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5 आसान फेंगशुई टिप्सः घर को बचाएं निगेटिव एनर्जी से (5 easy fengshui tips to keep away negative energy)

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दुख, दरिद्रता, तकलीफ़, पीड़ा इत्यादि परेशानियों का एक मात्र कारण है घर में प्रवेश करती नकारात्मक ऊर्जा अर्थात यदि इन नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोक दिया जाए, तो ऐसी परेशानी से छुटकारा मिल सकता है.
अगरबत्ती या धूप जलाएं
घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए सुबह-शाम सुगंधित अगरबत्ती या धूप जलाएं. कमरे में फैली अगरबत्ती या धूप की पवित्र सुगंध नकारात्मक ऊर्जा को ख़त्म कर देती है.

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कमरे की स्वच्छता पर ध्यान दें
नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए मकान के हर एक कमरे को साफ़-सुथरा रखने की कोशिश करें. अव्यवस्थित चीज़ों को सही ढंग से रखें. साथ ही अनावश्यक व बेकार की चीज़ों को फेंक दें, क्योंकि गंदगी व अस्वच्छता नकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करते हैं.

टॉयलेट का दरवाज़ा बंद रखें
टॉयलेट नकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है. अतः टॉयलेट का दरवाज़ा हमेशा बंद रखें, वरना यहां से निकलनेवाली नकारात्मक ऊर्जा अन्य कमरे में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकती है.

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नमक मिले पानी से पोंछा लगाएं
नकारात्मक ऊर्जा को कम करने के लिए घर के हर कमरे में नमक मिले पानी से पोंछा लगाना भी एक अच्छा उपाय है. फेंगशुई के अनुसार रोज़ाना ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो जाता है.

टॉयलेट में समुद्री नमक का कटोरा रखें
टॉयलेट में से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा को कम करने के लिए टॉयलेट की खिड़की पर कांच के कटोरे में समुद्री नमक डालकर रख दें. समुद्री नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है. परंतु ध्यान रहे, जब नमक गीला हो जाए, तो उसे फेंक कर दूसरा नमक डालें.

25 ईज़ी वुलन केयर टिप्स, ताकि कपड़े दिखें नए जैसे (25 Easy way to take care of your Woolen Clothes)

Woolen Clothes

* कोई भी स्वेटर या वुलन ड्रेस (Woolen Clothes) जिसमें बटन या ज़िप लगा हो, धोने से पहले उसकी बटन/ज़िप को बंद कर दें. इससे वुलन का शेप ठीक रहेगा.

* ऊनी कपड़ों की चमक बरक़रार रखने के लिए धोने के बाद उन्हें एक बाल्टी पानी में कुछ बूंदें ग्लिसरीन की डालकर दो मिनट तक डुबोकर रखें.

* ऊनी कपड़ों को माइल्ड डिटर्जेंट से ही धोएं. धोने से पहले स्वेटर को उल्टा कर लें यानी सिलाई वाला हिस्सा ऊपर हो.

* पसीने की दुर्गंध मिटाने के लिए एक लीटर पानी मेें एक टेबलस्पून बोरेक्स पाउडर डालकर स्वेटर को 10-15 मिनट के लिए भिगो दें. इसके बाद  स्वेटर को धोएं.

* ऊनी कपड़ों पर से तेल का दाग़ हटाने के लिए दाग़ वाली जगह पर दही रगड़कर एक तरफ़ रख दें. थोड़ी देर बाद धो लें. दाग़ ग़ायब हो जाएगा.

* अंडे, दूध या स्याही से कपड़े ख़राब हो गए हों, तो सादे स्पिरिट में एक कपड़ा भिगोकर दाग़ वाले स्थान पर रगड़ें, फिर स़फेद सिरका लगाकर धो दें.

* अल्कोहल आप के गरम कपड़े पर छलक जाए तो उसे फौरन साफ़ कपड़े से पोंछकर गरम पानी और सर्जिकल स्पिरिट से धोएं. कपड़े पर पड़ा  अल्कोहल निकल जाएगा.

* उधड़े हुए ऊन को फिर से नया, चमकीला और सीधा करने के लिए उसे पानी के भाप पर रखें. इसके लिए एक बर्तन में पानी गरम करें. उसके ऊपर  छलनी रखें. ऊन को छलनी में रखें. दो-दो मिनट पर ऊन को उलटती-पलटती रहें. थोड़ी देर बाद आप देखेंगी कि ऊन बिल्कुल सीधा, चमकदार और नए  जैसा हो गया है.

* ऊन से बुने स्वेटर, शॉल, मोजे, स्कार्फ आदि को धोने से पहले सूखे ब्रश से ही उनकी धूल-मिट्टी को अच्छी तरह साफ़ कर लें.

* ऊनी कपड़ों को धोने के लिए इसके लिए बनाया गया या फिर बाज़ार में मिलने वाला अच्छे ब्रांड का लिक्विड सोप इस्तेमाल करें. प्लास्टिक की  बाल्टी या फिर टब में पर्याप्त मात्रा में पानी लेकर उसमें लिक्विड सोप डालकर झागदार घोल बना लें.

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* कुछ ऊनी कपड़ों के लिए गुनगुने पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, अतः कपड़ों के अनुसार गरम या फिर ठंडा पानी भिगोने के लिए    इस्तेमाल करें.

* सभी स्वेटर को उल्टा व एक-एक करके भिगोएं व देखें कि किसी स्वेटर का रंग तो नहीं निकल रहा. यदि ऐसा है तो उस स्वेटर को अलग से भिगोएं.

* गरम कपड़ों को पहनने से पहले ड्रायक्लीन करा लें.

* गीले व नमी वाले गर्म कपड़ों पर प्रेस न करें. ऐसा करने से उनकी चमक फीकी पड़ सकती है. साथ ही इन्हें हैंगर पर न लटकाएं.

* ऊनी कपड़ों को सुखाते समय स्लीव्ज़ का ध्यान ज़रूर रखें, वरना वे लटक कर ढीली हो जाएंगी.

* गर्म कपड़ों को कभी भी नमी वाले स्थानों पर न रखें.

* अगर गरम कपड़े पर कॉफी गिर जाए और दाग़ पड़ जाए तो अल्कोहल व स़फेद सिरका बराबर मात्रा में मिलाकर उसमें कपड़ों को डुबोएं. दाग़ वाली  जगह को हल्का-सा मलें और साफ़ कपड़े से पोंछ दें. दाग़ निकल जाएंगे.

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* स्वेटर के कंधों को साफ़ करते समय नीचे रूई का छोटा-सा तकिया या गद्दी रखनी चाहिए. यह स्वेटर के आकार को बिगड़ने से बचाता है.

* सभी स्वेटर को अच्छी तरह से भिगोकर साफ़ पानी से चार-पांच बार धोएं.

* ऊनी कपड़ों को धोते समय ब्रश का उपयोग न करें. हल्के हाथों से रगड़कर साफ़ करें.

* अतिरिक्त पानी को निकालने के लिए स्वेटर को निचोड़ें नहीं, बल्कि स्वेटर को सूखे टॉवेल से कवर कर दें. इससे अतिरिक्त पानी टॉवेल में आ जाएगा.

* स्वेटर को सुखाने के लिए रस्सी पर न लटकाएं, उन्हें समतल ज़मीन पर फैलाकर सुखाएं. इससे उनका आकार सही बना रहेगा.

* वुलन को सूर्य के प्रकाश में न सुखाएं, इससे उनका रंग फीका पड़ जाता है.

* रोज़ाना इस्तेमाल किए जाने वाले ऊनी कपड़े घर पर धोए जा सकते हैं, लेकिन महंगे व विशेष कपड़ों को ड्रायक्लीन करवाना ही ठीक रहता है.

* वुलन को प्रेस तो आयरन को स्टीम मोड में रखें और ऊनी कपड़े के ऊपर मलमल का कपड़ा रखकर ही प्रेस करें.

वास्तु से सुधारें बिगड़े काम (Repair of damaged architectural work)

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अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं, अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं, अच्छे स्वभाव के होते हैं, पर इन सब के बावजूद उन्हें कई बार असफलता ही हाथ लगती है. उनका काम बिगड़ जाता है फिर चाहे वो घर, परिवार, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो. वास्तु द्वारा बिगड़े हुए कार्यों को सुधारा जा सकता है. आइए, इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ड्रॉइंगरूम
* कभी भी ड्रॉइंगरूम यानी बैठक में भारी परदे नहीं लगाएं. इससे धूल-मिट्टी परदे में चिपक जाती है, जिससे गृहिणियां अक्सर बीमार पड़ जाती हैं.
* जहां तक हो सके लकड़ी के फ़र्नीचर से कमरे को सजाएं, जैसे- कुर्सी, सोफा, टेबल आदि. दरअसल लकड़ी का फ़र्नीचर होने से सूर्य-प्रकाश, हवा आदि से प्रवाहित होनेवाली ऊर्जा व्यक्ति विशेष पर सीधे पड़ती है यानी लकड़ी इन्हें अपने में सोख नहीं लेती. इसके विपरीत लोहे, स्टील जैसी अन्य
धातुओं के फ़र्नीचर होने पर सभी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है.
* बहुत भारी पीतल के सजावट के सामान ड्रॉइंगरूम में दक्षिण व नैऋत्य दिशा में रखें.
* ताज़े फूल बैठक में लगाने से उनकी सुगंध से घर का वातावरण अच्छा रहता है, जबकि नकली फूल बनावटी जीवन का प्रतीक हैं.
* कई बार व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित बातें ड्रॉइंगरूम में करते हैं. ऐसे में अपनी दिशा के अनुरूप बैठकर वार्तालाप करें यानी जो दिशा व्यक्ति विशेष के अनुकूल हो, यदि वो वहां बैठें, तो सदैव सफलता हाथ लगती है. बिगड़े हुए काम बनते हैं.

कमरे का रंग
ड्रॉइंगरूम का रंग अगर गृहस्वामी से मैच नहीं करता, तो कभी भी उसका मन बैठक में नहीं लगेगा. उसका जो भी व्यवसाय है, उसमें वो सफल नहीं हो पाएगा. हल्के रंग ख़ासकर क्रीम रंग, जो सबको सूट करता है अर्थात् किसी भी लग्न प्रधान व्यक्ति को सूट करता है, इसे कमरे में लगवाएं. वैसे भी यह लक्ष्मी का प्रिय रंग है.

बेडरूम
इसका चुनाव व्यक्ति विशेष की दिशा पर निर्धारित किया जाता है. कमरे का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र न रखें. हवा आने के लिए सही खिड़की लगी होनी चाहिए. बेडरूम में अपने किसी भी मित्र का चित्र नहीं लगाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव संचित होता है.

कमरे का रंग
बेडरूम में गहरे रंग के प्रयोग से बचें. कमरे में सदैव हल्के रंग लगाएं. इससे संबंधों में मधुरता बनी रहती है.

कमरे में पलंग
कमरे का पलंग लकड़ी का ही हो, किसी धातु का न हो. पलंग की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई व्यक्ति के अनुरूप होनी चाहिए. बिस्तर नर्म होना चाहिए और चद्दर अधिकांशत: स़फेद रखनी चाहिए या हल्के क्रीम रंग की. व्यक्ति के अनुरूप रंग नहीं हुआ, तो व्यक्ति तकलीफ़ में आ जाता है. अत: इन पहलुओं पर भी ग़ौर करें.

बच्चों की पढ़ाई
बच्चों का कमरा या मेज़ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. सबसे शुभ पूर्व होता है, क्योंकि यहां से सूर्य का प्रकाश आता है. उनके कमरे में थोड़े खिलौने वगैरह लगा दें और किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति का चित्र लगाएं, जो उन्हें हमेशा प्रेरित
करते रहें कि कैसे इन महापुरुषों ने जीवन में संघर्ष किया और महान बने. उनसे कभी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा सकारात्मक बातें ही करें.

पूजाघर
घर में मंदिर पूर्वोत्तर (ईशान) दिशा में शुभ है. पश्‍चिम और दक्षिण दिशा में मंदिर नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा मंदिर में मूर्ति बहुत ज़्यादा ऊंची या टूटी अथवा भगवान का चित्र कटे-फटे अवस्था में नहीं रखना चाहिए. जहां तक हो सके, केवल अपने आराध्य देव की और दो-तीन मूर्ति ही रखें. टूटी हुई, खंडित मूर्ति, पुरानी जगह या मंदिर से लाई हुई मूर्ति न रखें. धूप-दीप जलाएं, घंटी व शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है. शुद्ध वायु का प्रसार होता है.

रसोईघर
वेद, उपनिषद एवं समस्त वास्तु ग्रंथों के अनुसार, रसोईघर को अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो वायव्य कोण में भी रसोई बना सकते हैं. यदि यह भी संभव न हो, तो ईशान कोण को छोड़कर किसी भी कमरे के अग्नि कोण में रसोईघर बना सकते हैं, परंतु क्रमानुसार उसकी शुभता कम होती जाती है. ध्यान रहे, भोजन बनाते समय चेहरा पूर्व में रहे.

टॉयलेट और बाथरूम
प्राय: लोग बाकी सभी चीज़ें साफ़ रखते हैं, पर टॉयलेट व बाथरूम पर ध्यान नहीं देते. इसके कारण कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हड्डी तक टूट जाती है. स्नानघर पूर्व दिशा और टॉयलेट दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में होना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉयलेट की सफ़ाई का विशेष रूप से ध्यान रखें.
विशेष: ईशान/नैऋत्य कोण में बाथरूम सदैव अशुभ होता है.

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भवन निर्माण के समय
कोई भी नया भवन निर्माण करते समय वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए. निर्माण के पूर्व नक्शा भी वास्तु के अनुरूप ही बनाना चाहिए. जहां तक संभव हो, निर्मित भवन में तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए. उपाय के द्वारा भी वास्तु-दोष निवारण किया जा सकता है, जैसे- उस वास्तु-दोष के निवारण हेतु दोषयुक्त दिशा या स्थान पर यंत्र स्थापित कर पूरे भवन के वास्तु-दोष की शांति के लिए मुख्य द्वार एवं अंदर के सभी कमरों के द्वारों पर शुभ प्रतीक चिह्न- घोड़े की नाल, स्वस्तिक, ओम आदि का प्रतीक चिह्न अंकित कर सकते हैं. तुलसी का पौधा दोषयुक्त स्थान/दिशा में रखकर लाभ उठाया जा सकता है. घर में अखंड रूप से श्रीरामचरितमानस का नवाह पारायण नौ बार करने से वास्तु जनित दोष दूर हो जाता है. वास्तु में विभिन्न दिशाओं, स्थानों और कोणों से किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्हें कैसे दूर करें? आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं-

ईशान कोण (उत्तर/पूर्व)
ईशान कोण वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान या दिशा है. यदि ईशान कोण दूषित है तो अन्य सारे स्थान/दिशा सही होने पर भी कोई लाभ नहीं. इस दिशा को हमेशा साफ़ रखें. यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए. यह स्थान खाली होना चाहिए. इस स्थान को देवता का वास/स्थान माना गया है. यहां पूजा स्थल सर्वाधिक उपयुक्त है. इस दिशा में झाड़ू भूलकर भी न रखें.
विशेष: यह कोण बढ़ा हुआ हो, तो शुभ फलदायक होता है.

आग्नेय कोण ( दक्षिण/पूर्व)
इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए. पानी की टंकी (अंडरग्राउंड) कदापि नहीं होनी चाहिए.

नैऋत्य कोण (दक्षिण/पश्‍चिम)
परिवार के मुखिया के शयनकक्ष हेतु सर्वाधिक उपयुक्त है तथा दुकान के मालिक के लिए यह स्थान लाभदायक है. भारी मशीनें, भारी सामान इस दिशा में रखना चाहिए.
विशेष: नैऋत्य कोण में किसी भी प्रकार का गड्ढा, बेसमेंट, कुआं नहीं होना चाहिए. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है.

वायव्य कोण (उत्तर/पश्‍चिम)
शौचालय, सेप्टिक टैंक के लिए उपयुक्त. अध्ययन कक्ष, गैरेज के लिए लाभदायक. इस दिशा में दुकान का गल्ला, कैश बॉक्स नहीं रखना चाहिए.

ब्रह्म स्थान
भूखंड के बीच के स्थान (आंगन) को ब्रह्म स्थान की संज्ञा दी गई है. आंगन खुला एवं स्वच्छ होना चाहिए. जूठे बर्तन या गंदगी आंगन में नहीं होनी चाहिए. आंगन में किसी प्रकार का गड्ढा न हो.

– डॉ. प्रेम गुप्ता
वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ

GST- कितनी आसान होगी ज़िंदगी? (How much easier life would be GST-?)

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सालों से अधर में लटका जीएसटी बिल आख़िरकार राज्यसभा में पास हो ही गया. संसद के मानसून सत्र में 197 वोटों के साथ जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है. ऐसा अनुमान है कि अगले साल यानी 2017 में इसे लागू भी कर दिया जाएगा. इसके लागू होते ही आम आदमी को कई तरह से फ़ायदा होगा.

जानें क्या है जीएसटी ?
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है, जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं.

जीएसटी के अनेक फ़ायदे
अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है. जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी. जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

समान प्राइस रेट
जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फ़ायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को ख़रीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी. उदाहरण के लिए अगर आप मुंबई से कार ख़रीदते हैं, तो आपको अलग क़ीमत चुकानी पड़ती है और उसी कार को अगर आप अहमदाबाद से ख़रीदते हैं, तो अलग क़ीमत. अब ऐसा नहीं होगा. जीएसटी बिल लागू होने के बाद आपको कार की एक ही क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

कम होगी महंगाई
जानकारों की मानें, तो जीएसटी बिल के लागू होने के बाद काफ़ी हद तक महंगाई पर लगाम लगाया जा सकता है. चीज़ों के रेट अपने आप कम हो जाएंगे, जिससे आम आदमी को इसका फ़ायदा मिलेगा. फिलहाल जो सामान ख़रीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है, वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है. आम आदमी के साथ कंपनियों और व्यापारियों को भी फ़ायदा होगा.

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प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट के ईज़ी टिप्स

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दिन-ब-दिन ब़ढ़ती महंगाई, बच्चों की हायर स्टडीज़ और लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों के चलते आम आदमी के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना थोड़ा मुश्किल होता है. वैसे भी प्रॉपर्टी में निवेश करना बहुत जोख़िम का काम होता है, लेकिन अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए यह जोख़िम उठाया जा सकता है. प्रॉपर्टी में निवेश करके आप भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

योजना बनाएं:
अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले योजना बनाएं कि प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपको कितनी अनुमानित राशि ख़र्च करनी है? प्रॉपर्टी कहां लेनी है? किस बैंक से लोन लेना है? आदि. इन बातों को ध्यान में रखकर योजना बनाएंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा. योजना के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने पर ख़र्चे बजट के अंदर होंगे और आप अतिरिक्त ख़र्चों के बोझ से भी बचेंगे.

अपना बजट तय करें:
प्रॉपर्टी ख़रीदने की योजना बनाने के बाद दूसरा चरण आता है बजट का. बजट बनाते समय प्रॉपर्टी की अनुमानित क़ीमत, स्टैंप ड्यूटी, ब्रोकर की फीस, मॉर्गेज़ इंश्योरेंस (अगर आवश्यक हो तो), मेंटेनेंस चार्जेस आदि ख़र्चों का ध्यान रखें. इसके अलावा कुछ अन्य ख़र्चे, जैसे- बैंक से कितना लोन मिल सकता है, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स आदि से कितना मैनेज हो सकता है. यदि रेनोवेशन, इंटीरियर और होम डेकोर आदि कराना है, तो कितना ख़र्च आएगा? इन सब बातों को ध्यान में रखकर अपना बजट बनाएं.

लोकेशन (प्रॉमिसिंग एरिया) का चुनाव करें:
यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है कि आपको किस एरिया में प्रॉपर्टी ख़रीदनी है? वहां पर किस-किस तरह की सुविधाएं (बच्चों के लिए पार्क, स्कूल, अस्पताल, मॉल आदि) उपलब्ध हैं? वहां पर भविष्य में विकास की कौन-कौन-सी संभावनाएं हैं? भविष्य में अगर किराए पर देना हो या प्रॉपर्टी बेचनी पड़े, तो मुना़फे की कितनी संभावना है. यदि इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रॉमिसिंग एरिया का चुनाव करेंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा.

अनुभवी व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर/रियलटर्स का चुनाव:
प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए स्थानीय एजेंट की बजाय विश्‍वसनीय, कुशल व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर या रियलटर्स (रियल इस्टेट एजेंट, जिनका संबंध नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियलटर्स से होता है और प्रॉपर्टी की ख़रीद-फ़रोख़्त करते समय वे एसोसिएशन से जुड़े नियमों को फॉलो करते हैं) का चुनाव करें. ये प्रॉपर्टी मैनेजर आपको प्रॉपर्टी संबंधी सही अधिकार और ज़िम्मेदारियों के बारे में बताएंगे, ताकि डील करते समय आपके साथ किसी तरह की कोई धोखाधड़ी न हो. ये मैनेजर्स आपके बजट और रिक्वायरमेंट के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपकी मदद करेेंगे.

मार्केट के उतार-चढ़ाव को जानें:
लोकेशन का चुनाव करने के बाद मार्केट के उतार-चढ़ावों का समझदारी के साथ अध्ययन करें. उस एरिया के प्रॉपर्टी मैनेजर और लोकल एजेंट से मिलकर सारी जानकारियां हासिल करें. लेकिन 1-2 व्यक्तियों से ही नहीं, बल्कि रियल इस्टेट/प्रॉपर्टी के बिज़नेस से जुड़े अन्य लोगों से मिलकर उस प्रॉपर्टी के बारे में कुछ जानकारियां हासिल करें. इंटरनेट पर भी आप उस एरिया/लोकेशन की प्रॉपर्टी की क़ीमत, औसत किराया और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त नेट पर उनके फ्री कॉन्टैक्ट नंबर भी दिए रहते हैं, जिन पर डायल करके आप उनसे मार्केट और प्रॉपर्टी के बारे में पूछ सकते हैं.

अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में जानकारी हासिल करें:
डील फाइनल करने से पहले प्रॉपर्टी से जुड़े अन्य ख़र्चों के बारे में सारी जानकारियां प्राप्त कर लें. ये अन्य ख़र्च हैं- लैंड टैक्स, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट टैक्स, काउंसिल रेट्स, डेवलपमेंट टैक्स और इंश्योरेंस आदि. डील फाइनल होने के बाद इन ख़र्चों का भुगतान आपको ही करना पड़ेगा. इसलिए प्रॉपर्टी मैनेजर/ब्रोकर से इन अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में सही जानकारी ले लें.

जांच-पड़ताल करें:
यदि आप पुरानी प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ख़रीदने से पहले प्रॉपर्टी डीलर या मैनेजर से सारी बातें पूछ लें यानी प्रॉपर्टी संबंधी दस्तावेज़ों के बारे में अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें. हो सकता है प्रॉपर्टी की ओनरशिप (स्वामित्व) लेने से पहले आपको उसे रिपेयर या रिनोवेट कराना पड़े. इसलिए पुरानी प्रॉपर्टी को ख़रीदने से पहले किसी प्रोफेशनल बिल्डिंग इंस्पेक्टर को हायर करें और उससे बिल्डिंग संबंधी पूरी जानकारी हासिल कर लें. तभी प्रॉपर्टी के पर्चेेज़ कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करें. ऐसा करके आप प्रॉपर्टी पर होनेवाले अनावश्यक ख़र्चे से बच सकते हैं.

अच्छे बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें:
यदि आपको प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए किसी फाइनेंसर की ज़रूरत है, तो उसके लिए अपने एरिया के प्रतिष्ठित बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें, जो लोन दिलाने में आपकी मदद करें. रियलटर्स भी एक बेस्ट ऑप्शन हैं, जो लोन दिलवाने में आपकी मदद करते हैं. इसके अलावा आप किसी अन्य इन्वेस्टर्स या बैंकों से भी फाइनेंशियल मदद (लोन) ले सकते हैं. आजकल नेशनलाइज़्ड बैंक ही नहीं, प्राइवेट बैंक भी होम लोन की सुविधा अपने कस्टमर्स को उपलब्ध कराते हैं, वो भी आकर्षक ऑफर्स के साथ.

होमलोन संबंधी जानकारियां:
प्रॉपर्टी के लिए लोन लेने से पहले विभिन्न बैंकों से ब्याज दर, समयावधि, टैक्स बेनीफिट्स आदि के बारे में सारी जानकारियां हासिल कर लें. आजकल बैंक अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए होमलोन पर सस्ती ब्याज दर पर ङ्गस्पेशल स्कीमम जैसे ऑफर देते हैं, जिससे उन्हें टैक्स में भी फ़ायदा मिले.
डीलर से ही नहीं, ऑक्शन साइट्स में जाकर देखें: अब वह समय बीत गया, जब प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए ख़रीददार को प्रॉपर्टी डीलर/एजेंट के कई चक्कर लगाने पड़ते थे. टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव को प्रॉपर्टी के बिज़नेस में भी देखा जा सकता है. ऑनलाइन वेबसाइट्स के ज़रिए भी आप अपनी मनपसंद प्रॉपर्टी ख़रीद सकते हैं. आजकल कई ऑनलाइन रियल इस्टेट ऑक्शन साइट्स हैं, जो प्रॉपर्टी की ख़रीद-फरोख़्त करती हैं. इन साइट्स पर लॉग इन करके आप अपने मनपसंद एरिया/लोकेशन में जाकर सारी आवश्यक जानकारी हासिल कर सकते हैं.

प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले
– निवेश करने के लिए ऐसी प्रॉपर्टी का चुनाव करें, जिसे भविष्य में यदि बेचना पड़े, तो अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना हो.

– यदि आप दूर-दराज़ के इलाकों में प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं, तो फ्रॉड से बचने के लिए सारे काग़ज़ी दस्तावेज़ों को अच्छी तरह से जांच-परख लें.

– याद रखें, प्रॉपर्टी के बिज़नेस में क़ीमतें मार्केट के उतार-चढ़ाव के अनुसार बढ़ती और घटती हैं. इसलिए प्रोफेशनल लोगों से सलाह लिए बिना न तो प्रॉपर्टी में निवेश करें और न ही बेचें.

– प्रॉपर्टी केवल ड्रीम होम ही नहीं होता, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया निवेश होता है, प्रॉपर्टी ख़रीदते समय इमोशनल होने की बजाय समझदारी से काम लें.

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