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त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

Health Benefits Of Triphala
Health Benefits Of Triphala
त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

आज के दौर में हर उम्र के व्यक्ति को जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां होना आम बात है. बदलते फास्ट लाइफ और बदलते समय के साथ-साथ, हमारे खाने-पीने की आदतों में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसने हमारे स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, ख़ासतौर से हमारे पाचन तंत्र पर इसका काफ़ी असर हुआ है. लेकिन अपने पाचन तंत्र को हेल्दी बनाए रखने का एक बेहद आसान तरीका है अपने डेली रुटीन में त्रिफला को शामिल करना.

त्रिफला सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक हर्बल उपचारों में से एक है. यह तीन फलों- आंवला, बहेड़ा और हरितकी का मिश्रण है. डॉ. हरिप्रसाद, अनुसंधान वैज्ञानिक, हिमालय ड्रग कंपनी आपको ऐसे पांच कारण बता रहा है, जिन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि अपने दैनिक आहार में त्रिफला को क्यों शामिल करना चाहिए.

कब्ज़ से राहत: आयुर्वेद ग्रंथों और समकालीन शोध अध्ययनों में कहा गया है कि त्रिफला पेट को खाली करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है और लंबे समय से बनी कब्ज़ से राहत देतीा है. त्रिफला के तीन हर्बल अवयवों में से प्रत्येक हमारे शरीर की देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी जड़ी-बूटियां हमारे शरीर से आंतरिक कचरे को बाहर निकालकर सफाई करने में मदद करती है. साथ ही साथ, इससे पाचन में भी सुधार होता है.

जठरांत्र या गैस्ट्रो-इंटेस्टानल टिश्यूज़ को शांत और जीवंत करना: त्रिफला में मिले आंवला में शामक और प्रदाह शांत करनेवाले गुण होते हैं, जो आंतों के अंदरूनी परत को फिर से जीवंत करने में मदद करता है. यह आंतों की दीवारों को ठंडा और
शांत करता है, इससे पेट फूलने और डकार-उबकाई से राहत मिलती है.

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धीरे-धीरे नियमितता बनाए रखता है: त्रिफला चयापचय को उत्तेजित करने में मदद करता है और हमारे शरीर के पाचनतंत्र को आराम देता है. हर रात सोने से पहले एक छोटी-सी खुराक मल त्याग को विनियमित करने में मदद करती है.

शरीर को विषमुक्त करता है: आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार त्रिफला का चूर्ण शरीर से चयापचय और पाचन के बाद बचे व्यर्थ पदार्थों से शरीर को शुद्ध करके पेट और बड़ी आंत के विषमुक्त करता है.

प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट: त्रिफला में कई एंटीऑक्सीडेंट तत्व शामिल हैं, जिनमें गैलिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स और टैनिन प्रमुख हैं, ये शरीर में स्वाभाविक रूप से ऐसे मुक्त कणों को निशाना बनाता है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने में

सक्षम होते हैं. तीन फलों से प्राप्त हुए सक्रिय तत्व एंटीऑक्सीडेंट के प्रभाव को बढ़ाते हैं और मल त्याग के लिए प्रेरित करते हैं.
तो त्रिफला का प्रयोग अब नियमित रूप से करें और अपनी संपूर्ण सेहत का ध्यान रखें, ताकि आनेवाला कल सेहतमंद बने.

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बच्चों के आम रोगों के उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Common Diseases Of Children)

जन्म के बाद से पांच वर्ष की उम्र तक का समय बच्चे की परवरिश की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान ही उसके रक्त, मांस, सभी अवयव, मस्तिष्क आदि का विकास होता है. ऐसे समय में थोड़ी-सी लापरवाही या आम बीमारियां (Common Diseases) उनके शारीरिक या मानसिक विकास को रोक सकती हैं. आइए, इस उम्र में बच्चों (Children) को होनेवाली छोटी-मोटी समस्याओं के घरेलू इलाज (Home Remedies) के बारे में जानते हैं.

Common Diseases Of Children

गैस-कब्ज़

* आधा टीस्पून लहसुन के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पिलाएं. तुरंत गैस से राहत मिलेगी.

* चुटकीभर सेंकी हुई हींग का चूर्ण घी में मिलाकर चटाने से शिशु को गैस से आराम मिलता है.

* जीरा या अजवायन को पीसकर पेट पर लेप करने से वायु का अवरोध दूर होता है और बच्चा राहत महसूस करता है.

* हींग को भूनकर उसे पानी में घिसकर नाभि के चारों ओर लेप करें. गैस का शमन होगा और बच्चा चैन की सांस लेगा.

* रात को बीज निकाला हुआ छुहारा पानी में भिगो दें. सुबह उसे हाथ से मसलकर निचोड़ लें और छुहारे के गूदे को फेंक दें. छुहारे के इस पानी को बच्चे को आवश्यकतानुसार 3-4 बार पिलाएं. इससे कब्ज़ की शिकायत दूर होगी.

* बड़ी हरड़ को पानी के साथ घिसकर उसमें चुटकीभर काला नमक मिलाएं. इसे गुनगुना करके आवश्यकतानुसार दिन में 2-3 बार बच्चे को दें. अवश्य लाभ होगा.

खांसी-ज़ुकाम

* शिशु को खांसी-ज़ुकाम हो, तो थोड़ा-सा सरसों का तेल प्रतिदिन उसकी छाती पर मलें. शीघ्र ही आराम होगा.

* थोड़ा-सा सोंठ का चूर्ण गुड़ व घी के साथ मिलाकर चटाने से बच्चे की खांसी-ज़ुकाम ठीक होती है.

* आधा इंच अदरक व 2 तेजपत्ता को एक कप पानी में भिगोकर काढ़ा बनाएं. इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिनभर में तीन बार पिलाएं. खांसी-ज़ुकाम दो दिन में ठीक हो जाएगा.

* बच्चे की छाती पर कफ़ जम जाए, तो उसकी छाती पर थोड़ा गाय का घी मलें. इससे कफ़ पिघलकर बाहर आ जाएगा और बच्चे को आराम मिलेगा.

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बुख़ार

* कालीमिर्च के चूर्ण में 125 मि.ग्रा. तुलसी का रस व शहद मिलाकर दिन में तीन बार दें.

* बुख़ार तेज़ हो, तो प्याज़ को बारीक़ काटकर पेट व सिर पर रखें. बुख़ार कम होने लगेगा.

* बुख़ार में सिरदर्द हो, तो गर्म पानी या दूध में सोंठ का चूर्ण मिलाकर सिर पर लेप करें या जायफल पानी में पीसकर लगाएं.

* बुख़ार में पसीना अधिक हो, हाथ-पैरों में ठंड लगे, तो सोंठ के चूर्ण को हल्के हाथों से लगाएं. लाभ होगा.

मतली

* 1-1 टीस्पून अदरक का रस, नींबू का रस और शहद को मिलाकर चटाएं.

* आधा-आधा टीस्पून अदरक व प्याज़ का रस मिलाकर पिलाएं.

* चुटकीभर अजवायन और लौंग का चूर्ण लेकर शहद के साथ चटाएं.

* छोटी इलायची को भूनकर उसका कपड़छान चूर्ण बनाएं. चुटकीभर चूर्ण आधा चम्मच नींबू के रस में मिलाकर खिलाएं.

* इलायची के छिलकों को जलाकर उसकी भस्म चटाने से भी मतली में लाभ होता है.

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नींद में डरना

* सर्दी के मौसम में एक से दो ग्राम सौंफ पानी में उबालकर उसे छान लें. इसे रात को सोने से पहले बच्चे को पिला दें. इससे नींद में डरने की शिकायत दूर होगी.

* गर्मी के मौसम में छोटी इलायची का एक ग्राम अर्क सौंफ के उबले हुए पानी के साथ पिलाएं. नींद में डरने की आदत छूट जाएगी.

सुपर टिप

आधा चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार बच्चे को पिलाने से सर्दी-खांसी में तुरंत राहत मिलती  है.

– परमिंदर निज्जर

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जानें हींग के 13 आश्‍चर्यजनक फ़ायदे (13 SURPRISING BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA)

BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA

हींग (Hing) का उपयोग विशेषतः दाल-साग को बघारने में होता है. परंतु अनेक रोगों के निवारण में भी यह सक्षम है. इसके सेवन से कफ, वायु दोष नहीं होते. उचित मात्रा में हींग (Asafoetida) का सदैव प्रयोग करना चाहिए. यह बहुत लाभप्रद (Beneficial) है. इसके अनेक औषधीय गुण हैं.

BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA

1. 2 चम्मच सरसों के तेल में 1 ग्राम हींग, दो कली लहसुन और ज़रा-सा सेंधा नमक भून लें. जब हींग जल जाए, तो तेल को छानकर शीशी में भरकर रख लें. कान में दर्द या सांय-सांय होने पर दो-दो बूंद तेल रोज रात को कानों में डालें. प्रतिदिन एक सप्ताह तक ऐसा करने से कान दर्द, खुश्की और सांय-सांय की आवाज की शिकायत दूर हो जाती है.

2. हींग को घी में भून लीजिए. फिर काली मिर्च, वायबिडंग, कूठ, सेंधा नमक और भुनी हुई हींग, सभी 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीस-छानकर शीशी में भर लें. कुकुर खांसी होने पर आधा या एक ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटें. यह नुस्ख़ा सिर्फ एक हफ्ते में ही चमत्कार दिखा देता है.

3. कौड़ी (गिल्टी का दर्द) हो, तो एक बीज निकाला हुआ मुनक्का लेकर उसमें दो ग्राम भुनी हींग मिलाकर नबा जाइए. ऊपर से दो घूंट गर्म पानी पी लें. असर होते देर नहीं लगेगी. दूसरे दिन इस दवा की एक ख़ुराक और ले लीजिए. रोग हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

4. हींग, सोंठ और मुलहठी 2-2 ग्राम लेकर पीस लें. फिर मधु मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें. भोजन के बाद एक गोली सुबह और एक गोली रात को चूसिए. कब्ज़ से राहत मिलेगी.

5. हींग को शराब में खरल करके सुखा लीजिए. इसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से खांसी, श्‍वास और दूषित कफ विकार में अत्यंत लाभ होता है.

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6. हींग, सेंधा नमक और घी 10-10 ग्राम लेकर 120 मि.ली. गोमूत्र में मिलाइए. उसे इतना उबालिए कि केवल घी बाकी रह जाए. यह घी पीने से मिर्गी दूर होती है.

7. हींग, कालीमिर्च और कपूर- प्रत्येक 10-10 ग्राम और अफीम 4 ग्राम लेकर अदरक के रस में छह घंटे तक घोंटिए. फिर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाइए. एक या दो गोली दिन में तीन बार लेने से दस्त से छुटकारा मिलता है.

8. हींग, कपूर और आम की गुठली समभाग में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें. चार-चार घंटे पर यह गोली देने से हैजे में फ़ायदा होता है.

9. घी में सेंकी हुई हींग घी के साथ खाने से प्रसूता स्त्री को आने वाला चक्कर (सिर चकराना) और शूल मिटता है.

10. हींग का चार माशा चूर्ण बीस तोले दही में मिलाकर पीने से और दोपहर को केवल दही-भात खाने से या स़िर्फ दही सेवन करने से तीन दिन में ही नारू बाहर निकल आता है.

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11. पेट में गैस हो गई हो, पेट फूल कर ढोल के समान बन गया हो, पेट में दर्द हो रहा हो, तो नाभि के आसपास और पेट पर हींग का लेप करने से थोड़े समय में ही आराम हो जाता है.

12. हींग और अफीम बराबर-बराबर लेकर तिल के तेल या मोम और तेल में अच्छी तरह पीसें. यह मलहम कंठमाल पर लगाने से कंठमाल पककर फूट जाता है और आराम मिलता है.

13. हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत की पीड़ा दूर होती है. यदि दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दंतकृमि मर जाते हैं और दांत की पीड़ा दूर हो जाती है.

– मूरत गुप्ता

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आंवला के 17 चमत्कारी फ़ायदे (17 Magical Health Benefits Of Amla)

Health Benefits Of Amla

आंवला (Health Benefits Of Amla) हमारे देश के श्रेष्ठ फलों में से एक है. यह आयुवर्द्धक, कल्याणकारी, श्रीफल, अमृतफल आदि नामों से भी जाना जाता है. आंलवा कफ़, पित्त, वायु को दूर करता है. इसके नियमित सेवन से आंखों की ज्योति बढ़ती है. यह हृदय रोग में भी लाभकारी है. इससे जिगर को ताक़त मिलती है. हरा आंवला रसायन होता है, सूखा आंवला कफ़ को नष्ट करता है. यह ख़ून की गर्मी को शांत करता है तथा हड्डियों को मज़बूत बनाता है. यह भूख को बढ़ानेवाला, पाचनशक्ति को ठीक करनेवाला तथा त्वचा रोगों को नष्ट करनेवाला भी माना जाता है.

Health Benefits Of Amla

1. एक छोटा चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को दूध के साथ सेवन करें. यह आंतों को साफ़ कर कब्ज़ दूर करता है.

2. सूखा आंवला तथा काला नमक समान भाग में लेकर चूर्ण बना लें. अजीर्ण से होनेवाले दस्त में आधा चम्मच चूर्ण दिन में तीन बार पानी के साथ सेवन करें. दस्त बंद हो जाएंगे.

3. बवासीर की शिकायत होने पर आंवले का चूर्ण दही के साथ नियमित लेना चाहिए.

4. तीन भाग ताज़े आंवले के रस में एक भाग शहद मिलाकर सुबह-दोपहर-शाम को लें. पीलिया में आश्चर्यजनक लाभ होगा.

5. नेत्र रोगों में आंवले का चूर्ण गाय के दूध के साथ नियमित सेवन करना चाहिए. इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है.

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6. आंवले को आग पर भूनकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर बारीक़ पीस लें. साथ ही इसमें दो-तीन बूंदें सरसों के तेल की मिला दें. इससे नियमित मंजन करने से पायरिया रोग का नाश होता है.

7. आंवले के रस में चंदन अथवा पीपरि का चूर्ण डालकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद होती है.

8. हड्डी टूटने पर आवश्यक उपचार के बाद नियमित रूप से आंवले का रस किसी फल के रस में मिलाकर लें. विशेष लाभ होगा.

9. आंवला और हल्दी 10-10 ग्राम लेकर काढ़ा बना कर पीने से मूत्र मार्ग और गुदा मार्ग की जलन शांत होती है और पेशाब साफ़ होता है.

10. बीस ग्राम आंवले के रस में एक पका हुआ केला मसलकर, उसमें 5 ग्राम शक्कर मिलाकर खाने से स्त्रियों का सोमरोग (बहुमूत्र रोग) दूर हो जाता है.

11. आंवले का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है.

12. एक औंस ताज़े आंवले का रस नित्य प्रातः खाली पेट एक हफ़्ते तक लें. पेट के कीड़े मर जाएंगे.

13. यदि नकसीर किसी प्रकार बंद न हो तो ताज़े आंवले का रस नाक में टपकाएं, नकसीर बंद हो जाएगी. जिन्हें अक्सर नकसीर की शिकायत रहती है, उन्हें नित्य आंवले का सेवन तथा सिर पर आंवले का लेप करना चाहिए.

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14. आंवले और काले तिल का बारीक़ चूर्ण बना लें. यह चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में घी या शहद के साथ नियमित चाटने से वृद्धत्व दूर होता है और शक्ति आती है.

15. बाल गिरते हों या कम उम्र में स़फेद हो गए हों, तो आंवले का चूर्ण पानी में मिलाकर तुलसी की हरी पत्तियों को पीसकर उसमें मिला दें. इसे बालों की जड़ों में मलें. 10 मिनट के बाद बाल धो लें, नियमित कुछ दिन तक ऐसा करने से बालों का गिरना तथा सफ़ेद होना रुक जाता है.

16. ताज़े आंवले के रस में थोड़ा नमक मिलाकर पीने से डायबिटीज़ कुछ महीने में ही ठीक हो जाता है.

17. आंवले के चूर्ण का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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मदर्स केयर- बच्चों की खांसी के 15 घरेलू असरदार उपाय (Mothers Care- 15 Tips For Relieving In Baby Cough)

Tips For Relieving In Baby Cough

Tips For Relieving In Baby Cough

  1. एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से कफ तथा खांसी से राहत मिलती है.
  2. अंजीर खाने से छाती में जमा बलगम निकल जाता है और खांसी से छुटकारा मिलता है.
  3. बड़ी इलायची का चूर्ण दो-दो ग्राम दिन में तीन बार पानी के साथ लेने से सभी प्रकार की खांसी से आराम मिलता है.
  4. काली खांसी होने पर कपूर की धूनी सूंघने से लाभ होता है.
  5. खांसी को कम करने के लिए मिश्री के साथ अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाइए. इससे खांसी से शीघ्र आराम मिलेगा.
  6. अदरक का रस शहद के साथ रात को सोते समय चाटें. इसके बाद पानी न पीएं. इससे खांसी में राहत पहुंचेगी.
  7. काली मिर्च तथा मिश्री या मुलहठी को मुख में रखकर चूसें. इससे सूखी खांसी में आराम मिलता है.
  8. तवे पर फिटकरी भून लें और उसका चूर्ण बनाकर मिश्री या शहद के साथ सेवन करें. सूखी खांसी से राहत मिलेगी.

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  1. एक चम्मच सोंठ का चूर्ण (भूना हुआ), थोड़ा-सा गुड़ और एक चुटकी अजवाइन इन तीनों को एक साथ मिलाकर खाएं और ऊपर से गर्म दूध पीकर कम्बल ओढ़कर सो जाएं. खांसी से छुटकारा मिलेगा.
  2. काली खांसी को खत्म करने के लिए काले बांस को जलाकर राख बना लें. इसे शहद के साथ मिलाकर चाटें.
  3. एक तोला मुलहठी, चौथाई तोला काली मिर्च, आधा तोला सोंठ, आधा तोला अदरक- इन सबको बारीक पीसकर छान लें और दो तोले गुड़ में मिलाकर बेर के बराबर गोलियां बना लें. 1-1 गोली सुबह-शाम गर्म पानी के साथ सेवन करें. इससे काली खांसी खत्म हो जाएगी.
  4. बादाम की 5 गिरी, 5 मुनक्का और 5 काली मिर्च- इन्हें मिश्री के साथ पीसकर गोली बना लें. चार-चार घंटे पर एक गोली चूसें. इससे खांसी दूर हो जाएगी.
  5. खांसी में थोड़े-से नमक में बराबर मात्रा में हल्दी मिलाकर फांक लें और ऊपर से एक कप गुनगुना दूध पी लें.
  6. चाय के पानी में चुटकी भर नमक मिलाकर सोते समय गरारे करने से भी खांसी में लाभ होता है.
  7. खांसी आने पर अरवी की सब्जी खाएं. इससे खांसी तुरंत ठीक हो जाएगी.

– रेखा गुप्ता

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औषधीय गुणों से भरपूर राई (10 Incredible Mustard Benefits)

Mustard Benefits

राई (Mustard Benefits) बहुत ही गुणकारी एवं पाचक है. दादी मां के खज़ाने में दवा के रूप में इसके घरेलू नुस्ख़े उपलब्ध हैं. लाल व सफेद राई कफ व पित्त को हरने वाली, तीक्ष्ण, गर्म और अग्नि को प्रदीप्त करने वाली होती है. यह खुजली, कोढ़ और पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाली होती है. काली वाई में भी यही गुण हैं. परंतु यह अत्यंत तीक्ष्ण होती है. इसके प्रसिद्ध घरेलू नुस्ख़े निम्न हैं.

Mustard Benefits

* राई को बारीक पीसकर पेट पर लेप करने से उल्टी तुरंत बंद हो जाती है.

* राई (Mustard Benefits) पीसकर सूंघने से जुकाम शीघ्र दूर हो जाता है. जुकाम की वजह से पैर ठंडे हो जाने पर राई का लेप हितकारी है.

* राई के एक-दो माशे चूर्ण में थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर खाने और ऊपर से एक कप पानी पीने से पेटदर्द दूर होता है.

* राई चार रत्ती, सेंधा नमक दो रत्ती और शक्कर दो माशा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खांसी में कफ़ गाढ़ा हो गया हो तो पतला होकर सरलता से निकल जाता है.

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* यदि किसी ने जाने-अनजाने विष खा लिया हो, तो आधा तोला पिसी हुईराई और आधा तोला नमक गर्म पानी में मिलाकर पीने से उल्टी होती है, जिससे विष बाहर निकल जाता है.

* राई के तेल में नमक मिलाकर दांत साफ करें. इससे दांत एवं मसूड़े स्वस्थ एवं मजबूत होते हैं.

* वात-व्याधि से जकड़ गए अंगों पर राई की पुल्टिस बांधने अथवा राई का प्लास्टर करने से लाभ होता है.

* गुड़, गुग्गुल और राई को पीसकर पानी में उबालकर लेप करने से कंखवारी मिटती है. कहावत भी है गुड़, गुग्गुल और पिसी राई, क्या करती उसे कंखवारी.

* राई के आटे को आठ गुने गाय के पुराने घी में मिलाकर उसका लेप करने से थोड़े दिनों में सफेद कोढ़ मिट जाता है. इस लेप से खाज-खुजली और दाद में भी फ़ायदा होता है.

* मिर्गी-मूर्च्छा में राई के आटे का नस्य दिया जाता है.

– ओमप्रकाश गुप्ता

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अमरूद खाने के 7 चमत्कारी फ़ायदे (7 Health Benefits of Guava)

Health Benefits of Guava

Health Benefits of Guava

अमरूद (Health Benefits of Guava) बारहमासी फल है, जो अनेक पोषक गुणों से युक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है. आंवला, नींबू और चेरी के बाद अमरूद ही ऐसा फल है, जिसमें विटामिन ‘सी’ की सर्वाधिक मात्रा पायी जाती है

1. कब्ज़ होने पर खाली पेट निरंतर कुछ दिनों तक पके अमरूद का सेवन करने से कब्ज़ हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगी.

2. भोजन के साथ अमरूद (Health Benefits of Guava) की सब्जी खाने से गरिष्ठ से गरिष्ठ भोजन भी पच जाता है.

3. अमरूद की डाली से दातून करने से दांत साफ़ होते हैं और सांस की दुर्गंध का नाश होता है.

4. अमरूद के बीजों को कुनकुने पानी के साथ लेने से जुकाम भाग जाता है. वैसे जुकाम और सर्दी से पीड़ित व्यक्ति को अमरूद का सेवन नहीं करना चाहिए.

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5. अमरूद की पत्तियों को उबालकर कुल्ला करने से गला-जीभ साफ़ होता है और मुंह के छाले ठीक होते हैं.

6. अमरूद (Health Benefits of Guava) को काट कर छिलके सहित पीसकर उसमें दूध मिलाकर छान लें. उसमें मिश्री मिलाकर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है.

7. अमरूद के बीज, पत्तियां और फल का सेवन करने से भांग, गांजा, शराब आदि का नशा उतरता ही नहीं, बल्कि इसका नियमित उपयोग करने से उनकी आदत भी छूट जाती है. सिगरेट पीने और पान खाने की आदत भी अमरूद के पत्तों को चबाने से छूट जाती है.

– रेषा गुप्ता

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सिरके के अनगिनत फ़ायदे (Top 25 Vinegar Benefits)

Vinegar Benefits

Vinegar Benefits

गन्ने के रस के अलावा सेब, जामुन आदि से भी सिरका (Vinegar Benefits) बनाया जाता है, जो सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है. सिरका यानी विनेगर रुचिकर, पेट रोगों में लाभप्रद, हृदय के लिए हितकारी व आहार को पचानेवाला है. सिरका बदहज़मी व गैस की समस्या को भी दूर करता है.

* गले की सूजन, जलन आदि दूर करने के लिए पानी में सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* पेटदर्द हो रहा हो, तो एक ग्लास पानी में आधा चम्मच सिरका मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है.

* यदि दस्त व कब्ज़ हो, तो सलाद या पानी में थोड़ा-सा सिरका डालकर इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद होता है.

* किडनी की पथरी में महीनेभर सेब का सिरका सेवन करने से लाभ होता है.

* डायबिटीज़ के मरीज़ सेब के सिरके का सेवन करें, तो बीमारी कंट्रोल में रहती है और बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है.

* सिरका व शहद को पानी में मिलाकर पीने से आंखों की चमक व रोशनी तेज़ होती है.

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* जहरीले कीड़ों के काटने पर हुए घाव में सिरका भरने से विष का प्रभाव कम हो जाता है.

* सिरका तथा प्याज़ मिलाकर खाने से लू नहीं लगती.

* यदि आपको लगातार हिचकियां आ रही हैं, तो एक टीस्पून सिरका पी लें.

* गले की ख़राश को दूर करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो जाती है. ऐसे में सिरके से मालिश करना लाभप्रद होता है.

* वज़न घटाने के लिए भी हर रोज़ एक टेबलस्पून सिरके का सेवन कर सकते हैं.

* सेब के सिरके से दांतों की मालिश करने या फिर एक कप पानी में एक टीस्पून सिरका मिलाकर गरारा करने से दांतों का पीलापन दूर होता है.

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* भोजन करते समय दाल-सब्ज़ी या सलाद आदि के साथ ज़रा-सा सिरका मिलाकर लेने से भोजन का स्वाद बढ़ जाता है और भोजन शीघ्र पचता है.

* पानी में सिरका मिलाकर सिर धोने से बाल झड़ने रुक जाते हैं.

* बेसन, हल्दी व मलाई में सिरका मिलाकर लेप बनाएं. इस लेप को चेहरे पर लगाने से दाग़-धब्बे दूर होकर रंग निखरता है.

* पनीर को अधिक दिनों तक ताज़ा रखने के लिए उसे सिरके से भीगे कपड़े में लपेटकर रखें.

* सिरका मिले पानी में कपड़ा धोने से कपड़ों का रंग नहीं निकलता.

* किसी भी नमकीन अचार में सिरका डाल देने से वह ख़राब नहीं होता.

* खिड़की व दरवाज़े के शीशे सिरके मिले पानी से साफ़ करने पर चमक उठते हैं.

* दूध में सिरका डालकर पनीर बनाने से पनीर मुलायम बनता है.

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* लालटेन में नई बत्ती डालने से पहले उसे सिरके में डालकर सुखा लें. इससे रोशनी अधिक होगी और धुआं भी नहीं उठेगा.

* यदि साइनस की समस्या है, तो उबलते पानी में 1/4 एप्पल विनेगर मिलाएं. थोड़ी देर बाद उसमें 1-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर व शहद डालें. फिर 1 नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें. इस मिश्रण को सुबह खाली पेट और शाम को सोने से पहले लें.

समस्या अनेक इलाज एक

यदि आप सर्दी-ज़ुकाम, मोटापा, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, बदहज़मी, अल्सर, कोलेस्ट्रॉल आदि समस्याओं से परेशान हैं, तो सिरके को निम्न तरी़के से इस्तेमाल करें.

100 ग्राम सेब के सिरके में 100 ग्राम शहद और छह लहसुन की कलियों को छीलकर मिक्सर में पीसकर पेस्ट बना लें. इसे कांच के बॉटल में रखकर पांच दिन के लिए फ्रिज में रख दें. बाद में इस मिश्रण को अंगूर या कोई भी फ्रूट जूस के साथ या फिर पानी में 2 चम्मच मिलाकर पीएं.

सुपर टिप

एसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए एक ग्लास पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका और 1 चम्मच शहद मिलाकर पीएं.

– संगीता श्यामा गुप्ता

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बच्चों के दस्त (Diarrhea) रोकने के 13 प्रभावकारी घरेलू नुस्ख़े (13 Home Remedies To Cure Diarrhea In Babies)

Home Remedies To Cure Diarrhea

Home Remedies To Cure Diarrhea

 

दूध व भोजन की अधिकता, संक्रमण आदि कारणों से बच्चों को दस्त (Home Remedies To Cure Diarrhea) होने लगता है. दूध पीते बच्चों को बार-बार दस्त होने से उनके रक्त व शरीर से पानी व अन्य आवश्यक खनिज निकल जाते हैं. दस्तों की कमी या अधिकता के अनुसार अनेक लक्षण पैदा हो जाते हैं. इससे ज्वर, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, उल्टी, चेहरा व शरीर पीला पड़ जाना, बेहोशी, आंखें अंदर धंस जाना आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं.

जिन बच्चों को गाय व डिब्बों का दूध पिलाया जाता है, उन्हें कीटाणुओं के संक्रमण से यह रोग अधिक होता है. इस रोग में पहले पतले हरे रंग के बदबूदार दस्त होते हैं. कभी दस्तों में आंव और रक्त भी आ जाता है.

* मीठे सेब का रस कपड़े से छानकर बार-बार पिलाने से दस्त रुक जाते हैं और रक्त व शरीर में तरल तत्वों की कमी भी दूर हो जाती है.

* जौ का पानी और अंडे की स़फेदी पानी में घोलकर बार-बार थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहने से लाभ होता है.

* फलों का रस, सब्जियों के पके रस और पानी बार-बार पिलाते रहने से शरीर में तरल तत्व पहुंच जाता है.

* छोटे बच्चे को लगातार पतली दस्त हो रही हो, तो 6 मि.ग्रा. सौंफ को 6 मि.ली. पानी में उबालें. जब आधा पानी रह जाए, तो 1 चम्मच       की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाएं. शीघ्र लाभ होगा.

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* शिशुओं को दस्त होने पर जायफल, लौंग, सफेद जीरा व सुहागा खील- इन चारों को समान मात्रा में लेकर कपड़छान चूर्ण बना लें. 50 से     100 मि.ग्रा. तक की मात्रा आवश्यकतानुसार शहद के साथ दिन में 1-1 बार चटाएं.

* 60 मि.ग्रा. से 125 की मात्रा में कपूर रस शहद के साथ सुबह-शाम देने से   विशेष लाभ होता है.

* दस्त होते हों, तो भी शिशु का दूध बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि साथ-साथ नारियल का पानी, अनार का रस, सेब का रस एवं नींबू पानी     दें.

* बगैर दूध की चाय या कॉफी बनाकर उसमें नींबू का रस डालकर पिलाने से लाभ होता है.

* जायफल घिसकर शहद के साथ बच्चे को सुबह-शाम चटाएं.

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* तेजपत्ते का चूर्ण एक भाग, बेलफल की गिरी 2 भाग गुड़ के साथ दें.

* सौंफ और सोंठ का काढ़ा बनाकर शिशु को 1-2 चम्मच की मात्रा में पिलाएं. इससे दस्त बंद होगा.

* सोंठ का चूर्ण 125 मि.ग्रा. की मात्रा में गुड़ में मिलाकर देने से बच्चे को दस्त से राहत मिलती है.

* यदि शिशु बार-बार हरे रंग की दस्त करता है, तो घबराइए नहीं. आप उंगली पर एरंड का तेल लगाकर चटाएं. दो-तीन दिन में ही आराम     हो जाएगा.

–  रेखा कुंदर

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हिस्टीरिया का घरेलू इलाज (Home Remedies for Hysteria)

Home Remedies for Hysteria

Home Remedies for Hysteria

हिस्टीरिया (Home Remedies for Hysteria) स्नायु संस्थान या नर्वस सिस्टम की विकृति से होनेवाले रोगों में एक प्रमुख रोग है. यह बीमारी 15 से 25 वर्ष की लड़कियों को अधिक होता है. इस रोग से पीड़ित महिलाओं का मस्तिष्क, स्मरणशक्ति और स्नायुमंडल कमज़ोर हो जाता है. अत्यधिक चिंता, भय, शोक, पारिवारिक कष्ट, मानसिक आघात, धन हानि, गर्भाशय विकार आदि कारणों से ये बीमारी हो सकती है. इसके अलावा लाड़-प्यार में पली युवतियों की इच्छा की पूर्ति न होना, विवाह में देरी, पति की पौरुषहीनता, तलाक़, किसी क़रीबी के मृत्यु का गंभीर सदमा जैसे कारणों से महिलाएं हिस्टीरिया की शिकार हो जाती हैं.

लक्षण
इससे पीड़ित महिला बिना कारण या बहुत मामूली कारणों से हंसने या रोने लगती है. आवाज़ या प्रकाश उसे अप्रिय लगता है. चक्कर आना, सांस फूलना, चिंता, थकान, सिरदर्द, कमज़ोरी, अपच, शरीर के विभिन्न अंगों में पीड़ा, पीरियड्स में गड़बड़ी, सेक्स व्यवहार में विषमताएं आदि अनेक लक्षण हिस्टीरिया में प्रकट हो सकते हैं.

* सबसे पहले पीड़ित को होश में लाएं. होश में आने पर उसे सांत्वना दें. शरबत, फलों का रस, मीठा दूध पीने को दें.
* केले के तने का ताजा रस हिस्टीरिया के रोगिणी को ठीक करने का अचूक नुस्ख़ा है. प्रतिदिन दिन में तीन बार एक-एक ग्लास केले के तने के ताज़े रस के सेवन से लाभ होता है. 3-4 माह इस नुस्ख़े का सेवन करने से अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है.

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* हिस्टीरिया(Home Remedies for Hysteria) रोग में धनिया अत्यंत लाभदायक है. 25 ग्राम धनिया और 10 ग्राम सर्पगंधा मिलाकर बारीक़ चूर्ण बनाएं. 1 से 2 ग्राम की मात्रा में रात में सोते समय पानी के साथ सेवन करें. इस नुस्ख़े को निरंतर कुछ दिनों तक सेवन करने से अवश्य लाभ होता है.
* तीन दिन तक तीनों समय (सुबह-दोपहर-शाम) गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लें. इसके बाद 100-100 ग्राम पांचों नमक लेकर उसे पीसकर एक साथ मिलाकर किसी साफ़ बर्तन में रख लें. ग्वारपाठा धोकर उसका एक लंबा टुकड़ा लेकर छील लें. फिर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उस पर मिश्रित नमक डालकर एक महीने तक सेवन करें. इससे हिस्टीरिया रोग से अवश्य राहत मिलेगी.
* चुकंदर के एक कप ताज़ा जूस में एक चम्मच आंवले का जूस मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीना चाहिए. एक महीने तक इसे नियमित पीने से अवश्य ही हिस्टीरिया का शमन होता है.

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* जो रोगी बालवच के चूर्ण को शहद में मिलाकर हर रोज़ 40 दिन तक खाता है और भोजन में केवल दूध-चावल का सेवन करता है, उसका भयानक और पुराना हिस्टीरिया(Home Remedies for Hysteria) रोग भी शांत हो जाता है.
* हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर हींग सुंघाने से राहत मिलती है. आधा ग्राम से एक ग्राम तक हींग नियमित खाने से लाभ होता है. साथ में 120 मि.ली. पानी में 2 ग्राम हींग मिलाकर एनिमा भी लेना चाहिए.

– रेषा गुप्ता

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औषधीय गुणों से भरपूर केला (Health Benefits of Banana)

Health Benefits of Banana

Health Benefits of Banana

केले (Health Benefits of Banana) में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम व विटामिन बी 6 है. केला खाने से कब्ज़ व गैस की समस्या दूर होती है. हर रोज़ केले व दूध का सेवन करने से तंदुरुस्ती बढ़ने के साथ-साथ शरीर में ख़ून की मात्रा भी बढ़ती है. केले में पाए जानेवाले फाइबर से पाचन क्रिया अच्छी रहती है. यह खून को पतला कर धमनियों में ख़ून के संचालन को भी ठीक करता है. दरअसल, इसमें पाया जानेवाला मैग्नीशियम शरीर में जाकर रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने से धमनियों में रक्त का संचालन सही रहता है.

* पीलिया यानी जॉन्डिस के मरीज़ को कच्चा या अधपका केला खिलाने से फ़ायदा होता है.

* पेचिश होने पर पके केले को मसलकर नमक और पिसा जीरा मिलाकर मरीज़ को खिलाएं.

* जीभ पर पड़े छालों को दूर करने के लिए दो-तीन दिन तक लगातार सुबह दही के साथ केला खाएं और इसके बाद ही कुछ खाएं. छाले ठीक हो जाएंगे.

* सूखी खांसी होने पर दो केले को मिक्सर में पीसकर उसमें दूध व स़फेद इलायची मिलाकर पीने से राहत मिलती है.

* यदि प्रदर रोग की समस्या हो, तो केला व दूध की खीर बनाकर हर रोज़ सुबह-शाम खाएं या फिर भोजन करने के बाद दो केले नियमित रूप से लें.

* दस्त यानी लूज़ मोशन होने पर पके हुए केले को मक्खन की तरह फेंटकर उसमें थोड़ी-सी कुछ दाने मिश्री मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार खाने से राहत मिलती है.

* यदि चोट लग जाए और ख़ून बंद न हो, तो वहां पर केले के डंठल का रस लगाएं या फिर केले का छिलका लगाने से भी लाभ होता है.

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* बेचैनी व घबराहट होने पर पके हुए केले (Health Benefits of Banana) को फेंटकर उसमें एक टीस्पून मिश्री व एक छोटी इलायची पीसकर मिलाएं और खाएं.

* दाद होने पर केले के गूदे को नींबू के रस में पीसकर पेस्ट बनाकर दाद पर लगाएं.

* अल्सर की शिकायत होने पर कच्चा केला खाने से लाभ होता है.

* यदि आपको बार-बार यूरिन होने की समस्या है, तो केले के रस में घी मिलाकर पीएं.

* जलने पर केले को मसलकर जले हुए स्थान पर लगाएं.

* छोटे बच्चे को दस्त हो, तो पके केले को इतना घोंटें कि वह मक्खन की तरह पतला हो जाए और इसे बच्चे को चटा दें. दस्त बंद हो जाएगा.

* पके केले को घी के साथ खाने से पित्त रोग तुरंत शांत होता है.

* एक पका हुआ केला मीठे दूध के साथ लगातार आठ दिन तक सेवन करने से नकसीर की समस्या दूर हो जाती है.

* दो केले को एक टीस्पून शहद में मिलाकर खाने से सीने के दर्द में आराम मिलता है.

* बाल गिरने की समस्या होने पर केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं.

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सुपर टिप

ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर नियमित रूप से केला खाएं. यह रक्त की अशुद्धियों को दूर करने के साथ-साथ शरीर में रक्त के बहाव को भी सही करता है.

रिसर्च

रिसर्च के अनुसार, अवसाद यानी डिप्रेशन के मरीज़ों के लिए केला फ़ायदेमंद है. दरअसल, केले में ऐसे प्रोटीन पाए जाते हैं, जो शरीर को रिलैक्स करते हैं. इसी कारण डिप्रेशन के मरीज़ जब भी केला खाते हैं, तो उन्हें आराम मिलता है.

हेल्थ अलर्ट

केला फ़ायदेमंद तो है, पर इसमें कुछ परहेज़ भी रखें.

* रात में केला न खाएं.

* केला खाने के बाद पानी न पीएं.

* पाचनशक्ति कमज़ोर होने पर इसे न खाएं.

* गठिया और डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे न खाएं.

* केला खाली पेट न खाकर भोजन के बाद ही खाएं, तो अधिक लाभप्रद होगा, क्योंकि यह कब्ज़नाशक और पाचक दोनों है.

– नरेंद्र भुल्लर

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तिल के 11 अमेज़िंग हेल्थ बेनिफिट्स (11 Amazing Health Benefits Of Sesame Seeds)

Health Benefits Of Sesame Seeds

Health Benefits Of Sesame Seeds

छोटी होने के बावजूद तिल गुणों से भरपूर होती है. तिल का उपयोग मकर संक्रांति के अवसर पर तिल के लड्डू, बर्फी, गजक आदि के रूप में करने की हमारे यहां परंपरा है. आइए, तिल के औषधीय गुणों (Health Benefits Of Sesame Seeds) का लाभ भी जानें.

* दांतों की मज़बूती के लिए एक चम्मच तिल रात को चबाकर खाइए.

* तिलों को पानी में पीसकर घावों पर बांधने से घाव जल्दी भर जाते हैं.

* 2 चम्मच काले तिलों को चबाकर ऊपर से ठंडा पानी पीने से बवासीर में लाभ होता है.

* ज़्यादा मूत्र आने की दशा में तिल भूनकर गुड़ के साथ लड्डू बनाएं. इसे सुबह-शाम खाएं. बहुमूत्र की शिकायत दूर हो जाएगी.

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* तिल को पीसकर गोमूत्र में पकाएं. इसे पुल्टिस की तरह फोड़े पर बांधने से फोड़ा पककर फूट जाता है.

* पेटदर्द होने पर एक चम्मच साफ़ तिल चबाकर ऊपर से गर्म पानी पीने से दर्द मिटता है.

* 4 चम्मच काले तिलों को पानी में भिगो दें. दूसरे दिन पीसकर छान लें. इस जल को प्रसवासन्न महिला को पिला देने से शीघ्र प्रसव हो जाता है.

* काले तिल को पीसकर मिश्री मिलाकर बकरी के दूध के साथ पीने से ख़ूनी दस्त में लाभ होगा.

* जाड़े के दिनों में तिल का शुद्ध तेल शरीर पर मलने से शरीर में गर्मी आती है. रक्त की गति तीव्र होती है. स्वास्थ्य बढ़ता है तथा त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाता है.

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* मूली अधिक खा लेने पर होनेवाले अजीर्ण में थोड़ी-सी तिल चबा लेने से तुरंत आराम मिलता है.

* तिल को मक्खन के साथ पीसकर मुंह पर लेप करने से रंग गोरा होता है और कील-मुंहासे आदि ठीक हो जाते हैं.

* तिल के पौधों पर पड़ी ओस को नेत्रों में डालने से खुजली, गर्मी, लालिमा आदि विकार समाप्त हो जाते हैं.

– जहांआरा ख़ान

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