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रिश्तों की बीमारियां, रिश्तों के टॉनिक (Relationship Toxins And Tonics We Must Know)

रिश्ते (Relationships) जीने के आधार हैं… मुहब्बत की शीतल बयार हैं, पर जब इन्हीं रिश्तों में शक, ईर्ष्या, अविश्‍वास की बीमारियां फैलने लगती हैं, तब जीना दूभर हो जाता है. तो क्यों न प्यार, विश्‍वास, समझदारी जैसे टॉनिक से इन बीमारियों को दूर किया जाए और रिश्तों में मुहब्बत की मिठास घोली जाए.

Relationship Toxins And Tonics

आज जहां एक ओर दुनिया सिमट रही है, वहीं दूसरी ओर रिश्ते और परिवार टूट रहे हैं. एक-दूसरे के प्रति हमारी संवेदनाएं कम होती जा रही हैं. हमारी व्यस्तताएं, हमारे अवसादों की छाया हमारे रिश्तों पर दिखने लगी है. नतीज़तन रिश्ते अपना औचित्य, अपनी गरिमा खोते जा रहे हैं. इन सबके बीच हम यह भूल जाते हैं कि स्वस्थ रिश्ते एक परिपक्व समाज की दरक़ार हैं. इसलिए सबसे ज़रूरी यह है कि हम यह जानें कि हमारे रिश्ते किन बीमारियों से जूझ रहे हैं यानी वे कौन-सी भावनात्मक बीमारियां हैं, जो रिश्तों को खोखला कर रही हैं. साथ ही रिश्तों से जुड़े उन पहलुओं के बारे में भी जानें, जो रिश्तों की इन बीमारियों को दूर करने में टॉनिक का काम करती हैं.

रिश्तों की बीमारियां

शक और अविश्‍वास

जी हां, रिश्ते की सबसे बड़ी व भयंकर बीमारी है शक. किसी भी रिश्ते में ख़ासकर पति-पत्नी के रिश्ते में अगर शक पनपने लगे, तो समझ लीजिए कि आपके रिश्ते को आई.सी.यू. की ज़रूरत है. शक या संशय के साथ किसी भी रिश्ते को ़ज़्यादा दिनों तक नहीं निभाया जा सकता. आप जिस व्यक्ति या रिश्ते पर शक कर रहे हैं, उससे आप कभी प्रेम या जुड़ाव नहीं कर पाएंगे. यदि आप किसी रिश्ते से बंधे हैं, तो आपको चाहिए कि उसे पूरे दिल से स्वीकार करें. यदि आपको किसी पर अविश्‍वास है, तो इसका मतलब है कि आपके रिश्ते में खटास है और उस रिश्ते को आपने पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है. अविश्‍वास किसी भी रिश्ते के लिए घातक है. फिर चाहे बात मां-बेटी की होे, सास-बहू की या फिर ननद-भाभी की.

द्वेष या जलन

किसी से द्वेष या जलन की भावना जहां एक ओर आपको आपके प्रियजनों से दूर करती है, वहीं दूसरी ओर आपके व्यक्तित्व को भी ख़राब करती है. किसी से द्वेष या जलन की भावना बीमारी होने से ज़्यादा बुरी है. यह आदत आपके किसी एक रिश्ते को नहीं, बल्कि सारे रिश्तों को बीमार कर सकती है. आप किसी एक से जलना शुरू करेंगे और फिर धीरे-धीरे आप हर किसी से जलने लगेंगे.

बेवफ़ाई

किसी भी रिश्ते में बेवफ़ाई या बेईमानी उस रिश्ते की ज़ड़ों को ही खोखला कर देती है. किसी के विश्‍वास और प्रेम को ठेस पहुंचाकर कोई रिश्ता नहीं निभाया जा सकता.

क्रोध

क्रोध रिश्तों की उम‘ को कम करता है. क्रोध से रिश्तों में दूरियां आती हैं. क्रोधित व्यक्ति अक्सर ग़ुस्से में रिश्तों की मान-मर्यादाओं को भूल जाता है.

अभिमान या ईगो

हमेशा याद रखें कि आत्मसम्मान और ईगो दो अलग-अलग चीज़ें हैं, इसलिए रिश्ते निभाने में किसी भी ज़िम्मेदारी को ईगो या झूठी प्रतिष्ठा से न जोड़ें, जैसे- “हमेशा मैं ही क्यों फ़ोन करूं, वह क्यों नहीं फ़ोन करता या करती.” “हमेशा मैं ही क्यों माफ़ी मांगू.” आदि.

अपेक्षाएं

रिश्तों में अपेक्षाओं का होना स्वाभाविक है और रिश्ते को ज़िंदा रखने के लिए कुछ हद तक ये ज़रूरी भी है. लेकिन अपेक्षाएं जब हद से ़ज़्यादा बढ़ जाएं तो यह किसी बीमारी से कम नहीं. अपेक्षाओं का बोझ बढ़ने से रिश्ते दम तोड़ देते हैं.

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Relationship Tonics

रिश्तों के टॉनिक

प्रेम

जिस रिश्ते में निःस्वार्थ व निश्छल प्रेम है, उस रिश्ते को किसी और टॉनिक की ज़रूरत ही नहीं. जिस रिश्ते में प्रेम है, उस रिश्ते की उम‘ अपने आप बढ़ जाती है. प्रेम हर रिश्ते को ख़ुशनुमा व तरोताज़ा बनाए रखता है.

समय

रिश्तों को समय देना बहुत ज़रूरी है. आप अपने रिश्तों को कितना समय देते हैं, उससे यह तय होता है कि वह रिश्ता आपके लिए कितना मायने रखता है. एक-दूसरे के साथ, परिवार के साथ समय बिताने से रिश्तों में प्रेम व विश्‍वास बढ़ता है.

विश्‍वास

एक समृद्ध रिश्ते के लिए आपसी विश्‍वास होना बेहद ज़रूरी है. विश्‍वास दोनों तरफ़ से होना चाहिए. रिश्तों में विश्‍वास होने का मतलब है कि आपका कोई भी रिश्ता फल-फूल
रहा है.

संयम

रिश्तों को कभी-कभी विषम परिस्थितियों से भी गुज़रना पड़ता है, ऐसे में संयम बरतें. यदि कोई एक अपना विवेक खोता भी है, तो दूसरा अपना संयम बनाए रखे, ताकि आपके रिश्ते में दरार न प़ड़े.

समझदारी

किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए परिपक्व विचारों की आवश्यकता होती है. एक-दूसरे की भावनाओं और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करें. हर साझेदारी को पूरी समझदारी से निभाएं. इस तरह रिश्ते की हर छोटी-मोटी समस्या को आप समझदारी से सुलझा सकते हैं.

स्पेस

कुछ समय पहले तक शायद इस टॉनिक की ज़रूरत रिश्तों को नहीं थी, पर आज के बदलते परिवेश में इसकी ज़रूरत हर रिश्ते में है. हर रिश्ते में एक-दूसरे के स्पेस का हमें आदर करना चाहिए. एक-दूसरे के मामलों में ज़्यादा हस्तक्षेप न करें. आज हर किसी को ख़ुद के लिए कुछ स्पेस की ज़रूरत है और इसमें कुछ ग़लत नहीं है. आप अपने रिश्ते को जितनी स्पेस देंगे, उतनी ही उनमें घुटन कम होगी.

इन सबसे ़ज़्यादा ज़रूरी है कि आप में किसी रिश्ते को निभाने की दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए, ताकि आप उन रिश्तों को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयत्न कर सकें. आप जिनके साथ रिश्ता बांट रहे हैं, उनका आदर, उनकी भावनाओं का आदर, उनके व्यक्तित्व का आदर करें. किसी भी रिश्ते को  टूटने न दें, क्योंकि हर रिश्ता अनमोल है.

– विजया कठाले निंबधे

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अपने रिश्ते को बनाएं पॉल्यूशन फ्री!(Effective Tips to Make Your Relationship Pollution Free)

Tips to Make Your Relationship Pollution Free

आप कहेंगे, पॉल्यूशन (Tips to Make Your Relationship Pollution Free) तो वातावरण में होता है, भला रिश्तों में पॉल्यूशन का क्या काम… लेकिन पॉल्यूशन स़िर्फ हवा, पानी या आवाज़ का ही नहीं होता… वह भावनाओं का, विचारों का और सोच का भी होता है. जी हां, जितने भी नकारात्मक विचार व भावनाएं हैं, वो हमारे रिश्तों को प्रदूषित ही तो करते हैं. कैसे बचें इस प्रदूषण से और कैसे बचाएं अपने रिश्ते को इससे, यह जानना भी ज़रूरी है. 

Tips to Make Your Relationship Pollution Free

पॉज़िटिव सोचें

यह इंसानी फ़ितरत है कि ज़रा-सी भी कोई चूक या वजह मिलने पर हम फ़ौरन नकारात्मक सोचने लगते हैं. अगर किसी से कोई ग़लती हो गई है या कोई हमारी अपेक्षाओं के अनुसार काम नहीं कर रहा, तो हम तुरंत उसके लिए ग़लत राय कायम कर लेते हैं, जिससे उसके ख़िलाफ़ हमारे मन में और विचारों में नकारात्मकता बढ़ती जाती है. यही नकारात्मकता हमारी भावनाओं को प्रदूषित करने लगती है, जिससे हमें बचना चाहिए.

क्या करें?

– बचने का सबसे बेहतर तरीक़ा है कि अपनी सोच सकारात्मक रखें.

– किसी के बारे में मात्र चंद अनुभवों व घटनाओं को आधार बनाकर एक निश्‍चित राय कायम न कर लें.

– अपनी अपेक्षाओं का दायरा भी बहुत अधिक विस्तृत न कर लें.

– अगर आपके रिश्ते में नकारात्मक सोच का प्रदूषण घर करने लगा है, तो उसे फ़ौरन साफ़ कर लें और आगे बढ़ें, वरना भविष्य में यह रिश्ते को भी प्रदूषित कर देगा.

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ग़ुस्से को नियंत्रित करें

ग़ुस्सा करना या क्रोध आना इंसानी कमज़ोरी है और यह स्वाभाविक भी है. हम सभी को ग़ुस्सा आता है, लेकिन अपने ग़ुस्से को कब, कहां और कैसे ज़ाहिर करना है और कैसे नियंत्रित करना है यह हमें सीखना होगा.

क्या करें?

– ग़ुस्से में अक्सर हम अपने क़रीबी को भी ऐसे अपशब्द कह जाते हैं, जो लंबे समय तक दर्द देते हैं. इसलिए जब भी ग़ुस्सा आए, तो बहस करने से बेहतर है चुप रहकर वहां से हट जाएं.

– मन ही मन यह तय कर लें कि चाहे कितने भी ग़ुस्से में हों आप, लेकिन दिल को चोट करनेवाले शब्द कभी भी अपने पार्टनर को नहीं कहेंगे.

– जब भी आपको लगने लगे कि ग़ुस्सा आप पर हावी होने जा रहा है, तो अपना ध्यान कहीं और लगाएं. ग़ुस्से में आपा खोकर अपने रिश्ते में कड़वाहट का प्रदूषण घोलने से बेहतर है कि आप विवाद को ज़्यादा तूल न दें और अपना ध्यान कहीं और लगाएं.

– ग़ुस्सा आने पर आप ध्यान या योग करें, पानी पीएं या फिर गाने सुनें. इससे क्षणिक आवेग शांत हो जाएगा और आप अपने रिश्ते को इस प्रदूषण से बचा पाएंगे.

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शक-संदेह

किसी भी रिश्ते के लिए शक-संदेह का प्रदूषण बेहद ख़तरनाक होता है. यह एक बार मन को प्रदूषित कर दे, तो रिश्ते की डोर कमज़ोर पड़ती जाती है. बेहतर है कि समय रहते इसकी सफ़ाई कर दी जाए या इसे आने ही न दिया जाए.

क्या करें?

– सबसे अच्छा तरीक़ा है बात करें. अक्सर कम्यूनिकेशन गैप की वजह से ही इस तरह की चीज़ें मन में आ जाती हैं.

– अपनी कल्पना से ही स्थिति की वास्तविकता का अंदाज़ा न लगाएं. बेहतर होगा कि किसी भी तरह की ग़लतफ़हमी मन में पालने से पहले उसके बारे में पार्टनर से बात करें.

– बिना बात किए यदि आप यह तय कर लेंगे कि जो कुछ भी आप सोच व समझ रहे हैं, वो ही सही है, तो यह आपके मन में शक के प्रदूषण को और भी गहरा करेगा.

– अपने पार्टनर को भी सफ़ाई देने का व अपनी बात रखने का मौक़ा ज़रूर दें.

 

ईगो

रिश्ते में प्यार-समर्पण और अपनापन बनाए रखने के लिए ईगो जैसी भावना को त्यागना बेहद ज़रूरी है. यूं भी जब हम किसी को प्यार करते हैं, तो अहं की कोई जगह नहीं रह जाती बीच में. लेकिन अक्सर हमारा अहं हमारे लिए इतना बड़ा व महत्वपूर्ण हो जाता है कि अच्छे-ख़ासे रिश्ते को भी प्रदूषित कर देता है.

क्या करें?

– चिंतन करें. यदि आप स्वाभाविक रूप से ईगोइस्ट हैं, तो चिंतन और ज़रूरी हो जाता है कि आपके लिए महत्वपूर्ण क्या है? आपका रिश्ता या आपका ईगो?

– ख़ुद को सबसे बड़ा समझना हमारी सबसे बड़ी ग़लती होती है. जब हम एक से दो होते हैं, तो हमसे बड़ा हमारा रिश्ता हो जाता है.

– अपने रिश्ते के महत्व को पहचानें. अगर रिश्ता टूटेगा, तो आप अपने अकेलेपन में अपने ईगो को संवारकर क्या करेंगे?

– यह अपने विवेक व परिपक्वता पर ही निर्भर करता है कि हम अपने ईगो को किस तरह से कंट्रोल करके अपने रिश्ते को बचाते हैं, तो बेहतर होगा कि ईगो के प्रदूषण से अपने रिश्ते को बचाएं

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ईर्ष्या व द्वेष

ये ऐसी भावनाएं हैं, जो हमारे मन व विचारों को पूरी तरह से प्रदूषित कर देती हैं. ये हमें पूरी तरह से नकारात्मकता की ओर ले जाती हैं और उसके बाद हमारे सोचने-समझने की क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित कर देती हैं.

क्या करें?

– ख़ुद से सवाल करें. जी हां, आप ख़ुद से पूछें कि ये ईर्ष्या आप किससे कर रहे हैं और क्यों? अपनों से ही ईर्ष्या? उन अपनों से, जो आपसे इतना प्यार करते हैं, आपकी परवाह करते हैं.

– अक्सर अपने अहंकार के चलते हम अपने पार्टनर के गुण, उसकी तारीफ़ और उसकी कामयाबी बर्दाश्त नहीं कर पाते. हम उसे अपना प्रतियोगी समझने लगते हैं, जिससे ईर्ष्या की भावना और बढ़ जाती है, जो रिश्तों और भावनाओं को इस कदर प्रदूषित करती है कि सब कुछ ख़त्म होने के बाद ही होश आता है.

– बेहतर होगा कि आप अपना नज़रिया बदलें. आपका पार्टनर आपका प्रतियोगी नहीं, सहयोगी है.

– उसकी कामयाबी का अर्थ है आपकी कामयाबी. उसकी ख़ुशी का मतलब है आपकी व आपके परिवार की ख़ुशी.

– आपका रिश्ता तभी संपूर्ण होगा, जब आप अपने पार्टनर को भी अपनी ज़िंदगी में पूरी तरह से शामिल करके उसे अपना ही एक हिस्सा मानें.

– उसके आगे बढ़ने में उसकी मदद करें, उसे सहयोग दें और उसकी ख़ुशियों को भी सेलिब्रेट करें.

– यदि ये तमाम बातें आप अपने जीवन में शामिल कर लेंगे और अपने नज़रिए को थोड़ा-सा बदलकर अपने रिश्तों को देखेंगे, तो आपका रिश्ता व जीवन पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हो जाएगा.

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– विजयलक्ष्मी 

 

 

रोमांटिक रिलेशनशिप के लिए 13 Best & Effective लव टॉनिक (13 Best and Effective Love Tonic for Romantic Relationship)

रिलेशनशिप क्लीनिंग टिप्स

किसी भी चीज़ को टिकाऊ और व्यवस्थित रखने के लिए समय-समय पर उसकी साफ़-सफ़ाई ज़रूरी होती है. हमारे रिश्ते भी ऐसे ही होते हैं, अगर उन्हें भी टिकाऊ बनाना है, तो समय-समय पर उन्हें भी क्लीनिंग की ज़रूरत पड़ती है. अपने रिलेशनशिप में से तमाम बुरी आदतें, नकारात्मक भावनाएं दूर करके उन्हें क्लीन करें और अपने रिश्ते को बनाएं परफेक्ट.

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ईगो: किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए बहुत ज़रूरी है ईगो को बीच में न आने दिया जाए, लेकिन  हम अपने अहम् को इतना महत्व देते हैं कि अधिकतर रिश्ते इसी के भेंट चढ़ जाते हैं.

–  ईगो को इतना बड़ा बना लेते हैं कि उसके सामने रिश्ते छोटे लगने लगते हैं.

– छोेटी-छोटी बातों को अपने स्वाभिमान का विषय बनाकर अपनों से ही उलझ पड़ते हैं.

– बहुत ज़रूरी है कि अपने रिश्ते में से ईगो को क्लीन किया जाए, ताकि आपका रिश्ता रहे लॉन्ग लास्टिंग.

ईर्ष्या: अपने रिश्ते को सेफ रखने के लिए बहुत ज़रूरी है कि ईर्ष्या को मन में न पनपने दें. चाहे कोई भी रिश्ता हो, ईर्ष्या अगर दिल में घर कर जाए, तो क़रीबी रिश्ते को भी ख़त्म कर सकती है.

– अपनी भावनाएं सकारात्मक रखें.

– नकारात्मक विचार मन से निकाल दें.

– यदि किसी में कोई कमी या कमज़ोरी भी है, तो भी उसके गुणों पर ध्यान दें.

– किसी की सफलता पर ईर्ष्या करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. बेहतर होगा कि इस दुर्गुण को अपने रिश्ते से क्लीन करें, प्रशंसा करना सीखें और रिश्ते को पॉज़िटिव बनाएं.

 

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कम्यूनिकेशन गैप: अक्सर हमें एहसास ही नहीं हो पाता और हमारे बीच मौन पसर जाता है. अंजाने में ही हम अपने रिश्ते के प्रति इतने कैज़ुअल होते चले जाते हैं कि आपस में बातचीत करना हमारी प्राथमिकता में रहता ही नहीं.

– बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन गैप को क्लीन करें और आपस में बात और शेयरिंग का सिलसिला जारी रखें.

–  न स़िर्फ अपने सुख-दुख, बल्कि छोटी-छोटी बातें भी शेयर करने का अलग ही सुख होता है. इससे रिश्ते मज़बूत बनते हैं.

ठंडापन: रिश्ते में ठंडापन और उदासीनता ख़तरे की निशानी है. अगर आपका रिश्ता भी इसी स्थिति से गुज़र रहा है, तो अलर्ट हो जाएं और इसे अपने रिलेशनशिप से दूर करें.

–  रोमांटिक पलों को एंजॉय करें और ऐसे पलों को ज़रूर चुराएं, जो आप दोनों को क़रीब लाएं.

–  सरप्राइज़ दें, डेट्स प्लान करें.

–  कुछ नया करें, ताकि एक्साइटमेंट बना रहे.

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सेक्स के प्रति अरुचि: सेक्स एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसे नज़रअंदाज़ करना रिश्ते के लिए ख़तरनाक हो सकता है.समय के साथ-साथ सेक्स के प्रति अरुचि होने लगती है, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

– एक-दूसरे के प्रति आकर्षण बना रहे, इसका प्रयास जारी रखें.

– अपनी फिटनेस व पर्सनल हाइजीन का ख़्याल भी रखें.

–  पार्टनर को कॉम्प्लीमेंट्स दें. रोमांटिक बातें करें.

– बेडरूम का डेकोर भी रोमांटिक ही रखें. बीच-बीच में डेकोर बदलते रहें, ताकि नीरसता न आए.

झूठ और अविश्‍वास: अपने रिश्ते को झूठ और अविश्‍वास जैसी चीज़ों से बचाएं. विश्‍वास की बुनियाद पर ही रिश्ते खड़े होते हैं.

– बेहतर होगा कि ऐसी नौबत न आए कि आपको झूठ बोलना पड़े.

– कोई भी बात हो, अपने पार्टनर से ज़रूर शेयर करें, क्योंकि बातें छिपाने पर ग़लतफ़हमियां बढ़ती हैं.

–  ग़लतफ़हमियां बढ़ने पर अविश्‍वास भी बढ़ता है, जिससे रिलेशनशिप में और उलझनें बढ़ने लगती हैं.

शक: अपने पार्टनर पर विश्‍वास करें. बात-बात पर या बेवजह शक करना या बहुत अधिक रोक-टोक व सवाल-जवाब करना सही नहीं. इससे पार्टनर को लगेगा कि आपको उन पर भरोसा नहीं.

– शक करने की कोई बड़ी वजह हो, तो बेहतर होगा कि आपस में बातचीत करके मसला हल करें.

– बेवजह मन में कड़वाहट पाले रखने से आपके स्वभाव व आपके रिश्ते पर नकारात्मक असर ही होगा.

– भरोसा करना सीखें. इससे रिश्तों में अपनापन और प्यार बढ़ता है और सामनेवाला भी आप पर भरोसा करके ख़ुद को सहज महसूस करता है.

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अत्यधिक अपेक्षाएं: अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन अत्यधिक अपेक्षाएं स़िर्फ दुख और निराशा ही देती हैं. ख़ुद को, अपने रिश्ते को इस कसौटी पर हमेशा परखें कि आपने क्या और कितनी अपेक्षाएं पाली हुई हैं.

–  अपने साधनों और एक-दूसरे के स्वभाव को जानने के बाद कुछ बदलाव आपको करने ही होंगे.

–  यह अपेक्षा करना कि सब कुछ आपके मन मुताबिक़ ही होगा, सही नहीं.

–  रिश्तों में त्याग व समर्पण करना ही पड़ता है, तभी वे टिकते हैं.

–  समय-समय पर अपने रिश्ते का विश्‍लेषण ज़रूर करें और नकारात्मक चीज़ों को बाहर करके रिश्ते को क्लीन करें.

रिश्ते को समय न देना: समय के साथ-साथ हम अपने रिश्ते को बहुत ही कैज़ुअली लेने लगते हैं. अपने प्रोफेशन से लेकर दोस्तों तक को हम समय देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे अपने रिश्ते को ही समय देना भूल जाते हैं.

– यह ग़लती कभी न करें. आपके अपनों को सबसे ज़्यादा आपके समय की ही ज़रूरत होती है.

–  समय निकालकर उन्हें ख़ुश करें और उन्हें स्पेशल फील करवाएं.

ज़िद व ग़ुस्सा: हर बात पर ज़िद करना या ग़ुस्सा होना ठीक नहीं है. अगर आप ऐसा करते हैं, तो संभल जाइए.

– ज़िद व ग़ुस्सा जैसी भावनाएं अच्छे से अच्छे रिश्ते को तोड़ सकती हैं.

– अपने रिश्ते को बचाए रखने के लिए आपको इन भावनाओं पर नियंत्रण करना ही होगा.

ताने देना: कुछ लोगों की आदत होती है बात-बात पर ताने देने की. कभी लड़ाई-झगड़े के दौरान, तो कभी मज़ाक के नाम पर भले ही आप ताने देते हों, लेकिन आपकी कही बातें सामनेवाले को तकलीफ़ दे सकती हैं.

– अपने चाहनेवालों का सम्मान करें. उन्हें सबके सामने नीचा दिखाने से बचें.

– जाने-अंजाने अगर आपमें यह आदत है, तो इसे समय रहते ठीक कर लें, वरना आपके रिश्ते पर यह भारी पड़ सकती है.

– विजयलक्ष्मी

रिश्तों में बचें इन चीज़ों के ओवरडोज़ से (Overdose of love in relationships)

Overdose of love

Overdose of love

मनोचिकित्सक डॉ. चंद्रशेखर सुशील कहते हैं कि एक-दूसरे की परवाह, प्यार व अपनापन अच्छा है, पर जब कोई भी भावना अत्यधिक (Overdose of love) हो जाए, तो समझिए कुछ बुरा हो सकता है. इसी तरह से फैमिली काउंसलर श्रीमती सुमन भंडारी का मानना है कि हर शादी- चाहे लव मैरिज हो या अरेंज्ड, एक समझौता होती है. रिश्तों में ट्रांसपरेंसी होना बेहद ज़रूरी है, लेकिन ओवरडोज़ नहीं. आइए देखें कि किन भावनाओं के अतिरेक से हमें बचना चाहिए-

पज़ेसिवनेस

किसी भी क़रीबी रिश्ते में पज़ेसिव होना स्वाभाविक है, परंतु अत्यधिक पज़ेसिव होने से आप सामनेवाले को स्पेस नहीं दे पाते. आपको लगता है कि आप उससे बेइंतहा (Overdose of love) प्यार कर रहे हैं, उसकी केयर कर रहे हैं, लेकिन इसके चलते आप उसकी पर्सनल स्पेस को ख़त्म कर देते हैं, जिससे उसे घुटन होने लगती है.

एडवोकेट कल्पना शर्मा बताती हैं कि तलाक़ के कई कारणों में ओवर पज़ेसिवनेस बड़ा फैक्टर है. पति-पत्नी में से कोई एक यदि इससे ग्रस्त है, तो ईर्ष्या, घुटन, कुढ़न आती ही है और ज़िंदगी नासूर बन जाती है. जिसे भी आप प्यार करते हैं, उसकी जगह ख़ुद को रखकर सोचें कि कहीं आप भी ओवर पज़ेसिव तो नहीं? यदि हां, तो स्वयं को तुरंत बदलने की कोशिश करें.

स्पेस न देना

पति-पत्नी या सहेलियों में नज़दीकी स्वाभाविक है. एक-दूसरे की अंतरंग बातें जानना भी सहज है, पर समस्या तब होती है, जब दोनों एक-दूसरे को अपने मन मुताबिक़ चलाना चाहते हैं और हर बात की रिपोर्ट मांगते हैं, फ्री टाइम बिल्कुल नहीं देते. ऐसे में हर बात की सफ़ाई देते-देते थकान व नीरसता आने लगती है. ‘सरप्राइज़’ रिश्तों में हमेशा नयापन लाता है, जिसके लिए थोड़ी दूरी और स्पेस ज़रूरी है. कुछ दूरी रिश्तों में मिठास भी भर देती है. बेहतर होगा कि जब भी संभव हो, कुछ समय दोस्त, जीवनसाथी, सहेली से अलग भी बिताने का प्रयत्न करें. आपके रिश्तों में नई उष्मा का संचार होगा.

तारीफ़ करना

तारीफ़ करना और सुनना हम सभी को बहुत अच्छा लगता है, पर बहुत अधिक तारीफ़ करने से सामनेवाला उसे सहज तौर पर लेने लगता है. संगी-साथियों में भी अधिक तारीफ़ से वे आपको लाइटली लेने लगते हैं या बात की वैल्यू नहीं समझ पाते. नतीजतन आपका मन बुझ जाता है. तारीफ़ कीजिए, पर सोच-समझकर और बार-बार मत दोहराइए.

प्रोटेक्टिव होना

रिलेशनशिप में हम अपनों के प्रति प्रोटेक्टिव हो जाते हैं. पैरेंट्स, पत्नी, बच्चे, बहन या प्रेमिका किसी की भी चिंता करना अच्छा है, पर इतनी चिंता करना कि वो असहज हो जाएं? आप पर पूर्णतया निर्भर हो जाएं, ठीक नहीं. बेटियों या अपनी पत्नी को सुरक्षा की दृष्टि से घर से बाहर न निकलने देना, मनचाहे कपड़े न पहनने देना, मनचाही नौकरी न करने देना या दूसरे शहर न जाने देना उनके व्यक्तित्व को कमज़ोर बनाएगा और फ्रस्ट्रेशन डेवलप करेगा. बेहतर होगा कि आप उनके व्यक्तित्व को ग्रो करने दें. श्रीमती भंडारी बताती हैं कि आजकल शादियां देर से होती हैं. लड़का-लड़की दोनों इंडिपेंडेंट होते हैं, ऐसे में यदि वो एक-दूसरे के प्रति ओवरप्रोटेक्टिव होंगे, तो दोनों का ईगो टकराएगा. इसीलिए प्री मैरिटल काउंसलिंग बहुत ज़रूरी है. अक्सर छोटी-सी ग़लती विवाह विच्छेद का कारण बन जाती है.

हर बात शेयर करना

शेयरिंग किसी भी रिश्ते की मज़बूती का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन हर ग़ैरज़रूरी बात व चीज़ भी शेयर करने लग जाएं, तो अक्सर ग़लतफ़हमियों की संभावना अधिक हो जाती है. ख़ासतौर से पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका को हर बात शेयर नहीं करनी चाहिए. उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने किसी कलीग के बारे में या किसी के स्वभाव के बारे में बात करते हैं या ऑफिस की, घर की हर बात शेयर करते हैं, तो आपका पार्टनर अपनी राय देगा या अपने तरी़के से चीज़ों को समझकर रिएक्ट करेगा, जिससे बात-बात में ही विवाद व झगड़े हो जाते हैं. इसलिए शेयरिंग एक सीमा तक ही ठीक है. अत्यधिक शेयरिंग कई बार रिश्तों में खटास ला देती है.

अत्यधिक अपेक्षाएं

सास को बहू से, पति को पत्नी से, बच्चों को पैरेंट्स से, दोस्तों को आपस में एक-दूसरे से उम्मीदें होती हैं. हर रिश्ता उम्मीदों पर टिका होता है. सायकोलॉजिस्ट रश्मि सक्सेना कहती हैं कि बहुत ज़्यादा एक्सपेक्टेशन से रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं. हम दूसरे से ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद करते रहते हैं, बिना उसकी परिस्थितियों को समझे. साथ ही हम यह भूल जाते हैं कि हमने उनके लिए क्या किया? कई बार अव्यावहारिक उम्मीदें कर बैठते हैं, नतीजा मनमुटाव, द्वेष, अलगाव. इसीलिए दूसरों से बहुत अधिक अपेक्षाएं न रखें, आप सुखी रहेंगे और आपके रिश्ते क़ामयाब.

वाचालता

कुछ रिश्ते हमारे पारंपरिक समाज में बड़े ख़ुशमिज़ाज, चटपटे व रसीले माने जाते हैं- जीजा-साली, देवर-भाभी में चुहल आम बात है, पर इन नाज़ुक रिश्तों में अधिक वाचाल होना मुसीबत मोल लेना है. मर्यादा को समझकर, सीमा में रहना ही श्रेयस्कर है. मस्ती-मज़ाक में कब रिश्तों की मर्यादा व सीमा टूट जाती है और सामनेवाले को ठेस लग जाती है, हम समझ ही नहीं पाते. इसलिए सीमा में रहकर ही मज़ाक करें, तो बेहतर होगा.
मस्ती-मज़ाक, रोमांस, चुहल, छेड़खानी, एक-दूसरे का ध्यान रखना- यह सभी विभिन्न रिश्तों की अलग पहचान है और जब तक ये अलग-अलग भाव रिश्तों में नहीं होंगे, जीवन का मज़ा भी नहीं आएगा. बस, बचना स़िर्फ अति से है, क्योंकि अधिक मिठास भी सेहत को नुक़सान पहुंचाती है.

– पूनम मेहता

पुरुषों को इन 5 मामलों में दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं (Men Hate Interference In These 5 Matters)

1. आदत- शायद ही कोई पुरुष हो, जिसे अपनी आदत को लेकर किसी भी तरह का कमेंट सुनना या भाषणबाज़ी व उपदेश सुनना पसंद आता हो. इस मामले में अधिकतर पुरुषों का एक ही जवाब रहता है कि ‘ऐसा ही हूं मैं’… यानी आप इसे अपना लो या फिर हंसते-रोते झेलो. आदत में बहुत कुछ हो सकता है, जैसे- खानपान की आदत, मज़ाक करने की आदत, बेवजह ग़ुस्सा हो जाना या फिर शॉर्ट टेंपर, शंकालु प्रवृत्ति, छोटी-छोटी बातों को तूल देना, बिना बात लड़ाई-झगड़ा करना, ओवर प्रोटेक्टिव होना, केयरिंग, साफ़-सफ़ाई को अनदेखा करना, दोस्तों के साथ व़क्त-बे़क्त घूमना आदि.
एक्सपर्ट सलाह- ऐसा नहीं है कि उनको अपनी ग़लत आदतों से होनेवाले फ़ायदे-नुक़सान का पता नहीं होता है, उन्हें सब मालूम होता है, बस मेल ईगो और आलस के चलते वे अपनी आदतें नहीं बदलते. इनकी बुरी आदतें बदलने का एक ही तरीका है धैर्य और समझदारी से काम लें.

2. दोस्त- पुरुषों को, ख़ासकर पतियों को पत्नियों का उनके दोस्तों के मामले में दख़लअंदाज़ी करना बिल्कुल पसंद नहीं आता. ‘आपका वो दोस्त सही नहीं है…’ ‘आप अपने उस दोस्त से अधिक मेल-जोल न रखें…’ पत्नियों की इस तरह की बातें पतियों को नागवार गुज़रती हैं. दरअसल, पुरुष ही नहीं, स्त्रियों की ज़िंदगी में भी उनके दोस्तों के लिए ख़ास जगह होती है. कुछ दोस्त तो इतने ख़ास व राज़दार होते हैं कि पैरेंट्स, पत्नी या फिर पति भी उनकी जगह नहीं ले सकते. इसलिए कोई भी पुरुष अपने अज़ीज़ दोस्तों को लेकर दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं करता.
एक्सपर्ट सलाह- बचपन से लेकर बड़े होने तक पुरुषों के जीवन में उनके दोस्त बेहद अहम् भूमिका निभाते हैं. वे उनसे अपने कई अनकहे दुख-दर्द, इच्छाएं व ख़्वाबों को शेयर करते हैं, जो वे पैरेंट्स या अपनों से नहीं कह पाते. इसलिए वाजिब-सी बात है कि ऐसे हमदर्द को लेकर दख़लअंदाज़ी उन्हें रास नहीं आएगी. अतः जहां तक हो सके, इस मैटर को स्मार्टली हैंडल करने की कोशिश करें, पर बेवजह अधिक तूल न दें.

3. लुक्स- पुरुषों के लुक्स को लेकर बातें करना, राय देना या फिर कमेंट करना उन्हें आहत कर जाता है. उनकी सोच के अनुसार तन से ज़्यादा उनके मन को तवज्जो दिया जाना चाहिए. वैसे भी व़क्त के साथ चेहरा-स्वभाव आदि बदलता रहता है. करियर, नौकरी, घर-परिवार की ज़िम्मेदारी कई बार पुरुषों को व़क्त से पहले उम्रदराज़ बना देती है.
एक्सपर्ट सलाह- लुक्स बेहद सेंसिटिव पहलू है. इसे लेकर दख़लअंदाज़ी या कमेंट स्त्रियों को तो बुरा लगता ही है, पर पुरुष भी इससे अछूते नहीं है. वे अपने लुक्स से अधिक अपनी बुद्धिमानी, समझदारी और हिम्मत को अधिक महत्व देते हैं. इसलिए उनके साथ डील करते समय अतिरिक्त ध्यान देने की ज़रूरत होती है.

4. आलोचना- पुरुषों का एक वर्ग ऐसा भी है, जिन्हें लगता है कि आलोचना करने का
कॉपीराइट उनके पास ही है. यदि भूले से भी पत्नी, प्रेमिका या फिर किसी और ने ही किसी बात को लेकर उनकी आलोचना कर दी, उनके काम पर कमेंट किया, तो इस तरह की दख़लअंदाज़ी उन्हें बर्दाश्त नहीं होती. कमेंट करने पर उनके ईगो व भावनाओं को चोट पहुंचती है. उस पर ग़लती से कमेंट्स पैरेंट्स या फिर घर की आर्थिक स्थिति को लेकर हो जाए, तो मूड और माहौल को बिगड़ते देर नहीं लगती.
एक्सपर्ट सलाह- मेल डॉमिनेटिंग सोसाइटी होने के कारण लड़कों की परवरिश ही कुछ ऐसी होती है कि वे कह तो बहुत कुछ सकते हैं, पर सुन नहीं सकते. उस पर आलोचना, तो कतई नहीं बर्दाश्त कर सकते. अतः यह ज़रूरी है कि उनसे तोल-मोल कर बोलें.

5. शौक़- हर व्यक्ति के अपने कुछ शौक़ होते हैं. पार्टनर या फिर किसी और का उनकी हॉबीज़ को लेकर दख़ल देना और यह कहना कि यह ठीक नहीं, इसे बदल दो, कुछ और करो, क्या यह ज़रूरी है कि तुम इस तरह के शौक़ पालो… इस तरह की बातें पुरुषों के मन में उस शख़्स को लेकर चिढ़ पैदा कर देती हैं. कोई भी पुरुष अपने शौक़ के साथ समझौता करना पसंद नहीं करता. उनके अनुसार, यही तो उनके ज़िंदगी को मस्ती में जीने का सबसे बड़ा ज़रिया है व आप उसी पर आरी चलाएंगे, तो कैसा लगेगा?
एक्सपर्ट सलाह- कहते हैं, एक मुकम्मल ज़िंदगी जीने के लिए कुछ मज़ेदार, तो कुछ अजीबो-गरीब शौक़ का होना बेहद ज़रूरी है. पुरुष वर्ग में शायद ही कोई हो, जो अपने शौक़ से समझौता करता हो. इसलिए बेहतरी इसी में है कि इसमें दख़लअंदाज़ी न की जाए, क्योंकि वे तो नहीं बदलेंगे, पर इसे लेकर मनमुटाव ज़रूर हो जाएगा.

– ऊषा गुप्ता

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