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मेरा 2 साल का एक बच्चा है और फ़िलहाल मैं दूसरा बच्चा नहीं चाहती, इसलिए हार्मोनल इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव (IUCD) इंसर्ट करवाया है. डॉक्टर के मुताबिक़ हैवी ब्लीडिंग के मामले में यह एक उचित गर्भनिरोधक है. पर अगर यह एक अच्छा गर्भनिरोधक है, तो सभी महिलाएं इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करतीं?

– समीरा यादव, कानपुर.

इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (IUCD) काफ़ी लोकप्रिय गर्भनिरोधक है. प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंसयुक्त यह डिवाइस हैवी ब्लीडिंग वाली महिलाओं को दिया जाता है. यह एक स्पेशल डिवाइस है, क्योंकि इसके टी शेप प्लास्टिक फ्रेम के साथ हार्मोंस भी होते हैं. आप 5 साल तक इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. दरअसल, महंगा होने के कारण यह बहुत लोकप्रिय नहीं हुआ है.

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Hormonal Intrauterine Contraceptive

मेरी नौंवें महीने की प्रेग्नेंसी के शुरुआती चेकअप के बाद डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी. टेस्ट के बाद उन्होंने बताया कि मुझे ओलिगोहाइड्रामिनियॉस है और मुझे सीज़ेरियन डिलीवरी ही करवानी होगी. यह क्या है?

– ख्याति झा, रायपुर.

गर्भाशय में बच्चा पानी की थैली के भीतर रहता है, जिसे एम्नियॉटिक फ्लूइड कहते हैं. अल्ट्रासाउंड के ज़रिए उसकी जांच की जाती है. ओलिगोहाइड्रामिनियॉस इसी की कमी की अवस्था है. आम भाषा में कहें, तो गर्भाशय में पानी की कमी है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे पानी की थैली में दरार पड़ना, बच्चे की किडनी में एब्नॉर्मिलिटी के कारण यूरिन कम होना, जीन डिफेक्ट, मां को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ आदि. पानी की कमी के कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है. यही कारण है कि आपके डॉक्टर ने सीज़ेरियन डिलीवरी की सलाह दी है.

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क्या आप पहचानती हैं प्रेग्नेंसी के ये शुरुआती लक्षण?

– जिस प्रकार हर महिला अलग होती है, उसी प्रकार उसकी प्रेग्नेंसी के लक्षण भी अलग होते हैं. यहां तक कि एक ही महिला की  दो प्रेग्नेंसीज़ के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. ज़रूरी नहीं जैसा वो पहली प्रेग्नेंसी में महसूस कर रही थी, वैसा भी दूसरी बार भी करे.

– पीरियड्स मिस होना इसका सबसे बड़ा लक्षण है, हांलाकि पीरियड्स मिस होने के पहले ही बहुत-सी

– कॉन्सेप्शन के बाद महिलाओं को हल्की-सी ब्लीडिंग होती है और पेट में मरोड़ भी होता है.

– शरीर में हो रहे बदलावों के कारण ब्रेस्ट हैवी लगने लगते हैं.

– थकान प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है.

– ज़्यादातर महिलाओं को सुबह-सुबह चक्कर आते हैं.

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डॉ. राजश्री कुमार
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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मैं 29 वर्षीया युवती हूं. हाल ही में मैंने ध्यान दिया कि पिछले साल की तुलना में इस साल पीरियड्स के दौरान मुझे बहुत ज़्यादा रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा है. पहले मेरे पीरियड्स स़िर्फ 4 दिनों तक रहते थे, पर अब 6 दिनों तक रहते हैं. आमतौर पर कितना ब्लड लॉस सामान्य होता है? और मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा है? 

– श्‍वेता मोरे, पुणे.

पीरियड्स के दौरान आमतौर पर महिलाओं को 40 मि.ली. तक ब्लड लॉस होता है, जो 20 मि.ली. से 80 मि.ली. तक भी हो सकता है. अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के बारे में जानने का सबसे आसान तरीक़ा यह देखना है कि रक्तस्राव के दौरान ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) निकलते हैं या नहीं, क्योंकि अगर पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट्स ज़्यादा आ रहे हैं और आपको कमज़ोरी महसूस हो रही है, तो समझ जाएं कि आपको अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है. ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.

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Heavy Menstrual Bleeding
मैं 32 वर्षीया महिला हूं व मेरा 4 साल का बच्चा है. डिलीवरी के छह महीने बाद से ही मैं इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी इस्तेमाल कर रही हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद मेरी फर्टिलिटी लौट आएगी या फिर मुझे कंसीव करने में बहुत ज़्यादा समय लगेगा?

– जयश्री मिश्रा, राजकोट.

आपको बता दें कि इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद ही आपकी फर्टिलिटी वापस आ जाएगी, जबकि हार्मोंसवाले गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता. उनकी फर्टिलिटी लौटने में 3 से 6 महीने का समय लगता है, इसलिए अपने पति से इस बारे में बात करें और जब आप प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हों, तभी कॉपर टी निकलवाएं.

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हैवी ब्लीडिंग के लिए होम रेमेडीज़ 

  • हैवी ब्लीडिंग से राहत के लिए ठंडा सेंक करें. कॉटन के कपड़े में बर्फ के टुकड़े लपेटकर १५-२०  मिनट  सेंक करें. अगर चाहें, तो 4 घंटे बाद
    रिपीट करें.
  • एप्पल साइडर विनेगर शरीर से टॉक्सिन्स को निकालकर हार्मोंस को संतुलित करता है. 1 ग्लास पानी में 1-2 टेबलस्पून एप्पल साइडर विनेगर
    मिलाकर दिन में 3 बार लें.
  • 2 कप पानी में 1 टीस्पून साबूत धनिया डालकर उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तब उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर रख लें. इसे गुनगुना ही पीरियड्स
    के दौरान 2-3 बार पीएं.
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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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मेरी 16 वर्षीया भांजी के पीरियड्स (periods) वैसे तो नियमित हैं, पर अक्सर एग्ज़ाम्स के दौरान अनियमित हो जाते हैं और एग्ज़ाम्स के बाद वापस से सामान्य हो जाते हैं. क्या यह नॉर्मल है?
– विनिता मल्होत्रा, रायपुर.
परीक्षा के दौरान सभी बच्चे तनाव महसूस करते हैं, पर कुछ में उस तनाव का असर ज़्यादा दिखाई देता है. कुछ लड़कियों को तो परीक्षा के दौरान पीरियड्स (periods) ही नहीं आते, पर परीक्षा के बाद पीरियड्स अपने नियमित समय पर आने लगते हैं. दरअसल, तनाव के कारण शरीर में हार्मोंनल चेंजेज़ होते हैं, जो पीरियड्स को प्रभावित करते हैं. आपकी भांजी को इस तनाव से निपटना सीखना होगा. वो योग या एक्सरसाइज़ कर सकती है या फिर म्यूज़िक सुनकर भी ख़ुद को रिलैक्स रख सकती है. साथ ही पैरेंट्स को भी समझना होगा कि एग्ज़ाम्स के व़क्त बच्चों पर बहुत ज़्यादा दबाव न डालें.

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irregular periods during exams
कुछ ही महीने में मेरी दूसरी डिलीवरी है. दो साल पहले, पहली डिलीवरी के व़क्त डिलीवरी की तारीख़ के एक हफ़्ते बाद भी जब डिलीवरी नहीं हुई, तब डॉक्टर ने लेबर पेन शुरू करनेवाली दवाइयां दी थीं. मेरे डॉक्टर ने कहा है कि इस बार भी शायद मेरा लेबर पेन ख़ुद से शुरू न हो. क्या ऐसा ही होता है?
– श्रुति झा, दरभंगा.
आप अकेली नहीं हैं, जिसके साथ ऐसा हुआ है. ऐसा लगभग 7% महिलाओं के साथ होता है. चूंकि पिछली प्रेग्नेंसी के व़क्त ऐसा हुआ था, इसलिए दोबारा इसकी संभावना बनी हुई है. हालांकि हर प्रेग्नेंसी अलग होती है, फिर भी अभी आपके पास कुछ महीने हैं, डॉक्टर से संपर्क बनाए रखें.
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हैप्पी पीरियड्स के लिए टिप्स

  • रोज़ाना कम से कम दो लीटर पानी पीएं. शरीर हाइड्रेटेड रहेगा, तो वॉटर रिटेंशन का असर कम होगा और आप अच्छा महसूस करेंगी.
  • खाने में नमक और चाय-कॉफी की मात्रा कम कर दें.
  • डार्क चॉकलेट खाएं. इसमें मौजूद तत्व शरीर में सेराटॉनिन की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और मूड स्विंग्स से आपको राहत मिलती है.
  • अधिक रक्तस्राव या दर्द हो रहा हो, तो गर्म पानी की बॉटल से पेट के निचले हिस्से में सेंक करें, अच्छा लगेगा.
     
    डॉ. राजश्री कुमार
    स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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मैं 31 वर्षीया महिला हूं. दो हफ़्ते पहले ही मेरी डिलीवरी हुई है. पहले हफ़्ते के अंत तक मुझे ब्रेस्टफीडिंग में थोड़ी तकलीफ़ हुई, जो दूसरे हफ़्ते में और बढ़ गई. मेरे दोनों ब्रेस्ट्स (breasts) में बहुत दर्द हो रहा है और उनमें सूजन भी आ गई है. मुझे बुख़ार भी आ गया है. पेनकिलर्स लेने के बावजूद यह कम नहीं हो रहा. मुझे क्या करना चाहिए?
– मुस्कान द्विवेदी, कानपुर.
आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवानी होगी. अगर यह मामूली सूजन होती, तो पेनकिलर्स से ठीक हो जाती, पर जैसा कि आपने बताया कि आपको बुख़ार भी है, तो हो सकता है कि आपके बे्रस्ट्स में पस हो गया हो. पस निकालने के अलावा इसका कोई और इलाज नहीं है. डॉक्टर को हल्का-सा चीरा लगाकर आपके बे्रस्ट्स से पस निकालना होगा, तभी ये ठीक होगा. आप जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं. ऐसी स्थितियों से बचने के लिए शुरुआत से ही बे्रस्टफीडिंग में सावधानी बरतें.

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मेरी बेटी का नौंवा महीना चल रहा है और अभी-अभी पता चला है कि उसे डेंगू है. मुझे डर लग रहा है, कहीं इससे मां-बच्चे को कोई ख़तरा तो नहीं. कृपया, मेरी मदद करें.
– बेला कुर्मी, हैदराबाद.
प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू मां व गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए बहुत ही ख़तरनाक हो सकता है. इसके कारण महिलाओं में रक्तस्राव शुरू हो सकता है और प्री-मैच्योर डिलीवरी भी हो सकती है. कुछ गंभीर मामलों में बच्चे की जान को भी ख़तरा हो सकता है. डिलीवरी के नज़दीक डेंगू होने से मां से बच्चे में ट्रांसफर होने का ख़तरा भी बना रहता है.

 

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ब्रेस्टफीडिंग के स्मार्ट टिप्स 

  • जन्म के तुरंत बाद दूध पिलाते व़क्त बच्चे के सिर को अच्छी तरह पकड़ें. हाथों से ब्रेस्ट को इस तरह संभालें कि बच्चे के सिर पर भार न पड़े.
  • फीड करते व़क्त बच्चे को दोनों तरफ़ से 10-10 मिनट तक दूध पिलाएं, क्योंकि पहले 5 मिनट तक पतला दूध ही आता है. अगर आपने 5-5 मिनट ही दोनों तरफ़ पिलाया, तो बच्चे को जल्दी भूख लग जाएगी.
  • फीड करने से पहले ब्रेस्ट्स को वेट टिश्यू पेपर से पोंछकर साफ़ कर लें.
  • अगर निप्पल की स्किन रफ व ड्राय लग रही है, तो थोड़ा-सा अपना दूध लेकर उसमें ऑलिव ऑयल मिलाकर निप्पल्स पर लगाएं, स्किन सॉफ्ट हो जाएगी.

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पहली बार मां बनने का एहसास ही बहुत ख़ूबसूरत होता है, लेकिन नई मांएं अपनी नन्हीं-सी जान को लेकर कई बार तब परेशान हो जाती हैं, जब उन्हें ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding Tips) का सही तरीक़ा नहीं पता होता. चिंता न करें, ऐसा हर नई मां के साथ होता है. कुछ बातों का ध्यान रखकर आप आसानी से फीड करा पाएंगी.

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ब्रेस्टफीडिंग के टिप्स

ऐसे कपड़े पहनें, जिनमें आसानी से ब्रेस्टफीडिंग कराई जा सके, जैसे सामने से खुलनेवाली कुर्ती या स्ट्रेचवाली टीशर्ट पहनें, जिन्हें आसानी से उठाकर स्तनपान कराया जा सके.
कई मांएं ब्रेस्टफीडिंग के बाद ब्रा नहीं पहनतीं, क्योंकि फीड कराने में द़िक्क़त होती है, पर ऐसा न करें. इससे ब्रेस्ट ढीले और बेडौल हो सकते हैं. सही साइज़ की ब्रा पहनें. ब्रेस्टफीडिंग कराने के लिए कई तरह की नर्सिंग ब्रा भी मार्केट में मिलती हैं.
कई बार स्तनों से दूध टपकता रहता है, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए डिसपोज़ेबल और वॉशेबल ब्रेस्ट पैड का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.
एक स्कार्फ या दुपट्टा भी साथ रखें, ताकि दूध पिलाते व़क्त स्तन और बच्चे को ढंक सकें, पर ध्यान रखें कि शिशु आराम से सांस ले पाए.
घर पर अपना एक नर्सिंग स्टेशन बनाएं, यानी एक ऐसी जगह तय करें, जहां आराम से बैठकर आप शिशु को दूध पिला पाएं.
इस जगह पर पानी की बोतल, टीवी का रिमोट, बेबी वाइप्स, टिश्यूज़, शिशु के एक जोड़ी कपड़े और कुछ पसंदीदा क़िताबें लेकर बैठें, क्योंकि दूध पिलाने में कम से कम 40 मिनट का व़क्त तो लग ही जाता है, ऐसे में किसी चीज़ के लिए आपको बीच में उठना न पड़े.
हर बार हाथ धोकर आराम से बैठें.
हर बार दूध पिलाने से पहले अपने स्तनों को कपड़े या वेट टिश्यू पेपर से पोंछकर साफ़ कर लें.
तकिए को पीठ के पीछे रखकर आराम से बैठ जाएं.
यूं तो कई अलग-अलग पोज़िशन्स हैं ब्रेस्टफीडिंग कराने की, लेकिन वही तरीक़ा अपनाएं, जिसमें आप और बच्चा दोनों ही आराम महसूस करें.
गोद में एक और तकिया रखें. तकिया इतना ऊंचा हो कि बच्चे को उस पर लिटाया जाए, तो उसका मुख मां के स्तन के क़रीब हो, इससे शिशु को दूध पीने में आसानी होती है और मां को ज़्यादा झुकना भी नहीं पड़ता.
बच्चे के सिर, गला, पीठ को अपने हाथों से सहारा देकर रखें. शिशु को अपने नज़दीक ले आएं, ताकि वो आसानी से दूध पी सके.
कोशिश करें कि बच्चे के मुख में एरोओला (निप्पल के आसपास के गहरे रंग की त्वचा) का भाग भी जाए, इससे शिशु को दूध खींचने में आसानी होगी.
ध्यान रखें कि शिशु की नाक न दबे और वह आसानी से सांस ले पाए.
दूध पिलाने के बाद शिशु को गोद में कंधे से चिपकाकर डकार ज़रूर दिलाएं, ताकि शिशु के पेट में गैस न बने.

सी-सेक्शन के बाद ब्रेस्टफीडिंग

डिलीवरी अगर सी-सेक्शन या सर्जरी के ज़रिए हुई हो, तो ब्रेस्टफीडिंग डिलीवरी के तुरंत बाद करना थोड़ा मुश्किल होता है.
ऑपरेशन के दर्द की वजह से बैठकर फीड कराना आसान नहीं होता.
एनिस्थीसिया के असर की वजह से पांच से छह घंटे बाद ही नर्स और घर के सदस्यों की मदद से बच्चे को दूध पिलाना शुरू किया जा सकता है.
शिशु को दूध पिलाने के लिए अस्पताल में मौजूद नर्स और डॉक्टर की सहायता अवश्य लें.
सर्जरी के बाद मां को दी जानेवाली एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स का बहुत ज़्यादा असर मां के दूध पर नहीं होता, इसलिए चिंता न करें.
बहुत ज़्यादा दर्द न हो, तो पेनकिलर अवॉइड करें.

अगर आप बच्चे के साथ बाहर हैं या सार्वजनिक स्थान पर हैं, तो ब्रेस्टफीडिंग के लिए शर्माएं न. बच्चे को दूध पिलाना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए.