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हेमा मालिनी: टीनएजर्स को संभालना मुश्किल होता है (Hema Malini: Teenagers Are Difficult To Handle)

पैरेंटिंग एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी होती है, ख़ासतौर से टीनएजर्स को संभालना सचमुच में एक बड़ी चुनौती है. बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं, तो न स़िर्फ बच्चे बदलाव के दौर से गुज़रते हैं, बल्कि पैरेंट्स के मन में भी बहुत कुछ चलता रहता है. जब वो देखते हैं कि बच्चे उनसे ज़्यादा दोस्तों के साथ व़क्त बिता रहे हैं, उनका कम्युनिकेशन भी कम हो रहा है, तो पैरेंट्स भी सोच में पड़ जाते हैं. यह कंफ्यूज़न दोनों जगह होता है.


इसी कंफ्यूज़न के चलते बच्चे और पैरेंट्स में कुछ अलग-सी भावनाएं कभी-कभार पनपने लगती हैं. पैरेंट्स को लगता है कि बच्चा कहीं भटक न जाए, हमसे दूर न हो जाए, वहीं बच्चों को लगता है कि पैरेंट्स उन्हें समझने की कोशिश ही नहीं करते. ऐसे में कभी बेहिसाब प्यार, कभी ईर्ष्या, कभी असुरक्षा की भावना और भी न जाने क्या-क्या मन में घर करने लगती है. यही वो समय होता है, जब पैरेंट्स को धैर्य रखना चाहिए और मैच्योरिटी से काम लेना चाहिए.
मैं अपना अनुभव बताती हूं, जब मेरी बच्चियां मेरे होते हुए किसी और के साथ समय बितातीं, तो मन आहत होता… कभी उन्हें किसी और के साथ जुड़ता देख जलन भी होती… तो कभी उनकी कामयाबी में ख़ुशी के साथ-साथ कई तरह की आशंकाएं भी पनपतीं… पैरेंटिंग आसान नहीं होती, बहुत कुछ असहज होते हुए भी आपको सहजता दिखानी पड़ती है. भले ही मन में अपनों के दूर हो जाने का डर पनपता हो, लेकिन मेरा अनुभव यही कहता है कि अपने कभी दूर होते ही नहीं, वो लौटकर ज़रूर आते हैं…

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दरअसल, ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में एक्सपोज़र इतना ज़्यादा है कि टीनएजर्स को संभालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. हां, मैं भी गुज़री हूं इस अनुभव से, लेकिन इस अनुभव से मैंने जाना कि कुछ समय के लिए बच्चे भले ही भटक या बहक जाएं, लेकिन वो हमसे दूर कभी नहीं जाते. यदि हमारे घर के संस्कार सही हैं, तो बच्चे बाहर की दुनिया से इन्फ्लूएंस नहीं होते. वो कुछ समय के लिए यदि चकाचौंध की गिरफ़्त में आ भी जाएं, तो हमारे संस्कार उन्हें फिर सही राह पर ले आते हैं… इसलिए बच्चों को सही परवरिश और सही संस्कार देना बहुत ज़रूरी है. दोस्तों के साथ पार्टी, मौज-मस्ती ये सब एक उम्र तक होता है, फिर बच्चे हमारी तरह ही एक नॉर्मल लाइफ जीने लगते हैं. आप उन्हें जितना रोकेंगे, वो उतने ही रिबेलियस बन जाएंगे. विद्रोह पर उतर आएंगे, इसलिए उन्हें उनका स्पेस देना ही पड़ता है. आप अपने टीनएजर्स पर बहुत ज़्यादा रोक-टोक नहीं लगा सकते, उन्हें बहुत ज़्यादा डांट भी नहीं सकते, क्योंकि उस व़क्त उन्हें आपकी बातें उपदेश लगती हैं, उस समय पैरेंट्स को बहुत बैलेंस होकर चलना पड़ता है. लेकिन जब वो इस उम्र से बाहर निकल जाते हैं, तो फिर सब कुछ नॉर्मल हो जाता है. बच्चों को भी महसूस होता है कि उनका व्यवहार सही नहीं था. फिर वो ख़ुद को बदल देते हैं और पैरेंट्स के लिए भी लाइफ आसान हो जाती है.
यह एक छोटा-सा दौर होता है, जो समय के साथ गुज़र जाता है, हां, ज़रूरी है कि इस दौर में आप ख़ुद को संतुलित रखें और बच्चों को मैच्योरिटी के साथ हैंडल करें.

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हेमा मालिनी: मैंने जो पाया वही लौटा रही हूं- देखें वीडियो (Hema Malini: I Want to give what I received- Watch Video)

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कला आपको पहचान देती है और आपका काम आपको कॉन्फिडेंस देता है. कला आपकी रूह को छूती है और काम आपके शरीर व भौतिक ज़रूरतों की पूर्ति का साधन बनता है. कला साधना है और काम सक्रियता. साधना भी ज़रूरी है और सक्रियता भी. मेरे लिए मेरा नृत्य कला है और मेरी साधना भी. जीवन में सक्रियता और सकारात्मकता का ज़रिया भी. मुझे डांस करते देख मेरी बच्चियों को भी इस कला से प्रेम हो गया और अब वो भी इसे साधना मानती हैं. मेरा मानना है कि इस तरह की कला जीवन में निरंतरता बनाए रखती है और मुझे इससे बहुत संबल मिला है.

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इसी संबल ने मुझे आगे बढ़ाया. मैं फिल्म इंडस्ट्री में भी इसलिए अलग पहचान बना पाई, क्योंकि मेरे पास नृत्य की साधना थी. यही वजह है कि मैं आज भी इस साधना से इतना जुड़ाव महसूस करती हूं. मेरी मां ने मुझे इस कला का सम्मान करना सिखाया और अब मेरी बेटियां भी वही करती हैं. उनके लिए भी यह मात्र एक कला न रहकर साधना ही है. हम सभी इस साधना के ज़रिए एक सूत्र में जैसे बंध जाते हैं. ईश्‍वर की आराधना का भी यह बेहतरीन ज़रिया है.

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फिल्म और डांस के माध्यम से मुझे लोगों का इतना प्यार और सम्मान मिला है कि मैं उनकी ऋणी हो गई हूं. इन्हीं सबके बीच मेरा पॉलिटिकल करियर भी शुरू हुआ. सच पूछो, तो यह करियर नहीं, बल्कि एक ज़रिया बना है लोगों के बीच जाने का. उनसे जुड़कर उनको और क़रीब से पहचानने का. अब मेरे पॉलिटिकल करियर के माध्यम से मुझे समाज, देश के लिए काम करने का मौक़ा मिला है और मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही हूं कि मैं अपना काम पूरे तन-मन से करूं.

हेमा मालिनी देश और अपने दर्शकों को क्या लौटाना चाहती हैं, जानने के लिए देखें वीडियो: 

मैं कृष्णभक्त हूं और मुझे कृष्ण की नगरी मथुरा में काम करने का मौक़ा मिला है, इससे अच्छा सौभाग्य मेरे लिए क्या हो सकता है. मुझे देश की जनता ने जो प्यार और सम्मान दिया है, उसे मैं अब उनकी सेवा करके लौटाना चाहती हूं.
ईश्‍वर की कृपा से मुझे जितना भी मिला है, मैं उससे पूरी तरह से संतुष्ट हूं और यदि मैं उसका अंश मात्र भी समाज को लौटा सकूं, तो ख़ुद को धन्य समझूंगी, क्योंकि हर किसी को इस तरह के मौ़के नहीं मिलते. मुझे मिले हैं, तो मैं ज़रूर चाहूंगी कि इन्हें यूं ही न गंवाऊं.

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मेरी दोनों बेटियां और धरमजी भी मुझे हौसला देते हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहते हैं. वैसे भी जब आपका परिवार आपके साथ होता है और लोगों का इतना प्यार और विश्‍वास भी होता है, तो कोई अड़चन आपको रोक नहीं सकती.
हालांकि छोटी-मोटी तकली़फें तो आती रहती हैं, उनसे पार पाकर ही आगे बढ़ना अब मेरा लक्ष्य है, क्योंकि अब मैं ज़िंदगी में जिस मुक़ाम पर पहुंच चुकी हूं, वहां पर निजी ख़्वाहिशों और हसरतों के लिए जगह ही नहीं है, मेरा अब जो भी है, वो समाज का है, उन लोगों का है, जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया है.
आपको लगेगा कि ये सब बड़ी-बड़ी बातें हैं, लेकिन मेरा दिल जानता है कि लोगों की सेवा का यह मौक़ा मेरे लिए क्या मायने रखता है. मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं पॉलिटिक्स के ज़रिए समाज सेवा कर पा रही हूं. मैंने जो पाया, वही लौटा रही हूं. मैं शिद्दत से यह करना चाहती थी, इसलिए ईश्‍वर ने मुझे चुना यह करने के लिए.

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जानें किस बात पर रो पड़ीं ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी (Why Dream Girl Hema Malini Cried)

ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी (Dream Girl Hema Malini) के इस ख़ास कॉलम ‘मेरी ज़िंदगी, मेरे अनुभव’ (Meri Zindagi Mere Anubhav) में आप हेमा मालिनी की ज़िंदगी के ऐसे अनुभवों के बारे में जानते हैं, जिन्हें आपने पहले कभी नहीं पढ़ा. ‘मेरी सहेली’ (Meri Saheli) की एडिटर हेमा मालिनी (Hema Malini) उनके कॉलम ‘मेरी ज़िंदगी, मेरे अनुभव’ (Meri Zindagi Mere Anubhav) के माध्यम से अपनी ज़िंदगी के ख़ास अनुभव आप लोगों के साथ शेयर करती हैं. जुड़े रहें हमारे साथ… और जानें ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी (Dream Girl Hema Malini) की ज़िंदगी के ख़ास अनुभव, उन्हीं की ज़ुबानी.

हां, उस वक़्त मैं रो पड़ी थी
आज मुझे सोचकर हंसी आती है कि जब ईशा पहली बार स्कूल गई, तो मैं रोने लगी थी. जी हां, यह सच है. अब तक मैंने उसे ख़ुद से एक पल के लिए भी अलग नहीं किया था. मेरे ख़्याल से ऐसा हर मां के साथ होता है. हम अपने बच्चों को लेकर इतने पज़ेसिव हो जाते हैं कि उन्हें ज़रा भी तकलीफ़ में नहीं देख सकते. वो भी पहली बार स्कूल जाते समय उदास थी, क्योंकि उसका भी यह पहला ही अनुभव था मुझसे दूर अंजान लोगों के बीच जाने का. ऐसे में अपने बच्चे को ख़ुद से थोड़ी देर के लिए भी अलग कर पाना आसान नहीं था. ईशा को देखकर मुझे और भी रोना आ रहा था, ये चंद घंटे कैसे गुज़रे बस मेरा दिल ही जानता है. फिर जब ईशा स्कूल से लौटी, तो मैंने उसे कलेजे से लगा लिया. थोड़ी देर तक मैंने उसे ऐसे ही कसकर पकड़े रखा. उन कुछ घंटों के लिए मैं बहुत बेचैन हो गई थी, ऐसा लग रहा था जैसे मेरी सांसें अटक गई हैं. फिर दूसरे-तीसरे दिन से सब नॉर्मल हो गया था. उसके बाद तो मैं और ईशा दोनों इस बात के लिए तैयार हो गए थे कि ईशा को स्कूल जाना है और उतना टाइम मुझसे दूर रहना है. यही नहीं, ठीक ऐसी ही फीलिंग आहना के स्कूल जाने पर भी हुई थी.

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एक मां के लिए उसके बच्चे की मुस्कान से बड़ी कोई चीज़ नहीं 
दुनिया की हर क़ीमती चीज़ बच्चे की मासूम-सी हंसी के सामने फीकी पड़ जाती है. जब ईशा का जन्म हुआ, तो मैंने ईश्‍वर को थैंक्यू कहा, क्योंकि मुझे उन्होंने मां बनने का सौभाग्य दिया. ममता का एहसास जगाया. ईशा के ईर्द-गिर्द ही मेरी दुनिया अब सिमट गई थी. मैं भी एक औरत ही थी, दुनिया के लिए मैं स्टार रही हूं, पर मेरी बच्ची के लिए तो मैं स़िर्फ उसकी मां थी. उसकी हर मासूम-सी शरारत पर बेहद प्यार उमड़ आता था. उसकी वो तोतली बोली पर दिल न्योछावर हो जाता था. सच कहूं, तो शब्दों में बयां करना नामुमकिन है इस एहसास को. एक मां ही पहचान सकती है, मां की भावनाओं को.

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बच्चे हमें सच्ची ख़ुशी देते हैं
दरअसल, हम ये सोचते हैं कि हम बच्चों को ख़ुशी देते हैं, सुख-सुविधाएं देते हैं, लेकिन सही मायने में वो हमें ख़ुशी देते हैं, उनके बिना हम अपनी ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते.
बच्चे हमें जीना भी सिखाते हैं और जीने की वजह भी देते हैं. हमारी दुनिया उनकी ख़ुशियों की परिधि में सिमट जाती है और यह सिमटना सकारात्मक होता है. हमें यह कभी नहीं लगता कि क्यों हमें अपने करियर या पर्सनल लाइफ से समझौता करना पड़ रहा है, क्योंकि हमारी प्राथमिकता हमारे बच्चे ही होते हैं.

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पैरेंट्स और बच्चों का रिश्ता सबसे अनोखा और प्यारा होता है
मेरी मां भी मुझे लेकर कितना कुछ सोचती थीं, उनका साथ ही था, जिसने मुझे आगे बढ़ाया. आज मैं समझ सकती हूं कि वो भी मुझे लेकर, मेरे करियर, मेरी पर्सनल लाइफ को लेकर इतना क्यों सोचती थीं, क्योंकि उनको मेरी फ़िक्र थी. उनका प्यार ही था, जो कभी डिसिप्लिन, तो कभी हल्की-सी डांट-फटकार के रूप में भी सामने आता था.
पैरेंट्स और बच्चों का रिश्ता सच में सबसे अनोखा और सबसे प्यारा होता है, क्योंकि इसमें स्वार्थ नहीं होता.

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आज मेरी दोनों बेटियां (ईशा और आहना) मां बन गई हैं और वो भी मातृत्व के उसी एहसास को जी रही हैं, जिसे मैंने, मेरी मां ने, उनकी मां ने…. और दुनिया की हर मां ने जीया है. ईश्वर दुनिया की हर औरत को ये सुख दे.

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हेमा मालिनी- “मैंने ज़िंदगी में बहुत एडजस्टमेंट्स किए हैं” (Hema Malini- “I have made a lot of adjustments in life”)

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हम सभी चाहते हैं कि ज़िंदगी में हमें सब कुछ हासिल हो, हम अक्सर सपने देखते हैं, ख़्वाहिशें पालते हैं और जुट जाते हैं उन्हें पूरा करने में… इसी कशमकश में हमें अक्सर ज़िंदगी में कई समझौते भी करने पड़ते हैं, एडजस्टमेंट्स करने पड़ते हैं, अपने दायरे तय करने पड़ते हैं. इसमें भी यदि हम बात करें एक स्त्री की, तो उसके दायरे व़क्त के साथ-साथ बदलते रहते हैं, उसके एडजस्टमेंट्स थोड़े ज़्यादा होते हैं… शादी के बाद वो नए रिश्तों को समझने के लिए एडजस्ट करती है. पति का साथ मिलता है, बच्चे होते हैं, तो ज़िम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं… सबके खाने-पीने का ख़्याल रखने से लेकर सबके जज़्बात की क़द्र करना और सबको ख़ुश रखना जैसे बिन बोले ही उसकी प्राकृतिक ज़िम्मेदारी का हिस्सा बनता चला जाता है… वो रोज़ बिना किसी शिकायत के इन ज़िम्मेदारियों को ओढ़ती चली जाती है… लेकिन कहीं न कहीं उसके अंतर्मन में एक द्वंद भी चलता रहता है कि क्या यही वो ज़िंदगी थी, जिसकी ख़्वाहिश उसे हमेशा से थी…? लेकिन सच कहूं तो हर ख़ुशी की क़ीमत अदा तो करनी ही पड़ती है. सभी की तरह मैंने भी बहुत एडजस्टमेंट किए हैं, लेकिन उसका आज मुझे बहुत फ़ायदा भी मिला है. जब मैं छोटी थी, तो मैं खिड़की से देखती थी कि सारे बच्चे बाहर खेल रहे हैं और मैं डांस प्रैक्टिस कर रही हूं, लेकिन आज पीछे पलटकर देखती हूं, तो लगता है कि अगर उस व़क्त साधना नहीं की होती, तो आज ये कामयाबी नहीं मिलती और इन सबका श्रेय मेरी मां को जाता है.

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मैंने फिल्मों में भी जब काम करना शुरू किया, तो एक व़क्त के बाद मुझे भी यह महसूस होने लगा कि एक लड़की की तरह मैं भी अपनी ज़िंदगी जीऊं, शादी करूं, घर बसाऊं… फिर मैंने शादी करने का फैसला कर लिया. जिस तरह ख़्वाहिशें समय के अनुसार बदलती रहती हैं, उसी तरह हमारी ज़िम्मेदारियां भी बदलती रहती हैं और हम उन्हें पूरा करने के लिए फिर अलग तरह से एडजस्टमेंट्स करने लगते हैं.

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हमारी ज़िंदगी ऐसी ही तो हो गई है, जहां रोज़ाना क्या करें, क्या न करें की एक फेहरिस्त हमें बांधे रखती है. सुकून, शांति और नैसर्गिक सुख से हम कोसों दूर हो चुके हैं. कई बार समय की ज़रूरतें पूरी करते-करते, अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने में हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि चाहकर भी अपने लिए, अपनों के लिए व़क्त नहीं निकाल पाते, अपनी इच्छाएं पूरी नहीं कर पाते… मुझे जब भी यह महसूस होने लगता है कि मैंने ख़ुद को ज़रूरत से ज़्यादा व्यस्त कर लिया है, तो मैं समझ जाती हूं कि कहीं न कहीं मेरे जीवन में असंतुलन आ गया है, जिसे स़िर्फ और स़िर्फ मैं ही ठीक कर सकती हूं. यह मुझे मेरे अनुभवों ने सिखाया है. ऐसे में मैं कुछ क़दम पीछे हट जाती हूं और उन चीज़ों के बारे में सोचती हूं, जो मुझे सुख व पूर्णता का आभास कराती हैं… तब मैं अपने नृत्य, ध्यान, योग, साधना के लिए व़क्त निकालती हूं, अपने परिवार के साथ व़क्त बिताती हूं… ऐसा करके मैं ख़ुद में फिर से वही ऊर्जा व शक्ति महसूस करती हूं.

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कोई भी किसी मामूली-सी वजह से भी ख़ुद को खो सकता है, चाहे वो एक अयोग्य-सा रिश्ता हो, असंतुष्ट-सी नौकरी हो, अनुचित ज़िम्मेदारियां हों या कुछ भी इसी तरह का… ऐसे में यह आपको तय करना है कि आपको ख़ुद को कैसे खोजना है. इसके कई आसान से रास्ते हैं- आप एक छोटा-सा वेकेशन ले सकते हैं, या फिर अध्यात्म-योग, डांस या ऐसी ही किसी हॉबी में मन लगा सकते हैं.

ख़ुद मैंने भी यह किया है, रोज़ाना चंद मिनटों तक करती हूं, ताकि अधिक केंद्रित हो सकूं और हर दूसरे महीने कुछ दिनों तक मैं यह ज़रूर करती हूं… और यक़ीन मानिए मैंने ख़ुद को बार-बार ढूंढ़ निकाला है… ख़ुद को पाया है… पूर्णत: परिपूर्ण रूप से!

मुझे ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं… ज़िंदगी को शिद्दत से जीने के लिए एडजस्टमेंट्स करने ही पड़ते हैं, आप उनसे बच नहीं सकते.

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हेमा मालिनी… मां बनना औरत के लिए फख़्र की बात होती है (Hema Malini… Being A Mother Is A Gift)

Being A Mother Is A Gift Hema Malini

बहुत-से अनछुए एहसास पलने लगते हैं आंखों में… कुछ रेशमी ख़्वाब पलकों पर उतरने लगते हैं, कुछ शबनमी बूंदें दिल को भिगोने लगती हैं… एक मासूम-सी खिलखिलाहट न जाने कितने अरमान, कितनी ख़्वाहिशें जगा जाती हैं और मन बार-बार यही कहता है कि हां, ये  नन्हीं-सी जान ही मेरी पूरी दुनिया है… मेरा अक्स है… मेरे वजूद का हिस्सा है… एक औरत जब मातृत्व को महसूस करती है, तो उसके लिए बहुत कुछ बदल जाता है… और वो इस बदलाव को लेकर बेहद उत्साहित भी रहती है… लेकिन कहीं न कहीं आज भी हमारे समाज की सोच उन बेड़ियों की जकड़न से ख़ुद को छुड़ा नहीं पाई है, जिसमें एक स्त्री को मात्र उसके जिस्म से ही पहचाना जाता है और उसके मां बनने को उसके सपनों को त्यागने का कारण समझा जाता है.

Being A Mother Is A Gift Hema Malini
जब एक स्त्री मां बनती है, तो उसे पल-पल यह एहसास करवाया जाता है कि अब तुम्हें बच्चे और करियर में से किसी एक को ही चुनना होगा, क्योंकि करियर पर ध्यान दोगी, तो तुम अच्छी मां नहीं बन पाओगी और यदि घर को तवज्जो दोगी, तो करियर के साथ नाइंसाफ़ी होगी… ऐसे में आज की अधिकतर कामकाजी महिलाएं मन में एक अपराधबोध के साथ जीती हैं कि वो चाहकर भी एक अच्छी मां नहीं बन पा रहीं… या कहीं वो अपने बच्चे के साथ नाइंसाफ़ी तो नहीं कर रहीं… इसी वजह से कई महिलाएं अपना करियर, अपने ख़्वाबों को मन के किसी कोने में दफ़न कर देती हैं… लेकिन अगर मैं बात करूं अपने अनुभव की, तो हर स्त्री अपने ख़्वाबों को जीते हुए भी मातृत्व के ख़ूबसूरत एहसास को भी जी सकती है… बस, ज़रूरत होती है, तो थोड़े-से बदलाव की और थोड़ी प्लानिंग की… अपनी सोच को समय व ज़रूरत के अनुसार बदलकर देखें, तो आप सब कुछ पा सकते हैं.
क्या ज़रूरी है… क्या ग़ैरज़रूरी? हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं? हमारी फ़िलहाल की ज़रूरतें क्या हैं… यह ख़ुद हमें ही तय करना है, लेकिन हमारे समाज में अक्सर हमारे लिए ये तमाम पहलू ‘दूसरे’ तय करते नज़र आते हैं. लेकिन हक़ीक़त तो यही है कि हमारी ज़रूरतें, हमारी वर्तमान की प्राथमिकताएं भला हमसे बेहतर कोई और कैसे जान पाएगा? यह हमें ही तय करना होगा कि हमें ज़िंदगी के किस पड़ाव पर किस बात को कितनी अहमियत देनी है और किसे कुछ समय के लिए अपनी प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में थोड़ा-सा पीछे करना है.
कुछ व़क्त पहले मैंने एक तस्वीर देखी थी, जिसमें डचेस ऑफ केम्ब्रिज केट मिडलटन अपने पति विलियम और अपने न्यूबॉर्न बेबी के साथ खिलखिलाती व बेहद ख़ूबसूरत नज़र आ रही थीं. केट के चेहरे पर मातृत्व की ख़ुशी साफ़-साफ़ झलक रही थी. लेकिन बेहद दुख की बात यह रही कि इन तमाम सकारात्मक बातों को छोड़कर अख़बारों व ख़बरों की सुर्ख़ियां बटोरीं केट के मां बनने के बाद हुए शारीरिक बदलावों ने… बहुत कुछ इस बात को लेकर कहा व लिखा गया कि आख़िर केट ने अपने मम्मी टम्मी को छिपाने की कोशिश क्यों नहीं की…
यह विडंबना ही है कि आख़िर एक स्त्री के मातृत्व को ये समाज क्यों नहीं सहजता से ले पाता? और अगर वो स्त्री कोई सेलिब्रिटी है, तो हर कोई उस पर तंज कसना अपना अधिकार समझ लेता है.
दरअसल, ऐसा ही कुछ ऐश्‍वर्या राय के बारे में भी कहा गया था. मां बनने के बाद उनके बढ़े हुए वज़न को लेकर काफ़ी चर्चा की लोगों ने और यही नहीं और भी बहुत कुछ कहा गया कि किस तरह से सेलिब्रिटीज़ को अपने मातृत्व का ख़ामियाज़ा चुकाना पड़ता है.

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यह सोच ही दरअसल ज़िम्मेदार है, किसी भी स्त्री के मन में बेवजह अपराधबोध की भावनाओं के बीज बोने के लिए. उसे न जाने क्यों कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है… क्या मां बनना अपराध है? क्या सेलिब्रिटी होना गुनाह है? मां बनने के बाद क्यों ये मान लिया जाता है कि अब करियर ख़त्म हो गया? क्यों हर व़क्त उस स्त्री के शरीर व उसमें हुए बदलावों पर ताने कसे जाते हैं? मां बनना किसी भी स्त्री के लिए प्रकृति की सबसे ख़ूबसूरत कृति है… उसके बाद शरीर और मन दोनों बदलता है, तो इसमें ग़लत क्या है… क्यों नहीं किसी भी स्त्री को इस अनोखे एहसास के साथ जीने दिया जाता? क्यों बेवजह सवालों की बौछार उस पर कर दी जाती है… उसे कम से कम अपने मातृत्व के अनोखे पलों को शिद्दत से महसूस तो करने दो… व़क्त के साथ सारे सवाल हल हो जाएंगे… वो ख़ुद तय करेगी कि उसे आगे कब, कैसे और क्या करना है…
सालों पहले जब मेरी बड़ी बेटी ईशा का जन्म हुआ था, तब सबसे पहले मुझसे भी यही पूछा गया था कि क्या मैं अब अपने करियर को प्राथमिकता नहीं दूंगी? क्योंकि हमारे समाज में यही मान्यता है कि मां बनने का अर्थ है आपको अपने सपनों से, अपनी रचनात्मकता और अपनी ख़्वाहिशों से समझौता करना पड़ेगा!
मैंने ख़ुशी-ख़ुशी मातृत्व को चुना, क्योंकि उस व़क्त मेरी प्राथमिकता वही थी. मैं यह जानती थी कि कुछ समय के लिए मुझे अपने काम से ब्रेक लेना ही होगा, और वैसे भी यह मेरी चॉइस थी और मैंने अपनी ख़ुशी से अपने मातृत्व को स्वीकारा था. वैसे भी मैं जो भी करती हूं, उसमें अपना शत-प्रतिशत देती हूं, चाहे वो करियर हो या फिर परिवार. मैं उस समय मां बनने के उस एहसास को पूरी तरह से जीना चाहती थी. मेरे लिए यह बात कोई मायने नहीं रखती थी कि मैं लंबे समय के लिए स्पॉटलाइट में नहीं रहूंगी, क्योंकि मेरे ज़ेहन में कभी यह बात नहीं आई कि मेरा करियर और मेरा मातृत्व एक-दूसरे के ख़िलाफ़ हैं. मैं पूरी तरह से आश्‍वस्त थी कि जब समय व हालात सही होंगे, तो मैं अपने काम पर दोबारा ज़रूर लौटूंगी, मुझे कुछ सामंजस्य बैठाने होंगे, कुछ एडजेस्टमेंट्स करने होंगे और वो मैं ज़रूर करूंगी.

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Being A Mother Is A Gift Hema Malini
मैं ही क्या, किसी भी औरत के लिए अपने बच्चे से ज़रूरी कुछ नहीं होता. मेरे लिए मां बनना एक सपने के पूरे होने जैसा था, इसलिए मैंने अपना पूरा ध्यान अपनी बेटियों की परवरिश पर लगा दिया. बच्चों को मां की ज़रूरत ज़्यादा होती है, मां की कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता, इसलिए मां को अपना अधिक से अधिक समय अपने बच्चे को देना चाहिए. जब मेरी बेटियां छोटी थीं और मुझे शूटिंग पर जाना पड़ता था, वो मुझे जाने नहीं देती थीं. मुझे भी उन्हें छोड़कर जाना अच्छा नहीं लगता था. फिर मैं कार में बेटी को राउंड पर ले जाती थी और जब वो सो जाती थी, तब मैं चुपके से शूटिंग के लिए निकल जाती थी.
अपनी बेटियों का बचपन अब मैं अपने नवासे में देखती हूं. हम सब चाहे उसे कितना ही प्यार दे दें, लेकिन उसे अपनी मां अपने पास ही चाहिए. मां बच्चे की सबसे बड़ी ज़रूरत होती है और औरत के लिए भी मां बनना सम्मान की बात होती है. मैं ख़ुशक़िस्मत थी कि मैं किसी भुलावे में या भ्रम में नहीं जी रही थी कि मैं चाहूं, तो सब कुछ एक साथ ही हासिल कर सकती हूं. मैं इस तथ्य से पूरी तरह वाक़िफ़ थी समय के साथ-साथ आपकी ज़रूरतें व ङ्गसब कुछफ की परिभाषा बदल जाती है. आपकी सोच अधिक परिपक्व व केंद्रित हो जाती है. आप यह तय कर पाते हो कि अभी आपको क्या चाहिए और भविष्य में आप किस तरह से अपनी प्राथमिकताएं बदल पाओगे. वर्तमान में जो चीज़ें आपके लिए गौण हो चुकी हैं, उन्हें आप आसानी से पहचान पाते हो, ऐसे में तमाम ग़ैरज़रूरी बातों और चीज़ों को आप पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकते हो. ऐसे में आप अपनी नई भूमिकाओं और ज़रूरतों के अनुसार आसानी से अपनी राह चुन सकते हो.
मैंने अपने अनुभवों से यही सीखा है कि उन तमाम नकारात्मक लोगों को नज़रअंदाज़ करें, जो आपके मातृत्व के चुनाव को निराशाजनक कहते हैं या फिर यह मानते हैं कि आपने मातृत्व को अपनी ज़िंदगी में सबसे अधिक अहमियत देकर अपने करियर को नज़रअंदाज़ किया है, जिससे आप करियर के प्रति उतने समर्पित नहीं रह पाते, जितने पहले थे. मैंने यही पाया है कि मेरी ज़िंदगी में सबकी अपनी-अपनी जगह व अहमियत है. न किसी की अहमियत कम होती है, न ही ज़्यादा. मेरा यही कहना है कि आप सब कुछ ज़रूर पा सकते हो, लेकिन ज़ाहिर है कि एक ही समय पर सब कुछ नहीं.

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दीपिका पादुकोण ने लॉन्च की ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी की बायोग्राफी (Deepika Padukone Launches Dream Girl Hema Malini Biography)

Dream Girl Hema Malini Biography

ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी (Dream Girl Hema Malini) का 69वां जन्मदिन 16 अक्टूबर 2017) कई मायने में ख़ास रहा. सबसे ख़ास बात ये थी उनके बर्थडे के ख़ास मौके पर पद्मावती यानी दीपिका पादुकोण (Dipika Padukone) ने उनकी बायॉग्रीफी (Biography) बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल (Beyond The Dream girl) लॉन्च की. राम कमल मुखर्जी द्वारा लिखी गई इस किताब में ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी की ज़िंदगी के कई अनछुए पहलुओं को छूने की कोशिश की गई है. हेमा मालिनी फिल्म इंडस्ट्री में 50 साल पूरे करने जा रही हैं और इस ख़ास अवसर पर अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर, विद्या बालन, अर्जुन कपूर सहित 50 सेलिब्रिटीज़ ने उन्हें बाधाई दी. आइए, जानते हैं इस ख़ास मौके की स्पेशल बातें.

Dream Girl Hema Malini Biography

* ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी हो गई हैं 69 साल की. 16 अक्टूबर 2017 यानी सोमवार के दिन बहुत ही ख़ास अंदाज़ में उनका बर्थडे सेलिब्रेट किया गया.
* उनके जन्मदिन के ख़ास मौके पर उनकी बायोग्राफी लॉन्च की गई.
* भाजपा सांसद हेमा मालिनी की बायोग्राफी बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल की प्रस्तावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखी है.
* हेमा मालिनी ने ट्वीट किया कि वो अपनी बायोग्राफी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावना लिखे जाने से बहुत सम्मानित महसूस कर रही हैं.
* हेमा जी की बायोग्राफी राम कमल मुखर्जी ने लिखी है, इससे पहले राम कमल ने हेमा मालिनी पर एक और किताब दिवा अनवेल्ड भी लिखी है.

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* हेमा मालिनी की बायोग्राफी बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल को लॉन्च किया रानी पद्मावती यानी ख़ूबसूरत दीपिका पादुकोण ने. इस ख़ास मौके पर एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने बनारसी साड़ी पहनी थी, उनका ये ख़ूबसूरत अंदाज़ उनकी आनेवाली फिल्म पद्मावती में उनके लुक से मेल खा रहा था.
* इस इवेंट में हेमा मालिनी और दीपिका पादुकोण के बीच जबरदस्त केमेस्ट्री देखने को मिली.

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* इस ख़ास मौके पर हेमा मालिनी और दीपिका पादुकोण ने अपनी-अपनी हिस्टोरिक फिल्मों और उनके बजट पर ख़ूब सारी बातें की. हेमा जी ने बताया कि उनके समय में किस तरह कम बजट में अच्छी फिल्में बनाने के लिए मेहनत की जाती थी.
* हेमा जी ने कहा कि नंबर 1 पोजिशन में रहने वाले अक्सर अकेले हो जाते हैं, क्योंकि 1 नंबर भी अकेला ही होता है. उनके काम का कमिटमेंट उन्हें अकेला कर देता है.
* एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण और हेमा मालिनी दोनों ने माना कि फेलियर के दौर से गुजरते हुए जब डिप्रेशन होने लगता है, तो उससे उबरना आसान नहीं होता. इसके लिए हमें ख़ुद ही कोशिश करनी पड़ती है.

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* अपने रिश्ते और प्यार-मोहब्बत की बातों को लेकर दीपिका ने बताया कि रोमांटिक रिश्ते बहुत कॉम्प्लिकेटेड होते हैं. ऐसे में एक ऐसा पार्टनर ढूंढ़ना जो आपको समझ सके, थोड़ा मुश्किल है.
* जब हेमा मालिनी की बायोग्राफी के लेखक राम कमल ने बताया कि हेमा मालिनी के माता-पिता ने उस समय के अखबार में हेमा मालिनी के लिए वैवाहिक विज्ञापन पोस्ट किया था, तो दीपिका पादुकोण ने हंसने हुए कहा, प्लीज़ इस बारे में बात मत कीजिए, यदि मेरे पिताजी (प्रकाश पादुकोण) यह सुनेंगे तो वो भी मेरी शादी के बारे में बात करने लग जाएंगे.

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* हेमा मालिनी इस साल फिल्म इंडस्ट्री में 50 साल पूरे करने जा रही हैं, इस ख़ास मौ़के पर अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर, विद्या बालन, अर्जुन कपूर सहित ग्लैमर इंडस्ट्री के 50 सलिब्रिटीज़ ने हेमा जी बधाई और शुभकामनाएं दी.
* हेमा मालिनी की बायोग्राफी के लॉन्च पर उनकी दोनों बेटियां और दामाद ईशा-भरत तथा आहना-वैभव भी मौजूद थे.

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* इस मौके पर जूही चावला, मधु, अल्का याज्ञिक, रमेश सिप्पी, किरण जुनेजा आदि कई सेलिब्रिटीज़ मौजूद थे.
* हेमा मालिनी का बर्थडे केक भी इसी समारोह में काटा गया.

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ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी 70 की उम्र में भी ख़ूबसूरत, देखें उनके टॉप 20 गाने… (Happy Birthday Dream Girl Hema Malini…)

Hema Malini Top Hit Songs

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ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी हो गई हैं 70 की. गज़ब की ख़ूबसूरत हेमा मालिनी ने अपने अभिनय, नृत्य और चुलबुले अंदाज़ से न सिर्फ़ बॉलीवुड में, बल्कि दर्शकों के दिलों में भी एक ख़ास जगह बनाई है. हेमा मालिनी अब भी फिल्मों में सक्रिय हैं. सपनों का सौदागर फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखने वाली हेमा मालिनी के बारे में शोमैन राज कपूर ने पहले ही कह दिया था कि वो एक दिन बहुत बड़ी स्टार बनेंगी. ये बात सच भी साबित हुई. जॉनी मेरा नाम, सीता और गीता, शोले, महबूबा, रज़िया सुल्तान, धर्मात्मा जैसी कई सुपरहिट फिल्में की. चार दशकों में लगभग 150 से भी ज़्यादा फिल्में कर चुकीं हेमा मालिनी मथुरा सेे लोकसभा की सांसद भी हैं. भरतनाट्यम, कुचीपुड़ी और ओडिसी में निपुर्ण हेमा जी की सुंदरता की वजह से उन्हें ड्रीम गर्ल नाम दिया गया, जिसके बाद उन पर इस नाम से फिल्म भी बनी.

मेरी सहेली की ओर से ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

उनके जन्मदिन के मौक़े पर आइए, देखते हैं उनके टॉप 20 गाने

फिल्म- रज़िया सुल्तान

फिल्म- धर्मात्मा

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फिल्म- राजा जानी

फिल्म- मृग तृष्णा

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फिल्म- सीता और गीता

फिल्म- त्रिशूल

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फिल्म- सत्ते पे सत्ता

फिल्म- महबूबा

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फिल्म- शोले

फिल्म- नसीब

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फिल्म- नया ज़माना

फिल्म- गोरा और काला

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फिल्म- जॉनी मेरा नाम

फिल्म- बंदिश

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फिल्म- क़ुदरत

फिल्म- अभिनेत्री

फिल्म- जुगनू

फिल्म- आस पास

फिल्म- जॉनी मेरा नाम

फिल्म- किनारा

ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी प्रस्तुत कर रही हैं डांस का अनोखा इवेंट- सिनर्जी फेस्टिवल… देखें वीडियो (Dream Girl Hema Malini Present Synergy Festival..! Watch Video)

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मशहूर अभिनेत्री और जानी-मानी भरतनाट्यम परफॉर्मर हेमा मालिनी हर साल की तरह इस साल भी ‘जया स्मृति’ इवेंट को ख़ास बनाने के लिए कुछ नया करने जा रही हैं. इस बार हेमाजी जॉर्जियन कलाकारों के सहयोग से जॉर्जियन नेशनल बैले ‘सुखीश्‍विली’ को भारत में प्रदर्शित करने जा रही हैं. इस इंटरनेशनल कल्चरल इवेंट में इस बार दो संस्कृतियों का अनोखा संगम यानी यंग इंडियन आर्टिस्ट और जॉर्जियन डांसर का बेहतरीन परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा. (देखें वीडियो)

जिन्हें मालूम नहीं है, उनकी जानकारी के लिए बता दें कि हेमा मालिनी 2006 से अपनी मां जयाजी की याद में हर साल एक शाम जया स्मृति कार्यक्रम के नाम समर्पित करती हैं. जयाजी हमेशा से ही देशभर से यंग टैलेंट को अपनी प्रतिभा स्टेज पर प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करती थीं. पिछले एक दशक से लगातार हेमाजी जया स्मृति कार्यक्रम मुंबई में कर रही हैं और इस बार उन्होंने एक क़दम आगे बढ़ते हुए इसे सही मायने में एक इंटरनेशनल इंवेट बनाने का फैसला किया है. डांस और म्यूज़िक के प्रतिभाशाली कलाकारों के प्रेरणास्रोत इस कार्यक्रम में इस साल जॉर्जियन डांस ‘सुखीश्‍विली’ का प्रदर्शन लगभग 50 साल बाद भारत में देखने को मिलेगा. यह वार्षिक इवेंट सितंबर में आयोजित किया जा रहा है. पहली बार सुखीश्‍विली और इंडियन डांस का प्रदर्शन इस साल भारत के 4 मुख्य शहरों मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता में होने जा रहा है.

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सुखीश्‍विली जॉर्जिया की पहली प्रोफेशनल स्टेट डांस कंपनी है. लाइको सुखीश्‍विली और नीनो रामिस्विली ने 1945 में इस डांस कंपनी की स्थापना की, पहले इसे जॉर्जियन स्टेट डांस कंपनी के नाम से जाना जाता था. इस जोड़े की वजह से जॉर्जियन नेशनल डांसिंग और म्यूज़िक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाना जाने लगा है.
अपने पूरे इतिहास में जॉर्जियन नेशनल बैले का प्रदर्शन एल्बर्ट हॉल, द कोलिज़ीयम, द मेट्रोपॉलिटन ओपेरा एंड मैडिसन स्न्वायर गार्डन आदि मशहूर जगहों में हो चुका है. इस डांस के कॉस्ट्यूम्स सिमोन विर्सालाज़ ने डिज़ाइन किए हैं. फ़िलहाल फाउंडर के बेटे टेंगिज़ सुखीश्‍विली, सुखीश्‍विली के आर्टिस्ट डायरेक्टर हैं. उनकी पत्नी इंगा टेविज़ाज़ भी पहले डांसर रह चुकी हैं और अब बैले मास्टर हैं. इलिको सुखीश्‍विली जूनियर चीफ कॉरियोग्राफर हैं. इस जॉर्जियन नेशनल बैले के 70 वेल ट्रेंड डांसर स्टेज पर अपने डांस से जैसे जादू कर देते हैं. इस डांस परफॉर्मेंस से प्रेरित होकर लेखक टेरी नैशन ने इस डांस फॉर्म को अपने टीवी सीरीज़ ङ्गडॉक्टर हूफ में शामिल किया था.

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जया चक्रवर्तीजी ने अपनी बेटी हेमा मालिनी को गाइड और सपोर्ट करने के साथ ही बिना किसी स्वार्थ के कई युवा कलाकारों के टैलेंट को स्टेज और फिल्म से जोड़ने का नेक काम किया है. जयाजी के इस सपने को अब जया स्मृति इवेंट के माध्यम से हेमा जी पूरा कर रही हैं. हेमाजी की दोनों बेटियां ईशा देओल तख्तानी और आहना देओल वोहरा का भी इस इवेंट से ख़ास जुड़ाव है और दोनों ही अपनी मां के इस सपने को पूरा करने के लिए उनका हर तरह से सपोर्ट करती हैं. कला सरहद की दीवारों को नहीं जानती. जॉर्जियन और भारतीय यंग टैलेंट को दर्शाता जया स्मृति इवेंट का यह प्रयास इसी बात को दर्शाता है.
हेमाजी ने जब पिछले साल त्बिलिसी, जॉर्जिया गई थीं और उन्होंने जॉर्जियन नेशनल डांस देखा, तो वो इस डांस कंपनी का वायब्रेंट परफॉर्मेंस देखकर बहुत प्रभावित हुई थीं. सुखीश्‍विली पिछली बार 1962 में भारत आए थे, इसीलिए इस डांस इंवेट का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा है. भारतीय डांसर में अदिति मंगलदास का ग्रुप दृष्टिकोण और पवि का डांस एनसेम्बल, साथ ही मणिपुर का पॉप्युलर क्लासिकल डांस अपने डिवाइन परफॉर्मेंस से प्रस्तुत करेंगे पुंग चोलोम.

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यह अनोखा इवेंट कला के माध्यम से भारत और जॉर्जिया के बीच ब्रिज (पुल) का काम कर रहा है. दिग्गजों और गणमान्य व्यक्तियों ने ख़ास इस कार्यक्रम के लिए अपना समय निकाल रखा है और इस इवेंट को अपना सपोर्ट दिया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, अन्य प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ, पंडित जसराज, पंडित शिवकुमार शर्मा, अंबानी, जया बच्चन, शबाना आज़मी, नीतू सिंह, रानी मुखर्जी, गोविंदा, अर्जन बाजवा, शत्रुघ्न सिन्हा आदि इस इवेंट में शामिल होंगे. हमेशा की तरह इस बार भी जया स्मृति ‘सिनर्जी’ इवेंट में गणमान्य लोगों के साथ ही सेलिब्रिटीज़, स्पेशल गेस्ट, कला के पारखी और आर्ट फॉर्म के स्टूडेंट्स के साथ ही उत्साही दर्शक इस यादगार लाइफटाइम इवेंट में शामिल होने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.

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हेमा मालिनी… मेरी ख़ूबसूरती का राज़… देखें वीडियो (Hema Malini… The Secret Of My Beauty… Watch Video)

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ख़ुद को खोजना, ख़ुद को पा लेना ही दरअसल सबसे बड़ी जीत होती है. दूसरों को जीतने से पहले स्वयं को जीतना पड़ता है और जब एक बार आपने ख़ुद को पा लिया, ख़ुद को समझ लिया, तो अपने अस्तित्व की सार्थकता भी आपको समझ में आ जाती है. यह एहसास आपको सकारात्मक बनाता है. यही सकारात्मकता मन को भीतर तक प्रसन्न बनाती है. जब मन को इस सकारात्मकता की ख़ुशी का एहसास होता है, तो यह हमारे पूरी व्यक्तित्व में प्रतिबिंबित होता है. भीतर की नकारात्मकता दूर होती है, तो मन ख़ूबसूरत बनता है और मन की यही ख़ूबसूरती बाहर भी झलकती है. आप ग्लो करते हो, कॉन्फिडेंट बनते हैं. आपका पूरा व्यक्तित्व ही आकर्षक और सम्मोहक होने लगता है.
सच कहूं, तो ख़ूबसूरत होने और ख़ूबसूरत नज़र आने से भी कहीं ज़्यादा ज़रूरी है, ख़ूबसूरत महसूस करना. अगर आप भीतर से ख़ुद को ख़ूबसूरत महसूस नहीं करेंगे, तो सब व्यर्थ है. भीतर की सकारात्मक ऊर्जा ही तो बाहर भी झलकती है, आप सुंदर, स्वस्थ, संतुष्ट और कॉन्फिडेंट नज़र आते हैं. (देखें वीडियो)

बहुत-से लोग आज भी यही समझते हैं कि हम सेलिब्रिटीज़ को अपनी ख़ूबसूरती का ख़्याल रखने की ज़रूरत ही नहीं, हमारी ब्यूटी तो गॉड गिफ्ट है… जबकि सच तो यह है कि हमें इसे मेंटेन रखने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और कठिन अनुशासन का पालन करना पड़ता है. यही मेहनत अगर आप भी करेंगे, तो आप भी उतने ही ख़ूबसूरत, फिट और हेल्दी नज़र आओगे. मुझे ड्रीम गर्ल का ख़िताब मेरे फैंस ने दिया. ऐसे में मेरी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि उनके इस ख़िताब को मैं जस्टिफाई कर सकूं. वैसे भी
बहुत-से लोग मुझसे आज भी मेरी ब्यूटी और फिटनेस का राज़ पूछते हैं, तो उनसे भी मैं यही कहूंगी कि हेल्दी लाइफस्टाइल, हेल्दी डायट के साथ-साथ हेल्दी सोच भी ज़रूरी है.
मैं तो यही नहीं समझ पाती कि लोग लेट नाइट जागकर, स्मोक, ड्रिंक करके, अनाप-शनाप खा-पीकर अपने शरीर को इतना नुक़सान क्यों और कैसे पहुंचा लेते हैं? ईश्‍वर ने हमें इतना सुंदर शरीर दिया है. इसकी देखभाल करना, इसे स्वस्थ-सुंदर बनाए रखना हमारी ज़िम्मेदारी है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल से आख़िर क्यों अपने ही शरीर को नुक़सान पहुंचाते हैं लोग? इसमें क्या आनंद आता है, मेरी समझ से ही परे है, क्योंकि आप ख़ुद को, अपने शरीर को ही नुक़सान पहुंचा रहे होते हैं.

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हर इंसान के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि वो सबसे पहले ख़ुद से प्यार करे. जब हम ख़ुश और स्वस्थ रहेंगे, तभी दूसरों को भी ख़ुश रख पाएंगे. इसके अलावा अनुशासन यानी डिसिप्लिन भी बेहद ज़रूरी है. अगर आप अनुशासित जीवन नहीं जीएंगे, तो कहीं न कहीं इसका ख़ामियाज़ा भुगतना ही पड़ेगा. जहां तक मेरी बात है, तो मैं सुबह उठकर साधना करती हूं, क्योंकि साधना हमें न स़िर्फ शांति का एहसास कराती है, बल्कि ईश्‍वर और प्रकृति से एकाकार होना भी सिखाती है, जिससे हम अपनी एनर्जी को महसूस करते हैं और उसका सही दिशा में इस्तेमाल कर पाते हैं. इसके अलावा योग से हम स्वस्थ तन-मन भी पा सकते हैं. मैं नियमित रूप से साधना, योग और डांस करती हूं, इसीलिए मेरा शरीर फिट और स्किन ख़ूबसूरत नज़र आती है. अच्छा शरीर पाने के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है. इसी तरह अपनी स्किन की ज़रूरतों को समझना भी ज़रूरी है. कंप्लीट नींद, हेल्दी फूड, डेली वर्कआउट से आप हर उम्र में स्वस्थ और ख़ूबसूरत नज़र आ सकते हैं. अक्सर ऐसा भी होता है कि बिज़ी शेड्यूल के चलते कई बार मुझे कुछ समझौते भी करने पड़ते हैं, जैसे- कभी नींद कम हो पाती है, तो कभी डायट ठीक से नहीं हो पाती, लेकिन यहां साधना, ध्यान और योग मेरी मदद करते हैं. आप लोग अगर यह सोचते हैं कि बस मेकअप करके स्किन को ख़ूबसूरत बना लेना बेहद आसान है, तो यह सोच ग़लत है. जब तक आप भीतर से हेल्दी नहीं महसूस करेंगे, कोई मेकअप आपके काम नहीं आएगा. इसलिए योग, साधना और ध्यान बेहद ज़रूरी है. यह मन के कॉस्मेटिक्स हैं, जो मन को सुंदर बनाते हैं, उसके बाद डायट की बारी आती है. पानी पीएं, हेल्दी खाएं, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएं.

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हमें ईश्‍वर ने इतना सुंदर जीवन दिया है, लेकिन हम इसके महत्व को न समझकर निरंतर अपनी इंद्रियों को तुष्ट करने की दिशा में भागे जाते हैं. दरअसल, हमारा शरीर एक ज़रिया है, शरीर के ज़रिए ही हम ध्यान व साधना करके आत्मा की गहराई तक पहुंच सकते हैं और यही गहराई हमें ख़ूबसूरत होने का कॉन्फिडेंस देती है. कॉन्फिडेंस भी बेहद ज़रूरी है और ख़ूबसूरती की एक महत्वपूर्ण शर्त भी. चाहे आप शारीरिक रूप से कितने भी ख़ूबसूरत हों, लेकिन अगर आपमें कॉन्फिडेंस नहीं, तो वो ख़ूबसूरती उभरकर नहीं आती. आप डल लगते हो. सवाल यह है कि यह कॉन्फिडेंस कहां से आएगा? जवाब वही है- भीतर से! भीतरी ऊर्जा, सकारात्मकता ही आपको कॉन्फिडेंस देती है और भीतरी ऊर्जा के लिए मन के कॉस्मेटिक्स- योग, साधना और ध्यान ही आपकी मदद करेंगे! कुल मिलाकर मैं यही कहूंगी कि ख़ुश रहें, पॉज़िटिव रहें और अनुशासित रहें, आप अपने आप ख़ूबसूरत और कॉन्फिडेंट नज़र आएंगे.

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हेमा मालिनी… हां, सपने पूरे होते हैं…! देखें वीडियो (Hema Malini… Yes, Dreams Do Get Fulfilled…! Watch Video)

Hema Malini

कौन कहता है आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों

हां, मैंने भी कुछ हसीन सपने देखे थे और ज़िंदगी ने मुझे ड्रीम गर्ल का ख़िताब दे डाला. मैंने आसमान छूने की ख़्वाहिश की और मेरे चाहनेवालों ने मुझे फलक पर बिठा दिया. मैंने ज़िंदगी में अपने हर क़िरदार को पूरी शिद्दत से निभाया और ज़िंदगी ने हमेशा मुझे मेरी ख़्वाहिश से ज़्यादा ही दिया है. हम दुनिया में आते हैं… बड़े होते हैं, फिर आंखों में कई नए-नए सपने पलने लगते हैं… उन्हें देखते हैं और जुट जाते हैं उन्हें पूरा करने में… दिल में कई अरमान जागते हैं… हम भागने लगते हैं उन्हें मुकम्मल करने के लिए… हसरतों के दायरे फिर हमें धीरे-धीरे कैद करने लगते हैं अपनी परिधि में… ये तो है इंसानी फ़ितरत, लेकिन इसमें भी यदि हम बात करें एक औरत की, तो उसके दायरे तो व़क्त के साथ-साथ और भी सिमटने लगते हैं… लेकिन जहां तक मेरी बात है, तो मुझे न तो अपने दायरे समेटने पड़े और न ही सपनों पर पाबंदी लगानी पड़ी, क्योंकि मेरे प्रयास सच्चे थे और मुझे अपनों का भी भरपूर साथ मिला.

Hema Malini

मैं यही कहूंगी कि बेशक, हर सपना पूरा होता है, यदि आप सही दिशा में काम कर रहे हों और आपने अपने सपने को पूरा करने की हर मुमकिन कोशिश की हो. यदि हम अपने अतीत पर नज़र डालेंगे, तो पाएंगे कि आज हम जो कुछ भी हैं, वो अतीत में हमारे द्वारा किए गए प्रयासों का ही नतीजा है.
ख़्वाहिशें, अरमान, अपेक्षाएं, इच्छाएं… ये तमाम तत्व इंसानी फ़ितरत का हिस्सा हैं. ख़्वाहिशें रखना ग़लत भी तो नहीं है. किसी चीज़ को पाने की ख़्वाहिश रखना बहुत अच्छी बात है और ये भी सच है कि आप पूरी ईमानदारी के साथ जितने बड़े सपने देखते हैं, ज़िंदगी आपको उससे कहीं ज़्यादा देती है, लेकिन उसके लिए आपका अपने सपनों के प्रति ईमानदार होना ज़रूरी है. जैसे आप यदि मर्सिडीज़ ख़रीदने का लक्ष्य रखते हैं, तो उसके बाद आपका मस्तिष्क उसी दिशा में सोचना शुरू कर देता है, आप उसे पाने के रास्ते तलाशने लगते हैं, आपके हालात भी उसी के अनुरूप बदलने लगते हैं और आख़िरकार आप मर्सिडीज़ ख़रीद लेते हैं. इसलिए जीवन में लक्ष्य का होना बहुत ज़रूरी है.

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हमें बचपन से अपने बच्चों को ये बात सिखानी चाहिए कि बड़े लक्ष्य रखो, बड़े सपने देखो और उन्हें पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत करो, फिर आपको वो चीज़ पाने से कोई नहीं रोक सकता. अक्सर मैं लोगों को देखती हूं, जिन्हें ज़िंदगी से बहुत शिकायत रहती है… बहुत कुछ होने के बाद भी वो संतुष्ट नहीं होते. उन्हें शायद ख़ुद भी यह नहीं पता होता कि उन्हें आख़िर क्या चाहिए. यही वजह है कि न तो उनके पास कोई लक्ष्य होता है और न ही उसे हासिल करने के लिए कोई प्रेरणा. मन की चंचलता उन्हें ताउम्र असंतुष्ट रखती है और वो भटकते रहते हैं, इसलिए सबसे ज़रूरी है कि आपके मन में यह बात पूरी तरह से साफ़ होनी चाहिए कि आपकी मंज़िल क्या है और आपको उस तक किस तरह से पहुंचना है. आपके प्रयास किस तरह के होने चाहिए और आपके त्याग कितने बड़े हो सकते हैं.

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अगर मैं अपनी बात करूं, तो मैं भी एक बेहद आम-सी लड़की थी, लेकिन मेरी मां ने मेरे लिए बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने के लिए मुझे सही दिशा दी. अगर मेरी मां कोई और होती, तो शायद मैं आज यहां न होती. मेरी मां ने मेरी ज़िंदगी को सही दिशा दी और मुझे उसके लिए मेहनत करने की हिम्मत भी दी. आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें मेरी मां का बहुत बड़ा रोल है.

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आज जब मैं अपने बचपन को याद करती हूं, तो पाती हूं कि मेरी परवरिश बहुत अच्छे माहौल में हुई. मेरी मां ने मुझे कला के प्रति समर्पित होना सिखाया, इसीलिए मेरी कला आज मेरी पहचान बन गई है. मां ने मेरे लिए जो सपने देखे थे, उन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने मुझे सही राह दिखाई, इसीलिए आज मैं यहां पहुंच पाई हूं. बचपन में जब मैं अपनी खिड़की से बाहर देखती थी कि मेरे फ्रेंड्स बाहर खेल रहे हैं और मैं घर में डांस की प्रैक्टिस कर रही हूं, तो मुझे मां पर बहुत ग़ुस्सा आता था, लेकिन आज जब मैं देखती हूं कि वो लड़कियां कहां हैं और मैं कहां हूं, तब समझ में आता है कि मेरी मां ने मेरे लिए कितने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने के लिए कितनी मेहनत की. आज मैं जो कुछ भी हूं, अपनी मां की वजह से हूं. बच्चों को प्यार देना जितना ज़रूरी है, उन्हें अनुशासन में रखना भी उतना ही ज़रूरी है. मां ने मेरे साथ भी ऐसा ही किया, उन्होंने मुझे सिखाया कि आपके पास यदि हुनर है, तो उसे इतना निखारो कि आपका हुनर ही आपकी पहचान बन जाए. मैंने यदि कला की साधना की है, तो कला ने भी मुझे नाम-शोहरत सब कुछ दिया है.

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हर पैरेंट्स को अपने बच्चों को सपने देखना और गोल सेट करना सिखाना ही चाहिए, फिर उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. वैसे भी आजकल इतने
छोटे-छोटे बच्चे रियालिटी शोज़ में कितना कुछ कर दिखाते हैं, उनके इस टैलेंट के पीछे उनके पैरेंट्स की मेहनत साफ़ दिखाई देती है. बच्चा पढ़ाई में ही अच्छा हो ये ज़रूरी नहीं, बच्चे के टैलेंट को पहचानें और उसे उसी फील्ड में आगे बढ़ने दें.यक़ीन मानिए, आप जिस भी चीज़ को शिद्दत से चाहते हैं, वो आपको मिलती है, आपको बस मेहनत करते रहना चाहिए.

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