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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या एबॉर्शन के बाद कंसीव करने में समस्या आती है? (Does a Past Abortion Affect Chances of Getting Pregnant?)

Pregnancy Problems

 

मैं 29 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. शादी के तुरंत बाद मैंने कंसीव कर लिया था, पर हम दोनों ही इस ज़िम्मेदारी के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए एबॉर्शन करा लिया. पर पिछले 2 सालों से हम प्रेग्नेंसी प्लान करना चाहते हैं, पर कंसीव नहीं कर पा रही हूं, इसलिए बहुत ग्लानि महसूस करती हूं. क्या पिछले एबॉर्शन के कारण ऐसा हो रहा है? कृपया, मेरी मदद करें.

– पावनी वर्मा, गुड़गांव.

एबॉर्शन के बाद कुछ महिलाएं आप ही की तरह ग्लानि महसूस करती हैं, पर याद रखें कि यह ़फैसला आपने सोच-समझकर लिया था, इसलिए उसे दिमाग़ से निकाल दें. आप एक बार पहले भी कंसीव कर चुकी हैं, इसलिए दोबारा भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं, पर आप कंसीव क्यों नहीं कर पा रही हैं, उसका कारण पता करने के लिए आप दोनों को ही सीमेन एनालिसेस, ट्यूबल पेटेंसी और ओवेरियन फंक्शन जैसे कुछ ज़रूरी टेस्ट कराने होंगे, जिसके बाद ही सही कारणों का पता चल पाएगा.

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Pregnancy Problems

मैं 36 वर्षीया महिला हूं और मेरी पहली प्रेग्नेंसी को 2 महीने हो गए हैं. सोनोग्राफी के बाद डॉक्टर ने सब नॉर्मल बताया, पर चौथे महीने में ट्रिपल टेस्ट कराने की सलाह भी दी है. यह टेस्ट किसलिए है?

– चेतना पटवा, आगरा.

यह प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में किया जानेवाला एक ब्लड टेस्ट है. दरअसल, आपकी उम्र 35 साल से ज़्यादा है और इस उम्र के बाद प्रेग्नेंसी में कुछ असामान्यताएं आ सकती हैं, इसलिए डॉक्टर ने आपको यह टेस्ट कराने की सलाह दी है. ट्रिपल टेस्ट के ज़रिए यह जानने की कोशिश की जाती है कि कहीं गर्भवती मां को कोई क्रोमोज़ोमल असामान्यताएं या फिर न्युरल ट्यूब डिफेक्ट्स की संभावना तो नहीं. आमतौर पर इस टेस्ट के साथ अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है. अगर किसी तरह की असामान्यता पाई गई और टेस्ट पॉज़ीटिव आया तो,  आपको एक और टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है.

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पीरियड्स के  दौरान इनसे दूर रहें महिलाएं

  • नमकीन पदार्थ: पीरियड्स के दौरान सबसे पहले खाने में नमक की मात्रा कम करनी चाहिए. इसके अलावा अन्य नमकीन पदार्थ, जैसे- पोटैटो चिप्स, सोडा, चीज़, सोया सॉस आदि. इस दौरान बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि होटल्स आदि में खाने में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे पेट में सूजन आदि की समस्या बढ़
    जाती है.
  • कैफीन: चाय, कॉफी, चॉकलेट जैसे कैफीनयुक्त पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. माना कि इन दिनों चॉकलेट आदि खाने का बहुत मन करता है, पर कैफीन के ज़्यादा सेवन से पेट में मरोड़ के साथ दर्द, तनाव व थकान आदि की समस्या बढ़ जाती है.
  • तला-भुना व मसालेदार: महीने के उन ख़ास दिनों में तला-भुना व अधिक मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए. इन दिनों पाचनशक्ति धीमी पड़ जाती है, इसलिए गरिष्ठ भोजन से दूर ही रहें. इसके अलावा फैट से भरपूर चीज़ें, जैसे- चीज़ व बटर आदि से बचें.
  • डेयरी प्रोडक्ट्स: पीरियड्स के दौरान डेयरी प्रोडक्ट्स, वेजीटेबल ऑयल, रेड मीट से दूर ही रहें. इसमें पाए जानेवाले अनसैचुरेटेड फैट दर्द बढ़ाते हैं.
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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या गर्भाशय का न होना मुमकिन है? (Can A Woman Be Born Without A Womb?)

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मेरी बेटी 16 साल की है, पर अभी तक उसके पीरियड्स नहीं आए हैं. सोनोग्राफी से पता चला कि उसकी ओवरीज़ तो हैं, पर गर्भाशय नहीं है, क्या ऐसा भी होता है? क्या यही वजह है कि उसके पीरियड्स नहीं आए?

– रीता वर्मा, हैदराबाद.

जी हां, यह मुमकिन है और यही वजह है कि उसके पीरियड्स नहीं आ रहे हैं. दरअसल, ऐसे मामलों में ओवरीज़ तो सामान्य होती हैं, पर योनि या गर्भाशय या तो अविकसित रह जाते हैं या होते ही नहीं. लगभग 4 या 5 हज़ार मामलों में से एक मामला ऐसा भी पाया जाता है. मैं समझ सकती हूं कि यह जानकर आप बहुत परेशान होंगी, पर कुछ सपोर्ट ग्रुप हैं, जो ऐसे मामलों में मदद करते हैं.

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मैं 35 वर्षीया दो बच्चों की मां हूं. हम तीसरा बच्चा नहीं चाहते थे, पर चूंकि मैंने कंसीव कर लिया था, इसलिए एबॉर्शन करवाना पड़ा. एबॉर्शन के तुरंत बाद डॉक्टर ने गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की सलाह दी. पर अगर इनका इस्तेमाल मैं कुछ दिनों बाद करूं, तो क्या इस बीच कंसीव करने की संभावना है?

– कुसुम जोशी, जबलपुर.

एबॉर्शन के 10-12 दिनों बाद ही महिलाओं में ओव्यूलेशन शुरू हो जाता है, इसलिए अगर आपको बच्चे नहीं चाहिए, तो तुरंत किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल शुरू कर दें.
बार-बार एबॉर्शन से पेल्विक इंफेक्शन, एब्नॉर्मल डिस्चार्ज और पेट में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए तुरंत किसी गर्भनिरोधक का
इस्तेमाल करें.

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पीरियड्स के दर्द में ट्राई करें ये होम रेमेडीज़ 

  • पीरियड्स के पहले ही दिन एक ग्लास गुनगुने पानी में डेढ़ टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1 टेबलस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन बार पीएं.
  • एक कप पानी में अदरक का एक टुकड़ा, शहद और नींबू का रस मिलाकर पांच मिनट तक उबालें. दिन में तीन बार पीएं.
  • एक कप पानी में 1 टेबलस्पून तुलसी की पत्तियां उबालकर थोड़ी-थोड़ी देर में पीएं.
  • अलसी में दर्दनिवारक गुण होते हैं, जो पीरियड्स में होनेवाले दर्द व मरोड़ मेंे आराम दिलाते हैं. 1-2 टेबलस्पून अलसी फांक लें.
  • गर्म पानी की थैली से पेट के निचले हिस्से में सेंक करें. तुरंत आराम मिलेगा.
  • एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण पपीता पीरियड्स के दर्द में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है. पीरियड्स के दौरान पपीता खाएं, यह दर्द से राहत दिलाकर पीरियड्स को हैप्पी बनाता है.
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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

 

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या हीमोग्लोबिन की कमी के लिए हार्मोनल पिल्स लेनी चाहिए ? (Should I Take Hormonal Pills To Boost Hemoglobin Level?)

हीमोग्लोबिन

मैं 21 वर्षीया छात्रा हूं. मुझे हमेशा कमज़ोरी महसूस होती है. ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन कम आया है और गायनाकोलॉजिस्ट ने हैवी ब्लीडिंग को इसका कारण बताया, साथ ही पीरियड्स के 5वें दिन से 3 हफ़्तों के लिए हार्मोनल पिल्स लेने की सलाह दी है. क्या यह ज़रूरी है? कृपया, मार्गदर्शन करें.

– रेखा खोसला, नोएडा.

मैं समझ सकती हूं कि इस उम्र में हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की सलाह को लेकर आप परेशान हैं. दरअसल, हार्मोनल पिल्स के ज़रिए एक आर्टिफिशियल साइकल तैयार होता है, जिससे आपको ब्लीडिंग कम होती है. पीरियड्स के 5वें दिन से पिल्स लेने के कारण शुरुआत से ही आपके हार्मोंस दब जाते हैं. क्योंकि आपका हीमोग्लोबिन भी कम है, इसलिए दवाओं के साथ-साथ यह ध्यान देना भी ज़रूरी है कि आपको बेवजह हैवी ब्लीडिंग तो नहीं हो रही.

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पिछली डिलीवरी में मेरे बच्चे का वज़न स़िर्फ 2 किलो था, पर डॉक्टर ने इसका कारण नहीं बताया. अब मैं दोबारा प्रेग्नेंट हूं और मुझे डर लग रहा है कि कहीं इस बार भी मेरे बच्चे का वज़न कम न हो. पिछली बार मैं स़िर्फ 3 बार चेकअप के लिए गई थी. इस बार क्या करूं?

– आरोही हांडे, नासिक.

जन्म के बाद जिन बच्चों का वज़न ढाई किलो से कम होता है, उन्हें लो वेट बर्थ कहते हैं. इसका एक अहम् कारण प्री मैच्योर डिलीवरी हो सकती है. इसके अलावा प्रेग्नेंसी में मां का ग़लत खानपान, बार-बार इंफेक्शन, धूम्रपान और अल्कोहल भी इसके कारण हो सकते हैं. जैसा कि आपने बताया कि पिछली बार आप स़िर्फ 3 बार चेकअप के लिए गई थीं, इससे साफ़ पता चलता है कि पिछली प्रेग्नेंसी के दौरान आपने कितनी लापरवाही बरती. इस दौरान सही खानपान और नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप बहुत ज़रूरी होता है. नियमित चेकअप से डॉक्टर समय-समय पर आपके और बच्चे की सही स्थिति के बारे में जानकारी देते रहते हैं. वैसे भी गर्भावस्था के दौरान खानपान, परहेज़, ज़रूरी सावधानियों के अलावा नियमित चेकअप करवाना बेहद ज़रूरी है.

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नेचुरल तरीकों से बूस्ट करें हीमोग्लोबिन लेवल 

  • अपने भोजन में आयरन से भरपूर ओट्स, बार्ली जैसे साबूत अनाज की मात्रा बढ़ा दें.
  • हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने में विटामिन सी काफ़ी मददगार साबित होता है. संतरा, मोसंबी, लीची, अमरूद और नींबू को अपने डायट में शामिल करें.
  • खजूर, मुनक्का और एप्रीकोट्स में भी भरपूर मात्रा में आयरन होता है. यह आपके हीमोग्लोबिन लेवल को बूस्ट करने में मदद करेगा.
  • स्ट्रॉबेरीज़ काफ़ी फ़ायदेमंद मानी जाती है. इसे जूस, स्मूदी या किसी रेसिपी में जैसे चाहें, वैसे अपने डायट में शामिल करें.
  • बीटरूट, आलू, ब्रोकोली, पालक का भरपूर सेवन करें.

 

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

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