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इस तारीख़ को तलाक लेकर हमेशा के लिए अलग हो जाएगा टीवी का यह कपल (This Famous TV Couple will get divorce after 15 days)

सीरियल ‘कुमकुम’ की फेम रह चुकी एक्ट्रेस जूही परमार (Juhi Parmar) और उनके पति सचिन श्रॉफ (Sachin Shroff) के बीच अनबन और तलाक की ख़बरें काफ़ी समय सुनने में आ रही थीं, लेकिन ताज़ा ख़बरों के अनुसार इस महीने की 25 तारीख़ को दोनों औपचारिक तौर पर एक-दूसरे से अलग हो जाएंगे. कहा जा रहा है कि यह कपल पिछले 18 महीनों से अलग रह रहा है और आगामी 25 तारीख़ को दोनों को कोर्ट की तरफ से तलाक मिल जाएगा. बता दें कि दोनों की एक बेटी है, जो तलाक के बाद मां जूही के साथ रहेगी और सचिन अपनी बेटी समायरा से वक़्त-वक़्त पर मिल सकेंगे.

बता दें कि 15 फरवरी 2009 में जूही परमार और सचिन श्रॉफ ने जयपुर में रॉयल वेडिंग की थी. दोनों की शादी जयपुर की टॉप 50 रॉयल शादियों की लिस्ट में शामिल है. बताया जाता है कि शादी के दो साल बाद ही दोनों की शादीशुदा ज़िंदगी में तकरार बढ़ने लगी थी, लेकिन बेटी समायरा के जन्म के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को सुधारने का एक मौका भी दिया, बावजूद इसके दोनों के बीच कड़वाहट बढ़ती ही गई और नौबत तलाक तक आ पहुंची.

हालांकि दोनों के रिश्ते के टूटने की असल वजह क्या है ये तो नहीं पता, लेकिन जूही का कहना था कि सचिन कई बार चीज़े भूल जाते थे, जिससे उन्हें काफ़ी परेशानी होती थी, जबकि सचिन का कहना था कि जूही बहुत गुस्सेवाली हैं, वो बात-बात पर गुस्सा करती हैं और उनका गुस्सा उन्हें पसंद नहीं था.

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इन 9 बेवजह के कारणों से भी होते हैं तलाक़ (9 Weird Reasons People Filed For Divorce)

Weird Reasons People Filed For Divorce

कभी-कभी लगता है कि बदलते दौर में रिश्तों की डोर कुछ ज़्यादा ही नाज़ुक हो चली है, तभी तो छोटी-छोटी बातें भी गृहस्थी के मज़बूत बंधन को तिनके-सा बिखेर रही हैं. कभी नासमझी, कभी ज़िद, कभी ग़ुस्से, तो कभी अहं की तुष्टि के लिए किए गए फैसले दांपत्य जीवन को बड़ी आसानी से ख़त्म कर रहे हैं. तलाक़ के बढ़ते मामले समाज के लिए गंभीर स्थिति हैं, पर क्या तलाक़ (Divorce) भी उतने ही गंभीर मुद्दों पर लिए जा रहे हैं? यहां हम कुछ ऐसे ही मामलों के बारे में बता रहे हैं, जहां तलाक़ के कारण बेवजह (Weird Reasons People Filed For Divorce) ही थे.

Weird Reasons People Filed For Divorce

तलाक़ से जुड़े अजीबो-ग़रीब मामले

हमारे देश में 10 साल पहले जहां 1000 शादियों में एक तलाक़ का मामला सामने आता था, वही आंकड़ा आज बढ़कर 13 हो गया है, जो यक़ीनन अगले साल और बढ़ेगा. पिछले कुछ सालों में यह आंकड़ा इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है? इन शादियों के टूटने के क्या कारण हैं? क्या सभी रिश्ते शोषण और अत्याचार की बलि चढ़ रहे हैं या फिर कुछ बेवजह के कारणों से भी शादियां टूट रही हैं. सर्वे में पता चला है कि हाल ही में तलाक़ से जुड़े कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कुछ अजीबो-ग़रीब कारणों से जहां कुछ रिश्ते टूट गए, तो कई टूटते-टूटते बचे. आइए जानें, क्या हैं ये कारण और क्यों बढ़ रहे हैं तलाक़ के मामले?

चेहरे के मुंहासे व फोड़े बने तलाक़ का कारण

मामला 1998 का है, जब देश में ज़्यादातर शादियां अरेंज होती थीं और शादी से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे को देख भी नहीं पाते थे. शादी के बाद पत्नी के चेहरे पर मुंहासे देखकर पति को ऐसा सदमा लगा कि उसने तलाक़ के लिए कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल कर दी. पति का तर्क था कि पत्नी के मुंहासों के कारण वह उसके प्रति आकर्षित नहीं हो पाता, जिससे उनके बीच शारीरिक संबंध भी नहीं बन पाए. ऐसे में इस शादी को ज़बर्दस्ती बनाए रखना उसके साथ ‘क्रुएल्टी’ है. कोर्ट ने माना कि पत्नी के लिए यह तकलीफ़देह है कि उसके मुंहासे ठीक नहीं हो रहे, पर पति के लिए भी यह किसी सदमे से कम नहीं, इसलिए 2002 में उन्हें तलाक़ मिल गया.

मोटापे के कारण पार्टीज़ में नहीं ले जा सकता

मामला उत्तर भारत के एक शहर का है, जहां एमएनसी में काम करनेवाले टॉप एक्ज़ीक्यूटिव ने अपनी पत्नी से इस बात पर तलाक़ की मांग की कि वह बहुत मोटी है. पति का तर्क था कि इतनी बड़ी पोस्ट पर होने के कारण उसे अक्सर सोशल पार्टीज़ में जाना पड़ता था, जहां अपनी पत्नी के मोटापे के कारण उसे काफ़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ती थी, क्योंकि उनकी जोड़ी बहुत बेमेल दिखती थी. अच्छी-ख़ासी सैलरी, शानो-शौक़त के बावजूद वह ख़ुश नहीं था. उसने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पत्नी का वज़न कम कराने की उसकी तमाम कोशिशें नाकामयाब रहीं. शुक्र है, तलाक़ मिलना इतना भी आसान नहीं, वरना लोग न जाने किन कारणों से तलाक़ की मांग करते.

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मुंह की बदबू और खर्राटों ने पहुंचाया कोर्ट

हाल ही में गुड़गांव के एमएनसी में काम करनेवाली दो लड़कियों ने पति के मुंह की बदबू और खर्राटों से परेशान होकर तलाक़ लेने का ़फैसला लिया. अपर-मिडल क्लास की इन लड़कियों के तर्क थे कि पति की सांस की बदबू के कारण उनकी सेक्स लाइफ बुरी तरह प्रभावित हुई थी, साथ ही रात में उनके खर्राटों ने उनका सुख-चैन छीन लिया था. हालांकि बाद में मैरिज काउंसलर्स के समझाने पर दोनों ने तलाक़ के पेपर्स वापस ले लिए. जहां यह पूरा मामला अपने आप में अजीबो-ग़रीब है, वहीं सभी के लिए एक सबक भी है कि अपने साथ-साथ अपने पार्टनर की ज़रूरतों और भावनाओं का हमेशा ख़्याल रखें.

मोदी सपोर्टर बनाम केजरीवाल सपोर्टर

मामला 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान गाज़ियाबाद का है. 2013 में अरेंज मैरिज करनेवाले आईटी प्रोफेशनल पति-पत्नी की ज़िंदगी काफ़ी ख़ुशगवार गुज़र रही थी, पर लोकसभा चुनाव ने सब बिगाड़ दिया. जहां पति नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा फैन था, वहीं पत्नी आम आदमी पार्टी की सपोर्टर. चुनावों में बीजेपी की ज़बर्दस्त जीत के बाद पति अक्सर पत्नी को ताने मारने लगा था, जिससे उनमें काफ़ी झगड़े होने लगे. नतीज़ा दो महीने बाद ही दोनों ने तलाक़ ले लिया.

शॉपिंग और पार्टी भी बन जाते हैं कारण

यह मामला एक ऐसे कपल का है, जिन्होंने कई सालों तक लिव इन में रहने के बाद शादी की. देश के मेट्रो शहर में रहनेवाले इस कपल ने शादी के 4 सालों बाद आपसी सहमति से तलाक़ ले लिया. जहां पत्नी ने पति का साथ में शॉपिंग न करना तलाक़ का कारण बताया, वहीं पति ने पार्टीज़ में साथ न चलने को बताया था वजह.

बड़े घर की बेटी

आज भी कुछ लड़कियां शादी को लेकर प्रैक्टिकल अप्रोच नहीं रख पातीं, जिससे उनकी शादी टूटने के कगार पर पहुंच जाती है. ऐसा ही कुछ इस मामले में भी देखने को मिला. शादी के बाद जब लड़की ने देखा कि पति का घर उसके घर से छोटा है, तो वह अलग घर में शिफ्ट होने की मांग करने लगी, पर जब पति ने उसकी मांग पूरी नहीं कि तो वह तलाक़ के लिए कोर्ट पहुंच गई. पत्नी का तर्क था कि वह अपने लिविंग स्टैंडर्ड को कम नहीं कर सकती और अगर उसका पति उसकी ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकता, तो वह उस शादी को निभा नहीं सकती. हालांकि मैरिज काउंसलर्स ने बातचीत के ज़रिए मामले को सुलझा दिया.

पति अपनी मातृभाषा में डॉक्टर और सीए से बात करते हैं

मुंबई के एक साउथ इंडियन और नॉर्थ इंडियन कपल से जुड़ा तलाक़ का यह मामला जब सामने आया, तो हर किसी को तलाक़ के कारण पर बड़ा आश्‍चर्य हुआ. दरअसल, दोनों की लव मैरिज हुई थी. पत्नी उस डॉक्टर या चार्टेड अकाउंटेंट के पास बिल्कुल नहीं जाती थी, जहां उसके पति जाते थे, क्योंकि वहां वो अपनी मातृभाषा में बात करते थे, जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं था. यहां तक कि पत्नी को अपने पति का उसके परिवारवालों से अपनी भाषा में बात करना भी पसंद नहीं था, क्योंकि उसे वह क्रूएल्टी लगता था. पत्नी के मुताबिक उसकी मौजूदगी में उन्हें उस भाषा में बात करनी चाहिए, जो उसे भी समझ में आए. अब इसे नादानी कहें या झूठा अहं, जो उनके रिश्ते पर भारी पड़ सकता था. शुक्र है, मैरिज काउंसलर्स रिश्तों को बचाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

उसे लव स्टोरीज़ पसंद नहीं

ऐसा माना जाता है कि लड़कियों को रोमांटिक स्टोरीज़ ज़्यादा पसंद होती हैं, जबकि लड़कों को एक्शन व एडवेंचर ज़्यादा पसंद आता है. पर अगर लड़के को रोमांटिक लव स्टोरीज़ पसंद हों और लड़की को नहीं, तो क्या इस बात पर तलाक़ लिया जा सकता है? मामला दरअसल नोएडा का है, जहां पति पत्नी से महज़ इसलिए तलाक़ लेना चाहता था कि वह उसके साथ बैठकर रोमांटिक फिल्म नहीं देखती. हद तो तब हो गई, जब उसने कहा कि पत्नी उसके पसंदीदा एक्टर्स को पसंद नहीं करती. इसका मतलब दोनों कम्पैटिबल नहीं हैं और इसलिए उन्हें तलाक़ ले लेना चाहिए. हालांकि उन्हें तलाक़ मिला नहीं.

पराए पुरुषों के साथ डांस करना पसंद नहीं

दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ पार्टी करना किसे पसंद नहीं, पर अगर पार्टीज़ में जाने का कारण तलाक़ का कारण बन जाए, तो यह वाक़ई में बहुत अजीबो-ग़रीब मामला होगा. यह मामला भी नोएडा से है, जहां पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग हैं और अपर-मिडल क्लास से हैं. पर शादी के कुछ महीनों बाद ही पति ने पत्नी की बेवफ़ाई को तलाक़ का कारण बताया. पति के मुताबिक़ उसकी पत्नी को पार्टीज़ का बहुत शौक़ था, पर उसे उसका पार्टीज़ में जाकर दूसरे पुरुषों के साथ डांस करना, या दोस्तों के साथ एंजॉय करना बिल्कुल पसंद नहीं था. इसके लिए उसने अपनी पत्नी को कई बार मना भी किया था. कोर्ट ने पति की बात पर अचरज जताते हुए तलाक़ नामंज़ूर कर दिया.

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Weird Reasons People Filed For Divorce

क्यों बढ़ रहे हैं तलाक़ के मामले?

– कपल मेें से किसी एक को लगता है कि शादी के बाद दूसरा बदल गया है.

– आजकल ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षाएं किसी को भी बर्दाश्त नहीं होतीं.

– शादी के कुछ ही दिनों बाद यह एहसास होना कि वो एक-दूसरे के लिए नहीं बने हैं.

– कम होता धैर्य और सहनशीलता भी इसका एक कारण है.

– दूसरों की बजाय स़िर्फ ख़ुद के बारे में सोचना.  

– एकल परिवारों में बड़े-बुज़ुर्गों का न रहना.  

– लड़की के घरवालों का ज़रूरत से ज़्यादा दख़लअंदाज़ी भी इसका एक बड़ा कारण है.

– फाइनेंशियल फ्रीडम ने महिलाओं को निर्णय की आज़ादी दे दी है. ये भी एक अहम् कारण है. 

तलाक़ के वाजिब कारण

द हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के सेक्शन 13 में तलाक़ के कारणों के बारे में दिया है, जो इस प्रकार हैं-

– व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, यौन रोग, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, 7 सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं और क्रूरता या निष्ठुरता. 

– उपरोक्त आधारों पर तलाक़ दिया जाता है, पर आजकल बहुत-से कपल्स ने क्रुएल्टी यानी क्रूरता को अपना हथियार बना लिया है. छोटी-छोटी समस्याओं को जब वे हल नहीं कर पाते, तो उसे क्रुएल्टी बताकर रिश्ते को तोड़ना उन्हें आसान लगता है.

– हम भी मानते हैं कि तनावपूर्ण रिश्ते में बने रहने से अच्छा है उस रिश्ते से छुटकारा पाना, पर वजहें वाजिब होनी चाहिए. 

– यंग जनरेशन व आनेवाली जनरेशन्स को शादी की गंभीरता और उसके सामाजिक मूल्यों को समझना होगा.

– सुनीता सिंह

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जानें कैसे पुरुषों पर भी असर डालता है तलाक़ (5 Reasons Why Divorce Is More Stressful On Men Than Women)

Divorce

आमतौर पर लोगों की यही सोच होती है कि तलाक़ का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर होता है और इसका पुरुषों पर कोई असर नहीं होता, लेकिन ये सच नहीं है. तलाक़ पुरुषों को भी प्रभावित करता है. पार्टनर से अलगाव उन्हें भी अकेला करता है, उन्हें भी तकलीफ़ देता है. तलाक़ का पुरुषों पर और क्या असर होता है, आइए जानते हैं.

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आमतौर पर तलाक़ के केस में सबकी सहानुभूति व तवज्जो पत्नी के साथ होती है. और माना जाता है कि किसी भी महिला के लिए तलाक़ की प्रक्रिया बेहद तकलीफ़देह होती है. लेकिन शायद ही किसी ने इस बात पर गौर किया हो कि तलाक़ पुरुषों के लिए भी उतना ही मुश्किलोंभरा व चुनौतीपूर्ण होता है. तलाक़ एक पुरुष को भी डिप्रेशन में डाल देता है. उसे अकेला बना देता है. साथ ही दोस्तों, परिवार, समाज की नज़रों में विलेन भी.
डॉ. प्रीति नंदा के अनुसार, यह एक मिथ है कि स़िर्फ महिलाएं ही अपने पति से बहुत प्यार करती हैं व उनसे दिल से जुड़ी रहती हैं. जबकि पुरुष भी अपनी पत्नी से भावनात्मक लगाव रखते हैं और डिवोर्स के बाद भी उस लगाव, संवेदनाओं व चाह को तोड़ नहीं पाते व बेचैन रहते हैं.
– तलाक़ पुरुषों को भावनात्मक रूप से अस्थिर कर देता है.
– कई बार मानसिक अवसाद इतना बढ़ जाता है कि उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति पनपनेे लगती है.
– मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पुरुष एक स्त्री की तुलना में अपने दुख को 1% भी व्यक्त नहीं करते, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका दुख-दर्द पत्नी की तुलना में कम है.
– तलाक़ के बाद पुरुष किस-किस तरह से प्रभावित होते हैं, आइए जानते हैं.

 

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मानसिक रूप से कमज़ोर होना

– पुरुष शारीरिक रूप से नारी की तुलना में भले ही बेहद ताक़तवर होते हैं, लेकिन मानसिक मज़बूती में वे स्त्री की तुलना में कहीं नहीं ठहरते.
– ये अलग बात है कि वे दुनिया के सामने कठोर बने रहते हैं.
– यहां तक कि तलाक़ जैसी त्रासदी को भी बिना शिकन के झेल लेते हैं, लेकिन यह महज़ दिखावा होता है.
– जीवनसाथी से अलगाव, आगे का जीवन तन्हा जीना, दोस्तों, रिश्तेदारों, महिला कलीग्स की चुभती निगाहें, ताने-उलाहने, तीखे कमेंट्स पुरुषों को अंदर से तोड़ देते हैं.
– उनका मन कमज़ोर और भावनाएं घायल होती जाती हैं.
– लेकिन हमेशा से जो सिखाया-बताया जाता है कि पुरुष बहादुर होता है, रोता नहीं है, उसे दर्द नहीं होता है… बस, यही बातें उन्हें कठोर बने रहने पर मजबूर कर देती हैं.

दर्द व्यक्त न कर पाना

– पुरुष अपने दुख-तकलीफ़ को उतनी सहजता से नहीं कह पाते, जितनी सरलता से महिलाएं कहती हैं. फिर चाहे बात छोटी-सी खरोंच लगने की हो या तलाक़ जैसी दुखद घटना.
– जहां स्त्री अपने-पराए हर किसी से अपने तलाक़ पर बात कर लेती है, पति के अत्याचार, व्यवहार के बारे में सब कुछ बता अपना मन हल्का कर लेती है, वहीं पुरुष ये सब नहीं कर पाते.
– पुरुष के लिए तो अपने बेस्ट फ्रेंड से भी अपनी पत्नी, तलाक़ और उससे जुड़े हालात, वजहों को डिसकस करना, अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करना टेढ़ी खीर साबित होता है.
– पुरुष अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण अपने ग़म को अपने अंदर ही पालता रहता है.
– तलाक़ से उपजा अवसाद, सदमा और पत्नी का रिजेक्शन पुरुष को लंबे समय तक तोड़कर रख देता है.
– पुरुष का यही अंतर्मुखी स्वभाव आगे चलकर कई गंभीर मानसिक व शारीरिक हेल्थ प्रॉब्लम्स को जन्म देता है.

प्रभावित होती प्रोफेशनल लाइफ

– भारतीय पुरुष शादी होते ही अपनी हर तरह की ज़रूरतों के लिए पत्नी पर कुछ इस कदर निर्भर हो जाते हैं कि उनका डेली रूटीन बिना पत्नी की मदद के पूरा नहीं होता.
– तलाक होने पर अचानक जब यह सपोर्ट सिस्टम फेल हो जाता है, तो उनकीज़िंदगी अव्यवस्थित हो जाती है. इन सबका असर उनकी नौकरी यानी प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ने लगता है.
– वे काम में पहले जैसे स्मार्ट और परफेक्ट नहीं रह जाते.
– देर रात तक की मीटिंग अटेंड नहीं कर पाते.
– वे लॉन्ग टूर पर नहीं जा पाते हैं, क्योंकि अब उन्हें घर मैनेज करने के साथ-साथ बच्चों के स्कूल (यदि बच्चे हैं), उनकी सुरक्षा की भी चिंता लगी रहती है.
– पहले की तरह स़िर्फ अपने करियर पर फोकस नहीं रख पाते, जिससे वे प्रोफेशनल फ्रंट पर पिछड़ने लगते हैं.
– सायकोलॉजिस्ट के अनुसार, घर-बाहर की ज़िम्मेदारी के साथ समाज व रिश्तेदारों के व्यवहार में उनके प्रति आया परिवर्तन, ठंडापन उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर करता है.
– जीवनसाथी की कमी उनके मन में खालीपन का एहसास पैदा करने लगती है.
– वे ग़ुस्सैल, चिड़चिड़े व आक्रामक होते जाते हैं.
– कभी-कभी अल्कोहल, ड्रग्स, जुए आदि की लत उनके पतन का कारण बन जाती है.

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फाइनेंशियल प्रेशर

– पुरुषों के लिए डिवोर्स फाइनेंशियली भी बहुत भारी पड़ता है.
-तलाक़ के बाद भारी एलीमनी देनी पड़ती है.
– जॉइंट एसेट्स का लिक्विडेशन करना होता है.
– घर, चल-अचल संपत्ति में भी पत्नी व बच्चोें की हिस्सेदारी देना ज़रूरी होता है.
– इन सब को पूरा करते-करते पुरुष की ज़िंदगीभर की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ख़र्च हो जाता है.
– फाइनेंशियल प्रेशर का असर उनके परफॉर्मेंस पर पड़ने लगता है, जिससे उनका कॉन्फिडेंस लेवल भी कम होता जाता है.
– तलाक़ पुरुष को मानसिक रूप से तो तोड़ता ही है, साथ ही कमोबेश पैसों की तंगी होेना उनके लिए दोहरी मार साबित होता है, जिसे झेल पाना पुरुषों के लिए कतई आसान नहीं होता.

इमोशनल अत्याचार

– डिवोर्स होने पर छोटे बच्चों की कस्टडी अक्सर मां को मिलती है. पिता के हिस्से में आती हैं कोर्ट के आदेशानुसार नियत समय पर चंद मुलाक़ातें.
– पुरुष अपनी पत्नी से अलग रह सकते हैं, लेकिन अपने बच्चों का दूर जाना उन्हें मानसिक रूप से तोड़ देता है.
– बच्चे के जन्म से लेेकर परवरिश से जुड़ी छोटी-छोटी बातें, यादें उन्हें ग़मगीन करती चली जाती हैं, यह औैर बात है कि वे अपना यह दर्द किसी से साझा नहीं करते.
– तलाक़ के बाद अपने बच्चे से पिता को दूर कर दिया जाना उनके लिए किसी इमोशनल अत्याचार से कम नहीं है.
तलाक़ का पुरुषों के मान-सम्मान और इमेज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. लेकिन अफ़सोस यह कि जहां पत्नी को हर तरफ़ से सहयोग मिलता है, वहीं पति के पास एक कंधा भी नहीं होता, जिस पर सिर रखकर, वह अपना मन हल्का कर सके. इसलिए यह कह देना कि तलाक़ का असर पुरुषों पर नहीं होता न्यायसंगत नहीं है.

– निधि निगम

क्यों नहीं निभ रही शादियां? (Why Marriages Are Breaking?)

शादि

शादि

सात जन्मों का बंधन कही जाने वाली शादी की उम्र दिन-प्रति-दिन घटती जा रही है. अग्नि को साक्षी मानकर मरते दम तक साथ निभाने की कसमें खाने वाले कपल्स अब कुछ साल भी साथ नहीं रह पाते. आज के मॉडर्न युग में जिस तेज़ी से तलाक़ के मामले बढ़ रहे हैं, उससे शादी के अस्तित्व पर ही संकट मंडराता नज़र आ रहा है. आख़िर युवाओं के लिए शादी निभाना इतना मुश्किल क्यों होता जा रहा है? पेश है ख़ास रिपोर्ट.

 

कमज़ोर होते रिश्ते
गांवों के मुक़ाबले महानगरों में तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. एक सर्वे के अनुसार, 1960 में सालभर में जहां तलाक़ के एक या दो मामले ही आते थे, वहीं 1990 तक ये आंकड़ा 1000 को पार कर गया. 2005 में फैमिली कोर्ट में तलाक़ के 7 हज़ार से भी ज़्यादा मामले दर्ज़ थे. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल तलाक़ के 8-9 हज़ार केस दर्ज़ हो रहे हैं, वहीं मुंबई में ये तादाद क़रीब 5 हज़ार है. जीवनसाथी डॉट कॉम के एक सर्वे के मुताबिक, तलाक़ लेने वालों में 25-35 साल के कपल्स की संख्या ज़्यादा है. मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद के मुताबिक, “आजकल के युवा शादी को कमिटमेंट की बजाय कन्वीनियंट (सुविधाजनक) रिलेशनशिप मानते हैं. जब तक सहजता से रिश्ता चलता है वो चलाते हैं और जब उन्हें असुविधा महसूस होने लगती है, तो बिना किसी गिल्ट के झट से रिश्ता तोड़ देते हैं.” कुछ जानकार टूटते रिश्तों के लिए शहरों में तलाक़शुदा महिलाओं को मिल रही स्वीकार्यता को भी ज़िम्मेदार मानते हैं. साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी कहती हैं, “तलाक़ को अब लोग कलंक नहीं मानते. पहले तलाक़शुदा महिलाओं को घर तोड़ने वाली कहकर आस-पड़ोस वाले और नाते-रिश्तेदार ताने मारते थे. इतना ही नहीं, माता-पिता भी तलाक़शुदा बेटी को अपनाने से कतराते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. तलाक़शुदा महिलाएं अब समाज से नज़रें चुराकर नहीं, बल्कि गर्व से सिर उठाकर जी रही हैं.”

आर्थिक स्वतंत्रता
डॉ. आनंद का मानना है, “महिलाओं की आत्मनिर्भरता से भी उनके रिश्तों की लय बिगड़ गई है. आर्थिक रूप से मज़बूत होने की वजह से उन्हें लगता है कि जब वो अकेले सब कुछ मैनेज कर सकती हैं, तो घुटन भरे रिश्ते को ढोने की भला क्या ज़रूरत है? दिलचस्प बात ये है कि पुरुषों को कमाऊ पत्नी तो चाहिए, लेकिन उसे वे ख़ुद से ऊपर उठता नहीं देख सकते. पत्नी के सामने अपना रुतबा कम होता देख पुरुषों के अहं को ठेस पहुंचती है और यही ठेस उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में दरार डाल देती है.” कुछ ऐसी ही राय साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी की भी है. उनके मुताबिक, “आजकल महिलाएं इंडिपेंडेंट हो गई हैं, आर्थिक रूप से वो किसी पर निर्भर नहीं हैं. ऐसे में पति से अलग होने का ़फैसला करने पर उन्हें इस बात का डर नहीं रहता कि अलग होने के बाद उनका ख़र्च कैसे चलेगा? बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा या समाज क्या कहेगा?” पहले ज़्यादातर महिलाएं मजबूरी में खोखले हो चुके रिश्तों का बोझ भी ढोती रहती थीं. शहरों में तलाक़ के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण डबल इनकम नो किड्स का बढ़ता चलन भी है. आजकल के ज़्यादातर दंपति करियर की ख़ातिर अकेले रहना पसंद करते हैं. ऐसे में तलाक़ की स्थिति में उन्हें ये डर भी नहीं रहता कि उनके अलग होने पर बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

शादि

साथ व़क्त न बिताना
बिज़ी लाइफस्टाइल के कारण पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए व़क्त ही नहीं रहता. कभी-कभी तो हफ्तों-महीनों तक वे एक-दूसरे से सुकून से बात तक नहीं कर पाते. ऐसे में उनके लिए एक-दूसरे को समझना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनमें भावनात्मक दूरियां बढ़ने लगती हैं और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है. औरतों से बहुत ज़्यादा उम्मीद की जाती है. पहले वो चुपचाप सब कुछ सह लेती थीं, लेकिन अब वो हिम्मत करके बोल रही हैं. जब बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है, तो वो रिश्ता ख़त्म करने में ही भलाई समझती हैं. वैसे भी जिस रिश्ते में तिल-तिलकर रोज़ मरना हो उसे तोड़ देना ही बेहतर है.

कपल्स ख़ुद की आइडेंटिटी को ज़्यादा महत्व देने लगे हैं. रिश्ता टूटने के लिए कोई एक ज़िम्मेदार नहीं होता, ताली दोनों हाथों से बजती है. हो सकता है, एक 70 फ़ीसदी ज़िम्मेदार हो तो दूसरा 30 फ़ीसदी ही हो, लेकिन ग़लती दोनों की होती है.

– मीता दोषी, साइकोलॉजिस्ट

समाज व परिवार का सीमित दायरा
डॉ. आनंद कहते हैं, “आजकल किसी भी कपल की ज़िंदगी में समाज और परिवार का रोल सीमित हो गया है, जिससे उनके बीच की छोटी-मोटी अनबन या झगड़ों को सुलझाने वाला कोई नहीं रहता. मनमुटाव की स्थिति में कपल्स अपना धैर्य खो देते हैं और तुरंत अलग होने का ़फैसला कर लेते हैं. आजकल के युवा बेस्ट पार्टनर चाहते हैं, जो हर चीज़ में परफेक्ट हो, लेकिन वो पार्टनर की मदद कर उसे किसी काम में परफेक्ट बनाने की ज़हमत नहीं उठाते. रिश्ते टूटने की एक बड़ी वजह धैर्य की कमी है, जिससे कुछ समय बाद कपल्स का एक-दूसरे के प्रति प्यार व आकर्षण कम हो जाता है, यही वजह है कि लव मैरिज करने वाले भी आसानी से तलाक़ ले रहे हैं.”

प्यार व विश्‍वास में कमी
आई लव यू बोल देना ही इस बात का सबूत नहीं कि पति-पत्नी के प्यार की डोर मज़बूत है. महानगरों में जहां वर्किंग कपल्स की तादाद दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, उनके बीच प्यार व विश्‍वास उतना ही कम होता जा रहा है. घर लेट से आने या फोन न उठाने पर पति-पत्नी दोनों को ही लगने लगता है कि पार्टनर का किसी और से संबंध है इसलिए वो उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है. फिर शक़ का यही बीज उनके रिश्तों को खोखला कर देता है. कई कपल्स तो अपने साथी की हर हरकत पर नज़र रखने के लिए उनके पीछे जासूस लगाने से भी नहीं हिचकिचाते. विश्‍वास ही शादी की बुनियाद है, अगर बुनियाद ही कमज़ोर हो जाए, तो शादी टिक पाना मुश्किल हो जाता है.

पहले जहां पति-पत्नी का रोल तय होता था, वहीं अब महिलाओं की भूमिका बदल रही है. उन्हें पहले से ज़्यादा अधिकार प्राप्त हैं और ये बात पुरुषों को हज़म नहीं हो रही. इसके अलावा आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक (सेक्सुअल) पहलू भी रिश्ता टूटने के लिए ज़िम्मेदार है. कपल्स को ढेर सारी उम्मीदें रखने की बजाय एक-दूसरे के अलग व्यक्तित्व को स्वीकारना चाहिए. शादी निभाने के लिए भव्य शादी समारोह की नहीं,
बल्कि समझदारी की ज़रूरत है.

– चित्रा सावंत, मीडिया प्रोफेशनल

बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं
डॉ. माधुरी सिंह के मुताबिक, “महिलाएं शादी निभाने की कोशिश करती हैं. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो वर्किंग वुमन के प्रति नज़रिए में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. आज भी पुरुष ऐसी बीवी चाहते हैं, जो अच्छी दिखती हो, अच्छा कमाती हो और जो उनके घर-परिवार को भी अच्छी तरह संभाल सके, यानी पत्नी उनकी हर कसौटी पर खरी उतरे, जो संभव नहीं है.” आजकल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं को भी अपने साथी से बहुत-सी उम्मीदें रहती हैं, जैसे- पति अच्छा दिखे, अच्छा कमाए, उसकी हर बात सुने, उसके माता-पिता का ज़्यादा ध्यान रखे आदि. साइकोलॉजिस्ट दोषी कहती हैं, “आजकल कपल्स की शादी से अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं. एक-दूसरे से की गई ये अपेक्षाएं जब पूरी नहीं होतीं तो पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं और धीरे-धीरे ये दूरियां इस क़दर बढ़ जाती हैं कि उनके रास्ते ही अलग हो जाते हैं.”

शादि

दोनों ज़िम्मेदार
तलाक़ के लिए हर बार पति ही ज़िम्मेदार हो, ये ज़रूरी नहीं. 3 साल पहले लव मैरिज करने वाले मुंबई के दिनेश इन दिनों अकेले हैं. दिनेश कहते हैं, “मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं. शादी के बाद मेरी पत्नी को बेवजह न जाने क्यों मेरे पैरेंट्स से परेशानी होने लगी. वो चाहती थी कि मैं अपने मां-बाप को छोड़कर उसके साथ दूसरे फ्लैट में रहूं, जो संभव नहीं था. मैं अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ सकता, ये कहने पर वो मुझे ही छोड़कर चली गई और तलाक़ का नोटिस भेज दिया.”

तलाक क़ानून
हमारे देश में तलाक़ लेना आसान नहीं है. इसके लिए लंबी क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है, जिसमें सालों लग जाते हैं. हालांकि पिछले साल कैबिनेट ने हिंदू मैरिज एक्ट में कुछ संशोधन करके इसे आसान बनाने की कोशिश की है यानी अब पति-पत्नी यदि स्वेच्छा से अलग होना चाहें, तो ऐसे मामलों को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा. अदालत को ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाना होगा. पहले तलाक़ की अर्ज़ी देने के बाद पति-पत्नी को सुलह के लिए 6 महीने की समय सीमा दी जाती थी, लेकिन अब ये बाध्यता ख़त्म हो चुकी है. फिर भी अदालत को सही लगे, तो वो कपल्स को सुलह के लिए कुछ व़क्त दे सकती है.


– कंचन सिंह

करिश्मा कपूर और संजय कपूर अलग हुए

story6013 सालों का रिश्ता आख़िरकार टूट गया. करिश्मा कपूर और संजय कपूर के बीच तलाक़ हो गया है. आधाकारिक रूप से दोनों अलग हो गए. 13 जून को मुंबई के फैमिली कोर्ट ने इनके तलाक़ पर अपनी मोहर लगा दी. वैसे दोनों काफ़ी पहले से ही एक-दूसरे से अलग रह रहे थे. साल 2003 में दोनों ने शादी की थी. शादी के बाद दोनों के बीच मन-मुटाव के चलते साल 2010 में करिश्मा संजय का दिल्ली वाला घर छोड़ कर मुंबई में रहने लगी थीं. बच्चों की कस्टडी का केस पहले ही करिश्मा जीत चुकी हैं और उन्हें दोनों बच्चों समायरा और किआन की कस्टडी दे दी गई थी. हालांकि कोर्ट ने संजय को बच्चों से मिलने और उनके साथ छुट्टी बिताने की अनुमति दी थी. सभी शर्तें व फाइनेंशियल ज़रुरतों को पूरा करने के बाद दोनों की सहमति से कोर्ट ने तलाक़ पर मोहर लगा दी. बच्चों की परवरिश के लिए संजय ने 14 करोड़ का बॉन्ड भी किया है. इसके अलावा संजय मुंबई में अपना खार स्थित घर पहले ही करिश्मा के नाम ट्रांसफर कर चुके हैं.