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दिवाली के दिन शुभ फल प्राप्ति के लिए क्या करें, कैसे करें? (Do’s And Don’ts Of A Prosperous Diwali)

do's and don'ts during diwali
दीपावली में सुख, समृद्धि और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, इसके लिए इन पांच दिनों में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे- पूजा की विधि, शुभ फल प्राप्ति के लिए क्या करें, किन बातों से बचें आदि. दीपावली के शुभ पर्व की शुरुआत होती है धनतेरस से, इस दिन किस तरह से पूजा-अर्चना करें और किन बातों का ख़्याल रखें, ताकि मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहे, सबसे पहले यही जानते हैं.

नरक चतुर्दशी

यह दूसरे दिन मनाया जानेवाला पर्व है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है. इस दिन की शाम को दीपदान करने की मान्यता है, जो यमराज के लिए किया जाता है.

– इस दिन स्नानादि के बाद मंदिर में भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की पूजा करें.

– रात को घर के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य द्वारा एक दीपक जलाकर पूरे घर में घुमाने के बाद उस दीप को घर से बाहर कहीं दूर इस मान्यता और विश्‍वास के साथ रखें कि सभी बुराइयां और हानिकारक शक्तियां घर से बाहर चली जाएं.

– मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में चावल की ढेरी बनाकर उस पर दीया जलाएं.

– यमराज को अकाल मृत्यु से दूर रखने की प्रार्थनाकरें.

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दीपावली

धार्मिक व सामाजिक मान्यता के अनुसार पांच दिनों तक हिंदू रीति से उत्सव की तरह मनाया जानेवाला त्योहार है दिवाली.

पूजन सामग्री और विधि

सामग्री: दीपक, कमल के फूल, जावित्री, केसर, रोली, चावल, पान के पांच पत्ते, सुपारी, एक थाली में फल, दूसरी थाली में गुलाब और गेंदा आदि के फूल, दूध, खील-बताशे, नारियल, सिंदूर, सूखे मेवे, मिठाई की भरी थाल, दही, गंगाजल, दूब, अगरबत्ती, आंगन आदि में जलाने के लिए 11 या 21 की संख्या में मिट्टी के दीपक, रूई, कलावा, तांबे का कलश और तांबे के अन्य पात्र, सिक्के तथा रुपए.

विधि: सबसे पहले थाली में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं या नवग्रह का यंत्र स्थापित करें. इसके साथ ही एक तांबे या मिट्टी का कलश रखें, जिसमें गंगाजल, दूध, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग वग़ैरह डालें तथा उसे लाल कपड़े से ढंककर एक कच्चे नारियल और कलावे से बांध दें.

– बनाए गए नवग्रह यंत्र के स्थान पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, देवी लक्ष्मी की मूर्ति और मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां या चित्रों से सजाएं.

– यदि कोई धातु की मूर्ति हो, तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध, दही और गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत-चंदन का शृंगार करें और फल-फूल आदि से सजाएं. इसके दाहिनी ओर घी या तिल का एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं.

– घर के किसी मुख्य सदस्य या नित्य पूजा-पाठ करनेवाले व्यक्ति को महालक्ष्मी पूजन के समय तक उपवास रखना चाहिए.

– ध्यान रहे पूजन के लिए उत्तर या पूर्व दिशा में मुख करके बैठें.

– सबसे पहले गणेश और अंबिका का पूजन करें. फिर कलश स्थापन और नवग्रह पूजन के बाद लक्ष्मी समेत दूसरे देवी-देवताओं का पूजन करें.

– इस पूजन के बाद तिजोरी में गणेश तथा लक्ष्मी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें. पूजन के स्थान पर चौमुखा दीपक जलाएं तथा पूजा के बाद घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें.

– कारोबारियों को अपने कार्यक्षेत्र पर बही-खातों की पूजा करना चाहिए. पूजा के बाद जितनी जैसी श्रद्धा हो, उसके अनुरूप घर के छोटे बच्चों, बहू-बेटियों को रुपया-पैसा या दूसरी वस्तुओं का दान देना चाहिए.

– रात के बारह बजे दुकान की गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें. परंपरा के अनुसार दीपावली पूजन के बाद चूने या गेरू में रूई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल-बट्टा तथा सूप पर तिलक करना चाहिए.

– देवी लक्ष्मी की पूजा के समय उनके मंत्र-ॐ श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: का लगातार उच्चारण करते रहें.

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क्या करें?

दीपावली की पूजा किसी योग्य पुजारी से विधि-विधान से संपन्न करवाएं.

– पूजा की तैयारी सूर्योदय से पहले ही नित्यकर्म एवं स्नान आदि से निबटकर कर लें.

– पूजन से पहले घर की अच्छी तरह साफ़-सफ़ाई करें. घर को फूल, आम के पत्ते, रंगोली, रंगीन बल्ब आदि से सजाएं.

– पूजाघर सही तरह से सुसज्जित होना चाहिए. सजावट में विविध रंगों का
इस्तेमाल करें.

– पूजा के क्रम में अच्छी ख़ुशबूदार अगरबत्ती या धूप का इस्तेमाल करें. इनमें गुलाब या चंदन की धूप सबसे बेहतर रहती है.

– घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीया जलाएं.

क्या न करें?

– घर में व प्रवेश द्वार पर कहीं भी गंदगी न रहने दें.

– रंगों, फूलों आदि से सजावट करते हुए या रंगोली बनाते समय ध्यान रहे कि काले या गाढ़े भूरे रंग का इस्तेमाल न के बराबर हो.

– पूजा का स्थान घर के दक्षिण, पश्‍चिम या उत्तर की ओर न बनाएं. किसी भी एक देवी या देवता की दो मूर्तियां या तस्वीरें न रखें.

– घर के कोने-कोने में नमक मिश्रित जल का छिड़काव करने के बाद अपना हाथ धोना नहीं भूलें.

– उपहार में चमड़े की बनी वस्तुएं किसी को भी न दें.

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वास्तु टिप्स

– घर के आंगन, बड़े हॉल या फिर प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं. उसके बीच में दीपक जलाएं. दीये के मुख को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखकर जलाने से सुख-समॄिद्ध बढ़ती है. इसी के साथ मुख्य द्वार पर घर में प्रवेश करते हुए पैरों के
निशान बनाएं.

– घर का उत्तरी भाग धन का प्रतिनिधित्व करता है, अत: लक्ष्मी पूजा इसी हिस्से में की जानी चाहिए.

– पूजाघर में भगवान गणेश को देवी लक्ष्मी के बाईं ओर तथा देवी सरस्वती को लक्ष्मी के दाईं ओर रखना चाहिए. सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें बैठी हुई अवस्था में होनी चाहिए, जिन्हें उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए
रखना चाहिए.

– पानी का कलश पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. पूजा स्थल या पूजा घर में मूर्तियां रखते समयइस बात का ध्यान रखें कि वे किसी भी दरवाज़े के सामने या रास्ते में न पड़ें.

– पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर की दिशा में एक चौड़े बर्तन के पानी में तैरती हुई ताज़ा गुलाब की पंखुड़ियां रखें.

– ॐ या स्वस्तिक के चिह्न को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवारों पर ही लगाएं.

– जब घर के बाहर दीये जलाएं, तो इन्हें चार के गुणक के रूप में रखें. प्रत्येक दीया लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र का प्रतिनिधित्व करता है.

– उपहार के लिए धातु के सामान या कपड़े आदि को उपयुक्त माना गया है. सजावटी वस्तुओं में पेंटिंग, क्रिस्टल बॉल आदि हो सकते हैं.

– घर की सजावट के क्रम में प्रकाश-व्यवस्था घर के मुख्य द्वार की दिशा के अनुरूप होनी चाहिए. यदि मुख्य द्वार उत्तर या उत्तर-पश्‍चिम की ओर हो, तो हरे या पीले रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि मुख्य प्रवेश पूर्व की ओर हो, तो पीले रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि मुख्य प्रवेश दक्षिण-पूर्व हो, तो लाल रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि प्रवेश द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्‍चिम या पश्‍चिम की ओर हो, तो लाल और नीले रंग की रोशनी का उपयोग करना चाहिए. इसी तरह से उत्तर-पूर्व की दिशा में प्रवेश द्वार होने की स्थिति में नीला रंग सही होता है.

 

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गोवर्धन पूजा

दिवाली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा होती है. इस दिन गायों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि गाय देवी लक्ष्मी का स्वरूप है. भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इंद्र का मान-मर्दन कर गिरिराज पूजन किया था.

– गायों को सुबह स्नान करवाकर फूल- माला, धूप, चंदन आदि से उनकी पूजा की जाती है. गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है.

– पूजा के बाद गोवर्धनजी की सात परिक्रमाएं उनकी जय-जयकार करते हुए की जाती है.

– गोवर्धनजी गोबर से लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाए जाते हैं. इनकी नाभि के स्थान पर एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रख दिया जाता है. फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करते समय डाल दिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है.

क्या करें?

– गोवर्धन पूजा पूरे विधि-विधान के साथ शुभ मुहूर्त में करें. बेहतर होगा किसी पंडित से पूजा करवाएं.

– पूजा से पहले प्रात:काल तेल मालिश कर स्नान करें.

– घर के बाहर गोवर्धन पर्वत बनाएं. फिर पूजा करें.

क्या न करें?

– गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन बंद कमरे में न करें.

– गायों की पूजा करते हुए ईष्टदेव या भगवान कृष्ण की पूजा करना न भूलें.

– इस दिन चंद्र का दर्शन न करें.

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bhaiya-dooj

भैया दूज

दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.

– भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.

– इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए. इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.

– बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है. इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.

क्या करें?

– भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.

– बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?

– भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.

– बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक
(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)

DIY घर पर बनाएं डिज़ाइनर कुंदन दीया (DIY- Easy To Make Designer Kundan Diya)

DIY Designer Kundan Diya

DIY Designer Kundan Diya
सामग्री:
सीडी
ब्लू कुंदन
ग्रीन कुंदन
हाफ पर्ल
जाली वाला कैंडल स्टैंड (जाली वाटी)
गोल्डन लेस
कार्ड पेपर
अडेसिव ग्लू
रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू
फैब्रिक ग्लू
कैंची

विधि:
* सबसे पहले सीडी पर अडेसिव ग्लू लगाएं और उस पर कार्ड पेपर चिपकाएं.
* कार्ड पेपर को सीडी के शेप में काट लें.
* सीडी के बीच में रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू से जाली वाला कैंडल स्टैंड चिपकाएं.
* जाली वाले कैंडल स्टैंड के पास रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू से गोल्डन लेस चिपकाएं.
* लेस के पास फैब्रिक ग्लू से हाफ पर्ल चिपकाएं.
* अब सीडी के किनारे पर फैब्रिक ग्लू से ब्लू कुंदन चिपकाएं.
* फिर ब्लू कुंदन के पास अंदर की तरफ़ ग्रीन कुंदन चिपकाएं.

DIY घर पर बनाएं ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली
दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय

इसी तरह आप अलग-अलग कलर कॉम्बिनेशन का प्रयोग करके ख़ूबसूरत डिज़ाइनर कुंदन दीये बना सकते हैं.

घर पर ख़ूबसूरत डिज़ाइनर कुंदन दीया बनाना सीखने के लिए देखें वीडियो:

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दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय (Diwali 2017: 20 Easy Ways To Impress Goddess Lakshmi This Diwali)

Easy Ways To Impress Goddess Lakshmi

दीपावली के त्योहार का जितना धार्मिक महत्व है, उतना ही इस दिन किए गए उपायों का भी महत्व है. पं. राजेंद्र जी बता रहे हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 आसान और अचूक उपाय.

Easy Ways To Impress Goddess Lakshmi

1) लक्ष्मी पूजन के ख़ास अवसर पर शुभ मुहूर्त पर पूजा-आराधना, मंत्र जाप, अनुष्ठान आदि करने से मां लक्ष्मी को प्रसन्न होती हैं इसलिए सही समय पर पूजा-प्रार्थना अवश्य करें.
2) इस साल 19 अक्टूबर के दिन लक्ष्मी पूजन है. पूजा-आराधना के लिए हम आपको तीन शुभ मुहूर्त बता रहे हैं, दो स्थिर लग्न हैं, जिनका समय है शाम 7.45 से लेकर 9.44 मिनट (ये वृषभ लग्न है) और रात 2.10 से लेकर 4.18 मिनट (इसे अर्धरात्रि भी कहा जाता है और ये सिंह लग्न है), इनके अलावा तीसरा शुभ मुहूर्त है प्रदोष काल, ये शाम 5.48 से लेकर 7.25 मिनट तक है. इन तीनों में से किसी भी शुभ मुहूर्त पर आप मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.
3) अपने आसपास के चौराहे पर दिवाली की रात में दीया ज़रूर जलाएं. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की प्रसन्न होती हैं.
4) दिवाली की रात एक दीया मंदिर में जाकर भी जलाएं.
5) घर के दरवाज़े और मेन गेट पर दीपक अवश्य जलाएं.
6) दिवाली की रात घर में अखंड दीया जलाएं जो सुबह तक जलता रहे.
7) दिवाली की रात बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाना भी शुभ माना जाता है. इससे भगवान शिव की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है.
8) दिवाली की रात किसी मंदिर के किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और फिर मुड़कर पीछे न देखें. ऐसा करने से लक्ष्मी जी की कृपा होती है.
9) दीपावली की रात तुलसी के पौधे के नीचे दीया जलाने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है.
10) दिवाली के दिन किसी भी मंदिर में केले का एक पेड़ लगाएं. फिर इस पेड़ की सेवा करते रहें. जैसे-जैसे केले का पेड़ बड़ा होगा आपके घर में भी समृद्धि बढ़ती जाएगी.

लक्ष्मी जी की आरती (Aarti- Lakshmi Ma)

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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के अचूक उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

11) दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद लक्ष्मी जी या किसी भी देवी को लौंग अर्पित करें. ये प्रकिया दिवाली के बाद भी सतत चलने दें. ऐसा करने से आर्थिक लाभ होता है.
12) शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू या पोंछा न लगाएं. यह समृद्धि के लिए अशुभ माना जाता है.
13) घर की दीवारों या ज़मीन पर पेन, पेंसिल या चॉक के निशान न बनाएं. इससे कर्ज़ का बोझ बढ़ता है.
14) दिवाली के दिन किसी किन्नर को धन का दान करें और उससे अनुरोध करके कुछ पैसे वापस ले लें. उन पैसों को स़फेद कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रख दें. इससे धन की कभी कमी नहीं होगी.
15) दिवाली की रात लौंग और इलायची जलाकर उसका भस्म बना लें. इस भस्म से देवी-देवताओं को तिलक लगाएं. इस प्रयोग से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
16) दिवाली के दिन एक पीपल का पत्ता तोड़कर घर ले आएं. पत्ता कटा-फटा नहीं होना चाहिए. इस पत्ते पर ॐ महालक्ष्मै नम: लिखकर पूजा स्थल पर रख दें. इसे तिजोरी में स्थापित करने से धन आगमन और धनवृद्धि होती है.
17) दिवाली के दिन किसी गरीब, दुखी, असहाय, रोगी को आर्थिक सहायता दें. ऐसा करने से आपकी उन्नति अवश्य होगी.
18) श्रीयंत्र के सामने बैठकर श्री सुक्त के 21 पाठ करके उनके समक्ष 21 घी के दीये जलाएं. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है.
19) दिवाली वाले दिन गणेश, लक्ष्मी और कुबेर इन सबकी पूजा अवश्य करें. साथ ही श्री सुक्त से हवन कराएं. ऐसा करने से धन की वृद्धि होती है.
20) लक्ष्मी यंत्र या श्री यंत्र पर 21 विष्णु कमल अवश्य चढ़ाएं. ऐसा करने से धन की समस्या दूर होती है.

 

फेस्टिव स्पेशल: रंगोली डिज़ाइन्स (Festive Special: Rangoli Designs)

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