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सिरके के अनगिनत फ़ायदे (Top 25 Vinegar Benefits)

Vinegar Benefits

Vinegar Benefits

गन्ने के रस के अलावा सेब, जामुन आदि से भी सिरका (Vinegar Benefits) बनाया जाता है, जो सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है. सिरका यानी विनेगर रुचिकर, पेट रोगों में लाभप्रद, हृदय के लिए हितकारी व आहार को पचानेवाला है. सिरका बदहज़मी व गैस की समस्या को भी दूर करता है.

* गले की सूजन, जलन आदि दूर करने के लिए पानी में सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* पेटदर्द हो रहा हो, तो एक ग्लास पानी में आधा चम्मच सिरका मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है.

* यदि दस्त व कब्ज़ हो, तो सलाद या पानी में थोड़ा-सा सिरका डालकर इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद होता है.

* किडनी की पथरी में महीनेभर सेब का सिरका सेवन करने से लाभ होता है.

* डायबिटीज़ के मरीज़ सेब के सिरके का सेवन करें, तो बीमारी कंट्रोल में रहती है और बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है.

* सिरका व शहद को पानी में मिलाकर पीने से आंखों की चमक व रोशनी तेज़ होती है.

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* जहरीले कीड़ों के काटने पर हुए घाव में सिरका भरने से विष का प्रभाव कम हो जाता है.

* सिरका तथा प्याज़ मिलाकर खाने से लू नहीं लगती.

* यदि आपको लगातार हिचकियां आ रही हैं, तो एक टीस्पून सिरका पी लें.

* गले की ख़राश को दूर करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो जाती है. ऐसे में सिरके से मालिश करना लाभप्रद होता है.

* वज़न घटाने के लिए भी हर रोज़ एक टेबलस्पून सिरके का सेवन कर सकते हैं.

* सेब के सिरके से दांतों की मालिश करने या फिर एक कप पानी में एक टीस्पून सिरका मिलाकर गरारा करने से दांतों का पीलापन दूर होता है.

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* भोजन करते समय दाल-सब्ज़ी या सलाद आदि के साथ ज़रा-सा सिरका मिलाकर लेने से भोजन का स्वाद बढ़ जाता है और भोजन शीघ्र पचता है.

* पानी में सिरका मिलाकर सिर धोने से बाल झड़ने रुक जाते हैं.

* बेसन, हल्दी व मलाई में सिरका मिलाकर लेप बनाएं. इस लेप को चेहरे पर लगाने से दाग़-धब्बे दूर होकर रंग निखरता है.

* पनीर को अधिक दिनों तक ताज़ा रखने के लिए उसे सिरके से भीगे कपड़े में लपेटकर रखें.

* सिरका मिले पानी में कपड़ा धोने से कपड़ों का रंग नहीं निकलता.

* किसी भी नमकीन अचार में सिरका डाल देने से वह ख़राब नहीं होता.

* खिड़की व दरवाज़े के शीशे सिरके मिले पानी से साफ़ करने पर चमक उठते हैं.

* दूध में सिरका डालकर पनीर बनाने से पनीर मुलायम बनता है.

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* लालटेन में नई बत्ती डालने से पहले उसे सिरके में डालकर सुखा लें. इससे रोशनी अधिक होगी और धुआं भी नहीं उठेगा.

* यदि साइनस की समस्या है, तो उबलते पानी में 1/4 एप्पल विनेगर मिलाएं. थोड़ी देर बाद उसमें 1-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर व शहद डालें. फिर 1 नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें. इस मिश्रण को सुबह खाली पेट और शाम को सोने से पहले लें.

समस्या अनेक इलाज एक

यदि आप सर्दी-ज़ुकाम, मोटापा, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, बदहज़मी, अल्सर, कोलेस्ट्रॉल आदि समस्याओं से परेशान हैं, तो सिरके को निम्न तरी़के से इस्तेमाल करें.

100 ग्राम सेब के सिरके में 100 ग्राम शहद और छह लहसुन की कलियों को छीलकर मिक्सर में पीसकर पेस्ट बना लें. इसे कांच के बॉटल में रखकर पांच दिन के लिए फ्रिज में रख दें. बाद में इस मिश्रण को अंगूर या कोई भी फ्रूट जूस के साथ या फिर पानी में 2 चम्मच मिलाकर पीएं.

सुपर टिप

एसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए एक ग्लास पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका और 1 चम्मच शहद मिलाकर पीएं.

– संगीता श्यामा गुप्ता

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बच्चों के दस्त (Diarrhea) रोकने के 13 प्रभावकारी घरेलू नुस्ख़े (13 Home Remedies To Cure Diarrhea In Babies)

Home Remedies To Cure Diarrhea

Home Remedies To Cure Diarrhea

 

दूध व भोजन की अधिकता, संक्रमण आदि कारणों से बच्चों को दस्त (Home Remedies To Cure Diarrhea) होने लगता है. दूध पीते बच्चों को बार-बार दस्त होने से उनके रक्त व शरीर से पानी व अन्य आवश्यक खनिज निकल जाते हैं. दस्तों की कमी या अधिकता के अनुसार अनेक लक्षण पैदा हो जाते हैं. इससे ज्वर, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, उल्टी, चेहरा व शरीर पीला पड़ जाना, बेहोशी, आंखें अंदर धंस जाना आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं.

जिन बच्चों को गाय व डिब्बों का दूध पिलाया जाता है, उन्हें कीटाणुओं के संक्रमण से यह रोग अधिक होता है. इस रोग में पहले पतले हरे रंग के बदबूदार दस्त होते हैं. कभी दस्तों में आंव और रक्त भी आ जाता है.

* मीठे सेब का रस कपड़े से छानकर बार-बार पिलाने से दस्त रुक जाते हैं और रक्त व शरीर में तरल तत्वों की कमी भी दूर हो जाती है.

* जौ का पानी और अंडे की स़फेदी पानी में घोलकर बार-बार थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहने से लाभ होता है.

* फलों का रस, सब्जियों के पके रस और पानी बार-बार पिलाते रहने से शरीर में तरल तत्व पहुंच जाता है.

* छोटे बच्चे को लगातार पतली दस्त हो रही हो, तो 6 मि.ग्रा. सौंफ को 6 मि.ली. पानी में उबालें. जब आधा पानी रह जाए, तो 1 चम्मच       की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाएं. शीघ्र लाभ होगा.

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* शिशुओं को दस्त होने पर जायफल, लौंग, सफेद जीरा व सुहागा खील- इन चारों को समान मात्रा में लेकर कपड़छान चूर्ण बना लें. 50 से     100 मि.ग्रा. तक की मात्रा आवश्यकतानुसार शहद के साथ दिन में 1-1 बार चटाएं.

* 60 मि.ग्रा. से 125 की मात्रा में कपूर रस शहद के साथ सुबह-शाम देने से   विशेष लाभ होता है.

* दस्त होते हों, तो भी शिशु का दूध बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि साथ-साथ नारियल का पानी, अनार का रस, सेब का रस एवं नींबू पानी     दें.

* बगैर दूध की चाय या कॉफी बनाकर उसमें नींबू का रस डालकर पिलाने से लाभ होता है.

* जायफल घिसकर शहद के साथ बच्चे को सुबह-शाम चटाएं.

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* तेजपत्ते का चूर्ण एक भाग, बेलफल की गिरी 2 भाग गुड़ के साथ दें.

* सौंफ और सोंठ का काढ़ा बनाकर शिशु को 1-2 चम्मच की मात्रा में पिलाएं. इससे दस्त बंद होगा.

* सोंठ का चूर्ण 125 मि.ग्रा. की मात्रा में गुड़ में मिलाकर देने से बच्चे को दस्त से राहत मिलती है.

* यदि शिशु बार-बार हरे रंग की दस्त करता है, तो घबराइए नहीं. आप उंगली पर एरंड का तेल लगाकर चटाएं. दो-तीन दिन में ही आराम     हो जाएगा.

–  रेखा कुंदर

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हिस्टीरिया का घरेलू इलाज (Home Remedies for Hysteria)

Home Remedies for Hysteria

Home Remedies for Hysteria

हिस्टीरिया (Home Remedies for Hysteria) स्नायु संस्थान या नर्वस सिस्टम की विकृति से होनेवाले रोगों में एक प्रमुख रोग है. यह बीमारी 15 से 25 वर्ष की लड़कियों को अधिक होता है. इस रोग से पीड़ित महिलाओं का मस्तिष्क, स्मरणशक्ति और स्नायुमंडल कमज़ोर हो जाता है. अत्यधिक चिंता, भय, शोक, पारिवारिक कष्ट, मानसिक आघात, धन हानि, गर्भाशय विकार आदि कारणों से ये बीमारी हो सकती है. इसके अलावा लाड़-प्यार में पली युवतियों की इच्छा की पूर्ति न होना, विवाह में देरी, पति की पौरुषहीनता, तलाक़, किसी क़रीबी के मृत्यु का गंभीर सदमा जैसे कारणों से महिलाएं हिस्टीरिया की शिकार हो जाती हैं.

लक्षण
इससे पीड़ित महिला बिना कारण या बहुत मामूली कारणों से हंसने या रोने लगती है. आवाज़ या प्रकाश उसे अप्रिय लगता है. चक्कर आना, सांस फूलना, चिंता, थकान, सिरदर्द, कमज़ोरी, अपच, शरीर के विभिन्न अंगों में पीड़ा, पीरियड्स में गड़बड़ी, सेक्स व्यवहार में विषमताएं आदि अनेक लक्षण हिस्टीरिया में प्रकट हो सकते हैं.

* सबसे पहले पीड़ित को होश में लाएं. होश में आने पर उसे सांत्वना दें. शरबत, फलों का रस, मीठा दूध पीने को दें.
* केले के तने का ताजा रस हिस्टीरिया के रोगिणी को ठीक करने का अचूक नुस्ख़ा है. प्रतिदिन दिन में तीन बार एक-एक ग्लास केले के तने के ताज़े रस के सेवन से लाभ होता है. 3-4 माह इस नुस्ख़े का सेवन करने से अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है.

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* हिस्टीरिया(Home Remedies for Hysteria) रोग में धनिया अत्यंत लाभदायक है. 25 ग्राम धनिया और 10 ग्राम सर्पगंधा मिलाकर बारीक़ चूर्ण बनाएं. 1 से 2 ग्राम की मात्रा में रात में सोते समय पानी के साथ सेवन करें. इस नुस्ख़े को निरंतर कुछ दिनों तक सेवन करने से अवश्य लाभ होता है.
* तीन दिन तक तीनों समय (सुबह-दोपहर-शाम) गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लें. इसके बाद 100-100 ग्राम पांचों नमक लेकर उसे पीसकर एक साथ मिलाकर किसी साफ़ बर्तन में रख लें. ग्वारपाठा धोकर उसका एक लंबा टुकड़ा लेकर छील लें. फिर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उस पर मिश्रित नमक डालकर एक महीने तक सेवन करें. इससे हिस्टीरिया रोग से अवश्य राहत मिलेगी.
* चुकंदर के एक कप ताज़ा जूस में एक चम्मच आंवले का जूस मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीना चाहिए. एक महीने तक इसे नियमित पीने से अवश्य ही हिस्टीरिया का शमन होता है.

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* जो रोगी बालवच के चूर्ण को शहद में मिलाकर हर रोज़ 40 दिन तक खाता है और भोजन में केवल दूध-चावल का सेवन करता है, उसका भयानक और पुराना हिस्टीरिया(Home Remedies for Hysteria) रोग भी शांत हो जाता है.
* हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर हींग सुंघाने से राहत मिलती है. आधा ग्राम से एक ग्राम तक हींग नियमित खाने से लाभ होता है. साथ में 120 मि.ली. पानी में 2 ग्राम हींग मिलाकर एनिमा भी लेना चाहिए.

– रेषा गुप्ता

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औषधीय गुणों से भरपूर केला (Health Benefits of Banana)

Health Benefits of Banana

Health Benefits of Banana

केले (Health Benefits of Banana) में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम व विटामिन बी 6 है. केला खाने से कब्ज़ व गैस की समस्या दूर होती है. हर रोज़ केले व दूध का सेवन करने से तंदुरुस्ती बढ़ने के साथ-साथ शरीर में ख़ून की मात्रा भी बढ़ती है. केले में पाए जानेवाले फाइबर से पाचन क्रिया अच्छी रहती है. यह खून को पतला कर धमनियों में ख़ून के संचालन को भी ठीक करता है. दरअसल, इसमें पाया जानेवाला मैग्नीशियम शरीर में जाकर रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने से धमनियों में रक्त का संचालन सही रहता है.

* पीलिया यानी जॉन्डिस के मरीज़ को कच्चा या अधपका केला खिलाने से फ़ायदा होता है.

* पेचिश होने पर पके केले को मसलकर नमक और पिसा जीरा मिलाकर मरीज़ को खिलाएं.

* जीभ पर पड़े छालों को दूर करने के लिए दो-तीन दिन तक लगातार सुबह दही के साथ केला खाएं और इसके बाद ही कुछ खाएं. छाले ठीक हो जाएंगे.

* सूखी खांसी होने पर दो केले को मिक्सर में पीसकर उसमें दूध व स़फेद इलायची मिलाकर पीने से राहत मिलती है.

* यदि प्रदर रोग की समस्या हो, तो केला व दूध की खीर बनाकर हर रोज़ सुबह-शाम खाएं या फिर भोजन करने के बाद दो केले नियमित रूप से लें.

* दस्त यानी लूज़ मोशन होने पर पके हुए केले को मक्खन की तरह फेंटकर उसमें थोड़ी-सी कुछ दाने मिश्री मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार खाने से राहत मिलती है.

* यदि चोट लग जाए और ख़ून बंद न हो, तो वहां पर केले के डंठल का रस लगाएं या फिर केले का छिलका लगाने से भी लाभ होता है.

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* बेचैनी व घबराहट होने पर पके हुए केले (Health Benefits of Banana) को फेंटकर उसमें एक टीस्पून मिश्री व एक छोटी इलायची पीसकर मिलाएं और खाएं.

* दाद होने पर केले के गूदे को नींबू के रस में पीसकर पेस्ट बनाकर दाद पर लगाएं.

* अल्सर की शिकायत होने पर कच्चा केला खाने से लाभ होता है.

* यदि आपको बार-बार यूरिन होने की समस्या है, तो केले के रस में घी मिलाकर पीएं.

* जलने पर केले को मसलकर जले हुए स्थान पर लगाएं.

* छोटे बच्चे को दस्त हो, तो पके केले को इतना घोंटें कि वह मक्खन की तरह पतला हो जाए और इसे बच्चे को चटा दें. दस्त बंद हो जाएगा.

* पके केले को घी के साथ खाने से पित्त रोग तुरंत शांत होता है.

* एक पका हुआ केला मीठे दूध के साथ लगातार आठ दिन तक सेवन करने से नकसीर की समस्या दूर हो जाती है.

* दो केले को एक टीस्पून शहद में मिलाकर खाने से सीने के दर्द में आराम मिलता है.

* बाल गिरने की समस्या होने पर केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं.

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सुपर टिप

ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर नियमित रूप से केला खाएं. यह रक्त की अशुद्धियों को दूर करने के साथ-साथ शरीर में रक्त के बहाव को भी सही करता है.

रिसर्च

रिसर्च के अनुसार, अवसाद यानी डिप्रेशन के मरीज़ों के लिए केला फ़ायदेमंद है. दरअसल, केले में ऐसे प्रोटीन पाए जाते हैं, जो शरीर को रिलैक्स करते हैं. इसी कारण डिप्रेशन के मरीज़ जब भी केला खाते हैं, तो उन्हें आराम मिलता है.

हेल्थ अलर्ट

केला फ़ायदेमंद तो है, पर इसमें कुछ परहेज़ भी रखें.

* रात में केला न खाएं.

* केला खाने के बाद पानी न पीएं.

* पाचनशक्ति कमज़ोर होने पर इसे न खाएं.

* गठिया और डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे न खाएं.

* केला खाली पेट न खाकर भोजन के बाद ही खाएं, तो अधिक लाभप्रद होगा, क्योंकि यह कब्ज़नाशक और पाचक दोनों है.

– नरेंद्र भुल्लर

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तिल के 11 अमेज़िंग हेल्थ बेनिफिट्स (11 Amazing Health Benefits Of Sesame Seeds)

Health Benefits Of Sesame Seeds

Health Benefits Of Sesame Seeds

छोटी होने के बावजूद तिल गुणों से भरपूर होती है. तिल का उपयोग मकर संक्रांति के अवसर पर तिल के लड्डू, बर्फी, गजक आदि के रूप में करने की हमारे यहां परंपरा है. आइए, तिल के औषधीय गुणों (Health Benefits Of Sesame Seeds) का लाभ भी जानें.

* दांतों की मज़बूती के लिए एक चम्मच तिल रात को चबाकर खाइए.

* तिलों को पानी में पीसकर घावों पर बांधने से घाव जल्दी भर जाते हैं.

* 2 चम्मच काले तिलों को चबाकर ऊपर से ठंडा पानी पीने से बवासीर में लाभ होता है.

* ज़्यादा मूत्र आने की दशा में तिल भूनकर गुड़ के साथ लड्डू बनाएं. इसे सुबह-शाम खाएं. बहुमूत्र की शिकायत दूर हो जाएगी.

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* तिल को पीसकर गोमूत्र में पकाएं. इसे पुल्टिस की तरह फोड़े पर बांधने से फोड़ा पककर फूट जाता है.

* पेटदर्द होने पर एक चम्मच साफ़ तिल चबाकर ऊपर से गर्म पानी पीने से दर्द मिटता है.

* 4 चम्मच काले तिलों को पानी में भिगो दें. दूसरे दिन पीसकर छान लें. इस जल को प्रसवासन्न महिला को पिला देने से शीघ्र प्रसव हो जाता है.

* काले तिल को पीसकर मिश्री मिलाकर बकरी के दूध के साथ पीने से ख़ूनी दस्त में लाभ होगा.

* जाड़े के दिनों में तिल का शुद्ध तेल शरीर पर मलने से शरीर में गर्मी आती है. रक्त की गति तीव्र होती है. स्वास्थ्य बढ़ता है तथा त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाता है.

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* मूली अधिक खा लेने पर होनेवाले अजीर्ण में थोड़ी-सी तिल चबा लेने से तुरंत आराम मिलता है.

* तिल को मक्खन के साथ पीसकर मुंह पर लेप करने से रंग गोरा होता है और कील-मुंहासे आदि ठीक हो जाते हैं.

* तिल के पौधों पर पड़ी ओस को नेत्रों में डालने से खुजली, गर्मी, लालिमा आदि विकार समाप्त हो जाते हैं.

– जहांआरा ख़ान

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इन घरेलू नुस्ख़ों से पाएं घमौरियों से छुटकारा (Get Rid Of The Heat Rash From These Home Remedies)

Heat Rash, Home Remedies

Heat Rash, Home Remedies

गर्मी के दिनों में शरीर पर छोटे-छोटे लाल-लाल दाने (Get Rid Of The Heat Rash) निकल आते हैं, जिसे घमौरी कहते हैं. यह घामपित्ती, गर्मी के दाने आदि नामों से भी जाना जाता है. मस्तक, छाती, पीठ, गर्दन आदि स्थानों पर यह अधिक होती है. ठंडी जगह पर रहने या ठंडी हवा लगने से इसकी उग्रता कम हो जाती है.

कारण
घमौरियां मुख्य रूप से त्वचा की स्वेद ग्रंथियों (पसीनेवाली ग्रंथियां) के विकार के कारण उत्पन्न होती हैं. इसलिए जिन अंगों में पसीना अधिक होता है, वहां पर ये अधिक निकलती हैं. चाय, कॉफी तथा उत्तेजक पदार्थों के अधिक सेवन से भी घमौरियां हो जाती हैं.

लक्षण
जब घमौरियां अपने उग्र रूप में होती हैं, तो उनमें जलन व खुजलाहट बढ़ जाती है. ये प्रायः कमज़ोर बच्चों, गर्भवती स्त्रियों तथा रोगग्रसित व्यक्तियों में अधिक होती हैं, जिससे व्यक्ति बेचैन हो उठता है. रोगी शरीर को जितना अधिक खुजलाता है, चुनचुनाहट एवं जलन उतनी ही बढ़ती जाती है. कभी-कभी खुजलाते-खुजलाते शरीर पर घाव भी हो जाता है.

* जामुन की पत्तियों को पीसकर उसमें खाने का सोडा मिलाकर घमौरियों पर लेप कीजिए.

* सुबह-दोपहर और शाम नींबू पानी का निरंतर सेवन करने से घमौरी निकलती ही नहीं. यदि निकल भी आयी हो, तो इसके सेवन से एक पखवाड़े के भीतर-भीतर शांत हो जाएगी.
* सुबह और दोपहर को एक-एक गन्ना चूसने से भी शरीर की गर्मी शांत होती है और घमौरी मिट जाती है.
* नीम के तेल में कपूर का चूर्ण मिलाकर उस तेल से जहां घमौरियां हुई हैं, वहां मालिश करें. आधे घंटे बाद स्नान करें. इससे आराम मिलता है.
* घमौरी से बचने के लिए नीम के साबुन से स्नान करें.

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* मिट्ठी के कुल्हड़ में आधा लीटर स्वच्छ पीने का पानी भर लें. उस पानी में आंवलों को कपड़े से पोंछकर साफ़ कर डाल दें. आंवले दस-पंद्रह से लेकर बीस तक इस्तेमाल कर सकते हैं. कुल्हड़ पर ढक्कन रख कर रातभर आंवलों को उसमें भिगोये रखें. सुबह हाथ धोकर उन आंवलों को पानी में मसल डालें. फिर उस पानी को छान लें और इच्छानुसार नमक या चीनी मिलाकर पीएं. जितनी प्यास हो, उतना पीयें. इस प्रयोग से पेट साफ़ रहेगा, भूख भी लगेगी और शरीर की गर्मी शांत होगी. घमौरियां एक सप्ताह के भीतर ही साफ़ हो जाएंगी.
* खरबूज का गूदा निकालकर जहां घमौरियां हुई हैं, उस जगह पर लगाने से घमौरियों से राहत मिलती है.

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* कोकम की चार फांके दो गिलास पानी में रातभर भिगोकर सुबह वह पानी तब तक उबालें, जब तक कि वह जलकर एक ग्लास न बन जाए. ठंडा होने पर उसमें 3 चम्मच शक्कर मिलाकर वह पानी पीने से शरीर की गर्मी दूर होती है और घमौरियां मिट जाती हैं.

पथ्यः गर्म चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा ठंडे वातावरण में रहना चाहिए. मोटे कपड़ों के बजाय हवादार झीने कपड़े पहनने चाहिए. नीम के साबुन से सुबह-शाम स्नान करना चाहिए.

परमिंदर निज्जर

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कपूर के 23 चमत्कारी फ़ायदे (23 Miraculous Benefits Of Camphor (Kapur) You Must Know)

Benefits Of Camphor

Benefits Of Camphor

कपूर (Benefits Of Camphor) दो तरह के होते हैं- प्राकृतिक व कृत्रिम. प्राकृतिक कपूर (भीमसेनी कपूर) को पेड़ से निकाला जाता है, जिसे हम खा भी सकते हैं. जबकि केमिकल्स से बना हुआ कृत्रिम कपूर हीलिंग प्रॉपर्टीज़ से भरपूर होता है और इसी काम में लाया जाता है. कपूर ख़ुशबूदार व ज्वलनशील है, इसलिए पूजा-हवन के दौरान वातावरण की शुद्धता के लिए इसका उपयोग करते हैं. इसके कई चिकित्सीय लाभ भी हैं, इसी कारण आयुर्वेदिक उपचारों में भी इसका इस्तेमाल होता है.

* पेटदर्द या गैस व जलन होने पर कपूर, अजवायन व पुदीने को शर्बत में मिलाकर पीने से आराम मिलता है.
* दांत में हुए गड्ढे यानी कैविटी में कपूर रखने से दांत का दर्द कम हो जाता है.
* दिल की कमज़ोरी की वजह से घबराहट होने पर थोड़ा-सा कपूर खाएं, इससे नाड़ी की गति बढ़ जाती है और घबराहट मिट जाती है.
* हैजा होने पर कपूर का अर्क लेने से लाभ होता है.
* बिच्छू काटने पर कपूर को सिरके में पीसकर दंश पर लगाने से बिच्छू का विष उतर जाता है.
* बाल टूट व गिर रहे हों या फिर बालों में रूसी हो, तो नारियल के तेल में कपूर का तेल मिलाकर लगाने से लाभ होता है.
* नकसीर फूटने या नाक से ख़ून निकलने पर गुलाबजल में कपूर पीसकर नाक में टपकाने से नाक से ख़ून गिरना बंद हो जाता है.

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* 10 ग्राम कपूर, 10 ग्राम स़फेद कत्था, 5 ग्राम मटिया सिंदूर- तीनों को एक साथ मिलाकर 100 ग्राम घी के साथ कांसे की थाली में हाथ की हथेली से ख़ूब मलकर ठंडे पानी से धोकर रख लें. इसे घाव, गर्मी के छाले, खुजली और सड़े हुए घाव पर लगाने से शीघ्र लाभ होता है.
* काली खांसी होने पर कपूर की धूनी सूंघने से लाभ होता है. पुरानी खांसी में कपूर व मुलहठी को मुंह में रखकर चूसने से राहत मिलती है.
* नाक बंद होने की स्थिति में कपूर की पोटली सूंघने से नाक खुल जाएगी.
* खुजली होने पर कपूर को चमेली के तेल में मिलाकर उसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर शरीर पर मलने से खुजली तुरंत मिट जाती है.
* कपूर जलाने से मक्खियां-मच्छर भाग जाते हैं.
* ज्यादा तंबाकू खाने या ग़लती से तंबाकूवाला पान खा लेने पर चक्कर आता है, ऐसी स्थिति में जी मिचलाता हो, तो कपूर की एक छोटी डली खाने से तुरंत आराम मिलता है.
* गद्दों व तकियों में कपूर रख देने से खटमल भाग जाते हैं.

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* चेचक व खसरे के दाने सूख जाने पर नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाने से ठंडक मिलती है और खुजलाहट भी दूर होती है.
* 1-1 टीस्पून कपूर और हींग पीसकर गोली बनाकर दमे (अस्थमा) के मरीज़ को दौरे के समय 2-2 घंटे पर देने से दमा का दौरा रुक जाता है.े से लाभ होता है.
* कपूर और अफीम को राई के तेल में मिलाकर मालिश करने से गठिया रोग दूर हो जाता है.
* न्यूमोनिया हो जाने पर तारपीन के तेल में कपूर मिलाकर मरीज़ की छाती पर मलने से शीघ्र आराम मिलता है.
* तनाव, सिरदर्द, डिप्रेशन आदि में सिर पर कपूर के तेल की मालिश करने से आराम मिलता है, क्योंकि कपूर की ख़ुशबू मस्तिष्क की नसों को आराम पहुंचाती है.
* चेहरे की डेड स्किन को दूर करने के लिए थोड़े-से दूध में कपूर पाउडर मिलाकर रूई से चेहरे पर लगाएं. थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें.
* बवासीर की समस्या में केले में चने बराबर प्राकृतिक कपूर रखकर खाने से लाभ होता है.
* पैर की फटी एड़ियों की समस्या होने पर गरम पानी में कपूर मिलाकर उसमें कुछ देर पैर डुबोकर रखें.

सुपर टिप
घाव-चोट लगने, खरोंच होने या फिर जलने पर कपूर लगाने से जलन की तकलीफ़ कम होती है. साथ ही पानी में कपूर घोलकर घाव पर लगाने से जलन कम होती है और ठंडक भी मिलती है.

– रीटा राजकुमार

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आम के 8 औषधीय गुण (8 Benefits Of Mango For Health)

Benefits Of Mango For Health

Benefits Of Mango For Health

* आम के ताज़े हरे पत्तों का अर्क गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है.

* आम की गुठली की गिरी का रस नाक में टपकाने से नाक से ख़ून बहना बंद हो जाता है.

* अमचूर को पानी में पीसकर लगाने से छोटी-छोटी फुंसियां ठीक हो जाती हैं.

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* आम (Benefits Of Mango For Health) की गुठली को पीसकर खाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं.

* यदि पेशाब रुक गई हो, तो आम की जड़ का छिलका और शीशम के पत्ते पानी में उबालकर, शक्कर मिलाकर पीएं. अवश्य लाभ होगा.

* दमे में आम की गुठली की 5 ग्राम बुकनी पानी के साथ सुबह लें, तो दमे की शिकायत दूर हो जाएगी.

* इंपोटेंसी (नपुंसकता) की समस्या होने पर आम के रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करें. सुबह लेने से अधिक लाभ होगा. 15-20 दिन में ही आपकी शिकायत दूर हो सकती है.

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* आम के 50 मि.ली. रस में 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ मिलाकर सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है.

– पन्नालाल गुप्ता

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मुलहठी के 21 चमत्कारी फ़ायदे (21 Amazing Benefits And Uses Of Mulethi)

Benefits And Uses Of Mulethi

Benefits And Uses Of Mulethi

मुलहठी (Benefits And Uses Of Mulethi) स्वाद में मधुर, शीतल, पचने में भारी, स्निग्ध और शरीर को बल देनेवाली होती है, इन गुणों के कारण यह बढ़े हुए तीनों दोषों को शांत करती है.
* खांसी, जुकाम में कफ को कम करने के लिए मुलहठी का ज्यादातर उपयोग किया जाता है.
* बढ़े हुए कफ से गला, नाक, छाती में जलन हो जाने जैसी अनुभूति होती है, तब मुलहठी को शहद में मिलाकर चटाने से बहुत फायदा होता है.
* बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं. शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है.
* यह स्वाद में मधुर होने के कारण प्रायः सभी बच्चे बिना झिझक के इसे चाट लेते हैं.
* मुलहठी बुद्धि को भी तेज करती है. अतः छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं.
* यह हल्की रेचक होती है. अतः पाचन के विकारों में इसके चूर्ण को इस्तेमाल किया जाता है. विशेषतः छोटे बच्चों को जब कब्ज होती हैं, तब हल्के रेच के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है.
* छोटे शिशु कई बार शाम को रोते हैं. पेट में गैस के कारण उन्हें शाम के वक्त पेट में दर्द होता है, उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेटदर्द शांत हो जाता है.

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* मुलहठी की मधुरता से पित्त का नाश होता है. आमाशय की बढ़ी हुई अम्लता एवं अम्लपित्त जैसी व्याधियों में मुलहठी काफी उपयुक्त सिद्ध होती है.
* आमाशय के अंदर हुए व्रण (अलसर) को मिटाने के लिए एवं पित्तवृद्धि को शांत करने के लिए मुलहठी का उपयोग होता है. मुलहठी को मिलाकर पकाए गए घी का प्रयोग करने से अलसर मिटता है.
* यह कफ को आसानी से निकालता है. अतः खांसी, दमा, टीबी एवं स्वरभेद (आवाज बदल जाना) आदि फेफड़ों की बीमारियों में बहुत ही लाभदायक है.
* कफ के निकल जाने से इन रोगों के साथ बुखार भी कम हो जाता है. इसके लिए मुलहठी का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाने से भी फायदा होता है.
* पेशाब की जलन मुलहठी के सेवन से कम होती है और पेशाब की रुकावट दूर होती है.
* मुलहठी शरीर के भीतरी एवं बाहरी जख्मों को जल्दी भरता है, अतः जहां पर जख्म से रक्तस्राव होता है, उस पर मुलहठी का उपयोग फायदेमंद होता है.
* केवल मुलहठी के चूर्ण के सेवन से गुदा से होनेवाला रक्तस्राव, वह चाहे जिस वजह से हो, बंद हो जाता है. जख्मों पर भी मुलहठी का लेप करें. इससे रक्तस्राव रुक जाता है और जख्म ठीक हो जाता है.
* त्वचा रोगों में भी मुलहठी लाभकारी है. चेहरे के मुंहासों को दूर करने के लिए मुलहठी का लेप बनाकर इस्तेमाल किया जाता है. इससे त्वचा का रंग निखर आता है, त्वचा की जलन और सूजन दूर होती है.
* यौवन को बनाए रखने के लिए इसका भीतरी एवं बाहरी प्रयोग काफी लाभदायी होता है.
* गुदा से रक्तस्राव होने पर मुलहठी आधा ग्राम, काली मिट्टी एक ग्राम और शंखभस्म 250 मि.ग्राम एक साथ मिलाकर शहद और चावल के धोबन के साथ दिन में चार बार सेवन करने से लाभ होता है.
* मुलहठी 1/2 ग्राम, पिपलामूल 1/2 गा्रम में गुड़, शहद और घी को स्वाद के अनुसार मिलाकर 3-4 बार सेवन करने से खांसी से राहत मिलती है.

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* आंखों की जलन दूर करने के लिए मुलहठी और पद्माख को जल के साथ घिसकर आंखों के ऊपर लेप करें.
* मुलहठी, काला तिल, आंवला और पद्मकेशर के चूर्ण में शहद मिलाकर उसका लेप सिर पर करने से बाल मजबूत और काले होते है.
* त्वचा के जख्म में जलन और पीड़ा हो रही हो तो जौ के आटे में मुलहठी और तिल का चूर्ण तथा घी मिलाकर पेस्ट जैसा बना लें. इसे जख्म पर लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता हैं.

– मूरत गुप्ता

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बर्फ के 8 अमेज़िंग फ़ायदे (8 Amazing Health Benefits Of Ice)

Health Benefits Of Ice

Health Benefits Of Ice

आजकल बर्फ (Health Benefits Of Ice) का प्रयोग आम आदमी की ज़िंदगी की एक आवश्यक चीज़ बन गया है. बर्फ केवल खाने-पीने के काम ही नहीं आता, बल्कि रोगों की चिकित्सा में भी इसका प्रयोग होता है.

* शरीर के किसी भी भाग में ख़ून बह रहा हो, तो उस जगह बर्फ लगाने से ख़ून बहना शीघ्र ही बंद हो जाता है.

* फांस गड़ जाने पर बर्फ लगा देने से वह जगह सुन्न हो जाती है, जिससे फांस आसानी से निकाली जा सकती है.

* पैर में मोच आ जाने पर उस स्थान पर बर्फ रगड़ें. इससे मोच के कारण सूजन नहीं आती.

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* गर्मी में लू लगने पर बर्फ के टुकड़े हाथ-पैरों पर मलने से शीघ्र आराम मिलता है.

* अधिक तेज़ बुखार आने पर या जब दवा से भी बुखार कम न हो, तब सिर पर बर्फ की पट्टी रखने और शरीर पर बर्फ मलने से बुखार शीघ्र उतर जाता है.

* गर्मी की घमौरियों पर बर्फ का टुकड़ा मलने से घमौरियां मुरझा जाती हैं, जिससे शरीर को घमौरियों से राहत मिलती है.

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* गर्मी में नाक से ख़ून बहने पर बर्फ का टुकड़ा नाक के आसपास रखने से नाक से ख़ून बहना बंद हो जाता है.

* गर्मी के कारण जब पेट में जलन, उबकाई, दस्त आदि होने लगे तो पेट पर बर्फ रगड़ने व बर्फयुक्त पानी पीने से तुरंत लाभ होता है.

– भावना अमित

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गन्ने के रस के 13 फ़ायदे (13 Benefits Of Sugarcane Juice)

Benefits Of Sugarcane Juice

Benefits Of Sugarcane Juice

गन्ने (Benefits Of Sugarcane Juice) का रस थकान मिटानेवाला, शीतल,मधुर तथा शुक्र शोधक है. पोषण, ऊर्जा एवं शक्ति की दृष्टि से जितना उपयोगी यह है, उतना इससे बने गुड़, चीनी आदि नहीं हैं. आप भी इसके गुणों का लाभ उठाएं.

गन्ने का रस थकान मिटानेवाला, शीतल,मधुर तथा शुक्र शोधक है. पोषण, ऊर्जा एवं शक्ति की दृष्टि से जितना उपयोगी यह है, उतना इससे बने गुड़, चीनी आदि नहीं हैं. आप भी इसके गुणों का लाभ उठाएं.

* रक्त में शर्करा की कमी तथा चक्कर आने की स्थिति में गन्ने का रस पीना चाहिए.

* गन्ने के रस में नींबू का रस डालने से वह काफी स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यपयोगी बन जाता है.

* गन्ने के रस में विटामिन बी के सभी गुण होने के कारण यह श्रेष्ठ किस्म का नर्व टॉनिक भी कहलाता है.

* इसके प्रयोग से पाचन क्रिया में सुधार आता है.

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* गन्ने का रस (Benefits Of Sugarcane Juice) स्नायुविक शक्ति में वृद्धि करता है.

* इसमें उत्तम किस्म का लोहा मिलता है, जो शीघ्रता से शरीर में अवशोषित होकर रक्त की कमी को दूर करता है.

* गन्ने के रस में प्रोटीन, वसा, कार्बोज भी होते हैं.

* इसमें प्रचुर मात्रा में इनॉसिटल होने की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती है.

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* इसके रस को अधिक पकाकर पीने से दस्त साफ होती है.

* अदरक के साथ गन्ना चूसने से आवाज सुरीली होती है.

* गन्ने का रस पीलिया रोग में बड़ा लाभप्रद है. यह पीलिया की जड़ काट देता है.

* उल्टी में गन्ने का रस पीने से मन को शांति मिलती है.

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* गन्ने के रस में आंवले का रस, अनार का रस और शहद मिलाकर पीने से पांडुरोग दूर होता है और रक्त की वृद्धि होती है.

* गन्ने के रस का नस्य लेने से हिचकी बंद हो जाती है.

– रेषा गुप्ता

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कद्दू खाने के 15 चमत्कारी फ़ायदे (Health Miracles: 15 Benefits Of Having Pumpkin)

Benefits Of Having Pumpkin

कद्दू (Benefits Of Having Pumpkin) एक लाभकारी और पित्तशामक साग है. इसमें दिमाग़ की कमज़ोरी को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है. कद्दू ठंडक पहुंचानेवाला होता है. इसके सेवन से शरीर में आवश्यक तत्वों की कमी नहीं होती है. इसके अतिरिक्त यह शरीर में मोटापा नहीं आने देता. कद्दू के बीज विषनाशक और उदर कृमिनाशक होते हैं. ये शरीर में पहुंचनेवाले व उत्पन्न होनेवाले अनेक विषैले पदार्थों को नष्ट कर देते हैं. ये आयरन, ज़िंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं. इसमें फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है, जिससे पेट हमेशा साफ़ रहता है. 

* कद्दू के बीज की गिरी के आटे को घी में भूनकर उसमें शक्कर मिलाकर लड्डू बनाएं. हर रोज़ सुबह एक लड्डू खाकर ऊपर से दूध पीने से शारीरिक कमज़ोरी दूर हो जाती है.

* मूत्र विकारों में 20 से 25 ग्राम कद्दू के बीजों की गिरी में शहद या मिश्री मिलाकर इस्तेमाल करने से लाभ होता है.

* डायबिटीज़ के मरीज़ नियमित भूरे कद्दू का रस पीएं, तो ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है.

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* उन्माद में जब मरीज़ की आंखें लाल हों, नाड़ी गति तीव्र हो और मरीज़ उत्तेजित हो, तो भूरे कद्दू का रस पिलाने से आराम मिलता है.

* कद्दू के रस में शक्कर मिलाकर पीने से अम्ल पित्त की शिकायत दूर हो जाती है.

* भूरे कद्दू का साग घी में बनाकर खाने या उसके रस में शक्कर मिलाकर आधा कप की मात्रा में सुबह-शाम पीने से स्त्रियों को अत्यधिक मासिक ऋतुस्राव, शरीर का दाह और खून की कमी में उत्तम लाभ होता है.

* 20-40 ग्राम कद्दू के बीज को पीसकर सेवन करने और ऊपर से विरेचन औषधि लेने से पेट और आंतों के कीड़े मर कर निकल जाते हैं.

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* भूरे कद्दू को सुखाकर चूर्ण बनाकर खाने, उसकी तरकारी बनाकर खाने या उसका पाक बनाकर सेवन करने से पीलिया दूर हो जाता है. यह पीलिया की उत्तम व सरल औषधि है.

* कद्दू में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है. पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है. बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है.

* चोट, घाव आदि होने पर 50 से 100 ग्राम तक कच्चे कद्दू का सेवन सेप्टिक को भी रोक देता है.

* कद्दू को डंठल की ओर से काटकर तलवों पर रगड़ने से शरीर की गर्मी ख़त्म होती है.

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* कद्दू लंबे समय के बुख़ार में भी असरकारी होता है. इससे शरीर की हरारत या उसका आभास दूर होता है.

* प्रयोगों से पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटी बैक्टीरिया तत्व होता है, जो संक्रमण फैलानेवाले जीवाणुओं से रक्षा करता है.

* कद्दू में कुछ ऐसे मिनरल्स होते हैं, जो दिमाग़ की नसों को आराम पहुंचाते हैं. यदि आपको रिलैक्स होना है, तो आप कद्दू खा सकते हैं.

* कई महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है, जिससे उन्हें एनीमिया हो जाता है. ऐसे में कद्दू बेहद सस्ता उपाय है और ये पौष्टिक भी होता है.

– कियारा साहू

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