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सौंफ खाने के 19 लाजवाब फ़ायदे (19 Benefits Of Fennel Seeds Or Saunf)

बरसों से सौंफ (Fennel) का इस्तेमाल मुखशुद्धि यानी माउथफ्रेशनर के साथ-साथ औषधि के रूप में होता रहा है. इसके अलावा यह घर-घर में मुखवास के रूप में भी मशहूर है. सूखी सौंफ (Dry Fennel) पाचनतंत्र पर प्रभावकारी असर करती है. सौंफ से अपच, कब्ज़ से लेकर पीरियड्स की समस्या तक में आराम मिलता है.

Benefits Of Fennel Seeds

* सौंफ को भूनकर उसमें आवश्यकतानुसार सेंधा नमक व नींबू का रस मिलाकर एक बॉटल में रख दें. इसका इस्तेमाल मुखवास के तौर पर करें. भोजन करने के बाद इसका सेवन करने से मुखशुद्धि होती है और खाना आसानी से पचता है.

* कब्ज़ की शिकायत हो, तो रात में सोते समय गुनगुने पानी के साथ सौंफ का चूर्ण लें.

* गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता है.

* पेटदर्द में भुनी हुई सौंफ चबाने से तुरंत आराम मिलता है.

* हाथ-पांव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री मिला लें. भोजन के बाद एक टीस्पून इस चूर्ण को लेने से कुछ ही दिनों में आराम मिल जाता है.

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* सौंफ का काढ़ा बनाकर पीने से पित्त बुख़ार से तुरंत छुटकारा मिलता है.

* आंखों की जलन व थकान को दूर करने के लिए सौंफ के पत्ते का रस या फिर सौंफ का पानी पीना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है.

* सौंफ के रस में थोड़ी-सी हींग मिलाकर पीने से पेशाब की समस्या, रुक-रुककर पेशाब होना आदि परेशानी दूर होती है.

* पेचिश की समस्या होने पर पानी में सौंफ मिलाकर उबाल लें. फिर उसमें थोड़ा-सा नमक मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार पीएं.

* यदि दांत निकलते समय दर्द के कारण बच्चा बहुत रोता हो, तो गाय के दूध में थोड़ी-सी सौंफ मिलाकर उबाल लें. हर रोज़ 1-1 चम्मच दिनभर में तीन-चार बार बच्चे को पिलाएं.

* भोजन करने के आधे घंटे बाद एक चम्मच सौंफ खाने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है.

* यदि आप सिगरेट-बीड़ी पीने की आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सौंफ को घी में भूनकर बॉटल में भरकर रख लें. जब भी सिगरेट पीने की तलब हो, तब आधा चम्मच सौंफ का सेवन कर लें.

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* एक-एक चम्मच सौंफ व धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें. इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर दिनभर में आधा-आधा चम्मच तीन बार पानी के साथ लेने से माइग्रेन (आधासीसी) की समस्या दूर होती है.

* सौंफ का रस और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से हिचकी दूर होती है.

* आधे लीटर पानी में एक टीस्पून सौंफ को डालकर उबाल लें. जब पानी एक चौथाई रह जाए, तब उसमें 2 टीस्पून घी और एक कप गाय का दूध मिलाकर पीएं. इससे बहरेपन की समस्या दूर होती है.

* सौंफ रक्त को शुद्ध करनेवाली एवं चर्मरोग नाशक है. प्रतिदिन सुबह-शाम दो टीस्पून सौंफ बिना मीठा यानी शक्कर मिलाए, वैसे ही चबा-चबाकर नियमित रूप से कुछ दिनों तक खाने से रक्त शुद्ध होता है.

* गर्भावस्था के दौरान प्रतिदिन भोजन के बाद सौंफ चबाने से संतान गौर वर्ण की होती है.

* 500 ग्राम सौंफ को बारीक़ कूटकर आधे लीटर पानी में भिगो दें. फिर उबालकर छान लें. इसमें पाव किलो शक्कर डालकर दोबारा उबालकर गाढ़ा शर्बत बना लें. जिन स्त्रियों के शरीर की प्रकृति गर्म हो, उनके लिए सौंफ का यह शर्बत रामबाण के समान है. सौंफ के शर्बत का सेवन करने से मां के स्तन में दूध की वृद्धि भी होती है.

सुपर टिप

सौंफ के पानी का काढ़ा बनाकर उसमें दूध मिलाकर पीने से अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या दूर होती है.

– ऊषा गुप्ता

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दर्द से यूं पाएं छुटकारा (How To Get Relief From Different Types Of Pain)

How To Get Relief From Pain

अक्सर हम कई तरह के दर्द (Pain) से परेशान रहते हैं. जहां चोट या अन्य कारणों से उत्पन्न दर्दवाली त्वचा, मांसपेशी व तंत्रिकाओं की क्षति में उपचार, दवाइयों आदि से आराम मिलता है, वहीं मांसपेशियों में उत्पन्न दर्द में मालिश और सेंक से भी लाभ होता है, क्योंकि इससे वात दोष का शमन होता है.

सेंक के लिए सादा गर्म पानी, नमक, कपूर या तारपीन के तेल मिले गर्म पानी से स्नान करना फ़ायदेमंद रहता है. यह सेंक दवा या मरहम लगाने के बाद ही करना चाहिए. सेंक करने से रक्तवाहिनियां फैल जाती हैं और प्रकुपित तंत्रिकाएं शांत हो जाती हैं. इस प्रकार हमारे शरीर का दर्द शांत हो जाता है. इसके अलावा यहां पर हम कुछ उपयोगी घरेलू नुस्ख़े दे रहे हैं, जिनके प्रयोग से तमाम तरह के दर्द से राहत मिलती है.

* घुटनों, हाथों की उंगलियों या बांहों के जोड़ों में टीस भरा दर्द उठता हो और कोई भी काम करने में या वज़न उठाने पर जोड़ों में दर्द होता हो, तो दिन में चार-पांच बार टमाटर का सेवन करते रहें या टमाटर का एक ग्लास रस सुबह-शाम लें. इससे कुछ दिनों में ही आपको आश्‍चर्यजनक रूप से लाभ होगा.

* चूना व शहद मिलाकर लेप करने से पसली के दर्द से राहत मिलती है या फिर सरसों को पानी में पीसकर गरम करके इसका लेप दर्दवाले स्थान पर बार-बार लगाएं.

* इसके अलावा एक ग्लास पानी में दो चम्मच जीरा डालकर गरम करें और उस गरम पानी में तौलिया भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ें और उसकी भाप से सेंक करें. कुछ ही घंटों में आराम मिल जाएगा.

* 100 ग्राम मेथीदाना हल्का-सा भूनें. फिर इसे हल्का-सा कूटकर उसमें चौथाई भाग काला नमक मिला लें. सुबह-शाम दो चम्मच गरम पानी के साथ इसकी फंकी लें. इस प्रयोग को निरंतर 15 दिनों तक करने से कैसा भी असहय दर्द हो, दूर हो जाएगा.

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* शरीर के किसी अंग में दर्द की टीस उठती हो, तो आप सुबह-शाम पीसे हुए आंवले का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ फांक लें. फिर कुछ देर बाद पिसी हुई इलायची दूध में डालकर पीएं. इस प्रयोग से अंगों में चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहेगी और शरीर के किसी भी अंग में दर्द की टीस नहीं उठेगी.

* लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द जाता रहेगा. किंतु इसे जल्द हटा लेना चाहिए, नहीं तो फफोले पड़ने का डर रहता है.

* राई यानी सरसों का लेप करने से हर प्रकार का दर्द मिट जाता है.

* गठिया के दर्द में एरंडी का छिला हुआ बीज पहले दिन एक, दूसरे दिन दो, इस प्रकार सात बीज तक खाएं. फिर प्रतिदिन एक-एक कम करके एक बीज पर ले आएं. इससे गठिया का दर्द हमेशा के लिए गायब हो जाएगा.

* जोड़ों के दर्द में अजवायन को पानी में डालकर पका लें और उस पानी की भाप दर्दवाले स्थान पर दें. देखते ही देखते दर्द दूर हो जाएगा.

* लहसुन की दो कलियां कुचलकर तिल के तेल में डालकर तेल गर्म करें और उससे जोड़ों पर मालिश करें. इससे भी बहुत लाभ होता है.

पथ्य-अपथ्यः जोड़ों के दर्द से बचने व इससे पीड़ित मरीज़ को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए रोग उत्पादक कारणों को टालना चाहिए. खट्टा, तीखा, ठंडा, रूखा भोजन नहीं करना चाहिए. चर्बी बढ़ानेवाले खाद्य पदार्थों से परहेज़ करना चाहिए. पौष्टिक और पचने में आसान चीज़ों को आहार में शामिल करें. शारीरिक श्रमवाले कामों से बचना चाहिए. साथ ही जागरण व मानसिक तनावों से भी दूर रहना चाहिए.

सुपर टिप

कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल से मालिश करने से हर प्रकार के दर्द से छुटकारा मिलता है.

– मूरत पन्नालाल गुप्ता

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हर बीमारी का इलाज नीम (Cure Your Ailments With Neem)

Neem Benefits

सिर से लेकर पैर तक के रोगों की इलाज की दवा है नीम. इसके साथ ही यह घर में कीड़े-मकोड़ों से भी रक्षा करता है. नीम के कुछ असरदार उपाय इस प्रकार हैं.

* नीम के पत्ते डालकर उबाले गए पानी से स्नान करने से चर्मरोग, फोड़े-फुंसी, खाज-खुजली मिट जाती है.

* पेट में दर्द होने पर 10 ग्राम नीम के बीज, 10 ग्राम सोंठ, 10 ग्राम तुलसी की पत्तियां तथा 8-10 काली मिर्च मिलाकर गाढ़ी चटनी  बनाकर थोड़ी-थोड़ी देर में रोगी को चटाएं. अवश्य फ़ायदा होगा.

* भोजन न पचने के कारण खट्टी डकारें, सिरदर्द, जी मिचलाना और कभी-कभी बुखार की शिकायत भी हो जाती है. ऐसे में निम्बोली खाने से पेट के उपर्युक्त तकलीफें ठीक हो जाती हैं.

* रोज़ सुबह नीम की दातून करने से दांत मजबूत और चमकदार बनते हैं व पायरिया की शिकायत भी नहीं होती.

* नीम का तेल प्रतिदिन सिर पर लगाने से जुएं और लीखें ख़त्म हो जाती हैं.

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* फोड़ा यदि पककर फूट गया हो, तो नीम के पत्तों को पीसकर उसकी लुगदी फोड़े पर बांधने से आराम मिलता है.

* पायरिया तथा मसूड़ों से ख़ून निकलने की समस्या हो तो नीम का तेल फ़ायदेमंद होता है. ऐसे में नियमित रूप से मसूड़ों पर इसकी मालिश करनी चाहिए.

* 10 बूंद नीम का तेल पान पर लगाकर खाने से दमा व खांसी में फ़ायदा होता है.

* यदि उल्टी हो रही हो तो 25 ग्राम नीम की पत्तियां पीस लें. इसमें 5-6 दानें काली मिर्च मिलाकर आधा कप पानी में घोलकर एक बार पी लें. उल्टी रुक जाएगी

* नीम की पत्तियों का रस निकालकर रुई के फाहे को भिगोएं और आंखों पर रखें. आंखों की जलन और लालिमा दूर हो जाएगी.

* यदि आंखों में सूजन व खुजली हो, तो नीम की 15-20 पत्तियों को पानी में उबालें. फिर उसमें 5 ग्राम फिटकरी घोल कर छान लें. साफ़ रुई द्वारा इस पानी से आंखें धोएं. दो-तीन बार ऐसा करने से सूजन और खुजली समाप्त हो जाती है.

* गाय के दूध में नीम का तेल मिलाकर पीने से प्रदर रोग में बहुत फ़ायदा होता है.

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* नीम के बीज को पानी में भिगोकर व पीसकर तथा पोटली बनाकर योनि पर रखने से योनि का दर्द समाप्त हो जाता है.

* नीम की पत्तियों को पीसकर हाथ-पैरों पर लेप करने से जलन शांत होती है.

* मलेरिया में नीम के रस का काढ़ा सर्वोत्तम दवा है. 50 ग्राम नीम के पत्ते को 4-5 काली मिर्च मिलाकर पीसें. इसे गर्म पानी में घोलकर पिलाएं. मलेरिया ठीक हो जाएगा.

* नीम की पत्तियों के रस में शहद मिलाकर चाटने से पेट के कीड़े मर जाते हैं. शहद की जगह हींग भी मिला सकते हैं.

* नकसीर फूटती हो तो नीम की छाल को पानी में पीसकर गाढ़ा लेप बनाएं. इस लेप को माथे पर लगाने से नकसीर से राहत मिलती है.

* खसरा होने पर नीम की कच्ची कोपलें तथा काली मिर्च बराबर मात्रा में पीसकर प्रतिदिन खाएं. खसरा सूखने पर नीम के पानी से नहलाएं तथा नीम का ही तेल लगाएं.

* शरीर में अम्लपित्त की वजह से कई विकार पैदा हो जाते हैं. ऐसे में नीम की छाल, सोंठ और काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं. 20 ग्राम चूर्ण रोज़ सवेरे ताज़े पानी के साथ लेने से अम्लपित्त की शिकायत दूर हो जाती है.

–  शिल्पी शर्मा

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संतरा खाने के 11 लाजवाब फ़ायदे (11 Amazing Benefits Of Eating Orange)

Benefits Of Orange

  1. हर रोज़ भोजन के बाद दो संतरा खाने से पेट के भारीपन, अपच व वायु विकार से छुटकारा मिलता है.
  2. खाली पेट संतरे के रस में हल्का नमक मिलाकर नियमित सेवन करने से बरसों पुराना कब्ज़ भी दूर हो जाता है.
  3. पेटदर्द होने पर आधे कप संतरे के रस में थोड़ी-सी भुनी हुई हींग मिलाकर पीएं. तुरंत लाभ होगा.
  4. एक कप संतरे के रस में चुटकीभर काला नमक और थोड़ी-सी मिर्च मिलाकर पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है. पुराने अजीर्ण में कुछ दिन इसका नियमित रूप से सेवन करें. अजीर्ण जड़ से समाप्त हो जाएगा.
  5. आधे कप संतरे के रस में थोड़ा-सा शहद डालकर पीएं. गर्भवती स्त्रियों को होनेवाली उल्टी में यह विशेष रूप से लाभकारी है.

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  1. संतरे के रस में अंगूर का रस मिलाकर पीने से बच्चों को सूखा रोग में लाभ पहुंचता है.
  2. इंफ्लूएंजा में आधा कप संतरे का रस दिन में तीन बार पीएं. आराम मिलेगा.
  3. ठंडी तासीर होने की वजह से गर्मियों में होनेवाले दस्त में संतरे के रस का सेवन फ़ायदा पहुंचाता है.
  4. संतरा एसीडीटी की रामबाण औषधि है. संतरे के रस को थोड़े भुने हुए जीरे तथा सेंधा नमक के साथ सेवन करने से एसीडीटी से होनेवाली बीमारियां दूर हो जाती हैं, जैसे-खट्टी डकार, छाती में जलन आदि.

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  1. यदि जीभ का स्वाद बिगड़ गया हो तथा भोजन से अरुचि हो गई हो, तो भोजन के तुरंत बाद एक संतरा रोज़ खाएं. यह भोजन को पचाने में मदद करता है तथा किसी भी प्रकार का विकार नहीं होने देता.
  2. यदि हाथ-पैर में दर्द-ऐंठन होती हो, तो एक ग्लास संतरे का रस पीने से आराम मिलता है.

* इसके अलावा दाद, खाज, फुंसी आदि चर्म रोग में ताज़े संतरे के छिलके को पीसकर लगाएं. शीघ्र लाभ होगा.

* संतरे के ताज़े छिलकों को चेहरे पर रगड़ें. धीरे-धीरे दाग़ गायब हो जाएंगे. इससे चेचक के दाग़ भी हल्के हो जाते है.

– वंशज बडोनी

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सीताफल के अनगिनत फ़ायदे (Profound Benefits Of Custard Apple)

Benefits Of Custard Apple

Benefits Of Custard Apple

विटामिन से भरपूर सीताफल के कई बेहतरीन फ़ायदे (Benefits Of Custard Apple) हैं. सीताफल एक मीठा व स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ अनगिनत औषधीय गुणों से भरपूर है. सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है. यह पित्तशामक, पौष्टिक, रक्तवर्द्धक, वातदोषशामक और हृदय के लिए बहुत ही लाभदायक है. इसमें मौजूद विटामिन ए त्वचा, बालों और आंखों के लिए बेहद उपयोगी है. विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है. इसमें प्रचुर मात्रा में पोटैशियम व मैग्नीशियम होता है, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता हैै.

*    सीताफल का नियमित सेवन करने से दांत व मसूड़ों में होनेवाले दर्द से छुटकारा मिलता है.

*    सीताफल आंखों की देखने की क्षमता बढ़ाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी और राइबोफ्लेविन काफ़ी ज़्यादा होता है. इससे चश्मे का नंबर भी दूर किया जा सकता है.

*    यदि डायरिया की समस्या हो, तो कच्चे सीताफल को काटकर सुखा लें. फिर इसे पीसकर मरीज़ को खिलाएं. इससे काफ़ी आराम मिलता है.

*    सीताफल का नियमित सेवन करने से शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है. ये दिमाग़ को रिलैक्स कर अनिद्रा, थकान व मानसिक तनाव को दूर करने में भी मदद करता है.

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*    जूं की परेशानी में सीताफल बेहद उपयोगी है. इसके लिए सीताफल के बीजों का बारीक़ चूर्ण बनाकर थोड़ा-सा पानी डालकर पेस्ट तैयार कर लें. इसे रात को बालों में लगाएं, सुबह बाल धो लें. दो-तीन दिन तक ऐसा करने से जुएं ख़त्म हो जाएंगे.

*    सीताफल में लौह तत्व की प्रचुरता होने से यह एनीमिया में फायदेमंद है.

* बाल कम होने या फिर गंजेपन में भी सीताफल उपयोगी है. सीताफल के बीज को बकरी के दूध के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. इसे अच्छी तरह से बालों में लगा लें. इससे बाल बढ़ते हैं. साथ ही इससे मस्तिष्क को ठंडक भी मिलती है.

*    सीताफल में विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा होने से ये शरीर से विषैले तत्वों को निकालने में मदद करता है. इसके अलावा इससे त्वचा भी निखरती है.

*    रिसर्च के अनुसार, सीताफल में ऐसे कई पोषक तत्व हैं, जो कैंसर से बचाव करते हैं. इसमें मौजूद ऐलकोनॉइड्स व एसिटोजिनिन ट्यूमर सेल्स को बढ़ने से रोकते हैं.

*    सीताफल का छिलका पीसकर सेवन करने से पतले दस्त या आंव की समस्या दूर होती है.

*    बच्चे के कान में दर्द हो, तो सीताफल के गूदे के रस में कुछ बूंद गाय का ताज़ा दूध मिलाकर कान में डालें.

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*    सीताफल खाने से ब्लड शुगर लेवल कम होता है, इस कारण डायबिटीज़ की प्रॉब्लम से बचा जा सकता है.

*    जो काफ़ी दुबले-पतले हैं और अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिए.

*    शरीर में कहीं भी दर्द हो, तो सीताफल के गूदे का रस निकालकर लगाने से दर्द में राहत मिलती है.

*    गठिया यानी जोड़ों के दर्द में सीताफल का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद है.

*    यदि आपका शरीर हमेशा गर्म रहता है, तो आपको नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर का ताप

संतुलित रहेगा.

*    सीताफल के पत्ते व छाल भी उपयोगी होते हैं, इससे फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है.

सुपर टिप

सीताफल में मौजूद कॉपर व डायटरी फाइबर अपच, कब्ज़ व अन्य पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में काफ़ी कारगर साबित होते हैं.

– अभिषेक गुप्ता

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पेट में कीड़े हो तो आज़माएं ये घरेलू इलाज (Get Rid Of Intestinal Worms With These Effective Home Remedies)

मनुष्य के पेट (Stomach) में विशेषकर आंतों (Intestines) में विभिन्न प्रकार के कीड़े (Worms) पाए जाते हैं. पाचन संस्थान से संबंधित इन कीड़ों को ही आम लोग पेट के कीड़े (Stomach Worms) के नाम से संबोधित करते हैं. ये कई तरह के होते हैं, जो तरह-तरह के विकारों को उत्पन्न करते हैं.

Home Remedies For Intestinal Worms

मधुर-अम्ल पदार्थों का अधिक सेवन तथा अजीर्ण रहने पर भी भोजन करना पेट के कीड़ों को पैदा करने में मुख्य भूमिका अदा करते हैं. इसके अतिरिक्त पतले पदार्थों तथा गुड़ का अधिक सेवन, व्यायाम न करना या शारीरिक श्रम से बचना, दिन में अधिक सेवन, परस्पर विरुद्ध पदार्थों का सेवन आदि कृमियों के उत्पत्ति के सामान्य कारण हैं. ये कारण कृमियों की उत्पजत्त और उनके विकास के लिए अनुकूल परिस्थिति उत्पन्न करते हैं.

पेट में जब कीड़े हो जाते हैं तो उनके कारण निम्न लक्षण पैदा होते हैं- मिचली, जी मिचलाना, लाल स्राव, अजीर्ण, अरुचि, उल्टी, ज्वर, दुर्बलता, छींक, नज़ला-जुकाम आदि. इसके अतिरिक्त पेट में तीव्र दर्द, भूख की कमी, रक्ताल्पता आदि लक्षण भी पाए जाते हैं.

* नारंगी के सूखे छिलके और बायविडंग दोनों समभाग में लेकर कूट-पीस कर 3 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन एक बार तीन दिन तक देने से कीड़े मर जाएंगे. उन मरेग हुए कीड़ों को निकालने के लिए चौथे दिन एरंडी का तेल पिलाएं.

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* ईख के सिरके में 25 ग्राम चना रात को भिगो दें और सुबह उसे चबा-चबा कर खाएं. आठ घंटे तक कुछ भी न खाएं-पीएं. कीड़े मरकर बाहर निकल आएंगे.

* मूली के रस में  थोड़ा नमक मिलाकर सबिह-शाम दिन में दो बार सेवन कीजिए. इस प्रयोग को निरंतर चार दिनों तक करने के बाद पेट की अंतड़ियों में फंसे सारे कीड़े मल के साथ निकल जाएंगे और आपका पेट एकदम स्वच्छ हो जाएगा.

* पीपल के पंचांग का चूर्ण गुड़ में मिलाएं और सौंफ के अर्क के साथ सुबह-शाम पांच-पांच ग्राम मात्रा में दें. तीन दिनों में सारे कीड़े खत्म हो जाएंगे.

* आपके घर का कोई भी सदस्य पेट के कीड़ों से त्रस्त है और बार-बार इलाज कराने पर भी कीड़ों से मुक्ति नहीं मिल पा रही है, तो आप उसे दिन में तीन-चार बार छाछ पिलाएं. छाछ में भुना हुआ जीरा, थोड़ा नमक और पिसी हुई काली मिर्च डाल सकते हैं. आप देखेंगे कि एक सप्ताह के भीतर ही अंतड़ियों में छुपे पड़े कीड़े बाहर निकल आएंगे.

* छाछ में बायविडंग का चूर्ण मिलाकर पिलाने से छोटे बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं या निकल जाते हैं.

* सुबह उठते ही दो-तीन माशा नमक पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पेट के भीतर के कीड़े बाहर आ जाते हैं और नये कृमियों की उत्पत्ति रुक जाती है.

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* सोंठ और बायविडंग के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते हैं.

* कड़ुवे परवल के पत्ते एक तोला और धनिया एक तोला रात को दस-बारह तोला पानी में भिगोकर रखें. सुबह उसे छानकर उसमें शहद मिलाएं. इसे तीन ख़ुराक बनाकर दिन में तीन बार सेवन करने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं.

* सहिजन का क्वाथ शहद में मिलाकर दिन में दो बार पीने से सूक्ष्म से सूक्ष्म कृमि भी निकल जाते हैं.

रोगी को ऐसा आहार न दें जो हजम होने में कठिन हो. अजीर्ण कृमियों की वृद्धि में उपयुक्त वातावरण तैयार करता है, अतः अजीर्ण से बचें. कड़वे आहार ऐसे रोगियों के लिए उपयोगी होते हैं. पत्तेदार आहार, हरड़ व लहसुन पथ्य हैं. चीनी या उससे बने पदार्थों, चॉकलेट आदि से परहेज रखें.

– रेखा गुप्ता

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जायफल के औषधीय 21 गुण (21 Surprising Ways Nutmeg Can Improve Your Health)

Nutmeg

भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए जायफल (Nutmeg) का इस्तेमाल किया जाता रहा है. मिठाइयों और पकवानों में इसका उपयोग किया जाता है. यह फाइबर, पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स व एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है. लेकिन औषधीय तत्वों से भरपूर जायफल कई बीमारियों को भी दूर करता है. यह अस्थमा, पेट के कीड़े, खांसी, उल्टी, सर्दी-ज़ुकाम, बवासीर आदि में लाभप्रद हैै.

* जायफल और सोंठ को गाय के घी में घिसकर चटाने से बच्चों को ज़ुकाम के कारण होनेवाले दस्त बंद हो जाते हैं.

* यदि बवासीर की समस्या है, तो जायफल को देसी घी में भूनकर सुखा लें. इसे पीसकर आटे में मिलाकर दोबारा देसी घी में सेंक लें. इसमें शक्कर मिलाकर हर रोज़ एक टीस्पून खाली पेट लें.

* 10 ग्राम जायफल के चूर्ण को गुड़ में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें. एक-एक गोली आधे-आधे घंटे पर देकर ऊपर से थोड़ा गर्म पानी पीने से हैजे के दस्त बंद होते हैं.

* 100 मि.ली. तेल में एक टीस्पून जायफल का चूर्ण मिलाकर धीमी आंच पर गर्म करें. ठंडा होने पर यह तेल हैजे के रोगी के हाथ-पैर पर मलने से दर्द में राहत मिलती है.

* जायफल का एक-दो बूंद तेल, शक्कर या बताशे में डालकर सेवन करने से पेटदर्द व पेट की गैस से छुटकारा मिलता है.

* जायफल के तेल को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ों की पुरानी सूजन पर मलने से त्वचा में गर्मी पैदा होती है. पसीना निकलता है, संधिवात के कारण अकड़े हुए संधि-स्थान खुलते हैं और संधिवात मिटता है.

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* जायफल के तेल का फाहा दांत में रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं और दांत की पीड़ा शांत होती है.

* यदि सिरदर्द हो, तो कच्चे दूध में जायफल घिसकर लेप की तरह माथे पर लगाएं. सिरदर्द में राहत मिलेगी.

* जायफल का तेल मिलाकर बनाया हुआ मलहम घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है.

* जायफल का काढ़ा बनाकर 3-4 बार कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं.

* जायफल, जावित्री व सोंठ को एक साथ पीसकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से सर्दी-ज़ुकाम की समस्या दूर होती है.

* खांसी से परेशान हैं, तो जायफल को पीसकर इसमें शहद मिला लें. इसे पानी के साथ चाटें.

* जायफल के तेल से मालिश करने पर गठिया रोग की समस्या के साथ-साथ हाथ-पैरों की ऐंठन भी दूर हो जाएगी.

* जायफल को चावल के धोवन में घिसकर पीने से हिचकी व उल्टी बंद हो जाती है.

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* जायफल व लौंग का काढ़ा पीने से भी जोड़ों के दर्द मेंं आराम मिलता है.

* यदि गैस व एसिडिटी की समस्या हो, तो जायफल, जीरा व सोंठ को पीसकर पाउडर बना लें. भोजन के बाद इसे पानी के साथ लें.

* जायफल के टुकड़े को पांच मिनट दांतों के नीचे रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं और कैविटी की समस्या भी दूर होती है.

* आधा टीस्पून जायफल के चूर्ण में आधा टीस्पून लौंग, एक टीस्पून शहद व चुटकीभर बंग भस्म मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्या दूर होती है.

* कान में सूजन हो, तो जायफल को घिसकर लगाने से आराम मिलता है.

* जायफल चेहरे की ख़ूबसूरती भी बढ़ाता है. यदि कील-मुंहासों की समस्या है, तो हर रोज़ चुटकीभर जायफल का सेवन करना चाहिए.

* यदि आपको नींद न आने की समस्या है, तो गाय के घी में जायफल घिसकर पैर के तलुवों और पलकों पर लगाने से अच्छी नींद आती है.

– ऊषा गुप्ता

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त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

Health Benefits Of Triphala
Health Benefits Of Triphala
त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

आज के दौर में हर उम्र के व्यक्ति को जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां होना आम बात है. बदलते फास्ट लाइफ और बदलते समय के साथ-साथ, हमारे खाने-पीने की आदतों में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसने हमारे स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, ख़ासतौर से हमारे पाचन तंत्र पर इसका काफ़ी असर हुआ है. लेकिन अपने पाचन तंत्र को हेल्दी बनाए रखने का एक बेहद आसान तरीका है अपने डेली रुटीन में त्रिफला को शामिल करना.

त्रिफला सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक हर्बल उपचारों में से एक है. यह तीन फलों- आंवला, बहेड़ा और हरितकी का मिश्रण है. डॉ. हरिप्रसाद, अनुसंधान वैज्ञानिक, हिमालय ड्रग कंपनी आपको ऐसे पांच कारण बता रहा है, जिन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि अपने दैनिक आहार में त्रिफला को क्यों शामिल करना चाहिए.

कब्ज़ से राहत: आयुर्वेद ग्रंथों और समकालीन शोध अध्ययनों में कहा गया है कि त्रिफला पेट को खाली करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है और लंबे समय से बनी कब्ज़ से राहत देतीा है. त्रिफला के तीन हर्बल अवयवों में से प्रत्येक हमारे शरीर की देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी जड़ी-बूटियां हमारे शरीर से आंतरिक कचरे को बाहर निकालकर सफाई करने में मदद करती है. साथ ही साथ, इससे पाचन में भी सुधार होता है.

जठरांत्र या गैस्ट्रो-इंटेस्टानल टिश्यूज़ को शांत और जीवंत करना: त्रिफला में मिले आंवला में शामक और प्रदाह शांत करनेवाले गुण होते हैं, जो आंतों के अंदरूनी परत को फिर से जीवंत करने में मदद करता है. यह आंतों की दीवारों को ठंडा और
शांत करता है, इससे पेट फूलने और डकार-उबकाई से राहत मिलती है.

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धीरे-धीरे नियमितता बनाए रखता है: त्रिफला चयापचय को उत्तेजित करने में मदद करता है और हमारे शरीर के पाचनतंत्र को आराम देता है. हर रात सोने से पहले एक छोटी-सी खुराक मल त्याग को विनियमित करने में मदद करती है.

शरीर को विषमुक्त करता है: आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार त्रिफला का चूर्ण शरीर से चयापचय और पाचन के बाद बचे व्यर्थ पदार्थों से शरीर को शुद्ध करके पेट और बड़ी आंत के विषमुक्त करता है.

प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट: त्रिफला में कई एंटीऑक्सीडेंट तत्व शामिल हैं, जिनमें गैलिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स और टैनिन प्रमुख हैं, ये शरीर में स्वाभाविक रूप से ऐसे मुक्त कणों को निशाना बनाता है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने में

सक्षम होते हैं. तीन फलों से प्राप्त हुए सक्रिय तत्व एंटीऑक्सीडेंट के प्रभाव को बढ़ाते हैं और मल त्याग के लिए प्रेरित करते हैं.
तो त्रिफला का प्रयोग अब नियमित रूप से करें और अपनी संपूर्ण सेहत का ध्यान रखें, ताकि आनेवाला कल सेहतमंद बने.

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बच्चों के आम रोगों के उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Common Diseases Of Children)

जन्म के बाद से पांच वर्ष की उम्र तक का समय बच्चे की परवरिश की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान ही उसके रक्त, मांस, सभी अवयव, मस्तिष्क आदि का विकास होता है. ऐसे समय में थोड़ी-सी लापरवाही या आम बीमारियां (Common Diseases) उनके शारीरिक या मानसिक विकास को रोक सकती हैं. आइए, इस उम्र में बच्चों (Children) को होनेवाली छोटी-मोटी समस्याओं के घरेलू इलाज (Home Remedies) के बारे में जानते हैं.

Common Diseases Of Children

गैस-कब्ज़

* आधा टीस्पून लहसुन के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पिलाएं. तुरंत गैस से राहत मिलेगी.

* चुटकीभर सेंकी हुई हींग का चूर्ण घी में मिलाकर चटाने से शिशु को गैस से आराम मिलता है.

* जीरा या अजवायन को पीसकर पेट पर लेप करने से वायु का अवरोध दूर होता है और बच्चा राहत महसूस करता है.

* हींग को भूनकर उसे पानी में घिसकर नाभि के चारों ओर लेप करें. गैस का शमन होगा और बच्चा चैन की सांस लेगा.

* रात को बीज निकाला हुआ छुहारा पानी में भिगो दें. सुबह उसे हाथ से मसलकर निचोड़ लें और छुहारे के गूदे को फेंक दें. छुहारे के इस पानी को बच्चे को आवश्यकतानुसार 3-4 बार पिलाएं. इससे कब्ज़ की शिकायत दूर होगी.

* बड़ी हरड़ को पानी के साथ घिसकर उसमें चुटकीभर काला नमक मिलाएं. इसे गुनगुना करके आवश्यकतानुसार दिन में 2-3 बार बच्चे को दें. अवश्य लाभ होगा.

खांसी-ज़ुकाम

* शिशु को खांसी-ज़ुकाम हो, तो थोड़ा-सा सरसों का तेल प्रतिदिन उसकी छाती पर मलें. शीघ्र ही आराम होगा.

* थोड़ा-सा सोंठ का चूर्ण गुड़ व घी के साथ मिलाकर चटाने से बच्चे की खांसी-ज़ुकाम ठीक होती है.

* आधा इंच अदरक व 2 तेजपत्ता को एक कप पानी में भिगोकर काढ़ा बनाएं. इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिनभर में तीन बार पिलाएं. खांसी-ज़ुकाम दो दिन में ठीक हो जाएगा.

* बच्चे की छाती पर कफ़ जम जाए, तो उसकी छाती पर थोड़ा गाय का घी मलें. इससे कफ़ पिघलकर बाहर आ जाएगा और बच्चे को आराम मिलेगा.

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बुख़ार

* कालीमिर्च के चूर्ण में 125 मि.ग्रा. तुलसी का रस व शहद मिलाकर दिन में तीन बार दें.

* बुख़ार तेज़ हो, तो प्याज़ को बारीक़ काटकर पेट व सिर पर रखें. बुख़ार कम होने लगेगा.

* बुख़ार में सिरदर्द हो, तो गर्म पानी या दूध में सोंठ का चूर्ण मिलाकर सिर पर लेप करें या जायफल पानी में पीसकर लगाएं.

* बुख़ार में पसीना अधिक हो, हाथ-पैरों में ठंड लगे, तो सोंठ के चूर्ण को हल्के हाथों से लगाएं. लाभ होगा.

मतली

* 1-1 टीस्पून अदरक का रस, नींबू का रस और शहद को मिलाकर चटाएं.

* आधा-आधा टीस्पून अदरक व प्याज़ का रस मिलाकर पिलाएं.

* चुटकीभर अजवायन और लौंग का चूर्ण लेकर शहद के साथ चटाएं.

* छोटी इलायची को भूनकर उसका कपड़छान चूर्ण बनाएं. चुटकीभर चूर्ण आधा चम्मच नींबू के रस में मिलाकर खिलाएं.

* इलायची के छिलकों को जलाकर उसकी भस्म चटाने से भी मतली में लाभ होता है.

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नींद में डरना

* सर्दी के मौसम में एक से दो ग्राम सौंफ पानी में उबालकर उसे छान लें. इसे रात को सोने से पहले बच्चे को पिला दें. इससे नींद में डरने की शिकायत दूर होगी.

* गर्मी के मौसम में छोटी इलायची का एक ग्राम अर्क सौंफ के उबले हुए पानी के साथ पिलाएं. नींद में डरने की आदत छूट जाएगी.

सुपर टिप

आधा चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार बच्चे को पिलाने से सर्दी-खांसी में तुरंत राहत मिलती  है.

– परमिंदर निज्जर

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जानें हींग के 13 आश्‍चर्यजनक फ़ायदे (13 SURPRISING BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA)

BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA

हींग (Hing) का उपयोग विशेषतः दाल-साग को बघारने में होता है. परंतु अनेक रोगों के निवारण में भी यह सक्षम है. इसके सेवन से कफ, वायु दोष नहीं होते. उचित मात्रा में हींग (Asafoetida) का सदैव प्रयोग करना चाहिए. यह बहुत लाभप्रद (Beneficial) है. इसके अनेक औषधीय गुण हैं.

BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA

1. 2 चम्मच सरसों के तेल में 1 ग्राम हींग, दो कली लहसुन और ज़रा-सा सेंधा नमक भून लें. जब हींग जल जाए, तो तेल को छानकर शीशी में भरकर रख लें. कान में दर्द या सांय-सांय होने पर दो-दो बूंद तेल रोज रात को कानों में डालें. प्रतिदिन एक सप्ताह तक ऐसा करने से कान दर्द, खुश्की और सांय-सांय की आवाज की शिकायत दूर हो जाती है.

2. हींग को घी में भून लीजिए. फिर काली मिर्च, वायबिडंग, कूठ, सेंधा नमक और भुनी हुई हींग, सभी 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीस-छानकर शीशी में भर लें. कुकुर खांसी होने पर आधा या एक ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटें. यह नुस्ख़ा सिर्फ एक हफ्ते में ही चमत्कार दिखा देता है.

3. कौड़ी (गिल्टी का दर्द) हो, तो एक बीज निकाला हुआ मुनक्का लेकर उसमें दो ग्राम भुनी हींग मिलाकर नबा जाइए. ऊपर से दो घूंट गर्म पानी पी लें. असर होते देर नहीं लगेगी. दूसरे दिन इस दवा की एक ख़ुराक और ले लीजिए. रोग हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

4. हींग, सोंठ और मुलहठी 2-2 ग्राम लेकर पीस लें. फिर मधु मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें. भोजन के बाद एक गोली सुबह और एक गोली रात को चूसिए. कब्ज़ से राहत मिलेगी.

5. हींग को शराब में खरल करके सुखा लीजिए. इसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से खांसी, श्‍वास और दूषित कफ विकार में अत्यंत लाभ होता है.

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6. हींग, सेंधा नमक और घी 10-10 ग्राम लेकर 120 मि.ली. गोमूत्र में मिलाइए. उसे इतना उबालिए कि केवल घी बाकी रह जाए. यह घी पीने से मिर्गी दूर होती है.

7. हींग, कालीमिर्च और कपूर- प्रत्येक 10-10 ग्राम और अफीम 4 ग्राम लेकर अदरक के रस में छह घंटे तक घोंटिए. फिर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाइए. एक या दो गोली दिन में तीन बार लेने से दस्त से छुटकारा मिलता है.

8. हींग, कपूर और आम की गुठली समभाग में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें. चार-चार घंटे पर यह गोली देने से हैजे में फ़ायदा होता है.

9. घी में सेंकी हुई हींग घी के साथ खाने से प्रसूता स्त्री को आने वाला चक्कर (सिर चकराना) और शूल मिटता है.

10. हींग का चार माशा चूर्ण बीस तोले दही में मिलाकर पीने से और दोपहर को केवल दही-भात खाने से या स़िर्फ दही सेवन करने से तीन दिन में ही नारू बाहर निकल आता है.

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11. पेट में गैस हो गई हो, पेट फूल कर ढोल के समान बन गया हो, पेट में दर्द हो रहा हो, तो नाभि के आसपास और पेट पर हींग का लेप करने से थोड़े समय में ही आराम हो जाता है.

12. हींग और अफीम बराबर-बराबर लेकर तिल के तेल या मोम और तेल में अच्छी तरह पीसें. यह मलहम कंठमाल पर लगाने से कंठमाल पककर फूट जाता है और आराम मिलता है.

13. हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत की पीड़ा दूर होती है. यदि दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दंतकृमि मर जाते हैं और दांत की पीड़ा दूर हो जाती है.

– मूरत गुप्ता

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आंवला के 17 चमत्कारी फ़ायदे (17 Magical Health Benefits Of Amla)

Health Benefits Of Amla

आंवला (Health Benefits Of Amla) हमारे देश के श्रेष्ठ फलों में से एक है. यह आयुवर्द्धक, कल्याणकारी, श्रीफल, अमृतफल आदि नामों से भी जाना जाता है. आंलवा कफ़, पित्त, वायु को दूर करता है. इसके नियमित सेवन से आंखों की ज्योति बढ़ती है. यह हृदय रोग में भी लाभकारी है. इससे जिगर को ताक़त मिलती है. हरा आंवला रसायन होता है, सूखा आंवला कफ़ को नष्ट करता है. यह ख़ून की गर्मी को शांत करता है तथा हड्डियों को मज़बूत बनाता है. यह भूख को बढ़ानेवाला, पाचनशक्ति को ठीक करनेवाला तथा त्वचा रोगों को नष्ट करनेवाला भी माना जाता है.

Health Benefits Of Amla

1. एक छोटा चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को दूध के साथ सेवन करें. यह आंतों को साफ़ कर कब्ज़ दूर करता है.

2. सूखा आंवला तथा काला नमक समान भाग में लेकर चूर्ण बना लें. अजीर्ण से होनेवाले दस्त में आधा चम्मच चूर्ण दिन में तीन बार पानी के साथ सेवन करें. दस्त बंद हो जाएंगे.

3. बवासीर की शिकायत होने पर आंवले का चूर्ण दही के साथ नियमित लेना चाहिए.

4. तीन भाग ताज़े आंवले के रस में एक भाग शहद मिलाकर सुबह-दोपहर-शाम को लें. पीलिया में आश्चर्यजनक लाभ होगा.

5. नेत्र रोगों में आंवले का चूर्ण गाय के दूध के साथ नियमित सेवन करना चाहिए. इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है.

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6. आंवले को आग पर भूनकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर बारीक़ पीस लें. साथ ही इसमें दो-तीन बूंदें सरसों के तेल की मिला दें. इससे नियमित मंजन करने से पायरिया रोग का नाश होता है.

7. आंवले के रस में चंदन अथवा पीपरि का चूर्ण डालकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद होती है.

8. हड्डी टूटने पर आवश्यक उपचार के बाद नियमित रूप से आंवले का रस किसी फल के रस में मिलाकर लें. विशेष लाभ होगा.

9. आंवला और हल्दी 10-10 ग्राम लेकर काढ़ा बना कर पीने से मूत्र मार्ग और गुदा मार्ग की जलन शांत होती है और पेशाब साफ़ होता है.

10. बीस ग्राम आंवले के रस में एक पका हुआ केला मसलकर, उसमें 5 ग्राम शक्कर मिलाकर खाने से स्त्रियों का सोमरोग (बहुमूत्र रोग) दूर हो जाता है.

11. आंवले का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है.

12. एक औंस ताज़े आंवले का रस नित्य प्रातः खाली पेट एक हफ़्ते तक लें. पेट के कीड़े मर जाएंगे.

13. यदि नकसीर किसी प्रकार बंद न हो तो ताज़े आंवले का रस नाक में टपकाएं, नकसीर बंद हो जाएगी. जिन्हें अक्सर नकसीर की शिकायत रहती है, उन्हें नित्य आंवले का सेवन तथा सिर पर आंवले का लेप करना चाहिए.

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14. आंवले और काले तिल का बारीक़ चूर्ण बना लें. यह चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में घी या शहद के साथ नियमित चाटने से वृद्धत्व दूर होता है और शक्ति आती है.

15. बाल गिरते हों या कम उम्र में स़फेद हो गए हों, तो आंवले का चूर्ण पानी में मिलाकर तुलसी की हरी पत्तियों को पीसकर उसमें मिला दें. इसे बालों की जड़ों में मलें. 10 मिनट के बाद बाल धो लें, नियमित कुछ दिन तक ऐसा करने से बालों का गिरना तथा सफ़ेद होना रुक जाता है.

16. ताज़े आंवले के रस में थोड़ा नमक मिलाकर पीने से डायबिटीज़ कुछ महीने में ही ठीक हो जाता है.

17. आंवले के चूर्ण का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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मदर्स केयर- बच्चों की खांसी के 15 घरेलू असरदार उपाय (Mothers Care- 15 Tips For Relieving In Baby Cough)

Tips For Relieving In Baby Cough

Tips For Relieving In Baby Cough

  1. एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से कफ तथा खांसी से राहत मिलती है.
  2. अंजीर खाने से छाती में जमा बलगम निकल जाता है और खांसी से छुटकारा मिलता है.
  3. बड़ी इलायची का चूर्ण दो-दो ग्राम दिन में तीन बार पानी के साथ लेने से सभी प्रकार की खांसी से आराम मिलता है.
  4. काली खांसी होने पर कपूर की धूनी सूंघने से लाभ होता है.
  5. खांसी को कम करने के लिए मिश्री के साथ अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाइए. इससे खांसी से शीघ्र आराम मिलेगा.
  6. अदरक का रस शहद के साथ रात को सोते समय चाटें. इसके बाद पानी न पीएं. इससे खांसी में राहत पहुंचेगी.
  7. काली मिर्च तथा मिश्री या मुलहठी को मुख में रखकर चूसें. इससे सूखी खांसी में आराम मिलता है.
  8. तवे पर फिटकरी भून लें और उसका चूर्ण बनाकर मिश्री या शहद के साथ सेवन करें. सूखी खांसी से राहत मिलेगी.

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  1. एक चम्मच सोंठ का चूर्ण (भूना हुआ), थोड़ा-सा गुड़ और एक चुटकी अजवाइन इन तीनों को एक साथ मिलाकर खाएं और ऊपर से गर्म दूध पीकर कम्बल ओढ़कर सो जाएं. खांसी से छुटकारा मिलेगा.
  2. काली खांसी को खत्म करने के लिए काले बांस को जलाकर राख बना लें. इसे शहद के साथ मिलाकर चाटें.
  3. एक तोला मुलहठी, चौथाई तोला काली मिर्च, आधा तोला सोंठ, आधा तोला अदरक- इन सबको बारीक पीसकर छान लें और दो तोले गुड़ में मिलाकर बेर के बराबर गोलियां बना लें. 1-1 गोली सुबह-शाम गर्म पानी के साथ सेवन करें. इससे काली खांसी खत्म हो जाएगी.
  4. बादाम की 5 गिरी, 5 मुनक्का और 5 काली मिर्च- इन्हें मिश्री के साथ पीसकर गोली बना लें. चार-चार घंटे पर एक गोली चूसें. इससे खांसी दूर हो जाएगी.
  5. खांसी में थोड़े-से नमक में बराबर मात्रा में हल्दी मिलाकर फांक लें और ऊपर से एक कप गुनगुना दूध पी लें.
  6. चाय के पानी में चुटकी भर नमक मिलाकर सोते समय गरारे करने से भी खांसी में लाभ होता है.
  7. खांसी आने पर अरवी की सब्जी खाएं. इससे खांसी तुरंत ठीक हो जाएगी.

– रेखा गुप्ता

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