death anniversary

अपनी मर्ज़ी से कहां अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं…

निदा फ़ाज़ली की इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह ने अपनी मधुर आवाज़ से और भी ख़ूबसूरत और आकर्षक बना दिया था. सच है कि कई बार ज़िंदगी के सफ़र में ना चाहते हुए भी हमें अनजाने रास्तों से गुज़रना पड़ता ही है.
आज जगजीत सिंहजी की पुण्यतिथि है. उन्हें गए नौ साल बीत चुके, पर लगता है जैसे कल की ही बात हो. इस अवसर पर उनसे जुड़ी कुछ कही-अनकही बातों को जानते हैं. साथ ही दिलों को मदहोश कर देनेवाले उनकी ग़ज़लों को भी देखते-सुनते हैं.
जगजीत सिंह का पूरा नाम जगमोहन सिंह धीमन था. वे राजस्थान के गंगाशहर के रहनेवाले थे. उनके पिता चाहते थे कि वे इंजीनियर या आईएएस ऑफिसर बने, लेकिन जगजीत दिल से संगीत के दीवाने थे. वे गाना चाहते थे. अपनी आवाज़ को एक मुक़ाम देना चाहते थे. उनकी पढ़ाई की किताबों से अधिक तो उनकी संगीत के साजो-सामान रहते थे.
पिता की इच्छा का मान रखते हुए वे जालंधर पढ़ाई के लिए गए. उन दिनों वे जालंधर के रेडियो और अपने कॉलेज में भी गाया करते थे. लेकिन सिंगर बनने की चाह दिनोंदिन बढ़ती गई. उनका यह सोचना था कि वह अपने घर गए, तो कभी उनके पिता उन्हें गायक नहीं बनने देंगे, इसलिए वे मुंबई आ गए.
यहां पर काफ़ी संघर्ष करना पड़ा. खाने के लिए उन्होंने होटलों में गाना शुरू किया, ताकि भरपेट भोजन मिल सके. फिर पार्टियों-इवेंट आदि में ग़ज़ल और गाना गाने लगे. उन्होंने ऐड में जिंगल के लिए भी अपनी आवाज़ दी, जिसे लोगों ने काफ़ी पसंद भी किया. ऐसे छोटे-मोटे काम करते रहे और आगे बढ़ते रहे.
उसी दरमियान उनकी मुलाक़ात अजीज मर्चेंट से हुई, जो गुजराती फिल्मों में संगीतकार थे. उन्होंने जगजीत सिंह को एक ऑफर दिया कि उनके लिए बढ़िया काम है. उन्हें ख़ुशी हुई कि फिल्मों में गाने का मौक़ा मिलेगा. लेकिन जब निर्माता से मिलना हुआ, तो उन्होंने फिल्म के हीरो का ऑफर किया. जगजीतजी गाने में अपना करियर बनाना चाहते थे. उन्होंने कहा कि वे यह नहीं कर सकते.
70 के दशक में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार जैसे गायकों का बोलबाला था. तब जगजीत सिंह ने सोचा कि ऐसे तो वे अपने पैर नहीं जमा पाएंगे. तब उन्होंने और चित्रा सिंह ने मिलकर ग़ज़ल सिंगिंग में आगे बढ़ने का निर्णय लिया. उन्होंने अपना पहला एल्बम ‘द अनफॉरगेटेबल’ रिलीज़ किया. यह एल्बम लोगों को इतना पसंद आया कि सुपर-डुपर हिट हो गया. फिर उसके बाद तो जगजीत-चित्रा के एल्बम की सीरीज़ निकलने लगी. लोगों को ख़ूब पसंद आने लगे.70 के दशक के सबसे मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं… लेकिन उनकी मखमली आवाज़ का जादू सदा रहेगा. गाने और ग़ज़लों को उनकी आवाज़ और भी उम्दा व ख़ूबसूरत बना देती हैं. आज उनकी पुण्यतिथि पर उनकी बेहतरीन गीत-संगीत के कलेक्शन को सुनते-देखते हैं…

Jagjit Singh

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जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे, संग-संग तुम भी गुनगुनाओगे
चाहे किशोर प्रेम का अल्हड़पन हो, दिल टूटने का दर्द हो, प्रेमिका से इज़हारे मोहब्बत हो या सिर्फ़ उसके हुस्न की तारीफ़… मोहम्मद रफ़ी का कोई सानी नहीं था. मोहब्बत ही नहीं, इंसानी जज्बात के जितने भी पहलू हो सकते हैं… दुख, ख़ुशी, आस्था या देशभक्ति या फिर गायकी का कोई भी रूप हो भजन, क़व्वाली, लोकगीत, शास्त्रीय संगीत या ग़ज़ल, मोहम्मद रफ़ी ने गायकी में सभी भावनाओं को बखूबी निभाया. ये सच है कि मोहम्मद रफी साहब जैसा फनकार न कभी हुआ और न कभी होगा.

Mohammed Rafi


रफी साहब न सिर्फ बहुत अच्छे गायक थे पर बेहद उम्दा इंसान भी थे, इसलिए ये कहना मुश्किल है कि वे इंसान बड़े थे या कलाकार. मोहम्मद रफी ने अपनी ज़िंदगी में करीब 26 हजार गीत गाये और लगभग हर भाषा में. वर्ष 1946 में फिल्म ‘अनमोल घड़ी’ में ‘तेरा खिलौना टूटा’ से हिन्दी सिनेमा की दुनिया में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अमृतसर के कोटला सुल्तान में जन्मे मोहम्मद रफी छः भाई बहनों में दूसरे नंबर पर थे. उन्हें घर में फीको कहा जाता था. गली में किसी फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था.

13 साल की उम्र में पहली शादी

ये बात शायद बहुत कम लोगों को पता है कि13 साल की उम्र में ही रफी की पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से हुई थी, लेकिन कुछ साल बाद ही उनका तलाक हो गया था. कहते हैं उनका तलाक भी गायकी से उनकी मोहब्बत की वजह से हुआ था. दरअसल जब भारत पाक विभाजन हुआ तो उनकी पहली पत्नी ने भारत में रुकने से मना कर दिया और रफी साहब संगीत से इतना प्यार करते थे कि उन्होंने भारत नहीं छोड़ा और उनकी पत्नी उन्हें छोड़ गई. उनकी इस शादी के बारे में घर में सभी को मालूम था लेकिन बाहरी लोगों से इसे छिपा कर रखा गया था. घर में इस बात का जिक्र करना भी मना था, क्योंकि रफी की दूसरी बीवी बिलकिस बेगम को ये बिल्कुल बर्दाश्त नहीं था कि कोई इस बारे में बात करे.

20 साल की उम्र में दूसरी शादी

Mohammed Rafi


20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी बिलकिस के साथ हुई, जिनसे उनके तीन बेटे खालिद, हामिद और शाहिद तथा तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद और यास्मीन अहमद हुईं. रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है.

जब सुरैया ने अपने घर में एक कमरा दिया रफी साहब को

Mohammed Rafi


बिलकिस से दूसरी शादी के बाद रफी और उनकी पत्नी भिंडी बजार के चॉल में शिफ्ट हो गए थे, लेकिन रफी को चॉल में रहना पसंद नहीं था. वो सुबह साढ़े तीन बजे उठकर रियाज करते थे और इसके लिए वे मरीन ड्राइव तक पैदल जाते थे, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि उनके रियाज की वजह से आस-पास के लोगों की नींद खराब हो. मरीन ड्राइव पर एक्ट्रेस सुरैया का घर था. जब उन्होंने कई दिनों तक रफी को रियाज करते हुए देखा तो उन्होंने पूछा कि वो यहां क्यों रियाज करते हैं. तब रफी ने अपनी परेशानी बताई. इसके बाद सुरैया ने अपने घर का एक कमरा रफी को रियाज करने के लिए दे दिया था. रफी को जब काम मिलने लगा था तब उन्होंने कोलाबा में फ्लैट खरीद लिया था, जहां वो अपने सात बच्चों के साथ रहते थे. 

कभी नहीं पूछा कि उन्हें गाने के लिए कितना पैसा मिलेगा

Mohammed Rafi


मोहम्मद रफी बहुत ही शर्मीले स्वभाव के थे. न किसी से ज्यादा बातचीत और न ही किसी से कोई लेना-देना. न शराब पीते थे न उन्हें सिगरेट-पार्टियों का शौक था, न ही देर रात घर से बाहर रहने की आदत. संकोची तो इतने थे कि
वे कभी भी संगीतकार से ये नहीं पूछते थे कि उन्हें गाने के लिए कितना पैसा मिलेगा. बस वे आकर गीत गा दिया करते थे और कभी कभी तो एक रुपया लेकर गीत गा दिया करते थे.

कई साल विधवा को चोरी से मनी ऑर्डर भेजते रहे

Mohammed Rafi


रफी काफी दयालु इंसान थे और उनका दिल भी काफी बड़ा था. उनकी ही कॉलोनी में जब उन्होंने देखा कि एक विधवा बहुत तकलीफ में है, तो उन्होंने किसी फर्जी नाम से पड़ोस की एक विधवा को पैसे भेजना शुरू कर दिया. कई साल तक उस महिला को मनी ऑर्डर मिलता रहा, पर जब मनी ऑर्डर आना बंद हुआ तो महिला पोस्ट ऑफिस गई. वहां पता चला कि मनीऑर्डर भेजने वाले का निधन हो गया और उनका नाम मोहम्मद रफी था.

पब्लिसिटी से रहे हमेशा दूर

रफी साहब को पब्लिसिटी बिल्कुल पसंद नहीं थी. वो जब भी किसी शादी में जाते थे तो ड्राइवर से कहते थे कि यहीं खड़े रहो. रफी सीधे कपल के पास जाकर उन्हें बधाई देते थे और फिर अपनी कार में आ जाते थे. वो जरा देर भी शादी में नहीं रुकते थे.

कभी इंटरव्यू नहीं दिया

Mohammed Rafi


रफ़ी बहुत कम बोलने वाले, ज़रूरत से ज़्यादा विनम्र और मीठे इंसान थे. शर्मीले इतने थे कि रफी साहब ने कभी कोई इंटरव्यू नहीं दिया. उनके सभी इंटरव्यू उनके बड़े भाई अब्दुल अमीन हैंडल करते थे. कहते हैं रफी ने अपनी पूरी लाइफ में सिर्फ दो इंटरव्यू दिए थे.

लता मंगेशकर से 6 साल बात नहीं की

Mohammed Rafi


रफी साहब को संगीत से मोहब्बत थी और वे इसे कभी पैसों के तराजू में नहीं तौलते थे. इसी पैसों वाले मुद्दे पर रफी साहब और लता मंगेशकर के बीच सालों तक बातचीत बंद रही. दोनों ने कई साल साथ गाना नहीं गाया. वजह थी प्लेबैक सिंगर को रॉयल्टी मिलने की. यह विवाद तब शुरू हुआ जब लताजी ने गीतों की रॉयल्टी में पार्श्वगायकों को भी हिस्सा देने की मांग की. हालांकि इस लड़ाई में मुकेश, मन्ना डे, तलत महमूद और किशोर दा समर्थन में खड़े थे, सिर्फ आशाजी, रफी साहब और कुछ सिंगर्स को यह बात ठीक नहीं लग रही थी. रफी साहब का कहना था कि जब हमने एक बार गाने के पैसे ले लिए तो दोबारा से उस पर पैसे मिलने का मतलब क्या है. लता मंगेशकर चाहती थीं कि रफी उनका साथ दें, पर रफी खिलाफ थे. फिर माया फिल्म के गाने ‘तस्वीर तेरी दिल में…’के अंतरे को लेकर दोनों में बहस हो गई.
दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया. बाद में संगीतकार जयकिशन ने दोनों में सुलह कराई, फिर एसडी बर्मन म्यूजिकल नाइट में उन्होंने एक साथ स्टेज पर गाया.


बाबुल की दुआएं गाते हुए खुद रो पड़े थे रफी साहब

Mohammed Rafi


फिल्म ‘नील कमल’ के गाने ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ के लिए रफी साहब को नेशनल अवार्ड मिला था. इस गीत को गाते समय कई बार उनकी आंखें नम हो गई थीं और इसकी वजह ये थी कि इस गीत को रिकॉर्ड करने से एक दिन पहले ही उनकी बेटी की सगाई हुई थी और कुछ दिन में शादी थी, इसलिए वो काफी भावुक थे, फिर भी उन्होंने ये गीत गाया और इस गीत के लिए उन्हें ‘नेशनल अवॉर्ड’ मिला.

जब मौलवी के कहने पर गाना छोड़ दिया था रफी साहब ने

Mohammed Rafi


हिंदी सिनेमा को अनगिनत नगमे देने वाले महान गायक मोहम्‍मद रफी जब अपने करियर के शिखर पर थे, तो सिर्फ मौलवियों के कहने पर फिल्मों में गाना बंद कर दिया था. दरअसल, रफी हज करने गए थे और मौलवियों का कहना था कि हाजी होने के बाद गाना बजाना बंद कर देना चाहिए. रफी के मन में भी ये बात बैठ गई. हज से लौटकर कई महीने गुजर गए और रफी ने कोई गाना रिकॉर्ड नहीं किया. बाद में नौशाद साहब ने उन्‍हें बहुत समझाया और रफी के बेटों ने भी गाना शुरू करने की सलाह दी, तब जाकर उनका मन बदला और दोबारा गाना शुरू किया. 

जब फांसी से पहले अपराधी ने आखिरी इच्छा के तौर पर रफी का गाना सुनने की बात की

वैसे तो रफी साहब के प्रति लोगों में दीवानगी के कई किस्से मशहूर हैं, लेकिन ये किस्सा नौशाद साहब ने खुद सुनाया था. हुआ यूं कि एक बार एक अपराधी को फांसी दी जी रही थी. उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने न तो अपने परिवार से मिलने की इच्छा जताई और न ही किसी ख़ास खाने की फ़रमाइश की. उसने कहा कि वो मरने से पहले रफ़ी का ‘बैजू बावरा’ फ़िल्म का गाना ‘ऐ दुनिया के रखवाले’ सुनना चाहता है. इस पर एक टेप रिकॉर्डर लाया गया और उसके लिए वह गाना बजाया गया. वैसे बता दें कि
इस गाने के लिए मोहम्मद रफ़ी ने 15 दिनों तक रियाज़ किया था और रिकॉर्डिंग के बाद उनकी आवाज़ इस हद तक टूट गई थी कि कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि रफ़ी शायद कभी अपनी आवाज़ वापस नहीं पा सकेंगे.

...और दुनिया से मौसिकी का पयंबर चला गया…

Mohammed Rafi


मोहम्मद रफी का निधन 31 जुलाई 1980 को हार्ट अटैक आने से हुआ था. मृत्यु से बस कुछ घंटे पहले ही रफी एक गाने की रिकॉर्डिंग करके आए थे. यह गाना था फिल्म ‘आस-पास’ का ‘शाम फिर क्यों उदास है दोस्त, तू कहीं आसपास है दोस्त’. मोहम्मद रफी का निधन रमजान के महीने में हुआ था. जिस दिन उनकी अंतिम विदाई थी, उस दिन मुंबई में जोरों की बारिश हो रही थी. फिर भी अंतिम यात्रा में कम से कम 10000 लोग सड़कों पर थे और सबने नम आंखों से अपने इस पसंदीदा गायक को बिदाई दी. रफी साहब के निधन पर भारत सरकार द्वारा दो दिन का राष्ट्रीय शोक भी रखा गया था.
उनके निधन के बाद संगीतकार नौशाद ने कहा था- कहता है कोई दिल गया
दिलबर चला गया
साहिल पुकारता है
समंदर चला गया
लेकिन जो बात सच है
वो कहता नहीं कोई
दुनिया से मौसिकी का
पयंबर चला गया

प्रतिभा तिवारी

गुरु दत्त की जिंदगी पर जब भी बात की जाएगी उसमें उनकी पत्नी गीता रॉय का नाम जरूर आएगा. जितनी महत्वपूर्ण और बेसब्र करने वाली कहानी गुरु दत्त की है, उतनी ही गीता दत्त की भी. उनके जीवन की हाइलाइट्स भी ऐसी ही रहीं. आज गीता दत्त की पुण्यतिथि पर बात उन्हीं की.

Geeta Dutt


रेशमी आवाज़ की मलिका

Geeta Dutt


जादुई आवाज़ की मलिका गीता दत्त ने बहुत कम उम्र में शोहरत की उस बुलंदी को छू लिया था, जहां लोग पूरा जीवन साधना करने के बाद भी नहीं पहुंच पाते. यही वजह है कि छह दशक बाद आज भी संगीत प्रेमी उनके गाने दिल से गुनगुनाते हैं. सबसे बड़ी बात गीता दत्त ने प्लेबैक सिंगिंग में उस दौर में अपना स्थान बनाया जब लता मंगेशकर शिखर पर पहुंच चुकी थीं और सुरैया, शमशाद बेग़म और नूरजहां जैसी गायिकाओं की भी तूती बोलती थी.

कैफ़ी आज़मी ने कहा था, गीता की आवाज़ में बंगाल का नमक और दर्द

Geeta Dutt


गीता दत्त की आवाज़ गीतकारों-संगीतकारों को कितनी भाती थी, इसका उदाहरण यह है कि उनके लिए ‘वक़्त ने किया क्या हसीं सितम’ लिखनेवाले मशहूर शायर कैफी आज़मी ने कहा था कि उनके आवाज में बंगाल का नमक और दर्द दोनों है. इसी तरह ओपी नैय्यर भी मानते थे कि गीता की आवाज़ में शहद की मिठास है तो मधुमक्खी के डंक का दर्द भी है.

कैसे बनी गायिका?
गीता घोष रॉयचौधरी अमीर बंगाली जमींदार परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उन्हें बचपन से ही गायन का शौक था. वह घर में काम करते हुए गुनगुनाती रहती थीं. एक दिन उनके म्यूज़िक कंपोज़र हनुमान प्रसाद गीता दत्त के घर के पास से गुजर रहे थे, तो उन्होंने गीता राय को कोई गाना गाते हुए सुना. गीता की आवाज़ में उन्हें एक अलग सा जादू लगा. बस उन्होंने उनके पिताजी से बात करके उन्हें गायन में प्रशिक्षित किया और महज 16 साल की उम्र में उन्हें अपनी फिल्म ‘भक्त प्रह्लाद’ (1946) में गाने का अवसर दिया. इसके बाद गीता दत्त ने कुछ और फिल्मों में गाना गाया, लेकिन उनको पहचान मिली फिल्म ‘दो भाई’ में जब एसडी बर्मन ने उनसे ‘मेरा सुंदर सपना टूट गया’ गाया गवाया. यह गाना फिल्म से पहले ही सुपरहिट हो गया. इस गीत की सफलता गीता दत्त की पहचान बन गई। उसके बाद तो गीता ने पीछे मुड़कर ही नहीं देखा. इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए कई यादगार गाने गाए.

गुरुदत्त से पहली मुलाकात, प्यार और शादी

Geeta Dutt


गुरु दत्त की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म ‘बाज़ी’ (1951) के एक गाने की रिकॉर्डिंग हो रही थी. गाना था “तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले’. गायिका थीं गीता दत्त. गीता तब तक इतनी ऊंचाई पर पहुंच चुकी थीं कि गुरु दत उनके सामने कुछ भी नहीं थीं. गीता स्टार सिंगर थीं. तब तक वे कई भाषाओं में 400-500 या ज्यादा गाने गा चुकी थीं. भव्य लिमोज़ीन में घूमती थीं. समृद्ध जमींदार परिवार से ताल्लुक रखती थीं और गुरु दत्त का बड़ा सा परिवार और छोटा सा घर… आधे से ज़्यादा समय तो उनका फाकामस्ती में ही गुजरता, लेकिन फिर भी दोनों में प्यार हो गया था… जोरदार प्यार. इस प्यार का सिलसिला 3 सालों तक चला और फिर दोनों ने बंगाली रीत रिवाजों से शादी कर ली. इसके बाद खार, मुम्बई के इलाके में एक किराये के फ्लैट में गीता-गुरु दत्त रहने लगे. कुछ दिन तो सब ठीक ठाक रहा, लेकिन फिर उन दोनों में अक्सर झगड़े होने लगे. इस बीच दोनों के तीन बच्चे भी हुए.

गीता-गुरुदत्त में अक्सर झगड़े होने लगे

Geeta Dutt


गीता के साथ दिक्कत ये थी कि वो गुरु दत्त को लेकर बहुत पज़ेसिव थी. किसी भी वैवाहिक जीवन में ये बहुत खराब स्थिति होती है. डायरेक्टर और एक्टर जैसे क्रिएटिव लोग कई एक्ट्रेस के साथ काम करते हैं. उन्हें परदे पर प्यार करते दिखना होता है और उसे असली प्यार जैसे दिखाना होता है. गीता को गुरु दत्त के साथ काम करने वाली हर एक्ट्रेस पर शक़ होने लगा था. वो उन पर हर वक्त नजर रखती थीं. दोनों के बीच लगातार झगड़े होते रहते थे. और जब भी झगड़ा होता, वो बच्चों को लेकर अपनी मां के घर चली जाती थी. गुरुदत्त हाथ पैर जोड़ते कि घर लौट आओ तब वो घर लौटतीं. और अगर गीता न मानतीं तो गुरु दत्त डिप्रेशन में चले जाते थे. ऐसा कई बार हुआ और अक्सर ही होता था.

पाबंदियां गुरुदत्त ने भी लगाईं

Guru Dutt


कहा जाता है कि शादी के बाद गुरु दत्त ने भी गीता पर पाबंदियां लगा दी थीं. वह चाहते थे गीता केवल उनकी फ़िल्म में ही गाए, लिहाज़ा, उनके दूसरे बैनर्स के लिए गाना गाने पर रोक लगा दिया. रिकॉर्डिंग स्टूडियो से घर आने का समय मुकर्रर कर दिया. काम के प्रति समर्पित गीता पहले तो इसके लिए राजी नहीं हुईं, लेकिन बाद में किस्मत से समझौता करना ही बेहतर समझा. पारिवारिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने गायन को दूसरी वरीयता पर रख दिया. कहा जाता है इस कारण गीता डिप्रेशन में रहने लगीं. लिहाज़ा, धीरे-धीरे संगीतकारों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया. इतना सब करने के बावजूद वे गुरु दत्त के साथ अपनी गृहस्थी संभालने में नाकाम रहीं.

सुंदर सपना टूट गया…

Geeta Dutt

इधर गुरु दत्त और वहीदा रहमान एक के बाद एक फिल्म में साथ काम कर रहे थे और उनके अफेयर के चर्चे होने लगे थे. गीता घर पर बेकार बैठी थीं. उनकी भी महत्वाकांक्षाएं थीं. उन्होंने सिंगिंग के अलावा एक्टिंग में भी आगे बढ़ने की इच्छा जताई, तो गुरु दत्त ने उन्हें लेक्ट ‘गौरी’ फिल्म शुरू की, लेकिन गुरु दत्त ने दो दिन में ही शूटिंग बंद कर दी. कारण बताया कि गीता का बर्ताव ठीक नहीं है और वे रिहर्सल पर नहीं आती हैं.

गीता दत्त ने खुद को नशे में डुबो लिया
गुरु दत्त का नाम वहीदा से जुड़ने का सदमा गीता झेल नहीं सकीं और शराब पीने लगीं. इस तरह शादी और शराब ने गीता के कैरियर को ग्रहण लगा दिया. उनके विवाहित ज़िंदगी मे दरार आ गई. वहीदा के साथ गुरु दत्त के रोमांस की ख़बरों को गीता सहन न कर सकीं और उनसे अलग रहने का निर्णय कर लिया. इसके बाद वहीदा ने भी गुरुदत्त से दूरी बना ली. गीता और वहीदा दोनों के जीवन से दूर हो जाने से गुरुदत्त टूट से गए और 1964 में मौत को गले लगा लिया. गुरुदत्त की मौत से गीता दत्त को गहरा सदमा पहुंचा और उन्होंने भी अपने आप को नशे में डुबो दिया और जिसके बाद वे बीमार रहने लगीं.

प्यार और शराब ने ली जान

सिर्फ़ 42 साल की उम्र जीने वाली गीता दत्त ने अपनी जिंदगी में स्टारडम, शोहरत और अकेलापन सब देखा. कहा जाता है कि वहीदा रहमान के साथ गुरु दत्त के अफेयर की ख़बरों ने गीता दत्त को तोड़ दिया था. गुरु दत्त की मौत से वह पूरी तरह टूट गईं. घर चलाने के लिए उनको फिर से काम करना पड़ा. 1964 से 1967 के बीच उन्होंने बमुश्किल दो दर्जन गाने गाए होंगे, वह भी लो बजट की फिल्मों के थे. उनसे हर किसी ने मुंह मोड़ लिया. आजीविका चलाने के लिए उन्हें स्टेज शो और रेडियो जिंगल्स करने पड़े. यह उस प्लेबैक सिंगर की दास्तां थी, जो कभी हर फिल्मकार और संगीतकार की चहेती हुआ करती थी. गीता दत्त ये बर्दाश्त नहीं कर सकीं और बहुत अधिक शराब पीने लगीं. 1971 में सिर्फ 42 साल की उम्र में गीता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

गीता दत्त ने फिल्म जगत में न तो बहुत अधिक वक़्त बिताया और न ही बहुत ज़्यादा गाने गाए. मतलब स्वर सामग्री लता मंगेशकर और आशा भोसले की तुलना में तो उनके गायन का सफर बहुत छोटा रहा. इसके बावजूद इस छोटे से सफर में ही गीता दत्त ने अपनी आवाज़ से संगीत प्रेमियों पर प्रभाव छोड़ा, उसने उन्हें उनके दिलों में अमर बना दिया.


गीता दत्त के कुछ सुपरहिट
गाने
1. वक्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम
2. मेरा सुंदर सपना बीत गया
3. मेरी जां मुझे जां न कहो मेरी जां
4. तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले
5. जा जा जा जा बेवफा
6. पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे
कि मैं तन मन की सुध बुध गवा बैठी
7. ठंडी हवा काली घटा आ ही गई झूम के
8. जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी
9. ये लो मैं हारी पिया हुई तेरी जीत रे
काहे का झगड़ा बालम नई नई प्रीत रे
10. काली घटा छाए मोरा जिया तरसाए
11. न जाओ सैयां छुड़ा के बैयां
12. हम आप की आंखों में इस दिल को बसा दें तो

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बॉलीवुड की हॉट और ग्लैमरस ऐक्ट्रेस में नाम शुमार था परवीन बाबी (Parveen Babi) का. परवीन भले ही बॉलीवुड की जानीमानी ऐक्ट्रेस थीं, लेकिन उनकी ज़िंदगी में कई राज़ छुपे थे. आज उनकी पुण्यतिथि है. उनकी गुमनाम मौत पर भी रहस्य बना हुआ है. आइए, जानते हैं मिस्टीरियस गर्स परवीन बाबी के बारे में ये 10 बातें.

  • परवीन बाबी इकलौती संतान थीं. माता-पिता के 14 सालों के इंतज़ार के बाद परवीन का जन्म हुआ.
  • जब परवीन सात साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था.
  • कॉलेज के दिनों से ही परवीन काफ़ी बोल्ड थीं. जब डायरेक्टर बीआर इशारा ने उन्हें अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में मिनी स्कर्ट पहने और हाथों में सिगरेट पकड़े हुए देखा, उसी वक़्त उन्होंने परवीन को पहली फिल्म का ऑफर दे दिया.
  • साल 1976 में टाइम मैगज़ीन के कवर पेज पर छपने वाली बॉलीवुड की पहली ऐक्ट्रेस बनीं.
  • परवीन की पहली फिल्म फ्लॉप रही. लेकिन परवीन ने अपनी कोशिश जारी रखी.
  • फिल्म मजबूर उनकी पहली सुपरहिट फिल्म रही, जिसमें परवीन के अपोज़िट अमिताभ बच्चन थे. उसके बाद उन्होंने बिग बी के साथ कई फिल्में कीं.
  • आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होंने अमिताभ बच्चन पर उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप भी लगाया था.
  • परवीन बाबी ने शादी नहीं की थी. लेकिन उनका नाम महेश भट्ट, डैनी के साथ जुड़ा था.
  • ख़बरें थीं कि महेश भट्ट परवीन के प्यार में कुछ इस कदर पड़ गए थे कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक भी दे दिया. लेकिन इनका रिश्ता भी चला नहीं. महेश से अलग होने के बाद परवीन काफ़ी डिप्रेशन में चली गई थीं. फिल्मों से दूर होकर वो अमेरिका चली गई थीं.
  • परवीन के दिवानों की लिस्ट में ऐक्टर बॉब क्रिस्टो का नाम भी शामिल है. बॉब ऑस्ट्रेलियन थे, लेकिन एक तरफ़ा प्यार में दिवाने बॉब परवीन के लिए मुंबई ही बस गए.
  • परवीन बाबी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थीं.
  • 22 जनवरी 2005 परवीन अपने जुहू के फ्लैट में मृत पाई गईं. उनके घर के बाहर दूध के पैकेट और अखबार दो दिनों से ऐसे ही पड़े हुए थे. उनकी मौत कैसे हुई इस पर भी रहस्य बना हुआ है. बताया जाता है कि वो डायबिटीज़ और पैर की बीमारी गैंगरीन से पीड़ित थीं.

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आज़ाद भारत के दूसरे और सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि के मौ़के पर आइए जानते हैं, उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें.

* लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1901 को मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) में हुआ था.

* उनका बचपन बहुत ग़रीबी में गुज़रा. वे कई मील नंगे पांव चलकर स्कूल जाते थे.

* मात्र सोलह साल की उम्र में उन्होंने गांधी जी के असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए देशवासियों से आह्वान किया था.

* शास्त्री जी आज़ाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. उनका सादा जीवन सबके लिए किसी मिसाल से कम नहीं था. एक समय ऐसा भी आया था जब  उन्होंने अपने नौकर को काम से हटा दिया और खुद घर का काम करने लगे थे.

* 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद जब देश आर्थिक तंगी से गुज़र रहा था, तब शास्त्री जी ने अपने ख़र्च कम कर दिए और देशवासियों से भी  ऐसा करने की अपील की थी.

* पैसे बचाने के लिए शास्त्री जी ने ख़ुद के लिए धोती खरीदने से भी मना कर दिया था और पत्नी को फटी हुई धोती सिलने को कहा था. इतना ही नहीं  उन्होंने सैलरी लेनी भी बंद कर दी थी.

* काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद उन्होंने अपना सरनेम श्रीवास्तव हमेशा के लिए हटा दिया और अपने नाम के आगे शास्त्री लगाने  लगे.

* शास्त्री जी ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने देश के बजट में से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर ख़र्च करने का फैसला लिया था.

* शास्त्री जी हमेशा कहते थे कि देश का जवान और देश का किसान देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण इंसान हैं, इसलिए इन्हें कोई भी तकलीफ नहीं होनी  चाहिए और फिर उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया.

* 10 जनवरी 1966 को भारत-पाकिस्तान के बीच हुए ताशकंद समझौते के अगले ही दिन यानी 11 जनवरी को शास्त्री जी की संदिग्ध मौत हो गई.  उनकी मौत का राज़ आजतक राज़ ही बना हुआ है.

rajesh-limg1बाबु मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए…लंबी नहीं…वाक़ई ये लाइन बिल्कुल फिट बैठती है स्व. राजेश खन्ना पर, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी ज़िंदादिली से जी है. 18 जुलाई 2012 को महज़ 69 साल की उम्र में काका सभी को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी यादें उनकी सुपरहिट फिल्मों और गानों के ज़रिए सबके ज़हन में अब भी ताज़ा है. बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार थे राजेश खन्ना. काका ने जो स्टारडम देखा है, वो शायद ही किसी एक्टर ने देखा हो….काका की पुण्यतिथि पर आइए, उनके कुछ सुपरहिट गाने देखते हैं.

फिल्म- आराधना (1969)

फिल्म- महबूब की मेंहदी (1971)

https://youtu.be/iUyYnqx0Q6Q

फिल्म- मेरे जीवन साथी (1972)

https://youtu.be/heXQRxM2Gro

फिल्म- दो रास्ते (1969)

https://youtu.be/q9aMSJGAkeY

फिल्म- आराधना (1969)