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शादी के बाद भारतीय महिलाएं मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं? मांग में सिंदूर भरने के पीछे कौन सी धार्मिक मान्यताएं और क्या वैज्ञानिक रहस्य हैं? भारत में सुहागन स्त्रियों के लिए मांग भरना अनिवार्य क्यों माना जाता है? शादी के समय मांग भरने की रस्म को ख़ास महत्व क्यों दिया जाता है? यदि आप भी इन सवालों के जवाब नहीं जानते, तो हम आपको बता रहे हैं मांग में सिंदूर भरने से जुड़ी मान्यताएं और वैज्ञानिक रहस्य.

Importance And Significance Of Sindoor

1) हमारे देश में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है इसलिए शादी के समय वर सिंदूर से वधू की मांग भरता है.
2) सिंदूर सुहागन स्त्रियों के शृंगार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है इसलिए शादी के बाद लगभग सभी महिलाएं मांग में सिंदूर भरती हैं.
3) पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती अपने पति शिवजी को बुरी नजर से बचाने के लिए सिंदूर लगाती थीं. इसी तरह माता सीता भी भगवान राम की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती थीं.
4) ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी का पृथ्वी पर पांच स्थानों पर वास है, जिसमें से एक स्थान सिर भी है, इसीलिए विवाहित महिलाएं मांग में मां लक्ष्मी का प्रिय सिंदूर भरती हैं, ताकि उनके घर में लक्ष्मी का वास हो और घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहे.
5) शास्त्रों के अनुसार, जो महिलाएं मांग में लंबा सिंदूर लगाती हैं, उनके पति को बहुत मान-सम्मान मिलता है.

Importance Of Sindoor

6) सिंदूर में पारा जैसी धातु की अधिकता होती है, जिससे चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़तीं यानी सिंदूर लगाने से महिलाओं के चेहरे पर बढ़ती उम्र के संकेत जल्दी नज़र नहीं आते और उनका चेहरा ख़ूबसूरत नज़र आता है.
7) सिंदूर लगाने से स्त्री के शरीर में स्थित वैद्युतिक उत्तेजना नियंत्रित रहती है.
8) लाल रंग महिलाओं की ख़ुशी, ताकत, स्वास्थ्य, सुंदरता आदि से सीधे जुड़ा है इसलिए मांग में सिंदूर लगाना सेहत की दृष्टि से भी फायदेमंद है.
9) महिलाएं इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि कभी भी किसी दूसरी महिला का सिंदूर न लगाएं और न ही अपना सिंदूर किसी को दें. ऐसा करने से पति का प्यार बंट जाता है.
10) बिना स्नान किए सिंदूर कभी न लगाएं. यदि सिंदूर जमीन पर गिर जाए, तो उसे उठाकर डिब्बी में न भरें. जमीन पर गिरा हुआ सिंदूर लगाना सही नहीं माना जाता.

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आप घर पर भी बना सकती हैं सिंदूर
यदि आप घर पर सिंदूर बनाना चाहती हैं, तो इसके लिए हल्दी, फिटकरी और सुहागा को मिक्स करके इसमें नींबू का रस मिलाएं. इस मिश्रण को डिब्बी में भरकर इस्तेमाल करें.

शिर्डी वाले साई बाबा के लिए सभी के मन में बड़ा सम्मान है. लोग अपनी मन्नतें मांगते हैं और इस आस से कि बाबा के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता. आस्था में डूबी उनकी कुछ चुनिंदा और अनदेखी तस्वीरें हम लाए हैं ख़ास आपके लिए इस वीडीयो के ज़रिए. ज़रूर देखें क्योंकि गुरुवार का दिन साई बाबा की सेवा के लिए सबसे ख़ास माना जाता है.

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अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के पीछे बहुत सारी मान्यताएं और बहुत सारी कहानियां भी जुड़ी हैं. इसे भगवान परशुराम जन्मदिन यानी परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के अलावा विष्णु के अवतार नर व नारायण के अवतरित होने की मान्यता भी इसी दिन से जुड़ी है. यह भी मान्यता है कि त्रेता युग का आरंभ इसी तिथि से हुआ था. मान्यता के अनुसार इस तिथि को उपवास रखने, दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है यानी इस दिन व्रत रखने वाले को कभी भी किसी चीज़ का अभाव नहीं होता, उसके भंडार हमेशा भरे रहते हैं. चूंकि इस व्रत का फल कभी कम न होने वाला, कभी न घटने वाला, कभी नष्ट न होने वाला होता है, इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है. अक्षय तृतीया 2020 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताओं से जुड़ी सभी जानकारी दे रहे हैं पंडित राजेंद्रजी.

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताएं

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त – 05:48 से 12:19
सोना खरीदने का शुभ समय – 05:48 से 13:22
तृतीया तिथि प्रारंभ – 11:51 (25 अप्रैल 2020)
तृतीया तिथि समाप्ति – 13:22 (26 अप्रैल 2020)

अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यताएं

  • माना जाता है कि जो लोग इस दिन अपने सौभाग्य को दूसरों के साथ बांटते हैं, उन्हें ईश्वर की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है. इस दिन दिए गए दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना से इस दिन शिव-पार्वती और नर-नारायण की पूजा का विधान है.
  • अक्षय तृतीया के दिन दान को श्रेष्ठ माना गया है. चूंकि वैशाख मास में सूर्य की तेज धूप और गर्मी चारों ओर रहती है और यह आकुलता को बढ़ाती है, तो इस तिथि पर शीतल जल, कलश, चावल, चना, दूध, दही आदि खाद्य पदार्थों सहित वस्त्राभूषणों का दान अक्षय व अमिट पुण्यकारी होता है.

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Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जानें मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय

1) लग्न राशि के ‘स्वामी ग्रह’ को करें प्रसन्न
प्रत्येक जातक की एक चन्द्र राशि होती है और इसी तरह कुंडली में जन्म के समय से संबंधित एक लग्न राशि भी होती है. जातक के गुण व व्यवहार को लग्न राशि काफी हद तक प्रभावित करती है. यदि किसी के कार्य नहीं बन पा रहे हैं या आर्थिक रूप से तकलीफ में हैं, तो अपनी लग्न राशि के ‘स्वामी ग्रह’ के अनुकूल रंग की कोई वस्तु अपने साथ जरूर रखें या स्वामी ग्रह के रंग से संबंधित कोई एक छोटा कपड़ा अपने साथ जरूर रखें.

2) अलमारी रखें उचित स्थान पर
धन की अलमारी उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार पर अगर लगी हो, तो यह धनवृद्धि में लाभदायक साबित हो सकती है.

3) मुख्य द्वार पर दीपक लगाएं
प्रात: सुबह लक्ष्मीजी का पूजन घर में प्रतिदिन किया जाना चाहिए और सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर दाईं ओर एक घी का दीया जरूर जलाना चाहिए. इन दोनों कार्यों से धन की देवी लक्ष्मीजी प्रसन्न होकर व्यक्ति के पास ही रहती हैं.

4) घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी का स्वरूप
गणेश भगवान के स्वरूप को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में धन संबंधित सभी समस्याओं का अंत होता है और घर में नकारात्मक शक्तियों का भी उदय नहीं हो पाता है.

5) घर में तुलसीजी का पौधा लगाएं
तुलसीजी की सेवा करने से धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है. तुलसी के पौधे पर नियमित रूप से दीपक लगाने और पूजन से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

6) गोमाता को चारा खिलाएं
नित्य सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गोमाता को हरा चारा या आटे का भोग लगाने से भी लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं.

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Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया पर करें 14 तरह के दान, देखें जीवन में चमत्कार

चूंकि तृतीया मां गौरी की तिथि है, इसलिए इस दिन गृहस्थ जीवन में सुख-शांति की कामना से की गई प्रार्थना तुरंत स्वीकार होती है. गृहस्थ जीवन को खुशहाल रखने के लिए इस दिन उनकी पूजा की जानी चाहिए.

अक्षय तृतीया के दिन ये 14 दान हैं महत्वपूर्ण
1) गौ,
2) भूमि
3) तिल
4) स्वर्ण
5) घी
6) वस्त्र
7) धान्य
8) गुड़
9) चांदी
10) नमक
11) शहद
12) मटकी
13) खरबूजा
14) कन्या

अधिकतर लोग छोटे बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए उनके माथे पर, कान के पीछे, हथेली या तलवो पर कला टीका लगाते हैं. क्या वाकई बुरी नज़र लगती है? क्या वाकई बुरी नज़र होती है? कुछ समय पहले सारा अली खान अपने भाई इब्राहिम अली खान के साथ एक प्रमुख पत्रिका के लिए शूट कर रही थी. शूटिंग के समय सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम अली खान के साथ उनकी मां अमृता सिंह भी मौजूद थीं. सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम अली खान ने शूटिंग के लिए सफ़ेद रंग के बहुत ही खूबसूरत कपड़े पहने थे. सारा अली खान सफ़ेद कपड़ों में बहुत खूबसूरत लग रही थी, ऐसे में मां अमृता सिंह ने अपनी बेटी सारा अली खान को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाया था. सारा अली खान, इब्राहिम अली खान और उनकी मां अमृता सिंह की ये फोटो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई बुरी नज़र लगती है? बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका क्यों लगाते हैं? बुरी नज़र से बचने के लिए काला टीका लगाने की मान्यता और सच्चाई के बारे में विस्तार से बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक.

Amrita Singh Sara Ali Khan Ibrahim Ali Khan

बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाने के पीछे ये मान्यता है
आपने अक्सर ये महसूस किया होगा कि जब हम किसी व्यक्ति से मिलते हैं, तो उससे मिलते या बात करते समय हम या तो अच्छा महसूस करते है या कुछ भी महसूस नहीं कर पाते या फिर बहुत बुरा महसूस करने लगते हैं. जिन लोगों से मिलकर हमारा मन खिन्न हो जाता है या हम भारीपन महसूस करने लगते हैं, जिन लोगों को हमारी सफलता से ईर्ष्या होती है, ऐसे लोगों से मिलकर होने वाली खिन्नता और भारीपन को हमारे बुज़ुर्गों ने नज़र लगना कहा है. काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समा लेता है, जिससे हम नकारात्मकता से बचे रहते हैं. नकारात्मक ऊर्जा को हमसे दूर रखने के लिए ही हमारे बड़े-बुज़ुर्ग हमें काला टीका या काला धागा बांधने की सलाह देते हैं.

आप भी देखिए सारा अली खान, इब्राहिम अली खान और उनकी मां अमृता सिंह की ये फोटो, जो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी.

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बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाने के पीछे ये सच्चाई है
संसार में हर वस्तु व हर व्यक्ति के इर्दगिर्द एक ऊर्जा होती है और जितनी तेज़ी से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, उससे कम तेज़ी से सकारात्मक ऊर्जा फैलती है. जब भी हम किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, तो उसकी ऊर्जा हमें प्रभावित करने लगती है. अगर व्यक्ति से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है, तो वह ऊर्जा हमारे ऊपर भी भारी मात्रा में हावी होने लगती है. ऐसे लोग हमारी ऊर्जा को नकारात्मकता से प्रभावित कर हमारी ऊर्जा को तो नष्ट करते ही हैं, साथ ही हमारे प्रति बुरे विचार भी रखते हैं. ऐसे ही लोगों की बुरी नज़र हमें लगती है. इसी तरह जब हमें किसी से मिलकर अच्छा लगता है, तो ज़ाहिर-सी बात है कि वो व्यक्ति मन में हमारे लिए अच्छे विचार रखता है. ऐसे लोगों से मिलनेवाली तरंगें हमें अच्छा व मज़बूत बनाती हैं.

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28 मार्च 2020 से दूरदर्शन पर रामायण (Ramayan) का प्रसारण शुरू हो गया है. लॉकडाउन के चलते दर्शकों की मांग पर टीवी पर फिर से रामायण का प्रसारण शुरू किया गया है. टीवी पर एक बार फिर से रामायण के प्रसारण से इस सीरियल के कलाकार फिर से सुर्ख़ियों में आ गए हैं. दर्शक ये जानना चाहते हैं कि इन दिनों रामायण सीरियल के कलाकार क्या कर रहे हैं. बता दें कि बता दें कि रामायण में अरुण गोविल (Arun Govil ) ने राम का किरदार निभाया था और उसके बाद से दर्शक उन्हें राम के नाम से ही जानने लगे थे. इन दिनों अरुण गोविल अपने परिवार के साथ रामायण देख रहे हैं. अरुण गोविल की अपने परिवार के साथ रामायण देखते हुए ये फोटो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रही है, आप भी देखें अरुण गोविल और उनके परिवार की ये फोटो.

Arun Govil Watching Ramayan With Family

पहली बार पोते के साथ ‘रामायण’ देख रहे हैं अरुण गोविल
जब टीवी पर एक बार फिर से रामायण के प्रसारण की ख़बर आई, तो इस सीरियल के राम यानी अरुण गोविल ने कहा था कि इस बार मैं ये शो अपने पोते के साथ देखूंगा. जब अरुण गोविल की अपने परिवार और पोते के साथ रामायण देखते हुए ये फोटो सोशल मीडिया पर आई, तो लोगों को उनकी ये फोटो बहुत पसंद आई और ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दूरदर्शन चैनल पर रामायण का पहला एपिसोड सुबह 9 बजे और दूसरा एपिसोड रात 9 बजे प्रसारित किया जाएगा.

33 साल बाद टीवी पर फिर से हो रहा है रामायण का प्रसारण
रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण 33 साल बाद टीवी पर फिर से शुरू हो गया है. आपको याद होगा कि 1987 में जब पहली बार दूरदर्शन पर रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण शुरू हुआ था, तो रामायण के प्रसारण के समय सड़कों पर कर्फ्यू वाला सन्नाटा पसर जाता था. इसी तरह जब 1988 में टीवी पर बी आर चोपड़ा के महाभारत का प्रसारण शुरू हुआ था, तब भी तब भी दर्शक घरों से बाहर नहीं निकलते थे.

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Ramayan

रामायण के राम अरुण गोविल की फोटो की तरह ही रामायण की सीता यानी दीपिका चिखलिया का ये वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था

रामायण के बाद ये सीरियल्स भी दिखाए जा रहे हैं दूरदर्शन पर
लॉकडाउन पीरियड में दर्शकों के मनोरंजन के लिए दूरदर्शन अब अपने अन्य पुराने शोज़ भी प्रसारित कर रहा है. रामायण के बाद महाभारत, ब्योमकेश बख्शी जैसे शोज़ का प्रसारण भी अब दूरदर्शन पर शुरू हो गया है. बहुत जल्दी बच्चों के पसंदीदा शो शक्तिमान भी टीवी पर दिखाया जाएगा.

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शादी की रस्मों में सोलह शृंगार का विशेष महत्व है. शादी के दिन जब दुल्हन सोलह शृंगार करती है, तो उसकी ख़ूबसूरती और भी निखर जाती है. महिलाओं के जीवन में सोलह शृंगार का महत्व स़िर्फ सजने-संवरने के लिए नहीं है, इसके पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य भी छुपे हैं. सोलह शृंगार का महिलाओं के स्वास्थ्य और सौभाग्य से गहरा संबंध है. आख़िर क्या है सोलह शृंगार का वैज्ञानिक महत्व, बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो-न्यूमरोलॉजी-वास्तु व फेंगशुई एक्सपर्ट मनीषा कौशिक.

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1) शादी का जोड़ा
दुल्हन के लिए शादी का जोड़ा चुनते समय सुंदर और चमकदार रंगों को प्राथमिकता दी जाती है, जैसे- लाल, पीला, गुलाबी आदि. दुल्हन के लिए लाल रंग का शादी का जोड़ा शुभ व महत्वपूर्ण माना जाता है. लाल रंग प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है.
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग शुभ, मंगल व सौभाग्य का प्रतीक है, इसीलिए शुभ कार्यों में लाल रंग का सिंदूर, कुमकुम, शादी का जोड़ा आदि का प्रयोग किया जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, लाल रंग शक्तिशाली व प्रभावशाली है, इसके उपयोग से एकाग्रता बनी रहती है. लाल रंग आपकी भावनाओं को नियंत्रित कर आपको स्थिरता देता है.

2) गजरा
गजरा एक ख़ूबसूरत व प्राकृतिक शृंगार है. गजरा चमेली के सुंगंधित फूलों से बनाया जाता है और इसे महिलाएं बालों में सजाती हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, गजरा दुल्हन को धैर्य व ताज़गी देता है. शादी के समय दुल्हन के मन में कई तरह के विचार आते हैं, गजरा उन्हीं विचारों से उसे दूर रखता है और ताज़गी देता है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, चमेली के फूलों की महक हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. चमेली की ख़ुशबू तनाव को दूर करने में सबसे ज़्यादा सहायक होती है.

3) बिंदी
बिंदी दोनों भौहों के बीच माथे पर लगाया जानेवाला लाल कुमकुम का चक्र होता है, जो महिला के शृंगार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
धार्मिक मान्यता
बिंदी को त्रिनेत्र का प्रतीक माना गया है. दो नेत्रों को सूर्य व चंद्रमा माना गया है, जो वर्तमान व भूतकाल देखते हैं तथा बिंदी त्रिनेत्र के प्रतीक के रूप में भविष्य में आनेवाले संकेतों की ओर इशारा करती है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, बिंदी लगाने से महिला का आज्ञा चक्र सक्रिय हो जाता है. यह महिला को आध्यात्मिक बने रहने में तथा आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखने में सहायक होता है. बिंदी आज्ञा चक्र को संतुलित कर दुल्हन को ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होती है.

4) सिंदूर
सिंदूर महिलाओं के सौभाग्यवती होने का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है. यह सबसे पहले शादी के समय दूल्हे के द्वारा दुल्हन की मांग में भरा जाता है. उसके बाद सौभाग्यवती महिला हर समय इसे अपनी मांग में सजाए रखती है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, सौभाग्यवती महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर भरती है. लाल सिंदूर महिला के सहस्रचक्र को सक्रिय रखता है. यह महिला के मस्तिष्क को एकाग्र कर उसे सही सूझबूझ देता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर महिलाओं के रक्तचाप को नियंत्रित करता है. सिंदूर महिला के शारीरिक तापमान को नियंत्रित कर उसे ठंडक देता है और शांत रखता है.

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5) काजल
काजल आंखों में लगाई जानेवाली काले रंग की स्याही को कहते हैं. काजल महिला की आंखों व रूप को निखारता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, काजल लगाने से स्त्री पर किसी की बुरी नज़र का कुप्रभाव नहीं पड़ता. काजल से आंखों से संबंधित कई रोगों से बचाव होता है. काजल से भरी आंखें स्त्री के हृदय के प्यार व कोमलता को दर्शाती हैं.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, काजल आंखों को ठंडक देता है. आंखों में काजल लगाने से नुक़सानदायक सूर्य की किरणों व धूल-मिट्टी से आंखों का बचाव होता है.

6) मेहंदी
मेहंदी लगाने का शौक लगभग सभी महिलाओं को होता है. लड़की कुंआरी हो या शादीशुदा हर महिला मेहंदी लगाने के मौ़के तलाशती रहती है. सोलह शृंगार में मेहंदी महत्वपूर्ण मानी गई है.
धार्मिक मान्यता
मानयताओं के अनुसार, मेहंदी का गहरा रंग पति-पत्नी के बीच के गहरे प्रेम से संबंध रखता है. मेहंदी का रंग जितना लाल और गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्रेम उतना ही गहरा होता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मेहंदी दुल्हन को तनाव से दूर रहने में सहायता करती है. मेहंदी की ठंडक और ख़ुशबू दुल्हन को ख़ुश व ऊर्जावान बनाए रखती है.

7) चूड़ियां
चूड़ियां हर सुहागन का सबसे महत्वपूर्ण शृंगार हैं. महिलाओं के लिए कांच, लाक, सोने, चांदी की चूड़ियां सबसे महत्वपूर्ण मानी गई हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, चूड़ियां पति-पत्नी के भाग्य और संपन्नता की प्रतीक हैं. यह भी मान्यता है कि महिलाओं को पति की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमेशा चूड़ी पहनने की सलाह दी जाती है. चूड़ियों का सीधा संबंध चंद्रमा से भी माना जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चूड़ियों से उत्पन्न होनेवाली ध्वनि महिलाओं की हड्डियों को मज़बूत करने में सहायक होती है. महिलाओं के रक्त के परिसंचरण में भी चूड़ियां सहायक होती हैं.

8) मंगलसूत्र
मंगलसूत्र एक ऐसा सूत्र है, जो शादी के समय वर द्वारा वधू के गले में बांधा जाता है और उसके बाद जब तक महिला सौभाग्यवती रहती है, तब तक वह निरंतर मंगलसूत्र पहनती है. मंगलसूत्र पति-पत्नी को ज़िंदगीभर एकसूत्र में बांधे रखता है.
धार्मिक मान्यता
ऐसी मान्यता है कि मंगलसूत्र सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित कर महिला के दिमाग़ और मन को शांत रखता है. मंगलसूत्र जितना लंबा होगा और हृदय के पास होगा वह उतना ही फ़ायदेमंद होगा. मंगलसूत्र के काले मोती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मज़बूत करते हैं.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलसूत्र सोने से निर्मित होता है और सोना शरीर में बल व ओज बढ़ानेवाली धातु है, इसलिए मंगलसूत्र शारीरिक ऊर्जा का क्षय होने से रोकता है.

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9) कर्णफूल/ईयररिंग्स
कर्णफूल यानी ईयररिंग्स-झुमके, कुंडल, गोल, लंंबे आदि आकार व डिज़ाइन में पाए जाते हैं. आमतौर पर महिलाएं सोने, चांदी, कुंदन आदि धातु से बने ईयररिंग्स पहनती हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, कर्णफूल यानी ईयररिंग्स महिला के स्वास्थ्य से सीधा संबंध रखते हैं. ये महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारते हैं. इसके बिना महिला का शृंगार अधूरा रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार हमारे कर्णपाली (ईयरलोब) पर बहुत से एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन पर सही दबाव दिया जाए, तो माहवारी के दिनों में होनेवाले दर्द से राहत मिलती है. ईयररिंग्स उन्हीं प्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालते हैं. साथ ही ये किडनी और मूत्राशय (ब्लैडर) को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं.

10) बाजूबंद
ये बाजू के ऊपरी हिस्से में पहना जाता है. बाजूबंद सोने, चांदी, कुंदन या अन्य मूल्यवान धातु या पत्थर से बना होता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, बाजूबंद महिलाओं के शरीर में ताक़त बनाए रखने व पूरे शरीर में उसका संचार करने में सहायक होता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, बाजूबंद बाजू पर सही मात्रा में दबाव डालकर रक्तसंचार बढ़ाने में सहायता करता है.

11) कमरबंद
कमरबंद धातु व अलग-अलग तरह के मूल्यवान पत्थरों से मिलकर बना होता है. कमरबंद नाभि के ऊपरी हिस्से में बांधा जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, महिला के लिए कमरबंद बहुत आवश्यक है. चांदी का कमरबंद महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी का कमरबंद पहनने से महिलाओं को माहवारी तथा गर्भावस्था में होनेवाले सभी तरह के दर्द से राहत मिलती है. चांदी का कमरबंद पहनने से महिलाओं में मोटापा भी नहीं बढ़ता.

12) मांगटीका
मांगटीका दुल्हन को मांग में पहनाया जानेवाला ज़ेवर है. यह सोने, चांदी, कुंदन, जरकन, हीरे, मोती आदि से बनाया जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, मांगटीका महिला के यश व सौभाग्य का प्रतीक है. मांगटीका यह दर्शाता है कि महिला को अपने से जुड़े लोगों का हमेशा आदर करना है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मांगटीका महिलाओं के शारीरिक तापमान को नियंत्रित करता है, जिससे उनकी सूझबूझ व निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है.

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13) अंगूठी
शादी की सबसे पहली रस्म अंगूठी से ही शुरू की जाती है, जिसमें लड़का-लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी करते हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, अंगूठी पति-पत्नी के प्रेम की प्रतीक होती है, इसे पहनने से पति-पत्नी के हृदय में एक-दूसरे के लिए सदैव प्रेम बना रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, अनामिका उंगली की नसें सीधे हृदय व दिमाग़ से जुड़ी होती हैं, इन पर प्रेशर पड़ने से दिल व दिमाग़ स्वस्थ रहता है.

14) पायल
पैरों में पहनी जानेवाली पायल चांदी की ही सबसे उत्तम व शुभ मानी जाती है. पायल कभी भी सोने की नहीं होनी चाहिए. शादी के समय मामा द्वारा दुल्हन के पैरों में पायल पहनाई जाती है या ससुराल से देवर की तरफ़ से यह तोहफ़ा अपनी भाभी के लिए भेजा जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, महिला के पैरों में पायल संपन्नता की प्रतीक होती है. घर की बहू को घर की लक्ष्मी माना गया है, इसी कारण घर में संपन्नता बनाए रखने के लिए महिला को पायल पहनाई जाती है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी की पायल महिला को जोड़ों व हड्डियों के दर्द से राहत देती है. साथ ही पायल के घुंघरू से उत्पन्न होनेवाली ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है.

15) बिछिया
हर वैवाहिक महिला पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनती है. बिछिया भी चांदी की ही सबसे शुभ मानी गई है.
धार्मिक मान्यता
महिलाओं के लिए पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनना शुभ व आवश्यक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि बिछिया पहनने से महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और घर में संपन्नता बनी रहती है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं के पैरों की उंगलियों की नसें उनके गर्भाशय से जुड़ी होती हैं, बिछिया पहनने से उन्हें गर्भावस्था व गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है. बिछिया पहनने से महिलाओं का ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है.

16) इत्र
सुगंध ख़ासकर गुलाब के फूल की सुगंध सीधे रूप से प्रेम से संबंध रखती है. सुगंध को प्रेम का प्रतीक माना गया है और यह पति-पत्नी को एक दूसरे की ओर आकर्षित करती है.
धार्मिक मान्यता
सौभाग्यवती महिला के लिए गुलाब की सुगंध सबसे उत्तम मानी जाती है. गुलाब प्रेम का प्रतीक है, इसलिए गुलाब का इत्र लगाने से पति हमेशा पत्नी की ओर आकर्षित रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, इत्र मानसिक तनाव दूरकर तरोताज़ा रखता है. गुलाब की सुगंध दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इत्र को नर्व पॉइंट्स पर लगाना चाहिए.
– कमला बडोनी

भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ जानना हर शिवभक्त के लिए ज़रूरी है. देवों के देव महादेव के अनेक रूप हैं और उनके हर रूप का अलग नाम है. सोमवार के दिन जब भगवान शिव की उपासना करें, तो शिव के 108 नाम जरूर जपें. भगवान शिव के 108 नाम जपने से पहले आपको यदि उनके हर नाम का अर्थ पता हो, तो आप भगवान शिव के हर रूप को भलीभांति समझ सकेंगे. हर शिवभक्त को भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ मालूम होना ही चाहिए इसलिए हम आपको बता रहे हैं भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ.

Names Of Lord Shiva With Meanings

 

भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ

1. शिव – कल्याण स्वरूप
2. महेश्वर – माया के अधीश्वर
3. शम्भू – आनंद स्वरूप वाले
4. पिनाकी – पिनाक धनुष धारण करने वाले
5. शशिशेखर – चंद्रमा धारण करने वाले
6. वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
7. विरूपाक्ष – विचित्र अथवा तीन आंख वाले
8. कपर्दी – जटा धारण करने वाले
9. नीललोहित – नीले और लाल रंग वाले
10. शंकर – सबका कल्याण करने वाले
11. शूलपाणी – हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
12. खटवांगी – खटिया का एक पाया रखने वाले
13. विष्णुवल्लभ – भगवान विष्णु के अति प्रिय
14. शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करने वाले
15. अंबिकानाथ – देवी भगवती के पति
16. श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले
17. भक्तवत्सल – भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
18. भव – संसार के रूप में प्रकट होने वाले
19. शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले
20. त्रिलोकेश – तीनों लोकों के स्वामी
21. शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले
22. शिवाप्रिय – पार्वती के प्रिय
23. उग्र – अत्यंत उग्र रूप वाले
24. कपाली – कपाल धारण करने वाले
25. कामारी – कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
26. सुरसूदन – अंधक दैत्य को मारने वाले
27. गंगाधर – गंगा को जटाओं में धारण करने वाले
28. ललाटाक्ष – माथे पर आंख धारण किए हुए
29. महाकाल – कालों के भी काल
30. कृपानिधि – करुणा की खान
31. भीम – भयंकर या रुद्र रूप वाले
32. परशुहस्त – हाथ में फरसा धारण करने वाले
33. मृगपाणी – हाथ में हिरण धारण करने वाले
34. जटाधर – जटा रखने वाले
35. कैलाशवासी – कैलाश पर निवास करने वाले
36. कवची – कवच धारण करने वाले
37. कठोर – अत्यंत मजबूत देह वाले
38. त्रिपुरांतक – त्रिपुरासुर का विनाश करने वाले
39. वृषांक – बैल-चिह्न की ध्वजा वाले
40. वृषभारूढ़ – बैल पर सवार होने वाले
41. भस्मोद्धूलितविग्रह – भस्म लगाने वाले
42. सामप्रिय – सामगान से प्रेम करने वाले
43. स्वरमयी – सातों स्वरों में निवास करने वाले
44. त्रयीमूर्ति – वेद रूपी विग्रह करने वाले
45. अनीश्वर – जो स्वयं ही सबके स्वामी है
46. सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
47. परमात्मा – सब आत्माओं में सर्वोच्च
48. सोमसूर्याग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले
49. हवि – आहुति रूपी द्रव्य वाले
50. यज्ञमय – यज्ञ स्वरूप वाले
51. सोम – उमा के सहित रूप वाले
52. पंचवक्त्र – पांच मुख वाले
53. सदाशिव – नित्य कल्याण रूप वाले
54. विश्वेश्वर – विश्व के ईश्वर
55. वीरभद्र – वीर तथा शांत स्वरूप वाले
56. गणनाथ – गणों के स्वामी
57. प्रजापति – प्रजा का पालन- पोषण करने वाले
58. हिरण्यरेता – स्वर्ण तेज वाले
59. दुर्धुर्ष – किसी से न हारने वाले
60. गिरीश – पर्वतों के स्वामी
61. गिरिश्वर – कैलाश पर्वत पर रहने वाले
62. अनघ – पापरहित या पुण्य आत्मा
63. भुजंगभूषण – सांपों व नागों के आभूषण धारण करने वाले
64. भर्ग – पापों का नाश करने वाले
65. गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
66. गिरिप्रिय – पर्वत को प्रेम करने वाले
67. कृत्तिवासा – गजचर्म पहनने वाले
68. पुराराति – पुरों का नाश करने वाले
69. भगवान् – सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न
70. प्रमथाधिप – प्रथम गणों के अधिपति
71. मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले
72. सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले
73. जगद्व्यापी – जगत में व्याप्त होकर रहने वाले
74. जगद्गुरू – जगत के गुरु
75. व्योमकेश – आकाश रूपी बाल वाले
76. महासेनजनक – कार्तिकेय के पिता
77. चारुविक्रम – सुन्दर पराक्रम वाले
78. रूद्र – उग्र रूप वाले
79. भूतपति – भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी
80. स्थाणु – स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
81. अहिर्बुध्न्य – कुण्डलिनी- धारण करने वाले
82. दिगम्बर – नग्न, आकाश रूपी वस्त्र वाले
83. अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
84. अनेकात्मा – अनेक आत्मा वाले
85. सात्त्विक – सत्व गुण वाले
86. शुद्धविग्रह – दिव्यमूर्ति वाले
87. शाश्वत – नित्य रहने वाले
88. खण्डपरशु – टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
89. अज – जन्म रहित
90. पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
91. मृड – सुखस्वरूप वाले
92. पशुपति – पशुओं के स्वामी
93. देव – स्वयं प्रकाश रूप
94. महादेव – देवों के देव
95. अव्यय – खर्च होने पर भी न घटने वाले
96. हरि – विष्णु समरूपी
97. पूषदन्तभित् – पूषा के दांत उखाड़ने वाले
98. अव्यग्र – व्यथित न होने वाले
99. दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले
100. हर – पापों को हरने वाले
101. भगनेत्रभिद् – भग देवता की आंख फोड़ने वाले
102. अव्यक्त – इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
103. सहस्राक्ष – अनंत आँख वाले
104. सहस्रपाद – अनंत पैर वाले
105. अपवर्गप्रद – मोक्ष देने वाले
106. अनंत – देशकाल वस्तु रूपी परिच्छेद से रहित
107. तारक – तारने वाले
108. परमेश्वर – प्रथम ईश्वर

अपनी राशि के अनुसार करें भगवान शिव की पूजा- पूरी होगी हर मनोकामना, देखें वीडियो:

 

 

जब भी हमारे घर में पूजा-पाठ, हवन, उत्सव या शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य होते हैं, तो घर में शंख ज़रूर बजाया जाता है. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है? धार्मिक कार्यों में शंख बजाने की परंपरा क्यों है और इसका वैज्ञानिक महत्व क्या है? चलिए, हम आपको बताते हैं.

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धार्मिक मान्यता
सभी धर्मों में शंखनाद को पवित्र माना गया है इसीलिए पूजा-पाठ, उत्सव, हवन, विवाह आदि शुभ कार्यों में शंख बजाना शुभ व अनिवार्य माना जाता है. मंदिरों में भी सुबह-शाम आरती के समय शंख बजाया जाता है.

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वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक मानते हैं कि शंख फूंकने से उसकी ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक के अनेक बीमारियों के कीटाणु ध्वनि-स्पंदन से मूर्छित हो जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं. यदि रोज़ शंख बजाया जाए, तो वातावरण कीटाणुओं से मुक्त हो सकता है. बर्लिन विश्‍वविद्यालय ने शंखध्वनि पर अनुसंधान कर यह पाया कि इसकी तरंगें बैक्टीरिया तथा अन्य रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए उत्तम व सस्ती औषधि हैं. इसके अलावा शंख बजाने से फेफड़े मज़बूत होते हैं, जिससे श्‍वास संबंधी रोगों से बचाव होता है.

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शंख में जल भरकर पूजा स्थान में रखा जाता है और पूजा-पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़का जाता है. इस जल को छिड़कने के पीछे मान्यता यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है, क्योंकि शंख में जो गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है, उसके अंश भी जल में आ जाते हैं. इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है. यही वजह है कि बंगाल में महिलाएं शंख की चूड़ियां पहनती हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी : शुभ मुहूर्त पर व्रत-पूजा से पूरी करें मनोकामना
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शुभ फल के लिए शनि जयंती पर करें ये उपाय  (Significance Of Shani Jayanti)

शनि जयंती हिंदू धर्म में शनि देवता की जन्म तिथि के दिन मनाते हैं. ज्योतिष में भी शनि का काफ़ी महत्व है. कहते हैं यह न्याय के देवता हैं. हमारे कर्मों का फल देते हैं. यही वजह है कि लोग शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय भी करते हैं.

  • इस दिन काले कुत्ते, गाय या कौवे को रोटी खिलाएं.
  • दान करें. रोगियों की सेवा करें. बुज़ुर्गों की सेवा करें. उन्हें व ज़रूरतमंदों को फल, मिठाई व नमकीन दें.
  • माना जाता है कि उड़द की दाल से बनी वस्तुओं के दान से शनि देवता बड़े प्रसन्न होते हैं.
  • तेल से बनी वस्तुओं का भोग लगाएं.
  • काले उड़द व लोहे से बनी चीज़ों का भी भोग लगाएं.
  • हनुमानजी की भी पूजा करें.
  • झूठ न बोलें, बेईमानी न करें. बहुत अधिक यात्रा से बचें.
  • यह बात जान लें कि बेवजह शनि का डर मन में न बिठाएं, शनि बेहद लाभकारी हैं और न्याय करते हैं. वो पापियों को उनके कर्मों का फल देते हैं, जबकि उनकी भक्ति करनेवालों को शुभफल देते हैं. उनकी पूजा करने से घर के झगड़े ख़त्म होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है.

– इन शनि मंत्रों का जाप करें-

ऊँ शं शनैश्चाराय नमः

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।