Dhanteras

दिवाली 2020 की शुरुआत हो गई है. सभी लोग दिवाली की तैयारियां कर रहे हैं. दिवाली में किस दिन क्या पूजा करें, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, ये हर कोई जानना चाहता है. धनतेरस पूजा, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा, भाई दूज के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक.

Dhanteras

13 नवम्बर 2020: ये हैं धनतेरस पूजा के शुभ मुहूर्त

धनतेरस का त्यौहार कुबेर देव जी, गणेश जी व माँ लक्ष्मी जी से सम्बन्ध रखता है. इस दिन कुबेर देव जी, गणेश जी व माँ लक्ष्मी जी की पूजा करने
से घर में सुख व संपन्नता आती है.
त्रयोदशी प्रारम्भ – सूर्यउदय से
त्रयोदशी समापन – 5:57 बजे
व्यावसायिक पूजा मुहूर्त
लाभ मुहूर्त – 08:07 से 9:27
अमृत मुहूर्त – 09:28 से 10:48
शुभ मुहूर्त – 12:10 से 1:29
खरीदारी के चौघाडिया मुहूर्त:
शुभ मुहूर्त – 12:10 से 1:29
लाभ मुहूर्त – 11:44 से 12:26

सांय काल में शुभ मुहूर्त
प्रदोषकाल में दीपदान व कुबेर पूजन करना शुभ रहता है.
दिल्ली में सूर्यास्त समय – सायं 5:26
प्रदोष काल का समय – 5:38 से 8:15
स्थिर लग्न / वृषभ लग्न – 5:32 से 7:28
पूजा का शुभ समय – 5:24 से 5:59

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14 नवंबर 2020: दिवाली पूजा (लक्ष्मी पूजा) का शुभ मुहूर्त
कार्तिक अमावस्या प्रारम्भ: 14 नवंबर 2:18
कार्तिक अमावस्या समापन: 15 नवंबर 10:37
व्यावसायिक पूजा मुहूर्त
पूजा मुहूर्त – 2:51 से 4:11
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा: 5:30 से 7:25
प्रदोष काल: 5:26 से 8:08
वृषभ काल: 5:30 से 7:26
लाभ चौघड़िया सर्वोत्तम मुहूर्त: 5:30 से 7:07
निशीथ काल
निशीथ काल: 8:08 से 10:51
निशीथ काल शुभ चौघड़िया: 8:48 से 10:30
निशीथ काल अमृत चौघड़िया: 10:30 से 12:12
महानिशीथ काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: 11:39 से 12:32
महानिशीथ काल: 10:51 से 25:33
सिंह काल: 12:03 से 26:19

दिवाली पूजा के लिए निम्नलिखित चार समय का बहुत अधिक महत्व
है:

  1. प्रदोष काल
  2. स्थिर लगन
  3. निशीथ काल
  4. महानिशीथ काल
    यदि ऊपर दिए गए कालों में स्थिर लगन के साथ शुभ चौघड़िया भी आ जाए अर्थात (काल समय+स्थिर लगन+शुभ चौघड़िया) तो, सभी समय की गणनाओं को ध्यान में रखते हुए लक्ष्मी पूजा उसी समय में करें. किसी कारणवश इस समय में पूजा न कर पाएं तो अन्य दिए गए समय में पूजा अवश्य करें.

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15 नवंबर 2020 गोवर्धन पूजा मुहूर्त
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 15 नवंबर 2020, 10:37 AM
प्रतिपदा तिथि समापन – 16 नवंबर 2020, 7:06 AM
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – 6:44 AM से 8:55 AM
गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त – 03:27 PM से 05:38 PM

16 नवंबर 2020 भाई दूज मुहूर्त
द्वितीय तिथि प्रारम्भ – 16, नवंबर 07:06 AM
द्वितीय तिथि समापन – 17, नवंबर 03:57 AM
भाई दूज टीका मुहूर्त – 01:16 PM से 03:27 PM
सर्वोत्तम तिलक मुहूर्त – 02:51 PM से 03:27 PM

हिंदुओं के त्योहारों में दीपावली का विशेष महत्व है. दीपावली का अर्थ है दीप की अवनी अर्थात् पंक्ति का त्योहार. दिवाली पांच दिनों का त्योहार होता है, जो धनतेरस से शुरू होकर नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन-अन्नकूट पूजा, भइया दूज तक रहता है. इन सभी दिनों में किस दिन किस तरह से पूजा की जाए, जिससे घर में सुख-समृद्धि, धन लाभ हो, इस बारे में वास्तु गुरु डॉ. मधुराज ने हमें जानकारी दी. 

 

दीपावली दीयों से जगमग करते रोशनी का सबसे बड़ा त्योहार है. जहां कई दिनों तक परिवार, सगे-संबंधियों, दोस्तों आदि का मेलजोल, सौ़ग़ात, मिठाइयों व लज़ीज व्यंजनों के लुत्फ़ उठाने आदि का ख़ूबसूरत सिलसिला-सा शुरू हो जाता है. वैसे भी भारतीय संस्कृति की झलक यहां के त्योहारों में दिखाई देती है. हमारा देश अनेक धर्मों, संप्रदायों तथा संस्कृतियों का अद्भुत संगम है, इसलिए विभिन्न धर्मों से जुड़े अनेक त्योहार यहां पर धूमधाम से मनाए जाते हैं. दीपावली में धनतेरस से लेकर भइया दूज तक विधिवत पूजा की जाए, तो घर में सुख, शांति, धन-वैभव आदि बना रहता है.

 

धनतेरस- धन की वर्षा

यूं तो दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, लेकिन इसके दो दिन पूर्व धनतेरसवाले दिन से ख़रीददारी का सिलसिला शुरू हो जाता है.

* इस दिन लोग नए बर्तन ख़रीदना शुभ मानते हैं.

* धनतेरस के दिन चांदी के बर्तन, ज्वेलरी, सिक्के की ख़रीददारी करें.

* साबूत धनिया ख़रीदें.

* कमलगट्टे की माला ख़रीदना शुभ होता है.

* गोमती चक्र व पीली कौड़ी ख़रीदना लाभकारी रहता है.

* कुबेर यंत्र और कुबेर मूर्ति ख़रीदना ज़रूरी है.

* एक चांदी का कलश-प्लेट और तांबे का कलश-प्लेट लें.

* गाय का देसी घी ख़रीदें.

* उत्तर की दिशा में एक साफ़ स्थान पर चांदी के कलश में गंगाजल भर दें.

* इसके ऊपर प्लेट रख दें.

* इस प्लेट में अक्षत यानी चावल रख दें.

* इसके बगल में कुबेर की मूर्ति या कुबेर यंत्र रख दें.

* उस पर हल्दी, कुमकुम व फूल-माला चढ़ाएं.

* आग्नेय दिशा में तांबे के कलश में घी भर दें.

* इसे प्लेट से ढंककर इसके ऊपर हल्दी, कुमकुम, फूल और माला चढ़ाएं.

Diwali 2019

नरक चतुर्दशी- छोटी दिवाली

इसे नरक चौदस या छोटी दिवाली भी कहते हैं. इस दिन कृष्ण भगवान ने नरकासुर का वध किया था तथा उसके कारागार में बंद सोलह हज़ार कन्याओं का उद्धार किया था.

* नरक चौदस के दिन यमराज के लिए दीपदान किया जाता है.

* शाम के समय घर के बड़े-बुज़ुर्ग द्वारा इस दीये को जलाना चाहिए.

* इसके लिए एक पीली कौड़ी और एक तांबे का सिक्का व तिल के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए.

* इस दीये को घर के बाहर मुख्यद्वार से निकलते समय बाईं तरफ़ रखें.

* जब यह दीपक ठंडा हो जाए यानी तेल समाप्त हो जाए, तब इसमें रखा पैसा और कौड़ी को लेकर तिज़ोरी या जहां पर पैसा-धन आदि रखते हैं, वहां पर रखें.

Happy Diwali 2019

दिवाली- प्रकाश पर्व

दीपावली के दिन घर को साफ़ करके रंगबिरंगे तोरण-कंदील, दीये से सजाते हैं. लक्ष्मी पूजन होता है. बच्चे-बड़े आतिशबाज़ी करके आनंदित होते हैं. व्यापारी इस दिन अपना नया व्यापार शुरू करते हैं.

* यूं तो सभी पहले से ही पूरे घर की साफ़-सफ़ाई कर देते हैं, पर दिवाली के दिन एक बार फिर घर की अच्छी तरह से सफ़ार्ई करें.

* पूरे घर में नमक के पानी से पोंछा लगाएं.

* घर में गंगाजल का छिड़काव करें.

* मुख्यद्वार को गाय के गोबर से लीप दें या फिर रंगोली से सजाएं.

* यदि आप रंगोली बनाते हैं, तो इसमें रंगों के इस्तेमाल में दिशाओं का भी ध्यान रखें, जैसे- पूर्व दिशा में हरे रंग से, पश्‍चिम में स़फेद, उत्तर में नीले और दक्षिण में लाल रंग से रंगोली बनाएं.

* इसके अलावा तोरण व कैंडल का रंग भी दिशा के अनुसार सिलेक्ट करें.

* पूजा के लिए गणेशजी की मूर्ति लेते समय जिस मूर्ति में गणेश भगवान की सूंड उनके बाएं हाथ की तरफ़ हो, वही लें. साथ ही लक्ष्मीजी की मूर्ति बैठी हुई लें.

* मंगल कलश की स्थापना करें. इसके लिए एक लोटे में चांदी का सिक्का, हल्दी, कुमकुम, चावल व फूल डालकर उसके ऊपर नारियल रखकर घर के ईशान कोण में रखें.

* एक चांदी या स्टील की प्लेट लें. इसमें पांच गोमती चक्र, तीन पीली कौड़ी और एक छोटा मोती शंख रखकर उसकी पूजा करें.

 

गोवर्धन व अन्नकूट

दिवाली के चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध से बृजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था. इसी दिन अन्नकूट भी मनाया जाता है.

* इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा-अर्चना की जाती है.

* साथ ही गाय की सेवा व पूजा करते हैं.

* सुगंधित द्रव्य या इत्र लगाकर स्नान करें.

* एक इंद्रजाल लेकर शाम को उसकी विधिवत पूजा-अर्चना करें.

* फिर भइया दूज के बाद इस इंद्रजाल को फ्रेम कराकर अपने घर या ऑफिस के दक्षिण दिशा की दीवार पर लगा दें.

 

भइया दूज- रिश्तों की मिठास

दीपावली के पांचवें यानी अंतिम दिन भइया दूज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों को टीका लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं.

* इस दिन भाई के माथे पर बहन तिलक लगाकर अक्षत यानी चावल लगाएं.

* भाई की कपूर से आरती करें.

* फिर मिठाई खिलाएं.

* भाई बहन को अपनी क्षमता अनुसार उपहार दें.

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दीपावली के दिन निम्न स्थानों पर दीये जलाने से लक्ष्मीजी की विशेष कृपा हमेशा बनी रहती है-

* दिवाली के दिन घर के पास किसी चौराहे पर रात के समय दीये जलाएं.

* किसी सुनसान जगह पर स्थित मंदिर में दीपक जलाएं.

* लक्ष्मी पूजा के स्थान का दीपक पूरी रात जलता रहे, इसका ख़्याल रखें.

* घर के मुख्यद्वार के दोनों तरफ़ दीये जलाएं.

* दिवाली की शाम किसी बिल्व के पेड़ के नीचे दीप प्रज्ज्वलित करें.

* घर के क़रीब जितने भी मंदिर हों, वहां पर दीये जलाएं.

* घर के आंगन में भी दीपक ज़रूर प्रज्जवलित करें.

* दिवाली की रात को पीपल के पेड़ के नीचे एक दीया ज़रूर जलाएं.

सुपर दिवाली के मास्टर स्ट्रोक

* दीपावली के दिन घर का मुख्यद्वार व सभी खिड़कियां खुली रखें.

* भगवान कुबेर की मूर्ति की पूजा करें.

* गणेशजी की मूर्ति लक्ष्मीजी की दाईं तरफ़ रखें.

* इस दिन काले रंग के कपड़े न पहनें.

* घर के मुख्य दरवाज़े के बाहर रंगोली ज़रूर बनाएं.

* मुख्यद्वार के उत्तर दिशा में कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर, उसके आसपास शुभ-लाभ लिखें.

दिवाली में पूजा-आराधना के समय वास्तु के अनुसार दिशाओं पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत होती है-

* घर की धन-संपत्ति व लॉकर, तिज़ोरी आदि को पूर्व दिशा में रखें.

* पश्‍चिम दिशा में धन-आभूषण रखना ठीक-ठाक रहता है, पर ऐसे में घर के मुखिया को सभी का साथ मिलने के बावजूद पैसे कमाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

* यदि आप आलमारी के अंदर के लॉकर में रुपए-पैसे, ज्वेलरी आदि रखते हैं, तो इस आलमारी को घर के उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखें. इससे धन-आभूषण में बढ़ोत्तरी होती है.

* ईशान कोण का भी बेहद महत्व है. उत्तर ईशान में धन रखा हो, तो पुत्री बुद्धिमान व मशहूर होती है और पूर्व ईशान में रखने से पुत्र.

* दक्षिण दिशा में कभी भी अपने रुपए-पैसे, गहने आदि न रखें.

* आग्नेय, वायव्य व नैऋत्य कोण में भी धन न रखें, वरना कर्ज़, धन हानि की परेशानियां हो सकती हैं.

* घर में रखे गए लॉकर या तिज़ोरी के दरवाज़े पर लक्ष्मीजी की ऐसी फोटो, जिसमें दो हाथी सूंड उठाए खड़े हों लगाएं. साथ ही इस कमरे का रंग क्रीम या ब्राउन होना फलदायी रहता है

– ऊषा गुप्ता

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जीवन की ज़रूरतें धन के बिना पूरी नहीं हो सकती इसलिए धनतेरस के शुभ अवसर पर पं. राजेंद्र जी बता रहे हैं धनप्राप्ति के 10 आसान और चमत्कारी उपाय.

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1) धनतेरस के दिन रसोई में जो भी भोजन बना हो, वह धनतेरस से नित्य पांच दिन तक गाय को खिलाने से धन की वृद्धि होती है.
2) धनतेरस के दिन हीरा ख़रीदना शुभ माना जाता है इसलिए इस दिन हीरा ख़रीदें.
3) चांदी का सिक्का या बर्तन ख़रीदना भी शुभ माना जाता है. लक्ष्मी पूजन के लिए चांदी की लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति भी ख़रीदकर उनकी पूजा करें. उन्हें नियमित धूप दिखाएं. ऐसा करने से धन की वृद्धि होती है.
4) धनतेरस के दिन धनिया के बीज खरीदें. ये धन के प्रतीक माने जाते हैं. लक्ष्मी पूजन में देवी को धनिया अर्पित करने के बाद बगीचे में बो दें. कुछ को तिजोरी में रख दें. ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.
5) धनतेरस के दिन लाल वस्त्र व शृंगार की वस्तु ख़रीदकर उन्हें उपहार में दें.

दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय

धनतेरस पर धन प्राप्ति के १० चमत्कारी उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

6) धनतेरस के दिन स़फेद चीज़ों का दान करने से आर्थिक लाभ होता है.
7) धनतेरस के दिन बहेड़े की जड़ और शंखपुष्पी की जड़ लाकर चांदी के डिब्बे में रखकर लक्ष्मी जी के साथ पूजन करें. धन के मार्ग खुलेंगे.
8) धनतेरस के दिन पूजा के बाद प्राण प्रतिष्ठित दक्षिणावर्ती शंख के चारों तरफ़ अष्ठगंध से श्री लिखें. इससे धन संबंधी चिंता ख़त्म होती है.
9) धनतेरस के दिन पीतल का लोटा अवश्य ख़रीदें. इससे स्वास्थ्य में वृद्धि होती है और रोग नहीं सताते.
10) धनतेरस के दिन घर में धनवंतरि हवन करें, इससे घर में सभी को स्वास्थ्य लाभ मिलता है.
11) धनतेरस से पांच दिन तक पैसे का व्यवहार न करें, स्वास्थ्य हेतु मदद कर सकते हैं.

नवविवाहित कैसे मनाएं दिवाली?

दीपावली में सुख, समृद्धि और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, इसके लिए इन पांच दिनों में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे- पूजा की विधि, शुभ फल प्राप्ति के लिए क्या करें, किन बातों से बचें आदि. दीपावली के शुभ पर्व की शुरुआत होती है धनतेरस से, इस दिन किस तरह से पूजा-अर्चना करें और किन बातों का ख़्याल रखें, ताकि मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहे, सबसे पहले यही जानते हैं.

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धनतेरस

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन देवता धन्वंतरि के अतिरिक्त देवी लक्ष्मी और धन के देव कुबेर की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है.

क्या करें?

– पूजा की तैयारी सूर्योदय से पहले नित्यकर्म और स्नान आदि से निपटकर शुरू कर देनी चाहिए.

– पूजा किसी पुजारी से करवाई जानी चाहिए या फिर उनके निर्देशों का पालन करते हुए पूजा करें.

– मुहूर्त के अनुसार पूजन की तैयारी करें. पूजा के लिए देव कुबेर की मूर्ति का उपयोग करें. मूर्ति नहीं होने की स्थिति में कुबेर की तस्वीर का उपयोग किया जा सकता है.

– पूजा के लिए तिजोरी या ज्वेलरी बॉक्स का भी उपयोग अच्छा होता है. यदि कुबेर यंत्र का प्रयोग पूजा और साधना के लिए किया जाए, तो यह बहुत ही शुभ प्रभाववाला साबित होता है.

– पूजा प्रारंभ करने से पहले तिजोरी या आभूषण के बक्से के ऊपर सिंदूर के
साथ स्वस्तिक का चिह्न बना दें. हाथ में कलेवा बांधें.

– कुबेर की पूजा में पीले वस्त्रों व पीली वस्तुओं का प्रयोग करें.. पीले आसन पर बैठकर पूजा करें.

– धनतेरस की शाम को मिट्टी के दीपक में तिल का तेल भरकर नई रूई की बाती जलाएं, जिसका मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए.

– धनतेरस के मौ़के पर बर्तन, आभूषण आदि की ख़रीद अपनी राशि के अनुसार करें. इसके साथ दूसरी कोई उपयोग में आनेवाली वस्तु भी ख़रीदें. बर्तनों में आप पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन ख़रीद सकते हैं. सोने या चांदी का सिक्का ख़रीदना भी शुभ होता है.

– बर्तनों के अतिरिक्त दूसरी वस्तुओं में कपड़े, स्टेशनरी, सुगंध, हल्दी, तेजपत्ता, पत्थर की निर्मित वस्तु या मूर्ति, मेवे-मिठाई आदि हो सकते हैं.

क्या न करें?

– कुबेर देव की पूजा के लिए अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हुए शुभ मुहूर्त की अनदेखी न करें.

– दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक ही जलाएं और उसमें तिल के तेल का इस्तेमाल करें. जलते दीपक का मुख उत्तर, पूरब या पश्‍चिम की दिशा में न रखें.

– सात्विक भोजन करें. मांसाहार या शराब का सेवन न करें.

– घर या आसपास के किसी भी कोने में गंदगी न रहने दें.

– उपहार में चाकू या चमड़े आदि के सामान न बांटें.

वास्तु टिप्स

– नकारात्मक ऊर्जा देनेवाले सामानों को घर से निकाल बाहर करें. ऐसी वस्तुओं के रूप में पुराने टूटे बर्तन, अख़बार, पत्र-पत्रिकाएं, टूटे खिलौने, बंद घड़ियां, ख़राब फोन, कंप्यूटर आदि के सामान या दूसरी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स आदि हो सकते हैं.

– धनागमन के लिए घर के प्रवेशद्वार पर की जानेवाली सजावट के लिए चावल के आटे, रंगीन पाउडर, चॉक, फूल, आम के पत्ते का प्रयोग करें.

– वास्तु के अनुसार कोई भी पूजा घर के उत्तरी हिस्से में शुभ मानी गई है. पूजा के समय घर में गुलाब या चंदन की ख़ुशबूवाली अगरबत्ती का ही प्रयोग करें.

– घर में मिट्टी के चार दीये एक साथ रखें. इसका अर्थ लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र से है.

नरक चतुर्दशी

यह दूसरे दिन मनाया जानेवाला पर्व है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है. इस दिन की शाम को दीपदान करने की मान्यता है, जो यमराज के लिए किया जाता है.

– इस दिन स्नानादि के बाद मंदिर में भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की पूजा करें.

– रात को घर के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य द्वारा एक दीपक जलाकर पूरे घर में घुमाने के बाद उस दीप को घर से बाहर कहीं दूर इस मान्यता और विश्‍वास के साथ रखें कि सभी बुराइयां और हानिकारक शक्तियां घर से बाहर चली जाएं.

– मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में चावल की ढेरी बनाकर उस पर दीया जलाएं.

– यमराज को अकाल मृत्यु से दूर रखने की प्रार्थनाकरें.

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दीपावली

धार्मिक व सामाजिक मान्यता के अनुसार पांच दिनों तक हिंदू रीति से उत्सव की तरह मनाया जानेवाला त्योहार है दिवाली.

पूजन सामग्री और विधि

सामग्री: दीपक, कमल के फूल, जावित्री, केसर, रोली, चावल, पान के पांच पत्ते, सुपारी, एक थाली में फल, दूसरी थाली में गुलाब और गेंदा आदि के फूल, दूध, खील-बताशे, नारियल, सिंदूर, सूखे मेवे, मिठाई की भरी थाल, दही, गंगाजल, दूब, अगरबत्ती, आंगन आदि में जलाने के लिए 11 या 21 की संख्या में मिट्टी के दीपक, रूई, कलावा, तांबे का कलश और तांबे के अन्य पात्र, सिक्के तथा रुपए.

विधि: सबसे पहले थाली में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं या नवग्रह का यंत्र स्थापित करें. इसके साथ ही एक तांबे या मिट्टी का कलश रखें, जिसमें गंगाजल, दूध, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग वग़ैरह डालें तथा उसे लाल कपड़े से ढंककर एक कच्चे नारियल और कलावे से बांध दें.

– बनाए गए नवग्रह यंत्र के स्थान पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, देवी लक्ष्मी की मूर्ति और मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां या चित्रों से सजाएं.

– यदि कोई धातु की मूर्ति हो, तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध, दही और गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत-चंदन का शृंगार करें और फल-फूल आदि से सजाएं. इसके दाहिनी ओर घी या तिल का एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं.

– घर के किसी मुख्य सदस्य या नित्य पूजा-पाठ करनेवाले व्यक्ति को महालक्ष्मी पूजन के समय तक उपवास रखना चाहिए.

– ध्यान रहे पूजन के लिए उत्तर या पूर्व दिशा में मुख करके बैठें.

– सबसे पहले गणेश और अंबिका का पूजन करें. फिर कलश स्थापन और नवग्रह पूजन के बाद लक्ष्मी समेत दूसरे देवी-देवताओं का पूजन करें.

– इस पूजन के बाद तिजोरी में गणेश तथा लक्ष्मी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें. पूजन के स्थान पर चौमुखा दीपक जलाएं तथा पूजा के बाद घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें.

– कारोबारियों को अपने कार्यक्षेत्र पर बही-खातों की पूजा करना चाहिए. पूजा के बाद जितनी जैसी श्रद्धा हो, उसके अनुरूप घर के छोटे बच्चों, बहू-बेटियों को रुपया-पैसा या दूसरी वस्तुओं का दान देना चाहिए.

– रात के बारह बजे दुकान की गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें. परंपरा के अनुसार दीपावली पूजन के बाद चूने या गेरू में रूई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल-बट्टा तथा सूप पर तिलक करना चाहिए.

– देवी लक्ष्मी की पूजा के समय उनके मंत्र-ॐ श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: का लगातार उच्चारण करते रहें.

क्या करें?

दीपावली की पूजा किसी योग्य पुजारी से विधि-विधान से संपन्न करवाएं.

– पूजा की तैयारी सूर्योदय से पहले ही नित्यकर्म एवं स्नान आदि से निबटकर कर लें.

– पूजन से पहले घर की अच्छी तरह साफ़-सफ़ाई करें. घर को फूल, आम के पत्ते, रंगोली, रंगीन बल्ब आदि से सजाएं.

– पूजाघर सही तरह से सुसज्जित होना चाहिए. सजावट में विविध रंगों का
इस्तेमाल करें.

– पूजा के क्रम में अच्छी ख़ुशबूदार अगरबत्ती या धूप का इस्तेमाल करें. इनमें गुलाब या चंदन की धूप सबसे बेहतर रहती है.

– घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीया जलाएं.

क्या न करें?

– घर में व प्रवेश द्वार पर कहीं भी गंदगी न रहने दें.

– रंगों, फूलों आदि से सजावट करते हुए या रंगोली बनाते समय ध्यान रहे कि काले या गाढ़े भूरे रंग का इस्तेमाल न के बराबर हो.

– पूजा का स्थान घर के दक्षिण, पश्‍चिम या उत्तर की ओर न बनाएं. किसी भी एक देवी या देवता की दो मूर्तियां या तस्वीरें न रखें.

– घर के कोने-कोने में नमक मिश्रित जल का छिड़काव करने के बाद अपना हाथ धोना नहीं भूलें.

– उपहार में चमड़े की बनी वस्तुएं किसी को भी न दें.

वास्तु टिप्स

– घर के आंगन, बड़े हॉल या फिर प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं. उसके बीच में दीपक जलाएं. दीये के मुख को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखकर जलाने से सुख-समॄिद्ध बढ़ती है. इसी के साथ मुख्य द्वार पर घर में प्रवेश करते हुए पैरों के
निशान बनाएं.

– घर का उत्तरी भाग धन का प्रतिनिधित्व करता है, अत: लक्ष्मी पूजा इसी हिस्से में की जानी चाहिए.

– पूजाघर में भगवान गणेश को देवी लक्ष्मी के बाईं ओर तथा देवी सरस्वती को लक्ष्मी के दाईं ओर रखना चाहिए. सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें बैठी हुई अवस्था में होनी चाहिए, जिन्हें उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए
रखना चाहिए.

– पानी का कलश पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. पूजा स्थल या पूजा घर में मूर्तियां रखते समयइस बात का ध्यान रखें कि वे किसी भी दरवाज़े के सामने या रास्ते में न पड़ें.

– पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर की दिशा में एक चौड़े बर्तन के पानी में तैरती हुई ताज़ा गुलाब की पंखुड़ियां रखें.

– ॐ या स्वस्तिक के चिह्न को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवारों पर ही लगाएं.

– जब घर के बाहर दीये जलाएं, तो इन्हें चार के गुणक के रूप में रखें. प्रत्येक दीया लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र का प्रतिनिधित्व करता है.

– उपहार के लिए धातु के सामान या कपड़े आदि को उपयुक्त माना गया है. सजावटी वस्तुओं में पेंटिंग, क्रिस्टल बॉल आदि हो सकते हैं.

– घर की सजावट के क्रम में प्रकाश-व्यवस्था घर के मुख्य द्वार की दिशा के अनुरूप होनी चाहिए. यदि मुख्य द्वार उत्तर या उत्तर-पश्‍चिम की ओर हो, तो हरे या पीले रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि मुख्य प्रवेश पूर्व की ओर हो, तो पीले रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि मुख्य प्रवेश दक्षिण-पूर्व हो, तो लाल रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि प्रवेश द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्‍चिम या पश्‍चिम की ओर हो, तो लाल और नीले रंग की रोशनी का उपयोग करना चाहिए. इसी तरह से उत्तर-पूर्व की दिशा में प्रवेश द्वार होने की स्थिति में नीला रंग सही होता है.

गोवर्धन पूजा

दिवाली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा होती है. इस दिन गायों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि गाय देवी लक्ष्मी का स्वरूप है. भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इंद्र का मान-मर्दन कर गिरिराज पूजन किया था.

– गायों को सुबह स्नान करवाकर फूल- माला, धूप, चंदन आदि से उनकी पूजा की जाती है. गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है.

– पूजा के बाद गोवर्धनजी की सात परिक्रमाएं उनकी जय-जयकार करते हुए की जाती है.

– गोवर्धनजी गोबर से लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाए जाते हैं. इनकी नाभि के स्थान पर एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रख दिया जाता है. फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करते समय डाल दिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है.

क्या करें?

– गोवर्धन पूजा पूरे विधि-विधान के साथ शुभ मुहूर्त में करें. बेहतर होगा किसी पंडित से पूजा करवाएं.

– पूजा से पहले प्रात:काल तेल मालिश कर स्नान करें.

– घर के बाहर गोवर्धन पर्वत बनाएं. फिर पूजा करें.

क्या न करें?

– गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन बंद कमरे में न करें.

– गायों की पूजा करते हुए ईष्टदेव या भगवान कृष्ण की पूजा करना न भूलें.

– इस दिन चंद्र का दर्शन न करें.

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भैया दूज

दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.

– भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.

– इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए. इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.

– बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है. इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.

क्या करें?

– भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.

– बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?

– भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.

– बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक
(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)

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धनतेरस के शुभ अवसर पर आम से लेकर ख़ास सभी कुछ न कुछ ख़रीदते हैं, ताकि उनका यह दिन और भी शुभ हो जाए. क्या आप जानते हैं कि आपके चहेते सेलेब धनतेरस के दिन क्या ख़रीदना पसंद करते हैं? नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.

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अर्जुन बिजलानी
हॉट एंड डैशिंग एक्टर अर्जुन बिजलानी इस दिन स़िर्फ गोल्ड ख़रीदने की बजाय और भी कुछ स्पेशल करते हैं. अर्जुन इस दिन ग़रीब बच्चों के साथ रहते हैं और उन्हें अच्छा खाना खिलाते हैं.

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दिव्यांका त्रिपाठी
नई नवेली दुल्हन और ख़ूबसूरत अदाकारा दिव्यांका की शादी के बाद यह पहला धनतेरस है. इस दिन दिव्यांका गोल्ड कॉइन ख़रीदेंगी. उनके अनुसार यह बेस्ट तरीक़ा है इन्वेस्टमेंट का. भई बात भी सही है. दिव्यांका की शादी हो गई है. ऐसे में फ्यूचर प्लानिंग करना तो बनता ही है.

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शिविन नारंग
क्यूट शिविन बेहद ट्रेडिशनल हैं और सभी त्योहार मनाते हैं. धनतेरस के शुभ मौ़के पर शिविन गोल्ड रिंग ख़रीदेंगे.

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दीपिका सिंह
दीया और बाती हम की लीड एक्टर आप सब की लाडली बहू संध्या उ़र्फ दीपिका सिंह दिव्यांका की ही तरह गोल्ड का कोई सामान ख़रीदेंगी. हो सकता है कि गोल्ड कॉइन ख़रीदें या फिर गोल्ड ज्वेलरी.

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करनवीर शर्मा
करनवीर शर्मा इस दिन लोगों से ज़रा हटकर करने में विश्‍वास करते हैं. वो कहते हैं कि मुझे मालूम है कि धनतेरस के नाम पर जो पहली चीज़ लोगों के दिमाग़ में आती है वह है गोल्ड, लेकिन मैं गोल्ड नहीं ख़रीदूंगा, बल्कि ज़रूरतमंदों के लिए अपनी सैलरी से कुछ गर्म कपड़े खरीदूंगा.

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शरद मल्होत्रा
क़सम मेरे प्यार की सीरियल के लीड एक्टर शरद मल्होत्रा धनतेरस के दिन अपने घर के लिए कोई सामान ख़रीदते हैं. हर साल की तरह इस साल भी वो अपने घर के लिए कोई पेंटिंग या फिर कुछ और ख़रीदेंगे. इसके अलावा वो अपने लिए सिल्वर चेन भी ख़रीद सकते हैं.

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विवियन डिसेना
टीवी सीरियल के एरोगेंट बट हॉट हीरो विवियन इस धनतेरस गोल्ड के बिस्किट ख़रीदेंगे. ऐसा ये इसलिए करेंगे, क्योंकि इससे उन्हें पॉज़िटिव एनर्र्‍जी मिलती है

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देवलीना भट्टाचार्य
देवलीना गुड डॉटर हैं. धनतेरस के दिन वो अपने पैरेंट्स को शॉपिंग कराएंगी और इसके साथ ही अपने भगवानजी के लिए कुछ ख़रीदेंगी.

ते देखा आपके चहेते स्टार भी अपने बिज़ी शेड्यूल से व़क्त निकालकर कैसे इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं. त्योहार का एक भी मौक़ा वो जाने नहीं देते. तो आप भी अपनी फैमिली के साथ इस दिन को सेलिब्रेट कीजिए और ख़ुश रहिए.

– श्वेता सिंह