depression

सुशांत के निधन के बाद से कई सेलेब्स अपने डिप्रेशन के बारे में खुलकर बात कर रहे हैं. एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं को व्यक्त करने के महत्व पर हर तरफ चर्चा हो रही है. और अब सुष्मिता ने भी एक बेहद इमोशनल पोस्ट के ज़रिए मेंटल हेल्थ पर बात की है. उनका कहना है, आप जिसे प्यार करते हैं या जिसके करीब हैं, उसे पूरी तरह से जानिए. साथ ही उन्होंने लोगों से ये भी कहा है कि जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी होती है. बस हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए.

मेंटल हेल्थ पर बात करना बहुत जरूरी है

Sushmita Sen


सुष्मिता ने कहा कि जैसे हम दूसरे टॉपिक्स पर बातें करते हैं, वैसे ही हमें मेंटल हेल्थ पर भी खुलकर बोलना चाहिए. ”सुशांत और उन जैसे अन्य युवा हमें बताने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें दूसरे लोगों को दोष देना शुरू करने से पहले अपनी चीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी. जब मैंने यूट्यूब चैनल शुरू किया तो हर कोई चाहता था कि मैं मेंटल हेल्थ पर बोलूं. मैं भी सोचती रही कि ठीक है मैं मेंटल हेल्थ पर कुछ करूंगी. मैंने तय किया कि ब्लॉग लिखूंगी, लेकिन शुरू नहीं कर पाई, लेकिन जब मैंने सुशांत की खबर सुनी, तो मैंने बस लगातार लिखना शुरू कर दिया है.”

सुष्मिता भी गुज़री हैं डिप्रेशन से

Sushmita Sen

मैंने भी बहुत डिप्रेशन झेला है. मुझे पता है वह बहुत रियल इमोशन होता है. उस वक्त हंसना बहुत मुश्किल है, फिर भी हमें जीवन चुनना पड़ता है, जीना पड़ता और हमें जीना भी चाहिए. हर इंसान अलग होता है. प्रतिदिन उससे निकलने की कोशिश करनी चाहिए. यादें रखें कि आप अकेले नहीं हैं. हम सब के अंदर कोई न कोई तकलीफ है, जो हमें डिप्रेशन की ओर ले जाता है, फिर चाहे क्लीनिकल हो या जिंदगी के रास्ते आपको उस मोड़ तक ले आते हैं. मैं उस दर्द को बांटना चाह रही थी. हम सबकी जिंदगी में अलग-अलग तरह की समस्याएं हैं। हमें उससे हार नहीं माननी चाहिए. ये भी सच है कि हर इंसान अलग होता है. कुछ लोगों को दोस्तों और परिवार के सपोर्ट की ज़रूरत होती है, तो कुछ डॉक्टर या मानसिक चिकित्सक के पास जाकर बेहतर महसूस करते हैं. बस आपको किसी भी हाल में अपनी ज़िंदगी का उद्देश्य नहीं भूलना चाहिए. मेरी जिंदगी के कई उद्देश्य हैं. मेरी दो बेटियां हैं, जिनका उनका पालन पोषण मैं अकेले कर रही हूं. मैं सिंगल मदर हूं. तो मैं सोच भी नहीं सकती कि जिंदगी खत्म हो गई.

जब भी ज़रूरत हो, डॉक्टर से मिलें, दोस्तों से मिलें

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सुष्मिता ने आगे कहा, ‘मुझे अगर लगता था कि मेरा डिप्रेशन बढ़ रहा है तो मैं सीधे डॉक्टर से मदद लेती थी. उनसे ट्रीटमेंट पूछती थी. अगर आपका मन नहीं अच्छा है, आपको रोना आ रहा है, तकलीफ हो रही है तो इसका मतलब है कि आपको मेडिकल हेल्प की ज़रूरत है, मुझे जब भी ऐसा महसूस हुआ, तो मैंने अपने डॉक्टर से कंसल्ट किया. क्योंकि मैं जानती हूँ कि मैं खुश रहने वाली इंसान हूं. अगर मुझे रोने का मन कर रहा है, तो मतलब मेरा मन ठीक नहीं है और मुझे मदद की ज़रूरत है. कई बार मेडिटेशन और मनोचिकित्सक ये दोनों आपको ठीक कर देते हैं. आपके पास हारने का विकल्प नहीं होता है. मेरे पास भी नहीं था. मुझे जिंदगी में बहुत कुछ अकेले दम पर करना पड़ा है. मुझे अकेलेपन से डर नहीं लगता. इसलिए मैं एक ही बात सोचती हूं मुझे ठीक होना ही है.”

डिप्रेशन पर लिखा इमोशनल पोस्ट

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सुशांत की डेथ के बाद सुष्मिता ने अपने इंस्टाग्राम पर भी एक बेहद इमोशनल पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था- अच्छा दिखो. अच्छा दिखाओ और हर समय अच्छे रहो, यही रील और रियल लाइफ को एक जैसा बना देता है. ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन का प्रोजेक्शन बन जाता है. कई बार शोहरत मिलने के साथ, बैंक बैलेंस बढ़ने के साथ असुरक्षा भी बढ़ती है. ये सभी एक्टर की जिंदगी में ट्रिगर के रूप में जाना जा सकता है, लेकिन वास्तव में ये हम सभी की जिंदगी की सच्चाई है. आपको जो भी तकलीफ में है, बस सिर्फ एक बात का ख्याल रखें कि आपको बहुत से लोग प्यार करते हैं. आपकी ज़िंदगी कीमती है और आपकी खुशियां भी…. अपनी खुशियों की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी है और हमें उस ज़िम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए. तकलीफ चाहे जितनी बड़ी हो, बस गुज़र जाएगी. ये जिंदगी खूबसरत तोहफा है, न जाने कितनी सम्भावनाएं, न जाने कितने ख्वाब हैं इसमें. इसलिए कभी हार मत मानें. अभी तो न जाने कितने अमेजिंग मोमेंट्स भी जीने हैं हमें… इसलिए बस आगे बढ़ते रहिए.

क्या हम दर्द छिपाने में एक्सपर्ट हो गए हैं

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अक्सर हम अपने मन की बात सिर्फ ये सोचकर कह नहीं पाते कि कैसे कहें? क्या हम अपने दर्द को छिपाने में एक्सपर्ट हो गए हैं.. या फिर किसी के पास इतना समय नहीं है कि वो हमारे दर्द को समझे, सुने या महसूस करे. हर किसी की ज़िंदगी मे अनगिनत प्रेशर है. उतार चढ़ाव हैं, लेकिन हमें हमेशा लड़ना चाहिए, कभी हार नहीं माननी चाहिए. अगर आप थक रहे हैं तो आराम करना सीखिए, क्विट करना नहीं. हम दुनिया नहीं बदल सकते, लेकिन अपने विचारों को बदल सकते हैं. ईश्वर पर यकीन करिए. हम अपनी जिंदगी में खुशियां खुद ला सकते हैं, इसलिए कभी हार मत मानिए.

प्रोटेक्ट योर पीस
सुष्मिता ने कड़े शब्दों में अपने प्रशंसकों और दर्शकों को जीवन में कभी भी हार न मानने के लिए कहा और अंत तक लड़ते रहने और जरूरत पड़ने पर हमेशा मदद लेने के लिए भी कहा. उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ एक फोटो भी शेयर की, जिसमें लिखा था, ‘प्रोटेक्ट योर पीस’ यानि कि अपनी शांति की रक्षा करो.

सुशांत के लिए कही ये बात

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सुशांत बहुत ही प्रतिभाशाली कलाकार थे. उन्होंने बहुत कम समय में शोहरत हासिल की थी. उनकी मौत की खबर सुनकर शॉक लगा मुझे. मैं उन्हें पर्सनली तौर नहीं जानती थी. काश मैं उनसे मिली होती. मैं उनके काम की मुरीद रही हूं. जब उनके निधन की खबर आई तो मुझसे रहा नहीं गया. यह सिर्फ एक सुशांत या एक कलाकार का सच नहीं है. बहुत सारे ऐसे लोग ऐसे मानसिक शोर से गुजर रहे हैं जिनकी आवाज हम तक पहुंच नहीं रही है. कलाकार के लिए अपनी बात को कहना और दिखाना काफी मुश्किल होता है, अगर आप अपनी यह आवाज को दबाकर रखते हैं. यह भी सच है कि कई बार लोग आपकी कही बातों का मजाक उड़ाते हैं. मेरा मानना है कि तब भी आपको अपना सच बोलना चाहिए. आपको मेडिकल या इमोशनल मदद मांगनी चाहिए.’

बता दें कि सुष्मिता ने लंबे समय बाद वेब सीरीज आर्या से कमबैक किया है और उनकी एक्टिंग की हर कोई जमकर तारीफ कर रहा है. सुष्मिता की पिछली फिल्म निर्बाक थी जो कि 2015 में रिलीज हुई थी. यह एक बंगाली फिल्म थी. बॉलीवुड की फिल्म में सुष्मिता दस साल पहले नजर आई थी फिल्म ‘नो प्रॉब्लम’ जो कि 2010 में रिलीज हुई थी. हालांकि सुष्मिता बताती हैं कि ये 10 साल भी उनके लिए मुश्किल ही रहे, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी.

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर ने लोगों को एक बार ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि डिप्रेशन (Depression) जैसी गंभीर समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए. हैरानी की बात ये है कि आज भी अधिकतर लोग डिप्रेशन को लेकर उतने संजीदा नहीं हैं, जितना होना चाहिए. ख़बरों के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत को छह महीने पहले डिप्रेशन की शिकायत शुरू हो गई थी, लेकिन सुशांत ने इसका पूरा इलाज नहीं कराया, दवाइयां भी समय पर नहीं ली, जिससे उनका डिप्रेशन बढ़ता चला गया और अब डिप्रेशन ने उनकी ज़िंदगी ले ली. बॉलीवुड इंडस्ट्री में मानसिक तनाव बहुत होता है. अक्सर जब बॉलीवुड सितारों का करियर आगे नहीं बढ़ पाता, तो स्टार्स इसे सहन नहीं कर पाते और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. ग्लैमर की चकाचौंध में रहने वाले ये सितारे कई बार अंदर ही अंदर टूट रहे होते हैं और कई बार इसका परिणाम जानलेवा भी हो जाता है. आइए, आज हम आपको उन बॉलीवुड सितारों के बारे में बताते हैं, जो डिप्रेशन के शिकार हो चुके हैं. सुशांत सिंह राजपूत ही नहीं ये फिल्मी सितारे भी हो चुके हैं डिप्रेशन के शिकार.

11 Bollywood Celebrities Who Have Suffered From Depression

1) सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput)
सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर से पूरा देश स्तब्ध है. आखिर ऐसा क्या हुआ सुशांत सिंह राजपूत के साथ कि उन्होंने फांसी लगाकर अपनी ज़िंदगी को ख़त्म कर दिया. बता दें कि उन्होंने अपने बांद्रा स्थित घर पर फांसी लगाकर जान दे दी. सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, वे पिछले छह महीनों से डिप्रेशन से गुजर रहे थे.

Sushant Singh Rajput

2) दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone)
बॉलीवुड की सुपरस्टार दीपिका पादुकोण डिप्रेशन की शिकार हो चुकी हैं और इसके बारे में वो अक्सर बताती रहती हैं. अपनी इस बीमारी का ख़ुलासा ख़ुद दीपिका ने एक इंटरव्यू के दौरान किया था. उन्होंने बताया था कि जब वो डिप्रेशन का दर्द झेल रही थीं, तब उन्हें कुछ समझ नहीं आता था कि वो कहां जाएं, क्या करें ? वो बस रोती रहती थीं. ख़ास बात ये है कि दीपिका पादुकोण इस गंभीर बीमारी से लड़कर बाहर आई हैं और अब वो मेंटल हेल्थ के बारे में लोगों को जागरूक करती रहती हैं. इसी कड़ी में दीपिका ने ‘द लिव लव लाफ फाउंडेशन’ (The Live Love Laugh Foundation) भी लॉन्च किया है.

Deepika Padukone

3) अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan)
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी डिप्रेशन के दर्द से गुजर चुके हैं. 90 के दशक में जब बिग बी ने बतौर निर्माता अपनी कंपनी शुरू की थी, लेकिन एक के बाद एक कई फिल्में फ्लॉप होने के कारण जब उनकी कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई, तो इस नुकसान को वे सहन नहीं कर पाए और डिप्रेशन में चले गए. बिग बी इसके कारण शारीरिक- मानसिक रूप से काफी कमज़ोर हो गए थे.

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Amitabh Bachchan

4) अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma)
अनुष्का शर्मा ने बहुत कम समय में बॉलीवुड में अपनी अलग जगह बनाया है, लेकिन अनुष्का को भी डिप्रेशन के दौर से गुजरना पड़ा है. अपनी इस मानसिक स्थिति के बारे में अनुष्का ने खुद ट्वीट करके बताया था कि वो एंज़ायटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से गुज़र रही हैं और उनका इलाज चल रहा है. उन्होंने इस विषय पर बेबाक़ी से कहा कि जब आपके पेट में दर्द होता है तो क्या आप डॉक्टर के पास नहीं जाते, तो फिर मेंटल हेल्थ से जुड़े मुद्दों पर ख़ुलकर बात करने में शर्म कैसी?

Anushka Sharma

डिप्रेशन से बचने और डिप्रेशन को दूर करने के उपाय जानने के लिए देखें ये वीडियो

5) शाहरुख ख़ान (Shahrukh Khan)
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख ख़ान भी डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं. शाहरुख ख़ान ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि साल 2010 में कंधे की सर्जरी कराने के बाद कुछ समय के लिए वो डिप्रेशन में चले गए थे, लेकिन अब वो पूरी तरह से इससे बाहर आ चुके हैं.

Shahrukh Khan

6) वरुण धवन (Varun Dhawan)
बहुत कम लोगों को ये बात मालूम है कि सुपरस्टार वरुण धवन भी डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक स्थिति से गुजर चुके हैं. वरुण धवन ने बताया कि फिल्म बदलापुर की शूटिंग के दौरान उन्हें डिप्रेशन की समस्या हो गई थी. एक इंटरव्यू के दौरान अपने इस दर्द को बयां करते हुए वरुण ने कहा था कि मैं अचानक दुखी हो जाता था, अकेलापन महसूस करता था. इस बीमारी ने मेरे मानसिक स्वास्थ्य को काफ़ी हद तक प्रभावित किया था. यह एक गंभीर समस्या है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

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Varun Dhawan

7) टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff)
बॉलीवुड के युवा अभिनेता टाइगर श्रॉफ भी ख़ुलकर अपने डिप्रेशन का दर्द बयां कर चुके हैं. एक इंटरव्यू के दौरान टाइगर ने कहा था कि उनकी फिल्म ‘अ फ्लाइंग जट्ट’ के फ्लॉप होने के बाद वो ज़बरदस्त डिप्रेशन में चले गए थे. उनका कहना था कि उनकी फिल्म ‘बाग़ी’ को सफलता मिली थी, लेकिन ‘अ फ्लाइंग जट्ट’ की असफलता ने उन्हें डिप्रेशन का शिकार बना दिया था. हालांकि उन्होंने डिप्रेशन के आगे हार नहीं मानी और इससे लड़ने का फैसला किया. आख़िरकार ‘मुन्ना माइकल’ की शूटिंग के दौरान वो ख़ुद को डिप्रेशन से पूरी तरह उबारने में सफल रहे.

Tiger Shroff

8) इलियाना डिक्रूज़ (Ileana D cruz)
इलियाना भी डिप्रेशन का शिकार हो चुकी हैं. इलियाना डिक्रूज़ ने एक इंटरव्यू में अपने 15 सालों के डिप्रेशन के बारे में बताया था. इलियाना ने बताया कि वो जब इंडस्ट्री में आई थीं तो खुद को यहां मिसफिट पाती थीं. उन्होंने इस बात को एक्सेप्ट किया कि वो डिप्रेशन में हैं. उनका कहना है कि इस बात को एक्सपेप्ट करना, बेहतर होने की दिशा में एक कदम है.

Ileana D cruz

9) आलिया भट्ट की बड़ी बहन शाहीन (Shaheen)
आलिया भट्ट बॉलीवुड की बड़ी बहन शाहीन भी डिप्रेशन की शिकार रह चुकी हैं. शाहीन ने अपनी इस जर्नी पर किताब भी लिखी है. इस किताब का नाम है Have Never Been (Un)Happier. शाहीन और आलिया भट्ट जब एक इवेंट में शामिल हुई थी, वहां पर उन्होंने मेंटल हेल्थ के बारे में बात की. उसी दौरान इस बारे में बात करते-करते आलिया भट्ट इतनी इमोशनल हो गईं कि वे फूट-फूटकर रोने लगीं. आलिया ने ये भी कहा, “हालांकि मुझे डिप्रेशन की समस्या नहीं है, लेकिन कभी-कभी मुझे एंज़ायटी होती है, पिछले 5-6 महीनों से मुझे यह समस्या हो रही है.”

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Shaheen Alia Bhatt

10) ज़ायरा वसीम (Zaira Wasim)
फिल्म ‘दंगल’ और ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में नज़र आ चुकी एक्ट्रेस ज़ायरा वसीम ने भी सोशल मीडिया पर अपने डिप्रेशन का खुलासा किया था. ज़ायरा सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया था कि पिछले कई सालों से वो डिप्रेशन यानी अवसाद से जूझ रही हैं और उन्हें हर रोज़ इसके लिए 5 गोलियां खानी पड़ती है.

Zaira Wasim

11) मनीषा कोइराला (Manisha Koirala)
बॉलीवुड की कई बेहतरीन फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी डिप्रेशन के दर्द को झेल चुकी हैं. उन्हें सिर्फ डिप्रेशन ने ही नहीं, बल्कि गर्भाशय के कैंसर ने भी अपना शिकार बना लिया था. हालांकि समय पर इलाज के साथ-साथ परिवार और दोस्तों के सहयोग ने उन्हें दोनों बीमारियों से लड़ने की हिम्मत दी. मनीषा का कहना है कि वे निराशावादी नहीं हैं, इसलिए डिप्रेशन से लड़ना जानती हैं. बता दें कि डिप्रेशन ने उनके रंग-रूप को भी काफ़ी हद तक प्रभावित किया था.

Manisha Koirala

डिप्रेशन के संकेत यदि वक़्त रहते समझ आ जाएं, तो इससे बहुत आसानी से बचा जा सकता है. यदि आपके घर में या आपके आसपास कोई व्यक्ति आपको डिप्रेस्ड दिखाई दे, तो खुद आगे बढ़कर उसकी मदद करें, उसके साथ वक़्त बिताएं, उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें, उसे डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद करें. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें. डिप्रेशन एक ऐसी नकारात्मक भावना है, जो व्यक्ति के जीवन से सारी खुशियां छीन लेती है. ऐसे व्यक्ति को जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं लगता, कई बार तो उसकी जीने की इच्छा भी ख़त्म हो जाती है. ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी बता रही हैं डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय.

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क्या हैं डिप्रेशन के कारण?
यदि किसी व्यक्ति के परिवार में अचानक किसी की मृत्यु हो जाए, किसी को बिज़नेस में बहुत बड़ा लॉस हो जाए, किसी की शादी टूट जाए… ऐसी कोई भी बात या घटना, जिसे आप चाहकर भी भूल नहीं पाते या जिसे सहन करना आपके लिए मुश्किल हो जाए, छह महीने बाद भी आप उस चीज़ को भूल न पाएं और आपका किसी चीज़ में मन न लगे, तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन है.

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क्या हैं डिप्रेशन के लक्षण?
डिप्रेशन की शुरुआत में चीज़ों में रुचि कम होने लगती है, फिर आप लोगों से कटने लगते हैं, सामाजिक समारोहों में जाने से कतराते हैं, घर से बाहर नहीं निकलना चाहते, आपका किसी काम में मन नहीं लगता, आप बहुत ज़्यादा सोने लगते हैं, आपका खाने का मन नहीं करता. जब ये स्थिति छह महीने बाद भी नहीं बदलती, तो मन में आत्महत्या के ख़्याल आने लगते हैं, जीने की रूचि ख़त्म होने लगती है.

डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय जानने के लिए देखें लाइफ कोच हित्ती रंगनानी का ये वीडियो:

आसान है डिप्रेशन को हराना
डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे ज़रूरी है किसी अपने का साथ, जिससे आप अपने मन की हर बात शेयर कर सकें, इसलिए अपने करीबी दोस्त या घर के करीबी सदस्य से अपने मन की बात शेयर करें. साथ ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें. नियमित एक्सरसाइज़, योग, ध्यान, सही आहार, पूरी नींद आदि से आप डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें.

Tips For Managing Depression
डिप्रेशन को ऐसे करें मैनेज (Self Help: Tips For Managing Depression)

डिप्रेशन ऐसी नकारात्मक भावना, जहां आपकी सारी ऊर्जा लगभग ख़त्म हो जाती है, उम्मीदें, आशाएं, ख़ुशियां… सब कुछ धूमिल-सी नज़र आती हैं. ज़िंदगी बेकार लगने लगती है… ऐसा महसूस होता है जैसे इन परिस्थितियों से निकलना अब नामुमकिन है, ज़िंदा रहना मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में बहुत ज़रूरी हो जाता है कि आप ख़ुद कुछ प्रयास करें, ताकि अपने इस डिप्रेशन को मैनेज कर सकें और पॉज़िटिव सोच अपना सकें.

बाहर जाएं, कनेक्टेड रहें: यह सच है कि डिप्रेशन के दौरान बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि आपमें वो ऊर्जा नहीं रहती, लेकिन थोड़ा-सा प्रयास आपकी मदद कर सकता है. सोशल गैदरिंग्स में जाएं, दोस्तों से मिलें, रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहें. अकेलापन आपकी तकलीफ़ और बढ़ाएगा. बेहतर होगा, नए दोस्त बनाएं और पुरानों से मिलना-जुलना शुरू करें. आपके क़रीबी हमेशा आपकी मदद करने को तत्पर रहेंगे, इसलिए अपनी तकलीफ़ उनसे शेयर करें, इससे आपका मूड बदलेगा और मन हल्का होगा.

किस तरह से कनेक्ट करें?

  • जिनके साथ आप सुरक्षित महसूस करते हों और जिन पर विश्‍वास करते हों, उनसे मिलें.
  • मिलने का अर्थ है आमने-सामने मिलना. यह सही है कि सोशल नेटवर्किंग और फोन कॉल्स से भी कनेक्ट किया जा सकता है, लेकिन फ़ायदा अधिक तभी होगा, जब फेस टु फेस मिलेंगे.
  • दूसरों की सहायता करने का मन बनाएं. दूसरों के लिए कुछ करेंगे, तो आपको कहीं न कहीं संतुष्टि महसूस होगी. मदद चाहे छोटी ही क्यों न हो, किसी के काम आने की भावना आपको पॉज़िटिव बनाएगी.
  • पेट्स रखें और उसके साथ समय बिताएं. यह काफ़ी कारगर तरीक़ा है डिप्रेशन से निपटने का. जानवरों से प्यार करते हैं, तो उनकी केयर करें, इससे आप बेहतर महसूस करेंगे.
  • एक्सरसाइज़, वर्कआउट, योग व मेडिटेशन करें. यह काफ़ी अच्छा उपाय है. इससे आप ऊर्जा व नई शक्ति महसूस करेंगे. मेडिटेशन व योग से मन शांत होगा और नकारात्मक भाव बाहर निकलेंगे.
  • एक्सपर्ट की मदद लें. हिचकिचाएं नहीं. आप सच में अच्छा महसूस करेंगे. ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बदलेगा और डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलेगी.

कनेक्शन के बेस्ट टिप्स

  • किसी क़रीबी या भरोसेमंद से अपनी तकलीफ़ व दुख का कारण शेयर करें.
  • किसी दोस्त के साथ कॉफी या टी डेट पर जाएं.
  • मूवी या डिनर प्लान करें.
  • किसी पुराने दोस्त को कॉल करें.
  • कोई हॉबी क्लास जॉइन कर लें.

अच्छा महसूस करानेवाली गतिविधियां करें: जिन बातों से, जिन गतिविधियों से आप रिलैक्स्ड और ऊर्जावान महसूस करते हों, उन पर ध्यान दें. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं. शेड्यूल बनाएं और दिनभर में फन एक्टिविटीज़ के लिए टाइम फिक्स करें.

कैसे करें?

  • जो चीज़ें आपको पहले मज़ेदार लगती थीं, उन्हें फिर करना शुरू करें.
  • यह सच है कि आपका मन नहीं करेगा, ये तमाम चीज़ें करने का, लेकिन ख़ुद को फोर्स करें, क्योंकि एक बार आप इस तरह की फन एक्टिविटीज़ में ख़ुद को व्यस्त कर लेंगे, तो आपको विश्‍वास ही नहीं होगा कि कितना बेहतर महसूस करेंगे.
  • हो सकता है कि एक बार में आप डिप्रेशन से बहुत ज़्यादा बाहर न आ पाएं, लेकिन धीरे-धीरे आप ख़ुद को अधिक सकारात्मक व ऊर्जावान महसूस करने लगेंगे.
  • आप कोई स्पोर्ट्स एक्टिविटी या स्विमिंग, डांस व साइकिलिंग जैसे शौक अपना सकते हैं.

अपनी हेल्थ को ज़रूर सपोर्ट करें

  • डिप्रेशन सबसे पहले आपकी नींद पर असर डालता है. या तो आप बहुत कम या बहुत अधिक सोने लगते हैं. अच्छी नींद लेने की कोशिश करें. हेल्दी स्लीप टेक्नीक्स के बारे में जानें और नींद पूरी लें. इससे आपको रेस्ट मिलेगा और आप फ्रेश फील करेंगे.
  • स्ट्रेस को बढ़ने न दें, क्योंकि स्ट्रेस से डिप्रेशन और बढ़ सकता है. उन तमाम तत्वों पर ध्यान दें, जो स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जैसे- काम का प्रेशर, आर्थिक समस्या, ख़राब रिलेशनशिप… बेहतर होगा इन सबसे निपटने के तरीक़ों पर ध्यान दें. एक्सपर्ट की सहायता भी ले सकते हैं.
  • रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं. ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ करें, ध्यान करें, म्यूज़िक सुनें, मसल रिलैक्सेशन तकनीक सीखें.

वेलनेस टूलबॉक्स

  • अपने बारे में सकारात्मक बातें लिखें.
  • लिस्ट बना लें कि आपको अपनी कौन-सी बातें और आदतें सबसे ज़्यादा पसंद हैं.
  • कोई फनी मूवी या टीवी सीरीज़ देखें.
  • म्यूज़िक सुनें.
  • नेचर में समय बिताएं. समंदर के किनारे या किसी पार्क में सुबह-शाम जाएं.
  • हॉट बाथ लें. जल्दबाज़ी न करके आराम से गर्म पानी से नहाएं, इससे शरीर हल्का लगेगा.
  • ख़ुद को किसी न किसी काम में बिज़ी रखें. हेल्दी डायट लें. मनपसंद डिश बनाएं.

एक्टिव रहने की कोशिश करें: एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने का सबसे बेहतर तरीक़ा है. शोध कहते हैं कि एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने में उतनी ही कारगर है, जितनी दवा. इसके अलावा एक्सरसाइज़ से डिप्रेशन के दोबारा होने की संभावना भी कम हो जाती है.

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एक्सरसाइज़ से मूड को बूस्ट कैसे करें?

  • यह सच है कि डिप्रेशन के चलते एक्सरसाइज़ का मन बनाना बेहद मुश्किल है, लेकिन एक बार आप इच्छाशक्ति दिखा देंगे, तो यह बेहद फ़ायदा पहुंचाएगी.
  • रिसर्च बताते हैं कि डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को एक्सरसाइज़ से ऊर्जा मिलती है और हताशा कम होती है.
  • रिदमवाली एक्सरसाइज़ अधिक फ़ायदेमंद होती है, जैसे- वॉकिंग, वेट ट्रेनिंग, स्विमिंग या डान्सिंग.
  • किसी क्लब के मेंबर बनकर अन्य लोगों के साथ एक्सरसाइज़ करना और बेहतर परिणाम देगा.
  • घर में अगर पेट्स हैं, तो उनके साथ ईवनिंग वॉक पर जाएं.

हेल्दी खाएं, डिप्रेशन से लड़नेवाली डायट फॉलो करें: जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन… ये कहावत यूं ही नहीं बनी है. हम जो खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे शरीर व मन पर पड़ता है. फैटी, ऑयली, कैफीन या अल्कोहल जैसी चीज़ों का सेवन कम करें, क्योंकि ये आपके हार्मोंस पर असर करते हैं और मूड पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

कैसी हो आपकी डायट?

  • शुगर और रिफाइंड कार्ब्स का सेवन कम कर दें. फ्रेंच फ्राइज़, पास्ता, एरिएटेड ड्रिंक्स कुछ समय के लिए ही बेहतर महसूस करवाते हैं. आगे चलकर ये आपके मूड को प्रभावित कर सकते हैं.
  • दिन में 3-4 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. खाने में बहुत ज़्यादा अंतर रखेंगे, तो चिड़चिड़ापन बढ़ेगा.
  • विटामिन बी ज़रूर लें, क्योंकि फॉलिक एसिड और विटामिन बी 12 की कमी से डिप्रेशन बढ़ता है. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडा, बींस, सिट्रस फ्रूट्स अधिक लें.
  • ओमेगा 3 फैटी एसिडयुक्त भोजन लें. मूड को संतुलित रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फैटी फिश और ठंडे पानी की मछलियों के तेल का सेवन करें.

ज़रूरी है सनलाइट का डेली डोज़: सनलाइट सेरोटोनिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाकर मूड बेहतर करने में मददगार है. जब भी मौक़ा मिले, रोज़ाना 15 मिनट की धूप ज़रूर लें.

कब और कैसे लें यह डेली डोज़?

  • आप लंच टाइम में बाहर जा सकते हैं, कुछ देर टहलें.
  • आसपास कोई गार्डन वगैरह हो, तो वहां जा सकते हैं.
  • अपने घर पर और वर्कप्लेस में जितना संभव हो, नेचुरल लाइट में रहने की कोशिश करें.
  • छुट्टी के दिन सुबह-सुबह की धूप लेने के लिए छत का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर रोज़ाना वॉक के लिए भी जा सकते हैं.

विंटर ब्लूज़ से कैसे निपटें?

  • सर्दियों के मौसम में सनलाइट वैसे भी कम होती है और इस मौसम में डिप्रेशन अधिक महसूस होता है, जिसे सीज़नल इफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं. लेकिन यदि आप प्रयास करें, तो सालभर आपका मूड बेहतर बना रह सकता है.

नकारात्मक सोच को चुनौती दें: ज़िंदगी से ऊब महसूस होना, कमज़ोरी-थकान लगना, निराशा महसूस होना… इस तरह के नकारात्मक भाव डिप्रेशन के चलते आते हैं. आपको यह बात मन में बैठा लेनी होगी कि ये तमाम नकारात्मक विचार असल में हैं ही नहीं. आपको अपने माइंड को पॉज़िटिव सोचने के लिए प्रशिक्षित करना होगा. हालांकि यह मुश्किल है, लेकिन लगातार प्रयास से यह संभव हो सकता है.

इस तरह के विचारों से रहें दूर

बहुत कुछ या कुछ भी नहीं सोचना: ब्लैक एंड व्हाइट में चीज़ों को न देखें. ये सही है और ये ग़लत… ऐसा नहीं होता. बीच का रास्ता भी होता है.

बुरे अनुभव को मन में बैठा लेना: एक जगह अगर असफलता हाथ लगी हो, तो इसका यह मतलब नहीं कि हर बार और हर जगह ही असफलता मिलेगी. अपने बुरे अनुभवों को मन में बैठा न लें.

पॉज़िटिव बातों को भूलकर स़िर्फ निगेटिव ही याद रखना: आपके साथ बहुत कुछ अच्छा होता है, लेकिन आप उसे अधिक समय तक याद नहीं रखते, लेकिन कोई एक बात ग़लत हो, तो उसे बार-बार याद करते हैं. इस सोच से बाहर निकलें. अच्छा-बुरा सभी के साथ होता है और दोनों को ही समान रूप से लें और जब मन निराश हो, तो पॉज़िटिव बातों को याद करें.

पॉज़िटिव बातों को कम आंकना: कुछ अच्छा हो, तो उसके बारे में भी यह सोचना कि ये तो सामान्य-सी बात है, इसमें कुछ ख़ास क्या है… इस तरह के विचारों से दूर रहें और हर छोटी-छोटी बात में ख़ुशियां ढूंढ़ें.

फ़ौरन निष्कर्ष पर पहुंच जाना: प्रयास करने से पहले ही यह सोच लेना कि परिणाम ग़लत ही होगा या हमें असफलता ही मिलेगी… ग़लत व नकारात्मक पहलू है. इससे दूर रहें.

अपने बारे में इमोशनली निगेटिव सोचना: ‘मैं ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता’ या ‘मेरे साथ कभी भी कुछ अच्छा नहीं हो सकता’… इस तरह की बातों से अपने बारे में निगेटिविटी न बढ़ाएं. हम जो सोचते हैं हम वही बन जाते हैं, इसलिए अपनी सोच को पॉज़िटिव बनाएं.

बहुत अधिक नियमों में ख़ुद को बांध लेना: अपने लिए बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स बना लेना, जिससे आप ज़िंदगी जीना ही भूल जाएं, आपको नकारात्मकता की ओर ले जाएंगे. फ्लेक्सिबल बनें.

कब लें एक्सपर्ट एडवाइस?

जब तमाम सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के बाद भी आपको लग रहा हो कि आपका डिप्रेशन ठीक नहीं हो रहा, तब आपको एक्सपर्ट के पास जाने से हिचकिचाना नहीं चाहिए. आपको अपनी मदद ख़ुद ही करनी होगी. ये न सोचें कि एक्सपर्ट के पास जाना किसी कमज़ोरी की निशानी है. अगर शरीर में तकलीफ़ हो, तो आप डॉक्टर के पास जाते ही हैं, तो मन की तकलीफ़ के लिए क्यों नहीं जाना चाहते?

हां, एक बात का ध्यान रहे कि प्रोफेशनल हेल्प के बाद भी ये सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स फॉलो करते रहें और यह बात भी मन में बैठा लें कि डिप्रेशन ठीक हो सकता है और आप इससे निकलकर बेहतर व हैप्पी लाइफ जी सकते हैं.

– गीता शर्मा

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RABF App
अब डिप्रेशन दूर भगाएगा किराये का बॉयफ्रेंड… रेंट ए बॉयफ्रेंड ऐप, एक अनोखी पहल! (RABF: This App Lets You Rent A Boyfriend To Cure Depression)

आज की तारीख़ में हर दूसरा व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है. कहीं न कहीं हम भी अपने जीवन में कभी न कभी तो डिप्रेशन यानी अवसाद के दौर से गुज़रते हैं, उस व़क्त ज़िंदगी बेकार लगने लगती है और यही डिप्रेशन यदि बढ़ता जाता है, तो सुसाइड तक पहुंच सकता है.
डिप्रेशन को दूर करने का एक अनोखा तरीक़ा कौशल प्रकाश ने खोज निकाला है. उन्होंने मुंबई में एक ऐप लॉन्च किया है, जो अकेलेपन से जूझ रहे डिप्रेस्ड लोगों को पार्टनर यानी साथी प्रोवाइड करता है. रेंट ए बॉयफ्रेंड (RABF) यह ऐप मुंबई बेस्ड है. इसमें शारीरिक यानी फिज़िकल रिलेशन नहीं होता, इमोशनल स्तर पर आपको बेहतर महसूस करवाया जाता है.
कौशल प्रकाश को यह आइडिया अपने अनुभव के आधार पर ही आया. वो ख़ुद डिप्रेशन का शिकार थे और अब वो दूसरों की मदद करना चाहते हैं.

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RABF App
यही नहीं इस ऐप में टोल फ्री नंबर भी होगा, जहां लोग कॉल करके प्रोफेशनल्स की मदद ले सकेंगे और उनसे अपनी समस्या शेयर कर सकेंगे.

RABF की वेबसाइट पर इससे संबंधित सारी डिटेल्स हैं. आप सेलिब्रिटी, मॉडल से लेकर आम आदमी को चुन सकते हैं. सेलेब्स का रेट 3000 प्रति घंटे के हिसाब से होगा, मॉडल्स 2000, वहीं आम आदमी आपको 300-400 तक में मिल सकेंगे. यह वेबसाइट पूरी तरह से कमिशन बेसिस पर काम करती है, जहां 70% कमाई बॉफ्रेंड्स को दी जाती है.

– गीता शर्मा

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ज़िंदगी में हर कोई कभी न कभी डिप्रेशन से गुज़रता ही है. यह स्थिति कभी-कभार हो, तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि यह ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए, तो दिल का सुकून, ख़ुशी, उमंग-उत्साह सब कुछ छीन लेता है. मेट्रो सिटीज़ में तो यह जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाया जाए. ऐसे कई ऐप्स हैं, जो इसमें आपकी मदद करते हैं.

Top Apps To Combat Depression

हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के बढ़ते केसेस से यह साबित हो चुका है कि अब यह शहरी समस्या नहीं रही. अब छोटे शहरों, गांव-कस्बों में भी तनाव से घिरकर लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं.

– डिप्रेशन बायो-सायको-सोशल प्रॉब्लम है यानी यह खानदानी भी हो सकता है, जो अवसादग्रस्त व्यक्ति व पारिवारिक-सामाजिक तनाव के कारण उत्पन्न होता है.

– शोध के अनुसार तीन में से दो वयस्क अपने जीवन में एक बार अवसाद से ग्रस्त ज़रूर होते हैं.

– 4% बच्चे भी टेंशन के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं.

– डिलीवरी व मेनोपॉज़ के बाद कई महिलाएं हार्मोनल बदलाव के कारण डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं.

– डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन) के अनुसार, भारत में भी क़रीब 36% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.

– हमारे देश में टीनएज भी डिप्रेशन के शिकार हैं. देश की जनसंख्या 131.11 करोड़ है, जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के टीनएजर्स की संख्या 7.5 करोड़ है. यह कुल जनसंख्या का 5.8% है. पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें, तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की समस्या से ग्रस्त हैं.

बेहतरीन ऐप्स जिनसे डिप्रेशन दूर करने में मदद मिलती है

1. डिप्रेशन सीबीटी सेल्फ हेल्प गाइड (Depression CBT Self-Help Guide)

– यह ऐप डिप्रेशन के मरीज़ को बीमारी से उबरने व सही मार्गदर्शन देने में मदद करता है.

– इस ऐप में डिप्रेशन को कंट्रोल करने से जुड़े टिप्स और टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें डिप्रेशन मूड को मॉनिटर करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट, क्लीनिकल डिप्रेशन व कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) से जुड़े लेख हैं.

2. स्टार्ट ऐप (Start App)

– कई बार हमें पता ही नहीं होता कि हमें डिप्रेशन की समस्या है.

– इस स्थिति में यह ऐप काफ़ी फ़ायदेमंद है. इसमें डिप्रेशन टेस्ट की सुविधा से लेकर हर रोज़ आपके प्रोग्रेस का भी ट्रैक रखा जाता है.

– इसमें डिप्रेशन से जुड़ी मेडिसिन लेने के लिए अलर्ट भी है.

– इसके अलावा यह ऐप आप जो मेडिसिन ले रहे हैं, उसके फ़ायदे व साइड इफेक्ट्स के बारे में भी बताता है.

– साथ ही इसमें मेडिकल प्रोफेशनल्स व फार्मासिस्ट द्वारा हर रोज़ डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी हैं.

– यह ऐप एंड्रायड व आईओएस यूज़र के लिए उपलब्ध है.

3. स्टॉप, ब्रीद एंड थिंक (Stop, Breathe & Think)

– यह ऐप टेंशन व डिप्रेशन को दूर करने में सहायक है. इसमें सांस किस तरह से लेनी चाहिए, इसके उपाय बताते हैं.

– ध्यान लगाने के लिए मार्गदर्शन भी किया जाता है.

– इस ऐप के ज़रिए आप मेडिटेशन से पहले व बाद में अपनी भावनाओं को भी चेक कर सकते हैं.

– इसे ख़ासतौर पर स्ट्रेस-डिप्रेशन, सेल्फ हीलिंग, सेल्फ मोटिवेशन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

– यह आपके मूड के अनुसार मेडिटेशन टिप्स भी बताता है.

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Top Apps To Combat Depression
4. मूड टूल्स (MoodTools)

– यदि आप बहुत तनाव में हैं और लगातार अवसाद से घिर जाते हैं, तो यह मूड टूल्स आपकी काफ़ी मदद कर सकता है.

– इसमें कई रिसर्च सपोर्टेड टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें दिए गए थॉट डायरी टूल में आपके विचारों व सोच के प्रकार के अनुसार आपके मूड को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, के उपाय बताए गए हैं.

– इस ऐप के बिहेवियर एक्टिवेशन थेरेपी में किसी एक्टिविटीज़ से पहले व बाद की स्थिति को जांचा-परखा जाता है.

– साथ ही सेफ्टी प्लान को आत्महत्या सुरक्षा के नज़रिए से विकसित किया गया है.

– इस ऐप के ज़रिए आप डिप्रेशन के शिकार हैं या नहीं, इसके लिए पीएचक्यू 9 टेस्ट में पार्ट भी ले सकते हैं.

5. मेडिटेशन म्यूज़िक (Meditation Music)

– डिप्रेशन के कारण हद से ज़्यादा परेशान हैं, तो इस ऐप का सहारा ले सकते हैं.

– यह आपके मन को सुकून देने के साथ ही आराम भी देता है.

– ऐप में मेडिटेशन से जुड़ी उच्च स्तर के संगीत व दिल को सुकून देनेवाली धुनें भी दी गई हैं.

– इस ऐप से आपको नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में मदद मिलेगी.

– साथ ही मेडिटेशन के लिए अलग-अलग साउंड भी हैं, जैसे- परफेक्ट रेन, सॉफ्ट पियानो, लेक, सनलाइज, हेवन साउंड, नेचर फॉरेस्ट मेलोडीज़ आदि.

इन सब के अलावा और भी कई ऐप हैं, जो डिप्रेशन के इलाज में कारगर हैं

6. पॉज़िटिव थींकिंग (Positive Thinking)- यह एंड्रॉयड ऐप पॉज़िटिव नज़रिया रखने में मदद करता है. ज़रूरत पड़ने पर यह दोस्ताना सलाह भी देता है.

7. डिप्रेशनचेक (Depressioncheck)- यह आईफोन ऐप न केवल आपकी बीमारी का कंप्लीट रिकॉर्ड रखता है, बल्कि डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी बताता है.

8. डिफीट डिप्रेशन (Defeat depression)– इसमें डिप्रेशन से छुटकारा पाने व निपटने के लिए उपयोगी टिप्स व जानकारियां मिल जाएंगी. सोशल मीडिया में फेसबुक पर भी डिप्रेशन, बेचैनी, मेंटल हेल्थ व बीमारी को दूर करने से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है, जिसका लाभ उठाया जा सकता है. यहां पर अवसाद के अलावा दिमाग़ से जुड़ी विभिन्न तरह की समस्याओं के बारे में बहुत सारी जानकारियां दी जाती हैं.

9. यूट्यूब यानी www.youtube.com पर ऐसे कई वीडियोज़ हैं, जिनकी मदद से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है.

10. माय थेरेपी (MyTherapy)- यह डिप्रेशन के लिए बेहतरीन डायरी ऐप है. ऑस्ट्रेलिया के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉम्प्लिेमेंट्री मेडिसिन और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में किए गए रिसर्च के अनुसार, स्मार्टफोन से लोगों को मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने, उसे जानने-समझने व ज़रूरी इलाज करने में मदद मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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Ileana D'Cruz, Suicidal Thoughts

दीपिका पादुकोण (Deepika Padukaon) के बाद अब इलियाना डीक्रूज़ (Ileana D’Cruz) ने डिप्रेशन को लेकर बात की. इलियाना ने इस बात का खुलासा किया कि इनकी लाइफ में एक वक़्त ऐसा भी आया था, जब उनके मन में आत्महत्या (Suicide) जैसे ख़्याल आते थे. मेंटल हेल्थ (Mental Health) की 21वीं वर्ल्ड कांग्रेस के आखिरी दिन इलियाना ने बताया कि डिप्रेशन (Depression) रियल होता है. यह मस्तिष्क में होने वाला एक केमिकल असंतुलन है, जिसका इलाज कराना ज़रूरी है.

इलियाना ने आगे बताया कि उनके जीवन में एक ऐसा वक़्त भी आया था, जब वो सुसाइड करने के बारे में सोचती थीं. इलियाना ने कहा कि वो हमेशा उदास रहती थीं. वो बॉडी डिसमॉर्फिक डिसऑर्डर से पीड़ित थीं. उन्हें इस बीमारी का पता तब चला, जब उन्होंने अपना इलाज कराया.

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डिप्रेशन को लेकर इलियाना ने जो कुछ फील किया वो उन्होंने दिल खोल कर सबके सामने रख दिया. उन्होंने बताया कि डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे पहला कदम ये हैं कि आप मदद के लिए ख़ुद आगे बढ़ें, अपना इलाज कराएं. उन्होंने ने कहा कि ये एक दिन में ठीक होने वाली चीज़ नहीं है, मुझे भी ठीक होने में वक़्त लगा था. इलियाना ने यह भी बताया कि ख़ुद में कमियां न ढूंढें. उन्होंने कहा, “हम सब इंसान हैं और सबमें कमियां होती हैं. ऐक्टर्स को ही देख लें, आपको लगता है कि हम बहुत ही ख़ूबसूरत हैं, लेकिन हमें ख़ूबसूरत लगने के लिए दो घंटे तैयार होना पड़ता है. ख़ुद से प्यार करें, तब आप सबसे ज़्यादा ख़ुश रहेंगे.”

महिलाओं के पांच हेल्थ दुश्मन- हृदय रोग,ऑस्टियोपोरोसिस, ब्रेस्ट कैंसर- सर्वाइकल कैंसर, डिप्रेशन और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम उन्हें कब चपेट में ले लेते हैं, उन्हें ख़ुद पता नहीं चलता. इसलिए ज़रूरी है समय रहते ध्यान देना और किसी भी संकेत की अनदेखी न करना.

women’s health problems

1. हृदय रोग

दुनियाभर के विभिन्न शोधों में यह बात सामने आई है कि पूरी दुनिया में 53.1% महिलाओं की मौत हृदय रोग के कारण होती है. पिछले कुछ सालों में कम उम्र की महिलाओं में भी हृदय रोग के कई मामले सामने आए हैं. इसका कारण वर्कलोड, तनाव, ़फैमिली हिस्ट्री, खान-पान की ग़लत आदतें आदि हैं. ज़्यादातर महिलाएं पहले डायबिटीज़, मोटापा आदि से पीड़ित होती हैं और फिर उन्हें हृदय रोग की समस्या हो जाती है. हायपरटेंशन और हाई कोलेस्ट्रॉल भी इसके प्रमुख कारण हैं

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हृदय रोग में आम शिकायतें

* नींद न आने की समस्या.
* सांस लेने में तकलीफ़.
* कमरदर्द, गर्दन या ठुड्डी में दर्द.
* अपच के कारण उबकाई आना या
उल्टी आना.
* चक्कर आना और थकान.
हृदय रोग से लड़ाई
* अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो अपने डॉक्टर की दी हुई दवाओं का नियमित सेवन करें. अगर आप डायबिटीज़ से जूझ रही हैं, तो अपने ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें.
* हेल्दी डायट लें. खाने में सब्ज़ियां, फल, साबूत अनाज, फाइबरयुक्त भोजन, प्रोटीन से भरपूर आहार व मछली
शामिल करें.
* डेली रूटीन में एक्सरसाइज़ को शामिल करें और अपना वज़न नियंत्रित रखें.
* सिगरेट और शराब से दूर रहें.
* तनाव को दूर कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

2. ऑस्टियोपोरोसिस

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जो हड्डियों को कमज़ोर कर देती है और हड्डियों के फ्रैक्चर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इसकी संभावना महिलाओं में पुरुषों से पांच गुना ज़्यादा होती है. पचास वर्ष से अधिक उम्र की क़रीब 50% महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस पाया जाता है. ये एक ऐसी बीमारी है, जिसे रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम ज़रूर किया जा सकता है. कमरदर्द, झुकी हुई कमर, शरीर दर्द और कमज़ोरी- ये सारे लक्षण इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि अब आप को संभलने की ज़रूरत है. कहीं आपका कमरदर्द आपके जीवन का दर्द न बन जाए.

ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क फैक्टर्स
* मेनोपॉज़ के दौरान ओवरीज़ (अंडाशय) में बननेवाले एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में कमी आ जाती है, जिसके कारण
हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है.
* सर्जरी के द्वारा ओवरी निकलवाने से हड्डियां बहुत तेज़ी से कमज़ोर होती हैं.
* कैल्शियम और विटामिन ङ्गडीफ हमारी हड्डियों की मज़बूती में अहम् भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इनकी कमी इस बीमारी का एक प्रमुख कारण बनती है.
* ग़लत खानपान और जीवनशैली भी ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क ़फैक्टर्स में से एक है.
* जिन महिलाओं के परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस हो चुका है और जो धुम्रपान और शराब का सेवन करती हैं, उनमें इसका ख़तरा ज़्यादा बढ़ जाता है.

कम करें रिस्क फैक्टर्स
* आपकी हड्डियों के लिए विटामिन ङ्गडीफ बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आपको ज़्यादा कुछ नहीं करना है, बस रोज़ाना 10 मिनट की धूप आपको भरपूर मात्रा में विटामिन ङ्गडीफ देती है. इसके अलावा खाने में अंडे की जर्दी और मछली का तेल इसकी कमी को पूरा करते हैं.
* कैल्शियम को अकेले लेने की बजाय विटामिन ङ्गडीफ के साथ लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.
* कैल्शियम से भरपूर भोजन दूध, दही, चीज़, हरी सब्ज़ियां, टोफू, मछली व साबूत अनाज का सेवन करें.
* एक्सरसाइज़ और जॉगिंग से अपने आप को एक्टिव रखें.

3. कैंसर

कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बॉडी सेल्स ठीक से काम नहीं करते. सेल्स बहुत तेज़ी से बंटते हैं और एक्स्ट्रा सेल्स ट्यूमर बन जाते हैं. भारत में अन्य देशों के मुक़ाबले कैंसर पीड़ितों की संख्या बहुत ज़्यादा है. महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.
ब्रेस्ट कैंसर
हमारे देश में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. इसका कारण जागरूकता में कमी और बदलती जीवनशैली है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, हर 22 में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर का शिकार होती है. देर से शादी होना, बच्चे होना और फिर बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग न कराना, रेडियोएक्टिव व केमिकल्स का एक्सपोज़र, ़फैमिली हिस्ट्री, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी आदि इस समस्या के प्रमुख कारण हैं. बदलती जीवनशैली के कारण जल्दी पीरियड्स आना और देर से मेनोपॉज़ होने के कारण शरीर के हार्मोंस में काफ़ी बदलाव आते हैं, जिसके कारण ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. भारत की क़रीब 22-25% महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हैं.
ब्रेस्ट की जांच ज़रूरी
ब्रेस्ट की जांच समय-समय पर करती रहें, ताकि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर इससे छुटकारा पाया जा सके. निप्पल डिस्चार्ज, निप्पल या ब्रेस्ट में दर्द, ब्रेस्ट में गांठ या सूजन, अंडरआर्म्स में गांठ या
सूजन, ब्रेस्ट के आकार में बदलाव, निप्पल का अंदर धंसना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं.
अपनाएं हेल्दी हैबिट्स
* वज़न नियंत्रित रखें.
* जितना ज़्यादा हो सके, फल और
सब्ज़ियां खाएं.
* एक्सरसाइज़ करें और एक्टिव रहें.
* ब्रेस्ट फीडिंग काफ़ी हद तक आपको सुरक्षित रखता है, इसलिए अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराएं.
* शराब से दूर ही रहें.
* तनाव से दूर रहें और सकारात्मक सोच रखें.
सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स, जो यूटेरस (गर्भाशय) के निचले हिस्से में होता है, में होनेवाला एक कैंसर है. जब सर्विक्स के सेल्स कैंसर सेल्स में बदल जाते हैं, तब सर्वाइकल कैंसर होता है. ज़्यादातर मामलों में सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है, जो एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर तक शारीरिक संबंध के ज़रिए फैलता है.
रिस्क फैक्टर्स
* कम उम्र में सेक्स.
* एक से ज़्यादा सेक्स पार्टनर्स.
* धूम्रपान, एचआईवी, कमज़ोर रोग
प्रतिरोधक क्षमता और अनियमित पैप टेस्ट. पैप टेस्ट के ज़रिए सर्विक्स के सेल्स में होनेवाले गंभीर बदलावों का पता लगाया जाता है.
रिस्क फैक्टर्स को कम करें
* सर्वेरिक्स और गार्डसिल ऐसे दो वैक्सिन्स या टीके हैं, जिनके इस्तेमाल से लड़कियों और महिलाओं को एचपीवी से सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि वे सर्वाइकल कैंसर की शिकार न हो सकें.
* सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इं़फेक्शन से बचने के लिए इस दौरान सेक्स न करें.
* अपने पार्टनर के प्रति वफ़ादार रहें.
* कंडोम का इस्तेमाल करें.

4. डिप्रेशन

तनाव और अवसाद के बीच मामूली-सा फ़र्क़ है. महिलाएं अक्सर अवसाद का शिकार इसलिए हो जाती हैं, क्योंकि वे जल्दी तनावग्रस्त हो जाती हैं. महिलाएं एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं. जहां एक ओर गृहस्थी संभालती हैं, वहीं दूसरी ओर ऑफ़िस का कामकाज भी संभालती हैं. घर और ऑफ़िस से जुड़ी ऐसी कई समस्याएं होती हैं, जिन्हें किसी और से शेयर न करके ख़ुद सुलझाना चाहती हैं. ऐसे में कई बार वे तनाव और फिर अवसाद का शिकार हो जाती हैं.
डिप्रेशन के रिस्क फैक्टर्स
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिप्रेशन न स़िर्फ बायोलॉजिकल (जैविक), बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तत्वों के कारण भी होता है यानी आपके रिश्ते-नाते, आपकी जीवनशैली और आपकी सहनशक्ति भी काफ़ी मायने रखती है.
* अकेलापन, सोशल सपोर्ट की कमी, तनावभरी ज़िंदगी, डिप्रेशन की ़फैमिली हिस्ट्री, वैवाहिक जीवन में तनाव, आर्थिक तंगी, बचपन की कड़वी यादें, शराब या ड्रग्स का इस्तेमाल, बेरोज़गारी या बेकारी और शारीरिक समस्याएं.
हेल्दी लाइफ़स्टाइल अपनाएं
* अच्छे दोस्त बनाएं.
* अच्छी नींद लें और एक्सरसाइज़ करें.
* हेल्दी खाएं और मूड अच्छा रखें.
* जितना हो सके, तनाव को नियंत्रित करें.
* संगीत सुनें और ख़ुद को रिलैक्स रखें.
* नकारात्मक ख़्यालों से लड़ें. इसके लिए आप काउंसलर की मदद भी ले सकती हैं.
* कोई भी समस्या जो आपको परेशान कर रही हो, अपने क़रीबी दोस्तों या रिश्तेदारों से शेयर करें.
* पॉज़िटिव लाइफ़स्टाइल अपनाए, ख़ुद की मदद करें और इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनें.

5. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) एक हार्मोनल समस्या है. इसमें ओवरी में कई सिस्ट हो जाते हैं, जिसके कारण महिलाओं को इंफ़र्टिलिटी की समस्या से दो चार होना पड़ता है. यह 5-10% महिलाओं में पाया जाता है. कई बार ये समस्या किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती है, लेकिन शादी के बाद ही इसका पता चल पाता है.
पीसीओएस में आम शिकायतें
* अनियमित माहवारी या माहवारी के समय अधिक रक्तस्राव.
* एंड्रोजन हार्मोंस के घटते-बढ़ते स्तर के कारण मुंहासे, अचानक से चेहरे और शरीर के विभिन्न अंगों में बालों का बढ़ना.
* थकान और डिप्रेशन.
* अचानक बालों का झड़ना.
* सिरदर्द और नींद न आना.
* याद्दाश्त पर असर.
* बार-बार प्यास लगना.
* वज़न बढ़ने के कारण मोटापा.
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का ट्रीटमेंट
* इससे छुटकारा पाने में रोज़ाना
एक्सरसाइज़ काफ़ी कारगर है. यह न स़िर्फ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है, बल्कि वज़न भी कम करके शारीरिक समस्याओं को दूर रखता है.
* हेल्दी डायट में फल, सब्ज़ियां, बींस, मेवे और साबूत अनाज ज़रूर शामिल करें.
* डॉक्टर आपको कुछ बर्थ कंट्रोल पिल्स या फ़र्टिलिटी मेडिसिन या डायबिटीज़ मेडिसिन दे सकते हैं, जिससे आपके पीरियड्स रेग्युलर हो जाएंगे.

  1. – अनीता सिंह

 

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