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मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

 

Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

क्या आप मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर डायटिंग के नाम पर अपने शरीर को टार्चर कर रहे हैं, फिर भी आपका मोटापा कम नहीं हो रहा है, तो एक नज़र अपनी लाइफस्टाइल संबंधी आदतों पर डालिए. जी हां, आपके मोटापे का एक अन्य और महत्वपूर्ण कारण है रात की   ग़लत आदतें, जो आपके मोटापे को कम नहीं होने देती हैं. आइए जानें, कैसे?

1 क्या आप हैवी डिनर करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि आपकी इस आदत से आपका मोटापा बढ़ सकता है? आपकी यह आदत आपको अपने फिटनेस गोल से भटका सकती है? अगर फिट रहना चाहते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डालिए. सुबह के समय हम अधिक एक्टिव रहते हैं. शाम होने पर थकावट के कारण शरीर का एनर्जी लेवल कम होने लगता है, जिसके कारण शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है. पर हैवी डिनर करने से पाचन तंत्र पर अनावश्यक लोड बढ़ने लगता है, जिसके कारण अतिरिक्त कैलोरी अतिरिक्त फैट में बदलने लगती है और धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है.

2 क्या आप टीवी देखते हुए खाना खाते हैं?

अधिकतर लोगों को टीवी के सामने बैठकर भोजन करना अच्छा लगता है. यह जानते हुए कि उनकी इस आदत से न स़िर्फ ओवरईटिंग होती है, बल्कि मोटापा भी बढ़ता है. अमेरिकन जनरल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन (2013) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खाने के प्रति जागरूक न होने पर आप ज़रूरत से ज़्यादा खा सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा. अगर अपना ध्यान खाने पर केन्द्रित करके खाते हैं, तो आप निश्‍चित तौर पर कम खाएंगे. यदि टीवी देखते हुए खाते हैं, तो आप खाने के स्वाद को दिमाग़ी तौर पर महसूस नहीं कर पाएंगे और ओवरइंटिंग कर लेंगे.

3 रात के समय आप क्या खाते हैं?

मोटापा इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप कितना (कम/ज़्यादा) खाते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि रात के समय आप किस तरह का खाना खाते हैं यानी आपकी फूड चॉइस पर निर्भर करता है. अगर आप रात को क्रीम बेस्ड सूप और ग्रेवी, फ्राइड फूड, डेज़र्ट आदि खाते हैं, तो पचने में थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए रात के समय हाई कैलोरी फूड का सेवन नहीं करना चाहिए.

4 क्या आप डिनर के बाद ब्रश नहीं करते हैं?

डिनर के बाद ब्रश करना बहुत बोरिंग काम है. अपनी इस आदत से आप ख़ुद को न केवल अतिरिक्त स्नैक्स खाने से रोक सकते हैं, बल्कि मोटापा भी कंट्रोल कर सकते हैं. डायटीशियन्स के अनुसार, डिनर के बाद ब्रश करने की आदत से आप पोस्ट डिनर स्नैकिंग से बच सकते हैं. बहुत से लोग डिनर के बाद डेज़र्ट और कैलोरीवाले फूड खाते हैं, चाहे उन्हें भूख न हो तो भी. ब्रश करने के बाद वे ख़ुद को ऐसी चीज़ें खाने से रोक सकते हैं, क्योंकि ब्रशिंग जैसा बोरिंग काम दोबारा नहीं करना चाहते. परिणामस्वरूप मोटापा नहीं बढ़ेगा.

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5 खाने के बाद क्या आप वॉक पर नहीं जाते हैं?

अगर नहीं जाते हैं, तो जाना शुरू करें. एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप रात को खाने के बाद वॉक करते हैं या फिर 5 मिनट तक वज्रासन में बैठते हैं, तो निश्‍चित रूप से आपका वज़न नियंत्रित रहेगा. यदि आप अपनी पाचन प्रक्रिया और मेटाबॉलिज़्म में सुधार करना चाहते हैं, तो डिनर के बाद वॉक ज़रूर करें. इससे आपका मोटापा नियंत्रित रहेगा और आपका मूड भी फ्रेश होगा.

6 क्या आप रात को मोबाइल या लैपटॉप पर व्यस्त रहते हैं?

अधिकतर लोगों में यह आदत होती है सोने से पहले मोबाइल-लैपटॉप पर अपने ईमेल चेक करना, अगले दिन की टु डू लिस्ट बनाना, अगले प्रोजेक्ट या असाइनमेंट का ड्राफ्ट तैयार करना आदि, जिसकी वजह से अनावश्यक रूप से तनाव बढ़ता है. अधिक तनाव होने से कार्टिसोल नामक हार्मोन का उत्पादन होता है. इस हार्मोन में ऐसे गुण होते हैं कि तनाव की तीव्रता स्वत: ही बढ़ जाती है, जिसके कारण फैट के स्तर में वृद्धि होने लगती है. इसके अलावा कार्टिसोल मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिसके कारण खाना सही तरह से नहीं पचता है और मोटापा बढ़ने लगता है.

7 क्या आप रात को देर से सोते हैं?

देर रात तक जागने से मंचिंग करने के चांस काफ़ी बढ़ जाते हैं. मंचिंग के दौरान भूख बढ़ानेवाले हार्मोंस (घ्रेलीन- जिसे हंगर हार्मोन भी कहा जाता है) का स्तर बढ़ जाता है और वो स्ट्रेस बढ़ानेवाले हार्मोंस (लेप्टिन) के स्तर को कम करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते वर्कलोड के कारण अधिकतर लोग रात को देर से खाना खाते हैं, जिससे उनके शरीर का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने लगता है और धीरे-धीरे मोटापा हावी होने लगता है.

8 क्या आप सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं

रात को सोने से पहले कुछ लोग एंटीडिप्रेशन और सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है. अगर आप अपने मोटापे को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो इन दवाओं को अपनी मर्ज़ी से बंद न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करके इनके डोज में बदलाव करें. ऐसी कोई एक मेडिसिन नियमित रूप से न खाएं, जिसका कोई साइड इफेक्ट हो.

9 क्या आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं?

पर्याप्त नींद न लेना और आवश्यकता से अधिक नींद लेने से मोटापा बढ़ता है. इसका कारण है कि आपका शरीर कैलोरी को बर्न करने में सक्षम नहीं है. अगर आप 7-8 घंटे से कम सोते हैं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा सोते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका मेटाबॉलिज़्म ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है.

हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग केवल 6 घंटे की नींद लेते हैं, उनका वज़न, उन लोगों की तुलना में अधिक होता है, जो 8-10 घंटे की पर्याप्त नींद लेते हैं. जो लोग 6 या 6 से कम घंटे सोते हैं, उनमें मोटापे के लक्षण दिखाई देते हैं. इसके अलावा पूरी नींद न लेने के कारण डायबिटीज़ और इंसोम्निया के होने की संभावना भी बढ़ जाती है.

10 क्या आप कैफीन या अल्कोहल का सेवन करते हैं?

अगर आप रात के व़क्त कैफीन और अल्कोहल का सेवन करते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत सुधार लें. आपकी यह आदत धीरे-धीेरे आपके बढ़ते वज़न की ओर संकेत करती है. कैफीन और अल्कोहल में बहुत अधिक कैलोरी होती है. इनका सेवन करने से नींद में रुकावट आती है. नींद में बाधा आने के कारण मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और शरीर में अतिरिक्त फैट जमने लगता है.

रात को जल्दी खाने के फ़ायदे

  • लंच और डिनर के बीच में बहुत अधिक अंतर होने के कारण भूख अधिक लगती है. इस अंतराल को कम करें. टी टाइम में स्नैक्स खाएं.
  • डिनर के दौरान टीवी न देखें, क्योंकि टीवी देखते हुए ओवरईटिंग की संभावना बढ़ जाती है.
  • कोशिश करें कि डिनर रात 9 बजे से पहले कर लें.
  • अगर यह संभव न हो, तो टी टाइम पर लाइट स्नैक्स लें और डिनर में हल्का भोजन करें.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिनर अवॉइड न करें. कम से कम सूप, सलाद या फ्रूट्स ज़रूर खाएं.
  • डिनर बैलेंस्ड लेकिन लाइट होगा, तो अगले दिन भी आप फ्रेश महसूस करेंगे.
  • डिनर में लो कार्ब और हाई प्रोटीन फूड लें. इन्हें पचने में अधिक समय लगता है.
  • लगातार कई दिनों तक डिनर में फ्राइड फूड और डेज़र्ट न लें. अगर इन्हें खाने की बहुत अधिक क्रेविंग हो, तो सुबह नाश्ते में लें.
  • डिनर के बाद तुरंत सोने की बजाय 5 मिनट वज्रासन में ज़रूर बैठें.
  • रात के समय चाय, कॉफी और चॉकलेट के सेवन से बचें.
  • इसकी बजाय गरम दूध में इलायची पाउडर डालकर पीएं.

– देवांश शर्मा

सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

Healthy Eating

अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

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चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

Healthy Eating

जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

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मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

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ज़मीन पर बैठकर खाने के 9 फ़ायदे (Health Benefits of Sitting on the Floor while Eating)

डायनिंग टेबल पर नहीं…जमीन पर बैठकर खाइए. आजकल घर में डायनिंग टेबल का होना ज़रूरी माना जाता है. घर में डायनिंग सेट के लिए ख़ास जगह बनाई जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं, कुर्सी पर बैठकर भोजन करने से कहीं बेहतर है ज़मीन पर आराम से बैठकर खाना खाना. इसका कनेक्शन हेल्थ से भी है.

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जमीन पर बैठकर खाने के हैं कई फ़ायदे

अच्छे पाचन के लिए

– जब ज़मीन पर बैठा जाता है, तो पैरों को क्रॉस करके बैठा जाता है. ये एक तरह का योगासन है. पालथी मारकर बैठना सुखासन या अर्ध पद्मासन की तरह होता है. योग में इस आसन को पाचन के लिए अच्छा माना जाता है. ऐसी धारणा है कि जब आप इस आसन में खाने के समक्ष बैठते हैं, तो मस्तिष्क में आहार को पचाने का सिग्नल जाता है.
– नीचे बैठकर खाने से मुंह में कौर लेने के लिए पहले खाने की ओर थोड़ा झुकना पड़ता है, फिर निगलने के लिए पुरानी स्थिति में आया जाता है. बार-बार ये प्रकिया करने से पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और खाना पचानेवाले एसिड्स का स्राव भी तेज़ी से होता है, जिस वजह से पाचनतंत्र आसानी से अपना कार्य करता है.

ह्रदय को मज़बूत बनाता है

– बैठकर खाने से रक्त का संचार आसानी से होता है.
– ह्रदय आसानी से रक्त का संचार आहार पचाने में मदद करनेवाले अंगों तक पहुंचा पाता है. इससे ह्रदय पर कोई भार नहीं पड़ता और ह्रदय स्वस्थ रहता है.
– डायनिंग टेबल पर बैठकर खाने से रक्त का संचार पैरों की ओर भी होता है, जबकि खाते व़क्त पैरों को इसकी ज़रूरत नहीं होती.
– ज़मीन पर आराम से बैठकर खाना खाने से हार्ट अटैक का ख़तरा भी कम रहता है.

ओवरईटिंग से बचाता है

– नीचे बैठकर खाने से आप ज़्यादा खाने से बच सकते हैं.
– सुखासन में बैठने से दिमाग़ शांत रहता है और भोजन पर ध्यान केन्द्रित रहता है.
– पेट से दिमाग़ तक संदेश पहुंचानेवाली वेगस नस दिमाग़ को तुरंत एहसास करा देती है कि पेट भर गया है.
– ओवरईटिंग न करने से वज़न भी नियंत्रण में रहता है.

कैलोरी पर रहती है नज़र

– नीचे बैठकर खाने से आप धीरे-धीरे खाते हैं. धीरे खाने की वजह से आपका पूरा ध्यान आहार पर रहता है. ऐसे में आप
सोच-समझ कर पौष्टिक और नियंत्रित मात्रा में खाना खाते हैं.
– कम खाने की वजह से कैलोरी का सेवन भी कम हो जाता है.
– साल 2007 में हुए एक रिसर्च की मानें, तो जो लोग धीरे खाते हैं, वो जल्दी-जल्दी खानेवालों की तुलना में कम कैलोरी का सेवन करते हैं.

शरीर को लचीला बनाता है

– पद्मासन में बैठने से कूल्हों, पीठ के नीचे का हिस्सा और पेट के आसपास की मांसपेशियों में खिचाव होता है.
– रोज़ाना इन मांसपेशियों में खिंचाव होने से शरीर लचीला बनता है.

जोड़ों के लिए फ़ायदेमंद

– जमीन पर बैठने से घुटने, टखने और कूल्हे के जोड़ लचीले बनते हैं.
– जब जोड़ों में लचीलापन आता है, तो जोड़ों के बीच चिकनाई भी बनी रहती है, जिससे उठना-बैठना आसान हो जाता है.
– आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों की बीमारी से बचाव होता है.

बैठने के तरी़के को सुधारता है

– इससे आसन सुधरता है.
– जमीन पर बैठते व़क्त आसन अपने आप सही रहता है, क्योंकि पीठ और रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है. इससे आप ग़लत तरी़के से बैठने से लगनेवाली चोट और उसके दर्द से बचे रहते हैं.
– मांसपेशियों और जोड़ों पर ज़रूरत से ज़्यादा तनाव भी नहीं पड़ता.

दिमाग़ भी रहता है स्वस्थ

सुखासन में बैठने से दिमाग़ तनावमुक्त रहता है, क्योंकि ये आसन मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांत करता है.

ज़मीन पर खाने से बढ़ती है उम्र

सुनने में भले ही अजीब लगे, पर यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में छपी एक स्टडी के मुताबिक़, जो लोग ज़मीन पर बैठकर खाना खाने के बाद आसानी से बिना किसी का सहारा लिए उठ जाते हैं, वो लोग ज़्यादा जीते हैं, क्योंकि वो शारीरिक तौर पर मज़बूत होते हैं और उनका शरीर लचीला होता है.

आयुर्वेद के मुताबिक़, शांत दिमाग़ से खाया गया आहार जल्दी पचता है और भोजन स्वादिष्ट भी लगता है.

 

चम्मच से नहीं, हाथ से खाइए (The Benefits of Eating With Your Hands)

वेस्टर्न कल्चर के चलते रेस्तंरा में या दूसरी जगहों पर बिना चम्मच-कांटे के भोजन करना बैड मैनर्स माना जाता है. लेकिन अगर आपसे एक सवाल पूछा जाए कि आपको चम्मच, छुरी-कांटे से खाना आसान लगता है या हाथ से? यक़ीनन हर कोई ये बात मानेगा कि हाथ से खाना ज़्यादा आसान है. आपको बता दें हाथ से खाना स़िर्फ आसान ही नहीं, बल्कि सेहतमंद भी होता है.

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हाथ से खाने के फ़ायदे

  • हाथों से खाना उठाते व़क्त इसका स्पर्श दिमाग़ को अलर्ट कर देता है और मस्तिष्क पहले ही खाना पचाने के लिए पेट को संकेत दे देता है, जिससे पेट गैस्ट्रिक जूस रिलीज़ करना शुरू कर देता है और खाना ठीक से पचता है.
  • चम्मच से खाने पर माइंडफुल ईटिंग नहीं हो पाती, क्योंकि खाने से ज़्यादा ध्यान चम्मच पर होता है. जबकि हाथ से खाने पर ध्यान अपने कौर और खाने पर होता है, जिसे देखकर ही पेट भरने का एहसास होने लगता है.
  • अमेरिका में हुई एक रिसर्च के मुताबिक़, हाथ से खाने से संतुष्टि मिलती है और ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. ओवरईटिंग न करने से मोटापा भी नहीं बढ़ता.
  • हाथ से खाने से जीभ जलने का ख़तरा नहीं रहता, क्योंकि हाथ से कौर उठाते व़क्त अंदाज़ा लग जाता है कि खाना कितना गर्म है, जबकि चम्मच से यह संकेत दिमाग़ तक नहीं पहुंचता.

ध्यान दें

खाने से पहले और बाद में हाथों को पानी और साबुन या एंटीबैक्टीरियल हैंड वॉश से अच्छी तरह से धो लें.

आयुर्वेद में हाथ से भोजन करना सेहत की दृष्टि से अच्छा माना गया है

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर पंच तत्वों से बना है- पृथ्वी, वायु, आकाश, जल व अग्नि. इनमें होनेवाला असंतुलन शरीर में कई बीमारियों का कारण बन सकता है. हाथ से कौर बनाते समय जो मुद्रा बनती है, उससे शरीर में इन पांचों तत्वों का संतुलन बरक़रार रहता है और शरीर की एनर्जी
बनी रहती है.