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डिजिटल पेमेंट में गड़बड़ी होने पर कहां और कैसे करें शिकायत? (What To Do If Digital Payments Go Wrong?)

ज़रा सोचें, अगर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान किसी मोबाइल वॉलेट से आपने पेमेंट किया, आपके अकाउंट से पैसे भी कट गए, पर शॉपिंग पूरी ही नहीं हुई, क्योंकि शॉपिंग साइट को पैसे ही नहीं मिले. अब क्या करें? ऐसे में अक्सर लोग घबरा जाते हैं, पर आप न घबराएं, क्योंकि आजकल ऐसे मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. डिजिटल पेमेंट्स से संबंधित शिकायतों के लिए कहां और कैसे करें शिकायत आइए जानते हैं.

Digital Payments

आज ज़्यादातर लोग डिजिटल पेमेंट्स का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ इसमें फ्रॉड और धोखाधड़ी या फिर टेक्निकल गड़बड़ी के मामले भी तेज़ी से बढ़े हैं, इसलिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में देश के 19 शहरों में 21 डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स ओम्बड्समैन यानी लोकपाल की नियुक्ति की है, जो डिजिटल पेमेंट संबंधी समस्याओं को सुलझाएंगे.

किन मामलों में कर सकते हैं शिकायत?

–     अगर आपके बैंक अकाउंट से अनाधिकृत रूप से इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर हो जाए.

–     अगर सर्विस प्रोवाइडर आपके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर न करे.

–     अगर आप ऑनलाइन पेमेंट या ट्रांज़ैक्शन नहीं कर पा रहे हों.

–     अगर ट्रांज़ैक्शन के बाद निश्‍चित समयावधि के भीतर वॉलेट में पैसे जमा न हों.

–     ऑनलाइन पेमेंट या फंड ट्रांसफर का ट्रांज़ैक्शन ऑनलाइन न दिखे.

–     ट्रांज़ैक्शन फेल होने पर रक़म अकाउंट में रिफंड न हो.

–     स्टॉप पेमेंट रिक्वेस्ट को समय पर स्टॉप न करें.

–     इसके अलावा यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), भारत बिल पेमेंट सिस्टम, भारत क्यूआर कोड, यूपीआई क्यूआर कोड से जुड़े मामलों को भी आप डिजिटल ओम्बड्समैन के पास ले जा सकते हैं.

कहां करें शिकायत?

कस्टमर केयर

– किसी भी तरह की शिकायत करने के लिए सबसे पहले अपने पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के कस्टमर केयर से संपर्क करें.

– उन्हें ऑनलाइन ईमेल करें और साथ में सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स भी अटैच करें.

– कंप्लेन नंबर और अपने कंप्लेन की कॉपी संभालकर रखें.

– उनके सोशल मीडिया हैंडल, जैसे- ट्विटर आदि के ज़रिए उन्हें शिकायत करें. अपनी इमेज के लिए वो जल्द से जल्द मामले को सुलझाने की कोशिश करते हैं.

– आपको अपने बैंक में जाकर एक फॉर्म भरना होगा, जिसके बाद वो ज़रूरी एक्शन लेंगे.

– आजकल ज़्यादातर वॉलेट्स अपने ऐप में ही ‘हेल्प’ सेगमेंट देते हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर कस्टमर शिकायत कर सके.

–     अगर ऐप की तरफ़ से कोई समस्या नहीं होगी, तो वो आपको अपने बैंक से संपर्क करने के लिए कहेंगे. उसके बाद आपको अपने बैंक से फॉलोअप करना होगा.

–     शिकायत करने के बाद आपको 30 दिनों तक इंतज़ार करना होगा.

–     अगर 30 दिनों के भीतर उनकी तरफ़ से कोई जवाब न आए या फिर आपको संतोषजनक जवाब न मिले या फिर आपकी शिकायत अस्वीकृत हो जाए, तो एक साल के भीतर आप ओम्बड्समैन से शिकायत कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: जानें डिजिटल पेमेंट्स की एबीसी (Different Methods And Benefits Of Digital Payments In India)

Digital Payments Tips

ओम्बड्समैन फॉर डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स

देश के 19 शहरों में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच में ओम्बड्समैन नियुक्त किए गए हैं. स़िर्फ मुंबई और दिल्ली में दो-दो ओम्बड्समैन अपॉइन्ट किए गए हैं.

–     अपने शहर के ओम्बड्समैन के बारे में जानने के लिए आरबीआई की वेबसाइट पर जाएं. वहां आपको नाम, पता, ईमेल आईडी, टेलीफोन नंबर आदि की पूरी जानकारी मिल जाएगी.

–     कई ओम्बड्समैन को राज्यों के अलावा यूनियन टेरीटरीज़ और कुछ दूसरे राज्यों के शहर भी दिए गए हैं, इसलिए पहले लिस्ट में अपने शहर के ओम्बड्समैन को कंफर्म कर लें, तभी शिकायत करें.

–     आपको सर्विस प्रोवाइडर की तरफ़ से शिकायत अस्वीकृत हो जाने या कोई जवाब न आने की स्थिति में एक साल के भीतर ओम्बड्समैन को शिकायत करनी होगी, वरना आपकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होगी.

–     आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि अगर आपका मामला पहले से किसी कोर्ट-कचहरी या आर्बिट्रेटर (मध्यस्थ) के पास है, तो ओम्बड्समैन आपकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे.

–     अगर आप ख़ुद शिकायत नहीं कर सकते, तो किसी सहयोगी की मदद ले सकते हैं, पर वो वकील नहीं होना चाहिए.

–     ओम्बड्समैन पहले सेटलमेंट की कोशिश करते हैं, लेकिन अगर किसी तरह बात न बने, तो वो अपना फैसला देंगे.

–    ओम्बड्समैन कस्टमर को एक लाख से लेकर 20 लाख तक का मुआवज़ा दिला सकते हैं.

–     अगर आप ओम्बड्समैन के फैसले से ख़ुश नहीं हैं, तो 30 दिनों के भीतर आरबीआई के डेप्यूटी गर्वनर के सामने अपना मामला रख सकते हैं.

जब हो नेट बैंकिंग ट्रांसफर में गड़बड़ी

जब भी हम नेट बैंकिंग के ज़रिए किसी वॉलेट में पैसे जमा करते हैं, तो हमारे बैंक और उस वॉलेट के बीच एक पेमेंट गेटवे होता है, जो पैसे ट्रांसफर करता है. कभी-कभी सर्वर या नेटवर्क के प्रॉब्लम की वजह से भी पैसे अकाउंट से कट जाते हैं, पर वॉलेट में नहीं पहुंचते, ऐसे में आपको दो दिनों तक इंतज़ार करना चाहिए. आमतौर पर दो दिनों के
भीतर बैंक में पैसे वापस आ जाते हैं, लेकिन अगर नहीं आते, तो आपको तुरंत वॉलेट के कस्टमर केयर में संपर्क करना चाहिए.

जब हो कार्ड के ज़रिए पेमेंट में गड़बड़ी

अगर आप डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके पेमेंट कर रहे हैं और वहां पैसे अटक जाते हैं, तो आपको सात दिनों का इंतज़ार करना होगा. शिकायत की प्रक्रिया वही है, जो नेट बैंकिंग की है.

सतर्क रहें व स्मार्ट बनें

–     किसी भी तरह का ट्रांज़ैक्शन करते व़क्त सतर्क रहें, अगर कहीं कोई गड़बड़ी हो, तो तुरंत एक्शन लें.

–     अपने कार्ड और नेट बैंकिंग पासवर्ड व डिटेल्स संभालकर रखें.

–     अपने बैंक अकाउंट को वॉलेट से लिंक करने की बजाय हमेशा वॉलेट में ही कुछ पैसे जमा रखें, ताकि वॉलेट से ही आसानी से पेमेंट हो जाए और हर बार बैंक अकाउंट तक न जाना पड़े.

–     वॉलेट में पैसे रखने से आपका काम सुविधाजनक तरी़के से हो जाता है और हैकर्स को आपके अकाउंट के डीटेल्स भी नहीं मिलते.

–    नेट बैंकिंग व डेबिट कार्ड के पासवर्ड अलग-अलग रखें और समय-समय पर बदलते भी रहें.

–     अपने मोबाइल पर कोई भी ऐप डाउनलोड करते समय ध्यान रखें कि उसके साथ कोई मालवेयर न आ जाए, वरना वो आपके मोबाइल की सारी ज़रूरी जानकारी चुरा सकता है.

–     अगर मुमकिन हो, तो अलग-अलग वॉलेट्स के लिए अलग-अलग ईमेल आईडी का इस्तेमाल करें.

–    इस्तेमाल करने के बाद ई-वॉलेट से लॉगआउट करें, वरना मोबाइल खोने या चोरी होने पर धोखाधड़ी का डर रहता है.

– सुनीता सिंह   

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जानें डिजिटल पेमेंट्स की एबीसी (Different Methods And Benefits Of Digital Payments In India)

किसी को पैसे ट्रांसफर (Money Transfer) करने हों, कोई बिल भरना हो या फिर इंवेस्टमेंट करना हो, सब कुछ अब मुमकिन है चुटकियों में. जी हां, डिजिटल पेमेंट (Digital Payments) से अब हर तरह के फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स (Financial Transactions) करें अपने मोबाइल से और बन जाएं फाइनेंशियली और टेक्नीकली स्मार्ट.

Benefits Of Digital Payments

डिजिटल पेमेंट्स के फ़ायदे

–     न लाइन में खड़े होने का झंझट और न ही कार्ड से पैसे निकालने की समस्या, बस अपने मोबाइल फोन से किसी भी दिन, किसी भी समय डिजिटल पेमेंट्स करें. फास्ट, सुविधाजनक और आसान ट्रांज़ैक्शन्स से बेहतर भला किसी ग्राहक के लिए और क्या हो सकता है.

–     डिजिटल पेमेंट आपके लिए काफ़ी किफ़ायती भी है, क्योंकि बहुत से मोबाइल वॉलेट्स और यूपीआई पर आपको न तो कोई सर्विस टैक्स देना पड़ता है और न ही कोई प्रोसेसिंग फीस यानी हर तरह से टैक्स की बचत.

–     आप अपने सारे ट्रांज़ैक्शन्स एक ही जगह से कर सकते हैं और वो भी पूरी तरह सिक्योर होकर.

–     बहुत से वॉलेट्स और बैंकिंग ऐप्स अपने ग्राहकों को कई डिस्काउंट ऑफर्स व कैशबैक देते हैं. कैशलेस होने का इससे अच्छा फ़ायदा और क्या हो सकता है.

–     इतना ही नहीं अपने ट्रांज़ैक्शन्स के बारे में किसी भी तरह की जानकारी आप कभी भी कहीं से भी ले सकते हैं, क्योंकि ऑनलाइन सब कुछ मौजूद है.

–     ये सभी तरी़के काफ़ी सिक्योर बनाए जाते हैं, ताकि फ्रॉड होने की गुंजाइश बिल्कुल न रहे, जैसे- अगर आपका कार्ड चोरी हो गया, तो आप उसे तुरंत ब्लॉक कर सकते हैं, बेवजह अकाउंट से पैसे कट गए,

तो तुरंत रिफंड के लिए अप्लाई कर सकते हैं आदि.

डिजिटल पेमेंट के तरी़के

डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स पर ज़ोर देने के लिए सरकार ने डिजिटल पेमेंट के लिए कई बेहतरीन विकल्प मुहैया कराए हैं. इस समय डिजिटल पेमेंट के लिए विकल्पों की भरमार है, ऐसे में आपके लिए कौन-सा विकल्प ज़्यादा सुविधाजनक है आइए देखते हैं.

बैंकिंग कार्ड्स

–     डेबिट कार्ड हो, क्रेडिट कार्ड या फिर प्री पेड बैंक कार्ड सभी की अपनी-अपनी ख़ूबियां हैं. इन कार्ड्स की मदद से आप मनपसंद शॉपिंग करें, घूमें-फिरें, खाएं-पीएं और कहीं भी कैश देने का कोई झंझट नहीं.

–     इसके अलावा कहीं भी कोई ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन करने के लिए आपको बस अपने कार्ड की डिटेल्स वहां भरनी होगी और चुटकियों में किसी को पैसे ट्रांसफर करना या कोई बिल भरना या फिर इंवेस्टमेंट आप आसानी से कर सकते हैं.

–     वीज़ा, रुपए और मास्टरकार्ड जैसे कार्ड्स से पेमेंट पर आपको काफ़ी कैशबैक और डिस्काउंट भी मिलते हैं.

अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा (USSD)

–     इसके ज़रिए अपने मोबाइल से बिना कोई ऐप डाउनलोड किए आप फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स कर सकते हैं.

–     इसके लिए न तो डाटा की ज़रूरत है और न ही स्मार्टफोन की.

–     यह सुविधा ख़ासतौर से ग़रीब तबके के लोगों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने के लिए बनाई गई है.

–     इसके लिए आपको अपने मोबाइल से *99ञ्च् डायल करना होगा और आप फंड ट्रांसफर, बैंक स्टेटमेंट और अकाउंट बैलेंस जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं.

–     यह सुविधा हिंदी भाषा में भी उपलब्ध है.

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Benefits Of Digital Payments
आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS)

–     बैंकिंग से जुड़ी सभी सुविधाएं, जैसे- बैलेंस इंक्वायरी, कैश विड्रॉअल, कैश डिपॉज़िट, पेमेंट ट्रांज़ैक्शन्स और आधार टु आधार फंड ट्रांसफर आप आसानी से कर सकते हैं.

–     बैंक का प्रतिनिधि आपके लिए ये सारे काम करेगा और आपको न ब्रांच जाना होगा और न ही किसी डॉक्यूमेंट पर साइन करना होगा. बस, आपका आधार आपके बैंक अकाउंट से लिंक

होना चाहिए.

यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)

–     इसके लिए आपको यूपीआई ऐप अपने मोबाइल में डाउनलोड करना होगा, जिसके ज़रिए आप अपने सभी फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स कर सकते हैं.

–     इसकी मदद से आप अपने सभी बैंक अकाउंट इसमें लिंक करके अपनी सुविधानुसार हर तरह के डिजिटल पेमेंट्स कर सकते हैं.

–     इसकी एक ख़ासियत यह भी है कि अगर आपको किसी का अकाउंट नंबर पता नहीं, तो उसके वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (वीपीए नंबर) से भी ट्रांज़ैक्शन्स कर सकते हैं.

–     गूगल पे (तेज़), पेटीएम, फोनपे, चिल्लर और भीम कुछ बेहद लोकप्रिय यूपीआई ऐप्स हैं.

मोबाइल वॉलेट्स

–    ये वर्चुअल वॉलेट्स होते हैं, जिसे आप ऐप डाउनलोड करके भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

–     मोबाइल वॉलेट में आप अपने बैंक डिटेल्स के अलावा डेबिट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी सेव कर सकते हैं.

–     साथ ही इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए अपने फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स पूरे कर सकते हैं. मोबाइल वॉलेट में आप पैसे भी जमा करके रख सकते हैं, इससे ट्रांज़ैक्शन आसान हो जाता है.

–     अपने ग्राहकों को अतिरिक्त सुविधाएं देने के लिए बहुत से बैंकों ने अपने ई-वॉलेट शुरू किए हैं, इसमें एसबीआई का योनो, आईसीआईसीआई पॉकेट्स और एचडीएफसी पेज़ैप कुछ टॉप के वॉलेट्स हैं.

–     इसके अलावा पेटीएम, ऐमज़ॉन पे, फोन पे, गूगल पे आदि बेहद लोकप्रिय वॉलेट्स हैं.

बैंक प्रीपेड कार्ड्स

–     डिजिटल पेमेंट की दुनिया में यह एक नया और अनूठा पेमेंट सिस्टम है.

–     अपने बैंक से आप गिफ्ट कार्ड, मील कार्ड, पे डायरेक्ट और ट्रैवेल जैसे प्रीपेड कार्ड ले सकते हैं.

–     ज़रूरी नहीं कि ये आपके अकाउंट से जुड़े हुए हों. इसमें आपको पैसे डालने पड़ते हैं. यह प्री पेड मोबाइल जैसा है, पैसे भरें और इस्तेमाल करें.

–     ज़्यादातर बड़ी कंपनियां ये कार्ड अपने कर्मचारियों को देती हैं या फिर उनकी सैलेरी और अन्य ज़रूरी पेमेंट्स के लिए इनका इस्तेमाल करती हैं.

इंटरनेट बैंकिंग

–     ऑनलाइन बैंकिंग, ई-बैंकिंग या वर्चुअल बैंकिंग को ही हम इंटरनेट बैंकिंग कहते हैं.

–     इसके ज़रिए आप बैंकिंग से जुड़े सभी काम, जैसे- फंड ट्रांसफर करना, फिक्स्ड या रिकरिंग अकाउंट खोलना, पीपीएफ अकाउंट खोलना ऑनलाइन कर सकते है.

–     नेफ्ट, आरटीजीएस या आईएमपीएस आप ऑनलाइन कर सकते हैं. इससे आप तुरंत मनी ट्रांसफर कर सकते हैं या फिर चाहें तो अगले दिन या अगले हफ़्ते के लिए शेड्यूल भी कर सकते हैं.

–     इसके अलावा जीवन बीमा की पॉलिसी भरने से लेकर सभी बिल के पेमेंट करने जैसे काम आप आसानी से कर सकते हैं.

मोबाइल बैंकिंग

–     साल 2002 में मोबाइल बैंकिंग की शुरुआत हुई थी और तब सारे ट्रांज़ैक्शन्स एसएमएस के ज़रिए होते थे.

–     मोबाइल बैंकिंग ने कंप्यूटर और लैपटॉप की ज़रूरत को दरकिनार कर दिया, अब आप अपने मोबाइल से ही सारे डिजिटल पेमेंट्स कर सकते हैं.

–     किसी वॉलेट, यूपीआई या अपने बैंक का ऐप डाउनलोड करके भी आप सारे फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स कर सकते हैं.

– सुनीता सिंह

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मोबाइल पेमेंट ऐप ‘भीम’ में क्या है ख़ास? (Bhim app: Everything you want to know about the app)

bhim app
कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर एक और मज़बूत क़दम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भीम (Bhim) ऐप’ लॉन्च किया है. ‘भीम’ का पूरा नाम- भारत इंटरफेस फॉर मनी है. इस ऐप के ज़रिए डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा मिलेगा. इसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है.

   bhim revised

    क्या ख़ास है ‘भीम’ (Bhim) में?

  • इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें  आपको बार-बार अकाउंट नंबर डालने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. बस, एक बार अकाउंट नंबर रजिस्टर करें और आसानी से डिजिटल पेमेंट करें.
  • इसकी दूसरी सबसे ख़ास बात है कि यह ऐप बिना इंटरनेट के भी काम करेगा.
  • इसमें टठ कोड भी दिया गया है, जिससे आप सामान ख़रीदने के बाद आसानी से पेमेंट कर सकते हैं. इसके लिए आपको स़िर्फ दुकानदार का टठ कोड स्कैन करके पेमेंट करना होगा.
  • पेमेंट्स करने के साथ-साथ आप अपने बैंक अकाउंट का बैलेंस भी चेक कर सकते हैं.
  • इसमें कस्टम पेमेंट ऐड करने की सुविधा है.
  • इस ऐप में मिनिमम पेमेंट लिमिट 10 हज़ार और मैक्सिमम 20 हज़ार रुपए है.
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    कैसे ऑपरेट करें ‘भीम’?

  • यह एक फ्री ऐप है, तो इसे बस डाउनलोड कर इंस्टॉल करें. 
  • इसके बाद स़िर्फ एक बार आपको अपना बैंक अकाउंट नंबर रजिस्टर करना होगा और एक
    यूपीआई (UPI) पिनकोड जनरेट करना होगा.
  • इसके बाद आपका मोबाइल नंबर ही आपका पेमेंट ऐड्रेस होगा.
  • इंटरनेट कनेक्शन न होने पर आप अपने मोबाइल से USSD कोड +99# डालकर ऑपरेट कर सकते हैं.
  • फिलहाल यह ऐप हिंदी और अंगे़्रजी दो भाषाओं में है, पर जल्द ही अन्य क्षेत्रीय भाषाएं भी इसमें शामिल की जाएंगी.
  • यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों के लिए उपलब्ध है.

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न बैंकों को करेगा सपोर्ट:

– Allahabad Bank
– Andhra Bank
– Axis Bank
– Bank of Baroda
– Bank of Maharashtra
– Canara Bank
– Catholic Syrian Bank
– Central Bank of India
– DCB Bank
– Dena Bank
– Federal Bank
– HDFC Bank
– ICICI Bank
– IDBI Bank
– IDFC Bank
– Indian Bank
– Indian Overseas Bank
– IndusInd Bank
– Karnataka Bank
– Karur Vysya Bank
– Kotak Mahindra Bank
– Oriental Bank of Commerce
– Punjab National Bank
– RBL Bank
– South Indian Bank
– Standard Chartered Bank
– State Bank of India
– Syndicate Bank
– Union Bank of India
– United Bank of India
– Vijaya Bank

– अनीता सिंह

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केंद्र सरकार की ‘लकी ग्राहक योजना’ से बनें ‘करोड़पति’ (lucky grahak yojna to promote digital payments)

डिजिटल पेमेंट व कैशलेश अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ख़ास लकी ड्रॉ योजना लेकर आई है. इस योजना में जहां ग्राहकों के लिए ‘लकी ग्राहक योजना’ (Lucky Grahak Yojna) की शुरुआत की गई है, वहीं व्यापारियों के लिए ‘डिजी व्यापारी धन योजना’ के तहत कई आकर्षक इनामों की घोषणा भी की गई है.

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कब से कब तक है योजना?

– लकी ग्राहक योजना (Lucky Grahak Yojna) और डिजी व्यापारी योजना की शुरुआत 25 दिसंबर, 2016 से हो रही है, जो 14 अप्रैल, 2017 तक चलेगी.
– यह योजना 100 दिनों की है.
– 25 दिसंबर को पहला लकी ड्रा निकाला जाएगा.
– 14 अप्रैल को 3 मेगा ड्रा होंगे, जिनके इनाम क्रमश: 1 करोड़, 50 लाख और 25 लाख हैं.

क्या है ये लकी ड्रा योजना?

– डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दैनिक, साप्ताहिक और योजना के अंतिम दिन एक बड़ा पुरस्कार देने की घोषणा की है.
– लकी ग्राहक योजना के तहत रोज़ाना 15 हज़ार विजेताओं का चुनाव किया जाएगा, जिन्हें 1000 रुपए का इनाम मिलेगा.
– नेशनल पेमेंट्स कमीशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की तरफ़ से ये इनाम क्रिसमस यानी 25 दिसंबर से दिए जाएंगे.
– डिजिटल धन व्यापारी योजना के तहत हर हफ़्ते 7 हज़ार के अवॉर्ड दिए जाएंगे यानी 7 हज़ार व्यापारियों को जीतने का मौका मिलेगा. इसकी अधिकतम धनराशि 50 हज़ार रुपए है.
– यह योजना ख़ासतौर से 50 रुपए से 3000 रुपए तक का डिजिटल पेमेंट करनेवालों के लिए है.
– प्राइवेट कार्ड वॉलेट्स और 3000 रुपए से ज़्यादा के पेमेंट इसमें शामिल नहीं किए गए हैं.
– डिजिटल पेमेंट्स में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की सहभागिता बढ़ाने के लिए इस योजना में कुल 340 करोड़ रुपयों का बजट बनाया गया है.

– अनीता सिंह