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40 होम डेकोर मिस्टेक्स (40 Home Decor Mistakes)

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ख़ूबसूरत और स्टाइलिश घर की चाह भला किसे नहीं होती. इसके लिए लोग तरह-तरह के चीज़ों से घर को सजाने लगते हैं, लेकिन कई बार होम डेकोर में वे कुछ ऐसी ग़लतियां भी कर देते हैं, जिनसे घर की ख़ूबसूरती प्रभावित होती है. इसी विषय पर हमें इंटीरियर डिज़ाइनर एकांश बंसल ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

* घर का डेकोर बदलने से पहले यह देख लें कि आप किस तरह ज़्यादा से ज़्यादा जगहों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

* घर की पेंटिंग और लाइटिंग अरेंजमेंट किस तरह की होनी चाहिए. कभी भी अपनी पसंद की सभी चीज़ों को एक ही कमरे में सजा देने की भूल न करें.

* दीवारों पर ब्राइट कलर्स न लगाएं. इसकी बजाय नेचुरल कलर्स का इस्तेमाल करें, जैसे- बेज या क्रीम.

* किसी भी तरह का मोज़ैक टाइल्स रूम के किसी भी दीवार पर न लगाएं.

* कई लोग मैग्ज़ीन में छपे इंटीरियर डेकोरेशन को देख उसी तरह की डेकोरेशन करने की सोचते हैं. ऐसा न करें. अपने घर के आकार और ज़रूरत को    ध्यान में रखते हुए होम डेकोर करें.

* सीलिंग के मामले में अक्सर लोग ग़लतियां करते हैं, जैसे- सीलिंग लो हो या बहुत ही हाई, दोनों ही स्थितियों में होम डेकोर के हिसाब से ख़राब लगता  है. ऐसे में यदि कमरे की छत नीची है, तो कमरे का आकार बड़ा दिखाने के लिए आप ग्लास के दरवाज़े लगा सकते हैं. इसी तरह यदि सीलिंग बहुत  ऊंची है, तो वह देखने में बहुत अजीब लगती है. इसके लिए कमरे में बड़ी-बड़ी लाइटें या झूमर लटका देते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि हमारे सिर के  ऊपर कोई बोझ लटका हुआ है. इन सबसे बेहतर यही होगा कि फॉल्स सीलिंग बनाई जाए.

* पूरी दीवार को पेंटिंग्स या आर्ट वर्क न सजाएं. ब्राइट और लाइवली आर्ट वर्क दीवार के बीचोंबीच लगाएं यानी सेंटर प्लेस पर.

* फ्लोर छोटा है, तो दीवारों पर डार्क कलर करने की भूल न करें, इससे फ्लोर और छोटा नज़र आएगा.

* आपने बहुत स्टाइलिश फर्नीचर से घर को सजा तो दिया, लेकिन वे फर्नीचर्स कंफर्टेबल न हो, तो ऐसे फर्नीचर का कोई औचित्य नहीं है.

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* ड्रॉइंगरूम में शोपीस का ढेर न लगा दें. फर्नीचर के अलावा शोपीस कॉफी टेबल या फिर साइड टेबल पर लगाएं.

* घर की खिड़कियां बड़ी हैं, तो उन्हें लैमीनेटेड ग्लास पेन्ट से कवर करने की ग़लती न करें. इसकी बजाय ग्रिल्स का इस्तेमाल करें. इससे जहां कमरे    को एथनिक लुक मिलेगा, वहीं फ्रेश हवा भी कमरे में आएगी.

* कमरों को छोटे-छोटे चीज़ों से न भर दें. बहुत अधिक छोटे सामानों से रूम बहुत भरा-भरा लगता है.

* कभी भी दीवारों पर पेंटिंग बहुत ऊंचाई पर न लगाएं. इसे लगाने से पहले दीवार के सामने बैठकर देख लेें और एक निश्‍चित ऊंचाई पर इसे लगाएं.

* छोटे कमरे में रखा गया बड़ा सोफा इंटीरियर के अनुसार बहुत बड़ी ग़लती है. ग़लत तरी़के से रखा गया फर्नीचर घर के शो को बिगाड़ देता है. एक बड़े  सोफे के साथ छोटा-सा साइड टेबल भी अच्छा नहीं लगता.

* बड़े पैटर्नवाले कारपेट की बजाय कमरे में छोटे पैटर्नवाले कारपेट बिछाएं, इससे कमरा बड़ा दिखेगा. इसके अलावा छोटे कारपेट से भी कमरे बड़े  दिखते हैं.

* दीवारों पर एक ही कलर के अलग-अलग शेड्स का इस्तेमाल न करें, जैसे- सीलिंग पर अगर इंडिगो कलर लगा रहे हैं, तो एक तरफ़ की दीवार पर  हल्का नीला रंग करें.

* कमरे की हर चीज़ एक-दूसरे से अधिक मैच करने की ग़लती न करें, जैसे- सोफे, पर्दे, कारपेट, लैंपशेड आदि मैचिंग करने पर अधिक ज़ोर न दें. वरना  हर चीज़ एक ही शैली व रंगों में दिखाई देगी, जो होम डेकोर के हिसाब से ठीक नहीं होगा.

* यदि स्ट्रेटलाइन सोफा वेलवेट रेड कलर का है, तो उसके साथ कश्मीरी कारपेट नहीं जाएगा.

* कई लोग ड्रॉइंगरूम को ट्रेंडी और आकर्षक दिखाने के लिए डेकोरेटिव पीसेस, बड़े-बड़े शैंडेलेयसर्र्, पेंटिंग्स, प्लांट्स,  फोटोफ्रेम आदि से भर देते हैं. इससे कमरा ख़ूबसूरत दिखने की बजाय म्यूज़ियम लगने लगता है.

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* आप घर को कैसा लुक देना चाहते हैं, उसी के अनुसार ही होम डेकोर के सामान ख़रीदें, जैसे- एथनिक लुक, फ्यूज़न लुक देना चाह रहे हैं, तो उसी के  अनुसार सही कॉम्बीनेशन की चीज़ें इस्तेमाल करें.

* बच्चों के कमरों को बहुत अधिक खिलौनों से न भर दें. इससे जहां बच्चे का कमरा छोटा दिखाई देगा, वहीं इन्हें रखने-हटाने में भी मुश्किलें आएंगी.

* डायनिंग रूम में क्रॉकरी को सजाकर न रखें, वरना मेहमानों के आने पर क्रॉकरी को डायनिंग रूम से किचन में ले जाना पड़ता है, जो ठीक नहीं लगता.  वैसे भी क्रॉकरी कोई रूम को सजाने की वस्तु नहीं है, इसलिए इसे किचन में ही रखें, तो बेहतर है.

* यदि रूम की सीलिंग नीची है और उसे रूम की दीवारों के कलर से अधिक डार्क कलर से पेंट करा दिया है, तो वो और अधिक नीची लगेगी. सीलिंग को  ऊंचा दिखाने के लिए लाइट कलर का इस्तेमाल करें.

* इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, जैसे- एलसीडी टीवी, म्यूज़िक सिस्टम आदि के कई वायर्स होते हैं. इन वायरों को बाहर की तरफ़ बिखरा हुआ न रहने दें. इसके  लिए टीवी पैनल बनाए जाते हैं, उसमें इसे छिपाकर रखा जा सकता है.

* बाथरूम में फ्लैशी हाइलाइटर्स अवॉइड करना चाहिए. बेडरूम को स्टोर रूम बनाने की ग़लती न करें. बेड के क़रीब ग़ैरज़रूरी चीज़ें या बुक्स आदि का  ढेर न रखें.

* मिरर को बेड की ओर मुंह करके न रखें. फ्लोरिंग के लिए ज्योमैट्रिकल डिज़ाइन का इस्तेमाल करना ग़लत है. जहां इस तरह के डिज़ाइन्स आंखों में  चुभते हैं, वहीं रूम भी भरा-भरा लगता है.

* साथ ही इस तरह की फ्लोरिंग के साथ फर्नीचर मैच करना बहुत मुश्किल हो जाता है.

* फिर भी यदि आप फ्लोरिंग के लिए ज्योमैट्रिकल डिज़ाइन्स इस्तेमाल करना ही चाहते हैं, तो फर्नीचर बहुत ही लाइट व स्लीक वाले इस्तेमाल करें.

* बेडरूम में डल कलर से पेेंट न कराएं. स़फेद रंग या ऑफ व्हाइट जैसे लाइट कलर एंग्ज़ाइटी व डिप्रेशन पैदा कर  सकते हैं.

* साथ ही बेडरूम की दीवारों पर गहरे रंग भी न लगाएं. इसकी बजाय पिंक, पेस्टल या पेल शेड्स सिलेक्ट करें.

* डेकोरेशन में झालर व डोरियां लगाने से बचें, क्योंकि इनका अन्य डेकोरेशन के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होता है.

* ड्रेसिंग टेबल और स्टडी टेबल पर डिम लाइट न लगाएं. यहां हमेशा अच्छी रोशनी होनी चाहिए.

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* लाइटिंग अरेंजमेंट ऐसा हो, जो आंखों पर चुभे नहीं, बल्कि आराम पहुंचाए. अतः हर कमरे की ज़रूरत के अनुसार लाइटिंग
अरेंजमेंट करें.

* बच्चों के कमरे में बहुत ज़्यादा डेकोरेटिव लाइट का इस्तेमाल न करें. इससे पढ़ते व़क्त उनकी आंखों पर तनाव बढ़ता है और चिड़चिड़ापन भी आता है.

* कभी भी बासी फूलों को कमरे में न रखें. डेकोरेशन के लिए जब भी फूलों का इस्तेमाल करें, तो फ्रेश फ्लावर्स ही लें. फ्रेश फ्लावर्स जहां नकारात्मक  ऊर्जा को घर से बाहर निकालने में सहायक होते हैं, वहीं घर के सदस्यों के लिए एनर्जी बूस्टर का काम भी करते हैं.

* बाथरूम में मिरर टाइल्स न लगवाएं. बेडरूम में मेटल फ्रेम वाले बेड की बजाय वुडन बेड का इस्तेमाल करें.

* बेड के पिलो और मैट्रेस न ज़्यादा कड़े होने चाहिए और न ही ज़्यादा नरम. बेड पर बिछाने के लिए भी कॉटन फैब्रिकवाला बेडशीट चुनें. यह बेहद  आरामदायक होता है.

* अक्सर लोग बेडरूम या टॉयलेट्स जैसी ज़रूरी चीज़ों की तुलना में लॉबी यानी खाली स्पेस को ज़्यादा बड़ा रखते हैं. जबकि ऐसा करना जगह की  बर्बादी करना है.

* बेड बिना किसी सहारे के न रखें, बेड को दीवार से सटाकर रखें. यानी आपके बेड के पीछे दीवार होनी चाहिए. बेड कवर, बेडशीट और पिलो कवर्स के  लिए नेचुरल फैब्रिक्स का प्रयोग करें.

* ऐसे में खाली जगह होने पर कई बार वहां पर वॉशिंग मशीन, बच्चों के खिलौनों की टोकरी, साइकिल या फिर प्रेस के लिए जानेवाले कपड़ों की पोटली  आदि रख देते हैं. ऐसी ग़लती न करें. इस जगह को स्टोरेज बनाने की बजाय यहां क्लासिक डेकोरेटिव चीज़ें रखकर घर का ख़ास आकर्षण बना सकते हैं.

– रीटा गुप्ता

वास्तु से सुधारें बिगड़े काम (Repair of damaged architectural work)

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अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं, अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं, अच्छे स्वभाव के होते हैं, पर इन सब के बावजूद उन्हें कई बार असफलता ही हाथ लगती है. उनका काम बिगड़ जाता है फिर चाहे वो घर, परिवार, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो. वास्तु द्वारा बिगड़े हुए कार्यों को सुधारा जा सकता है. आइए, इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ड्रॉइंगरूम
* कभी भी ड्रॉइंगरूम यानी बैठक में भारी परदे नहीं लगाएं. इससे धूल-मिट्टी परदे में चिपक जाती है, जिससे गृहिणियां अक्सर बीमार पड़ जाती हैं.
* जहां तक हो सके लकड़ी के फ़र्नीचर से कमरे को सजाएं, जैसे- कुर्सी, सोफा, टेबल आदि. दरअसल लकड़ी का फ़र्नीचर होने से सूर्य-प्रकाश, हवा आदि से प्रवाहित होनेवाली ऊर्जा व्यक्ति विशेष पर सीधे पड़ती है यानी लकड़ी इन्हें अपने में सोख नहीं लेती. इसके विपरीत लोहे, स्टील जैसी अन्य
धातुओं के फ़र्नीचर होने पर सभी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है.
* बहुत भारी पीतल के सजावट के सामान ड्रॉइंगरूम में दक्षिण व नैऋत्य दिशा में रखें.
* ताज़े फूल बैठक में लगाने से उनकी सुगंध से घर का वातावरण अच्छा रहता है, जबकि नकली फूल बनावटी जीवन का प्रतीक हैं.
* कई बार व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित बातें ड्रॉइंगरूम में करते हैं. ऐसे में अपनी दिशा के अनुरूप बैठकर वार्तालाप करें यानी जो दिशा व्यक्ति विशेष के अनुकूल हो, यदि वो वहां बैठें, तो सदैव सफलता हाथ लगती है. बिगड़े हुए काम बनते हैं.

कमरे का रंग
ड्रॉइंगरूम का रंग अगर गृहस्वामी से मैच नहीं करता, तो कभी भी उसका मन बैठक में नहीं लगेगा. उसका जो भी व्यवसाय है, उसमें वो सफल नहीं हो पाएगा. हल्के रंग ख़ासकर क्रीम रंग, जो सबको सूट करता है अर्थात् किसी भी लग्न प्रधान व्यक्ति को सूट करता है, इसे कमरे में लगवाएं. वैसे भी यह लक्ष्मी का प्रिय रंग है.

बेडरूम
इसका चुनाव व्यक्ति विशेष की दिशा पर निर्धारित किया जाता है. कमरे का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र न रखें. हवा आने के लिए सही खिड़की लगी होनी चाहिए. बेडरूम में अपने किसी भी मित्र का चित्र नहीं लगाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव संचित होता है.

कमरे का रंग
बेडरूम में गहरे रंग के प्रयोग से बचें. कमरे में सदैव हल्के रंग लगाएं. इससे संबंधों में मधुरता बनी रहती है.

कमरे में पलंग
कमरे का पलंग लकड़ी का ही हो, किसी धातु का न हो. पलंग की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई व्यक्ति के अनुरूप होनी चाहिए. बिस्तर नर्म होना चाहिए और चद्दर अधिकांशत: स़फेद रखनी चाहिए या हल्के क्रीम रंग की. व्यक्ति के अनुरूप रंग नहीं हुआ, तो व्यक्ति तकलीफ़ में आ जाता है. अत: इन पहलुओं पर भी ग़ौर करें.

बच्चों की पढ़ाई
बच्चों का कमरा या मेज़ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. सबसे शुभ पूर्व होता है, क्योंकि यहां से सूर्य का प्रकाश आता है. उनके कमरे में थोड़े खिलौने वगैरह लगा दें और किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति का चित्र लगाएं, जो उन्हें हमेशा प्रेरित
करते रहें कि कैसे इन महापुरुषों ने जीवन में संघर्ष किया और महान बने. उनसे कभी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा सकारात्मक बातें ही करें.

पूजाघर
घर में मंदिर पूर्वोत्तर (ईशान) दिशा में शुभ है. पश्‍चिम और दक्षिण दिशा में मंदिर नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा मंदिर में मूर्ति बहुत ज़्यादा ऊंची या टूटी अथवा भगवान का चित्र कटे-फटे अवस्था में नहीं रखना चाहिए. जहां तक हो सके, केवल अपने आराध्य देव की और दो-तीन मूर्ति ही रखें. टूटी हुई, खंडित मूर्ति, पुरानी जगह या मंदिर से लाई हुई मूर्ति न रखें. धूप-दीप जलाएं, घंटी व शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है. शुद्ध वायु का प्रसार होता है.

रसोईघर
वेद, उपनिषद एवं समस्त वास्तु ग्रंथों के अनुसार, रसोईघर को अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो वायव्य कोण में भी रसोई बना सकते हैं. यदि यह भी संभव न हो, तो ईशान कोण को छोड़कर किसी भी कमरे के अग्नि कोण में रसोईघर बना सकते हैं, परंतु क्रमानुसार उसकी शुभता कम होती जाती है. ध्यान रहे, भोजन बनाते समय चेहरा पूर्व में रहे.

टॉयलेट और बाथरूम
प्राय: लोग बाकी सभी चीज़ें साफ़ रखते हैं, पर टॉयलेट व बाथरूम पर ध्यान नहीं देते. इसके कारण कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हड्डी तक टूट जाती है. स्नानघर पूर्व दिशा और टॉयलेट दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में होना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉयलेट की सफ़ाई का विशेष रूप से ध्यान रखें.
विशेष: ईशान/नैऋत्य कोण में बाथरूम सदैव अशुभ होता है.

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भवन निर्माण के समय
कोई भी नया भवन निर्माण करते समय वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए. निर्माण के पूर्व नक्शा भी वास्तु के अनुरूप ही बनाना चाहिए. जहां तक संभव हो, निर्मित भवन में तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए. उपाय के द्वारा भी वास्तु-दोष निवारण किया जा सकता है, जैसे- उस वास्तु-दोष के निवारण हेतु दोषयुक्त दिशा या स्थान पर यंत्र स्थापित कर पूरे भवन के वास्तु-दोष की शांति के लिए मुख्य द्वार एवं अंदर के सभी कमरों के द्वारों पर शुभ प्रतीक चिह्न- घोड़े की नाल, स्वस्तिक, ओम आदि का प्रतीक चिह्न अंकित कर सकते हैं. तुलसी का पौधा दोषयुक्त स्थान/दिशा में रखकर लाभ उठाया जा सकता है. घर में अखंड रूप से श्रीरामचरितमानस का नवाह पारायण नौ बार करने से वास्तु जनित दोष दूर हो जाता है. वास्तु में विभिन्न दिशाओं, स्थानों और कोणों से किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्हें कैसे दूर करें? आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं-

ईशान कोण (उत्तर/पूर्व)
ईशान कोण वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान या दिशा है. यदि ईशान कोण दूषित है तो अन्य सारे स्थान/दिशा सही होने पर भी कोई लाभ नहीं. इस दिशा को हमेशा साफ़ रखें. यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए. यह स्थान खाली होना चाहिए. इस स्थान को देवता का वास/स्थान माना गया है. यहां पूजा स्थल सर्वाधिक उपयुक्त है. इस दिशा में झाड़ू भूलकर भी न रखें.
विशेष: यह कोण बढ़ा हुआ हो, तो शुभ फलदायक होता है.

आग्नेय कोण ( दक्षिण/पूर्व)
इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए. पानी की टंकी (अंडरग्राउंड) कदापि नहीं होनी चाहिए.

नैऋत्य कोण (दक्षिण/पश्‍चिम)
परिवार के मुखिया के शयनकक्ष हेतु सर्वाधिक उपयुक्त है तथा दुकान के मालिक के लिए यह स्थान लाभदायक है. भारी मशीनें, भारी सामान इस दिशा में रखना चाहिए.
विशेष: नैऋत्य कोण में किसी भी प्रकार का गड्ढा, बेसमेंट, कुआं नहीं होना चाहिए. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है.

वायव्य कोण (उत्तर/पश्‍चिम)
शौचालय, सेप्टिक टैंक के लिए उपयुक्त. अध्ययन कक्ष, गैरेज के लिए लाभदायक. इस दिशा में दुकान का गल्ला, कैश बॉक्स नहीं रखना चाहिए.

ब्रह्म स्थान
भूखंड के बीच के स्थान (आंगन) को ब्रह्म स्थान की संज्ञा दी गई है. आंगन खुला एवं स्वच्छ होना चाहिए. जूठे बर्तन या गंदगी आंगन में नहीं होनी चाहिए. आंगन में किसी प्रकार का गड्ढा न हो.

– डॉ. प्रेम गुप्ता
वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ