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इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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डायट सीक्रेट: बारिश के मौसम में क्या खाएं, क्या नहीं? (Diet Secret: Foods To Avoid This Monsoon)

Diet Secret

डायट सीक्रेट: बारिश के मौसम में क्या खाएं, क्या नहीं? (Diet Secret: Foods To Avoid This Monsoon)

मॉनसून में इंफेक्शन से जुड़ी बीमारी होने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है. इनसे बचने के लिए खान-पान में सावधानी बरतना ज़रूरी है. फोर्टिस हॉस्पिटल, कल्याण की डायटीशियन नियति लिखिते बता रही हैं कि बारिश में क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए?

 

खाएं

–    शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर फल, जैसे-सेब, नाशपाती और अनार इत्यादि का सेवन करें. ये हमारे शरीर में मौजूद फ्री-रेडिकल्स व टॉक्सिन्स से लड़ते हैं और हमें स्वस्थ रखते हैं.

–  इंफेक्शन से बचने के लिए स्टीम्ड सलाद ही खाएं. कच्चा सलाद हानिकारक हो सकता है. सूप और सब्ज़ी में अदरक व लहसुन का इस्तेमाल करें.

–    टमाटर, पालक, गोभी जैसी हरी सब्ज़ियों को इस्तेमाल करने से पहले उन्हें हल्के गर्म पानी से साफ़ कर लें, क्योंकि बारिश के मौसम में सब्ज़ियों को अच्छी तरह साफ़ किए बिना ही इस्तेमाल करने से इंफेक्शन होने का ख़तरा रहता है.

–    हल्दी वाला दूध पीएं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन इंफेक्शन के ख़तरे को कम करता है. गला ख़राब होने या कफ होने पर तुलसी, अदरक, हल्दी मिली हुई चाय या दूध पीने से काफ़ी आराम मिलता है. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए रोज़ाना एक टीस्पून त्रिफला पाउडर ग्रहण करें.

–    भुना हुआ भुट्टा भी सेहत के लिए अच्छा होता है. साथ ही इस सीज़न में घर का बना हुआ हल्का खाना ही खाएं.

–    बारिश के मौसम में उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीएं. शरीर में पानी की कमी न होने दें. चूंकि बारिश में मौसम हल्का ठंडा होता है इसलिए हमें कम प्यास लगती है, लेकिन शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज़रूरी होता है.

–    इंफेक्शन से बचने के लिए नाश्ते में गर्मागर्म दलिया, ओट्स, दूध इत्यादि का सेवन करें.

–   पेट के सुचारु  संचालन के लिए प्रोबायोटिक्स जैसे दही या याकुर्ट का सेवन कर सकते हैं.

 न खाएं

–    मछली और सी फूड खाने से बचें, क्योंकि इस मौसम में बासी मछली खाने से गंभीर इंफेक्शन हो सकता है. चिकन और मटन का सेवन करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए. नॉनवेज बनाकर तुरंत खाएं. फ्रिज में रखा हुआ बासी नॉनवेज नुक़सान पहुंचा सकता है. कच्चा और अधपका अंडा खाने से भी बचें.

–    भिंडी, फूलगोभी और ग्वार खाने से परहेज़ करें.

–   अदरक, इलायची, काली मिर्च व दालचीनी युक्त हर्बल टी पीएं.

–   बाज़ार से कटी हुई सब्ज़ियां ख़रीदने और अंकुरित आलू का सेवन करने से बचें.

–    ज़्यादा पानी युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे तरबूज और खरबूज का सेवन करने से भी बचें. ऐसी चीज़ें खाने पर आप सुस्त महसूस कर सकते हैं.

–    मसालेदार, तली-भुनी और रोड पर बिकनेवाली चीज़ें न खाएं. इससे आपको एसिडिटी, पेट का इंफेक्शन व मुंहासे इत्यादि की समस्या हो सकती है.

–    बारिश के मौसम में अत्यधिक नमक व रेडी टु ईट चीज़ें खाना नुक़सानदेह हो सकता है. इससे वॉटर रिटेंशन और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

–  अत्यधिक कॉफी का सेवन भी नुक़सान पहुंचा सकता है. यह शरीर को डिहाइड्रेट करता है. अल्कोहॉलिक पेय पदार्थ शरीर को डिहाइड्रेट करने के साथ एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा को भी घटाते हैं. हालांकि रेड वाइन एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है इसलिए कभी-कभार इसका सेवन किया जा सकता है.

–    लोकल या सड़क पर मिलनेवाली आइसक्रीम व अन्य ठंडी चीज़ें न खाएं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल किया हुआ पानी या दूध ख़राब हो सकता है.

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कामकाजी महिलाओं के लिए हेल्दी स्नैकिंग आइडियाज़ (Healthy Snacking Ideas For Working Women)

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वर्किंग वीमेन (Working Women) के लिए ज़रूरी है वर्क लाइफ (worklife) और पर्सनल लाइफ (personallife) में बैलेंस बनाते हुए भी अपने हेल्थ को इग्नोर न करना, ऐसी में ये हेल्दी स्नैकिंग (Healthy Snacking) टिप्स (Tips) उनकी मदद करेंगे


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अब वो व़क्त तो रहा नहीं, जब महिलाएं केवल किचन और घर की शोभा बढ़ाती थीं. समय बदलने के साथ-साथ महिलाओं की भूमिका में भी बहुत परिवर्तन आ गया है. फैमिली लाइफ के अलावा आज उसकी सोशल और प्रोफेशनल लाइफ भी है. यही वजह है कि उसके लिए चुनौतियां बढ़ी हैं. घर-परिवार, जॉब और बच्चों की देखभाल… इन सबके बीच उसकी अपनी सेहत काफ़ी प्रभावित होती है. लेकिन अगर वो हेल्दी डायट ले और अपनी हेल्थ को इग्नोर न करे, तो इन सारी चुनौतियों का सामना वो बेहतर तरी़के से कर पाएगी.
लें सही डायट
– काम के बीच अपने लिए कुछ भी ख़ास बनाकर खाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अगर आप स्मार्टली स्नैकिंग करें, तो यह आसान हो जाएगा.
– ऑयली और जंक फूड की जगह हेल्दी फूड लें.
– आपके दोपहर के भोजन में कम से कम एक हरी सब्ज़ी, एक हिस्सा ताज़ा सलाद का और एक हिस्सा कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट, जैसे- छाछ, पनीर या दही, का होना चाहिए.
– महिलाओं को वैसे भी कैल्शियम की अधिक ज़रूरत होती है, तो ऐसे में अपनी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ न करें.
– पानी भरपूर पीएं. अपने डेस्क पर पानी की बोतल भरकर रखें, ताकि हमेशा हाइड्रेटेड रहें.
– काम के तनाव के बीच, देर तक काम करने और डेड लाइन्स पूरी करने के चक्कर में खानपान अनियमित और अनहेल्दी हो जाता है. लेकिन ऐसा जंक फूड न लें, जिनमें न एनर्जी है, न पोषण. बेहतर होगा कि जब भूख लगे, तो फ्रेश फ्रूट या फिर नट्स खाएं.
– एक्सरसाइज़ के लिए समय नहीं मिल पाता, तो बैठे-बैठे कुछ देेर के लिए मेडिटेशन करें. इससे तनाव कम होकर ऊर्जा मिलेगी.
– दिल्ली बेस्ड न्यूट्रिशनिस्ट रितिका समादार के अनुसार, “वर्किंग वुमन को सेहत संबंधी समस्याएं होने की अधिक आशंका रहती है, क्योंकि समय के अभाव के चलते उनकी खाने में हेल्दी फूड और पोषण की कमी रहती है. वो जब भी समय मिलता है, कुछ भी अनहेल्दी खा लेती हैं, जिससे स़िर्फ फैट्स और कैलोरीज़ ही बढ़ती हैं. इससे बचने के लिए स्मार्ट स्नैकिंग की ज़रूरत है.
– रोज़ सुबह रातभर पानी में भिगोए हुए बादाम खाएं, इससे दिनभर एनर्जी बनी रहेगी, क्योंकि यह विटामिन ई, फाइबर, प्रोटीन, राइबोफ्लेविन और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है.
– स्नैकिंग के लिए ऐसी हेल्दी चीज़ें सिलेक्ट करें, जिन्हें कैरी करना भी आसान हो.”

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कैसे करें स्मार्ट स्नैकिंग?
– सलाद काटने का समय नहीं हो, तो गाजर, ककड़ी, टमाटर, सेब आदि को आप यूं ही बैग में रख लें और लंच के समय काटकर खाएं.
– जब कभी भूख लगे, तो ऑयली खाने की बजाय एक सेब या कोई अन्य फ्रूट खाएं.
– कभी-कभी भूख दिमाग़ में भी होती है, इसलिए जब भी भूख महसूस हो, तो पहले पानी पीएं. हो सकता है इसी से आपकी भूख शांत हो जाए.
– कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ताज़ा फलों का जूस पीएं.
– ग्रीन टी भी अच्छा ऑप्शन है. यह काफ़ी हेल्दी होती है.
– बहुत अधिक मीठा न खाएं. इससे फैट्स बढ़ेगा.
– अपने खाने में या फिर एक बाउल दही में कुछ क्रश्ड बादाम मिलाकर खाएं. यह बहुत ही हेल्दी ऑप्शन है और इससे पेट भी भरा रहेगा.
– हर 4 घंटे में भूख लगती ही है, ऐसे में अपने डेस्क या ड्रॉअर में ऐसे हेल्दी स्नैक्स रखें, जिनमें 200 से कम कैलोरीज़ हों.
– मल्टीग्रेन बिस्किट्स या क्रैकर्स, पीनट बटर, नट्स, चना, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि रखें.
– बेहतर होगा कि बादाम का पैकेट लाकर ड्रॉअर में रखें, जब कभी भूख लगे, तो इसे अलग-अलग तरह से खाने में मिलाकर खाएं.
– आप रोस्टेड आल्मंड भी खा सकती हैं. चिप्स और समोसे से यह ऑप्शन बेहतर है.
– फैट फ्री, माइक्रोवेव में भुने पॉपकॉर्न भी एक विकल्प है, क्योंकि यह अधिक समय तक पेट भरे होने का एहसास कराते हैं.
– ऑलिव्स भी बहुत हेल्दी होते हैं और गुणों से भरपूर भी.
– व्हाइट ब्रेड की बजाय ब्राउन ब्रेड लें. पीनट बटर के साथ या अन्य हेल्दी चीज़ों के साथ उसकी सैंडविच बनाकर खाएं.

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

क्या आप मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर डायटिंग के नाम पर अपने शरीर को टार्चर कर रहे हैं, फिर भी आपका मोटापा कम नहीं हो रहा है, तो एक नज़र अपनी लाइफस्टाइल संबंधी आदतों पर डालिए. जी हां, आपके मोटापे का एक अन्य और महत्वपूर्ण कारण है रात की   ग़लत आदतें, जो आपके मोटापे को कम नहीं होने देती हैं. आइए जानें, कैसे?

1 क्या आप हैवी डिनर करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि आपकी इस आदत से आपका मोटापा बढ़ सकता है? आपकी यह आदत आपको अपने फिटनेस गोल से भटका सकती है? अगर फिट रहना चाहते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डालिए. सुबह के समय हम अधिक एक्टिव रहते हैं. शाम होने पर थकावट के कारण शरीर का एनर्जी लेवल कम होने लगता है, जिसके कारण शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है. पर हैवी डिनर करने से पाचन तंत्र पर अनावश्यक लोड बढ़ने लगता है, जिसके कारण अतिरिक्त कैलोरी अतिरिक्त फैट में बदलने लगती है और धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है.

2 क्या आप टीवी देखते हुए खाना खाते हैं?

अधिकतर लोगों को टीवी के सामने बैठकर भोजन करना अच्छा लगता है. यह जानते हुए कि उनकी इस आदत से न स़िर्फ ओवरईटिंग होती है, बल्कि मोटापा भी बढ़ता है. अमेरिकन जनरल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन (2013) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खाने के प्रति जागरूक न होने पर आप ज़रूरत से ज़्यादा खा सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा. अगर अपना ध्यान खाने पर केन्द्रित करके खाते हैं, तो आप निश्‍चित तौर पर कम खाएंगे. यदि टीवी देखते हुए खाते हैं, तो आप खाने के स्वाद को दिमाग़ी तौर पर महसूस नहीं कर पाएंगे और ओवरइंटिंग कर लेंगे.

3 रात के समय आप क्या खाते हैं?

मोटापा इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप कितना (कम/ज़्यादा) खाते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि रात के समय आप किस तरह का खाना खाते हैं यानी आपकी फूड चॉइस पर निर्भर करता है. अगर आप रात को क्रीम बेस्ड सूप और ग्रेवी, फ्राइड फूड, डेज़र्ट आदि खाते हैं, तो पचने में थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए रात के समय हाई कैलोरी फूड का सेवन नहीं करना चाहिए.

4 क्या आप डिनर के बाद ब्रश नहीं करते हैं?

डिनर के बाद ब्रश करना बहुत बोरिंग काम है. अपनी इस आदत से आप ख़ुद को न केवल अतिरिक्त स्नैक्स खाने से रोक सकते हैं, बल्कि मोटापा भी कंट्रोल कर सकते हैं. डायटीशियन्स के अनुसार, डिनर के बाद ब्रश करने की आदत से आप पोस्ट डिनर स्नैकिंग से बच सकते हैं. बहुत से लोग डिनर के बाद डेज़र्ट और कैलोरीवाले फूड खाते हैं, चाहे उन्हें भूख न हो तो भी. ब्रश करने के बाद वे ख़ुद को ऐसी चीज़ें खाने से रोक सकते हैं, क्योंकि ब्रशिंग जैसा बोरिंग काम दोबारा नहीं करना चाहते. परिणामस्वरूप मोटापा नहीं बढ़ेगा.

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5 खाने के बाद क्या आप वॉक पर नहीं जाते हैं?

अगर नहीं जाते हैं, तो जाना शुरू करें. एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप रात को खाने के बाद वॉक करते हैं या फिर 5 मिनट तक वज्रासन में बैठते हैं, तो निश्‍चित रूप से आपका वज़न नियंत्रित रहेगा. यदि आप अपनी पाचन प्रक्रिया और मेटाबॉलिज़्म में सुधार करना चाहते हैं, तो डिनर के बाद वॉक ज़रूर करें. इससे आपका मोटापा नियंत्रित रहेगा और आपका मूड भी फ्रेश होगा.

6 क्या आप रात को मोबाइल या लैपटॉप पर व्यस्त रहते हैं?

अधिकतर लोगों में यह आदत होती है सोने से पहले मोबाइल-लैपटॉप पर अपने ईमेल चेक करना, अगले दिन की टु डू लिस्ट बनाना, अगले प्रोजेक्ट या असाइनमेंट का ड्राफ्ट तैयार करना आदि, जिसकी वजह से अनावश्यक रूप से तनाव बढ़ता है. अधिक तनाव होने से कार्टिसोल नामक हार्मोन का उत्पादन होता है. इस हार्मोन में ऐसे गुण होते हैं कि तनाव की तीव्रता स्वत: ही बढ़ जाती है, जिसके कारण फैट के स्तर में वृद्धि होने लगती है. इसके अलावा कार्टिसोल मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिसके कारण खाना सही तरह से नहीं पचता है और मोटापा बढ़ने लगता है.

7 क्या आप रात को देर से सोते हैं?

देर रात तक जागने से मंचिंग करने के चांस काफ़ी बढ़ जाते हैं. मंचिंग के दौरान भूख बढ़ानेवाले हार्मोंस (घ्रेलीन- जिसे हंगर हार्मोन भी कहा जाता है) का स्तर बढ़ जाता है और वो स्ट्रेस बढ़ानेवाले हार्मोंस (लेप्टिन) के स्तर को कम करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते वर्कलोड के कारण अधिकतर लोग रात को देर से खाना खाते हैं, जिससे उनके शरीर का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने लगता है और धीरे-धीरे मोटापा हावी होने लगता है.

8 क्या आप सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं

रात को सोने से पहले कुछ लोग एंटीडिप्रेशन और सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है. अगर आप अपने मोटापे को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो इन दवाओं को अपनी मर्ज़ी से बंद न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करके इनके डोज में बदलाव करें. ऐसी कोई एक मेडिसिन नियमित रूप से न खाएं, जिसका कोई साइड इफेक्ट हो.

9 क्या आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं?

पर्याप्त नींद न लेना और आवश्यकता से अधिक नींद लेने से मोटापा बढ़ता है. इसका कारण है कि आपका शरीर कैलोरी को बर्न करने में सक्षम नहीं है. अगर आप 7-8 घंटे से कम सोते हैं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा सोते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका मेटाबॉलिज़्म ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है.

हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग केवल 6 घंटे की नींद लेते हैं, उनका वज़न, उन लोगों की तुलना में अधिक होता है, जो 8-10 घंटे की पर्याप्त नींद लेते हैं. जो लोग 6 या 6 से कम घंटे सोते हैं, उनमें मोटापे के लक्षण दिखाई देते हैं. इसके अलावा पूरी नींद न लेने के कारण डायबिटीज़ और इंसोम्निया के होने की संभावना भी बढ़ जाती है.

10 क्या आप कैफीन या अल्कोहल का सेवन करते हैं?

अगर आप रात के व़क्त कैफीन और अल्कोहल का सेवन करते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत सुधार लें. आपकी यह आदत धीरे-धीेरे आपके बढ़ते वज़न की ओर संकेत करती है. कैफीन और अल्कोहल में बहुत अधिक कैलोरी होती है. इनका सेवन करने से नींद में रुकावट आती है. नींद में बाधा आने के कारण मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और शरीर में अतिरिक्त फैट जमने लगता है.

रात को जल्दी खाने के फ़ायदे

  • लंच और डिनर के बीच में बहुत अधिक अंतर होने के कारण भूख अधिक लगती है. इस अंतराल को कम करें. टी टाइम में स्नैक्स खाएं.
  • डिनर के दौरान टीवी न देखें, क्योंकि टीवी देखते हुए ओवरईटिंग की संभावना बढ़ जाती है.
  • कोशिश करें कि डिनर रात 9 बजे से पहले कर लें.
  • अगर यह संभव न हो, तो टी टाइम पर लाइट स्नैक्स लें और डिनर में हल्का भोजन करें.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिनर अवॉइड न करें. कम से कम सूप, सलाद या फ्रूट्स ज़रूर खाएं.
  • डिनर बैलेंस्ड लेकिन लाइट होगा, तो अगले दिन भी आप फ्रेश महसूस करेंगे.
  • डिनर में लो कार्ब और हाई प्रोटीन फूड लें. इन्हें पचने में अधिक समय लगता है.
  • लगातार कई दिनों तक डिनर में फ्राइड फूड और डेज़र्ट न लें. अगर इन्हें खाने की बहुत अधिक क्रेविंग हो, तो सुबह नाश्ते में लें.
  • डिनर के बाद तुरंत सोने की बजाय 5 मिनट वज्रासन में ज़रूर बैठें.
  • रात के समय चाय, कॉफी और चॉकलेट के सेवन से बचें.
  • इसकी बजाय गरम दूध में इलायची पाउडर डालकर पीएं.

– देवांश शर्मा

योग व डायट से बनाएं अपनी सेक्स लाइफ को हॉट, हेल्दी और स्पाइसी (Yoga & Diet For Hot, Healthy & Spicy Sex Life)

Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन में सेक्सुअल रिलेशन एक अहम् भूमिका अदा करती है. पर कभीकभी शारीरिक व मानसिक कारणों से इसमें मुश्किलें आने लगती हैं. तो क्यों न सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए योग व डायट टिप्स को अपनाएंपतिपत्नी के रिश्ते को मज़बूत और ख़ुशनुमा बनाने में सेक्स की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है. लेकिन कई बार अच्छी ख़ुशनुमा सेक्स लाइफ में मुश्किलें आने लगती हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में दरार पड़ जाती है. ऐसा इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) यानी लिंग उत्तेजित न होने के कारण होता है. कई बार सेक्स टॉनिक या वियाग्रा जैसी कामोत्तेजक गोलियां लेकर समस्या को सुलझाने की कोशिश की जाती है, पर इससे स्थिति सुधरने की बजाय और भी बिगड़ जाती है. बेहतर सेक्स लाइफ का रहस्य इन गोलियों में नहीं, बल्कि संतुलित डायट और योग में छुपा है. इस संदर्भ में हमें विस्तृत जानकारी दे रही हैं न्यूट्रीशनिस्ट व योग इंस्ट्रक्टर नुपूर पद्मनाभन.

Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

कारण

1. रक्त संबंधी बीमारी

लिंग में इरेक्शन (उत्तेजना) ख़ून के ज़्यादा बहाव के कारण आता है. यदि किसी कारणवश ख़ून का बहाव कम हो जाता है, तो इरेक्शन की समस्या होती है. ऐसा रक्त कोशिकाओं के डैमेज होने या धमनियों के कठोर होने से होता है.

2. नर्व डैमेज

डायबिटीज़, प्रोस्टेट सर्जरी या स्पाइनल कॉर्ड के क्षतिग्रस्त होने पर भी इरेक्शन की समस्या होती है.

3. दवाइयां

हाई ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन, ह्रदय संबंधी बीमारियों व प्रोस्टेट कैंसर के लिए ली

जानेवाली दवाइयों के प्रयोग से सेक्सुअल क्रियाएं प्रभावित होती हैं.

4. मानसिक कारण

अनेक मानसिक कारणों, जैसेतनाव, डिप्रेशन, व्याकुलता, डर, अपराधबोध से भी सेक्स क्रिया पर असर पड़ता है.

5. हार्मोंस

टेस्टोस्टेरॉन, थायरॉइड एवं पिट्टयूटरी हार्मोंस के असामान्य स्तर से भी सेक्स लाइफ़ प्रभावित होती है.

6. बीमारियां

एनीमिया, डिप्रेशन, आर्थराइटिस, डायबिटीज़, हाइपोथायरॉइड़िज़्म, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसी बीमारियां भी सेक्स को प्रभावित करती हैं.

समाधान

सेक्स लाइफ़ को बेहतर बनाने के लिए योग बहुत ही लाभकारी है.

  • इससे शरीर रिलैक्स होता है और तनाव भी दूर होता है.
  • इससे हृदय गति व ब्लडप्रेशर सामान्य होने में मदद मिलती है.
  • योग से शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ जाती है.

ये सारी बातें इरेक्शन पर असर डालती हैं.

बद्ध कोणासन (बटरफ्लाई)

– दोनों पैरों के तलवों को आपस में जोड़कर, दोनों हाथों से पकड़ लें.

– अब इन्हें बटरफ्लाई की तरह हिलाएं.

इस क्रिया को दस बार दोहराएं.

फ़ायदे

इस आसन से पेट, पीठ और पेल्विक एरिया में ब्लड सप्लाई ठीक तरह से होने लगती है. यह आसन किडनी, प्रोस्टेट और यूरिनरी ब्लैडर को हेल्दी रखता है.

बालासन (चाइल्ड पोज़)

दोनों पैरों को घुटने से मोड़ लें एवं एड़ियां जोड़कर उस पर बैठ जाएं (हलासन की स्थिति में).

सिर सामने झुकाकर ज़मीन पर टिका दें. इससे कमर ऊपर उठ जाएगी.

अब दोनों हाथों को पैरों के समानांतर इस तरह रखें कि हथेलियां ज़मीन पर टिकी रहें. (तलवे नहीं).

2 मिनट तक इसी पोज़ में रहें.

ऐसा 5 से 10 बार करें.

फ़ायदे

इस आसन से तनाव दूर होता है और सेक्सुअल क्रियाओं में काफ़ी लाभ मिलता है.

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Yoga Diet For Hot, Healthy Spicy Sex Life

डायट

इरेक्टाइल डिस़फंक्शन का मुख्य कारण होता हैलिंग की धमनियों के अवरुद्ध होने से रक्त प्रवाह का कम होना. इसलिए इस स्थिति में शाकाहारी डायट की सलाह दी जाती है, ताकि धमनियां अवरुद्ध न होने पाएं.

डायट में ताज़े फल, हरी एवं फली वाली सब्ज़ियां, फिश आदि लें.

मैदा, प्रोसेस्ड व जंक फूड, शक्कर, आर्टिफ़िशियल स्वीटनर, जैसेसैकरीन आदि न लें.

तिल के तेल व ऑलिव ऑयल का प्रयोग बेहतर परिणाम देता है.

सादे नमक की जगह समुद्री नमक या सेंधा नमक का प्रयोग करें.

टमाटर खाएं. टमाटर का लाइक्रोपीन प्रोस्टेट ग्लैंड को हेल्दी रखता है.

कद्दू के बीज, तरबूज आदि पुरुष जननांगों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं.

वज़न अधिक न बढ़ने दें. संतुलित भोजन करें और वज़न को नियंत्रित रखें.

तलेमसालेदार एवं कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ न लें.

चाय, कॉफी, सिगरेट व शराब का अधिक सेवन न करें.

डॉ. सुषमा श्रीराव

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weight Loss Tips Of The Day)

  • 1 ग्लास पानी में 2 टीस्पून ऐप्पल साइडर विनेगर और 1/4 टीस्पून दालचीनी पाउडर मिलाकर घोल लें और दिन में 2 बार पीए.
  • 1 ग्लास पानी में 2 टीस्पून शहद और 2 टीस्पून ऐप्पल साइड विनेगर मिलाकर घोल लें. नियमित रूप से पीने से वज़न कम होता है.
  • इस सिंपल टिप से करें वेट लॉस: 3 टीस्पून नींबू का रस, 1-1 टीस्पून शहद और काली मिर्च पाउडर को 1 ग्लास पानी में मिलाकर रोज़ सुबह खाली पेट पीएं. यह 3 महीने तक करें.
  • इसके अलावा रेग्युलर एक्सरसाइज़, योगा और मेडिटेशन भी करें, तो दुगुना लाभ होगा.
  • अपने डायट में हेल्दी चीज़ें शामिल करें.
  • जंक व ऑयली फुड से दूर रहें.
  • देशी घी को ज़रूर अपने डायट में शामिल करें, क्योंकि यह हेल्दी फैट्स बढ़ाता है. लेकिन बहुत ज़्यादा सेवन करने से बचें.
  • आप अपने भोजन में नींबू को नियमित रूप से शामिल करें. सलाद पर नींबू का रस निचोड़ें या फिर खाने के बाद लाइम शॉट लें.
  • इसी तरह से कालीमिर्च पाउडर को भी आप सलाद पर बुरकें.
  • शहद भी हेल्दी है और वेटलॉस में बेहद फ़ायदेमंद है.
  • भूखे रहने से बचें, अक्सर लोग जल्द से जल्द वेटलॉस के चक्कर में खाना-पीना छोड़ देते हैं, लेकिन ऐसा न करें. इससे कमज़ोरी बढ़ेगी और फैट्स भी कम नहीं होगा.
  • रियलिस्टिक गोल सेट करें. 1 हफ़्ते में 5 किलो कम करने की कोशिश न करें, 1 महीने में 1 किलो भी कम हुआ, तो भी फ़ायदेमंद है.

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सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

Healthy Eating

अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

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चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

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जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

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मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 ईज़ी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Weight Loss Tips)

 

बॉडी के अनुसार डाइट (Food Choice: Diet according to body)

Diet according to body

Diet according to body

आहार यानी भोजन शरीर का ईंधन है. यह ईंधन जलकर शरीर को काम करने के लिए ज़रूरी ऊर्जा प्रदान करता है. यानी हर शरीर को उसके आकार के मुताबिक़ आहार बहुत ज़रूरी है. ज़ाहिर-सी बात है, हर शरीर को उसकी गतिविधियों के मुताबिक़ भोजन मिलना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ रहे. आइए, सबसे पहले शरीर की तासीर में बदलाव के साथ जुड़े बीएचआई यानी बॉडी हीट इंडेक्स के बारे में जानें. बीएचआई यानी शरीर में गर्मी के सूचकांक में बदलाव से बेचैनी और च़िड़चिड़ापन आता है. ऐसे में शरीर को नम रखना लाभदायक रहता है. अपच व मुंहासे जैसी आम समस्याएं भी बीएचआई में बदलाव के कारण पनपती हैं.

बीएचआई क्या है?
यह वातावरण की आर्द्रता से शरीर की तुलना कर शरीर के तापमान की जानकारी देता है. यदि आपके शरीर का तापमान औसत (98.3 डिग्री फारेहाइट) से कम है तो आपका हीट इंडेक्स लो यानी निम्न है और औसत से ़ज़्यादा है तो हाई यानी उच्च है.

बीएचआई को प्रभावित करनेवाले कारक
– वैक्सीनेशन या स्टेरॉइड.
– गर्भावस्था और पीरियड्स.
– लंबी दूरी की यात्रा व तनाव.

डायट प्लान
ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि शरीर की तासीर व मौसम के अनुसार डायट प्लान किया जाए. इसके लिए ज़रूरी है कि ठंडे व गर्म क़िस्म के खाद्य पदार्थों के बारे में जानें.

ठंडे खाद्य पदार्थ

1- तरबूज़
तरबज़ में पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. पका हुआ तरबूज़ पित्तकारक, क्षारयुक्त, गर्म, वात व कफ़ शामक होता है. यह ब्लडप्रेशर को संतुलित रखता है और कई बीमारियों को दूर करता है. भोजन के बाद इसका रस पीने से भोजन जल्दी पचता है और नींद भी अच्छी आती है. इसके रस से लू लगने का ख़तरा नहीं रहता. त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए भी यह फ़ायदेमंद है. चेहरे पर फुंसी हो तो तरबूज लगाने से लाभ
मिलता है.

2- ककड़ी
शरीर की तासीर को नम यानी ठंडा रखने का ककड़ी एक ़कुदरती उपाय है, जिसमें प्रचुर मात्रा में फ़ाइबर भी होता है. यह पेट को साफ़ करने में मदद करता है. अध्ययन के अनुसार एक बाउल ककड़ी दिमाग़ को ठंडा करता है, ख़ासकर गर्मियों में.

3- दही
वैज्ञानिकों का कहना है कि दही पूर्ण भोजन है. इसमें सभी पौष्टिक तत्व होते हैं. फैट, कैल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, आयरन, सोडियम जैसे तंदुरुस्ती बढ़ाने वाले तत्व इसमें प्राकृतिक रूप में पाए जाते हैं. दही का नियमित सेवन करने से पेट संबंधी परेशानियों से भी निजात मिलती है. इसलिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह काफ़ी
लाभकारी है.

4- पालक
पालक से रक्त शुद्धि व शक्ति का संचार होता है. आयरन तत्व हमारे शरीर के लिए उपयोगी व ज़रूरी है. आयरन के कारण ही रक्त में बल्ड सेल्स में इम्यूनिटी व लालिमा आती है. गर्मी में नज़ला, सीने व फेफड़े की जलन में यह लाभदायक है. यह पित्त की तेज़ी शांत करता है. गर्मी की वजह से होनेवाले पीलिया व खांसी में यह बहुत लाभदायक है. यह पानी और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है. यह पाचन क्रिया को सही रखने में भी मदद करता है.

गर्म खाद्य पदार्थ

1- अंडा
अंडा काफ़ी गर्म माना जाता है. हर रोज़ एक अंडा खाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन अधिक नहीं. अध्ययन के अनुसार अंडे की जर्दी और मुंहासों की समस्या में सीधा संबंध है.

2- पपीता
पपीते के वैज्ञानिक विश्‍लेषण से पता चला है कि यह शरीर का क्षार संतुलित रखता है. इसमें विटामिन ए, बी और सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और डी अल्प मात्रा में. इसके नियमित उपयोग से शरीर में विटामिन्स की कमी नहीं रहती. इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो बहुत ही पाचक होता है. यह पेप्सिन प्राप्त करने का एकमात्र साधन है. पपीते का रस प्रोटीन को आसानी से पचा देता है. इसलिए पपीता पेट व आंत संबंधी विकारों में बहुत ही लाभदायक है. लेकिन अधिक गर्म पदार्थ होने के कारण गर्भावस्था में महिलाओं को पपीता न खाने की सलाह दी जाती है.

3- लाल मिर्च
लाल मिर्च शरीर की संचार प्रणाली को उत्तेजित करता है. शरीर के हर अंग में रक्त और पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. परंतु इसका ज़रूरत से ़ज़्यादा इस्तेमाल कई गंभीर समस्याओं, जैसे- गैस्ट्रिक, एसिड, क़ब्ज़ की समस्याएं बढ़ाता है.

4- नट्स
नट्स ऊर्जा का अच्छा स्रोत है, जिसे पचने में काफ़ी व़क़्त लगता है. यह दिमाग़ व शरीर को स्वस्थ बनाता है. इसमें एनर्जी होती है. साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल फ्री होता है. पर इसे खाली पेट लेने से गैस्ट्रिक की समस्या भी हो सकती है, जो हाइपर हीट इंडेक्स को बढ़ाता है.

ध्यान रखें

  • बासी, ठंडा, कच्चा या जला हुआ व दोबारा गर्म किया हुआ भोजन सेहत के लिए नुक़सानदेह होता है.
  • भोजन करते समय कड़े पदार्थ पहले, नरम बीच में और पतले पदार्थ अंत में खाएं.
  • भूख लगने पर पानी और प्यास लगने पर भोजन नहीं करें, अन्यथा स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है.
  • सर्दी के दिनों में भोजन से पहले थोड़ा-सा अदरक व सेंधा नमक खा लेना चाहिए, जिससे पाचन शक्ति बढ़ जाती है.
  • भोजन करने से पहले केला व ककड़ी न खाएं.
  • भोजन में दूध, दही, छाछ लेना आयु को बढ़ाता है.
  • रात को भोजन के बाद दूध पीना सेहत के लिए हितकर है.
  • बिना भूख के भोजन करना बीमारियों को आमंत्रित करता है.
  • दो भोजन के बीच कम से कम छह घंटे का अंतर होना चाहिए.
  • अपनी शरीर की प्रकृति, पाचन शक्ति व शारीरिक क्षमता के अनुसार उचित मात्रा में ही भोजन करें.
  • भोजन करने के बाद क्रोध व तुरंत एक्सरसाइज़ कभी न करें.
  • भोजन करने के बाद कुछ देर ज़रूर टहलें. एसिडिटी होने पर अचार न खाएं.
  • जब मलेरिया हो तो दूध, मोसंबी, संतरा, गन्ने का रस लें. बुख़ार उतरने पर साबूदाना, पतली दाल व दलिया लें. कोई भी ठोस पदार्थ न खाएं.
  • संतरा का फ़ाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.

जानें किन खाद्य पदार्थों को एक साथ खाना चाहिए (7 Best Food Combinations)

12 सुपर फूड, जो आपको देंगे इंस्टेंट एनर्जी(12 Super food for instant energy)

energy booster food

क्या आप भी दिनभर थकान महसूस करती हैं? तो दिनभर की थकान को चुटकियों में दूर करने के लिए अपनी डायट में शामिल करें कुछ सुपरफूड, जो दिनभर आपको रखेंगे फ्रेश और एनर्जेटिक.

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दही

दही में प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो थकान दूर करके आपको एनर्जेटिक बनाते हैं. दही को आप सुबह के नाश्ते में भी शामिल कर सकते हैं. दही में फ्रूट्स मिलाकर खाना भी एक बेहतरीन विकल्प है. एनर्जेटिक बनाने के साथ ही दही के सेवन से इम्यून सिस्टम भी मज़बूत बनता है.

 

सौंफ

सुनकर शायद आपको थोड़ी हैरानी होगी, लेकिन सौंफ में पाए जानेवाले पोषक तत्व सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन आदि शरीर में थकान महसूस कराने वाले हार्मोन्स को ख़त्म कर देते हैं. सौंफ को चबा-चबा कर खाएं या फिर सौंफ वाली चाय पीएं. थकान मिनटों में छूमंतर हो जाएगी और आप तरोताज़ा महसूस करेंगे.

 

केला

ऑफिस से आने के बाद शाम को यदि आपको बहुत ज़्यादा थकान महसूस हो रही है और आपसे उठा नहीं जा रहा हो, तो 2-3 केले खा लें. केले में पोटैशियम पाया जाता है जो शरीर में मौजूद शुगर को एनर्जी में बदल देता है और आपकी थकान दूर हो जाती है.

 

अजवायन

क्या कभी आपने अजवायन की चाय पी है? नहीं..? तो पीकर देखिए, थकान मिनटों में दूर हो जाएगी. अजवायन को गरम पानी में उबालकर चाय की तरह पीएं. सुबह-शाम थोड़ी-थोड़ी मात्रा में इसे पीने से शरीर को ऊर्जा तो मिलती ही है, साथ ही मस्तिष्क की नसों को आराम और जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है.

 

संतरा

संतरे मे मौजूद विटामिन बी6 और फॉलिक एसिड थकान दूर करके आपको एनर्जेटिक बनाता है. जब भी आपको थकान लगे, तो संतरा खाएं या उसका जूस पीएं. संतरे का जूस प्रेग्नेट महिलाओं के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद होता है.

 

अखरोट

एनर्जी बढ़ाने वाले फूड की बात हो और अखरोट का नाम न आए, भला ऐसा कैसे हो सकता है. ओमेगा3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट मिनटों में थकान दूर करने में मदद करता है. इतना ही नहीं, अखरोट खाने से एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन से भी राहत मिलती है. यदि आप एक्सरसाइज़ करके थक चुके हैं, तो अखरोट खाइए.

 

ओटमील

फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट के गुणों से भरपूर ओटमील कई तरह की बीमारियों से बचाने के साथ ही एनर्जेटिक भी रखता है. सुबह नाश्ते में ओटमील खाने से आप दिनभर फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करेंगे. अपनी पसंद के अनुसार आप ओट्स से स्वीट या नमकीन रेसिपी बना सकती हैं.

 

मशरूम

दिन मे एक कप मशरूम खाने से शरीर को 50 प्रतिशत आयरन मिलता है. मशरूम खाने से रक्त की कमी की समस्या नहीं होती. इसके सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है, साथ ही हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी ये फ़ायदेमंद होता है. मशरूम में अन्य सब्ज़ियों के मुक़ाबले प्रोटीन, विटामिन ई और सेलेनियम की मात्रा अधिक होती है.

 

पपीता

सुबह-सुबह पपीता खाने से डाइजेशन सिस्टम ठीक रहने के साथ ही शरीर को ऊर्जा भी मिलती है. पपीते में मौजूद विटामिन बी6 और फॉलिक एसिड शरीर की थकान दूर करने में मदद करते हैं. ऑफिस में शाम के समय भूख लगने पर पपीता खाएं. इससे तुरंत एनर्जी मिलेगी. इसके अलावा पपीता कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित रखने और वज़न घटाने में भी मदद करता है.

 

पालक

इसमें मैग्नीशियम, आयरन और पोटैशियम की भरपूर मात्रा होती है. मैग्नीशियम शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करने में मदद करता है और पोटैशियम पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है. दोपहर के भोजन में सलाद के रूप में पालक खाने से आप दिनभर तरोताज़ा महसूस करेंगे.

 

अदरक

थकान महूसस होने पर अदरक वाली चाय पीजिए या फिर अदरक को पतला-पतला काटकर नमक के साथ खाइए. आप तरोताज़ा महसूस करेंगे. अदरक में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट मसल्स को रिलैक्स करने के साथ ही इम्यून सिस्टम को भी मज़बूत बनाते हैं.

 

अंडा

अंडे में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है. दिन में एक अंडा खाने से शरीर को 30 प्रतिशत प्रोटीन मिलता है. एक्सरसाइज़ के बाद एक अंडा खाइए, इससे थकान दूर होने के साथ ही मसल्स भी रिलैक्स होंगी.

 

सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

स्किन टाइप के अनुसार ब्यूटी डायट

कभी शाम ढले तुम चली आती हो मेरे दिल के आंगन में… कभी सुबह को खिल जाती हो गुलमोहर की तरह मेरे दामन में… मेरी पलकों पर जब रख देती हो तुम अपनी पलकें, तो महक उठते हैं लाखों ख़्वाब मुहब्बत के चमन में…

हुस्न के तो कई रंग होते हैं, लेकिन ये हुस्न हमेशा जवां बना रहे, इसके लिए स़िर्फ ऊपरी देखभाल ही नहीं, इंटरनल केयर भी ज़रूरी है. आप जो खाएंगे, वही आपकी स्किन पर नज़र आएगा. इसीलिए बहुत ज़रूरी है कि हेल्दी स्किन के लिए हेल्दी खाया जाए. इसका पहला स्टेप यह है कि अपनी स्किन को पहचानें और उसकी ज़रूरत के अनुसार अपनी डायट सिलेक्ट करें.

ब्यूटी डायट से पाएं ग्लोइंग स्किन

अपनी स्किन को भीतर से रिस्टोर और रिपेयर करें, ताकि आप पाएं खिली-खिली त्वचा और बेपनाह हुस्न.
हेल्दी डायट न स़िर्फ अच्छी सेहत, बल्कि अच्छी स्किन के लिए भी ज़रूरी है. लेकिन यह भी ध्यान रखें कि सभी की स्किन अलग होती है. ऐसे में हर स्किन टाइप के लिए ब्यूटी डायट भी अलग ही होगी. हम यहां स्किन टाइप के अनुसार ब्यूटी डायट की चर्चा कर रहे हैं, जिसे अपनाकर आप भी अपनी स्किन की बेहतर देखभाल कर सकेंगी.

ड्राई स्किन

– मॉइश्‍चर की कमी के चलते ड्राई स्किन पर मौसम का असर भी जल्दी होता है.

– त्वचा हमेशा खिंची-खिंची रहती है और लिप्स भी ड्राई रहते हैं.

– ऐसे में सबसे ज़रूरी है पानी. जी हां, भरपूर पानी पीने से आप हाइड्रेटेड रहेंगी, जिसका सीधा असर आपकी स्किन पर नज़र आएगा.

– अपने दिन की शुरुआत करें गुनगुने पानी में आधे नींबू के रस से. इससे शरीर के विषैले तत्व निकल जाएंगे और आपको मिलेगी ग्लोइंग स्किन.

– ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो, जैसे- ककड़ी, तरबूज़, सेलरी, सलाद के पत्ते, टमाटर आदि. इनके नियमित सेवन से आपको ज़रूरी मिनरल्स और विटामिन्स भी मिलेंगे.

– गुड फैट्स भरपूर मात्रा में लें. ओमेगा-3 फैटी एसिड्स मॉइश्‍चर प्रदान करता है. इसके लिए आप ऑयली फिश, एवोकैडोज़, फ्लैक्ससीड्स, नारियल का तेल और नट्स ले सकती हैं.

– अगर स्किन क्रैक्ड और फ्लेकी लगे, तो स्किन को रिपेयर करनेवाले फूड पर ध्यान दें. ज़िंक से भरपूर आहार त्वचा को हील और टिश्यूज़ को रिपेयर करते हैं, जैसे- ऑयस्टर, कद्दू के बीज, सी फूड, बीन्स और दालें.

अवॉइड करें: अल्कोहल, कैफीन और शुगर, क्योंकि ये स्किन को डीहाइड्रेट करते हैं.

ऑयली स्किन

– विटामिन बी6 के मुख्य स्रोत हैं- साबूत अनाज, टूना, सालमन मछली, पालक, शिमला मिर्च, ब्रोकोली, असपैरागस, नट्स और लहसुन.

– सीबम के अधिक रिसाव के कारण त्वचा पर ऑयल और शाइन नज़र आता है, ख़ासतौर से टी-ज़ोन पर.

– ऑयली स्किनवाली महिलाओं को मुंहासों की भी समस्या अधिक होती है.

– आप विटामिन बी6 से भरपूर डायट लें, क्योंकि यह सीबम को कंट्रोल करता है यानी सीबम के निर्माण को कम करता है.

– लैसिथिन भी फैट सेल्स को ब्रेक करके रोमछिद्रों में जमा तेल और ऑयल के अतिरिक्त निर्माण को नियंत्रित करता है. लैसिथिन के प्रमुख स्रोत हैं- अंडा, बीज, फलियां, फूलगोभी, सोयाबीन्स.

अवॉइड करें: फ्राइड और फास्ट फूड्स, क्योंकि अधिकतर फास्ट फूड्स हाइड्रोजनेटेड वेजीटेबल ऑयल का इस्तेमाल करते हैं, जो रोमछिद्रों को बंद करके फ्री रेडिकल्स को बढ़ाते हैं. इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड भी अवॉइड करें, क्योंकि इनमें प्रिज़र्वेटिव्स और शुगर की अधिक मात्रा होती है.

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सेंसिटिव स्किन

– रैशेज़, ड्राईनेस, जलन, लालिमा, खुजली आदि सेंसिटिव स्किन की निशानी है.

– अमीनो एसिड्स और फैटी एसिड्स सेल्स रिन्यू करके सेंसिटिविटी को कंट्रोल करते हैं.

– सुबह अपने जूस या स्मूदी में इन्हें शामिल करें और कोशिश करें कि उन्हें अपने नेचुरल फॉर्म में लें.

अवॉइड करें: रेड मीट, कैफीन, सॉफ्ट ड्रिंक्स, अल्कोहल और स्पाइसी फूड. मोनोसोडियम ग्लूटामेट और इसके रिप्लेसमेंट्स, कलर्स, फ्लेवर्स और प्रिज़र्वेटिव्स को भी अवॉइड करें.

हेल्दी स्किन के लिए बेस्ट सुपर फूड्स

– ब्लूबेरीज़ नंबर वन फूड माना जाता है एंटीऑक्सीडेंट्स के मामले में. यह एजिंग प्रोसेस को कम करता है.

– वाइल्ड सालमन में सेलेनियम होता है, जो त्वचा का धूप से बचाव करता है. इसके अलावा सालमन में मौजूद विटामिन डी आपकी हड्डियों और दांतों को भी मज़बूती प्रदान करता है.

– पालक में मौजूद लूटीन आंखों को हेल्दी और शाइनी रखता है. पालक में विटामिन बी, सी, ई, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्निशियम, ओमैगा 3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स और कई पोषक तत्व होते हैं, जो स्किन को ग्लोइंग और हेल्दी रखते हैं.

– ऑयस्टर्स में मौजूद ज़िंक सेल्स के निर्माण व रिपेयर को तेज़ करता है. इसके अलावा यह नाख़ून, बाल और आंखों को भी हेल्दी
बनाता है.

– टमाटर एंटीएजिंग एंटीऑक्सीडेंट- लाइकोपीन का बेहतरीन स्रोत है. पकने के बाद या प्रोसेस्ड टोमैटोज़ में भी लाइकोपीन नष्ट नहीं होता और हमारे शरीर द्वारा आसानी से एब्ज़ॉर्ब कर लिया जाता है.

– अखरोट विटामिन ई और ओमेगा 3 फैटी एसिड्स से भरपूर है. यह स्मूद स्किन, शाइनी हेयर, ब्राइट आईज़ और हेल्दी बोन्स देता है. मुट्ठीभर अखरोट अपने डायट में शामिल करें.

– कीवि फ्रूट विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है. यह झुर्रियों से बचाव करता है और त्वचा में कसाव लाता है.

– डार्क चॉकलेट स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है और धूप से भी बचाव करता है.

– दही कैल्शियम से भरपूर होता है और यह स्किन, दांत व नाख़ूनों को हेल्दी व शाइनी बनाता है.

– स्वीट पोटैटो में बीटा-कैरोटीन होता है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट है और एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है.

मुंहासोंवाली स्किन के लिए डायट

– जितना अधिक आपकी बॉडी अंदर से क्लीन होगी, उतनी ही आपकी स्किन भी क्लीन होगी.

– लिवर, पेट और आंतों को क्लीन रखने के लिए हाई फाइबरयुक्त फूड लें.

– सेब में पेक्टिन होता है. यह एक कार्बोहाइड्रेट कंपाउंड होता है, जो पेट के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और आंतों को भी मज़बूत बनाता है.

– गाजर और सेलरी विटामिन सी से भरपूर होते हैं, जो त्वचा को क्लीन लुक देते हैं.

– ताज़े नींबू का रस पानी में मिलाकर सुबह पीएं. इससे सिस्टम क्लीन होता है.

मैच्योर स्किन के लिए डायट

– प्रोटीन से भरपूर आहार लें, जैसे- नट्स और ओट्स. ये ओमेगा 3 फैटी एसिड और फाइबर से भी भरपूर होते है, जो त्वचा को लूज़ होने से बचाते हैं.

– फिश बहुत ही हेल्दी होती है. आप सालमन फिश लें, जो एजिंग के प्रोसेस को धीमा करती है.

– कमलेश शर्मा

ब्यूटी विटामिन्स

विटामिन ए: एंटी एजिंग

हेल्दी स्किन और महत्वपूर्ण स्किन टिश्यू़ूज के रिपेयर और केयर के लिए विटामिन ए बहुत ज़रूरी है. इसकी कमी होने पर त्वचा ड्राई और पपड़ीदार हो जाती है. विटामिन ए को रेटिनॉइड्स नामक कंटेंट के तौर पर भी जाना जाता है. विटामिन ए से भरपूर डायट और रेटिनॉइड्स युक्त नाइट क्रीम व लोशन लगाकर हेल्दी त्वचा पाई जा सकती है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: ब्रोकोली, ऐवोकैडो, शकरकंद, गाजर, पालक, तरबूज़ और खरबूजा आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: रोज़ाना विटामिन ए युक्त क्रीम व लोशन लगाने से फाइन लाइन्स और रिंकल्स को कम किया जा सकता है.

– ये क्रीम्स व लोशन दाग़ धब्बों को मिटाकर स्किन को स्मूद बनाते हैं.

– रेटिनॉइड्स बेस्ड क्रीम में मौजूद तत्व दिन में भी सूर्य की तेज़ धूप से होनेवाले नुक़सान से त्वचा की रक्षा करते हैं.

– ये क्रीम्स त्वचा पर तेज़ी से अपना असर दिखाती हैं. इनका असर चार से आठ सप्ताह के अंदर त्वचा पर देखा जा सकता है.

कैसे करें अप्लाई: रोज़ाना रात को सोने से पहले चेहरे पर रेटिनॉइड कंटेंट मिश्रित क्रीम से मसाज करें.

– पहली बार अप्लाई करते समय त्वचा पर बहुत थोड़ी मात्रा में क्रीम लगाएं और क्रीम का रिएक्शन चेक करें.

– पहली बार क्रीम अप्लाई करने पर त्वचा पर रेडनेस हो सकती है या स्किन की लेयर निकल सकती है, लेकिन दूसरे दिन से क्रीम का असर दिखने लगेगा. धीरे-धीरे त्वचा स्मूद होने लगेगी.

विटामिन बी3: रेडनेस

नायसिनअमाइड नामक तत्व को विटामिन बी3 के रूप में जाना जाता है. विटामिन बी3 बेस्ड क्रीम्स, लोशन्स और सीरम्स में नायसिनअमाइड नामक कंटेंट होता है, जो त्वचा की रेडनेस को कम करने और मुंहासों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है. विटामिन बी3 त्वचा में हाइड्रेशन के स्तर को बूस्ट करता है, साथ ही त्वचा में सैरेमाइड के प्रोडक्शन और फैटी एसिड की मात्रा में वृद्धि करने में मदद करता है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: चिकन, टूना, सालमन, मूंगफली, ब्राउन राइस, एस्पेरागस, हरी मटर, जौ, मशरूम, खरबूजा, सनफ्लावर सीड आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: विटामिन बी3 त्वचा के लिए रक्षात्मक कवच का काम करता है.

– ड्राई और सेंसिटिव स्किन के लिए विटामिन बी3 बहुत फ़ायदेमंद है.

– विटामिन बी3 युक्त क्रीम आदि लगाने से त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है और स्किन सॉफ्ट होती है.

– रोज़ाना क्रीम व लोशन से मसाज करने पर त्वचा में कसाव आता है.

कैसे करें अप्लाई: रोज़ाना सुबह और शाम को विटामिन बी3 मिश्रित क्रीम या लोशन से 2 मिनट तक मसाज करें.

विटामिन सी: दाग़-धब्बे

विटामिन सी में स्किन ब्राइटनिंग प्रॉपटीऱ्ज होती हैं, जो दाग़-धब्बों को दूर करने में मदद करता है. यह विटामिन कोलैजन का निर्माण अधिक मात्रा में करता है, जो डैमेज्ड टिश्यूज़ को रिपेयर करने में मदद करता है. विटामिन सी युक्त मॉइश्‍चराइज़र, सीरम और ऑयल लगाने से दाग़-धब्बे दूर होते हैं.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: एवोकैडो, ब्रोकोली, टमाटर, ककड़ी, लाल शिमला मिर्च, मोसंबी, संतरा और स्ट्रॉबेरी.

ब्यूटी बेनीफिट्स: विटामिन सी एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है, जिससे स्किन रिंकल फ्री रहती है.

– यह फाइन लाइन्स और ड्राईनेस को दूर करता है.

– विटामिन सी की हीलिंग प्रॉपर्टीज़ डैमेज स्किन को हील करती हैं.

– विटामिन सी टिश्यूज़ की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है.

कैसे करें अप्लाई: त्वचा पर रोज़ सुबह विटामिन सी युक्त क्रीम से 2 मिनट तक मसाज करें.

– घर से बाहर निकलने से पहले विटामिन सी युक्तक्रीम लगाएं. फिर सनस्क्रीन लगाएं.

विटामिन ई: मॉइश्‍चराइज़ेशन

विटामिन ई फ्री रेडिकल्स (त्वचा को हानि पहुंचानेवाले कण) से त्वचा की रक्षा करता है, इसलिए इस विटामिन को त्वचा के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है. विटामिन सी की तरह विटामिन ई भी कोलैजन का अधिक मात्रा में उत्पादन करता है, जो स्किन एजिंग के प्रोसेस को धीमा करता है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: बादाम, अंडे, सूखे मेवे, हरी सब्ज़ियां, साबूत अनाज, शकरकंद, शलजम, पपीता आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: नियमित रूप से विटामिन ई युक्तऑयल या लोशन लगाने से झुर्रियों को कम किया जा सकता है.

– विटामिन ई मिश्रित ऑयल लगाने से त्वचा की रेडनेस दूर होती है.

– इस विटामिन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को प्रदूषण और अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से होनेवाले नुक़सान से बचाते हैं.

– विटामिन ई युक्त ऑयल या सीरम ड्राई स्किन को न केवल नमी प्रदान करता है, बल्कि सॉफ्ट और स्मूद भी बनाता है.

– नियमित रूप से विटामिन ई युक्त क्रीम व ऑयल लगाने से स्ट्रेच मार्क्स और दाग़-धब्बे भी दूर होते हैं.

– विटामिन ई बेस्ड क्रीम त्वचा में होनेवाली जलन को कम करने में मदद करती है.

कैसे करें अप्लाई: ड्राई स्किन को मॉइश्‍चराइज़ करने के लिए रोज़ाना नाइट क्रीम से मसाज करें.

– देवांश शर्मा