Dadi Ma Ka Khazana

वैसे तो लहसुन का उपयोग साग-सब्ज़ी में किया जाता है, पर इसमें अनेक औषधीय गुण भी होते हैं. यह एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर, विटामिंस और मिनरल्स से भरपूर होता है. रोज़ाना लहसुन का सेवन करने से अनेक बीमारियां दूर होती हैं. माना जाता है कि ठंड में लहसुन खाना बहुत ही फ़ायदेमंद है. इसे खाने से सर्दी-ज़ुकाम, कोलेस्ट्रॉल और पाचन की अनेक बीमारियां दूर रहती हैं. लहसुन की तासीर गरम होती है, इसलिए ठंड में लहसुन खाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है.

सर्दी-ज़ुकाम में होता है फ़ायदेमंद
लहसुन के सेवन से सर्दी और ज़ुकाम की परेशानियां दूर रहती हैं. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायररल गुण होते हैं, जो सर्दी और ज़ुकाम की बीमारी से बचाते हैं. लहसुन के सेवन से इम्यूनिटी बढ़ती है. बीमारी फैलानेवाले बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति भी बढ़ती है.

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हार्ट के लिए उपयोगी लहसुन का सेवन
ठंड में दिल संबंधी बीमारियों का ख़तरा अधिक रहता है, क्योंकि इस समय तला-भुना खाना अधिक खाया जाता है. साथ ही इस मौसम में फिजिकल एक्टीविटी भी कम हो जाती है. लहसुन का न्यूट्रीएंट्स कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट्स मिलता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं देता. लहसुन का मिनरल्स ब्लड प्रेशर को नहीं बढ़ने देता.

हड्डियों को मज़बूत करता है
एक उम्र के बाद हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं. लहसुन में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मज़बूत करने का काम करता है. लहसुन में एंटी इन्फ्लोमेटरी गुण होते हैं, इसलिए इसके सेवन से सूजन में आराम मिलता है और असहनीय दर्द भी दूर होता है.

अल्ज़ाइमर का ख़तरा कम करता है
लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करते हैं. लहसुन के सेवन से स्मरणशक्ति अधिक मज़बूत होती है और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी का ख़तरा कम होता है.

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थकान और कमज़ोरी को तेजी से दूर करता है
ठंड में अनेक बार ऐसा होता है कि बिस्तर से उठने का मन नहीं होता. हड्डियां और मसल्स अकड़ से जाते हैं. लहसुन खाने से शरीर को एनर्जी मिलती रहती है. इसके सेवन से थकान और कमज़ोरी दूर होती है.

– स्नेहा सिंह

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सर्दियों में हल्दी का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद होता है. हल्दी का इस्तेमाल मसाले, पूजा-पाठ के अलावा कई बीमारियों से बचाव मेंं होता रहा है. हल्दी में विटामिन सी, विटामिन बी 6, आयरन, कैल्शियम, डाइटरी फाइबर, सोडियम, प्रोटीन, जिंक, मैग्नीज व पोटैशियम होता है, जो सेहत को कई तरी़के से लाभ पहुंचाता है.

  • पाचन समस्या होने पर कच्ची हल्दी खाएं. डायरिया, अपच, गैस होने पर कच्ची हल्दी को पानी में उबालकर पीएं.
  • हल्दी का पानी लिवर में जानेवाले रक्त को डिटॉक्सीफाई करने में सक्षम महत्वपूर्ण एंजाइम का उत्पादन करके लिवर को हेल्दी बनाता है.
  • हल्दी का पानी वज़न घटाने के साथ-साथ अपच की समस्या को भी दूर करता है. एक ग्लास दूध में थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर सुबह रोज़ पीने से शरीर के फैट्स कम होते हैं और वज़न कम करने में मदद मिलती है.

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  • सर्दी-जुकाम होने पर रात को सोने से पहले एक ग्लास दूध में आधा टीस्पून हल्दी मिलाकर पीएं. हल्दीवाला दूध बनाने के लिए आधा कप गुनगुने दूध में 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर और चुटकीभर कालीमिर्च पाउडर मिक्स करें. मीठेपन के लिए शक्कर, गुड आदि मिला सकते हैं.
  • रोज़ाना हल्दी खाने से रक्त में पाए जानेवाले विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते है, जिससे रक्त का बहाव अच्छे से होता है. रक्त पतला होने पर धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है. इससे हृदय संबंधी समस्याएं नहीं होतीं.
  • पायरिया की समस्या होने पर हल्दी में सरसों का तेल मिक्स करके मसूड़ों पर मालिश करने से आराम मिलता है. मालिश के बाद गर्म पानी से कुल्ला करें.
  • यदि सिर में फोड़े-फुंसियां हों, तो हल्दी में त्रिफला, नीम और चंदन मिलाकर पीसकर पेस्ट बना लें और इसे सिर पर लगाकर मसाज करें.
  • .गले में खराश हो, तो आधा-आधा टीस्पून हल्दी, यवक्षार व चित्रक में एक टीस्पून शहद मिलाकर सेवन करें.
  • दाद, खुजली होने पर उस जगह पर हल्दी का लेप लगाएं.
  • चोट लगने पर तुरंत हल्दी लगाने से चोट से बहनेवाला खून रुक जाता है और घाव भी जल्दी ठीक होते हैं. साथ ही इससे चोट की जलन व दर्द भी कम होती है.

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  • हल्दी के सत को सेवन करने से आर्थराइटिस के दर्द, सूजन को कम करने में मदद मिलती है.
  • शरीर में किसी जगह पर दर्द या सूजन होने पर वहां हल्दी का लेप लगाने से आराम मिलता है.
  • शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने, संक्रमण से लड़ने, डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के साथ अच्छी नींद के लिए सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीना फ़ायदेमंद रहता है. साथ ही यह कई तरह की बीमारियों के जोख़िम को भी कम करता है.

कैंसर से बचाव
कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं. ये पुरुषों में होनेवाले प्रोस्टेट कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ उन्हें ख़त्म भी कर देते हैं.

सावधानियां

  • जिन लोगों को हल्दी से एलर्जी है, उन्हें पेटदर्द या डायरिया जैसी समस्या हो सकती है.
  • गर्भवती महिलाएं कच्ची हल्दी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें.
  • यदि किसी की सर्जरी होनेवाली है, तो कच्ची हल्दी का सेवन न करें.
  • एक दिन में एक टीस्पून हल्दी का सेवन कर सकते हैं.

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें- Dadi Ma Ka Khazana

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आलूबुखारा यानी प्लम (Benefits of plums) सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद है. इसमें फाइबर, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स व विटामिंस भरपूर मात्रा में होती है. इसका इस्तेमाल औषधि के रूप में भी किया जाता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • यदि कब्ज़ की शिकायत है, तो रात को सोने से पहले 5-6 सूखा आलूबुखारा पानी में भिगो दें. सुबह उठकर खाली पेट इन्हें खाएं और बचा हुआ पानी पी लें. इससे कब्ज़ की समस्या दूर हो जाएगी.
  • सूखे आलूबुखारे में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड डायबिटीज़ के ख़तरे को कम करने में सहायता करते हैं. स्वाद में मीठा होने के बावजूद सूखा आलूबुखारा ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.
  • आलूबुखारे में सोल्यूबल फाइबर होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसलिए कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए आलूबुखारा खाना फ़ायदेमंद है.
  • आलूबुखारे को लेकर किए गए एक शोध के अनुसार, आलूबुखारा में अधिक फिनोलेक्स कंपाउंड होते हैं. इसका जूस बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क कार्यप्रणाली में आनेवाली समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है.
  • आलूबुखारा हाई ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है, जिससे हृदय की सुरक्षा होती है. रिसर्च के मुताबिक़, आलूबुखारा का सेवन हृदय संबंधी बीमारियों से बचाव में मददगार है.

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  • क्या आप जानते हैं कि महिलाओं में होनेवाले ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में आलूबुखारा उपयोगी है. यदि मेनोपॉज़ के बाद स्त्रियां आलूबुखारे का नियमित सेवन करें, तो ऑस्टियोपोरोसिस से बच सकती हैं.
  • हर रोज़ 100 ग्राम सूखा आलूबुखारा खाने से हड्डियां मज़बूत होती हैं.
  • आलूबुखारा में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और विटामिन ई होता है, जो आंखों की रोशनी की समस्या दूर करने के साथ आंखों की सेहत का भी ख़्याल रखता है.
  • यदि आप हर दिन आलूबुखारा खाते हैं व इसका पल्प चेहरे पर लगाते हैं, तो चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है. त्वचा को सभी पोषक तत्व भी मिलते हैं, जिससे स्किन हेल्दी बनती है.
  • आलूबुखारे को ओटमील, सलाद, दही, स्मूदी व पुडिंग में मिलाकर खा सकते हैं. आलूबुखारा का उपयोग मफिन, ब्रेड और अन्य डेजर्ट में भी कर सकते हैं.

सेहत और स्वाद से भरपूर आलूबुखारे की खट्टी-मीठी चटनी ऐसे बनाएं
सामग्री
250 ग्राम कटा हुआ आलूबुखारा, 4 टेबलस्पून कटे हुए बादाम, आधा टीस्पून लाल मिर्च पाउडर, 20 ग्राम पिसा हुई अदरक, 1 टीस्पून नींबू का रस, नमक स्वादानुसार, कुछ पुदीने के पत्ते गार्निशिंग के लिए.
विधि
आलूबुखारे को अच्छी तरह से धोकर कुछ घंटे पानी में भिगोकर रखें. इसकी गुठली निकालकर टुकड़ों में काट लें. पैन में आलूबुखारा, नमक व अदरक डालकर गाढ़ा पेस्ट बनने तक पकाएं. फिर नींबू का रस डालकर अच्छे से मिक्स करें. ठंडा होने पर पुदीने के पत्तों से सजाकर सर्व करें.

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सुपर टिप
आलूबुखारे का नियमित सेवन अपच से राहत दिलाने में मदद करता है. साथ ही इसे खाने से पेट भी साफ़ रहता है. इसे सुबह या शाम के समय खाना अधिक लाभदायक रहता है.

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सर्दी-खांसी होना एक आम समस्या है. ऐसे में यहां दिए गए घरेलू नुस्ख़ों से न केवल सर्दी-खांसी से राहत मिलेगी, बल्कि कुछ ख़ास उपायों से इम्यून सिस्टम भी मज़बूत होगा.

घरेलू नुस्ख़े

  • आधा टीस्पून शहद में चुटकीभर इलायची पाउडर के साथ नींबू के रस की 3-4 बूंदें मिलाकर दिनभर में दो बार लेने से सर्दी-खांसी में काफ़ी आराम मिलता है.
  • सर्दी-ज़ुकाम में राहत के लिए अदरक, कालीमिर्च, तुलसी मिलाकर चाय पीएं.
  • अलसी के बीज को मोटा होने तक उबालें. फिर इसमें शहद व नींबू का रस मिलाकर पीने से खांसी दूर होती है.
  • सूखी खांसी में राहत के लिए अदरक के एक छोटे टुकड़े में नमक मिलाकर दांतों के नीचे दबा लें. जब अदरक का रस धीरे-धीरे मुंह में जाएगा, तो राहत मिलेगी. लगभग 7-8 मिनट बाद गरारा कर लें. इससे सूखी खांसी दूर होने के साथ गला खुलता है.

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  • अनार के जूस में पिपली पाउडर और थोड़ा-सा अदरक मिलाकर पीने से खांसी में फ़ायदा होता है.
  • यदि खांसी में बलगम आता हो, तो देसी घी में आधा टीस्पून कालीमिर्च मिलाकर खाएं.
  • खांसी से राहत पाने के लिए तुलसी के पत्तों का रस निकालकर पीएं.
  • बच्चों की खांसी में ऐलोवीरा के जूस में शहद मिलाकर देना फ़ायदेमंद रहता है.
  • हर रोज़ सुबह लहसुन की कली खाएं. इससे सर्दी-खांसी दूर होने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम भी मज़बूत होता है.
  • सर्दी-खांसी में गाजर का रस भी लाभदायक होता है, पर ध्यान रहे जूस में ब़र्फ न डालें.
  • सर्दी-खांसी होने पर गर्म पानी, सूप, चाय, विटामिन सी का अधिक सेवन करें.
  • खट्टे फलों को खाना खांसी-ज़ुकाम में लाभकारी हैै, क्योंकि इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसके अलावा यदि किसी एलर्जी के कारण खांसी हो रही है, तो संतरा, कीवी जैसे खट्टे फ्रूट्स खाना उपयोगी रहता है.
  • हर रोज़ दूध में हल्दी डालकर पीएं. इससे न केवल सर्दी-खांसी से दूर रहेंगे, बल्कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मज़बूत होगी.
  • सर्दी में राहत के लिए गुनगुने पानी में आधा टीस्पून नमक मिलाकर गरारे करें.
  • सर्दी-खांसी में स्टीम लेना फ़ायदेमंद
    रहता है.

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हेल्थ अलर्ट

  • मसालेदार भोजन से दूर रहें.
  • प्रोसेस्ड भोजन न खाएं.
  • यदि खांसी के साथ बलगम आता हो, तो दूध का सेवन बिल्कुल न करें.

रिसर्च
शोधों से पता चला है कि अनन्नास खाने से सर्दी दूर होने के अलावा पेट की समस्याएं दूर होती हैं और बलगम की परेशानी भी ख़त्म होती है. दरअसल, रिसर्च में पाया गया कि अनन्नास के तने और फल में ब्रोमलैन एंजाइम होता है, जो खांसी दूर करने में प्रभावशाली भूमिका निभाता है.

कीवी एक ऐसा फल है, जो पोषक तत्वों से भरपूर है. कीवी से न केवल इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है, बल्कि शरीर को ज़रूरी विटामिन्स भी मिलते हैं. कीवी में एंटी-इंफ्लेमेटरी, विटामिन बी6, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट्स, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, कॉपर, जिंक, बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. कीवी में सेरोटोनिन होता है, जो हमारे हैप्पी हार्मोन को बढ़ाता है. कीवी मानसिक तनाव, बैक्टीरिया व वायरस के हमले को भी दूर करती है. कीवी का इस्तेमाल करके आप ऐसी बीमारियों को मात दे सकते हैं, जो दवाई से भी ठीक नहीं हो पाती हैं. दरअसल, कीवी में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व कई तरह की बीमारियों से लड़ने में सहायता करते हैं. कीवी खाने से त्वचा चमकदार व झुर्रियां दूर होती हैं. यह जोड़ों व हड्डियों के दर्द को दूर करने में भी मददगार है. कीवी को सलाद, जूस, स्मूदी या फिर स्वीट डिश बनाकर भी खा सकते है.

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घरेलू नुस्ख़े

  • कीवी खाने से डायबिटीज़ कंट्रोल करने में मदद मिलती है और प्रतिदिन कीवी खाने से खून में ग्लूकोज़ की मात्रा कम हो जाती है.
  • यदि आपको रात में नींद न आने की समस्या रहती है, तो आप अपने भोजन में कीवी को ज़रूर शामिल करें. अच्छी नींद के लिए रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले कीवी का सेवन करें.
  • फाइबर से भरपूर कीवी पेट से जुड़ी तकलीफ़ों से राहत दिलाने में सहायक होती है. हर रोज़ खाली पेट कीवी खाने से पेट साफ़ रहता है, साथ ही इससे एसिडिटी और गैस की समस्या भी दूर होती है. कीवी में लैक्सेटिव पाया जाता है, जो कब्ज़ से भी छुटकारा दिलाने में मदद करता है.
  • कीवी में कार्डिओ प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज़ होने के कारण यह हृदय से जुड़ी बीमारियों से रक्षा करता है.
  • हर रोज़ एक कीवी खाने से मोतियाबिंद और आंखों की कई समस्याएं दूर रहती है. दरअसल, कीवी में पाए जाने वाले विटामिन्स व मिनरल्स से आंखों का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है. कीवी खाने से ल्यूटिन व ज़ेक्सैंथिन भी भरपूर मिलता है. रेटिना का केंद्र, मैक्युला, ल्यूटिन, बीटा-कैरोटीन और ज़ेक्सैन्थिन से बना होता है. वहीं विटामिन ए के लिए शरीर इन फाइटोकेमिकल्स का इस्तेमाल करता है, जो आंखों की अच्छी रोशनी के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है. इसलिए आंखों को हेल्दी रखने के लिए अपने डायट में कीवी फ्रूट को ज़रूर शामिल करें.
  • डेंगू बुखार में ब्लड प्लेटलेट्स काउंट तेजी से गिरने लगता है. ऐसे में कीवी के सेवन से प्लेटलेट्स को गिरने से रोकने में मदद मिलती है.
  • खाली पेट कीवी खाने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट बर्न जैसी समस्याओं की संभावना बहुत कम हो जाती है.

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  • अगर आप मोटापे से परेशान हैं, तो कीवी का सेवन ज़रूर करें. कीवी में पोटैशियम की मात्रा अधिक और कैलोरी बहुत कम होती है, इससे वज़न घटाने में भी सहायता मिलती है.
  • पेट की गर्मी व अल्सर जैसी बीमारियों को दूर करने में भी कीवी बहुत उपयोगी फल माना गया है.
  • कीवी में भरपूर आयरन के साथ फॉलिक एसिड भी होता है, जिससे गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह लाभदायक है.
  • अगर आप पिंपल्स से परेशान हैं, तो एक कीवी फल हर रोज़ खाएं. धीरे-धीरे आपके पिंपल्स ठीक होने लगेंगे.
  • यह शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है.

सुपर टिप
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए रोज़ किवी का सेवन करना चाहिए.

हेल्थ अलर्ट

  • अगर आपको किडनी की समस्या है, तो कीवी से आपको नुक़सान हो सकता है, क्योंकि इसमें पोटैशियम अधिक मात्रा में होता है.
  • प्रेग्नेंट महिलाएं इसका सेवन करने के पहले अपने डॉक्टर से सलाह-मशवरा ज़रूर कर लें.
  • यदि आप कीवी का अधिक सेवन करते हैं, तो इससे मुंह में जलन हो सकती है.

सूरन यानी जिमीकंद एक प्रकार का कंद मूल है, जिसमें कई ख़ास पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में सहायता करते हैं. सूरन में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर भरपूर मात्रा में होती है. इस कारण सूरन को खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती. यह भूख को कम करके वज़न घटाने में भी सहायक होता है. इस सब्ज़ी को स्लिमिंग फूड भी कहते हैं. सूरन में मौजूद पोटैशियम पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है. यदि इसे नियमित रुप से खाएं, तो कब्ज़ व कोलेस्ट्रॉल की समस्या नहीं होती. खांसी, बवासीर, वात, सांस संबंधी रोग, कृमि की बीमारी के उपचार में सूरन का उपयोग किया जाता है. जिन्हें लीवर में समस्या है, उन्हें भी डॉक्टर सूरन खाने की सलाह देते हैं.

  • बवासीर की समस्या में सूरन को टुकड़ों में काटकर भाप में पका लें. फिर तिल के तेल में सब्ज़ी बनाकर खाएं और उसके ऊपर से छाछ पी लें. इससे हर तरह की बवासीर में लाभ होता है. इसे महीनेभर तक करें. अगर खूनी बवासीर हो, तो सूरन की सब्ज़ी के साथ इमली की पत्तियां व चावल लेने से फ़ायदा होता हैं.
  • मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) में महिलाओं को अचानक गर्मी लगना, नींद न आना, अजीब सा व्यवहार जैसे लक्षण दिखते हैं. अध्ययन के अनुसार, सूरन के रस के इस्तेमाल से मेनोपॉज के लक्षण में काफ़ी हद तक राहत मिल सकती है.

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  • सूरन ब्लड सर्कुलेशन सही करता है. इसमें मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी के कारण यह गठिया व अस्थमा के मरीज़ों के लिए भी अच्छा होता है. इसमें पाया जानेवाला कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में ब्लड के फ्लो को दुरुस्त करता है.
  • सूरन में प्राकृतिक रूप से एलेंटॉइन केमिकल कंपाउंड होता है. एक शोध में पाया गया कि एलेंटॉइन में एंटी डायबिटिक प्रभाव होता है, लिपिड प्रोफाइल को सुधारने के साथ ब्लड शुगर को नियंत्रित करके डायबिटीज़ से बचाव करता है.
  • सूरन लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स की श्रेणी में आता है और इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, इस कारण डायबिटीज़ के मरीज़ इसे अपने भोजन में ज़रूर शामिल करें.
  • सूरन में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है. ये अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने के साथ ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं.
  • जिमीकंद में विटामिन बी6 पाया जाता है, जिससे बाल गिरने की समस्या दूर होती है और बाल हेल्दी व मज़बूत भी होते हैं. साथ ही सूरन चिड़चिड़ेपन और चिंता जैसी समस्या को भी कम करता है.
  • सूरन में दर्द कम करने वाले और सूजन रोधी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द को कम करते हैं.
  • जिमीकंद को एस्ट्रोजन बढ़ाने वाला भोजन भी कहते हैं. ये सब्ज़ी विटामिन बी6 व एंटीस्पास्मोडिक गुण पीएमएस यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों को रोकने के साथ-साथ ठीक करने में भी सहायक है.

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रिसर्च
एक रिसर्च के अनुसार, सूरन में एंटीऑक्सीडेंट रक्षा प्रणाली में वृद्धि करके व इंफ्लेमेशन प्रक्रिया को कम कर कोलन कैंसर से बचा जा सकता है.

सावधानी

  • जिन्हें त्वचा संबंधी समस्याएं, ह्रदयरोग, रक्तस्राव, कुष्ठ रोग आदि है, वे सूरन का सेवन न करें.
  • यदि सूरन खाने से मुंह आना या खुजली हो, तो नींबू या इमली का सेवन करें.
  • अधिक मात्रा में सूरन के सेवन से उल्टी हो सकती है.
  • साइनस के संक्रमण से पीड़ित मरीज़ों को जिमीकंद खाने से बचना चाहिए.

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गर्मी के दिनों में स्वाद और सेहत दोनों के लिए ही कच्चे आम की चटनी और पना फ़ायदेमंद होता है. कच्चे आम खाने से न केवल पेट संबंधी समस्याएं दूर रहती हैं, बल्कि गर्मियों में होनेवाली लू, बदहजमी, एसिडिटी से भी आराम मिलता है. कच्चे आम में विटामिन ए, सी, ई प्रचुर मात्रा में होता है. साथ ही कैल्शियम, फॉस्फोरस, फाइबर जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. यह इम्यून सिस्टम व लीवर को मज़बूत करने में सहायक होता है. शुगरवालों के लिए कच्चा आम खाना फ़ायदेमंद है, क्योंकि यह शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है. कच्चे आम में जेंथोन एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो यूवी किरणों से हमारे शरीर का बचाव करता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • गर्मियों के दिनों में अधिक गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण जी मितलाने की परेशानी भी बहुत होती है. ऐसे में कच्चे आम को काटकर काला नमक छिड़ककर खाने से तुरंत आराम मिलता है.
  • मिनरल्स और विटामिन सी से भरपूर कच्चे आम को चुटकीभर नमक के साथ खाने से गर्मियों में होनेवाली शारीरिक परेशानी और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलती है. ख़ासकर यह डिहाइड्रेशन से भी बचाता है.
  • यदि लू लग जाए, तो उबले हुए हरे आम के रस में शक्कर और भुना हुआ जीरा मिलाकर पना बनाकर पीएं. साथ ही इसे पीने से सनस्ट्रोक और अत्यधिक गर्मी से होनेवाले स्किन प्रॉब्लम्स में भी राहत मिलती है.
  • पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में कच्चा आम काफ़ी फ़ायदेमंद है. यह हमारे शरीर में पानी की कमी को दूर करता है. इसमें मौजूद पेक्टिन की से कब्ज़, एसिडिटी, डायरिया, दस्त जैसी पेट की समस्याओं के इलाज में सहायता मिलती है.
  • डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए कच्चा आम बेहद उपयोगी है. इससे शरीर में शुगर लेवल कम होता है और आयरन की कमी भी दूर होती है. यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तो आपको अपने भोजन में कच्चा आम ज़रूर शामिल करना चाहिए.
  • गर्मियों के दिनों में अधिक पसीने के कारण हमारे शरीर में आयरन, सोडियम क्लोराइड मिनरल्स की कमी हो जाती है और ऐसे में कच्चे आम का जूस पीना लाभदायक होता है.
  • कच्चा आम खाने से सांसों की बदबू की समस्या दूर होती है.
  • एंटीऑक्सिडेंट्स व विटामिन सी से भरपूर कच्चे आम को नमक के साथ खाने से मसूड़े और दांत मज़बूत होते हैं.
  • कच्चे आम का नियमित रूप से सेवन करते हैं, तो बालों को काला बनाए रखने और त्वचा को बेदाग़ व आकर्षक बनाए रखने में भी मदद मिलती है.
  • उल्टी होने पर कच्चे आम को काले नमक के साथ खाने से थोड़ी देर में ही आराम मिल जाता है.
  • कच्चे आम को खाने से एनीमिया, हीमोफीलिया, ब्लड क्लॉट्स जैसे रक्त संबंधी विकारों को कंट्रोल करने में सहायता मिलती है.
  • विटामिन सी की कमी के कारण मसूड़ों की बीमारी स्कर्वी में कच्चा आम उपयोगी होता है. यह इस बीमारी को ठीक करने में मदद करता है.
  • एक आम इंसान को 100 से 150 ग्राम तक कच्चा आम खाना चाहिए, जबकि डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के मरीज़ों को 10 ग्राम खाना पर्याप्त है.

सुपर टिप
यदि आपका वज़न अधिक बढ़ रहा है, तो हर रोज़ कच्चे आम खाने से लाभ होगा.

सावधानी
यूं तो कच्चा आम सभी को पसंद आता है, लेकिन इसे पर्याप्त मात्रा में खाना ज़रूरी है, वरना इसके अधिक सेवन से पेटदर्द, टॉन्सिल, दस्त जैसी परेशानी हो सकती है. ध्यान रहे, इसे खाने के तुरंत बाद कभी भी ठंडा पानी ना पीएं.

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अनन्नास का स्वाद अन्य फलों से थोड़ा अलग होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक औषधि के रूप में भी काफ़ी फ़ायदेमंद है. अनन्नास के सेवन से कई बीमारियों को ठीक किया जा सकता है. अनन्नास में ब्रोमेलैन एंजाइम होता है, जो पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायता करता है. इसमें अधिक मात्रा में मौजूद फाइबर शरीर में कब्ज़ की समस्या को दूर करती है. यह आंतों को भी स्वस्थ रखता है. अनन्नास शक्तिवर्धक, भूख को बढ़ाने के साथ रक्त-पित्त विकार की समस्या से निजात दिलाता है. यह बुखार, पेटदर्द, एसिडिटी, रक्त स्त्राव से जुड़ी बीमारी, शारीरिक कमज़ोरी आदि को दूर करता है.

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घरेलू नुस्ख़े

  • एसिडिटी की परेशानी हो, तो पके हुए अनन्नास के जूस में भुनी हुई हींग, सेंधा नमक और अदरक का रस मिलाकर रोज़ सुबह और शाम पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है.
  • अनन्नास से डायबिटीज़ को भी कंट्रोल किया जा सकता है. 100 मिलीग्राम अनन्नास के रस में 10-10 ग्राम तिल, आंवला, हरड़, बहेड़ा, गोखरू और जामुन के बीज मिलाएं. इसके सूखने पर पाउडर बनाकर रख लें. हर रोज़ एक टीस्पून पाउडर का सेवन करें.
  • 10 मिलीग्राम पके हुए अनन्नास के रस में भुनी हुई हींग और अदरक का रस मिलाकर रोज़ पीने से पेटदर्द में राहत मिलती है.
  • दस्त की समस्या होने पर अनन्नास के पत्तों का काढ़ा बनाकर इसमें बहेड़ा और छोटी हरड़ का चूर्ण मिलाकर लें.


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  • अनन्नास के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री को मिलाकर सेवन करने से सांसों से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है.
  • भोजन के बाद यदि पेट फूल जाए और बैचेनी होने लगे, तो 50-100 मिलीग्राम अनन्नास का जूस पीएं.
  • खांसी से परेशान हैं, तो 100 मिलीग्राम पके अनन्नास के रस में 2-2 ग्राम पिप्पली का जड़, सोंठ, बहेड़े का चूर्ण, भुना हुआ सुहागा और शहद मिलाकर लें.
  • बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या होने पर पके हुए अनन्नास के रस में अजवायन, छुहारा, खुरासानी और वायविडंग का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाएं. इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में चटाने से पेट में कीड़े की समस्या ख़त्म हो जाती है.
  • बुखार होने पर अनन्नास के जूस में शहद मिलाकर पीने से बुखार ठीक होता है.


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  • पीरियड्स यानी माहवारी की समस्या में 50 मिलीग्राम कच्चे अनन्नास के रस में 1-1 मिलीग्राम पीपल की छाल का पाउडर और गुड मिलाकर लें.
  • शरीर में सूजन की समस्या हो, तो अनन्नास के रस का लेप लगाने से सूजन ठीक हो जाती है. इसके अलावा अनन्नास के पत्तों पर एरंड का तेल लगाकर थोड़ गर्म करके सूजनवाले हिस्से पर बांधने से भी सूजन दूर होती है.
  • यूरिन से संबंधित समस्या हो, तो अनन्नास के जूस में गुड़ मिलाकर पीएं.

सुपर टिप
पके हुए अनन्नास के टुकड़े में सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर मिलाकर खाने से अपच की समस्या दूर होती है.

Photo Courtesy: Freepik

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अंजीर स्वास्थ्यवर्धक बहुपयोगी फल है. इसमें आयरन, विटामिन, फाइबर, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरस पाया जाता है. यह वज़न घटाने में भी मदद करता है. अंजीर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मज़बूत करने में सहायक होता है. गर्भवती महिलाओं में लौह की कमी को भी पूरा करता है अंजीर. हाइपरटेंशन के मरीज़ों के लिए अंजीर बहुत फ़ायदेमंद है क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में पोटैशियम व कम मात्रा में सोडियम होता है. इसके ये पोषक गुण इसको सर्वोत्तम बनाते हैं. अंजीर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जिससे कब्ज़ की समस्या दूर करने में मदद मिलती है. अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के अनुसार, अंजीर डायबिटीज़ को भी कंट्रोल करता है. इसकी पत्तियों का सेवन शुगर के मरीज़ों की इन्सुलिन के इंजेक्शन पर निर्भरता को कम करता है. अंजीर खाने से डायरिया से भी बचा जा सकता है. यह पाचन शक्ति में सुधार कर पाचन से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • एक-दो पके हुए अंजीर दूध में उबालकर रात को सोने से पहले खाएं और ऊपर से दूध पी लें. इससे कब्ज़ में फ़ायदा होता है या फिर एक अंजीर को रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें. सुबह इसे अच्‍छी तरह से चबाकर खाएं और इसका पानी पी लें. कुछ ही दिनों में कब्ज़ की समस्‍या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी.
  • सिरदर्द की समस्या होने पर सिरके या पानी में अंजीर के पेड़ की छाल की भस्म बनाकर सिर पर लेप करने से आराम मिलता है.
  • सर्दी-ज़ुकाम होने पर पानी में पांच अंजीर उबाल लें और इस पानी को छानकर गर्म-गर्म सुबह-शाम पीएं. इससे ज़ुकाम में लाभ होता है.
  • कमरदर्द में भी अंजीर का उपयोग लाभदायक होता है. अंजीर की छाल, धनिया और सोंठ बराबर मात्रा में लेकर कूटकर रात को पानी में भिगो दें. सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें. इससे कमरदर्द में आराम मिलता है.
  • गले की सूजन व जलन होने पर अंजीर के पेस्ट को गर्म पानी के साथ घोलकर गले पर लगाएं. यह दर्द को कम करने के साथ गले को राहत देता है.


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  • रक्त संबंधी विकार और वृद्धि के लिए पाव लीटर दूध में आठ अंजीर व दस मुनक्के उबालकर खाएं और दूध को पी लें. इससे रक्त में वृद्धि होने के साथ रक्त संबंधी विकार भी दूर होते हैं. दो अंजीर को बीच से आधा काटकर एक ग्लास पानी में रातभर भिगोकर रख दें. सुबह अंजीर खा लें व उसका पानी पी लें. इससे रक्तसंचार बढ़ता है.
  • यदि बवासीर की समस्या हो, तो 3-4 सूखे अंजीर को शाम के समय पानी में भिगोकर रख दें. सुबह अंजीर को मसलकर खाली पेट खा लें. ऐसे कई दिनों तक हर रोज़ करने से बवासीर की तकलीफ़ दूर हो जाएगी.
  • यौन शक्ति बढ़ाने के लिए 2-3 अंजीर रातभर दूध में भिगो दें और सुबह खा लें.
  • अस्थमा के मरीज़ों के लिए अंजीर काफ़ी फ़ायदेमंद है. 2-3 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में उबालकर खाएं.
  • सूखे अंजीर के टुकड़े और छिले हुए बादाम को गर्म पानी में उबालें. इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर सात दिन तक गाय के घी में डालकर रखे. रोज़ सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें. इससे शरीर में ताक़त बढ़ती है.
  • दो अंजीर को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने से और ऊपर से उसी पानी को पीने से पेट साफ़ होता है.

सुपर टिप
नियमित रूप से अंजीर का सेवन करने पर कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.

रिसर्च
अध्ययनों के अनुसार, हर रोज़ अंजीर का सेवन ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है. अंजीर में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायता करते हैं.

सावधानी
इस बात का भी ध्यान रखें कि अंजीर के अधिक सेवन से वज़न बढ़ भी सकता है, ख़ासकर यदि इसे दूध के साथ लेते हैं.


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ब्राह्मी को विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार ब्राह्मी पित्तनाशक, बुद्धिवर्धक, ठंडक देने के साथ शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है. ब्राह्मी के तने व पत्तियां मुलामय व गूदेदार होते है. असली ब्राह्मी की एक टहनी में कई सारे पत्ते होते हैं और इसके फूल सफ़ेद‌ व छोटे-छोटे होते हैं.
त्वचा संबंधी बीमारियों में ब्राह्मी फ़ायदेमंद है. यह खून को साफ़ करने के साथ कफ़ को भी दूर करता है. बालों को मज़बूत व घना बनाने के साथ रूसी, दोमुंहे बाल, गंजापन और बालों को झड़ना भी रोकता है. ब्राह्मी वटी स्वाद में कसैली, तीखी व ठंडी तासीरवाली बूटी है. यह त्रिदोष का नाश करने, आयु बढ़ाने, प्रसूति महिलाओं के स्तनों के दूध को बढ़ाने व मस्तिष्क को शांति देनेवाली है. ब्राह्मी जन्मजात तुतलाहट की बीमारी में भी फ़ायदेमंद है. ब्राह्मी तेल आयुर्वेदिक तेल है, जिसे तिल के तेल या नारियल के तेल के साथ इस्तेमाल करना अधिक लाभदायक है. दिल की कमज़ोरी में इसका इस्तेमाल फ़ायदेमंद है. डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी ब्राह्मी उपयोगी है. यह शुगर के लेवल को नियंत्रित करती है. ब्राह्मी का नियमित रूप से उपयोग करने से इम्युनिटी मज़बूत होती है.

घरेलू नुस्ख़े

• सिरदर्द, पीठदर्द, मांसपेशियों में दर्द होने पर ब्राह्मी तेल से हल्का मसाज करने से राहत मिलती है.
• ब्राह्मी के पत्‍ते के रस को पेट्रोल के साथ मिलाकर लगाने से गठिया की समस्या दूर होती है.
• मानसिक व शारीरिक ताक़त बढाने के लिए १०-१० ग्राम ब्राह्मी, सौंठ, खसखस, सूखा साबुत धनिया और गोखरू, ३ ग्राम बादामगिरी, ५-५ ग्राम त्रिफला, शतावर और अश्वगंधा को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें. ३-३ ग्राम चूर्ण को सुबह-शाम दूध से लेें. इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है. साथ ही चश्मे के नंबर में भी कमी आती है.
• क्या आप जानते हैं कि ब्राह्मी तनाव में भी राहत देती है. इसके लिए ५-५ ग्राम ब्राह्मी व शंखपुष्पी, 6 ग्राम बादामगिरी, 3 ग्राम इलायची के दाने, 6 ग्राम खसखस सभी को मिलाकर पीस लें. इसे ठंडई की तरह पीने से तनाव में लाभ होता है.
• इसके अलावा चिंता और तनाव होने पर ब्राह्मी के पौधे की पत्तियों को भी चबाया जा सकता है.


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• ब्राह्मी की‌ १-१ टेबलेट सुबह-शाम दूध के साथ लेने से दिमाग़ मज़बूत होता है.
• नींद न आने की परेशानी में ब्राह्मी के ५ ग्राम चूर्ण को आधा लीटर दूध में उबालकर व छानकर ठंडा करें. इसे पीने से अनिद्रा और पुरानी नींद न आने की समस्या भी दूर होती है.
• ब्राह्मी के सेवन से मिर्गी में भी मदद मिलती है और यह बीमारी ठीक होती है.
• ब्राह्मी के रस एंटीऑक्सीडेंट और एडेप्टोजेनिक होते हैं, जिसके प्रभाव से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी सांस संबंधी बीमारियां ठीक होती हैं.
• यह शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी को निकालकर वॉटर रिटेंशन, किडनी, स्टोन, अन्य बीमारियों से छुटकारा दिलाने में भी कारगर साबित होती है.
• सूजन और झुर्रियों को दूर करने में भी ब्राह्मी फ़ायदेमंद है. ब्राह्मी के चूर्ण को पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाएं. इससे चेहरा चमक उठता है और सूजन भी कम होती है.
• बालों के गिरने की समस्या हो, तो ब्राह्मी, आंवला, भृंजराज को एक साथ पीसकर मिश्रण बना लें. इस मिश्रण को रातभर लोहे की कढ़ाई में रखें. सुबह इस पेस्ट को बालों में लगाकर 10-15 मिनट तक रखें. हफ़्ते में दो बार ऐसा करने से बालों का गिरना बंद हो जाता है.
• गर्दन और छाती पर ब्राह्मी का पेस्ट लगाने से निमोनिया से बचा जा सकता है.
• ब्राह्मी में रक्‍त शुद्ध करने के गुण पाए जाते हैं, जिससे स्कीन संबंधी बीमारियां ठीक करने में मदद मिलती है.
• ब्राह्मी का चाय बेहद फ़ायदेमंद होता है. ब्राह्मी चाय‌ बनाने के लिए ब्राह्मी के पांच से सात पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं.

रिसर्च
रिसर्च से यह साबित हुआ है कि ब्राह्मी कैंसर के ख़तरे को भी कम करता है. ब्राह्मी कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद करता है. एक अन्य अध्ययन के अनुसार इस जड़ी-बूटी में ऐसे एंटी कैंसर गुण है, जो ब्रेस्ट कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है.


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सुपर टीप
मानसिक बीमारियों में ब्राह्मी के पत्तों के चूर्ण का सेवन लाभदायक होता है.

सर्दियों में ठंड के कारण खाने-पीने की इच्छा पूरी तरह से बदल जाती है. इस मौसम में लोग गर्म और मौसमी चीज़ों पर ज़्यादा ध्‍यान देते हैं. विंटर में एक और चीज़ है, जो लोग खाना पसंद करते हैं, वो है गजक. सर्दियों में हर कोई गजक को बड़े चाव से खाना पसंद करता है. स्वाद और मिठास के अलावा गजक में सेहत के कई राज़ भी छिपे हुए हैं. सर्दियों में गजक के सेवन से कई तरह की समस्याओं से निजात मिलती है. आइए जानते हैं इससे होनेवाले फ़ायदों के बारे में.

गजक के तिल और गुड़ में मौजूद कैल्शियम हड्डियां मज़बूत करती हैं. गुड़ में कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है. इसे खाने से हड्डियां मज़बूत होती हैं. गुड़ आपके शरीर को साफ़ करने में मदद करता है, जिससे आपकी त्वचा पर भी निखार आता है. डॉक्टर्स भी सर्दी में एक बार खाने के बाद बीस ग्राम गुड़ की गजक नियमित खाने की सलाह देते हैं.

गजक आर्थराइटिस जैसी बीमारी से भी बचाता है. इसका कारण यह है कि इसमें तिल और मूंगफली पर्याप्त मात्रा मे होती है.

गजक मे तिल होता है और इसमें सीसामोलिन पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करता है.

गजक का तिल, मूंगफली और गुड़ लिवर को हेल्दी और फिट रखता है.


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फाइबर से भरपूर गजक पेट की तकलीफ़ दूर करते हैं.

गजक में जिंक, सेलेनियम जैसे मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बुढ़ापे की प्रोसेस को स्लो करने में सहायक हैं.

आयरन का सबसे शानदार स्रोत है गजक. शरीर में लौह तत्व बनता है. इसके सेवन से एनीमिया की बीमारी भी दूर होती है.

गजक में मौजूद तिल, मूंगफली, मेवे, इलायची आदि सर्द मौसम में शरीर को गर्म रखते हैं.

तिल और गुड़ शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर सर्दी-ज़ुकाम जैसी बीमारियों से बचाता है.

गजक खाने से कमज़ोरी दूर होती है, शरीर में ऊर्जा पैदा होती है और एनर्जी लेवल भी बढ़ जाता है.

– पूनम पांडे

Gajak


यह भी पढ़ें: सामान्य दर्द से लेकर कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज़ जैसी बीमारियों में भी फ़ायदेमंद है अदरक… (11 Health Benefits of Ginger)

Photo Courtesy: Freepik

 Jaggery

औषध‍िय गुणों से भरपूर गुड़ एक सुपर फूड है, जो अच्‍छी सेहत के लिए ज़रूरी है. इसके न‍ियमित इस्‍तेमाल से शरीर निरोगी और स्‍वस्‍थ बना रहता है. गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्‍शियम और फास्‍फोरस पाया जाता है. यह दोनों तत्‍व हड्डियों को मज़बूती देने में सहायक हैं. इससे शरीर मज़बूत व एक्टिव भी रहता है. गुड़ स्‍वाद का ही नहीं बल्‍कि सेहत का भी ख़ज़ाना है. इसके फ़ायदों के बारे में लोग कम ही जानते हैं. गुड़ का इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा कड़वी दवा को मीठा करने और कई बीमारियों में दवा के तौर पर भी किया जाता था. अधिकतर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि गुड़ सालभर खाया जा सकता है और शरीर को इससे भरपूर लाभ भी मिलते हैं.

घरेलू नुस्ख़े

• खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है.
• जोड़ों में दर्द की समस्या हो, तो गुड़ का अदरक के साथ सेवन लाभदायक है. हर रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
• अस्थमा के इलाज में गुड़ फ़ायदेमंद है. गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से अस्थमा की तकलीफ़ नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी भी बनी रहती है.
• पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर खाने से लाभ मिलता है.
• काफ़ी थकावट है, तो गुड़ को दूध के साथ लें. यदि आपको दूध नहीं पसंद, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा-सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से शरीर की थकान दूर होती है.


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• पेट में गैस बनने की समस्या होने पर हर रोज़ एक ग्लास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से पेट में ठंडक होती है और गैस भी नहीं बनती.
• गला बैठ जाने और आवाज़ जकड़ जाने पर पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है व आवाज़ भी खुल जाती है.
• कान में दर्द होने पर गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होनेवाले दर्द की समस्या ये निजात मिलती है.
• गुड़ सर्दी-ज़ुकाम भगाने में भी बेहद असरदार है. काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-ज़ुकाम में आराम मिलता है.
• खांसी की श‍िकायत है, तो गुड़ खाएं. गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश में राहत मिलती है.

Health Benefits Of Jaggery


• सांस संबंधी बीमारियों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
• शारीरिक कमज़ोरी में दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताक़त आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है.

सुपर टिप
गुड़ को अदरक के साथ हल्का गर्म कर खाने से गले की जलन दूर होती है. 

– अभिषेक गुप्ता


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Photo Courtesy: Freepik

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