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15 बेस्ट ईमेल एटिकेट रूल्स (15 Best Email Etiquette Rules)

चैट (Chat) या ईमेल (Email) लिखते हुए अधिकतर लोग कई तरह की ग़लतियां (Mistakes) करते हैं. हम यहां पर ऐसे ही कुछ पर्सनल और ऑफिशियल ईमेल एटीकेट्स के बारे में आपको विस्तार से बता रहे, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपने इंप्रेशन को ख़राब होने से बचा सकते हैं.

Email Etiquette Rules

जनरल ईमेल एटीकेट्स टिप्स

1. इंट्रोडक्शन बहुत ज़रूरी है

ईमेल में सबसे महत्वपूर्ण होता है इंट्रोडक्शन यानी परिचय. यदि आप किसी अंजान व्यक्ति को ईमेल लिख रहे हैं, तो सबसे पहले उसे अपना परिचय दें, फिर किस संदर्भ या विषय पर आप उससे बात करना चाहते हैं, इस बारे में उसे कम शब्दों में विस्तार से बताएं. इंट्रोडक्शन तब और भी ज़रूरी होता है, जब अंजान लोगों से किसी सर्वे, प्रश्‍नोत्तरी या क्विज़ के बारे में पूछ रहे होते हैं.

2. स्पेलिंग चेक करना न भूलें

ईमेल चाहे पर्सनल हो या ऑफिशियल, भेजने से पहले पूरे मेल की स्पेलिंग ज़रूर चेक करें. ख़ासकर जब आप मोबाइल से ईमेल कर रहे हों तो, क्योंकि टचस्क्रीन मोबाइल होने के कारण कई बार ग़लत टाइप हो जाता है. यदि आप बार-बार होनेवाली ग़लत स्पेलिंग से बचना चाहते हैं, तो ‘ऑटोकरेक्ट’ का ऑप्शन यूज़ करें. इस ऑप्शन की मदद से आप स्पेलिंग के ग़लत होने से बच सकते हैं.

3. इसी तरह से ईमेल लिखते समय:

– सही व्याकरण का प्रयोग करें.

– विराम चिह्नों का ज़्यादा इस्तेमाल करने से बचें.

– ईमेल कैपिटल लेटर्स में न लिखें.

– लिखते समय अशिष्ट भाषा का प्रयोग न करें.

– मुख्य बातों को पॉइंट में लिखें.

उपरोक्त बताई गई बातों का ध्यान ज़रूर रखें, विशेष रूप से तब, जब आप ऑफिशियल मेल लिख रहे हों.

4. ‘रिप्लाई-ऑल’ फीचर का प्रयोग सावधानी से करें

जब आपको बहुत सारे व्यक्तियों को मेल का जवाब देना हो, तभी इस फीचर का प्रयोग करें. इस फीचर का प्रयोग सावधानी से करें, क्योंकि ‘रिप्लाई ऑल’ करते समय कई बार मेल ऐसे व्यक्तियों को भी पहुंच जाता है, जिन्हें उस मेल का रिप्लाई नहीं करना होता है. इसलिए इस फीचर का प्रयोग सावधानी के साथ करें.

5. जनरल मेल्स के लिए ‘बीसीसी’ यूज़ करें

यदि आपको बहुत सारे व्यक्तियों को मेल भेजना है, तो ईमेल बॉक्स में दिए गए ‘बीसीसी’ ऑप्शन का इस्तेमाल करें.

6. ज़िप फाइल बनाएं

ईमेल से 8-10 हैवी अटैचमेंट एक साथ न भेजें. हैवी और बहुत सारी अटैचमेंट भेजने से प्राप्तकर्ता का इनबॉक्स अवरुद्ध हो सकता है. इसलिए हैवी अटैचमेंट्स को ‘फाइल-हॉस्टिंग सर्विस’ से भेजें. इसके अलावा हैवी फाइलों की ‘ज़िप फाइल’ या ‘रिसाइज़ पिक्चर’ बनाकर भी भेज सकते हैं. यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को ईमेल कर रहे हैं, जो अपने मोबाइल से ईमेल एक्सेस कर रहा है, तो उसे ज़्यादा अटैचमेंट एक साथ न भेजें.

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Email Etiquette

एब्रिविएशन (संक्षिप्त शब्दों) का

7. इस्तेमाल कम करें: ईमेल लिखते समय संक्षिप्त शब्दों (एब्रिविएशन्स) का प्रयोग कम से कम करें. एब्रिविएशन्स, जैसे- एफवाईआई (ऋधख), पीएफए (झऋअ), पीडीएफ (झऊऋ) और एफवाईआर (ऋधठ), सीयू (उण), एनपी (छझ), डब्ल्यूयू (थण) आदि लिखते समय इस बात का ध्यान रखें कि ईमेल प्राप्तकर्ता (रिसीवर) इन एब्रिविएशन्स के अर्थ समझता भी हो. इसलिए मेल लिखते समय केवल उन्हीं एब्रिविएशन्स का प्रयोग करें, जो प्रचलित हों.

8. फॉन्ट को फॉरमेट करें: ईमेल लिखते समय कैपिटल लेटर्स और बोल्ड फॉन्ट का इस्तेमाल न करें. बोल्ड फॉन्ट और कैपिटल लेटर्स में लिखने से ईमेल प्राप्तकर्ता पर आपका ख़राब इंप्रेशन पड़ सकता है. इसी तरह से टेक्स्ट को बीच-बीच में अंडरलाइन करना, फैंसी फॉन्ट या मल्टीपल फॉन्ट का प्रयोग करने से बचें.

9. ईमेल के टाइप को पहचानें: कोई भी ईमेल पढ़ते समय सावधानीपूर्वक पढ़ें यानी मेल की टोन को पहचानें. हो सकता है वह ऑफिशियल मेल हो या फिर वह पर्सनल मेल भी हो सकता है, जो अशिष्ट व कड़े शब्दों में लिखा गया हो. इसलिए जब भी आप परेशान हों या जब आपका मूड ख़राब हो, तो मेल न लिखें. इन मेल को ‘ड्राफ्ट’ में सेव कर लें या दोबारा पढ़कर शांत दिमाग़ से और अच्छी तरह सोच-समझकर रिप्लाई करें.

10. ‘फॉरवर्ड’ करने से पहले: कोई भी मेल अन्य व्यक्तियों को फॉरवर्ड करने से पहले उसका पहले का पिछला मैटर और मेल-एड्रेस आदि डिलीट (क्लीन-अप) कर लें. इससे प्राप्तकर्ता को आपके द्वारा भेजा गया मेल पढ़ने में आसानी होगी और उसके समय की बचत भी.

11. ‘सेंड’ करने से पहले: पूरा मेल लिखने के बाद ‘टू’ वाला फील्ड चेक करें. कहीं सेंडर की ईमेल-आईडी ग़लत टाइप तो नहीं किया है. कई बार सेंडर के पर्सनल और ऑफिशियल ईमेल-आईडी 2-3 होने के कारण इस तरह की समस्या हो सकती है.

ऑफिशियल ईमेल एटीकेट्स

12. सब्जेक्ट लाइन: प्राप्तकर्ता के इनबॉक्स में सबसे पहले सब्जेक्ट लाइन ही दिखाई देती है. इस सब्जेक्ट लाइन को पढ़कर प्राप्तकर्ता को ईमेल की महत्ता समझ में आ जाती है कि वह मेल कितना महत्वपूर्ण है और किस संदर्भ में लिखा गया है. इसलिए सब्जेक्ट ज़रूर लिखें.

13. सोल्यूशन: ईमेल में मुद्दे की बात लिखने से पहले प्राप्तकर्ता के नाम के आगे ‘डियर’ या पीछे ‘जी’ कहकर संबोधित करें. अगर आप प्राप्तकर्ता का फर्स्ट नेम नहीं जानते हैं, तो उन्हें उनके सरनेम या टाइटल से संबोधित करें.

14. कंसाइज़ बॉडी: इसमें सीधे कम शब्दों में मुद्दे की बात लिखें. यदि आप एक से अधिक विषयों पर अपनी बात कहना चाहते हैं, तो सबसे पहले सबसे महत्वपूर्ण बात लिखें, फिर पॉइंट वाइज़ अन्य बातों का ज़िक्र करें.

15. साइन ऑफ: यदि आप फॉर्मल मेल लिख रहे हैं, तो मेल के अंत में ‘यॉअर्स सिन्सियर्ली’, ‘यॉअर्स फेदफुली’ जैसे संबोधन ज़रूर लिखें. यदि ऑफिशियल मेल या अन्य स्थितियों में मेल लिख रहे हैं, तो अंत में ‘बेस्ट रिगार्ड्स’ और ‘काइन्ड रिगार्ड्स’ जैसे संबोधन ज़रूर लिखें. इससे प्राप्तकर्ता पर आपका अच्छा प्रभाव पड़ेगा. आख़िर में सबसे अहम् बात- पूरा मेल लिखने और भेजने के बाद ‘साइन ऑफ’ करके बंद करें.

– नागेंद्र शर्मा 

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दांपत्य जीवन में ज़रूरी है शिष्टाचार (How to Live a Happy Married Life)

पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर तकरार या झगड़ा होना आम बात है. झगड़ा करते समय अक्सर पति-पत्नी असभ्य भाषा का प्रयोग करते हुए एक-दूसरे को अपमानित करते हैं, जिससे उनके दांपत्य जीवन में दरार आ सकती है. ख़ुशहाल दांपत्य जीवन की सफलता में शिष्टाचार और बेसिक मैनर्स (How to Live a Happy Married Life) की भूमिका भी अहम् होती है. इससे पार्टनर्स में एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान की भावना बढ़ती है.

How to Live a Happy Married Life

शादी दो लोगों के बीच एक ऐसा खट्टा-मीठा रिश्ता है, जो जितना पुराना होता जाता है, उनके बीच प्यार और विश्‍वास की नींव उतनी ही गहरी होती जाती है. इस नींव की मज़बूती तभी कायम रह सकती है, जब उनके रिश्ते में एक-दूसरे के लिए आदर, सम्मान और शिष्टाचार की भावना हो. आज तलाक़ लेनेवाले दंपतियों की संख्या जिस तेज़ी से बढ़ रही है, उसके पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि उनके दांपत्य जीवन से ‘शिष्टाचार’ और ‘एटीकेट्स’ जैसे शब्द गायब होते जा रहे हैं. पति-पत्नी के बीच अशिष्ट भाषा का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है, जो धीरे-धीरे उनके सुखी वैवाहिक जीवन को खोखला बना रहा है.

क्यों ज़रूरी है दांपत्य जीवन में शिष्टता?

– आपसी रिश्ते में मज़बूती लाने के लिए.

– एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान का भाव बनाए रखने के लिए.

– एक-दूसरे के लिए प्यार बनाए रखने के लिए.

How to Live a Happy Married Life

शिष्टाचार संबंधी कुछ ज़रूरी बातें

पतियों के लिए

– कुछ पतियों की आदत होती है कि घर के कामों में पत्नियों की मदद नहीं करते, बल्कि उनके कामों को और बढ़ा  देते हैं. यदि आप घर के कामों में पत्नी की मदद नहीं कर सकते हैं, तो उनके कामों को और बढ़ाएं भी नहीं.

– यदि आप पत्नी की मदद करना चाहते हैं, तो पहले उनसे पूछ लें कि आप किस तरह से उनकी मदद कर सकते हैं.

– ऐसा करने से पति का सम्मान कम नहीं होता है, बल्कि उन्हें अच्छा लगता है कि पति उन्हें सपोर्ट करना चाह रहे हैं.

– पति अपनी चीज़ों की देखभाल, साज-संभाल स्वयं करें.

– हर छोटे-छोटे काम के लिए पत्नी को बोलने की बजाय कुछ काम ख़ुद करें.

– कुछ व्यक्तियों की काम को टालने की आदत होती है. बेहतर होगा कि काम को टालने की बजाय पत्नी को पहले ही स्पष्ट रूप से बता दें कि आप उनकी मदद नहीं कर सकते, क्योंकि यदि आप काम टालते रहेंगे, तो आपकी इस आदत से परेशान होकर वह धीरे-धीरे आप पर विश्‍वास खोने लगेगी, जो दांपत्य जीवन के लिए ठीक नहीं है.

– पत्नी चाहे हाउसवाइफ हो या वर्किंग, बातचीत के दौरान शिष्टता बनाए रखें. अधिकतर पतियों की यह आदत होती है कि वे पत्नियों के साथ सही ढंग से बात नहीं करते. उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह आपकी पत्नी है. वह भी आपसे उतना ही सम्मान चाहती है, जितना आप उनसे. यदि आप उनसे बेसिक मैनर्स, शिष्टाचार और आदर-सम्मान की उम्मीद रखते हैं, तो वे भी आप से ऐसे ही व्यवहार की अपेक्षा रखती हैं.

– पत्नी के साथ बाहर जाते समय कुछ छोटी किंतु महत्वपूर्ण शिष्टाचार संबंधी बातों का ध्यान ज़रूर रखें, जैसे- शॉपिंग बैग्स उठाना, कार में बैठने से पहले उनके लिए दरवाज़ा खोलना, बाहर लंच या डिनर के समय चेयर ऑफर करना आदि. ये बेसिक मैनर्स महिलाओं को, ख़ासकर पत्नियों को बेहद अच्छे लगते हैं. पत्नियों को भी यह एहसास होता है कि वे अपने पति के लिए ‘स्पेशल’ हैं.

– समय-समय पर पत्नी को उपहार ज़रूर दें. ज़रूरी नहीं कि उपहार में डायमंड-गोल्ड की ज्वेलरी, डिज़ाइनर साड़ियां, क़ीमती सामान आदि ही दिए जाएं. उपहार देकर उन्हें यह एहसास कराएं कि वे आपके लिए ख़ास हैं.

– पत्नी के सामने कभी भी उनकी सहेलियों की तारीफ़ न करें, न ही उनसे ज़्यादा घुलने-मिलने की कोशिश करें. पत्नियों को पति की यह आदत बिल्कुल अच्छी नहीं लगती.

– समय-समय पर पत्नी को ‘मिस यू’, ‘लव यू’ ज़रूर कहें. अच्छा काम करने पर उन्हें कॉम्प्लीमेंट्स दें या एप्रिशिएट करें.

– ऑफिस के काम को घर में न लाएं.

– घर या बाहर, जब भी पत्नी आपके साथ हो, तो मोबाइल, लैपटॉप आदि को नज़रअंदाज़ करें. नहीं तो उन्हें यह महसूस होगा कि आप उन्हें अनदेखा कर रहे हैं.

– आप चाहे कितने ही व्यस्त क्यों न हों, परिवार के लिए समय ज़रूर निकालें.

– शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखें.

– गंदे मोजे, गंदी बनियान और गंदा रुमाल आदि चीज़ें कहीं भी फेंकने की बजाय लॉन्ड्री बैग में रखें.

– गीला तौलिया बिस्तर पर छोड़ने की बजाय सूखने के लिए डाल दें.

How to Live a Happy Married Life

शिष्टाचार संबंधी कुछ ज़रूरी बातें

पत्नियों के लिए

– पतियों को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता कि पत्नियां उन्हें बात-बात पर टोकें, उनमें कमी निकालें.

– पति को स्पेस दें. हर समय उन पर शक करने या जासूसी करने से आपका दांपत्य जीवन ख़तरे में पड़ सकता है.

– अपनी सहेलियों, पति के दोस्तों, ससुराल व मायकेवालों के सामने पति की बुराई न करें. इससे न केवल पति की इमेज ख़राब होगी, बल्कि आपका इम्प्रेशन भी ख़राब होगा.

– घर हो या बाहर, दोस्तों, रिश्तेदारों के सामने पति को रिसपेक्ट दें. उनकी कमियों के बारे में दूसरों से न बोलें, न ही ताने मारें.

– हर समय पति के सामने ससुराल व बच्चों की शिकायतों का रोना न रोएं. आपके ऐसे व्यवहार से परेशान होकर पति आपसे बचने की कोशिश करने लगेंगे.

– पति को हर छोटी-छोटी बात के लिए फोन या एसएमएस करके परेशान न करें.

– भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करने की कोशिश न करें.

– छोटी-छोटी तकरार होने पर बार-बार मायके जाने या बच्चों को छोड़कर जाने की धमकी न दें.

– व़क्त-बेव़क्त पति के सामने उनकी कम तनख़्वाह और महंगाई का रोना न रोएं.

– छोटी-छोटी बातों की ज़िद न करें, जैसे- मुझे आज ही शॉपिंग के लिए जाना है या आज डिनर के लिए हम बाहर जाएंगे आदि.

– पति व बच्चों के साथ बाहर जाते समय पहनावे का ख़ास ध्यान रखें.

– पति के लिए कुछ समय ज़रूर निकालें, जैसे- साथ बैठकर कॉफी पीएं, वॉक पर जाएं.

– घर-बाहर की ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपनी फिटनेस व ब्यूटी का भी ध्यान रखें.

– देवांश शर्मा

बच्चों को सिखाएं शिष्टाचार

सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि लोग उनके बच्चे के व्यवहार से प्रभावित हों, उनकी प्रशंसा करें, मगर बच्चे अक्सर लोगों के सामने ऊटपटांग हरकतें करना शुरू कर देते हैं. उनके व्यवहार के कारण कभी-कभी पैरेंट्स को शर्मिंदा भी होना पड़ता है. इसी शर्मिंदगी से बचने के लिए बच्चों को एटीकेट यानी शिष्टाचार सिखाना बहुत ज़रूरी है.

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इंट्रोडक्शन एटीकेट्स

आपके बच्चों को आपसे बेहतर कोई नहीं सिखा सकता, इसलिए यह पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है कि वे बच्चों को ये बातें सिखाएं-
अक्सर घर में मेहमान आने पर बच्चे अपने काम या खेल में व्यस्त रहते हैं. उन्हें यह सिखाएं कि जब भी घर पर कोई मिलने आए, तो अपनी जगह पर ही बैठे न रहें, बल्कि खड़े होकर मुस्कुराकर ‘नमस्ते’ से उनका अभिवादन करें.
कुछ बच्चे बड़ों की बातों को सुनते हुए भी अनसुना कर देते हैं, अगर घर पर कोई मेहमान आ रहा है या आप कहीं बाहर जा रहे हैं, तो बच्चों को पहले से ही समझाएं कि वे बड़ों की बातों को ध्यान से सुनें और उसमें रुचि दिखाएं. यह उनके प्रति आदर दिखाने का एक तरीक़ा है.
आजकल घर आनेवाले ज़्यादातर मेहमान छोटे बच्चों से भी हैंडशेक करना पसंद करते हैं. इसलिए आपके बच्चे को हैंडशेक करना आना चाहिए.
हैंडशेक के बाद बच्चे से ‘नाइस टू मीट यू’ या ‘आपसे मिलकर ख़ुशी हुई’ अवश्य कहलवाएं. मेहमान को यह बहुत अच्छा लगेगा और आपके द्वारा दिए गए अच्छे संस्कारों की वे प्रशंसा किए बगैर नहीं रह पाएंगे.
फोन पर किसी से कैसे बात करें, यह भी बच्चे को शुरू से ही सिखाएं. उन्हें बताएं कि जब भी अपने दोस्त के घर फोन करें, तो पहले अपना नाम बताएं. यदि फोन पर कोई बड़ा व्यक्ति हो, तो उन्हें ‘नमस्ते’ कहें और पूछें कि ‘क्या मैं अमुक व्यक्ति से बात कर सकता हूं.’

टॉकिंग एटीकेट्स

‘प्लीज़’ और ‘थैंक यू’ कहने में भले ही दो छोटे लफ़्ज़ हैं, पर ये आपके अच्छे संस्कार दर्शाते हैं. बच्चों को बचपन से ही यह सिखाएं कि जब भी किसी से कुछ मांगें तो ‘प्लीज़’ और जब भी कोई उन्हें कुछ दे, तो ‘थैंक यू’ ज़रूर कहें.
कुछ बच्चे घर में तो ख़ूब बोलते हैं, लेकिन रिश्तेदारों के सामने एकदम चुप्पी साध लेते हैं, जो ठीक नहीं है. इसलिए बच्चों को सिखाएं कि जब भी कोई उनसे पूछे “बेटा कैसे हो?” तो मुस्कुराकर जवाब दें. साथ ही उनसे भी पूछें कि वे कैसे हैं?
जब भी बच्चा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने या अन्य किसी काम से उनके घर जाए, तो निकलते व़क्त दोस्त के पैरेंट्स को साथ में समय बिताने, ध्यान रखने और खाने-पीने की चीज़ें देने के लिए ‘धन्यवाद’ अवश्य कहना चाहिए.
बच्चों को यह सिखाना बहुत ज़रूरी है कि जब भी बड़े लोग आपस में बातें कर रहे हों, तो वे बीच में न बोलें.
ग़ुस्से में अक्सर बच्चे अपशब्दों का प्रयोेग करते हैं. ऐसे में पैरेंट्स उन्हें शुरू से ही सिखाएं कि वे गाली-गलौज न करें, क्योंकि उन्हें     गाली-गलौज करते देख दूसरे उनके बारे में ग़लत राय बनाएंगे.
बच्चों को सिखाएं कि जब भी टीचर से बात करें, तो हाथ हमेशा पीछे रखें और सीधे खड़े होकर बात करें. अगर टीचर्स उनकी कोई समस्या सुलझाएं, तो उन्हें ‘थैंक यू’ कहना न भूलें.

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सोशल एटीकेट्स

बच्चों को बचपन से ही सिखाएं कि जब भी छींक या खांसी आ रही हो, तो अपने मुंह पर हाथ या रूमाल रखें. सबके सामने नाक या मुंह में उंगली ना डालें.
अक्सर स्कूल के कार्यक्रम या असेंबली में बच्चे अपने दोस्तों के साथ मिलकर शोर-शराबा करते हैं, उन्हें समझाएं कि ये कार्यक्रम ख़ास उनके लिए ही बहुत मेहनत से तैयार किए जाते हैं, इसलिए ख़ुद भी एंजॉय करें और दूसरों को भी करने दें.
अक्सर शरारती बच्चे कमज़ोर या शांत रहनेवाले बच्चों को डराते हैं या उन्हें टारगेट बनाकर तंग करते हैं. जैसे ही आपको इस बारे में पता चले, तो बच्चों को प्यार से समझाएं कि यह ग़लत है. कभी किसी का मज़ाक न उड़ाएं और न ही बेवजह सताएं.
बचपन से ही बच्चों में दूसरों की मदद करने की आदत डालें. उन्हें सिखाएं कि घर या बाहर जब भी कोई उनसे मदद मांगे, तो मुस्कुराते हुए उनकी मदद करें.
बच्चों को यह सिखाना भी बहुत ज़रूरी है कि जब भी वो किसी के घर जाएं, तो हमेशा दरवाज़े पर ‘दस्तक’ ज़रूर दें. बिना दस्तक दिए या कॉलबेल बजाए किसी के घर में न जाएं.
शेयरिंग बहुत अच्छी आदत है. चाहे घर पर हों या बाहर बच्चों को अपने दोस्तों और दूसरे बच्चों के साथ खिलौने शेयर करने की आदत डालें.
बच्चों को शिष्टाचार सिखाते व़क्त यह भी ध्यान रखें कि आप जो बातें उन्हें सिखा रहे हैं, उन्हें पहले ख़ुद अमल में लाएं, क्योंकि बच्चे देखकर जल्दी सीखते हैं.

ईटिंग एटीकेट्स

बच्चों को सिखाएं कि खाना खाते समय गर्दन के नीचे नैपकिन अवश्य लगाएं. बीच-बीच में मुंह पोंछें. कई बार खाना मुंह पर लग जाता है और पता ही नहीं चलता, जो देखने में बहुत बुरा लगता है. बड़े बच्चे पेपर नैपकिन्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.
बच्चों को खाना छोटे-छोटे कौर लेकर धीरे-धीरे चबाकर खाने के लिए कहें. ध्यान रखें कि खाना खाते समय चबाने की आवाज़ न आए और न ही खाना खाते समय वो बात करें.
यदि बच्चे की पसंदवाली खाने की चीज़ें नहीं हैं, तो बच्चे को समझाएं कि उसका इश्यू न बनाएं. इससे पैरेंट्स को शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी.

पार्टी एटीकेट्स

बच्चे पार्टी में अपने दोस्तों के साथ मस्ती करने में इतने खो जाते हैं कि कई बार सारे मैनर्स भूल जाते हैं. दूसरों की बर्थडे पार्टी के गिफ्ट्स उत्सुकतावश खोलकर देखना शुरू कर देते हैं. पार्टी में जाने से पहले उन्हें अच्छी तरह समझाएं कि वहां ऐसा न करें.
कई बार बच्चे शर्म व संकोच के कारण बर्थडे पार्टी में खेले जानेवाले गेम्स में भाग नहीं लेते. बच्चे को वहीं डांटने की बजाय पार्टी में ले जाने से पहले ही उसे बताएं कि ये गेम्स उन्हीं के लिए रखे गए हैं और अगर वे भाग नहीं लेंगे, तो उनके दोस्त को बुरा लगेगा.
यदि आपके घर में बर्थडे पार्टी है, तो बच्चे को मेहमानों के साथ सही व्यवहार का तरीक़ा सिखाएं, यह भी बताएं कि मिलनेवाले गिफ्ट्स सबके सामने न खोलें.
अपनी बर्थडे पार्टी में गिफ्ट मिलने पर ‘थैंक यू’ कहें. यदि आप पार्टी में रिटर्न गिफ्ट दे रहे हैं, तो उस पर ‘थैंक यू’ नोट लगाकर दें. बड़े बच्चे सोशल नेटवर्किंग साइट्स या मैसेजिंग के ज़रिए भी ‘थैंक यू नोट’ भेज सकते हैं. इससे सामनेवाले पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है.
                                                                                                                                                             – डॉ. सुषमा श्रीराव

चम्मच से नहीं, हाथ से खाइए (The Benefits of Eating With Your Hands)

वेस्टर्न कल्चर के चलते रेस्तंरा में या दूसरी जगहों पर बिना चम्मच-कांटे के भोजन करना बैड मैनर्स माना जाता है. लेकिन अगर आपसे एक सवाल पूछा जाए कि आपको चम्मच, छुरी-कांटे से खाना आसान लगता है या हाथ से? यक़ीनन हर कोई ये बात मानेगा कि हाथ से खाना ज़्यादा आसान है. आपको बता दें हाथ से खाना स़िर्फ आसान ही नहीं, बल्कि सेहतमंद भी होता है.

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हाथ से खाने के फ़ायदे

  • हाथों से खाना उठाते व़क्त इसका स्पर्श दिमाग़ को अलर्ट कर देता है और मस्तिष्क पहले ही खाना पचाने के लिए पेट को संकेत दे देता है, जिससे पेट गैस्ट्रिक जूस रिलीज़ करना शुरू कर देता है और खाना ठीक से पचता है.
  • चम्मच से खाने पर माइंडफुल ईटिंग नहीं हो पाती, क्योंकि खाने से ज़्यादा ध्यान चम्मच पर होता है. जबकि हाथ से खाने पर ध्यान अपने कौर और खाने पर होता है, जिसे देखकर ही पेट भरने का एहसास होने लगता है.
  • अमेरिका में हुई एक रिसर्च के मुताबिक़, हाथ से खाने से संतुष्टि मिलती है और ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. ओवरईटिंग न करने से मोटापा भी नहीं बढ़ता.
  • हाथ से खाने से जीभ जलने का ख़तरा नहीं रहता, क्योंकि हाथ से कौर उठाते व़क्त अंदाज़ा लग जाता है कि खाना कितना गर्म है, जबकि चम्मच से यह संकेत दिमाग़ तक नहीं पहुंचता.

ध्यान दें

खाने से पहले और बाद में हाथों को पानी और साबुन या एंटीबैक्टीरियल हैंड वॉश से अच्छी तरह से धो लें.

आयुर्वेद में हाथ से भोजन करना सेहत की दृष्टि से अच्छा माना गया है

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर पंच तत्वों से बना है- पृथ्वी, वायु, आकाश, जल व अग्नि. इनमें होनेवाला असंतुलन शरीर में कई बीमारियों का कारण बन सकता है. हाथ से कौर बनाते समय जो मुद्रा बनती है, उससे शरीर में इन पांचों तत्वों का संतुलन बरक़रार रहता है और शरीर की एनर्जी
बनी रहती है.