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व्रत का सेहत पर असर (Fasting: Health Benefits And Risks)

व्रत (Fasting) को आमतौर पर श्रद्धा और भक्ति से जोड़कर देखा जाता है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यह सोचकर व्रत रखते हैं कि इसी बहाने उनका वज़न कम हो जाएगा. लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता है कि व्रत रखना सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है. चूंकि छठ के अवसर पर कई महिलाएं उपवास रखती  हैं. इसलिए पर आपको उपवास के हेल्थ बेनेफिट्स (Health Benefits) बता रहे हैं.

Fasting

चर्बी कम होती है
फास्टिंग वज़न कम करने का सुरक्षित तरीक़ा है. बहुत से अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि इंटरमीडिएंट फास्टिंग यानी कुछ घंटों के लिए भोजन ग्रहण नहीं करने पर हमारा शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए शुगर की बजाय शरीर में एकत्रित फैट का प्रयोग करता है,जिससे शरीर की चर्बी कम होती है.

इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है
उपवास रखने से शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है, जिससे हमारा शरीर शुगर को बेहतर तरी़के इस्तेमाल करता है. एक अध्ययन से इस बात की पुष्टि हुई है कि कुछ दिनों तक व्रत रखने से इंसुलिन ब्लड में मौजूद ग्लूकोज़ को बेहतर तरी़के से ऊर्जा में परिवर्तित करता है.

मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है
उपवास या व्रत रखने से हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है, जिसका सकारात्मक असर हमारे मेटाबॉलिज़्म पर पड़ता है और हमारा शरीर कैलोरीज़ को बेहतर तरी़के से बर्न करता है. अगर हमारा पाचनतंत्र कमजोर होता है, तो इसका हमारे शरीर के फैट बर्न करने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उपवास पाचनक्रिया को बेहतर बनाता है , जिससे पेट स्वस्थ रहता है.

उम्र बढ़ती है
आप चाहे विश्‍वास करें या न करें, लेकिन नियमित अंतराल पर उपवास रखने से उम्र बढ़ती है. जो लोग कम खाते हैं, वे ज़्यादा दिनों तक जीते हैं. बहुत से अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि खान-पान किस तरह हमारे उम्र को प्रभावित करता है. हम जितना कम खाते हैं, हमारा पाचनतंत्र उतना ही मजबूत बना रहता है.

भूख में सुधार
इस बारे में ज़रा ध्यान से सोचिए. अगर आप हर 2-3 घंटे पर कुछ खाते रहेंगे तो क्या आप वास्तविक भूख को महसूस कर पाएंगे? नहीं ना. वास्तव में भूख को महसूस करने के लिए कम से कम 8 से 10 घंटे खाली पेट रहने की आवश्यकता होती है. व्रत हमारे शरीर के हार्मोन्स को नियंत्रित करता है, जिससे असली भूख का सही एहसास होता है. कहने का अर्थ यह है कि व्रत रीसेट बटन की तरह कार्य करता है. हम जितने अधिक समय तक उपवास रखते हैं, हमारे शरीर को हार्मोन्स को नियंत्रित करने का उतना अधिक समय मिलता है, जिससे सही भूख का पता चलता है. इतना ही नहीं, जब शरीर के हार्मोन्स सही तरी़के से काम करते हैं, तो पेट जल्दी भर जाता है और मस्तिष्क को सही सिग्नल्स मिलते हैं.

खान-पान में सुधार आता है
जो लोग बिंज़ ईटिंग के शिकार होते हैं या जो काम या दूसरी ज़िम्मेदारियों के कारण खाने-पीने में लापरवाही बरतते हैं और किसी भी समय कुछ भी खा लेते हैं, उन्हें व्रत रखना चाहिए. उपवास करने से खान-पान की आदतें सुधरती हैं और व्यक्ति तय समय पर फलाहार या जूस इत्यादि लेता है. इसलिए यदि आप बिंज ईटिंग से छुटकारा पाना चाहते हैं तो व्रत रखें और तय समय पर ही कुछ ग्रहण करें. इससे काफ़ी फ़ायदा होगा.

दिमाग़ सही तरी़के से काम करता है
व्रत रखने से मस्तिष्क की कार्य प्रणाली में सुधार आता है, क्योंकि इससे ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक नामक प्रोटीन का उत्पादन बढ़ जाता है. यह प्रोटीन ब्रेन स्टेम सेल्स को न्यूरॉन्स में परिवर्तित करता है, जिससे मस्तिष्क बेहतर तरी़के से काम करता है.

रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
व्रत रखने से हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, क्योंकि यह फ्री रेडिकल्स डैमेज को कम करता है, इंफ्लेमेटरी कंडिशन को कम करता है और कैंसर सेल्स के निर्माण को रोकता है. यही वजह है कि जब जानवर बीमार पड़ते हैं तो खाना छोड़ देते हैं और आराम करते हैं. इससे शरीर की आंतरिक प्रणाली को आराम मिलता है और शरीर इंफेक्शन से बेहतर तरी़के से लड़ पाता है. जबकि इसके ठीक विपरीत जब मनुष्य बीमार पड़ते हैं तो स्वस्थ होने के लिए वे खाने पर ज़्यादा जोर देने लगते हैं.

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आत्मज्ञान का एहसास होता है
व्रत हमें जीवन को और क़रीब से समझने का मौक़ा देता है और इस दौरान हमारा ध्यान पढ़ने, योग व मेडिटेशन इत्यादि की ओर जाता है. जब हमारे पेट में खाना नहीं होता है तो पाचनतंत्र को खाना पचाने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती. जिससे ऊर्जा बचती है और हम ज़्यादा ऊर्जावान महसूस करते हैं. व्रत रखने से हम शारीरिक और मानसिक रूप से ज़्यादा स्वस्थ महसूस करते हैं. शरीर जितना हल्का होता है, दिमाग़ उतना ही चुस्त-दुरुस्त रहता है और हम अपने आस-पास की चीज़ों के प्रति उतने ही जागरूक होते हैं.

त्वचा में चमक आती है
एक दिन खाना ग्रहण नहीं करने पर शरीर से विषाक्त पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे त्वचा में चमक आती है और लिवर, किडनी व अन्य अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है.

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व्रत से नुकसान भी
1 कई बार हम उपवास में फलाहार के चक्कर में ज़रूरत से ज़्यादा भोजन कर लेते हैं. इस भोजन को पचाने के लिए शरीर को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इस वजह से उपवास के समय अन्य कामों के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती.
2 उपवास आपके गुर्दों को प्रभावित कर सकता है व गुर्दे की पथरी का कारण भी बन सकता है. इस समस्या से बचने के लिए हमें पर्याप्त पानी (तरल पदार्थ) पीना चाहिए ताकि कैल्शियम तथा इस तरह के संबद्ध पोषक तत्व जमा ना हो सकें.
3 मधुमेह, उच्च रक्तचाप या ख़ून की कमी से पीड़ित लोगों को व्रत रखने से कुछ परेशानियां हो सकती हैं.
सावधानी
1 व्रत के दुष्प्रभावों से बचने के लिए हम नींबू पानी, पाइनेप्पल का रस, नारियल पानी, विटामिन ए से युक्त फल आदि भी ले सकते हैं.
2 बहुत ज़्यादा चाय या कॉफी, बर्फी या लड्डू जैसी मिठाइयां लेने से
बचना चाहिए.
3 गुर्दे, हृदय, जिगर या फेफड़ों से संबंधित दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को झेल रहे व्यक्तियों को केवल डॉक्टरों
से सहमति के बाद ही व्रत करना चाहिए.
4 गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आलू, खीर, साबूदाना, पकोड़े जैसे हैवी खाने से परहेज़ करना चाहिए, क्योंकि इस तरह का खाना खाने से वज़न बढ़ सकता ह

जानिए कितना फ़ायदेमंद है उपवास? (Know Benefits of Fasting)

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप उपवास रखते हैं तो उस दौरान आपके शरीर में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं? नहीं ना. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि व्रत रखने या कुछ घंटों तक भोजन नहीं करने पर हमारा शरीर किस तरह रिएक्ट करता है और इसके क्या फायदे हैं?

Benefits Of Fasting

शुगर ब्रेकडाउन
आमतौर उपवास के पहले कुछ घंटे बेहद सामान्य होते हैं. उस दौरान हमारा शरीर सामान्य प्रक्रिया दोहराते हुए ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लाइकोजेन को ब्रेक करके ग्लूकोज़ रिलीज़ करता है. इस ग्लूकोज़ का 25 फ़ीसदी इस्तेमाल मस्तिष्क करता है और बचे हुए ग्लूकोज़ का प्रयोग लाल रक्त कोशिकाएं और मांसपेशियां करती हैं.

कीटोसिस
उपवास के 5-6 घंटे बाद हमारा शरीर कीटोसिस लेवल पर पहुंच जाता है. यह एक प्रकार का मेटाबॉलिक स्टेट है. इस दौरान हमारा शरीर रक्त में मौजूद कीटोन बॉडीज़ से ऊर्जा प्राप्त करता है. कीटोन बॉडीज़ वॉटर-सॉल्यूबल मॉलिक्यूल्स हैं. जब हम खाना नहीं खाते या बहुत कम खाते हैं तो उस दौरान हमारा लिवर इनका उत्पादन करता है. यह चर्बी गलने की प्रक्रिया है. इस दौरान असली उपवास शुरू होता है और वज़न कम होने की प्रक्रिया भी. कीटोजेनिक डायट का पालन करके भी आप इस स्थिति तक पहुंच सकते हैं.

Benefits Of Fasting
कोलेस्ट्रॉल और यूरिक एसिड की सफ़ाई
कीटोसिस प्रक्रिया के दौरान शरीर में बहुत-सी दूसरी चीज़ें भी होती हैं. इस दौरान शरीर डिटॉक्स होता है और हमारा शरीर रक्तमें कोलेस्ट्रॉल और यूरिक एसिड रिलीज़ करता है. इस दौरान व्यक्ति को सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द व स्किन रैश जैसी समस्याएं होती हैं. यह प्रक्रिया ख़त्म होते-होते दर्द कम हो जाता है और ब्लड प्रेशर भी घट जाता है. कहने का अर्थ है कि इस स्टेज में शरीर की आंतरिक सफ़ाई होती है और कोलेस्ट्रॉल लेवल कम हो जाता है.

पाचन तंत्र को आराम मिलता है
चूंकि हम कुछ नहीं खाते या बहुत कम खाना खाते हैं, इसलिए हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है. चूंकि पाचन प्रक्रिया को पूरा होने में समय लगता है, इसलिए उपवास के दौरान भी यह पूरी तरह रुकता नहीं है.

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इमोशनल डिटॉक्स
छह घंटे उपवास करने के बाद हमें सामान्यतः भूख लगनी शुरू हो जाती है, जिसके कारण ग़ुस्सा, थकान, मायूसी इत्यादि भावनाएं हावी होने लगती हैं. इन भावनाओं पर क़ाबू करना ज़रूरी है. बेहतर होगा कि इस दौरान अपना ग़ुस्सा किसी दूसरे पर न निकालें और बार-बार खाने पर ध्यान लगाने की बजाय मेडिटेशन करें. कोई ऐसी एक्टिविटी न करें, जिसमें ज़्यादा मेहनत लगती हो.

उपवास के प्रकार
इंटर्मिटेंट (अनिरंतर) फास्टिंगः इस तरह का उपवास वज़न कम करने की कोशिश में जुटे लोग करते हैं. इसमें दिनभर में कुछ घंटों के लिए खाने की अनुमति होती है और बाकी बचे हुए समय में व्रत रखना पड़ता है. इससे हम कम कैलोरीज़ ग्रहण करते हैं और फालतू में दिनभर मुंह चलाने से बच जाते हैं.
प्रोलॉन्ग्ड फास्टिंगः इस प्रकार के उपवास में स़िर्फ जूस या पानी पीने की अनुमति होती है, लेकिन इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें, ताकि आपको पता चल सके कि आपका शरीर इतने ज़्यादा समय तक भूखे रहने की स्थिति में है या नहीं और यह आपके लिए कितना सुरक्षित है.
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