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जानिए क्यों आते हैं सपने (Dreams: Why Do We Dream?)

सपने (Dreams) क्यों आते हैं? नींद में सोते समय मस्तिष्क में ऐसा क्या होता है जो सपनों की दुनिया में ले जाता है? इन सवालों पर कई रिसर्च्स की गई हैं. हालांकि इन सवालों के कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिले हैं. लेकिन शोधों के आधार पर सपनों के बारे में कई तथ्य सामने आए हैं.

Dreaming

नींद और सपने का कनेक्शन
1. वैज्ञानिकों ने नींद को दो चरणों में बांटा है. पहला है- आरईएम और दूसरा है- नॉन आरईएम, जिसके चार चरण होते हैं. सबसे ज़्यादा सपने आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट चरण में आते हैं. इस दौरान शरीर शिथिल रहता है, लेकिन पलकों के नीचे आंखों की पुतलियां तेज़ी से घूमती रहती हैं.
2. 70 मिनट के नॉन आरईएम चरण के बाद व्यक्ति पहले आरईएम चरण में पहुंचता है, जो केवल 5 मिनट का होता है.
3. आरईएम-नॉन आरईएम का चक्र 90 मिनटों का होता है और पूरी रात में नींद के दौरान यह पैटर्न 5 बार रिपीट होता है.
4. जैसे-जैसे समय गुज़रता है, नॉन आरईएम स्टेज छोटा होता जाता है और आरईएम स्टेज बढ़ा होता जाता है और व्यक्ति सपनों की दुनिया में पहुंच जाता है.
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Dreams

क्यों आते हैं सपने?
यूं तो सपने क्यों आते हैं? इसका कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिल पाया है, लेकिन रिसर्च के आधार पर जो कारण सामने आए हैं, वे ये हो सकते हैं
– कुछ छिपी इच्छाएं या भावनाएं, जो पूरी न हो सकी हों या पूरी न हो पा रही हों.
– पूरे दिन ख़ुद के साथ घटित हुई बातों  व घटनाओं का पुनर्परीक्षण करने के लिए सपने आते हैं.
– कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सपने इसलिए आते हैं, ताकि शरीर आराम कर सके.
– जब आप बेहद तनाव में होते हैं, तब सपने आते हैं.
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सपने का सच
1. हर व्यक्ति सपने देखता है. फिर चाहे वो पुरुष हो, स्त्री हो या बच्चा. फ़र्क़ इतना है कि कुछ लोगों को सपने याद रह जाते हैं और कुछ को नहीं.
2. नींद के लगभग 2 घंटे सपने देखने में जाते हैं.
3. हर व्यक्ति रात में 3 से 6 सपने देखता है, जिनमें से एकाध सपना ही याद रह जाता है.
4. नींद में हर 90 मिनट पर एक सपना आता है. हर सपना पिछलेवाले से बड़ा होता है. एक्सपर्ट्स की माने तो रात का पहला सपना 5 मिनट लंबा होता है, जबकि आख़िरी सपना लगभग 45 मिनट से 1 घंटे का होता है.
5.  एक रिसर्च के मुताबिक़, एक इंसान अपने पूरे जीवनकाल में तक़रीबन 100000 से ज़्यादा सपने देखता है या यह भी कह सकते हैं कि जीवन के 6 साल वो सपने देखने में बिताता है.
6. नींद से जागने के बाद 95 फ़ीसदी लोगों को उनके सपने याद नहीं रहते हैं.
7.  सपने कुछ सीखने में मदद करते हैं और याद्दाश्त को मज़बूत बनाते हैं.
8. महिला और पुरुष के सपनों में फ़र्क़ होता है. दोनों अलग-अलग तरह के सपने देखते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाएं परिवार व अपने बच्चों से जुड़े सपने ज़्यादा देखती हैं.
9. रैपिड आई मूवमेंट और नॉन रैपिड आई मूवमेंट के दौरान देखे गए सपनों में फ़र्क़ होता है.
10. 48 फ़ीसदी ऐसे लोग सपने में आते हैं, जिन्हे आप जानते हैं.
11. नेत्रहीन लोगों को देख पानेवाले लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा सपने आते हैं.
12. अल्कोहल पीने से नींद और सपने दोनों की क्वालिटी पर असर होता है.
13. सपनों पर कंट्रोल करना भी संभव है. कई सपने ऐसे होते हैं, जिनमें व्यक्ति भले ही सो रहा हो पर उसे पता होता है कि वो सपना देख रहा है और इस सपने को अपनी इच्छानुसार कंट्रोल कर सकता है. इसे ल्यूसिड ड्रीम्स कहा जाता है.