diet

हर कोई स्लिम दिखना चाहता है लेकिन स्लिम होने के साथ-साथ आपका फिटनेस लेवल भी उतना ही बेहतर होना चाहिए! में रिसर्च कहता है कि आपकी डायट हैबिट्स ही आपको फिट और स्लिम रखने में मदद कर सकती हैं, कैसे? आइए जानें-


– रिसर्च कहता है कि आपकी डायट हैबिट्स आपको फिट और स्लिम रखने में मददगार हो सकती है, जैसे- जब आप सबसे ज़्यादा एक्टिव हों, तभी खाएं और अपने पाचन तंत्र को रोज़ाना लंबा ब्रेक दें. आफ्टर डिनर स्नैक्स हमेशा फैट्स बढ़ाते हैं, इन्हें अवॉइड करें.

– कोशिश करें कि अपनी हर मील में फल व सब्ज़ियों का रेनबो लें यानी सारे रंगों के फल-सब्ज़ी शामिल करें. ये लो कैलोरी पर पोषण से भरपूर होते हैं. इनमें विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं. 

– हरी सब्ज़ियां ज़रूर खाएं, जैसे- पालक, मेथी, ब्रोकोली, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च आदि. ये विटामिन ए, सी, ई, के और कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम व ज़िंक से भरपूर होते हैं.

– मीठा खाने की क्रेविंग्स से बचने के लिए नेचुरल रूप से जो सब्ज़ियां मीठी होती हैं, जैसे- मकई, गाजर, बीट, शकरकंद व प्याज़ आदि को भी डायट में शामिल करें. 

Healthy Diet Habits

– ब्रेन, हार्ट और विभिन्न सेल्स के पोषण के लिए हेल्दी फैट्स बहुत ज़रूरी हैं ही, इसलिए अनहेल्दी फैट्स की जगह हेल्दी फैट्स लें. ये स्किन, बाल और नेल्स को भी हेल्दी और शाइनी बनाते हैं.

– ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ बेहद महत्वपर्ण होते हैं. वे हार्ट डीसीज़ से रक्षा करते हैं, मूड को बेहतर बनाते हैं. 

– मोनोसैचुरेटेड फैट्स आपके डायट का हिस्सा हो यह भी ध्यान रखें, इसलिए अपने खाने में प्लांट ऑयल, जैसे- कनोला, पीनट, नट्स  में बादाम, सीड्स में तिल व पंपकिन, ऑलिव, एवाकैडो आदि को ज़रूर खाएं और अपने खाने में उन्हें ख़ास जगह दें. 

Healthy Diet Habits

– डायट में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स जैसे- ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स को जगह दें. इसके सोर्स हैं- फैटी फिश, जैसे- सालमन, सार्डिन, हैरिंग, मैकरेल, सोयाबीन, फ्लैक्सीड ऑयल, बिना गर्म किए हुए सनफ्लावर ऑयल,  अखरोट और कॉर्न. कुछ ठंडे पानी के फिश ऑयल सप्लीपमेंट्स में भी यह पाए जाते हैं. 

– बेहतर होगा कि खाने में नमक को सेवन कुछ कम कर दें, इससे वॉटर रिटेंशन होता है, बीपी बढ़ता है, जिस वजह से वज़न और बीमारी दोनों बढ़ते हैं, शरीर में सूजन व भारीपन लगता है. 

– फ्राइड पोटैटो चिप्स कम खाएं. कैंड फूड की जगह फ्रेश या फ्रोज़न वेजीटेबल्स लें. प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें. रिफाइंड फूड्स, जैसे- ब्रेड व पास्ता अवॉइड करें.

Healthy Diet Habits

– अपने डायट से इन्हें घटाएं- सैचुरेटेड फैट्स, जो मिलता है रेड मीट और डेरी प्रोडक्ट्स से 
ट्रान्स फैट्स, जो मिलता है स्नैक्स, कैंडीज़, कुकीज़, फ्राइड फुड से. 

– प्रोटीन रिच डायट लें और अपने खाने में अलग-अलग तरह के प्रोटीन्स शामिल करें, जैसे- बींस, नट्स, टोफू, चिकन, ताज़ा फिश, अंडे और सोय प्रोडक्ट्स. 

– नॉन वेज में अगर चिकन व मीट लेने जा रहे हों, तो हर्मोंस व एंटीबायोटिक्स मुक्त लें.

– हड्डियों की मज़बूती के लिए कैल्शियम बहुत ज़रूरी है. कैल्शियम आप सही-संतुलित रूप में खा रहे हों इसका ध्यान रखें, क्योंकि डायटिंग के चक्कर में अक्सर पोषण कम हो जाता है, जिससे कमज़ोरी या किसी तरह की कमी व डेफिशियंसी हो सकती है. डेयरी प्रोडक्ट्स, जैसे- दूध, दही व चीज़ इसके अच्छे स्रोत हैं. बींस, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम से भरपूर होती हैं. 

Healthy Diet Habits

– फ्रूट्स ज़रूर खाएं, क्योंकि ये फाइबर, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं. इनमें कैसर अवरोधक तत्व भी होते हैं और कई तरह के विटामिन्स भी. 

– अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि जो लोग साबूत अनाज का अधिक सेवन करते हैं, उनका हार्ट अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक स्वस्थ होता है, क्योंकि साबूत अनाज फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत हैं और ये लंबे समय तक एनर्जी देते हैं. इसलिए कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर डायट में शामिल करें. साबूत अनाज, ब्राउन राइस, जौ, बाजरा, बींस, फल और सब्ज़ियां, ज़्यादा लें, क्योंकि ये धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक भूख महसूस नहीं होती और ब्लड शुगर व इंसुलिन का स्तर भी सामान्य व स्थिर रहता है. इनमें फाइटोकेमिकल और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोरोनरी हार्ट डिसीज़, कुछ प्रकार के कैंसर और डायबिटीज़ से भी रक्षा करते हैं.

Healthy Diet Habits

– अनहेल्दी कार्बोहाइड्रेट्स से बचें, जैसे- मैदा, रिफाइंड शुगर, पॉलिश्ड चावल. ये कार्ब्स जल्दी पच जाते हैं और शुगर लेवल को बढ़ा देते हैं. 

– राजा शर्मा

यह भी पढ़ें: बच्चों में बढ़ रहा है कोरोना का रिस्क, क्या करें जब बच्चे में दिखाई दें कोरोना के ये लक्षण (Coronavirus: Now Kids Are At High Risk, What To Do If Your Child Tests Positive)

हेल्दी भला कौन नहीं रहना चाहता और यह ज़रूरी भी है, लेकिन हेल्दी रहने के लिए बेहद ज़रूरी है कि आपका वज़न एक तय सीमा से ज़्यादा न बढ़े, लोग न जाने कितनी डायटिंग और एक्सरसाइज़ करते हैं, लेकिन फिर भी वो रिज़ल्ट नहीं मिलता, क्योंकि शायद लोगों की अप्रोच सही नहीं है… या तो खाना ही बंद कर देंगे या फिर दवाओं से वज़न कम करने के चक्कर में पड़ जाते हैं, जबकि वज़न घटाने के लिए खाना बंद करना उपाय नहीं है, बल्कि सही तरी़के से खाना ज़रूरी है, ताकि पोषण भी मिले और धीरे-धीरे सहजता से आप हेल्दी तरी़के से वज़न घटाएं. समझदारी से अपना डायट प्लान करेंगे, तो आपका स्वाद भी बरक़रार रहेगा और हेल्थ भी, इसीलिए हम कुछ स्मार्ट हेल्दी टिप्स और ट्रिक्स की के बारे में बात करेंगे, जिसमें आपका यह आइडिया मिलेगा कि कैसे खाएं, क्या खाएं जो टेस्टी भी हो और आपको फिट भी रखे.

Lose Weight Tips

समझें खाने और न्यूट्रिशन यानी पोषण की बेसिक बातें: हेल्दी खाने का सीधा मतलब है कि ऐसा खाना, जिससे आप स्वस्थ रहें, फिट रहें, ख़ुश रहें और ज़्यादा एनर्जेटिक महसूस करें. अपना मनचाहा काल्पनिक फिगर पाने और हेल्दी खाने का यह मतलब नहीं है कि आप कम खाएं, कैलोरीज़ गिन-गिन के स़िर्फ न्यूट्रिशियस फूड ही खाएं. इसलिए खाने और न्यूट्रिशन की कुछ बेसिक बातें जानें और समझें, ताकि आप ऐसा डायट प्लान कर सकें, जिसमें आपको ढेर सारी वेरायटी भी मिले और आपका काम भी हो जाए.  आप कुछ  हेल्दी के साथ-साथ स्वादिष्ट भी खाएं. 

स्ट्रिक्ट डायट प्लान करने की ग़लती न करें: अचानक बहुत स्ट्रिक्ट डायट शुरू न करें, बल्कि छोटे गोल्स सेट करें. धीरे-धीरे शुरुआत करें. आपको एकदम परफेक्ट होने की ज़रूरत नहीं है. न ही अपने मनपसंद भोजन को पूरी तरह से त्याग देने की ही ज़रूरत है. बस, आपका उद्देश्य ज़्यादा हेल्दी और एनर्जेटिक फील करना और रोगों के रिस्क का कम करना होना चाहिए.

ईटिंग हैबिट्स में धीरे-धीरे बदलाव लाएं: आप  अपनी डायट रातोंरात नहीं बदल सकते. धीरे-धीरे अनहेल्दी चीज़ों को हेल्दी चीज़ों से रिप्लेस करें, जैसे- नियमित रूप से रोज़ कोई फल,  सलाद खाएं, खाने में तेल, नमक और शक्कर को कम करें. हेल्दी ऑयल्य यूज़ करें, जैसे- ऑलिव ऑयल. किसी जानकार से सलाह भी लें कि क्या बेहतर होगा.

Lose Weight Tips

लिक्विड इनटेक और पानी बहुत ज़रूरी है: पानी सिस्टम को क्लीन हो करता है. शरीर के टॉक्सिन्स को भी निकालता है. हम में से अधिकतर लोग अंजाने में ही पानी कम पीने के कारण डिहाइड्रेटेड रहते हैं,जिसकी वजह से थकान, सिरदर्द और लो एनर्जी लेवल महसूस करते हैं.

गोल सेट करें: आपको यह तय करना होगा कि एक महीने में एक से दो किलो ही वज़न कम करना है, पांच या सात किलो कम करने के चक्कर में न पड़ें. बेहतर होगा एक रियलिस्टिक गोल सेट करें. 

डायट में कलर्स ऐड करें: डायाटिंग का मतलब स़िर्फ खाने में कुछ घटाना ही नहीं होता, बल्कि बढ़ाना भी होता है, पोषण को बढ़ाएं. कलर्स को बढ़ाएं. सिंपल डायट फॉलो करें. खाने में जितने ज़्यादा कलर्स होंगे, उतना ही वो हेल्दी और पोषक होगा, जैसे: हरी सब्ज़ियां, गाजर, टमाटर, ताज़ा फल, दही, दूध, चटनी, छाछ आदि.  कैलोरीज़ गिनने से बेहतर होगा कि आप खाने में वेरायटीज़, कलर्स और ताज़गी को महत्ता दें. 

योग, एक्सरसाइज़ ज़रूर करें: लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाएं, रोज़ संभव न हो, तो हफ़्ते में दो या तीन दिन, एक्सरसाइज़, वॉक, जॉग और योग करें.  

Lose Weight Tips

क्रेविंग्स का ख़्याल रखने के लिए बीच का रास्ता चुनें, किसी भी खाने को पूरी तरह बंद न करें: लोग अक्सर डायटिंग के शुरुआती दौर में पूरी तरह से हेल्दी फुड पर शिफ्ट होने की ठान लेते हैं. बेहतर होगा कि अनहेल्दी फूड पहले से थोड़ा-सा कम खाएं. किसी भी फूड को पूरी तरह से बैन न करें, क्योंकि यह स्वाभाविक है कि जब आप किसी चीज़ को खाना पूरी तरह से बंद कर देते हैं, तो उसे खाने की चाह और बढ़ जाती है. और जब वो चीज़ हमारे सामने आती है, तो ख़ुद को रोक ही नहीं पाते. आप ऐसे खाने की मात्रा और संख्या कम कर दें, जैसे- मीठा या नमकीन बहुत पसंद है, तो रोज़ाना खाने की बजाय हफ़्ते में कुछ दिन निर्धारित कर लें. धीरे-धीरे संख्या और मात्रा और कम करते जाएं. इससे आपकी क्रेविंग्स अपने आप कम होती जाएगी, इसलिए बीच का रास्ता चुनें. 

कैलोरीज़ को बैलेंस करना सीखें: दिनभर का डायट प्लान ऐसा हो कि आप उसे बैलेंस कर पाएं. यदि नाश्ता हेवी हो गया हो, तो लंच और डिनर हेल्दी व लाइट रखें. आप खिचड़ी, दलिया, ओटस, सूप या सलाद लें. इस तरह अपनी कैलोरीज़ बैलेंस करना सीखें. 

छोटे-छोटे और ज़्यादा मील्स प्लान करें: दिन में 3 बार हैवी खाना और कंप्लीट मील की जगह दिन में 6 बार खाएं. जब भी भूख लगे, तो कोई फ्रूट लें या स़िर्फ एक कटोरी सब्ज़ी या दाल लें.

Lose Weight Tips

स्नैकिंग में अनहेल्दी को हेल्दी से रिप्लेस करें: चिप्स, समोसा या वड़ा खाने की बजाय ड्राई फ्रूट्स, बेक्ड स्नैक्स, स्टीम्ड स्नैक्स, इडली या सादा डोसा, सूखी भेल, मखाना या सैंडविच आदि खाएं. 

होटल में स्मार्टली ऑर्डर करें फूड: जब बाहर खाने जाएं, फैमिली या फ्रेंड्स के साथ, तो मिलकर डिश ऑर्डर करें. अपना खाना सबके साथ शेयर करें. कोई भी ऐसी डिश ऑर्डर न करें, जो बहुत ज़्यादा मात्रा में आती हो. बेहतर होगा कि स़िर्फ स्टार्टर्स ही लें.

बहुत जल्दी-जल्दी न खाएं: हम क्या खाते हैं यही ज़रूरी नहीं है, बल्कि कैसे खाते हैं, यह भी ज़रूरी है, इसलिए बहुत जल्दी-जल्दी न खाएं. धीरे-धीरे चबा-चबाकर खाएं. तसल्ली से सबके साथ मिलकर खाएं. खाने को एंजॉय करें. कभी भी जल्दीबाज़ी में खाना न खाएं. हमेशा फुर्सत में और खाने का पूरा मज़ा लेकर ही खाना खाएं. टीवी देखते हुए न खाएं, वरना अंजाने में ही आप ज़्यादा खा लेते हैं. 

Lose Weight Tips

स्वाद के चक्कर में ओवरईटिंग न करें: अपनी बॉडी की बाते सुनें. आपकी मनपसंद डिश है या खाना बहुत स्वादिष्ट बना है, तो खाते ही न चले जाएं. पेट भरने से भी पहले खाना बंद कर दें. वरना बाद में पेट भारी लगेगा और लो एनर्जी महसूस होगी आपको. हमेशा पानी के लिए जगह रखें. दो रोटी की भूख हो, तो डेढ़ रोटी खाएं और अगर एक ही रोटी खानी हो, तो दाल या सब्ज़ी ज़्यादा लें या दही के साथ खा लें. बहुत ज़्यादा तेल में सब्ज़ी या कोई भी खाना न पकाएं. तेल की मात्रा कम कर दें. बिना तड़के की दाल लें. 

डिनर जल्दी करने की आदत डालें: डिनर जितना जल्दी हो सके कर लें, क्योंकि जिस वक़्त हमारा पाचनतंत्र बेहतर काम करता है, तभी भोजन करना अच्छा होता है. डिनर और नाश्ते के बीच पाचन तंत्र को लगभग 14 से 16 घंटे का आराम मिलना चाहिए, इसलिए  देर रात खाना अवॉइड करें. 

– रानी शर्मा 

यह भी पढ़ें: हेल्दी रहने के 50 सिंपल गोल्डन रूल्स, इन छोटे-छोटे स्टेप्स को फॉलो करें और रहें हमेशा फिट (50 Simple Tips To Stay Healthy & Fit)

हेल्दी रहना भले ही आज के दौर में इतना आसान नहीं लेकिन छोटी-छोटी कोशिशें बड़े रंग ला सकती हैं. आप भी अगर ये सिम्पल रूल्स फ़ॉलो करेंगे तो हमेशा फिट और हेल्दी रहेंगे… इन स्टेप्स को फ़ॉलो करना ज़रा भी मुश्किल नहीं और इनकी जानकारी हम सभी को है लेकिन बस हम इनको फ़ॉलो नहीं करते, लेकिन आप कल से इन्हें आज़माएं और फ़र्क़ देखें व महसूस करें!

Tips To Stay Healthy & Fit
  1. रोज़ाना कम से कम 8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं. फ्रूट जूसेस भी लें.
  2. सुबह उठते ही दो ग्लास गुनगुना पानी पीएं.
  3. भरपूर नींद लें. तनाव से दूर रहें.
  4. योग और एक्सरसाइज़ करें. रोज़ाना समय निकाल कर थोड़ी-सी फिज़िकल एक्टिविटी ज़रूर करें. दिन भर चुस्ती-स्फुर्ति के लिए हल्का व्यायाम बेहद ज़रूरी है.
  5. पौष्टिक नाश्ता ज़रूर करें. जी हां, जब भी आप सुबह उठते हैं तो अपनी ऊर्जा को बढ़ाने और नए दिन की ताज़ा तरीन शुरुआत के लिए सबसे ज़रूरी है पौष्टिक नाश्ता, जिससे शरीर को पूरे दिन की ऊर्जा मिले.
  6. अपने भोजन में वैरायटीज़ रखें, ताकि हर तरह का पोषण आपको मिल सके.
  7. मौसमी फल और सब्ज़ियां ज़रूर खाएं. हर रंग के फल व सब्ज़ियां खाएं.
  8. ड्राय फ्रूट्स भी अपने डायट में ज़रूर शामिल करें. होल ग्रेन्स और फ़ाइबर्स भी भरपूर मात्रा में लें.
  9. हेल्दी स्नैक्स खाएं. 4 बजे वाली भूख के लि, कोई हेल्दी ऑप्शन रखें. सूप्स पीएं, सलाद खाएं.
  10. शराब-सिगरेट, चाय-कॉफी जितना हो सके कम पीएं.
  11. अपनी पसंद का काम करें, अपनी हॉबीज़ को भी पूरा करने का टाइम निकालें. यह आपको रिफ्रेश कर देगा.
  12. खाना बनाने और खाने से पहले हाथ ज़रूर धोएं. अगर साबुन और पानी न हो, तो सनेटोइज़र का इस्तेमाल करें.
  13. खांसते-छींकते वक़्त मुंह ढंकें और धूल-धूप में जाते वक़्त मास्क पहनें.
  14. ओवर ईटिंग से बचें. कई बार अपना मनपसंद खाना देखते ही हम भूख से ज़्यादा खा लेते हैं, लेकिन ऐसा न करें. हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं, ताकि पानी के लिए जगह बची रहे.
  15. बहुत ज़्यादा पेन किलर्स न खाएं. घरेलू नुस्ख़े आज़माएं.
  16. खाने से एक घंटा पहले एक ग्लास पानी में नींबू का रस डालकर पीएं.
  17. खाने के फौरन बाद पानी न पी लें.
  18. रात को सोते समय एक ग्लास मीठा दूध पीएं.
  19. अपने बारे में हमेशा अच्छा महसूस करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें.
  20. नहाने के बाद थोड़ा ध्यान लगाएं. इससे मन में एकाग्रता आती है और आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.
  21. बहुत देर तक एक ही जगह पर न बैठें, न ही देर तक टीवी देखें. अपनी दिनचर्या नियमित करें और उसका पालन ईमानदारी से करें.
  22. अगर आपकी ईटिंग हैबिट्स ठीक नहीं है, तो एकदम से उसे बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव लाएं.
  23. अपनी बॉडी की सुनें. हर व्यक्ति की ज़रूरत और बॉडी टाइप व बॉडी क्लॉक अलग होता है, उसी के अनुसार अपना डायट और एक्सरसाइज़ प्लान करें.
  24. दिन में दो बार भरपेट खाने की बजाय 5-6 बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं.
  25. खाना चबा-चबाकर खाएं.
  26. अपने डायट में मोनोअनसैचुरेटेड ़फैट्स शामिल करें. यह आपको स़फेद सरसों के तेल, मूंगफली का तेल और बादाम से मिलेगा. इसके अलावा कद्दू और सीसम के तेल में भी इसका स्रोत है.
  27. पॉलीअनसैचुरेटड फैट्स और ओमेगा3 और 6 ़फैटी एसिड भी शामिल करें. यह आपको ़फैटी फिश से मिलेगा, जैसे- सालमन, सार्डिन और ठंडे पानी की मछलियों के ऑयल. इसके अलावा अलसी के बीज, सोयाबीन और मकई भी पॉलीअनसैचुरेटड फैट्स के अच्छे स्रोत हैं.
  28. अपने डायट से सैचुरेटेड ़फैट्स की मात्रा कम करें. यह रेड मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स में मिलता है.
  29. ट्रान्स फैट्स भी कम करें, जो फ्राइड व बेक्ड फूड, कुकिज़, कैंडीज़ और दूसरे प्रोसेस्ड फूड में पाया जाता है.
  30. अलग-अलग प्रोटीन्स लें. ये आपको बीन्स, नट्स, सीड्स, टोफू, सोय प्रोडक्ट्स में मिलेंगे. लेकिन सॉल्टेड, शुगरी या रिफाइन्ड नट्स न लें.
  31. कैल्शियम युक्त पदार्थ ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. ये जल्दी डायजेस्ट हो जाते हैं. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं.
  32. बहुत ज़्यादा नमक और मीठा खाने से बचें. अपना हफ़्तेभर का डायट प्लान करके चार्ट बना लें. बासी भोजन करने से बचें. जितना हो सके ताज़ा पका खाना ही खाएं.
  33. रेग्युलर हेल्थ चेकअप भी करवाते रहें. कई बार डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का सालों तक पता नहीं चल पाता.
  34. घर में वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए. दिन के समय खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ा हवा और भरपूर रोशनी रहे.
  35. एसी का प्रयोग ज़रूरत पड़ने पर ही करें और समय-समय पर क्लीन भी करवाते रहें.
  36. ऑफ़िस में भी देर तक एक ही जगह पर न बैठे न रहें. बीच-बीच में टहल आएं.
  37. कंप्यूटर के सामने बहुत देर तक न रहें. समय-समय पर आंखें बंद करके रिलैक्मस करें.
  38. फ़ोन पर बहुत देर तक बातें न करें, इससे भी कई तरह के विकार उत्पन्न होते हैं.
  39. अगर संभव हो तो डान्सिंग और स्विमिंग क्लासेस जॉइन करें. इससे फन के साथ-साथ एक्सरसाइज़ भी होगी.
  40. रोज़ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीएं.
  41. 1 कप कटे हुए मीठे पके सेब में 1 कप कटी हुई पत्ता गोभी, 1 टीस्पून जीरा और 3 कप पानी मिलाकर 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. इसे छानकर इतना पानी मिला लें कि 3 कप बन जाए. इसे दिन भर थोड़ा-थोड़ा पीएं.
  42. नींबू का रोज़ाना सेवन करें. या तो नींबू पानी के रूप में या फिर खाने में नींबू का रस डालकर. यह पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है.
  43. रोज़ सुबह 1 टीस्पून फिश ऑयल लेना भी काफ़ी हेल्दी होता है.
  44. जितना हो सके ब्रोकोली और पालक का सेवन करें.
  45. संतरे के छिलकों का जाम बनाकर सेवन करें. ताज़ा टमाटर खाएं.
  46. ब्लैक टी या ग्रीन टी लें.
  47. सोने से पहले भी दांतों को ब्रश करें. मुंह की दुर्गंध मिटाने के लिए पानी में बेकिंग सोडा डालकर गरारे करें.
  48. दांत और मसूड़ों की तकलीफ़ हो तो सेंधा नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मालिश करें.
  49. वीकेंड्स पर बॉडी व हेड मसाज करवाएं. इससे थकान भी मिटेगी और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ेगा.
  50. हवा-पानी बदलना बहुत ज़रूरी होता है. इससे पेट संबंधी रोग कम होते हैं. छुट्टियां प्लान करें और बाहर ज़रूर जाएं.
  51. खुलकर हंसे. रोज़मर्रा के तनाव में आपकी हंसी गायब न होने पाए. खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ा हवा मिलती है.
  • रिंकु शर्मा
Tips To Stay Healthy & Fit

यह भी पढ़ें: आंखों की रोशनी इम्प्रूव करने के लिए 10 ईज़ी आई एक्सरसाइज़ (10 Easy Eye Exercises That Can Improve Your Vision)

हमारा शरीर खुद ही हमें कई बातों का संकेत देता है, बस ज़रूरत है उन संकेतों को पहचानने की. इसी तरह जब हमारावज़न बढ़ता है तो भी शरीर संकेत देता है, समय पर उनको पहचानकर ध्यान दें वर्ना सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

  • सबसे पहला संकेत है कि आपको खुद अपना शरीर हेवी लगने लगता है. आप अक्सर सोचने लगते हो कि कहीं मेरावज़न बढ़ तो नहीं रहा. 
  • आपके कपड़े आपको टाइट होने लगते हैं, पुराने कपड़े अब नहीं आते.
  • आप खर्राटे लेने लगते हैं, अगर कोई आपका अपना कहे कि आजकल आप खर्राटे लेने लगे हो तो नाराज़ होने कीबजाय गम्भीरता से लें इस बात को क्योंकि सोने के दौरान अनियमित सांसों से ऐसा होता है. दरअसल जब शरीर मेंफैट्स बढ़ता है तो गर्दन के आसपास भी फैट्स बढ़ जाता है जिससे सांस की नली संकरी हो जाती है और सांस लेनेमें रुकावट व दिक़्क़त होने लगती है. बेहतर होगा आप डॉक्टर के पास जाकर हल निकालें.
  • थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि से आपकी सांस फूलने लगे, सीढ़ियां चढ़ने पर, चलने फिरने पर भी सांस फूल जाए तोसमझ जाएं कि डायटिंग करके हेल्दी लाइफ़स्टाइल से वज़न कंट्रोल किया जाए.
Healthy Foods
  • रूटीन चेकअप पर पता चले कि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. अगर आप वज़न कम करेंगे तो ब्लड प्रेशर भी कमहो जाएगा क्योंकि आपके कार्डीओवैस्क्युलर सिस्टम को शरीर को ऑक्सिजन सप्लाई करने के लिए कम मेहनतकरनी पड़ेगी. 
  • अगर आपका वजन बढ़ता है तो आप टाइप 2 डायबिटीज़ के रिस्क पर आ जाते हैं. बहुत ज़्यादा प्यास लगने लगे, बार बार यूरिन जाना पड़े और पिछले कुछ समय में फैट्स भी बढ़ा हो तो सतर्क हो जाएं. 
  • कॉलेस्टरॉल का बढ़ना भी बड़ा संकेत है और यह मात्र वज़न कम करने से कम नहीं होगा बल्कि हेल्दी ईटिंग, डायटिंगऔर एक्सरसाइज़ से कम होगा.
  • परिवार में कोलोन या ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री है तो आपको शुरुआत से ही डायटिंग को अपनी आदत में शुमार करलेना चाहिए, क्योंकि इस तरह के कैंसर का मोटापे से गहरा संबंध होता है.
Healthy Lifestyle

डायटिंग का मतलब ना खाना नहीं, बल्कि हेल्दी खाना होता है

  • अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि डायटिंग का मतलब है खाना बंद कर दो या एकदम कम कर दो.
  • लेकिन यह सोच ग़लत है, डायटिंग का मतलब होता है अनहेल्दी चीज़ों को छोड़कर हेल्दी चीज़ें खाएं. 
  • फ़्राइड चीज़ों को बेक्ड से रिप्लेस करें.
  • चीनी और स्टार्च का सेवन कम कर दें.
  • नमक कम कर दें.
  • ग्रीन टी का सेवन करें, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं.
  • प्रोटीन का सेवन बेहद ज़रूरी है. प्रोटीन के सोर्स- दालें, ड्राइफ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, दही, फिश, सोयाबीन, अंडा.
  • फ़ाइबर का अधिक इस्तेमाल करें. फल और सब्ज़ियां फ़ाइबर का अच्छा सोर्स है. खीरा, गाजर, सलाद और हरीपत्तेदार सब्जियां ज़रूर खाएं.
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें. यह टॉक्सिंस को बाहर करता है, मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है.
  • गुनगुना पानी पीएं. हो सके तो सुबह शहद और नींबू गुनगुने पानी में लें.
  • हेल्दी ब्रेकफ़ास्ट लें, रिसर्च बताते हैं कि नाश्ता आपको डायबिटीज़ के ख़तरे से बचाता है. जो लोग नाश्ता करते हैंउन्हें डायबिटीज़ का ख़तरा नाश्ता ना करनेवालों की तुलना में कम रहता है.
  • इतना ही नहीं ब्रेकफ़ास्ट आपको मोटापे से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उनकी वेस्ट लाइन नाश्ता करनेवालों की तुलना में अधिक होती है. भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
Healthy Lifestyle Tips
  • जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं. 
  • नाश्ते से पाचन तंत्र संतुलित रहता है. यह क्रेविंग से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उन्हें दिनभर में मीठा खानेकी, जंक फ़ूड की और चाय आदि की तलब ज़्यादा लगती है, जिससे वो अधिक कैलरीज़ का सेवन कर लेते हैं औरमोटापे का शिकार होने लगते हैं.
  • एक बार में ज़्यादा खाने की बजाए अपनी मील्स को डिवाइड करें. दिन में 4-6 बार छोटी-छोटी मील्स लें. 
  • हेल्दी सूप्स और सलाद को शामिल करें. 
  • रात को हल्का खाना लें और सोने से दो घंटे पहले डिनर कर लें. 
  • खाने के हेल्दी ऑप्शन्स की लिस्ट बना लें, जैसे- खिचड़ी, ओट्स, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, ब्राउन राइस, दाल, इडली, सादा डोसा, उपमा, पोहा आदि.
  • डायट के अलावा रोज़ आधा घंटा कुछ एक्सरसाइज़, वॉक या योगा ज़रूर करें.
  • नींद पूरी लें और स्ट्रेस कम लें.
Healthy Lifestyle
  • सबसे ज़रूरी कि वज़न बढ़ने पर जब कपड़े टाइट होने लगें तो नए साइज़ के कपड़े लेने की बजाय अपना फ़िटनेसलेवल बढ़ाकर, हेल्दी ईटिंग कर, डायट और कसरत से वज़न कम करने पर फ़ोकस करें और उन्हीं कपड़ों में फिटहोने पर ध्यान दें! क्योंकि स्वास्थ्य से बड़ा धन कोई नहीं, वज़न बढ़ने पर कई बीमारियां एक साथ घेर लेती हैं औरइनमें से कई बीमारियां काफ़ी गंभीर और जानलेवा तक हो सकती हैं. आज से बल्कि अभी से अपनी बॉडी के संकेतोंको पहचानें, उन्हें नज़रअंदाज़ क़तई ना करें और उनपर ध्यान देकर एक्शन लें. स्वस्थ रहें और हेल्दी खाएं!
  • भोलू शर्मा

यह भी पढ़ें: शिशु को इन्फेक्शन से बचाने के स्मार्ट टिप्स.. (Smart Tips To Protect Your Baby From Infection..)

हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक हमारे पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा रहता है, इसलिए हेल्दी रहने के लिए पाचन तंत्र औरमेटाबॉलिज़्म का सही और हेल्दी रहना बेहद ज़रूरी है. कैसे रखें अपने पाचन तंत्र का ख़्याल आइए जाने.

हो सही शुरुआत: जी हां, दिन की शुरुआत सही होगी तो पूरा दिन सही होगा और सेहत भी दुरुस्त रहेगी. सही शुरुआत केलिए हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता ज़रूरी है. नाश्ता पौष्टिक होना ज़रूरी है- फल, ड्राई फ़्रूट्स, दलिया, उपमा, पोहा, कॉर्नफ़्लेक्स, दूध, फ़्रूट जूस, अंकुरित अनाज,दालें, अंडा, पराठे, दही आदि. पौष्टिक नाश्ता आपका दिनभर संतुष्ट रखताऔर इससे पाचन तंत्र संतुलित रहता है. ये दिनभर की ऊर्जा प्रदान करता है. एसिडिटी से राहत दिलाता है, क्योंकि अगरआप नाश्ता नहीं करते हैं, तो ऐसिड बनने लगती है, जो काफ़ी तकलीफ़ देती है.

हेल्दी डायजेशन के लिए प्रोबायोटिक्स ज़रूरी है: क्या आप जानते हैं कि बैक्टीरिया भी हेल्दी और अनहेल्दी होते हैं. हेल्दीबैक्टीरिया पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. हेल्दी बैक्टीरिया आपको प्रोबायोटिक्स सेमिलते हैं. आप प्रोबायोटिक्स के प्राकृतिक स्रोतों को भोजन में शामिल करें. दही, ख़मीर वाले प्रोडक्ट्स, छाछ व रेडीमेडप्रोबायोटिक्स ड्रिंक्स का सेवन करें.

Digestive Health Tips

स्ट्रेस से दूर रहें: स्ट्रेस यानी तनाव पूरे शरीर व ख़ासतौर से पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है. तनाव के कारण पेट में ब्लड व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससेपेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होने लगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है. इसके अलावा तनाव से नींद भी नहीं आती और नींद पूरी ना होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता. 

प्रोटीन रिच फूड खाएं: ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है. प्रोटीन के लिए आप पनीर, चीज़ व अन्य डेयरी प्रॉडक्ट्स शामिल करसकते हें. इसके अलावा अंडा, चिकन, फिश भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं.

Digestive Health Food

सेब, केला और पपीता ज़रूर खाएं: सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. सेबफाइबर का अच्छा स्रोत भी है और गुड बैक्टीरिया को पनपाने में भी मदद करता है. पपीते में विटामिन ए, बी और सी औरकई तरह के एन्ज़ाइम्स होते हैं, जो खाने को डायजेस्ट करने में मदद करते हैं. रिसर्च बताते हैं कि पपीता खाने सेडायजेस्टिव सिस्टम में सुधार होता है. केले में फाइबर और पेक्टिन भरपूर मात्रा में होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिएबहुत फायदेमंद होता है.

डायट में फाइबर शामिल करें: भोजन में फाइबर जितना ज़्यादा होगा पेट उतना ही स्वस्थ होगा क्योंकि आपको क़ब्ज़ कीसमस्या नहीं होगी. फाइबर कोलोन की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और पेट साफ़ रखता है. अपने भोजन में साबूतअनाज, दालें, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, छिलके सहित आलू, मकई, बींस व ओट्स को शामिल करें.

अदरक का सेवन करें: अदरक पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह पाचन को बेहतर करता है. अदरक के टुकड़ेकरके ऊपर से नींबू का थोड़ा सा रस डालें और भोजन के साथ खाएं. आपका हाज़मा बेहतर होगा. अपच की समस्या नहीं होगी.

Digestive Health Tips

लहसुन मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करता है: लहसुन को भी डायट में शामिल करें. यह ना सिर्फ़ मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है बल्कि वज़न कम करने में भी सहायक है और हार्ट को भी हेल्दी रखता है.

जीरा भी है बेहद हेल्दी: जीरा आंतों को और गर्भाशय को भी साफ़ रखता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. जीरा भूख भीबढ़ाता है और पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत दिलाता है.

ग्रीन टी है मेटाबॉलिज़्म बूस्टर: जी हां, ग्रीन टी ज़रूर लें इससे पाचन बेहतर होता है. यह मेटाबॉलिज़्म बूस्टर मानी जाती हैऔर वज़न भी कम करती है.

Digestive Health Tips

साबूत अनाज और बींस: यह पाचन तंत्र को ठीक रखने में सहायक होते हैं. क़ब्ज़ से बचाते हैं और पेट संबंधी कईसमस्याओं से राहत दिलाते हैं. इसी तरह बींस में भी फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर करता है. बींस से गुड़बैक्टीरिया भी बढ़ते हैं और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां: ये प्रोटीन व आयरन का भी अच्छा सोर्स मानी जाती हैं और विटामिंस से भरपूर होती हैं. साथ ही साथये पेट को व पाचन तंत्र को हेल्दी रखती हैं. ये फाइबर का बेहतर स्रोत होती हैं, इनमें ख़ासतौर से पालक और गोभी में कईपोषक तत्व- फोलेट, विटामिन ए, सी और के होता है. शोध बताते हैं कि हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में एक ख़ास तरह का शुगरहोता है जो आंतों के हेल्दी बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) के निर्माण को बढ़ाता है.

रसीले व मौसमी फल व ड्राई फ़्रूट्स खाएं: फल पेट को हेल्दी रखते हैं. क़ब्ज़ की समस्या नहीं होने देते. फाइबर से भरपूरहोते हैं. ड्राई फ़्रूट्स भी फाइबर से भरपूर होते हैं और आंतों को हेल्दी रखते हैं. हाल ही के रिसर्च से पता चला है कि प्रूनयानी सूखा आलूबखारा आंतों, मुंह और वजाइना में पाया जानेवाला ख़ास क़िस्म का बैक्टीरिया के निर्माण में सहायकहोता है जिससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है. इसी तरह से खजूर भी पेट के लिए काफ़ी हेल्दी माना जाता है.

Boost Metabolism

हाईड्रेटेड रहें: पानी ख़ूब पिएं क्योंकि यह ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. शरीर मेंपानी व नमी की कमी ना होने पाए. नींबू पानी, नारियल पानी या ताज़ा फल व सब्ज़ी का जूस भी लें. 

एक्टिव रहें, एक्सरसाइज़ व योगा करें: रोज़ाना 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें, वॉक करें, एक्टिव रहें. लिफ़्ट की बजायसीढ़ियों का इस्तेमाल करें. योगा भी कर सकते हैं. साइक्लिंग, स्विमिंग भी कर सकते हें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियोंको लचीला बनाएगा और पाचन को बेहतर. वरना शारीरिक गतिविधियों की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या होने लगेगी.

अनहेल्दी चीज़ों से रहें दूर: पाचन तंत्र की हेल्थ के लिए ज़रूरी है कि अनहेल्दी चीज़ों से भी दूरी बनाए रखें. शराब व कैफेनका सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई करते हैं और डीहाईड्रेट करते हैं. साथ ही ये क़ब्ज़ की समस्या भीपैदा करते हैं. पानी के नाम पर शुगरी ड्रिंक ना पिएं. तला हुआ ज़्यादा ना खाएं. प्रोसेस्ड फूड व शुगर का सेवन कम या नाकरें. मैदा और ज़्यादा मसालेदार भोजन ना करें, क्योंकि ये क़ब्ज़, गैस, एसिडिटी, अपच को बढ़ाकर पाचन को कमज़ोरकरते हैं.

पूर्वा शर्मा

यह भी पढ़ें: ये हैं वज़न घटाने के 10 आसान और कुदरती तरीके (10 Easy Ways to Lose Weight Naturally)

हेल्दी तो हम सभी रहना चाहते हैं लेकिन कुछ छोटे छोटे सूत्र हैं जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते, अगर ये सूत्र और सीक्रेट हमसमझ जाएँ तो हेल्दी रहना आसान हो जाए. 

आइए जानते हैं इन्हीं सीक्रेट सूत्रों को-

  • सकारात्मक रहें और अपना महत्व समझें. 
  • खुद पर ध्यान देना ज़रूरी है इस तथ्य को समझ लें.
  • दूसरों के लिए जीना अच्छी सोच है लेकिन उससे पहले खुद के लिए जीना सीखें.
  • आप हेल्दी रहेंगे तभी तो दूसरों के लिए भी कुछ कर पाएँगे.
  • हाईड्रेटेड रहें ताकि शरीर में पानी व नमी की कमी ना हो. पानी ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रियाको बेहतर बनाता है.
  • फ़िज़िकली एक्टिव रहें. एक्सरसाइज़ व योगा करें. आप भले ही कितना भी हेल्दी खा लें पर जब तक शरीर कोक्रियाशील नहीं रखेंगे तब तक कहीं न कहीं कोई कमी रह ही जाएगी. 
  • रोज़ाना कम से कम आधा घंटा कसरत करें. जॉगिंग और वॉकिंग करें.
  • लिफ़्ट की बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाएगा और पाचन कोबेहतर. 
  • ध्यान और योगा भी कर सकते हैं. मेडिटेशन से ब्रेन में हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होते हैं और एक नई ऊर्जा का एहसासहोता है.
  • ध्यान रहे फ़िज़िकल एक्टिविटी की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है.
Sutras For Healthy Life
  • हेल्दी खाना खायें. अपने दिन की शुरुआत पोषण भरे नाश्ते से करें. 
  • भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता अच्छी तरह और हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
  • रिसर्च बताते हैं कि जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं.
  • जंक फूड से बचें. हेल्दी खाना खाएँ. 
  • मंचिंग के लिए भी हेल्दी ऑप्शन पर ध्यान दें. फ़्राइड सनैक्स की बजाए ड्राई फ़्रूट्स, बेक्ड फ़ूड रखें.
  • स्ट्रेस ना लें, क्योंकि तनाव पूरे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इस से गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या होसकती है.
  • स्ट्रेस के कारण पेट में रक्त व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससे पेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होनेलगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है.
Sutras For Healthy Life
  • शराब व कैफेन का सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई और डीहाईड्रेट करते हैं.
  • अपने भोजन में साबूत अनाज, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, मकई, बींस, ओट्स, दालें व छिलके सहित आलू को शामिलकरें.
  • मौसमी फल खाएँ और अपने खाने में हर रंग की फल-सब्ज़ियाँ शामिल करें.
  • दही व छाछ का सेवन करें, क्योंकि इनमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं जो पेट और आँतों को स्वस्थ रखते हैं.
  • पनीर का सेवन करें क्योंकि यह वज़न को भी नियंत्रित रखने में कारगर है.
  • हफ़्ते में एक या दो दिन अपनी क्रेविंग्स के लिए रखें. मनपसंद कुछ खाएँ क्योंकि अगर आप बहुत ज़्यादा स्ट्रिक्टडायट करते हो तो बहुत ज़्यादा समय तक उसको फ़ॉलो कर पाना बेहद मुश्किल है.
  • हेल्दी सूप को अपने डायट का हिस्सा बनाएँ. 
  • किचन में मौजूद मसाले भी बहुत हेल्दी होते हैं , काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलाइची,धनिया आदि को खाने में शामिल करें.
Sutras For Healthy Life
  • अगर गले में ख़राश या सिर में दर्द हो तो चटकीभर दालचीनी पाउडर को पानी के साथ लें. यही नहीं दालचीनी वज़नभी कम करती है. इसे सलाद या दही में मिलाकर ले सकते हैं. यह मुँहासों को भी कम करता है. दालचीनी पाउडर कोपानी में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और अप्लाई करें.
  • अगर कफ़ की समस्या हो तो सरसों के तेल में लहसुन और सेंधा नमक मिलाकर गुनगुना करें और सीने पर मालिशकरें.
  • वज़न को नियंत्रण में रखें क्योंकि बढ़ता वज़न कई बीमारियों को जन्म देता है. हार्ट से लेकर ब्लड प्रेशर औरडायबिटीज़ तक जैसी समस्याएँ बढ़ते वज़न के कारण हो सकती हैं.
  • वज़न कम करने के लिए छोटे गोल्स सेट करें और धैर्य ना खोएँ.
  • वज़न कम करने में नींबू और शहद बेहद कारगर हैं. गुनगुने पानी में रोज़ सुबह खाली पेट सेवन करें.
  • स्पोर्ट्स, स्विमिंग या डांस क्लास से जुड़ सकते हैं.
  • अपने शौक़ को ज़रूर पूरा करें, उन्हें मरने ना दें, क्योंकि यही शौक़ आपको जीवंत बनाए रखते हैं.
  • पर्सनल हाइजीन से लेकर ओरल हाइजीन तक के महत्व को समझें और उनपर ध्यान भी दें.
Sutras For Healthy Life
  • हेल्दी सोशल लाइफ़ मेंटेन करें, क्योंकि इससे आपको अकेलापन और डिप्रेशन नहीं होगा. लोगों की मदद करें यहआपको बेहतर महसूस कराएगा.
  • पार्टी करें, दोस्तों से मिलें और रिश्तों में इंवेस्ट करें.
  • धोखा ना दें क्योंकि यह आपमें अपराधबोध की भावना को जन्म देगा और आप भीतर से अनहेल्दी मेहसूस करेंगे.
  • ज़िम्मेदारी लेना सीखें, यह आपमें आत्मविश्वास बढ़ाएगा.
  • नींद पूरी लें, यह आदत आपको कई तरह के तनावों से बचाएगी और साथ ही दिनभर ऊर्जावान रखेगी. साथ ही यहडिप्रेशन जैसी नकारात्मक भावनाओं से भी आपका बचाव करती है.
  • ओवर ईटिंग और ओवर स्लीपिंग से भी बचें, ये आपको अनहेल्दी बनाती हैं.
  • बहुत ज़्यादा टीवी ना देखें, यह आपको आलसी और इनएक्टिव तो बनाएगा ही साथ ही रिसर्च बताते हैं कि ज़्यादाटीवी देखने वालों की लाइफ़ कम होती जाती है.
Sutras For Healthy Life
  • इसी तरह मोबाइल और बहुत ज़्यादा सोशल साइट्स पर भी ना बने रहें. ये आपके रिश्तों की सेहत के लिएहानिकारक है जिसका असर आपने शरीर पर भी पड़ता है.
  • कुकिंग थेरेपी आज़माएँ. रिसर्च के अनुसार जब आप खुद खाना बनाते हैं तो स्ट्रेस कम होता है, आप बेहतर महसूसकरते हैं, क्रिएटिव बनते हैं और हेल्दी रहते हैं.
  • नए दोस्त बनाएँ और हो सके तो पेट्स रखें. ये आपको खुश और हेल्दी रखने में मदद करते हैं.
  • खुश होने का मौक़ा ना छोड़ें. बड़ी चीज़ों की बजाए छोटी छोटी चीज़ों में ख़ुशियाँ देखें. यह आपको सकारात्मकबनाती है और मन के संतोष को दूर करती हैं.
  • ये तमाम बातें आपको पहले से ही पता होती हैं लेकिन कमी सिर्फ़ जज़्बे की होती है. बेहतर होगा बिना देर किएआज से ही हेल्दी लाइफ़ के इन सीक्रेट और सूत्रोंको अमल में लाया जाए.

सरस्वती शर्मा

यह भी पढ़ें: हेल्थ अलर्ट- मास्क पहनते समय इन बातों का रखें ख़्याल… (Health Alert- The Do’s And Don’ts When It Comes To Masks…)

 

The Fitness Project by Rujuta Diwekar

फिटनेस प्रोजेक्ट: घी खाएं बिना डरे, बिना शंका व अपराधबोध के… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र (Eat Ghee Without Fear, Without Guilt, Without Doubt: The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

फिटनेस प्रोजेक्ट की थीम के अंतर्गत हमने आपको पहले हफ्ते की गाइडलाइन्स की जानकारी दी थी. अब आप जानें कि दूसरे हफ्ते में आपको कैसे डायट व फिटनेस को प्लान करना है.
ब्रेकफास्ट-लंच-डिनर में 1 टीस्पून घी का इस्तेमाल ज़रूर करें. बिना किसी डर के, बिना किसी शंका के, बिना किसी झिझक के और बिना अपराधबोध के बेहिचक, बेझिझक देसी घी का इस्तेमाल ज़रूर करें.

दूसरा हफ्ता- गाइडलाइन 2- कैसे शुरुआत करें?

– आप अपना नाश्ता अपनी पहली मील, जिसे आप पहले हफ्ते से फॉलो कर रहे हैं, उसके 20-90 मिनट बाद ले सकते हैं.

– दोपहर में यदि मीठा खाने की इच्छा हो या फिर आलस महसूस हो यानी आपको यह लगे कि आप अपनी क्षमता का मात्र 50% ही इस्तेमाल करके काम कर रहे हैं, तो लंच में एक्स्ट्रा टीस्पून देसी घी का डालें.

– यदि आपको कब्ज़ की समस्या रहती है, पाचन संबंधी समस्या रहती है या अच्छी नींद नहीं आती, तो रात के खाने में भी एक अतिरिक्त टीस्पून घी का इस्तेमाल करें.

घी के इस्तेमाल के अन्य तरीके, ख़ासतौर से सर्दियों में अपने जोड़ों को लचीला व त्वचा को ग्लोइंग इफेक्ट देने के लिए-
– घी में मखाने भूनकर खाएं, मिड मील यानी चाय के साथ लगभग 4 बजे.

– देसी घी में बने गोंद के लड्डू, ख़ासतौर से यदि आप उत्तर भारत या दुनिया में कहीं भी बेहद ठंडी जगहों पर रहते हों, तो मिड मॉर्निंग मील (नाश्ते के 2-3 घंटे बाद) के तौर पर खाएं.

– घी और गुड का सेवन करें, यदि आपको पीएमएस यानी पीरियड्स से पहले की तकलीफ़ होती हो, थकान महसूस होती हो या आपको हीमोग्लोबिन स्तर कम हो तो.

यह भी पढ़ें: फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- Fitness Is Simple And Uncomplicated- The Fitness Project By Rujuta Diwekar)

आमतौर पर पूछे जानेवाले सवाल

मुझे हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर आदि की समस्या हो, तो क्या घी का सेवन किया जा सकता है?
जी बिल्कुल. घी मेटाबॉलिज़्म में लिपिड्स को बढ़ाकर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है. बेहतर होगा पैक्ड बिस्किट्स न खाएं और अल्कोहल बंद करें, न कि घी. घी पूरी तरह सुरक्षित व हेल्दी है.

मुझे डायबिटीज़, पीसीओडी है और मैं ओवरवेट हूं, तो क्या मैं घी ले सकता/सकती हूं?
जी हां, ज़रूर ले सकते हैं, क्योंकि घी में भी एसेंशियल फैटी एसिड का एक प्रकार होता है, जो वज़न और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है.

हम देसी घी में ही खाना बनाता है, इसके बाद भी क्या ऊपर से अतिरिक्त घी डालेन की आवश्यकता है?
यह पूरी तरह आप पर निर्भर है. यह ख़्याल रखें कि आप दिन में 3-6 टीस्पून घी का सेवन करें. घी खाने का स्वाद बढ़ाता है, न कि उसे मास्क करता है.

हम तेल में खाना बनाते हैं, तो क्या हमें ऊपर से घी मिलाना चाहिए?
जी हां, ज़रूर.

क्या स्टोर से ख़रीदा घी ठीक रहेगा या हमें घर पर बनाना चाहिए?
आपको यह ध्यान में रखना होगा कि देसी गाय के दूध से बना घी हो. बड़े ब्रान्ड्स की बजाय छोटी गौशाला या महिला गृह उद्योग जैसी संस्थाओं से लेना श्रेयस्कर है.

अगर देसी गाय का घी उपलब्ध न हो, तो क्या भैंस का घी इस्तेमाल किया जा सकता है?
जी हां, आप कर सकते हैं. यह बड़े ब्रान्ड्स से घी ख़रीदने से कहीं बेहतर होगा.

भारत के बाहर रहनेवालों के लिए क्या विकल्प हैं?
कल्चर्ड व्हाइट ऑर्गैनिक बटर या क्लैरिफाइड बटर, जो हेल्थ फूड स्टोर्स पर मिलता हो. बेहतर होगा कि खुले में स्वतंत्र चरनेवाली या घास खानेवाली गाय के ही डेयरी प्रोडक्ट्स यूज़ करें.

क्या हमें मांसाहार पर भी घी का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वो तो पहले से ही काफ़ी फैटी होता है.
आपको ज़रूर देसी घी यूज़ करना चाहिए, क्योंकि घी का अनूठा फैटी एसिड स्ट्रक्चर शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है.

हमें कैसे पता चलेगा कि हर खाने में कितना और कितनी मात्रा में घी का इस्तेमाल करना है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खा रहे हैं और यह जानकारी एक परिपेक्ष में सामान्यतौर पर समझ के लिए है. दाल-चावल, खिचड़ी या रोटी-सब्ज़ी में कम घी यूज़ होता है, जबकि पूरन पोली, दाल-बाटी, बाजरा रोटी में अधिक घी की आवश्यकता होती है. यदि किसी तरह का कंफ्यूज़न हो, तो घर की बुज़ुर्ग यानी दादी-नानी से सलाह लें.

घी व उसके इस्तेमाल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इंडियन सुपरफूड्स का घी चैप्टर पढ़ें.

घी के हेल्थ बेनीफिट्स के लिए देखें यह वीडियो

https://www.facebook.com/rujuta.diwekar/videos/10155263095883424

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

Ishi Khosla

जानें क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम… यूं कम करें पेट के फैट्स- इशी खोसला (About Metabolic Syndrome… How To Reduce Belly Fat- Ishi Khosla)

अक्सर लो अपने पेट की चर्बी से परेशान रहते हैं, डायटिंग, एक्सरसाइज़ करने पर भी उन्हें वो रिज़ल्ट नहीं मिल पाता, जिसकी वो उम्मीद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वो पेट के फैट्स के मूल कारणों को नहीं जान पाते. इस विषय पर अधिक जानते हैं कि इशी खोसला किस तरह से मार्गदर्शन करती हैं. इशी खोसला अपने आप में जाना-माना नाम है. वो प्रैक्टिसिंग क्लिनिकल न्यूट्रिशिनिस्ट, कंसल्टेंट और राइटर हैं. आप भी उनके बताए डायट व हेल्थ प्लान्स फॉलो करें और हमेशा हेल्दी रहें.

पेट के फैट्स की प्रमुख वजहें हैं- हाई ब्लड प्रेशर, गुड फैट्स की कमी, बैड फैट्स की अधिकता, ट्रायग्लिसरॉइड्स की अधिक मात्रा, ब्लड शुगर की अधिकता या फिर वंशानुगत डायबिटीज़- जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम या सिंड्रोम एक्स भी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, पर रिस्क फैक्टर्स का कॉम्बीनेशन है.

सवाल यह है कि इन सबके चलते ज़िद्दी फैट्स को कैसे भगाया जाए? हेल्दी ईटिंग, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट से यह किया जा सकता है.

शरीर के वज़न को नियंत्रित रखें: संतुलित खानपान व क्रियाशीलता से यह हो सकता है. साबूत अनाज, नट्स, फ्रूट्स, सब्ज़ियां, दालें और बीजों से अपने डायट को हेल्दी बनाएं. मीठा खाना-पीना व अल्कोहल का सेवन कम कर दें.

गुड कैलोरीज़वाला भोजन लें: फाइबर, गुड कैलोरीज़, प्रोटीन, कॉम्प्लैक्स कार्बोहाइड्रेट को अपने डायट का हिस्सा बनाएं.

हाई कैलोरी फुड से बचें: बहुत ज़्यादा ऑयली, फैटी, फ्राइड फूड न लें. मीठा व स्वीट ड्रिंक्स से बचें. कम पोषण वाले भोजन को अवॉइड करें. नमक कम खाएं. बेहतर होगा पिज़्ज़ा, बर्गर व अन्य जंक फूड से दूर रहें.

स्मार्ट स्नैकिंग करें: स्नैकिंग के लिए बेक्ड व रोस्टेड चीज़ें ख़रीदें. इसके अलावा ड्राय फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स आदि लें.

फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं: वॉकिंग करें, जॉग करें. लाइट एक्सरसाइज़ करें. रोज़मर्रा की दिनचर्या में भी लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफिस में बीच-बीच में जगह से उठकर राउंड लगाकर आएं. इस तरह अपनी फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं. इससे ब्लड शुगर, व प्रेशर के साथ-साथ आपका वज़न भी काफ़ी नियंत्रित रहता है.

स्ट्रेस मैनेज करें: मेडिटेशन, योगा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और पॉज़िटिव सोच बेहतरीन तरी़के हैं अपने स्ट्रेस को मैनेज करने के. स्ट्रेस आए इससे पहले ही यदि इन हेल्दी एक्टिविटीज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो स्ट्रेस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. बहुत से लोग स्ट्रेस ईटिंग भी करते हैं, ऐसे में स्ट्रेस कम होगा, तो आप बेवजह कैलेरीज़ नहीं खाएंगे.

दरअसल ईटिंग हैबिट्स और डायटिंग को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां हैं हम सबके मन में. इसे बेहतर तरी़के से समझने के लिए इस वीडियो को फॉलो करें, पर इसे मेडिकल एडवाइस के तौर पर न लें.

सौजन्य: http://www.theweightmonitor.com/

Psoriasis

सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

हरी-भरी वादियों, बर्फ से ढंके पहाड़ों और सूरज की रोशनी से भरपूर, सुनहरे समुद्रतटों पर जाने का मजा ही कुछ और है, लेकिन यदि आपको सोरायसिस हो तो? ऐसे लोगों को यात्रा करने के दौरान असहजता हो सकती है. यदि वे मामूली से लेकर गंभीर प्रकार के सोरायसिस से ग्रस्‍त हैं. खासकर लंबी यात्रा में.सोरायसिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जिसमें त्वचा की नई कोशिकाएं सामान्य की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होती हैं.

आमतौर पर हमारा शरीर पुरानी कोशिकाओं की जगह भरने के लिये प्रत्येक 10 से 30 दिन में त्वचा की नई कोशिकाएं बनाता है. सोरायसिस में त्वचा की नई कोशिकाएं 3 से 4 दिन में ही बन जाती हैं और शरीर को पुरानी कोशिकाएं हटाने का समय नहीं मिलता है. इससे त्वचा की सतह पर परत आ जाती है और त्वचा शुष्क, खुजली वाली, पपड़ीदार दिखाई देने लगती है और उस पर लाल चकत्ते या चमकीली परत आ जाती है.

सोरायसिस से पीड़ित लोगों को यदि बिना किसी परेशानी के एक आरामदायक यात्रा का आनंद उठाना है तो उन्‍हें बस पहले से योजना बनाना जरूरी है. चिकित्सा विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कोई विशेष मनाही नहीं हैं, उनके लिए हल्की धूप वाला मौसम ठंडे और शुष्क मौसम की तुलना में बेहतर रहता है.  डॉ. शेहनाज़ अरसीवाला, त्वचा रोग विशेषज्ञ, सैफी हॉस्पिटल एवं प्रिंस अली खान हॉस्पिटल और मेडिकल डायरेक्टर, रीन्यूडर्म सेंटर स्किन हेयर लेजर्स एंड एस्थेटिक्स सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कुछ उपयोगी टिप्स दे रही हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए.

 

  1. सबसे पहले योजना बनाएं : चाहे आप छोटी यात्रा पर जा रहे हों या फिर लंबे समय के लिए, आपको दो सप्ताह पहले से तैयारी आरम्‍भ कर देनी चाहिए. ठहरने के दौरान की गतिविधियों को निश्चित करना और यात्रा के लिये आवश्यक चीजों को रखना अच्छा होता है. इन चीजों में आपकी दवाएं भी शामिल हैं और वे आपके सामान में सरलता से शामिल होनी चाहिए. यात्रा के दौरान अपनी भोजन सम्बंधी आदतों का नियमित ध्यान रखें और शराब से बचें. इस बारे में आपके त्वचा रोग विशेषज्ञ बेहतर सलाह दे सकते हैं. तनाव से सोरियासिस की पीड़ा बढ़ जाती है, इसलिये अपने यात्राक्रम की पहले से योजना बनाकर आप अंतिम मिनट की परेशानियों से बच सकते हैं. सोरियासिस के रोगियों को यात्रा पर जाने से पहले खूब आराम करने और अपनी त्वचा को अधिक से अधिक नम रखने की सलाह भी दी जाती है.

 

  1. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास अवश्य जाएं: छुट्टियों पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना अच्छा होता है कि आपकी त्वचा की स्थिति अच्छी हो, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जाना महत्वपूर्ण है. सुनिश्चित करें कि आपकी दवाओं के सभी पर्चे व्यवस्थित हों और लिखित पर्चों की प्रति भी मांगें, ताकि यात्रा के समय जरूरत पड़ने पर वे काम आ सकें. यदि आपको बायोलॉजिक्स के इंजेक्शन लगते हैं, तो इसके बारे में अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ से पूरी जानकारी प्राप्‍त कर लें. इस जानकारी में वह महत्वपूर्ण वर्णन भी होना चाहिये, जो आपकी यात्रा के स्थान पर वहाँ के त्वचा रोग विशेषज्ञ से मदद लेने में काम आ सके.

 

  1. पैकिंग सावधानी से करें और जरूरी सामान व्‍यवस्थित रखें : आपके गंतव्य के लिये उपयुक्त कपड़े, जूते और अन्य चीजें रखें. उदाहरण के लिए यदि आप गर्म, आर्द्र क्षेत्र में जा रहे हैं, तो हल्के, ढीले, पसीने को बाहर निकालने वाले कपड़े रखें. यदि आप ठंडे स्थान पर जा रहे हैं, तो टोपी, दस्ताने और स्कार्फ रखें, ताकि आपकी त्वचा सुरक्षित रहे. त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए मेडिकैटेड शैम्पू, मॉइश्चराइजर और साबुन या क्लींजर रखें और उनके द्वारा बताया गया सनस्क्रीन ले जाना कतई न भूलें. यात्रा के समय दवाएं लेना न भूलें. किसी भी तरह के दर्द से बचने के लिये अच्छी नींद लें.

 

  1. संक्रमण के जोखिम से बचें: कुछ प्रकार के संक्रमण सोरियासिस की पीड़ा बढ़ा सकते हैं. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के निर्देशानुसार उपचार के क्रम में रक्त की आवश्यक जांचें करवाएं. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको संक्रमण का जोखिम नहीं है. यात्रा के दौरान स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें और वायरल संक्रमण वाले व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें. स्वच्छ रहने के लिए अपने हाथ धोएं और त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए सैनिटाइजर का उपयोग करें. शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा होना भी बहुत जरूरी है.

यह भी पढ़ें: अक्टूबर में करें इन इंडियन डेस्टिनेशन की सैर (Best Places To Visit In October In India)

 

 

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज (Postmenopausal Bleeding: Causes And Treatments)

Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: एलर्जी से बचने के 15 अचूक उपाय (15 Smart Ways To Prevent Allergies)

Tips For Managing Depression
डिप्रेशन को ऐसे करें मैनेज (Self Help: Tips For Managing Depression)

डिप्रेशन ऐसी नकारात्मक भावना, जहां आपकी सारी ऊर्जा लगभग ख़त्म हो जाती है, उम्मीदें, आशाएं, ख़ुशियां… सब कुछ धूमिल-सी नज़र आती हैं. ज़िंदगी बेकार लगने लगती है… ऐसा महसूस होता है जैसे इन परिस्थितियों से निकलना अब नामुमकिन है, ज़िंदा रहना मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में बहुत ज़रूरी हो जाता है कि आप ख़ुद कुछ प्रयास करें, ताकि अपने इस डिप्रेशन को मैनेज कर सकें और पॉज़िटिव सोच अपना सकें.

बाहर जाएं, कनेक्टेड रहें: यह सच है कि डिप्रेशन के दौरान बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि आपमें वो ऊर्जा नहीं रहती, लेकिन थोड़ा-सा प्रयास आपकी मदद कर सकता है. सोशल गैदरिंग्स में जाएं, दोस्तों से मिलें, रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहें. अकेलापन आपकी तकलीफ़ और बढ़ाएगा. बेहतर होगा, नए दोस्त बनाएं और पुरानों से मिलना-जुलना शुरू करें. आपके क़रीबी हमेशा आपकी मदद करने को तत्पर रहेंगे, इसलिए अपनी तकलीफ़ उनसे शेयर करें, इससे आपका मूड बदलेगा और मन हल्का होगा.

किस तरह से कनेक्ट करें?

  • जिनके साथ आप सुरक्षित महसूस करते हों और जिन पर विश्‍वास करते हों, उनसे मिलें.
  • मिलने का अर्थ है आमने-सामने मिलना. यह सही है कि सोशल नेटवर्किंग और फोन कॉल्स से भी कनेक्ट किया जा सकता है, लेकिन फ़ायदा अधिक तभी होगा, जब फेस टु फेस मिलेंगे.
  • दूसरों की सहायता करने का मन बनाएं. दूसरों के लिए कुछ करेंगे, तो आपको कहीं न कहीं संतुष्टि महसूस होगी. मदद चाहे छोटी ही क्यों न हो, किसी के काम आने की भावना आपको पॉज़िटिव बनाएगी.
  • पेट्स रखें और उसके साथ समय बिताएं. यह काफ़ी कारगर तरीक़ा है डिप्रेशन से निपटने का. जानवरों से प्यार करते हैं, तो उनकी केयर करें, इससे आप बेहतर महसूस करेंगे.
  • एक्सरसाइज़, वर्कआउट, योग व मेडिटेशन करें. यह काफ़ी अच्छा उपाय है. इससे आप ऊर्जा व नई शक्ति महसूस करेंगे. मेडिटेशन व योग से मन शांत होगा और नकारात्मक भाव बाहर निकलेंगे.
  • एक्सपर्ट की मदद लें. हिचकिचाएं नहीं. आप सच में अच्छा महसूस करेंगे. ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बदलेगा और डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलेगी.

कनेक्शन के बेस्ट टिप्स

  • किसी क़रीबी या भरोसेमंद से अपनी तकलीफ़ व दुख का कारण शेयर करें.
  • किसी दोस्त के साथ कॉफी या टी डेट पर जाएं.
  • मूवी या डिनर प्लान करें.
  • किसी पुराने दोस्त को कॉल करें.
  • कोई हॉबी क्लास जॉइन कर लें.

अच्छा महसूस करानेवाली गतिविधियां करें: जिन बातों से, जिन गतिविधियों से आप रिलैक्स्ड और ऊर्जावान महसूस करते हों, उन पर ध्यान दें. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं. शेड्यूल बनाएं और दिनभर में फन एक्टिविटीज़ के लिए टाइम फिक्स करें.

कैसे करें?

  • जो चीज़ें आपको पहले मज़ेदार लगती थीं, उन्हें फिर करना शुरू करें.
  • यह सच है कि आपका मन नहीं करेगा, ये तमाम चीज़ें करने का, लेकिन ख़ुद को फोर्स करें, क्योंकि एक बार आप इस तरह की फन एक्टिविटीज़ में ख़ुद को व्यस्त कर लेंगे, तो आपको विश्‍वास ही नहीं होगा कि कितना बेहतर महसूस करेंगे.
  • हो सकता है कि एक बार में आप डिप्रेशन से बहुत ज़्यादा बाहर न आ पाएं, लेकिन धीरे-धीरे आप ख़ुद को अधिक सकारात्मक व ऊर्जावान महसूस करने लगेंगे.
  • आप कोई स्पोर्ट्स एक्टिविटी या स्विमिंग, डांस व साइकिलिंग जैसे शौक अपना सकते हैं.

अपनी हेल्थ को ज़रूर सपोर्ट करें

  • डिप्रेशन सबसे पहले आपकी नींद पर असर डालता है. या तो आप बहुत कम या बहुत अधिक सोने लगते हैं. अच्छी नींद लेने की कोशिश करें. हेल्दी स्लीप टेक्नीक्स के बारे में जानें और नींद पूरी लें. इससे आपको रेस्ट मिलेगा और आप फ्रेश फील करेंगे.
  • स्ट्रेस को बढ़ने न दें, क्योंकि स्ट्रेस से डिप्रेशन और बढ़ सकता है. उन तमाम तत्वों पर ध्यान दें, जो स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जैसे- काम का प्रेशर, आर्थिक समस्या, ख़राब रिलेशनशिप… बेहतर होगा इन सबसे निपटने के तरीक़ों पर ध्यान दें. एक्सपर्ट की सहायता भी ले सकते हैं.
  • रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं. ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ करें, ध्यान करें, म्यूज़िक सुनें, मसल रिलैक्सेशन तकनीक सीखें.

वेलनेस टूलबॉक्स

  • अपने बारे में सकारात्मक बातें लिखें.
  • लिस्ट बना लें कि आपको अपनी कौन-सी बातें और आदतें सबसे ज़्यादा पसंद हैं.
  • कोई फनी मूवी या टीवी सीरीज़ देखें.
  • म्यूज़िक सुनें.
  • नेचर में समय बिताएं. समंदर के किनारे या किसी पार्क में सुबह-शाम जाएं.
  • हॉट बाथ लें. जल्दबाज़ी न करके आराम से गर्म पानी से नहाएं, इससे शरीर हल्का लगेगा.
  • ख़ुद को किसी न किसी काम में बिज़ी रखें. हेल्दी डायट लें. मनपसंद डिश बनाएं.

एक्टिव रहने की कोशिश करें: एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने का सबसे बेहतर तरीक़ा है. शोध कहते हैं कि एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने में उतनी ही कारगर है, जितनी दवा. इसके अलावा एक्सरसाइज़ से डिप्रेशन के दोबारा होने की संभावना भी कम हो जाती है.

यह भी पढ़ें: सुख-शांति के लिए घर को दें एस्ट्रो टच… (Astrological Remedies For Peace And Happiness To Home)

एक्सरसाइज़ से मूड को बूस्ट कैसे करें?

  • यह सच है कि डिप्रेशन के चलते एक्सरसाइज़ का मन बनाना बेहद मुश्किल है, लेकिन एक बार आप इच्छाशक्ति दिखा देंगे, तो यह बेहद फ़ायदा पहुंचाएगी.
  • रिसर्च बताते हैं कि डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को एक्सरसाइज़ से ऊर्जा मिलती है और हताशा कम होती है.
  • रिदमवाली एक्सरसाइज़ अधिक फ़ायदेमंद होती है, जैसे- वॉकिंग, वेट ट्रेनिंग, स्विमिंग या डान्सिंग.
  • किसी क्लब के मेंबर बनकर अन्य लोगों के साथ एक्सरसाइज़ करना और बेहतर परिणाम देगा.
  • घर में अगर पेट्स हैं, तो उनके साथ ईवनिंग वॉक पर जाएं.

हेल्दी खाएं, डिप्रेशन से लड़नेवाली डायट फॉलो करें: जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन… ये कहावत यूं ही नहीं बनी है. हम जो खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे शरीर व मन पर पड़ता है. फैटी, ऑयली, कैफीन या अल्कोहल जैसी चीज़ों का सेवन कम करें, क्योंकि ये आपके हार्मोंस पर असर करते हैं और मूड पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

कैसी हो आपकी डायट?

  • शुगर और रिफाइंड कार्ब्स का सेवन कम कर दें. फ्रेंच फ्राइज़, पास्ता, एरिएटेड ड्रिंक्स कुछ समय के लिए ही बेहतर महसूस करवाते हैं. आगे चलकर ये आपके मूड को प्रभावित कर सकते हैं.
  • दिन में 3-4 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. खाने में बहुत ज़्यादा अंतर रखेंगे, तो चिड़चिड़ापन बढ़ेगा.
  • विटामिन बी ज़रूर लें, क्योंकि फॉलिक एसिड और विटामिन बी 12 की कमी से डिप्रेशन बढ़ता है. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडा, बींस, सिट्रस फ्रूट्स अधिक लें.
  • ओमेगा 3 फैटी एसिडयुक्त भोजन लें. मूड को संतुलित रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फैटी फिश और ठंडे पानी की मछलियों के तेल का सेवन करें.

ज़रूरी है सनलाइट का डेली डोज़: सनलाइट सेरोटोनिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाकर मूड बेहतर करने में मददगार है. जब भी मौक़ा मिले, रोज़ाना 15 मिनट की धूप ज़रूर लें.

कब और कैसे लें यह डेली डोज़?

  • आप लंच टाइम में बाहर जा सकते हैं, कुछ देर टहलें.
  • आसपास कोई गार्डन वगैरह हो, तो वहां जा सकते हैं.
  • अपने घर पर और वर्कप्लेस में जितना संभव हो, नेचुरल लाइट में रहने की कोशिश करें.
  • छुट्टी के दिन सुबह-सुबह की धूप लेने के लिए छत का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर रोज़ाना वॉक के लिए भी जा सकते हैं.

विंटर ब्लूज़ से कैसे निपटें?

  • सर्दियों के मौसम में सनलाइट वैसे भी कम होती है और इस मौसम में डिप्रेशन अधिक महसूस होता है, जिसे सीज़नल इफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं. लेकिन यदि आप प्रयास करें, तो सालभर आपका मूड बेहतर बना रह सकता है.

नकारात्मक सोच को चुनौती दें: ज़िंदगी से ऊब महसूस होना, कमज़ोरी-थकान लगना, निराशा महसूस होना… इस तरह के नकारात्मक भाव डिप्रेशन के चलते आते हैं. आपको यह बात मन में बैठा लेनी होगी कि ये तमाम नकारात्मक विचार असल में हैं ही नहीं. आपको अपने माइंड को पॉज़िटिव सोचने के लिए प्रशिक्षित करना होगा. हालांकि यह मुश्किल है, लेकिन लगातार प्रयास से यह संभव हो सकता है.

इस तरह के विचारों से रहें दूर

बहुत कुछ या कुछ भी नहीं सोचना: ब्लैक एंड व्हाइट में चीज़ों को न देखें. ये सही है और ये ग़लत… ऐसा नहीं होता. बीच का रास्ता भी होता है.

बुरे अनुभव को मन में बैठा लेना: एक जगह अगर असफलता हाथ लगी हो, तो इसका यह मतलब नहीं कि हर बार और हर जगह ही असफलता मिलेगी. अपने बुरे अनुभवों को मन में बैठा न लें.

पॉज़िटिव बातों को भूलकर स़िर्फ निगेटिव ही याद रखना: आपके साथ बहुत कुछ अच्छा होता है, लेकिन आप उसे अधिक समय तक याद नहीं रखते, लेकिन कोई एक बात ग़लत हो, तो उसे बार-बार याद करते हैं. इस सोच से बाहर निकलें. अच्छा-बुरा सभी के साथ होता है और दोनों को ही समान रूप से लें और जब मन निराश हो, तो पॉज़िटिव बातों को याद करें.

पॉज़िटिव बातों को कम आंकना: कुछ अच्छा हो, तो उसके बारे में भी यह सोचना कि ये तो सामान्य-सी बात है, इसमें कुछ ख़ास क्या है… इस तरह के विचारों से दूर रहें और हर छोटी-छोटी बात में ख़ुशियां ढूंढ़ें.

फ़ौरन निष्कर्ष पर पहुंच जाना: प्रयास करने से पहले ही यह सोच लेना कि परिणाम ग़लत ही होगा या हमें असफलता ही मिलेगी… ग़लत व नकारात्मक पहलू है. इससे दूर रहें.

अपने बारे में इमोशनली निगेटिव सोचना: ‘मैं ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता’ या ‘मेरे साथ कभी भी कुछ अच्छा नहीं हो सकता’… इस तरह की बातों से अपने बारे में निगेटिविटी न बढ़ाएं. हम जो सोचते हैं हम वही बन जाते हैं, इसलिए अपनी सोच को पॉज़िटिव बनाएं.

बहुत अधिक नियमों में ख़ुद को बांध लेना: अपने लिए बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स बना लेना, जिससे आप ज़िंदगी जीना ही भूल जाएं, आपको नकारात्मकता की ओर ले जाएंगे. फ्लेक्सिबल बनें.

कब लें एक्सपर्ट एडवाइस?

जब तमाम सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के बाद भी आपको लग रहा हो कि आपका डिप्रेशन ठीक नहीं हो रहा, तब आपको एक्सपर्ट के पास जाने से हिचकिचाना नहीं चाहिए. आपको अपनी मदद ख़ुद ही करनी होगी. ये न सोचें कि एक्सपर्ट के पास जाना किसी कमज़ोरी की निशानी है. अगर शरीर में तकलीफ़ हो, तो आप डॉक्टर के पास जाते ही हैं, तो मन की तकलीफ़ के लिए क्यों नहीं जाना चाहते?

हां, एक बात का ध्यान रहे कि प्रोफेशनल हेल्प के बाद भी ये सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स फॉलो करते रहें और यह बात भी मन में बैठा लें कि डिप्रेशन ठीक हो सकता है और आप इससे निकलकर बेहतर व हैप्पी लाइफ जी सकते हैं.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: निर्णय लेने से क्यों डरते हैं आप? क्या हैं डिसाइडोफोबिया के शिकार? (Do You Suffer From Decidophobia)

खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही नमक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है, मगर जिस तरह किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है, उसी तरह ज़रूरत से ज़्यादा नमक का सेवन भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है. अतः स्वस्थ रहने के लिए कैसे संतुलित रखें नमक की मात्रा? आइए, जानते हैं.

Salt
क्यों ज़रूरी है नमक?
नमक शरीर में पानी के स्तर को नियंत्रित करने के अलावा पाचन तंत्र व किडनी को ठीक से काम करने, ब्लड शुगर लेवल को कम करने, तनाव, अवसाद और अन्य भावनात्मक समस्याओं से भी राहत दिलाता है. यह मांसपेशियों को सही तरी़के से काम करने में भी मदद करता है. शरीर में नमक की मात्रा कम होने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है. साथ ही थकान, मांसपेशियों में जकड़न, चक्कर आना, भूख न लगना और लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा मात्रा है हानिकारक
नमक शरीर के लिए ज़रूरी तो है, मगर इसकी अधिकता कई बीमारियों को न्योता देती है. अधिक नमक के सेवन से हाइपर टेंशन, हाई ब्लड प्रेशर का ख़तरा बढ़ जाता है, नतीजतन हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है. ज़्यादा नमक से ख़ून में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे एसिडिटी बढ़ जाती है. भूख न लगने पर भी भूख का एहसास बना रहता है, जिससे शरीर में ज़्यादा कैलोरी बनने लगती है और मोटापा बढ़ता है.

ये भी पढ़ेंः ज़्यादा नमक खाने के साइड इफेक्ट्स ( Side Effects Of Consuming Too Much Salt)

यूं संतुलित करें नमक
1. खाने में तेज़ नमक न खाएं.
2. नमकीन स्नैक्स कम से कम खाएं.
3. दही में नमक मिलाकर न खाएं.
4. तला हुआ भोजन कम खाएं.
5. बिना नमक मिला सलाद खाएं.
6. पापड़, चटनी, चिप्स, सॉल्टेड पीनट (मूंगफली), पॉपकॉर्न, सोया सॉस, कैचअप और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.
7. हार्ट, किडनी व फेफड़ों के बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को लो सोडियम नमक खाना चाहिए.
8. सोडिमय क्लोराइड की मात्रा संतुलित करने के लिए अपनी डायट में ज़्यादा पोटैशियम वाली चीज़ें जैसे- फल व सब्ज़ियां शामिल करें.

उम्र के मुताबिक़ प्रतिदिन नमक का सेवन
विश्‍व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, हर व्यक्ति को उम्र के अनुसार नमक का सेवन कम करना चाहिए.
0-12 महीने- एक ग्राम से कम
1-3 साल- 2 ग्राम
4-6 साल- 3 ग्राम
7-10 साल- 4 ग्राम
11 साल और उससे ऊपर- 5 ग्राम

ये भी जानें
. हमारे शरीर में कुल नमक का 24 प्रतिशत हड्डियों में होता है.
. नमक में 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोरीन होता है.
. आयोडिन की कमी से होने वाले गॉइटर रोग को दूर करने के लिए 1924 में आयोडिन युक्त नमक का प्रचलन शुरू हुआ.

 

×