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मन की बात- एक छोटा बच्चा (Motivational Story- Ek Chhota Bachcha)

मैं उसे कभी बड़ा होने नहीं दूंगी, क्योंकि वह बच्चा मुझे ख़ुश रहना सिखाता है. मुझे ज़िंदा रखता है. मुझमें आशा का संचार करता है. मुझे हमेशा उत्साहित रखता है. मुझे बहुत छोटी-छोटी बातों पर ख़ुश होना सिखाता है.

 Motivational Story

एक छोटा बच्चा है, जो बहुत ख़ुश रहना चाहता है, हर दर्द, हर दुख-तकलीफ़ से दूर जीवन के हर पल का आनंद उठाना चाहता है और जानता भी है. इन बारिशों के दिनों में उसका मन करता है, सुबह-सुबह उठकर हर काम छोड़कर बारिश में ख़ूब भीगे, खेले, सोसायटी के गार्डन में लगे झूले पर बारिश में भीगते हुए ख़ूब झूले. न मिट्टी से उलझन हो, न भीगे कपड़ों से. वह बच्चा कैलोरीज़ की चिंता किए बिना मनपसंद तली-भुनी चीज़ें खाना चाहता है, इसलिए कभी-कभी बिना मन मारे खा भी लेता है.

उसका मन करता है, अपने प्रिय गाने पर उठकर सबके सामने ही ताल से ताल मिला ले, पर सबके सामने न सही अकेले में ख़ुश होकर मनपसंद संगीत पर थिरक ही उठता है. कभी-कभी अपने जैसे किसी दोस्त के साथ साफ़-सफ़ाई को दरकिनार रख सड़क किनारे खड़े हुए गोलगप्पे, कुल्फी के ठेलों पर अंदर की ख़ुशी को दबाता हुआ मुस्कुराते हुए खड़ा होकर आनंद उठा ही लेता है. अमित जब ऑफिस के लिए निकलते हैं, वह बच्चा उन्हें तब तक देखता है, जब तक वे आंखों से ओझल नहीं हो जाते और अगर अमित मोबाइल फोन पर बात करते हुए अपनी धुन में निकल जाएं, पीछे मुड़कर हाथ हिलाकर बाय न करें, तो वह देर तक उदास रहता है. सोचता है, क्या मेरे लिए उनके पास इतना भी समय नहीं कि जो यह छोटी-सी बात उस बच्चे को अच्छी लगती हो, वही बात अमित भूल जाएं. फिर वह दिनभर मन ही मन ईश्‍वर से अमित की सलामती की प्रार्थना करता रहता है. सौरभ और सुरभि को देखकर तो वह बच्चा खिलखिला उठता है. उनके उठने से लेकर रात के सोने तक वह बच्चा उनके आसपास मंडराता रहता है, उनके साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने की चाह में. सौरभ-सुरभि जब उसे उसका मनचाहा समय न देकर अपने फोन, टीवी या लैपटॉप में लगे रहते हैं, वह बच्चा मन ही मन बहुत उदास होता है, लेकिन वह अपने चेहरे से यह ज़ाहिर नहीं होने देता. फिर वह भी चुपचाप अपने किसी काम में लग जाता है.

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उस बच्चे को कुछ नहीं चाहिए, न महंगे कपड़े, न शानदार गिफ्ट्स, वह तो बस अमित, सौरभ-सुरभि के साथ कुछ पल बिताकर ही ख़ुश हो जाता है. वह कितना भी उदास हो, अपने पास इन तीनों की उपस्थिति से ही खिल उठता है.

वह छोटा बच्चा कहीं और नहीं, मेरे मन में छुपा है, मुझमें जीता है, जो पति के साथ, बच्चों के साथ बैठकर कुछ समय बिताकर, जी भरकर हंस-बोलकर अपना जीवन बिताना चाहता है. बच्चे ही तो कई बार कहते हैं, “मॉम, ऐसा लगता है मन से आप बिल्कुल बच्ची हैं.” मैं कहती हूं, “हां, तुम दोनों ने सही अंदाज़ा लगाया है.” अमित के मुंह से भी कई बार सुना है, “सिया, इस घर में दो नहीं, तीन बच्चे हैं.” हां, सच ही तो है, अब तो मैं रात-दिन यह बात महसूस करती हूं और स्वीकार भी कि हां, एक छोटा बच्चा छुपा है मेरे अंदर, जिसे मैं चाहती भी नहीं कि वह कभी बड़ा हो. मैं उसे कभी बड़ा होने भी नहीं दूंगी, क्योंकि वह बच्चा मुझे ख़ुश रहना सिखाता है. मुझे ज़िंदा रखता है. मुझमें आशा का संचार करता है. मुझे हमेशा उत्साहित रखता है. मुझे बहुत छोटी-छोटी बातों पर ख़ुश होना सिखाता है.

कभी-कभी मुझे लगता है हम सबमें छुपा है एक बच्चा, जो व़क्त के थपेड़े खाकर कहीं गुम होता चला जाता है. उसे गुम न होने दें. उसे अंदर ही अंदर प्यार से सहलाते रहें. जानती हूं मैं वह कहीं खो गया, तो मैं भी खो जाऊंगी इस दुनिया की आपाधापी में, जीवन की भागदौड़ में.जगजीत सिंह की वह ग़ज़ल है न- ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, भले छीन लो, मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी… यह लिखनेवाले के दिल में भी यक़ीनन एक छोटा बच्चा था.

 

– हिना अहमद

अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

Akbar Birbal Story

अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

एक दिन राजा अकबर और बीरबल राज महल के बगीचे में टहल रहे थे. बहुत ही सुंदर सुबह थी. कई तरह के पंछी चहक रहे थे. वहीं तालाब के पास ही बहुत सारे कौवे भी आस-पास उड़ रहे थे. उन कौवों को देखते ही बादशाह अकबर के मन में एक सवाल उत्पन्न हुआ. उनके मन में यह सवाल आया कि उनके राज्य में कुल कितने कौवे होंगे?

बीरबल तो उनके साथ ही बगीचे में टहल रह थे, तो राजा अकबर ने बीरबल से ही यह सवाल कर डाला और पूछा कि बताओ बीरबल, आख़िर हमारे राज्य में कितने कौवे हैं? तुम तो बड़े चतुर हो, तुम्हें हर सवाल का उत्तर पता होता है.

यह सुनते ही चालाक बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया कि महाराज, हमारे राज्य में कुल 95,463 कौवे हैं, आप चाहें तो गिनती करवा सकते हैं.
महाराज अकबर इतने तेज़ी से दिए हुए उत्तर को सुन कर हक्का-बक्का रह गए और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने की सोची.

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Akbar Aur Birbal Ki Kahani

महाराज ने बीरबल से दोबारा सवाल किया- अगर तुम्हारी गणना के अनुसार कौवे ज़्यादा हुए तो?

बिना किसी संकोच के बीरबल बोले, हो सकता है महाराज, किसी पड़ोसी राज्य के कौवे हमारे राज्य में घूमने आये हों.

राजा फिर बोले- और अगर गिनती में कम कौवे हुए तो?

बीरबल ने फिर तपाक से उत्तर दिया- महाराज, हो सकता है हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने किसी अन्य राज्यों के रिश्तेदारों के यहां घूमने गए हों.

यह सुन अकबर बेहद ख़ुश हुए, क्योंकि बीरबल ने अपनी चतुराई एक बार फिर साबित कर दी.

सीख: प्रश्‍न भले ही कितने मुश्किल क्यों न हों, बिना घबराई बुद्धि व चतुराई से काम लेना चाहिए. दुनिया का कोई ऐसा सवाल नहीं, जिसका जवाब न हो, बस ज़रूरत है, विवेक, धैर्य व बुद्धि की.

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गोल्डन गर्ल हिमा दास की कामयाबी ने प्रधानमंत्री मोदी को किया भावुक (Seeing Her Passionately Search For The Tricolour Touched Me Deeply: PM Narendra Modi)

 

Athlete Hima Das

भारतीय ऐथ्लीट हिमा दास ने गुरुवार को आईएएएफ विश्व अंडर २० एथलेटिक्स चैम्पीयन्शिप की ४०० मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.

ये चैम्पीयन्शिप फ़िनलैंड के टेम्पेयर शहर में हुई थी. ऐसा करके अब हिमा ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनकी तारीफ़ करते हुए उन्हें बधाई दी… मोदी जी ने कहा…जीत के बाद तिरंगे के लिए जो प्यार हिमा के जज़्बे में दिखा और राष्ट्रगान के समय उनका भावुक होना मेरे मन को भीतर तक छू गया! यह देखने के बाद आख़िर किस भारतीय की आँखें नम ना होंगी!

आप देखें प्रधानमंत्री मोदी ने जो वीडियो ट्विटर पर शेयर किया

असम की रहनेवाली हिमा १८ साल की हैं और ग़रीब किसान की बेटी हैं… हम सबको उनपर गर्व है!

– गीता शर्मा

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पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना (Pahla Affair: Khamosh Sa Afsana)

पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना

Pahla Affair: Khamosh Sa Afsana

पहला अफेयर: ख़ामोश-सा अफ़साना (Pahla Affair: Khamosh Sa Afsana) 

मैं ज़िद्दी, बेपरवाह, अल्हड़-सा था. रोज़ पापा कहते हैं सुबह जल्दी शोरूम पहुंच जाना और मैं हूं कि हर रोज़ लेट होता हूं.
“राज, कहां हो तुम? बहुत हो गया गाना-बजाना, कब ज़िम्मेदार होगा ये लड़का.”
हमेशा की तरह मां ने मुझे पीछे के दरवाज़े से भगा दिया और मैं बाइक लेकर सीधे अपने दोस्त विक्की के पास पहुंच गया.

“राज, एक गुड न्यूज़ है. वो शर्मा अंकल के कैफेटेरिया की एक ब्रांच अपने कॉलेज के पास खुली है, उन्होंने सामने से ऑफर दिया है. शाम को उनसे मिलने जाना है.” मुझे शर्मा अंकल के कैफेटेरिया को संभालने का काम मिल गया था, मम्मी-पापा भी बेहद ख़ुश हुए.
अगली सुबह कैफेटेरिया पहुंचा, तो सब कुछ किसी कॉफी हाउस जैसा ही था, लेकिन वहां एक छोटी-सी लाइब्रेरी भी थी, जो उसे दूसरे कॉफी हाउस से अलग बना रही थी.

अक्टूबर महीने की गुलाबी शाम वैसे ही रोमांटिक होती है, उस पर मैं एक रोमांटिक गाना गा रहा था. मेरे गाने की धुन ने सबको मदहोश कर दिया था, लेकिन कोई एक था, जिस पर मेरी मधुर आवाज़ का कोई असर ही नहीं हो रहा था. वो लड़की अपनी किताब पढ़ने में ही बिज़ी थी, बीच-बीच में डायरी में भी कुछ लिखती. उसे देखकर मैं चौंक गया, अरे! ये तो वही है… हां वही तो है, जिसके साथ मैं बस में ट्रैवल करता था, इसे देखने के चक्कर में ही तो मैं बाइक को घर पर छोड़कर बस में जाता था. मैं तब 12वीं का स्टूडेंट था. कभी उससे बात नहीं की थी, लेकिन कहीं न कहीं उसकी ख़ामोशी मेरे दिल को छू जाती थी. लेकिन आज उसकी ख़ामोशी मुझे अच्छी नहीं लगी. शायद उसकी संगीत की समझ मुझसे अच्छी हो, यही सोचकर मैंने अपना रियाज़ और बढ़ा दिया.

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Pahla Affair: Khamosh Sa Afsana

मेरे गाने का जादू सब पर सिर चढ़कर बोलने लगा, लेकिन जिसे इंप्रेस करना चाहता था, बस उस पर ही कोई असर न हुआ. वो मेरी तरफ़ देखती तक नहीं थी.

एक दिन घर जाते समय देखा सड़क पर भीड़ जमा है. पास जाकर देखा, तो वो लड़की खून से लथपथ थी, कोई गाड़ी टक्कर मारकर निकल गई थी. मैंने उसे अस्पताल पहुंचाया. उसके घरवालों को भी ख़बर कर दी. उसका नाम पलक था, जिसे मैं अपलक देखता रह जाता था. अगले दिन मैं उसे देखने पहुंचा, उसके घरवालों ने मुझे धन्यवाद कहा, लेकिन उसकी बेरूख़ी ने मेरी जान ले ली, उसने मुझे थैंक्स तक नहीं कहा. उसके बाद मैं कभी अस्पताल नहीं गया.

वो ठीक होकर कैफेटेरिया आई, तो मैंने देखा उसका एक दोस्त उससे साइन लैंग्वेज में बात कर रहा है. पहली बार पलक को किताबों के बाहर किसी से बात करते देखा, लेकिन वो भी उसी साइन लैंग्वेज में उससे बात कर रही थी. मुझे समझते देर न लगी कि जिसे मैं उसकी बेरूख़ी और घमंड समझ रहा था, वह उसकी मजबूरी थी. वो न सुन सकती थी, न बोल सकती थी.

मेरे दिल का हाल जानकर विक्की ने मेरा साथ दिया और उसकी मदद से मैंने साइन लैंग्वेज भी सीख ली. वैलेंटाइन डे आया और उस रूमानी माहौल में मैंने साइन लैंग्वेज की मदद से अपने दिल की बात गुनगुनाते हुए पलक से कह दी. पलक ने भी इशारा किया कि मैं बहुत अच्छा गाता हूं. जैसे-जैसे मैं गाता गया, उसकी आंखें भीगती गईं. कुछ देर बाद वो आंसू पोंछते हुए बाहर जाने लगी कि तभी उसकी डायरी नीचे गिर गई, मैंने वो डायरी उठाई, उसमें लिखा हर लफ़्ज़ उसके प्यार की गवाही दे रहा था. हर पन्ना जज़्बात से भरा था. मैंने पलक से कुछ कहना चाहा, मगर पानी में तैरते रह गए मेरे अनबोले शब्द, जो हमारे होंठों तक का सफ़र तय नहीं कर पा रहे थे. जहां शब्दों की सीमाएं ख़त्म हो जाती हैं, वहां रह जाता है स़िर्फ एहसास! हम दोनों के बीच अनायास ऐसा लम्हा आ गया था, जब पूरी ताक़त के बावजूद भी शब्दों को आकार नहीं मिल पा रहा था. इस ख़ूबसूरत एहसास का हर लम्हा हम अपने अंदर समेटना चाह रहे थे.

– नीतू मुकुल

पहले प्यार के मीठे एहसास में डूबे ऐसे ही अफेयर्स के लिए यहां क्लिक करें: Pahla Affair

 

सेक्स प्रॉब्लम्स- मुझे सेक्स का कोई अनुभव नहीं है (Sex Problems- I Have No Experience In Sex)

रिश्ते से डिलीट करें इन 10 आदतों को (10 Habits Happy Couples Must Delete for Happy Relationship)

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पति-पत्नी का रिश्ता प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से मज़बूत बनता है, पर अगर पति-पत्नी की कुछ बुरी आदतें रिश्ते को नुक़सान पहुंचाने लगें, तो ऐसी आदतों को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए, वरना गृहस्थी की गाड़ी को डगमगाने में देर नहीं लगती.

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आदत- बातें छिपाना या झूठ बोलना

शादीशुदा ज़िंदगी में अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे से कई बातें छुपाते हैं, बहाने बनाते हैं और अपनी ग़लतियों को छुपाने के लिए अक्सर झूठ भी बोलते हैं, पर हमें यह एहसास ही नहीं होता कि ये छोटे-छोटे झूठ हमारे रिश्ते को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं. और सबसे बड़ी बात कि ये आपके रिश्ते से विश्‍वास को ख़त्म कर देते हैं.
डिलीट करें: अगर आपसे कोई ग़लती हुई है, तो झूठ बोलने की बजाय उसे मान लें. पार्टनर को इस बारे में बताएं, भले ही उस समय पार्टनर आपसे ग़ुस्सा होगा, लेकिन आपकी बात को ज़रूर समझेगा और सबसे बड़ी बात आपके रिश्ते में हमेशा विश्‍वास बना रहेगा.

आदत- बदलने की कोशिश करना

यह एक बहुत ही ख़तरनाक आदत है. कभी-कभी तो लगता है कि लोग एक-दूसरे को सुधारने के मक़सद से ही शादी करते हैं, ख़ासकर नए शादीशुदा जोड़े, जो सब कुछ अपने मुताबिक़ चाहते हैं. याद रहे, आपकी यह आदत पार्टनर को ग़ुस्सा दिलाने और चिड़चिड़ा बनाने के लिए काफ़ी है, जो आपके रिश्ते के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं.
डिलीट करें: शादी का मतलब एक-दूसरे को अपने मुताबिक़ ढालना नहीं, बल्कि ज़रूरत के मुताबिक़ ढल जाना है. आपको यह बात समझनी होगी कि आप दोनों ही अब तक अलग-अलग माहौल में पले-बढ़े हैं, जिससे आपकी आदतें भी काफ़ी अलग हैं, पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि आपकी आदतें अच्छी हैं और उनकी ग़लत. अपने रिश्ते को थोड़ा समय दें और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें.

आदत- फॉर ग्रांटेड लेना

अक्सर शादी के कुछ सालों बाद लोग अपने रिश्ते को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं. फॉर ग्रांटेड लेना यानी पार्टनर व रिश्ते के प्रति
लापरवाही भरा रवैया अपनाना, उसके त्याग-समर्पण को महत्व न देना आदि. आपका यह रवैया आपके पार्टनर के मन में आपके लिए चिढ़ और ग़ुस्से के अलावा कुछ और नहीं लाएगा.
डिलीट करें: अपने रिश्ते को इससे बचाना आपकी ज़िम्मेदारी है. पार्टनर जब भी आपके लिए कुछ स्पेशल करता है या आपकी किसी समस्या को बिना कहे सुलझा देता है, तो ङ्गथैंक्यूफ कहकर उसे प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि आप भी समय-समय पर कुछ ऐसा करें, जिससे आपके रिश्ते में हमेशा गर्माहट बनी रहे.

आदत- बातचीत से उठकर चले जाना

अक्सर पार्टनर्स अपनी बात कहकर, सामनेवाले की बात बिना सुने वहां से हट जाते हैं. उन्हें लगता है कि इससे वो बहस को टाल रहे हैं, पर वो यह नहीं जानते कि अपने पार्टनर को अपनी बात रखने का मौक़ा न देकर, वो उसके साथ ज़्यादती कर रहे हैं. ऐसा करने से पार्टनर को बुरा लग सकता है, जिससे वो अगली बार किसी भी मुद्दे पर अपनी बात रखना बंद कर सकता है. इससे रिश्ते में खटास आती है, जो आपके रिश्ते को बिगाड़ सकती है.
डिलीट करें: पति-पत्नी के बीच यह एक नियम होना चाहिए कि जब भी एक किसी समस्या या मुद्दे पर अपनी बात रख रहा हो या सफ़ाई मांग रहा हो, तो दूसरा उसे सुनेगा और उस पर अपनी राय रखेगा और किसी भी हाल में वहां से उठकर नहीं जाएगा. यह नियम आपकी हर समस्या को सुलझा देगा. इस ख़्याल को दिमाग़ से निकाल दें कि उठकर चले जाने से आप बात को ख़त्म कर रहे हैं, बल्कि आप उसे और बढ़ा रहे हैं.

आदत- हर बात में तुलना करना

तुलना किसी को भी अच्छी नहीं लगती, क्योंकि हर व्यक्ति अपनी समझ व क्षमतानुसार काम व व्यवहार करता है, पर कुछ लोगों की आदत होती है, हर बात में पार्टनर की तुलना अपने दोस्तों, पड़ोसी या कलीग्स से करने की. हमेशा तुलना का मकसद पाटर्नर को नीचा दिखाना ही नहीं होता है, बल्कि जाने-अनजाने की गई तुलना भी किसी के आत्मविश्‍वास को कमज़ोर कर सकती है. इसलिए इस तुलनात्मक आदत से अपने रिश्ते को कमज़ोर न होने दें.
डिलीट करें: किसी भी रिश्ते की मज़बूती दो लोगों के मान-सम्मान से बनती है, पर अगर आपके पार्टनर का आत्मविश्‍वास ही कमज़ोर हो, तो भला वह अपने रिश्ते को क्या मज़बूती देगा. पार्टनर का मान-सम्मान आपकी ज़िम्मेदारी है, इसे निभाएं और हर बात में किसी और से तुलना करना छोड़ दें.

आदत- पार्टनर पर नज़र रखना

पार्टनर के मोबाइल में कॉल लॉग चेक करना, सभी मैसेजेस पढ़ना, ईमेल और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नज़र रखना कुछ लोगों की आदत होती है. इस तरह नज़र रखने का मतलब है कि आप अपने पार्टनर पर शक कर रहे हैं और आपको उन पर विश्‍वास नहीं. ऐसा करके आप अपने पार्टनर के विश्‍वास को तोड़ते हैं, जो आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं.
डिलीट करें: पार्टनर पर नज़र रखने से पहले यह ध्यान रखें कि हर व्यक्ति का अपना पर्सनल स्पेस होता है, जिसमें अतिक्रमण किसी को भी पसंद नहीं आता. आपको हर व़क्त सैटेलाइट बनकर घूमने की ज़रूरत नहीं, अपने पार्टनर पर विश्‍वास करना भी सीखें. कुछ लोग एहतियात के तौर पर ऐसा करते हैं, ताकि समय रहते अपने रिश्ते को संभाल सकें, पर अक्सर बेवजह का शक रिश्तों को बर्बाद कर देता है. अगर आपके मन में कोई बात है, तो जासूसी करने की बजाय पार्टनर से आमने-सामने बैठकर बात करें.

आदत- दूसरों के सामने बेइज़्ज़ती करना

दूसरों के सामने ख़ुद की अहमियत बढ़ाने के लिए पार्टनर की बेइज़्ज़ती करना एक बचकानी आदत है. इसका इस्तेमाल ज़्यादातर पुरुष करते हैं, पर महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं. ऐसा करनेवाले पार्टनर्स अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनकी इस आदत को लोग उनके रिश्ते की असफलता मानते हैं.
डिलीट करें: पति-पत्नी का व्यवहार घर-बाहर एक समान होना चाहिए. आप एक-दूसरे का सम्मान जितना घर में करते हैं, उतना ही दूसरों के सामने भी करें. अगर कभी मन-मुटाव भी हो गया है, तो उसे अपने घर के बाहर न ले जाएं. दूसरों के सामने हमेशा अपने पार्टनर की तारीफ़ करें, पर अगर यह नहीं कर सकते, तो कम से कम ऐसी बात न कहें, जिससे उन्हें बेइज़्ज़ती महसूस हो.

आदत- हर व़क्त कमियां गिनाना

आप किसी काम के नहीं हो,फ ङ्गआपने ऐसा क्यों किया,फ ङ्गआपको कुछ आता भी है,फ जैसे उलाहनों से अपने पार्टनर की कमियां गिनाना बहुत ग़लत आदत है. पार्टनर में कमियां और ख़ामियां निकालना बहुत आसान है, पर उनकी ख़ूबियों को पहचानकर उनकी तारीफ़ करना बहुत मुश्किल.
डिलीट करें: पति-पत्नी का फज़र्र् एक-दूसरे की कमियां गिनाना नहीं, बल्कि उन कमियों के साथ अपनाना है. आख़िर कमियां किसमें नहीं होतीं, इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है. हम सबमें कुछ न कुछ कमी है. शादी का मतलब ही होता है, पार्टनर को उसकी ख़ूबियों और कमियों के साथ अपनाना, फिर शिकायत किस बात की. पार्टनर की कमियां गिनाने से पहले ख़ुद का आकलन भी कर लें. अगर आप परफेक्ट नहीं, तो भला दूसरों से ऐसी उम्मीद क्यों.

आदत- इमोशनल ब्लैकमेल करना

अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. अक्सर अपनी ज़िद मनवाने के लिए कपल्स इसका इस्तेमाल करते हैं. ङ्गङ्घअगर आप मुझसे प्यार करते हैं, तो ऐसा ज़रूर करेंगे…फफ जैसी इमोशनल बातों से अपनी ज़िद मनवाते हैं. अपनी बात को मनवाने के लिए कभी रोना-धोना, तो कभी सेक्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं.
डिलीट करें: अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करके भले ही आप अपनी बात मनवा लेते हैं, पर इससे पार्टनर आपको ज़िद्दी और स्वार्थी समझने लगता है. उनके मन में अपनी ऐसी छवि न बनने दें और जल्द से जल्द अपनी इस आदत को डिलीट करें.

आदत- स़िर्फ अपने बारे में सोचना

मेरी पसंद, मेरी आदतें, मेरा विचार, मेरा रहन-सहन, मेरा कंफर्ट… जैसी बातें आपके वैवाहिक जीवन के लिए उचित नहीं. अपने बारे में सोचना अच्छी आदत है, पर स़िर्फ अपने बारे में सोचकर पार्टनर को तवज्जो न देना सही नहीं है, जो आपके वैवाहिक जीवन को भी प्रभावित करता है. शादी का मतलब पहले स़िर्फ मैं नहीं, बल्कि हम होता है, इस बात को समझें.
डिलीट करें: ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन दो लोगों से जुड़ा रिश्ता है. शादी में कई समझौते करने पड़ते हैं, इसलिए हमेशा ख़ुद को आगे रखने की बजाय, अपने रिश्ते को आगे रखें, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी हमेशा ख़ुशहाल बनी रहे.

– सुनीता सिंह

क्यों रोए सलमान?

सलमान खान नहीं रोक पाए अपने आंसू और फूट-फूट कर रो पड़े. आंखें, चेहरा रो-रोकर लाल हो गया था. दरअसल, सलमान इमोशनल हुए रजत बड़जात्या की शोकसभा में. राजश्री मीडिया के सीईओ रजत कैंसर से लड़ रहे थे और वह कुछ दिनों से जसलोक अस्पताल में भर्ती थे. शुक्रवार को रजत का निधन हो गया. जब सलमान शोकसभा में अपनी बहन अलवीरा के साथ पहुंचे, तो ख़ुद पर कंट्रोल नहीं कर पाए और उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे. इससे पहले सलमान ने रजत की मौत पर ट्वीट करके शोक जताया था. सलमान और रजत अच्छे दोस्त थे और रजत का यूं चले जाना सलमान के लिए एक बड़ा सदमा था. सलमान के अलावा और कौन-कौन पहुंचा शोकसभा में देखें वीडियो में.