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एग्ज़ाम गाइड- कैसे करें परीक्षा की तैयारी? (Exam Guide- How To Prepare For The Examination?)

अक्सर परीक्षा (Exam) को लेकर बच्चों (Kids) के मन में एक अनजाना-सा डर बना ही रहता है. ऐसे में पैरेंट्स के साथ-साथ टीचर्स की भी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़ने दें. इसलिए एग्ज़ाम के पहले और दौरान अभिभावकों को विशेष ध्यान देना चाहिए कि बच्चे के दिलोदिमाग़ पर किसी बात का बुरा असर न पड़े. इस संबंध में हिंदुजा हेल्थकेयर के कंसल्टेंट सायकोलॉजिस्ट डॉ. केरसी चावड़ा और परमिंदर निज्जर ने भी कई उपयोगी जानकारियां दीं.

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पैरेंटिंग केयर

* बच्चे को सकारात्मक और तनावमुक्त वातावरण दें. यानी घर में बेवजह के झगड़ों से बचें, ख़ासकर पति-पत्नी उलझें नहीं.

* मां बच्चे के भोजन में पौष्टिकता का ध्यान रखे. अक्सर मांएं लाड़-दुलार में या फिर बच्चे की ज़िद पर उसे जंक फूड, फास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि ज़रूरत से अधिक पीने पर रोकती या टोकती नहीं हैं. यह ठीक नहीं है. परीक्षा के समय इस बात का विशेष ख़्याल रखें कि बच्चा घर का ही स्वादभरा, पर सिंपल भोजन करें.

* पिता भी बच्चे से पढ़ाई से जुड़ी परेशानियां को जानने-समझने की कोशिश करें. उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करते रहें.

* जब पैरेंट्स बच्चों की पढ़ाई को लेकर नियम बनाते हैं, तब उन्हें भी इसका अनुसरण करना चाहिए. यदि आप बच्चे को टीवी, फिल्म, मनोरंजन आदि के लिए मना करते हैं, तो परीक्षा के दिनों तक आप भी इनसे दूरी बनाए रखें.

* परीक्षा के दिनों में पढ़ाई को लेकर पैरेंट्स अधिक एग्रेसिव न बन जाएं यानी बच्चे को डांटना, मारना, पढ़ने के लिए अधिक दबाव बनाना आदि न करें. ध्यान रहे, इससे बच्चे को घबराहट, पेटदर्द, सांस लेने में तकलीफ़, तनाव आदि जैसी समस्या हो सकती है. इसलिए थोड़ा स्ट्रेस ठीक है, पर अधिक स्ट्रेस नुक़सानदायक हो सकता है.

* पढ़ने के लिए सुबह जल्दी उठना हो, तो यह ज़रूरी है कि बच्चे रात को समय पर जल्दी सोएं. इसके लिए पढ़ने की और रिविज़न करने की समय सीमा निर्धारित कर ली जाए, तो बेहतर है.

* अपने ऑफिस-घर आदि के कामों से समय निकालकर बच्चे की पढ़ाई व परीक्षा में दिलचस्पी लें, वरना कई पैरेंट्स बस स्कूल, ट्यूशन, क्लासेस लगा देने भर से ही अपनी ज़िम्मेदारियां ख़त्म समझते हैं. जबकि एग्ज़ाम के समय बच्चों को पैरेंट्स के साथ, सहयोग, प्रोत्साहन की ख़ास ज़रूरत होती है.

* यदि कोई रिश्तेदार या फिर मेहमान बच्चों की परीक्षा के दिनों में आना चाहे, तो विनम्रतापूर्वक उन्हें वस्तुस्थिति बताकर मना कर दें.

* यदि बच्चे को कोई सब्जेक्ट डिफिकल्ट लग रहा है, तो पैरेंट्स उसे डांटने-फटकराने, तुम करना नहीं चाहते… तुम पर कितने पैसे ख़र्च कर रहे हैं… जैसी निगेटिव बातें न कहें.  उसकी डिफिकल्टी को समझें और उसे दूर करने की कोशिश करें. साथ ही जिन विषयों में वो अच्छा कर रहा है, उसकी तारीफ़ करें, उसे शाबाशी दें.

टीचर्स डायरेक्शन

* पैरेंट्स को बच्चों की क्लास टीचर से परीक्षा से पहले ज़रूर मिलना चाहिए, ताकि वे जान सकें कि उनका बच्चा किस विषय में अच्छा और किसमें कमज़ोर है. इससे बच्चे की एक्स्ट्रा केयर करने में मदद मिलेगी.

* शिक्षकों का भी यह फर्ज़ बनता है कि वे परीक्षा से पहले स्टूडेंट्स के पैरेंट्स को उनके बच्चे हर तैयारी से अवगत कराएं.

* पैरेंट्स मीटिंग में बच्चे के दिए गए रिपोर्ट्स, इम्प्रूवमेंट आदि को चेक करके उसके अनुसार माता-पिता का मार्गदर्शन करें कि उन्हें परीक्षा के समय बच्चे की किन बातों पर अधिक ध्यान देना है.

* समय के साथ बहुत कुछ बदला है. दरअसल, एग्ज़ाम केवल बच्चे का ही नहीं होता, बल्कि उनके मम्मी-पापा, टीचर्स, परिवार, स्कूल आदि भी

जाने-अनजाने में इसमें शामिल होते हैं. फिर वो मानसिक रूप से हों या बौद्धिक तौर पर.

* आज टीचर्स की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं. उन्हें भी स्टूडेंट्स की पढ़ाई के साथ-साथ उनके बैकग्राउंड, माहौल आदि के बारे में अपडेट होना पड़ता है, ताकि वे बच्चों को सही शिक्षा दे सकें और उनका उचित मार्गदर्शन कर सकें.

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स्टूडेंट्स-मास्टर स्ट्रोक्स

* छात्र-छात्राओं दोनों को ही एग्ज़ाम को पॉज़िटिवली लेना चाहिए.

* सालभर उन्होंने जितनी मेहनत व पढ़ाई की है, उसी पर अधिक ध्यान दें. ऐन एग्ज़ाम के समय कुछ नया पढ़ने की कोशिश न करें.

* सभी विषय के हर चैप्टर का पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ रिविज़न करें.

* एग्ज़ाम फोबिया से बचें. यानी इसे लेकर डरें, घबराएं नहीं. ख़ुद पर और अपनी तैयारी पर विश्‍वास करें.

* एग्ज़ाम से एक दिन पहले जल्दी सो जाएं. यानी सब कुछ अभी तक पढ़ा नहीं, कुछ छूट गया है, ये भी महत्वपूर्ण है, अरे वो तो पढ़ना बाकी रह गया… इस तरह की दुविधा में न फंसें. आपने जितनी अच्छी तरह से जो पढ़ा है, बस परीक्षा से पहले उसे एक बार सरसरी तौर पर देख लें.

* एग्ज़ाम हॉल में समय से थोड़ा पहले पहुंचें, ताकि अपनी सीट, रूम आदि को देख-समझ सकें.

* सबसे ज़रूरी बात अपनी परीक्षा की तैयारी को बेहतर समझें और उसी सोच के साथ सकारात्मक होकर परीक्षा दें. ऑल द बेस्ट!

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एग्ज़ाम अलर्ट…

* एग्ज़ाम के समय अच्छी नींद लेना बहुत ज़रूरी है. यानी कम से कम 7-8 घंटे की नींद, ताकि अगले दिन परीक्षा के समय स्टूडेंट्स फ्रेश व एनर्जिटिक रहें.

* अक्सर परीक्षा के दिनों में बच्चे खाना कम खाते हैं या फिर नहीं खाते. ऐसा न करें, क्योंकि ऐसा करने से परीक्षा के समय घबराहट व हल्की बेचैनी-सी होने लगती है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि परीक्षा चाहे सुबह की हो या दोपहर की- स्टूडेंट्स अच्छी तरह से नाश्ता करके जाएं. इससे उनका एनर्जी लेवल बेहतर रहेगा.

* एग्ज़ाम के समय एक पेपर हो जाने के बाद उस पर चर्चा न करते बैठें. न ही बच्चे व अभिभावक माथापच्ची करते रहें कि इस सवाल को और भी अच्छे से कर सकते थे. इस सवाल पर इतना नंबर मिलेगा, इस पर अधिक नंबर कटेंगे इत्यादि करने की बजाय जो पेपर हो चुका है, उसे भूल जाएं और फ्रेश मूड से अगले पेपर की तैयारी करें.

* एग्ज़ाम के दौरान दिनभर पढ़ाई के अलावा बीच-बीच में ब्रेक ज़रूर लें. साथ ही आधा या एक घंटा कोई भी फिजिकल एक्टीविटीज़, जैसे- वॉकिंग, रनिंग, प्राणायाम, योग या फिर टहलना आदि ज़रूर करें. इससे बच्चे की बैटरी पूरी तरह चार्ज हो जाएगी और वे तरोताज़ा भी महसूस करेंगे.

* हर बच्चा युनीक होता है. फिर चाहे वो पढ़ाई में एवरेज हो या फिर बहुत अच्छा. यह ज़रूरी नहीं कि जो बच्चे 95-99% लाते हैं, वे ही ज़िंदगी में कामयाब होते हैं. कई बार देखा गया है कि जो बच्चे पढ़ाई में औसत दर्जे के रहे, वे भी जीवन में बेहद सफल रहे हैं. ध्यान रहे पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं. अतः अच्छी सोच, ईमानदारीभरी मेहनत और कॉन्फिडेंस के साथ एग़्जाम दें.

– ऊषा गुप्ता

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

एग्ज़ाम टाइम: क्या करें कि बच्चे पढ़ाई में मन लगाएं? (Exam Time: How To Concentrate On Studies)

क्या करें कि बच्चे पढ़ाई (Studies) में मन लगाएं? उपाय आसान है, साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर माधवी सेठ बता रही हैं कुछ आसान उपाय (Easy Steps) जिनसे आपका बच्चा पढ़ाई में मन लगाएगा और उसका बौद्धिक विकास भी होगा. आप भी जानें वो आसान उपाय जिनसे आप अपने बच्चे को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं..

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एग्ज़ाम टाइम में बच्चों को टेंशन से ऐसे रखें दूर:
मार्च का महीना आते ही बच्चों से लेकर पैरेंट्स तक की दिल की धड़कन बढ़ जाती हैं. एग्ज़ाम के समय बच्चों के दिमाग पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है, ऐसे में बच्चों को टेंशन से दूर कैसे रखें, ये जानना पैरेंट्स के लिए बहुत ज़रूरी है. पढ़ाई और परीक्षा के तनाव से बच्चे को कैसे दूर रखा सकता है? आइए, जानते हैं.

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क्या करें पैरेंट्स कि बच्चे पढ़ाई में मन लगाएं?

1) घर का माहौल ख़ुशनुमा व शांत बनाए रखने की कोशिश करें.

2) बच्चे को हमेशा सही टाइम पर पढ़ने, पढ़ाई से ब्रेक लेने और सोने के लिए प्रोत्साहित करें. बिना ब्रेक के लगातार पढ़ते रहने से वो तनावग्रस्त हो सकते हैं.

3) बच्चे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहें. उससे पूछती रहें कि क्या उसे आपकी कोई मदद चाहिए?

4) बच्चे पर किसी तरह का दबाव न डालें. बेटा तुम्हें 90 प्रतिशत नंबर लाने ही होंगे… जैसे वा़क्य ग़लती से भी न कहें.

5) यदि परीक्षा के दौरान बच्चे का व्यवहार सही नहीं है, तो ग़ुस्सा होने की बजाय ख़ुद पर क़ाबू रखें और प्यार से उसे समझाने की कोशिश करें.

6) एग्ज़ाम पीरियड में उसे किसी भी तरह का घर का काम न दें और न ही कोई ऐसी बात कहें जिससे उसका ध्यान पढ़ाई से हटे.

7) पढ़ाई को लेकर बच्चे के पीछे न पड़ी रहीं रिलैक्स व फ्रेश होने के लिए उन्हें थोड़ी देर खेलने व टीवी देखने की छूट दें.

8) एग्ज़ाम का हौव्वा न बनाएं उसे सामान्य तरी़के से लें.

9) बच्चे के सामने ये कभी न ज़ाहिर करें कि आप उनकी परीक्षा को लेकर चिंतिंत हैं.

10) अपने बच्चे को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें और उसके साथ प्यार से पेश आएं.

क्या करें कि बच्चे पढ़ाई में मन लगाएं? देखें वीडियो:

 

एग्ज़ाम टाइम में बच्चे ऐसे करें पढ़ाई:

1) एग्ज़ाम को लेकर घबराए नहीं, इसे सामान्य तरी़के से लें. घबराने से कई बार आप आती हुई चीज़ भी भूल सकते हैं.

2) यदि आपको परीक्षा का डर सता रहा है तो अपने दोस्तों या पैरेंट्स से बात करें. डर की भावना को अंदर ही अंदर न समेटें.

3) एग्ज़ाम को लेकर अपना दृष्टिकोण बदलें, माना कि ये आपकी ज़िंदगी का अहम् हिस्सा है लेकिन ये ज़िंदगी नहीं. कई क़ामयाब लोग परीक्षा में अच्छा नहीं कर पाएं, लेकिन ज़िंदगी में सफल हुए. अतः अपना बेस्ट देने की कोशिश ज़रूरी करें, लेकिन नतीजे के बारे में सोचकर परेशान न हों.

4) पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बना लें कितनी देर पढ़ना है? कब ब्रेक लेना है? कौन-सा सब्जेक्ट पहले पढ़ना है? आदि.

5) लगातार पढ़ने की बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेकर ख़ुद को फ्रेश करते रहें. एग्ज़ाम के पहले अच्छी तरह रिविज़न कर लें.

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परीक्षा के दौरान ऐसी हो बच्चों की डायट

परीक्षा के दौरान बच्चों को स्ट्रेस फ्री और हेल्दी रखने में डायट की भी अहम् भूमिका होती है. एग्ज़ाम टाइम में बच्चों की डायट कैसी होनी चाहिए? बता रही हैं न्यूट्रीशनिस्ट व डायट कंस्लटेंट शिल्पा मित्तल.

1) बच्चे के दिन की अच्छी शुरुआत के लिए ब्रेकफास्ट बहुत ज़रूरी है, इसे स्किप करने की ग़लती न करें. ये बच्चे को कॉन्सन्ट्रेट करने और चीज़ों को याद रखने में मदद करता है. ब्रेकफास्ट में स्टार्च से भरपूर व मीठी चीज़ें जैसे- शीरा (हल्वा) और व्हाइट ब्रेड की जगह फाइबर युक्त चीज़ें जैसे- दलिया, पोहा, उपमा और होल वीट ब्रेड सैंडविच दें.

2) रोज़ना कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए.

3) बच्चे के खाने में ताज़े फल व हरी पत्तेदार सब्ज़ियों की मात्रा ज़्यादा रखें.

4) बच्चे के लिए प्रोटीन भी बेहद ज़रूरी है. अतः खाने में दाल, स्प्राउट्स (अंकुरित मूंग, चना), सोया, दूध से बनी चीज़ें, सी फूड, लीन मीट, अंडा आदि को शामिल करें.

5) कैलोरीज़ की मात्रा कम रखने के लिए कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, फ्रायड स्नैक्स, एनर्जी ड्रिंक आदि से बच्चे को दूर रखें. इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका बच्चा अल्कोहल और तंबाकू आदि से भी दूर रहे.

6) अच्छी तरह से पढ़ने के लिए फिज़िकल व मेंटल एनर्जी ज़रूरी है, जिसे मेंटेन रखने के लिए बच्चे को आयरन से भरपूर चीज़ें जैसे- रेड मीट, रागी, पालक आदि दें. साथ ही विटामिन बी युक्त होल ग्रेन (साबूत अनाज), अंकुरित गेहूं, अंडे, बादाम आदि को भी उनकी डायट में शामिल करें. फिश और सोया भी बच्चों की ब्रेन पावर बढ़ाते हैं.

7) यदि आपका बच्चा लाइब्रेरी जा रहा है, तो उसके टिफिन में सेब, केला, संतरा, गाजर और एप्रीकॉट रखें. ये चीज़ें फाइबर, बीटा कैरोटीन और मिनरल्स की अन्य ज़रूरतों को पूरा करके बच्चे को एनर्जेटिक रखेगी.

8) एक ही बार ज़्यादा खाना देने की बजाय दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा करके खाना दें. इससे शरीर और मस्तिष्क दोनों को ज़रूरी पोषक तत्व मिलते रहेंगे. बच्चे को स्नैक्स के तौर पर समोसा, बर्गर, नमकीन और पैटीज़ आदि खाने से मना करें, इसकी जगह बादाम, काजू, पिस्ता या सूखा भेल व चना चाट का विकल्प बेहतर है.

9) बच्चे के शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए रस वाले फल व सब्ज़ियों को खाने में शामिल करें, इसे खाने के बाद उन्हें नींद नहीं आएगी. उनके लिए तरबूज़, खरबूज़, स्ट्रॉबेरी, संतरा और मौसंबी जैसे फल अच्छे रहेंगे.

10) बादाम, अखरोट, कद्दू का बीज और तरबूज़ का बीज स्मरण शक्ति बढ़ाने के साथ ही कॉन्सन्ट्रेशन में भी मदद करता है.

11) बच्चे को बहुत ज़्यादा स्टार्च युक्त सब्ज़ियां जैसे- आलू, शकरकंद आदि खाने से रोकें. क्योंकि ये खाने से उन्हें नींद आ सकती है. साथ ही कॉन्स्टीपैशन की समस्या भी हो सकती है.

12) एग्ज़ाम के समय बच्चों को चपाती के साथ हल्की सब्ज़ी जैसे लौकी, गाजर मेथी आदि दें.

13) परीक्षा के समय बच्चों के दिमाग़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, ऐसे में मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने लिए एंटी ऑक्सीटेंड जैसे- विटामिन ए, सी और ई से भरपूर अंडा, फिश, गाजर, कद्दू, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और ताज़े फल को उनकी डायट में शामिल करें. ये न स़िर्फ मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाकर बच्चों को बीमारियों से भी बचाते हैं.

14) नियमित एक्सरसाइज़ खासकर प्रणायाम (ब्रिदिंग एक्सरसाइज़) मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है जिससे तनाव कम हो जाता है.

15) ज़िंदगी के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाएं.

16) रात को ज़्यादा देर तक पढ़ने के लिए बच्चे अक्सर चाय/कॉफी का सहारा लेते हैं, ये उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है. अतः उन्हें बहुत ज़्यादा चाय/कॉफी पीने से रोके.

17) थकान, चिंता और डिप्रेशन से बचने के लिए नींद पूरी होनी ज़रूरी है. अतः परीक्षा के दौरान इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि आपका बच्चा पर्याप्त नींद ले, वरना वो रिलैक्स होकर एग्ज़ाम नहीं दे पाएगा.

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बच्चों को बुद्धिमान बनाने के लिए आज़माएं ये फेंगशुई टिप्स:

फेंगशुई के ज़रिए कैसे आप अपने बच्चे की पढ़ाई में दिलचस्पी बढ़ाकर बुद्धिमान बना सकती हैं बता रही हैं फेंगशुई कंसल्टेंट दीप्ति एच अरोरा.

1) बच्चों का बेडरूम
बच्चों का बेडरूम उत्तर-पूर्व दिशा में बनवाएं. फेंगशुई के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा का संबंध बल, बुद्धि और शौर्य से होता है. शिक्षा की दृष्टि से यह दिशा अत्यंत शुभ मानी जाती है.

2) स्टडी टेबल
बच्चों के कमरे में स्टडी टेबल ऐसी जगह रखें, जिससे कि बच्चों का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ़ हो. इस दिशा में बैठने से बच्चे अपना लक्ष्य जल्दी प्राप्त करते हैं.

3) ग्लोब
अपने बच्चों को पढ़ाई में होशियार बनाने के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा में ग्लोब रखें. फेंगशुई के अनुसार, इस क्षेत्र का तत्व पृथ्वी है. अतः इस दिशा में पृथ्वी की प्रतिमा रखने से शिक्षा एवं ज्ञान का संचार होता है.

4) एज्युकेशन टॉवर
फेंगशुई के अनुसार, घर में एज्युकेशन टावर रखने से बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करते हैं और अच्छे नंबर से पास होते हैं.

5) घर की पश्‍चिम दिशा में अपने बच्चों की तस्वीर लगाएं. पश्‍चिम दिशा का संबंध संतान से होता है इसलिए इस दिशा में बच्चों की तस्वीर लगाना उत्तम माना जाता है.

इन फेंगशुई आइटम्स को भी घर में रखने से बच्चे पढ़ाई में तेज़ होते हैंः
6) ड्रैगन कार्प
7) कॉन्च शैल
8) क्रिस्टल ग्लोब
9) क्वान यिन गॉडेन
10) ग्रीन क्रिस्टल लोटस

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ऐसे करें परीक्षा की तैयारी (Exam Preparation- 23 Study Tips)

Exam Preparation- 23 Study Tips

Exam Preparation- 23 Study Tips

मार्च का महीना होता है कई सारी परीक्षाओं का. बच्चे जहां किताबों को खंगालने में लगे रहते हैं, वहीं माता-पिता पुरज़ोर कोशिश कर रहे होते हैं कि वे अपने बच्चों की हर मुमकिन मदद कर सकें, क्योंकि यह समय सालभर मिले ज्ञान को कसौटी पर परखने का होता है. बच्चों के भीतर से परीक्षा का डर निकालने और परीक्षा की स्ट्रेस फ्री तैयारी कराने के लिए किन-किन बातों का रखें ख़ास ख़्याल, आइए जानते हैं.

परीक्षा के समय विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए, वहीं माता-पिता को अपने बच्चों का आत्मविश्‍वास बढ़ाना चाहिए. न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. निमरजीत कौर बताती हैं कि वैसे तो बच्चों के खानपान का ध्यान हमेशा ही रखना चाहिए, पर परीक्षा के दौरान अगर बच्चों के खाने में कुछ स्मार्ट न्यूट्रीयंट्स शामिल किए जाएं, तो उनमें ऊर्जा और मानसिक शक्ति की कमी नहीं होगी.
वहीं एक निजी स्कूल की को-ऑर्डिनेटर के. सविथा बताती हैं कि इस समय बच्चों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है सहयोग की. इस समय शिक्षकों का यह कर्त्तव्य है कि बच्चों की परीक्षा से जुड़ी छोटी-सी-छोटी उलझन को सुलझाएं. उन्हें बोर्ड परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी दें. परीक्षा की तैयारी कभी भी एक-दो दिन में नहीं होती, इसके लिए निरंतर अभ्यास करना बहुत ज़रूरी है. अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो छात्रों को मदद मिलेगी.

पढ़ाई को पर्याप्त समय दें
यह बहुत ही पुराना नुस्ख़ा ज़रूर है, पर हमेशा कारगर रहा है. किसी भी चीज़ को सीखकर उसे याद रखना एक दिन का काम नहीं है. रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ने से परीक्षा के दिनों में आप पढ़ाई के अतिरिक्त भार से मुक्त रहते हैं. इसका अर्थ यह है कि पढ़ाई की शुरुआत तब हो जब परीक्षा में काफ़ी समय बचा हो.इसके लिए टाइम टेबल बनाना सबसे अच्छा सुझाव है, पर याद रखें, टाइम टेबल आपकी अपनी ज़रूरत के हिसाब से हो, किसी और के टाइम टेबल की नकल ना करें.

पढ़ाई के लिए हो खुली जगह
आप पढ़ने के लिए किस स्थान पर बैठते हैं, इसका आपकी पढ़ाई पर बहुत असर पड़ता है. पढ़ाई की जगह खुली, खाली और उजाले से भरपूर होनी चाहिए. पढ़ाई की मेज़ पर स़िर्फ ज़रूरत का ही सामान हो. अगर पढ़ने का कमरा या मेज़ फैला हुआ होगा, तो दिमाग़ पढ़ाई में नहीं लग पाएगा. इसके अलावा बैठने की कुर्सी आरामदायक होनी चाहिए. कुछ बच्चों को पढ़ने के लिए शांति चाहिए होती है, वहीं कुछ को पढ़ाई करते समय संगीत सुनने की आदत होती है. आप कैसे पढ़ना पसंद करते हैं, उसका चुनाव करें और ख़ुद के लिए वैसा माहौल बनाएं.

लिखकर करें पढ़ाई
जब पढ़ाई शुरू करें, तो जितना हो सके, चीज़ों को चित्रों या चार्ट के रूप में लिखकर रखें. मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि इस तरह पढ़ी हुई चीज़ें अच्छे से और लंबे समय तक याद रहती हैं. परीक्षा के कुछ दिन पहले रिवीज़न करने के लिए एक पेपर पर महत्वपूर्ण टॉपिक्स का एक फ्लो चार्ट बना लें. इससे आप कम समय में सभी चीज़ें एक साथ पढ़ लेंगे. इससे बोरियत भी नहीं होती.

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दूसरों को पढ़ाएं
यह बड़ा ही मज़ेदार तरीक़ा है पढ़ाई करने का. जब परीक्षा नज़दीक हो, तब आपने जो भी पढ़ा है, वह किसी को भी बिना देखे समझाएं. आप चाहें तो अपने किसी दोस्त या माता-पिता की भी मदद ले सकते हैं. ऐसा करने से आपको सब कुछ साफ़-साफ़ समझ में आ जाएगा और यह भी पता चलेगा कि कहां आपको ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत है.

दोस्तों के साथ पढ़ाई
अगर आपका ध्येय आपके सामने साफ़ है और अगर आपका ध्यान पढ़ाई से ना भटके, तो यह एक अच्छा तरीक़ा है पढ़ने का. इससे आप एक-दूसरे की मुश्किलें भी हल कर सकते हैं और पढ़ाई भी अधिक रुचिकर हो जाती है, पर हां, ग्रुप स्टडी के नाम पर पढ़ाई का समय बर्बाद करना ग़लत है.

बहुत सारे टेस्ट पेपर्स सॉल्व करें
परीक्षा के लगभग 10 दिन पहले से हर विषय के टेस्ट पेपर्स सॉल्व करें. इसके कई सारे फ़ायदे हैं. पहला यह कि आपको पेपर पैटर्न के बारे में अच्छी जानकारी मिल जाएगी और अगर आप समय लगाकर टेस्ट देते हैं, तो आपको पेपर के हर सेक्शन को कितना समय देना है यह भी अच्छे से पता चल जाएगा. और दूसरा जब आप कुछ पेपर सॉल्व कर लेंगे, तो आपका आत्मविश्‍वास बढ़ जाएगा.

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अच्छा रहे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य
डॉ. निमरजीत बताती हैं कि इस समय बच्चों की दो ज़रूरतें होती हैं, पहली- उनकी शारीरिक ऊर्जा बनी रहे और दूसरी- वह परीक्षा में बहुत ज़्यादा तनाव व दबाव ना ले और ये दोनों ही ज़रूरतें अच्छे न्यूट्रीशन से पूरी हो सकती हैं.
* इसके लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि बच्चे घर में बना खाना खाएं. भूख लगने पर उन्हें ड्रायफ्रूट्स, भुनी मूंगफली या फल आदि दें.
* ज़िंक, विटामिन बी और विटामिन सी तनाव को कम करते हैं, इसलिए परीक्षा के दिनों में जितना हो सके, हरी सब्ज़ियां, फल और अंडे खाएं.
* परीक्षा के समय नाश्ता हैवी होना चाहिए. नाश्ते में आलू के परांठे या उपमा आदि दे सकते हैं. इसके अलावा प्रोटीन बहुत महत्वपूर्ण है.

कुछ नोट्स टीचर की डायरी से
1. एक साथ चार या पांच घंटे पढ़ाई ना करें. हर एक घंटे में थोड़ी देर के लिए ब्रेक लें.
2. जब परीक्षा नज़दीक आ जाए, तो स्मार्ट नोट्स बनाकर पढ़ें. इसका अर्थ है कि सभी विषयों के कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक्स की लिस्ट बना लें.
3. एग्ज़ाम हॉल में प्रवेश करने तक किताब ना पढ़ें. परीक्षा शुरू होने के कुछ समय पहले पढ़ाई बंद कर दें.
4. आख़िरी समय में किसी के बताने पर कोई नया टॉपिक पढ़ने की कोशिश ना करें. इससे आप कंफ्यूज़ हो जाएंगे.
5. चाहे आपकी परीक्षा सुबह देर से हो, पर कोई भी काम, जैसे- बैग में कंपास बॉक्स, उसमें एडमिट कार्ड रखना आदि रात को ही कर लें.
6. जितना संभव हो सके, ख़ुद को शांत रखें. इसके लिए ध्यान या प्राणायाम करना सबसे कारगर होगा.
7. अगर संभव हो, तो एक या दो दिन पहले अपने परीक्षा केंद्र में जाकर मुआयना कर लें.

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…ताकि परीक्षा में ना हो कोई टेंशन
डॉ़ निमरजीत बताती हैं कि स्मार्ट फूड से स्ट्रेस से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है-
1. प्रोटीन स्लो बर्नर होता है, इसलिए ऊर्जा से भरपूर है. खाने में इसे शामिल करें.
2. विटामिन सी और बी से भरपूर चीज़ें, जैसे- मूंगफली, अंडा, मछली या फल खाएं.
3. पानी भरपूर पीएं, ताकि शरीर में हाइड्रेशन अच्छा रहे. साथ ही मिल्क शेक या शरबत आदि लें.
5. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें.
6. चाय या कॉफी ज़्यादा ना लें.
7. दही, छाछ या नींबू पानी लें.

– विजया कठाले निबंधे

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