप्रेशन के समय अमरूद का सेवन उपयोगी होता है. दरअसल, अमरूद में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जो तनाव व चिंता को दूर करने में अहम् भूमिका निभाता है.

* मितली या उल्टी की परेशानी होने पर अमरूद के पत्ते खाने से राहत मिलती है.

* नेचुरल ग्लो में भी अमरूद मदद करता है. यदि आप नियमित रूप से अमरूद खाते हैं, तो आपकी त्वचा खिली-खिली रहेगी.

* डेंगू के बुख़ार में अमरूद के पत्तों का उपयोग लाभप्रद होता है. पांच कप पानी में अमरूद के दस पत्ते डालकर तब तक उबालें जब तक पानी तीन कप न रह जाए. फिर इस मिश्रण को ठंडा करके मरीज़ को दिनभर में तीन बार एक-एक कप दें.

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* रिसर्च से यह पता चला है कि अमरूद के पत्तों की चाय बनाकर नियमित रूप से तीन महीने तक पीने से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल दूर होता है व ट्राइग्लिसराइड्स कम होते हैं.

* यदि पित्त की समस्या हो जाए, तो उसके लिए भी अमरूद का सेवन करना उपयोगी होता है.

* मुंह में छाले हों, तो अमरूद की पत्तियों को चबाने से आराम मिलता है.

* यदि आप नियमित रूप से अमरूद खाते हैं, तो आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. रिंकल व अन्य त्वचा संबंधी परेशानियां कम होती हैं.

सुपर टिप

हर रोज़ अमरूद खाने से सर्दी-ज़ुकाम जैसी मौसमी बीमारियां कम होती हैं.

– ऊषा गुप्ता

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कपूर का कमाल (11 Incredible Benefits Of Camphor)

हिंदू धर्म में पूजा के बाद कपूर जलाकर आरती करने की परंपरा है. पूजन, आरती जैसे धार्मिक कार्यों में कपूर का विशेष महत्व है. पूजा में प्रयोग किया जानेवाला कपूर हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद है.

Benefits Of Camphor

वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हुआ है कि कपूर की सुगंध से जीवाणु, विषाणु इत्यादि बीमारी फैलानेवाले जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है व बीमारियां नहीं फैलती हैं.

* त्वचा संबंधी रोगों के इलाज में कपूर बेहद फ़ायदेमंद होता है. नारियल के तेल में कपूर व गंधक का पाउडर मिलाकर दाद, खाज, खुजली वाले स्थान पर लगाने से फ़ायदा मिलता है. मुहांसों पर भी कपूर का तेल लगाने की सलाह दी जाती है.

* फटी एड़ियों को ठीक करने में कपूर बहुत उपयोगी होता है. इसके लिए टब में गर्म पानी लें और उसमें कपूर मिलाकर पैर डालकर 10-15 बैठें. ऐसा करने से एड़ियां ठीक होती हैं.

* कपूर की टिकिया को रूमाल में लपेटकर सूंघते रहने से सर्दी-ज़ुकाम से राहत मिलती है.

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* कपूर व चंदन को तुलसी के रस में घिसकर लेप बनाकर सिर पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है. इसके अलावा कपूर को नींबू के रस के साथ मिलाकर सिर पर मलें. यह सिरदर्द का अचूक इलाज है. जोड़ों का दर्द या कमर दर्द होने पर कपूर के तेल से उस स्थान की मालिश करें. तुरंत आराम मिलेगा. शरीर के किसी भी अंग में दर्द होने पर आप इस तेल से मालिश कर सकते हैं. कपूर गठिया के रोगियों के लिए फ़ायदेमंद होता है. मांसपेशियों में दर्द होने पर इसे लगाने पर तुरंत आराम मिलता है.

* नारियल के तेल में कपूर डालें. इस तेल से बालों की जड़ों में हल्के हाथों से मालिश करें. इससे बाल स्वस्थ व मज़बूत होते हैं. रूसी, जुएं, बालों का गिरना इत्यादि समस्या होने पर सरसों के तेल में कपूर मिलाकर बालों पर लगाएं. इससे काफ़ी फ़ायदा होगा. इसके अलावा सौ ग्राम नारियल के तेल में चार ग्राम कपूर मिलाकर बॉटल में रखें. इस तेल को रात में सोने से पहले बालों में लगाकर मालिश करें. कुछ दिनों के अंदर रूसी गायब हो जाएगी.

* हींग और कपूर के पाउडर को  बराबर मात्रा में मिलाकर दांत के बीच दबाकर रखें. दर्द से तत्काल आराम मिलेगा. पान में देसी कपूर डालकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया की शिकायत दूर हो जाती है. मसूड़ों में किसी तरह की समस्या होने पर कैस्टर ऑयल में कपूर मिलाकर मसूड़ों पर मलने से बहुत फ़ायदा मिलता है.

* आग से जलने या चोट के कारण त्वचा पर दाग़ पड़ने पर थोड़ा-सा कपूर पानी में मिलाकर प्रभावित स्थान पर नियमित रूप से कुछ दिनों तक लगाने से निशान मिट जाता है.

* देसी घी में कपूर मिलाकर रात को सोते समय पैरों के तलवों पर मालिश करने से अच्छी नींद आती है.

* मिश्री को बारीक पीसकर उसमें थोड़ा-सा कपूर पाउडर मिलाकर छालों पर लगाएं. यह नुस्ख़ा बच्चों के मुंह के छालों के लिए बेहद लाभकारी होता है.

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* ऊनी या रेश्मी कपड़े रखते समय छोटी-सी पोटली में कपूर बांधकर कपड़ों के बीच में रख दें. इससे कीड़े नहीं लगेंगे. तकिये के नीचे व पलंग के चारों तरफ़ कपूर की पोटली बांधकर रखने से खटमल नहीं आते हैं.

– आभा जैन

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जानें कालीमिर्च के 17 फ़ायदे (17 Amazing Black Pepper Benefits: More Than Just A Spice)

कालीमिर्च (Black Pepper) वातनाशक व पित्तकारक है. इसमें पेपराइन नामक केमिकल होता है, जिसके कारण इसका स्वाद तीखा होता है. इसी कारण यह पाचन क्रिया में भी उपयोगी होता है. इससे पाचन क्षमता बढ़ती है. कालीमिर्च में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कैंसर से लड़ते हैं, ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर से. कालीमिर्च का उपयोग कफ़, खांसी, फोड़े-फुंसी, पेट संबंधी समस्या आदि के इलाज में भी किया जाता है.

Black Pepper Benefits

* ज़ुकाम के साथ हल्का बुख़ार भी हो, तो 5-6 साबूत कालीमिर्च, 7-8 तुलसी के पत्ते, 2-3 लौंग, एक इंच अदरक का टुकड़ा, एक इलायची- इन सभी को पानी में उबाल लें. फिर इसमें दूध डालकर चाय की तरह गरम-गरम दिन में तीन बार पीएं. इससे पसीना आकर शरीर हल्का होता है और बुख़ार उतर जाता है.

* आधा टीस्पून कालीमिर्च पाउडर और आधा टीस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटें. इससे खांसी ठीक हो जाती है.

* पाचनशक्ति कमज़ोर हो और भोजन डायजेस्ट न होता हो, तो जीरा, सोंठ, सेंधा नमक, पीपरि, कालीमिर्च- सब समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. भोजन के बाद एक चम्मच चूर्ण पानी से लें. भोजन शीघ्र पचने लगेगा.

* गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधे नींबू का रस, आधा चम्मच कालीमिर्च का चूर्ण व आधा चम्मच काला नमक मिलाकर नियमित रूप से कुछ दिनों तक सेवन करने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है.

* कालीमिर्च पाउडर को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज़ सुरीली होती है.

यह भी पढ़ेचोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

* कालीमिर्च को घी में बारीक़ पीसकर लेप करने से दाद, खाज, फोड़े-फुंसी आदि चर्म रोग दूर हो जाते हैं. छोटी फुंसियां भी दिन में दो बार लेप करने से तुरंत बैठ जाती हैं.

* 8-10 कालीमिर्च पानी में उबालकर इस पानी से गरारे करें. इससे गले का संक्रमण ठीक हो जाता है.

* मस्तिष्क में ताज़गी लाने तथा स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए कालीमिर्च का प्रयोग ब्राह्मी की पत्तियों के साथ मिलाकर किया जाता है. थोड़े-से घी में 3-4 ग्राम ब्राह्मी की पत्ती उबाल लें. इसमें पिसी कालीमिर्च तथा शक्कर मिलाकर चाटें.

* आधा चम्मच घी, आधा चम्मच पिसी हुई कालीमिर्च और आधा चम्मच मिश्री, तीनों को मिलाकर सुबह चाटें. इससे आंखों की कमज़ोरी दूर होती है व रोशनी भी बढ़ती है.

* बदहज़मी की शिकायत होने पर एक नींबू काटकर कालीमिर्च और काला नमक लगाएं. और उसे गरम करके चूसें.

* कालीमिर्च को उबालकर उसके पानी से गरारा करने से मसूड़ों की सूजन कम हो जाती है. मसूड़े स्वस्थ तथा मज़बूत होते हैं.

* कालीमिर्च का चूर्ण तुलसी के रस और शहद में मिलाकर सेवन करने से मलेरिया दूर हो जाता है.

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* अदरक और नींबू के रस में एक टीस्पून कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेटदर्द दूर होता है.

* कालीमिर्च का बारीक़ चूर्ण शहद के साथ चाटकर ऊपर से छाछ पीने से दीर्घकालीन पेचिश मिटता है. इस नुस्ख़े का सेवन दिन में तीन बार करें.

* कालीमिर्च का चूर्ण, शक्कर और घी एक साथ मिलाकर सेवन करने से सिर का चकराना दूर होता है.

* कालीमिर्च को दही और पुराने गुड़ में मिलाकर पीने से नकसीर (नाक में से ख़ून गिरना) बंद होता है.

सुपर टिप

पाचन क्रिया ठीक करने के लिए कालीमिर्च व सेंधा नमक पीसकर इसे भुनी हुई अदरक के बारीक़ टुकड़ों के साथ मिलाकर खाएं.

– ऊषा गुप्ता

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चोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

राह चलते, घर का कामकाज करते हुए, फिसल जाने पर या गिर जाने पर मोच, चोट या घाव हो जाए या फिर सूजन आ जाए, तो निम्न घरेलू नुस्ख़ों (Home Remedies) द्वारा इन्हें दूर किया जा सकता है.

Home Remedies For Swelling

* मोच के स्थान पर सरसों का तेल लगाकर उस पर हल्दी का पाउडर छिड़कें तथा छोटे तौलिए से ढंक दें. एक कपड़े में नमक की पोटली बांध लें. इसे तवे के ऊपर गर्म करके तौलिए के ऊपर से सहने योग्य सेंक करें.

* त्वचा या घाव से बहते ख़ून पर फिटकरी पीसकर बुरक दीजिए. इससे ख़ून का बहना रुक जाएगा.

* नीम की हरी पत्तियों को पीसकर उसकी लुगदी बनाकर घाव पर रखकर पट्टी बांध दें.

* गूलर के पत्तों को पीसकर घाव पर कुछ दिनों तक लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है.

* चोटवाली जगह पर खानेवाला चूना व शहद मिक्स करके लगाने से चोट जल्द ठीक हो जाती है.

* हाथ-पैर में हुए फ्रैक्चर से सूजन व दर्द होने पर प्याज़ को कूटकर उसमें हल्दी व सरसों का तेल मिला लें. इसे हल्का गर्म करके चोटवाले स्थान पर बांधकर रातभर रहने दें.

* चोट के कारण घाव हो गया हो, तो वहां पर घी में कपूर मिलाकर लगाएं.

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* दूब को पीसकर चोट पर लगाने से भी लाभ होता है.

* 4 चम्मच सरसों के तेल में 4-5 लहसुन की कलियां व एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर धीमी आंच पर हल्का-सा गर्म कर लें. इसे चोटवाली जगह पर लगाकर कपड़े से बांध लें.

* घाववाली जगह पर फिटकरी को भूनकर लगाएं. इससे भी घाव जल्दी भरता है.

* हल्दी व सरसों को मिक्स करके हल्का गर्म कर लें. इसे चोट पर लगाकर उसके ऊपर एरंड के पत्ते लगाकर बांध देने से चोट में लाभ होता है.

* यदि पत्थर या लकड़ी की चोट से सूजन हुई हो, तो इमली के पत्तों को उबालकर चोटवाली जगह पर लगाकर बांधें. इसके अलावा चूना व हल्दी को गर्म करके लगाने से भी फ़ायदा होगा.

* जब कभी शरीर के किसी अंग पर चोट लग जाए, तब अदरक को कद्दूकस करके पानी में हल्का-सा उबालकर उस स्थान पर लगाएं.

* चोट के कारण घाव होने पर 20-25 नीम की ताज़ी पत्तियों को तोड़कर पानी के साथ पीस लें और साफ़ कपड़े से छान लें. इसमें चुटकीभर हल्दी डाल दें. फिर इस रस में रुई के फाहे को भिगोकर तवे पर थोड़ा-सा घी डालकर गर्म करें. जब रुई जलने लगे, तो उसे हटाकर थोड़ा-सा ठंडा कर घाव पर लगाकर पट्टी बांध दें.

* सेंधा नमक को पानी में डालकर इसमें कपड़े को भिगोकर चोटवाले स्थान पर सेंक करने से आराम मिलता है.

यह भी पढ़ेचाइल्ड केयरः बच्चों की काली खांसी के 13 असरदार नुस्ख़े (Child Care: Children’s And Whooping Cough)

* जहां चोट लगी हो, वहां पर अजवायन पीसकर लगाएं और कपड़े से बांध दें.

* यदि कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो एरंड के पत्ते पर सरसों का तेल लगाएं. इसे आग में हल्का सेंककर चोट पर लगाकर बांध दें.

* यदि चोट लगे हुए स्थान से लगातार ख़ून बह रहा हो, तो कपड़े को मिट्टी के तेल में भिगोकर बांधे. ख़ून का बहना रुक जाएगा.

* यदि मोच की वजह से सूजन हुई हो, तो सूजन को दूर करने के लिए गुनगुने पानी में फिटकरी मिलाकर मोचवाली जगह पर सिंकाई करें.

* चोट लग जाने पर गेहूं के आटे में सरसों का तेल मिलाकर चोट पर रखकर कपड़े से बांध दें.

सुपर टिप

तुलसी के पत्तों को पीसकर चोट पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है.

– ऊषा गुप्ता

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चाइल्ड केयरः बच्चों की काली खांसी के 13 असरदार नुस्ख़े (Child Care: Children’s And Whooping Cough)

अधिकतर बच्चों को होनेवाली संक्रामक बीमारियों में से काली खांसी एक गंभीर बीमारी है. इसका छोटे बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. इस बीमारी की शुरुआत सामान्य खांसी से होती है. साथ ही अक्सर बच्चे की नाक बहती रहती है. इस बीमारी में खांसी एकाएक आरंभ हो जाती है और बच्चे को उठाते ही खांसी बढ़ जाती है. बच्चे को सांस लेने में कठिनाई होती है. ये सभी काली खांसी के लक्षण है. इसमें खांसी के साथ प्रायः उल्टी भी होती है. इसके अलावा निमोनिया और कान का संक्रमण इस बीमारी में ख़ास परेशान करता है. काली खांसी को कुक्कुर खांसी भी कहते हैं.

Child Care Tips

 

* तीन-चार बादाम रातभर पानी में भिगोकर रख दें. सुबह बादाम के छिलके निकालकर इसमें लहसुन की एक कली व थोड़ा-सा मिश्री मिलाकर बारीक़ पीस लें. अब इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें. बच्चे को ये गोलियां खिलाएं. इससे काली खांसी में काफ़ी राहत मिलेगी.

* पांच-छह लहसुन की कलियों को छीलकर बारीक़ काटकर पानी में अच्छी तरह से उबाल लें. इस पानी से भाप लें. प्रतिदिन इसी तरह से करते रहने से सात-आठ दिन में काली खांसी जड़ से दूर हो जाएगी.

* शुद्ध किया हुआ नारियल का तेल दिनभर में तीन बार आधा टीस्पून पिलाने से भी काली खांसी में शीघ्र लाभ होता है.

* अनार का छिलका सुखाकर उसे पीसकर चूर्ण बनाएं. 2 ग्राम चूर्ण को पानी में उबालकर छान लें. ठंडा होने पर 1-2 चम्मच की मात्रा में दिन में तीन-चार बार पिलाएं. इससे तीन दिन में ही काली खांसी दूर हो जाएगी.

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* केले के सूखे पत्तों को जलाकर भस्म (राख) बनाएं. इस भस्म को शहद में मिलाकर बच्चे को 125 मि.ग्रा. की मात्रा में दिन में तीन-चार बार चटाएं.

* बच्चे को अधिक से अधिक तरल पदार्थ दें, जैसे- जूस, सूप, पानी आदि. भोजन भी हल्का ही दें.

* 250 मि.ग्रा. भुनी हुई फिटकरी सममात्रा में शक्कर में मिलाकर दिन में दो बार देने से काली खांसी दूर हो जाती है.

* मुलहठी और अनार का छिलका जलाकर कपड़छान चूर्ण बनाएं. इस चूर्ण को आधा टीस्पून की मात्रा में शहद में मिलाकर बच्चे को चटाएं. इससे राहत मिलेगी और कुछ दिनों में काली खांसी दूर हो जाएगी.

* तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च समभाग में लेकर उसे पीस लें. फिर मूंग के बराबर गोलियां बनाकर 1-1 गोली चार बार बच्चे को दे. दें. कुछ दिनों में काली खांसी अवश्य दूर हो जाएगी.

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* अनार के छिलके, कालीमिर्च, सेंधा नमक- सभी को सममात्रा में लेकर महीन पीसकर पाउडर बना लें. आधा टीस्पून पान के रस के साथ मिलाकर बच्चे को तीन बार चटाएं. यदि आप चाहें, तो पान के रस की बजाय तुलसी का रस भी ले सकते हैं.

* एक छोटा चम्मच मां का दूध या बकरी का दूध लेकर उसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में चार-पांच बार बच्चे को चटाएं. इससे भयंकर से भयंकर खांसी भी दूर हो जाएगी. यह काली खांसी का अचूक इलाज है.

* लौंग को आग में भूनकर और बारीक़ चूर्ण बनाकर शहद के साथ दिन में तीन बार चटाने से काली खांसी से राहत मिलती है.

सुपर टिप

चने के दाल के बराबर पिसी हुई फिटकरी पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिलाने से काली खांसी में लाभ होता है.

– मूरत पन्नालाल गुप्ता

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ककड़ी के 15 बेमिसाल फ़ायदे (15 Amazing Health Benefits Of Cucumbers You May Not Know)

ककड़ी (Cucumber) स्वाद में मधुर, वातकारक, पित्त का शमन करनेवाली व मूत्रकारक होती है. इसमें विटामिन, मिनरल, पोटैशियम व फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में होता है. यह वज़न कम करने में मदद करती है. ककड़ी में 95 प्रतिशत पानी होने के कारण यह न केवल भूख को मिटाती है, बल्कि मेटाबॉलिज़्म भी बेहतर बनाती है. इसकी तासीर ठंडी होने के कारण गर्मियों के मौसम में शरीर में ठंडक के लिए इसका अधिक सेवन करते हैं. ककड़ी आंत संबंधी सभी तरह की बीमारियों में फ़ायदेमंद है. इससे हड्डियां मज़बूत होती हैं. ककड़ी को सलाद, जूस, सूप, रस व सब्ज़ी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. यह गर्मी व लू से भी बचाती है.  

Health Benefits Of Cucumbers

* यूरिन में जलन या फिर यूरिन कम होने पर ककड़ी का रस बेहद उपयोगी है. इसे दिनभर में चार बार तीन-तीन घंटे के अंतराल पर लें.

* रिसर्च के अनुसार, हर रोज़ ककड़ी का सेवन करने से कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है. इसमें मौजूद प्रोटीन ट्यूमर या कैंसर को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ शरीर में कैंसर से लड़ने की ताक़त को भी बढ़ाता है.

* ककड़ी के साथ मूली, गाजर, बीट, प्याज़ व नींबू का रस मिलाकर सलाद बनाकर खाने से अरुचि व ख़ून की कमी दूर होती है.

* 150 मि.ली. की मात्रा में ककड़ी का रस दिनभर में 2-3 बार पीने से गुर्दे की पथरी से छुटकारा मिलता है.

* जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो, उन्हें 200 ग्राम खीरे में सेंधा नमक व नींबू का रस डालकर हर रोज़ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए.

* पेटदर्द होने पर गुनगुने पानी में आधा टीस्पून ककड़ी का रस मिलाकर पीएं.

* पेशाब की रुकावट होने पर ककड़ी के रस में मिश्री या शक्कर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है.

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* बेहोश व्यक्ति की बेहोशी दूर करने के लिए ककड़ी काटकर सुंघाएं.

* गर्मी के कारण सिर चकराने पर ककड़ी खाने से या फिर इसमें टमाटर, मूली व चुकंदर को मिक्स करके जूस बनाकर पीने से आराम मिलता है.

* कब्ज़ या बदहज़मी की समस्या हो, तो भोजन के साथ ककड़ी का सेवन करें.

* ककड़ी के रस का उपयोग गुर्दे व त्वचा की सभी प्रकार की बीमारियां, गुर्दे की पथरी, मूत्रनली में जलन, अस्थमा, डायबिटीज़, उल्टी, मोटापा, दस्त आदि को दूर करने में किया जाता है.

* हड्डियों की मज़बूती के लिए ककड़ी को छिलके सहित खाएं, क्योंकि इसमें कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को स्वस्थ व मज़बूत बनाता है.

* चेहरे पर झाइयां हों, तो एक ककड़ी का रस निकालकर उसमें आधा-आधा टीस्पून गुलाबजल व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें.

* ककड़ी के बीज को ठंडई में पीसकर लेने से गर्मियों के मौसम में होनेवाली समस्याएं दूर होती हैं.

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* ककड़ी में मौजूद विटामिन सी, बीटा कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स बॉडी में मौजूद फ्री रैडिकल्स को दूर करते हैं और इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं.

सुपर टिप

* ककड़ी के बीज को पानी में पीसकर चेहरे पर लगाने से त्वचा हेल्दी बनती है.

हेल्थ अलर्ट

ककड़ी खाते समय या फिर खाने के बाद कभी भी पानी न पीएं. भोजन को डायजेस्ट करने के लिए पीएच लेवल की ज़रूरत होती है. ककड़ी खाने के बाद पानी पीने से पीएच लेवल बाधित होता है.

– ऊषा गुप्ता

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केले के 20 चमत्कारी फ़ायदे (20 Surprising Health Benefits Of Bananas)

केला (Bananas) एनर्जी लेवल को काफ़ी बढ़ाता है. दुनियाभर में तीन सौ से भी अधिक क़िस्म के केले पाए जाते हैं. इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन्स होते हैं. यह आयरन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, विटामिन ए से भरपूर होता है. आयुर्वेद के अनुसार पका केला शीतल, वीर्यवर्द्धक, भूख-प्यास, आंखों से संबंधित बीमारियों आदि को दूर करता है. रिसर्च के अनुसार केले के सेवन से तनाव, डिप्रेशन में भी राहत मिलती है. नियमित रूप से एक केला खाने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि बीमारियां भी पास नहीं आतीं. 

 Health Benefits Of Bananas

* यदि कब्ज़ की परेशानी है, तो केले का सेवन लाभदायक है, क्योंकि यह आंतों की अच्छी तरह से सफ़ाई कर देता है. इसे दही के साथ खाएं.

* यदि मुंह में छाले हों, तो गाय के दूध से बनी दही में केला मिलाकर खाएं.

* लूज़ मोशन यानी दस्त होने पर पके हुए केले को मैश करके मक्खन की तरह बनाकर उसमें मिश्री के कुछ दाने मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार लेने से आराम मिलता है.

* गैस की समस्या होने पर रोज़ रात को सोने से पहले ईसबगोल या दूध के साथ केला खाएं.

* खांसी की तकलीफ़ होने पर पके हुए केले को काटकर उसमें शक्कर मिलाकर ढंक दें. इसे गर्म पानी में थोड़ी देर डुबोकर रखें. फिर इसे शरबत की तरह पी लें. खांसी में काफ़ी आराम मिलेगा.

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* यदि आंतों में सूजन है, तो केले का नियमित सेवन करने से यह समस्या दूर हो जाती है.

* यदि जल जाएं, तो उस स्थान पर केले का पल्प लगाएं. तुरंत आराम मिलेगा.

* दाद, खाज-खुजली होने पर केले को मसलकर उसमें नींबू का रस मिलाकर लगाएं. तुरंत आराम मिलता है.

* शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो यानी एनीमिया की समस्या हो, तो प्रतिदिन नियमित रूप से केले खाएं.

* श्‍वेत प्रदर की तकलीफ़ होने पर हर रोज़ एक केला एक चम्मच देसी घी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है.

* यदि शरीर में ख़ून की कमी हो, तो हर रोज़ सुबह दो-तीन केले खाएं और इलायचीवाला दूध पीएं.

* यदि अस्थमा यानी दमा की समस्या हो, तो केले को छिलके के साथ काटकर उसमें कालीमिर्च पाउडर व नमक लगाकर रातभर चांदनी में रखें. सुबह इस केले को आग में भूनकर खाने से अस्थमा में लाभ होता है.

* यदि नाक से रक्त निकलने लगे यानी नकसीर फूटने की समस्या होने पर एक पका केला शक्कर मिले दूध के साथ नियमित रूप से खाने पर हफ़्तेभर में आराम मिल जाता है. इसके अलावा नकसीर की समस्या भी दूर हो जाती है.

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* सूखी खांसी या फिर पुरानी खांसी की तकलीफ़ हो, तो दो केले को मिक्सर में पीसकर उसमें दूध व इलायची मिलाकर शर्बत की तरह पीएं.

* नियमित रूप से केला खाते रहने से किडनी के कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.

* चोट या खरोंच आने पर उस जगह पर केले का छिलका बांध दें.

* यदि आप दुबले-पतले हैं और अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं, तो हर रोज़ एक ग्लास दूध के साथ दो पके हुए केले खाएं.

* चेहरे के ग्लो के लिए केले के पल्प को चेहरे पर लगाकर थो़ड़ी देर बाद चेहरा धो लें.

* एक्सरसाइज़ करने के आधे घंटे पहले एक केला खाने से वर्कआउट्स करने पर होनेवाली थकान नहीं होती और एनर्जी लेवल भी अच्छा रहता है.

सुपर टिप

केले में विटामिन ए अधिक मात्रा में होता है, इस कारण हर रोज़ एक केला खाने से आंखों की रोशनी तेज़ होती है.

– ऊषा गुप्ता

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बहरापन  दूर करने के 15 आसान उपाय (15 Home Remedies For Deafness)

जब कान (Ear) की वायु शब्दवाही स्रोतों को रोक देती है, तो व्यक्ति को बहरेपन (Deafness) की शिकायत होने लगती है. इस बीमारी (Disease) में सुनने की क्षमता कम या बिल्कुल समाप्त हो जाती है. बहरापन तीन प्रकार का होता है. ऊंचा सुनाई देना, कठिनता से सुनना और बिल्कुल न सुनना. वृद्धों का तथा पुराना बहरापन असाध्य होता है. यानी इसे ठीक करना बहुत मुश्किल होता है.

Home Remedies For Deafness

कान के मध्य या भीतरी भाग में सूजन तथा फोड़े के कारण या कानों में जीव-जंतुओं के चले जाने से बहरापन आ सकता है. कई बीमारियों के दुष्परिणामस्वरूप भी बहरापन होने की संभावना रहती है, जैसे- खसरा, टायफॉइड, मम्प्स, सिफिलिस आदि. बहरापन आनुवंशिक भी होता है, जो चार-छह महीने के बाद बच्चे में दिखाई देने लगता है. कान में पानी जाने या कान बह रहा हो, फिर भी उसका इलाज न कराने से बहरापन आ जाता है. किसी आघात से, भयंकर विस्फोटों या धमाकों के कारण भी बहरापन आ सकता है.

जब बच्चा साल-डेढ़ साल का हो जाने पर मां-पापा जैसे सामान्य शब्द भी न बोल पाए, तो किसी कान के विशेषज्ञ यानी ईएनटी डॉक्टर से बच्चे में बहरेपन की जांच ज़रूर करा लेनी चाहिए, क्योंकि अक्सर बहरेपन के कारण ही बच्चा न तो बोल पाता है और न ही कोई प्रतिक्रिया व्यक्त कर पाता है.

* सप्ताह में एक बार कानों में शुद्ध सरसों का तेल हल्का गुनगुना करके डालना फ़ायदेमंद होता है. इससे बहरापन दूर होता है.

* ताज़ा मूली का रस, सरसों का तेल और शहद तीनों बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से मिला लें. इसकी दो से चार बूंद दिन में चार बार कान में डालने से श्रवण शक्ति बढ़ती है.

* बहरापन होने पर नियमित रूप से कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस निकालकर हल्का गर्म करके कान में डालना चाहिए.

* सोंठ, गुड़ और घी खाने से कम सुनने में लाभ होता है और कान की सांय-सांय की आवाज़ भी बंद होती है.

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* 4-5 बूंद सरसों का तेल कान में डालनेे से कम सुनाई पड़ने की शिकायत दूर हो जाती है.

* अदरक के रस और शहद में थोड़ा-सानमक मिलाकर 2-4 बूंद कान में डालें, अवश्य फ़ायदा करेगा.

* बहरेपन की स्थिति में नियमित रूप से दालचीनी का तेल रात को सोते समय कान में डालें. कुछ ही दिनों में लाभ होगा.

* लहसुन की 3-4 कलियां कूटी हुई, एक टेबलस्पून जैतून का तेल व आधा टीस्पून प्याज़ का रस लें. एक कप मेें जैतून का तेल डालकर उसमें प्याज़ का रस व लहसुन की कलियां डालकर अच्छी तरह से मिला लें. इस मिश्रण को दोनों कानों में 3-4 बूंद डालकर रूई से ढंक दें.

* अखरोट या कड़वे बादाम तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से भी सुनने की क्षमता बढ़ती है.

* दूध में थोड़ा-सा हींग मिलाकर कान में कुछ बूंद डालने से फ़ायदा होता है.

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* 25 ग्राम गुड़ में एक चम्मच सोंठ मिलाकर क़रीब चार महीने तक नियमित रूप से लेने से बहरेपन की शिकायत दूर होती है.

* हर रोज़ एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर दो बार पीएं, इससे सुनने की क्षमता बढ़ेगी.

* सरसों के तेल में कुछ दाने धनिया के डालकर पकाएं. जब आधा रह जाए, तब इसे छानकर दो-दो बूंद कान में डालें. लाभ होगा.

* बारीक़ पिसा हुआ सुहागा कान में डालकर उसके ऊपर 5-6 बूंद नींबू का रस डालने से कान के भीतर गैस उत्पन्न होगी और मैल फूलकर बाहर आ जाएगी. इससे कान का परदा साफ़ हो जाएगा और सुनाई देने लगेगा.

– हरिवंश ममता परमेश्‍वर

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अनिद्रा की समस्या से यूं निजात पाएं (8 Ways To Cure Sleeping Problems Naturally)

अनिद्रा (Insomnia) का मतलब केवल नींद (Sleep) ना आना नहीं है, बल्कि रात में नींद का बार-बार टूटना या सुबह के पहले ही नींद खुल जाना भी अनिद्रा रोग ही है. तनाव, डिप्रेशन, चिंता आदि भी नींद में बाधक होते हैं. यदि रात में देर तक नींद नहीं आती, तो इसका कारण अक्सर तनाव, डिप्रेशन ही होता है. वातावरण से भी हमारी नींद प्रभावित होती है.

Sleeping Problems

शोर-शराबे, तेज़ रोशनी, ज़्यादा गर्मी या ठंडी अथवा नए अपरिचित परिवेश के कारण भी नींद में बाधा आती है, जिससे अनिद्रा की समस्या होने लगती है. आमतौर पर अनिद्रा की समस्या से परेशान लोगों को जागृतावस्था में आलस्य, सुस्ती, थकान और सिरदर्द की शिकायत बनी रहती है. इससे उनकी कार्यक्षमता भी घट जाती है.

* कोकम को चटनी की तरह पीसकर पानी मिलाकर छान लें. इसमें शक्कर मिलाकर शरबत बनाएं. इस शरबत को पीने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है. इसका सेवन कम से कम 15 दिन तक अवश्य करना चाहिए.

* एक लीटर पानी को अच्छी तरह उबाल लें. फिर आंच से उतारकर उसमें आधा कप कद्दूकस किया हुआ प्याज़ डालकर 5-10 मिनट रहने दें. ठंडा होने पर छान लें. इस पानी को एक चम्मच की मात्रा में लेकर उसमें पांच बूंद शहद मिलाकर बच्चों को पिलाने से वे गहरी नींद सोते हैं.

* पीपरामूल का पाउडर बनाकर रख लें. हर रोज़ सोने से पहले आधा चम्मच पाउडर गुड़ मिलाकर खाएं और ऊपर से गर्म दूध पीकर सो जाएं. इससे अच्छी नींद आती है और सुबह उठने पर मन प्रसन्न रहता है.

* चार जायफल लेकर पाउडर बनाकर 16 पुड़िया बना लें. हर दिन सोने से पहले एक पुड़िया पानी के साथ सेवन करें. इससे अनिद्रा की समस्या से निजात मिलेगा और अच्छी नींद आएगी.

* एक पका हुआ कद्दू लेकर उसका छिलका निकाल दें. फिर उसे काटकर उसका

बीज और पल्प निकाल दें. इसके बाद कद्दू के बड़े-बड़े टुकड़े करके पानी में उबालें. ज़रा नरम पड़ने पर आंच से उतारकर कपड़े पर डालकर पानी निथार दें. उबले हुए कतरों को दुगुनी शक्कर की चाशनी बनाकर उसमें डाल दें. इसमें केसर और इलायची इच्छानुसार डाले जा सकते हैं. इस मुरब्बे का नियमित सेवन करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है और अच्छी नींद आती है.

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* प्याज़ में मसाले भरकर उसका अचार बनाएं. यह अचार इतना हो कि ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिन तक सेवन किया जा सके. हर 15 दिनों में ताज़ा अचार बनाएं. यह अचार खाने से अच्छी नींद आती है. साथ ही थकावट दूर होती है, खाने में रुचि बढ़ती है और पेट भी साफ़ होता है.

* सोने से पहले एक ग्लास गर्म दूध पीने से अच्छी नींद आती है.

सुपर टिप

सोने से पहले मुट्ठीभर चेरी का सेवन या फिर चेरी का जूस लेना फ़ायदेमंद रहता है. इससे अच्छी नींद आती है.

पथ्य पर भी ध्यान दें…

सोने का प्रयास करते समय चिंता-तनाव पर से ध्यान हटाने के लिए मन ही मन अच्छी कविताएं गुनगुनाएं या अपने आराध्य भगवान का ध्यान करें. सुबह उठकर हल्की एक्सरसाइज़ करें और शाम को भोजन के बाद कुछ समय तक टहलें. रात में सिगरेट, चाय, कॉफी आदि उत्तेजक पदार्थों से परहेज़ रखें. दिन में झपकियों से बचें.

भरपूर नींद लेना है ज़रूरी

भोजन की तरह पर्याप्त नींद भी ज़रूरी है. इससे शरीर स्वस्थ रहता है और शारीरिक विकारों से भी बचाव होता है. दिन में परिश्रम करने से शरीर की शक्ति कम हो जाती है. रात को अच्छी नींद सोने से शरीर को आराम मिलता है, स्फूर्ति पैदा होती है तथा अगले दिन काम करने के लिए नई शक्ति मिलती है. यही नींद का सबसे बड़ा रहस्य है. अतः हर व्यक्ति को भरपूर नींद लेनी चाहिए.

– ऊषा गुप्ता

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रागी खाएं, रोग भगाएं (Health Benefits Of Ragi OrFinger Millet)

आजकल ज़्यादातर इंसान किसी न किसी बीमारी से परेशान हैं. किसी को हाई ब्लड प्रेशर है, तो किसी को कब्ज़. कोई डायबिटीज़ से डर रहा है, तो किसी का इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो रहा है. ऐसे में सिर्फ़ कुछ लाल-भूरे दाने कमाल कर सकते हैं. ये दाने हैं अनाज रागी (Ragi) के. एक्स्पर्ट्स भी मानते हैं कि रागी से ढेरों बीमारियों का इलाज संभव है. जानिए कितना फ़ायदेमंद है रागी.

Ragi

वज़न कम करना है, कब्ज़ की भी दिक़्क़त है, डायबिटीज़ भी दस्तक दे रहा है, दिल की भी चिंता है, कैल्शियम की कमी भी है-तो इन सबका सस्ता और बेहतरीन इलाज रागी है. एक ऐसा मोटा अनाज, जो अपने छोटे-छोटे दानों में ढेरों बीमारियों का इलाज समेटे है. बहुत आसान तरी़के से रागी का सेवन किया जा सकता है. ये आपके खाने को इस कदर पौष्टिक बना देता है कि आप सोच भी नहीं सकते. इसको ऐसे समझ सकते हैं कि 100 ग्राम रागी में पूरे 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है. यह ग्लूटन फ्री भी है. इसका सेवन वे लोग भी कर सकते हैं, जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है.

बॉडी होगी रिलैक्स

रागी को नियमित खानपान में शामिल करना बॉडी रिलैक्सेशन के लिए भी फ़ायदेमंद है. दरअसल, इसमें मौजूद तत्वों के चलते यह अवसाद से निकलने में मदद करती है तो ग़ुस्से और इन्सोम्निया से भी राहत दिलाती है.

इन्सोम्निया नींद न आने की बीमारी होती है. रागी से यह सारे फ़ायदे इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स की वजह से होते हैं. ख़ासतौर पर ट्रिप्टोफ़ैन और अमीनो एसिड नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स रागी को बेहद स्पेशल अनाज बना देते हैं.

त्वचा भी चमकाए

रागी के छोटे-छोटे दाने त्वचा पर भी बड़ा असर करते हैं. रागी का सेवन त्वचा को जवां और चमकदार बना देता है. इसमें मौजूद मिथायोनिन और लाइसिन त्वचा की कसावट को बनाए रखने और झुर्रियों को रोकने में मदद करते हैं.

पाचन होगा आसान

रागी पेट का भी भरपूर ख़्याल रखता है. रागी को आहार का हिस्सा बनाने से ये पाचनतंत्र को ठीक रखता है. दरअसल रागी में मौजूद ऐल्कलाइन तत्व खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है. बहुत ही मानी हुई बात है कि पेट ख़राब होना, कई और दिक़्क़तों की वजह भी बनता है. ऐसे में रागी का सेवन कई बीमारियों का एक साथ इलाज करेगा.

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हड्डियों का रखता है ख़्याल

आजकल सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली  समस्याओं में से एक है हड्डियों से जुड़ी बीमारी. पर रागी के पास इसका भी इलाज है. रागी में पाया जाने वाला फ़ास्फ़ोरस हड्डियों के विकास में सहायक होता है.

नुक़सान भी हैं

रागी का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन नुक़सानदायक होता है. ज़्यादा सेवन से शरीर में आक्ज़ैलिक एसिड बढ़ता है. इसके अलावा गुर्दे की पथरी वालों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

रखें ध्यान

रागी के छिलकों को हटाकर ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके छिलके को पचाने में दिक़्क़त होती है. इसके लिए रागी को पहले अच्छे से धो लें और उसकी परत यानी छिलके हटा दें.

– शिल्पी शर्मा

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