Diet Myths

हेल्थ और फिटनेस से जुड़े कई ऐसे भ्रम हैं, जिनका सच से कोई वास्ता नहीं होता, लेकिन हम इन्हें इतनी बार इतने लोगोंके मुंह से सुन चुके होते हैं कि समय के साथ-साथ हमें ये सच लगने लगते हैं. यहां हम ऐसे ही कॉमन हेल्थ मिथ्स की बात करेंगे. 

ज़्यादा मीठा खाने से डायबिटीज़ होती है: सबसे पहली बात कि डायबिटीज़ मीठा खाने से नहीं, पैंक्रियाज़ द्वारा पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन न बना पाने के कारण होती है. हां, यदि आप बहुत मीठा खाते हैं, तो उससे वज़न बढ़ने का ख़तरा ज़रूर रहता है और बढ़े वज़न के कारण टाइप 2 डायबिटीज़ का रिस्क हो जाता है, लेकिन मीठा खाने और डायबिटीज़ में सीधेतौर पर कोई कनेक्शन नहीं है. तो मीठा कम खाएं, ताकि वज़न न बढ़े और आप फिट रहें. 

हेल्दी रहने के लिए डेली 8-10 ग्लास पानी पीना ज़रूरी है: हम सबकी बॉडी अलग होती है और उसी के अनुसार हर बॉडी की ज़रूरत भी अलग-अलग होती है. किसी के लिए 6 ग्लास पानी ही पर्याप्त होता है, तो किसी के लिए 8 ग्लास भी कम होता है, लेकिन बहुत अधिक पानी पीने से शरीर के फ्लूइड पतले हो जाते हैं, जो शरीर में सोडियम के स्तर को इस हद तक कम कर सकते हैं, जिससे जान को ख़तरा तक हो सकता है, यह बात लोग जानते ही नहीं. इसलिए कहा जा सकता है कि हेल्दी रहने के लिए जितना हो सके पानी पीना यह सबसे बड़ा मिथ है, लेकिन इस मिथ पर लोग आंख बंद करके विश्‍वास करते हैं.

बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने के लिए नियमित रूप से फास्टिंग यानी उपवास ज़रूरी है: यह धारणा ग़लत है, क्योंकि शरीर की ख़ुद को क्लीन करने की अपनी नेचुरल प्रक्रिया होती है. शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए लिवर, किडनी और स्प्लीन नियमित रूप से काम करते हैं. ऐसा कोई तथ्य नहीं पाया गया अब तक कि न खाने से या स़िर्फ पानी या जूस पर ही कुछ दिन तक रहने से इन अंगों का काम बेहतर होता है. बस, हेल्दी खाएं और अनहेल्दी से बचें, तो भी शरीर में टॉक्सिन्स नहीं होंगे. 

फैट्स का मतलब यानी अनहेल्दी चीज़ और मोटापा: सभी फैट्स ख़राब या अनहेल्दी नहीं होते. दो तरह के फैट्स होते हैं, गुड फैट्स और बैड फैट्स. गुड फैट्स शरीर के लिए बेहद आवश्यक होते हैं और शरीर को फिट रखते हैं. 

फैटी फूड से मोटापा बढ़ता है: जैसाकि अभी बताया गया है कि फैट्स शरीर के लिए बेहद ज़रूरी होता है और जहां तक मोटापे की बात है, तो स़िर्फ फैटी फूड खाने से मोटापा नहीं बढ़ता, बल्कि बॉडी में एनर्जी के असंतुलित होने से मोटापा बढ़ता है. जब आप अधिक कैलोरीज़ लेते हो और ख़र्च उससे कम करते हो, तब मोटापा बढ़ता है, इसलिए पतले होने के लिए फैट्स को पूरी तरह से अपने डायट से हटा देना बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है. फैट्स दरअसल कैलोरीज़ का ही एकत्रित स्रोत होता है, तो कोशिश करें कैलोरीज़ ज़रूरत के मुताबिक लें और उन्हें ख़र्च भी करें. 

ख़ास शैंपू के इस्तेमाल से दोमुंहे बालों से छुटकारा मिल सकता है: कोई भी शैंपू यह चमत्कार नहीं कर सकता. स़िर्फ हेल्दी डायट, जैसे- बादाम, फिश, नट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि से ही बालों को हेल्दी रखा जा सकता है. लेकिन यदि फिर भी दोमुंहे बालों की समस्या हो जाती है, तो नियमित रूप से बालों को ट्रिम करवाना ही एकमात्र रास्ता है.

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एंटीपर्सपरेंट और डियोडरेंट से ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा होता है: ये बातें अक्सर सुनी जाती हैं कि  अगर आप अंडरआर्म्स में डियोडरेंट लगाते हैं, तो बॉडी उसे सोख लेती है और ब्रेस्ट टिश्यू उसे सोख लेते हैं, जिससे कैंसर सेल्स पैदा होते हैं. लेकिन साइंटिस्ट्स को इस तरह की बातों या कनेक्शन के कोई प्रमाण नहीं मिले. 

आपको रोज़ाना मल्टिविटामिन्स की ज़रूरत होती है: अक्सर लोग सोचते हैं कि जो पोषण उन्हें भोजन से नहीं मिल पाता उसे वो मल्टीविटामिन लेकर पूरा कर सकते हैं, जबकि शोधकर्ता ऐसा नहीं मानते. हां, अगर आपके डॉक्टर ने कहा है, तो ज़रूर उनकी सलाह मानें. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए जो भी सलाह डॉक्टर्स देते हैं, उन्हें मानना ज़रूरी है, लेकिन एक सामान्य इंसान को अपने डायट को हेल्दी बनाने की कोशिश करनी चाहिए. रोज़ फल और सब्ज़ियां लें, नट्स, ग्रेन्स और ज़रूरी आयल्स अपने खाने में शामिल करें.

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ज़्यादा शुगर खाने से बच्चे हाइपरएक्टिव होते हैं: यह धारणा बिल्कुल ग़लत है, क्योंकि शोधों ने इस थ्योरी पूरी तरह से ग़लत साबित कर दिया है. अब अगली बार अपने बच्चे को चॉकलेट खाने से मत रोकिएगा. हां, अधिक मीठा खाने से वज़न ज़रूर बढ़ सकता है और दांतों की भी समस्या हो सकती है, लेकिन इससे बच्चा हारइपरएक्टिव नहीं होगा. 

सर्द मौसम, ठंडी हवाएं और बालों को अधिक देर तक गीला रखने से सर्दी-ज़ुकाम होता है: ठंडे मौसम का सर्दी या फ्लू से कोई संबंध नहीं है. अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि बाहर ठंडी हवा चल रही है, गर्म कपड़े पहन लो वरना कोल्ड हो जाएगा. जबकि सर्दी होने की वजह एलर्जी और वायरल इंफेक्शन्स होते हैं. इसी तरह से अगर आपके बाल गीले हैं, तो उससे भी कोल्ड नहीं होगा. हां, अगर आपको पहले से सर्दी हुई है और ठंड के मौसम में आप बालों को गीला रखते हैं, तो आपकी सर्दी बढ़ ज़रूर सकती है, लेकिन उसकी वजह से सर्दी या फ्लू नहीं होगा.

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खाना स्किप करने से वज़न कम होता है: खाना बंद करने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं. इसके अलावा, आपका मेटाबॉलिक सिस्टम भी धीमा पड़ जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं, लेकिन लोगों की यह धारणा रहती है कि एक व़क्त खाना बंद कर देंगे, तो वज़न कम हो जाएगा, पर खाना बंद करने से वज़न और बढ़ने की आशंका होती है, क्योंकि हो सकता है आप अगली मील में अधिक खाएं.

वज़न कम करना है, तो ब्रेकफास्ट करें: शोधों में ऐसा कहीं नहीं पाया गया. हां, नाश्ता करने से आप ऊर्जा का अनुभव करते हैं और पेट भी भरा हुआ महसूस होता है, जिससे हो सकता है कुछ लोगों को वज़न कंट्रोल करने में मदद मिले, लेकिन यदि आपको नाश्ते की आदत नहीं, तो ज़बर्दस्ती न करें, क्योंकि जो नाश्ता नहीं करते उन्हें अगली मील में न तो ज़्यादा खाते हुए पाया गया है और यही नहीं, वो नाश्ता करनेवालों के मुकाबले दिनभर में कम कैलोरीज़ लेते हैं. 

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एग योक यानी अंडे का पीला भाग खाने से हार्ट को नुक़सान होता है: अंडे के पीले भाग में काफ़ी अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है, लेकिन यह हेल्दी होता है और शरीर को कोलेस्ट्रोल की भी ज़रूरत होती है. इसलिए अंडे को अनहेल्दी नहीं कहा जा सकता. एक स्वस्थ इंसान रोज़ाना एक अंडा खा सकता है. हार्ट के लिए सबसे बड़े दुश्मन हैं- सैचुरेटेड और ट्रांस फैट्स. अंडे में कोई ट्रांस फैट्स नहीं होता और सैचुरेटेड फैट्स भी बेहद कम होता है. हां, यदि आपको हार्ट डिसीज़ है, तो थोड़ी सतर्कता ज़रूर बरतें. हम में से अधिकतर लोग अंडे या अन्य खाद्य पदार्थों से जो कोलेस्ट्रॉल का सेवन करते हैं, वो ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में उतनी बड़ी भूमिका नहीं निभाता, क्योंकि हमारा शरीर ख़ुद ही कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य कर लेता है. 

माइक्रोवेव में पका खाना ख़तरनाक और अनहेल्दी होता है: अक्सर लोग यह मानते हैं, लेकिन खाना पकने की प्रक्रिया दरसअल खाने में जो हीट पैदा होती है उससे ही पूरी होती है, इसलिए माइक्रोवेव कुकिंग किसी भी दूसरी कुकिंग से अलग नहीं होती और पूरी तरह सेफ भी होती है. माइक्रोवेव्स में जिन रेज़ वेव्स का प्रयोग होता है, वो बहुत ही माइल्ड और हल्की होती हैं, जिनसे कोई नुकसान नहीं होता.

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कार्बोहाइड्रेड्स से वज़न बढ़ता है: अगर आप शक्कर, व्हाइट ब्रेड या पास्ता अधिक खाते हैं, तो आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन गुड कार्बोहाड्रेड्स शरीर के पोषण के लिए बेहद ज़रूरी हैं, जैसे- साबूत अनाज, बीन्स, फल-सब्ज़ियां. ये आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का बड़ा स्रोत हैं और यदि आप गुड कार्बोहाड्रेड्स कम कर देंगे तो ऊर्जा का स्रोत कम हो जाएगा. बेहतर होगा कि चाहे लो फैट डायट हो या लो कार्ब, आप गुड फैट्स और गुड कार्ब को डायट में ज़रूर शामिल करें. बैड फैट्स और बैड कार्ब से दूर रहें. वैसे भी आप लंबे समय तक लो कार्ब डायट पर रह भी नहीं सकते, क्योंकि इससे शरीर को ज़रूरी पोषण और फाइबर नहीं मिल पाएगा.

रात को ली जानेवाली कैलोरीज़ से मोटापा तेज़ी से बढ़ता है: फर्क़ स़िर्फ इससे पड़ता है कि आप कुल मिलाकर रोज़ कितनी कैलोरीज़ ले रहे हो और उसके मुकाबले कितनी ख़र्च कर रहे हो, क्योंकि कैलोरीज़ तो कैलोरीज़ ही होती हैं, उन्हें यह नहीं पता होता कि उन्हें रात में लिया जा रहा है या दिन में. 

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टॉयलेट सीट आपको बीमार कर सकती है: यदि टॉयलेट सीट साफ़ रहती है, तो परेशन न हों और यदि आप उसको कवर नहीं कर सकते तो भी समस्या नहीं, क्योंकि उनके मुकाबले बाथरूम के दरवाज़े, उन दरवाज़ों के हैंडल्स और फर्श आपको ज़रूर बीमार कर सकता है, क्योंकि ई कोली, फ्लू व पेट का फ्लू देनेवाले वायरस व बैक्टीरियाज़ वहीं पनपते हैं. बेहतर होगा दरवाज़ों और हैंडल्स को छूने से पहले अपने हाथों को टिश्यू से कवर करें और बाद में भी हैंड सैनिटाइज़र ज़रूर यूज़ करें. 

हड्डियां कटकने की आवाज़ से आर्थराइटिस होता है: जी नहीं, ऐसा कहीं नहीं पाया गया. अक्सर लोग सोचते हैं कि जब दो हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं, तब यह आवाज़ आती है, लेकिन सच तो यह है कि यह आवाज़ हड्डियों के बीच गैस बबल्स बनने से होती है. अगर आपको हड्डियां कटकाना पसंद है, तो ज़रूर ऐसा करें. शोध में नहीं नहीं पाया गया कि ये आर्थराइटिस का कारण बनते हैं. हां, अगर आपको हड्डियों में, जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है, तो ज़रूर डॉक्टर के पास जाएं. लेकिन मन में ग़लतफहमी न पालें.

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तो अब तो आप जान ही गए होंगे कि कितनी और किस तरह की ग़लतफ़हमियाँ हमने हेल्थ को लेकर मन में पाल रखी हैं, बेहतर है इन्हें दूर करें और हेल्दी रहें!

– भोलू शर्मा

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बहुत ज़्यादा हेल्थ कॉन्शियस बनने के चक्कर में कई बार हम ग़लतफहमियों के भी शिकार हो जाते हैं. खानपान से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथकों की सच्चाई (Diet Myths Busted) जानने के लिए हमने बात की न्यूट्रीशनिस्ट व डायट प्लानर निमिता शास्त्री से.

मिथक- दाल और पनीर साथ खाने से मोटापा बढ़ता है.
सच्चाई– दाल और पनीर प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं, जो मांसपेशियों को मज़बूत बनाने और वज़न घटाने में सहायक हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक बैलेंस वेट लॉस प्लान के लिए 25 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन स्रोतों से मिलनी ज़रूरी है, जिसके लिए दाल और पनीर का कॉम्बिनेशन बेस्ट है.
मिथक- अंगूर, नींबू और संतरा खाने से सर्जरी के घाव जल्दी नहीं भरते.
सच्चाई- यह सोच ग़लत है. वास्तविकता यह है कि खट्टे फलों में मौजदू विटामिन सी स्टिचेस (टांके) सूखने में मदद करता है. जबकि सोडा, कोला और कार्बोनेटेड ड्रिंक में पाया जाने वाला कार्बोनिक एसिड स्टिचेस को कमज़ोर कर देता है, जिससे ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है.
नोटः सर्जरी, ख़ासकर ईएनटी सर्जरी के तुरंत बाद खट्टे फल न खाएं. (Diet Myths Busted)
मिथक- रात में नारियल पानी पीने से एसिडिटी हो जाती है.
सच्चाई- ऐसा नहीं है. नारियल पानी शरीर को ठंडा रखता है. साथ ही एसिडिटी और हार्टबर्न (सीने में जलन) होने पर भी नारियल पानी पीने की सलाह दी जाती है. ये पेट के पीएच बैलेंस को बनाए रखता है. नारियल डीहाइड्रेशन से बचाने के साथ ही पाचन में भी मदद करता है.
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मिथक– चॉकलेट से एक्ने की समस्या हो जाती है. (Diet Myths Busted)
सच्चाई- किसी भी चीज़ की अति नुक़सानदायक होती है. इसी तरह यदि आप बहुत ज़्यादा चॉकलेट खाती हैं तो निश्‍चय ही एक्ने की समस्या हो सकती है लेकिन थोड़ी मात्रा में चॉकलेट खाने से कोई नुक़सान नहीं होता.
मिथक– पपीता खाने से मिसकैरेज हो जाता है.
सच्चाई– प्रेग्नेंट महिलाओं को अक्सर पपीता न खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे मिसकैरेज हो सकता है. कच्चे पपीता में लैटेक्स मौजूद होते हैं, जिससे गर्भाशय में संकुचन हो सकता है. लेकिन पका हुआ पपीता विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है जो हार्टबर्न और कॉन्सटिपेशन (कब्ज़) रोकने में सहायक है.
नोटः यदि आप प्रेग्नेंट हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही पपीता को अपनी डायट में शामिल करें.

Diet Myths Busted
मिथक- बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता और किशमिश मोटापा बढ़ाते हैं.
सच्चाई- सूखे मेवों में अच्छी क्वॉलिटी का फैट होता है जो आपकी सेहत के लिए ज़रूरी है, लेकिन इनका ज़रूरत से ज़्यादा सेवन वज़न बढ़ा सकता है, क्योंकि सूखे मेवों में प्रति ग्राम शुगर, कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज़्यादा होती है. अतः फिट और हेल्दी रहने के लिए थोड़ी मात्रा में ड्राय फ्रूट्स को अपनी डायट में शामिल करें.
मिथक- कार्बोहाइड्रेट बुरा होता है.
सच्चाई- शरीर की एनर्जी की ज़रूरत पूरी करने के लिए ग्लुकोज़ की आवश्यकता होती है, और ग्लुकोज़ कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट जैसे ब्राउन राइस, नाचनी, ज्वार और बाजरा आदि से मिलता है. अन्य चीज़ों के साथ कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की संतुलित मात्रा आपके एनर्जी लेवल को बनाए रखती है, लेकिन वज़न कम करने के लिए हाईली रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, जैसे- व्हाइट ब्रेड, शुगर, मैदा, व्हाइट राइस आदि से परहेज़ करें.
मिथक– दिल के लिए अच्छा होता है टोमैटो केचअप.
सच्चाई– टमाटर में मौजूद लाइकोपेन हार्ट डिसीज़ के ख़तरे को कम करने में सहायक है, लेकिन स़िर्फ घर पर बने केचअप ही दिल के लिए अच्छे होते हैं. बाज़ार में मिलने वाले टोमैटो केचअप में सोडियम और शुगर की मात्रा ज़्यादा होती है, जिससे आपके दिल को नुक़सान पहुंच सकता है.
मिथक- फैट फ्री फूड में ज़ीरो कैलोरी होती है. (Diet Myths Busted)
सच्चाई– बाज़ार में मिलने वाले पैक्ड फूड पर भले ही फैट फ्री का लेबल लगा हो लेकिन इसमें ज़ीरो कैलोरी नहीं होती. इसमें कम से कम 3 ग्राम फैट होता है. फैट फ्री का लेवल स़िर्फ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए लगाया जाता है. दरअसल, फैट फ्री/ज़ीरो कैलोरी का लेबल लगे खाद्य पदार्थों को प्रिज़र्व करने के लिए ट्रंास फैट का इस्तेमाल किया जाता है जो सेहत के लिए हानिकारक है.
मिथक- खाने के तुरंत बाद फल खाना अच्छा होता है.
सच्चाई- जानकारों का मानना है कि खाने के तुरंत बाद फल खाने से डाइजेशन, गैस और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि हेवी खाना खाने के कम से कम 1 घंटे बाद फल खाएं.
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आजकल लोग अपने शरीर को लेकर इतने सजग हो गए हैं कि स्लिम-ट्रिम दिखने के लिए वे किसी तरह के भी उपाय करने से नहीं हिचकिचाते. लोगों की सुनी-सुनी-सुनाई बातें, अख़बार, मैग्ज़ीन… जहां से, जो भी सलाह मिल जाए, बिना आगे-पीछे सोचे उसका पालन करने लगते हैं. लेकिन क्या सचमुच उससे कोई फ़ायदा मिलता है. शायद नहीं. हम डायट से जुड़े कुछ ऐसे ही वहमों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि आप बेकार के चक्करों में पड़कर अपने शरीर को टॉर्चर करना बंद कर दें.

Not-Losing-Weight

मिथकः कार्बोहाइड्रेट मोटापा बढ़ाता है
सच्चाईः कार्बोहाइड्रेट्स युक्त खाद्य पदार्थों में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो हमारे शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है, ताकि हम दिनभर चुस्ती-फुर्ती से काम कर सकें. खाने में कार्ब्स को पूरी तरह नदारद करने से हमारे शरीर का एनर्जी लेवल एकदम कम हो जाएगा व पाचन संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाएंगी. इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी डायट में गुड कार्ब्स, जैसे- होल वीट पास्ता, ओट्स, ब्राउन ब्रेड, ब्राउन राइस, बीन्स, एप्पल इत्यादि शामिल करें.

Myths-Debunked

मिथकः नाश्ता राजा की तरह करो और डिनर भिखारी के जैसा
सच्चाईः इसमें कोई शक़ नहीं है कि पेटभर नाश्ता करना बेहद ज़रूरी होता है, लेकिन हैवी नाश्ता करने के चक्कर में अक्सर हम ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ ग्रहण कर लेते हैं. सुबह ख़ूब सारा नाश्ता करने का मतलब यह नहीं है कि आपको दिनभर भूख नहीं लगेगी. इसलिए ज़रूरी है कि अपनी लाइफ़स्टाइल व काम करने के तरी़के के आधार पर दिनभर का खानपान प्लान करें.

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मिथकः दिनभर थोड़ा-थोड़ा खाते रहना चाहिए
सच्चाईः ऐसा कहा जाता है कि दिनभर थोड़ा-थोड़ा खाते रहने से मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है, फलस्वरुप वज़न कम होता है. कम मात्रा में खाना सही है, लेकिन इसका वज़न कम होने का कोई सीधा संबंध नहीं है. यह सच है कि थोड़ा-थोड़ा खाते रहने से हंगर पैग्स को कंट्रोल करने में मदद मिलती है, लेकिन इसका मेटाबॉलिज़्म से कोई लेना-देना नहीं है. 2001 में इंटरनैशनल जरनल ऑफ ओबिसिटी में छपे अध्ययन के अनुसार, आप तय कैलोरीज़ तीन बार में लें या छह बार में, इससे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता. वज़न कम करने के लिए आप दिनभर कितना कैलोरीज़ ग्रहण करती हैं, उस पर ध्यान देना ज़्यादा ज़रूरी है.

मिथकः हर तरह के फैट से दूर रहना चाहिए
सच्चाईः बाज़ार में मिलने वाले फैट फ्री कोल्ड ड्रिंक्स व जूस पर आंख मूंदकर विश्‍वास न करें. ये आपके शरीर पर धीरे-धीरे ही सही, लेकिन चर्बी की पर्त चढ़ाते जाते हैं. इसी तरह लो कार्ब या लो फैट डायट भी वज़न कम करने में कुछ ख़ास मदद नहीं करते. इसलिए फैट से बिल्कुल दूर रहने से बेहतर है कि आप अपने खाने में हेल्दी व एसेंशियल फैटी एसिड्स, जैसे-नट्स, मछली, फल इत्यादि शामिल करें.

मिथकः यदि आप जिम जाती हैं तो कुछ भी खा सकती हैं
सच्चाईः अगर आप ट्रेडमील पर एक घंटा भगाने के बाद आइसक्रीम और चीज़ पिज़्ज़ा पर टूट पड़ेंगी तो आपने दौ़़ड़कर जितनी कैलोरीज़ बर्न की है, उससे कहीं ज़्यादा आप दोबारा ग्रहण कर लेंगी. सच्चाई यह है कि अगर खानपान पर नियंत्रण न हो तो एक्सरसाइज़ करने से कोई फायदा नहीं मिलता. अतः एक्सरसाइज़ के साथ-साथ अपने खाने पीने पर ध्यान दें और संतुलित आहार ग्रहण करें.

Why-I-am-not-Losing-Weight

मिथकः रात में देर से खाने से वज़न बढ़ता है
सच्चाईः बहुत-से डायट प्लान्स ऐसे हैं जो शाम को सात बजे के बाद किचन का दरवाज़ा बंद करने की सलाद देते हैं. लेकिन रात में देर से खानेवालों को यह जानकर संतुष्टि मिलेगी कि कैलोरी आपके खाने का समय नहीं देखती. सच्चाई यह है कि चूंकि हम रात के समय किसी तरह का शारीरिक श्रम नहीं करते इसलिए कैलोरीज़ को बर्न होने में समय लगता है. इसलिए कुछ भी न खाने से बेहतर होगा कि आप रात में हाई कैलोरी फूड लेने से बचें.

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