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अब डिप्रेशन दूर भगाएगा किराये का बॉयफ्रेंड… रेंट ए बॉयफ्रेंड ऐप, एक अनोखी पहल! (RABF: This App Lets You Rent A Boyfriend To Cure Depression)

RABF App
अब डिप्रेशन दूर भगाएगा किराये का बॉयफ्रेंड… रेंट ए बॉयफ्रेंड ऐप, एक अनोखी पहल! (RABF: This App Lets You Rent A Boyfriend To Cure Depression)

आज की तारीख़ में हर दूसरा व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है. कहीं न कहीं हम भी अपने जीवन में कभी न कभी तो डिप्रेशन यानी अवसाद के दौर से गुज़रते हैं, उस व़क्त ज़िंदगी बेकार लगने लगती है और यही डिप्रेशन यदि बढ़ता जाता है, तो सुसाइड तक पहुंच सकता है.
डिप्रेशन को दूर करने का एक अनोखा तरीक़ा कौशल प्रकाश ने खोज निकाला है. उन्होंने मुंबई में एक ऐप लॉन्च किया है, जो अकेलेपन से जूझ रहे डिप्रेस्ड लोगों को पार्टनर यानी साथी प्रोवाइड करता है. रेंट ए बॉयफ्रेंड (RABF) यह ऐप मुंबई बेस्ड है. इसमें शारीरिक यानी फिज़िकल रिलेशन नहीं होता, इमोशनल स्तर पर आपको बेहतर महसूस करवाया जाता है.
कौशल प्रकाश को यह आइडिया अपने अनुभव के आधार पर ही आया. वो ख़ुद डिप्रेशन का शिकार थे और अब वो दूसरों की मदद करना चाहते हैं.

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RABF App
यही नहीं इस ऐप में टोल फ्री नंबर भी होगा, जहां लोग कॉल करके प्रोफेशनल्स की मदद ले सकेंगे और उनसे अपनी समस्या शेयर कर सकेंगे.

RABF की वेबसाइट पर इससे संबंधित सारी डिटेल्स हैं. आप सेलिब्रिटी, मॉडल से लेकर आम आदमी को चुन सकते हैं. सेलेब्स का रेट 3000 प्रति घंटे के हिसाब से होगा, मॉडल्स 2000, वहीं आम आदमी आपको 300-400 तक में मिल सकेंगे. यह वेबसाइट पूरी तरह से कमिशन बेसिस पर काम करती है, जहां 70% कमाई बॉफ्रेंड्स को दी जाती है.

– गीता शर्मा

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डिप्रेशन दूर भगाएंगे ये Top 10 ऐप्स (Top 10 Apps To Combat Depression)

Top Apps To Combat Depression

ज़िंदगी में हर कोई कभी न कभी डिप्रेशन से गुज़रता ही है. यह स्थिति कभी-कभार हो, तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि यह ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए, तो दिल का सुकून, ख़ुशी, उमंग-उत्साह सब कुछ छीन लेता है. मेट्रो सिटीज़ में तो यह जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाया जाए. ऐसे कई ऐप्स हैं, जो इसमें आपकी मदद करते हैं.

Top Apps To Combat Depression

हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के बढ़ते केसेस से यह साबित हो चुका है कि अब यह शहरी समस्या नहीं रही. अब छोटे शहरों, गांव-कस्बों में भी तनाव से घिरकर लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के बढ़ते केसेस से यह साबित हो चुका है कि अब यह शहरी समस्या नहीं रही. अब छोटे शहरों, गांव-कस्बों में भी तनाव से घिरकर लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं.

– डिप्रेशन बायो-सायको-सोशल प्रॉब्लम है यानी यह खानदानी भी हो सकता है, जो अवसादग्रस्त व्यक्ति व पारिवारिक-सामाजिक तनाव के कारण उत्पन्न होता है.

– शोध के अनुसार तीन में से दो वयस्क अपने जीवन में एक बार अवसाद से ग्रस्त ज़रूर होते हैं.

– 4% बच्चे भी टेंशन के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं.

– डिलीवरी व मेनोपॉज़ के बाद कई महिलाएं हार्मोनल बदलाव के कारण डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं.

– डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन) के अनुसार, भारत में भी क़रीब 36% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.

– हमारे देश में टीनएज भी डिप्रेशन के शिकार हैं. देश की जनसंख्या 131.11 करोड़ है, जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के टीनएजर्स की संख्या 7.5 करोड़ है. यह कुल जनसंख्या का 5.8% है. पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें, तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की समस्या से ग्रस्त हैं.

बेहतरीन ऐप्स जिनसे डिप्रेशन दूर करने में मदद मिलती है

1. डिप्रेशन सीबीटी सेल्फ हेल्प गाइड (Depression CBT Self-Help Guide)

– यह ऐप डिप्रेशन के मरीज़ को बीमारी से उबरने व सही मार्गदर्शन देने में मदद करता है.

– इस ऐप में डिप्रेशन को कंट्रोल करने से जुड़े टिप्स और टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें डिप्रेशन मूड को मॉनिटर करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट, क्लीनिकल डिप्रेशन व कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) से जुड़े लेख हैं.

2. स्टार्ट ऐप (Start App)

– कई बार हमें पता ही नहीं होता कि हमें डिप्रेशन की समस्या है.

– इस स्थिति में यह ऐप काफ़ी फ़ायदेमंद है. इसमें डिप्रेशन टेस्ट की सुविधा से लेकर हर रोज़ आपके प्रोग्रेस का भी ट्रैक रखा जाता है.

– इसमें डिप्रेशन से जुड़ी मेडिसिन लेने के लिए अलर्ट भी है.

– इसके अलावा यह ऐप आप जो मेडिसिन ले रहे हैं, उसके फ़ायदे व साइड इफेक्ट्स के बारे में भी बताता है.

– साथ ही इसमें मेडिकल प्रोफेशनल्स व फार्मासिस्ट द्वारा हर रोज़ डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी हैं.

– यह ऐप एंड्रायड व आईओएस यूज़र के लिए उपलब्ध है.

3. स्टॉप, ब्रीद एंड थिंक (Stop, Breathe & Think)

– यह ऐप टेंशन व डिप्रेशन को दूर करने में सहायक है. इसमें सांस किस तरह से लेनी चाहिए, इसके उपाय बताते हैं.

– ध्यान लगाने के लिए मार्गदर्शन भी किया जाता है.

– इस ऐप के ज़रिए आप मेडिटेशन से पहले व बाद में अपनी भावनाओं को भी चेक कर सकते हैं.

– इसे ख़ासतौर पर स्ट्रेस-डिप्रेशन, सेल्फ हीलिंग, सेल्फ मोटिवेशन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

– यह आपके मूड के अनुसार मेडिटेशन टिप्स भी बताता है.

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Top Apps To Combat Depression
4. मूड टूल्स (MoodTools)

– यदि आप बहुत तनाव में हैं और लगातार अवसाद से घिर जाते हैं, तो यह मूड टूल्स आपकी काफ़ी मदद कर सकता है.

– इसमें कई रिसर्च सपोर्टेड टूल्स दिए गए हैं.

– इसमें दिए गए थॉट डायरी टूल में आपके विचारों व सोच के प्रकार के अनुसार आपके मूड को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, के उपाय बताए गए हैं.

– इस ऐप के बिहेवियर एक्टिवेशन थेरेपी में किसी एक्टिविटीज़ से पहले व बाद की स्थिति को जांचा-परखा जाता है.

– साथ ही सेफ्टी प्लान को आत्महत्या सुरक्षा के नज़रिए से विकसित किया गया है.

– इस ऐप के ज़रिए आप डिप्रेशन के शिकार हैं या नहीं, इसके लिए पीएचक्यू 9 टेस्ट में पार्ट भी ले सकते हैं.

5. मेडिटेशन म्यूज़िक (Meditation Music)

– डिप्रेशन के कारण हद से ज़्यादा परेशान हैं, तो इस ऐप का सहारा ले सकते हैं.

– यह आपके मन को सुकून देने के साथ ही आराम भी देता है.

– ऐप में मेडिटेशन से जुड़ी उच्च स्तर के संगीत व दिल को सुकून देनेवाली धुनें भी दी गई हैं.

– इस ऐप से आपको नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में मदद मिलेगी.

– साथ ही मेडिटेशन के लिए अलग-अलग साउंड भी हैं, जैसे- परफेक्ट रेन, सॉफ्ट पियानो, लेक, सनलाइज, हेवन साउंड, नेचर फॉरेस्ट मेलोडीज़ आदि.

इन सब के अलावा और भी कई ऐप हैं, जो डिप्रेशन के इलाज में कारगर हैं

6. पॉज़िटिव थींकिंग (Positive Thinking)- यह एंड्रॉयड ऐप पॉज़िटिव नज़रिया रखने में मदद करता है. ज़रूरत पड़ने पर यह दोस्ताना सलाह भी देता है.

7. डिप्रेशनचेक (Depressioncheck)- यह आईफोन ऐप न केवल आपकी बीमारी का कंप्लीट रिकॉर्ड रखता है, बल्कि डिप्रेशन से निजात पाने के टिप्स भी बताता है.

8. डिफीट डिप्रेशन (Defeat depression)– इसमें डिप्रेशन से छुटकारा पाने व निपटने के लिए उपयोगी टिप्स व जानकारियां मिल जाएंगी. सोशल मीडिया में फेसबुक पर भी डिप्रेशन, बेचैनी, मेंटल हेल्थ व बीमारी को दूर करने से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है, जिसका लाभ उठाया जा सकता है. यहां पर अवसाद के अलावा दिमाग़ से जुड़ी विभिन्न तरह की समस्याओं के बारे में बहुत सारी जानकारियां दी जाती हैं.

9. यूट्यूब यानी www.youtube.com पर ऐसे कई वीडियोज़ हैं, जिनकी मदद से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है.

10. माय थेरेपी (MyTherapy)- यह डिप्रेशन के लिए बेहतरीन डायरी ऐप है. ऑस्ट्रेलिया के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉम्प्लिेमेंट्री मेडिसिन और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में किए गए रिसर्च के अनुसार, स्मार्टफोन से लोगों को मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने, उसे जानने-समझने व ज़रूरी इलाज करने में मदद मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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जब आत्महत्या करना चाहती थीं इलियाना डीक्रूज़… जानें क्या थी वजह (When Ileana D’Cruz Had ‘Suicidal Thoughts’)

Ileana D'Cruz, Suicidal Thoughts

Ileana D'Cruz, Suicidal Thoughts

दीपिका पादुकोण (Deepika Padukaon) के बाद अब इलियाना डीक्रूज़ (Ileana D’Cruz) ने डिप्रेशन को लेकर बात की. इलियाना ने इस बात का खुलासा किया कि इनकी लाइफ में एक वक़्त ऐसा भी आया था, जब उनके मन में आत्महत्या (Suicide) जैसे ख़्याल आते थे. मेंटल हेल्थ (Mental Health) की 21वीं वर्ल्ड कांग्रेस के आखिरी दिन इलियाना ने बताया कि डिप्रेशन (Depression) रियल होता है. यह मस्तिष्क में होने वाला एक केमिकल असंतुलन है, जिसका इलाज कराना ज़रूरी है.

इलियाना ने आगे बताया कि उनके जीवन में एक ऐसा वक़्त भी आया था, जब वो सुसाइड करने के बारे में सोचती थीं. इलियाना ने कहा कि वो हमेशा उदास रहती थीं. वो बॉडी डिसमॉर्फिक डिसऑर्डर से पीड़ित थीं. उन्हें इस बीमारी का पता तब चला, जब उन्होंने अपना इलाज कराया.

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डिप्रेशन को लेकर इलियाना ने जो कुछ फील किया वो उन्होंने दिल खोल कर सबके सामने रख दिया. उन्होंने बताया कि डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे पहला कदम ये हैं कि आप मदद के लिए ख़ुद आगे बढ़ें, अपना इलाज कराएं. उन्होंने ने कहा कि ये एक दिन में ठीक होने वाली चीज़ नहीं है, मुझे भी ठीक होने में वक़्त लगा था. इलियाना ने यह भी बताया कि ख़ुद में कमियां न ढूंढें. उन्होंने कहा, “हम सब इंसान हैं और सबमें कमियां होती हैं. ऐक्टर्स को ही देख लें, आपको लगता है कि हम बहुत ही ख़ूबसूरत हैं, लेकिन हमें ख़ूबसूरत लगने के लिए दो घंटे तैयार होना पड़ता है. ख़ुद से प्यार करें, तब आप सबसे ज़्यादा ख़ुश रहेंगे.”

महिलाओं के 5 टॉप दुश्मन(5 Top women’s health problems which she should never ignore)

women’s health problems

महिलाओं के पांच हेल्थ दुश्मन- हृदय रोग,ऑस्टियोपोरोसिस, ब्रेस्ट कैंसर- सर्वाइकल कैंसर, डिप्रेशन और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम उन्हें कब चपेट में ले लेते हैं, उन्हें ख़ुद पता नहीं चलता. इसलिए ज़रूरी है समय रहते ध्यान देना और किसी भी संकेत की अनदेखी न करना.

women’s health problems

1. हृदय रोग

दुनियाभर के विभिन्न शोधों में यह बात सामने आई है कि पूरी दुनिया में 53.1% महिलाओं की मौत हृदय रोग के कारण होती है. पिछले कुछ सालों में कम उम्र की महिलाओं में भी हृदय रोग के कई मामले सामने आए हैं. इसका कारण वर्कलोड, तनाव, ़फैमिली हिस्ट्री, खान-पान की ग़लत आदतें आदि हैं. ज़्यादातर महिलाएं पहले डायबिटीज़, मोटापा आदि से पीड़ित होती हैं और फिर उन्हें हृदय रोग की समस्या हो जाती है. हायपरटेंशन और हाई कोलेस्ट्रॉल भी इसके प्रमुख कारण हैं

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हृदय रोग में आम शिकायतें

* नींद न आने की समस्या.
* सांस लेने में तकलीफ़.
* कमरदर्द, गर्दन या ठुड्डी में दर्द.
* अपच के कारण उबकाई आना या
उल्टी आना.
* चक्कर आना और थकान.
हृदय रोग से लड़ाई
* अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो अपने डॉक्टर की दी हुई दवाओं का नियमित सेवन करें. अगर आप डायबिटीज़ से जूझ रही हैं, तो अपने ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें.
* हेल्दी डायट लें. खाने में सब्ज़ियां, फल, साबूत अनाज, फाइबरयुक्त भोजन, प्रोटीन से भरपूर आहार व मछली
शामिल करें.
* डेली रूटीन में एक्सरसाइज़ को शामिल करें और अपना वज़न नियंत्रित रखें.
* सिगरेट और शराब से दूर रहें.
* तनाव को दूर कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

2. ऑस्टियोपोरोसिस

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जो हड्डियों को कमज़ोर कर देती है और हड्डियों के फ्रैक्चर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इसकी संभावना महिलाओं में पुरुषों से पांच गुना ज़्यादा होती है. पचास वर्ष से अधिक उम्र की क़रीब 50% महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस पाया जाता है. ये एक ऐसी बीमारी है, जिसे रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम ज़रूर किया जा सकता है. कमरदर्द, झुकी हुई कमर, शरीर दर्द और कमज़ोरी- ये सारे लक्षण इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि अब आप को संभलने की ज़रूरत है. कहीं आपका कमरदर्द आपके जीवन का दर्द न बन जाए.

ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क फैक्टर्स
* मेनोपॉज़ के दौरान ओवरीज़ (अंडाशय) में बननेवाले एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में कमी आ जाती है, जिसके कारण
हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है.
* सर्जरी के द्वारा ओवरी निकलवाने से हड्डियां बहुत तेज़ी से कमज़ोर होती हैं.
* कैल्शियम और विटामिन ङ्गडीफ हमारी हड्डियों की मज़बूती में अहम् भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इनकी कमी इस बीमारी का एक प्रमुख कारण बनती है.
* ग़लत खानपान और जीवनशैली भी ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क ़फैक्टर्स में से एक है.
* जिन महिलाओं के परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस हो चुका है और जो धुम्रपान और शराब का सेवन करती हैं, उनमें इसका ख़तरा ज़्यादा बढ़ जाता है.

कम करें रिस्क फैक्टर्स
* आपकी हड्डियों के लिए विटामिन ङ्गडीफ बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आपको ज़्यादा कुछ नहीं करना है, बस रोज़ाना 10 मिनट की धूप आपको भरपूर मात्रा में विटामिन ङ्गडीफ देती है. इसके अलावा खाने में अंडे की जर्दी और मछली का तेल इसकी कमी को पूरा करते हैं.
* कैल्शियम को अकेले लेने की बजाय विटामिन ङ्गडीफ के साथ लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.
* कैल्शियम से भरपूर भोजन दूध, दही, चीज़, हरी सब्ज़ियां, टोफू, मछली व साबूत अनाज का सेवन करें.
* एक्सरसाइज़ और जॉगिंग से अपने आप को एक्टिव रखें.

3. कैंसर

कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बॉडी सेल्स ठीक से काम नहीं करते. सेल्स बहुत तेज़ी से बंटते हैं और एक्स्ट्रा सेल्स ट्यूमर बन जाते हैं. भारत में अन्य देशों के मुक़ाबले कैंसर पीड़ितों की संख्या बहुत ज़्यादा है. महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.
ब्रेस्ट कैंसर
हमारे देश में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. इसका कारण जागरूकता में कमी और बदलती जीवनशैली है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, हर 22 में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर का शिकार होती है. देर से शादी होना, बच्चे होना और फिर बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग न कराना, रेडियोएक्टिव व केमिकल्स का एक्सपोज़र, ़फैमिली हिस्ट्री, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी आदि इस समस्या के प्रमुख कारण हैं. बदलती जीवनशैली के कारण जल्दी पीरियड्स आना और देर से मेनोपॉज़ होने के कारण शरीर के हार्मोंस में काफ़ी बदलाव आते हैं, जिसके कारण ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. भारत की क़रीब 22-25% महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हैं.
ब्रेस्ट की जांच ज़रूरी
ब्रेस्ट की जांच समय-समय पर करती रहें, ताकि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर इससे छुटकारा पाया जा सके. निप्पल डिस्चार्ज, निप्पल या ब्रेस्ट में दर्द, ब्रेस्ट में गांठ या सूजन, अंडरआर्म्स में गांठ या
सूजन, ब्रेस्ट के आकार में बदलाव, निप्पल का अंदर धंसना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं.
अपनाएं हेल्दी हैबिट्स
* वज़न नियंत्रित रखें.
* जितना ज़्यादा हो सके, फल और
सब्ज़ियां खाएं.
* एक्सरसाइज़ करें और एक्टिव रहें.
* ब्रेस्ट फीडिंग काफ़ी हद तक आपको सुरक्षित रखता है, इसलिए अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराएं.
* शराब से दूर ही रहें.
* तनाव से दूर रहें और सकारात्मक सोच रखें.
सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स, जो यूटेरस (गर्भाशय) के निचले हिस्से में होता है, में होनेवाला एक कैंसर है. जब सर्विक्स के सेल्स कैंसर सेल्स में बदल जाते हैं, तब सर्वाइकल कैंसर होता है. ज़्यादातर मामलों में सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है, जो एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर तक शारीरिक संबंध के ज़रिए फैलता है.
रिस्क फैक्टर्स
* कम उम्र में सेक्स.
* एक से ज़्यादा सेक्स पार्टनर्स.
* धूम्रपान, एचआईवी, कमज़ोर रोग
प्रतिरोधक क्षमता और अनियमित पैप टेस्ट. पैप टेस्ट के ज़रिए सर्विक्स के सेल्स में होनेवाले गंभीर बदलावों का पता लगाया जाता है.
रिस्क फैक्टर्स को कम करें
* सर्वेरिक्स और गार्डसिल ऐसे दो वैक्सिन्स या टीके हैं, जिनके इस्तेमाल से लड़कियों और महिलाओं को एचपीवी से सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि वे सर्वाइकल कैंसर की शिकार न हो सकें.
* सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इं़फेक्शन से बचने के लिए इस दौरान सेक्स न करें.
* अपने पार्टनर के प्रति वफ़ादार रहें.
* कंडोम का इस्तेमाल करें.

4. डिप्रेशन

तनाव और अवसाद के बीच मामूली-सा फ़र्क़ है. महिलाएं अक्सर अवसाद का शिकार इसलिए हो जाती हैं, क्योंकि वे जल्दी तनावग्रस्त हो जाती हैं. महिलाएं एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं. जहां एक ओर गृहस्थी संभालती हैं, वहीं दूसरी ओर ऑफ़िस का कामकाज भी संभालती हैं. घर और ऑफ़िस से जुड़ी ऐसी कई समस्याएं होती हैं, जिन्हें किसी और से शेयर न करके ख़ुद सुलझाना चाहती हैं. ऐसे में कई बार वे तनाव और फिर अवसाद का शिकार हो जाती हैं.
डिप्रेशन के रिस्क फैक्टर्स
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिप्रेशन न स़िर्फ बायोलॉजिकल (जैविक), बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तत्वों के कारण भी होता है यानी आपके रिश्ते-नाते, आपकी जीवनशैली और आपकी सहनशक्ति भी काफ़ी मायने रखती है.
* अकेलापन, सोशल सपोर्ट की कमी, तनावभरी ज़िंदगी, डिप्रेशन की ़फैमिली हिस्ट्री, वैवाहिक जीवन में तनाव, आर्थिक तंगी, बचपन की कड़वी यादें, शराब या ड्रग्स का इस्तेमाल, बेरोज़गारी या बेकारी और शारीरिक समस्याएं.
हेल्दी लाइफ़स्टाइल अपनाएं
* अच्छे दोस्त बनाएं.
* अच्छी नींद लें और एक्सरसाइज़ करें.
* हेल्दी खाएं और मूड अच्छा रखें.
* जितना हो सके, तनाव को नियंत्रित करें.
* संगीत सुनें और ख़ुद को रिलैक्स रखें.
* नकारात्मक ख़्यालों से लड़ें. इसके लिए आप काउंसलर की मदद भी ले सकती हैं.
* कोई भी समस्या जो आपको परेशान कर रही हो, अपने क़रीबी दोस्तों या रिश्तेदारों से शेयर करें.
* पॉज़िटिव लाइफ़स्टाइल अपनाए, ख़ुद की मदद करें और इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनें.

5. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) एक हार्मोनल समस्या है. इसमें ओवरी में कई सिस्ट हो जाते हैं, जिसके कारण महिलाओं को इंफ़र्टिलिटी की समस्या से दो चार होना पड़ता है. यह 5-10% महिलाओं में पाया जाता है. कई बार ये समस्या किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती है, लेकिन शादी के बाद ही इसका पता चल पाता है.
पीसीओएस में आम शिकायतें
* अनियमित माहवारी या माहवारी के समय अधिक रक्तस्राव.
* एंड्रोजन हार्मोंस के घटते-बढ़ते स्तर के कारण मुंहासे, अचानक से चेहरे और शरीर के विभिन्न अंगों में बालों का बढ़ना.
* थकान और डिप्रेशन.
* अचानक बालों का झड़ना.
* सिरदर्द और नींद न आना.
* याद्दाश्त पर असर.
* बार-बार प्यास लगना.
* वज़न बढ़ने के कारण मोटापा.
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का ट्रीटमेंट
* इससे छुटकारा पाने में रोज़ाना
एक्सरसाइज़ काफ़ी कारगर है. यह न स़िर्फ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है, बल्कि वज़न भी कम करके शारीरिक समस्याओं को दूर रखता है.
* हेल्दी डायट में फल, सब्ज़ियां, बींस, मेवे और साबूत अनाज ज़रूर शामिल करें.
* डॉक्टर आपको कुछ बर्थ कंट्रोल पिल्स या फ़र्टिलिटी मेडिसिन या डायबिटीज़ मेडिसिन दे सकते हैं, जिससे आपके पीरियड्स रेग्युलर हो जाएंगे.

  1. – अनीता सिंह

 

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